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फैशन और सौंदर्य की दुनिया की चर्चित शख्सियत : अंजली फौगाट

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                             अंजली फौगाट का नाम फैशन और सौंदर्य की दुनिया में एक चर्चित शख्सियत के रूप में बड़े ही कम समय में तेजी से उभर कर सामने आया है। एक विश्व प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर के रूप में पिछले कुछ वर्षों से वो मिस यूनिवर्स की ब्यूटी क्वीन्स को तैयार कर रही हैं। अंजली इस महीने न्यू ऑरलियन्स में 71वें मिस यूनिवर्स इवेंट का गवाह बनने जा रही हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक डिजाइनर के रूप में काम करके की थी। कुछ वर्षों के बाद, उन्होंने डीडीसी (डिजाइनर ड्रीम कलेक्शन) के रूप में जाना जाने वाला अपना खुद का लेबल लॉन्च किया और जल्दी ही देश में सबसे अधिक मांग वाले डिजाइनरों में से एक बन गईं। हाल के वर्षों में, फौगट मिस यूनिवर्स प्रतियोगियों के कपड़े पहनने में तेजी से शामिल हो गई हैं।

उसने कई विजेताओं और उपविजेताओं के कपड़े पहने हैं, और उसके डिजाइनों को दुनिया भर की पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में चित्रित किया गया है। फिलवक्त अंजली फौगाट मिस यूनिवर्स चिली और मिस यूनिवर्स अरमानिया के लिए ज्वेलरी और ड्रेस डिजाइन कर रही हैं। अंजली फौगाट के डिजाइन उनके स्त्रैण आकार, नाजुक कपड़े और जटिल बीडिंग के लिए जाने जाते हैं। वह अक्सर अपने डिजाइनों में पारंपरिक भारतीय कपड़ों और अलंकरणों का उपयोग करती हैं, जो उन्हें एक अद्वितीय और आकर्षक स्वभाव देता है। चाहे वह एक विजेता या उपविजेता के रूप में तैयार हो, फौगाट हमेशा यह सुनिश्चित करती है कि उसका संग्रह रॉयल्टी जैसा महसूस हो।

पूर्व में ‘इमर्जिंग वुमेन एंटरप्रेन्योर्स इन फैशन’ अवार्ड प्राप्त कर चुकी फैशन ब्रांड ‘डिजाइनर ड्रीम कलेक्शन’ की संस्थापक और क्रिएटिव डायरेक्टर अंजली फौगाट मिस यूनिवर्स हरनाज़ कौर संधू और कई अन्य बॉलीवुड हस्तियों को अपने डिजाइन की वस्त्र पहनाए और मिस यूनिवर्स सोफिया डिपासियर को 71वें मिस यूनिवर्स सौंदर्य प्रतियोगिता के दौरान अपने खुद के डिजाइन किये वस्त्र पहनाने के लिए काफी उत्साहित थीं लेकिन अब खबर आ गई है कि अंजली फौगाट मिस यूनिवर्स चिल्ली सोफिया डेपासियर के लुक को डिजाइन की हैं।

सोफिया डेपासियर मिस यूनिवर्स के 71वें संस्करण में चिली का प्रतिनिधित्व करेंगी। सौंदर्य प्रतियोगिता की दुनिया में सोफिया डेपासियर का नाम कोई अजनबी नहीं है उसने मिस टीन साउथ फ्लोरिडा 2004 में भाग लिया था जहाँ उसे मिस फोटोजेनिक से सम्मानित किया गया था।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

केजरीवाल और केसीआर से कांग्रेस को परहेज , ऐसे होगी विपक्षी एकता ?

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राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा अपने समापन की तरफ बढ़ रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तरफ से विपक्षी दलों के नेताओं को भेजी गयी चिट्ठी से पूर्णाहुति जैसा माहौल भी बनने लगा है । अब तो  कांग्रेस पार्टी ने कमाल कर दिया  है। भारत जोड़ो यात्रा के समापन समारोह में शामिल होने के लिए उसने देश की 21 पार्टियों को न्योता दिया है लेकिन आम आदमी पार्टी और भारत राष्ट्र संघ को नहीं बुलाया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभी 21 पार्टियों के अध्यक्षों को चिट्ठी लिखी है। सोचें, खड़गे को संसदीय कामकाज के दौरान आम आदमी पार्टी और भारत राष्ट्र समिति के साथ राजनीकि करने में कोई दिक्कत नहीं होती है। उन्होंने पिछले शीतकालीन सत्र में दो बार विपक्षी पार्टियों की बैठक बुलाई, जिसमें इन दोनों पार्टियों के नेता शामिल हुए। संसद में सरकार को घेरने में इन दोनों पार्टियों ने कांग्रेस के साथ सहयोग किया। लेकिन कश्मीर के श्रीनगर में 30 जनवरी को यात्रा के समापन कार्यक्रम का न्योता इनको नहीं दिया गया है।इससे पहले भी राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रही यात्रा जब दिल्ली पहुंचने वाली थी तब सभी विपक्षी पार्टियों को चिट्ठी लिख कर बुलाया गया था उसमें भी आप नेता अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी नहीं लिखी गई थी। यह अलग बात है कि कोई भी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बुलावे पर उसकी यात्रा मे शामिल नहीं हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश में जब यात्रा पहुंची तो वहां की विपक्षी पार्टियों को न्योता दिया गया लेकिन उनमें से भी कोई नेता यात्रा में शामिल नहीं हुआ। अब तीसरी बार विपक्षी पार्टियों को न्योता दिया गया है।

