37वें राष्ट्रीय खेल में उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री धामी ने फ्लैग ऑफ कर किया रवाना।
देहरादून 23अक्टूबर 2023, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में आगामी 37वें राष्ट्रीय खेल, गोवा में उत्तराखण्ड राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों के दल को फ्लैग ऑफ कर रवाना किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 37वें राष्ट्रीय खेल में राज्य की ओर से प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों को खेल किट/ ट्रैक सूट वितरण कर शुभकामनाएं प्रेषित की।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी खिलाड़ी अपने मनोबल एवं लगन से राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगे। राष्ट्रीय खेलों में खिलाड़ी अपनी कुशल खेल प्रतिभा के बल पर देवभूमि का नाम अवश्य रोशन करेंगे। उन्होंने कहा इस वर्ष खेल विधाओं एवं खिलाड़ियों की संख्या में वृद्धि हुई है। राज्य में खेल संस्कृति का निरंतर विकास हो रहा है। राज्य सरकार भी राज्य में खेल संस्कृति विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में प्रतिभा को बढ़ाए जाने के मकसद से खेल प्रतिभाशाली और उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए खेल छात्रवृत्ति देने का कार्य जारी है। उन्होंने कहा राज्य में खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन हेतु “नई खेल नीति’’ लाई गई है। खिलाड़ियों को जमीनी स्तर से खेल क्षेत्र में रूचि लाने हेतु 14 से 23 वर्ष तक के खिलाड़ियों को ’’मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना’’ के अंतर्गत 2000 प्रति माह छात्रवृत्ति एवं 10 हजार रुपए प्रति वर्ष संबंधति खेलों हेतु किट खरीदने के लिए दिए जा रहे है। ’’मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना’’ में 08 से 14 वर्ष के उभरते खिलाड़ियों को 1500 रूपये प्रतिमाह की खेल छात्रवृत्ति दी जा रही है। साथ ही खिलाड़ियों को नियमानुसार त्वरित वित्तीय लाभ दिये जाने हेतु ” मुख्यमंत्री खेल विकास निधि’ की स्थापना भी की गयी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पिथौरागढ़ दौरे के दौरान प्रदेश के प्रत्येक खिलाड़ी का मान बढ़ाया है। राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के प्रतियोगिता एवं प्रशिक्षण शिविरों में यात्रा के दौरान दुर्घटना होने पर आर्थिक सहायता की व्यवस्था की है। प्रदेश सरकार विश्वविद्यालयों में व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु 5 प्रतिशत र्स्पोट्स कोटे की व्यवस्था करने के लिये नियमावली बनाने जा रही है। निजी खेल क्षेत्रों के माध्यम से खेल अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण हेतु अनुदान दिये जाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा राज्याधीन सेवाओं में सेवायोजन के लिए 4 प्रतिशत खेल कोटे को पुनः लागू किये जाने की कार्यवाही भी की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी खिलाड़ी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ भरपूर मेहनत एवं’ विकल्प रहित संकल्प’ के मूल मंत्र को अपनाकर अपने लक्ष्य निर्धारित करें और उस लक्ष्य को पाने के लिए जी जान से जुट जाएं। राज्य सरकार भी आपके साथ हर कदम पर खड़ी है।
खेल मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खिलाड़ियों के बीच आकर स्वयं को गौरवान्वित एवं ऊर्जावान महसूस कर रही हूं। उन्होंने कहा बदलते समय के साथ लोगों का खेल के प्रति नजरिया भी बदला है। उत्तराखंड खेल के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के संकल्प अनुसार खेल के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई है। प्रदेश में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किए जाने हेतु छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने खिलाड़ियों का सरकारी सेवा में रास्ता खोला है। आज खिलाड़ियों के वर्तमान के साथ भविष्य भी बनाने का कार्य जारी है।
