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वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण से प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज ने की SHG पर चर्चा

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18 नवम्बर 2025, नई दिल्ली कर्तव्य भवन, 18 नवम्बर ,नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड की प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज जी ने देश की माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामण जी से सौजन्य भेंट की।

इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड की स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आजीविका वृद्धि एवं कौशल-विकास को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक के दौरान श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज ने उत्तराखंड के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय महिला समूहों के उत्कृष्ट कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि-SHG महिलाओं ने उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नयी दिशा दी है।
स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन से लेकर डिजिटल लेन-देन तक हमारी बहनें स्वयं को और अपने परिवारों को सशक्त बना रही हैं।”

प्रदेश महामंत्री ने बैठक में निम्न विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला:
• SHG उत्पादों का राष्ट्रीय स्तर पर विपणन
• स्थानीय उद्योगों व हस्तशिल्प का मूल्य संवर्धन
• महिला उद्यमिता को बढ़ाने हेतु कौशल एवं वित्तीय प्रशिक्षण
• समूह आधारित आजीविका मॉडल
• बैंक लिंकिंग और वित्तीय समावेशन
• डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा

माननीय वित्त मंत्री श्रीमती सीतारामण ने उत्तराखंड की महिलाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिला आर्थिक भागीदारी बढ़ाने, SHG समूहों को नई तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित नए आजीविका मॉडल विकसित करने का सुझाव भी दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि-“SHG उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय बाज़ार और सरकारी क्रय प्रणालियों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
केंद्र सरकार इस दिशा में राज्य को हर संभव सहयोग देगी।”

बैठक के अंत में दीप्ति रावत भारद्वाज जी ने वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “माननीय वित्त मंत्री जी का मार्गदर्शन उत्तराखंड की महिलाओं को आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और आर्थिक उन्नति की नई ऊर्जा देगा।”

यह संवाद उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला नेतृत्व और SHG आधारित आजीविका को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री 19 नवंबर को आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का दौरा करेंगे

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प्रधानमंत्री 9 करोड़ किसानों के लिए पीएम-किसान निधि की 18,000 करोड़ रुपये की 21वीं किस्त जारी करेंगे

प्रधानमंत्री पुट्टापार्थी में भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह में भाग लेंगे

प्रधानमंत्री भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जीवन, शिक्षाओं और उनकी शाश्वत विरासत के सम्मान में स्मारक सिक्का और डाक टिकटों का सेट जारी करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 19 नवंबर को आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के पुट्टापार्थी में सुबह लगभग 10 बजे भगवान श्री सत्य साईं बाबा के पवित्र तीर्थस्थल और महासमाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री सुबह लगभग 10:30 बजे भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह में भाग लेंगे। वे इस अवसर पर भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जीवन, शिक्षाओं और शाश्वत विरासत को समर्पित स्मारक सिक्का और डाक टिकटों का सेट जारी करेंगे। वे इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे।

इसके बाद प्रधानमंत्री तमिलनाडु के कोयंबटूर जाएंगे। वहां वे लगभग 1:30 बजे दिन में दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री देश भर के 9 करोड़ किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए पीएम-किसान योजना की 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की 21वीं किस्त जारी करेंगे। प्रधानमंत्री इस अवसर पर वहां उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे।

दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन तमिलनाडु प्राकृतिक कृषि हितधारक मंच की ओर से 19 से 21 नवंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और रसायन-मुक्त कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा भारत में कृषि के भविष्य के लिए व्यावहारिक, जलवायु-अनुकूल और आर्थिक रूप से टिकाऊ मॉडल के रूप में प्राकृतिक और पुनः विकास योग्य कृषि की ओर परिवर्तन को गति प्रदान करना है।

