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कुंभ फालतू है लालू यादव के इस बयान पर BJP-JDU ने किया पलटवार

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Bihar Politics: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार देर रात हुई भगदड़ में करीब 18 लोगों की मौत हुई थी. इसमें अधिकतर कुंभ जाने वाले यात्री थे. हादसे के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने रेलवे को दोषी ठहराया. साथ ही उन्होंने कहा कि कुंभ का कोई मतलब नहीं है. कुंभ फालतू है. उनके इस बयान के बाद बिहार में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. वार पलटवार का दौर शुरू हो गया है. आज यानी सोमवार को लालू यादव के बयान पर बीजेपी और जेडीयू ने करारा पलटवार किया है.

कोई भी सनातनी बर्दाश्त नहीं करेगा

बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने लालू यादव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि किसी की धार्मिक अस्मिता पर चोट करने वाला लालू प्रसाद यादव का बयान घोर निंदनीय है. जो व्यक्ति अपने बाल-बच्चों के मांगलिक कार्यों में धार्मिक अनुष्ठान करवाता हो उनके मुख से इस तरह का कथन कोई भी सनातनी बर्दाश्त नहीं करेगा. करोड़ों लोग कुंभ में स्नान करके धार्मिक आस्था का परिचय दे चुके हैं, इसलिए लालू यादव को अपने दिए गए बयान का औचित्य बताना चाहिए. क्या राबड़ी देवी छठ पूजा करती हैं तो गंगा स्नान नहीं करती हैं? काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन को क्या उनका परिवार नहीं जाता है? फिर लालू यादव का इस तरह का बेतुका बयान क्यों? इस बार बिहार के विधानसभा चुनाव में सनातनी इसका उन्हें मजा चखाएगा.

जेडीयू नेता अरविंद निषाद ने भी किया पलटवार

वहीं लालू यादव के महाकुंभ वाले बयान पर जवाब देते हुए जदयू प्रवक्ता अरविंद निषाद ने कहा, “लालू यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे. उस दौरान रेलवे में 51 दुर्घटनाएं हुई थीं. 370 रेलवे क्रॉसिंग की घटनाएं हुईं. उनके पांच वर्षों के रेल मंत्री के कार्यकाल में कुल 1034 लोगों की मृत्यु हुई थी. तो अपने कार्यकाल में रेलवे में जो सुधार किया जाना चाहिए था उसको आपने नहीं किया था जिसके कारण 1034 लोगों की मृत्यु हुई? दुर्घटनाएं दुर्भाग्य से घटित होती हैं. इस प्रकार से हिंदू सभ्यता संस्कृति और रेलवे पर सवाल खड़ा करने की जरूरत नहीं है बल्कि सहयोग करने की आवश्यकता है.”

आरजेडी प्रवक्ता ने किया बचाव

हालांकि, राजद सुप्रीमो लालू यादव की तरफ से बचाव करते हुए आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि लालू यादव के बोलने का मतलब यह था कि जो कुंभ में व्यवस्था की गई है वह फालतू व्यवस्था है. इसके कारण इतने लोगों की मौत हो रही है. पूरी तरह कुंभ की जो व्यवस्था है वह लचर व्यवस्था है. कुंभ पर उनके बोलने का यही मतलब था कि बीजेपी अपने वोट बैंक को साधने के लिए लोगों की जान ले रही है.

किसान का बेटा हमेशा सत्य के प्रति समर्पित रहेगा: उपराष्ट्रपति

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किसान का बेटा हमेशा सत्य के प्रति समर्पित रहेगा: उपराष्ट्रपति

लुटेरे और आक्रमणकारी आए, हमारे संस्थानों को बेतहाशा नष्ट किया, इसके बाद भी हम संभल जाते हैं, उभर आते हैं: उपराष्ट्रपति

जो शोध ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए, वह वह शोध नहीं है जिसकी देश को जरूरत है; शोध अमूर्त नहीं हो सकता: उपराष्ट्रपति

कृषि क्षेत्र के लिए कोई कमी नहीं, किसान के लिए कोई कमी नहीं, यही हमारा आदर्श वाक्य होना चाहिए: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने कहा, विकसित भारत का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है

उपराष्ट्रपति ने कहा-हमारे देश में कुछ लोग इस बात पर संदेह कर रहे हैं कि यह सदी भारत की है

स्टार्टअप्स को गांवों तक पहुंचना चाहिए: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय कृषि-खाद्य एवं जैव विनिर्माण संस्थान (एनएबीआई) में उन्नत उद्यमिता एवं कौशल विकास कार्यक्रम (ए-ईएसडीपी) परिसर का उद्घाटन किया। भारत के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कहा, “मैं एक किसान का बेटा हूँ। किसान का बेटा हमेशा सत्य के प्रति समर्पित रहता है… उन्होंने आगे कहा, “भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है और ग्रामीण व्यवस्था देश की रीढ़ की हड्डी है। विकसित भारत का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है। विकसित भारत अब केवल एक सपना नहीं है; यह हमारा लक्ष्य है।” उन्होंने कृषि से अपने गहरे जुड़ाव पर जोर दिया।

मोहाली के राष्ट्रीय कृषि-खाद्य और जैव विनिर्माण संस्थान (एनएबीआई) में उन्नत उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम (ए-ईएसडीपी) परिसर के उद्घाटन के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री धनखड़ ने कहा- “यदि हम अपने गौरवशाली इतिहास को देखें, तो भारत को ज्ञान और बुद्धि की भूमि के रूप में जाना जाता था। विशेष रूप से विज्ञान, खगोल विज्ञान और बहुत कुछ में। मानव जीवन के हर पहलू को हमारे वेदों, उपनिषदों, पुराणों में प्रतिबिंबित किया गया है। हम एक ऐसा राष्ट्र हैं जो नालंदा, तक्षशिला और इस तरह के प्राचीन संस्थानों पर गर्व करता है। हमारे यहां 11वीं या 12वीं शताब्दी के आसपास बहुत कुछ नष्‍ट कर दिया गया। लुटेरे आए, आक्रमणकारी आए और वे हमारी संस्थाओं को नष्ट करने में बुरी तरह मुब्तिला रहे। नष्‍ट किए जाने वाली संस्‍थाओं में, नालंदा एक था। हमारे सांस्कृतिक केंद्र, हमारे धार्मिक केंद्रों पर बहुत अलग तरह के प्रतिशोधी, विकृत होने की हद तक चले गए। उन्होंने अपने खुद के केंद्र बनाए। राष्ट्र ने इसका सामना किया। फिर ब्रिटिश शासन आया। व्यवस्थित रूप से, हमें ऐसे कानून मिले जो उनके अधीन थे। हमें ऐसी शिक्षा मिली जिसने हमारी शिक्षा को नष्ट कर दिया और हमारी प्रतिभा के पूर्ण दोहन का इकोसिस्‍टम नहीं बन पाया। उपराष्‍ट्रपति ने कहा, सबसे अच्छी बात यह है कि हम जल्‍दी से संभल जाते हैं और तेजी से उभर रहे हैं।”

