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गोवर्धन पूजा पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया गौपूजन

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रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास रायपुर में स्थित गौशाला में गोवर्धन पूजा के अवसर पर गौमाता की पूजा-अर्चना की और गौ माता को खिचड़ी खिलाकर गोसेवा की परंपरा निभाई। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोवर्धन पूजा प्रकृति, गौवंश और पर्यावरण के प्रति आभार व्यक्त करने का पावन पर्व है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं दी। पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण के दौरान मुख्यमंत्री साय ने गौशाला में सेवा कर रहे गौसेवकों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। उन्होंने गौसेवा के लिए उनकी सराहना करते हुए सभी से गौवंश की रक्षा एवं संरक्षण के कार्यों में आगे आने का आग्रह किया। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने गौशाला की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। गौसेवकों ने मुख्यमंत्री को बताया कि गौशाला में गौवंश की देखरेख की सभी व्यवस्था मौजूद है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोवर्धन पूजा हमारे जीवन में प्रकृति, अन्न और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। गाय भारतीय संस्कृति की आधारशिला है, जो न केवल हमारे ग्रामीण जीवन से जुड़ी है, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था और आस्था दोनों का केंद्र भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी में गोसेवा और प्रकृति पूजन की भावना गहराई से रची-बसी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय, अन्न और धरती का सम्मान करना उस मातृशक्ति को प्रणाम करना है, जिससे हमारा जीवन जुड़ा है। जब हम इन्हें नमन करते हैं, तब हम अपनी संस्कृति की जड़ों, अपनी आत्मा की गहराइयों और समृद्धि के स्रोतों को स्पर्श करते हैं।

गोवर्धन पूजा पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गौ माता की पूजा-अर्चना

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को गोवर्धन पूजा के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास स्थित गौशाला में गौ माता की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली, समृद्धि और जन कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोवर्धन पूजा प्रकृति संरक्षण, मनुष्यों एवं जानवरों के बीच के प्रेम को दर्शाता है। यह पर्व हमें अपनी परंपराओं, संस्कृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बने रहने का भी संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने सभी से अपील की कि हम सभी मिलकर गायों की सेवा, सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रयास करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा मिला है। गौमाता सनातन संस्कृति और कृषि जीवन का अभिन्न हिस्सा है। उनकी सेवा और संरक्षण, हमारे जीवन को आगे बढ़ाता है। कई परिवारों का भरण-पोषण गाय पालन और गो-सेवा से होता है। गौ-संवर्धन धार्मिक भावनाओं से जुड़े होने के साथ ही आजीविका और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निराश्रित गोवंश के लिए गौ सदनों के निर्माण और संचालन को बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में निराश्रित पशु (जिन्हें गौशालाओं में पाला जा रहा है) उनके भरण पोषण के लिए पहले 5 रुपए प्रति दिन प्रति पशु दिया जाता था, इसे बढ़ाकर अब 80 रुपए प्रति पशु/ प्रति दिन किया गया है। निजी रूप से गौशालाओं के निर्माण में राज्य सरकार ने 60 फीसदी सब्सिडी देने का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 54 गौ सदनों का निर्माण कार्य जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे भी राज्य सरकार गौ संरक्षण के लिए कार्य करते रहेगी।

छत्तीसगढ़ – गौ-उत्पीड़न का भयावह मामला

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CG News: जांजगीर-चांपा जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। बिर्रा पुलिस स्टेशन एरिया के तालदेवरी गांव में 200 से ज्यादा गायों को एक छोटे से बाड़े में बंद कर दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नदी किनारे बने इस बाड़े में न तो पानी था और न ही चारा। कई गायें भूख और प्यास से तड़प रही थीं, जबकि कुछ के पैर रस्सियों से कसकर बंधे हुए थे, जिससे वे खून से लथपथ और सड़ रही थीं।