यह शिखर सम्मेलन किसान और उत्पादक संगठनों तथा ग्रामीण उद्यमियों के लिए बाज़ार संपर्क का निर्माण करने पर भी केंद्रित होगा। साथ ही इसमें जैविक इनपुट, कृषि-प्रसंस्करण, पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग और स्वदेशी तकनीकों में नवाचारों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के 50,000 से अधिक किसान, प्राकृतिक कृषि व्यवसायी, वैज्ञानिक, जैविक इनपुट आपूर्तिकर्ता, विक्रेता और हितधारक भाग लेंगे।

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बेकार गोबर बना सोना

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हजारीबाग: झारखंड में हजारीबाग जिले की एक गौशाला इन दिनों तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने को लेकर चर्चा में है. यहां रह रही 500 से अधिक गाय की देखभाल का खर्च अब गौशाला खुद अपने संसाधनों से पूरा करने लगी है. पहले जहां चारे और देखभाल के लिए दान पर निर्भरता अधिक थी, वहीं, अब गायों से मिलने वाले संसाधनो खासकर जैविक खाद तैयार कर बिक्री से ही गौशाला का पूरा खर्च निकाला जा रहा है. इससे न केवल गौशाला आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है. बल्कि इसका सीधा लाभ जिले के किसानों और आम लोगों को भी मिल रहा है.
मौजूदा समय में हजारीबाग गौशाला में 500 गाएं हैं, जिन्हें सड़क से या विभिन्न परिस्थितियों में रेस्क्यू कर लाया गया है. इतने बड़े स्तर पर गौ-सेवा चलाना आसान नहीं है. इसलिए गौशाला कमेटी ने एक प्रभावी मॉडल तैयार किया है. जिसमें गायों के द्वारा दिए गए गोबर से जैविक खाद तैयार किया जा रहा है और इसी स्थानीय बाजार से लेकर स्थानीय किसानों को बेचा जा रहा है और इसी कमाई से अब गौशाला की आमदनी बढ़ाई जा रही है.
कमेटी के सदस्य मनोज गुप्ता ने बताया कि जैविक खाद की बढ़ती मांग ने गौशाला को आर्थिक सहारा दिया है. पहले के समय में गाय के द्वारा दिए गए गोबर को ऐसे ही बाहर फेंक दिया जाता था या किसी को ओने पौने दाम पर बेचा जाता था, लेकिन वह मॉडल प्रभावित नहीं था, जिस कारण से यहां पर गोबर से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई. आज यह मॉडल सफल हो चुका है. गौशाला के आमदनी का प्रमुख हिस्सा अब जैविक खाद है.

लेंसकार्ट ने बार्सिलोना के ब्रांड मेलर को भारत में किया लॉन्च

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लैबुबू मेकर पॉपमार्ट संग नई रचनात्मक साझेदारी के साथ प्रीमियम पोर्टफोलियो का किया विस्तार; ग्लोबल हाउस ऑफ ब्रांड्स को मजबूत किया

मुंबई। लेंसकार्ट ने भारत में मेलर के लॉन्च की घोषणा की और वैश्विक पॉप-कल्चर ब्रांड पॉपमार्ट के साथ एक नई रचनात्मक आईवियर साझेदारी की घोषणा की। इस साझेदारी से आईवियर ब्रांड्स का एक आधुनिक घराना बनाने की उसकी महत्वाकांक्षा और मज़बूत होगी और लेंसकार्ट को समकालीन आईवियर डिज़ाइन के केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।

पॉप मार्ट x लेंसकार्ट आईवियर कलेक्शन दिसंबर के पहले हफ्ते से सिंगापुर में—ऑनलाइन और चुनिंदा लेंसकार्ट स्टोर्स में—लॉन्च होगा। इस रेंज में संग्रहणीय, चरित्र-प्रेरित डिज़ाइन पेश किए गए हैं, जो उन उपभोक्ताओं के लिए हैं जो भावपूर्ण, चंचल और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक फैशन एक्सेसरीज पसंद करते हैं।

यह साझेदारी लेंसकार्ट के सांस्कृतिक सहयोगों के बढ़ते दायरे पर आधारित है, जिसमें हैरी पॉटर, हैलो किट्टी, पोकेमॉन, ड्रैगन बॉल ज़ेड, सुपरमैन और बैटमैन शामिल हैं। ये सहयोग लेंसकार्ट को डिज़ाइन-आधारित कहानी कहने के माध्यम से अपने आईवियर की अपील को व्यापक बनाने में मदद कर रहे हैं जो प्रशंसकों और उभरती उपसंस्कृतियों से गहराई से जुड़ती है।

