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बास्केटबॉल के खिलाड़ियों को बुलंदी पर ले जाएगा आईएनबीएल

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खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन के लिए पहुंचे फिल्म अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कहा कि मुझे बास्केटबॉल पसंद है। दिल्ली में मैंने खूब छलांग लगा लगाकर बास्केटबॉल खेला और मेरी पहली फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ में भी खेलने का अवसर मिला।
मेरी शुभकामनाएं सभी खिलाड़ियों और आयोजकों के साथ है। उन्हें देखकर और भी प्रतिभाएं सामने आएंगे।

INBL राष्ट्रीय लीग के लिए 50 लाख रुपये का इनामी पूल, BFI की प्रथम राष्ट्रीय लीग के लिए टीम के प्रतीक लोगो और जर्सियों का अनावरण

मुंबई। भारतीय बास्केटबॉल की नई ऊंचाइयों पर पहुँचने की नई प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। बेंगलुरू, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, कोच्चि और मुंबई का प्रतिनिधित्व करने वाली छह शहर-आधारित टीमें बीएफआई की पहली नेशनल लीग, INBL सीजन 2022 में तीन प्रारंभिक राउंड में एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी होंगी। 16 से 20 अक्टूबर तक पहला राउंड कोच्चि में और छह दिन बाद दूसरा राउंड 26 से 30 अक्टूबर तक जयपुर में खेला जाएगा। तीसरा राउंड 7 से 11 दिसंबर के बीच पुणे में होगा। प्ले ऑफ 11-15 जनवरी के बीच बेंगलुरु में खेला जाएगा। प्रत्येक राउंड 5 दिनों का होगा जिसमें 6 टीमें एक राउंड रॉबिन में शेष सभी टीमों के खिलाफ खेलेंगी। तीन राउंड में स्टैंडिंग अंतिम रैंकिंग में जमा हो जाएगी जो प्लेऑफ के लिए सीडिंग का आधार बनेगी। ये टीमें बेंगलुरु किंग्स, चेन्नई हीट, चंडीगढ़ वॉरियर्स, दिल्ली ड्रिब्लर्स, कोच्चि टाइगर्स और मुंबई टाइटन्स के नाम से जानी जाएंगी। खिलाड़ियों को टीमों के आस-पास के कैचमेंट क्षेत्रों से टीमों में शामिल किया गया है। बास्केटबॉल खिलाड़ी अरविंद अरुमुगम (बेंगलुरु किंग्स), एम. अरविंद कुमार (चेन्नई हीट), अरविंदर सिंह कहलों (चंडीगढ़ वॉरियर्स), दिग्विजय सिंह (दिल्ली ड्रिब्लर्स), सेजिन मैथ्यू (कोच्चि टाइगर्स) और सिद्धांत शिंदे (मुंबई टाइटंस) ने लोगो के अनावरण में टीमों का प्रतिनिधित्व किया।
हेडस्टार्ट एरिना इंडिया (एचएआई) के चेयरमैन रूपिंदर बराड़ ने कहा कि इस उल्लेखनीय पहल के लिए बीएफआई के साथ काम करते हुए हमें खुशी है। यह भारत में शीर्ष प्रतिभाओं के लिए ज़बरदस्त टक्कर देने वाले विपक्ष के खिलाफ अपनी क्षमता को प्रदर्शित करने का एक मंच है। इस साल की शुरुआत में अत्यधिक सफल आईएनबीएल 3×3 सीजन 1, जिसकी 20 शहरों में आयोजित प्रतियोगिताओं में 9,000 से अधिक खिलाड़ी और 2500 टीमें देश भर के शामिल हुई थीं, के बाद यह हमारी दूसरी पहल है जिसे हम प्रोमोट कर रहे हैं। हमें ऑन रिकॉर्ड यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि INBL 3×3 सीज़न 1 राष्ट्रीय फ़ाइनल के चैंपियन-लुधियाना_INBL इस महीने की शुरुआत में सेबू में FIBA 3×3 वर्ल्ड टूर इवेंट में भाग लेने वाला पहला अखिल भारतीय रोस्टर बन गया है। हमें उम्मीद है कि हम सभी स्तरों पर खेल को विकसित करने में अपना प्रयास निरंतर करते रहेंगे और अंतत: भारतीय बास्केटबॉल को उस स्तर तक ले जाएंगे जिसका कि वह हकदार है।
INBL के सह-संस्थापक दुष्यंत खन्ना के अनुसार, “यह भारत के लिए बास्केटबॉल के लिए एक नया युग है। और हम इसका हिस्सा बनने और इसे होने के लिए प्रेरित करने के लिए बहुत उत्साहित हैं।
इस अवसर पर आईएनबीएल के सह-संस्थापक सरबजोत सिंह ढिल्लन मौजूद थे।
डॉ. के गोविन्दराज (एमएलसी, बीएफआई अध्यक्ष) ने कहा कि आईएनबीएल सिर्फ खेलों का एक लीग नहीं है। यह सही है कि भारत में बास्केटबॉल के लाखों प्रशंसकों ने एक नेशनल लीग का सपना देखा है। पर हमारा उद्देश्य केवल एक उच्च गुणवत्ता की बास्केटबॉल लीग आयोजित करना ही नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर इसके विकास के लिए एक मजबूत और टिकाऊ प्रक्रिया का आधार तैयार करने के साथ ही खेल के हर पहलू को शामिल करना भी है। हमने बीएफआई कार्यकारी परिषद के दृष्टिकोण के अनुसार योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए हेडस्टार्ट एरेना इंडिया को यह ज़िम्मेदारी सौंपा है।
बीएफआई के महासचिव चंदर मुखी शर्मा ने कहा कि इसे सीधे और सरल शब्दों में कहें, तो राष्ट्रीय टीमों की सफलता देश में किसी भी खेल की सफलता का असली संकेत है। एक उच्च गुणवत्ता वाली लीग जैसी प्रतियोगिता, जिसकी संरचना बहुत मजबूत हैं, निश्चित रूप से इस प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है। लेकिन यह यहीं तक सीमित नहीं है।
आईएनबीएल की अवधारणा है कि यह हर दूसरे सप्ताह के अंत में हजारों खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी खेल प्रदान करे। चाहे 3×3 प्रारूप हो, जहां हम मानते हैं कि हमारे पास 2024 में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का एक बहुत सुनहरा अवसर है या नियमित प्रारूप कि जैसी स्थिति है, उसमें हमें 2027 एफआईबीए बास्केटबॉल विश्व कप और 2030 एफआईबीए महिला बास्केटबॉल कप के लिए क्वालीफाई करने का लक्ष्य रखना चाहिए। और हम आईएनबीएल के माध्यम से ठीक यही हासिल करने पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं।
बेंगलुरू किंग्स के प्रमुख खिलाड़ी अरविंद अरुमुगम ने कहा कि न केवल यह हमें अपने इलाके का प्रतिनिधित्व करने का एक शानदार अवसर दे रहा है, बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद करने के लिए आईएनबीएल हमें महान चीजों से जुड़ने का भी अवसर प्रदान कर रहा है। लुधियाना आईएनबीएल के अरविंदर सिंह, जो आईएनबीएल 3×3 सीज़न 1 नेशनल फ़ाइनल के चैंपियन और सेबू में एफसीबीए 3×3 वर्ल्ड टूर इवेंट के लिए यात्रा करने वाली टीम के एक सदस्य हैं, उन्होंने कहा कि भले ही हम पेशेवर नहीं हैं पर खिलाड़ियों की तरह व्यवहार किया जाना कितना अच्छा लगता है। पुरस्कार राशि अर्जित करना और अपने साथियों के बीच पहचान पाने का अवसर मिलना भी बहुत ही शानदार अनुभव है।
कोची टीम के कैप्टन सेजिन मैथ्यू ने कहा कि मैं आईएनबीएल में खेलने के लिए वास्तव में उत्साहित हूं। यह न केवल मेरे शहर का प्रतिनिधित्व करने का, बल्कि इस नए प्रारूप में देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का भी एक शानदार अवसर है।

