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गौ माता को नुकसान पहुंचा तो जेल जाएंगे सरपंच

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किसी भी गांव में यदि गौ माता घूमते पाई गई या उन्हें कुछ नुकसान पहुंचता है तो उस पंचायत के सरपंच, जनपद सदस्य,पंचायत सहायक, पंचायत सचिव सब जिम्मेदार होंगे..

MP सरकार में राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने गोवंश के संरक्षण को लेकर न सिर्फ चिंता जताई है बल्कि सख्त लहजे में ये भी कहा है कि अगर किसी गांव में कोई गौ माता घूमती पाई गई या उसे किसी तरह का नुकसान पहुंचाया गया तो सरपंच को जेल भेज दिया जाएगा। इतना ही नहीं उन्होंने आगे ये भी कहा कि धारा 151 में सरपंच जेल तो जाएगा ही साथ ही साथ तीन दिन उसकी जमानत नहीं होने दी जाएगी।

ज्योतिपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कर कमलो द्वारा गौ सांसद

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कोटा : एक दशक से अधिक गौ सेवा में सक्रिय है एम् एल नागर हाल ही में भारत के आध्यात्मिक गौ माता को राष्ट्रमाता बनाने के राष्ट्रिय उत्थान हेतु सक्रिय ज्योतिपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कर कमलो द्वारा कोटा संसदीय क्षेत्र से एकमात्र एम् एल नागर को गौ सांसद नियुक्ति प्रमाण पत्र सौपा गया .कोटा से गौ सेवा मिशन में सक्रिय कोटा संसदीय क्षेत्र के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ नयन प्रकाश गाँधी ने बताया की स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने के लिए अग्रसर है और लगातार सोशल और देश भर में विभिन्न प्रादेशिक सक्रिय कार्यिकी सदस्यों गौ सांसदों की बदौलत आज पुर भारत भर में राष्ट्रव्यापी गौ वंश को बचाने और राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए लगातार स्वामी जी इस पुनीत कार्य में सामाजिक सेवा में सक्रिय वरिष्ठ युवाओ की एक सक्रिय टीम के साथ प्रयासरत है .इसी क्रम में कोटा संसदीय क्षेत्र से मांगीलाल नागर सुपुत्र पन्नालाल का चयन गौ माता के अभियान को तीव्र गति से आगे बढ़ाने हेतु किया गया .एम् एल नागर कोटा के जाने माने सक्रिय गौ सेवक सेवा कार्यक्रम से करीब एक दशक से अधिक सेवा से जुड़े हुए है. पुरे देश भर से उनका गौ सांसद बनना कोटा शिक्षा नगरी के लिए और सामाजिक संस्थाओ के प्रतिनिधियों के लिए हर्ष का विषय है।

गौ-संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व यह बजट: मंत्री पटेल

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भोपाल, 3 जुलाई (हि.स.)। पशुपालन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में यह वर्ष गौ-संरक्षण एवं संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा आज विधानसभा में प्रस्तुत बजट 2024-25 गौ-संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व सिद्ध होगा। इससे पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र का विकास होगा।

बजट में पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में किए गए प्रमुख प्रावधानों में गहन पशु विकास परियोजना के लिए 895 करोड़, गौ-संवर्धन एवं पशुओं के संवर्धन के लिए 252 करोड़, मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के लिए 196 करोड़, मुख्यमंत्री सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना के लिए 150 करोड़ तथा गौ-अभ्यारण अनुसंधान एवं उत्पादन केंद्र के लिए 100 करोड रुपये का प्रावधान शामिल हैं।

घुंघरू 2024 कार्यक्रम में सम्मानित हुए फिल्म निर्माता और सोशल वर्कर संदीप नागराले

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नवी मुंबई। पिछले दिनों वाशी स्थित सिडको ऑडिटोरियम में सिंधु नायर द्वारा प्रस्तुत नृत्य महोत्सव का आयोजन संपन्न हुआ जहां पूरे भारत के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति दी गई।