कांग्रेस ने कहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने समान विचारधारा वाली पार्टियों को न्योता दिया है। तो सवाल है कि क्या अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति को कांग्रेस समान विचारधारा की पार्टी नहीं मानती है? अगर ये समान विचार वाली पार्टियां नहीं हैं तो संसद में इनके साथ कैसे समन्वय और सहयोग बनता है? एक सवाल यह भी है कि किस आधार पर कांग्रेस इन दोनों को समान विचार वाली पार्टी नहीं मान रही है? केजरीवाल की तरह राहुल गांधी भी मंदिर मंदिर जाते हैं और उनकी तरह मुफ्त में बिजली, पानी की घोषणा कांग्रेस भी करती है। केजरीवाल और केसीआर दोनों की पार्टी भी भाजपा के खिलाफ बोलते और उससे लड़ते हैं। सो, यह विचारधारा का मामला है।असलियत यह है कि जहां भी कांग्रेस का अपना हित सीधे किसी पार्टी से टकरा रहा है वह पार्टी कांग्रेस को पसंद नहीं है। जहां पार्टी पहले ही अपने हितों का सरेंडर कर चुकी है वहां की पार्टियों के साथ काम करने में कांग्रेस को दिक्कत नहीं है। आम आदमी पार्टी सीधे कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रही है। उसने दिल्ली कांग्रेस के हाथ से छीन ली, गोवा और गुजरात में कांग्रेस को नुकसान किया और इस साल होने वाले चुनाव में राजस्थान सहित कुछ और राज्यों में कांग्रेस को नुकसान कर सकती है। इसलिए वह कांग्रेस को पसंद नहीं है। तेलंगाना का निर्माण कांग्रेस ने कराया था और वह वहां वापसी की उम्मीद कर रही है, जिसके लिए उसको सीधे केसीआर की पार्टी से टकराना है। ऊपर से केसीआर कांग्रेस को छोड़ कर मोर्चा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सोचें, अगर भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने का कांग्रेस का यह पैमाना होगा तो कैसे गठबंधन बनेगा और काम करेगा?

हाल फिलहाल केसीआर और अरविंद केजरीवाल को काफी करीब देखा गया है, और तेलंगाना रैली में केजरीवाल के साथ साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी केसीआर की तरफ से बुलावा भेजा गया है। जैसे केजरीवाल के साथ केसीआर पंजाब तक जाकर किसानों को चेक बांट चुके हैं, पटना जाकर नीतीश कुमार के साथ विपक्षी एकता के प्रयासों का प्रदर्शन भी कर चुके हैं  लेकिन 18 जनवरी को होने जा रही रैली में केसीआर ने नीतीश कुमार ही नहीं, ममता बनर्जी को भी नहीं बुलाया है।केजरीवाल और केसीआर के प्रति कांग्रेस का व्यवहार इसलिए भी थोड़ा अजीब लग रहा है क्योंकि संसद के शीतकालीन सत्र में जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों के सांसदों की मीटिंग बुलायी थी, तो आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह के अलावा केसीआर के सांसद के केशव राव भी आखिरी वक्त में पहुंच गये थे। राज्य सभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष की मीटिंग में ममता बनर्जी ने भी प्रतिनिधि भेजा था और तब ऐसा लगा जैसे कांग्रेस ने सारे गिले शिकवे खत्म कर लिया है  लेकिन कन्याकुमारी से राहुल गांधी के कश्मीर पहुंचते पहुंचते सारी खटास बाहर निकल आयी है।

केजरीवाल और केसीआर ही नहीं तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी या फिर तेलुगु देशम पार्टी के नेताओं के साथ कांग्रेस नेतृत्व का व्यवहार तो दोस्ताना नहीं ही महसूस किया गया है। ममता बनर्जी तो अब सोनिया गांधी से भी नहीं मिलतीं और ऐसा लगता है जैसे वो विपक्षी खेमे से काफी दूर जा चुकी हों। फिर भी ममता बनर्जी को मल्लिकार्जुन खड़गे ने समापन समारोह के लिए बुलाया है।मायावती को लेकर तो राहुल गांधी खुल कर आरोप लगा चुके हैं। राहुल गांधी के ये कहने पर कि कांग्रेस की तरफ से बसपा नेता को मुख्यमंत्री पद का ऑफर दिया गया था, लेकिन जांच एजेंसियों के डर से वो खामोश हो गयीं । मायावती ने सामने आकर यही बताने की कोशिश की थी कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं।  और रही बात अखिलेश यादव की तो हाल ही में देखा गया कि कैसे राहुल गांधी के साथ वो मीडिया के जरिये दो दो हाथ करते रहे।

