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Sagar: गोचर भूमि से अतिक्रमण हटवाने की मांग

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मंगलवार के दिन सागर कलेक्ट्रेट में गले में कागजों की माला पहनकर कुछ लोग पहुंचे। इन कागजों में उनकी मांगें लिखी हुई थी जो ज्ञापन के तौर पर वह कलेक्टर को देने आए थे। इन लोगों के ज्ञापन देने का यह तरीका लोगों को इनके प्रति आकृष्ट कर रहा था। ज्ञापन देने आए लोगों से पूछने पर उन्होंने बताया कि वह सब गौ सेवक है।

सागर कलेक्ट्रेट में प्रति मंगलवार जनसुनवाई का आयोजन किया जाता है। मंगलवार को इस जनसुनवाई में सागर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए गौ सेवक अपने अपने गले में ज्ञापनों की माला पहनकर ज्ञापन देने कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में उल्लेख करते हुए कहा कि संपूर्ण मध्यप्रदेश में सभी शहरों और गांवों में गौचर भूमि हैं, जिसपर भू-माफियाओं का कब्जा है। उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाना चाहिए, क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संपूर्ण मध्यप्रदेश की गोचर भूमि का अतिक्रमण हटाने का आदेश किया था, परन्तु महीनों बीत जाने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया और ना ही अब तक गौशालाओं की व्यवस्थाओं में कोई सुधार हुआ है।

ड्रोन आधारित अनुप्रयोग व्यापक इस्तेमाल के लिए मछली किसानों तक पहुंचना चाहिए: डॉ. अभिलक्ष लिखी

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मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज कोलकाता स्थित आईसीएआर-सीआईएफआरआई में मत्स्य पालन प्रबंधन संबंधी ड्रोन अनुप्रयोग के क्षेत्र में संस्थान के अनुसंधान एवं विकास की समीक्षा की


डॉ. लिखी ने आईसीएआर-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान में मत्स्य पालन अनुप्रयोग में ड्रोन प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन को देखा

New Delhi –  सरकार के मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आज कोलकाता स्थित आईसीएआर-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई) का मत्स्य पालन प्रबंधन संबंधी ड्रोन अनुप्रयोग के क्षेत्र में इस संस्थान के अनुसंधान एवं विकास की समीक्षा करने के लिए दौरा किया। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिक, राज्य मत्स्य पालन अधिकारी, मछुआरे और मछुआरियां शामिल हुईं। प्रस्तुति के दौरान, राज्यों के मत्स्य पालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, नागर विमानन मंत्रालय, नेफेड, एनसीडीसी, एनईआरएमएआरसी, एसएफएसी, खुदरा विक्रेताओं, स्टार्ट-अप, मत्स्य पालन अधीनस्थ कार्यालयों, राज्य सरकार के अधिकारियों, एफएफपीओ, सहकारी समितियों आदि को वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।

A drone flying over a group of peopleDescription automatically generated

ड्रोन प्रदर्शन के दौरान, डॉ. अभिलक्ष लिखी ने मछली पालकों और मछुआरों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की, उनके अनुभवों, उनकी सफलता की कहानियों और उनके दैनिक कार्यों में आने वाली चुनौतियों को सुना। इस बातचीत ने इस बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान की कि कैसे ड्रोन जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकी उनकी जरूरतों को पूरा कर सकती है, दक्षता में सुधार कर सकती है और मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ा सकती है, साथ ही उन्हें अपनी आकांक्षाओं और चिंताओं को व्यक्त करने के लिए एक मंच भी प्रदान कर सकती है।

A group of people standing around a droneDescription automatically generated

इस मौके पर बोलते हुए, सचिव महोदय ने कहा कि आईसीएआर-सीआईएफआरआई द्वारा शुरू की गई पायलट परियोजना मछली पालन क्षेत्र में नए अवसरों को खोलेगी, जो कम समय और न्यूनतम मानवीय भागीदारी के साथ ताजी मछली के परिवहन के लिए एक प्रभावी और आशाजनक विकल्प प्रदान करेगी और साथ ही मछलियों पर तनाव को कम करेगी। डॉ. लिखी ने कहा कि निजी भागीदारी के साथ ड्रोन प्रौद्योगिकी का उपयोग करके मछली परिवहन पर अनुसंधान और विकास भी उपभोक्ताओं और किसानों को आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली में बेहतर स्वच्छ ताजी मछली उपलब्ध कराने में सक्षम बनाएगा।

उन्होंने कहा कि फरवरी 2024 में 6000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य समृद्धि योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) को स्वीकृति दी गई थी, जिसका उद्देश्य 2025 तक मत्स्य पालन क्षेत्र के सूक्ष्म उद्यमों और छोटे उद्यमों सहित मछली किसानों, मछली विक्रेताओं को कार्य-आधारित पहचान देने के लिए एक राष्ट्रीय मत्स्य पालन डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) बनाकर असंगठित मत्स्य पालन क्षेत्र को औपचारिक रूप देना है। सचिव महोदय ने कहा कि एनएफडीपी के जरिये पीएम-एमकेएसएसवाई संस्थागत ऋण की पहुंच और प्रोत्साहन, जलीय कृषि बीमा की खरीद, सहकारी समितियों को एफएफपीओ बनने के लिए मजबूत करना, ट्रेसबिलिटी को अपनाना, मूल्य-श्रृंखला दक्षता और सुरक्षा तथा गुणवत्ता आश्वासन और रोजगार सृजन करने वाली प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रदर्शन अनुदान को सुगम बनाएगा।

A group of people standing around a drone flyingDescription automatically generated

सचिव महोदय ने आईसीएआर-सीआईएफआरआई और अन्य हितधारकों से ड्रोन आधारित इन अनुप्रयोगों को मछली किसानों तक पहुंचाने के लिए कदम उठाने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि सभी की इन अनुप्रयोगों तक पहुंच हो सके। उन्होंने मत्स्य पालन विभाग से इन सभी मूल्यवान प्रदर्शनों का दस्तावेजीकरण करने और उनको मंत्रालय को भेजने के लिए भी कहा, ताकि उनका इस्तेमाल देश भर के मछली किसानों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए किया जा सके।

इस समीक्षा बैठक में, आईसीएआर-सीआईएफआरआई के निदेशक डॉ बी के दास ने ड्रोन आधारित प्रौद्योगिकियों में संस्थान की उपलब्धियों और प्रगति को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। मत्स्य पालन में ड्रोन प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग पर एक स्टार्ट-अप द्वारा प्रस्तुति भी दी गई।

विभिन्न ड्रोन-आधारित प्रौद्योगिकियों, जैसे स्प्रेयर ड्रोन, फीड ब्रॉडकास्ट ड्रोन और कार्गो डिलीवरी ड्रोन का प्रदर्शन आईसीएआर-सीआईएफआरआई और स्टार्ट-अप कंपनियों द्वारा 100 से अधिक मछुआरों और मछुआरिनों के बीच किया गया।