वित्त मंत्री ने ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट को किया संबोधित

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वाशिंगटन, प्रेट्र: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि आत्मनिर्भर भारत न तो ‘पृथकतावाद’ है और न ही ‘संरक्षणवाद’, बल्कि यह इस तथ्य की स्वीकार्यता है कि भारत को जीडीपी में अपनी विनिर्माण हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए। सीतारमण ने यहां प्रतिष्ठित ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में व्यापक तौर पर औद्योगिकीकरण नहीं हुआ क्योंकि इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी की कमी थी।

अलगाववाद या संरक्षणवाद के रूप में गलत समझा
सीतारमण ने मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भर भारत परियोजना के संदर्भ में कहा कि हम पिछले आठ साल से इसी कमी को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत को अलगाववाद या संरक्षणवाद के रूप में गलत समझा जाता है। यह इस तथ्य की मान्यता है कि भारत को सकल घरेलू उत्पाद का अपना विनिर्माण हिस्सा बढ़ाना चाहिए क्योंकि यह कुशल और अर्धकुशल दोनों के लिए रोजगार पैदा करता है।

 

उन्होंने कहा कि सड़क और हाईवे का निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। बंदरगाहों और रेल नेटवर्क को मजबूत किया गया है। सरकार के पूंजीगत व्यय में वृद्धि का उद्देश्य निजी क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण क्षमता बनाने के लिए बुनियादी ढांचा मंच प्रदान करना था। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर सीतारमण ने कहा कि, वैश्विक विकास और व्यापार परस्पर जुड़े हुए हैं। व्यापार के लिए नई विश्व व्यवस्था में विकास का समर्थन करने के लिए, हमें अनिवार्य रूप से सीमाओं के पार चलने के लिए माल और सेवा आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता है। सीतारमण ने कहा कि प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना स्थानीय स्तर पर वैश्विक क्षमता बनाने के बारे में है। यह हमें आपूर्ति-श्रृंखला के लचीलापन का एक उपाय प्रदान करते हुए भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में प्लग करना चाहते है।
भारत की यात्रा पर आएंगे अमेरिकी ट्रेजरी सचिव

वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण के साथ मुलाकात में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट एल येलेन ने घोषणा की कि वो जी20 की बैठकों से पहले नवंबर में, अमेरिका-भारत आर्थिक और वित्तीय भागीदारी की बैठक में भाग लेने के लिए ट्रेजरी सचिव के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा करेंगे।

