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टीटीके प्रेस्‍टीज ने होम कुकिंग को और भी बेहतर बनाने के लिये एक खास फेस्टिव ऑफर ‘शुभ उत्‍सव’ की घोषणा की

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मुंबई (अनिल बेदाग): त्‍यौहारों के सीजन को और भी खास बनाने के लिए टीटीके प्रेस्‍टीज ने “शुभ उत्‍सव फेस्टिव ऑफर 2024” लॉन्च किया है। यह ऑफर 15 नवंबर, 2024 तक चलेगा, जिसमें ग्राहकों को प्रेस्टीज के उत्पादों पर बंपर डिस्काउंट और मुफ्त उपहार मिलेंगे।
टीटीके प्रेस्‍टीज के चीफ सेल्स और मार्केटिंग ऑफिसर, श्री अनिल गुरनानी ने कहा, “हमने देखा है कि अभिनव उत्पाद देने वाले ब्रैंड्स को उनके ग्राहक बहुत पसंद करते हैं। हमारा लक्ष्य भारतीय परिवारों को बेहतरीन और फीचर्स से भरपूर उत्पाद उपलब्ध कराना है, वो भी किफायती दाम पर। शुभ उत्‍सव में हमारे ग्राहकों के लिए ढेर सारे फायदे और छूट हैं। हमें इस सीजन की बड़ी सफलता की उम्मीद है, और हम अपने ग्राहकों को इन रोमांचक ऑफर्स का लाभ उठाते हुए देखना चाहते हैं।”
शुभ उत्सव 2024 के लिए खास ऑफर्स और डिस्काउंट: इस साल टीटीके प्रेस्टीज अपने ग्राहकों के लिए शुभ उत्सव में पहले से भी ज्यादा खुशी देने वाले और आकर्षक ऑफर्स लेकर आया है। इस खास मौके पर कंपनी अपने सभी उत्पादों की श्रेणियों पर शानदार छूट दे रही है।
ग्राहक इस सीजन में अपनी रसोई को अपग्रेड करने के लिए 3-लेयर मेटल बॉडी (स्टेनलेस स्टील, एल्युमिनियम, स्टेनलेस स्टील) वाला 3 लीटर स्पिलेज कंट्रोल टाइ-प्लाई प्रेशर कुकर खरीद सकते हैं, जिसके साथ 1550 रुपये का ड्यूरास्टोन ओमनी तवा (27 सेंटीमीटर) मुफ्त में दिया जा रहा है।
कुकिंग के बाद स्टोव की सफाई को आसान बनाने के लिए टीटीके प्रेस्टीज का 11,295 रुपये का स्वच्छ नियो 3 बर्नर गैस स्टोव एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें लिफ्टेबल बर्नर्स हैं, जिससे सफाई करना बेहद आसान हो जाता है। इस शुभ उत्सव में यह प्रोडक्ट दो शानदार उपहारों के साथ आता है – नक्षत्र इसेंशियल स्वच्छ 3 लीटर प्रेशर कुकर (मूल्य 2,525 रुपये) और स्वच्छ ग्रेनाइट नॉन-स्टिक कुकवेयर 3-पीस सेट (मूल्य 4,395 रुपये), जो आपको मुफ्त में मिलेंगे।
उपभोक्ता इस त्योहार के दौरान 1000 वॉट की पावरफुल मोटर वाले एंड्यूरा प्रो मिक्सर ग्राइंडर पर 14 अलग-अलग काम करने की क्षमता का लाभ उठा सकते हैं। यह मिक्सर ग्राइंडर 25% की छूट के साथ उपलब्ध है, और इसके साथ 1795 रुपये का सैंडविच मेकर भी मुफ्त मिलेगा।

Haryana Assembly Election Results 2024 -हरियाणा विधानसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी का जादू

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नई दिल्ली:  हरियाणा विधानसभा चुनाव का परिणाम करीब-करीब साफ हो चुका है. राज्य में बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है. यह पहली बार होगा कि राज्य में कोई पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी. हरियाणा के इस चुनाव परिणाम से यह पता चलता है कि हरियाणा में इस चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी का जादू किस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है. हरियाणा चुनाव के लिए बीजेपी ने जो रणनीति बनाई थी, लगता है कि उसकी वह रणनीति काम कर गई है और राज्य में तीसरी बार बीजेपी की सरकार बनाने जा रही है. आइए देखते हैं कि हरियाणा में बीजेपी ने यह कारनामा कैसे कर दिखाया.