सबसे दिल दहला देने वाला नज़ारा था मरी हुई गायों को नदी में फेंकना। सूचना मिलने पर, गोरक्षा दल और बिर्रा पुलिस मौके पर पहुंची और तुरंत कार्रवाई की। 30 से ज्यादा घायल और बीमार गायों को मौके पर ही फर्स्ट एड दिया गया। गाँव वालों और गोरक्षा करने वालों की मदद से 200 से ज्यादा मवेशियों को बाड़े से आजाद कराया गया, जो दिवाली पर नरक से एक तरह की आजादी थी।

CG News: स्थानीय लोगों और गौरक्षकों ने इस घटना को बहुत ही अमानवीय और दिल दहला देने वाला बताया है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। पुलिस ने मौके का मुआयना करके जांच शुरू कर दी है, और इसमें शामिल लोगों से पूछताछ कर रही है।

कुएं में गिरा गौवंश गौसेवकों ने किया बचाव कार्य

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मुरैना:- थाना सरायछोला के अंतर्गत मृगपुरा पंचायत के लाला का पुरा पर खुले पड़े कुएं में गौवंश गिर गया जिसकी सूचना गौ रक्षा दल के प्रदेश महामंत्री व गौ सांसद रुद्रप्रताप सिंह राठौर को मिली तो वह अपनी टीम व रेस्क्यू का सामान लेकर मौके पर पहुंचे और देखा कि कुआं काफी गहरा व सकरा था गौवंश 80 फीट गहरे कुएं में फंसा हुआ था जिसमें गांव के रामू परमार, छोटू परमार कुएं में घुसे और गौवंश को बांधा लेकिन जब गौवंश को ऊपर खींचा तो रस्सा खुल गया फिर वही द्वारा कुएं में घुसे और गौसेवक सुदामा कुशवाह भी साथ में घुसे जिन्होंने मिलकर गौवंश को सुरक्षित बांधा और गांव वालों की मदद से व ट्रैक्टर की सहायता से गौवंश को बाहर निकाल लिया जिसका पशु चिकित्सक के द्वारा उपचार कराया।

मौके पर गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह,सुदामा कुशवाह,मोहित प्रजापति,लायक सिंह, हर्ष गौड़,दीपक परमार,हरेंद्र सिंह,हनुमान परमार, सत्यपाल परमार बसई, श्यामवीर परमार, छिंगा परमार,आनंद दुबे, शिवनाथ सिंह,अमर सिंह बघेल,निरंजन गुर्जर,दिलीप परमार,श्रीओम, हवलदार सिंह, जसरथ बघेल,पवन,मोनू जाटव,गणेशराम कुलश्रेष्ठ, रणजीत सरपंच, रामू,छोटू आदि

अपने यूट्यूब चैनल पर मोटिवेशनल वीडियो शेयर करती हैं अभिनेत्री रोमा बाली 

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टेलीविजन और फिल्मों की पावरफुल एक्ट्रेस रोमा बाली एक छोटे से ब्रेक के बाद फिर से कैमरे के सामने लौटने को तैयार हैं। लगभग 20 सालों से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकीं रोमा अब एक बार फिर दर्शकों का दिल जीतने आ रही हैं।

लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से ताल्लुक रखने वाली रोमा बाली ने अपने करियर की शुरुआत लोकप्रिय धारावाहिक ‘ओम नमः शिवाय’ से की थी। शुरुआत में उन्होंने एक फिल्म साइन की थी जो किसी कारणवश रिलीज़ नहीं हो पाई, लेकिन इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उन्होंने ‘पुनर्विवाह’, ‘साथ निभाना साथिया’, ‘कुंडली भाग्य’, ‘किट्टी पार्टी’, ‘डोली सजा के रखना’, ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ और ‘कसम तेरे प्यार की’ जैसे कई सुपरहिट सीरियल्स में अपने दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई।

फिल्मों में भी रोमा ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई – ‘लाइफ एक्सप्रेस’ और ‘जीना इसी का नाम है’ में उनका अभिनय खूब सराहा गया। वहीं नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ ‘उड़ान’ और आशा पारेख निर्देशित ‘कंगन’ में भी उन्होंने अपने टैलेंट का जलवा दिखाया।