मुसलमानों ने बॉलीवुड को बिगाड़ा है ,बनाया नहीं

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‘राष्ट्रद्रोही मुसलमान’ जब अपने समाज में भी दुत्कारे जाने लगे हैं , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने देश में तेजी से अप्रासंगिक होती मुस्लिम तुष्टिकरण की अपनी घिसी- पिटी राजनीति को प्राणवायु देने के लिए यह हास्यास्पद बयान दिया है कि मुसलमानों ने बॉलीवुड को बनाया है। ‘बनाया है ” के बाद के शब्द उन्होने शायद नहीं बोले या मीडिया को वह शब्द स्पष्ट सुनाई नहीं दिया तो उसने उस शब्द को नहीं लिखा या दिखाया जिससे राजनीतिक क्षेत्र में उनकी वरिष्ठता के कारण यह विश्वास होता है कि वे ‘उल्लू’ अथवा ‘भ्रष्ट ‘ बोलना भूल गए या बोले तो वह स्पष्ट नहीं सुनाई दिया – यदि ऐसा है तो वे बिलकुल सही बोल रहे थे। यदि उनके कहने का अर्थ यह है कि ‘मुसलमानों के कारण बॉलीवुड का भला हुआ है’ तो उनका भ्रम है – सुझाव होगा वे अपनी अज्ञानता को दूर करें और भारतीय सिनेमा के इतिहास को पढ़ें , अतीत के चलचित्रों को देखें तभी उनको ‘ सिनेमा एवं उसके चरित्र’ का ज्ञान होगा।
सिनेमा के लिए आवश्यक तत्व है धन , लेखन , निर्माण कौशल , निर्देशन कौशल , अभिनय कौशल ,’गायन -वादन -नृत्य – रूप सज्जा’ कौशल , प्रबंधन कौशल ,दृश्यांकन ( फिल्मांकन ) कौशल , सम्पादन कौशल , वितरण कौशल और व्यवसाय कौशल।भारतीय सिनेमा के लगभग सवा सौ सालों के इतिहास में
“मुसलमानों के कुसंस्कारिय दुष्कौशल” में ही हिन्दू पिछड़े हैं बाकी उपरोक्त किसी कौशल में वे हिन्दू प्रतिभाओं के आसपास भी फटकने की हैसियत नहीं रखते। यहां हम एक -एक उदाहरण हर खंड से लेते हैं बात स्पष्ट हो जाएगी।
भारतीय सिनेद्योग में कोई मुसलमान निर्माता प्रमथेश बरुआ ,शापूरजी पलोनजी , पी एल संतोषी की जूतियों बराबर आजतक नहीं हुआ। मुस्लिम निर्माता अगर कोई है तो वह लागत कम करने पर ध्यान देता है चाहे उसके लिए कंटेंट की भद्द क्यों नहीं पीटनी पड़े। ऐसे चिंदीचोर पैसा भले बना लें ,सिनेमा नहीं बना सकते। आज भी भारतीय फिल्मोद्योग के पास एक भी मुस्लिम वित्तपोषक ( फायनेंसर ) नहीं है , जो भी हैं वे प्रोजेक्ट मैनेजर हैं -पी पी टी दिखाकर अनेक लोगों से पैसा लेकर लगानेवाले। शापूरजी पालोन जी की देखा -देखी टाटा समूह भी फिल्म निर्माण में उतरा और चर्चित एवं कथित बड़े नामवाले मुस्लिम निर्देशक -कलाकारों को अनुबंधित कर लिया। शीघ्र ही फिल्म निर्माण के नाम पर मुस्लिम निर्देशक -कलाकारों के द्वारा की जानेवाली गन्दगी देखकर टाटा समूह ने प्रोजेक्ट बीच में ही बंद कर दिया। आज कोई ‘मुस्लिम फिल्मकार’ नहीं है जो बिना बैंक ,कॉर्पोरेट तथा ‘बाहर’ से निवेश लिए फिल्म बना ले। क्या ये कुर्सी -पिपासु नेतागण कभी सोच भी सकते हैं कि कोई मुसलमान ‘राजश्री प्रोडक्शन ‘ जैसी संस्थान बनाकर सिनेमा को संजीवनी दे सकता है बिना भारतीयता से कोई समझौता किये हुए ? राजश्री प्रोडक्शन अपने जीवन का शतक लगाने जा रही है।
क्या मुसलमानों में आजतक कोई इतना बड़ा लेखक हुआ
जो पंडित मुखराम शर्मा के घुटने तक भी पहुँच सके ?
क्या मुसलमानों में आजतक कोई इतना बड़ा लेखक हुआ जो पंडित मुखराम शर्मा के घुटने तक भी पहुँच सके-रचनात्मकता ही नहीं , व्यावसायिक मूल्यों की दृष्टि से भी ? मुस्लिम फिल्मलेखकों में सबसे बड़े नाम कहलानेवाले सलीम -जावेद चाहे जितनी बकलोली कर लें उनके नाम पर एक भी फिल्म बनाने से पहले नहीं बिकी जबकि पंडित मुखराम शर्मा अगर शीर्षक भी घोषित कर देते थे तो निर्माताओं की लम्बी पंक्तियाँ उनके घर के दरवाजे पर लग जाती थी और जो निर्माता उनको अनुबंधित कर लेता था उसको फिल्म बनाने से पहले गोल्डन जुबली मनाने पर होनेवाले लाभ तक की राशि वितरकों से मिल जाते थे। यह बात एशिया के सबसे बड़े फिल्म इतिहासकार कहलानेवाले स्वर्गीय पी के नायर ने अनेक बार ‘फिल्म एप्रिसिएशन कोर्सेज’ और नियमित फिल्म प्रशिक्षण वर्गों में कही है(जिनको संदेह हो वे पुणे स्थित फिल्म स्कूल जाकर उसके आर्काइव खंगाल लें )।
शापूरजी – केदारशर्मा के आगे आज भी
बौने हैं सारे मुस्लिम निर्माता -निर्देशक
फिल्म निर्माण कौशल में शापुर जी पालोन जी से लगायत राजकुमार कोहली , यश जौहर ,गुलशन राय – राजीव राय जैसे दिग्गज लोगों की सूची है जो मुसलमान नहीं थे और उनके घुटने के बराबर कद का भी एक मुस्लिम फिल्म निर्माता नहीं दिखता – नहीं मिलता पिछले सवा सौ सालों में।यदि निर्देशन की बात करें तो चरित्र -चित्रण एवं दृश्य-संयोजन का जो कौशल धुंडिराज गोविन्द (दादा साहेब) फाल्के , प्रमथेश बरुआ , केदार शर्मा ,विजय आनंद (गोल्डी ) ,मनोज कुमार दिखा गए उनके आसपास कोई अनीस बज्मी या तारिक़ खान खड़ा होने योग्य भी है क्या ?
दिलीप कुमार स्वयं को मोतीलाल,अशोक कुमार
शम्मी कपूर से कमतर अभिनेता मानते थे
कथित ‘अभिनय सम्राट’ दिलीप कुमार उपाख्य युसूफ खान ने स्वयं मुझे बताया था कि मोतीलाल , दादामुनि ( अशोक कुमार ) के साथ काम करते हुए उनको डर लगता था। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की पत्रकार देवयानी चौबल को सपने दिखाकर दिलीप ने मीडिया से स्वयं को ‘अभिनय सम्राट’ कहलवाकर अपनी दुकान चमकाई थी और जब देवयानी को धोखा मिला तो उसने दिलीप की चमक ऐसी धोई कि उनको फ़िल्में छोड़ हाजी मस्तान के साथ मिलकर राजनीतिक पार्टी का गठन कर नरगिस के सहारे इंदिरा जी की छत्रछाया ले राजयसभा का जुगाड़ बिठाना पड़ा। जॉन पीटर ने भी इसकी चर्चा दिलीप कुमार पर लिखी अपनी किताब में की है।बाद के वर्षों में कमल हसन के साथ काम करने से दिलीप मना कर गए लेकिन ‘विधाता’ में संजीव कुमार के आगे यह कथित अभिनय -सम्राट पानी भरता नजर आया।अपने स्वर्णिम काल में भी दिलीप कुमार को शम्मी कपूर से स्क्रीन शेयर करने में झिझक ही रही।
