Home Blog Page 111

दो गायों पर एयरगन से हमला करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया

0

घनश्याम सोनी- बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में गायों पर एयरगन से हमला करने का मामला सामने आया है। गायों ने फसल को नुकसान पहुंचाया तो युवक ने गायों को एयरगन से शूट कर दिया। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है।

दरअसल यह पूरा मामला बलरामपुर थाना क्षेत्र का है। जहां पर एक युवक ने फसल को नुकसान पहुंचाने वाले दो गायों को एयरगन से शूट कर दिया। जिसके बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई। वहीं पुलिस ने मामले में नगर पालिका की अध्यक्ष सुंदरमुनी मिंज के पति परम मिंज को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही आरोपी के पास से एयरगन को भी जब्त किया गया है।गौ हत्या में शामिल था आरोपी 

पुलिस ने बताया की गायों ने आरोपी युवक के खेत में लगे फसल को नुकसान पहुंचाया था। जिसके बाद युवक आक्रोश में आकर दो गायों को एयरगन से शूट कर दिया। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी युवक पहले भी गौ हत्या के मामले में संलिप्त रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने किया हिलजात्रा महोत्सव को वर्चुअली सम्बोधित

0

देहरादून ,20 सितम्बर ,मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअली पिथौरागढ में आयोजित हिलजात्रा महोत्सव को सम्बोधित किया। उन्होंने सभी को हिलजात्रा पर्व की शुभकामनाएँ देते हुए कामना की कि जिस प्रकार हर घर में माँ गौरा और भगवान महेश्वर की पारंपरिक पूजा के साथ सातू-आठू पर्व से हिलजात्रा की धारा प्रवाहित होती है उसी प्रकार सबके जीवन में भी सुख, समृद्धि और शांति की धारा निरंतर प्रवाहित होती रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिलजात्रा महोत्सव के आयोजन हेतु 5 लाख रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने, मोस्टामानू मंदिर के सौन्दर्गीकरण के लिए 98 लाख रुपए स्वीकृत करने, चौतोल मेला परिसर, श्री गोलज्यू मंदिर के सौन्दर्गीकरण हेतु धनराशि की स्वीकृति प्रदान करने तथा कुमौड़ में हिलजात्रा मेला स्थल के सौन्दर्याकरण का कार्य कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारीे पिथौरागढ़ को जी.जी.आई.सी. के समीप निर्माण की जाने वाली पार्किंग का ‘‘स्ट्रक्चरल सेफ्टी’’ का जल्द से जल्द अपने स्तर पर परीक्षण करने के निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोरघाटी की ये ऐतिहासिक हिलजात्रा हमारी आस्था, विश्वास और समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है। यह यात्रा केवल एक धार्मिक या पारंपरिक आयोजन ही नहीं बल्कि हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। हिलजात्रा न केवल हमारे पूर्वजों की महान परंपराओं, आदर्शों और बहादुरी का स्मरण कराती है बल्कि कृषि और पशुपालन से जुड़े हमारे ग्रामीण जीवन की विशेषताओं को भी दर्शाती है। हिलजात्रा की यह परंपरा हमें हमारी मिट्टी, खेतों, सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का अनूठा माध्यम है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि 500 वर्षों से भी अधिक समय से मनाए जा रहे इस पर्व ने पिथौरागढ़ को एक विशिष्ट पहचान दी है और भगवान् शिव के गण लखिया भूत के आगमन ने हमें सदैव सुख, समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान किया है। इस पर्व के माध्यम से हम अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, और उज्जैन में महाकाल लोक जैसी परियोजनाएं पूरी हुई है। साथ ही केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का पुनर्निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री जी ने स्वयं पिथौरागढ क्षेत्र की यात्रा कर आदि कैलाश यात्रा को भी विश्व भर में प्रसिद्धि दिलाने का कार्य किया है।

प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे पारंपरिक पर्व, मेले, और त्योहार आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और संरक्षित रहें। इसके लिए हमारी सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर सहयोग कर रही है। पारंपरिक और पौराणिक मेलों के मूल स्वरूप को यथावत रखने के लिए हर वर्ष आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।