भारतीय मत्स्य पालन क्षेत्र में जलीय संसाधनों की निगरानी और प्रबंधन में कई चुनौतियां हैं, जो जलीय संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रभावी और टिकाऊ योजना बनाने में बाधा डालती हैं। हालांकि, आधुनिक प्रौद्योगिकियों के लगातार बढ़ते विकास के साथ तालमेल रखने के लिए कृषि प्रणाली में हर दिन सुधार हो रहा है, लेकिन उतरी हुई मछलियों के किफायती उपयोग के लिए व्यवस्थित मछली परिवहन में उचित वैज्ञानिक पद्धति, समय दक्षता और लागत-प्रभावी साधनों का अभाव है, क्योंकि यह हमारे मत्स्य पालन और मछली प्रसंस्करण उद्योगों के समुचित विकास के लिए एक ज़रूरी शर्त है। दूरदराज के मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों से लंबी दूरी तक परिवहन के लिए आवश्यक लंबा समय और हैंडलिंग और संरक्षण की कमी से मछलियों को अपूरणीय क्षति हो सकती है और यहां तक कि वे मर भी सकती हैं, जिससे बाजार में उनकी कीमत कम हो जाती है और किसानों को भारी नुकसान होता है।

हाल के दिनों में, ड्रोन जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकी में दूरदराज के स्थानों पर महत्वपूर्ण सामान पहुंचाने, पहुंच बाधाओं को दूर करने और तेजी से डिलीवरी को सक्षम बनाने की जबरदस्त क्षमता है। मत्स्य पालन उद्योग में ड्रोन प्रौद्योगिकी की क्षमता का पता लगाने के लिए, केंद्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने आईसीएआर-सीआईएफआरआई को “जिंदा मछली परिवहन के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी विकसित करने” संबंधी एक पायलट परियोजना सौंपी है। यह परियोजना आईसीएआर-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई), कोलकाता द्वारा कार्यान्वित की जाएगी, जिसका उद्देश्य 100 किलोग्राम पेलोड वाला ड्रोन डिजाइन करना और विकसित करना है, जो 10 किलोमीटर तक जिंदा मछली ले जा सकेगा।

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देश भर में 500 से अधिक आयुष एसएचएस अभियान चरम पर

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आयुष मंत्रालय ने देश भर में अपनी परिषदों और संस्थानों के साथ मिलकर ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत देश भर में 502 गतिविधियों की शुरुआत की। 17 सितंबर, 2024 को शुरू यह 15 दिवसीय अभियान 1 अक्टूबर, 2024 तक जारी रहेगा। इस अभियान को तीन प्रमुख स्तंभों ‘स्वच्छता में जन भागीदारी’, ‘संपूर्ण स्वच्छता’, और ‘सफाई मित्र सुरक्षा शिविर’ के आधार पर तैयार किया गया है। ‘स्वच्छता में जन भागीदारी’ के तहत मंत्रालय ने अब तक कुल 227 गतिविधियां बनाई हैं, जिनमें जन भागीदारी, जागरूकता बढ़ाने और स्वच्छता को एक साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया गया है। दूसरे स्तंभ ‘सम्पूर्ण स्वच्छता’ के तहत उपेक्षित क्षेत्रों में स्वच्छता के मुद्दों का समाधान करने के उद्देश्य से 90 गतिविधियों को सफलतापूर्वक बनाया गया है। तीसरे स्तंभ ‘सफाई मित्र सुरक्षा शिविर’ के साथ 185 गतिविधियां क्रियान्वयन के अधीन हैं। ये गतिविधियां सफाई कर्मचारियों की कार्य और स्वास्थ्य स्थितियों को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने कहा, “स्वच्छता केवल एक कर्तव्य नहीं है, बल्कि हमारे राष्ट्र के प्रति समर्पण है। प्रत्येक नागरिक में हर कार्य में स्वच्छता को अपनाकर एक स्वस्थ और मजबूत भारत बनाने की शक्ति है। स्वच्छता ही सेवा अभियान के साथ, आइए हम भारत को भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और स्वस्थ बनाने के लिए एकजुट हों।” आयुष मंत्रालय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से शुरू किए गए अभियान के साथ सफलतापूर्वक चल रहा है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में स्वच्छता और सफाई को बढ़ाना है। इस अभियान का विषय ‘स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता’, व्यवहार और सांस्कृतिक बदलावों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

यह अभियान तीन प्रमुख स्तंभों के इर्द-गिर्द बना है, जिनमें से प्रत्येक को अधिक से अधिक सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देने और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से सार्थक प्रभाव डालने के लिए तैयार किया गया है। पहला स्तंभ ‘स्वच्छता में जन भागीदारी’, सार्वजनिक भागीदारी और जागरूकता बढ़ाने पर जोर देता है, जिससे स्वच्छता एक साझा जिम्मेदारी बन जाती है। मंत्रालय ने अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इस स्तंभ के तहत 227 गतिविधियां बनाई हैं। स्वच्छ भारत मिशन के शुभारंभ के बाद से, इसकी सफलता सामूहिक जिम्मेदारी से प्रेरित है, जिसमें प्रत्येक नागरिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दूसरा स्तंभ ‘सम्पूर्ण स्वच्छता’, सम्पूर्ण स्वच्छता पहल के तहत स्वच्छता अभियानों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य उपेक्षित या चुनौतीपूर्ण स्थानों को स्वच्छ और स्वस्थ स्थानों में बदलना है, जिन्हें अक्सर काला धब्बा (ब्लैक स्पॉट) कहा जाता है। इन क्षेत्रों को नियमित सफाई प्रयासों के दौरान प्रबंधित करना आम तौर पर मुश्किल होता है, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण को गंभीर खतरा होता है। अभियान ने इन मुद्दों का समाधान करने के लिए 90 गतिविधियों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

यह अभियान स्थानीय निकायों, विशेष रूप से गांवों में, नागरिकों और भागीदार संगठनों दोनों को संगठित करके बड़े स्वच्छता अभियानों के माध्यम से इन काले धब्बों की पहचान करने और उनसे निपटने के लिए प्रोत्साहित करता है।

तीसरा स्तंभ, ‘सफाई मित्र सुरक्षा शिविर’, सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और तंदुरूस्ती को प्राथमिकता देता है, जिन्हें आमतौर पर सफाई मित्र के रूप में जाना जाता है। उनके प्रयासों में सहयोग करने के लिए, उनकी कार्य स्थितियों में सुधार के लिए 185 गतिविधियां तैयार की गई हैं। निवारक स्वास्थ्य जांच की पहल के तहत, यह सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे कि सफाई मित्रों और उनके परिवारों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो।

‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान अभी जोरों पर चल रहा है और यह 1 अक्टूबर, 2024 तक चलेगा। आयुष मंत्रालय सभी नागरिकों को इस महत्वपूर्ण पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित करता है, ताकि पूरे देश में सफाई और स्वच्छता की संस्कृति को बढ़ावा मिले।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की 

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PM in a Bilateral Meeting with the President of Ukraine, Mr. Volodymyr Zelenskyy, in New York, USA on September 23, 2024.

