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UP: आवारा पशुओं पर योगी सरकार का मेगा प्लान, गोशालाओं के लिए बनेंगे सेल्फ सस्टेनेबल मॉडल

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Uttar Prdaesh News: उत्तर प्रदेश में गाय और मवेशियों को बेहतर आश्रय प्रदान करने के लिए योगी सरकार टीपीपी मॉडल पर बने गौ आश्रयों को शुरू करने की योजना बना रही है. यहीं नहीं सरकार गाय आश्रयों को अपनी आय उत्पन्न करने के लिए आत्मनिर्भर भी बनाएगी. फसल की बर्बादी और यहां तक कि बड़ी दुर्घटनाएं झेल रहे किसानों के लिए आवारा मवेशियों का मुद्दा अब भाजपा सरकार की प्राथमिकता बन गई है. यूपी चुनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इसे बायो फार्मिंग से जोड़कर समस्या के स्थायी समाधान की बात कही थी.

मवेशियों के वध पर प्रतिबंध और गौरक्षकों के डर से आवारा पशुओं की समस्या तेजी से बढ़ी है और यूपी में दूध न देने वाले पशुओं को पालना किसानों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. 6 अगस्त, 2019 को उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहायता योजना’ को मंजूरी दी थी. जिसके तहत आवारा पशुओं को रखने वाले लोगों को राज्य सरकार प्रतिदिन 30 रुपये देती है. राज्य सरकार ने इस योजना पर करीब 109.5 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान लगाया था. इंडियास्पेंड में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, 25 सितंबर, 2021 तक 53,522 लोगों को 98,205 मवेशी दिए जा चुके हैं. हालांकि अगर इसकी तुलना उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की संख्या से करें तो यह बहुत कम है. यानी सरकार को अभी इस पर और काम करने की जरूरत है.

अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गौशाला चलाने के लिए अर्थव्यवस्था बनाने की जरूरत है. इसके लिए एक सेल्फ-सस्टेनेबल मॉडल बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पीपीपी मोड पर गौशालाओं का निर्माण कराया जाए। साथ ही उन्हें प्राकृतिक खेती, गोबर पेंट, सीएनजी और सीबीजी से जोड़ा जाए. इससे गौशालाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी और गायों के रख-रखाव और पालन-पोषण का खर्च वे खुद वहन कर सकेंगी. सीएम योगी ने कहा कि इन गौशालाओं के लिए इच्छुक एनजीओ से एमओयू करें और उन्हें आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराएं.

सफल मौद्रिक प्रबंधन और सफल विदेश नीति से विश्व पटल पर भारत की बढ़ती साख , भारत 2021-24 के दौरान विश्व की प्रमुख तीव्रगामी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

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– विवेक रंजन श्रीवास्तव

विगत वर्ष के परिप्रेक्ष्य में दुनिया के अन्य देशो  की तुलना में भारत की प्रगति के आंकड़े देखें तो जहाँ कोरोना जनित कारणों  से दुनिया के अनेक देशो की आर्थिक प्रगति बाधित रही है वहीँ आर्थिक समीक्षा 2021-22 के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था  9.2 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि दर्ज कर रही है।  वर्ष 2022-23 में भारत की आर्थिक विकास दर 8 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है। विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के अनुसार भी भारत 2021-24 के दौरान विश्व की प्रमुख तीव्रगामी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

 देश ने अंतरिक्ष , रक्षा , सोलर पावर , तथा ओषधि अनुसन्धान तथा निर्माण के क्षेत्रों में असाधारण सफलताएं अर्जित की हैं।  पारम्परिक निर्यात क्षेत्रो के अतिरिक्त कृषि निर्यात , रक्षा उपकरणों के निर्यात , वेक्सीन तथा दवा निर्यात , के साथ साथ विकसित देशों को भी अंतरिक्ष सेवाये देने  में वैश्विक स्तर पर देश ने अनेकानेक सफलताएं पाई हैं।  कृषि क्षेत्र में लगभग 4  प्रतिशत वृद्धि , औद्योगिक क्षेत्र में  7 प्रतिशत की विकास दर , सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर लगभग  8 प्रतिशत दर्ज की गई है।  दिसंबर 2021 में  विदेशी मुद्रा भंडार 634 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जो 13 महीनों से अधिक के आयात के समतुल्य और देश के विदेशी ऋण से भी अधिक है , 2021-22 में निवेश में 15 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

इन सारे आंकड़ों से परे यदि समवेत स्वरूप में देश को  विश्व गुरु बनाने के संकल्प से सिद्धि के सूत्र को ध्यान में रखते हुए देखा  जावे तो जहाँ एक ओर दुनियां के इंग्लैण्ड जैसे कई विकसित देशों सहित हमारे पडोसी देशों श्रीलंका , पाकिस्तान आदि की अर्थव्यवस्थाये ध्वस्त हो रही दिखती हैं , वहीँ भारत के राजकोषीय घाटे को बजट अनुमानों के 46 प्रतिशत तक सीमित कर लिया गया है , दुनिया पर मंडराते विश्व युद्ध के खतरे और महामारी के बावजूद पूंजी बाजार में अप्रैल-नवम्बर 2021 के दौरान 75 आईपीओ जारी करके 89 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जुटाई गई है , जो पिछले दशक के किसी भी वर्ष की तुलना में  अधिक है।  नवंबर, 2021 के अंत तक चीन, जापान और स्विट्ज़रलैंड के बाद भारत विश्व में चौथा सबसे अधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाला देश है।  देश के स्वर्ण भंडार में वृद्धि ,सुनियोजित  मौद्रिक प्रबंधन का ही परिणाम है की रूपये को परस्पर व्यापार में वैश्विक मुद्रा के रूप में स्वीकार्यता हेतु अनेक देशों से सहमति प्रतिलक्षित हो रही है।

 

ई  रूपये की व्यवस्था , यू पी आई भुगतान प्रणाली , जैसे कदमो ने भारत को मुद्रा पप्रबंधन में विश्व गुरु के रूप में  प्रस्तुत किया है। भारतीय समरसता की मुक्त वैश्विक विदेश नीति ने यू एन ओ  जैसे संगठन के सम्मुख भी भारत विश्व गुरु की तरह सबका मार्ग प्रशस्त करता दिखता है।  मैं विगत लगभग पांच महीनो से अमेरिका भ्रमण पर हूँ , मैं अपनी पिछली विदेश यात्राओं की तुलना में दुनियां के कई देशो  के सामान्य नागरिको का भारत के प्रति बदलता नजरिया अनुभव करता हूँ तो गर्व से सीना फूल जाता है।  मेरी दृष्टि में विश्व पटल पर भारत की धाक जमाने मे भारत के  समवेत प्रयासों में हमारा मौद्रिक प्रबंधन मुझे गेम चेंजर प्रतीत होता है। (युवराज)