लता -मन्ना डे -येशुदास के आगे रफी नाटे ही थे
मुस्लिम मोहम्मद रफ़ी को सर्वश्रेष्ठ गायक के रूप में उछालते रहते हैं जबकि स्वयं रफ़ी को मन्ना डे की शास्त्रीयता और किशोर कुमार की बहुमुखी गायकी से भय लगता था। उनको स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने रिकॉर्डिंग के समय ही अनेक बार सुर सुधारने को कहा था। एक बार इसी बात पर रफ़ी तुनक गए तो लता मंगेशकर ने रिकॉर्डिंग से मना कर दिया। लगभग पंद्रह सालों तक रफ़ी फिर फिल्मों से बाहर हो गए और मुस्लिम संगीतकारों की लम्बी कतार भी उनको पुनर्जीवन नहीं दे सकी। जब उन्होने राज डूंगरपुर के पैर पकड़े तो लता जी ने क्षमा करते हुए उनके साथ गाने की रिकॉर्डिंग की। रफ़ी पहले कुन्दनलाल सहगल को अपने से महान मानते थे और बाद में येसुदास को स्वयं से अच्छा गायक कहा।
सलिल -रवि -सचिनदेब -एल पी -इलैया -रवींद्र -भाष्कर की तरह
रचनात्मक विविधता नहीं दिखी मुस्लिम संगीतकारों में
वादन में देखें तो मुस्लिम संगीतकार अपने एक ही पैटर्न पर कोल्हू के बैल की तरह चलते रहे चाहे वे सरदार मालिक हों या खय्याम अथवा नौशाद। कोई भी मुस्लिम फिल्मसंगीतकार हर बार मौलिक रचना लेकर नहीं आया जबकि वसंत देसाई ,रविशंकर,सलिल चौधरी ,सचिनदेब बर्मन ,चित्रगुप्त , रवि ,नीलेश मोइर ,भास्कर चंदावरकर ,मदनमोहन ,लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ,ओ पी नय्यर ,रामलक्ष्मण ,रवींद्र जैन, इलैया राजा, शंकर महादेवन जैसे अनेक फिल्म संगीतकार हैं जिन्होने हर बार अपने संगीत में कुछ नया रचकर फ़िल्मी संगीत को समृद्ध किया है।
गोपी -गणेश -गुरुदत्त बिरजू की पंक्ति में
नहीं है कोई मुस्लिम डांस डायरेक्टर
नृत्य निर्देशन की बात करें तो गोपीकृष्ण ,गणेश हसल गुरूजी ,गुरु दत्त ,सितारा देवी ,जयन्तीमाला , रुक्मिणी देवी पद्मा सुब्रह्मनियम ,सीमा केरवानी ,बिरजू महाराज लच्छू महाराज,शाश्वती सेन , मंजरी चतुर्वेदी के आसपास भी कोई मुस्लिम नृत्य निर्देशक नहीं मिलता। आधुनिक समय की बात करें तो प्रभुदेवा के सामने सभी पानी भरते हैं।
रूप सज्जा में सत्यजीत रे, पी जी जोशी ,आर पीतांबर ,टी राजा राम ,शान्तिदेव से लगायत विक्रम गायकवाड़ तक हिन्दू ही भरे पड़े हैं और उनके मुकाबले में कोई मुस्लिम नहीं दिखता। कला निर्देशन की बात करें तो के आर शर्मा ,अशोक भगत ,श्याम रामसे ,दादू मिस्त्री ,वी जाधव ,एम एस सथ्यू ,राम येदेकर ,बी आर खेड़कर ,एल डी लिंगायत, एच जे म्हात्रे, एस पी वरळीकर ,नितिन देसाई ,समीर चंदा जैसे बड़े नाम हिन्दू ही हैं। जहां तक फिल्म और टेलीविजन धारावाहिक निर्माण के प्रबंधकों का विषय है आर के हांडा , राममिलन वर्मा ,माणिक गुप्ता , वी के माथुर , गंगाधर राम ,भूषण वर्मा , ज्ञान सचदेव ,वेद गांधी , यश जौहर ,बंसीलाल ,सुरेंद्र श्रीवास्तव ,इंद्रजीत चड्डा ने बड़ी लकीरें खींची हैं और उनके आगे दूर- दूर तक कोई मुस्लिम प्रोडक्शन मैनेजर नहीं दिखता।
आरडी -सुब्रत -केके -बीर -सुमेर-प्रिय सेठ सा
एक भी कैमरामैन मुस्लिम मजहब का नहीं .
दृश्यांकन ( सिनेमैटोग्राफी ) में आर डी माथुर , सुब्रत मित्रा , के के महाजन ,पद्मश्री अपूर्वकिशोर बीर ,सुमेर वर्मा ,प्रिय सेठ ने फिल्मिंग की जिन ऊंचाइयों को छुआ और गहराइयों को नापा उसकी बराबरी छोड़िये , उस विधा में कदम रखकर खड़ा रहने की क्षमता वाला एक भी मुसलमान भारतीय सिनेमैटोग्राफर का नाम गिना दीजिये शरद पवार जी – आपका लोहा मान जाऊंगा। यही बात फिल्म -सम्पादन के लिए कहूंगा। फिल्म सम्पादन में धर्मवीर ,वाय जी चौहान, हृषिकेश मुखर्जी , बाबूभाई ठक्कर , विजय आनंद , माधव एस शिंदे , रेणु सलूजा ,भारती , आरती बजाज ,बल्लू सलूजा , कोटागिरी व्यंकटेश्वर राव ,ए श्रीकर प्रसाद की बराबरी या इनसे उन्नीस भी कोई मुस्लिम फिल्म सम्पादक बताइये। फिल्म वितरण और व्यवसाय कौशल में एक भी नाम मुसलमान मजहब का नहीं है। इनमें जोखिम उठाने की कुव्बत नहीं होती इसलिए इस कौम का कोई आदमी फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर और एक्जिवीटर नहीं है , हाँ फिल्म दलाली के क्षेत्र में ये बिजबिजाते मिलते हैं।
मुसलमानों के बढ़ते प्रभुत्व ने सिनेमा को १९६५ और उसके बाद के दशकों में रसातल की और धकेला है जिसका परिणाम चोर -डाकुओं -गुंडों और माफिया गिरोहों का महिमामंडन से लेकर देशद्रोह को कुतर्कों से सिद्ध करने के रूप में सामने आया तो समानांतर सिनेमा के नाम पर नक्सलवाद और सामाजिक कुरीतियों के ग्लैमराइजेशन ,कन्वर्जन ,हिन्दूद्रोह ,सामाजिक -पारिवारिक विखंडन ,तनाव ,परेशानियां ,लम्पटई को बढ़ावा मिला। बुराइयों की चर्चा से उसको विस्तार मिलता है इसलिए सिर्फ संकेत किया है। अगर आपके ज्ञानचक्षु नहीं खुले तो विस्तार से तीन -चार लेखों में १९६५ से २०२२ तक मुस्लिमों की गंदगियों का सिनेमाई प्रभाव सार्वजनिक करूँगा।

