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महाराष्ट्र के राज्यपाल ने आईआईजेएस प्रीमियर 2024 का उद्घाटन किया

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मुंबई (अनिल बेदाग) : इंडिया इंटरनेशनल ज्वेलरी शो (आईआईजेएस) उद्योग में उत्कृष्टता के चार दशकों का प्रतीक है और लग्जरी, नवीनता और शिल्प कौशल के शिखर का अनुभव कराता है। विशिष्ट संग्रह कलेक्शन, वैश्विक लीडरों के साथ नेटवर्क बनाएं और भारत के आभूषण क्षेत्र के केंद्र में इस महत्वपूर्ण आयोजन का हिस्सा बनें।
महाराष्ट्र के राज्यपाल माननीय श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने जिओ वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर,बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, मुंबई में भारत के शीर्ष व्यापार निकाय, द जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल द्वारा आयोजित दुनिया के सबसे बड़े रत्न और आभूषण बी2बी शो – इंडिया इंटरनेशनल ज्वेलरी शो प्रीमियर 2024 में से एक का उद्घाटन किया।श्री मंगल प्रभात लोढ़ा, मा. कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री,  महाराष्ट्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण अवसर की शोभा बढ़ाई।
जीजेईपीसी के अध्यक्ष श्री विपुल शाह, जीजेईपीसी के उपाध्यक्ष श्री किरीट भंसाली, जीजेईपीसी के संयोजक-राष्ट्रीय प्रदर्शनी श्री नीरव भंसाली के साथ-साथ प्रशासन समिति (सीओए) ने कई सम्मानित अतिथियों और कार्यकारी उपाध्यक्ष श्री पॉल रोवले जैसे गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।
जीजेईपीसी की ब्रांड एंबेसडर मानुषी छिल्लर ने उद्घाटन में ग्लैमर और चकाचौंध का तड़का लगाया।
इस वर्ष एक विशेष आकर्षण द सेलेक्ट क्लब – एक्सक्लूसिव हाई-एंड कॉउचर ज्वेलरी सेक्शन है। सेलेक्ट क्लब 101 प्रदर्शकों द्वारा सुरुचिपूर्ण डिजाइन और नवीन शिल्प कौशल की खोज करता है।
महाराष्ट्र के राज्यपाल माननीय श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा, “जीजेईपीसी का आईआईजेएस दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बी2बी रत्न और आभूषण शो में से एक है और एक दिन आएगा जब यह पूरी दुनिया में सबसे बड़ा शो होगा। यदि जीजेईपीसी के सदस्य रत्न और आभूषण निर्यातक भारतीय महिलाओं को बेच सकते हैं, तो वे दुनिया में किसी को भी बेच सकते हैं। मैं जीजेईपीसी से दुनिया भर में ब्रांड इंडिया का प्रदर्शन और प्रचार जारी रखने का आग्रह करता हूं; और इस प्रयास के माध्यम से, भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत को दुनिया भर में ले जाएं।
महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री श्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा, “हीरा उद्योग को भविष्य की पीढ़ी के बारे में सोचना चाहिए और उन्हें व्यवसाय में शामिल करने और रोजगार सृजन बढ़ाने के लिए सहयोग करना चाहिए। हीरा उद्योग को युवाओं को अपनाना चाहिए और उनका कौशल विकसित कर उन्हें रोजगार के लायक बनाना चाहिए।”
जीजेईपीसी के अध्यक्ष श्री विपुल शाह ने कहा, “इस साल, आईआईजेएस प्रीमियर गर्व से 2,100 से अधिक प्रदर्शकों और 3,600 से अधिक स्टालों की मेजबानी कर रहा है, और हम भारत और 60 से अधिक देशों से 50,000 से अधिक व्यापार आगंतुकों की उम्मीद कर रहे हैं। कंबोडिया, ईरान, जापान, मलेशिया, नेपाल, रूस, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और उज़्बेकिस्तान सहित 13 से ज्यादा देशों के 15 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल हैं। हालिया केंद्रीय बजट 2024 हमारे उद्योग के लिए परिवर्तनकारी रहा है और सरकार की नीतिगत अनिवार्यताएं भारत को वैश्विक कच्चे हीरे के व्यापार केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित करेंगी, रोजगार पैदा करेंगी और 2047 तक भारत के विकसित भारत बनने के दृष्टिकोण में योगदान देंगी।
श्री शाह ने कहा,“जब रत्न और आभूषण निर्यात की बात आती है, तो महाराष्ट्र सबसे आगे है, जो भारत के कुल रत्न और आभूषण निर्यात में लगभग 70% का योगदान देता है। महाराष्ट्र राज्य सरकार नवी मुंबई में एक ज्वेलरी पार्क और SEEPZ में भारत रत्नम – मेगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) स्थापित करने में हमारी मदद करने के हमारे प्रयासों में अविश्वसनीय रूप से सहायक रही है।

Congress-आवारा पशुओं की समस्या को लेकर संविधान यात्रा

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Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ कांग्रेस लगातार राज्य सरकार को घेरने में लगी हुई है। इस क्रम में पार्टी 14 अगस्त को बिजली के दामों की बढ़ोतरी, नगरीय निकायों के अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार की वापसी और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर संविधान यात्रा निकालेगी।

Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ कांग्रेस लगातार राज्य सरकार को घेरने में लगी हुई है। इस क्रम में पार्टी 14 अगस्त को बिजली के दामों की बढ़ोतरी, नगरीय निकायों के अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार की वापसी और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर संविधान यात्रा निकालेगी। इससे पूर्व विश्व आदिवासी दिवस पर आज नये आरक्षण विधेयक पर हस्ताक्षर विषय पर चर्चा करेंगे। वहीं 16 को कांग्रेस  जिलों और ब्लॉकों में गौ सत्याग्रह करेगी।

वार्डों और गांवों में संविधान यात्रा 14 अगस्त को
आजादी की 77वीं वर्षगांठ के पूर्व 14 अगस्त को कांग्रेस प्रदेश के सभी गांवों और वार्डों में संविधान यात्रा के रूप में प्रभातफेरी निकालेगी। देश के संविधान की रक्षा की प्रतिज्ञा ली जायेगी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रिय भजन “वैष्णव जन” का गान होगा। इस प्रभातफेरी में भारत के संविधान, तिरंगा ध्वज और बापू का चित्र लेकर कांग्रेसी चलेंगे।
प्रदेश के सभी जिलों और ब्लॉकों में गौ-सत्याग्रह 16 अगस्त को
प्रदेशभर में हो रही गायों की मौत और खुले मवेशियों के कारण सड़कों में हो रही दुर्घटनायें आवारा मवेशियों से खेतों की चराई पूरे प्रदेश में एक बड़ी समस्या बन कर उभरी है। पार्टी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार आने के बाद से प्रदेश में गौवंश बदहाल है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार की ओर से संचालित गोधन न्याय योजना को बंद करके गौवंशी पशुओं को सड़क पर बेमौत मरने छोड़ दिया है। एक तरफ जहां किसान खुली चराई से परेशान हैं। वही सड़कों में दुर्घटनाएं बढ़ गई है। भाजपा की सरकार में गाय, भैंस के साथ जनता भी सड़कों पर बेमौत मरने मजबूर हैं।

‘विश्व आदिवासी दिवस पर आरक्षण संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर करें राज्यपाल’
9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस है। आदिवासियों का संवैधानिक अधिकार पिछले डेढ़ साल से राजभवन में लंबित है। अब प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री भी है। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि छत्तीसगढ़ का आरक्षण संशोधन विधेयक जो पूर्ववर्ती सरकार ने विधानसभा से पारित करवा कर राजभवन भेजा था, उस पर हस्ताक्षर करने राजभवन से आग्रह करें। प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है फिर आदिवासियों का 32 प्रतिशत एससी का 13 प्रतिशत, ओबीसी का 27 प्रतिशत, ईडब्ल्यूएस का 4 प्रतिशत अधिकार राजभवन में क्यों रूका हुआ है? राज्यपाल से विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य की 32 प्रतिशत आबादी आदिवासियों के हक में विधेयक पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया है।

 

भय और आतंक के साये में बांग्लादेश के हिन्दू*

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– मनोज कुमार अग्रवाल 
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में उपद्रवी हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं। देश में 1 करोड़ 31 लाख के करीब हिंदू हैं, उनके घरों और दुकानों को आग के हवाले किया जा रहा है।अराजक तत्व हिंदू मंदिरों को भी निशाना बना रहे हैं।हालात इतने खराब हो गए हैं कि वहां रहने वाले करीब 7 प्रतिशत हिंदू इन दिनों  भय और आतंक के साये में जी रहे हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले कोई नई बात नहीं है,पहले भी हिंदुओं को यहां निशाना बनाया जाता रहा है।लेकिन इस बार हालात और भी अलग हैं। शेख हसीना सत्ता छोड़ चुकी हैं, ऐसे में भारतीय नागरिकों का क्या होगा, यही चिंता सताने लगी है।
बांग्लादेश में जारी अनिश्चितता और अराजकता के माहौल के बीच वहां हिंदुओं और अल्पसंख्यकों को टारगेट किया जा रहा है। हिन्दुओं के मंदिर, घर और  दुकानें प्रदर्शनकारी कुछ भी नहीं छोड़ रहे हैं।आततायी कट्टरपंथी भीड़ ने यहां पर 64 जिलों में 44 हिन्दू मंदिरों समेत अनेक हिंदुओं के घरों के साथ ही उनके व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।इतना ही नहीं अराजक तत्व उनका कीमती सामान भी लूट ले गए। वहां पर मंदिरों और गुरुद्वारों में तोड़फोड़ की जा रही है।शेख हसीना के सत्ता और देश छोड़ने के बाद से वहां हालात बदतर हो गए हैं। इतना ही नहीं हिन्दू परिवारों की महिलाओं और लड़कियों के साथ भी बेहद घिनौना दुर्व्यवहार किया जा रहा है।
बांग्लादेश के पंचगढ़, दिनाजपुर, बोगुरा, रंगपुर, शेरपुर किशोरगंज, सिराजगंज, मुगरा, नरैल, पश्चिम जशोर, पटुआखली, दक्षिण-पश्चिम खुलना, मध्य नरसिंगड़ी, सतखीरा, तंगैल,फेनी चटगांव, उत्तर-पश्चिम लक्खीपुर और हबीगंज जैसी जगहों पर कट्टरपंथियों का आतंक जारी है। वह यहां रहने वाले हिंदुओं पर न सिर्फ हमले कर रहे हैं बल्कि उनकी संपत्तियों को भी लूट कर ले जा रहे। बांग्लादेश के कट्टरपंथी हिंदुओं की संपत्तियों को चुन-चुन कर नुकसान पहुंचा रहे हैं।मंदिर हो या गुरुद्वारा किसी को भी बख्शा नहीं जा रहा है। शहरों में हिंदू नेताओं पर हमले किए जा रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर कई हिंदू परिवारों के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें उन पर किए जा रहे अत्याचार का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सैकड़ों हिन्दू परिवार घर-बार छोड़कर भारतीय सीमा की ओर निकल पड़े हैं, लेकिन सीमा सील होने के कारण वह सीमा पार नहीं कर पा रहे। बांग्लादेश के हिन्दुओं का सब्र टूट रहा है। पलायन के सिवा उनके पास कोई विकल्प नहीं है। अपनी महिलाओं और लड़कियों को दंगाइयों से बचाने के लिए हिन्दू स्वयं ही अपने घरों को आग लगा रहे हैं। यह घटनाएं भारत विभाजन की याद ताजा कर देती हैं। उस समय भी सीमा के उस पार जब इंसान शैतान बन गया था तो इन शैतानों से औरतों की सुरक्षा हेतु लोग अपने मकानों को आग लगाने के साथ-साथ महिला सदस्यों की स्वयं ही हत्या करने को मजबूर हो गए थे। बांग्लादेश के हिन्दू परिवार आज वैसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं।

