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प्रधानमंत्री ने 17वीं लोकसभा की आखिरी बैठक को संबोधित किया

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New Delhi – आदरणीय  आज का ये दिवस लोकतंत्र की एक महान परंपरा का महत्वपूर्ण दिवस है। सत्रहवीं लोकसभा ने पांच वर्ष देश सेवा में जिस प्रकार से अनेक विविध महत्वपूर्ण निर्णय किए। अनेक चुनौतियों को सबने अपने सामर्थ्य से देश को उचित दिशा देने का प्रयास, एक प्रकार से ये आज का दिवस हम सबकी उन पांच वर्ष की वैचारिक यात्रा का, राष्ट्र को समर्पित उस समय का, देश को फिर से एक बार अपने संकल्पों को राष्ट्र के चरणों में समर्पित करने का ये अवसर है। ये पांच वर्ष देश में रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म, ये बहुत rare होता है, कि रिफार्म भी हो, परफॉर्म भी हो और हम ट्रांसफॉर्म होता अपनी आंखों के सामने देख पाते हों, एक नया विश्वास भरता हो। ये अपने आप में सत्रहवीं लोकसभा से आज देश अनुभव कर रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है कि देश सत्रहवीं लोकसभा को जरूर आशीर्वाद देता रहेगा। इन सभी प्रक्रियाओं में सदन के सभी माननीय सदस्यों का बहुत महत्वपूर्ण रोल रहा है, महत्वपूर्ण भूमिका रही है। और ये समय है कि मैं सभी माननीय सांसदों का इस ग्रुप के नेता के नाते भी और आप सबको एक साथी के नाते भी आप सबका अभिनंदन करता हूं।

