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मानसून ने मुंबई को किया पानी-पानी

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School Closed : लौटते हुए मानसून ने मुंबई को एक बार फिर से पानी-पानी कर दिया है. यहां पिछले 24 घंटे से लगातार बारिश हो रही है. जिसके चलते बीएमसी ने सभी स्कूल और कॉलेजों को बंद करने के निर्देश दिए हैं. बीएमसी का यह आदेश सरकारी के साथ सभी प्राइवेट स्कूलों और कॉलेजों पर भी लागू होगा. मौसम विभाग ने आज मुंबई शहर और उसके आसपास के जिलों में बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है.

मुंबई में भारी बारिश का असर लोकल ट्रेन, बस और विमान सेवाओं पर भी देखने को मिला है. रात साढ़े आठ बजे कुर्ला स्टेशन पर ट्रैक पर पानी भरने की वजह से ट्रेन की आवाजाही बंद करनी पड़ी. साथ ही एयरपोर्ट के रनवे पर पानी भरने के चलते 14 उड़ानों का मार्ग बदलना पड़ा.

कृषि एवं किसान कल्याण सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

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 New Delhi    – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीएएंडएफडब्ल्यू) के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (यूएन डब्ल्यूएफपी) के प्रतिनिधियों और संबंधित मंत्रालयों/विभागों के सदस्यों के साथ देश रणनीतिक योजना (सीएसपी) 2023-2027 के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए देश कार्यक्रम सलाहकार समिति (सीपीएसी) की बैठक की अध्यक्षता की।

क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और पोषण में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए, कृषि और किसान कल्याण विभाग और संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। एमओयू के तहत, सीएसपी 2023-27 चार रणनीतिक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करता है जिसमें (i) अधिक प्रभावी और कुशल राष्ट्रीय खाद्य-आधारित सामाजिक सुरक्षा प्रणाली;  (ii) विविध, पौष्टिक और पोषण युक्त खाद्य पदार्थों की खपत में वृद्धि; (iii) महिलाओं की सामाजिक और वित्तीय गतिशीलता को बढ़ाना; और (iv) जलवायु-लचीली आजीविका और खाद्य प्रणालियों के निर्माण के लिए अनुकूल क्षमता को मजबूत करना शामिल है।

देश रणनीतिक योजना के तहत पहलों की प्रगति का समन्वय और समीक्षा करने के लिए, डॉ. देवेश चतुर्वेदी की अध्यक्षता में एक देश कार्यक्रम सलाहकार समिति का गठन किया गया है और संबंधित मंत्रालयों और नीति आयोग के संयुक्त सचिव इसके सदस्य हैं। समिति की वर्ष में कम से कम एक बैठक होती है। यह सीएसपी 2023-27 के तहत सीपीएसी की पहली बैठक थी जिसमें चल रही देश रणनीतिक योजना (सीएसपी) की प्रगति और उपलब्धियों की समीक्षा और चर्चा की गई।

डब्ल्यूएफपी की कंट्री डायरेक्टर सुश्री एलिजाबेथ फॉरे ने समिति को सीएसपी के विभिन्न लक्षित परिणामों की स्थिति के बारे में जानकारी दी।  डब्ल्यूएफपी ने विभिन्न चल रही पहलों के बारे में जानकारी दी, जिनमें असम, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में छोटे किसानों के लिए कृषि में बदलाव और खाद्य सुरक्षा बढ़ाना; मोटे अनाज को मुख्यधारा में लाने के लिए राष्ट्रव्यापी प्रयास; ‘सिक्योर फिशिंग’ ऐप के माध्यम से मछली पकड़ने वाले समुदायों में लचीलापन पैदा करना; सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को अनुकूलित करने की पहल; अनाज एटीएम को प्रदान करने वाली अन्नपूर्ति पहल; स्कूल पोषक उद्यान; और चावल को पोषित करना आदि सम्मिलित है।

डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विभाग और डब्ल्यूएफपी ने खाद्य और पोषण सुरक्षा प्राप्त करने के साझा लक्ष्य से प्रेरित होकर दीर्घकालिक भागीदारी बनाए रखी है। उन्होंने अधिकारियों को मापनीय पहलों की पहचान करने और मंत्रालयों/विभागों के चल रहे कार्यक्रमों में उन्हें शामिल करने के लिए प्रणाली तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने डब्ल्यूएफपी को कृषि क्षेत्र में विशेष रूप से महत्वपूर्ण पहलों और प्रायोगिक कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने और विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा करने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित करने की भी सलाह दी।  उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कार्यक्रमों के पोषण संबंधी परिणामों तक पहुंचने के दौरान हमें भारतीय जनसंख्या के लिए लागू पोषण मानकों को भी देखना चाहिए। विभिन्न अनाजों की मौजूदा पोषण युक्त किस्मों के साथ-साथ लाल और काले चावल और बाजरा की मौजूदा स्थानीय किस्में, जो पौष्टिक हैं, को भी लोकप्रिय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को विभिन्न पहलों में सम्मिलित करने की संभावनाओं का पता लगाने की भी सलाह दी।