एक और शाहीन बाग बनाने की तैयारी

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भारत के एक छोटे से शहर को धर्म के नाम पर भड़काया जा रहा है। ये शहर उत्तराखंड का हल्द्वानी है जहां दावा किया जा रहा है कि मुसलमान खतरे में हैं। आरोप लग रहे हैं कि बीजेपी की सरकार उनके घर गिराने जा रही है जबकि हकीकत ये है कि ये पूरी कार्रवाई अतिक्रमण की वजह से हो रही है। क्योंकि आरोप है कि इन लोगों ने रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ है। अब रेलवे अपनी जमीन खाली करवा रही है लेकिन इस जमीन पर 95 प्रतिशत की आबादी मुसलमानों की है इसीलिए आगे के कुछ दिनों के लिए यहां राजनीतिक मसाला तैयार हो रहा है।

दरअसल, हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे ट्रैक के पास बसी अवैध कॉलोनियों को गिराने के लिए एक निर्णय सुनाया है। जिसके बाद लिबरल गैंग के अंदर खलबली मच गई है और ईमानदार पत्रकार रवीश कुमार से लेकर मोहम्मद जुबैर तक सभी लिबरल गैंग के लोग इस मामले को शाहीन बाग जैसा मामला बताने में जुट गुए हैं। हालांकि सरकार द्वारा इन अवैध कॉलोनियों पर अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है फिर भी लिबरल गैंग के पेट में दर्द हो रहा है।सबसे पहले जानते हैं कि पूरा मामला क्या है? तो उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे स्टेशन के किनारे लगभग 2।5 किलोमीटर लंबी पट्टी पर अवैध कॉलोनियां बसी हुई हैं और ये कॉलोनियां स्वतंत्रता के बाद से बसना शुरू हुई थीं। रेलवे के अनुसार वनभूलपुरा में अवैध कब्जे के दायरे में आने वाली ढोलक बस्ती, गफूर बस्ती के साथ ही इंदिरा नगर, लाइन नंबर 17, बड़ी ठोकर और छोटी ठोकर के इलाके शामिल हैं।

जब देश को स्वतंत्रता मिली उस दौर में इस क्षेत्र के आसपास बड़े बगीचे, लकड़ी के गोदाम और लकड़ी के कारखाने हुआ करते थे, इन्हीं बगीचों और कारखानों में काम करने के लिए रामपुर, मुरादाबाद और बरेली से मुस्लिम समुदाय के लोगों को यहां लाया गया था। बगीचों में काम करते हुए लोगों ने रेलवे लाइन के पास पहले अपनी झुग्गियां लगाईं और वे झुग्गियां कच्चे मकानों से होती हई धीरे-धीरे पक्के मकानों में परिवर्तित हो गईं। रेलवे द्वारा दिए गए आंकड़ों को देखा जाए तो यह कोई छोटा-मोटा अतिक्रमण नहीं है बल्कि 78 एकड़ भूमि पर किया गया कब्जा है जिसमें 4000 से अधिक परिवार यहां पर रह रहे हैं और इन परिवारों में अधिकतर मुस्लिम परिवार हैं।

वहीं रेलवे ने यह भी दावा किया है कि जिस जगह पर अतिक्रमण हुआ है वहां पर कभी ट्रेन की पटरियां हुआ करती थीं। जिसका नक्शा आज भी रेलवे के पास मौजूद है। ऐसे में रेलवे ने कोर्ट के आदेश के बाद उसी जगह को चिह्नित किया है जहां पटरियों के निशान आज भी मौजूद हैं। अब जब कार्रवाई की बारी आई है तो बैनर पोस्टर लेकर महिलाओं और बच्चों के साथ लोग बैठे हुए हैं। ये लोग एक तरफ कार्रवाई को गलत ठहरा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ लिबरल गैंग के लोगों ने इसके कानूनी पक्ष की जांच परख किए बिना ही सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है और हल्द्वानी में दिल्ली जैसा शाहीन बाग बनाने के लिए गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाने लगे हैं।

प्रश्न है कि मामला कोर्ट में कैसे पहुंचा और हाइकोर्ट ने इस पर निर्णय क्या दिया है? साल 2016 में हल्द्वानी के गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी ने एक जनहित याचिका दायर कर इस मामले को कोर्ट में उठाया था। मामले पर लंबी सुनवाई और सभी पक्षों व साक्ष्यों को देखने और सुनने के बाद हाईकोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से सटी 78 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है जिसे हटाया जाना जरूरी है। 20 दिसंबर को नैनीताल कोर्ट द्वारा यह निर्णय सुनाया गया। ऐसे में प्रशासन हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश का पालन कर कार्रवाई कर रहा है।

ज्ञात हो कि हल्द्वानी के इस मामले से पहले साल 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम के संसद में पारित होने के बाद उसे अकारण ही एक बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास किया गया था। इसके अलावा NRC को लेकर भी विरोध प्रदर्शन किए गए। इन मुद्दों को माध्यम बनाकर सरकार के विरुद्ध माहौल बनाने का बहुत प्रयास किया गया और 2020 के मार्च महीने तक प्रदर्शन किया गया था। इस कथित आंदोलन का केंद्र दिल्ली का शाहीन बाग था जहां लोगों ने लगभग चार महीनों तक राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद करके रखा था जिसके चलते बहुत सारे लोगों को आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