बीजेपी के साथ कौन सी जातियां खड़ी हैं

बीजेपी 2014 में पहली बार हरियाणा की सत्ता पर काबिज हुई.लोगों को उम्मीद थी कि किसी जाट को ही मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी, क्योंकि पिछले कई दशक से हरियाणा का मुख्यमंत्री जाट ही बन रहा था, भले ही वो किसी भी दल का हो.लेकिन बीजेपी ने पंजाबी समाज के मनोहर लाल खट्टर को सीएम की कुर्सी पर बिठा दिया. पहली बार विधायक बने खट्टर को पीएम नरेंद्र मोदी की पसंद बताया गया.खट्टर को सीएम बनाने के बाद ही यह चर्चा चल उठी कि बीजेपी जाट राजनीति को खत्म करने की कोशिश कर रही है. बीजेपी से जाटों की नाराजगी यहीं से शुरू हुई. बीजेपी कभी जाटों को मनाने की कोशिश करती हुई नजर नहीं आई.उसने पंजाबी, ओबीसी और दलित वोटों को एकजुट रखने की कोशिशें जारी रखीं.मनोहर लाल खट्टर को लेकर लोगों में नाराजगी नजर आई तो बीजेपी ने उन्हें हटाकर नायब सिंह सैनी को सीएम की कुर्सी पर बैठा दिया. सैनी की माली जाति हरियाणा की बड़ी और ताकतवर ओबीसी जाति है.यानी कि बीजेपी की गैर जाट जातियों को जोड़ने का फार्मूला एक बार फिर काम कर गया है.हरियाणा में गैर जाट जातियां आज भी बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ी नजर आ रही हैं.

क्या जाटों ने बीजेपी का समर्थन किया है

ऐसा नहीं है कि जाट बीजेपी से नाराज ही हैं. हम यह इसलिए कह रहे हैं कि इस बार के चुनाव में बीजेपी ने जाट बहुल सीटों पर भी अच्छा प्रदर्शन किया है.बीजेपी ने 2019 के चुनाव में 30 फीसद जाट बहुल सीटें जीत ली थीं. वहीं 2024 के चुनाव में उसने 51 फीसदी जाट बहुल सीटों पर बढ़त बनाई है. इसका मतलब यह हुआ कि जाट बीजेपी से बहुत नाराज नहीं हैं. हालांकि हरियाणा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस को मिले वोटों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है. चुनाव आयोग के मुताबिक बीजेपी ने अभी तक 39.98 फीसदी और कांग्रेस ने 39.13 फीसदी वोट हासिल किए हैं, यानी की दोनों के वोट शेयर में मात्र 0.85 फीसदी की ही अंतर है.

क्या अभी भी मिर्चपुर कांड ओर गोहाना कांड से डरे हुए हैं दलित

इस साल के चुनाव प्रचार में बीजेपी मिर्चपुर कांड ओर गोहाना कांड को जोर-शोर से उठाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन दोनों कांडों का इस्तेमाल अपने चुनाव भाषणों में किया.दरअसल मिर्चपुर हरियाणा के हिसार जिले का एक गांव है. वहां 21 अप्रैल 2010 को वाल्मीकि समुदाय के लोगों के दर्जनों घर को जमींदोज कर दिया गया था.प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था हमलावर भीड़ की ओर ले लगाई गई आग में एक बुजुर्ग और उनकी विकलांग बेटी की जलकर मौत हो गई थी. इसका आरोप जाट जाति के लोगों पर लगा था. यह मामला अदालत तक पहुंचा था.अदालत ने इस मामले के 20 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. अदालत का फैसला आने से पहले ही मिर्चपुर गांव से 125 से अधिक दलित परिवार पलायन कर गए. वो आज तक वापस नहीं लौटे हैं. वहीं सोनीपत के गोहाना में 2005 में दलितों के 50 घर जला दिए गए थे. इसकी शुरुआत तब हुई जब गांव के एक दलित पर ऊंची जाति के व्यक्ति की हत्या का आरोप लगा.ये दोनों कांड जब हरियाणा में हुए तो वहां बीजेपी की सरकार थी. और भूपेंद्र सिंह हुड्डा वहां के मुख्यमंत्री थे. हुड्डा पर इन दोनों कांड के आरोपियों के साथ नरमी बरतने के आरोप लगे थे.

भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप क्या थे

बीजेपी ने मिर्चपुर कांड ओर गोहाना कांड उठाकर दलितों के मन में कांग्रेस और भूपेंद्र सिंह हुड्डा को लेकर डर बिठाने की कोशिश की. वह इसमें कामयाब भी हो गई. चुनाव की मतगणना के रूझानों को देखते हुए लगता है कि दलितों ने बड़ी संख्या में बीजेपी को वोट किया है. इसका परिणाम यह नजर आ रहा है कि 2019 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित  29 फीसदी सीटें जीतने वाली बीजेपी ने 2024 में 52 फीसदी एससी सीटों पर बढ़त बनाई है.

 

गुजरात के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

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Delhi  गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पर पोस्ट किया:

प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पर पोस्ट किया है:

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

Haryana की जनता ने कांग्रेस को नकारा , भाजपा को 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में लगभग 5o सीटें जीतने की संभावना

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हरियाणा विधानसभा चुनाव ने राजनीतिक पूर्वानुमानों को झुठलाते हुए एक आश्चर्यजनक परिणाम दिया है। रुझानों के अनुसार, सत्तारूढ़ भाजपा को 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में लगभग 5o सीटें जीतने की संभावना है। भाजपा ने इसको लेकर जश्न मनाना शुरू कर दिया है। केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर का भी बयान सामने आया है। मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मुद्दा (चुनाव का) यह था कि हमने हरियाणा के पहलवानों, किसानों, युवाओं के लिए जो काम किया है, वह कांग्रेस कभी नहीं कर सकती।

खट्टर ने आगे कहा कि मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि इस जीत का श्रेय हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं और राज्य के लोगों को जाता है। हमारे सीएम ने पहले ही कहा था ‘एक दिन आएगा जब जनता देगी जवाब और कांग्रेस एक ही बात कहेगी कि ईवीएम खराब है। उन्होंने कहा कि जनता ने कांग्रेस पार्टी को नकार दिया है। जनता ने यह संदेश दिया है कि पीएम मोदी की नीतियों का राज्य की जनता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हरियाणा में यह रिकॉर्ड है कि कोई पार्टी तीसरी बार सत्ता में आई है।

 

नायब सिंह सैनी ने अपने बयान में कहा कि मैं लाडवा की जनता और हरियाणा की 2.80 करोड़ आबादी को धन्यवाद देना चाहता हूं। इस जीत का श्रेय पीएम मोदी को जाता है। हरियाणा की जनता ने पीएम मोदी की नीतियों पर मुहर लगा दी है। सैनी ने कहा कि मैं प्रमाणपत्र लेने जाऊंगा और फिर ज्योतिसर मंदिर में भगवान कृष्ण की पूजा करूंगा। हरियाणा की 2.80 करोड़ जनता ने इस सरकार को चुना है और हम पीएम मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ेंगे। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने साफ तौर पर कह दिया है कि एक मोदी सब पर भारी हैं। उन्होंने कहा कि हम ‘एक मोदी सब पर भारी’ के नतीजे देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के लोगों ने उन्हें (राहुल गांधी) सबक सिखा दिया है।’ उन्हें राहुल गांधी के बयानों पर नहीं बल्कि पीएम मोदी पर भरोसा है। सभी किसान और पहलवान हमारे साथ हैं।

भाजपा नेता ने कहा कि हमने जम्मू-कश्मीर में भी कांग्रेस पार्टी को हराया है। वे भाजपा के सामने कहीं नहीं टिकते। उन्होंने (राहुल गांधी) फारूक अब्दुल्ला का समर्थन किया। बवानी खेड़ा विधानसभा सीट से बीजेपी के प्रमुख उम्मीदवार कपूर सिंह ने कहा कि मैं जीत गया हूं क्योंकि लोगों ने मुझे अपना समर्थन दिया है। लोगों ने साबित कर दिया है कि जो काम करता है वह कभी नहीं हारता। उन्होंने कहा कि मैं लोगों के बीच रहा हूं…लोगों ने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है। जैसे ही भाजपा की सरकार बनी जनता ने केंद्र में तीसरी बार, हरियाणा में भी तीसरी बार भाजपा की सरकार बनाने का मन बना लिया है।

महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक रद्द ,विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज

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हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे साफ हो चुके हैं। अब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। महा विकास अघाड़ी (MVA) में कांग्रेस ने मुंबई की 36 विधानसभा सीटों में से 18 सीटों की मांग की है। मुंबई में कुल 36 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से 22 सीटों पर चर्चा हो चुकी है, बाकी 14 सीटों पर चर्चा होनी बाकी है। मुंबई की 22 विधानसभा सीटों में से 12 सीटें शिवसेना, 8 सीटें कांग्रेस, 1 सीट समाजवादी पार्टी और 1 सीट एनसीपी (शरद पवार गुट) गुट लड़ेगी। बाकी मुंबई की 14 विधानसभा सीटों पर चर्चा बाकी है, लेकिन मुंबई की 5 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जिस पर ना ही शिवसेना, ना कांग्रेस और ना एनसीपी दावा कर रही है।