New Delhi  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 23 सितंबर 2024 को न्यूयॉर्क में ‘भविष्य के शिखर सम्मेलन’ के अवसर पर यूक्रेन के राष्ट्रपति महामहिम श्री वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठक की।

इन दोनों ही राजनेताओं ने प्रधानमंत्री की हाल की यूक्रेन यात्रा को स्‍मरण किया और द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर सुदृढ़ीकरण पर संतोष व्यक्त किया। यूक्रेन के ताजा हालात के साथ-साथ शांति की राह पर आगे बढ़ने का मुद्दा भी उनकी चर्चाओं में प्रमुखता से शामिल हुआ।

प्रधानमंत्री ने कूटनीति और संवाद के साथ-साथ समस्‍त हितधारकों के बीच जुड़ाव के माध्यम से भी युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में भारत के स्पष्ट, सुसंगत और रचनात्मक दृष्टिकोण को दोहराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत युद्ध का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार हरसंभव सहायता मुहैया कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

पिछले लगभग तीन महीनों में इन दोनों ही राजनेताओं के बीच यह तीसरी बैठक थी। दोनों ही राजनेताओं ने पारस्‍परिक संपर्क निरंतर बनाए रखने पर सहमति जताई।

सीडीओ ने अकमा गौ आश्रय स्थल का किया निरीक्षण

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अयोध्या। अमानीगंज क्षेत्र के अकमा गोवंश आश्रय स्थल का मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के स्वाति शर्मा ज्वॉइटं मजिस्ट्रेट/उपायुक्त स्वतः रोजगार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, उपायुक्त श्रम रोजगार, खंड विकास अधिकारी अमानीगंज एवं संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी उपस्थित थे। सीडीओ ने उपस्थित संबंधित अधिकारी को अभियान चलाकर गोवंश आश्रय स्थल को शीघ्र संचालित कराने एवं क्षेत्र में भ्रमण कर रहे गोवंशो को पड़कर संरक्षित कराने का निर्देश दिया। भूसा चारा इत्यादि की व्यवस्था कराने व खाली पड़ी जमीन पर हरे चारे की बुवाई कराने को कहा।

सीडीओ ने प्राथमिक विद्यालय अकमा का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय शिक्षक उपस्थित थे। बच्चों की उपस्थिति पंजिका पर चढ़ाई गई हाजिरी में कमी तथा विद्यालय परिसर व शौचालय में साफ-सफाई नहीं पायी गयी। मध्यान भोजन में दाल, चावल परोसा गया था, जिसकी गुणवत्ता में सुधार लाने के निर्देश दिए गए। मल्टीपल हैंड वॉश यूनिट बंद पाई गई, जिसे क्रियाशील कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही विद्यालय में साफ-सफाई व पुताई कराने के भी निर्देश दिये।

 खण्ड विकास अधिकारी एवं पशु चिकित्सा अधिकारी ने हरिग्टनगंज के अस्थायी गौ-आश्रय स्थल अछोरा, निमड़ी, शाहबाबाद ग्राण्ट व मलेथू बुर्जुग, विकासखण्ड तारून में जाना गौशाला, विकासखण्ड मिल्कीपुर में अस्थायी गौशाला भागीपुर, मजनाई, विकासखण्ड सोहावल में देवराकोट, सीवार गौशाला आदि का संयुक्त निरीक्षण किया गया।

विशेष 25 सितम्बर जन्म- दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद दर्शन* 

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(विभूति नारायण ओझा -विभूति फीचर्स)
एकात्म मानववाद मानव जीवन के सम्पूर्ण सृष्टि सम्बन्ध का दर्शन है। एकात्म मानववाद एक ऐसी धारणा है, जो सर्पिलाकार मण्डलाकृति द्वारा स्पष्ट की जा सकती है, जिसके केन्द्र में व्यक्ति, व्यक्ति से जुड़ा हुआ एक घेरा परिवार, परिवार से जुड़ा हुआ घेरा समाज, जाति फिर राष्ट्र, विश्व और फिर अनंत ब्रह्माण्ड को अपने में समाविष्ट किये है। इस अखण्ड मण्डलाकार आकृति में एक घटक में से दूसरे,फिर दूसरे से तीसरे का विकास होता जाता है। सभी एक दूसरे से जुड़कर अपना अस्तित्व साधते हुए एक-दूसरे के पूरक एवं स्वाभाविक सहयोगी हैं। इनमें कोई संघर्ष नहीं है। एकात्म मानववाद में मानव जाति की मूलभूत आवश्यकताओं और सृजित कानूनों के अनुरुप राजनीतिक कारवाई हेतु एक वैकल्पिक सन्दर्भ दिया गया है।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय मानव को विभाजित करके देखने के पक्षधर नहीं थे। वे मानव-मात्र का हर उस दृष्टि से मूल्यांकन की बात करते हैं, जो उसके सम्पूर्ण जीवन काल में छोटी अथवा बड़ी जरुरत के रुप में सम्बन्ध रखता है। विश्व के इतिहास में ‘मानव-मात्र‘ के लिए अगर किसी एक विचार दर्शन ने समग्रता में चिंतन प्रस्तुत किया है तो वो ‘एकात्म मानववाद दर्शन‘ है। उनके अनुसार व्यक्ति शरीर में बुद्धि व आत्मा का एक समुच्चय है। अतः मानव के सन्दर्भ में इन चारों को विभाजित करके नहीं देखा जा सकता है, में परस्पर अंर्तसम्बन्ध हैं। एकात्म मानववाद उनके चिन्तन की एक ऐसी मौलिकता है, जो भारतीय इतिहास, परम्परा, राजनीति और भारतीय अर्थनीति के समावेशी धरातल पर स्थित है।
एकात्म मानववाद मानव में संवेदनशीलता की पुर्नस्थापना का एक सशक्त माध्यम हो सकता है। इसलिए मानववाद जहाँ मानव को सम्पूर्ण सत्ता के केन्द्र में रखता है तो वहीं एकात्म मानववाद मानव मात्र की तात्विक एकता का सिद्धान्त है जो मानव के समग्र विकास का आधार है। उपाध्याय जी का मानना था कि ‘‘भारत में रहने वाला और इसके प्रति ममत्व की भावना रखने वाला मानव समूह एक जन है। उनकी जीवन प्रणाली, कला, साहित्य और दर्शन सब भारतीय संस्कृति है जो राष्ट्रवाद का आधार है। इस संस्कृति में निष्ठा रखे तभी भारत एकात्म होगा।‘‘
भारत में नैतिकता को सिद्धान्तों के अनुसार बदला जाता है, तब हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होते हैं। उपाध्याय जी का मानना है कि ‘‘शिक्षा और संस्कार से ही समाज के जीवन मूल्य बनते और सुदृढ़ होते हैं।‘‘ भारत में हमने अपने समक्ष मानव के समग्र विकास के लिए शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा की आवश्यकताओं की पूर्ति उसकी विविध कामनाओं, इच्छाओं तथा एकताओं की सन्तुष्टि और उसके सर्वांगीण विकास की दृष्टि से व्यक्ति के सामने कर्तव्य रूप में भारतीय संस्कृति में चतुर्विध पुरूषार्थ- धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की कल्पना की  है। पुरूषार्थ का अर्थ उन कर्मों से है जिनसे पुरूषत्व सार्थक है। पुरूषार्थ की कामना मनुष्य में स्वाभाविक होती है और उनके पालन से उसको आनन्द प्राप्त होता है।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय भारत के सबसे तेजस्वी, तपस्वी एवं यशस्वी चिन्तक रहे हैं। उनके चिन्तन के मूल में लोकमंगल और राष्ट्र का कल्याण समाहित है। उन्होंने राष्ट्र को धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का सनातन पुंज बताते हुये राजनीति की नयी व्याख्या की। वह गांधी जी, तिलक और सुभाष की परम्परा के वाहक थे। वह दलगत एवं सत्ता की राजनीति से ऊपर उठकर वास्तव में एक ऐसे राजनीतिक दर्शन को विकसित करना चाहते थे, जो भारत की प्रकृति एवं परम्परा के अनुकूल हो और राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करने में समर्थ हो। अपनी व्याख्या को उन्होंने ‘‘एकात्म मानववाद‘‘ का नाम दिया।
दीनदयाल जी का जन्म 25 सितम्बर 1916 को निम्न मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ। दीनदयाल जी की भारतीय लोकतंत्र में गहरी आस्था थी। उनका मानना था कि लोकतंत्र भारत को पश्चिम की देय नहीं है। भारत की राज्यवधारणा स्वाभाविक रूप से लोकतन्त्रवादी रही है। वे लिखते हैं- ‘‘वैदिक सभा और समिति का गठन जनतंत्रीय आधार पर ही होता था तथा मध्यकालीन अनेक गणराज्य पूर्णतः जनतंत्रीय थे।‘‘ 
भारतीय दर्शन परम्परा प्राचीन काल से ही संघर्ष और द्वन्द की अपेक्षा समरसता को महत्व देती है। जिससे मानव का सम्पूर्ण विकास हो सके। यह व्यवस्था हमारे ऋषि मुनियों ने हजारों वर्ष पहले ही विकसित कर रखी थी। आवश्यकता उसे पुनः लोगों के सामने लाने की है। दीनदयाल जी ने वही कार्य किया जिसे वे एकात्म मानववाद के माध्यम से व्यक्त करते हैं। एकात्म मानववाद मानव जीवन में सामंजस्य स्थापित करके जीवन की समग्र सम्पन्नता एवं भव्यता के मार्ग को दिखाने वाला दर्शन है।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि भारतवर्ष विश्व में सर्वप्रथम रहेगा, तो अपने सांस्कृतिक संस्कारो के कारण। उनके द्वारा स्थापित एकात्म मानववाद की परिभाषा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ज्यादा सामयिक है। उन्होंने कहा था कि मनुष्य का शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा ये चारों अंग ठीक रहेगें तभी मनुष्य को चरम सुख और वैभव की प्राप्ति हो सकती हैं।आज भी उनके द्वारा प्रस्तुत दर्शन शिक्षा की दृष्टि से प्रासंगिक प्रतीत होता है। आज आवश्यकता है कि सरकारें भी दीनदयाल उपाध्याय के इस दर्शन के अनुसार  कार्य करें । (विभूति फीचर्स)