मुंबई में रहकर लगातार एक्टिव रहने वाली रोमा इन दिनों अपने यूट्यूब चैनल “रोमाबाली एक्टर्स वर्ल्ड” के जरिए मोटिवेशनल वीडियो शेयर करती हैं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं।

रोमा कहती हैं – “ज़िंदगी किसी का इंतज़ार नहीं करती, इसलिए खुद को मोटिवेट करो और अपने सपनों के लिए आगे बढ़ो। खुद पर भरोसा रखो, क्योंकि मंज़िल तक पहुंचना आपको अकेले ही होता है।”

अपने जीवन के उतार-चढ़ावों से गुज़रकर भी रोमा ने कभी हार नहीं मानी। उनका मानना है – “इंसान को आत्मनिर्भर होना चाहिए, परिवार और काम में संतुलन ही जीवन की सच्ची कला है।”

नई पारी को लेकर बेहद एक्साइटेड रोमा कहती हैं – “मैं फिर से दर्शकों के बीच आ रही हूं, अच्छे प्रोजेक्ट्स के साथ। उम्मीद है, इस बार भी सबका प्यार और आशीर्वाद मिलेगा।”

रोमा बाली की यह वापसी सिर्फ एक कलाकार की कमबैक स्टोरी नहीं, बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो सपनों को साकार करने की हिम्मत रखते हैं।

यम द्वितीया: भगवान चित्रगुप्त का पूजा दिवस

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(अंजनी सक्सेना-विनायक फीचर्स)

भारतीय समाज में कायस्थ एक बुद्धिजीवी एवं चतुर जाति मानी जाती है। मध्यकाल में तो यह मान्यता थी कि राज-काज के संचालन में इससे कुशल एवं प्रवीण कोई अन्य जाति नहीं है। गुप्त काल से लेकर राजपूत, मुगल एवं मराठा शासकों के काल में कायस्थ न केवल महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होते थे, बल्कि राजस्व विभाग विशेषकर ‘पटवारियों’ के पदों पर कायस्थों का ही अधिकार होता था।