उन्होंने कहा कि हिलजात्रा जैसे पर्वों के माध्यम से हमें हमारी युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का अवसर मिलता है। उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करें और उन्हें आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्धारित प्रशासनिक व्यस्तताओं के चलते वे व्यक्तिगत रूप से इस आयोजन में शामिल नहीं हो पाये लेकिन उन्हें इस बात का संतोष भी है कि तकनीक के माध्यम से आप सभी के साथ वर्चुअल रूप से जुड़कर वे इस अद्भुद उत्सव का साक्षी बन पा रहे हैं।

इस महोत्सव में विधायक डीडीहाट बिशन सिंह चुफाल, विधायक पिथौरागढ मयूख सिंह मेहर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दीपिका बोरा, राज्य स्तरीय लघु सिंचाई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष गणेश भण्डारी, पूर्व विधायक श्रीमती चन्द्रा पंत, भाजपा जिलाध्यक्ष पिथौरागढ गिरीश जोशी, निवर्तमान अध्यक्ष नगर पालिका पिथौरागढ राजेन्द्र सिंह रावत, शिव सिंह विष्ट सहित बडी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

वीर ने पंढरपुर की वारी तीर्थयात्रा में शामिल होकर अपनी जड़ो का किया सम्मान

0

पंढरपुर मदिंर तक की पवित्र यात्रा में शामिल होकर एक्टर वीर ने अपने इतिहास को किया सेलिब्रेट

अपने फैशन स्टेटमेंट की वजह से हमेशा सुर्खियां में बनें रहने वाले एक्टर वीर इन दिनों अपनी डेब्यू फिल्म ‘स्काईफोर्स’ को लेकर काफी चर्चा में हैं। वीर की एक और सबसे खास बात यह है कि वो आज भी अपनी जडो़ को नहीं भूले है और अपनी विरासत को सेलिब्रेट करना उन्हें अच्छे से आता हैं। इसका एक नजारा हालही में तब देखने मिला जब उन्होंने अपनी फिल्म की शूटिंग पूरी करने के बाद पंढरपुर वारी तीर्थयात्रा में हिस्सा लिया, जो विठोबा रुक्मिणी मंदिर की एक प्रतिष्ठित तीर्थयात्रा है। इस दौरान वीर ने पहले दिन 22 किलोमीटर और दूसरे दिन 20 किलोमीटर का सफर पैदल तय किया, जो इस परंपरा के प्रति उनके समर्पण को दिखाता है। यहीं नहीं वीर उन लोगों की भी तारीफ करने से पीछे नहीं रहें जो 250 किलोमीटर की पूरी वारी करते हैं।

आपको बता दें कि पंढरपुर वारी, या वारी, विठोबा को समर्पित एक यात्रा है, जिसमें ज्ञानेश्वर और तुकाराम जैसे संतों की पादुका उनके मंदिरों से पंढरपुर तक लाई जाती है। इस यात्रा में बहुत से भक्त पैदल शामिल होते हैं, जो महाराष्ट्र की धार्मिक और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

वीर ने इस यात्रा में हिस्सा लेकर इस बात को साफ कर दिया है कि कैसे वो न सिर्फ अपने रिवाजों से जुड़े हैं, बल्की अपने इतिहास का सम्मान भी करते हैं। यह यात्रा उनकी जड़ों के प्रति उनकी कमिटमेंट को दिखाता है।

शहर में घूम-घूमकर गाय को भोजन खिलाता है, ताकि उनको रोटी के बदले प्लास्टिक न खाना पड़े.

0

मुजफ्फरपुर:- बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, यह कहावत तो आपने जरुर सुनी होगी. अब कहावत को मुजफ्फरपुर का लड़का सच करने की जिद पर अड़ गया है. दरअसल ये लड़का शहर में घूम-घूमकर गाय को भोजन खिलाता है, ताकि उनको रोटी के बदले प्लास्टिक न खाना पड़े. पहले तो दोनों खुद से रोटी पकाते थे. लेकिन जब गायों की संख्या बढ़ी, तो फिर लोगों से मदद लेनी शुरू की. उनके काम की शहर के लोग भी तारीफ करते हैं. शुरुआत से विकास का साथ उनके दोस्त सुगंध दे रहे हैं. वही इनके कामों को देख और भी लड़के इनसे जुड़ने लगे हैं.