रेल ट्रैक पर बढ़ते हादसे,कहीं बड़ी साजिश के संकेत तो नहीं* 

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(मनोज कुमार अग्रवाल-विनायक फीचर्स)
 हाल ही में उस समय हड़कंप मच गया,जब दिल्ली-मुंबई रेलवे लाइन पर बुरहानपुर जिले के रेल ट्रैक पर सेना की स्पेशल ट्रेन के गुजरते समय दस डेटोनेटर रखे पाए गए।ये घटना 18 सितंबर की है। सागफाटा रेलवे स्टेशन के नजदीक ट्रैक से डेटोनेटर जब्त किए गए ।इस ट्रैक से जब सेना की एक ट्रेन गुजरी तो तेज विस्फोट हुआ।
इसके बाद लोको पायलट ने ट्रेन रोक दी। सूचना मिलते ही रेलवे के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच में जुट गए कि कहीं यह सेना की ट्रेन उड़ाने की साजिश तो नहीं थी ? 18 सितंबर को दोपहर जम्मू-कश्मीर से दक्षिण भारत की ओर जा रही सेना की विशेष ट्रेन के पहियों के नीचे आने से ये सभी डेटोनेटर फटे थे। इससे तेज धमाका हुआ था। पटरी पर डेटोनेटर रखकर सेना की विशेष ट्रेन को रोकने की गंभीर घटना की जांच में रेलवे इंटेलीजेंस, एटीएस, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, आरपीएफ जुट गई हैं।
माना जाता है कि डेटोनेटर रखकर ट्रेन को उड़ाने की साजिश के तहत ये कृत्य किया गया।लोको पायलट की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया।आर्मी की यह स्पेशल ट्रेन जम्मू-कश्मीर से कर्नाटक जा रही थी। रेलवे के अनुसार ये डेटोनेटर ट्रेन को इमरजेंसी के दौरान रोकने में  इस्तेमाल किए जाते हैं। इस मामले में रेलवे के ट्रैकमैन सहित 3 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है।उनसे पूछताछ की जा रही है।जांच एजेंसियां ये जानने का प्रयास कर रही हैं कि ट्रैक पर डेटोनेटर रखने का मकसद क्या था?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेलवे के स्टाफ साबिर की गिरफ्तारी सोमवार (23 सितंबर 2024) को हुई है। उससे राष्ट्रीय जाँच एजेंसी, एटीएस और आरपीएफ पूछताछ कर रही है। डेटोनेटर को पटरी पर रखना कोई साजिश थी या शरारत इसकी भी पड़ताल करने में जाँच एजेंसियाँ जुटी हुई है। साबिर की गिरफ्तारी का संज्ञान रेल मंत्रालय ने भी लिया है। मंत्रालय की तरफ से भी जाँच के आदेश  किए गए हैं। मामला सेना से जुड़ा हुआ है इसलिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
 ताजा जानकारी के अनुसार साबिर पुत्र शब्बीर जो कि गैंग नंबर 14 सागफटा का था, वह उस दिन ड्यूटी से अनुपस्थित था, और घटना वाले दिन ड्यूटी पर उपलब्ध नहीं था। यह रेल संपत्ति की चोरी का मामला है, और इसमें आरोपी ने रेल संपत्ति की चोरी की है। इस मामले में वह सामग्री जो उसका उस समय जिम्मेदार था, उसके पास होनी चाहिए थी, जिसको वह लीगल यूज के लिए दी गई हो। साबिर के द्वारा इसका इस्तेमाल करना गैरकानूनी था। साथ ही इसमें 153 रेलवे एक्ट के तहत जानबूझकर रेल में सफर कर रहे किसी यात्री की सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़ा केस भी दर्ज हुआ है।
 आर्मी स्पेशल ट्रेन के इंजन में डेटोनेटर के टकराने से ब्लास्ट हुआ था। आरोपी ने कोहरा हटाने वाला डेटोनेटर का इस्तेमाल किया था। आरपीएफ  भुसावल के डॉग ‘जेम्स’ ने मौके से सूंघकर आरोपी की शिनाख्त की थी। मामले की जांच एनआइए एटीएस आरपीएफ कर रही है। आरोपी साबीर पिता शब्बीर उम्र 38 वर्ष पदनाम- मेट, यूनिट नंबर 14, रेल पथ विभाग, सागफाटा को गिरफ्तार किया है।
एक अन्य घटना गुजरात के सूरत में हुई। यहां रेलवे ट्रैक से फिश प्लेट और 71 कीज हटाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जांच में पता चला कि इसकी सूचना देने वाला की-मैन ही इसका आरोपी निकला। दरअसल, की-मैन सुभाष कुमार ने कबूला कि उसने प्रमोशन पाने के लिए यह साजिश रची थी।
 चालू वर्ष में रेलवे ट्रैक पर गड़बड़ी कर ट्रेन बेपटरी करने की दर्जनों वारदात सामने आई है । फरवरी 2024 में तमिलनाडु के मदुरै में वांची मनियाची जंक्शन और तिरुनेलवेली जंक्शन के बीच वंदे भारत ट्रेन पर पत्थर फेंके गए, जिसमें 9 खिड़कियों के शीशे टूट गए थे। 12 जुलाई 2024 को पश्चिम बंगाल में दुबराजपुर-चिनियाल सेक्शन के पास रेलवे ट्रैक पर कब्जा और रेलवे ट्रैक तोड़ने की कोशिश की गई, केस में शेख लादेन नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया। पहली अगस्त 2024 को यूपी के लखनऊ डिवीजन के लालगोपालगंज स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर एक साइकिल और गैस सिलेंडर रखा मिला, केस में गुलजार नाम का आरोपी अरेस्ट किया गया।