अब आप कहेंगे कि यहां इस आंदोलन का उल्लेख करने का औचित्य ही क्या है। दरअसल, जिस तरह से शाहीन बाग में महिलाओं को आगे करके कथित आंदोलन चलाया जा रहा था और लिबरल गैंग पर्दे के पीछे से उस षड्यंत्रकारी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे उसी तरह हल्द्वानी में भी महिलाओं को आगे करके लिबरल गैंग उनका नेतृत्व कर रहा है जबकि यह साफ-साफ दिख रहा है कि भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। ये तो ऐसा ही कि पहले चोरी करो फिर सीना जोरी करो और कहो कागज नहीं दिखाएंगे। देश संविधान से चलता है ना कि भावनात्मक या धार्मिक आधार पर। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच चुका है तो नेताओं को बड़बोले बयान देने की बजाय अदालत के आदेश का इंतजार करना चाहिए। वैसे हल्द्वानी में आंदोलन का जो स्वरूप दिखाई दे रहा है उससे एक बात साबित हो गयी है कि शाहीन बाग कोई संयोग नहीं बल्कि प्रयोग था जोकि अब जगह-जगह दोहराया जा रहा है। अवैध कॉलोनियों से जब भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है तो उसे सियासी लोग धार्मिक रंग देने का काम करते हैं। दिल्ली में पिछले साल एमसीडी का बुलडोजर शाहीन बाग समेत कई अन्य इलाकों में पहुँचा तो इस कार्रवाई को एक धर्म विशेष के लोगों के खिलाफ अभियान करार दिया गया। अब उत्तराखंड चर्चा में है क्योंकि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की जमीन पर बनी अवैध कॉलोनी से कब्जा हटाने का जो आदेश उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दिया है उसके खिलाफ सियासत शुरू हो गयी है। एकदम शाहीन बाग के आंदोलन की तर्ज पर महिलाओं और बच्चों को ठंड के मौसम में आगे कर प्रदर्शन करवाया जा रहा है, कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं। यहाँ हमें समझना होगा कि सरकारी जमीन सार्वजनिक संपत्ति होती है किसी एक की बपौती नहीं। सरकारी जमीन से कब्जा छुड़वाने के प्रयास को अन्याय का रूप देना गलत है।

इस पूरे घटना चक्र का एक मानवीय पहलू भी हैं । उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 20 दिसंबर को हल्द्वानी में बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण करके बनाए गए ढांचों को गिराने के आदेश दिए थे। न्यायालय ने कहा था कि अगर जरूरत पड़े तो जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने के लिए पैरा मिलिट्री फोर्स की मदद ले, फिर भी कोई दिक्कत हो तो बलपूर्वक कार्रवाई की जाए। इसके बाद जगह खाली करने के लिए स्थानीय समाचार पत्रों की मदद से नोटिस दिये गये। जिसके बाद हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश के नेतृत्व में क्षेत्र के निवासियों ने उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। इलाके के लोगों का कहना है कि वे लोग इस क्षेत्र में 70 साल से रह रहे हैं। वहां 20 मस्जिदें, 9 मंदिर, पानी की टंकी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1970 में डाली गई एक सीवर लाइन, दो इंटर कॉलेज और एक प्राथमिक विद्यालय है इसलिए यह क्षेत्र अवैध कब्जे वाला नहीं है। इलाके के लोगों का कहना है कि हम प्रधानमंत्री, रेल मंत्री और मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि वे इस तथा-कथित अतिक्रमण को हटाने पर मानवीय पहलू से विचार करें। इलाके के लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर यह रेलवे की जमीन थी तो सरकार ने इसे पट्टे पर कैसे दिया था?

इस मामले में क्षेत्र के कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने कहा, ”करीब सौ साल से इस क्षेत्र में लोग बसे हुए हैं। यहां 70 साल पुरानी मस्जिदें और मंदिर हैं। यहां नजूल जमीन, पूर्ण स्वामित्व वाली भूमि और लीजधारक हैं।” उन्होंने कहा, ”रेलवे जिस 78 एकड़ जमीन को अपना बताता है, उसे खाली करने का विरोध करने के लिए हम व्यक्तिगत रूप से उच्च न्यायालय गये। हम उच्चतम न्यायालय भी गये जहां हमारे वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद मामले की पैरवी कर रहे हैं लेकिन जिस सरकार ने जमीन पर स्कूल एवं अस्पताल बनवाये, उसने अपने नागरिकों की कोई परवाह नहीं की।’’ विधानसभा में हल्द्वानी सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे सुमित हृदयेश ने हाल में प्रदर्शनकारियों के धरने में भी हिस्सा लिया था। हम आपको बता दें कि यह सीट पारंपरिक रूप से वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं उनकी मां इंदिरा हृदयेश जीतती थीं।

जहां तक इस पूरे मामले का सवाल है तो आपको बता दें कि उत्तराखंड उच्च न्यायायल ने हल्द्वानी के इस इलाके में रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का 20 दिसंबर को आदेश दिया था। न्यायालय ने अतिक्रमणकर्ताओं को वह जगह खाली करने के लिए एक हफ्ते का नोटिस देने का आदेश दिया था। हालांकि बनफूलपुरा के हजारों बाशिंदों ने अतिक्रमण हटाने का यह कहते हुए विरोध किया कि वे बेघर हो जायेंगे और स्कूल जाने वाले उनके बच्चों का भविष्य तबाह हो जाएगा।

इस बीच, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी अनुरोध किया है कि वे अतिक्रमण हटाने संबंधी इस आदेश पर मानवीय तरीके से विचार करें क्योंकि ऐसा होने पर हजारों लोग बेघर हो जाएंगे। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम एक खुला पत्र लिखते हुए इसे सोशल मीडिया पर शेयर भी कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि कानूनी पक्ष के इतर मानवीय दृष्टिकोण से मामले में कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए। हरीश रावत ने अपने पत्र के माध्यम से सवाल भी किया है कि यदि 50 हजार से ज्यादा लोगों को हटाया जाएगा तो ये लोग कहां जाएंगे? हरीश रावत ने कहा है कि अशांति का वातावरण पूरे हल्द्वानी और कुमाऊं के अंचल में फैलेगा जोकि ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आज भले कुछ लोग चुप हों लेकिन जब स्थितियां बिगड़ेंगी तो वो लोग भी सरकार के विवेक पर उंगली उठाएंगे। हरीश रावत ने पत्र के माध्यम से चेतावनी भी देते हुए कहा है कि जहां तक सवाल हमारे कर्तव्य का है, तो हम केवल इतना भर कर सकते हैं कि जब घर तोड़ने के लिए हथौड़ा उठेगा तो हम उसके आगे बैठ सकते हैं। वहीं एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि प्रधानमंत्री को इंसानियत की बुनियाद पर हल्द्वानी के लोगों की मदद करनी चाहिये और उन्हें वहां से नहीं निकालना चाहिए। उन्होंने सवाल किया है कि हल्द्वानी के लोगों के सर से छत छीन लेना कौन-सी इंसानियत है?