विशेष प्रमुख सचिव श्री अभिनव कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय खेलों में इस बार राज्य की ओर से 240 सदस्यीय टीम प्रतिभाग कर रही है। जिसमें 177 खिलाड़ियों के साथ 63 टीम ऑफिशियल्स हैं और यह टीम 25 खेल विधाओं में प्रतिभाग करेगी। उन्होंने खिलाडियों को आगामी खेल हेतु शुभकामनाएं दी।
इस दौरान कार्यक्रम में उत्तराचंल ओलंपिक एसोसिएशन संघ के अध्यक्ष निर्मान मुखर्जी, महासचिव डॉ. डी.के सिंह, निदेशक खेल जितेंद्र कुमार सोनकर, डॉ. अलकनंदा अशोक एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
केंद्र ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का किया गठन, 2030 तक हल्दी निर्यात 1 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
21अक्टूबर 2023, नई दिल्ली: केंद्र ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का किया गठन, 2030 तक हल्दी निर्यात 1 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य – भारत सरकार ने अधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन की घोषणा की हैं। यह बोर्ड देश में हल्दी और उससे संबंधित उत्पादों के विकास और विस्तार पर ध्यान केंद्रित करेगा। भारत में हल्दी की खेती मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में की जाती है।
भारत हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक
भारत विश्व में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। वर्ष 2022-23 में 11.61 लाख टन (वैश्विक हल्दी उत्पादन का 75 प्रतिशत से अधिक) के उत्पादन के साथ भारत में 3.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हल्दी की खेती की गई थी। भारत में हल्दी की 30 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं और यह देश के 20 से अधिक राज्यों में उगाई जाती है। हल्दी के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु हैं।
2030 तक 1 बिलियन डॉलर तक निर्यात का लक्ष्य
हल्दी के विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत से अधिक है। 2022-23 के दौरान, 380 से अधिक निर्यातकों द्वारा 207.45 मिलियन डालर मूल्य के 1.534 लाख टन हल्दी और हल्दी उत्पादों का निर्यात किया गया था। भारतीय हल्दी के लिए प्रमुख निर्यात बाजार बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और मलेशिया हैं। बोर्ड की केंद्रित गतिविधियों से यह उम्मीद की जाती है कि 2030 तक हल्दी निर्यात 1 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।
कौन होगा सदस्य
राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष, आयुष मंत्रालय, केंद्र सरकार के फार्मास्यूटिकल्स, कृषि मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग विभाग, तीन राज्यों के वरिष्ठ राज्य सरकार के प्रतिनिधि (रोटेशन के आधार पर), अनुसंधान में शामिल राष्ट्रीय/राज्य संस्थानों, चुनिंदा हल्दी किसानों और निर्यातकों के प्रतिनिधि होंगे, बोर्ड के सचिव की नियुक्ति वाणिज्य विभाग द्वारा की जाएगी।
राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड हल्दी से संबंधित मामलों में नेतृत्व प्रदान करेगा, प्रयासों को मजबूत बनाएगा तथा हल्दी क्षेत्र के विकास और वृद्धि में मसाला बोर्ड और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ अधिक समन्वय की सुविधा प्रदान करेगा।
बोर्ड के उद्देश्य
हल्दी के नए उत्पाद विकास और मूल्य वर्धन को बढ़ावा देना।
अंतराष्ट्रीय बाजारों में हल्दी और हल्दी के उत्पादों की जागरूकता और खपत को बढ़ावा देना। अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करना
हल्दी के मूल्य वर्धित उत्पादों के विकास के लिए संभावित अंतरार्ष्ट्रीय बाजारों में बाजार अनुसंधान की सुविधा प्रदान करना।
गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना .
हल्दी की संभाल और संभावनाओं को बनाने और अधिकतम करने का काम करना.