5 अगस्त 2024 को लखनऊ डिवीजन के लालगोपालगंज स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर गैस सिलेंडर और साइकिल मिली, इस बार गुफरान नाम का आरोपी पकड़ा गया। 17 अगस्त 2024 को यूपी के कानपुर में गोविंदपुरी और भीमसेन के बीच साबरमती एक्सप्रेस के 20 डिब्बे पटरी से उतर गए,मौके से एक पुरानी पटरी का टुकड़ा और लोहे का क्लैंप मिला। 5 अगस्त 2024 को लखनऊ डिवीजन के लालगोपालगंज स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर गैस सिलेंडर और साइकिल मिली, इस बार गुफरान नाम का आरोपी पकड़ा गया।
17 अगस्त 2024 को यूपी के कानपुर में गोविंदपुरी और भीमसेन के बीच साबरमती एक्सप्रेस के 20 डिब्बे पटरी से उतर गए, मौके से एक पुरानी पटरी का टुकड़ा और लोहे का क्लैंप मिला। 18 अगस्त 2024 को मध्यप्रदेश के जबलपुर में गढ़ा के पास रेलवे लाइन पर कुछ लोहे की छड़ें पड़ी मिलीं, शुरुआती जांच में पता चला कि किसी ने रेलवे की छड़ें चुराकर ले जाने की कोशिश की थी। 20 अगस्त 2024 को यूपी के प्रयागराज के पास रेलवे ट्रैक पर बाइक का अलॉय व्हील रखा मिला, ट्रेन संख्या KN2733541 इससे टकराकर रुक गई, पास ही झाड़ियों में एक प्लास्टिक बैग मिला। 20 अगस्त 2024 को भदोहरा रेलवे स्टेशन के पास कॉन्स्टेबल प्रमोद कुमार और मोहम्मद जावेद की डेडबॉडी मिलीं, मर्डर का केस दर्ज किया गया।एजेंसियों ने इसे साजिश माना।
24 अगस्त 2024 को राजस्थान के अजमेर जिले में जवाई बांध और बिरोलिया के बीच रेलवे ट्रैक पर पत्थर रखे मिले। 23 अगस्त 2024 को यूपी के फर्रुखाबाद जिले में कायमगंज- शमशाबाद के बीच रेलवे ट्रैक पर लकड़ी का बड़ा टुकड़ा रखा मिला। 28 अगस्त 2024 को राजस्थान के बारां में छबड़ा गुगोर और भुलोन के बीच रेलवे ट्रैक पर एक बाइक का स्क्रैप रखा मिला,जिससे मालगाड़ी टकरा गई।
30 अगस्त 2024 को तेलंगाना के रंगारेड्डी में लिंगमपल्ली और हफीजपेट स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक पर लोहे की रॉड मिली। 30 अगस्त 2024 को झारखंड के पलामू जिले के डाल्टनगंज और कजरी सेक्शन के बीच रेलवे ट्रैक से कुल 100 पेंड्रोल क्लिप चोरी कर ली गई। 30 अगस्त 2024 को ओडिशा के संबलपुर में बिलासपुर-सुरला रोड स्टेशन के बीच डाउन लाइन ट्रैक के पास रखा PAC स्लीपर टैक से फिसल गया और टेन के फटबोर्ट से उलझ गया। 4 सितंबर 2024 को शिवपुरी-पाडर खेड़ा स्टेशन के बीच बीना-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन पत्थर से टकरा गई, जांच में ट्रैक के दोनों ओर पत्थर के निशान मिले।
4 सितंबर 2024 को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के कुर्दुवाड़ी स्टेशन यार्ड के पास ट्रैक पर एक बड़ा फाउलिंग मार्क स्टोन मिला, जिसके कारण टावर वैगन ट्रैक पर रुक गया। 8 सितंबर को राजस्थान के अजमेर जिले में पट्टियों पर सीमेंट के ब्लॉक डालकर एक मालगाड़ी को पटरी से उतारने की कोशिश की गई।
9 सितंबर 2024 को यूपी के कानपुर में बैरागपुर और उत्तरीपुरा के बीच ट्रैक पर गैस सिलेंडर रखकर कालिंदी एक्सप्रेस को डिरेल करने की साजिश की गई थी। 18 सितंबर 2024 को मध्य प्रदेश के नेपानगर में दिल्ली-मुबंई रेलवे ट्रैक पर डेटोनेटर बिछाए गए। आर्मी अफसरों की ट्रेन को बेपटरी करनी कोशिश की गई।
20 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत में अज्ञात लोगों ने अप लाइन की पटरी से फिश प्लेट और कीज हटा दी थी। उन्हें उसी पटरी पर रख दिया था। 22 सितंबर 2024 को कानपुर में प्रेमपुर स्टेशन पर 5 किलो का खाली सिलेंडर रेलवे ट्रैक पर रखा गया था।
ये सभी वारदात किसी सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दी जा रही है या इसके पीछे किसी आतंकी संगठन का हाथ है?आतंकवादियों द्वारा लोगों का माइंड वाश कर स्लीपर सैल के जरिए किसी बड़ी रेल दुर्घटना को अंजाम देने की साजिश की भी संभावनाएं जताई जा रही हैं। यह सारे सवाल अभी जबाव के इंतजार में हैं। तमाम जांच एजेंसियां इन सवालों के जवाब तलाश रही हैं। (विनायक फीचर्स)

मर्डर थ्रिलर ‘ज़ोरा’ से होगी निर्माता-निर्देशक राजीव राय की धमाकेदार वापसी.