उसी अवसर पर विशिष्ट अतिथि फिल्म निर्माता और सोशल वर्कर संदीप नागराले को सम्मानित किया गया।
आपको बता दें कि कुछ महीने पूर्व मैंने प्यार किया फिल्म में सलमान खान के साथ अभिनय कैरियर की शुरुआत करने वाली प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री भाग्यश्री के हाथों संदीप नागराले ग्लोबल ग्लोरी अवार्ड 2023 से सम्मानित हो चुके हैं।
संदीप ने हाल ही में महाराष्ट्र सरकार से अनुमति पत्र प्राप्त करके एक नर्सिंग कॉलेज भी शुरू किया है जिसके वह ट्रस्टी हैं।
विदित हो कि संदीप नागराले ने कुछ महीने पूर्व सुप्रसिद्ध मराठी गायक स्वप्निल बांदोड़कर की आवाज़ में एक एलबम बनाया है।
गौरतलब है कि सोशल वर्कर, बिजनेसमैन एवं फिल्म निर्माता संदीप नागराले पिछले कुछ वर्षों से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। उन्होंने प्रोड्यूसर एसोसिएशन में अपना बैनर वी एस एन प्रोडक्शन रजिस्टर कर युवा पीढ़ी में जागरूकता लाने के लिए नशामुक्ति पर एक शॉर्ट फिल्म का निर्माण किया जिसे कई पुरस्कार प्राप्त हुए। साथ वे कई फैशन शो का आयोजन भी करते रहते हैं। लेकिन बॉलीवुड में उनका लक्ष्य कुछ बड़ा काम करना है। उन्होंने फिल्मों में काम करने वाले चालीस बौनों को लेकर फिल्म ‘आखिरी गब्बर’ बनाया जो कि एक तरह का अनूठा प्रयास रहा। फिर लॉकडाउन के दौरान कॉमेडियन सुनील पाल अभिनीत मराठी फिल्म ‘एक होता लेखक’ रिलीज हुई जिसमें वह सह-निर्माता के रूप में जुड़े थे। संदीप नागराले ने एक बड़े बजट की हिंदी फिल्म के निर्माण की योजना बना रहे हैं जो एक हिडन गैंगस्टर की कहानी होगी। इसकी स्क्रिप्ट को वह शीघ्र ही पूरी कर लेंगे फिर किसी नामचीन एक्टर को अप्रोच करेंगे।
संदीप को एक मराठी फिल्म ‘ उठाव’ के लिए रोल ऑफर हुआ है।
संदीप का प्रयास रहता है कि फिल्म, टीवी, वेब सीरीज में नए प्रतिभाशाली लोगों को काम मिलता रहे।
बॉलीवुड सहित सामाजिक कार्यों में संदीप नागराले को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए महाराष्ट्र रत्न अवार्ड 2023 सहित लीजेंड दादासाहेब फाल्के अवार्ड, महाराष्ट्र रत्न अवार्ड और महात्मा गांधी रत्न अवार्ड भी मिल चुका है।

– संतोष साहू

गौ रक्षा दल के जिला प्रधान अपनी टीम के साथ भाजपा में शामिल

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जगाधरी, जगाधरी विधानसभा में भाजपा संगठन लगातार मजबूत हो रहा है। लगातार भाजपा की रीति-नीति से प्रभावित होकर लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को यमुनानगर गौ रक्षा दल के जिला प्रधान धर्मेंद्र राणा ने अपनी पूरी गौ रक्षा दल की टीम के साथ भाजपा का दामन थाम लिया। हरियाणा के कृषि मंत्री चौ. कंवर पाल गुर्जर ने अपने जगाधरी आवास पर पार्टी का पटका पहना कर इन सभी का भाजपा परिवार में स्वागत किया। कृषि मंत्री कंवर पाल ने इस मौके पर कहा कि पार्टी में शामिल हुए सभी गौ रक्षकों को पूरा मान सम्मान दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि गौ रक्षक बहुत सराहनीय कार्य कर रहे हैं, इनके पार्टी में आने से भाजपा और मजबूत होगी।

महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखी पुस्तक का किया विमोचन

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मुंबई – दिनाँक २९जून को वाग्धारा कला महोत्सव में मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री रमेश बैस के द्वारा डॉ.मुस्तफ़ा युसूफअली गोम की लिखी पहली पुस्तक ‘नरेंद्र मोदी संवाद नए भारत का संकल्प ‘ का विमोचन अंधेरी पश्चिम के मुक्ति शभागार में किया गया।