शोध के महत्व पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया: “देश के सभी संस्थानों को लिटमस टेस्ट पास करना होगा। लिटमस टेस्ट यह है कि क्या प्रभाव पैदा हो रहा है? सकारात्मक अर्थों में, यह भूकंप की तरह होना चाहिए, जिसका प्रभाव महसूस किया जा सके। शोध के लिए शोध, स्वयं के लिए शोध, शेल्फ पर रखे जाने वाले शोध, व्यक्तिगत अलंकरण के रूप में सामने आने वाले शोध वह शोध नहीं है जिसकी राष्ट्र को आवश्यकता है। शोध सतही रूप से शोधपत्र देना नहीं है। शोध उस व्यक्ति को प्रभावित करने के लिए नहीं है जो विषय से अनभिज्ञ है। शोध उन लोगों को प्रभावित करने के लिए है जो विषय को उतना ही जानते हैं जितना आप जानते हैं या वैश्विक बेंचमार्क पर आपसे अधिक जानते हैं। और वह शोध केवल अमूर्त नहीं हो सकता। हम जो कर रहे हैं उस पर शोध का प्रभाव होना चाहिए। उन्होंने कहा- “मुझे यकीन है कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आपके पास पर्याप्त गुंजाइश है।”

भारत की सभ्यतागत ताकत को दोहराते हुए उन्होंने कहा, “यह सदी भारत की है। इस पर हमारे देश के कुछ लोगों को छोड़कर किसी को संदेह नहीं है। एक भारतीय के रूप में मेरी उनसे अपील है: हमारे राष्ट्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत में विश्वास और इस विचारधारा को अपनाना कि कोई भी हित – व्यक्तिगत, राजनीतिक या अन्य – राष्ट्रीय हित से बड़ा नहीं है।”

श्री धनखड़ ने कहा, “मैं देखता हूं कि कृषि उपज तब बेची जाती है जब यह किसानों का बाजार नहीं होता, यह खरीदारों का बाजार होता है। सरकार बड़े पैमाने पर गोदाम और सहकारी आंदोलन के जरिए स्टॉक को बनाए रखने की सुविधा प्रदान करती है। मैं आपको बता सकता हूं कि सरकार की कृषि नीतियां किसान की बहुत मदद कर रही हैं। किसान को इसके बारे में जानना होगा। आप एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि हम यह अनुमति नहीं दे सकते कि हमारे किसानों को सबसे अच्छे के अलावा कुछ भी मिले। कृषि क्षेत्र के लिए कोई छोटा बदलाव नहीं। किसान के लिए कोई छोटा बदलाव नहीं। यह हमारा आदर्श वाक्य होना चाहिए। उपराष्‍ट्रपति ने कहा- आपके जैसे संस्थानों का कृषि विज्ञान केंद्रों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के संस्थानों के साथ सीधा संपर्क होना चाहिए।

 

श्री धनखड़ ने कृषि और डेयरी उत्पादों में मूल्य संवर्धन करने वाले सूक्ष्म उद्योगों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के पुनरुद्धार का आह्वान किया, “गांव या गांवों के समूह में एक ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जहां आपके खेत में सूक्ष्म उद्योग हों, जो कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन करें, जो उत्पादित पशुधन, उत्पादित दूध में मूल्य संवर्धन करें। इससे एक स्थायी समाज विकसित करने में मदद मिलेगी और निश्चित रूप से पोषण संबंधी खाद्य मूल्य में वृद्धि होगी। हमें गांव के समूहों में आइसक्रीम, पनीर, मिठाई और इसी तरह की अन्य चीजें बनाने के लिए उद्यमशीलता कौशल रखने से कौन रोकता है? यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे रोजगार पैदा होगा और ग्रामीण युवा संतुष्ट होंगे।”

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दक्षता और उत्पादकता में सुधार के लिए कृषि पद्धतियों में प्रौद्योगिकी को एकीकृत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैं। उन्हें अब गांवों तक पहुंचना होगा क्योंकि कृषि उपज अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है, उद्योग के लिए कच्चा माल है। और जब ऐसा होगा, तो ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि के करीब, एक क्लस्टर के रूप में विकसित होने से अर्थव्यवस्था में उछाल आएगा और लोग कृषि भूमि पर विश्वास करेंगे।

श्री धनखड़ ने किसानों से आग्रह किया कि वे प्रौद्योगिकी में हो रही प्रगति और इसके संभावित लाभों के बारे में जानकारी रखें। उन्‍होंने जोर देकर कहा, “किसान आम तौर पर अपने ट्रैक्टर से चिपके रहते हैं। वे ट्रैक्टर का इस्तेमाल तब तक करना चाहते हैं जब तक यह चल सकता है, इस तथ्य से अनभिज्ञ कि नई तकनीक पर्यावरण के अनुकूल, ईंधन कुशल, बहुक्रियाशील और अत्यधिक सब्सिडी वाली होती जा रही है। जागरुकता अभियान चलाने की जरूरत है।”

उन्होंने सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “छोटे-छोटे समूह बनाएं, अपने उत्पाद को अपनी पसंद की कीमत पर बेचें। आपको किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है। आपको अपनी अर्थव्यवस्था को बहुत ऊँचे स्तर पर बदलने के लिए बस अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानना होगा।”

इस अवसर पर श्री प्रियांक भारती, आईएएस, प्रशासनिक सचिव, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण, पंजाब सरकार, प्रो. अश्विनी पारीक, कार्यकारी निदेशक, ब्रिक-एनएबीआई, सुश्री एकता विश्नोई, आईआरएस, संयुक्त सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

 