बार्सिलोना में शुरू किया गया मेलर, यूरोप के सबसे प्रभावशाली डी2सी युवा आईवियर ब्रांडों में से एक बन गया है, जो अपने बोल्ड सिल्हूट, स्ट्रीट-कल्चर से प्रेरित पैलेट और अभिव्यंजक, फ़ैशन-फ़ॉरवर्ड सौंदर्यशास्त्र के लिए जाना जाता है। 700,000 से अधिक फ़ॉलोअर्स और यूरोप और अमेरिका में मज़बूत पकड़ के साथ, मेलर ने एक जीवंत वैश्विक समुदाय और विशिष्ट, डिज़ाइन-आधारित आईवियर चाहने वाले युवा उपभोक्ताओं के साथ एक गहरा जुड़ाव बनाया है।

भारत में, मेलर अब लेंसकार्ट के रिटेल नेटवर्क के साथ-साथ लेंसकार्ट ऐप और वेबसाइट के ज़रिए ऑनलाइन भी उपलब्ध होगा। ब्रांड सबसे पहले उच्च फ़ैशन-अनुकूलता वाले क्षेत्रों से मेल खाने के लिए जियोआईक्यू इंटेलिजेंस का उपयोग करके पहचाने गए लगभग 500 क्यूरेटेड स्टोर्स में इसे लॉन्च करेगा।

मेलर, जॉन जैकब्स, ओनडेज़ जैसे ब्रांडों और पॉपमार्ट, ड्रैगन बॉल ज़ेड और हैरी पॉटर जैसी रचनात्मक साझेदारियों के माध्यम से, लेंसकार्ट धीरे-धीरे एक विचारशील प्रीमियम पोर्टफोलियो तैयार कर रहा है जो नई पीढ़ी के ग्राहकों की ज़रूरतों के अनुरूप है। आईवियर उद्योग ने दिखाया है कि कैसे मजबूत प्लेटफॉर्म ब्रांडों को आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं, और लेंसकार्ट को अभिव्यंजक, डिज़ाइन-प्रधान ब्रांडों की अगली लहर को सक्षम करने में अपनी भूमिका निभाने की उम्मीद है। प्रत्येक ब्रांड एक विशिष्ट डिज़ाइन दर्शन और उपभोक्ता वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे लेंसकार्ट विशिष्टता, प्रीमियम गुणवत्ता और स्टाइल चाहने वाले वैश्विक ग्राहकों की एक विस्तृत श्रृंखला की सेवा कर पाता है। लेंस तकनीक के क्षेत्र में, वैश्विक नवप्रवर्तक टोकाई और रोडेनस्टॉक ने भी लेंसकार्ट के साथ साझेदारी की है।

लेंसकार्ट के सह-संस्थापक और सीईओ, पीयूष बंसल ने कहा, “हमारे ग्राहक हमारे हर फैसले को प्रेरित करते हैं। वे वैश्विक डिज़ाइन, विशिष्टता और प्रामाणिक लगने वाले ब्रांड चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मेलर का बोल्ड सौंदर्यबोध और मज़बूत समुदाय इसे हमारे ब्रांड हाउस में एक अद्भुत जोड़ बनाता है। और पॉप मार्ट जैसी रचनात्मक साझेदारियों के माध्यम से, हम अपने ग्राहकों को प्रसन्न करने वाले तरीकों से आईवियर में खेल, कल्पना और संग्रहणीयता के क्षण लाने की उम्मीद करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जॉन जैकब्स, ओनडेज़ और अब मेलर जैसे ब्रांडों को पॉप मार्ट जैसे सहयोगों के साथ एक साथ लाकर, हमारा लक्ष्य ग्राहकों को ज़्यादा विकल्प और बेहतर अनुभव प्रदान करना है। हम खुद को अगली पीढ़ी के आईवियर ब्रांडों के लिए एक सक्षमकर्ता के रूप में देखते हैं – उन्हें ज़्यादा लोगों तक पहुँचने और अपनी क्षमता को उजागर करने के लिए एक मंच और क्षमताएँ प्रदान करते हैं।”