ले लिया ये कठिन संकल्प
अब गौ सेवा करने वाले विकास ने एक नया चैलेंज ले लिया है. विकाश ने Local 18 को बताया कि हम अक्सर देखते हैं कि शहर में जो लावारिस गाय घूमती है, उनकी तबियत बिगड़ी रहती है. जगह-जगह पर जख्म होते है. उनकी देखभाल के लिए कोई नहीं है और इनके लिए न तो कोई गौशाला है. मैंने यह चैलेंज लिया है कि जब तक मैं इनके इन लावारिस गाय के लिए गौशाला नहीं बनवा दूं, तब तक मैं अपना बाल नहीं कटवाऊंगा. बीच में अगर किसी तरह कोई दिक्कत आती है, जिसमें मुझे बाल कटवाना पड़े, तभी मैं इसके लिए सोचूंगा.

लोगों से की ये अपील
विकाश ने आगे लोकल 18 को आगे बताया कि हम जब कॉलेज आने-जाने के दौरान गाय को कूड़ा-कचरा खाते देखते थे, यह चीज हमारे दिल को छू गई. इसके बाद दोनों दोस्तों ने शहर के घूम रहे लावारिस गायों के लिए अच्छे खाने की व्यवस्था करने लगे. ये दोनों दोस्त घर से रोटी लेकर निकलते हैं और जहां-जहां लावारिस गाय का जमावड़ा होता है, उन्हें वह रोटी खिलाते हैं. लेकिन अब इनके लिए गौशाला भी बनवाएंगे. अब गौशाला बनाने के काफी पैसे खर्च होंगे. हम छात्र हैं और हमारे पास एक साथ इतने पैसे नहीं आ पाएंगे. लेकिन कहते हैं न कि बूंद-बूंद से घड़ा भरता है. इसको सोच मैंने बाबा गरीब नाथ मंदिर में यह चैलेंज लिया है. हम लोगों के पास जाएंगे और थोड़े-थोड़े पैसे लेकर जमा करेंगे. फिर एक दिन गौशाला बनवाएंगे, साथ ही शहर के लोगों से अपील रहेगी कि हमारी मदद करें.

पॉलिथीन का उपयोग गौ हत्या और मानव वध करने जैसा

0

कोटा : प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर गुरुवार को कोटा के दौरे पर रहे. यहां उन्होंने राज्य स्तरीय स्कूली छात्र-छात्रा सॉफ्टबॉल और शतरंज प्रतियोगिता का उद्घाटन किया. इस मौके पर समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पॉलिथीन का उपयोग करना गौ हत्या और मानव वध जैसा है. यह हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा है. इससे कैंसर और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियां होती है.

आगे वन नेशन, वन इलेक्शन पर उन्होंने कहा कि कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई है. यह देश के लिए अच्छी बात है और स्वागत योग्य कदम है. इलेक्शन में होने वाला खर्च इससे कम होगा और देश के विकास में पैसों को लगाया जाएगा. साथ ही आगामी उपचुनाव में सातों सीटों पर भाजपा की जीत का दावा किया. मंत्री ने कहा कि चुनाव की तैयारी हम पूरे 5 साल करते हैं. इस समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि जिला प्रमुख मुकेश मेघवाल शामिल हुए थे.

शरीर में रोज जा रही 5 ग्राम पॉलिथीन : मंत्री दिलावर ने कहा कि आज पॉलिथीन हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है. इससे लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है. इसके चलते खाद्यान्न का उत्पादन कम हो जाएगा और एक दिन हम लोगों के भूखे मरने की नौबत आ जाएगी. भारत माता के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए गौ माता की सेवा करनी होगी, क्योंकि गोबर के जरिए ही हम धरती के वातावरण को ठीक कर सकते हैं. इसके लिए गौ माता को जिंदा रखना आवश्यक है. उनकी सेहत पॉलिथीन से खराब हो रही है.