रुस्लान मुमताज और आन्या तिवारी की फिल्म सरकारी बच्चा 28 फरवरी को रिलीज़ होगी

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मुंबई (अनिल बेदाग) : दानिश सिद्दीकी  निर्मित और फ्लाइंग बर्ड पिक्चर्स के बैनर तले सूर्यकांत त्यागी और दानिश सिद्दीकी की जोड़ी द्वारा निर्देशित, सरकारी बच्चा आधुनिक समय के प्यार पर एक नया, अनोखा नज़रिया पेश करता है, जहाँ अंतिम परीक्षा सिर्फ़ दिल की नहीं बल्कि एक स्थिर सरकारी तनख्वाह की भी होती है!“सरकारी बच्चा” का आधिकारिक पोस्टर हाल ही में रिलीज़ किया गया है।
रुस्लान मुमताज और आन्या तिवारी अभिनीत, सरकारी बच्चा एक ऐसे युवक की कहानी है जो प्यार में डूबा हुआ है, लेकिन उसे एहसास होता है कि उसकी सबसे बड़ी बाधा लड़की को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित सरकारी नौकरी के साथ उसके परिवार को प्रभावित करना है- ऐसा कुछ जो उसके पास नहीं है! हास्य, रोमांस, विचित्रता और ड्रामा से भरपूर, यह फिल्म एक मध्यम वर्गीय परिवार के जुनून और प्यार पर स्थिरता के प्रति जुनून को दर्शाती है।
मुख्य जोड़ी में बिजेंद्रे कलाम, एहशान खान, दिवंगत जूनियर महमूद, आशीष सिंह, दानिश सिद्दीकी, गुरप्रीत कौर चड्ढा, रिजवान सिकंदर और हेमंत चौधरी जैसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं की टोली शामिल है। फिल्म में मशहूर गायक जावेद अली, रितु पाठक, रितु राज मोहंती और हरमन नाजिम के साथ एक बेहतरीन साउंडट्रैक है, जिसका संगीत दानिश अली, नजाकत शुजात और सहजन शेख सागर ने दिया है।
फिल्म के बारे में बात करते हुए, निर्माता दानिश सिद्दीकी ने साझा किया, “सरकारी बच्चा एक हल्की-फुल्की लेकिन भरोसेमंद कहानी है जो कई युवा भारतीयों द्वारा सामना की जाने वाली वास्तविक जीवन की दुविधा को दर्शाती है। यह हास्य, भावनाओं और संगीत से भरपूर है जो निश्चित रूप से दर्शकों को पसंद आएगी।”
निर्देशक सूर्यकांत त्यागी ने कहा, “हम एक ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जो मनोरंजन करे लेकिन साथ ही समाज के एक खास तबके के जुनून को भी सूक्ष्मता से दिखाए जो यह मानता है कि आज की तकनीकी दुनिया में करियर के ढेरों विकल्पों के बीच केवल सरकारी नौकरी ही सबसे सुरक्षित है। हमारे नायक की यात्रा हास्यप्रद और प्रेरणादायक दोनों है।”
सुरेश एल वर्मा और चंदन के पंडित द्वारा सिनेमैटोग्राफी और एसवाई77 पोस्टलैब द्वारा पोस्ट-प्रोडक्शन के साथ, सरकारी बच्चा एक आकर्षक और मनोरंजक सिनेमाई अनुभव देने के लिए तैयार है। यह फिल्म 28 फरवरी 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म की एक और खासियत अभिनेता श्रेष्ठ अय्यर का विशेष शानदार अभिनय है।

संभाजी की वीरता की कहानी है फिल्म छावा*

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(अर्चित सक्सेना-विभूति फीचर्स)

भारतीय वीर सपूत छत्रपति शिवाजी महाराज की वीर गाथाएं तो हम सब जानते हैं लेकिन,उनके सुपुत्र संभाजी महाराज की वीर गाथा कुछ अनसुनी और अनकही सी ही है। हमारी पीढ़ी तो विशेष कर उनकी वीरता की गाथा से अनजान ही है। स्वतंत्रता के लिए हमारे देश में अनगिनत वीरों ने बलिदान दिया है। हमारी पाठ्यपुस्तकों में जो पढ़ाया गया उसमें मुगलों के तो दास दासियों का भी विस्तार से वर्णन है लेकिन उसी समय के अनगिनत वीर योद्धाओं को तो मानो गुमनामी में धकेल दिया गया है। यह तो उन लेखकों और इतिहासकारों की अनुकंपा और अपने राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम रहा जो उन्होने इतिहास के उन अनसुने नायकों के बारे में लिखने का जोखिम लिया और ऐसे वीर सपूतों की वीरगाथाएं जीवंत रह पायी। भारतीय इतिहास के ऐसे ही वीर योद्धा थे छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज।

वर्षों पहले संभाजी महाराज पर मराठी के सुप्रसिद्ध लेखक शिवाजी सावंत ने “छावा” नाम से उपन्यास लिखा था। अब उस उपन्यास पर शानदार फिल्म बनी है “छावा”। संभाजी महाराज भी छत्रपति शिवाजी की तरह ही बलशाली, साहसी, पराक्रमी और कर्मठ शासक व योद्धा थे। इस पर मराठी के जाने-माने लेखक शिवाजी सांवत ने गहन शोध के पश्चात वृहत उपन्यास लिखा जिस पर छावा फिल्म आधारित है। इतना बड़ी कहानी और घटनाओं को मात्र ढ़ाई-तीन घंटे में समेटना कोई आसान काम नहीं था लेकिन, निर्देशक ने अपनी सूझबूझ और समझ से कुछ चुनिंदा घटनाओं को लेकर सारा कथानक प्रस्तुत किया जो दर्शनीय भी है। मराठी शब्द छावा का अर्थ है शेर का बच्चा ।विक्की कौशल ने अपने अभिनय में छावा अर्थात शेर का बच्चा शब्द को ऐसा आत्मसात किया कि, ज्यादातर समय दर्शक दहलते हुए ही नजर आए। वैसा दिखने के लिए विकी ने अपने शरीर पर भी काम किया तो बलशाली भी दिखाई दिए हैं। रश्मिका मंदाना, अक्षय खन्ना, आशुतोष राणा, दिव्या दत्ता सभी ने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करने का प्रयास किया।मुख्य अभिनेता के बाद किसी ने दर्शकों का ध्यान अपनी तहफ आकर्षित किया तो वे औरंगजेब के किरदार में नजर आए अक्षय खन्ना ही है। इस फिल्म का सबसे सशक्त पहलू हिन्दवी स्वराज्य की अवधारणा को स्पष्ट करना और यह बताना है कि, इसके लिए हमारे देश के वीरों ने अपनी जान की बाजी लगा दी है। लेकिन तब भी देश में गद्दारों की कमी नहीं थी। संभाजी महाराज भी औरंगजेब की गिरफ्त में अपने करीबी और रिश्ते में उनके अपने साले की गद्दारी की वजह से आए। जिन्होंने राज्य की लालसा में वीर मराठा संभाजी को धोखा देकर पकड़वा दिया था।

इस फिल्म का सबसे दमदार और प्रभावी दृश्य वह है जब औरंगजेब धोखे से कैद किये संभाजी महाराज से कहता है कि, हमारी तरफ आ जाओ ऐश से जीवन गुजारोगे, बस अपना धर्म बदलना पड़ेगा तब संभाजी जो जबाव देते हैं वह सुनने व समझने लायक है। वे कहते हैं हमारी तरफ आ जाओ सारी सुख सुविधाएं मिलेंगी और धर्म भी नहीं बदलना पड़ेगा । फिल्म का यह इतना जबरदस्त संदेश है जो हर किसी को ग्रहण करना चाहिए क्योंकि, हिन्दवी स्वराज्य की असल संकल्पना यही है। जहां किसी भी धर्म या जाति से कोई विरोध नहीं है।औरंगजेब का सम्प्रदाय अपना मुल्क बनाने सबको एक रंग में रंगने पर अड़ा रहा जबकि, हिन्दू समाज विविधता में एकता के सिद्धांत पर चलता हुआ आगे बढ़ रहा है।