मंच पर आयोजक वागीश सारस्वत , लेखक – निर्देशक रूमी जाफ़री , प्राचार्य अजय कौल , मशहूर कला निर्देशक जयंत देशमुख , आदि मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्साही और दृष्टि संपन्न नेतृत्व को समर्पित यह पुस्तक, भारतीय जनमानस की उम्मीदों और सपनों का प्रतिबिंब है। डॉ. गोम ने इस पुस्तक के माध्यम से श्री मोदी की नेतृत्व शैली और उनके द्वारा विकसित आदर्श भारत की दृष्टि को साझा किया है। उनके नेतृत्व में देश के समग्र विकास की दिशा में की गई प्रगति को यह पुस्तक उजागर करती है। इस पुस्तक का प्रकाशन मुंबई हिंदी अकादमी द्वारा किया गया है।

 

काले परिधान में दिलों की धड़कन बनी मधुरिमा तुली  

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मुंबई (अनिल बेदाग) : मधुरिमा तुली भारतीय मनोरंजन उद्योग में सबसे पसंदीदा और प्रशंसित कलाकारों में से एक हैं। इन वर्षों में दिवा ने विभिन्न माध्यमों में अपनी प्रतिभा और क्षमता साबित की है और कोई आश्चर्य नहीं कि आज, वह उस प्यार और ध्यान को पाने की हकदार है जो उसे मिल रहा है।  चाहे वह टीवी क्षेत्र हो या फिल्में या ओटीटी और रियलिटी शो, वस्तुतः ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां मधुरिमा ने अपनी क्षमता का अच्छा उपयोग न किया हो और कोई आश्चर्य नहीं, उनके वफादार प्रशंसकों को हमेशा उन पर गर्व है। उनकी उपलब्धियाँ खुद बोलती हैं और इसीलिए उनके प्रशंसक हमेशा उस प्यार और प्रशंसा को प्रदर्शित करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं जिसकी वह हकदार हैं। जबकि मधुरिमा को हमेशा एक ऐसी कलाकार के रूप में जाना जाता है जो अपनी कला पर ध्यान केंद्रित करती है और एक अभिनेत्री के रूप में अपने काम को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
 हर कोई इस तथ्य से भी वाकिफ है कि वह एक उत्कृष्ट फैशनिस्टा हैं और वह भी सबसे सहज और मनमौजी अंदाज में। वह एक ऐसी दिवा है जो अपनी इच्छा और पसंद के अनुसार एथनिक या कस्टम वेस्टर्न अवतार में रॉक और रोल करने की क्षमता रखती है और यही बात हमें उसकी सबसे ज्यादा पसंद है। वह बार-बार अपने प्रशंसकों को लुभाने और मंत्रमुग्ध करने के लिए अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर स्टनर पोस्ट करने में माहिर हैं। भव्यता और खूबसूरती की प्रतीक उर्फ ​​मधुरिमा ने अपने आकर्षक और आकर्षक ऑल-ब्लैक आउटफिट में सजी-धजी अपनी कुछ शानदार और जबड़ा-गिरा देने वाली तस्वीरें साझा कीं और हम उनसे अपनी नजरें नहीं हटा पा रहे हैं। लाल रंग की लिपस्टिक के साथ उनका बंधा हुआ लंबा हेयरस्टाइल उनके स्वैग को लेकर चर्चा में है और इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि प्रशंसक हमेशा इस प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

मैं ‘बद्तमीज़ गिल’ में कॉमेडी कर रही हूं, एक ऐसा जॉनर जिसे मैंने बहुत ज्यादा एक्सप्लोर नहीं किया है : वाणी कपूर

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खूबसूरत बॉलीवुड अभिनेत्री वाणी कपूर ‘बद्तमीज़ गिल’ में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। यह ड्रामेडी (ड्रामा + कॉमेडी) लोगों के दिलों को छूने का वादा करती है। वाणी अब फिल्म के दूसरे शेड्यूल के लिए यूके जा रही हैं।