कायस्थ जाति अपने आपको भगवान चित्रगुप्त का वंशज मानती है। धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान चित्रगुप्त, प्रत्येक प्राणी के पाप पुण्यों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं यथा वे धर्मराज के सहायक हैं।
भगवान चित्रगुप्त एवं कायस्थों की उत्पत्ति का विवरण कई पुराणों एवं धर्मग्रंथों में मिलता है। इस विवरण के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपने मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, पेट या जंघा से वैश्य तथा पैरों से शूद्र उत्पन्न किए। उन्होंने सूर्य एवं चन्द्र आदि ग्रहों के साथ ही बिना पैर वाले जीवों से लेकर अनेक पैर वाले जीवों की रचना की।
इस सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा के शरीर (काया) से बड़ी-बड़ी भुजाओं वाले, श्याम वर्ण, कमलवत् नेत्रवान्, शंख के समान गर्दन वाले, तेजस्वी, अति बुद्धिमान, हाथ में लेखनी और दवात धारण किए हुए, अव्यक्त जन्मा चित्रगुप्त जी उत्पन्न हुए। समाधि खुलने के बाद ब्रह्मा जी ने अपने सामने उपस्थित इस पुरुष से पूछा आप कौन हैं? उस पुरुष ने कहा – मैं आपके ही शरीर से उत्पन्न हुआ हूं इसलिए आप मेरा नामकरण कीजिए तथा मेरे कर्तव्य बताईये।
ब्रह्मा जी ने यह सुनकर कहा कि तुम मेरी काया (शरीर) से उत्पन्न हुए हो इसलिए तुम्हारी संज्ञा कायस्थ है। तुम्हारी उत्पत्ति के समय मेरा मन विश्रांत स्थिति में था अर्थात् मेरा चित्त गुप्त था इसलिए तुम चित्रगुप्त कहलाओगे। तुम धर्मराज की धर्मपुरी में निवास करो और प्राणियों के धर्माधर्म पर विचार करो।
धर्म ग्रंथों के अनुसार चित्रगुप्त जी के दो विवाह हुए। एक सूर्य कन्या से तथा दूसरा नाग कन्या से। इन पत्नियों से उनके बारह पुत्र उत्पन्न हुए। इन पुत्रों के नाम पर ही कायस्थों की बारह उपजातियां हैं। भगवान चित्रगुप्त ने अपने इन पुत्रों को शास्त्रों की शिक्षा दी तथा उनके लिए कर्तव्यों का निर्धारण किया। इन कर्तव्यों के अनुसार कायस्थों को देवताओं का पूजन, पितरों का श्राद्ध तथा अभ्यागतों की सेवा करना चाहिए। चित्रगुप्त जी ने अपनी संतति को महिषासुर मर्दिनी देवी की पूजन एवं उपासना करने का भी आदेश दिया।
कायस्थ जाति में भगवान चित्रगुप्त की वर्ष में कम-से-कम दो बार पूजन होती है। इनमें से पहली पूजन दीपावली की द्वितीया को होती है तथा दूसरी होली की द्वितीया (दौज) को। यह दोनों ही तिथियां भाई दौज या यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन प्रत्येक कायस्थ के घर मे चित्रगुप्त जी एवं कलम दवात की पूजा होती है। कई स्थानों पर यह पूजन सामूहिक रूप से भी की जाती है।
पूजन के समय भगवान चित्रगुप्त की स्तुति में जो मंत्र कहे जाते हैं, उनका अर्थ है कि दवात-कलम और खल्ली धारण करने वाले भगवान चित्रगुप्त आप लेखकों को अक्षर प्रदान करते हैं। इन धर्मग्रंथो में कहा गया है कि कायस्थों के अतिरिक्त अन्य जाति के लोग भी चित्रगुप्त जी की पूजन करते हैं तो इस पूजन से उन मनुष्यों की आयु बढ़ती है तथा उन्हें नरक के कष्ट नहीं भोगने पडते है और वे स्वर्ग के अधिकारी होते हैं। (विभूति फीचर्स)

मुंबई में अक्टूबर महीने में पानी की किल्लत

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मुंबई: मुंबई में कई दिनों से कई इलाकों में पानी की समस्या बढ़ गई है। सायन, प्रतीक्षा नगर, विले पार्ले, अंधेरी, गोरेगांव, भांडुप, विक्रोली सहित कई इलाकों में कम दबाव या कम पानी आने से लोग परेशान है। बीएमसी का कहना है कि गर्मी बढ़ने और दिवाली में पानी की ज्यादा खपत की वजह से इस तरह की परेशानी आ रही है। 15 से 20 दिनों में हालत यह हो गई है कि मुंबईकर अक्टूबर में ही पानी की अघोषित कटौती झेल रहे हैं। पहले झीलों में जलस्तर घटने पर जून या जुलाई में पानी कटौती का सामना करना पड़ता था।

बीएमसी वॉटर डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि कम दबाव में पानी सप्लाई की समस्या को लेकर आम लोगों और अलग-अलग प्रभागों के पूर्व नगरसेवकों से शिकायतें मिल रही है। हम भी हैरान है, क्योंकि कहीं किसी पाइपलाइन में शिकायत नहीं मिली है।

गोरेगांव ईस्ट में शिकायत

गोरेगांव ईस्ट के गोकुलधाम इलाके में कई दिनों से पानी काफी कम प्रेशर में आ में रहा है। स्थानीय लोगों ने बीजेपी की पूर्व नगरसेविका प्रीति साटम से शिकायत की, जिसके बाद उन्होंने बीएमसी अधिकारियों को ज्ञापन देकर सुचारू तरीके से पानी सप्लाई की मांग की।