हम लोग सड़क पर पॉलिथीन फेंक देते हैं. इससे गंदगी फैलती है. हम सभी को संकल्प लेना पड़ेगा कि किसी भी कीमत पर पॉलिथीन को नजदीक नहीं आने देंगे. ये पॉलिथीन रोज हमारे शरीर में 5 ग्राम जा रही है. इसे ज्यादा खराब डिस्पोजल है, जिनमें हम चाय या खाना खाते हैं. इसका उपयोग नहीं करेंगे तो शरीर साफ सुथरा रहेगा. दूसरी तरफ बच्चों से अपील है कि बच्चे स्कूली टिफिन में प्लास्टिक का उपयोग बंद कर दें.

प्रधानमंत्री 20 सितंबर को महाराष्ट्र का दौरा करेंगे

0


प्रधानमंत्री अमरावती में पीएम मित्र पार्क की आधारशिला रखेंगे

प्रधानमंत्री आचार्य चाणक्य कौशल्य विकास योजना और पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर महिला स्टार्ट-अप योजना का शुभारंभ करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 20 सितंबर को महाराष्ट्र के वर्धा का दौरा करेंगे। सुबह करीब 11:30 बजे वे राष्ट्रीय ‘पीएम विश्वकर्मा’ कार्यक्रम में भाग लेंगे, जिसमें प्रधानमंत्री विश्वकर्मा के तहत प्रगति के एक वर्ष पूरे होने का उत्‍सव मनाया जाएगा।

प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के दौरान, पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र और ऋण जारी करेंगे। इस योजना के तहत कारीगरों को दिए जाने वाले ठोस समर्थन के प्रतीक के रूप में वे 18 ट्रेडों के तहत 18 लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा के तहत ऋण भी वितरित करेंगे। समाज में उनकी विरासत और उनके स्थायी योगदान के सम्मान के रूप में वे पीएम विश्वकर्मा के तहत प्रगति के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में समर्पित एक स्मारक डाक टिकट जारी करेंगे।

प्रधानमंत्री महाराष्ट्र के अमरावती में पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्र) पार्क की आधारशिला रखेंगे। 1000 एकड़ में फैले इस पार्क का विकास महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) द्वारा राज्य कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में किया जा रहा है। भारत सरकार ने वस्त्र उद्योग के लिए 7 पीएम मित्र पार्क स्थापित करने को मंजूरी दी थी। पीएम मित्र पार्क भारत को वस्त्र विनिर्माण और निर्यात के लिए वैश्विक केंद्र बनाने के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह विश्व स्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में मदद करेगा, जो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सहित बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करेगा और इस क्षेत्र में नवाचार और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करेगा।

प्रधानमंत्री महाराष्ट्र सरकार की “आचार्य चाणक्य कौशल विकास केंद्र” योजना का शुभारंभ करेंगे। 15 से 45 वर्ष की उम्र के युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए राज्य भर के प्रसिद्ध कॉलेजों में कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और रोजगार के विभिन्न अवसरों तक पहुंच सकें। राज्य भर में लगभग 1,50,000 युवाओं को हर साल कौशल विकास प्रशिक्षण मुफ्त मिलेगा।

प्रधानमंत्री “पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर महिला स्टार्टअप योजना” का भी शुभारंभ करेंगे। इस योजना के तहत महाराष्ट्र में महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप को शुरुआती चरण में सहायता दी जाएगी। योजना के तहत 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत कुल प्रावधानों का 25 प्रतिशत पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा, जैसा कि सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया गया है। इससे महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप को आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनने में मदद मिलेगी।

गाय ने दिया दो सिर वाले बछड़े को जन्म

0

मैंगलोर: मुल्की तालुक के किन्निगोली क्षेत्र में एक दुर्लभ घटना सामने आई है, जहां एक गाय ने दो सिर वाले बछड़े को जन्म दिया. दमस कट्टे दुजलागुड़ी निवासी जयारामा जोगी की गाय ने यह अद्वितीय बछड़ा जन्मा है. बछड़े का शरीर एक है, लेकिन उसके दो सिर हैं. दोनों सिर आपस में जुड़े हुए हैं और कुल चार आंखें हैं, जिनमें से बीच की दो आंखें काम नहीं कर रही हैं, जबकि बाकी दो आंखें सामान्य रूप से काम कर रही हैं.

