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डीपी वर्ल्ड, आईसीसी और सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट को विस्तार देने की वैश्विक पहल के लिए मिलाया हाथ

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अनिल बेदाग, मुम्बई
मुंबई : स्मार्ट एंड-टू-एंड सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी कंपनी डीपी वर्ल्ड ने क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर और आईसीसी के साथ मिलकर नई पहल ‘बियॉन्ड बाउंड्रीज’ की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य दुनियाभर में क्रिकेट के विकास को गति देना है।
इस ग्लोबल मिशन के तहत डीपी वर्ल्ड अपने एंड-टू-एंड नेटवर्क और स्मार्ट लॉजिस्टिक्स क्षमता का प्रयोग करते हुए दुनियाभर में आधारिक स्तर पर क्रिकेट क्लब्स को 50 पुनर्निर्मित शिपिंग कंटेनर उपलब्ध कराएगी। सभी कंटेनर जरूरी किट एवं इक्विपमेंट से लैस होंगे।
     2023 का 50 ओवर का मेन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप 5 अक्टूबर से 19 नवंबर तक होने जा रहा है। वर्ल्ड कप की शुरुआत से ठीक पहले डीपी वर्ल्ड के ग्लोबल एंबेसडर सचिन तेंदुलकर ने एनएससीआई, मुंबई में पहले कंटेनर का अनावरण किया। 40 क्रिकेट किट के साथ डीपी वर्ल्ड के पहले कंटेनर को पालघर, महाराष्ट्र के चिखलिकर स्पोर्ट्स क्लब में रखा जाएगा। साथ ही अन्य 210 किट्स आचरेकर क्रिकेट एकेडमी और शिवाजी पार्क जिमखाना एकेडमी समेत कुछ अन्य एकेडमी के युवा क्रिकेटरों को दी जाएंगी।
प्रत्येक कंटेनर में विशेषरूप से तैयार 250 किट्स होंगी। इनमें क्रिकेट बैट, हेलमेट, ग्लव्स और पैड शामिल हैं। प्रत्येक कंटेनर का प्रयोग कई अलग-अलग तरह से किया जा सकेगा। ये कंटेनर पवेलियन के रूप में भी प्रयोग किए जा सकेंगे, जिनमें स्कोरबोर्ड, सन प्रोटेक्शन और बैठने की व्यवस्था होगी।
पहले कंटेनर के लॉन्च के मौके पर डीपी वर्ल्ड के ग्लोबल एंबेसडर सचिन तेंदुलकर ने कहा, “वैश्विक स्तर पर क्रिकेट का विस्तार करने के लिए डीपी वर्ल्ड के साथ साझेदारी की मुझे खुशी है। ज्यादातर युवा क्रिकेटर्स की तरह मैं भी अपने स्थानीय क्लब में खेलते हुए बड़ा हुआ हूं। मैं क्रिकेट के क्वालिटी इक्विपमेंट और किट के महत्व को समझता हूं।
आधारिक स्तर पर संचालित हो रहे ये क्रिकेट क्लब किसी भी देश में क्रिकेट की आधारशिला हैं। भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में युवा क्रिकेटर्स को बढ़ावा देने की दिशा में डीपी वर्ल्ड की प्रतिबद्धता दिल को छू लेने वाली है।”
उन्होंने आगे कहा, “ये क्रिकेट कंटेनर नए उभरते क्रिकेटर्स को आराम करने और तैयार होने की जगह उपलब्ध कराएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात, यह लड़कियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इन कंटेनर का प्रयोग चेंजिंग रूम के रूप में भी किया जा सकेगा। मैं इस पहल का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित हूं। मैं भारत और दुनियाभर में नई पीढ़ी के क्रिकेटर्स को निखारने में इस पहल के प्रभाव को देखने के लिए आशान्वित हूं।”
पहले कंटेनर को स्थानीय आर्टिस्ट साधना प्रसाद ने डिजाइन किया है और इसके माध्यम से मास्टर ब्लास्टर सचिन के प्रति सम्मान व्यक्ति किया गया है। पहले 10 कंटेनर तेंदुलकर की विरासत से प्रेरित होंगे।
     अगले पांच साल में डीपी वर्ल्ड 75 देशों और छह महाद्वीपों में फैले अपने इंटरकनेक्टेड ग्लोबल नेटवर्क का लाभ लेते हुए बाकी के 49 कंटेनर्स को दुनियाभर के कुछ महत्वपूर्ण एवं स्ट्रेटजिक लोकेशंस पर पहुंचाएगा। इनमें से दो कंटेनर इसी वर्ल्ड कप के दौरान दे दिए जाएंगे। इसके बारे में जल्द ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
      डीपी वर्ल्ड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट – बिजनेस डेवलपमेंट, मिडल ईस्ट, नॉर्थ अफ्रीका एंड इंडिया सबकॉन्टिनेंट, केविन डीसूजा ने कहा, “भारत रत्न सचिन तेंदुलकर का डीपी वर्ल्ड परिवार में स्वागत करते हुए हमें गर्व हो रहा है।
सचिन करोड़ों सपनों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने में बहुत प्रेरक भूमिका निभाई है। युवाओं के रोल मॉडल के रूप में वह कठिन परिश्रम, प्रतिबद्धता, समर्पण और परफेक्शन के प्रतीक हैं। डीपी वर्ल्ड के प्रत्येक सदस्य की भी यही खूबियां हैं। हम भी अपने ग्राहकों और स्टेकहोल्डर्स के लिए व्यापार को सीमाओं से परे ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं। हमें विश्वास है कि सचिन के साथ हमारी साझेदारी दुनियाभर में ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने में सहायक होगी।
     स्मार्ट लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन के अग्रणी ग्लोबल प्रोवाइडर के रूप में हम वह बदलाव लाना चाहते हैं, जो सभी के लिए संभव हैं और हमें विश्वास है कि यह नई पहल भारत एवं दुनिया के अन्य देशों में युवाओं के लिए क्रिकेट की संभावनाएं बढ़ाने में भूमिका निभाएगी।”
बियॉन्ड बाउंड्रीज पहल को आईसीसी ब्रॉडकास्ट के माध्यम से पूरे टूर्नामेंट के दौरान नया आयाम दिया जाएगा। ग्राफिक के माध्यम से बताया जाएगा कि कैसे प्रत्येक मैच में प्रत्येक 100 रन के स्कोर पर 10 किट प्रदान की जाएंगी। सभी किट डोनेशन 2023 में लॉन्च किए जाने वाले कंटेनर के माध्यम से की जाएगी।

गोदरेज सिक्योरिटी सॉल्यूशंस ने ब्रांड एंबेसडर आयुष्मान खुराना के साथ लॉन्च किया ‘देश की तिजोरी’अभियान