शेख हसीना पिछले 15 साल से बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज थीं और उनके शासन के दौरान दोनों देशों के संबंधों में काफी मजबूती आयी है लेकिन तख्तापलट के साथ ही बांग्लादेश में सब कुछ बदल गया है।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने जेल में बंद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख खालिदा जिया को रिहा कर दिया है बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और शेख हसीना के इस्तीफे के बाद भारत आने से भारत बेहद मुश्किल स्थिति में खड़ा दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट कमेटी की बैठक कर पूरी जानकारी ली है। इसके बाद  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ढाका की स्थिति पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक की। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली रणनीतिक स्तर पर बांग्लादेश के घटनाक्रम पर नजर रख रही है। चूंकि शेख हसीना के साथ भारत के लंबे और घनिष्ठ रिश्ते रहे हैं। इस संकट में भारत को यह तय करना है कि क्या वह अपने पुराने मित्र का साथ दे सकता है या नहीं। दिल्ली के पास शेख हसीना के रूप में बांग्लादेश में एक दोस्त था, और 2009 से उनके निरंतर कार्यकाल ने नई दिल्ली-ढाका संबंधों में एक बड़ा बढ़ावा देखा। सड़क और रेल संपर्क से लेकर सीमा प्रबंधन और रक्षा सहयोग तक, भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध इस समय के दौरान मजबूत हुए।

जब हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन बढ़ने लगे, तो भारत की प्रतिक्रिया थी कि यह एक आंतरिक मामला’ है। दरअसल भारत के पूर्वोत्तर के कई राज्यों की सीमा बांग्लादेश से लगी हुई है। सीमा से लगे इन इलाकों में भारत विरोधी गुट लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। हालांकि, शेख हसीना ने अपने कार्यकाल में भारत विरोधी आतंकी समूहों पर कड़ी कार्रवाई की है। इससे भारत के पूर्वोत्तर के राज्यों में शांति कायम हुई है और बांग्लादेश के साथ व्यापार में भी काफी वृद्धि हुई । 

बांग्लादेश के बदलते राजनीतिक परिदृश्य के साथ भारत की सुरक्षा रणनीति को गहरा धक्का लगा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल की खाड़ी रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, जो अफ्रीका से इंडोनेशिया तक हिंद महासागर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह बांग्लादेश, म्यांमार और भारत के बीच स्थित क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह क्षेत्र मलक्का जलडमरूमध्य के निकट होने के कारण महत्वपूर्ण है, जो दुनिया के प्रमुख समुद्री अवरोधों में से एक है, जो हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। भारत के लिए बांग्लादेश अपने भौगोलिक रूप से अलग-थलग उत्तर-पूर्वी राज्यों को बंगाल की खाड़ी से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है। पांच भारतीय राज्य हैं जो बांग्लादेश के साथ अपनी सीमा साझा करते हैं, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा और असम। साफ है कि बांग्लादेश में उथल-पुथल और सत्ता परिवर्तन भारत के लिए बड़े खतरे की घंटी है।