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) के निदेशक मंडल को संबोधित किया
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फ़ेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) के निदेशक मंडल को संबोधित किया। श्री अमित शाह ने कहा कि NCCF को वर्ष 2027-28 तक 50 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनना चाहिये। उन्होंने कहा कि NCCF को देश भर की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और अन्य सहकारी संस्थाओं को अपना सदस्य बनाने पर जोर देना चाहिये जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि NCCF की अंश पूंजी में सहकारिता का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक हो। केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि इसके लिये NCCF को अपना बिज़नेस प्लान डेवलप करने तथा बिज़नेस एप्रोच में बदलाव लाना होगा।
केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न को पूरा करने में NCCF महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, अपने गठन के बाद से, सहकारिता मंत्रालय ने देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने और GDP में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पिछले 26 महीनों में 52 पहल की हैं।
श्री अमित शाह ने कहा कि NCCF को आत्मनिर्भर सहकारी संस्था बनने के लिए अगले 10 वर्ष का एक रोडमैप बनाना चाहिए। उन्होने कहा कि इसे क्रियान्वित करने में सहकारिता मंत्रालय अपना पूर्ण सहयोग दे सकता हैं। केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने NCCF द्वारा अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ इथेनॉल के उत्पादन के लिये गुजरात, बिहार और अन्य राज्यों के किसानों से मक्के की खरीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि अगर एनसीसीएफ और नेफेड चाहे तो सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) से डिजिटल प्लेटफार्म पर अपना एक कॉमन ऐप तैयार करवा सकते हैं और इस कॉमन ऐप के माध्यम से सामंजस्य स्थापित कर मक्के की खरीदारी की जा सकती हैं। श्री शाह ने NCCF द्वारा किसानों से दलहन की खरीदारी कर निर्यात के अवसर तलाशने और इस खरीद को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने एग्रेसिव एक्सटेंशन और मार्केटिंग अपनाने, किसानो को पूर्व में आश्वासन देकर खरीद करने तथा कॉमन कलेक्शन सेंटर बनाए जाने पर भी ज़ोर दिया।
श्री अमित शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि NCCF प्याज एवं दालों की खरीद के लिये पैक्स के साथ संबद्ध हो सकता है, ताकि सहकारिता के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी भंडारण योजना के तहत इसके भंडारण की व्यवस्था बनाई जा सके। उन्होंने कृषि उत्पादों में निर्यात के अवसर और चावल की खरीदारी कर राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NECL) द्वारा उसे निर्यात करने के अवसर तलाशने को भी कहा।
NCCF के चेयरमैन श्री विशाल सिंह ने आश्वस्त किया कि वे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता द्वारा सुझाये गए लक्ष्यों को पूर्ण करेंगे। निदेशक मंडल की बैठक में सहकारिता मंत्रालय के सचिव श्री ज्ञानेश कुमार और NCCF के प्रबंध निदेशक एनिस जोसेफ चंद्र भी शामिल हुए।
किसानों के लाभ के लिए मोदी सरकार ने फिर बढ़ाई एमएसपी – श्री तोमर