विशेष रूप से आदरणीय अध्यक्ष जी,
मैं आपके प्रति भी हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। पांचों वर्ष कभी-कभी सुमित्रा जी मुक्त हास्य करती थीं। लेकिन आप हर पल आपका चेहरा मुस्कान से भरा रहता था। यहां कुछ भी हो जाए लेकिन कभी भी उस मुस्कान में कोई कमी नहीं आई। अनेक विविध परिस्थितियों में आपने बहुत ही संतुलित भाव से और सच्चे अर्थ में निष्पक्ष भाव से इस सदन का मार्गदर्शन किया, सदन का नेतृत्व किया। मैं इसके लिए भी आपकी भूरी-भूरी प्रशंसा करता हूं। आक्रोश के पल भी आए, आरोप के भी पल आए, लेकिन आपने पूरे धैर्य के साथ इन सभी स्थितियों को संभालते हुए और एक सूझबूझ के साथ आपने सदन को चलाया, हम सबका मार्गदर्शन किया इसके लिए भी मैं आपका आभारी हूं।
आदरणीय सभापति जी,
इस पांच वर्ष में इस सदी का सबसे बड़ा संकट पूरी मानव जाति ने झेला। कौन बचेगा? कौन बच पाएगा? कोई किसी को बचा सकता है कि नहीं बचा सकता? ऐसी वो अवस्था थी। ऐसे में सदन में आना ये भी, अपना घर छोड़कर के निकलना ये भी संकट का काल था। उसके बाद भी जो भी नई व्यवस्थाएं करनी पड़ी, आपने उसको किया, देश के काम को रुकने नहीं दिया। सदन की गरिमा भी बनी रहे और देश के आवश्यक कामों को जो गति देनी चाहिए, वो गति भी बनी रहे और उस काम में सदन की जो भूमिका है, वो रत्ती भर भी पीछे न रहे, इसको आपने बड़ी कुशलता के साथ संभाला और दुनिया के लिए एक उदाहरण के रूप में।
आदरणीय सभापति जी,
मैं माननीय सांसदों का भी इस बात के लिए एक बार आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि उस कालखंड में देश की आवश्यकताओं को देखते हुए सांसद निधि छोड़ने का प्रस्ताव माननीय सांसदों के सामने रखा और एक पल के विलंब के बिना सभी माननीय सांसदों ने सांसद निधि छोड़ दी। इतना ही नहीं एक देशवासियों को पॉजिटिव मैसेज देने के लिए अपने आचरण से समाज को एक विश्वास देने के लिए सांसदों ने अपनी सैलरी में से 30 प्रतिशत कटौती का निर्णय सबने खुद ने किया। ताकि देश को भी विश्वास हुआ कि ये सबसे पहले छोड़ने वाले लोग हैं।
और आदरणीय सभापति जी,
हम सभी सांसद बिना कारण साल में दो बार हिंदुस्तान के मीडिया के किसी न किसी कोने में गाली खाते रहते थे कि ये सांसदों को इतना मिलता है और कैंटीन में इतने में खाते हैं। बाहर इतने में मिलता है, कैंटीन में इतने में मिलता है यानी पता नहीं बाल नोच लिए जाते थे। आपने निर्णय किया सबके लिए समान रेट होंगे कैंटीन में और सांसदों ने कभी भी विरोध नहीं किया, शिकायत भी नहीं की और सभी सांसदों की बिना कारण इतनी फजीहत करने वाले लोग मजे लेते थे। उससे हम सबको आपने बचा लिया, इसके लिए भी मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं।
आदरणीय सभापति जी,
ये बात सही है कि हमारे कई लोकसभा के चाहे सत्रहवीं हो, सोलहवीं हो, पंद्रहवीं हो, संसद का नया भवन होना चाहिए। इसकी चर्चा सबने की सामूहिक रूप से की, एक स्वर से की, लेकिन निर्णय नहीं होता था। ये आपका नेतृत्व है जिसने निर्णय किया, चीजों को आगे बढ़ाया,  सरकार के साथ विविध मीटिंगे की, और उसी का परिणाम है कि आज देश को ये नया संसद भवन प्राप्त हुआ है।
आदरणीय सभापति जी,
संसद के नए भवन में एक विरासत का अंश और जो आजादी का पहला पल था उसको जीवंत रखने का हमेशा-हमेशा हमारे मार्गदर्शक रूप में ये सेंगोल को यहां स्‍थापित करने का काम और अब प्रति वर्ष उसको सेरेमोनियल इवेंट के रूप में उसको हिस्‍सा बनाने का एक बहुत बड़ा काम आपके नेतृत्‍व में हुआ है जो भारत की आने वाली पीढ़ियों को हमेशा-हमेशा हमें आजादी के उस प्रथम पल के साथ जोड़ कर रखेगा। और आजादी का वो पल क्‍यों था, हमें वो याद रहेगा तो देश को आगे ले जाने की वो प्रेरणा भी बनी रहेगी, उस पवित्र काम को आपने किया है। 
आदरणीय सभापति जी,
ये भी सही है, इस कालखंड में जी 20 की अध्यक्षता का भार तो मिला, भारत को बहुत सम्मान मिला, देश के हर राज्य ने विश्व के सामने भारत का सामर्थ्य और अपने राज्‍य की पहचान बखूबी प्रस्‍तुत की, जिसका प्रभाव आज भी विश्व के मंच पर है। उसके साथ आपके नेतृत्‍व में जी 20 की तरह पी 20 का जो सम्मेलन हुआ और विश्व के अनेक देशों के स्‍पीकर्स यहां आए और Mother of democracy, भारत की इस महान परंपरा को ले करके, इस democratic values को ले करके सदियों से हम आगे बढ़े हैं। व्‍यवस्‍थाएं बदली होंगी लेकिन democratic मन भारत का हमेशा बना रहा है, उस बात को आपने विश्‍व के स्‍पीकर्स के सामने बखूबी प्रस्तुत किया और भारत को लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में भी एक प्रतिष्ठा प्राप्‍त कराने का काम आपके नेतृत्व में हुआ।
आदरणीय सभापति जी,
मैं एक बात के लिए आपका विशेष अभिनंदन करना चाहता हूं, शायद हमारे सभी माननीय सांसदों का और मीडिया का भी उस तरफ ध्‍यान नहीं गया है। हम संविधान सदन जिसको कहते हैं, जो पुरानी संसद, जिसमें महापुरुषों के जन्मजयंती के निमित्त उनकी प्रतिमा को पुष्प चढ़ाने के निमित्त हम लोग एकत्र होते हैं। लेकिन वो एक 10 मिनट का ईवेंट होता था और हम लोग चले जाते थे। आपने देशभर में इन महापुरुषों के लिए वक्‍तव्‍य स्पर्धा, निबंध स्पर्धा का एक अभियान चलाया है। उसमें से जो बेस्ट ऑरेटर होते थे और बेस्ट Essays होते थे और राज्‍य से दो-दो बालक उस दिन दिल्‍ली आते थे और उस महापुरुष की जन्म-जयंती के समय पुष्प वर्षा में वो मौजूद रहते थे, देश के नेता भी, और बाद में पूरा दिन रह करके उस पर अपना व्‍याख्‍यान देते थे। वे दिल्‍ली के अन्‍य स्‍थान पर जाते थे, वो सांसद की गतिविधियों को समझते थे यानी आपने जो निरंतर प्रक्रिया चला करके देश के लाखों विद्यार्थियों को भारत की संसदीय परम्परा से जोड़ने का बहुत बड़ा काम किया है। और ये परम्‍परा, ये आपके खाते में रहेगी और आने वाले समय में हर कोई बड़े गर्व के साथ इस परम्परा को आगे बढ़ाएगा। मैं इसके लिए भी आपका अभिनंदन करता हूं।
आदरणीय अध्‍यक्ष जी,
संसद की लाइब्रेरी, जिसको उपयोग करना चाहिए वो कितना कर पाते थे, वो तो मैं नहीं कह सकता, लेकिन आपने उसके दरवाजे सामान्‍य व्‍यक्ति के लिए खोल दिए। ज्ञान का ये खजाना, परम्‍पराओं की विरासत, उसको आपने जनसामान्‍य के लिए खोल करके बहुत बड़ी सेवा की है, इसके लिए भी आपका हृदय से अभिनंदन करता हूं। पेपरलेस पार्लियामेंट, डिजिटलाइजेशन, आपने आधुनिक टेक्नोलॉजी हमारी व्यवस्था में कैसे बने, शुरू में कुछ साथियों को दिक्‍कत रही लेकिन अब सब इसके आदी हो गए हैं। जब मैं देखता हूं जब यहां बैठे हैं तो कुछ न कुछ करते रहते हैं, अपने-आप में एक बहुत बड़ा काम आपने किया है, ये एक स्थायी व्‍यवस्‍थाएं आपने निर्माण की हैं। मैं इसके लिए बहुत आभार व्यक्त करता हूं।
आदरणीय अध्यक्ष जी,
आपकी कुशलता और इन माननीय सांसदों की जागरूकता, उन सबका संयुक्त प्रयास मैं कह सकता हूं कि जिसके कारण 17वीं लोकसभा की productivity करीब-करीब 97 परसेंट रही है। 97 परसेंट productivity अपने-आप में प्रसन्‍नता का विषय है लेकिन मुझे विश्‍वास है कि आज जब हम 17वीं लोकसभा की समाप्ति की तरफ हम बढ़ रहे हैं तब एक संकल्‍प ले करके 18वीं लोकसभा प्रारंभ होगी कि हम हमेशा शत-प्रतिशत से ज्‍यादा productivity वाली हमारी कार्यवाही रहेगी। और इसमें भी सात सत्र 100 प्रतिशत से भी ज्‍यादा productivity वाले रहे, ये भी। और मैंने देखा आपने रात-रात भर बैठ-बैठ करके हर सांसदों के मन की बात को आपने सरकार के ध्‍यान में लाने का भरपूर प्रयास किया। मैं इन सफलताओं के लिए सभी माननीय सांसदों का और सभी फ्लोर लीडर्स का भी हृदय से आभार और अभिनंदन व्‍यक्‍त करता हूं। पहले सत्र में, 17वीं लोकसभा के पहले सत्र में दोनों सदन ने 30 विधेयक पारित किए थे,   ये अपने-आप में रिकॉर्ड है। और एक नए-नए बेंचमार्क 17वीं लोकसभा में बनाए हैं।
आदरणीय अध्‍यक्ष जी,
आजादी के 75 वर्ष पूरा होने का उत्‍सव, हम सबको कितना बड़ा सौभाग्य मिला है कि ऐसे अवसर पर हमारे सदन ने अत्यंत महत्वपूर्ण कामों का नेतृत्व किया है, हर स्‍थान पर हुआ। शायद ही कोई सांसद ऐसा होगा कि जिसने आजादी के 75 वर्ष को लोकोत्सव बनाने में अपने-अपने क्षेत्र में भूमिका अदा न की हो। यानी सचमुच में आजादी के 75 वर्ष को देश ने जी भर करके उत्सव से मनाया और उसमें हमारे माननीय सांसदों की और इस सदन की बहुत बड़ी भूमिका रही है। हमारे संविधान लागू होने के 75 वर्ष, ये भी अवसर इसी समय इसी सदन को मिला है, इसी सभी माननीय सांसदों को मिला है और संविधान की जो भी जिम्मेदारियां हैं उनकी शुरुआत यहां से होती है और उनके साथ ही जुड़ना, ये अपने-आप में बहुत बड़ी प्रेरक है।