विशेषज्ञों की माने तो यह भारत के लिए चिंता का विषय इसलिए है कि जिस देश को पाकिस्तान के दो टुकड़े कर भारत ने बनाया, अगर उस देश को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, आतंकी संगठन और चीन की अन्य ताकतें मिलकर  चलाने लगेंगी तो भारत के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाएगा। बांग्लादेश की तीन तरफ की सीमाएं हमारे देश से लगती हैं, वहां से भारत में प्रवेश भी आसान है, ऐसे में भारत में यही ताकतें आकर भारत को भी अस्थिर करने की कोशिश कर सकती हैं। हालांकि देखा जाए तो वर्तमान में भारत के लिए करने को कुछ ज्यादा है।

बांग्लादेश में हिन्दुओं और दूसरे सिख ,बौद्ध ,ईसाई अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अत्याचार को दुनिया चुपचाप देख रही है। इनमें विश्व के वे तमाम देश और एमनेस्टी इंटरनेशनल सरीखे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी शामिल हैं जो भारत में किसी अल्पसंख्यक के साथ होने वाली मामूली वारदात पर भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर हो हल्ला शुरू कर देते हैं लेकिन दुनिया के किसी भी मुल्क में हिन्दुओं व भारतीय मूल के समुदाय के साथ होने वाली अमानवीयता, दमन और अत्याचार पर सभी को सांप सूंघ जाता है। जाहिर है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी मौकापरस्तों की सरपरस्ती में है।हिन्दुओं के साथ किए जा रहे जुल्म और अत्याचार के खिलाफ भारत सरकार भी अभी सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए।  (विभूति फीचर्स) 

फिल्म ”चिंटू की दुल्हनिया” का फर्स्ट लुक आउट

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जॉली हिट्स एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी भोजपुरी फिल्म ”चिंटू की दुल्हनिया” का मुंबई में फर्स्ट लुक आउट कर दिया गया है। फिल्म के निर्देशक चन्दन सिंह ने बताया की यह भोजपुरी फिल्म ”चिंटू की दुल्हनिया” कॉमेडी हॉरर है। जिस की पूरी शूटिंग उत्तर प्रदेश में की गई है। देसी धुन म्यूजिक पर इसका ट्रेलर जल्द रिलीज की जाएग। सिनेमाघरों में फिल्में देखना हर किसी को पसंद है। हॉरर फिल्मों में अब डर के साथ दर्शकों को हंसाने की भी कोशिश होती है। हॉरर में कॉमेडी का तड़का लगाकर फिल्म मेकर्स को बहुत फायदा होता है, जो लोग हॉरर मूवी नहीं देखते पर कॉमेडी देखते हैं वह भी हॉरर कॉमेडी फिल्में देखना पसंद करते हैं। आज के समय में सिनेमाघरों में लोग अपनी पसंद के कंटेंट को देखना चाहते हैं। इन कंटेंट में कॉमेडी, हॉरर कॉमेडी, रोमांटिक और सस्पेंस-थ्रिलर फिल्में शामिल है।

फिल्म के मुख्य कलाकार है -प्रदीप पांडेय चिंटू ,यामिनी सिंह ,शिल्पी राघवानी,प्रमोद माउथो,राम सूजन सिंह ,रश्मि शर्मा ,पुष्पेंद्र कुमार ,सोनिया मिश्रा ,नेहा सिंह ,कृष्णा कुमार सोनी ,महेश आचर्य ,मनोज दिवेदी ,पूर्वी ,अमन सिंह चौहान ,नन्द किशोर ,अभय झा,मेहनाज़ श्रॉफ ,देव सिंह ,सिप्पी भट्ट ,अंकित चौहान ,विशाल सिंह ,रॉकी ,मोहित कनोजिया आदि है।

जॉली हिट्स एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी भोजपुरी फिल्म ”चिंटू की दुल्हनिया” के निर्माता मुकेश जवाहिर चौहान ,निर्देशक चंदन सिंह ,लेखक वीरू ठाकुर ,छायांकन समीर सय्यद ,एक्शन दिलीप यादव ,प्रचारक संजय भूषण पटियाला ,डांस कानू मुखर्जी ,रामदेवन और संगीत राजेश प्रसाद ने तैयार किया है।

पानी की तलाश में लिफ्ट कैनाल में गिरी गाय

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 पाली:- कहते हैं कि सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता है. इसी कहावत को चरितार्थ राजस्थान के इन युवाओं ने किया है. उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर भी पशुओं की जान बचाने में सबसे आगे रहे. राजस्थान के पांचला खुर्द ग्राम पंचायत के युवाओं द्वारा गौ सेवा के उद्देश्य से एक टीम बनाई और आज भी यह टीम गायों की सेवा के लिए हमेशा आगे रहती है. इसी गांव की सरहद में बहने वाली राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल में प्यासी गौ माता अपनी प्यास शांत करने के प्रयास में गिर गई, जिसको देखकर गांव के ही कुछ युवाओं ने बहती हुई गौमाता को बचाने की ठानी. राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल में गाय के गिरने की सूचना पर टीम सदस्यों ने मेहनत की. लेकिन पानी कम होने से गाय को बाहर निकालने में मुश्किल हो रही थी, जिसके चलते जेसीबी की सहायता से गाय को बाहर निकाला गया.