बैठक में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास विभाग, पर्यावरण, वानिकी एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, विदेश मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मौसम विभाग और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए रात 11:45 बजे तक 57.03 प्रतिशत मतदान

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए आम चुनाव के दूसरे चरण में रात 11:45 बजे तक लगभग 57.03 प्रतिशत मतदान हुआ। शेष मतदान प्रतिशत को पोलिंग पार्टियों के वापस आने के साथ ही क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों द्वारा अपडेट किया जाता रहेगा और मतदाता प्रतिशत ऐप पर विधानसभा सीट और जिलेवार अद्यतन आंकड़े लाइव उपलब्ध रहेंगे।

रात्रि 11:45 बजे तक जिलावार अनुमानित मतदान प्रतिशत निम्नानुसार है:

चरण-2 में जिलावार अनुमानित मतदाता मतदान (रात 11:45 बजे)

क्रम सं.

ज़िला

एसी की संख्या

अनुमानित मतदाता मतदान प्रतिशत

1

बडगाम

5

62.98

2

गंदेरबल

2

62.51

3

पुंछ

3

73.80

4

राजौरी

5

70.95

5

रियासी

3

74.70

6

श्रीनगर

8

29.81

उपर्युक्त 6 जिले

26

57.03

यहाँ प्रदर्शित आंकड़े क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा सिस्टम में दी जा रही जानकारी के अनुसार है। यह एक अनुमानित आंकड़े हैं, क्योंकि कुछ मतदान केंद्रों (पी.एस.) से डेटा प्राप्त करने में समय लगता है और इस आंकड़े में डाक मतपत्र शामिल नहीं है। प्रत्येक पोलिंग स्टेशन के लिए दर्ज किए गए मतदान का अंतिम वास्तविक लेखा मतदान समाप्ति पर मतदान एजेंटों के साथ फॉर्म 17 सी में साझा किया जाता है।

ट्राई ने एसएमएस ट्रैफिक के लिए व्हाइटलिस्टेड यूआरएल, एपीकेएस या ओटीटी लिंक को अनिवार्य किया

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 26 SEP 2024 New Delhi –  भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 20 अगस्त 2024 को संदेशों में यूआरएल (यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर) के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बड़े कदम के रूप में एक निर्देश जारी किया, जिसमें सभी एक्सेस प्रदाताओं को निर्देश दिया गया कि वे यूआरएल, एपीके (एंड्रॉइड पैकेज किट), या ओटीटी (ओवर द टॉप) लिंक वाले किसी भी ट्रैफ़िक को ब्लॉक करें, जिन्हें व्हाइटलिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। इस निर्देश को 1 अक्टूबर 2024  से लागू किया जाएगा।
यूआरएल युक्त एसएमएस ट्रैफ़िक के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए, ट्राई पंजीकृत प्रेषकों को सलाह देता है कि वे अपने व्हाइटलिस्टेड यूआरएल/एपीके/ ओटीटी लिंक को संबंधित एक्सेस प्रदाताओं के पोर्टल पर तुरंत अपलोड करें। अब तक, 3,000 से अधिक पंजीकृत प्रेषकों ने 70,000 से अधिक लिंक को व्हाइटलिस्टेड करके इस आवश्यकता का अनुपालन किया है। जो प्रेषक नियत तिथि तक अपने लिंक को व्हाइटलिस्टेड नहीं करेंगे, वह यूआरएल/एपीके/ओटीटी लिंक वाले किसी भी संदेश को प्रेषित नहीं कर पाएंगे।
ट्राई की यह पहल उपभोक्ताओं को दुर्भावनापूर्ण लिंक वाले अनचाहे संदेशों से बचाने के लिए बनाई गई है, साथ ही एक पारदर्शी और सुरक्षित संचार प्रणाली को प्रोत्साहन देती है।  इन नए नियमों का पालन करके, एक्सेस प्रदाता और पंजीकृत प्रेषक दोनों ही अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित संदेश वातावरण बनाने में सहायता कर सकते हैं।