लेंसकार्ट के वितरण पैमाने, पूर्ण-स्टैक आपूर्ति श्रृंखला, डिज़ाइन पारिस्थितिकी तंत्र और उन्नत तकनीकी क्षमताओं द्वारा संचालित, साझेदार ब्रांड नए दर्शकों तक पहुंच सकते हैं और बाज़ारों में अधिक सार्थक रूप से विकसित हो सकते हैं।

जैसे-जैसे वैश्विक आईवियर विकसित हो रहा है, मज़बूत मल्टी-ब्रांड प्लेटफ़ॉर्म ने इस श्रेणी को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। अपने हाउस ऑफ ब्रांड्स विज़न के साथ, लेंसकार्ट का लक्ष्य दुनिया भर में एक्सप्रेसिव, डिज़ाइन-आधारित आईवियर ब्रांड्स और सांस्कृतिक सहयोगों की अगली लहर को सशक्त बनाना है।

मुंद्रा बंदरगाह पर तस्करी वाले 5 करोड़ रुपये मूल्य के पटाखे जब्त

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राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पटाखों के अवैध आयात को रोकने के लिए ऑपरेशन “फायर ट्रेल” के तहत जारी प्रयास में देश में चीनी पटाखों और पटाखों के अवैध आयात से जुड़े एक और गंभीर तस्करी के प्रयास का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है।

ऑपरेशन के दौरान, डीआरआई अधिकारियों ने मुंद्रा बंदरगाह पर चीन से आ रहे एक 40 फीट लंबा कंटेनर पकड़ा, जिसके बारे में बताया गया कि उसमें “गिलास सेट” और “फूलदान” है। विस्तृत जांच में गिलास के ऊपरी हिस्से के पीछे 30,000 पटाखे/आतिशबाज़ी के टुकड़े छिपे हुए पाए गए। इससे पहले, अक्टूबर 2025 में डीआरआई ने मुंबई और तूतीकोरिन में चीनी पटाखों के अवैध आयात के प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया था।

विदेश व्यापार नीति के आईटीसी (एचएस) वर्गीकरण के अंतर्गत पटाखों का आयात ‘प्रतिबंधित’ है और इसके लिए विस्फोटक नियम, 2008 के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) दोनों से वैध लाइसेंस की जरूरत होती है। आयातक के पास आयात के समर्थन में कोई वैध दस्तावेज़ नहीं थे और उसने स्वीकार किया कि माल की तस्करी आर्थिक लाभ के लिए की गई है। तदनुसार, तस्करी किए गए चीनी पटाखों को उनके कवर कार्गो/माल सहित 15.11.2025 को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के अंतर्गत जब्त कर लिया गया, इसकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपये है। इस लेन-देन के साजिशकर्ता-सह-वित्तपोषक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

ऐसे खतरनाक सामानों का अवैध आयात जन सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, महत्वपूर्ण बंदरगाह अवसंरचना और व्यापक शिपिंग एवं लॉजिस्टिक्स श्रृंखला के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। डीआरआई ऐसे संगठित तस्करी नेटवर्क का पता लगाकर और उन्हें ध्वस्त करके, खतरनाक तस्करी से जनता की सुरक्षा और देश के व्यापार एवं सुरक्षा परितंत्र की अखंडता को बनाए रखने के अपने मिशन पर अडिग है।

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प्रधानमंत्री ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा की

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कल गुजरात के सूरत में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन का दौरा किया और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की टीम से भी बातचीत की और गति तथा समय सारिणी के लक्ष्यों के पालन सहित परियोजना की प्रगति के बारे में जानकारी ली। कर्मियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि परियोजना बिना किसी कठिनाई के सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है।