सूचना मिलते ही ऐसे पहुंचे टीम के सदस्य
नहर में गिरी गाय की सूचना जब आसपास के तकरीबन 30-40 किलोमीटर की परिधि में पांचला, चामू, चेराई, चंडालिया, घेवडा, गगाड़ी, खुडियाला, बडला बिजारिया बावड़ी आदि गांवों में फैली, तो इस टीम के सदस्य तुरंत पहुंच गए. इस दौरान ओमाराम बेनीवाल,अमेश बैरड़ ,लिखमाराम लुखा,महेंद्र कुमार,रूपाराम बेनीवाल,महेंद्र,आदि ने जेसीबी से गाय को बाहर निकाला.

कई सालों से कर रही इसी तरह से सेवा
गायों की सेवा के लिए यह टीम आज से नहीं, बल्कि पिछले कई सालों से इसी तरह काम कर रही है. गायों के इलाज से लेकर उनको खाना खिलाना हो या फिर कहीं पर भी गायों को इस तरह से रेस्क्यू करना हो, उसको लेकर हमेशा यह टीम सतर्क रहती है. साथ ही इस टीम के युवा तो अपनी जान तक की परवाह नहीं करते. ऐसे में जहां बारिश का समय चल रहा है, उसी बीच नहर में गिरी गाय को रेस्क्यू कर उसकी जान बचाने का काम इस टीम ने किया.

Cow Economy – गाय पालकर कर सकते हैं तगड़ी कमाई

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आदित्य कृष्ण/ अमेठी: गाय को मां का दर्जा दिया गया है, लेकिन आज सड़क पर गौवंशों की दुर्दशा देख कहीं न कहीं अपने आप में गौ संरक्षण पर सवाल उठता है. इसलिए गौ सरंक्षण को अब बढ़ावा दिया जा रहा है.  इसके साथ ही गाय पालने का व्यवसाय कर बड़े स्तर पर किसान मुनाफा कमा सकते हैं. इसके लिए प्रोत्साहित कर उन्हें अनुदान भी दिया जा रहा है. पशुपालन विभाग की तरफ से अनुदान पर आप गौपालन शुरू कर सकते हैं. इस काम से आपको काफी फायदा होगा और आप अपने व्यवसाय की शुरुआत एक अच्छे काम से कर सकते हैं.

इतना मिल रहा अनुदान किसानों को होगा फायदा

जिले के किसानों को  गौपालन के लिए  40 से 50% का अनुदान दिया जा रहा है. जिससे गौ पालन में उन्हें कोई आर्थिक समस्या ना आए. इसके साथ ही पशुपालन विभाग किसानों के गोवंशों का बीमा भी कर रहा है. जिससे भविष्य में गोवंश यदि बीमार पड़ते हैं, तो उनका इलाज भी आसानी से हो सके. आंकड़ों के मुताबिक 50 से अधिक किसान जिले में गौ पालन कर मुनाफा कमा रहे हैं. ऐसे में किसानों को बढ़ावा दिया जा रहा है. जिससे वह गौपालन करें और मुनाफा कमाए.

इन कागजातों की पड़ेगी जरूर

किसानों को पशुपालन के साथ गौपालन के लिए अनुदान का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक के साथ फोटो और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा. जिले के पशु विभाग कार्यालय पर जाकर आप अपना आवेदन दर्ज करवा सकते हैं और आप पशुपालन के साथ गौपालन योजना का लाभ ले सकते हैं.

सभी किसानों को करना चाहिए गौ पालन

गौपालन करने वाले प्रगतिशील किसान हरकेश सिंह बताते हैं कि आज गौपालन से उनकी किस्मत बदल गई है और उन्हें मुनाफा हो रहा है. उन्होंने कहा कि अगर सभी किसान गौपालन करना शुरू कर दें तो सड़क पर गायों की दुर्दशा होनी बंद हो जाएगी और गोवंश को संरक्षण मिलेगा.

जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी पीएन शुक्ला बताते हैं कि किसानों को समय-समय पर पशुपालन विभाग की योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है, जो भी योजनाएं अभी वर्तमान समय में चल रही हैं, उसमें पशुपालन और गौपालन भी शामिल है. मेरी किसानों से अपील है कि जो भी किसान पशुपालन विभाग की योजनाओं से लाभान्वित होना चाहते हैं वह आकर आवेदन करें. जो भी योजनाओं में उन्हें लाभ देने का प्रावधान होगा वह उसे दिया जाएगा.

संगमेश्वर महादेव जहां नागराज शिवलिंग से लिपटते हैं

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 विभूति फीचर्स

देवताओं व ऋषि-मुनियों की पावन भारत भूमि का कण-कण सदियों से पवित्रता व महानता का संदेश देता रहा है। यहां के पर्वत, नदियां, सागर, तीर्थ, व्रत, आदि आज भी किसी न किसी रूप में हमें अपनी महानता का एहसास कराते हैं।
देवादिदेव भगवान शंकर जिन्हें नीलकंठ, आशुतोष, भोले भंडारी आदि अनेक नामों से स्मरण किया जाता है का अत्यंत प्राचीन तीर्थ हरियाणा के अरुणाय नामक कस्बे में है, जो पिहोवा से मात्र पांच कि.मी की दूरी पर है। इस जगह भगवान शिव का प्रसिद्ध श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर है। कहा जाता है कि इस जगह पर सरस्वती और अरुणा का संगम था। शायद इसलिए इसे संगमेश्वर महादेव कहते हैं। प्राचीन काल में इस तीर्थ का अत्यधिक महत्व रहा है।  ऐसा बताते हैं बाबा गणेश गिरी को भगवान शंकर ने स्वप्न में कहा, मैं आदि अनन्त शिव हूं। यहां मेरी पूजा से देवराज इन्द्र भी ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हुए थे।