ईश्वर का अनुपम उपहार हैं मध्यप्रदेश की नदियां* 

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(श्रीकांत कलमकर-विनायक फीचर्स)
नर्मदा, बेतवा,चम्बल,सोन, कालीसिंध,पार्वती,ताप्ती,माही और ऐसी कई नदियाँ है जो मध्य प्रदेश की पावन भूमि से निकली हैं और दूसरे प्रदेशों में जाकर वहाँ की प्रकृति को हरा-भरा कर रही हैं। ऐसा नहीं है कि ये जहाँ से निकली हैं , वहाँ हरा-भरा नहीं करतीं,मध्यप्रदेश की ये पुण्यसलिलाएं तो जहां जाती हैं वहीं अपनी पवित्र पावन जलधार से सबको संतृप्त और संतुष्ट करती हैं।
मध्य प्रदेश को समृद्ध बनाने वाली इन नदियों में प्रात:स्मरणीय नर्मदाजी तो मध्यप्रदेश की जीवन रेखा कहलाती हैं। इसी तरह चंबल नदी महू के पास जानापाव से निकली है । जानापाव ऋषि परशुराम जी की जन्म स्थली है । यहाँ से चंबल नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। जब चंबल यहाँ से चलती है, तो वर्षा काल में तो यह नदी जल से भरी रहती है, परंतु जैसे ही गर्मी का मौसम आता है ,पूरी तरह से सूख जाती है,फिर इसमें पानी के दर्शन होते हैं औद्योगिक नगरी नागदा में, जहाँ पर इसके ऊपर एक बाँध बना हुआ है और उसमें वर्षा का पानी रोक लिया जाता है,जो पूरे वर्षभर लबालब रहता है।
नागदा के बाद ही,यह नदी अपने पूर्ण स्वरूप में दर्शन देती है। नागदा से आगे इस पर गाँधी सागर में बहुत बड़ा बाँध बना है,जो आजादी के बाद बने हुए बाँधों में सबसे पहले बना था।इससे आगे राजस्थान के रावतभाटा में और कोटा में भी इस पर बाँध बने हुए हैं ,उसके बाद आगे चलकर यह उत्तर प्रदेश में इटावा से आगे और ओरैया के पहले,अपने आपको यमुना नदी में विलीन कर देती है। मध्य प्रदेश में कालीसिंध ,गंभीर ,पार्वती ,क्षिप्रा और अन्य अनेक छोटी-बड़ी सहायक नदियाँ हैं जो इसे वर्षभर जल से भरपूर रखती हैं।
इस नदी का सौभाग्य कहें या ईश्वर की कृपा ! इसके किनारे पर ना तो ज्यादा बड़ा कोई शहर है और ना ही कोई बड़ा धर्म और आस्था का केंद्र,और इसी कारण यह निर्मल स्वच्छ धारा के रूप में बह रही है,कोई शहर या धार्मिक स्थल किसी नदी के किनारे होने के कारण वहाँ शहर की गंदगी का और वर्षभर लगने वाले धार्मिक मेले और आस्था का जमघट लगा रहता है फलस्वरूप नदियों के तट पर प्लास्टिक और  पुराने कपड़ों के ढेर लग जाते हैं और कई तरह की गंदगियाँ इकट्ठी होती जाती हैं। परंतु चंबल अभी भी इससे बची हुई है।
मैं  इसके तटों पर घूमा और रहा हूँ । मुझे इसे करीब से देखने का सौभाग्य मिला है। मैंने इसके सौन्दर्य का रस-पान किया है, इसमें पलने वाले पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं की स्वच्छंदता को महसूस किया है।
जितना मैंने देखा है,उस सम्पूर्ण क्षेत्र में यह नदी ईश्वर की इन संतानों को अपने यहाँ पाल-पोस रही है और स्वच्छ, सुरक्षित खाद्य से भरपूर वातावरण मुहैया करवा रही है। यह भी सच है कि नदियाँ गाती हैं ,उसे सुननेवाले चाहिए। चंबल में भी कल-कल बहते पानी का संगीत सुन सकते हैं ,झरनों की गर्जन-तर्जन है ,पक्षियों का कलरव रुपी सुर और ताल है । इनके मनभावन गीत को सुनने के लिए,बस हमें कान चाहिए ।
यह अपने आपमें हमारे लिए बहुत बड़ी बात है कि ईश्वर का यह अनुपम उपहार ,चंबल नदी मध्यप्रदेश में बह रही है और प्रकृति को संतुलित करने में अपना योगदान दे रही है।
पैंतीस-चालीस हजार वर्ष पूर्व मानव सभ्यता इसके किनारों पर अपना जीवन यापन करती थी, यह सबूत है यहां पर मिल रहे गुफाओं मे बने शैलचित्रों से।इससे प्रतीत होता है कि यहां बहुत ही संपन्न और उन्नतिशील सभ्यता रही होगी।
वर्तमान समय में भी मानव जीवन के लिए  यह अपना अमूल्य योगदान दे रही है।मध्यप्रदेश के लिए तो यह वरदान है ही ,साथ ही राजस्थान को भी हरा भरा कर रही है क्योंकि राजस्थान जैसे सूखे प्रदेश में यह सबसे बड़ी जल संरचना है।
मध्यप्रदेश और राजस्थान के उस सूखे और बीहड़ी क्षेत्र, जहाँ केवल बीहड़ ही बीहड़ है वहाँ यह नदी अपना स्तन-पान करवा रही है और गेहूं-सरसों जैसी उपज के लहलहाते कई किलोमीटर लंबे खेत इसके किनारे देखे जा सकते हैं। इसके आसपास अधिकतर जो वन क्षेत्र है, वह कँटीली झाड़ियों का है क्योंकि इसके तटों पर दूर तक बीहड़ और पथरीले तट हैं फिर भी यह नदी जितना अधिक से अधिक योगदान मानव कल्याण में और प्रकृति को सहेजने में दे सकती है, दे रही है।
पेड-पौधे तो ज्यादातर इसके किनारे पर कंटीली प्रजातियों वाले ही है,जिसमें बबूल बहुतायत में है,जलीय वनस्पति का मुझे अभी कुछ समझ में नहीं आता है।
इसके तटों पर रेत उत्खनन और अवैध शिकार धड़ल्ले से होता है।इसका एक तट राजस्थान में और एक तट मध्यप्रदेश में लगता है,अतः इस बात का पूरा फायदा अवैध कारोबारियों द्वारा उठाया जाता है। सरकारी तंत्र भी उतना समुचित और साधन-सम्पन्न नहीं है कि रेत माफ़िया का सामना कर सके।
सुझाव यह है कि इसमें बीच बीच में इको-टूरिज्म प्रारम्भ करना चाहिए इससे राजस्व की प्राप्ति भी होगी और अवैध कारोबार पर नकेल भी लगेगी।अभी केवल राजस्थान के पाली में और मध्यप्रदेश के मुरैना के पास सफारी चल रही है।इसी तरह की सफारी चार-छ: जगह और प्रारंभ की जा सकती है।
मेरी व्यक्तिगत राय है कि जब भी कभी किसी भी मंच पर गंगा,यमुना, नर्मदा की बात हो तो उसमे चंबल को भी अवश्य शामिल किया जाए।(विनायक फीचर्स)