औरंगजेब ने संभाजी पर जो अत्याचार किए उसकी एक बानगी भी यह फिल्म दिखाती फिर चाहे संभाजी महाराज के हाथ के नाखूनों को निर्दयता से नोंचना हो या उनके शरीर के जख्मों पर नमक डालना हो या उनकी आंखों में दहकती हुई लोहे की सलाखें भरना या उनकी जुबान को काटना। इतनी निर्ममता को भी संभाजी महाराज जगदम्बा भवानी का नाम जपते हुए सहन कर लेते हैं। संभाजी के रुप में विकी ने इस दृश्य को जीवंत रुप में प्रस्तुत किया है। इसके अलावा फिल्म में छत्रपति संभाजी महाराज के नौ साल के शासन, उनका मंत्रिमंडल, उनके सलाहकार, उनके सेनानायक ,उनकी अनोखी युद्ध नीतियां और पारिवारिक पृष्ठभूमि को भी अल्प ही सही परंतु दर्शाने का भरपूर प्रयास किया है। मुगलों ने किस तरह से हमारे राजा-महाराजाओं को कष्ट दिए यह इतिहास में नहीं पढ़ाया गया वहां केवल, अकबर महान बताया जाता रहा तो हम सब भी वही सच मानते रहे जबकि, महान तो वे सभी योद्धा रहे जिन्होंने प्राण दे दिए मगर, धर्म और राष्ट्रभक्ति से समझौता नहीं किया। यह देखने के लिए भी इस फिल्म को देखा जाना चाहिए ताकि, सबको वास्तविक इतिहास भी पता चल सके।

विक्की कौशल की छावा ने ओपनिंग डे पर धमाल मचा दिया है। इस पीरियड ड्रामा एक्शन ने पहले दिन ना सिर्फ उम्मीद से कहीं अधिक कमाई की है, बल्कि 2025 में ओपनिंग डे पर सबसे अधिक बिजनेस करने वाली हिंदी फिल्म भी बन गई है। छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी महाराज के जीवन पर लक्ष्मण उतेकर के डायरेक्शन में बनी छावा विक्की कौशल के करियर की पहली फिल्म है, जिसने ओपनिंग डे पर 10 करोड़ से अधिक का बिजनेस किया है। इस फिल्म का बजट 130 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इस फिल्म ने रिलीज से पहले ही 13.79 करोड़ रुपये की तगड़ी एडवांस बुकिंग की थी। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार 14 फरवरी को छावा ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार 31करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है। शुक्रवार को छावा के शोज में सुबह से ही अच्छी खासी भीड़ नजर आई। देशभर में 3500 से अधिक स्क्रीन्स पर यह फिल्म रिलीज हुई है। छावा की शानदार ओपनिंग को देखते हुए अब लग रहा है कि यह फिल्म 100 करोड़ क्लब में एंट्री कर लेगी।
साल 2025 में छावा से पहले ओपनिंग डे पर सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म अक्षय कुमार की स्काई फोर्स थी, जिसने 12.25 करोड़ रुपये का बिजनेस किया था। विक्की कौशल की फिल्म ने इससे 153% अधिक कमाई की है। यही नहीं, छावा ने पहले दिन की कमाई के मामले में 2024 की चार बड़ी फिल्मों स्त्री 2, भूल भुलैया 3, सिंघम अगेन और पुष्पा 2 को छोड़कर बाकी सभी को पीछे छोड़ दिया है।

वैलेंटाइन वीक में भी किसी फिल्म की यह सबसे बड़ी ओपनिंग है। इससे पहले रणवीर सिंह और आलिया भट्ट की गली बॉय ने 2019 में वैलेंटाइन वीक में सबसे अधिक 19.40 करोड़ रुपये की ओपनिंग ली थी। विकी की छावा ने गली बॉय से 59.79% अधिक का कारोबार किया है।

ओपनिंग डे पर सबसे अधिक कमाई करने वाली पीरियड ड्रामा फिल्मों की फेहरिस्त में भी छावा ने ओपनिंग डे पर सबसे अधिक कमाई की है। संभाजी महाराज की कहानी को महाराष्ट्र में भी जबरदस्त रेस्पॉन्स मिला है।

छावा की धमाकेदार ओपनिंग का जलवा सिर्फ कमाई तक नहीं है। इसने टिकटों की बिक्री में भी धूम मचाई है। प्रमुख टिकटिंग प्लेटफॉर्म बुक माय शो के मुताबिक, विक्की कौशल की फिल्म ने एनिमल और गदर 2 को छोड़कर बाकी हर हिंदी फिल्म की ओपनिंग डे टिकट बिक्री को पीछे छोड़ दिया है। छावा के लिए बीएमएस से कुल 14 लाख टिकटों की बिक्री पहले दिन के लिए हुई । इसमें से करीब 5 लाख टिकट रिलीज के दिन बिके । यह 2025 में अभी तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। रिलीज के दिन सबसे अधिक टिकटों की बिक्री के मामले में रणबीर कपूर की एनिमल सबसे आगे है, जिसके 8.90 लाख टिकट बिके थे। गदर 2 के लिए 6.70 लाख टिकट बीएमएस के जरिए बिके थे। टिकटिंग प्लेटफॉर्म के मुताबिक, एक घंटे में सबसे अधिक टिकट बेचने के मामले में भी छावा ने बाजी मारी है। एक घंटे में इसके सबसे ज्यादा 42.98 हजार टिकट बिके।

छावा ने विक्की कौशल को भी उनके करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग दी है। इससे पहले उनकी ब्लॉकबस्टर ‘उरी द सर्जिकल स्ट्राइक’ ने ओपनिंग डे पर सबसे अधिक 8.20 करोड़ रुपये कमाए थे। लेकिन लेकिन छावा ने इससे करीब 4 गुना अधिक बिजनेस किया है। यह उनके करियर की पहली फिल्म है, जिसने पहले दिन 10 करोड़ से अधिक का बिजनेस किया है।(विभूति फीचर्स)