ऋषि विशिष्ट और ऋषि विश्वमित्र ने यही मेरी आराधना की थी। बाबा गणेश गिरि को यह स्वप्न बिहार के एक गांव में शिव पूजन के बाद आया कि आप सरस्वती और अरुणा के संगम पर जाकर शिव आराधना करो। इसके बाद वह अपने दो शिष्यों के साथ इस स्थानकी खोज में निकल पड़े और पिहोवा से पांच कि.मी. दूर उत्तर-पूर्व में अरुणा सरस्वती के संगम में वट वृक्षों के झुंड में रुक गये।
तपस्या में लीन बाबा को एक दिन भविष्यवाणी हुई भक्त, तुम जिसकी खोज में हो वह यहां से कुछ ही दूर है। बाबा ने घने जंगल में पास ही दीमक का एक ढेर दिखाई दिया। वे चिमटे सेइस जगह को कुरेदने लगे। नीचे एक अत्यंत सुंदर पाषाण शिला दिखाई देने लगी। वह उसे उखाडऩे का प्रयत्न करने लगे। जब ऐसा नहीं हुआ तो थक-हार कर लौट गये।
रात्रि में भगवान शंकर ने पुन: स्वप्न में कहा है तपस्वी। मैं आदि अनन्त शिव हूं। मुझे उखाडऩे का व्यर्थ प्रयास मत करो। मैं पत्थर मात्र नहीं हूं। इसे असंख्य ऋषि मुनियों व राजा महाराजाओं को भक्ति प्राप्त हुई है अत: इस स्थान का उद्धार करके शिव आशीर्वाद प्राप्त करो।
बाबा अंधेरे में ही उस स्थान की ओर भागे उस पिण्डी पर मणिमय सर्पराज फन फैलाए विराजमान थे। बाबा भोले शंकर की लीला समझ गए, दूर से  ही उन्हें प्रणाम किया और सर्पराज लुप्त हो गये। तब बाबा गणेश गिरि ने वहां निर्माण कार्य प्रारंभ किया और यहां पर अत्यंत सुंदर शिव मंदिर का निर्माण हो पाया।
अरुण संगम तीर्थ की महिमा पुरातन काल में महाभारत, वामन पुराण, गरुड़ पुराण ब्रम्हवैवर्त पुराण, स्कंद पुराण, पद्म पुराण आदि ग्रंथों में वणित है। महाभारत में अरुणा संगम तीर्थ के बारे में कथा वर्णित है। कहते हैं कि ऋषि विश्वमित्र के श्राप से सरस्वती रक्त मिश्रित होकर बहने लगी थीं।
बाद में ऋषि के श्राम से मुक्ति दिलाने के लिये असंख्य ऋषि मुनियों ने निरंतर जप और यज्ञ करके भगवान शिव को प्रसन्न किया तो उन्होंने स्वयं प्रकट होकर सरस्वती को इस श्राप से मुक्त किया था। तब उस स्थान पर ऋषियों ने महादेव जी की स्थापना की थी।
महाभारत में वर्णित एक श्लोक का सार यूं है-महर्षि लोमहर्षण जी तपस्वी ऋषियो को अरुणा संगम के बारे में बताते हुए यूं कहते हैं यहां तीन रातों का उपवास पूर्वक स्नान करने वाला समस्त पापों से मुक्त हो जाता है। घोर कलियुग आने पर अधर्म का प्रचार होने पर मनुष्य इस संगम में स्नान करके मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
इस महान पुण्य भूमि पर मंदिर में जो शिवलिंग की पिण्डी है वह भूरे रंग की है, जिसके दर्शन मात्र से ही शिवभक्त शिवमय हो जाते हैं। कई बार इस शिवलिंग के ऊपर नागराज ने अपना पहरा दिया है।  मंदिर के मुख्य द्वार से आगे बड़े द्वार से होते हुए एक नागराज सीधे मंदिर में उतरे और शिवभक्ति में लीन अनेक भक्तों के बीच से होकर शिवलिंग पर पहुंचकर उससे ऐसा लिपटे कि दो घंटे तक फन फैलाकर भगवान शंकर के साक्षात मौजूद होने का प्रमाण देने लगे।
(विभूति फीचर्स)