पेड़ से लटका मिला शव मर गया महालक्ष्मी का कातिल

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नई दिल्ली: बेंगलुरु मर्डर केस में नया मोड़ सामने आया है. बेंगलुरु पुलिस को जिस शख्स पर महालक्ष्मी की हत्या कर उसके शरीर के 59 टुकड़े करने का शक था, उसने ओडिशा में आत्महत्या कर ली है. महालक्ष्मी के संदिग्ध कातिल का शव ओडिशा में एक पेड़ से लटका मिला है. बताया जा रहा है कि उसने खुद को एक पेड़ से लटका लिया. उसके पास से एक सुसाइ़ड नोट भी मिला है, जिसमें उसने जाते-जाते हत्या की बात कबूल की है.

30 साल के आरोपी मुक्ति रंजन रे का शव ओडिशा के भद्रक जिले के धुसुरी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले एक गांव में मिला. आरोपी कातिल मुक्ति रंजन रे कथित तौर पर फरार चल रहा था. स्थानीय पुलिस ने बेंगलुरु पुलिस को इसकी जानकारी दी. बेंगलुरु पुलिस इलाके में संदिग्ध की तलाश कर रही थी. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आरोपी रंजन मंगलवार को अपने गांव गया था, लेकिन बाद में वह घर से निकल गया और उसका शव गांव के बाहर मिला.

परिजनों ने शव की शिनाख्त कर ली है और उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. मामले की जानकारी जुटाने के लिए आगे की जांच की जा रही है. ओडिशा के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ लॉ एंड ऑर्डर संजय कुमार ने बताया कि पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर इस नोट में महालक्ष्मी की हत्या करने की बात कबूल की है. संजय कुमार ने बताया, ‘ओडिशा पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला पहले ही दर्ज कर लिया है. सुसाइड नोट के आधार पर बेंगलुरु पुलिस ने पुष्टि की है कि वही इस हत्याकांड का आरोपी है.’

इससे पहले न्यूज18 ने बताया था कि बेंगलुरु पुलिस ने 29 साल की महालक्ष्मी की हत्या के मामले में आरोपी रंजन रे को मुख्य संदिग्ध माना है. महालक्ष्मी सेल्सवुमन का काम करती थी. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी रे और महालक्ष्मी साथ में काम करते थे. रंजन रे ने एक अन्य व्यक्ति के साथ महालक्ष्मी के संबंधों को लेकर नाराजगी जताई थी. हालांकि, सूत्र ने उस शख्स की पहचान उजागर नहीं की.

महालक्ष्मी आखिरी बार 1 सितंबर को काम पर आई थी. उसके परिवार ने बताया कि उसका मोबाइल फोन 2 सितंबर से बंद था. 21 सितंबर को उसकी मां और बड़ी बहन ने व्यालिकावल स्थित उसके घर में उसका शव फ्रिज में पाया. उसका शव कई टुकड़ों में कटा हुआ था और उसमें कीड़े लगे हुए थे. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि महालक्ष्मी के शरीर को 59 टुकड़ों में काटा गया था. यह पता लगाने के लिए कि मौत से पहले उसे जहर तो नहीं दिया गया था, उसकी आंत के नमूने एक टॉक्सिकोलॉजी जांच के लिए भेजे गए थे. फोरेंसिक टीमें रेफ्रिजरेटर पर मिले उंगलियों के निशान की भी जांच कर रही थीं.

महालक्ष्मी अपने पति हेमंत दास से अलग हो गई थी और पिछले नौ महीनों से अलग रह रही थी. उनकी चार साल की एक बेटी है. उसके पति ने पुलिस को बताया था कि उसका किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध था.