UIDAI का दस साल पहले आधार बनवाने वालों से आग्रह, कहा- डेटाबेस में अपनी जानकारी कराएं अपडेट

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नई दिल्ली, प्रेट्र: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइई) ने दस साल पहले अपना आधार बनवाने वाले लोगों से इसे अपडेट कराने का आग्रह किया है। यूआइडीएआइई ने कहा है कि ऐसे व्यक्ति जिन्होंने अपना आधार दस साल पहले बनवाया था और उसके बाद कभी अपडेट नहीं कराया है, ऐसे आधार नंबर धारकों से दस्तावेज अपडेट कराने का आग्रह किया जाता है।

अपडेट के लिए देय होगा निर्धारित शुल्क

प्राधिकरण ने कहा है कि इसके लिए आधार धारकों को दस्तावेज अपडेट करने की सुविधा निर्धारित शुल्क के साथ प्रदान की गई है। आधार धारक व्यक्तिगत पहचान प्रमाण और पते के प्रमाण से जुड़े दस्तावेजों को आधार डाटा में अपडेट कर सकता है। यह सुविधा आनलाइन भी प्राप्त की जा सकती है। गौरतलब है कि यूआइडीएआइई एक संवैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना आधार कानून, 2016 के तहत 12 जुलाई, 2016 को भारत सरकार द्वारा की गई थी।

आधार कार्ड डाटा कराएं अपडेट

गौरतलब है कि आधार प्रोग्राम आंख की पुतली, फिंगरप्रिंट और तस्वीरों के माध्यम से पहचान स्थापित करता है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि, पिछले 10 वर्षों के दौरान आधार नंबर लोगों की पहचान के स्रोत के रूप में उभरा है। आधार संख्या का इस्तेमाल विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं में किया जाता है। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे आधार डाटा को अपडेट करें ताकि पहचान में किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।

कैलाश खेर की महाआरती ‘जय श्री महाकाल’ का लोकार्पण प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी करेंगे

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विश्वविख्यात सिंगर कैलाश खेर भारतीय शास्त्रीय संगीत की शक्ति और इसकी सदियों पुरानी विरासत के प्रचार व प्रसार हेतु आज के युवाओं के लिए एक आध्यात्मिक भेंट महाआरती ‘जय श्री महाकाल’ लाये हैं। यह आध्यात्मिक भेंट है जो धीरे-धीरे श्रोताओं को अपनी जड़ों की ओर वापस जाने, अपने परिवारों और सुंदर परंपराओं के साथ फिर से जुड़ने की याद दिलाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे वास्तव में कौन हैं।  ‘जय श्री महाकाल’, आध्यात्मिक गीत रोमांचित करेगा, श्रोताओं को प्रेरित करेगा और भारतीय संस्कृति के बारे में अधिक जानने के लिए जिज्ञासा को प्रज्वलित करेगा। यह श्रोताओं के दिलों और दिमागों में ज्ञान और सच्चाई के दीपक जलाएगा ताकि वे अपने भीतर की अंधकार की शक्तियों को दूर कर सकें और अपनी सहज प्रतिभा और अच्छाई को चमकने दें। कैलाश खेर माननीय प्रधान मंत्री के संयुक्त प्रयासों और मध्य प्रदेश उज्जैन स्मार्ट सिटी, मध्य प्रदेश संस्कृति / पर्यटन विभाग, उज्जैन महाकाल मंदिर ट्रस्ट उज्जैन के प्रयास को संगीतमय समर्थन देते हैं, जो शहर को फिर से जीवंत करने के लिए किया जा रहा है, जो आगे महाकाल शहर की पौराणिक कथाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

क्षिप्रा नदी के तट पर बसा उज्जैन शहर और देवताओं के वास को ‘जय श्री महाकाल’ में गीत व संगीत के जरिये खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया है।