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                ‘त्रिदेव’, ‘विश्वात्मा’, ‘मोहरा’, ‘गुप्त’ जैसी सुपर हिट फिल्मों के निर्माता-निर्देशक राजीव राय की भारतीय फिल्म जगत में धमाकेदार वापसी मर्डर थ्रिलर ‘ज़ोरा’ से होने जा रही है। अपनी नवीनतम फिल्म ‘ज़ोरा’ के मेकिंग की विस्तृत चर्चा करते हुए राजीव राय कहते हैं “मैंने अपनी नयी फिल्म ‘ज़ोरा’ की शूटिंग पूरी कर ली है और अब उसका पोस्ट- प्रॉडक्शन तेज गति से चल रही है जो लगभग पूरा हो चुकी है। लेकिन मेरी यह फिल्म अपनी पिछली फिल्मों से इस मायने में अलग है कि इस बार मेरी इस फिल्म में कोई भी बड़ा नाम या स्टार नहीं है। इसमें चालीस नये चेहरे हैं जिनका चुनाव मैंने उत्तर भारत से किया है और सिर्फ एक गाना है जिसका संगीत विजू शाह ने दिया है। इस फिल्म को मैंने बहुत कम बजट में बनाया है। एक निर्माता-निर्देशक के रूप में एक तरह से मैंने अपने आपको चुनौती दी है कि मामूली बजट होने के बावजूद मैं एक बेहद दिलचस्प फिल्म बनाऊँ जो मेरी अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म साबित हो। फिल्म का बजट भले ही कम है, लेकिन अपने कहानी कहने के अंदाज़ या उसके तकनीकी पहलुओं के साथ मैंने किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया है।
मैंने अपनी यह फिल्म हमेशा की तरह आम दर्शकों के लिए बनायी है जिन्हें आज हमने ‘सिंगल स्क्रीन सिनेमा के दर्शक’ या ‘मास ऑडिएंस’ का नाम दे दिया है। मेरा मानना है कि आज भी मुख्य रूप से देश की आम जनता ही सिनेमा देखने जाती है। आप गौर करें तो पायेंगे कि मैंने कभी भी अपने दौर के टॉप स्टार्स (जैसे कि अमिताभ बच्चन) के साथ काम नहीं किया। जब मैंने ‘त्रिदेव’ के लिए सनी देओल और जैकी श्रॉफ को साइन किया था हालांकि तब वो नामी और कामयाब स्टार थे, पर तब उनकी पिछली कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास सफल नहीं रही थीं। नसीरुद्दीन शाह भी तब ज़्यादातर आर्ट फिल्मों का ही हिस्सा थे। इसके बावजूद फिल्म कामयाब रही। जब मैंने ‘मोहरा’ के लिए अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी को कास्ट किया था, तब वो उभरते हुए सितारे थे। ‘गुप्त’ के लिए मैंने बॉबी देओल को तभी साइन कर लिया था जब उनकी पहली फिल्म ‘बरसात’ की शूटिंग चल रही थी। हालांकि ये सब कलाकार बाद में बड़े स्टार बन गये। मैंने संगीता बिजलानी, अर्जुन रामपाल जैसे सितारों को खोजा और सोनम और दिव्या भारती जैसी उभरती हुई अभिनेत्रियों के कैरियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभायी। इनके अलावा और भी ऐसे कई कलाकार हैं जिन्हें मैंने अपनी फिल्मों में ब्रेक दिया और जिन्होंने बाद में भारतीय फिल्म जगत में अपनी एक अलग जगह बनायी। नयी प्रतिभाएं हमेशा से मेरा ध्यान आकर्षित करती रही हैं और नये लोगों के साथ काम करने में मैंने कभी भी संकोच नहीं किया। ‘ज़ोरा’ भी एक विशुद्ध कमर्शियल मास एंटरटेनर है। इसके स्क्रिप्ट में ज़्यादा गानों की गुंजाइश नहीं थी, इसलिए फिल्म की ज़रूरत के मुताबिक मैंने इसमें सिर्फ एक ही गाना शामिल किया है। इस फिल्म की मेकिंग में मैंने किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया है। यह एक दमदार, स्टाइलिश और मनोरंजक फिल्म है। मुझे यकीन है, ‘ज़ोरा’ दर्शकों को बहुत पसंद आएगी।”
              अस्सी और नब्बे के दशक में, निर्माता-निर्देशक राजीव राय का नाम और उनका बैनर त्रिमूर्ति फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड एक ताकत थी। कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों के निर्माता निर्देशक राजीव राय की फिल्मों का अपना एक अलग फॉर्मूला होता था-चटपटे डायलॉग्स, दो-तीन हीरो-हीरोइन्स, ज़बरदस्त गन फाइट्स, शानदार फोटोग्राफी, साउंड इफेक्ट्स, बड़े-बड़े तड़कीले-भड़कीले सेट्स, हेलिकॉप्टर शॉट्स और हिट गाने यानी आम दर्शकों के लिए मनोरंजन का भरपूर मसाला, यही वजह थी कि जब भी उनकी कोई फिल्म रिलीज़ होती थी, तो दर्शक उसे देखने के लिए टूट पड़ते थे लेकिन फिर परिस्थितियों और कुछ व्यक्तिगत कारणों से राजीव ने एकाएक फिल्में बनाना बंद कर दिया और विदेश में जा कर बस गये। मगर फिर देश के प्रति प्रेम जागा, अपनी बेमिसाल क्रिएटिविटी और हिंदी फिल्मों के प्रति जुनून ने उन्हें भारत लौटने पर मजबूर कर दिया। प्रतिफल स्वरूप उनकी स्टाइलिश, मनोरंजक, सस्पेंस मर्डर थ्रिलर ‘ज़ोरा’ सिनेदर्शकों तक पहुंचने वाली है। इस फिल्म को लेकर निर्माता-निर्देशक राजीव राय इन दिनों काफी उत्साहित हैं और इस फिल्म को इस साल के अंत तक प्रदर्शित करने के प्रयास में लगे हुए हैं।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

जगद्‌गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में गौ रक्षा के मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा है

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Lucknow News: जगद्‌गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwaranand Saraswati) सोमवार को लखनऊ पहुंचे. यहां उन्होंने कहा कि, हिंदूओ के साथ धोखा हो रहा है, हिंदुओ का वोट लेकर हिंदुओं के साथ धोखा किया जा रहा है. उन्होंने गौ हत्या बंद कराने के लिए कानून बनाने की मांग की है और कहा कि इसके लिए ही मैं मठ छोड़कर निकला हूं. यूपी के मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ हैं, इसके बाद भी यूपी सबसे ज्यादा गौ मांस का निर्यात कर रहा है. मेरी यात्रा का विरोध सबसे पहले बीजेपी ने ही किया. मैं सभी प्रदेशों की यात्रा करूंगा गौ-ध्वज फहराऊंगा.

जगद्‌गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि, सरकार को हर हाल गौ रक्षा कानून बनाना होगा. मैंने रामलला के सामने संकल्प लिया है कि जब तक गौ रक्षा का कानून नहीं बन जाता तब तक दर्शन नहीं करूंगा. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बीजेपी सरकार पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि, बीजेपी ने गौ हत्या के मुद्दे पर हिंदुओं के साथ छल किया है. तिरुपति बालाजी के लड्डू प्रसाद में मछली का तेल, जानवरों की चर्बी मामले पर कहा कि, बहुत लोगों ने प्रसाद खाया है और लोगों के मन में गिलानी है इसे लेकर उनके लिए बता दिया है कि जो हमारी त्वचा में पाप चला गया है. अगर हम पंचगव्य का परासन कर ले तो वो पाप नष्ट हो जाता है. कहा कि हिंदुओं की पवित्रता अशुद्ध करने के लिए इस तरह के षड्यंत्र हो रहे हैं. इसलिये भी गाय जरूरी है.