यरटेल ने स्पैम का पता लगाने के लिए भारत का पहला एआई-संचालित नेटवर्क स्पैम डिटेक्शन लॉन्च किया

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मुंबई (अनिल बेदाग) : देश में स्पैम की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए एक अग्रणी कदम उठाते हुए, भारती एयरटेल (“एयरटेल”) ने आज भारत का पहला नेटवर्क-आधारित, एआई-संचालित स्पैम डिटेक्शन लॉन्च किया, जो इसके ग्राहकों के लिए स्पैम कॉल और संदेशों की समस्या का काफी हद तक समाधान कर देगा।
देश में किसी दूरसंचार सेवा प्रदाता द्वारा अपनी तरह का यह पहला समाधान, ग्राहकों को सभी संदिग्ध स्पैम कॉल और एसएमएस के बारे में वास्तविक समय में सचेत कर देगा। यह समाधान निःशुल्क है और सभी एयरटेल ग्राहकों के लिए बिना किसी अनुरोध या ऐप डाउनलोड किए स्वयं सक्रिय हो जाएगा।
गोपाल विट्टल, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भारती एयरटेल ने कहा, “स्पैम ग्राहकों के लिए एक खतरा बन गया है। हमने इस समस्या को हल करने के लिए पिछले बारह महीनों में काफी काम किया हैं। आज उठाया जा रहा है यह कदम एक मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि हम देश का पहला एआई-संचालित स्पैम मुक्त नेटवर्क लॉन्च कर रहे हैं जो हमारे ग्राहकों को घुसपैठ और अवांछित संचार के निरंतर हमले से बचाएगा”।
उन्होंने आगे कहा, “दोहरी परत वाली सुरक्षा के रूप में डिज़ाइन किए गए इस समाधान में दो स्तरीय फ़िल्टर हैं – पहला नेटवर्क स्तर पर और दूसरा आईटी सिस्टम स्तर पर। हर कॉल और एसएमएस इस दोहरी परत वाली एआई शील्ड से होकर गुज़रता है। दो मिलीसेकंड में हमारा समाधान हर दिन 150 करोड मैसेज और 250 करोड कॉल प्रोसेस करता है। यह एआई की शक्ति का उपयोग करके वास्तविक समय के आधार पर 10 खरब रिकॉर्ड को प्रोसेस करने के बराबर है। हमारा समाधान हर दिन आने वाले 10 करोड संभावित स्पैम कॉल और 30 लाख स्पैम एसएमएस की सफलतापूर्वक पहचान करने में सक्षम है। हमारे लिए, अपने ग्राहकों को सुरक्षित रखना एक सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
एयरटेल के डेटा वैज्ञानिकों द्वारा इन-हाउस विकसित, एआई-संचालित समाधान कॉल और एसएमएस को “संदिग्ध स्पैम” के रूप में पहचानने और वर्गीकृत करने के लिए एक मालिकाना एल्गोरिदम का उपयोग करता है। अत्याधुनिक एआई एल्गोरिदम द्वारा संचालित नेटवर्क वास्तविक समय के आधार पर कॉल करने वाले या भेजने वाले के उपयोग पैटर्न, कॉल/एसएमएस आवृत्ति, कॉल अवधि जैसे कई अन्य मापदंडों का विश्लेषण करता है। ज्ञात स्पैम पैटर्न के विरुद्ध इस जानकारी को क्रॉस-रेफ़रेंस करके, सिस्टम संदिग्ध स्पैम कॉल और एसएमएस को सटीक रूप से चिह्नित करता है।
इसके अतिरिक्त, यह समाधान ग्राहकों को एसएमएस के माध्यम से प्राप्त दुर्भावनापूर्ण लिंक के बारे में भी सचेत करता है। इसके लिए, एयरटेल ने ब्लैकलिस्ट किए गए यूआरएल का एक केंद्रीकृत डेटाबेस बनाया है और हर एसएमएस को वास्तविक समय में अत्याधुनिक एआई एल्गोरिदम द्वारा स्कैन किया जाता है ताकि उपयोगकर्ताओं को संदिग्ध लिंक पर गलती से क्लिक करने से सावधान किया जा सके। यह समाधान बार-बार आईएमईआई परिवर्तन जैसी विसंगतियों का भी पता लगा सकता है – जो धोखाधड़ी के व्यवहार का एक विशिष्ट संकेतक है। इन सुरक्षात्मक उपायों को लागू करके, कंपनी यह सुनिश्चित कर रही है कि उसके ग्राहकों को स्पैम और धोखाधड़ी के खतरों के उभरते परिदृश्य के खिलाफ अधिकतम स्तर की सुरक्षा मिल सके।