अखिलेश यादव के ये बोल देने के बाद कि भाजपा को हराएगा कौन – राहुल गांधी ने भी बोल दिया कि ये काम समाजवादी पार्टी के वश का तो है नहीं। क्योंकि, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का भले ही प्रभाव हो, लेकिन केरल और कर्नाटक में उसे पूछता ही कौन है? और लगे हाथ राहुल गांधी ने ये भी जता दिया कि कांग्रेस की राष्ट्रीय विचारधारा ही भाजपा के खिलाफ विपक्ष को सही नेतृत्व दे सकती है।भारत जोड़ो यात्रा के उत्तर प्रदेश से गुजरने के दौरान तो अखिलेश यादव भावनात्मक रूप से तो शामिल हुए थे, लेकिन जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी के नेताओं की तरह अपना कोई नुमाइंदा नहीं भेजा था।अब जबकि मल्लिकार्जुन खड़गे ने व्यक्तिगत तौर पर अखिलेश यादव को भी पत्र भेज कर यात्रा के समापन कार्यक्रम के लिए बुलाया है, फिर भी ऐसा कोई संकेत तो नहीं मिल रहा है कि अखिलेश यादव मन से तैयार हों। यहां तक कि केसीआर की रैली में जाने को तैयार हैं।अखिलेश यादव जब मुलायम सिंह यादव के नाम पर कैलेंडर जारी कर रहे थे, तभी मीडिया केसीआर की रैली और भारत जोड़ो यात्रा को लेकर समाजवादी पार्टी का रुख जानना चाहा। अखिलेश यादव ने बताया कि केसीआर की रैली का निमंत्रण मिला भी है और वो रैली में शामिल भी होंगे।कंफर्म तो अखिलेश यादव ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बुलावा मिलने का भी किया, लेकिन उसे लेकर उनका कहना रहा कि समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ विचार करने के बाद ही वो भारत जोड़ो यात्रा के समापन समारोह में शामिल होने को लेकर कोई फैसला करेंगे।अब तो ये समझना भी मुश्किल हो रहा है कि अखिलेश यादव ने कैसे फटाफट केसीआर की रैली में जाने का फैसला कर लिया। क्योंकि केसीआर ने नीतीश कुमार को तो नहीं बुलाया है। नीतीश कुमार उत्तरप्रदेश में अखिलेश यादव को महागठबंधन का नेता तक घोषित कर चुके हैं – क्या अखिलेश यादव, केसीआर के साथ जाने के लिए नीतीश कुमार को छोड़ भी सकते हैं?

एक बात तो सामने आ चुकी है कि कांग्रेस के बगैर विपक्ष के ज्यादातर नेता एकजुट होने की पहल भी अधूरी मानते हैं। अब तो राहुल गांधी खुल कर ये बात कह भी चुके हैं कि कांग्रेस ही विपक्ष का नेतृत्व कर सकती है।भारत जोड़ो यात्रा शुरू होने से पहले ही कांग्रेस के रणनीतिकारों की कोशिश और उम्मीद भी रही कि विपक्षी खेमे के ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक दल साथ आ सकें। मल्लिकार्जुन खड़गे की विपक्षी नेताओं को भेजी गयी चिट्ठी उसी मिशन की आखिरी तैयारी लगती है।ये भी देखने में आया कि कन्याकुमारी से यात्रा के शुरू होने के मौके पर जिस तरह डीएमके नेता एमके स्टालिन डटे रहे, श्रीनगर में समापन के मौके पर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती भी राहुल गांधी के साथ खड़ी देखने को मिलेंगी। फारूक अब्दुल्ला तो दिल्ली में यात्रा के प्रति अपना समर्थन जता ही चुके हैं।जिन दलों ने यात्रा से दूरी बनायी उनमें तृणमूल कांग्रेस, भारत राष्ट्र समिति, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी रही है। फिर भी मल्लिकार्जुन खड़गे ने ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती को न्योता भेजा है, लेकिन अरविंद केजरीवाल और केसीआर को सूची से बाहर रखा है।