जगेश्वरी ईस्ट के हालत

जोगेश्वरी ईस्ट में उद्धव गुट के विधायक बाला नार ने भी के ईस्ट वॉर्ड (अंधेरी पूर्व) के असिस्टेंट कमिश्नर से मिलकर वॉटर प्रॉब्लम की शिकायत की थी। बीजेपी के पूर्व नगरसेवक अभिजीत सामंत ने अंधेरी ईस्ट के कई इलाकों में पानी की कम सप्लाई की शिकायत की है। बता दें कि 1 अक्टूबर, 2025 तक झील में 99.50% पानी जमा था। इसके बावजूद लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है।

बीजेपी नेता रवि राजा ने आरोप लगाया कि बीएमसी अधिकारियों की लापरवाही से मुंबईकर 24 महीने अघोषित पानी कटौती झेल रहे हैं। पानी आपूर्ति पर बीएमसी हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन लोगों को किसी न किसी कारणवश पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है।

दहिसर में भी आ रहा गंदा और बदबूदार पानी

दहिसर पूर्व स्थित अंबावाडी में भी सप्लाई के पानी में बहुत गंदी बदबू आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ दिनों से यह समस्या हो रही है। पहले 5 से 6 मिनट पानी बहाना पड़ता है, क्योंकि वह पीने योग्य तो क्या होगा, अन्य उपयोग लायक भी नहीं है।

4,160 MLD हो रही जलापूर्ति

बीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि शिकायतों के बाद वॉटर सप्लाई 4,000 से बढ़ाकर 4,160 एमएलडी प्रतिदिन की गई है। अक्टूबर का महीना गर्म होने और दिवाली में साफ-सफाई व अन्य कामों में लोगों के ज्यादा पानी इस्तेमाल से दिक्कत हो सकती है। अगर अंदर की पानी की पाइपलाइन में सप्लाई में कोई दिक्कत आती है, तो सोसाइटियों और बिल्डिंग्स के साथ-साथ स्लम में भी पानी कम सप्लाई होने की आशंका है। आशंकाओं को देखते हुए वॉटर इंजिनियरिंग डिपार्टमेंट के इंजिनियर कई इलाकों में जांच कर रहे हैं। बता दें कि बीएमसी को रोजाना औसतन 2,700 शिकायतें वॉटर लीकेज की मिलती हैं।

आचार्य लोकेशजी ने आजाद हिंद फौज के स्थापना दिवस को संबोधित किया

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राष्ट्रीय सैनिक संस्था ने भारत सरकार से 21 अक्टूबर को ‘नेताजी दिवस’ घोषित करने की मांग की- कर्नल त्यागी

राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को सच्ची श्रद्धांजलि- आचार्य लोकेश

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2025: अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेश जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं स्वतंत्रता सेनाननियों को समर्पित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि देश वासियों का राष्ट्र प्रेम व राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। राष्ट्रीय सैनिक संस्था दिल्ली ईकाई के युवा विंग द्वारा कान्स्टिटूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संगोष्ठी को गौरव सैनानी रमेश अग्रवाल, श्री सुपरनो सतपथी, श्री राजन छिब्बर, ऐयर वाईस मार्शल राकेश कुमार खत्री, कर्नल तजेंद्र पाल त्यागी वीर चक्र आदि अनेक दिग्गजों ने संबोधित किया |


विश्व शांति दूत आचार्य लोकेश जी ने इस अवसर पर कहा कि भारत के निर्माण में युवाओं का योगदान बहुआयामी है, जिसमें आर्थिक विकास के लिए उद्यमिता और नवाचार, सामाजिक प्रगति के लिए स्वैच्छिक कार्य और जागरूकता, और तकनीकी प्रगति के लिए डिजिटल साक्षरता शामिल है |
कर्नल तजेंद्र पाल त्यागी जी ने इस अवसर पर कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में 21 अक्टूबर 1943 को स्थापित ‘आजाद हिंद फौज’ ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के संघर्ष में अनमोल योगदान दिया, इसलिए राष्ट्रीय सैनिक संस्था भारत सरकार से 21 अक्टूबर को ‘नेताजी दिवस’ घोषित करने की मांग करती है | सभागार में उपस्थित सभी महानुभावों ने इस मांग का पुरज़ोर समर्थन किया |
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री सुनील बंसल, कर्नल मुकेश त्यागी, श्री राजीव जोली खोसला, श्रीमती उषा राणा एडवोकेट डॉ सुधीर त्यागी ने पूर्ण सहयोग दिया |