चलता-फिरता खबरनामा थे दादा दिनेश चंद्र वर्मा* 

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(राकेश अचल-विनायक फीचर्स)
देश के वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार किये जाने वाले  दिनेशचंद्र वर्मा अद्भुत लिख्खाड़ पत्रकार थे। 29 जुलाई 1944 को जन्मे वर्मा जी की आरंभिक कर्मभूमि विदिशा थी।जीवन भर वे अपनी कलम का साथ निभाते रहे। अंतिम एक साल वे शारीरिक रूप से कमजोर हो गए थे, लेकिन उन्होंने अपनी जीवटता को आखिर तक बनाये रखा।
वर्मा जी अपनी कलम के साथ ही अपनी फकीरी वेश-भूषा के कारण भी जाने जाते थे। एक जमाना था जब वे पूरे भोपाल में सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आते थे। सातवें-आठवें दशक में हिंदी पत्रकारिता में फटाफट लेखन करने वालों में दिनेश चंद्र वर्मा अग्रणीय माने जाते थे। उन दिनों मैंने भी लिखना शुरू कर दिया था। प्रदेश के तमाम छोटे-बड़े अखबारों में छपने की जैसे होड़ लगी रहती थी। वर्मा जी ने कुछ समाचार पत्रों में नौकरी भी की लेकिन नौकरी लम्बी चली नहीं। शायद नौकरी उनके लिए थी ही नहीं। उन्हें स्वतंत्र लेखन ने अपनी ओर आकर्षित किया और ये अंत तक उसी में जुटे रहे। उन्होंने कोई पच्चीस साल तक विनायक फीचर्स के जरिये हिंदी पत्रकारिता की अविराम सेवा की।
जाहिर है कि वर्मा जी एक चलता फिरता सूचना भंड़ार थे। मध्यप्रदेश बनने के बाद के एक-दो मुख्यमंत्रियों और नौकरशाहों को छोड़‌कर अधिकांश के बारे में वर्मा जी के पास किस्से ही किस्से थे। तब विस्पर्स कॉरिडोर का चलन नहीं था लेकिन वर्मा जी ने इस चलन को लोकप्रिय बना दिया था। ये जहाँ होते एक न एक सुर्री छोड़ जाते थे। उनकी दुश्मनी शायद ही किसी से हो लेकिन दोस्ती सबसे थी। वे दुश्मनी भी स्थाई नहीं पाल पाते थे जो आज दुश्मन बना हो यो कल उनका दोस्त भी हो सकता था। वे आखरी वक्त तक कम से कम हमें अपनी मित्र सूची में शामिल किये रहे।वर्मा जी से मित्रता का पहला दौर 1992 के आसपास कुछ  शिथिल पड़ गया था लेकिन 2004 में भोपाल के युवा पत्रकार जय यादव ने अपनी मासिक पत्रिका (भोपाल महानगर) के जरिये इस दोस्ती को फिर हरा-भरा कर दिया। बीते सोलह साल से प्रायः हर महीने  हमारा सतसंग होता था वे हम निवाला हमसफर, हमराज थे। उनकी फीचर सेवा के लिए भी मैं खूब लिखता रहता था और आज भी लिख रहा हूं।
उनकी प्रेरणा से  मैंने भी रोजाना एक लेख लिखने की प्रक्रिया प्रारंभ की जो अनवरत जारी है। जब भी लिखते समय गाड़ी कहीं अटकती वर्मा जी अपनी स्मृति के सहारे उसे सहारा दे देते थे।
जीवन की हीरक जयंती मनाने में कामयाब रहे वर्मा जी इंस्टेंट लेखन में सिद्ध हस्त थे। एक बैठक में आप उनसे बीस-तीस पेज आसानी से लिखवा सकते थे। वे विवादों से दूर रहते थे। उन्होंने श्रमजीवी पत्रकार संघ की स्थापना और उसके विस्तार में भी सक्रिय योगदान दिया लेकिन बाद में नेतागिरी से उनका मोहभंग हो गया था। राजनेताओं से उनके संबंध बड़े मधुर रहे। विद्याचरण शुक्ल हों या अर्जुन सिंह,राघव जी भाई हों या लक्ष्मीकांत शर्मा,दिग्विजय सिंह हों या शिवराज सिंह सबके बीच दिनेश चंद्र वर्मा की पहुंच थी लेकिन इस पहुंच से वे बहुत ज्यादा लाभान्वित कभी नहीं हुए इसलिए जीवन भर फकीरों की तरह  रहे। दादा दिनेश चंद्र वर्मा ने अपने बाल कटाना एक लम्बे अरसे से बंद कर रखे थे। उन्होंने अपने बालों को कभी रंग-रोगन भी नहीं किया इसलिए वे उम्र से पहले दादा हो गए। साधुओं जैसा उनका चोला सबसे अलग दिखाई देता था। वे अच्छे यायावर थे । उन्होंने अपनी सेहत के साथ कभी खिलवाड़ नहीं किया और महाप्रयाण से कुछ महीनों पहले तक जीवन को जीवन की तरह जिया। खान-पान के शौकीन दादा वक्त के पाबन्द थे। कुछ वर्षों से वे अपनी कार में सवार होकर जहां बुलाइये वहां हाजिर हो जाते थे। वे अपने जीवन से नाराज बिलकुल नहीं थे।
 उनके इकलौते पुत्र ने उनकी पत्रकारिता का उत्तराधिकार उनके सामने ही संभाल लिया था। पवन की पहचान कायम होने से वे अक्सर मुतमईन दिखाई देते थे। बेटा अपने आप पत्रकार बन गया। कई मामलों में दादा एकदम रुखे भी थे लेकिन जो उन्हें जानते थे उन्हें  दादा का रूखापन भी प्रिय लगता था… मैंने उनके साथ अनेक यात्राएं की। अनेक घटनाओं,दुर्घटनाओं का साक्षी रहा। वे मुझसे उम्र में कोई 15 साल बड़े थे, लेकिन उन्होंने कभी मुझे राकेश नहीं कहा। वे हमेशा मुझे अचल जी ही कहते थे। सम्मान करना और सम्मान कराना उन्हें खूब आता था। भोपाल में हमारी मित्र मंडली में अब कोई दूसरा दादा फिलहाल दूर-दूर तक दिखाई नहीं देगा। दादा दिनेश चंद्र वर्मा शेष जीवन में हमेशा एक मधुर स्मृति बनकर हमारे साथ रहेंगे।विनम्र श्रद्धांजलि।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