फ़िलहाल हल्द्वानी जमीन खाली करने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आ गया  है। सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड सरकार को नोटिस भी जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण और तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 7  फरवरी को होगी । दोनों पक्षों का साक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है । बहरहाल, मामला  जब  न्यायालय में है इसलिए प्रदर्शनकारियों को भी घरों में बैठना चाहिए और नेताओं को भी जुबान पर काबू रखना चाहिए साथ ही सोशल मीडिया पर तनाव बढ़ाने जैसी पोस्ट करने से भी बचना चाहिए। सांप्रदायिक सौहार्द्र कायम रख कर ही हम देश को आगे बढ़ा सकते हैं।हालांकि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है और ऐसे वक्त जब  को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी हैं  दोनों पक्षों को संयम रखना चाहिए ।

अशोक भाटिया

सम्मेद शिखरजी पर इको टूरिज्म गतिविधि पर रोक लगी

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सम्मेद शिखरजी पर केंद्र का बड़ा फैसला, झारखंड सरकार को इको टूरिज्म गतिविधि पर रोक लगाने के निर्देश

केंद्र सरकार ने गुरुवार को तीन साल पहले जारी किए गए अपने आदेश को वापस ले लिया है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से कहा है कि वह इस समिति में शामिल होने के लिए जैन समुदाय से दो सदस्यों और स्थानीय जनजातीय समूह से एक सदस्य को स्थायी सदस्य के रूप में आमंत्रित करे।

झारखंड के पारसनाथ में स्थित जैन समुदाय का पवित्र तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। केंद्र के मुताबिक, यह अब पर्यटन क्षेत्र नहीं होगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में सभी पर्यटन और इको टूरिज्म गतिविधि पर पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी है।

केंद्र सरकार ने गुरुवार को तीन साल पहले जारी किए गए अपने आदेश को वापस ले लिया है। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से आज पांच जनवरी को जारी दो पेज की चिट्ठी के दूसरे पेज पर लिखा गया है, ”इको सेंसेटिव जोन अधिसूचना के खंड-3 के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाती है, जिसमें अन्य सभी पर्यटन और इको-टूरिज्म गतिविधियां शामिल हैं। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है।”

केंद्र सरकार ने निगरानी समिति बनाई। राज्य सरकार से कहा गया है कि वह इस समिति में शामिल होने के लिए जैन समुदाय से दो सदस्यों और स्थानीय जनजातीय समूह से एक सदस्य को स्थायी सदस्य के रूप में आमंत्रित करे।

फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहा था जैन समुदाय
सम्मेद शिखर को पर्यटन क्षेत्र घोषित किए जाने के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से जैन समुदाय आंदोलन कर रहा है। इसके खिलाफ कई जैन मुनियों ने आमरण अनशन भी शुरू कर दिया था। इसमें जैन मुनि सुज्ञेयसागर महाराज ने मंगलवार को प्राण भी त्याग दिया था।

जैनियों का पवित्र तीर्थ है सम्मेद शिखरजी
सम्मेद शिखरजी जैनियों का पवित्र तीर्थ है। जैन समुदाय से जुड़े लोग सम्मेद शिखरजी के कण-कण को पवित्र मानते हैं। झारखंड के गिरिडीह जिले में पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित श्री सम्मेद शिखरजी को पार्श्वनाथ पर्वत भी कहा जाता है। ये जगह लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है। बड़ी संख्या में हिंदू भी इसे आस्था का बड़ा केंद्र मानते हैं। जैन समुदाय के लोग सम्मेद शिखरजी के दर्शन करते हैं और 27 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले मंदिरों में पूजा करते हैं। यहां पहुंचने वाले लोग पूजा-पाठ के बाद ही कुछ खाते-पीते हैं।

1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर तैयार मिलेगा : अमित शाह

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1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर तैयार मिलेगा, अमित शाह का एलान

राम मंदिर के लिए कानूनी लड़ाई 135 सालों से ज्यादा लंबी चली है। 15वीं सदी से चली आ रही इस लड़ाई पर साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विराम लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विवादित जमीन पर राममंदिर का निर्माण करने की अनुमति देते हुए मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अयोध्या में तैयार हो रहे राम मंदिर को लेकर बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर तैयार मिलेगा। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब से देश आजाद हुआ, तब से कांग्रेसी इसको कार्ट में उलझा रहे थे। मोदी जी आए एक दिन सुबह सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया और मोदी जी ने उसी दिन राम मंदिर का भूमि पूजन पूरा कर मंदिर निर्माण शुरू कराया। 1 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर तैयार मिलेगा। गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए कानूनी लड़ाई 135 सालों से ज्यादा लंबी चली है। 15वीं सदी से चली आ रही इस लड़ाई पर साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विराम लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विवादित जमीन पर राममंदिर का निर्माण करने की अनुमति देते हुए मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक ट्रस्ट बनाकर भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। पांच अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था।

स्थापत्य कला के लिए नजीर बनेगा राममंदिर
राममंदिर स्थापत्य कला के लिए भी नजीर होगा। 70 एकड़ के रामजन्मभूमि परिसर में संपूर्ण भारत को संजोने की योजना है। यहां हो रहे निर्माण कार्य में भारतीय संस्कृति के नायाब कला की झलक दिखेगी। राममंदिर जिन 400 स्तंभों पर टिका होगा उनमें देवी-देवताओं के चित्र उकेरे जाएंगे तो आठ एकड़ में बनने वाले परकोटे में रामकथा के 100 प्रसंगों का चित्रांकन किया जाएगा।

400 स्तंभों पर टिका होगा राममंदिर
राममंदिर न सिर्फ तकनीक बल्कि भव्यता में भी दुनिया के चुनिंदा मंदिरों में शामिल होगा। तीन मंजिला राममंदिर 400 स्तंभों पर टिका होगा। कुशल कारीगरों द्वारा इन स्तंभों में रामकथा के प्रसंगों सहित कुल 6400 मूर्तियां प्राचीन पद्धति से उकेरी जाएंगी, जो मंदिर को हेरिटेज लुक देने का काम करेंगी। मंदिर के हर खंभे में देवी-देवताओं की 16 मूर्तियों को उकेरा जाएगा।