कैलाश खेर की नवीनतम प्रस्तुति “जय श्री महाकाल” के ऑडियो और वीडियो का लोकार्पण प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा पूरे देश वासियों के लिए 11 अक्टूबर को किया जाएगा।

‘जय श्री महाकाल’ की विस्तृत चर्चा करते हुए कैलाश खेर कहते हैं “भारत की आध्यात्मिक संपदा और पौराणिक कथाएं बहुत समृद्ध और विशेष हैं। इस युग में, “जय श्री महाकाल, हमारी संस्कृति का जिक्र करना मनोरंजन के साथ-साथ आज के जीवन में एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। भारत में बारह ज्योतिर्लिंग हैं, लेकिन किसी को समर्पित स्तुति का कोई गीत नहीं है। मैं बचपन से ही शिव का उपासक हूं, भोलेनाथ ने ही मुझे अध्यात्म के माध्यम से संगीत में भेजा है। महाकाल पर लिखना, गाना, संगीत बनाना, जप करना किसी तपस्या से कम नहीं है, क्योंकि महादेव बचपन से ही मेरे खून में बहते हैं, जब भी मैं उनकी महिमा को गाना चाहता हूँ तो मैं बस अपने दिल में झांकता हूं, अर्थात ध्यानी होकर, समाधि में रहकर .. और सब कुछ बहता है। शिव स्वयं ध्वनि की तरह बहने लगते हैं”

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

लंपी पीडित गौ माता की रक्षा के लिए प्रार्थना सभा हुई, गौ माता की सेवा का लिया संकल्प

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अलवर. गौ सेवा और गौ रक्षा के संकल्प के साथ राजस्थान पत्रिका की पहल पर सोमवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के तिजारा फाटक स्थित सभागार में आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर सामूहिक रूप से प्रार्थना सभा आयोजित कर लंपी पीडित गौ माता के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई। इसके साथ ही लंपी से पीडित गौ माता को गोद लेने और उसकी हर संभव सेवा करने का संकल्प भी लिया गया। इस अवसर पर जिला स्तरीय लंपी वार्ड के इंचार्ज और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ विमल कुमार ने कहा कि लंपी बीमारी का सामना करने के लिए जन सहभागिता बढ़ाई जाए। गऊओं के प्रति हम संवेदनशील बने और जहां कहीं भी गाय को खराब स्थिति में देखें तो उसको उचित स्थान पर पहुंचा कर उसके इलाज और देखभाल का प्रबंध करें।

एक श्रेष्ठ सतयुगी संसार गऊ के बिना साकार नहीं होगाब्रह्माकुमारी केंद्र संचालिका राजयोगिनी बी.के. ममता दीदी ने गौ माता की आत्मा की शांति और सुखद स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना और मंगल कामना करवाई। उन्होंने भारतीय सनातन संस्कृति में गाय के योगदान पर भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि किसी मनुष्य के जीवन में जो महत्व उसकी मां का होता है, वह महत्व गौ का होता है। गऊओं की प्रेम भाव से की गई सेवा का फल अवश्य प्राप्त होता है। घर में जो रोटी बनती है उसमें पहली रोटी गाय के लिए हमेशा निकाली जाए। अपने तन, मन, धन, समय और शक्ति गऊओं के प्रति यदि हम देंगे तो गौ माता की रक्षा हो सकती हैं। एक श्रेष्ठ सतयुगी संसार गऊ के बिना साकार नहीं हो सकता। गाय संकट में है तो सारी जीव सृष्टि संकट में है। मन के शुभ संकल्प से एक मनसा यज्ञ करें और गऊओं के संवर्धन के लिए सभी योगदान दें। इस अवसर पर सार्वजनिक गौशाला समिति रेलवे स्टेशन के प्रतिनिधि की ओर से गौ माता को गोद लेने के लिए आवेदन भी दिए गए।

प्रार्थना में ये हुए शामिल

 

इस अवसर पर वार्ड नंबर 56 के पार्षद हेतराम यादव, गायत्री परिवार के वरिष्ठ सदस्य सतीश सारस्वत, राजकीय विधि महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य बाबू लाल यादव , नगर परिषद में नेता प्रतिपक्ष सतीश यादव, भाजपा जिला मीडिया प्रभारी जितेंद्र गोयल, सरस्वती सेवा संस्थान से संयोजक, कुश कौशिक, पहल सेवा संस्थान के संयोजक मनोज चौहान, भाजयुमो महामंत्री चतर सिंह गुर्जर, भाजपा शहर अध्यक्ष मनोज शर्मा,भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रभारी, बी.के. अनुभा, बी.के. सरिता , परमार्थ दिव्यांग संस्थान के सचिव प्रताप सिंह व सदस्य इंद्रजीत सिंह व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

Cow Economy – गौ-मूत्र से निर्मित उत्पाद से कृषकों एवं स्वसहायता समूहों की आय में हो रही वृद्धि

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बेमेतरा / रायपुर , 11 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ शासन की फ्लैगशिप योजना नरवा, गरुवा, घुरुवा, बाड़ी योजनांतर्गत गौ-मूत्र क्रय एवं इससे निर्मित उत्पाद से कृषकों एवं स्वसहायता समूहों की आय में वृद्धि हो रही है।

बेमेतरा जिला के गौठान मौहाभाठा एवं गौठान ओडिया विकासखण्ड साजा में 20 जुलाई 2022 को गौ-मूत्र क्रय प्रारंभ किया गया है। इस योजना में स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा गांव के कृषकों से गौ-मूत्र क्रय किया जा रहा है। गौ-मूत्र उत्पाद के विपणन का कार्य कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की सहायता से की जा रही है। क्रयित गौ-मूत्र से स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा जीवमृत व कीटनाशक निर्माण कर विक्रय से हजारों रुपये की आमदनी अर्जित कर रही है, जो कि जिलें के लिये एक नयी एवं प्रेरणादायक पहल है। उक्त जानकारी डॉ. राजेन्द्र भगत, उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें जिला बेमेतरा द्वारा दी गई।