हाल ही की तो बात है, राहुल गांधी क्षेत्रीय दलों से अपील कर रहे थे कि सब लोग साथ मिल कर भाजपा के खिलाफ लड़ें। राहुल गांधी ने ये भी प्रॉमिस किया था कि कांग्रेस सबको साथ लेकर चलेगी और सबका सम्मान कायम रखने की भी कोशिश होगी – गुलाम नबी आजाद और जगनमोहन रेड्डी को न बुलाये जाने की बात भी एक बार समझी जा सकती है, लेकिन केसीआर और केजरीवाल से क्या दिक्कत हो सकती है?क्या राहुल गांधी अभी से  बी आर एस  और आप  दोनों पार्टियों को क्षेत्रीय दलों के दायरे से बाहर कर चुके हैं । मतलब, राष्ट्रीय पार्टी मान चुके हैं? और ये भी मान कर चल रहे हैं कि ये दोनों ही कांग्रेस और उनको नहीं पूछने वाले हैं?देखा जाये तो केसीआर के साथ साथ जेडीएस को न बुलाये जाने के पीछे अलग राजनीतिक समीकरण हो सकते है  और ये भी हो सकता है कि ये पॉलिसी सिर्फ 2023 के लिए हो। हो सकता है 2024 से कांग्रेस अपना स्टैंड बदल ले।असल में 2023 के शुरू में कर्नाटक विधानसभा और फिर साल के आखिर में तेलंगाना में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। तेलंगाना में राहुल गांधी पहले से ही केसीआर के खिलाफ धावा बोले हुए हैं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान तेलंगाना में दोनों के बीच तनातनी देखने को मिली थी।अगर केसीआर गैर कांग्रेसी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे होते तो क्या कांग्रेस उनको अलग रखने के बारे में नहीं सोचती। हैदराबाद में कांग्रेस दफ्तर पर छापे के बाद से कांग्रेस नेता केसीआर के खिलाफ आक्रामक हो गये थे – और यहां तक बताने लगे थे कि केसीआर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में कोई फर्क नहीं है। वैसे भी तेलंगाना में बीआरएस को कांग्रेस से मुकाबला तो करना ही है।तेलंगाना से पहले कर्नाटक में चुनाव होने जा रहे हैं और वहां कांग्रेस को भाजपा ही नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस के साथ भी लड़ना है। ध्यान देने वाली बात ये है कि कर्नाटक में केसीआर ने जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी के साथ चुनाव गठबंधन भी कर रखा है  और केसीआर को भी विपक्ष की अपनी सर्कल से दूर रखने की कांग्रेस नेतृत्व का राजनीतिक स्टैंड हो सकता है।राहुल को किसी से व किसी ओर को किसी ओर से अलेर्जी है तो विपक्षी एकता बेमानी है और ‘भारत जोड़ो यात्रा ‘ फुस्स ।

अशोक भाटिया

आरआरआर स्टार राम चरण की यूएसए में नेक्स्ट बिग पिक्चर के साथ बातचीत

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हाल ही मेगा पॉवर स्टार राम चरण गोल्डन ग्लोब्स अवॉर्ड्स के लिए लॉस एंजेल्स में थे और जहां उन्होंने नेक्स्ट बिग पिक्चर के साथ एक पोडकास्ट में बातचीत के दौरान अपनी एक्साइटमेंट जाहिर की।
आपको बता दें कि गोल्डन ग्लोब्स में राम चरण और जूनियर एनटीआर स्टारर आरआरआर के नाटू नाटू गाने को बेस्ट सॉन्ग से सम्मानित किया गया है। ऐसे में उन्होंने बात करते हुए कहा कि यह देखकर संतोष होता है कि वेस्ट इंडियन सिनेमा को पहचान दे रहा है। उन्होंने कहा, “यह हम सभी के लिए एक खास पल है।
यह पूछे जाने पर कि उन्हें अल्लूरी सीता राम राजू की भूमिका कैसे मिली, राम चरण ने कहा, “मैंने पहले भी राजामौली के साथ काम किया हैं। जब उन्होंने स्क्रीन पर दो सबसे अच्छे दोस्तों के कॉन्सेप्ट और उसके इर्द गिर्द घूमने वाले ड्रामा को चुना, तो उन्होंने सोचा कि ऐसे दो अभिनेताओं को लेना सही होगा जो रियल लाइफ में भी दोस्त हैं। यही मुख्य वजह है कि फिल्म के लिए उन्होंने हमें चुना। वह अपनी फिल्म और स्क्रिप्ट के अवाला किसी और के लिए फेवर्स नही करते हैं।
वहीं जब आगे उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने किरदार की तैयारी करते समय अपने परिवार के इतिहास को देखा, जिस पर जवाब देते हुए उन्होंने नहीं कहा। उनके मुताबिक, “यह इन किरादरों पर निर्देशक का एक काल्पनिक टेक है। उन्होंने वास्तव में क्या किया, इसका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने ऑटोबायोग्राफी नहीं पढ़ी। यह किरदारों के पीछे का सार और आभा है। उन्होंने इसके इर्द-गिर्द अपनी कहानी बुनी है। यह काफी हद तक एक नई स्क्रिप्ट की तरह था। इसके लिए हमें इतिहास में जाने की जरूरत नहीं।
राम चरण ने बात को जारी करते हुए कहा, “अगर आपको राजामौली की फिल्म का एक्टर बनना है, तो आपको लुक में बेस्ट और फिट दिखना होता है। मैं उनका यह कहकर मजाक उड़ाता था कि वह हमें बॉडी शेम कर रहे हैं। मैं आमतौर पर फिट रहना पसंद करता हूं। लेकिन फिटनेस को लेकर राजामौली की दीवानगी एक अलग ही लेवल पर है। महामारी के साथ, यह और भी मुश्किल हो गया क्योंकि यह फास्टेस्ट फिल्म होने वाली थी, लेकिन महामारी की वजह से हमें अपने लुक को दो साल तक और मेंटेन रखना पड़ा।
अल्लूरी सीता रामा राजू में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “इतिहास के किसी एक किरदार को निभाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। लोग इतिहास से वाकिफ हैं और यह एक जिम्मेदारी है। आखिरी के 15 मिनट पूरी फिल्म की तरह ही चुनौतीपूर्ण थे।
आरआरआर फिल्म के नाटू नाटू गीत के बारे में राम चरण ने कहा कि रिहर्सल और प्रैक्टिस में पूरे 6 दिन लग गए। मैंने लगभग 4 किलो वजन कम किया और जूनियर एनटीआर ने 2-3 किलो वजन कम किया। जब मैं उस गाने के बारे में बात करता हूं तो मेरे घुटने आज भी कांपने लगते हैं। तारक और मेरे पास कमाल का स्टाइल और एबिलिटी है। कोरियोग्राफी इतनी मुश्किल नहीं लगी क्योंकि हमने इस पर बहुत मेहनत की थी, और यह स्क्रिप्ट की डिमांड थी। यह दो शरीर थे जिन्हें एक जैसा दिखना था। तालमेल और विचार कि हम एक जैसे हैं, जिसे स्क्रीन्स पर भी अच्छे से दर्शाना था। ये दो जिस्म और एक जान की तरह था। हमें हर एक फ्रेम, हर एक कदम को सिंक्रोनाइज़ करना था। यह राम चरण स्टाइल या तारक स्टाइल नहीं था, यह राजामौली स्टाइल था। हम मैराथन की तरह लूप पर चलते रहें।”
आगे यह पूछे जाने पर कि क्या वह इसे गोल्डन ग्लोब्स के मंच पर करेंगे, उन्होंने पॉजिटिव जवाब देते हुए फौरन कह दिया, “बेशक और 17 बार करेंगे जैसे टेक्स के दौरान किया था।”
मैं देख सकता हूं कि राजामौली ने क्या कल्पना की थी और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। सारा प्यार देखकर बहुत संतोष होता है।
वेस्ट के दर्शकों के लिए, राम चरण ने उन्हें इंडियन फिल्म मेकिंग की और झलक देखने के लिए रंगस्थलम, बाहुबली, ईगा, अरविंदा समेता जैसी कई फिल्में देखने की नसीहत दी।