इससे पहले मुंबई के ट्राइडेंट होटल में सोमवार को सीट बंटवारे को लेकर महा विकास अघाड़ी (MVA) के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से करीब 180-90 सीटों पर तीनों पार्टियों में सहमति बनी थी। हालांकि, अभी भी करीब 100 सीटों पर बात अटकी है। जिन सीटों पर बात अटकी है उनमें विदर्भ, मुंबई कोंकण रीजन, मराठवाड़ा और कुछ सीटें उत्तर महाराष्ट्र से हैं। सीट शेयरिंग को लेकर आज भी महा विकास आघाड़ी की बैठक हो रही है। सोमवार को बैठक के बाद महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि सकारात्मक चर्चा हुई है और MVA का प्रयास रहेगा कि दशहरे के बाद सीट बंटवारे को लेकर कुछ सीटों का ऐलान किया जाए।

महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक रद्द 

वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीमार होने की वजह से मुंबई के सह्याद्री राज्य अतिथि गृह में दोपहर बाद होने वाली महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक रद्द कर दी गई। इसके अतिरिक्त, शिंदे की सोलापुर की योजनाबद्ध यात्रा, जहां वह लड़की बहिन कार्यक्रम में भाग लेने वाले थे, को भी रद्द कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, शिंदे की बीमारी पिछले कुछ दिनों में जागरण सहित विभिन्न नवरात्रि कार्यक्रमों में भाग लेने से हुई अत्यधिक थकान के कारण हुई है। उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है और वह फिलहाल अपने आधिकारिक आवास वर्षा में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।

जेके टायर ने अपने ईवी बेड़े के लिए वर्टेलो के साथ साझेदारी की

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नई दिल्ली/मुंबई : अग्रणी टायर निर्माता जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज ने अपनी तरह की पहली क्लाउड-आधारित निगरानी प्रणाली “कनेक्टेड मोबिलिटी सॉल्यूशंस” प्रदान करने के लिए वर्टेलो के साथ लंबे समय के लिए साझेदारी की है। वर्टेलो एक विशेष इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सोल्यूशंस प्रदाता है, जिसे बेड़े के इलेक्ट्रिफिकेशन को एक आसान बदलाव बनाने के लिए बनाया गया है।
इस साझेदारी के माध्यम से, जेके टायर वर्टेलो के बेड़े के लिए वास्तविक समय की निगरानी के साथ कनेक्टेड ट्रील सेंसर से लैस ब्रांड की नई पीढ़ी के ईवी टायर – 255/70प्रदान करेगा। मोबिलिटी सेवाएं मुंबई से शुरू करके देश भर में वर्टेलो डिपो में प्रदान की जाएंगी। जेके टायर डिपो में चौबीसों घंटे सहायता के साथ-साथ रास्ते में सहायता प्रदान करने के लिए अनुभवी पेशेवरों की एक समर्पित टीम तैनात करेगा।
साझेदारी के बारे में जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज के बिक्री और मार्केट‌िंग के निदेशक श्री श्रीनिवासु अल्लाफान ने कहा कि हम जेके टायर में भारत के बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के लिए स्थायी गतिशीलता समाधानों का नेतृत्व करने में प्रसन्न हैं। इस साझेदारी के साथ, जेके टायर भारत के वाणिज्यिक ईवी टायर सेगमेंट में उद्योग के लीडर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए स्मार्ट, टिकाऊ गतिशीलता में आगे बढ़ना जारी रखता है।
जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, फ्लीट मैनेजमेंट एंड मोबिलिटी सॉल्यूशंस, श्री संजीव शर्मा ने कहा कि वर्टेलो के साथ इस साझेदारी का उद्देश्य तकनीक-संचालित व्यापक गतिशीलता समाधान प्रदान करना, टायर का उच्चतम प्रदर्शन सुनिश्चित करना, बेड़े की दक्षता बढ़ाना और टिकाऊ परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देना है। साथ मिलकर, हमारा लक्ष्य पूरे भारत में इलेक्ट्रिक बेड़े कैसे संचालित होते हैं, इसे फिर से परिभाषित करना है।”
वर्टेलो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री संदीप गंभीर ने इस समझौते पर हस्ताक्षर होने पर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि वर्टेलो में हम अधिक टिकाऊ भारत के लिए परिवहन को फिर से परिभाषित करने में मदद कर रहे हैं। ई-मोबिलिटी इकोसिस्टम में काम करते हुए, हमारा मिशन इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद करके पूरे भारत में परिवहन में बदलाव लाना है और जेके टायर के साथ यह जुड़ाव इस उद्देश्य को आगे बढ़ाता है।