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अनिल बेदाग, मुंबई 
मुंबई : भारतीय ‘तिजोरी’ के पर्याय – गोदरेज सिक्योरिटी सॉल्यूशंस ने आज बॉलीवुड स्टार और ब्रांड एंबेसडर आयुष्मान खुराना के साथ अपने नवीनतम अभियान ‘देश की तिजोरी’ की शुरुआत की है। गोदरेज सिक्योरिटी सॉल्यूशंस गोदरेज ग्रुप की प्रमुख कंपनी गोदरेज एंड बॉयस की एक व्यावसायिक इकाई है, जो अपने प्लेटफॉर्म सिक्योर 4.0 के माध्यम से इनोवेशंस और नई तकनीक पर आधारित सॉल्यूशंस पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
    ‘देश की तिजोरी’ कैम्पेन बताता है कि 1902 में गोदरेज द्वारा भारत में निर्मित पहले लॉकर से लेकर नवीनतम डिजिटल लॉकर तक, यह प्रॉडक्ट भारत के घरों में सबसे अलग पहचान रखता है। गोदरेज सिक्योरिटी सॉल्यूशंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हैड, पुष्कर गोखले ने बताया कि आज के बदलते माहौल में ज्यादातर लोग अपने घरों की खूबसूरती को भी प्राथमिकता देते हैं और उसके अनुरूप ही कोई प्रॉडक्ट चुनते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें किसी भी अनहोनी के घटने से पहले ही सचेत रहने और अपने घर की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के महत्व के बारे में बताना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, जैसे-जैसे स्मार्ट घरेलू उपकरणों का चलन बढ़ता जा रहा है, यह भी जरूरी है कि घरेलू सुरक्षा ब्रांड भी स्मार्ट होम तकनीक से लैस हों, क्योंकि आज उपभोक्ता नवीन तकनीक से सुसज्जित सॉल्यूशंस का विकल्प चुन रहे हैं।
     वैन के अंदर डिज़ाइन किए गए स्मार्ट होम में घरेलू सुरक्षा लॉकर, वीडियो डोर फोन से लेकर घरेलू सुरक्षा कैमरे और सीसीटीवी कैमरों जैसे स्मार्ट होम सुरक्षा प्रॉडक्ट्स की एक विस्तृत रेंज प्रदर्शित की गई है। वैन के अंदर का स्मार्ट होम एक ऐसी शक्तिशाली पहल के बारे में भी जानकारी देता है, जिसका उद्देश्य घर के मालिकों को स्मार्ट घरेलू सुरक्षा समाधान अपनाने और घर की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करना और मार्गदर्शन करना है।
     गोदरेज सिक्योरिटी सॉल्यूशंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हैड श्री पुष्कर गोखले ने कहा, ‘‘गोदरेज सिक्योरिटी सॉल्यूशंस ने एक ऐसे ब्रांड के रूप में प्रतिष्ठा अर्जित की है, जिसने न केवल भारतीय घरों को सुरक्षित करने की दिशा में लगातार काम किया है, बल्कि बैंकिंग, ज्वैलरी, हॉस्पिटेलिटी और अन्य कई प्रमुख क्षेत्रों की सुरक्षा में भी योगदान दिया है। आज हमें इस बात की खुशी है कि हमारे नए और इनोवेटिव प्रॉडक्ट्स को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। ये ऐसे प्रॉडक्ट्स हैं, जिन्हें हम सिक्योर 4.0 के तहत जारी कर रहे हैं।’’
    भारत के सबसे प्रतिष्ठित ब्रांडों में से एक के रूप में, ‘देश की तिजोरी’ कैम्पेन के पीछे की सोच एक ऐसे उत्पाद को प्रदर्शित करना था जिस पर लोगों ने कई दशकों से भरोसा किया है। यह प्रॉडक्ट एक  ऐसी श्रेणी का है, जो लगातार बढ़ते खतरों के बीच बेहद जरूरी हो जाता है।
     श्री गोखले ने आगे कहा, ‘‘इस पहल के एक हिस्से के रूप में हमने विशेष रूप से हमारे घरेलू सुरक्षा उपकरणों को दर्शाने के लिए चार वैन डिजाइन की हैं और ये वैन मुंबई से शुरू करते हुए पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण की यात्रा शुरू करेंगी। हमारा लक्ष्य 100 दिनों से भी कम समय में भारत के 100 शहरों को कवर करना और घरों की सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाना और अपने ग्राहकों को सही निर्णय लेने में मदद करना है।’’
      उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बेहद खुशी है कि हमारे ब्रांड एंबेसडर आयुष्मान आज यहां हमारे साथ हैं। आखिर वे भी भारतीय घरों को अधिक सुरक्षित बनाने और इस दिशा में निवेश करने के बारे में हमारी तरह ही सोचते हैं।’’
      बॉलीवुड स्टार और गोदरेज सिक्योरिटी सॉल्यूशंस के ब्रांड एंबेसडर आयुष्मान खुराना ने इस अवसर पर कहा, ‘‘एक ऐसे शख्स के रूप में जो बहुत यात्रा करता है और घर के बाहर इतना समय बिताता है, मैं अपने घर और उसके आसपास की सुरक्षा के महत्व को पूरी तरह से समझता हूं। कई भारतीयों की तरह, मैं भी अपने घर में किसी न किसी रूप में गोदरेज के साथ बड़ा हुआ हूं और गोदरेज सिक्योरिटी सॉल्यूशंस के साथ जुड़ना वास्तव में मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। इस मौके पर मुझे एक पुरानी तिजोरी याद आती है जो मेरे परिवार के पास थी और इसे घर में कीमती सामान सुरक्षित रखने के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। लेकिन आज चूँकि मैं ऐसे प्रॉडक्ट पर भरोसा करना चाहता हूं, जो टैक्नीकल लिहाज से ज्यादा बेहतर और डिजिटल रूप से भी अच्छा हो, तो ऐसी स्थिति में मुझे इस बात की खुशी है कि मैं अभी भी अपने ‘मन की शांति’ के लिए गोदरेज तिजोरी पर भरोसा कर सकता हूँ,। इसमें बायोमेट्रिक स्कैनर के साथ एक बहुत अच्छा डिजिटल लॉकर भी है। आज का अभियान बिल्कुल इसी बारे में है, कि तिजोरी या गोदरेज होम लॉकर लगातार विकसित हो रहा है।