नागर विमानन मंत्रालय ने उड़ान की 9वीं वर्षगांठ मनाई

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उड़ान योजना के तहत 3.23 लाख उड़ानों के ज़रिए 1.56 करोड़ से अधिक यात्रियों ने हवाई यात्रा की

93 अप्रयुक्त और अल्प प्रयुक्त हवाई अड्डों को जोड़ने वाले 649 हवाई मार्ग चालू किये गये

नागर विमानन मंत्रालय क्षेत्रीय संपर्क योजना – उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) की 9वीं वर्षगांठ मना रहा है। मुख्य समारोह नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता नागर विमानन सचिव ने की। इस अवसर पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अध्यक्ष, सदस्यगण और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में नागर विमानन सचिव श्री समीर कुमार सिन्हा ने बताया कि उड़ान योजना, जिसे 21 अक्टूबर 2016 को राष्ट्रीय नागर विमानन नीति के अंतर्गत प्रारंभ किया गया था, एक परिवर्तनकारी पहल रही है, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को सुलभ और किफ़ायती बनाना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 27 अप्रैल 2017 को शिमला और दिल्ली के बीच उद्घाटित की गई पहली उड़ान ने क्षेत्रीय विमानन संपर्कता में एक नए युग की शुरुआत की।

इस योजना के अंतर्गत 15 हेलीपोर्ट और 2 जल हवाई अड्डों सहित 93 अप्रयुक्त और अल्प प्रयुक्त हवाई अड्डों को जोड़ने वाले 649 मार्गों का संचालन शुरू किया गया है, जिससे 3.23 लाख उड़ान उड़ानों के माध्यम से 1.56 करोड़ से अधिक यात्रियों को लाभ हुआ है। एयरलाइन ऑपरेटरों और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को समर्थन देने के लिए सरकार ने व्यवहार्यता गैप निधि (वीजीएफ) के रूप में 4,300 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया है और आरसीएस के तहत हवाई अड्डे के विकास में 4,638 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

हाल ही में की गई एक प्रमुख पहल अगस्त 2024 में सीप्लेन संचालन के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करना और सीप्लेन व हेलीकॉप्टरों के लिए विशेष बोली चरण, उड़ान 5.5 का शुभारंभ है। इस चरण के अंतर्गत विभिन्न तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में 30 जल हवाई अड्डों को जोड़ने वाले 150 मार्गों के लिए आशय पत्र जारी किए गए हैं।

नागर विमानन सचिव ने विस्तारित उड़ान फ्रेमवर्क के माध्यम से अप्रैल 2027 के बाद भी इस योजना को जारी रखने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें पर्वतीय, उत्तर-पूर्वी और आकांक्षी क्षेत्रों के साथ कनेक्टिविटी और लगभग 120 नए गंतव्यों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

‘उड़ान’ केवल एक योजना नहीं है, बल्कि यह परिवर्तन का उत्प्रेरक है – भारत की इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि हवाई यात्रा को समावेशी, सतत और हमारी विकास यात्रा का अभिन्न अंग बनाया जाए।

लोक गायिका विजया भारती से विशेष साक्षात्कार उग हो सुरज देव, अरघ के बेरिया…”

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(शत्रुघ्न प्रसाद -विनायक फीचर्स)

“पटना के महंगी पनवा, खाइब गमकदार हो”
“उग हो सुरज देव, अरघ के बेरिया…”
“मोरे राजा केंवड़िया खोल, रस के बूनी पड़े…”
“दुनिया में छा गये बिहारी रे, बोलो जय जय बिहारी”