प्रेम चोपड़ा को कृष्णा चौहान ने सौंपा बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड 2022

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मुम्बई। बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता प्रेम चोपड़ा को पिछले दिनों कृष्णा चौहान ने उनके आवास पर पहुंचकर चौथे बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड 2022 से सम्मानित किया। प्रेम चोपड़ा को यह ट्रॉफी बेहद पसन्द आई और वे ट्रॉफी को देखते ही रहे। साथ ही कृष्णा चौहान ने प्रेम चोपड़ा को 26 जनवरी को होने वाले राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2023 के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है।
बता दें कि ‘बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड का भव्य आयोजन पिछले 3 वर्षों से कृष्णा चौहान करते आ रहे हैं। चौथे वर्ष कृष्णा चौहान फाउंडेशन द्वारा बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड – 2022 का आयोजन 10 दिसम्बर 2022 को किया गया था। जहां भारतीय फिल्मों और उसकी तरक्की में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उसी अवसर पर ब्राइट आउटडोर मीडिया के डॉ योगेश लखानी, संगीतकार दिलीप सेन, देवदास और हम दिल दे चुके सनम फेम संगीतकार इस्माइल दरबार, बी एन तिवारी, रमेश गोयल, बीरबल जी, विजेंद्र गोयल, नाफ़े खान, देव मेनारिया, पुनीत सहित कई हस्तियां उपस्थित रहे और सम्मान प्राप्त किये। कार्यक्रम में सिया काले ने डांस किया वहीं भारती छाबड़िया ने एंकरिंग की।
अवार्ड समारोह में सिंगर संध्या पवार, विजय कश्यप, तृप्ति शुक्ला, निकेश ताराचंद, ज्योति झिंज्ञानी, बीरबल खोसला, के के गोस्वामी, पुनीत कुमार वोरा, जान्हवी राठौड़, डॉ भारती छाबड़िया, ऐश्वर्या सिंह, दीपा नारायण, रंजन कुमार सिंह (टीवी डायरेक्टर), आर राजपाल, सिंगर राजू टांक, चंद्रप्रकाश, आसमा कपाड़िया, राजेन्द्र, उपेंद्र पंडित, महताब आलम, दिनेश कुमार, नसीर तगाले, दिलीप पटेल, देवेंद्र खन्ना, प्रमोद शर्मा, दीपक साहू, मंगेश, रत्न जी, रेहान शेख, गणेश पाण्डेय, पीके गुप्ता, केवल कुमार, तेजेन्द्र सिंह, अब्दुल कदीर, शमा ईरानी सहित कई लोग सम्मानित हुए।
कृष्णा चौहान केसीएफ के अंतर्गत बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड, बॉलीवुड आइकोनिक एवॉर्ड, लीजेंड दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और महात्मा गांधी रत्न अवार्ड का आयोजन पिछले कई वर्षों से करते आ रहे हैं।

मकर संक्रान्ति के अवसर पर मेघाश्रेय फाउंडेशन द्वारा सर्वाइकल कैंसर फ्री इंडिया पर जागरूकता अभियान