वी-गार्ड ने पेश किया ‘इनसाइट-जी’-एक प्रीमियम, स्लिम बीएलडीसी पंखा

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अनिल बेदाग, मुंबई 
मुंबई : भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनी, वी-गार्ड ने अपने प्रीमियम बीएलडीसी हाई-स्पीड पंखे, इंसाइट-जी को पेश किया।
इंसाइट-जी बीएलडीसी पंखा सुंदरता और कुशलता का एक बहुत ही जबरदस्त मेल है। यह स्लिम मार्वल 12 विविध रंगों में उपलब्ध है, जो निरंतर विकसित हो रही उपभोक्ता की पसंद के अनुसार इंटीरियर डेकोरेशन के लिए अनुकूल है। इसके अलावा, इसे 5 साल की वारंटी और 5-स्टार रेटिंग भी मिलती है। इनसाइट जी फैन केवल 35 वॉट बिजली की खपत करते है, जिससे उपभोक्ताओं के बिजली के बिल में सालाना लगभग 1518/- रुपये तक की बचत होती है| (वास्तविक बचत उपयोग पैटर्न और लागू बिजली दरों पर निर्भर करती है) इसे 2.25 लाख वर्ग फुट से अधिक जगह में फैले वी-गार्ड की अत्याधुनिक रूड़की फैसिलिटी में तैयार किया गया है, जो गुणवत्ता और नवाचार के प्रति वी-गार्ड के समर्पण का एक उत्तम उदाहरण है।
      अन्य उल्लेखनीय विशेषताओं में 370 आरपीएम की एक हाई-स्पीड मोटर, आसानी से सफाई करने के लिए एक प्रभावी धूल प्रतिरोधी कोटिंग, सर्दियों के लिए रिवर्स मोड ऑपरेशन, एक सहज यूजर इंटरफ़ेस और टाइमर विकल्पों के साथ, एक उपयोगकर्ता-अनुकूल रिमोट कंट्रोल शामिल हैं। इस पंखे में बूस्ट मोड, ब्रीज मोड, स्लीप मोड, स्टैंडर्ड मोड, और कस्टम मोड जैसे कई ऑपरेशन मोड भी दिए गये हैं, जिससे यह उत्पाद सबसे अलग बन जाता है।
     अत्यधिक विशिष्ट और नवीनतम तकनीक से तैयार किए गए इस पंखे को मुंबई के जियो सेंटर में आयोजित एक शानदार समारोह में लॉन्च किया गया। वी-गार्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक और सीओओ, श्री रामचंद्रन वी ने बताया, “यह सिर्फ एक पंखा नहीं है, यह एक लाइफस्टाइल अपग्रेड है, जो आराम, सुंदरता और नवीनता को एक साथ समाहित करता है। इनसाइट जी को हमारे रूड़की, हरिद्वार स्थित अत्याधुनिक कारखाने पूरी बारिकी से बनाया गया है। यह भारतीय घरों को सजाने के लिए शानदार डिजाईन के साथ नवीनतम प्रौद्योगिकी प्रदान करता है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, हम इसके और स्मार्ट वेरिएंट पेश करेंगे, जो अगली पीढ़ी के उपभोक्ताओं की विविध आवश्यकताओं को पूरा करेगा।” इनसाइट जी, वी-गार्ड की ओर से बीएलडीसी सेगमेंट में एक मजबूत बयान का प्रतीक है, जो नवाचार और हरित ग्रह के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
 वी-गार्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के विषय में:
वी-गार्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कोच्चि में स्थित भारत की अग्रणी उपभोक्ता इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी है। एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध इकाई वाली इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2023 में 4126 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया और 32 शाखाओं और 50,000 से अधिक चैनल भागीदारों के साथ देश भर में मौजूद है। 1977 में श्री कोचहाउसफ चित्तिलापिल्ली द्वारा वोल्टेज स्टेबलाइजर के निर्माण और विपणन करने के लिए इसे स्थापित किया गया था, जो अब भारतीय इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक गुड्स परिदृश्य में एक ताकत बन गया है। कंपनी ने पिछले 46 वर्षों में एक मजबूत ब्रांड नाम स्थापित किया है और वोल्टेज स्टेबलाइजर्स, इन्वर्टर और इन्वर्टर बैटरी, इलेक्ट्रिक वॉटर हीटर, सोलर वॉटर हीटर, पंप और मोटर्स, घरेलू स्विचगियर्स, वायर्स और केबल, पंखे, मॉड्यूलर स्विच, एयर कूलर और रसोई उपकरणों के पोर्टफोलियो के साथ एक मल्टी-प्रोडक्ट कंपनी के रूप में तेज़ी से विविधता लाई है। वी-गार्ड ने न केवल भारत में कई श्रेणियों में मार्केट लीडरशिप का नेतृत्व किया है, बल्कि कई ‘इंडस्ट्री-फर्स्ट’ स्मार्ट उत्पादों को लॉन्च करके उत्पाद लीडरशिप का भी नेतृत्व किया है, जिसमें इंटेलिजेंट और स्मार्ट वॉटर हीटर, स्मार्ट इनवर्टर, स्मार्ट पंखे, एलईडी लाइट्स, और विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में कई अन्य नवीन और सुंदर डिज़ाइन शामिल है।

युगांडा एयरलाइंस ने एंटेबे-मुंबई फ्लाइट के लॉन्‍च के साथ भारत में अपना परिचालन शुरू किया

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अनिल बेदाग, मुंबई 
मुंबई : युगांडा एयरलाइंस ने आज मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट और युगांडा के एंटेबे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच अपनी नई डायरेक्ट सर्विस के लॉन्‍च के साथ भारत में अपना परिचालन शुरू करने की घोषणा की। यह सेवा 7 अक्टूबर से शुरू होगी। दोनों शहरों के बीच हफ्ते में तीन दिन यह विमान सेवा संचालित की जाएगी। कंपनी अपनी एयरबस ए330-800 नियो एयरक्राफ्ट पर सीधी सेवा की पेशकश करेगी। इस सेवा में तीन श्रेणियों में यात्रा करने की सुविधा यात्रियों को मिलेगी। इसमें बिजनेस क्लास में 20 सीटें, प्रीमियम इकोनॉमी क्लास में 28 और इकोनॉमी क्लास में 210 सीटें होंगी। 50 से भी ज्यादा सालों में दोनों देशों के उड्डयन संबंधों में इस तरह का उत्साहजनक विकास पहली बार होगा कि जब भारत और युगांडा नॉन-स्टॉप विमान सेवा से आपस में जुड़ेंगे।
    यह रूट युगांडा एयरलाइंस की सर्विस का अफ्रीकी महाद्वीप के बाहर विस्तार करेगा। कंपनी के तेजी से फैलते नेटवर्क में इस नई विमान सेवा के जुड़ने से यात्रियों को दक्षिण, पश्चिम, मध्य और पूर्वी अफ्रीका की यात्रा करने का सुविधाजनक अवसर मिलेगा। इस डायरेक्ट सर्विस की अवधि एक दिशा में करीब साढ़े पांच घंटे होगी। इससे बिजनेस, परिवार से मिलने और घूमने-फिरने के लिए दोनों देशों के यात्रियों को बेमिसाल सुविधा मिलेगी।
     चीफ कमर्शल अफसर श्री एडेदायो ओलावुयी ने कहा, “हम इसे लॉन्च करने के लिए काफी उत्साहित हैं। हमारे नेटवर्क में शामिल हुई ये नई उड़ान सेवा युगांडा एयरलाइंस के अपने यात्रियों के लिए यात्रा संबंधी विकल्पों के विस्तार की पुष्टि करती है। हम उम्मीद करते हैं कि यात्रियों को सुविधा देने के अलावा यह रूट भारत और युगांडा के एक दशक से भी लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी और वाणिज्यिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।“
     युगांडा के माननीय राजदूत एच.ई. मधुसुदून अग्रवाल ने कहा, “2017 से ही मैंने मुंबई और एंटेबे के बीच सीधी फ्लाइट के सपने को साकार करने के लिए बिना रुके और बिना थके मेहनत की है। मेरा विश्वास है कि दोनों देशों के बीच सीधी विमान सेवा व्यापार, वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा देगी। मैं अपने सपने को पूरा होते देखकर बेहद उत्साहित हूं।”