रामायण के 100 प्रसंगों को भी उकेरा जाएगा
साथ ही राममंदिर के 2500 वर्ग फीट के क्षेत्र में बनने वाले परकोटे में रामायण के 100 प्रसंगों को भी उकेरा जाएगा। इसके लिए मूर्तिकारों सहित रामनगरी व देश के संत-धर्माचार्यों से भी सलाह ली जा रही है। मूर्तियों का निर्माण सबसे पहले पेंसिल से होगा फिल क्ले बनाया जाएगा उसके बाद मॉडलिंग की जाएगी।

मंदिर के इतिहास पर बनेगी फिल्म, महानायक देंगे आवाज
राममंदिर के लिए हुए पांच सौ वर्षों के संघर्ष पर एक फिल्म बनाने की ट्रस्ट की योजना है। फिल्म का निर्माण दूूरदर्शन कर रहा है। फिल्म में बॉलीवुड के सुपर स्टर अभिनेता अमिताभ बच्चन अपनी आवाज देंगे। राममंदिर के 500 साल के इतिहास को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मशहूर लेखक और फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून को दी गई है। उनके साथ छह सदस्यीय टीम काम करेगी। इस काम के लिए अमिताभ व प्रसून जोशी कोई फीस नहीं ले रहे हैं।

अयोध्या मामले का घटनाक्रम

  • 1528: बाबर ने यहां एक मस्जिद का निर्माण कराया जिसे बाबरी मस्जिद कहते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार इसी जगह पर भगवान राम का जन्म हुआ था।
  • 1853: हिंदुओं का आरोप कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ। मुद्दे पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई।
  • 1859: ब्रिटिश सरकार ने तारों की एक बाड़ खड़ी करके विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों और हिदुओं को अलग-अलग प्रार्थनाओं की इजाजत दे दी।
  • 1885: मामला पहली बार अदालत में पहुंचा। महंत रघुबर दास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे एक राम मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की।
  • 23 दिसंबर 1949: करीब 50 हिंदुओं ने मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति रख दी।  इसके बाद उस स्थान पर हिंदू नियमित रूप से पूजा करने लगे। मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया।
  • 16 जनवरी 1950: गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर कर रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष इजाजत मांगी।
  • 5 दिसंबर 1950: महंत परमहंस रामचंद्र दास ने हिंदू प्रार्थनाएं जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राममूर्ति को रखने के लिए मुकदमा दायर किया. मस्जिद को ‘ढांचा’ नाम दिया गया
  • 17 दिसंबर 1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया।
  • 18 दिसंबर 1961: उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया।
  • 1984: विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने और राम जन्मस्थान को स्वतंत्र कराने व एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया. एक समिति का गठन किया गया।
  • 1 फरवरी 1986: फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिदुओं को पूजा की इजाजत दी। ताले दोबारा खोले गए। नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया।
  • जून 1989: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने वीएचपी को औपचारिक समर्थन देना शुरू करके मंदिर आंदोलन को नया जीवन दे दिया।
  • 1 जुलाई 1989: भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवा मुकदमा दाखिल किया गया।
  • 9 नवंबर 1989: तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी।
  • 25 सितंबर 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली, जिसके बाद साम्प्रदायिक दंगे हुए।
  • नवंबर 1990: आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया। बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
  • अक्टूबर 1991: उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार ने बाबरी मस्जिद के आस-पास की 2.77 एकड़ भूमि को अपने अधिकार में ले लिया।
  • 6 दिसंबर 1992: हजारों की संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढाह दिया। इसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए। जल्दबाजी में एक अस्थायी राम मंदिर बनाया गया।
  • 16 दिसंबर 1992: मस्जिद की तोड़-फोड़ की जिम्मेदार स्थितियों की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का गठन हुआ।
  • जनवरी 2002: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यालय में एक अयोध्या विभाग शुरू किया, जिसका काम विवाद को सुलझाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों से बातचीत करना था।
  • अप्रैल 2002: अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।
  • मार्च-अगस्त 2003: इलाहबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दावा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं। मुस्लिमों में इसे लेकर अलग-अलग मत थे।
  • सितंबर 2003: एक अदालत ने फैसला दिया कि मस्जिद के विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए।
  • जुलाई 2009: लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
  • 28 सितंबर 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया।
  • 30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े में जमीन बंटी।
  • 9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।
  • जुलाई 2016: बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का निधन।
  • 21 मार्च 2017: सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही।
  • 19 अप्रैल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।8 फरवरी, 2018: सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपीलों पर सुनवाई शुरू की।
  • 2019:  सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन किया।
  • 6 अगस्त, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना मामले की सुनवाई शुरू की।
  • 16 अक्तूबर, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।
  • 9 नवंबर, 2019: सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा: विवादित भूमि पर बनेगा मंदिर, मुस्लिम पक्ष को कहीं और मिलेगी जमीन

‘कमीने’ के बाद ‘कुत्ते’ के लिए विशाल भारद्वाज ने रिक्रिएट किया गाना ‘फिर धन ते नान’