रेलवे की लापरवाही और कमजोरियों को उजागर करता दिल्ली रेल हादसा*

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(मनोज कुमार अग्रवाल-विनायक फीचर्स)
          नईदिल्ली रेलवे स्टेशन पर  हुए हादसे के बाद  भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं। शनिवार रात नईदिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मचने से 18 लोगों की मौत हो चुकी है और 12 से अधिक लोग घायल हैं। पूर्व में भी महाकुंभ के दौरान रेलवे प्लेटफार्म पर ऐन वक्त पर ट्रेन का प्लेटफार्म बदलने पर भगदड़ में लोगों की जान जाने की बड़ी दुर्घटना घटित हुई थी।  प्रयागराज जंक्शन पर  बारह वर्ष पूर्व 2013 के महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ हुई थी। उसमें 42 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, जबकि 46 से अधिक श्रद्धालु घायल हुए। ठीक 12 वर्ष बाद, 15 फरवरी को नई दिल्ली स्टेशन पर उसी घटना की पुनरावृत्ति हुई है। हमारी सरकार और उसकी मशीनरी पुरानी दुर्घटनाओं के बुरे अनुभव से भी कोई सबक नहीं लेते हैं वरना इस हादसे को टाला जा सकता था।
             दिल्ली रेलवे स्टेशन देश का एक प्रमुख और अत्यधिक भीड़-भाड़ वाला रेलवे स्टेशन है, यह घटना उस समय घटी, जब बड़ी संख्या में यात्री एक विशेष ट्रेन के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही ट्रेन का वक्त पास आया, भीड़ भगदड़ में बदल गई। यह भगदड़ इतनी भयावह थी कि इसमें 18 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए। यह घटनाक्रम एक बार फिर भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी कमजोरियों को उजागर करता है।
   इस दुखद और हृदय विदारक घटनाक्रम के बाद सबसे पहला और प्रमुख सवाल यह उठता है कि इस घटना के लिए भारतीय रेलवे प्रशासन जिम्मेदार है या नहीं ? रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ की स्थिति को नियंत्रित करने में विफलता, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करना, और आपातकालीन प्रतिक्रिया की कमी यह सब भारतीय रेलवे के जिम्मेवार विभागों की लापरवाही को दर्शाते हैं। रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी भारतीय रेलवे की होती है, लेकिन इस घटना में साफ दिखता है कि उपयुक्त योजना और प्रबंधन की कमी थी। यदि, रेलवे प्रशासन ने समय रहते उपाय किए होते, तो इस तरह के भयानक परिणाम से बचा जा सकता था।
     केवल रेलवे ही नहीं, बल्कि राज्य और केंद्रीय प्रशासन भी इस घटना के जिम्मेदार हैं। भारतीय रेलवे के लिए सुरक्षा उपायों का निर्धारण सरकार के स्तर पर होता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि ऐसे बड़े स्थानों पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल और पुलिस मौजूद रहे ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना किया जा सके। राज्य सरकार की ओर से रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुरक्षा को लेकर किए गए उपायों की समीक्षा करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
       नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मचने के बाद 25 फुट चौड़े फुटओवर ब्रिज तक जाने वाली 42 पायदान की एक संकरी सीढ़ी पर लोगों का सामान जहां-तहां बिखरा नजर आया।  सीढ़ियों, पुल और प्लेटफार्म 14 और 15 पर बिखरे हुए चप्पल, फटे बैग, महिलाओं के दुपट्टे,पानी की बोतलें और लावारिस सामान शनिवार रात की त्रासदी की भयावहता को बयां कर रहे थे। यह हादसा शनिवार रात लगभग दस बजे हुआ जब हजारों यात्री, जिनमें से कई महाकुंभ तीर्थयात्री थे, स्टेशन पर उमड़ पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन की घोषणा में गड़बड़ी के कारण भ्रम और घबराहट की स्थिति पैदा हो गई। दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह भ्रम समान शुरुआती नाम वाली दो ट्रेन की घोषणा के कारण हुआ क्योंकि इन ट्रेन के नाम ‘प्रयागराज’ शब्द से शुरू हो रहे थे। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रयागराज स्पेशल’ के प्लेटफॉर्म 16 पर आने की घोषणा से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, क्योंकि ‘प्रयागराज एक्सप्रेस’ पहले से ही प्लेटफॉर्म 14 पर थी। जो लोग प्लेटफॉर्म 14 पर अपनी ट्रेन तक नहीं पहुंच पाए, उन्हें लगा कि उनकी ट्रेन प्लेटफॉर्म 16 पर आ रही है, जिसके कारण भगदड़ मच गई।’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा, प्रयागराज जाने वाली चार ट्रेन थीं, जिनमें से तीन देरी से चल रही थीं, जिससे प्लेटफार्म पर अप्रत्याशित रूप से भीड़ बढ़ गई थी।
 उत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु के अनुसार पटना जाने वाली मगध एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म संख्या 14 पर खड़ी थी और नई दिल्ली-जम्मू उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म संख्या 15 पर खड़ी थी। उन्होंने भगदड़ का कारण बताते हुए कहा, ‘‘कुछ लोग ‘फुटओवर ब्रिज’ से प्लेटफॉर्म संख्या 14 और 15 की ओर सीढ़ियों से उतर रहे थे, तभी वे फिसलकर अन्य लोगों पर गिर गए।” उन्होंने यह भी बताया कि घटना के बाद यह अफवाह फैलने लगी कि गाड़ियों का प्लेटफॉर्म बदलने के कारण भगदड़ मची, जिससे यह दुर्घटना हुई,ऐसा नहीं है गाड़ियों का प्लेटफॉर्म बदलने के बारे में जो खबरें फैल रही हैं, वह पूरी तरह से निराधार हैं। कोई ट्रेन न तो रद्द की गई थी और न ही किसी ट्रेन का प्लेटफॉर्म बदला गया था। उन्होंने आगे बताया कि इस दौरान रेलवे ने पांच से छह मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया था, लेकिन ट्रेन के प्लेटफॉर्म बदलने के बारे में कोई सच्चाई नहीं है। रेलवे सीपीआरओ ने यह भी पुष्टि की कि रात भर सामान्य रूप से ट्रेनें चलती रहीं और स्थिति अब पूरी तरह से सामान्य है। उन्होंने जनता से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और घटना की जांच चल रही है।
रेल मंत्रालय ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ के एक दिन बाद रविवार को कहा कि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कई उपाय किए गए हैं। भगदड़ में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि यह निर्णय लिया गया है कि प्रयागराज की ओर जाने वाली सभी विशेष ट्रेनें प्लेटफॉर्म नंबर 16 से चलाई जाएंगी। इसलिए, प्रयागराज जाने के इच्छुक सभी यात्री नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के अजमेरी गेट की तरफ से आएंगे और जाएंगे। शेष सभी प्लेटफॉर्म से नियमित ट्रेनें हमेशा की तरह चलती रहेंगी। यह उपाय ज्यादा भीड़भाड़ वाले समय में भीड़ को एक प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा होने से रोकने की दिशा में एक कदम है।
यह एक दुखद हादसा है जिसमें कई परिवारों ने अपने परिजनों को गंवा दिया है, जो लोग रिजर्वेशन करा कर रेलयात्रा के जरिए कुम्भ पहुंचना चाहते थे उनका क्या कसूर था। महाकुंभ के दौरान तमाम ट्रेनों पर भीड़तंत्र का कब्जा हो गया है। टिकट वाले यात्रियों को ट्रेन में घुसने नहीं दिया जा रहा है और बिना टिकट वाले लोग शारीरिक बल पर बलात आरक्षित डिब्बों में घुस कर सफर कर रहे हैं । भीड़ इतनी कि टिकट चैक करना तो दूर यात्रियों की गिनती भी नहीं की जा सकती है।  क्या हमारी सरकारें इसी व्यवस्था के बूते पर एक वैश्विक आयोजन का प्रचार प्रसार करने में लगी थी? यह वास्तव में सरकार और तंत्र की नासमझी और नाकामी है जिसको स्वीकार कर भविष्य के लिए सबक लेना चाहिए।