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मुंबई। मकर संक्रान्ति के अवसर पर मेघाश्रेय फाउंडेशन के द्वारा फाउंडेशन द्वारा सर्वाइकल कैंसर फ्री इंडिया पर जागरूकता अभियान का आयोजन कार्टर रोड, बांद्रा पश्चिम में किया गया। भाजपा के मुंबई अध्यक्ष और आमदार आशीष शेलार, सीमा सिंह (संस्थापक मेघाश्रेय फ़ाउंडेशन) और डॉ मेघना सिंह ने इस अवसर पर ज़रूरतमंद बच्चों को कंबल, पतंग और मिठाइयाँ भी वितरित की।
इस अवसर पर सीमा सिंह ने कहा कि हम लगातार सर्वाइकल कैंसर फ्री इंडिया पर जागरूकता अभियान का आयोजन करते रहते हैं। अगर समय पर महिलाओं में होने वाली इस बीमारी का पता चलता है तो बेहतर उपचार और इलाज संभव हैं। मेघाश्रेय फाउंडेशन की संस्थापक सीमा सिंह अपने बच्चों डॉ मेघना सिंह और श्रेय सिंह के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में सबसे आगे रहती हैं। सीमा सिंह ने अपने बच्चों की ओर से मेघाश्रेया फाउंडेशन की शुरुआत की। मेघाश्रेया फाउंडेशन भारत भर में वंचित बच्चों की बेहतरी और भूखे लोगों को खाना खिलाने की दिशा में काम करता है। अब तक, 50 से अधिक कार्यक्रम और पहल के माध्यम से पूरे भारत में एक लाख से अधिक लोगों के जीवन को बदल दिया है।

गौ मूत्र से स्नान कर आरिफ बन गया आनंद, अपने प्यार को पाने के लिए अपनाया हिन्दू धर्म

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Bhopal News: अब तक सुनते और देखते आए हैं कि मोहब्बत में आदमी कुछ भी कर सकता है. ऐसा ही एक नजारा राजधानी भोपाल (Bhopal) से 100 किलोमीटर दूर शुजालपुर तहसील में देखने को मिला है. यहां एक युवक अपने सच्चे प्रेम को पाने के लिए मुस्लिम से हिन्दू बन गया. विहिप और बजरंग दल पदाधिकारियों की मौजूदगी में मुस्लिम युवक ने हिन्दू धर्म अपनाया.

इसी के साथ युवक आरिफ खान का मुंडन कराया, गौ मूत्र से स्नान कराया. मंदिर में माताजी के दर्शन-पूजन के बाद तिलक लगाकर और कलाई पर कलेवा बांधकर उसे सनातन धर्म ग्रहण कराया. इन सभी प्रक्रियाओं के बाद आरिफ खान अब आनंद तिवारी बन गया है.

दरअसल, शुजालपुर के नूरपुरा निवासी 30 वर्षीय आरिफ खान पिता यासीन खान कबाड़ी का काम करता है. युवक को एक हिन्दू युवती से प्रेम हो गया. दोनों ने साथ रहने का मन बनाया. 21 दिसंबर 2022 को दोनों शाजापुर कोर्ट पहुंचे, लेकिन जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन के युवा पहुंच गए. इसके बाद युवती को नारी निकेतन भेज दिया गया, जबकि युवक को पुलिस ने घर भेज दिया. हालांकि युवक आरिफ ने अपने प्यार को पाने के लिए धर्म परिवर्तन का मन बनाया.

आरिफ का नाम बदलकर आनंद तिवारी रखा गया
बुधवार को क्षेत्र में विहिप और बजरंग दल का शौर्य संचलन निकाला जाना था. यहां पहुंचकर हिन्दू संगठन के पदाधिकारियों के समक्ष आरिफ खान ने मुस्लिम धर्म छोडऩे की बात कही. मंच पर उपस्थित विहिप-बजरंग दल के मालवा प्रांत के संगठन मंत्री नंददास दंडोतिया ने आरिफ की सहमति से उसे हिन्दू धर्म में शामिल किया. आरिफ ने हिन्दू धर्म अपनाने के लए कलेक्टर काके आवेदन दिया.

किशोरी को अगवा कर किया सामूहिक दुष्कर्म

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मुरादनगर में किशोरी को अगवा कर किया सामूहिक दुष्कर्म

मुरादनगर में घर से दूध लेने निकली किशोरी को अगवा कर दो ई रिक्शा चालकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपियों ने दुष्कर्म के बाद किशोरी को दिल्ली की बस में बैठा दिया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से नाजिम व जाहिद निवासी कस्बा मुरादनगर को गिरफ्तार कर लिया है।

डीसीपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बताया कि गाजियाबाद एएलटी सेंटर के पास मंगलवार रात करीब 12:30 बजे एक किशोरी घूम रही थी। पुलिस पिकेट ने किशोरी को अकेला देखा तो उससे बात की इस पर वह रोने लगी।