पंजाब में एक और गाय की मौत, भड़के गो भक्त, पढ़ें पूरा मामला

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रूपनगर : रूपनगर में गौहत्या के मामले में एक और गाय की मौत हो गई, जिससे यह मामला और भी पेचीदा होता जा रहा है। इस मामले को लेकर गौभक्तों में पहले से ही काफी गुस्सा है और अब दूसरी गाय की मौत के बाद लोगों में गुस्सा और भड़क गया है।

गौरतलब है कि करीब दस दिन पहले एक स्थानीय गाय डेयरी पर कुछ लोगों ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया था, जिसमें छह गायें गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिनमें से एक गाय की मौत हो गई थी और अब दूसरी गाय की आज मौत हो गई, जो पिछले दस दिनों से उपचाराधीन थी। गौहत्या के मुद्दे को लेकर गौभक्तों में भारी रोष था, इसी सिलसिले में सनातन धर्म सभा ने व्यापार मंडल के सहयोग से रूपनगर बंद का आह्वान किया था, जो पूरी तरह सफल रहा।

इसके बाद गौ रक्षा दल ने सिटी पुलिस स्टेशन रूपनगर का घेराव किया और धरना दिया। अब पुलिस को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया गया, लेकिन इस बीच एक और गाय की मौत हो गई। इस संबंध में सनातन धर्म सभा द्वारा प्रत्येक मंगलवार को रात्रि 8 बजे श्री कृष्ण मंदिर गांधी चौक, रूपनगर में एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। सनातन धर्म सभा के सचिव अनुप गुप्ता ने कहा कि गौहत्या का मुद्दा उठाया जाएगा इस बैठक में चर्चा की जाएगी। वहीं आंदोलन को तेज करने के लिए अन्य धार्मिक व सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा।

जिला गौ सेवा समिति का सम्मेलन, मंत्री जोराराम बोले- लाभ देककर सरकार गोपालकों को दे रही है संबल

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झुंझुनू खेमी शक्ति मंदिर परिसर में झुंझुनू जिला गौ सेवा समिति के जिला स्तरीय प्रतिनिधि समेलन में भाग लिया। कैबिनेट मंत्री ने इस दौरान गोशाला के संचालन,अनुदान, भूमि, चारा अन्य प्रशासनिक समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं से गोपालकों को सहायता और संबल प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार गोशालाओं को और भी सुविधाजनक बनाने की कार्य योजना बनाकर कार्य कर रही है इस दौरान रमाकान्त टीबड़ा मुंबई,एडीएम अजय कुमार आर्य, बनवारीलाल सैनी,महेंद्र चंदवा,प्रांत प्रचारक बाबूलाल, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ.सुरेश सूरा, बजरंगलाल सोलानावाला जयपुर,राजकुमार टीबड़ा, श्यामसुन्दर सौंथलिया मुम्बई, रतनलाल जाखोदिया दिल्ली,वी. एन. शर्मा चैन्नई, रामप्रकाश बिरमीवाला बिसाऊ की उपस्थिति में गौ माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। स्वागत उदबोधन समिति अध्यक्ष ताराचंद गुप्ता एवं कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन सिंह जानू ने दिया। कार्यक्रम का संचालन कैलाश व्यास लिखवा ने किया।

इस दौरान जिले की सर्वश्रेष्ठ तीन गोशालाओं की घोषणा की गई , जिसमें प्रथम जमवाय माता गौशाला भौड़की, द्वितीय श्री गोपाल गौशाला झुन्झनू व तृतीय पिंजरापोल गौशाला बिसाऊ रही। सांत्वना पुरस्कार की हकदार पिलानी गौशाला रही, जिसके प्रतिनिधियों को 20 अक्टूबर 2024 को पिलानी गौशाला में पिलानी के प्रमुख उद्योगपतियों द्वारा पारितोषिक प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में जिला समिति द्वारा प्रकाशित कामधेनु स्मारिका का भी विमोचन भी किया गया, जिसमें पूरे जिले की सभी गौशालाओं का विवरण प्रकाशित किया गया है।