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा विपणन सीजन 2024-25 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दे दी गई। इसका स्वागत कर प्रधानमंत्री श्री मोदी को किसानों की ओर से धन्यवाद देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि मोदी सरकार के इस फैसले ने किसान कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर सिद्ध किया है। मोदी सरकार ने किसानों की भलाई के लिए गत 9 साल से ज्यादा के समय में एक के बाद एक अनेक कल्याणकारी निर्णय लिए हैं, कई योजनाएं-कार्यक्रम सृजित किए, जिनका बेहतर क्रियान्वयन भी हो रहा है।
केंद्र सरकार ने विपणन सीजन 2024-25 के लिए रबी फसलों के एमएसपी में वृद्धि की है, ताकि उत्पादक किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सकें। एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दाल (मसूर) के लिए 425 रुपये प्रति क्विंटल, रेपसीड-सरसों हेतु 200 रु. प्रति क्विंटल की मंजूरी दी गई है। गेहूं व कुसुम, हरेक के लिए 150 रु. प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। जौ व चने के लिए क्रमश: 115 रु. प्रति क्विंटल और 105 रु. प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। विपणन सीजन 2024-25 के लिए अनिवार्य रबी फसलों की एमएसपी में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है, जिसमें एमएसपी को अ.भा. भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर निर्धारित करने की बात कही गई थी। अ.भा. भारित औसत उत्पादन लागत पर अपेक्षित लाभ गेहूं के लिए 102 प्रतिशत; रेपसीड-सरसों के लिए 98 प्रतिशत; दाल के लिए 89 प्रतिशत; चने के लिए 60 प्रतिशत; जौ के लिए 60 प्रतिशत व कुसुम के लिए 52 प्रतिशत है। रबी फसलों की इस बढ़ी हुई एमएसपी से किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होगा और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन भी मिलेगा।
सरकार खाद्य सुरक्षा बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने व आयात पर निर्भरता कम करने के लिए तिलहन, दलहन और श्रीअन्न/मोटे अनाजों की ऊपज बढ़ाने के क्रम में फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है। मूल्य नीति के अलावा, सरकार ने वित्तीय सहायता प्रदान करने व तिलहन व दलहन की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और राष्ट्रीय तिलहन और ऑयल पाम मिशन (एनएमओओपी) जैसी विभिन्न पहलें की हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि व 10 हजार नए एफपीओ बनाने की महत्वपूर्ण योजनाओं से भी किसानों को सीधा फायदा पहुंच रहा है। इसके अतिरिक्त, देशभर में हरेक किसान तक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना का लाभ पहुंचाने हेतु सरकार ने किसान ऋण पोर्टल (केआरपी), केसीसी घर-घर अभियान और मौसम सूचना नेटवर्क डेटा प्रणाली (विंड्स) का शुभारंभ किया है। विंड्स का उद्देश्य किसानों को अपनी फसल के संबंध में निर्णय लेने में सशक्त बनाने के लिए मौसम की समय पर व सटीक जानकारी प्रदान करना है। इन पहलों का लक्ष्य कृषि में क्रांति लाना, वित्तीय समावेश का विस्तार करना, डेटा उपयोग को अधिकतम करना व किसानों के जीवन को बेहतर बनाना है।
उल्लेखनीय है कि विपणन सीजन 2024-25 के लिए सभी रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है , जो इस प्रकार है- गेहूं -2275 , जौ- 1850 , चना -5440 , दाल ( मसूर ) – 6425 , रेपसीड एवं सरसों -5650 और कुसुम -5800 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
जानिए खिलारी गाय की विशेषतांए, उत्पत्ति व उपयोग
भारत में गाय का पालन कई वर्षों से चलता आ रहा हैं। किसान कई सदियों से खेती के साथ गायो को भी पाल रहे हैं। भारत में गाय की बहुत सारी देसी नस्लें हैं, जिनकी सबकी अपनी-अपनी खासियत होती हैं। इनमें से आपने विभिन्न प्रजातियों की गायो को देखा होगा और कुछ के बारें सुना भी होगा, इन्हीं में शामिल हैं एक खिलारी गाय, जो पश्चिमी महाराष्ट्र में पायी जाती है।