आदरणीय अध्‍यक्ष जी,
इस कार्यकाल में बहुत ही Reforms हुए हैं और game-changer है। 21वीं सदी के भारत की मजबूत नींव उन सारी बातों में नजर आती है। एक बड़े बदलाव की तरफ तेज गति से देश आगे बढ़ा है और इसमें भी सदन के सभी साथियों ने बहुत ही उत्तम मार्गदर्शन किया है, अपनी हिस्‍सेदारी जताई है और देश…हम संतोष से कह सकते हैं कि हमारी अनेक पीढ़ियां जिन बातों का इंतजार करती थीं, ऐसे बहुत से काम इस 17वीं लोकसभा के माध्यम से पूरे हुए, पीढ़ियों का इंतजार खत्म हुआ। अनेक पीढ़ियों ने एक संविधान, इसके लिए सपना देखा था। लेकिन हर पल वो संविधान में एक दरार दिखाई देती थी, एक खाई नजर आती थी। एक रुकावट चुभती थी। लेकिन इसी सदन ने धारा 370, आर्टिकल 310 हटा करके संविधान के पूर्ण रूप को इसके पूर्ण प्रकाश के साथ उसका प्रकटीकरण हुआ। और मैं मानता हूं जब संविधान के 75 वर्ष हुए हैं…जिन-जिन महापुरुषों ने संविधान को बनाया है उनकी आत्मा जहां भी होगी, जरूर हमें आशीर्वाद देते होंगे, ये काम हमने पूरा किया है। कश्मीर के भी जम्मू-कश्मीर के लोगों को सामाजिक न्याय से वंचित रखा गया था। आज हमें संतोष है कि सामाजिक न्‍याय का हमारा जो कमिटमेंट है, वो हमारे जम्मू-कश्‍मीर के भाई-बहनों को भी पहुंचा करके हम आज एक संतोष की अनुभूति कर रहे हैं। 
आदरणीय अध्यक्ष जी,
आतंकवाद नासूर बनकर देश के सीने पर गोलियां चलाता रहता था। मां भारती की धरा आए दिन रक्तरंजित हो जाती थी। देश के अनेक वीर होनहार लोग, आतंकवाद के कारण बलि चढ़ जाते थे। हमने आतंकवाद के विरुद्ध सख्त कानून बनाए, इसी सदन ने बनाए। मुझे पक्का विश्वास है कि उसके कारण, जो लोग ऐसी समस्याओं के लिए जूझते हैं उनको एक बल मिला है। मानसिक रूप के अनुसार Confidence बढ़ा है। और भारत को पूर्ण रूप से आतंकवाद से मुक्ति का उसमें एक एहसास हो रहा है। और वो सपना भी सिद्ध हो कर रहेगा। हम 75 साल तक अंग्रेजों की दी हुई दंड संहिता में जीते रहे हैं। हम गर्व से कहेंगे देश को, नई पीढ़ी को कहेंगे, आप अपने पोती-पोती को कह सकेंगे गर्व से कि देश 75 साल भले ही दंड संहिता में जिया है लेकिन अब आने वाले पीढ़ी न्याय संहिता में जियेगी। और यही सच्चा लोकतंत्र है।
आदरणीय अध्यक्ष जी, 
मैं आपको एक बात के लिए और अभिनंदन करना चाहूंगा कि नया सदन, इसकी भव्यता वगैरह तो है ही लेकिन उसका प्रारंभ एक ऐसे काम से हुआ है जो भारत को मूलभूत मान्यताओं को बल देता है और वो नारी शक्ति वंदन अधिनियम है। जब भी इस नए सदन की चर्चा होगी तो नारी शक्‍ति वंदन अधिनियम इसका जिक्र, यानि एक और भले जी वो छोटा सत्र था लेकिन दूरगामी निर्णय करने वाला सत्र था। इस नए सदन की पवित्रता का एहसास उसी पल शुरू हो गया था जो हम लोगों को एक नई शक्ति देने वाला है और उसी का परिणाम है कि आने वाले समय जब बहुत बड़ी मात्रा में यहां हमारी माताएं-बहनें बैठी होंगी, देश गौरव की अनुभूति करेगा। तीन तलाक कितने उतार-चढ़ाव से हमारी मुस्लिम बहनें इंतजार कर रही थीं। अदालत ने उनके पक्ष में निर्णय किए थे, लेकिन वो हक उनको प्राप्त नहीं हो रहा था। मजबूरियों से गुजारा करना पड़ा रहा था। कोई प्रकट रूप से कहे, कोई अप्रकट रूप से कहे। लेकिन तीन तलाक से मुक्ति का बहुत महत्वपूर्ण और नारी शक्ति के सम्मान का काम 17वीं लोकसभा ने किया है। सभी माननीय सांसद उनके विचार कुछ भी रहे हों, उनका निर्णय कुछ भी रहा हो, लेकिन कभी न कभी तो वो कहेंगे कि हां इन बेटियों का न्याय देने का काम भी करने में हम यहां प्रस्तुत रहे। पीढ़ियों से होता ये अन्याय हमने पूरा किया है और वो बहने हमें आशीर्वाद दे रही हैं। 
आदरणीय अध्यक्ष जी, 
आने वाले 25 वर्ष हमारे देश के लिए हमारे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। राजनीति की गहमागहमी अपनी जगह पर है। राजनीति क्षेत्र के लोगों की आशा-आकांक्षा अपनी जगह पर है। लेकिन देश की अपेक्षा, देश की आशंका, देश की सपना, देश का संकल्प, ये बन चुका है… 25 साल हो गए हैं तो देश इच्छित परिणाम प्राप्त करके रहेगा। 1930 में जब महात्मा गांधी जी ने दांडी की यात्रा की थी, जब नमक का सत्याग्रह था। घोषणा होने के पहले लोगों को सामर्थ्‍य नजर नहीं आया था। चाहे स्वदेशी आंदोलन हो, चाहे सत्याग्रह की परंपरा हो, चाहे नमक का सत्याग्रह हो। उस समय तो घटनाएं छोटी लगती थी लेकिन 1947, वो 25 साल का कालखण्ड, उसने देश के अंदर वो जज्बा पैदा कर दिया था। हर व्यक्ति के दिल में वो जज्बा पैदा कर दिया था कि अब तो आजाद होकर रहना है। मैं आज देख रहा हूँ कि देश में वो जज्बा पैदा हो रहा है। हर गली-मोहल्ले में हर बच्चे के मुंह से निकला है कि 25 साल में हम विकसित भारत बना के रहेंगे। इसलिए ये 25 साल मेरी देश की युवा शक्ति के अत्यंत महत्वपूर्ण कालखंड हैं। और हम में से कोई ऐसा नहीं होगा जो नहीं चाहता होगा कि 25 साल में देश विकसित भारत न बने। हर किसी का सपना है, कुछ लोगों ने सपने को संकल्प बना लिया है, कुछ लोगों को शायद संकल्प बनाते देर हो जाएगी, लेकिन जुड़ना तो हरेक को होगा और जो जुड़ भी नहीं पाएंगे और जीवित होंगे तो फल तो जरूर खाएंगे, ये मेरा विश्‍वास है।  
आदरणीय अध्यक्ष जी, 
ये 5 वर्ष युवाओं के लिए बहुत ही ऐतिहासिक कानून के भी बने हैं। व्यवस्था में पारदर्शिता लाकर युवाओं को नए मौके दिए गए हैं। पेपर लीक जैसी समस्या जो हमारे युवाओं को चिंतित करती थी। हमने बहुत ही कठोर बनाया है ताकि उनके मन में जो सवाल या निशान है और उनको व्यवस्था के प्रति उनका गुस्सा था उसको एड्रेस करने का सभी माननीय सांसदों ने देश के युवाओं के मन के भाव को समझ करके बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय किया है। 
आदरणीय अध्यक्ष जी, 
ये बात सही है कि कोई भी मानव जाति अनुसंधान के बिना आगे नहीं बढ़ सकती है। उसको नित्य परिवर्तन के लिए अनुसंधान अनिवार्य होते हैं। और मानव जाति का लाखों साल का इतिहास गवाह है कि हर कालखंड में अनुसंधान होते रहे हैं, जीवन बढ़ता चला गया है, जीवन का विस्तार होता गया है। इस सदन ने विधिवत रूप से कानूनी व्यवस्था खड़ी करके अनुसंधान को प्रोत्साहन देने का बहुत बड़ा कार्य किया है। National Research Foundation, ये कानून आम तौर पर रोजमर्रा की राजनीति की चर्चा का विषय बन नही पाता, लेकिन इसके परिणाम बहुत दूरगामी होने वाले हैं और इतना बड़ा महत्वपूर्ण काम इस 17वीं लोकसभा ने किया है। मुझे पक्का विश्वास है देश की युवा शक्ति में… इस व्यवस्था के कारण दुनिया का रिसर्च का एक हब हमारा देश बन सकता है। हमारे देश के युवा के talent ऐसी है, आज भी दुनिया की बहुत कंपनियां ऐसी हैं जिनकी innovation के काम आज भी भारत में हो रहे हैं। लेकिन ये बहुत बड़ा हब बनेगा, ये मेरा पूरा विश्‍वास है। 
आदरणीय अध्यक्ष जी, 
21वी सदी में हमारी basic needs पूरी तरह बदल रही हैं। कल तक जिसका कोई मूल्य नहीं था, कोई ध्यान नहीं था वो आने वाले समय में बहुत अमूल्य बन चुका है जैसे डेटा… पूरी दुनिया में चर्चा है डेटा का सामर्थ्य क्या होता है। हमने Data Protection Bill लाकर के पूरी भावी पीढ़ी को सुरक्षित कर दिया है। पूरी भावी पीढ़ी को एक नया शस्त्र हमने उसके हाथ मे दिया है जिसके आधार पर वो अपने भविष्य को बनाने के लिए इसका सही इस्तेमाल भी करेंगे। और Digital Personal Data Protection Act, ये हमारी 21वी सदी की पीढ़ी को और दुनिया के लोगों को भी भारत के इस एक्ट के प्रति रुचि बनी हुई है। दुनिया के देश उसका अध्ययन करते हैं। अपने-अपने नई-नई व्यवस्था अनुकूल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। और डेटा का उपयोग कैसे हो, उसकी भी उसमें गाइडलाइंस हैं। यानि एक प्रकार से प्रोटेक्‍शन का पूरा प्रबंध करते हुए इसका सामर्थ्य कैसे आए, जिस डेटा को लोग गोल्ड माइन कहते हैं, new oil कहते हैं। मैं समझता हूँ वो सामर्थ्य भारत को प्राप्त है और भारत इस शक्ति का इसलिए विशेष है, क्योंकि विविधताओं से भरा हुआ देश है। हमारे पास जिस प्रकार की जानकारियां और हमारे साथ जुड़ा हुआ डेटा जो जनरेट होता है, सिर्फ हमारे रेलवे पेसेंजर्स का डेटा कोई देख लें, दुनिया के लिए बहुत बड़ा शोध का विषय बन सकता है।  उसकी ताकत को हमनें पहचान करके इस कानूनी व्यवस्था को दिया है।