बुंदेलखंड के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगी केन-बेतवा लिंक परियोजना

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 विष्णु दत्त शर्मा- 

बुंदेलखंड की दो दशक पुरानी आस अब पूरी हो रही है। 18 साल से लंबित केन-बेतवा लिंक परियोजना का शुभारंभ क्षेत्र की प्यास के बुझने के साथ ही जीवन बदलने का ऐतिहासिक पड़ाव भी है। चार दशक से बुंदेलखंड की जनता को जिस दिन का बेसब्री से इंतजार था,वह दिन  अब आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल जी ने देश में 37 नदियों को आपस में जोड़कर जल संकट को दूर करने का बीड़ा उठाया था, उसमें केन-बेतवा लिंक परियोजना भी थी, उसे अब  मूर्त रूप मिल गया है। यह भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इसको अंतर्राज्यीय नदी हस्तांतरण मिशन के लिये एक मॉडल योजना के रूप में माना जाता है। लेकिन दुर्भाग्य से अटल जी के बाद की यूपीए सरकार ने इसमें रुचि नहीं दिखायी। हालांकि बुन्देलखंड की दुर्दशा पर राजनीतिक रोटियाँ जरुर सेकीं।  अटल जी ने नदियों को जोड़ने की जो परिकल्पना की थी, उनमें से केन-बेतवा पहला लक्ष्य था। देश में जल के संकट से सर्वाधिक प्रभावित बुन्देलखंड का ही क्षेत्र था, जिसका निदान मानवता की माँग थी।
स्वाधीन भारत में सर्वाधिक राजनीतिक रोटियाँ बुंदेलखंड के पिछड़ेपन पर ही सेकी गईं। राजनीतिक पर्यटकों ने इसकी दुर्दशा की तस्वीरों को देश-विदेश में भी खूब प्रचारित किया, लेकिन जिनके हाथों में सात दशक तक इसके तकदीर की चाभी थी, उन्होंने उससे हर बार छल किया और बुंदेलखंड की दशा जस की तस बनी रही। जिस बुंदेलखंड की वीरता की गाथाएँ साहस देती हैं, वही बुंदेलखंड पानी के समर में कई दशकों से मात खाता रहा। उजड़ते गाँव और पलायन बुंदेलखंड की त्रासदी का वृतांत बताते हैं। बुंदेलखंड की जनता के जीवन में हर दिन अंधकार और अधिक घना होता गया और सपनों के सौदागर उन्हें सब्जबाग दिखाते रहे। कड़वा सच है कि विगत दशकों में बुन्देलखंड से करोड़ों लोग पलायन कर गये। पशुधन को बचाना, कृषि कार्य करना, जीवन के लिए जरूरी पानी जैसी समस्याएँ बुन्देलखंड की नसीब बन गयीं और जन-जीवन में और अँधेरा छाता चला गया।
लेकिन अब  बुंदेलखंड के इतिहास में  नया सवेरा आने वाला है। जल, वन-भूमि साझाकरण और अधिग्रहण में आने वाली कठिनाईयों से जूझ रही केन-बेतवा लिंक परियोजना अब शुरू हो रही है। इस महान परियोजना की अनेक अड़चनें दूर हुईं और विश्व जल दिवस पर 8 मार्च को प्रधानमंत्री की उपस्थिति में यूपी और एमपी सरकारों ने इसके लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। सारी बाधाओं को पार कर अब मोदी सरकार ने 45 हजार करोड़ वाली केन-बेतवा लिंक जैसी बहुप्रतीक्षित परियोजना को जमीन पर उतार कर यहाँ समाज-जीवन की सरलता के सारे मार्ग प्रशस्त कर दिये हैं। इस परियोजना में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी और शेष मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश वहन करेंगे। इसके तहत केन नदी से बेतवा नदी में पानी भेजा जाएगा और 221 किलोमीटर लंबी संपर्क नहर निकाली जाएगी, जो झांसी के निकट बरुआ में बेतवा नदी को जल उपलब्ध कराएगी। केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से नॉन मानसून सीजन (नवंबर से अप्रैल के बीच) में क्रमशः मध्यप्रदेश को 1834 तथा उत्तर प्रदेश को 750 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिल सकेगा। इसका लाभ मध्य प्रदेश में बुंदेलखंड के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर और दतिया के साथ-साथ शिवपुरी, विदिशा और रायसेन सहित अन्य जिलों को भी मिलेगा। केन-बेतवा लिंक कार्य के पूरा हो जाने से जहां 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा पहुंचाई जा सकेगी, वहीं 41 लाख लोगों को सहज तौर पर पीने का पानी मिल पाएगा। बुंदेलखंड में आने वाले उत्तर प्रदेश के 2 लाख 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाईं और पेयजल की सुविधा भी इससे मिल सकेगी। बाद में 103 मेगा वाट पनबिजली और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा भी पैदा की जा सकेगी।
भले ही देश में जल-संकट पर छिटपुट चर्चाएँ होती रहीं हों परन्तु यह एक अटल सत्य है कि 1999 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी ने ही पहली बार नदी जोड़ो परियोजना पर काम शुरू किया था। उस समय एक टॉस्क फोर्स का गठन करके आधारभूत कार्य किया गया। इस टॉस्क फोर्स ने देश की नदियों का वर्गीकरण करके एक रूपरेखा रखी कि किन नदियों को जोड़कर देश को पानी की समस्या से मुक्ति दिलाई जा सकती है। हालांकि बीच में यह योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई लेकिन अब यहां की जनता का जीवन बदलने का रास्ता खुल गया है।
मोदी सरकार ने  केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण को इसकी कमान सौंपी तथा प्राधिकरण की मॉनिटरिंग का जिम्मा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री को दिया । इसके लिए अप्रैल 2015 में एक स्वतंत्र कार्यबल भी गठित किया था। अब  देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में केन-बेतवा लिंक प्रारंभ हो रही है और बुंदेलखंड की जनता का भी सपना पूरा हो रहा है।
बुंदेलखंड की जीवन रेखा केन-बेतवा लिंक परियोजना अब यहां युगांतकारी परिवर्तन लाएगी। जल-संकट खत्म होने के साथ ही महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। उन्हें मीलों सिर पर पानी ढोने से निजात मिलेगी। पानी की उपलब्धता से स्वच्छता बढ़ेगी और उनका स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। इस परियोजना से बुंदेलखंड में सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक स्तर ऊँचा होगा। नहरों का विकास होगा, पनबिजली से सस्ती बिजली मिलेगी तथा वनीकरण भी बढ़ेगा। आर्थिक समृद्धि आने से जीवन बदलेगा और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति रुझान बढ़ेगा तो पर्यटन उद्योग भी निखरेगा। खाद्य सम्पन्नता और रोजगार के अवसर मिलेंगे तो पलायन पर विराम लगेगा।आज जिस बुंदेलखंड की पहचान अकाल और सूखा की है, वह बुंदेलखंड भविष्य में हरियाली से पहचाना जाएगा। जो बुंदेलखंड गरीबी से जाना जाता है,वह समृद्ध बुंदेलखंड बनेगा और भविष्य में अपने गौरवशाली अस्मिता के साथ सारी दुनिया को आकर्षित करेगा। (विभूति फीचर्स)