ये लोक गीत भारत की आत्मा की धड़कन हैं। और इन धड़कनों को चार दशकों से स्वर दे रही हैं – भारतीय लोक संगीत की शीर्ष साधिका, विजया भारती।
संगीत और हिंदी में डबल एमए व विद्यावाचस्पति विजया भारती देश की जानी मानी लोकगायिका, एंकर, कवयित्री व लोक संस्कृति की मर्मज्ञ हैं। आकाशवाणी व दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार विजया ने देश के कोने-कोने से लेकर 20 से अधिक देशों में भारतीय लोक संस्कृति का परचम लहराया है।
तमाम टीवी चैनलों पर नियमित कार्यक्रम के अलावा आपने महुआ टीवी पर लगातार चार साल तक प्रतिदिन ‘बिहाने बिहाने’ कार्यक्रम की एंकरिंग कर रिकार्ड बनाया है। अनेक पुरस्कारों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ‘कुपोषण’ और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित और निमंत्रित भी किया।
बिहार में जन्मी और मुंबई में पली-बढ़ी विजया भारती ने हिंदी, भोजपुरी, मैथिली, अंगिका, मगही के अलावा राजस्थानी, हरियाणवी, संथाली, असमिया आदि अनेक भाषाओं में गायन कर भारतीय लोकगायिकी को वैश्विक पहचान दिलाई है। वे केवल गायिका नहीं, बल्कि लोक संस्कृति की विचारक, रचनाकार और सांस्कृतिक नीति की सजग प्रहरी हैं। प्रस्तुत हैं उनसे लिए गए साक्षात्कार के मुख्य अंश-

प्रश्न लोकगीतों को आप सनातन से कैसे जोड़ती हैं?

विजया भारती- वेदों में कहा गया है – “संगीतं ब्रह्म स्वरूपं।” लोकगीतों में वही छंद और स्वर सहज रूप से बहते हैं जो ऋग्वेद के मंत्रों में हैं। लोक ही सत्य है और सनातन भी। शास्त्रीय संगीत उसका परिष्कृत रूप है, पर मूल तो लोक ही है।

प्रश्न- छठ गीतों में आपकी विशेष पहचान रही है। कुछ उदाहरण देंगी?
विजया भारती – इस साल मेरे दो छठगीत रिलीज हुए हैं। इंडियन फोक स्टार विजया भारती के नाम से मेरे यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध इन दोनों गीतों के बोल भी मैंने लिखे हैं। एक भोजपुरी और एक मैथिली में। इससे पहले मेरे गाये अनगिनत छठ गीत टी सीरीज और अन्य कंपनियों और चैनलों से रिलीज हुए, और यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। मैंने इन्हें न केवल गाया, बल्कि कई गीत स्वयं लिखे और संगीतबद्ध भी किए हैं।

प्रश्न आपने मंचों से लेकर टीवी और फिल्मों तक अपनी कला का विस्तार किया है। कुछ अनुभव साझा करें?

विजया भारती – मैंने अमिताभ बच्चन, अमरीश पुरी, गोविंदा, यश चोपड़ा, मनोज बाजपेयी जैसे दिग्गजों के साथ मंच साझा किया है। ICCR के माध्यम से रूस, ब्रिटेन, जर्मनी, त्रिनिडाड जैसे 22 देशों में कार्यक्रम किए। त्रिनिडाड के एक अखबार ने मेरे कार्यक्रम को “Electrifying Bharati” कहा- यह मेरे लिए गर्व का क्षण था।

प्रश्न: सांस्कृतिक राजनीति को लेकर आपने मुखरता दिखाई है। क्या कहना चाहेंगी?

विजया भारती – कुछ कलाकार राजनीतिक संबंधों के बल पर मंच तय करते हैं, यह प्रतिभा के साथ अन्याय है। मुझे राजनीति से उतना ही सरोकार है जितना किसी आम नागरिक को। मैंने कभी किसी संबंध से लाभ नहीं लिया, और ना ही चाहा।

प्रश्न लोक संस्कृति के लिए आपकी नीति-सुझाव क्या हैं?