आदरणीय अध्यक्ष जी,
जल थल नभ ये सदियों से इन क्षेत्रों की चर्चा चली है। लेकिन अब समुद्री शक्ति और स्पेस की शक्ति और साइबर की शक्ति, ये ऐसी त्रिविध शक्तियों का मुकाबला करने की आवश्यकता खड़ी हुई है, और विश्व जिस प्रकार के संकटों से गुजर रहा है। और विश्व जिस प्रकार की विचारीय प्रभाव पैदा करने का प्रयास कर रहे है तब इन क्षेत्रों में हमें सकारात्मक सामर्थ्य भी पैदा करना है और नकारात्मक शक्तियों से अपने आप को हर चुनौतियों से चुनौती लेने का सामर्थ्य भी बनाना है। और उसके लिए आवश्यक स्पेस से जुड़े रिफॉर्म्स बहुत अनिवार्य थे और बहुत दूरगामी दृष्टि के साथ स्पेस के रिफार्म का काम हमारे यहां हुआ है।
आदरणीय अध्यक्ष जी,
देश ने जो आर्थिक रिफॉर्म किए हैं उसमें सत्रहवीं के लोकसभा के सभी माननीय सांसदों की बहुत बड़ी भूमिका रही है। बीते वर्षों में हजारों compliances ने बेवजह हम जनता जनार्दन को ऐसी चीजों में उलझाए रखा। ये गर्वनेंस की ऐसी विकृत व्यवस्थाएं विकसित हो गई उसमें से मुक्ति दिलाने का बहुत बड़ा काम हमारे यहां हुआ है और इसके लिए भी इस सदन का मैं आभारी हूं। यानी इस प्रकार के compliances के बोझ में सामान्य व्यक्ति तो दब जाता है। और मैंने तो एक बार लाल किले से भी कहा था। हम जब minimum government, maximum governance कहते हैं। मैं दिल से मानता हूं कि लोगों की जिंदगी में से जितना जल्द सरकार निकल जाए, उतना ही लोकतंत्र का सामर्थ्य बढ़े़गा। रोजमर्रा की जिंदगी में हर डगर पर सरकार टांग क्यों अड़ा रही है? हां जो अभाव में है उसके लिए सरकार हर पल मौजूद होगी। लेकिन सरकार का प्रभाव उसकी जिंदगी को ही रुकावट बना दे ऐसी लोकतंत्र नहीं हो सकता है। और इसलिए हमारा मकसद है सामान्य मानवीय की जिंदगी से सरकार जितनी हट जाए, कम से कम उसकी जिंदगी में सरकार का नाता रहे वैसा समृद्ध लोकतंत्र दुनिया के सामने हमने आगे बढ़ाना चाहिए। उस सपने को पूरा करेंगे।
आदरणीय अध्यक्ष जी,
Companies Act, Limited Liability Partnership Act, साठ से अधिक गैर जरूरी कानूनों को हमनें हटाया है। Ease of doing business इसके लिए ये बहुत बड़ी आवश्यकता थी क्योंकि अब देश को आगे बढ़ना है तो बहुत सारी रूकावटों से बाहर आने पड़ेगा। हमारे कई कानून तो ऐसे थे छोटे-छोटे कारणों से जेल में भर दो बस। यहां तक की फैक्ट्री है और उसके शौचलय को छह महीने में एक बार अगर व्हाइट पोस्ट नहीं किया तो उसके लिए जेल थी। वो कितनी बड़ी कंपनी का मालिक क्यों न हो। अब ये जो एक प्रकार की जो अपने आप को बड़े लेफ्ट लिबरल कहते हैं उन लोगों की ideology और देश में ये कुमार शाही का जमाना, उन सारों से मुक्ति दिलाने का हमें भरोसा होना चाहिए भई। वो करेगा लोगों के घरो में लीप पोत के। वो सोसाइयटी फ्लैट वाले लोग अपनी लिफ्ट नीचे ऊपर करते ही हैं जी। हर चीज कर लेते हैं। तो ये जो समाज पर नागरिक पर भरोसा करने का काम, बहुत तेजी से बढ़ाने का काम सत्रहवीं लोकसभा ने किया है। और भी चलिए- जन विश्वास एक्ट। मैं समझता हूं 180 से ज्यादा प्रावधान decriminalize करने का काम किया है। जो मैंने कहा छोटी-छोटी बात के लिए जेल में डाल देना। ये decriminalize करके हमनें नागरिक को ताकत दी है। वो इसी सदन ने किया है, यही माननीय सांसदों ने किया है। कोर्ट के चक्कर से जिंदगी बचाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण काम कोर्ट के बाहर विवादों से मुक्ति उस दिशा में महत्वपूर्ण काम मध्यस्थता का कानून उस दिशा में भी इसी माननीय सांसदों ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। जो हमेशा हाशिये पर थे, किनारे पर थे, जिनको कोई पूछता नहीं था। सरकार होने का उनको एहसास हुआ है। हां सरकार अहम है जब कोविड में मुफ्त इंजेक्शन मिलता था ना, उसको भरोसा होता था चलिए जान बच गई। सरकार होने का उसको एहसास होता था और यही तो सामान्य मानवीय की जिंदगी में बहुत आवश्यक है। वो असहायता का अनुभव अब क्या होगा, ये स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।
ट्रांसजेंडर समुदाय अपमानित महसूस करता था। और जब बार-बार वो अपमानित होता था तो उसके अंदर भी विकृतियों की संभावना बढ़ती रहती थी…और ऐसे विषयों से हम लोग दूर भागते थे। 17वीं लोकसभा के सभी माननीय सांसदों ने ट्रांसजेंडर्स के प्रति भी संवेदना जताई और उनके जीवन में भी बेहतरीन जिंदगी बने। और आज दुनिया के अंदर जब भारत ने ट्रांसजेंडर के लिए किए हुए काम और जो निर्णय किए हैं, इनकी चर्चा है। दुनिया को बड़ा, दुनिया को बड़ा, जब हम कहते हैं ना हमारे यहां…ईवन हमारी माता-बहनों के लिए प्रेगनेंसी के लिए 26 वीक की डिलीवरी के समय की छुट्टी…दुनिया के समृद्ध देशों को भी आश्चर्य होता है, अच्‍छा ! यानी ये progressive निर्णय यहीं पर हुए हैं, इसी 17वीं लोकसभा में हुए हैं। हमने ट्रांसजेंडर को एक पहचान दी है। अब तक करीब 16-17 हजार ट्रांसजेंडर को उनका identity card दिया गया है ताकि उनके जीवन को, और मैंने देखा है अब तो मुद्रा योजना से पैसे ले करके छोटा-मोटा वो बिजनेस करने लगी हैं, कमाने लगी हैं। पदमा अवार्ड हमने ट्रांसजेंडर्स को दिया है, एक सम्‍मान की जिंदगी जीने के लिए। सरकार से जुड़ी अनेक योजनाओं का लाभ उन्‍हें जब तक मिलता रहेगा, मिलना प्रारंभ हुआ है वो सम्‍मान की जिंदगी जीने लगे हैं। 
आदरणीय अध्‍यक्ष जी,
बहुत विकट काल में हमारा समय गया क्‍योंकि डेढ़-दो साल कोविड ने हमारे ऊपर बहुत बड़ा दबाव किया था, लेकिन उसके बावजूद भी 17वीं लोकसभा देश के लिए बहुत उपकारक रही है, बहुत अच्‍छे काम किए हैं। लेकिन इस समय हमने कई साथियों को भी खो दिया है। हो सकता है अगर आज वो हमारे बीच होते तो आज इस विदाई समारोह में मौजूद होते। लेकिन बीच में ही कोविड के कारण हमें बहुत होनहार साथियों को खोना पड़ा है। उसका दुख हमेशा-हमेशा हमें रहेगा।
आदरणीय अध्‍यक्ष जी,
17वीं लोकसभा का ये अंतिम सत्र और अंतिम hour ही समझ लीजिए, है। लोकतंत्र और भारत की यात्रा अनंत है। अनेक और ये देश किसी purpose के लिए है, उसका कोई लक्ष्‍य है वो पूरी मानव जाति के लिए है। ऐसे ही अरविंद ने देखा हो, चाहे स्‍वामी विवेकानंद जी ने देखा हो। लेकिन आज उन शब्‍दों में, उस विज़न में सामर्थ्‍य था वो हम आंखों के सामने देख पा रहे हैं। दुनिया जिस प्रकार से भारत के महात्‍मय को स्‍वीकार कर रही है, भारत के सामर्थ्‍य को स्‍वीकारने लगी है, और इसको, इस यात्रा को हमें और शक्ति के साथ आगे बढ़ाना है।
आदरणीय अध्‍यक्ष जी,
चुनाव बहुत दूर नहीं हैं। कुछ लोगों को थोड़ी घबराहट रहती होगी, लेकिन ये लोकतंत्र का सहज, आवश्‍यक पहलू है। हम सब उसको गर्व से स्‍वीकार करते हैं। और मुझे विश्‍वास है कि हमारे चुनाव भी देश की शान बढ़ाने वाले, लोकतंत्र की हमारी जो परंपरा है, पूरे विश्‍व को अचंभित करने वाले अवश्‍य रहेंगे, ये मेरा पक्‍का विश्‍वास है।
आदरणीय अध्‍यक्ष जी,
मैं सभी माननीय सांसदों का जो सहयोग मिला है, जो निर्णय हम कर पाए हैं, और कभी-कभी हमले भी इतने मजेदार हुए हैं कि हमारे भीतर की शक्ति भी खिल करके निकली है। और मेरा तो परमात्‍मा की कृपा रही कि जब चुनौती आती है तो जरा और आनंद आता है। हर चुनौती का हम सामना कर पाए हैं, बड़े आत्‍मविश्‍वास और विश्‍वास के साथ हम चले हैं। आज राम मंदिर को ले करके इस सदन ने जो प्रस्‍ताव पारित किया है, वो देश की भावी पीढ़ी को, इस देश की मूल्‍य पर गर्व करने की संवैधानिक शक्ति देगा। ये सही है कि हर किसी में ये सामर्थ्‍य नहीं होता है कि ऐसी चीजों में कोई हिम्‍मत दिखाते हैं, कुछ लोग मैदान छोड़कर भाग जाते हैं। लेकिन फिर भी भविष्‍य के रिकॉर्ड को देखेंगे तो आज जो व्‍याख्‍यान हुए हैं, जो बातें रखी गई हैं, उसमें संवेदना भी है, संकल्‍प भी है, सहानुभूति भी है और सबका साथ-सबका विकास के मंत्र को आगे बढ़ाने का उसमें तत्‍व भी है। ये देश, बुरे दिन कितने ही क्‍यों न गए हों, हम भावी पीढ़ी के लिए कुछ न कुछ अच्‍छा करते रहेंगे। ये सदन हमें वो प्रेरणा देता रहेगा और हम सामूहिक संकल्‍प से, सामूहिक शक्ति से उत्तम से उत्तम परिणाम, भारत की नौजवान पीढ़ी की आशा-आकांक्षा के अनुसार करते रहेंगे।
इसी विश्‍वास के साथ फिर एक बार आपका आभार प्रकट करता हूं, सभी माननीय सांसदों का आभार प्रकट करता हूं।