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मुम्बई। विशाल भारद्वाज और लव रंजन की ‘कुत्ते’ में नया और अनोखा ‘फिर धन ते नान’ गाना लाने की घोषणा ने अपने आप में दर्शकों के बीच काफी उत्साह पैदा कर दिया है। 2023 के पहले ब्लॉकबस्टर गाने के लिए दर्शकों के लंबे इंतजार पर अब फुर स्टॉप लग गया है क्योंकि ‘फिर धन ते नान’ आखिरकार सामने आ गया है और साल के चार्टबस्टर गाने की परिभाषा को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है।
केपर शैली की खोज करते हुए, बेसब्री से इंतजार किया जाने वाला ‘फिर धन ते नान’ गीत दर्शकों को कुत्ते की ब्लैक कॉमेडी थ्रिलर दुनिया से रूबरू कराएगा। कुछ अद्भुत संगीत बनाने के लिए पहचाने जाने वाले विशाल भारद्वाज ने गुलज़ार के लीरीक्स के लिए म्यूजिक दिया है। इस गाने को दो दमदार गायक सुखविंदर सिंह और विशाल डडलानी ने गाया है।
इस बहुप्रतीक्षित गाने के म्यूजिक कंपोजर विशाल भारद्वाज ने इसे बनाने के पीछे का कारण बताते हुए अपने विचार साझा किए। ‘फिर धन ते नान’ एक ऐसा इमोशन है जो आपके भीतर उमड़ता है। यह आकर्षक है, फिर भी ओरिजनल गाने, धन ते नान की यादें ताजा करता है, जो एक चार्टबस्टर था जिसने अपना आकर्षण कभी नहीं खोया। यह आज भी प्ले किया जाता है। शायद इसीलिए, शुरू में हमारे लिए फिर धन ते नान की रचना करना चुनौतीपूर्ण था और ओरिजनल धुन में बदलाव करने के बारे में सोचा। पहले वाले गाने की वास्तविकता को नए वाले गाने की ताजगी के साथ बरकरार रखते हुए हमें दोनों को इंटीग्रेट करने की जरूरत थी। एक और चुनौती यह थी कि धन ते नान एकदम परफेक्ट है। इसलिए नए वर्जन को अंतिम रूप देने से पहले कई मीटिंग्स, डिस्कशन्स और जैमिंग सेशन करने पड़े। धन ते नान की रचना सालों पहले की गई थी, इसलिए हमें यह ध्यान रखना था कि नए वर्जन में किए गए बदलावों को आज के कंटेंपरेरी बीट्स और म्यूजिक को शोकेस करे और फिर भी इसकी खासियत बरकरार रहें। एक बड़ा फैसला ओरिजनल सिंगर्स और लिरिसिस्ट – सुखविंदर और विशाल ददलानी को फिर से बनाए रखना था और लेजेंड्री गुलज़ार साहब लीरिक्स पर फिर धन ते नान गाना था। इसमें भी हमारी मदद करने के लिए हम हमेशा गुलजार साहब के बेहद शुक्रगुजार रहेंगे। विशाल की हस्की, वाइब्रेंट आवाज के साथ सुखविंदर की गुनगुनाहट हमारे गाने में जादू बिखेरती हैं। यह सेंसुअस, सुरिला और झूमने पर मजबूर करने वाला है। अब यह गाना जारी कर दिया गया है और जिसका जादू आप सब भी महसूस कर पाएंगे।
इसके अलावा, ‘फिर धन ते नान’ गाना निस्संदेह सबसे खास और सबसे बड़ा गाना है जो आखिरकार रिलीज हो चुका है। यह फिल्म निश्चित रूप से साल की शुरुआत में दर्शकों के लिए एक बड़ी ट्रीट के रूप में आई है और फिल्म की रिलीज के लिए उत्साह का लेवल बढ़ गया है। दर्शकों ने एक बार शाहिद कपूर को इस गाने की ट्यून पर झूमते देखा था और अब अर्जुन कपूर, तब्बू, राधिका मदान, शार्दुल भारद्वाज, नसीरुद्दीन शाह, कोंकणा सेन शर्मा और कुमुद मिश्रा की नई कलाकारों की टुकड़ी इस पर डांस रही है। गाने का नए वर्जन जो वास्तव में पर्दे पर देखने के लिए दर्शक क्रेजी हुए जा रहे हैं।
लव फिल्म्स और विशाल भारद्वाज फिल्म्स के बैनर तले लव रंजन, विशाल भारद्वाज, अंकुर गर्ग और रेखा भारद्वाज द्वारा निर्मित ‘कुत्ते’ गुलशन कुमार और भूषण कुमार की टी-सीरीज़ द्वारा प्रस्तुत है। इस फिल्म का निर्देशन विशाल-रेखा के पुत्र आसमान भारद्वाज ने किया है। फिल्म के संगीतकार विशाल भारद्वाज हैं और इसके बोल गुलजार ने लिखे हैं। कुत्ते 13 जनवरी 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

मिस बॉलीवुड ऑनलाइन ब्यूटी कांटेस्ट 2023 की विनर बनी एक्ट्रेस जानवी राठौड़, विभा तिवारी बनी फर्स्ट रनरअप

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मुम्बई में 1 जनवरी 2023 को केसीएफ व केसीपी प्रस्तुत “मिस बॉलीवुड ऑनलाइन ब्यूटी कॉन्टेस्ट 2023” का आयोजन किया गया जहां एक्ट्रेस जानवी राठौड़ विनर और मॉडल ऎक्ट्रेस विभा तिवारी फर्स्ट रनरअप रहीं। कृष्णा चौहान ने नए वर्ष के उपलक्ष्य में 2023 में एक शानदार इवेंट किया। केसीएफ और केसीपी द्वारा जनवरी में मिस बॉलीवुड ऑनलाइन ब्यूटी कांटेस्ट 2023 का चौथा सीजन आयोजन हुआ। इस ब्यूटी कांटेस्ट के ज्यूरी मेम्बर कृष्णा चौहान, डॉ परिन सोमानी (अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर) और आर राजपाल (पब्लिसिटी डिज़ाइनर) रहे।

आपको बता दें कि कृष्णा चौहान 26 जनवरी 2023 को “राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2023″ आयोजित करने जा रहे हैं जो दूसरा सीज़न होगा। इसका पोस्टर सोशल मीडिया पर आउट होते ही वायरल हो गया है। केसीएफ प्रस्तुत यह पुरस्कार समारोह मुम्बई में अंधेरी स्थित मेयर हॉल में होगा। राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2023” उन लोगों को नवाजा जाएगा जिन्होंने समाज सेवा और मानव सेवा का उल्लेखनीय कार्य किया है। कृष्णा चौहान इस अवार्ड समारोह को लेकर काफी उत्साहित हैं।

इस पुरस्कार समारोह के बाद कृष्णा चौहान अपनी नेक्स्ट हॉरर थ्रिलर फिल्म आत्मा डॉट कॉम की शूटिंग शुरू करने जा रहे हैं, जिसका हाल ही में मुहूर्त किया गया था। कृष्णा चौहान एक्टिव सोशल वर्कर हैं साथ ही अवार्ड्स फंक्शन्स करवाने के मामले में सबसे चर्चित शख्सियत माने जाते हैं।

आपको बता दें कि कृष्णा चौहान का हिंदी अल्बम “ज़िक्र तेरा” हाल ही में रिलीज हुआ है और उनकी हिंदी फिल्म “आत्मा डॉट कॉम” शीघ्र ही फ्लोर पर जाने वाली है, इसके संगीतकार दिलीप सेन हैं।

दिल्ली में पारा 2.8 डिग्री तक गिरा

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Delhi Weather Update: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दिल्ली में आज (5 जनवरी) को लोधी रोड में न्यूनतम तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.राजधानी में यह इस मौसम का सबसे न्यूनतम तापमान है. वहीं सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. सुबह 6:10 बजे यह 3.2 और 6:10 से 8:30 के बीच 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.इससे पहले बुधवार सुबह न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. कोहरे की चादर में लिपटी राजधानी दिल्ली धर्मशाला, नैनीताल और देहरादून से भी ज्यादा ठंडी हो गई है.

मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 3 दिनों तक उत्तर भारत में घने से बहुत घने कोहरे और शीतलहर की स्थिति जारी रहेगी. इसके बाद इसकी तीव्रता कुछ कम हो जाएगी. इसके साथ ही अगले 2-3 दिनों तक उत्तराखंड, दक्षिण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरी मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में हल्की बारिश की संभावना है. इसके अलावा 2-3 दिनों के दौरान उत्तराखंड और राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में भी घना कोहरा छाया रह सकता है.

जानें दिल्ली में कैसा रहेगा तापमान 
प्रादेशिक मौसम विज्ञान केंद्र नई दिल्ली (Regional Meteorology Centre New Delhi) के मुताबिक, दिल्ली में 5 जनवरी को न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा. वहीं, घने कोहरे के साथ शीतलहर चलने के आसार हैं. राजधानी में 6 और 7 जनवरी को न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. यहां घने कोहरे के साथ शीतलहर चलेगी. 8 जनवरी से पारा बढ़ने के आसार हैं. ​रविवार को राजधानी में सुबह हल्के कोहरे के साथ दिन में बादल साफ रहेंगे. 8 जनवरी को न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है.

19 ट्रेनें चल रही साढ़े चार घंटे तक की देरी से 

रेल अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि घने कोहरे के कारण दृश्यता 200 मीटर रह गई है, जिसकी वजह से रेल परिवहन प्रभावित हुआ है. उन्होंने बताया कि कोहरे के कारण दिल्ली आने वाली कम से कम 19 ट्रेन डेढ़ घंटे से साढ़े चार घंटे तक देरी से चल रही हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सैटेलाइट के जरिये ली गई तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें भारत के मैदानी क्षेत्रों और उससे लगते मध्य, पूर्वी और उत्तर भाग में कोहरे की मोटी परत दिख रही है.

जानकारी के अनुसार, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे स्थित पालम वेधशाला ने बुधवार को सुबह साढ़े पांच बजे दृश्यता 200 मीटर दर्ज की. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दृश्यता शून्य से 50 मीटर के बीच रहने पर ‘बेहद घना कोहरा’, 51 मीटर से 200 मीटर के बीच ‘घना कोहरा’, 201 मीटर से 500 मीटर के बीच ‘मध्यम कोहरा’ और 501 से 1,000 मीटर के बीच रहने पर ‘हल्का कोहरा’ माना जाता है. दिल्ली में न्यूनतम तापमान धर्मशाला (5.2 डिग्री), नैनीताल (6 डिग्री) और देहरादून (4.5 डिग्री) से भी कम दर्ज किया गया. दिल्ली में बुधवार को न्यूनतम तापमान दिल्ली विश्वविद्यालय के पास 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

24 से 48 घंटों तक चलेंगी शीतलहर 
आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरके जेनामणि ने कहा, ”दिल्ली में शीत लहर जारी है और अधिकतम तापमान भी कम है, जिससे सर्दी बनी हुई है. उन्होंने बताया कि अधिकतर स्थानों पर अधिकतम तापमान 13 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है. हालांकि, दिल्ली में कोहरे की स्थिति में सुधार हुआ है. जेनामणि ने कहा कि अगले 24 से 48 घंटों के लिए शीत लहर और शीत दिवस की स्थिति बनी रहने की संभावना है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण कुछ सुधार होगा, जिससे सात जनवरी के बाद उत्तर भारत में असर पड़ सकता है.

वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में ऐसी ही स्थिति रहेगी. इन राज्यों में दिन में तापमान सामान्य से बहुत कम रहने की संभावना है. ‘शीत दिवस’ तब होता है जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस से कम या उसके बराबर होता है और अधिकतम तापमान सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री सेल्सियस कम होता है. इसके आलावा ‘गंभीर ठंडा दिन’ तब होता है, जब अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक कम होता है. न्यूनतम तापमान के दो डिग्री सेल्सियस रहने या सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस से कम रहने पर ‘भीषण’ शीतलहर की घोषणा की जाती है.

 

निधि ने की थी साजिश? परिवार ने उठाए सवाल, आखिर कातिल कार को ढूंढने में क्यों लगे 12 घंटे

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Kanjhawala Death Case: दिल्ली के सुल्तानपुरी के कंझावला इलाके में 1 जनवरी तड़के 20 वर्षीय अंजलि एक स्कूटी पर जा रही थी, तभी एक बलेनो कार ने टक्कर मार दी. उसके बाद अंजलि का पैर कार के एक्सेल में फंस गया, कार ने अंजलि को करीब 12 किलोमीटर तक घसीटा और अंजलि की दर्दनाक मौत हो गई. इस पूरे मामले में अब सामने आया है कि कार को ट्रैक करने के लिए पीसीआर वैन और रात्रि गश्त इकाइयों सहित कम से कम 10 गाड़ियों को लगाया गया था, लेकिन 12 घंटे तक कार का पता नहीं लगाया जा सका था.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि घना कोहरा होने के कारण कार को ट्रैक करना काफी मुश्किल था. जांच में सामने आया कि कार ने अंजलि को सुल्तानपुरी से कंझावला तक 12 किलोमीटर तक घसीटा और पुलिस को चकमा देने के लिए मुख्य सड़क की बजाय संकरी गलियों में चली गई. चलिए केस से जुड़ी कुछ अहम बातें और जरूरी सवालों के बारे में आपको बताते हैं.

परिवार का दावा- ‘अंजलि ने कभी शराब नहीं पी’

इस मामले की मुख्य गवाह निधि (हादसे के दौरान जो अंजलि के साथ थी) ने दावा किया कि अंजलि रात में नशे की हालत में थी और वो स्कूटी चलाने की जिद कर रही थी. वहीं दूसरी ओर, अंजलि के परिवार ने दावे का खंडन किया और कहा कि उन्होंने अंजलि से किसी निधि के बारे में कभी नहीं सुना. अंजलि की मां रेहा देवी ने पत्रकारों को बताया कि अंजलि ने कभी शराब नहीं पी और कभी भी शराब पीकर घर नहीं आई.