विष्णु दत्त शर्मा-  

(लेखक खजुराहो लोकसभा क्षेत्र से सांसद व मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं)

 

राजश्री प्रोडक्शंस एक बार फिर अपने सिग्नेचर अंदाज में ‘दोनों’ के जरिये नए युग का रोमांस ला रही है

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राजश्री प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड अपनी 59वीं फिल्म ‘दोनों’ जियो स्टूडियोज के सहयोग से प्रस्तुत कर रही है। राजवीर देओल, पलोमा और निर्देशक अवनीश बड़जात्या की बॉलीवुड डेब्यू फिल्म 5 अक्टूबर को रिलीज हो रही है। इस फिल्म का निर्देशन अवनीश एस बड़जात्या ने किया हैं, वहीं कमल कुमार बड़जात्या, स्वर्गीय राजकुमार बड़जात्या और अजीत कुमार बड़जात्या ने इस फिल्म को प्रोड्यूस किया है। फिल्म के लिए क्रिएटिव प्रोडक्शन का नेतृत्व सूरज आर. बड़जात्या ने किया है। राजश्री प्रोडक्शंस एक बार फिर अपने सिग्नेचर अंदाज में नए युग का रोमांस ला रही है, एक विशेष राजश्री प्रोडक्शंस की परंपरा है जिसे निर्माता सूरज बड़जात्या और निर्देशक अवनीश ने वर्षों से बरकरार रखने के लिए चुना है। राजश्री प्रोडक्शंस ने हमेशा से एक रणनीति बनाए रखी है कि शुरुआत में अपनी फिल्म को सीमित स्क्रीन पर रिलीज़ करती है और धीरे-धीरे स्क्रीन की संख्या बढ़ाई जाती है।
यह एक ऐसी प्रथा है जिसका पालन राजश्री प्रोडक्शंस ने ‘हम आपके हैं कौन’ से लेकर ‘ऊंचाई’ तक किया है। ‘दोनों’ को भी सीमित स्क्रीन पर ही प्रदर्शित किया जारहा है और जैसे-जैसे फिल्म रफ्तार पकड़ेगी, स्क्रीन की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी तो यह फिल्म पूरे देश में 273 स्क्रीन्स पर रिलीज होगी। राजश्री प्रोडक्शंस के 76 साल पुरे हो चुके हैं और ‘दोनों’  राजश्री प्रोडक्शंस की सेलिब्रेशन फिल्म है। देश का सबसे पुराना प्रोडक्शन हाउस अपनी विरासत को आगे बढ़ा रहा है क्योंकि अब राजश्री प्रोडक्शंस की चौथी पीढ़ी फिलवक्त इसके कमान को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

नई दिल्ली प्रस्तावित रोड शो में पंहुचे पुष्कर सिंह धामी , केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदिच्छा भेंट की

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नई दिल्ली ,4अक्टूबर,बुद्धवार नई दिल्ली प्रस्तावित रोड शो में पंहुचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदिच्छा भेंट की |

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री से उत्तराखंड में आगामी दिसंबर माह में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट व जोशीमठ आपदा पर चर्चा की | इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समसामयिक विषयों पर चर्चा कर गृहमंत्री को राज्य की तत्कालीन स्थिति से अवगत कराया ,तथा दिसंबर माह में आयोजित होने वाले” वैश्विक निवेशक सम्मलेन” तथा नवंबर में आपदा प्रबंधन पर आयोजित होने वाले छठे वैश्विक सम्मेलन में सम्मिलित होने का निमंत्रण भी दिया |

Sanjay Balodi ‘ Prakhar’

गैया है मेरी मैया – अंतिम सांस तक पालिये-दूध दे या ना दे, गलत हाथों में मत बेचिए

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👉🏻 चीता के मुंह से जान बचाकर गौ माता ने 11 दिन के अबोध बालक की बचाई जान
👉🏻 गौ हत्या के लिए जितना दोषी दूसरे समुदाय के हैं, उससे कहीं अधिक दोषी हम और आप
👉🏻 त्यौहारों के मौसम में अन्य बेजुबान पशुओं की भी दी जाती है बलि, इस प्रथा पर भी रोक जरूरी
👉🏻 बिडम्बना है कि मनुष्य का शरीर प्राण निकलने के बाद मृत घोषित होता है, पर पशु का लाश पवित्र बन त्योहारों में व्यंजन बन जाता है।