 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ हत्या को लेकर पीएम मोदी पर सवाल उठाए

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रायपुर : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ी बात कही है. अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ हत्या को लेकर पीएम मोदी पर सवाल उठाए हैं. आपको बता दें कि अविमुक्तेश्वरानंद देश में गौ हत्या के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं. शंकराचार्य सभी राज्यों में गौ ध्वज स्थापना करने के लिए भारत यात्रा कर रहे हैं. अब तक शंकराचार्य ने 8 राज्यों की यात्रा की है. जिसमें चार राज्यों में उन्हें एंट्री दी गई है. चार राज्यों में उन्हें घुसने नहीं दिया गया. इसके साथ ही अविमुक्तेश्वरानंद ने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता मानने से इंकार किया है.

पीएम मोदी को शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती बता चुके हैं एजेंट : इससे पहले अंबिकापुर में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने मोदी को गौ हत्या का एजेंट बताया है. इस सवाल के जवाब में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि साल 2014 में हमने मोदी जी से आशा की थी कि यह व्यक्ति देश में गौ हत्या बंद करेगा. यही सोचकर हमने वोट दिया था और हमें आशा भी थी. लेकिन बिल्कुल भी ऐसा नहीं हुआ.

साल 2014 में हमने मोदी को यही सोचकर आशा करते हुए वोट दिया था कि यह देश में गौ हत्या बंद कर देगा. लेकिन जितनी बड़ी आशा हमने की थी इतनी बड़ी निराशा भी हमें हाथ लगी है. जितने ज्यादा ऊपर हम पहुंचे थे उतने ही हमें नीचे पहुंचना पड़ा. मोदी जी से हम कम आशा रखते तो कम दुख होता. उन्होंने बड़ी आशा जताई थी इसलिए हमें बड़ा दुख हुआ है: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

गौ हत्याओं पर प्रतिबंध क्यों नहीं ?: शंकराचार्य ने कहा कि जब देश में एक टैक्स, वन नेशन, एक इलेक्शन की बात होती है तो फिर एक देश में गाय के लिए एक कानून होना चाहिए. गौ हत्या बंद होनी चाहिए. लेकिन कुछ राज्यों में गौ हत्या पर प्रतिबंध लगा हुआ है और कुछ राज्यों में आज भी लगातार गौ हत्या हो रही है. ऐसे में पूरे देश में गौ हत्या बंद हो इसके लिए एक कानून होना चाहिए. इसी को लेकर हम पूरे देश में गौ ध्वज स्थापना के तहत भारत यात्रा कर रहे हैं.लेकिन चार राज्यों में एंट्री नहीं मिली.

हमारी यात्रा को लेकर राज्य की सरकारें और वहां विरोध करने वाले लोगों को हमने धन्यवाद देते हुए कहा कि विरोध के कारण हमारी बात वहां तक पहुंच गई. भारत देश की आर्थिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान रखने वाला मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने हमें आमंत्रित किया था. वहां के मुख्यमंत्री ने कहा कि हम गाय को राष्ट्र माता तो घोषित नहीं कर सकते लेकिन हमारे राज्य का नाम महाराष्ट्र है इसलिए हम गाय को महाराष्ट्र माता घोषित करते हैं: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

छत्तीसगढ़ के नेताओं से अपील : छत्तीसगढ़ को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि यहां के विधायक और सांसद गौ माता को लेकर काफी गंभीर हैं. हम समझते हैं कि छत्तीसगढ़ में गाय को छत्तीसगढ़ महतारी का दर्जा देगा. शंकराचार्य ने छत्तीसगढ़ सरकार से अपेक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ी में कहा कि मुझे छत्तीसगढ़ की सरकार से काफी उम्मीद है और विश्वास भी है कि छत्तीसगढ़ में भी गौ माता को दर्जा मिलेगा. उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से अपेक्षा की और कहा कि कौशल्या मां के राज्य में गाय को भी राज माता का दर्जा मिलेगा.