सिक्किम के राज्य पाल ने किया जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का पादुका पूजन

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सिक्किम – गंगटोक दिनाँक:25/09/2024 राज्यपाल महोदय ने परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज से की भेंट। आज सिक्किम के माननीय राज्यपाल श्री ओम प्रकाश माथुर ने परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज से राजभवन में सौहार्दपूर्ण भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल महोदय ने स्वामी जी का स्वागत कर सम्मान स्वरूप शॉल ओढ़ाकर पादुका पूजन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। राज्यपाल महोदय ने उनके आगमन से राज्य को आध्यात्मिक ऊर्जा और मार्गदर्शन प्राप्त होने की बात कही है। साथ ही कहा कि स्वामी जी महाराज का ज्ञान और अनुभव समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके उपदेशों से समाज में नैतिकता और सदाचार का प्रसार होगा।
इस अवसर पर राज्यपाल महोदय को स्वामी जी महाराज ने स्मृति चिन्ह भेंट किया । यह भेंट राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक समन्वय को और मजबूत करेगी और समाज में एकता और सद्भावना का संदेश प्रसारित करेगी।

स्वावलंबी और समर्थ समाज निर्माण के प्रेरक पं. दीनदयाल उपाध्याय* 

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डॉ.मोहन यादव-
विलक्षण व्यक्तित्व के धनी, ऋषि राजनेता, एकात्म मानव दर्शन तथा अंत्योदय के प्रणेता और हमारे मार्गदर्शक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के चरणों में कोटिशः नमन।
संपूर्ण समाज, मानवता और राष्ट्र के लिये समर्पित श्रद्धेय दीनदयाल जी ने राष्ट्र निर्माण के लिये जो सूत्र दिये हैं वह भारतीय संस्कृति, परंपरा, देशज ज्ञान और एकात्म पर केंद्रित हैं। श्रद्धेय दीनदयाल जी ने जनसंघ की स्थापना से लेकर अंतिम सांस तक, अपने जीवन को यज्ञ में आहुति की तरह समर्पित किया और समग्र कल्याण का दर्शन दिया। इस दर्शन को विश्व एकात्म मानव दर्शन के रूप में जानता है।
पंडित जी मौलिक विचारक थे। उनका कहना था कि हमारी विरासत हजारों साल पुरानी है। हमें अतीत से प्रेरणा लेनी है और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना है। उनका मानना था, जब समाज आत्म-निर्भर होगा तभी स्वाभिमानी होगा और जब स्वाभिमानी होगा तभी स्वावलंबी होगा। वे कहते थे, हमें देशानुकूल होने के साथ युगानुकूल भी होना है।
मौलिक भारतीय चिंतन के आधार पर विकास के लिये पंडित दीनदयाल जी ने एकात्म मानव दर्शन दिया। एकात्म मानव दर्शन में व्यक्ति के सुख की समग्र परिकल्पना की गई है। इसमें शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वय तथा एकात्मता का विचार है। यह दर्शन समस्त मानव के उत्थान पर केंद्रित है। इसमें सहज, सरल और सरस समाज निर्माण का मार्ग है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सबका साथ, सबका विकास और सबका कल्याण इसी अवधारणा का प्रकटीकरण है।
पंडित दीनदयाल जी ने अपने व्याख्यानों में विकास और निर्माण का मंत्र दिया। वे कहते थे, स्वाभिमानी बनो! अपने पुरुषार्थ से स्वाभिमानी कैसे बना जाये, वह इसका भी उल्लेख करते थे। उन्होंने देश-दुनिया को चतुर्पुरुषार्थ की संकल्पना दी। ये पुरुषार्थ हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। यह चतुर्पुरुषार्थ मन, बुद्धि, आत्मा और शरीर के संतुलन से संभव हैं। इनके द्वारा ही एक आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र का निर्माण हो सकता है।
पहला पुरुषार्थ धर्म है जिसमें शिक्षा, संस्कार और व्यवस्था है तो दूसरे अर्थ में साधन, संपन्नता और वैभव आता है। अर्थ उपार्जन सही तरीके से हो, इसके लिये पंडित दीनदयाल जी ने मानव धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस तरह धर्मानुकूल, अर्थात उचित मार्ग से अर्थ उपार्जन करने का मार्ग प्रशस्त किया। तीसरा पुरुषार्थ है काम, जिसमें मन की समस्त कामनाएं शामिल हैं। मनुष्य को संतुलित, समयानुकुल और सकारात्मक स्वरूप में कार्य करना चाहिए। चौथा पुरुषार्थ है मोक्ष, अर्थात संतोष की परम स्थिति। यदि व्यक्ति संतोषी होगा तो वह समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार बन सकता है। इन चार पुरुषार्थों की अवधारणा के अनुसार, यदि व्यक्ति और समाज को विकास के अवसर दिये जायें तो स्वावलंबी और समर्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है। इस समाज की परिकल्पना हमारे वेदों में की गई है। यही पंडित दीनदयाल जी की एकात्म मानव दर्शन की मूल अवधारणा है।