मुम्बई में मेरी मुलाक़ात गउ भारत भारती पत्रिका के संपादक आदरणीय संजय शर्मा अमान जी से 30 सितम्बर को अंधेरी स्थित श्रीजी नामक एक होटल में मेरे परम मित्र विशाल विजय भगत जी के माध्यम से हुई। इस क्रम में उन्होंने मुझे गऊ भारत भारती की अख़बार तथा मैगज़ीन भेंट की। श्री शर्मा जी ने बातचीत के दौरान बताया कि हमलोग गौ माता के ऊपर कार्य कर रहे है तथा समाज में जागरूकता ला रहें है। उनके इस सराहनीय कार्य पर मै भावुक हुआ। मै भी बचपन से ही जीव हत्या का खिलाफ हूं। मुझे ऐसा लगा कि जिसकी तलाश मुझे थी, वह मिल गया है। क्योंकि जीव हत्या का विरोध करना मतलब लोगों से दुश्मनी झेलना है। जब इसकी आवाज उठाने वाला मिल जाये तो अपने आपको ऊर्जा मिलती है।

मेरा जन्म एक मध्यमवर्ग परिवार में हुआ है। मेरे पिता श्री नर बहादुर सोनार और माता श्रीमती राज कुमारी की गोद से 1973 में डिब्रुगढ़, आसाम में स्थित दिनजान सैनिक अस्पताल में जन्म हुआ। मेरी मां बताती है कि मै मां का दूध बिल्कुल ही नहीं पिया है। मां का स्तन में दूध जमा होने से काफी दर्द सहती थी। दूध को निकाल कर फेंकना पड़ता था। मेरे पिता को काफी चिंता हो गई कि पहला संतान माँ का दूध नहीं पी रहा है, तब पिताजी वायु सेना के एमईएस में कार्यरत थे। मुझे गाय का दूध पिलाया गया। गौ माता का दूध पीकर आज मै आधी उम्र गुजार चुका हुं। मेरे पिताजी बताते हैं कि बाहर का दूध से बेटा को क्या खुराक मिलेगा। मै खुद गाय पालकर बेटा को दूध पिलाऊंगा। पिताजी सरकारी जागीर में थे। गाय पालना संभव नहीं था, फिर भी पिताजी ने वहां के उच्च अधिकारी और वायु सेना के सीईओ साहब से अनुमति मांगी कि मेरा पहला संतान बेटा माँ का दूध नहीं पी रहा है। मुझे एक गाय पालने की अनुमति दीजिये। पिताजी को अनुमति मिल गई।

दरअसल मैं गौ माता का दूध पीकर अब बड़ा हो गया हूं। उस गौ माता का दूध पिया है, जो मेरे पिताजी आगे बताते हैं कि वायु सेना के जंगल में गाय को घास चरने के लिए छोड़ दिया था, तभी एक चीता ने गाय पर आक्रमण कर दिया। गौ माता अपनी जान बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। चीता के साथ जीवन और मौत का संघर्ष चल रहा। गौ माता लहू लुहान हो गई और चीता हार मानकर वापस जंगल चला गया। फिर वह गौ माता जो मुझे दूध पिलाती थी, वापस लहू लुहान होकर घर वापस लौटी। उस गौ माता का नाम भुंती रखा गया था। भुंती नेपाली शब्द है भूंती का अर्थ गोल-मटोल को कहा जाता है। इस घटना को वायु सेना के कर्मचारियों ने आँखो से देखी तथा मेरे पिता को सूचना दिया। मेरा पिताजी उस गाय को वापस घर लेकर आये। गाय काफी जख्मी हो गयी थी, गर्दन से खून बह रहा था। गाय का सिंग भी लहू-लुहान हो गया था। पूरे शरीर में चीता के पंजे का चीथड़ा हुआ निशान था। मेरे पिता ने गौ माता का इलाज कराया। इलाज के दौरान बाद में घाव भर गया और वह स्वस्थ्य हो गयी। यह घटना मेरे जन्मदिन से 11वें दिन फरवरी 16 तारीख की घटना है। उस दिन मेरे घर में खुशी का माहौल था, जिस दिन मेरा नामांकरण हो रहा था। इस खुशी के माहौल में एका-एक खबर आयी की गाय को चीता ने घायल कर दिया है और उसी गाय का दूध पी नामांकरण होने वाला बालक पी रहा था। इन शब्दों को लिखते हुए मेरे आँखों में आंसू भर आया। मेरे जीवन में जन्म देने वाली माँ और दूध पिलाने वाली गौ माता है। इन दोनो माँ का सदैव ऋणी हूं।

इसलिए शायद मैं बचपन से शाकाहारी जीवन जी रहा हूं। जब किसी भी पशु को काटा जाता है तो मेरा दिल झकझोर देता है। अनुभव करता हूं कि बेजुवान पशुओं का कब तक क़त्लेआम होता रहेगा। अब विज्ञान का युग आ गया है। तब जाकर लोगों को अपना संस्कृति याद आ जाती है। अब आवाज उठने लगी है कि गाय हमारी माता है। उसकी हत्या बंद करनी चाहिए। जाति संप्रदाय में आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है कि गौ हत्या बंद हो। ऐसे में हिंदू समाज काफी अग्रसर है और गौ माता की रक्षा के लिए कार्य भी कर रहा है। मेरा अपना निजी विचार है कि गौ हत्या करने में जितना दोषी अन्य समुदाय है, उतना दोषी मैं समझता हूं कि हिंदू समाज भी है। हो सकता है कि कट्टर हिंदू को मेरा इन शब्दों से बुरा लग सकता है। दरअसल बात मैं यह बताना चाहता हूं कि अन्य समुदाय से अधिक संख्या में गाय पालने वाले हिन्दू समाज से ही हैं। इसका बड़ा कारण है कि जब तक गाय दूध देती है, तब तक गौ माता कहते हैं। जब गाय बुढ़ी हो जाती है या दूध देना बंद करती है तो चंद पैसों की लालच में कसाई को बेच देते हैं। ऐसा खरीद-बिक्री मैंने अपने जीवन में कई बार देखा है। अब बताइये इसमें दोषी ज्यादा कौन है। अगर हमलोग गौ माता के सेवक हैं तो उसे कसाई के हाथों क्यो बेच रहे हैं। इसे रोकने के तौर तरीके को सख्त रूप अपनाना होगा। आरोप लगाने से पहले अपने आप को सजग होकर गौ माता की रक्षा करनी होगी। हम हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, पारसी आदि होने से पहले मानव हैं। इसमे हमारा वास्तविक धर्म क्या है। धर्म जाति आपस में लड़कर कुछ हसील होने वाला नहीं है।

आज हम गाय सेवा की काफी चर्चा करते हैं। इसके लिए देश में विभिन्न क्षेत्रों में कई संगठन काम कर रहे हैं। अब सोचने वाली बात यह है कि जब ऊपर लिखे गये मेरे जीवन का उदाहरण पेश किया है, ठीक इसी तरह किसी समाज में व्यक्ति को बकरी का दूध सेवन करने से नया जीवन मिला हो। भले बकरी को माता का दर्जा न मिल पाया हो।