विजया भारती – कोविड के बाद लोक कलाकारों के कार्यक्रमों में भारी गिरावट आई है। दूरदर्शन को लोक संगीत के लिए समर्पित चैनल आरक्षित करना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में लोक-संस्कृति को शिक्षा से जोड़ने की बात है, पर क्रियान्वयन नहीं दिखता। एक समर्पित सांस्कृतिक नीति बननी चाहिए।

प्रश्न साहित्य और समाज में आपका योगदान क्या रहा?

विजया भारती – मेरे 10 कविता संग्रह और एक कहानी संग्रह प्रकाशित हैं। ‘बेटी बचाओ’, ‘कुपोषण’, ‘बाल श्रम’, ‘पर्यावरण संरक्षण’ जैसे विषयों पर लोकगीतों के माध्यम से जनजागरण किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पत्र लिखकर इन अभियानों में आमंत्रित किया था।

प्रश्न आपकी लोकगायिकी का सार क्या है?

विजया भारती – “विशुद्ध लोक संगीत मन को माटी की सुगंध से भर देता है।” यह केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मनोविज्ञान का सार है।

प्रश्न: भारत की सांस्कृतिक एकता के लिए आपकी पुकार क्या है?

विजया भारती – उत्तर के लोक को दक्षिण से, पश्चिम के लोक को पूर्व से जोड़ना भारतीयता को बढ़ावा देगा। भारत की पुकार है-लोक का संरक्षण।

प्रश्न: आज कई कलाकार बिहार में चुनाव लड़ रहे हैं। क्या कहेंगी?

विजया भारती – मुझे राजनीति से उतना ही सरोकार है जितना किसी आम नागरिक को। मैं उन सभी कलाकारों को शुभकामनाएं देती हूँ। पर यह भी सत्य है कि कई मंच राजनीतिक संबंधों से तय होते हैं, जो प्रतिभा के साथ अन्याय है।

प्रश्न भारत की माटी से विश्व मंच तक आपने कहां-कहां प्रस्तुतियां दी हैं?

विजया भारती- बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, गुजरात, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हजारों प्रस्तुतियाँ दी हैं। मुंबई में छठ के अवसर पर मेरे कार्यक्रम लगातार 17 साल हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैंने 22 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

प्रश्न सुरों की साधना से लेकर फिल्म, मंच और बॉलीवुड में आपका क्या योगदान रहा है?
विजया भारती- मैंने रवींद्र जैन के संगीत निर्देशन में ‘धर्मयुद्ध’, ‘गाँव आजा परदेसी’ जैसी फिल्मों में गाया है। ‘टूटे ना सनेहिया के डोर’ में अभिनय भी किया है। जुहू बीच पर अमिताभ बच्चन, शारदा सिन्हा, मनोज तिवारी, पूनम ढिल्लो, रवीन्द्र जैन, जितेन्द्र, उदित नारायण जैसे कलाकारों के साथ मंच साझा किया है।

प्रश्न आपने गायन के अलावा साहित्य सृजन भी किया है। कुछ बताएँ।
विजया भारती – मेरे 10 कविता संग्रह और एक कहानी संग्रह प्रकाशित हैं। पहली पुस्तक “रंग पिया का सोहना” थी। रोमांटिक से लेकर विभिन्न भावों से जुड़ी कविताओं का संकलन। इसका विमोचन गोवा की राज्यपाल रहीं मृदुला सिन्हा ने किया था। बीते वर्ष मेरे कविता संग्रह ‘वतन पे कुर्बान’ का विमोचन जनरल वीके सिंह ने किया। मैंने लोकगीतों के माध्यम से सामाजिक जागरण किया है। अपने गीत भी मैं खुद लिखती और धुन बनाती हूँ।

प्रश्न एक लोक गायिका के तौर पर आपके लिए भारत की पुकार और लोक का संकल्प क्या है?

विजया भारती- यह अमृत काल है। इस समय भारत को चाहिए कि वह लोक संस्कृति को केवल उत्सवों की शोभा नहीं, बल्कि नीति का हिस्सा बनाए। मेरी पुकार है-“भारत की पुकार है, लोक का संरक्षण हो, संवर्धन हो और बेहतर प्रोत्साहन भी मिले।” (विनायक फीचर्स)