पंडित दीनदयाल जी की स्वावलंबी समाज निर्माण की अवधारणा को हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी विश्वकर्मा योजना, आत्मनिर्भऱ भारत, स्टार्टअप इंडिया, वोकल फॉर लोकल, एक भारत-श्रेष्ठ भारत आदि योजनाओं के माध्यम से धरातल पर लाने को प्रयासरत हैं। इन योजनाओं ने समाज को सशक्त बनाया और हर जन की अंतरात्मा को पुरुषार्थ करने के लिये प्रेरित किया है।
अंत्योदय अर्थात समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का कल्याण। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अंत्योदय के लिये जो मार्ग बताया था, वह माननीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में धरातल पर दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी गांव, गरीब, किसान, वंचित, शोषित, युवा और महिलाओं के कल्याण के लिये संकल्पित हैं। देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में सामाजिक सुरक्षा, मुद्रा, जनधन, उज्ज्वला, स्वच्छता मिशन, शौचालय निर्माण, दीनदयाल ग्राम ज्योति, प्रधानमंत्री आवास, जन औषधि केंद्र तथा आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं से अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है।
मुझे यह बताते हुए संतोष है कि हम समाज के सभी वर्गों की सहभागिता के साथ, सबके विकास को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रहे हैं। प्रदेश में प्रत्येक स्तर पर त्वरित पारदर्शी उत्तरदायी तथा संवेदनशील शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से हम हर जन के कल्याण और प्रदेश के विकास के लिये चार मिशन, युवा शक्ति मिशन, गरीब कल्याण मिशन, किसान कल्याण मिशन और नारी सशक्तिकरण मिशन बनाकर काम करने जा रहे हैं। इससे युवा, गरीब, किसान और महिलाओं के समग्र विकास पर कार्य किया जायेगा। यह मिशन पंडित दीनदयाल जी के अंत्योदय कल्याण के लक्ष्य पूर्ति में सहभागी बनेंगे।
मध्यप्रदेश में गरीब कल्याण के लिये कई योजनाएं और कार्य अमल में लाये जा रहे हैं। इनमें इंदौर की हुकुमचंद मिल के 4 हजार 800 श्रमिक परिवारों को उनका अधिकार दिया गया है। स्वामित्व योजना के माध्यम से 23 लाख 50 हजार लोगों को भू-अधिकार पत्र वितरित किये गये हैं। मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना 2.0 के अंतर्गत 30 हजार 500 से अधिक श्रमिक परिवारों को 670 करोड़ रुपये से अधिक की अनुग्रह सहायता प्रदान की गई है और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से प्रतिमाह 55 लाख 60 हजार से अधिक हितग्राहियों को पिछले एक वर्ष में लगभग 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक की पेंशन राशि वितरित की गई। इसी तरह तेंदूपत्ता संग्राहकों का मानदेय 3 हजार रुपये प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर चार हजार रुपये किया गया। पीएम जन-मन योजना से विशेष पिछड़ी जनजातियों को अधोसंरचना, बिजली की उपलब्धता, आहार अनुदान तथा अन्य समुचित व्यवस्था के लिये योजनाएं चलाई जा रही हैं।
पंडित दीनदयाल जी ने एकात्म मानवदर्शन और अंत्योदय से भारत राष्ट्र के कल्याण का जो मार्ग बताया, वह आकार ले रहा है। गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में बदलाव आये, उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों और उनका जीवन सफल हो, ऐसे हर संभव प्रयास करना श्रद्धेय पंडित दीनदयाल जी के दर्शन का मूल भाव है। भारत, वर्ष 2047 तक विश्व की महाशक्ति बनने के संकल्प के साथ प्रगति पथ पर अग्रसर है। भारत को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने के लिये हमें दीनदयाल जी के मौलिक चिंतन और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा को आत्मसात करना होगा।
हमारे पथ प्रदर्शक, मार्गदर्शक, राष्ट्र निर्माण के दृष्टा, विराट समर्पण के प्रतीक, मां भारती की सेवा में जीवनपर्यंत समर्पित
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को एक बार पुनः नमन। *
(लेखक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।)
(विनायक फीचर्स)*