आख़िरकार अपने बच्चे या किसी इंसान के बच्चों को दूध तो पिलाया होगा। हो सकता है कि दूध पिलाने में रेगिस्तान का ऊट भी शामिल हो। फिर भी मानव को देखिये इसके विपरीत पशु को लोग काटकर मांस को बड़े चाव से खाते हैं। अब त्योहारों का मौसम आ रहा है। देश के अन्य भागों में सहित मुम्बई राज्य में धूमधाम से गणेश उत्सव मनाया गया, अब पितृ पक्ष के बाद महालया, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा, भैया दूज आदि त्योहार मनाया जायेगा। अब त्योहारों के मौसम में चिकन-मटन आदि का सेवन करेंगे। जैसे ही अन्य समुदाय का त्योहार आयेगा तो गौ माता याद आ जाती है।
मैं इसमें किसी समुदाय विशेष का पक्ष नहीं ले रहा हूं। मेरा कहने का अभिप्राय यह है कि बूढ़ी हो जाने के बाद या दूध देना बंद करने के बाद गाय ना बेचें। इसका सख्त विरोध होना चाहिए। इसके साथ ही पशु हत्या भी बंद होनी चाहिए। यह इसलिए कि मेरा विचार संसार के उन लोगों के विचार से भिन्न हैं, जो पशुओं में विभाजन लाते है। यह बात अगर मै व्यक्तिगत बोलूं तो हो सकता है, कोई आहत हों। कसाई के यहां जाकर आपलोग प्राय सभी लोग देखते होंगे बकरी, मुर्गा इत्यादि काटते हैं तो कतार में दूसरा पशु देख रहा होता है। उसी के सामने शरीर के चमड़े को उखाड़ दिया जाता है। वही कतार पर खड़ा होकर अपनी मौत की बारी आने का इंतज़ार में प्रतीक्षा कर रहा होता है। फिर भी सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य इस दर्द को नहीं समझ सकता है। बस त्योहारों पर समुदाय के बीच भेदभाव में अपना आक्रोश जाहिर करते हैं। मेरा बस चले तो जीव हत्या ही बंद होना चाहिए। अब इस बात को लोगों के समक्ष किस तरह से समझाया जाये, जिसके मुँह में मांस का स्वाद मिल चुका है। इसमे हो सकता है की लोग मांस का स्वाद का भक्षण का आनंद लेने वाले व्यक्ति मेरा पुरजोर विरोध करेंगे। मैं एक दलित परिवार से हूं फिर भी शाकाहारी जीवन आनंद के साथ जी रहा हूं। मेरी धर्म पत्नी, बेटी, बेटा बिल्कुल ही शाकाहारी जीवन यापन कर रहे है। मैं अपनी दिमागी सोच इस तरह रखता हूं कि इंसान की जब मौत होती है तो डॉक्टर सांस चेक करता है। सांस नहीं चल रहा होता है तो उसे मृत घोषित किया जाता है। उसे अंग्रेजी भाषा में डेथ बॉडी कहते हैं मतलब मृत शरीर। अब लोग अपने-अपने धर्म और रीति-रीवाज से उनकी अंतिम विदाई देते है। हिंदू हो या अन्य धर्म समाज के लोग, मृत शरीर को अछूत मानते हैं। मनुष्य का मृत शरीर छूने से अपवित्र मानते है और श्मशान तथा कब्रिस्तान से घर वापस लौटने के बाद कुछ न कुछ नियम (शुद्धिकरण) करके घर के अंदर प्रवेश करते हैं।

अब देखिये सोचने और विचारने का समय है कि प्राणी में सर्वश्रेष्ठ मानव चोला का प्राण निकलने के बाद अपवित्र होता है, तो पशुओं का प्राण निकलने के बाद अपवित्र कैसे नहीं हुआ। वह पशु इतना शुद्ध है कि मानव जाति मांस का भक्षण कर रहा है। यह कैसी बिडम्बना है कि मानव लाश को छूता है तो अपवित्र और पशु के लाश से कोई मतलब नहीं। बल्कि शानदार आहार बन जाता है जो छोटे-मोटे होटलों से लेकर फाइव स्टार होटल तक में बिकता है। उस मांस के लिए होटालों में सेफ नाना प्रकार से स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर तैयार करते है। भाई, दुनिया में ऐसा कौन सा विज्ञान है कि मनुष्य को मृत घोषित करती है और पशुओं को नही। अगर पशुओं को मृत घोषित करती है तो उसे शमशान के बजाये अपना आहार में भक्षण क्यों किया जाता है?

मेरा मानना है कि मनुष्य का मृत शरीर को श्मशान या कब्रिस्तान में जलाया या दफनाया जाता है। वहां अगर मध्य रात्रि को अकेले जाने के लिए कहा जाये तो लोग सोचेंगे की कैसे जाये, क्योकि वहां किसका निवास स्थान है। प्रायः यही सुनने को आएगा कि भूत का निवास होता है। डरावनी आवाज निकलती है, यही न? अब मेरा इस बात को ध्यान से मनन और चिंतन करिये कि प्राणीयों में सर्वश्रेष्ठ मनुष्य है, फिर भी शमशान में मध्य रात को जाने से लोग डरते हैं। वहीं जिन पशुओं को मार कर नाना प्रकार का व्यंजन बना कर खाते है तो उसे कौन सा शमशान में पहुंचाया जाता है वह है मनुष्य का पेट। उस शमशान रूपी पेट में किसका वास होगा? डरावने भूत पिचाश ही तो उत्पन्न होंगे। पशु का मृत शरीर पेट में जायेगा तो भूतों का असर तो होना ही होना है। इसलिए कहा भी गया है कि जैसा खायेगा अन्न, वैसा होगा मन। जैसा पिएंगे पानी, वैसा होगा वाणी ।

हिम बहादुर सोनार।
सिलीगुड़ी जिला दार्जीलिंग
पश्चिम बंगाल
मोबाइल नम्बर : 7602719190
Email: himbahadur.ghimire@gmail.com

डॉ. मुस्तफ़ा यूसुफ़ अली गोम को मिला ‘महात्मा गांधी रत्न अवार्ड 2023’