ओड़िया में कुल 1071 लीलटर गौ-मूत्र क्रय किया गया एवं 525 लीलटर कीटनाशक एवं 400 लीलटर जीवमृत उत्पाद बनाया गया है, इसी प्रकार गौठान मौहाभाठा में 576 लीलटर गौ-मूत्र क्रय किया गया जिससे 288 लीलटर कीटनाशक तैयार किया गया है। गौ-मूत्र उत्पाद जीवमृत को पंचायत विभाग द्वारा वृक्षारोपण कार्यक्रम के लिए क्रय किया गया एवं   कीटनाशक को चारागाह विकास कार्यक्रम के लिए स्व-सहायता समूह द्वारा क्रय किया गया तथा कृषि विभाग द्वारा कीटनाशक क्रय किया जा रहा है। वर्तमान में कुल 813 लीलटर ब्रम्हास्त्र (कीटनाशक) एवं 400 लीलटर जीवमृत (वृद्धिवर्धक) गौ-मूत्र उत्पाद निर्मित किया गया है। जिसका विक्रय स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा 50 रुपये प्रति लीटर की दर से कीटनाशक को व 40 रुपये प्रति लीटर की दर से किया जा रहा है जिससे अतिरिक्त आमदनी अर्जित हो रही है।

एशिया टुडे रिसर्च और मीडिया एक्नॉलेज्ड द्वारा प्राईड आफ नेशन अवॉर्ड 2022 के विजेताओं का सम्मान

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पद्मभूषण गायक उदित नारायण, अभिनेत्री व राजनीतिज्ञ जयाप्रदा, अभिनेता कबीर बेदी और अन्य द प्राईड आफ नेशन अवॉर्ड 2022 से हुए सम्मानित

मुम्बई। महानगर के नरीमन पॉइंट में स्थित होटल ट्रिडेंट में 7 अक्टूबर के दिन एशिया टूडे रिसर्च एंड मीडिया ने एक अनूठे अवार्ड ‘प्राइड ऑफ नेशन 2022’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उन सभी व्यक्तियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने जीवन में देश सहित विश्व में किसी भी जगह देश को गौरवान्वित करने वाले कार्य किये हों। इस कार्यक्रम में अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले, राज्य और देशहित में विशेष योगदान देने वाले चुनिंदा व्यक्ति और संगठन को सम्मानित किया गया। ‘प्राइड ऑफ नेशन अवार्ड्स 2022’ उन व्यक्ति विशेष या संगठनों को सम्मानित करने का एक प्रयास है जिन्होंने अपने स्वयं के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और देश को गौरवान्वित किया।
‘प्राइड ऑफ नेशन अवार्ड्स’ की स्थापना का अनूठा उद्देश्य ऐसे लोगों को प्रेरित करना या उनका समर्थन करना है जिन्होंने अपने संबंधित क्षेत्रों में असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
‘प्राइड ऑफ नेशन अवार्ड्स’ एकमात्र ऐसा आयोजन है जहाँ हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त किए भारतीयों को सम्मानित किया जाता है। जैसे कि कला, मनोरंजन, सामाजिक कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, व्यवसाय, राजनीति, संगीत, खेल, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण आदि क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विशेष व्यक्ति और संगठन को आगे लाया जाता है और सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन कर ऐसे ही आगे प्रेरक कार्य करते रहने के लिए प्रेरित करता है।
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोशियारी, रामदास अठावले (सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री, भारत सरकार) और राहुल नार्वेकर (महाराष्ट्र विधान परिषद के प्रवक्ता) उपस्थित रहे।
इस पुरस्कार वितरण समारोह में राज्यपाल ने संबोधन दिया कि यह कार्यक्रम है, किसी व्यक्ति या संगठन की कड़ी मेहनत को प्रस्तुत करने के लिए यह सबसे अच्छा स्थान है। एशिया टुडे ने हममें से प्रत्येक को एक अवसर प्रदान किया है, ताकि सभी प्रतिभागी विवादास्पद दुनिया से दूर अपने प्रयासों के लिए पुरस्कारों का आनंद प्राप्त कर सकें।
एशिया टुडे रिसर्च एंड मीडिया के सीईओ प्रदीप चौधरी हैं। यह एक गतिशील विश्वव्यापी मीडिया और विश्लेषणात्मक संगठन है जो अनुसंधान, विश्लेषण और रेटिंग सेवाएं प्रदान करता है। इस कंपनी के द्वारा अत्याधुनिक बाजार अनुसंधान, मूल्यांकन और विश्लेषण की सुविधा देने की पेशकश सभी प्रकार के उद्यमों के लिए उपलब्ध है।
पुरस्कृत कुछ व्यक्तियों और संगठनों की सूची में उदित नारायण, जयाप्रदा, कबीर बेदी, अनिल कुमार (अंकिता ओवरसीज), नारायण गोयनका (ऑरसन रेजिन एंड कोटिंग्स प्राइवेट लिमिटेड), डॉ संदीप भालसिंग (जीआई-वन हॉस्पिटल), दीप्तिमान चटर्जी (भारतीय फैशन), शैलेश डालमिया (एन. एल. डालमिया हाई स्कूल), डॉ. आर्चिस नेर्लिकर (नेर्लिकर अस्पताल), चंद्रशेखर पुचा (इनोकॉर्प उरेथेनेस), वी.के. कृष्णकुमार (रोलिंग इंडस्ट्रीज), डॉ. अभिजीत पी. ​​वाडेकर (पी.ई.एस. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग), समीर दत्तानी (सनातन टेक्सटाइल्स लिमिटेड), डॉ अरविंद पंडित खरात (पैरामेडिकल साइंस ऑफ इंडिया परिषद, मेदिनोवा प्रशिक्षण संस्थान, पैरामेडिकल काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र), डॉ समीर श्याम कुलकर्णी (कुलकर्णी मेडिकल फाउंडेशन पिरामिड अस्पताल), डॉ जीवन भावलाल राजपूत (जेजे प्लस अस्पताल और न्यूरॉन इंटरनेशनल), डॉ. बी. लोंढे (अमृतवाहिनी प्रबंधन और व्यवसाय प्रशासन संस्थान), श्रीमती स्वाति बिरमाने (विद्या निकेतन हाई स्कूल), डॉ रवींद्र परांकर (आर वी पारांकर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी), दिलीप शिंदे (विशाल रबर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड), बापूराव राठौड़ (राजीव गांधी पॉलिटेक्निक उदगीर), अभिजीत भगवानराव मोकाशी (दादासाहेब मोकाशी संस्थान), द्विपायन पटनायक (स्टार्क रिज पेपर प्राइवेट लिमिटेड), शरीफ ए थिम, डॉ एन के राणा (थीम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग), डॉ अनिरुद्ध भोसले (सलाहकार लीवर प्रत्यारोपण और एचपीबी सर्जन), डॉ राजेश पी धारिया (आर्थोपेडिक सर्जन) का नाम प्रमुख है।