केरल की एक इंजीनियर ने गुजरात के नवसारी स्थित नॉइज़ बैरियर फ़ैक्टरी में काम करने का अपना अनुभव साझा किया, जहाँ सरिया के पिंजरों की वेल्डिंग के लिए रोबोटिक इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं। श्री मोदी ने उनसे पूछा कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन के निर्माण के अनुभव को उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कैसा महसूस किया और इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बारे में वे अपने परिवारों के साथ क्या साझा करती हैं। उन्होंने देश की पहली बुलेट ट्रेन में योगदान देने पर गर्व व्यक्त किया और इसे अपने परिवार के लिए एक “ड्रीम प्रोजेक्ट” और “गर्व का क्षण” बताया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र सेवा की भावना पर विचार करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि जब राष्ट्र के लिए काम करने और कुछ नया योगदान देने की भावना जागृत होती है, तो यह अत्यधिक प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। उन्होंने भारत की अंतरिक्ष यात्रा के साथ तुलना करते हुए याद दिलाया कि देश का पहला उपग्रह प्रक्षेपित करने वाले वैज्ञानिकों को कैसा महसूस हुआ होगा और आज कैसे सैकड़ों उपग्रह प्रक्षेपित किए जा रहे हैं।

 

बेंगलुरु की एक अन्य कर्मचारी, श्रुति, मुख्य इंजीनियरिंग प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कठोर डिज़ाइन और इंजीनियरिंग नियंत्रण प्रक्रियाओं के बारे में बताया। श्रुति ने बताया कि कार्यान्वयन के प्रत्येक चरण में, उनकी टीम फायदे और नुकसान का मूल्यांकन करती है, समाधानों की पहचान करती है और दोषरहित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए विकल्पों की खोज करती है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि यदि यहाँ प्राप्त अनुभवों को ब्लू बुक की तरह दर्ज और संकलित किया जाए, तो देश बुलेट ट्रेनों के बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत को बार-बार प्रयोग करने से बचना चाहिए और इसके बजाय मौजूदा मॉडलों से सीखों को दोहराना चाहिए। श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि अनुकरण तभी सार्थक होगा जब यह स्पष्ट समझ हो कि कुछ कदम क्यों उठाए गए। उन्होंने आगाह किया, कि अनुकरण बिना किसी उद्देश्य या दिशा के हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे रिकॉर्ड बनाए रखने से भविष्य के विद्यार्थियों को लाभ हो सकता है और राष्ट्र निर्माण में योगदान मिल सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम अपना जीवन यहीं समर्पित करेंगे और देश के लिए कुछ मूल्यवान छोड़ जाएँगे।”

एक कर्मचारी ने एक कविता के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया, जिस पर प्रधानमंत्री ने उनके समर्पण की प्रशंसा और सराहना की।

केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव इस दौरे के अवसर पर मौजूद थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) की प्रगति की समीक्षा करने के लिए सूरत में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन का दौरा किया। यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है और देश के हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के युग में प्रवेश का प्रतीक है।

एमएएचएसआर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में और 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में शामिल है। यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई सहित प्रमुख शहरों को जोड़ेगा, जो भारत के परिवहन बुनियादी ढांचे में एक परिवर्तनकारी कदम है।

अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों से निर्मित इस परियोजना में 465 किलोमीटर (मार्ग का लगभग 85 प्रतिशत) पुलों पर बना है, जिससे न्यूनतम भूमि व्यवधान और बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होती है। अब तक 326 किलोमीटर पुल निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है और 25 में से 17 नदी पुलों का निर्माण हो चुका है।

बुलेट ट्रेन परियोजना के पूरा होने पर, मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को लगभग दो घंटे तक कम कर देगी, जिससे अंतर-शहर यात्रा तेज, आसान और अधिक आरामदायक बनकर क्रांति ला देगी। इस परियोजना से पूरे कॉरिडोर पर व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की संभावना है।