इस नस्ल को मंदेशी या शिकारी या थिल्लर के नाम से भी जाना जाता है। इस नस्ल का मूल स्थान महाराष्ट्र और कर्नाटक के जिले हैं और यह पश्चिमी महाराष्ट्र में पायी जाती है। इस नस्ल का नाम खिलार शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब है पशुओं का झुंड।
खिलारी गाय की विशेषताएँ
शरीरः खिलारी मवेशी छोटे आकार के जानवर हैं। इनका शरीर बेलनाकार होता हैं और कमर पर छोटा सा कूबड़ निकला होता हैं।
शरीर का रंगः ये सभी किस्में रंग-रूप में काफी भिन्न होती हैं। दक्कन के पठार की खिल्लारी गाय भरे-सफेद रंग की होती हैं। नर मवेशी के आगे और पीछे का हिस्सा गहरे रंग का होता हैं। इसके अलावा यह मवेशी मुख्य रूप से स्लेटी-सफेद रंग की होती हैं।
सिर व सींगः खिलारी नस्ल की गायो के अंग मजबूत होते हैं। इनके सींग लंबे, सिंर तंग, खाल हल्की (पतली) और छोटे कान होते हैं।
वजनः इस नस्ल के नर का औसतन भार 450 किलो और मादा गाय का औसतन भार 360 किलो होता है। इसके दूध की वसा लगभग 4.2 प्रतिशत होती है। यह नस्ल एक दिन में औसतन 240-515 किलो दूध देती है।
खिलारी गाय की मुख्य पहचान
ये सभी किस्में रंग-रूप में काफी भिन्न हैं। दक्कन के पठार की खिल्लरी, म्हसवद और अटपाडी महल प्रकार भूरे सफेद रंग के होते हैं, नर के अग्रभाग और पिछले भाग पर गहरा रंग होता है, चेहरे पर अजीब भूरे और सफेद धब्बे होते हैं। खिल्लारी मवेशी छोटे आकार के जानवर हैं।
खिलारी गाय का शरीर बेलनाकार होता हैं।
खिलारी मवेशी की कमर पर छोटा सा कूबड़ निकला होता हैं।
खिलारी मवेशी के सींग लंबे और सिर तंग होता हैं।
खिलारी गाय के उपयोग
खिलारी मवेशियों का उपयोग मुख्य रूप से भारवाहक पशु के रूप में किया जाता है। इस नस्ल की गायें अच्छी दूध देने वाली नहीं हैं और लाभदायक दूध उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
सिरीशा भगवातुला और रिदम रोहिन ने गाया रोमांटिक गीत
मुम्बई। सिंगल गानों की डिमांड हमेशा से म्यूजिक लवर के लिस्ट में ऊपर रही है और बड़े पैमाने पर सोलो गाने हिट भी हो रहे हैं। हाल ही में प्रसिद्ध संगीतकार शिखर संतोष ने एक रोमांटिक सांग बनाया है जिसे खूबसूरत आवाज़ में गाया है सिरीशा भगवातुला और रिदम रोहिन ने।
रिदम रोहिन की बात करें तो वे अमेरिका में रहते हैं और उन्होंने प्रसिद्ध म्यूज़िक इंस्टिट्यूट कॉलेज ऑफ कंटेम्पररी म्यूजिक इन हॉलीवुड से गायन की शिक्षा ली है। सिरीशा ने हाल में ‘घोड़े पे होके सवार… गीत गाकर रातों रात सुर्ख़ियाँ बँटोरी हैं यह गाना लोगों के बीच काफ़ी पसंद किया जा रहा है।
लता मंगेशकर के साथ काम कर चुके संगीतकार शिखर संतोष ने सिरीशा और रिदम रोहिन की बेहतरीन आवाज़ में जब नया गाना रिकॉर्ड किया तो स्टूडियो में बैठे लोग झूम उठे। स्वयं सिरीशा और रिदम को लगता है कि यह मेलोडी गाना लोगों को बेहद पसंद आएगा। इस गाने को प्रसिद्ध गीतकार असलम साहनी ने लिखा है जबकि म्यूज़िक अरेंजर रिकेश गुरुंग हैं। इस गाने का वीडियो निर्देशन भूषण दहाल करने वाले हैं।
शिखर संतोष ने बताया कि गाने के वीडियो में टीवी जगत के चर्चित चेहरों को लिया जाएगा और इसका म्यूज़िक टी सीरिज़ के साथ रिलीज़ किया जाएगा।
बेज़ुबान मेरी जान है , बेज़ुबान कुत्तो का दूसरा घर है लकी मिश्रा का घर
जीवदया आज के समय में क्या हर युग और समय में जरुरी रहा है , भारत के ऋषि मुनियों ने जीवदया और उनके रक्षण के लिए युद्ध लड़े और अपने प्राणों की बलि दी। मात्र दस वर्ष की उम्र में छत्रपति शिवाजी महाराज ने गौ माता के लिए लड़ाई लड़ी थी। अपने बाल्य्काल में ही छत्रपति शिवाजी महाराज ने गौमाता के दुश्मनो के दांत खट्टे कर दिए थे। जीवदया और गौमाता का हिन्दू धर्म में महत्त्व आज से नहीं बल्कि हजारों सालों से रहा है.
