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आयुष्मान कार्ड में आयुर्वेद इलाज को भी शामिल किया जाए : आयुर्वेद गुरु आचार्य मनीष

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एचआईआईएमएस नवी मुंबई में आचार्य मनीष ने कहा कि आयुर्वेद लाइफस्टाइल में बदलाव करके किडनी और लीवर फेल्योर को कर सकता है ठीक

नवी मुंबई। आयुर्वेद से किडनी फेल्योर, लीवर फेल्योर और थैलेसीमिया का इलाज पूरी तरह संभव है। यह बात एचआईआईएमएस नवी मुंबई में 20 नवंबर को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एचआईआईएमएस के डॉक्टरों और मरीजों ने कही। आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए हमेशा सक्रिय रहने वाले एचआईआईएमएस आयुर्वेद के संस्थापक आचार्य मनीष लोगों को अपनी पुरानी विरासत से अवगत कराकर स्वस्थ शरीर का मंत्र दे रहे हैं। एचआईआईएमएस नवी मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों ने कहा कि एचआईआईएमएस शरीर की आंतरिक शक्ति को बढ़ाकर किडनी, कैंसर, लीवर, शुगर, बीपी और हृदय रोगों को दूर करने पर जोर देता है।
आयुर्वेदाचार्य मनीष ने सरकार से मांग की है कि आयुष्मान कार्ड में आयुर्वेद इलाज को भी शामिल किया जाए।
भारतीय हेल्थ केयर सर्विस के परिदृश्य में, आचार्य मनीष के नेतृत्व में द हीलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिसिन एंड साइंसेज (एचआईआईएमएस ), आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए आशा के एक चमकदार प्रतीक के रूप में खड़ा है। आयुर्वेदिक संस्थान ने मॉर्डन मेडिकल टेक्निक के साथ आयुर्वेद की सदियों पुरानी साइंस के कॉम्बिनेशन के प्रति अपने अटूट डेडीकेशन के साथ भारत और दुनिया भर में हेल्थकेयर में क्रांति ला दी है।


हॉलिस्टिक हेल्थ की फिलॉसफी के साथ स्थापित, एचआईआईएमएस थैलेसीमिया, रेनल फेल्योर, लीवर फेल्योर और कैंसर से लेकर गंभीर पुरानी बीमारियों से पीड़ित रोगियों के लिए विश्वास और आशा की किरण बनकर उभरा है। एचआईआईएमएस को जो चीज सबसे अलग बनाती है, वह है इसकी यूनिक एप्रोच जो पर्सनलाइज्ड, सक्सेसफुल थेरेपी के साथ पेश करता है जो आयुर्वेद, एलोपैथी, यूनानी, नेचुरोपैथी और होम्योपैथी की खूबियों को आपस में बेहतरीन तरीके से कम्बाइन करता है।
जिन मरीजों को पहले यह आशंका थी कि उनकी बीमारियों में कभी सुधार नहीं होगा, उन्हें उम्मीद की किरण मिली है और मरीजों के इलाज के लिए एचआईआईएमएस के कॉन्फ्रीहेंसिव अप्रोच के कारण उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।
एचआईआईएमएस नवी मुंबई के एक मरीज ने कहा, “एचआईआईएमएस में मेरे इलाज के बाद आयुर्वेद में मेरा विश्वास बहाल हो गया है। कई लोगों और अस्पतालों ने मुझे बताया कि मेरी किडनी की समस्या लाइलाज है। फिर एक दोस्त ने मुझे आचार्य मनीष जी से मिलने के लिए कहा। आचार्य जी ने मुझे आश्वासन दिया कि मैं ठीक हो सकता हूं और इसलिए मैंने यहां अपना इलाज शुरू किया। आज मैं इस बात का जीता-जागता सबूत हूं कि आयुर्वेद किसी भी बीमारी को ठीक कर सकता है।”
एचआईआईएमएस नवी मुंबई 150 बिस्तरों वाला अस्पताल है और एचआईआईएमएस के मुंबई में अंधेरी और ठाणे में 20 बिस्तरों वाले 2 और अस्पताल हैं। एचआईआईएमएस आयुर्वेद, एलोपैथी, यूनानी, नेचरोपैथी, होम्योपैथी आदि जैसे साइंस का उपयोग करके बीमारियों का इलाज करता है। यहां रोगियों को उनके उचित ट्रीटमेंट और रिकवरी के लिए बाजरा और जड़ी-बूटियों से बना भोजन प्रदान किया जाता है। एचआईआईएमएस पोस्टुरल थेरेपी का भी उपयोग करता है जो डायलिसिस को 70% तक रोक सकता है। इस थेरेपी के जरिए हाई बीपी के 100 फीसदी मरीज बिना किसी दवा के तुरंत अपना बीपी कंट्रोल कर सकते हैं।
एचआईआईएमएस किडनी फेल्योर के इलाज के लिए पूरे देश में मशहूर है। एचआईआईएमएस शुद्धि आयुर्वेद केंद्र नवी मुंबई के अलावा भारत के कई अन्य शहरों जैसे चंडीगढ़, लखनऊ, मेरठ, ठाणे, अंधेरी, संगरूर, भागलपुर, गुरुग्राम, लुधियाना, अमृतसर, दिल्ली और गोवा में स्थापित किए गए हैं। देश भर के इन केंद्रों में 250 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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