(विनायक फीचर्स)

अपकमिंग प्रोजेक्ट्स से दर्शकों को मन्त्रमुग्ध करेंगे हरिओम शर्मा

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मुंबई (अनिल बेदाग) : फिल्म निर्माता हरिओम शर्मा का नया धारावाहिक वसुंधरा जल्द ही दूरदर्शन वन पर रिलीज़ होने वाला है। हरिओम शर्मा उत्तरप्रदेश के डीजीपी और वर्तमान लोकसभा सदस्य की लिखित कहानी लखनऊ के रंगबाज पर भी सीरीज़ बनाने वाले हैं। वह फिल्म कर्ज के फेमस गीत एक हसीना थी के गाने का रिमेक गीत भी सारेगामा पर लॉन्च करने वाले हैं। इनके अपकमिंग प्रोजेक्ट्स की एक लंबी कतार है जो एक एक करके पर्दे से बाहर आएगी और दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगी।
हरिओम शर्मा हरियाणा के गुड़गांव में पटौदी डिस्ट्रिक्ट के भोड़ाकला के निवासी हैं। एक सम्पन्न परिवार में जन्मे हरिओम शर्मा किसी कमी के मोहताज नहीं थे। हाँ, पढ़ाई में ये जरा पीछे थे और चौथी में फेल होने का रिकॉर्ड भी बनाया। हालात ऐसे बने कि इन्हें घर छोड़कर भागना पड़ा।
हुआ यूं कि जब ये कम उम्र के ही थे तभी इनसे गलती हो गई और इनके पिताजी इन्हें मांरेंगे इस डर से ये दिल्ली से भागकर मुम्बई आ गए और यहीं से इनका संघर्ष भरा जीवन प्रारंभ हुआ। पेट भरने के लिए ये होटल पर प्लेट धोने लगे और सड़कों पर सोने लगे। मलमल पर सोने वाले का बिछौना खुरदरी जमीन बन गया था। लेकिन अच्छे इंसान की भगवान किसी ना किसी रूप में सहायता करते हैं, इन्हें भी एक सज्जन मिल गये। उन्होंने इन्हें अपने पास रखा। 20 वर्षो तक ये अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के पड़ोस में रहे। उसी दौरान इनको निर्माता निर्देशक नितिन मनमोहन का साथ मिला जिन्होंने इना मीना डिका, लाडला, पृथ्वी, महासंग्राम और रेडी जैसी फिल्में बनाई हैं।
जब नितिन अपने कैरियर की शुरुआत कर रहे थे तब हरिओम भी उनके साथ जुड़े और इनके अंदर भी निर्माता निर्देशक बनने का शौक आ गया। इन्होंने कई फिल्म और सीरीज का निर्माण किया। बतौर निर्माता मराठी फिल्म थाम्ब लक्ष्मी थाम्ब बनाया जिसमें अभिनेत्री नगमा मुख्य भूमिका में थी। उसके बाद फिल्म कमाल धमाल बनाई। कसाब पर बेस्ड फिल्म टेरीरिस्ट देश के दुश्मन बनाई जो कसाब से जुड़ी पहली फिल्म थी वह पर्दे पर आई।
हरिओम का जीवन सफलता के आकाश पर था मगर अचानक इनके जीवन से लक्ष्मी जी रूठ कर चली गयी और ये अर्श से फर्श पर आ गये। ये तीन चार वर्ष इनके लिए बेहद मुश्किल भरे रहे। समय कठिन था मगर इन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बस दुख इस बात का था कि जिनकी सहायता करने में इन्होंने कभी झिझक नहीं किया आज वही लोग मुंह फेरने लगे।
हरिओम वह इंसान है जो फिल्म निर्माण में पैसा लगाते हैं। ज़ब लोग चंद रुपये के लिए इनसे दूर जाने लगे। इस हालत में भी हरिओम शर्मा ने किसी के आगे हाथ नहीं फैलाये, भले पैदल सड़kon पर भटके लेकिन बड़े व्यापारी और राजनेताओं से संपर्क होते हुए कभी किसी के सामने वे नहीं झुके। उन्होंने खुद पर विश्वास रखा और जीवन के तीन चार साल तकलीफों में गुजारी। स्थिति दयनीय थी मगर हौसला बनाये रखा। हरिओम कहते हैं कि उनके करीबियों ने भले उनका दामन छोड़ दिया मगर उनके दोस्त राजू पंडा और बड़े भाई ने साथ दिया। यह वक्त हरिओम के लिए संघर्ष भरा रहा मगर इस वक्त ने नई सीख भी दी। इसी बीच एक महिला की बुक पब्लिश करवाने के लिए इन्होंने उनकी सहायता की और वापस किस्मत इनके साथ हो चली। आज पुनः हरिओम अपने नए मुकाम पर पहुंच गए हैं और वापस फिल्म निर्माण का कार्य जोर शोर से कर रहे हैं।

प्रतिबंधित क्षेत्र में हो रही थी नॉनवेज की बिक्री गोरक्षक दल ने पकड़ा

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मथुरा में गोरक्षक दल ने रविवार को सुबह प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थित एक मैरिज होम में नॉनवेज बिरयानी की बिक्री को पकड़ा। इसके गोरक्षकों की सूचना पर खाद्य सुरक्षा की टीम पहुंच गई। टीम ने यहां से नमूने एकत्रित किए हैं। पूछताछ में संचालक के पास फूड लाइसेंस था, लेकिन प्रतिबंधित क्षेत्र का अनापत्ति-पत्र नहीं मिला। इस पर टीम ने ताला लगाकर एक सप्ताह के अंदर जवाब देने के लिए नोटिस दिया है।