कब जाएंगे रामलला के दर्शन करने? 
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दोहराया कि, गऊ माता के लिए जो खड़ा होगा, हिंदुओं को उसी को समर्थन देना है. उन्होंने कहा कि ‘हम किसी पार्टी की लुटिया डुबोने का काम नहीं कर रहे, बल्कि कसाई पार्टी की लुटिया जरूर डुबोएंगे.’ हमने गंगा माता के बारे में, गऊ माता के बारे में राष्ट्रपति से, प्रधानमंत्री से समय मांगा है लेकिन हमें समय नहीं देते हैं. इसलिए हम जनता के पास जा रहे हैं, क्योंकि असली सरकार जनता है. रामलला के दर्शन करने जाने के सवाल पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि, दर्शन के लिए हमने पहले कहा था कि हम राष्ट्र माता का दूध सोने के कटोरे में ले जाकर जाएंगे तब श्रीराम को मुंह दिखाएंगे. गौ माता आज राष्ट्र माता घोषित हो जाएं, हम आज लखनऊ से वापस जाकर रामलला के दर्शन करेंगे.

मेहनतकश किसानों के प्रति नीति और नजरिया बदलना आवश्यक*

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जीतू पटवारी-
मध्य प्रदेश में बीती 10 सितंबर से किसान आंदोलनरत हैं। किसानों का गुस्सा  सरकार के प्रति है। कांग्रेस की किसान न्याय यात्रा का नेतृत्व करते हुए मैं प्रदेश के कई जिलों में हजारों किसानों से प्रत्यक्ष मिल चुका हूं। आक्रोश के ये स्‍वर  सरकार की नीतियों के विरोध में हैं। सोयाबीन के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में शामिल मध्य प्रदेश में इस साल किसानों को औसत कीमत वही मिल रही है, जो दस साल पहले थी। केंद्र और राज्य सरकार ने आंशिक मूल्‍य वृद्धि का खेल जरूर खेला, लेकिन उससे भी किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ। आज भी किसानों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खेती की लागत 4,000 रुपए प्रति क्विंटल के करीब है, तब फसल का मूल्य 3,800 रुपए क्‍यों दिया जा रहा है? मध्य प्रदेश में सोयाबीन की नई फसल फिर सबूत के रूप में सामने है कि किसानों की आय दोगुनी करने का बीजेपी का वादा झूठा है। 
मध्‍यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की आय दोगुना करने का सरकारी वचन बार-बार, लगातार दोहराया है। बीजेपी ने गेहूं एवं धान के लिए क्रमशः 2,700 रुपए और 3,100 रुपए एमएसपी देने का वादा किया था, लेकिन यह सिर्फ किसानों से झूठ बोलकर, उनके वोट लेने की नौटंकी थी। 2014 से 2024 के बीच मोदीजी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी सरकार ने किसानों की स्थिति सुधारने के जितने दावे किए, किसानों की बदहाली उतनी ही बढ़ती गई। देश का मेहनतकश किसान यह जानता है कि प्रधानमंत्री ने 2014 में सत्ता में आते ही “दोगुनी किसान आय” का लक्ष्य रखा। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की योजना को राष्ट्रीय एजेंडा बताया। लेकिन, किसी भी कोशिश और योजना का सीधा लाभ किसानों को नहीं मिला। कृषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर भी सवाल उठते रहे, इसलिए कई बार किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचना पड़ी।
 *किसानों के आंदोलन ने बताया खेती का सच* 
2017 और 2020 के दौरान हुए बड़े किसान आंदोलन हुए थे। 2017 में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में किसान आंदोलन हुए, जहां किसानों ने कर्ज माफी और उचित दाम की मांग की। 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए किसानों के आंदोलन ने देश को हिला कर रख दिया। इन कानूनों के तहत कृषि बाजार में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की बात थी। लेकिन, किसानों ने आशंका जताई कि इससे एमएसपी प्रणाली खत्म हो जाएगी और उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलेगा। इस आंदोलन के दौरान हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहे, जिसके चलते सरकार को अंततः कानूनों को वापस लेना पड़ा। 2019 में केंद्र सरकार ने किसानों की आय में सुधार के लिए पीएम-किसान योजना की शुरुआत की। किसानों ने तर्क के साथ कहा कि यह राशि पर्याप्त नहीं है। इतने कम धन में किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
 *कर्ज का संकट, न्यूनतम समर्थन मूल्य का झूठ* 
2014 से 2024 के बीच किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या कर्ज की थी। भाजपा शासित राज्‍यों में कर्ज माफी का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो सका। इससे किसान आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ीं। कर्ज का पुराना बोझ भी किसानों को परेशान करता रहा। 2018 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2018 के बीच हर साल औसतन 10,000 से अधिक किसान आत्महत्याएं हुईं। किसान संगठनों ने सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी नीतियां छोटे और सीमांत किसानों के बजाय बड़े व्यापारियों और कंपनियों को लाभ पहुंचाती हैं। एमएसपी में बढ़ोतरी का दावा तो सरकार द्वारा किया गया, लेकिन किसानों की शिकायत रही कि फसलें एमएसपी पर बिकने के बजाय व्यापारियों द्वारा कम कीमतों पर खरीदी जाती रहीं। विशेष रूप से गेहूं, चावल, दाल और गन्ने जैसी प्रमुख फसलों की उचित कीमत न मिलने की शिकायत किसान लगातार करते रहे, लेकिन  सरकारों ने सुनवाई नहीं की।
 *फसल बीमा योजना की चुनौतियां* 
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा देना था। परंतु, इसके क्रियान्वयन में गंभीर समस्याएं सामने आईं। बीमा कंपनियों ने किसानों को मुआवजा देने में देरी की। किसानों को नुकसान के बावजूद सही मुआवजा नहीं मिल पाया। इससे योजना के प्रति किसानों का विश्वास घट गया। मोदी सरकार ने 2014 से 2024 के बीच ग्रामीण सड़कों, बिजली और सिंचाई व्यवस्था में सुधार के कई दावे किए। मीडिया को झूठे प्रमाण देकर बताया गया कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और सौभाग्य योजना से गांवों में बिजली और सड़कों का विस्तार हुआ। परंतु, इनका प्रभाव कृषि उत्पादकता और किसानों से जुड़े लाभ पर अब तक दिखाई नहीं दे रहा है।
 *कृषि कानूनों से कैसे हो सकता था कृषि सुधार?*
क्‍या 2020 में पारित तीन कृषि कानून किसानों की उपज के बेहतर मूल्य और कृषि बाजार को सुधारने के उद्देश्य से लाए गए थे? यह 100% झूठ है! इसीलिए, लाखों किसानों ने विरोध किया और इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया। किसानों का कहना है कि ऐसे कानून निजी कंपनियों को कृषि में अधिक प्रभावी बना देंगे और छोटे किसानों को नुकसान ही होगा। लगभग एक साल तक चले आंदोलन के बाद सरकार ने कानून तो वापस लिए, लेकिन किसानों को लेकर गहरे किस्म की दुर्भावना और घृणा मन में रख ली। तभी ताे यह मामला किसानों और सरकार के बीच संबंधों में बड़ी दरार की तरह देखा गया। इस आंदोलन ने सरकार की किसान नीतियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।
 *कृषि निर्यात और आत्मनिर्भर भारत का झूठ* 