खड़े होने में असमर्थ है बछड़ा
यह बछड़ा अभी खड़ा होने में असमर्थ है, इसलिए इसे बच्चों को दी जाने वाली बोतल से दूध पिलाया जा रहा है. गाय का यह दूसरा बछड़ा है और इस बार उसने मादा बछड़े को जन्म दिया है. परिवार के लोग मादा बछड़े के जन्म से ज्यादा इस अनोखे बछड़े की सेहत को लेकर चिंतित हैं.

सिर का वजन बन रहा बछड़े के लिए समस्या
बछड़ा खड़ा होने का प्रयास कर रहा है, लेकिन उसके सिर का वजन शरीर से अधिक होने के कारण वह संतुलन नहीं बना पा रहा. इसके अलावा, वह सीधे गाय का दूध नहीं पी पा रहा है, इसलिए घरवाले उसे बोतल के जरिए दूध पिला रहे हैं.

क्या कहते हैं पशु चिकित्सक
पशु चिकित्सक ने बछड़े की जांच की और फिलहाल उसे स्वस्थ बताया है, लेकिन आगे चलकर उसकी स्थिति में बदलाव आ सकता है. डॉक्टर का कहना है कि बछड़े का जीवन पूरी तरह से देखभाल पर निर्भर करेगा.

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के किसानों के लिए दी सौगातें

0

बिहार के कृषि मंत्री श्री मंगल पांडे की केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक

बिहार के कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाने एवं किसानों की सुविधा के लिए बिहार में खुलेगा एपीडा ऑफिस

हाईब्रीड-उन्नत बीजों हेतु केंद्रीय कृषि मंत्रालय देगा सहयोग, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में अधिक राशि

बिहार में कृषोन्नति योजना के लिए अच्छे परफार्मेंस के आधार पर अधिक राशि के आवंटन के निर्देश

आईसीएआर के क्षेत्रीय मक्का अनुसंधान व बीज उत्पादन केंद्र को बनाया जाएगा अत्याधुनिक

लीची व शहद के किसानों की सहायता के लिए निर्देश, एनआरसी मखाना का होगा सशक्तिकरण

New Delhi – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज बिहार के किसानों के लिए अनेक सौगातें दी। बिहार के कृषि मंत्री श्री मंगल पांडे की केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ कृषि भवन, दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में किसान हितैषी निर्णय लिए गए।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में, बिहार के कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाने और किसानों की सुविधा-सहूलियत के लिए बिहार स्थित कृषि भवन में एपीडा का ऑफिस खोलने के निर्णय पर एपीडा के सीएमडी द्वारा सहमति व्यक्त की गई। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार में किसानों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हरसंभव उपाय किए जा रहे हैं। इसके तहत उन्होंने हाईब्रीड-उन्नत बीजों के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा सहयोग प्रदान करने के निर्देश भी दिए। साथ ही, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में अधिक आवंटन के लिए बिहार की मांग पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल दिशा-निर्देश दिए, साथ ही इस योजना की बिहार के लिए दूसरी किश्त जारी कर दी गई।

 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि बिहार का कृषि क्षेत्र में अच्छा परफार्मेंस है, इस आधार पर कृषोन्नति योजना के लिए अधिक राशि के आवंटन के लिए भी उन्होंने बैठक में ही निर्देशित किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के बिहार स्थित क्षेत्रीय मक्का अनुसंधान व बीज उत्पादन केंद्र को आवश्यकतानुरूप अत्याधुनिक बनाया जाएगा, जिसके लिए श्री शिवराज सिंह ने अधिकारियों को मार्गदर्शन दिया। साथ ही,  लीची के लिए प्रसिद्ध बिहार में लीची एवं शहद उत्पादक किसानों की सहायता के लिए भी उन्होंने दिशा-निर्देश प्रदान किए। इसके साथ ही एनआरसी मखाना का सशक्तिकरण करने का निर्णय लिया गया। बिहार के किसानों को इन सबसे काफी लाभ होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में कृषि एवं किसान कल्याण के लिए केंद्र सरकार द्वारा अनेकानेक कदम उठाए जा रहे हैं, इसी कड़ी में बिहार राज्य के किसानों के लिए भी हरसंभव कदम उठाए गए है।