पर्यटन व स्वरोजगार का संदेश देने रात्रि चौफाल में सीमांत ग्राम ठाटा, लोहाघाट(चंपावत)पंहुचे मुख्यमंत्री धामी

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मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से किया सीधा जन संवाद।

10 फरवरी 2024,शनिवार,चम्पावत /देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश

देहरादून /चम्पावत, 10 फरवरी “गांव चलो अभियान” अंतर्गत सीमांत क्षेत्र के ग्राम ठाटा (वि0ख0 लोहाघाट) दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी! इस अवसर पर विभिन्न गांवों से आयी क्षेत्रीय जनता द्वारा मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया।

अपने कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी जनता के बीच नन्हे बच्चों से भी रूबरू हुए और उनसे बातचीत कर उनका हालचाल जाना।

मुख्यमंत्री ने ठाटा गांव के मां भगवती मंदिर में पूजा अर्चना कर जनपद व प्रदेश की सुख, शांति व समृद्धि की कामना की।

रात्रि चौपाल के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री धामी लोगों के बीच प्रत्येक व्यक्ति की समस्याओ से रूबरू हुए। उन्होंने कहा सरकार की योजनाओं एवं प्रशासन द्वारा किए जा रहे काम को आमजन के बीच बैठकर ही समझा जा सकता है।
मुख्यमंत्री द्वारा ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान व सभी पात्र लोगों को सरकारी योजना का लाभ हर गांव, हर परिवार तक पहुंचाए जाने पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में घर- घर तक आज रसोई गैस पंहुच गई है। साथ ही अब घर- घर शुद्ध पानी पंहुच रहा है।
ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि हमें पहले फोला (गगरी) लेकर सुबह 3 बजे पानी लेने जाना पड़ता था पर अब घर पर ही पानी आ गया है
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिकी को सुदृढ़ कर और अधिक सशक्त बनाए जाने के लिए लखपति दीदी योजना पर कार्य किया जा रहा है। राज्य के अंतर्गत रोजगार के साथ ही युवा स्वरोजगार की ओर बढ़े। इसके लिए भी कई कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा जनपद चंपावत को आदर्श जनपद बनाए जाने हेतु कई विकास कार्य किए जा रहे हैं, ताकि यह जनपद राज्य के साथ- साथ पूरे देश में एक आदर्श जिले की मिसाल बने।
मुख्यमंत्री धामी ने गांव में बने होमस्टे में रात्रि विश्राम कर ग्रामीणों को स्वरोजगार का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि *राज्य के अंतर्गत होमस्टे को बढ़ावा मिले इसके लिए सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
सीएम ने कहा कि हमने संकल्प लिया कि उत्तराखंड में रहने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए एक समान कानून लाएंगे, समान नागरिक संहिता विधेयक पास कर प्रदेश में ऐतिहासिक कार्य किया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता के सहयोग से ही यह इतिहास बनाने का मौका मिला। हमने जो कहा वह किया।

सीएम श्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड शांतिप्रिय प्रदेश है। यहां की भूमि देवभूमि है। यहां बिलकुल भी गलत बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आज उत्तराखंड को आदर्श बनाने हेतु चंपावत जिले से शुरुआत हुई है। इस जिले को आदर्श जिला बनाया जा रहा है। जो आदर्श उत्तराखंड की ओर बढेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड का चौमुखी हो रहा हैं। केंद्र एवं राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े प्रत्येक व्यक्ति को मिले, इसके लिए अनेक योजनाएं बनाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा राज्य से भ्रष्टाचार खत्म हो इसके लिए 1064 सेवा शुरू की गई है, यह सरकार भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के “विकल्प रहित संकल्प” को पूर्ण कर रही है।
उन्होंने कहा सरकार एवं जनता आपसी समन्वय से हर संभव कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की कल्पना अनुसार हम उत्तराखंड राज्य के विकास को आगे बढ़ने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को आपसी समन्वय, इच्छा शक्ति, संकल्प शक्ति और सामूहिक शक्ति से हर कार्य को सरलीकरण कर उसका समाधान करेंगे।

सांसद अजय टम्टा ने समान नागरिक संहिता को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी ने इसे विधेयक को पास कराकर इतिहास रचने के साथ ही देश दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन किया है।

सीमांत क्षेत्र के ठाटा गांव की पल्लवी पंत जो आरबीआई अधिकारी बनी, उनके दादा आनंद देव जी को शाल ओढ़ाकर मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।
धामी, मां भगवती मंदिर प्रांगण में ग्रामीणों के साथ खड़ी होली गायन व देव स्तुति में भी शामिल हुए।

बहुभाषीय फिल्म फेस्टिवल ‘अमोदिनी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024’ का हुआ शानदार आगाज

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बहुभाषीय फिल्म फेस्टिवल ‘अमोदिनी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024’ का हुआ शानदार आगाज 
               राजधानी जयपुर में झालाना स्थित राजस्थान इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में डोला फाउंडेशन सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के द्वारा आयोजित दो दिवसीय बहुभाषीय ‘अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव अमोदिनी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024’ का शानदार तरीके से शुभारंभ किया गया। पहले दिन दीप प्रज्ज्वलित कर इस फेस्टिवल की शुरुआत की गई। इसके बाद में ‘हिन्दुत्व’, ‘डीप फ्रिज’, ‘आजमगढ़’, ‘अदृश्य’, ‘मटरीपक्ष’ समेत अन्य फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। इसके साथ ही पहले दिन तीन पैनल डिस्कशन का भी आयोजन किया गया। पहला पैनल डिस्कशन अंजू भट्ट द्वारा रिलीजियस इंपैक्ट ऑन दी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री, दूसरा थिएटर – ‘दी बेसिक ऑफ फिल्म एंड मीडिया’ बाय अभिषेक मुदगल और तीसरा ‘इसरो – दी गर्ल ड्रीम्ड टू बी एन एस्ट्रोनॉट’ जैसे विषयों पर डिस्कशन कर विस्तृत चर्चा की गई।10 और 11 फरवरी को आयोजित इस दो दिवसीय फिल्म फेस्टिवल में हिंदी, बंगाली, नेपाली, मलयालम, जर्मन सहित अन्य भाषाओं की 15 फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी साथ ही साथ थिएटर, फिल्म, मीडिया सहित अन्य सब्जेक्ट्स पर भी डिबेट होगी और पैनल डिस्कशन में बॉलीवुड के चर्चित निर्देशक अशोक पंडित उपस्थित रहेंगे। इस फिल्म बहुभाषीय फिल्म फेस्टिवल के आयोजक देवज्योति रे ने बताया कि इस फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य एकता का जश्न मनाना है। एक ऐसी विविधता जो भारत को परिभाषित करती है, देश की जीवंत संस्कृति और उसका प्रदर्शन करती है। अनेकता में एकता का उत्सव मनाकर व्यक्तियों को सशक्त बनाना और हमारे समग्र कल्याण को बढ़ाना यही इस फेस्टिवल का केंद्र बिंदु है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्मोड़ा को दी करोड़ों रुपए के योजनाओं की सौगात.