सूरत-बिलिमोरा खंड, लगभग 47 किलोमीटर लंबा है और यह निर्माण कार्य के अंतिम चरण में है, जिसमें सिविल कार्य और ट्रैक बिछाने का काम पूर्ण रूप से पूरा हो चुका है। सूरत स्टेशन का डिज़ाइन शहर के विश्व प्रसिद्ध हीरा उद्योग से प्रेरित है, जो सुंदरता और कार्यक्षमता दोनों को दर्शाता है। स्टेशन को यात्रियों की सुविधा पर विशेष ध्यान देते हुए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें विशाल प्रतीक्षालय, शौचालय और खुदरा दुकानें हैं। यह सूरत मेट्रो, सिटी बसों और भारतीय रेलवे नेटवर्क के साथ निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी भी प्रदान करेगा।

बिहार विधानसभा के चुनाव परिणामों के निहितार्थ

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(डॉ. सुधाकर आशावादी -विनायक फीचर्स)

लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव व्यवस्था को बार बार कटघरे में खड़ा करने का प्रयास बिहार चुनावों में भी विफल सिद्ध हुआ। बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों ने सिद्ध कर दिया कि लोकतंत्र में झूठे विमर्श और भ्रामक प्रचार को मतदाता स्वीकार करने के लिए तैयार नही है। चुनाव परिणामों ने उन राजनीतिक दलों को सत्य का दर्पण दिखा दिया, जो यह समझते थे, कि उनके द्वारा स्थापित किया जाने वाला वोट चोरी का अप्रमाणिक विमर्श ही सत्य है। अप्रत्याशित चुनाव परिणामों ने यह भी स्पष्ट कर दिया, कि मतदाता पूर्व की अपेक्षा अधिक जागरूक है तथा वह अकल्पनीय वादों पर विश्वास नहीं करता।
बिहार चुनाव परिणामों ने जाति आधारित वोट बैंक के भरम को भी तोड़ दिया,कि जातियां किसी विशेष राजनीतिक दल की बपौती हैं, यही नहीं उन वंशवादी राजनेताओं को भी जमीनी दर्पण दिखा दिया, जो काल्पनिक बातें करके मनगढंत विमर्श से मतदाताओं को गुमराह करने के लिए किसी भी हद तक अराजकता की स्थिति उत्पन्न कर सकते थे। वस्तुस्थिति यह है, कि बिहार के चुनाव परिणामों ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को बरक़रार रखा तथा अपने निहित स्वार्थों के लिए देश की चुनाव व्यवस्था को बदनाम करने वाले तत्वों की कलई खोल कर रख दी।
यहाँ इस सत्य को नहीं नाकारा जा सकता, कि हार की खीज सहजता से नहीं मिटाई जा सकती, यदि ऐसा न होता, तो अपनी जमीनी सच्चाई को दरकिनार करते हुए राजनेता पूर्व से ही चुनाव आयोग, चुनाव व्यवस्था को कटघरे में खड़ा न करते। कभी वोट चोरी, कभी ईवीएम में गड़बड़ी, कभी स्लो काउंटिंग, कभी मतदाता सूची में गड़बड़, कभी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर कुछ राजनीतिक दल निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में विघ्न डालने का प्रयास न करते।
निसंदेह बिहार विधानसभा चुनाव देश में चुनाव सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी तथा चुनावों को मनगढ़ंत विमर्श से प्रभावित करने वाले राजनीतिक दलों के प्रति विश्वसनीयता को कम करेगी। ऐसा समझा जाना अपेक्षित है। (विनायक फीचर्स)

MP – चिकलोद गांव में गौवंश अभ्यारण्य विकसित किया जा रहा है

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MP News: मध्य प्रदेश के रायसेन के चिकलोद गांव में गौवंश अभ्यारण्य विकसित किया जा रहा है. बेसहारा गौवंशों की बढ़ती संख्या को देखते राज्य सरकार ने अभ्यारण्य बनाने का फैसला लिया है. इसे बनाने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई. यहां गौवंशों को रखने के साथ-साथ चिकित्सालय और क्वारंटीन करने समेत कई व्यवस्था होगी.