आज की इस अति आधुनिक दुनियाँ में जहां जानवरो को बेतहाशा मारा और काट कर खाया जा रहा है वह चिंतनीय तो है ही बड़ा ही दुर्भाग्य पूर्ण है। भारत देश के नागालैंड प्रदेश में कुत्तों को मार कर खाने पर कोर्ट द्वारा रोक लगा दिया गया था मगर उस रोक को कुछ दिन पहले हटा दिया गया। ज्ञात हो कि 2020 में नागालैंड सरकार ने कुत्तों के मांस की बिक्री पर रोक लगाई थी।
स्ट्रीट डॉग्स हमारे जीवन में क्या मायने रखते है अगर जानना हो तो उनसे मिले जो एक स्ट्रीट डॉग को बचाते है उन्हें खाना खिलाते है। नई जिंदगी देते है। स्ट्रीट कुत्ते , जिन्हें वैज्ञानिक साहित्य में स्वतंत्र शहरी कुत्तों के रूप में जाना जाता है और जिनका कोई भी मई – बाप नहीं होता है। कहते है कि कुत्तों को अत्यधिक अनुकूलनशील और बुद्धिमान प्रजाति माना जाता है। यह सही भी है , गल्ली मुहल्लों , और सड़को पर भटकने वाले यह प्राणी बहुत वफ़ादार भी है।
लकी मिश्रा का बेज़ुबानों के प्रति प्रेम
खैर जहां बेज़ुबान कुत्तों और जानवरों को लोग मार रहे है वही कुछ लोग उसे संरक्षण देने और बचाने में लगे है। मुंबई में रहने वाली लकी मिश्रा एक यैसी ही पशुप्रेमी महिला है जो अपना सब कुछ दाव पर लगा कर इन आवारा पशुओ , कुत्तो के लिए मशीहा बन कर उभरी है। पिछले २५ वर्षो से ये आवारा कुत्तो को घर देने और उनकी देख भाल करने का काम कर रही है।
वो कहती है कि -” जब हम बेजुबानों की मदद करने का वास्तविक कार्य कर रहे हैं तो हमें दुर्व्यवहार का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ता है? जहां पीएम मोदी “मन की बात” में आवारा कुत्तों को गोद लेने की सलाह देते रहते हैं, वहीं हमारे सीएम योगीजी, जो खुद एक कुत्ता प्रेमी हैं, हमें जानवरों की देखभाल के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं, यह अजीब है कि लोगों ने कुत्तों से नफरत करने वाला व्हाट्सएप बनाना शुरू कर दिया है।
लकी मिश्रा कहती है – कुत्तों को उनके क्षेत्रीय क्षेत्र से भगाना गैरकानूनी है। एडब्ल्यूबीआई दिशानिर्देशों के अनुसार कोई भी संगठन स्वयं या सुरक्षा गार्ड जैसे अपने द्वारा नियोजित किसी व्यक्ति के माध्यम से ऐसा नहीं कर सकता है। इसके अलावा, भारत सरकार ने आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए एबीसी कार्यक्रम शुरू किया है ताकि उनकी संख्या में वृद्धि न हो। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि कुत्ते दूसरों को तब तक नुकसान नहीं पहुंचाते जब तक कि उन्हें उकसाया न जाए या जब उन्हें पता हो कि उनकी जान खतरे में है। कुत्ते उस प्रादेशिक स्थान के रक्षक बन जाते हैं जहाँ उनका जन्म और पालन-पोषण हुआ है। कुत्ते इंसान के सबसे अच्छे दोस्त हैं और हमेशा रहेंगे।

Mom & Dad ( GOD OF UNIVERS) मोम एंड डैड – गॉड ऑफ़ यनिवर्स
लकी मिश्रा एक ३० वर्षीय सामाजिक महिला है , जिनके भीतर मानवता , के साथ वह अति सवेदनशील दिल की मालकिन है। २५ वर्ष पहले उनके साथ एक घटना हुई जिस वजह से आज वह अपने छोटे से घर को ही कुत्तों के लिए घर बना दिया है।लकी मिश्रा पूरी तरह से शाकाहारी है। जब से उनके मन में जीवदया की भावना आई है वह शाकाहारी बन गई है।