Shiv Sena Symbol Freeze: अपने खेमे के नेताओं के साथ शिंदे ने की बैठक, पार्टी के चुनाव चिन्ह पर हुई चर्चा

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मुंबई,  अब शिवसेना के दोनों धड़ों के लिए चुनावी नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने का क्या मतलब है? क्या वे लड़ाई हार गए हैं या लड़ाई अभी शुरू हुई है। “नए गुट के पास बहुत कुछ दांव पर नहीं है। एक प्रतीक फ्रीज का मतलब यह नहीं है कि उद्धव ठाकरे ने सब कुछ खो दिया है। भाजपा और शिंदे गुट यह भ्रम पैदा कर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अलग-अलग प्रतीकों के साथ दो लोकसभा चुनाव जीते थे। उन्होंने नए चुनाव चिह्न के साथ 350 से अधिक सीटें जीती थीं।’

यह सोशल मीडिया की पीढ़ी है। प्रतीकों का प्रचार करना मुश्किल नहीं है। शिवसेना के मूल धड़े को बालासाहेब ठाकरे के नाम पर वोट मिलते हैं, जो लोग बालासाहेब या उद्धव को वोट देना चाहते हैं, वे चुनाव चिन्ह की परवाह किए बिना उन्हें वोट देंगे।”

इस बीच एकनाथ शिंदे ने शाम को अपने समूह के नेताओं की बैठक की। इस बैठक में पार्टी के चुनाव चिन्ह और नाम पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक शिंदे खेमे ने अपने शिवसेना गुट के चुनाव चिन्ह के लिए दो विकल्पों पर चर्चा की है। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने अपने देर शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह हमारे लिए सदमा है क्योंकि चुनाव आयोग ने खुद ही प्रतीक चिन्ह को फ्रीज कर दिया है।

जैसा कि उन्होंने प्रस्तुत किया, सुझाव है कि वे इस सब के साथ तैयार हो सकते हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि हमें धनुष और तीर मिलेगा। प्रमुख मंत्री एकनाथ शिंदे जल्द ही चुनाव चिन्ह के बारे में निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ठाकरे गुट के कारण प्रतीक जम गया क्योंकि उन्होंने पूरी प्रक्रिया में देरी की।

मुलायम सिंह आपातकाल के दौरान थे लोकतंत्र के लिए प्रमुख सैनिक -पीएम मोदी

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नई दिल्ली, । उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मुलायाम सिंह ने सोमवार सुबह 8:15 मिनट पर अंतिम सांस ली। इस दुखद खबर का जानकारी देते हुए अखिलेश यादव ने कहा ‘मेरे आदरणीय पिता जी और सबके नेता जी नहीं रहे।’ मुलायम सिंह यादव पिछले कई दिनों से दिल्ली के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के निधन पर पीएम मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया। पीएम मोदी ने मुलायम सिंह से जुड़ी कई यादें ट्विटर पर साझा की है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘मुलायम सिंह यादव जी एक विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हें एक विनम्र और जमीन से जुड़े नेता के रूप में व्यापक रूप से सराहा गया, जो लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील थे। उन्होंने लगन से लोगों की सेवा की और लोकनायक जेपी और डॉक्टर लोहिया के आदर्शों को लोकप्रिय बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने किया मजबूत काम

एक दूसरे ट्वीट में पीएम मोदी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव जी ने यूपी और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वह आपातकाल के दौरान लोकतंत्र के लिए एक प्रमुख सैनिक थे। रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने एक मजबूत भारत के लिए काम किया। उनके संसदीय हस्तक्षेप व्यावहारिक थे और राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाने पर जोर देते थे।

पीएम मोदी ने कहा कि जब हमने अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के रूप में काम किया, तब मुलायम सिंह यादव जी के साथ मेरी कई बातचीत हुई। हम दोनों की घनिष्ठता जारी रही और मैं हमेशा उनके विचारों को सुनने के लिए उत्सुक रहता था। उनका निधन मुझे पीड़ा देता है। उनके परिवार और लाखों समर्थकों के प्रति संवेदना हैं। ओम् शांति।

मुलायम सिंह का निधन बेहद पीड़ादायक: राजनाथ

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह यादव जी जमीन से जुड़े एक ऐसे नेता थे जिन्होंने कई दशकों तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख भूमिका निभाई। अपने लम्बे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने अनेक पदों पर काम किया और देश, समाज एवं प्रदेश के विकास में अपना योगदान दिया। उनका निधन बेहद पीड़ादायक है।

जमीन से जुड़े जननेता के रूप में किए जाएंगे याद: अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों व समर्थकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। साथ ही उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव जी अपने अद्वितीय राजनीतिक कौशल से दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहे। आपातकाल में उन्होंने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए बुलंद आवाज उठाई। वह सदैव एक जमीन से जुड़े जननेता के रूप में याद किए जाएंगे। उनका निधन भारतीय राजनीति के एक युग का अंत है।