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मुम्बई की चर्चित स्वयं सेवी संस्था कृष्णा चौहान फाउंडेशन के संस्थापक डॉ कृष्णा चौहान द्वारा गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को अंधेरी (वेस्ट), मुम्बई स्थित मेयर हॉल में आयोजित ‘महात्मा गांधी रत्न अवार्ड 2023’ समारोह बॉलीवुड सिंगर पद्मश्री उदित नारायण, निर्माता धीरज कुमार, एसीपी संजय पाटिल, एसीपी बाजीराव महाजन, दिलीप सेन, सुनील पाल, के के गोस्वामी, अमिताभ बच्चन के मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत, पंकज बेरी, अरुण बख्शी, अली खान, रमेश गोयल, जीतेन्द्र कुमार तिवारी, जीनत एहसान कुरैशी, डांसर शिरीन फरीद, समाजसेविका सुंदरी ठाकुर और मधुमंगल दास की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
इस समारोह में पद्मश्री उदित नारायण, निर्माता धीरज कुमार, एसीपी संजय पाटिल, एसीपी बाजीराव महाजन, दिलीप सेन, सुनील पाल, के के गोस्वामी के हाथो जाने माने , सुप्रसिद्ध समाजसेवी और केयर टेकर्स एक्सटीरियर एंड इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. मुस्तफ़ा यूसुफ़ अली गोम को सम्मान चिन्ह दे कर ‘महात्मा गांधी रत्न अवार्ड 2023’ से सम्मानित किया गया।
डॉ. मुस्तफ़ा यूसुफ़ अली गोम , मुंबई के कांदिवली में अंजुमन ए नजमी दाऊदी भोरा जमात के सचिव हैं। अपनी अंजुमन के माध्यम से वह सामाजिक कार्य करते है। अब तक श्री गोम को उनके अच्छे सामाजिक कार्यों के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें “गौ भारत भारती” के सर्वोत्तम सम्मान के साथ-साथ केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा वाग्धारा सम्मान से सम्मानित किया। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने भी राजभवन में डॉ. बीआर अंबेडकर पुरस्कार से सम्मानित किया है।
इसके अलावा मुस्तफा यूसुफ अली गोम को हाल ही में “फेस ऑफ इंडिया” का सम्मान भी सिनेमा जगत के मशहूर अभिनेता मुकेश ऋषि ने दिया था।
खैर ‘महात्मा गांधी रत्न अवार्ड 2023’ कार्यक्रम की एंकर डॉ भारती छाबरिया,थी , और प्रमुख आयोजक कृष्णा चौहान थे।

ऋण वसूली के लिए मोबिक्यूल का पहला फिज़िकल कलेक्शन प्लॅटफॉर्म ‘एमकोलेक्ट’ लॉन्च

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अनिल बेदाग, मुंबई
मुंबई : मोबिक्यूल टेक्नोलॉजीज एक मान्यता प्राप्त ऋण संग्रह और भारत में एक अग्रणी घरेलू डिजिटल ग्राहक ऑन-बोर्डिंग कंपनी है। कंपनी को ऋण वसूली और ऋण क्षमता बढ़ाने के लिए अपनी फिजिटल ऋण समाधान सेवा शुरू करने पर गर्व है। अत्याधुनिक ऋण वसूली और समाधान के लिए एक सुव्यवस्थित और कुशल दृष्टिकोण बनाने के लिए ग्राहक-केंद्रित कॉल सेंटर के साथ डिजिटल आउटरीच का एक समानांतर मिश्रण है। यह दृष्टिकोण ग्राहक केंद्रित रणनीति की गारंटी देकर बाउंस दरों को कम करने में मदद करेगा। क्योंकि यह डिजिटल + एआई + भौतिक कॉल के संयोजन के साथ उपयोगकर्ता के व्यवहार को पूरा करके संग्रह दक्षता में वृद्धि करेगा।
      वर्तमान आधुनिक आर्थिक परिदृश्य में बैंक और एनबीएफसी अक्सर विभिन्न चैनलों के माध्यम से ऋण संग्रह का प्रबंधन करने के लिए संघर्ष करते हैं, जिससे परिचालन अक्षमताएं और बढ़ती लागत होती है। मोबिक्यूल की ओमनी-चैनल ऋण समाधान सेवा लागत प्रभावी तरीके से इस चुनौती का समाधान करती है।
     इस नवोन्मेषी और उद्योग के पहले समाधान के बारे में उत्साहित मोबिक्यूल टेक्नोलॉजीज के संस्थापक और प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा, “बैंक और एनबीएफसी डिजिटल संग्रह के लिए मामले सौंपते हैं और अनसुलझे मामलों को समाधान के लिए कॉल सेंटर में स्थानांतरित कर दिया जाता है। दोनों चैनलों का उपयोग एक साथ या कम मात्रा में किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप अक्षमताएं और लागत में वृद्धि होती है।
    मोबिक्यूल एक एकीकृत ऋण समाधान सेवा पेश करता है जो डिजिटल आउटरीच के साथ 100 से अधिक कॉल सेंटर संचालन को सहजता से जोड़ती है, एक सच्चा ओमनी-चैनल समाधान बनाती है जो प्रौद्योगिकी, डेटा विज्ञान, रणनीति और भौतिक कॉल सेंटरों का लाभ उठाती है। जैसे एसएमएस, ईमेल, व्हाट्सएप, आईवीआर, वॉयस बॉट, आउटबाउंड और इनबाउंड कॉल सेंटर सेवाएं। हमारा मिशन प्लेटफ़ॉर्म पर वास्तविक समय ग्राहक संपर्क और व्यवहार का लाभ उठाकर डिजिटल और मानव कॉल सेंटर क्षमताओं के बीच तालमेल में सुधार करना है।
हमारा ऋण वसूली मंच पूर्व, प्रारंभिक, मध्य और अंतिम चरण के सभी चरणों को पूरा करता है। हमने अपना प्लेटफ़ॉर्म विशेष रूप से निपटान, परिसंपत्ति पुनर्प्राप्ति और कानूनी वर्कफ़्लो प्रबंधन के पुनर्प्राप्ति चक्रों को पूरा करने और प्रबंधित करने के लिए डिज़ाइन किया है।  हम विशेषज्ञता और विशिष्ट क्षेत्रों की पूर्ति करने वाले वकीलों के सहयोग से आपकी कानूनी प्रक्रिया को प्रबंधित करने के लिए कानूनी सेवाओं के साथ एक एकीकृत मंच प्रदान करते हैं।
हमारी भौतिक ऋण समाधान सेवा का उद्देश्य व्यक्तिगत ग्राहक जुड़ाव के साथ प्रौद्योगिकी को जोड़कर ऋण वसूली और वसूली की सुविधा प्रदान करना है। हमारा इरादा वसूली दरों में सुधार करने और वित्तीय संस्थानों की परिचालन लागत को कम करने का है।”
मोबिक्यूल टेक्नोलॉजीज के वरिष्ठ प्रौद्योगिकी अधिकारी यतिन पेडनेकर ने कहा, “मानव-केंद्रित रणनीतियों के साथ डिजिटल क्षमताओं को संरेखित करके, नये  दृष्टिकोण की पेशकश करना जो वित्तीय संस्थानों को ऋण वसूली की जटिलताओं को सटीक और सावधानीपूर्वक नेविगेट करने की अनुमति देता है।”