पाकिस्तान के राष्ट्रपिता मोहम्मद अली जिन्ना बने क्योंकि पाकिस्तान नया जन्मा था. लोग अफवाह फैलाते हैं कि मोहनदास करमचंद गांधी राष्ट्रपिता हैं. यदि राष्ट्रपिता हैं तो बताओं कि उन्होंने किस राष्ट्र को जन्म दिया. भारत तो पहले से था, भारत को किसी ने नहीं जन्मा. कोई भी यहां राष्ट्रपिता के पर पद प्रतिष्ठित नहीं किया जा सकता.: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

“गाय को सिर्फ चाहिए सम्मान” : शंकराचार्य ने कहा कि गाय कुछ नहीं चाहती लेकिन गाय इतना जरूर चाहती है कि उसका सम्मान हो. गाय को अनुदान नहीं चाहिए. कई राज्यों की सरकारी गाय को अनुदान देती है. गाय को अनुदान की जरूरत नहीं है बल्कि सम्मान की जरूरत है. अगर आप गाय को सम्मान नहीं देते हैं तो हम गाय के भक्त हैं और हम गाय का सम्मान करेंगे. उन्होंने सरकारों से कहा है कि गौ माता को पशु की सूची से हटाकर उनका सम्मान सुनिश्चित करें. यदि वह ऐसा करते हैं तो स्वागत है. वे गौ की सेवा करते हैं तो स्वागत है. अगर वह नहीं करते हैं तो कोई बात नहीं वह हम करेंगे.