 

गया : जहां भगवान विष्णु स्वयं पितृ देवता के रूप में करते हैं निवास* 

0
(कुमार कृष्णन-विनायक फीचर्स)
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का खास महत्व है। पितृपक्ष में पितरों की शांति के लिए श्राद्ध कर्म, तर्पण विधि और दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। इन दिनों में गया तीर्थ का महत्व भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि बिहार के गया तीर्थ में पितरों की शांति के लिए तर्पण विधि और पिंडदान किया जाए तो सात पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है। गया जिला प्रशासन इस मेले के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियों में जुट जाता है। इस समय  देश के अलग-अलग राज्यों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों की संख्या में तीर्थयात्री गया आ​ते हैं।
गया तीर्थ का हिंदू धर्म में काफी महत्व है और यह बौद्ध धर्म की आस्था का भी प्रमुख स्थल है। यहां देशभर से लोग पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म और पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि यहां पिंडदान और श्राद्ध करने से आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। यहां केवल देश से नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। कहा जाता है कि भगवान राम और माता सीता ने यहां राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था।
वायु पुराण में गया तीर्थ के बारे में बताया गया है कि
 *ब्रह्महत्या सुरापानं स्तेयं गुरुः अंगनागमः, पापं तत्संगजं सर्वं गयाश्राद्धाद्विनश्यति।*
अर्थात गया में श्राद्ध कर्म करने से ब्रह्महत्या, स्वर्ण की चोरी आदि जैसे महापाप नष्ट हो जाते हैं। पितृ पक्ष में गया में पितरों का श्राद्ध-तर्पण करने से व्यक्ति पितृऋण से मुक्त हो जाता है क्योंकि भगवान विष्णु स्वयं पितृ देवता के रूप में गया में निवास करते हैं इसलिए इस स्थान को पितृ तीर्थ भी कहा जाता है। देशभर में श्राद्ध कर्म करने के लिए 55 स्थानों को महत्वपूर्ण माना गया है लेकिन गया तीर्थ का स्थान सर्वोपरि माना गया है।
पुराणों में बताया गया है कि प्राचीन शहर गया में भगवान विष्णु स्वयं पितृदेव के रूप में निवास करते हैं।वायु पुराण,गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण में भी गया शहर का महत्व बताया गया है। इस तीर्थ पर पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है इसलिए गया को मोक्ष की भूमि अर्थात मोक्ष स्थली कहा जाता है। गया शहर में हर साल पितृपक्ष के दौरान  मेला लगता है, जिसे पितृपक्ष का मेला भी कहा जाता है। गया शहर हिंदुओं के साथ साथ बौद्ध धर्म के लिए भी पवित्र स्थल है। बोधगया को भगवान बुद्ध की भूमि भी कहा जाता है। यहां पर बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने अपनी शैली में यहां कई मंदिरों का निर्माण करवाया है।
गया तीर्थ में पितरों की आत्मा की शांति के लिए फल्गु नदी के तट पर ही पिंडदान किया जाता है। फल्गु नदी के तट पर विष्णु पद नाम का एक मंदिर है और मंदिर के पास ही अक्षयवट है, यहीं पूर्वजों के नाम का पिंडदान किया जाता है। फल्गु नदी आगे चलकर यह गंगा नदी में मिल जाती है। इस नदी का वर्णन वायु पुराण में भी देखने को मिलता है। बताया जाता है कि इस नदी को माता सीता का शाप भी लगा है, इस वजह से यहां पानी धरती के अंदर से बहता है। इसलिए फल्गु नदी को सलिला भी कहा जाता है। सबसे पहले इस नदी के तट पर ब्रह्माजी ने गया को श्रेष्ठ तीर्थ मानकर यहां यज्ञ किया था। तभी से गया में श्राद्ध और पिंडदान के कार्य आरंभ हुए। गया में श्राद्ध करने के बाद कुछ शेष नहीं रह जाता है। इसके बाद भगवान राम और पांडवों ने भी इस नदी में श्राद्ध कर्म किए हैं।