पुलिस पूछताछ में किशोरी ने बताया कि मंगलवार शाम करीब चार बजे परिजनों ने किसी बात पर डांट दिया था, जिसके कारण वह परिजनों से नाराज थी। उन्होंने दुकान से दूध लेने भेजा था लेकिन वह वापस घर नहीं लौटी। बीच रास्ते में ई रिक्शा चालक अगवा कर ले गये।

करीब चार घंटे तक वह किशोरी को घुमाते रहे। रात होने पर जलालपुर रोड पर एक खाली प्लाट में ले गये और दोनों ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर आरोपियों ने उसकी पिटाई भी की।

आरोपियों ने बैठाया दिल्ली की बस में

हैवानियत के बाद आरोपियों ने किशोरी को दिल्ली जाने वाली बस में बैठा दिया। किशोरी गाजियाबाद बस से उतर गई। बताया गया है कि किराया न होने के कारण परिचालक ने किशोरी को बस से नीचे उतार दिया था। किशोरी पैदल ही एएलटी सेंटर के पास पहुंच गई थी।

सीसीटीवी फुटेज की मदद से पकड़े गए दोनों आरोपी
डीसीपी डॉ. ईरज राजा ने बताया कि पुलिस ने ईदगाह रोड, जलालपुर रोड, मेन कस्बा रोड, मेन बाजार के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। किशोरी ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की। 

गैस जलाने से हुए धमाके से महिला और गाय झुलसी

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सुबह गैस जलाते ही हुआ धमाका, महिला और गाय झुलसे, ढह गया मकान

गुरुग्राम से सटे पटौदी खंड के गांव गुढाना में सुबह एक वृद्ध महिला ने जैसे ही गैस जलाई वहां तेज धमाका हो गया। धमाके के बाद लगी आग में महिला बुरी तरह झुलस गई साथ ही उसकी गाय भी झुलस गई।

महिला की हालत ज्यादा खराब होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहीं गाय को झज्जर गोशाला में उपचार के लिए भेजा गया है। धमाका इतना तेज था कि महिला का मकान भी ढह गया। बताया जा रहा है कि यह हादसा गैस लीकेज के चलते हुआ।

आतंकवाद को सीमापार समर्थन : सेनाध्यक्ष

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आतंकवाद को सीमापार से मिल रहा समर्थन, किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हम तैयार : सेनाध्यक्ष

सेनाध्यक्ष ने कहा, उत्तरी सीमाओं पर स्थिति स्थिर है लेकिन अप्रत्याशित है। हम सात मुद्दों में से पांच को हल करने में सफल रहे हैं। हमने सैन्य और राजनयिक दोनों स्तरों पर बात करना जारी रखा हुआ है। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए हमारे पास पर्याप्त भंडार है।

सेना दिवस से पहले सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे ने कहा कि इस बार का आयोजन खास है। क्योंकि, यह आजादी का 75वां साल है। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर सवालों के जवाब दिए। सेना प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में कहा, फरवरी 2021 में हुआ संघर्ष विराम वहां पर अच्छी तरह से जारी है, लेकिन आतंकवाद और आतंकी ढांचे को सीमा पार से समर्थन अभी भी बना हुआ है। उन्होंने कहा, उत्तरी सीमाओं पर स्थिति स्थिर है लेकिन अप्रत्याशित है। हम सात मुद्दों में से पांच को हल करने में सफल रहे हैं। हमने सैन्य और राजनयिक दोनों स्तरों पर बात करना जारी रखा हुआ है। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए हमारे पास पर्याप्त भंडार है। वहीं उन्होंने पूर्वोत्तर की स्थिति के बारे में कहा कि पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों में शांति है। आर्थिक गतिविधियों और विकास की पहल के अच्छे परिणाम मिले हैं। उन्होंने सेना दिवस के बारे में कहा, यह सेना दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यह आजादी का 75वां साल है।

चीनी सीमा पर दुश्मन के बराबर तैनानी
सेना प्रमुख ने कहा, उत्तरी सीमा पर विरोधी पक्ष की ओर से तैनाती जारी है। हमारे पास बराबर संख्या में सैनिक हैं। हमारी पूर्वी कमान के विपरीत चीन द्वारा सैनिकों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है लेकिन हम कड़ी नजर रख रहे हैं।

सेना में होंगे कई बदलाव 
सेनाध्यक्ष ने कहा, महिला अधिकारियों को भारतीय सेना की कोर ऑफ आर्टिलरी में कमीशन दिया जाएगा। इसके लिए हमने सरकार को प्रस्ताव भेजा है और हमें उम्मीद है कि इसे स्वीकार कर लिया जाएगा। हमारे पास आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन (AMAR) भी है, जो युद्ध की स्थितियों से निपटने में मदद करेगा। यह देश में विभिन्न मार्शल आर्ट का एक समामेलन है। सेना प्रमुख ने कहा, हमने भारतीय सेना में कई बदलाव करने का फैसला किया है और यह अनिवार्य रूप से बल पुनर्गठन और अनुकूलन, आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन प्रबंधन से शुरू होने वाले पांच प्रमुख डोमेन में फैला हुआ है।