मोदी सरकार ने “आत्मनिर्भर भारत” के तहत कृषि क्षेत्र में निर्यात को बढ़ावा का झूठा दावा किया। कागजों में भारत ने कृषि उत्पादों का निर्यात तो बढ़ाया, लेकिन इसका सीधा लाभ छोटे किसानों को नहीं मिला। बड़े व्यापारी और कृषि-व्यवसायिक कंपनियां ही ज्यादातर लाभान्वित हुईं। सरकार ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया। ई-नाम (नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) जैसी योजनाएं लाई गईं, जिनका उद्देश्य कृषि उत्पादों के ऑनलाइन व्यापार को बढ़ावा देना था। परंतु, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी जागरूकता की कमी के कारण इसका लाभ भी किसानों तक नहीं पहुंच सका। यही सबसे बड़ी परेशानी है कि केंद्र सरकार ने किसान कल्याण के नाम पर झूठा प्रचार तो बहुत किया, लेकिन सच्चाई से मुंह फेर लिया।
 *मप्र में भाजपा के किसान विरोधी 20 साल* 
बात अब केंद्र के साथ राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार को लेकर भी की जानी चाहिए। भाजपा ने जब से मध्य प्रदेश की सत्ता संभाली, तब से लेकर अब तक किसानों के लिए जो नीतियां लागू की गईं, वे ज्यादातर किसान हितैषी कम और किसान विरोधी अधिक साबित हुईं। इनमें सबसे बड़ी समस्या यह रही कि किसानों की आय को बढ़ाने के लिए जो योजनाएं लागू की गईं, वे फाइलों तक ही सीमित रह गईं। किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का सही से निर्धारण नहीं किया गया। जो मूल्य तय किए गए, वे किसानों को लागत ही नहीं दिलवा पाए।
 *किसान आंदोलनों का दमन करने की नीति*
कई बार मध्य प्रदेश के किसानों ने अपने अधिकारों और मांगों के लिए आंदोलन किया। 2017 में मंदसौर का किसान आंदोलन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां किसान अपने उत्पादों के उचित मूल्य की मांग कर रहे थे। भाजपा सरकार ने आंदोलन को पुलिस के जरिए कुचलने की कोशिश की। संघर्ष में कई किसानों की जान चली गई। मध्य प्रदेश के इतिहास की यह सबसे बड़ी घटना भाजपा सरकार की किसान विरोधी मानसिकता दर्शाती है। किसानों की मांग के बावजूद प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, फसल बीमा योजना और अन्य योजनाओं का लाभ अधिकांश किसानों तक नहीं पहुंच सका। भ्रष्टाचार, बिचौलियों और अफसरशाही ने इन योजनाओं को कमजोर कर दिया। कई बार किसानों को प्रीमियम भरने के बावजूद बीमा कंपनियों से सही समय पर मुआवजा नहीं मिला, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो गई। ऋण माफी जैसी योजनाओं का सही से कार्यान्वयन नहीं हो सका। इससे कर्ज दिनोंदिन बढ़ता गया। हालात ऐसे बन गए कि किसानों को आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा।
 *खेती के अधिकारों की आवाज है कांग्रेस की ‘किसान न्याय यात्रा’*
किसानों के प्रति भाजपा सरकार की उदासीनता और गलत नीतियों के खिलाफ मध्य प्रदेश कांग्रेस ने ‘किसान न्याय यात्रा’ शुरू की है। यात्रा का उद्देश्य किसानों की समस्याओं को उजागर करना और उनकी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाना है। कांग्रेस ने इस यात्रा के दौरान न केवल किसानों की समस्याओं और जमीनी कठिनाइयों को समझा, बल्कि उन्हें यह भी बताया कि कैसे खेत-खलिहान के वाजिब हकों को भाजपा सरकार नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं का एक ही उद्देश्य है मध्य प्रदेश के किसानों को न्याय दिलाना और उनकी आय को बढ़ाने के लिए सरकार का ध्‍यान दिलाना।
मध्य प्रदेश कांग्रेस की यह स्पष्ट मान्यता है कि किसानों की हालत सुधारने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाना होगा, ताकि किसानों को उनके उत्पादों का सही मूल्य मिल सके। एमएसपी का निर्धारण इस प्रकार होना चाहिए कि किसान की लागत और एक सम्मानजनक मुनाफे मिल सके। इसके लिए भाजपा सरकार को कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों का पालन करना चाहिए। फसल बीमा योजना में भी सुधार की आवश्यकता है। किसानों को उनकी फसल नुकसान के लिए समय पर मुआवजा मिलना चाहिए। बीमा कंपनियों के द्वारा होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र होना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रीमियम दरें उचित हों। बीमा दावों के निपटान में देरी को कम करने के लिए एक पारदर्शी और डिजिटल प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
 *बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करे सरकार* 
किसानों तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना भी आवश्यक है। इसके लिए सरकार को डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी समाधान अपनाने चाहिए, जिससे किसान सीधे सरकार से जुड़ सकें और योजनाओं का लाभ उठा सकें। किसानों की ऋण माफी योजना को सुदृढ़ करना चाहिए, क्‍योंकि कर्ज माफी के वादे कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं और उनका लाभ छोटे और गरीब किसानों तक नहीं पहुंच पाता। ऋण माफी योजनाओं को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए एक सशक्त प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
मध्य प्रदेश के किसानों की एक बड़ी समस्या जल संकट है। प्रदेश में मानसून के भरोसे कृषि करने वाले किसानों के लिए जल प्रबंधन और सिंचाई सुविधाओं का विकास अत्यंत आवश्यक है। सरकार को नए जल प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा देना चाहिए, जैसे ड्रिप सिंचाई, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और माइक्रो सिंचाई। इसके अलावा, सिंचाई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और देरी को रोकने के लिए एक स्वतंत्र और पारदर्शी निगरानी तंत्र होना चाहिए। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादों के निर्यात को भी प्रोत्साहन देना चाहिए। सरकार को किसानों को निर्यात बाजारों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सहयोग देना चाहिए। इसके लिए कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण को बेहतर बनाना आवश्यक है। लगातार कृषि कर्मण अवार्ड जीतने वाले मध्य प्रदेश के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचारों के बारे में जागरूक करना भी आवश्यक है। कृषि शिक्षा का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक होना चाहिए, ताकि किसानों को नई तकनीकों, उर्वरकों और बीजों के उपयोग के बारे में जानकारी मिल सके। इसके अलावा, कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों को किसानों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, ताकि किसानों को नवीनतम जानकारी और तकनीकी सहायता मिल सके।
यदि सरकार किसानों की समस्याओं को जमीन स्तर पर देखेगी तो उसे अपनी कागजी योजनाएं बदलने में देर नहीं लगेगी। अब आवश्‍यकता नीति और नजरिया बदलने की है, ताकि मेहनतकश किसान को भी जीने का हक मिल सके।
(लेखक मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष हैं।)