बुध ने बढ़ाया विनेश फोगाट का वजन,राहु गुरु के योग ने किया पदक से दूर

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25 अगस्त 1994 को हरियाणा के चरखी दादरी कस्बे में जन्मी विनेश फोगाट  के साथ ओलम्पिक में हुए हादसे ने देश भर को सकते में डाल दिया। आज चारों ओर यही चर्चा है कि आखिर अचानक विनेश फोगाट का वजन इतना क्यों बढ़ गया और क्यों वे अपना वजन नियंत्रित नहीं कर पायीं। जब इस बात को जानने के लिए ज्योतिषीय दृष्टि से विवेचना की गयी तो स्पष्ट हुआ कि विनेश की कुंडली तुला लग्न की है जिसमें प्रथम भाव में गुरु और राहु की युति है । ज्योतिष की भाषा में इसे गुरु चांड़ाल योग कहा जाता है।
लाल किताब कहती है कि जब किसी व्यक्ति के लग्न में गुरु और राहु एक साथ होते हैं तो गुरु के अच्छे फल को राहु निष्प्रभावी कर देता है तथा तुला लग्न की कुंडली में प्रथम भाव का राहु समाज में कम से कम एक बार बहुत बड़ी बेइज्जती करवाता है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक के बहुत नजदीक पहुंचकर फिर एक दम से डिसक्वालिफाई हो जाना  इसी ज्योतिषीय योग का परिणाम है। ओलंपिक में अर्श से फर्श पर आने का हादसा इसी कारण हुआ।
विनेश की कुंडली में केतु सातवें भाव में है जबकि मंगल नवें भाव में है। ऐसी स्थिति में केतु से तीसरे मंगल होते हैं और जिन व्यक्तियों की कुंडली में यह योग होता है, वह अपने बचपन में खेलकूद में काफी सक्रिय होते हैं।

लाल किताब की व्याकरण एकदम स्पष्ट कहती है कि जब किसी  व्यक्ति की कुंडली में गुरु लग्न में और शनि पंचम भाव में  अकेला हो तो ऐसे व्यक्ति की किस्मत मंद होती है और ऐसा व्यक्ति कभी भी चारों खाने चित्त हो जाएगा । यह योग विनेश की पत्रिका में भी है। इसी कारण वह स्वर्ण पदक जीतते – जीतते आश्चर्यजनक रुप से पूरे ओलंपिक से ही बाहर हो गयी।

इस समय यह भी चर्चा है कि विनेश का वजन अचानक इतना क्यों बढ़ गया । इसका प्रमुख कारण विनेश की पत्रिका में ग्यारहवें स्थान पर बैठे बुध हैं। इस स्थान पर बैठे बुध व्यक्ति का कभी भी अचानक से वजन बढ़ा देते हैं। विनेश के ग्यारहवें भाव के मंदे बुध की तीसरी दृष्टि सीधे लग्न भाव के राहू पर पड़ रही है। लाल किताब के अनुसार पर जब भी मंदे बुध और राहु  के बीच एक दूसरे से दृष्टि संबंध होगा तब व्यक्ति को जेलखाना, पागलखाना या दवाखाना अवश्य जाना पड़ता है। यही कारण रहा कि ओलंपिक से डिस्क्वालीफाई होने के बाद सदमे के कारण विनेश को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।

विनेश के पदक से चूकने के कई और कारण उनकी कुंडली में मौजूद हैं। उनकी पत्रिका में छठे भाव में मीन का चंद्रमा है, जो मनुष्य को बहुत ज्यादा धनवान नहीं होने देता। अगर गोल्ड मैडल जीतकर उन्हें सौ करोड़ रुपए मिलते तो अब यह योग उन्हें एक-दो करोड़ पर ही सीमित कर देगा।

विनेश की पत्रिका में मंगल नवम् भाव में है लेकिन वे अपनी नीच राशि मिथुन में हैं साथ ही कुंडली के दूसरे भाव में कोई ग्रह नहीं है।  इस कारण इन्हें अपनी मेहनत का पूरा परिणाम कभी नहीं मिलेगा। लाल किताब का भविष्यफल कहता है कि नवम् भाव में मंगल हो और दूसरा घर खाली हो तो ऐसे व्यक्ति को अपनी मेहनत का सही परिणाम नहीं मिलता। इनकी पत्रिका में लग्न के गुरु और ग्यारहवें भाव के बुध के बीच भी दृष्टि संबंध है। लाल किताब में लिखा है कि ऐसा व्यक्ति 17 साल की उम्र के बाद अपने जीवन में कभी न कभी कोई ऐसी गलती अवश्य करता है जिसका उसको जीवन भर पछतावा रहता है। बुध और गुरु के इसी दृष्टि संबंध के परिणामस्वरूप विनेश ने खान पान में लापरवाही बरती जिसके कारण उनका वजन बड़ा और अब वे सारे जीवन भर इस गलती से दुखी होती रहेंगी।

ताजा घटनाक्रम के संबंध में विनेश की कुंडली का विश्लेषण यही बताता है कि ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतना उनके भाग्य में नहीं था इसी कारण इतने आगे आकर भी सफलता उनके हाथ से फिसल गयी। (लेखक जाने माने ज्योतिषाचार्य एवं लाल किताब विशेषज्ञ हैं .