जोशीमठ में इमारतें बनाने में तोड़े गए कानून

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इमारतें बनाने में तोड़े गए कानून, जोशीमठ ने बेपर्दा कर दिया पहाड़ में बेतरतीब निर्माण का सच

जोशीमठ की दरकती इमारतों ने पहाड़ में बेतरतीब निर्माण की हकीकत को बेपर्दा कर दिया। जहां 12 मीटर से ऊपर की इमारत बनाने पर रोक हो। भूस्खलन क्षेत्र, 30 डिग्री स्लोप पर निर्माण प्रतिबंधित हो, वहां न कोई नियम चला और न कायदा। नगर पालिका से सेटिंग-गेटिंग कर अनुमति जारी होती रही और जोशीमठ की धरती पर बोझ बढ़ता चला गया।
आज तक विनियमित नहीं हुआ जोशीमठ
इतिहास के पन्नों को खंगालें तो जोशीमठ जैसे महत्वपूर्ण शहर को लेकर यूपी से लेकर उत्तराखंड तक की सरकारों की बेपरवाही नजर आती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों को विनियमित किया था लेकिन इसमें जोशीमठ नहीं था। राज्य बनने के बाद 2011 में भवन निर्माण एवं विकास विनियम आया। इसके बाद राज्य ने 2013 में अपने बायलॉज जारी किए। लेकिन आज तक जोशीमठ विनियमित नहीं हो पाया। हालात यह हैं कि यहां कैसे निर्माण हो, इसे समझने, देखने और लागू करने वाला कोई नहीं।
सात मंजिला भवनों के जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब
केंद्रीय बिल्डिंग बायलॉज और उत्तराखंड के 2011 व 2013 में जारी हुए बायलॉज को देखें तो पर्वतीय क्षेत्रों में 12 मीटर यानी चार मंजिल से अधिक ऊंचाई के भवन का निर्माण नहीं किया जा सकता। इतनी ऊंचाई भी तभी संभव है जबकि निर्माण वाले क्षेत्र का अध्ययन हुआ हो। जोशीमठ में इन कायदों को दरकिनार कर सात-सात मंजिला भवन बनाने के लिए संबंधित निकाय ने अनुमति जारी कर दी। सवाल यह है कि इतने बेतहाशा और बेतरतीब निर्माण का जिम्मेदार कौन है।
मास्टर प्लान होता तो हालात ऐसे न होते
जोशीमठ का मास्टर प्लान अब तैयार हो रहा है। अगर इससे पहले मास्टर प्लान बना होता तो शायद हालात ये न होते। दरअसल, किसी भी शहर का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए उसकी भौगोलिक, भूगर्भीय, जल स्त्रोत, सड़क, वनस्पतियों का ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा उस शहर की मिट्टी की जांच वैज्ञानिकों से कराके यह देखा जाता है कि वह कितना भार वहन कर सकती है। यह भी देखा जाता है कि जनसंख्या घनत्व के हिसाब से आने वाले 10 या 20 वर्षों में शहर पर कितना बोझ बढ़ सकता है। इसे नियंत्रित रखने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं। मास्टर प्लान से इतर निर्माण करने वालों पर प्राधिकरण कार्रवाई भी कर सकते हैं।
इन नियमों का भी खुला उल्लंघन
केंद्र व राज्य के नियमों के हिसाब से जो भी इलाका भू-स्खलन प्रभावित हो, वहां निर्माण करने पर रोक है। 1976 में मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट में इस क्षेत्र को भूस्खलन से प्रभावित करार दिया गया था। इसके बावजूद निर्माण जारी रहे। दूसरा नियम यह है कि 30 डिग्री से अधिक स्लोप वाली जगह पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। जोशीमठ में इस नियम की भी धज्जियां उड़ाई गईं। जहां मौका मिला, बड़ी इमारतें खड़ी होती चली गईं।
जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण आया और गया
त्रिवेंद्र सरकार ने 2017 में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण का गठन करते हुए जोशीमठ जैसे क्षेत्रों को विनियमित करने का प्रयास किया लेकिन विरोध के चलते सरकार को इसे वर्ष 2021 में स्थगित करना पड़ा। चार साल तक इन प्राधिकरणों में डीएम को उपाध्यक्ष और एडीएम को सचिव की जिम्मेदारी देकर जिंदा रखा गया लेकिन इन्हें चलाने के लिए इंजीनियर व अन्य विभाग मजबूती से तैयार ही नहीं हो पाए। लिहाजा, जोशीमठ के विकास का कोई रोडमैप तैयार नहीं हो पाया।
पहाड़ी शहरों को बचाने के लिए यह हो सकती है कवायद
-प्रदेश के सभी संवेदनशील शहरों का चिन्हिकरण किया जाए।
-फिलहाल तत्काल इन शहरों में किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगाई जाए।
-आवास विभाग को तत्काल मास्टर प्लान बनाने के निर्देश दिए जाएं।
-बिल्डिंग बायलॉज को लागू करने के लिए प्राधिकरण या समकक्षीय व्यवस्था हो।
-अगर प्राधिकरण हों तो वहां मैन पावर आदि की पूरी व्यवस्था की जाए।