गोरक्षक दल के महामंत्री हेमंत शर्मा ने बताया कि सूचना मिली थी कि गोविंद नगर के जयसिंहपुरा में एक मैरिज होम के अंदर नॉनवेज बिरयानी की चोरी-छिपे बिक्री की जा रही है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के चलते यह क्षेत्र मांस बिक्री के लिए प्रतिबंधित है। मौके पर जाकर देखा तो बिरयानी की बिक्री मिली। इस पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग व पुलिस को सूचना दी गई।

सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया, संचालक के पास लाइसेंस है, लेकिन नगर निगम का अनापत्ति प्रमाण नहीं था। बिरयानी के सैंपल एकत्रित कराकर लैब भेजे हैं। सात दिन बाद बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं संचालक का कहना है कि उनके पास फूड लाइसेंस है। यह क्षेत्र प्रतिबंधित नहीं है।

अधपका चिकेन ना खाएं-अजित पवार ने किया अलर्ट

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने लोगों को सलाह दी कि वे अपने भोजन, खास तौर पर चिकन को अच्छी तरह से पकाकर खाएं। राज्य में ‘गिलियन-बैरे सिंड्रोम’ (जीबीएस) के हाल ही में सामने आए कई मामलों के बीच शनिवार को अजित पवार ने लोगों से  एहतियात के तौर पर अधपका चिकन खाने से बचने का आग्रह किया है। पुणे में पत्रकारों को संबोधित करते हुए  पवार ने इस बीमारी के कारण मुर्गी पालन से जुड़ी व्यवसायियों की चिंताओं को भी खत्म कर दिया और कहा कि इस बीमारी की वजह से मुर्गियों को मारने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन लोग अधपका चिकेन खाने से बचें।

मुर्गियों को मारने की जरूरत नहीं है

बता दें कि महाराष्ट्र में ‘गिलियन-बैरे सिंड्रोम’ (जीबीएस) के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। पवार ने कहा, “हाल ही में पुणे के एक इलाके में जीबीएस फैलने की सूचना मिली थी। इससे घबराए कुछ लोगों ने इसे पानी के प्रदूषण से जोड़ा जबकि दूसरे लोगों ने अनुमान लगाया कि यह चिकन खाने के कारण हुआ था। इस तरह की आशंकाओं की विस्तृत समीक्षा की गई जिसमें निष्कर्ष निकाला गया कि मुर्गियों को मारने की कोई आवश्यकता नहीं है।”

जीबीएस के फैलने की वजह आई सामने

अजित पवार ने कहा, “इस बीमारी को लेकर चिकित्सक भी सलाह देते हैं कि खाने वाले भोजन को अच्छी तरह से पकाया जाना चाहिए। पवार ने कहा कि राज्य में जीबीएस की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और इसकी वजह से मुर्गियों को मारने की कोई जरूरत नहीं है।’’ स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को जीबीएस का फिर से एक नया मामला सामने आया, जिससे राज्य में संदिग्ध और पुष्टि किए गए कुल मामलों की संख्या 208 हो गई है। बता दें कि जीबीएस संक्रमण दूषित पानी और भोजन, खास तौर पर ‘कैंपिलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया’ वाले भोजन से हो सकता है।

(इनपुट-पीटीआई)