(विनायक फीचर्स )

श्रेष्ठ प्रोडक्शंस द्वारा लॉन्च हुआ हिंदी फिल्म “कजिन ईशा” का फर्स्ट लुक

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रोमांटिक फिल्म “कजिन ईशा” की नवम्बर 2024 में उन्नाव, उत्तरप्रदेश में शुरू होगी शूटिंग

मुम्बई। हाल ही में श्रेष्ठ प्रोडक्शन के बैनर तले हिन्दी रोमांटिक फिल्म “कजिन ईशा” के पोस्टर का फर्स्ट लुक के लॉन्च के साथ निर्माताओं ने शूटिंग की तारीख की घोषणा की है। “कजिन ईशा” नामक इस हिंदी फिल्म की शूटिंग नवंबर 2024 में शुरू होगी। फिल्म की शूटिंग उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले के भगवंतनगर गांव में की जाएगी।
श्रेष्ठ प्रोडक्शंस के बैनर तले निर्मित होने वाली इस फिल्म का निर्देशन वैभव वर्मा करेंगे, जो विक्रांत राय अभिनीत हिंदी थ्रिलर फिल्म “तत्क्षण” के लिए जाने जाते हैं। “कजिन ईशा” में कई हिट टीवी शो और हिंदी फिल्मों जैसे युवा, भौंरी और तत्क्षण फेम अभिनेता विक्रांत राय के साथ-साथ नई गर्ल्स “फ्रेडी” फिल्म और “गर्ल्स हॉस्टल” सीरीज फेम हर्षिका केवलरमानी और “गुंजन सक्सेना-द कारगिल गर्ल” फिल्म फेम ओशी साहू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म एक अद्भुत प्रेम कहानी है।

फिलीपींस में खोज के दौरान सैयद शामीर हुसैन को प्राप्त हुआ वज्र एवं त्रिशूल

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मंदिर निर्माण करवाकर भगवान शिव और इंद्र देव को समर्पित करना चाहते हैं

मुंबई। इतिहास, माइथोलॉजी और विज्ञान के क्षेत्र को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण खोज एक विख्यात रिसर्च स्कॉलर और बिजनेसमैन सैयद शामीर हुसैन ने की जिसमें हिंदू देवताओं के दो लीजेंडरी हथियार वज्र एवं त्रिशूल का पता लगाया गया है।
फिलिपींस में कच्चे तांबा और गोल्ड माइनिंग में श्री हुसैन के इंवॉल्वमेंट से 2012 में उन्हें यह अभूतपूर्व खोज करने में मदद मिली। 5 मई, 2015 को स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कार्य करते समय एक श्रमिक सुपरवाइजर ने पिरदा माउंटेन सीरन में उन्हें एक खनन साइट पर आमंत्रित किया, जहां पर 20 फीट की गहराई पर एक अन्य अप्रत्याशित चीज की खोज की गई।
निरीक्षण के दौरान श्री हुसैन ने दो चीजों का पता लगाया। आयरन रॉड से छूने पर एक धातु जैसी चीज का पता चला जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। दूसरी चीज एक धातु त्रिशूल थी, जिसके हिंदू माइथोलॉजी से जुडे होने की संभावना थी। श्री हुसैन ने उसके बारे में और जानकारी एकत्र करने के लिए उसकी डॉक्यूमेंट्री बनाई और फोटोग्राफी शेयर की।
व्यापक रिसर्च करने और विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श करने पर पता चला कि एनिग्मेटिक ऑब्जेक्ट इंद्र देवता के हथियार वज्र जैसा था जबकि त्रिशूल भगवान शिव से जुड़ा हुआ था। अपनी खोज के महत्व को मान्यता दिलाने के लिए श्री हुसैन ने भारत लौटने पर इन आइटमों को आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के पास रजिस्टर्ड कराया।
25 देश की यात्रा करने और 9 वर्ष के रिसर्च के बाद उन्होंने उनके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए सांस्कृतिक मंत्रालयों और और राष्ट्रीय म्यूजियम के साथ चर्चा की। उन्होंने धर्मगुरुओं, योगी, इतिहास के विद्वानों और अनुसंधानकर्ताओं से मार्गदर्शन मांगा।
सैयद शामीर हुसैन का कहना है कि वज्र और त्रिशूल की खोज सांस्कृतिक और धार्मिक सीमाओं से परे है, इनमें असीम शक्ति और क्वालिटी है, जो पुराने ज्ञान से जुड़ने के लिए जगत को एक विशिष्ट अवसर ऑफर करता है। हर व्यक्ति के लिए मेरा विजन है कि उन्हे इन आर्टीफैक्ट में निहित ट्रांसफॉर्मेटिव एनर्जी का अनुभव करना चाहिए और मैं सभी के लिए इन्हें उपलब्ध बनाने के प्रति प्रतिबद्ध हूं। हिंदू धर्म की आस्था स्वरूप इन दोनों हथियार को किसी म्यूजियम में न रखा जाए बल्कि मंदिर का निर्माण हो और इसे भगवान शिव और इंद्र देवता को समर्पित किया जाए।
वज्र और त्रिशूल जो इस समय ग्लोबल अटेंशन के केंद्र में हैं तथा ये आध्यात्मिक रोशनी के द्वार भी है इनको संरक्षित रखने और शेयर करने के प्रति श्री हुसेन की प्रतिबद्धता डिवाइन पावर के प्रति बेहतर जागरुकता को बढ़ावा देने की संभावना एवं उनके महत्त्व पर जोर देती है।