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10 फरवरी 2024,शनिवार, देहरादून
संजय बलिदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखण्ड प्रदेश

देहरादून /अल्मोड़ा, 10 फरवरी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को अल्मोड़ा के हवालबाग में आयोजित आजीविका महोत्सव (दीदी भुली हाथ लगाल, उत्तराखंडक हौल अमृत काल) में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुल 20213.60 लाख रू0 की योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिनमें 11702.67 लाख रू0 की योजनाओं का लोकार्पण एवं 8510.93 लाख रू0 की योजनाओं का शिलान्यास है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आमंत्रित अन्य अतिथियों सहित द्वीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया ! आस्थावान मुख्यमंत्री ने देवी शक्ति के स्वरूप 10 कन्याओं का पूजन किया तथा आशीर्वाद प्राप्त कर प्रदेश की सुख समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रूलर बिजनेस इन्क्यूवेटर में 21 महिला उद्यमियों से सीधे संवाद किया। इस दौरान उज्जवला सहकारिता की अध्यक्ष कमला लटवाल ने मुख्यमंत्री को सहकारिता के क्षेत्र में किये गये कार्यों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी उन्होने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में 98 लाख का टर्नओवर प्राप्त किया जिसमें से 10 लाख 15 हजार का लाभांश उन्हें प्राप्त हुआ। रूलर बिजनेस इन्क्यूवेटर आरबीआई से जुडी भवना शर्मा ने मुख्यमंत्री का पूरे प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने पर उन्हें बधाई दी। इस दौरान ललिता काण्डपाल ने मुख्यमंत्री को अपने द्वारा किये जा रहे मशरूम उत्पादन के बारे में अवगत कराया । प्रबन्धक आरबी आई योगेश भट्ट ने बताया कि जनपद अल्मोड़ा का 5 हजार लखपति दीदी बनाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया था उसमें जनपद अल्मोड़ा ने समय से पूर्व अपना लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार मातृशक्ति के उत्थान को समर्पित सरकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार लगातार महिलाओं के कल्याण हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी (समान नागरिक संहिता) को पारित कर जनता से किया वादा उन्होंने पूरा कर दिया है। उन्होंने समान नागरिक संहिता को देश एवं महिलाओं के विकास में मील का पत्थर कहा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी जाति, धर्म समुदाय के लिए न होकर पूरे राज्यवासियों के हितों के लिए है।

उन्होंने कहा कि गोल्जू भगवान की पावन धरती अल्मोड़ा में आकर वें स्वयं को अभिभूत महसूस कर रहे हैं। इतने बड़े जन सैलाब के द्वारा अल्मोड़ा से किए गए स्वागत के लिए उन्होंने अल्मोड़ा वासियों का अभिनंदन एवं धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह जनसैलाब हमारे संकल्प में ऊर्जा भरने का काम करता है। चंद राजाओं की भूमि सांस्कृतिक विशेषताओं को संजोए हुए हैं। यहां आर्गेनिक कृषि, दुग्ध विकास, एपन की अपनी अलग पहचान है। इन विशेषताओं को गति देकर अल्मोड़ा में विकास का नया आयाम शुरू होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सबका साथ सबका विकास एवं सबका विश्वास के मंत्र पर हमारी सरकार अग्रसर है। कहा कि डबल इंजन की सरकार प्रदेश में विकास की गंगा बहाने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की आबोहवा खराब नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि जो भी देवभूमि की छवि खराब करने का प्रयास करेगा उसके साथ सख्ती से निपटा जाएगा। पूरे प्रदेश में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की लगातार कार्रवाई गतिमान है तथा यह इसी प्रकार चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि जो भी सरकारी कार्य में बाधा डालेगा उसके साथ सख्ती से निपटा जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को चेक वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया।

 

उद्यमशीलता को बढ़ावा देने हेतु 111 करोड़ रुपए के ऋण चेक महिलाओं को वितरित किए।
मुख्यमंत्री धामी कि घोषणाओं में भतरौजखान में स्टेडियम का निर्माण, विकासखण्ड लगमड़ा के सर्वादय इण्टर कालेज में 04 कक्षों का निर्माण कार्य, तिलोरा में सिंचाई पम्पिंग योजना, विकासखण्ड हवालबाग के समीप मिनी स्टेडियम का निर्माण, सल्ट के गुलमरा-गैरखेत मोटर मार्ग का डामरीकरण एवं विकासखण्ड द्वाराहाट के ग्रामसभा सकुनी में शुक्रेश्वर महादेव मन्दिर का जीर्णाद्वार का अवशेष कार्य मुख्य है ।

मुख्यमंत्री ने ‘मातृ-शक्ति आजीविका महोत्सव’ में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टाल्स एवं शिल्पकार गैलरी का निरीक्षण किया। मातृशक्ति द्वारा निर्मित विभिन्न उत्पादों का अवलोकन करते हुए पहाड़ी नमक पीसने व घी तैयार कर पुरानी स्मृतियों को जीवंत किया। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों द्वारा निर्मित ताम्र शिल्प उत्पादों, हथकरघा उत्पादों के साथ ही स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा वैज्ञानिक सिद्धांतों पर बनाए गए विभिन्न प्रोजेक्टों का अवलोकन किया।

स्थानीय सांसद अजय टम्टा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दौर में नई नई उपलब्धियां प्रदेश हासिल कर रहा है। समान नागरिक संहिता को लागू करने पर उन्होंने पूरे संसदीय क्षेत्र की तरफ से मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया तथा प्रदेशवासियों को बधाई दी।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष भाजपा अल्मोड़ा रमेश बहुगुणा, रानीखेत लीला बिष्ट, विधायक जागेश्वर मोहन सिंह मेहरा, सल्ट महेश जीना, विधायक कपकोट सुरेश गड़िया, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, राज्य मंत्री शिव सिंह बिष्ट, महिला आयोग उत्तराखंड की उपाध्यक्ष ज्योति शाह मिश्रा, अनिल शाही सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