320 एकड़ में होगा विकसित
गौ अभ्यारण्य को 320 एकड़ में विकसित किया जाएगा. इसके लिए 15 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत कर दी गई और टेंडर भी जारी कर दिया गया है. इसके साथ ही पशुपालन विभाग ने ग्रामीण अभियांत्रकी सेवा को निर्देश दिया है कि एक साल के भीतर काम पूरा कर लिया जाए.

पशुपालन विभाग में डिप्टी डायरेक्टर डॉ. आरके शुक्ला ने बताया कि चिकलोद में अभ्यारण्य के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है. निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा. इसके साथ ही पठारी परियोजना को तेज गति पूरा किया जा रहा है. इसके बनने के बाद सड़क पर अवारा और बेसहारा गौवंशों को यहां रखा जाएगा.

6 हजार गौवंश रखने की व्यवस्था
चिकलोद अभ्यारण्य में 6 हजार गौवंशों को रखने की व्यवस्था होगी. यहां इनका हर तरीके से ध्यान रखा जाएगा. आधुनिक शेड, पानी की समुचित व्यवस्था, चारा भंडारण केंद्र, अस्पताल, क्वारंटीन जोन और सुरक्षा परिधि को विकसित किया जाएगा.

आगर-मालवा और रीवा में भी अभ्यारण्य
मध्य प्रदेश का पहला गौ अभ्यारण्य आगरा-मालवा जिले के सुसनेर में स्थापित किया गया. कामधेनु गौ अभ्यारण्य को साल 2023 से संचालित किया जा रहा है. इसके साथ ही रीवा में बसामन मामा में गौ अभ्यारण्य स्थापित किया गया है.

रेबीज से गाय की मौत के बाद मचा हड़कंप, दहशत में चरणामृत पीने वाले

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गोरखपुर। रेबीज संक्रमित गाय की मौत ने उरुवा ब्लाक के रामडीह गांव में दहशत फैला दी है। इस गाय के कच्चे दूध से बना चरणामृत गांव के लगभग 150 लोगों ने हाल ही में एक धार्मिक आयोजन में ग्रहण किया था। संक्रमण की पुष्टि और गाय की मौत के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है।

पिछले दो दिनों में 70 ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) उरुवा पहुंचकर एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) की पहली डोज लगवा चुके हैं। पीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. जे.पी. तिवारी ने बताया कि एहतियात के तौर पर कच्चा दूध पीने वाले सभी ग्रामीणों को वैक्सीन की तीन डोज दी जाएगी। पहली के तीन दिन बाद दूसरी और सात दिन बाद तीसरी डोज लगाई जाएगी।

ग्रामीणों के अनुसार, लगभग तीन महीने पहले एक कुत्ते ने सुशील गौड़ और धर्मेंद्र गौड़ की दो गायों को काट लिया था। सुशील ने तत्काल एआरवी की डोज दिलवा दी, पर जानकारी के अभाव में धर्मेंद्र ने ऐसा नहीं किया। कुछ दिन पहले गांव में राजीव गौड़ और सोनू विश्वकर्मा के घर में धार्मिक आयोजन के दौरान चरणामृत बनाने के लिए धर्मेंद्र की गाय का कच्चा दूध लिया गया। इसी से बना चरणामृत लगभग 150 ग्रामीणों ने ग्रहण किया था।

बुधवार को धर्मेंद्र की गाय की तबीयत बिगड़ी। परीक्षण में रेबीज संक्रमण की पुष्टि हुई। गुरुवार को गाय का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। वह कुत्ते की तरह भौंकने लगी, पानी देख उछलने लगी और लोगों को काटने के लिए दौड़ाने लगी। शनिवार रात उसकी मौत हो गई। संक्रमण की आशंका के चलते शुक्रवार को 20 और शनिवार को 50 ग्रामीण वैक्सीन लगवाने पहुंचे। अनिल गौड़, मेवाती देवी, ललिता, सोनू विश्वकर्मा, नीलम विश्वकर्मा, रितु, आंचल, नीलम गौड़, आराध्या, अरविंद ओझा, शकुंतला, रितिका सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने चरणामृत का सेवन किया था, इसलिए बेहद चिंतित हैं।सीएमओ डा. राजेश झा ने कहा कि मामला संज्ञान में है और विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है। रविवार तक यह स्पष्ट किया जाएगा कि गाय के कच्चे दूध से रेबीज संक्रमण की वास्तविक आशंका कितनी है। तब तक एहतियातन सभी प्रभावितों को वैक्सीन दी जा रही है।