‘निधि और अंजलि 15 दिन से एक-दूसरे को जानती थीं’

निधि ने अब पुलिस को बताया है कि यह पहला मौका था जब वे 31 तारीख की रात को एक साथ निकली थीं. निधि ने कहा कि वह अंजलि को केवल 15 दिनों से जानती थी. अभी तक पता चला है कि अंजलि और निधि एक होटल में पार्टी अटेंड करने गई थीं. अंजलि और निधि के नाम पर एक कमरा बुक किया गया था और होटल बुक करने के लिए उनके आधार कार्ड होटल अधिकारियों को दिए गए थे. उन्हें होटल पार्टी में 7 लोगों से बात करते देखा गया, जिनसे पुलिस ने पूछताछ की है.

‘निधि अंतिम संस्कार के बाद सामने क्यों आई?’

निधि को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. निधि ने अपने बयान में बताया है कि वो भी हादसे में घायल हुई थी और अंजलि को छोड़कर घर भाग गई थी. उसने बताया कि वो हादसे के बाद डर गई थी और इसीलिए उसने अंजलि के परिजनों या पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी. वहीं अंजलि के परिवार ने अब सवाल उठाया है कि निधि उनकी बेटी के अंतिम संस्कार के बाद ही सामने क्यों आई? अंजलि के मामा ने कहा, “अगर वह तब डरी हुई थी तो अब क्यों नहीं डर रही? यह निधि की साजिश थी.”

अंजलि को लगी थीं 40 चोटें

अंजलि को सुल्तानपुरी से कंझावला तक लगभग 12 किलोमीटर तक घसीटा गया था. उसके शरीर पर 40 चोटें लगी थीं और कई चोटें, खरोंच और घाव थे. उसका ब्रेन मैटर गायब था. फोरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक, अंजलि आगे के बाएं पहिये पर फंसी हुई थी और उसका सिर कार के बूट की ओर था.

‘पुलिस टीमों को किया गया था अलर्ट, लेकिन…’

कंझावला, होशंबी बॉर्डर और अमन विहार से तीन पीसीआर वैन उन 10 वाहनों में शामिल थीं, जो पुलिस कंट्रोल रूम में कई कॉल आने के बाद कार का पता लगाने के लिए रात में निकलीं थीं. जांच में पता चला है कि एक पुलिस वैन ने स्कूटी को हादसे के बाद देखा था, चूंकि वहां कोई मौजूद नहीं था तो पुलिसकर्मियों ने मान लिया कि वो अस्पताल गए होंगे. बलेनो कार 12 घंटे से अधिक समय के बाद रविवार दोपहर मिली थी.

Cow Economy – इंजीनियर गौ पालक का हाईटेक डेयरी फार्म, सालाना करोड़ों की कमाई

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आगर मालवा. कृषि और पशुपालन को लाभ का धंधा बनाया जा सकता है इसे साबित किया है आगर मालवा जिले के एक छोटे से गांव के उच्च शिक्षा हासिल एक युवा इंजीनियर ने. बीटेक इंजीनियर ने किसी महानगर में नौकरी करने के बजाय गौपालन से सालाना करोड़ों का टर्न ओवर हासिल कर लिया है. अपनी मेहनत और लगन से करीब 5 लाख रुपयों से खरीदी गई 8 गायों से शुरू किया गौ दुग्ध का व्यापार अब करोड़ों के टर्न ओवर में बदल गया है.

आगर मालवा जिले के मोड़ी गांव में रहने वाले अनिल पाटीदार और उसके किसान पिता का एक समय सपना था कि अनिल पढ़ लिखकर किसी बड़ी कम्पनी में अच्छी नौकरी करे. इंजीनियरिंग डिग्री हासिल करने के बाद उनका यह सपना आसानी से पूरा भी हो रहा था. लेकिन बचपन से ही प्रकृति और क्षेत्र से प्रेम और कुछ अलग करने की चाह में अनिल ने नई राह अपनाने की ठानी और बजाय किसी कम्पनी में नौकरी करने के बजाए स्वयं का डेयरी फार्मिंग का व्यवसाय शुरू किया. और आज वो किसी की नौकरी करने के बजाय खुद नौकरी देने वाले बन गए.

8 गाय से शुरू हुआ सफर आज 100 से ज्यादा पशु

अनिल पाटीदार ने वर्ष 2018 में राजस्थान से 8 उन्नत नस्ल की गाय खरीद कर अपना एक छोटा सा डेयरी फार्म शुरू किया था. इस डेयरी फार्म के जरिये उनका उद्देश्य था कि गौसेवा के साथ साथ उन्हें और लोगों को बिना किसी केमिकल का शुद्ध दूध उपलब्ध हो सके. धीरे धीरे अपनी मेहनत और लगन से व्यवसाय ऐसा चला कि करीब 4 वर्षो में ही उन्नत किस्म की एक सौ से भी अधिक गायें वर्तमान में उनके डेयरी फार्म पर पाली जा रही हैं. इनके जरिये रोजाना सैकड़ों लीटर दूध से सालाना करोड़ों का व्यापार हो रहा है. अनिल न केवल दूध का व्यापार कर रहे हैं बल्कि खासतौर पर ब्रीडिंग के जरिये क्षेत्र में गायों की अच्छी नस्ल भी तैयार की जा रही है. इसके साथ साथ घी, पनीर और अन्य दूध से बने प्रोडक्ट बनाकर भी बेचे जा रहे हैं. इससे उसे अतिरिक्त अधिक आय प्राप्त हो रही है.

मशीनें निकालती हैं गाय का दूध

अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का उपयोग अनिल डेयरी फार्म में कर रहे हैं. फार्म में  गायों का दूध निकालने के लिए मशीनें लगायी गयी हैं. इससे 100 से अधिक गायों का दूध रोजाना आसानी से निकाला जा सके. साथ ही गायों के लिए पंखे, घास काटने की मशीन आदि भी फार्म में लगाई गई है. गायों की देखभाल अपने कर्मचारियों के साथ स्वयं अनिल भी प्रतिदिन करते हैं. इससे अच्छी सेहत के साथ साथ अच्छा खासा मुनाफा भी उन्हें मिल रहा है. साथ ही इस बात का सुकून भी कि वो अपने घर परिवार के साथ अपने गांव में हैं.