अब नहीं चलेगा जेल में जातिवाद* 

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(मनोज कुमार अग्रवाल -विभूति फीचर्स)
यह नितान्त दुखद और विस्मित करने वाली खबर है कि हमारे लोकजीवन में जाति कहीं भी पीछा नहीं छोड़ती। यहां तक कि जेल में अभिरक्षा में होने के बाद भी जाति पांति कायम रहती  है। देश की आजादी के 77 साल बाद भी जेलों के अंदर कैदियों के साथ जातिगत भेदभाव होना दुर्भाग्यपूर्ण होने के साथ ही शर्मनाक भी हैं। हाल ही में चीफ जस्टिस ने इस बात पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए एक आदेश दिया है। हमारे यहां जेलों में जाति के आधार पर कैदियों को काम पर लगाया जाता रहा है।
इस का सीधा तात्पर्य यह है कि यदि निम्न कही जाने वाली जाति से है तो उन कैदियों को सफाई कर्मी जैसे काम पर लगाया जाता है और यदि उच्च जाति से है तो खान पान यानि की मैस का काम दिया जाता है। यह भेदभाव बताता है कि जाति का जहर हमारे तंत्र की जड़ों को आज भी दूषित किए है। औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों के समय से चली आ रही इस कुप्रथा को पहले ही बंद होना चाहिए था, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण घटिया जातिवादी सोच आज भी बरकरार है। सजा के बाद कैदियों को जेल में रखने का उद्देश्य उनको सुधारना और समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में मदद करना होता है, ताकि जेल से छूटने के बाद वे समाज के साथ फिर से जुड़ सकें। लेकिन अगर जेलों में ही कैदियों से जातिगत स्तर पर भेदभाव होता है, तो समझना मुश्किल नहीं है कि उनकी मानसिक स्थिति पर क्या असर पड़ता होगा। मगर अच्छी बात है कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में जेलों में जातिगत भेदभाव के साथ श्रम विभाजन पर रोक लगाने की दिशा में अहम फैसला दिया है।
शीर्ष न्यायालय ने भारत की जेलों में बंद कैदियों के बीच जाति के आधार पर भेदभाव करने को गैर कानूनी तथा असंवैधानिक करार देते हुए स्पष्ट तौर पर कहा है कि देश की किसी भी जेल में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। जेल नियमावली में मौजूद ऐसे सभी प्रावधानों को हटाया जाना चाहिए, जो इस तरह के भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। कोर्ट ने इसे संविधान के आर्टिकल 15 का सरासर उल्लंघन बतलाया है और साफतौर पर कहा है कि रसोई व सफाई का काम जाति के आधार पर बांटा जाना अनुचित है। दरअसल एक महिला पत्रकार द्वारा दायर जनहित याचिका पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि जेल नियमावली जाति के आधार पर कामों के बंटवारे में भेदभाव करती है।
खाना बनाने का काम ऊंची जाति के लोगों को देना व सफाई का काम निचली जातियों के कैदियों को देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है, जो जेलों में जातिगत भेदभाव को बढ़ाता है। कोर्ट का कहना था कि जाति के आधार पर कामों का बंटवारा औपनिवेशक सोच का पर्याय है, जिसे स्वतंत्र भारत में जारी नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह बात स्पष्ट है कि जेल नियमावली साफतौर पर भेदभाव करती है। साथ ही कहा कि नियमावली में जाति से जुड़ी डिटेल्स का उल्लेख असंवैधानिक है। कोर्ट ने खरी-खरी सुनाते हुए सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के जेल मैन्युअल में तुरंत बदलाव करने को कहा है। साथ ही राज्यों को इस फैसले के अनुपालन की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली इस बेंच में जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल थे। दरअसल एक पत्रकार सुकन्या शांता ने सबसे पहले यह मामला उठाया था। उनका कहना था कि देश के 17 राज्यों की जेलों में कैदियों के साथ यह भेदभाव हो रहा है। उन्होंने दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने तीन महीनों में नियमों में बदलाव करने को कहा है।
देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा है कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार कैदियों को भी है। कैदियों को सम्मान प्रदान न करना औपनिवेशिक काल की निशानी है, जब उन्हें मानवीय गुणों से वंचित किया जाता था। संविधान- पूर्व युग के सत्तावादी शासन ने जेलों को न केवल कारावास के स्थान के रूप में देखा, बल्कि वर्चस्व के उपकरण के रूप में भी देखा। इस अदालत ने संविधान द्वारा लाए गए बदले हुए कानूनी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए माना है कि कैदियों को भी सम्मान का अधिकार है। फैसले में कहा गया है कि मानव गरिमा एक संवैधानिक मूल्य और संवैधानिक लक्ष्य है। अदालत ने अन्य फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मानव गरिमा मानव अस्तित्व का अभिन्न अंग है और दोनों को अलग नहीं किया जा सकता है’ और इसमें ‘यातना या क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि गरिमा और जीवन की गुणवत्ता के बीच भी घनिष्ठ संबंध है।
मानव अस्तित्व की गरिमा तभी पूरी तरह से साकार होती है, जब कोई व्यक्ति गुणवत्तापूर्ण जीवन जीता है। शीर्ष न्यायालय ने आदेश दिया कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव का निषेध), 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और 23 (जबरन श्रम के खिलाफ अधिकार) का उल्लंघन करने के कारण इन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया जाता है। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि वे तीन महीने की अवधि के भीतर इस फैसले के अनुसार अपने जेल नियमावली/नियमों को संशोधित करें। दरअसल आरोप है कि देश भर के जेलों के बैरकों में जाति आधारित भेदभाव जारी है और शारीरिक श्रम कार्यों तक फैला हुआ है, जो विमुक्त जनजातियों और आदतन अपराधियों के रूप में वर्गीकृत लोगों को प्रभावित कर रहा है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में इन्हें गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे कई उदाहरण सामने है, जहां अनुसूचित जातियों के व्यक्तियों को अलग और अन्य जातियों के व्यक्तियों को अलग रखा गया है। इस तरह का जाति आधारित भेदभाव जेल में कदम रखने के बाद से ही शुरू होता है।
राजस्थान समेत देश की कई जेलों में आज भी ब्रिटिश शासन के जेल मैनुअल के मुताबिक काम का आवंटन होता है। प्रत्येक आरोपी व्यक्ति, जो जेल में दाखिल होता है, उससे जाति पूछी जाती है। एक रिपोर्ट के अनुसार मानवाधिकार से जुड़ी एक निजी संस्था ने दावा किया है कि निचले तबके के बंदियों को शौचालय व जेलों की सफाई जैसे काम सौंपे जाते हैं। जानकारी के मुताबिक जाति पिरामिड के निचले भाग वाले सफाई का काम करते हैं, उनसे उच्च वर्ग वाले रसोई या लीगल दस्तावेज विभाग को संभालते हैं, जबकि अमीर और प्रभावशाली कोई काम नहीं करते।
दअरसल औपनिवेशिक युग के जेल मैनुअल ने इस तरह के जाति-आधारित श्रम विभाजन की अनुमति दी थी। लेकिन बाद में सरकारों ने बुनियादी मानवाधिकारों के अनुरूप मैनुअल में संशोधन करने के लिए बहुत कम काम किया है, लेकिन इसके बावजूद कुछ कुप्रथाएं आज भी विद्यमान है, जिसमें से एक जातिवाद के आधार पर काम देना भी शामिल है।अब कानूनी और मानवीय आधार पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए फैसले के बाद उम्मीद की जा सकती है कि कैदियों के साथ भेदभाव की कुप्रथा खत्म होगी और जेलों में उनके अधिकारों की रक्षा होगी।जरूरत इस बात की है कि आरक्षण के स्थान पर जातिविहीन समाज की स्थापना पर बल दिया जाए। जाति के आधार पर वर्गीकरण करना ही व्यवस्था से समाप्त कर दिया जाए।(विभूति फीचर्स)