सबसे छोटी गाय पुंगनूर का जशपुर में जन्म

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जशपुर: पुंगनूर गाय दुनिया की सबसे छोटी गायों में से एक है. इसकी औसत ऊंचाई लगभग 70 से 90 सेंटीमीटर तक होती है. पुंगनूर गाय का वजन 115 से 200 किलोग्राम के बीच होता है. ये गाय कद काठी में छोटी जरुर होती है लेकिन इसका दूध कई गुणों की खान है. मुख्य रुप से ये गाय आंध्र प्रदेश में मिलती है. लेकिन अब लोग बड़े पैमाने पर इसे दूसरे राज्यों में भी ले जाकर पाल रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार इस गाय की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चुके हैं. पीएम मोदी ने जब से पुंगनूर गाय की तस्वीर शेयर की है तब से इस गाय की डिमांड कई राज्यों में तेजी से बढ़ी है.

दुनिया की सबसे छोटी गाय पुंगनूर का जशपुर में जन्म: जशपुर जिले में पहली बार कृत्रिम गर्भाधान के जरिए पुंगनूर नस्ल की मादा वत्स (बछिया) का जन्म कराया गया है. पशु विज्ञान और पशु चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग इसे एक बड़ी सफलता के तौर पर देख रहे हैं. उनका मानना है कि इस सफलता के बाद पुंगनूर नस्ल की गायों को संरक्षण और संवर्धन दोनों तेजी से हो सकेगा.

पशु चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी सफलता: यह उपलब्धि पशु चिकित्सालय पत्थलगांव में पदस्थ सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के.के. पटेल के मार्गदर्शन और तकनीकी दक्षता से संभव हो सका. के के पटेल ने गोढ़ीकला तथा ग्राम करमीटिकरा–करूमहुआ क्षेत्र के किसान खगेश्वर यादव की देशी गाय में पुंगनूर नस्ल के सांड के हिमकृत सीमेन का उपयोग करते हुए 29 जनवरी 2025 को गाय को कृत्रिम गर्भाधान कराया. 284 दिनों के गर्भकाल के बाद 11 नवंबर 2025 को गाय ने एक पूरी तरह से स्वस्थ पुंगनूर नस्ल की बछिया को जन्म दिया. जशपुर के किसान और गौ पालक इसे लेकर काफी उत्साहित हैं. बड़ी संख्या में लोग पुंगनूर बछिया को देखने के लिए किसान के घर पहुंच रहे हैं.

दुनिया की सबसे छोटी गाय होने का मिला है तमगा: पुंगनूर गाय मूल रूप से आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के पुंगनूर क्षेत्र की देशज नस्ल है. इसे विश्व की सबसे छोटी गाय के रूप में मान्यता प्राप्त है. इसकी औसत ऊंचाई 70 से 90 सेंटीमीटर तथा वजन 110 से 200 किलोग्राम तक होता है. इसे पालने वाले किसान बताते हैं कि ये गाय कम चारा, कम रखरखाव और कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी आसानी से जीवित रहती है. पशु चिकित्सक और इसे पालने वाले किसान बताते हैं कि यह प्रतिदिन 1 से 2 लीटर तक दूध देती है, जबकि कुछ मादा अधिकतम 3 लीटर तक दूध देती है. पुंगनूर गाय के दूध में A2 प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा होती है. इसके साथ ही इसके दूध में एंटी-बैक्टीरियल तत्व और औषधीय गुण भरपूर मात्रा में होता है. इसकी वजह से इस गाय का दूध स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है. इस गाय के दूध में फैट की मात्रा भी काफी कम होती है.