अमृतकाल में जनजातीय समुदाय की आकांक्षाओं का  सम्मान

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(विष्णुदत्त शर्मा-विनायक फीचर्स)
आज़ादी का ये अमृतकाल, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का काल है। भारत की आत्मनिर्भरता, जनजातीय भागीदारी के बिना संभव ही नहीं है। भारत की सांस्कृतिक यात्रा में जनजातीय समाज का योगदान अटूट रहा है। गुलामी के कालखंड में विदेशी शासन के खिलाफ खासी-गारो आंदोलन, मिजो आंदोलन, कोल आंदोलन समेत कई संग्राम हुए। गोंड महारानी वीर दुर्गावती का शौर्य हो या फिर रानी कमलापति का बलिदान, देश इन्हें भूल नहीं सकता। वीर महाराणा प्रताप के संघर्ष की कल्पना उन बहादुर भीलों के बिना नहीं की जा सकती जिन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर महाराणा प्रताप के साथ लड़ाई के मैदान में अपने-आप को बलि चढ़ा दिया था। हम इस ऋण को कभी चुका नहीं सकते, लेकिन इस विरासत को संजोकर, उसे उचित स्थान देकर, अपना दायित्व जरूर निभा सकते हैं। जिसकी दिशा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
मई,  2014 में जब प्रधानमंत्री के रूप में मोदी जी ने दायित्व संभाला, उसी दिन से जनजातीय समाज के उत्थान के प्रयास शुरू कर दिए थे। देश में 110 से अधिक जिले ऐसे थे, जो हर क्षेत्र में पिछड़े हुए थे। पहले की सरकार बस उनकी पहचान कर के छोड़ देती थी। मोदी जी की सरकार ने इन जिलों को आकांक्षी जिला घोषित किया। इन जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसे अनेक विषयों पर शून्य से काम शुरू करके सफलता के नए आयाम स्थापित किये। हाल ही में महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री जी ने कहा कि, “सबका साथ, सबका विकास सिर्फ एक नारा नहीं है, यह मोदी जी की गारंटी है।” और निश्चित ही भारत सरकार आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध है,  जिसके तहत आदिवासी समाज को, देश के विकास में उचित भागीदारी दी जा रही है।
मुझे याद है,  15 नवंबर 2023 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने झारखंड में भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू में अमृतकाल के 25 वर्ष में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए चार अमृत मंत्र दिए थे। इसी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जी ने 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान-पीएम जन मन का शुभारंभ किया,  जिसमें 75 विशेषरूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के साथ पोषण तथा आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाना है। जनजातीय गौरव दिवस पर ही प्रधानमंत्री जी ने सामाजिक न्याय तथा सभी को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विकसित भारत संकल्प यात्रा का शुभारंभ किया था,जिसमें गांव-गांव तक पहुंचकर हर गरीब, हर वंचित को सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाया गया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के जनजातीय सशक्तीकरण के संकल्प स्वरूप ही श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी राष्ट्रपति निर्वाचित हुई हैं, जो भारतीय लोकतंत्र की एक अविस्मरणीय घटना है।हमारे देश में जनजातीय समाज को शीर्ष पर प्रतिनिधित्व देने में भी देश को सात दशकों की लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ी। हम लोगों ने यह भी देखा है जब जनजातीय समाज से आने वाले तुलसी गौड़ा जी, राहीबाई, सोमा पोपेरे जैसे महानुभावों को जब पद्म पुरस्कारों से अलंकृत किया गया,  तब वे राष्ट्रपति भवन के लाल कालीन पर नंगे पांव पहुंचे और भारतवर्ष समेत समूचे विश्व ने तालियां बजाई क्योंकि स्वतंत्रता के बाद पहली बार किसी सरकार ने साधारण दिखने वाली इन असाधारण हस्तियों का सम्मान किया था। देश की कुल जनसंख्या में आदिवासियों की संख्या नौ प्रतिशत है। किंतु पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने एवं उनके उत्थान के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। पहली बार एनडीए की श्रद्धेय अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1999 में एक अलग मंत्रालय बनाने के साथ ही 89 वें संविधान संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की। अटल जी ने जो शुरुआत की थी, उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उसे बहुआयामी गति दी है और लंबे समय तक हाशिये पे रहा जनजातीय समुदाय आज विकास की मुख्यधारा का हिस्सा है।
श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से भारत के सांस्कृतिक अभ्युदय को दिशा मिली है। हम सब जानते हैं कि  वनवासियों के साथ बिताए समय ने ही एक राजकुमार को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उस कालखंड में प्रभु श्री राम ने वनवासी समाज से जो प्रेरणा पाई थी और उसी से उन्होंने सबको साथ लेकर चलने वाले रामराज्य की स्थापना की। प्रधानमंत्री जी भी प्रभु श्री

भारतीय रेलवे मालगोदाम श्रमिक संघ (बिलासपुर जोन) ने सांसद जगदंबिका पाल का अभिवादन किया

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लोकसभा में शून्य काल के दौरान माल गोदाम श्रामिको से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाने पर
भारतीय रेलवे मालगोदाम श्रमिक संघ (बिलासपुर जोन) ने सांसद जगदंबिका पाल का अभिवादन किया
नई दिल्ली – सांसद जगदंबिका पाल ने लोकसभा में शून्य काल के दौरान माल गोदाम श्रामिको से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रेल मालगोदाम के कर्मचारियों को मिलने वाली मजदूरी में सुधार की आवश्यकता है और सरकार को इस गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
सांसद के इस कदम की सराहना करते हुए भारतीय रेलवे माल गोदाम श्रमिक संघ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR, Zone) बिलासपुर, छत्तीसगढ़ ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि – ” संसद में बजट सत्र के दौरान माल गोदाम श्रमिकों के हक में आवाज बुलंद करने के लिए अभिभावक माननीय श्री जगदंबिका पाल जी का हम सभी पदाधिकारी सादर आभार व्यक्त करते है। संस्था के अरुण कुमार पासवान ,मनोरंजन कुमार और दिगंबर प्रसाद मेहता ने सांसद जगदंबिका पाल जी का अभिवादन किया और माल गोदाम श्रामिको का मशीहा कहते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी।
इसके अतिरिक्त भारतीय रेलवे मालगोदाम श्रमिक संघ (बिलासपुर जोन) के हेमंत कुमार साहू ,जोनल सचिव , हिम बहादुर सोनार , जोनल अध्यक्ष , संतोष अरुण थोरात जोनल सचिव ,विशाल विजय भगत जोनल अध्यक्ष मुंबई महाराष्ट्र ने भी सांसद जगदंबिका पाल जी का अभिवादन किया और प्रशंसा की।

सूरज बड़जात्या के निर्देशन में दोबारा काम करेंगे सलमान खान

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मुंबई (अनिल बेदाग )सबसे बड़ी और सबसे सफल डायरेक्टर-एक्टर जोड़ी सूरज बड़जात्या और सलमान खान ने अब तक कई बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। इसमें मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन..!,  और प्रेम रतन धन पायो शामिल है। ऐसे में सलमान खान और सूरज बड़जात्या का साथ में अगले सहयोग का हमेशा लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। हालांकि पिछले साल, इसके जोड़ी ने कन्फर्म किया था कि वे प्रेम रतन धन पायो (2015) के आठ साल बाद अपने पांचवें सहयोग के लिए फिर से साथ आ रहे हैं, और उनकी अपकमिंग परियोजना बड़े पैमाने पर बनाई जाने वाली है। अब इस पर एक ताजा अपडेट सामने आई है।
     सूत्र के अनुसार, “सूरज बड़जात्या और सलमान खान एक बड़े विज़न और बड़े पैमाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं और उससे उन्हें काफी उम्मीदें है। सूरज बड़जात्या सुपरस्टार के साथ सहयोग करने से पहले एक फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं और, जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सलमान भी अगले 26 महीनों तक एकदम बिजी हैं।”
खैर, लेकिन लंबे समय के बाद सलमान खान और सूरज बड़जात्या के इस सहयोग ने वाकई लोगों को एक्साइट कर दिया है। ऐसे में अब हर किसी को इसका  इंतजार रहेगा क्योंकि पिछले कुछ सालों  में उन्होंने जिस तरह की ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, वह वास्तव में उनके अपकमिंग प्रोजेक्ट के लिए उत्सुक्ता बढ़ाने के लिए काफी है।

महाकुंभ 2025 से पहले गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिया जा सकता है