विकृत मानसिकता का शिकार बनती मासूम बच्चियां* 

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          (मनोज कुमार अग्रवाल-विनायक फीचर्स)
    हमारे देश में कहा जाता है कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तत्र देवताः’ अर्थात जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं, परंतु आज विकृत मानसिकता के शिकार,वासना के भूखे, वहशी, दरिंदों द्वारा मासूम दूध पीती बच्चियों और किशोरियों तक को अपनी हवस की शिकार बनाकर उनका जीवन नष्ट किया जा रहा है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो(एन सी आर बी) के आंकड़े बताते हैं कि देश में हर दिन 86 रेप के मामले सामने आते हैं जिनमें करीब आधे छोटी अवयस्क बच्चियों के साथ घटित होते हैं।
    केंद्र सरकार की एजेंसी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार भारत में साल भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के चार लाख से ज्यादा अपराध दर्ज किए जाते हैं। इन अपराधों में सिर्फ रेप ही नहीं, बल्कि छेड़छाड़, दहेज हत्या, किडनैपिंग, ट्रैफिकिंग, एसिड अटैक जैसे अपराध भी शामिल हैं।
     हमारे देश में  रोजाना 86 लड़कियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की वारदातों को अंजाम दिया जाता है। आइए आप को पिछले एक पखवाड़े में अखबारों में प्रकाशित छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म की वारदातों से अवगत कराने का प्रयास करते हैं ये ऐसी घिनौनी वारदात हैं जिन्हें जान कर इंसान का सिर झुका जाता है। ऐसी विकृत मानसिकता वाले अपराधियों के बीच  रहते हुए भी हम विश्वगुरु बनने का स्वप्न संजो रहे हैं। इसी साल के आरंभ में 31 जनवरी को बलिया (उत्तर प्रदेश) में 3 नाबालिगों सहित 5 लोगों को एक 13 वर्षीय लड़की से बलात्कार करने और किसी को बताने पर गंभीर परिणामों की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
      31 जनवरी को ही मांडया (कर्नाटक) के एक सरकारी स्कूल के शौचालय में 8 वर्ष की बच्ची के साथ 2 लोगों द्वारा बलात्कार करके उसे गंभीर रूप से घायल करने के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया।
     4 फरवरी को जयपुर की एक विशेष अदालत ने 11 वर्षीय नाबालिग लड़की से बलात्कार करने के आरोप में रूप सिंह बैरवा नामक व्यक्ति को आजीवन कैद और 50,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
    6 फरवरी को कोलकाता में एक 14 वर्षीय बच्ची को घर छोड़ने के बहाने ले जाकर उससे बलात्कार करके हत्या कर देने के आरोप में टोटो नामक एक 22 वर्षीय ई-रिक्शा ड्राइवर को गिरफ्तार किया गया।
    6 फरवरी को ही जयपुर (राजस्थान) में एक 14 महीने की मासूम बच्ची से नशे की हालत में बलात्कार करने और अपनी घिनौनी हरकत का वीडियो बनाने के आरोप में उसके फूफा को गिरफ्तार किया गया।
   6 फरवरी को ही अम्बाला (हरियाणा) में एडीशनल सैशन जज ‘मनपाल रावत’ की अदालत ने एक 6 वर्षीय बच्ची को चाकलेट दिलाने के बहाने अपने साथ ले जाकर उससे बलात्कार करने के दोषी युवक को 20 वर्ष कैद के साथ 10,000 रुपए जुर्माना की सजा दी।
   6 फरवरी को ही नूंह (हरियाणा) में पुलिस ने एक 14 वर्षीय किशोरी से बलात्कार करने के आरोप में 2 युवकों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की।
   6 फरवरी को ही कृष्णागिरि जिले (तमिलनाडु) के सरकारी सैकेंडरी स्कूल में 13 वर्षीय स्कूली छात्रा का स्कूल परिसर के अंदर 2 दिनों तक यौन उत्पीड़न करने के आरोप में 3 शिक्षकों को गिरफ्तार किया गया।
    7 फरवरी को इंदौर (मध्य प्रदेश) की विशेष अदालत ने एक 7 वर्षीय बच्ची से बलात्कार करने के दोषी मंगल पवार को फांसी की सजा सुनाई।
      8 फरवरी को नासिक (महाराष्ट्र) के एक प्राइवेट स्कूल में एक 13 वर्षीय छात्रा से बलात्कार करने के आरोप में स्कूल के प्रिंसीपल तुकाराम गोविंद सावले और एक अध्यापक गोरखनाथ मारुति जोशी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार अध्यापक छठी कक्षा की छात्रा को प्रिंसीपल के घर ले गया जहां दोनों ने उसके साथ बलात्कार किया।
    8 फरवरी को ही छतरपुर (मध्य प्रदेश) में पुलिस ने एक 5 वर्षीय बच्ची से बलात्कार करने के आरोप में विनोद अहिरवार नामक युवक को गिरफ्तार किया।
   8 फरवरी को ही राजगढ़ (मध्य प्रदेश) में बलात्कार का शिकार हुई मूक-बधिर नाबालिग लड़की ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। 9 फरवरी को दिल्ली में एक 62 वर्षीय व्यक्ति को एक 16 वर्षीय नाबालिग से बलात्कार करके उसे गर्भवती करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
     11 फरवरी को कोरापुट (ओडिशा) में ‘ओपेरा शो’ देखने गई एक 14 वर्षीय किशोरी के साथ 4 युवकों ने बलात्कार कर डाला।। 11 फरवरी को ही भोपाल में राहुल साहू नामक ड्राइवर को एक 15 वर्षीय लड़की से बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 11 फरवरी को ही अलवर (राजस्थान) के नौगांवा गांव में एक नाबालिग से बलात्कार करने और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोप में उसके भाई को गिरफ्तार किया गया।
12 फरवरी को केंद्रपाड़ा (ओडिशा) की अदालत ने 8 वर्षीय बच्ची से बलात्कार करने ने आरोप में एक अध्यापक को 20 वर्ष कैद की सजा सुनाई।12 फरवरी को ही शिवपुरी (मध्य प्रदेश) में एक 7 वर्षीय बच्ची से बलात्कार करने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया। 12 फरवरी को ही इटावा (उत्तर प्रदेश) में चाकलेट दिलाने के बहाने एक 7 वर्षीय बच्ची से अंकुर नामक युवक ने बलात्कार कर डाला।ये वारदातें तो महज बानगी यानि नमूना भर है हकीकत में स्थिति और भी बदतर है।
हालांकि अदालतों ने दोषियों को सजा दी है, परंतु यह बुराई रुकने का नाम नहीं ले रही। ऐसे आरोपों में संलिप्त होने वालों को विशेष अदालतों के जरिए तुरंत मृत्युदंड देने की जरूरत है ताकि देश को ऐसे लोगों से मुक्ति मिल सके।
मासूम बच्चों का संरक्षण करने के लिए पॉक्सो एक्ट बनाया गया है। इस कानून को पॉक्सो एक्ट-2012 के नाम से जाना जाता है। इस कानून के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप के दोषी को फांसी की सजा का प्रावधन है। पॉक्सो कानून बच्चों के खिलाफ अपराधों को ‘जेंडर न्यूट्रल’ भी बनाता है। इसका सीधा मतलब ये है कि कानून बच्चियों के साथ-साथ लड़कों के खिलाफ हुए अपराध को भी देखता है।
       ये कहना गलत नहीं होगा कि डिजिटल क्रांति ने हर शख्स के हाथ में अश्लील सामग्री की पहुंच आसान कर दी है। यही आसान पहुंच लोगों की मानसिकता पर प्रभाव डालती है, जिस कारण इस तरह के मामलों में इजाफा हो रहा है। वहीं, कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति अपराधियों का हौसला और बुलंद कर देती है।
    भले ही देश में बलात्कार को लेकर कानून बने हो लेकिन सजा की प्रक्रिया बेहद जटिल है जिस कारण अपराधी को सजा मिलने में बहुत अधिक समय लग जाता है। रेप मामलों में आऱोपी को जल्द से जल्द सजा मिलनी  चाहिए जिससे लोगों में डर पैदा हो।
     नैतिक शिक्षा की कमी भी इसका एक मुख्य कारण माना जा सकती है।  नैतिक शिक्षा का सीधा अर्थ होता है, वो व्यवहार जिससे सबकी रक्षा हो सके। ये शिक्षा बच्चों को छोटी उम्र से ही दी जानी चाहिए। नैतिक सिक्षा सही और गलत के बीच अंतर करने में मदद करती है इसलिए नैतिक शिक्षा जरूरी होती है।
   रेप मामलों के बढ़ने की और भी तमाम वजह हो सकती हैं। नशा, सोशल मीडिया, कानून का खौफ ना होना समेत और कई। परेशानी की बात ये है कि ऐसे मामले दिन पर दिन बढ़ रहे हैं और देश की महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। ऐसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए कानून व्यवस्था का सख्त होना बेहद जरूरी है। लोगों में जब तक कानून का डर नहीं होगा तब तक इस तरह के अपराध होते रहेंगे। (विनायक फीचर्स)

झुंझुनू से जयपुर ले जाए जा रहे थे गोवंश, रींगस में गौ रक्षकों ने रोका

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Rajasthan News: सीकर जिले के रींगस कस्बे में गौ रक्षकों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से गोवंश का परिवहन कर रहे दो ट्रकों को पकड़ा. गौ रक्षक दल रींगस, आभावास, महरोली और शिवम रेस्क्यू टीम ने संयुक्त रूप से इन ट्रकों का करीब 30 किलोमीटर तक पीछा किया और आखिरकार रींगस के मिल तिराहे पर दोनों ट्रकों को रोकने में सफल रहे. जब इन ट्रकों की जांच की गई तो उनमेंぎ ठूंस-ठूंस कर भरे हुए कुल 27 गोवंश मिले, जिनमें एक ट्रक में 17 और दूसरे ट्रक में 10 गोवंश थे.

गौ रक्षक गौरीशंकर अग्रवाल ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि झुंझुनू से जयपुर की ओर अवैध रूप से गोवंश की तस्करी की जा रही है. संदेह होने पर गौ रक्षक दल ने ट्रकों का पीछा किया और मौके पर रोका. जब दस्तावेजों की जांच की गई तो ट्रक चालकों के पास गोवंश के परिवहन से संबंधित कोई भी अधिकृत अनुमति नहीं पाई गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि गायों को अवैध रूप से ले जाया जा रहा था.