वो कहती है मुझे इन बच्चो की सेवा की प्रेरणा ईश्वर की देन है – दीपावली का वह दिन था जब एक फीमेल डॉग ने अपने बच्चों की जन्म दिया था , दीपावली के दिन जोरदार फटाको की वजह से मदर डॉग डर के मारे जन्म देने के बाद भाग गई। , उस समय मैं इन डॉग्स को ले कर बहुत अनजान थी , मदर डॉग के भाग जाने के कारण उन जन्में बच्चो की हालत बहुत खराब हो रही थी , उनकी आंख तक नहीं खुली थी , वह चिल्ला रहे थे , भूख के मारे तड़प रहे थे। कोई भी देखने वाला नहीं था , मुझे बड़ा दुःख हुआ , मैं बहुत रोने लगी , और न जाने कहा से मेरे भीतर उन मासूम बच्चो को बचाने का ख्याल आ गया वही वह दिन था जब मेरे भीतर इन बेज़ुबानों के लिए काम करने की प्रेरणा आई। मैं भाग कर गई और निपल ले कर आई मुझे कुछ पता नहीं था , बॉटल में सेरेलक दाल कर उन मासूम बच्चो को एक माँ जैसे अपने बच्चे की फीडिंग करवाती है वैसे ही मैंने किया और उन बच्चो को बचाया। कुछ वह ९ बच्चे थे।
Mom & Dad ( GOD OF UNIVERS) मोम एंड डैड – गॉड ऑफ़ यनिवर्स
जब उनसे पूछा गया तो लकी मिश्रा ने बताया कि ” Mom & Dad ( GOD OF UNIVERS) मोम एंड डैड – गॉड ऑफ़ यनिवर्स ” यह मेरे लिए आने वाले समय में बेज़ुबानों की सेवा करने के लिए एक बड़ा कदम है , मेरे पिता जी , माता जी मेरे लिए भगवान् है।
घर को सेल्टर होम बना दिया है।
लकी मिश्रा का घर स्ट्रीट डॉग्स के लिए घर बन गया है , लकी ने बताया कि आज मैं १५ बिल्लियों , बाहर ३० डॉग्स , और उतने अडॉप्टेड डॉग्स है। जिसमे मेरे पति और मेरी बहन मेरा साथ देते है। मैंने सभी डॉग्स का बैसिनेशन करवा रखा है। सभी की देख भाल मेडिकल पैरामीटर के अनुसार हम करते है।
लकी मिश्रा ब्रीड डॉग्स को भी संभालती है जो लोग अपने पालतू कुत्तों को छोड़ देते है उन्हें भी हम रेस्क्यू कर के अपने घर लाते है। अब तक १०० से भी ज्यादा कुत्तो का रेस्क्यू मैंने किया है। और सभी कुत्तों का नशबंदी करवा रखा है।
लकी मिश्रा ने बताया इन बेज़ुबान जानवरों के पीछे का सारा खर्ज हम खुद उठाते है। शुरुआत में बड़ी परेशानी आई लोगो से चंदा भी माँगा लेकिन लोगो की बेरुखी देख कर यह निर्णय लिया कि हम खुद जैसे – तैसे कर के इन बेज़ुबानों की सेवा करुँगी।
बेज़ुबानों की सेवा प्रभु की सेवा मानती हूँ। लकी मिश्रा आगे बड़े भारी मन से कहती है कि – ” जैन धर्म अहिंसा परमो धर्मः के सिद्धांत पर अडिग है। हमारा धर्म करुणा परोपकार और अनुकंपा की प्रेरणाओं से भरा धर्म है। हमारे इतिहास के जगमगाते पृष्ठो में भगवान शांतिनाथ, भगवान अरिष्टनेमिनाथ एवं करुणा सिंधु भगवान पार्श्वनाथ एवं अनेक श्रावकों के ऐसे जीव दया प्रेम का उल्लेख है जिन पर हमारी आस्था और श्रद्धा टिकी हुई है। जीव दया की महत्वपूर्ण योजना को अपना महत्वपूर्ण सेवा प्ररकल्प बनाया है। जो आज अनेकों मूक प्राणियों के लिए आशा का संदेश बन गया है। मैं अपने भारतीय परम्पराओं को संस्कृति को मानने वाली हूँ।
ऋषि मुनियों की वाणी को अपने जीवन का मूल मन्त्र मानते हुए मैं अपने बेज़ुबानों की सेवा कर रही हूँ और साड़ी जिंदगी करती रहूँगी , मैं मेरे पिता जी , पति और अपने परिवार के सभी लोगो का आभार मानती हूँ जो लोग मुझे सहयोग करते है , और कभी भी हारने नहीं देते है। बेज़ुबानों की सेवा ही मेरी जिंदगी है।