गया में भगवान विष्णु के पदचिह्नों पर मंदिर बना है। जिसे विष्णुपद मंदिर कहा जाता है। पितृपक्ष के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुटती है। इसे धर्मशिला के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि पितरों के तर्पण के पश्चात इस मंदिर में भगवान विष्णु के चरणों के दर्शन करने से समस्त दुखों का नाश होता है एवं पूर्वज पुण्यलोक को प्राप्त करते हैं। इन पदचिह्नों का श्रृंगार रक्त चंदन से किया जाता है। इस पर गदा, चक्र, शंख आदि अंकित किए जाते हैं। यह परंपरा भी काफी पुरानी बताई जाती है जो कि मंदिर में अनेक वर्षों से की जा रही है। फल्गु नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के अलावा पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरण चिह्न ऋषि मरीची की पत्नी माता धर्मवत्ता की शिला पर है। राक्षस गयासुर को स्थिर करने के लिए धर्मपुरी से माता धर्मवत्ता शिला को लाया गया था, जिसे गयासुर पर रख भगवान विष्णु ने अपने पैरों से दबाया। इसके बाद शिला पर भगवान के चरण चिह्न स्थापित हो गए। माना जाता है कि विश्व में विष्णुपद ही एक ऐसा स्थान है, जहां भगवान विष्णु के चरण का साक्षात दर्शन कर सकते हैं।
विष्णुपद मंदिर सोने को कसने वाले पत्थर कसौटी से बना है, जिसे जिले के अतरी प्रखंड के पत्थरकट्‌टी से लाया गया था। इस मंदिर की ऊंचाई करीब सौ फीट है। सभा मंडप में 44 पिलर हैं। 54 वेदियों में से 19 वेदी विष्णपुद में ही हैं, जहां पर पितरों के मुक्ति के लिए पिंडदान होता है। यहां साल भर पिंडदान होता है। यहां भगवान विष्णु के चरण चिन्ह के स्पर्श से ही मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं।
विष्णुपद मंदिर के ठीक सामने फल्गु नदी के पूर्वी तट पर स्थित है सीताकुंड। यहां स्वयं माता सीता ने महाराज दशरथ का पिंडदान किया था। पौराणिक काल में यह स्थल अरण्य वन जंगल के नाम से प्रसिद्ध था। भगवान श्रीराम, माता सीता के साथ महाराज दशरथ का पिंडदान करने आए थे, जहां माता सीता ने महाराज दशरथ को फल्गु जल में बालू का पिंड अर्पित किया था, जिसके बाद से यहां बालू से बने पिंड देने का महत्व है।
विष्णुपद मंदिर के शीर्ष पर 50 किलो सोने का कलश और 50 किलो सोने की ध्वजा लगी है। गर्भगृह में 50 किलो चांदी का छत्र और 50 किलो चांदी का अष्टपहल है, जिसके अंदर भगवान विष्णु की चरण पादुका विराजमान है। इसके अलावा गर्भगृह का पूर्वी द्वार चांदी से बना है। वहीं भगवान विष्णु के चरण की लंबाई करीब 40 सेंटीमीटर है।  18 वीं शताब्दी में महारानी अहिल्याबाई ने मंदिर का जीर्णोद्वार कराया था, लेकिन मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु के चरण सतयुग काल से ही है।
गया तीर्थ में पितरों का श्राद्ध और तर्पण किए जाने का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। पुराणों के अनुसार, गयासुर नाम के एक असुर ने घोर तपस्या करके भगवान से आशीर्वाद प्राप्त कर लिया। भगवान से मिले आशीर्वाद का दुरुपयोग करके गयासुर ने देवताओं को ही परेशान करना शुरू कर दिया। गयासुर के अत्याचार से दु:खी देवताओं ने भगवान विष्णु की शरण ली और उनसे प्रार्थना की कि वह गयासुर से देवताओं की रक्षा करें। इस पर विष्णु ने अपनी गदा से गयासुर का वध कर दिया। बाद में भगवान विष्णु ने गयासुर के सिर पर एक पत्थर रख कर उसे मोक्ष प्रदान किया।
वरीय पुलिस अ​धीक्षक आशीष भारती के अनुसार इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विष्णुपद मंदिर एरिया, रेलवे स्टेशन, प्रेतशिला और बोधगया एरिया में जगह-जगह पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। इसके अलावा, महत्वपूर्ण जगहों पर 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की निगरानी के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां से पुलिस हर गतिविधि पर नजर रखेगी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रामशिला मोड़, उत्तर मानस टीओपी, पिता महेश्वर जाने वाले मार्ग पर, अंदर गया टीओपी, चांदचौरा से विष्णुपद जाने वाले मार्ग पर, गया कुपवेदी, बंगाली आश्रम, अक्षयवट तीन मुहानी, बाटा मोड़, गया कॉलेज खेल परिसर, मुन्नी मस्जिद मोड़, बाईपास, छोटकी नवादा, घुघरीटांड़ हनुमान मंदिर बाईपास पटना-गया रोड, चांदचौरा पूर्वी छोर, नारायण चुआं मोड़ सहित 27 जगहों पर बैरिकेडिंग की जाएगी।(विनायक फीचर्स)

पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर मंगेशकर परिवार की ओर से एक अनोखा उपहार 

0
मुंबई (अनिल बेदाग) : माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर, दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान ने एक असाधारण संगीत कार्यक्रम “विश्वशांति दुत – वसुधैव कुटुंबकम” प्रस्तुत किया।  मोदी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत में विश्वास करते हैं यानी पूरी दुनिया एक परिवार है।  ब्रह्माण्ड को एक मानने की उनकी अभिव्यक्ति असाधारण है।  उनकी अभिव्यक्ति को दिव्य स्वरों एवं काव्य छंदों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
 वसुधैव कुटुंबकम सभी देशों और नागरिकों को सभी सीमाओं के पार शांति के मार्ग पर एकजुट करने का एक प्रयास है। पद्मश्री पंडितजी हृदयनाथ मंगेशकर और उषा मंगेशकर द्वारा प्रस्तुत यह भव्य स्वरांजलि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सद्भाव के अमर संदेश का एक प्रमाण है।  आदिनाथ मंगेशकर और निसर्ग पाटिल द्वारा परिकल्पित, इस परियोजना में रूपकुमार राठौड़ की मंत्रमुग्ध कर देने वाली संगीत रचना शामिल हैं।
कवि डाॅ.दीपक वज़े के स्वरांजलि के अवसर पर  प्रेरक शब्द और पद्मश्री शंकर महादेवन और निसर्ग पाटिल की जादुईआवाज़ें एक साथ आईं।  इन सभी ने मिलकर दुनिया को वैश्विक एकता का संदेश दिया है। इस त्योहार की भावना यह है कि पीएम मोदी देशों के बीच शांति और एकता स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”  भविष्य में विश्व के सभी मनुष्यों को एक होना चाहिए।  विभाजन को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन वसुधैव कुटुंबकम पर विश्वशांति दूत संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया जो एक संगीत कार्यक्रम से कहीं बढ़कर है.  इस कार्यक्रम से पता चला कि संगीत सभी समस्याओं का समाधान है और संगीत का उपयोग दुनिया को एक साथ लाने के लिए किया जा सकता है।
आदिनाथ मंगेशकर और निसर्ग पाटिल का सहयोग, रूपकुमार राठौड़ का संगीत, डॉ.  दीपक वज़े की काव्य प्रतिभा और पद्मश्री शंकर महादेवन और निसर्ग पाटिल के गायन ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।  इस पहल का बीजेपी नेता आशीष शेलार और हितेश जैन ने समर्थन किया है.  यह संगीत समारोह विश्व में शांति की आवश्यकता को उजागर करने के लिए है।  यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान करता है, जिन्होंने पूरी दुनिया को एक साथ लाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, यह सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम नहीं है बल्कि पूरी दुनिया को एक सूत्र में जोड़ने का एक पवित्र क्षण है, शांति का बंधन, भारत की सबसे बड़ी प्रतिभा वसुधैव। विश्व शांति दूत अपनी कलात्मकता के माध्यम से कुटुंबकम के सार को दर्शाते हैं।