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प्रयागराज, 10 फरवरी (आईएएनएस)। अगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रयागराज में संतों की मांग मान लेते हैं तो महाकुंभ 2025 से पहले गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिया जा सकता है।संत चाहते हैं कि गाय को ‘रामा’ कहा जाए, ‘रा’ का अर्थ ‘राष्ट्र’ (राष्ट्र) और ‘मा’ का अर्थ ‘माता’ (मां) हो।
इस आशय का एक प्रस्ताव बुधवार को उत्तराखंड के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के माघ मेला शिविर में आयोजित ‘गौ संसद’ में संतों द्वारा पारित 21 प्रस्तावों में से एक था।
गौ संसद में संतों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि अब से वे गायों को रामा कहकर संबोधित करेंगे। माघ मेला 2024 का चल रहा 54 दिवसीय वार्षिक धार्मिक मेला 15 जनवरी को मकर संक्रांति स्नान के साथ शुरू हुआ और 8 मार्च को महा शिवरात्रि स्नान के साथ समाप्त होगा।
संतों ने यह भी संकल्प लिया कि यदि इन प्रस्तावों के माध्यम से उठाई गई उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन करेंगे।
उनके द्वारा पारित अन्य प्रस्तावों में गौ भक्तों की मदद से ‘राष्ट्रीय रामा गौ भक्त आयोग’ की स्थापना शामिल है।
यह आयोग डीएनए परीक्षण के माध्यम से देश की सभी गायों की पहचान करेगा, उनका पंजीकरण करेगा और ‘नव संवत्सर’ (हिंदू नव वर्ष) से उनके साथ व्यवहार के लिए एक प्रोटोकॉल घोषित करेगा।
‘गौ संसद’ ने सरकार से यह भी अपील की कि एक अलग ‘गाय मंत्रालय’ बनाया जाए और गोवंश को पशुपालन मंत्रालय से अलग किया जाये।
गाय और उनकी संतान को संविधान की राज्य सूची से हटाकर केंद्रीय सूची में शामिल किया जाना चाहिए। जो लोग गोमांस खाते हैं उनका बहिष्कार किया जाना चाहिए।
लोगों को उस प्रत्याशी को वोट देना चाहिए जो अपने घोषणा पत्र के साथ यह शपथ पत्र दे कि सरकार बनते ही पहला फैसला गाय को सम्मान और सुरक्षा देने का होगा।
संतों ने कहा कि जैसे ही गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का सम्मान मिलेगा, संत समुदाय सबसे पहले गाय का दूध अयोध्या ले जाएगा और वहां राम लला को अर्पित करेगा।
सरकार से अतिक्रमित भूमि को मुक्त करने और इसे गायों के चरने के लिए उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।

सिनेड्रीम्स इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल की घोषणा

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मुंबई (अनिल बेदाग )फाउंडर और आयोजक अयूब खान द्वारा आज मुम्बई के पीवीआर आइकॉन थिएटर में सिनेड्रीम्स इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल की ऑफिशियल घोषणा की गई। इस अवसर पर फाउंडर व आयोजक अयूब  खान, सय्यद अहमद, निर्माता निर्देशक मेहुल कुमार, ब्राइट आउटडोर मीडिया के डॉ योगेश लखानी, श्याम सिंघानिया, निर्देशक जय प्रकाश, अमित ख़ान राइटर , पराग चापेकर सहित कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं।
इस फ़िल्म फेस्टिवल के संस्थापक और ऑर्गनाइजर अयूब  खान हैं, उनके साथ सय्यद अहमद भी जुड़े हुए हैं। ये बिल्कुल नए ढंग का और काफी अलग किस्म का फेस्टिवल है जिसमें फ़िल्म कंपटीशन के लिए हर भाषा, हर अवधि की फिल्मों की एंट्री की जाएगी और विनर को सर्टिफिकेट के साथ कैश प्राइज भी दिया जाएगा।
सबसे खास बात यह है कि इस फ़िल्म फेस्टिवल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में पहलाज निहलानी, श्याम सिंघानिया, गीतकार समीर अंजान, रईस अहमद, जरीना वहाब, कौसर खालिद जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
वहीं इस फेस्टिवल के ज्यूरी सदस्यों में मेहुल कुमार, कोमल नाहटा, संजय मासूम, जितेंद्र वत्स, सुभाष साहू ,पराग चापेकर, राजीव वर्मा, सतलज धीर, सैकत दास, तुषार थोरात , के एस adiyaman , सीमा पहवा, अतुल मोहन और अनिल दुबे का नाम उल्लेखनीय है। आज ही इस फ़िल्म फेस्टिवल की वेबसाइट भी लॉन्च की गई।
फ़िल्म जगत में पिछले 4 दशकों से निर्माता निर्देशक लेखक और डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में काम कर रहे अयूब खान ने कहा कि इस अनूठे फ़िल्म फेस्टिवल का आयोजन मुम्बई के जुहू पीवीआर सिनेमा में 28 और 29 मई 2024 को होगा और 30 मई को अवार्ड दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वह बचपन से फिल्मों के शौकीन रहे हैं और फ़िल्म को हो वह अपना सब कुछ मानते हैं। फ़िल्म और फ़िल्म मेकर के प्रति इसी प्रेम की वजह से वह इस फ़िल्म महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं जहां अच्छी फिल्मो और उनसे जुड़े अदाकारों, निर्देशक, निर्माता, टेक्नीशियन को सराहेंगे। इस फ़िल्म फेस्टिवल से पैसा कमाना उनका उद्देश्य नहीं बल्कि बेहतर सिनेमा को दर्शकों तक पहुंचाना चाहते हैं, उन्हें बनाने वालों का सम्मान करना चाहते हैं।
यहाँ आए सभी अतिथियों मेहुल कुमार, योगेश लखानी और श्याम सिंघानिया ने अयूब खान के विज़न की प्रशंसा की और अपना पूरा सपोर्ट इस फेस्टिवल को देने का वादा किया। सभी गेस्ट्स ने अय्यूब खान को इस आयोजन के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। एक्ट्रेस और इन्फ्लुएंसर एकता जैन ने इस लांच इवेंट की एंकरिंग की।

नादिर गोदरेज हुए पीएमएफएआई के लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित  

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मुंबई, 9 फरवरी, 2024 – गोदरेज इंडस्ट्रीज लिमिटेड (जीआईएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड (जीएवीएल) तथा एस्टेक लाइफसाइंसेज लिमिटेड के अध्यक्ष, नादिर गोदरेज को पेस्टिसाइड्स मैन्युफैक्चरर्स एंड फॉर्म्युलेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (पीएमएफएआई) की ओर से प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार कल पीएमएफएआई-एसएमएल वार्षिक एग्केम अवार्ड्स (2024) के 5वें संस्करण में प्रदान किया गया, जिसका आयोजन 19वें अंतर्राष्ट्रीय फसल विज्ञान सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (आईसीएससीई दुबई 2024) के मौके पर किया गया था।

पीएमएफएआई की स्थापना 1967 में हुई थी और यह कृषि रसायन/कीटनाशक उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाला राष्ट्रीय संघ है। 221 बड़े, मध्यम और छोटे पैमाने के भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग इसके सदस्य हैं। पीएमएफएआई उन प्रौद्योगिकियों में सुधार और नवोन्मेष की वकालत कर कृषि प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने का प्रयास करती है जो किसानों को गुणवत्तापूर्ण फसल सुरक्षा उत्पाद प्रदान करते हैं। पीएमएफएआई ने भारतीय कृषि रसायन (एग्रोकेमिकल) उद्योग में असाधारण उपलब्धियों और योगदान को सम्मानित करने के लिए 2018 में वार्षिक एगकेम पुरस्कारों की स्थापना की थी।

नादिर गोदरेज को दिया गया यह लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग में उनके उत्कृष्ट योगदान और प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने और भारतीय एग्रोकेमिकल उद्योग तथा भारतीय कृषि के विकास में योगदान के उल्लेखनीय प्रयास का सम्मान है।

श्री गोदरेज ने इस सम्मान के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं पीएमएफएआई से लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्राप्त कर बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। यह पुरस्कार पूरी टीम के सामूहिक समर्पण और अथक प्रयासों का सम्मान है। नवोन्मेषी और वहनीय फसल सुरक्षा समाधान प्रदान करने की हमारी प्रतिबद्धता पीएमएफएआई के कृषि प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और सतत विकास को बढ़ावा देने के मिशन के अनुरूप है। मैं इस सम्मान के लिए आभारी हूं और उन सहयोगात्मक प्रयासों से प्रेरित हूं जो हमें इस मुकाम तक लेकर आए हैं।”

एग्रोकेमिकल और सीडीएमओ क्षेत्र के प्रति समूह की प्रतिबद्धता के बारे में उन्होंने कहा, “नवोन्मेष और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, हमारी समर्पित अनुसंधान एवं विकास इकाइयों से स्पष्ट है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग और सक्रिय रूप से जुड़ने की शक्ति में हमारा दृढ़ विश्वास हमें लगातार अनुरूप समाधान प्रदान करने में मदद करता है जो किसानों की चुनौतियों को दूर करते हैं और साथ ही इनसे कृषि क्षेत्र में उत्कृष्टता तथा निरंतर प्रदर्शन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सुनिश्चित होती है। यह सम्मान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्टता और वहनीयता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।”

यह पुरस्कार न केवल जीवन भर के असाधारण योगदान का, बल्कि गोदरेज की प्रगतिशील योगदान की लंबी विरासत का भी सम्मान है।