वाणी कहती हैं, “हमारा अगला शेड्यूल यूके में है, और मैं इस रोमांचक फिल्मिंग अनुभव का इंतजार कर रही हूं। ‘बद्तमीज़ गिल’ मुझे एक नए अवतार में पेश कर रही है, जिसे लेकर मैं वाकई खुश हूं। यह प्रोजेक्ट मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और यह जानकर बहुत अच्छा लगता है कि निर्माता मेरी अभिनय क्षमताओं पर विश्वास करते हैं और मुझे लीड रोल में रखते हुए फिल्मों को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। मैं इसे अपना सर्वश्रेष्ठ देने और एक कलाकार के रूप में अपनी विविधता दिखाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।”

वाणी ‘बद्तमीज़ गिल’ के साथ कॉमेडी का भी अन्वेषण कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक ऐसे जॉनर का भी अन्वेषण कर रही हूं, जिसे मुझे अभी तक गहराई से तलाशने का मौका नहीं मिला था, जो एक अभिनेत्री के रूप में मेरे लिए मजेदार और चुनौतीपूर्ण दोनों है। कॉमेडी, विशेष रूप से परिवारिक कॉमेडी, जिसे हर कोई एक साथ आनंद ले सके, यह जॉनर मुझे बहुत पसंद है। मैं ‘बद्तमीज़ गिल’ की शूटिंग का पूरा आनंद ले रही हूं।”

देश को कंगाल बनाने की घृणित राजनीति* 

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(शिव शरण त्रिपाठी – विनायक फीचर्स)
यदि चुनाव के समय राजनीतिक दलों द्वारा अपने घोषणा पत्रों के माध्यम से अपनी राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध के लिये नाना प्रकार की मुफत की रेवाडिय़ा बांटने की संस्कृति पर लगाम न लगाई गई तो देश को कंगाल होने से कोई बचा नहीं सकता।
इससे अधिक दुर्भाग्य और विडम्बना हो भी क्या सकती है कि सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बार-बार चिंता जताने और इस पर रोक लगाने की मंशा जताने के बावजूद आज तक न तो सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश आ सका और न सरकार कोई कानून बना सकी।
चुनाव में मुफ्त की रेवडिय़ा बांटकर सत्ता में आने वाली पार्टियों के कार्यकाल में उनके राज्यों की आर्थिक बदहाली का ही नतीजा रहा है कि कहीं बिजली नहीं मिल पा रही है तो कहीं पानी नहीं मिल पा रहा है। विकास के लिये तो मानों धन का अकाल ही पैदा हो गया है।
हाल ही में यदि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को डीजल व पेट्रोल के दामों में भारी वृद्धि करने को विवश होना पड़ा है तो यह मुफत रेवडिय़ां बांटे जाने का ही नतीजा है। यही हाल पंजाब व दिल्ली का हो चुका है।
इस दिशा में 3 अक्टूबर 2022 को भारतीय स्टेट बैंक की एक रपट आंखे खोल देने को काफी है। रपट में मुफ्त रेवड़ी संस्कृति को देश की अर्थ व्यवस्था के लिये घातक बताया गया था।
ज्ञात रहे 2022 में सुप्रीम कोर्ट और मोदी सरकार ने इस दिशा में कड़े कदम उठाये जाने की मंशा जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समस्या के निदान के लिये एक समिति का गठन किया जाना चाहिये। इसके बाद 2023 में उसने मुफ्त रेवडिय़ां बांटे जाने को लेकर ही एक याचिका पर मध्य प्रदेश राजस्थान और केन्द्र सरकार को नोटिस भी जारी किया था।
16 जुलाई 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुदेलखण्ड एक्सप्रेस वे जनता को सौंपने के बाद जनपद जालौन के कैथोरी गांव में एक जनसभा में कहा था कि देश की राजनीति से मुफ्त रेवड़ी संस्कृति खत्म करेगें। युवाओं को चेताया कि ऐसी राजनीति कर वोट बटोरने वालों से सावधान रहे, ये घातक है। उससे देश को नुकसान हो रहा है। रेवड़ी संस्कृति वाले कभी एक्सप्रेस वे, डिफेंस कॉरीडोर एयरपोर्ट नहीं बनायेगें। वो तो रेवड़ी में  फसाकर खुद के खजाने भरेगें।
ऐसे में एक ही रास्ता बचता है कि देश की प्रबुद्ध जनता ही मुफ्त रेवड़ी संस्कृति को सदा-सदा के लिये खत्म करने को आगे आये वरन देश की आर्थिक बदहाली के नतीजे भोगने के लिये सभी को तैयार रहना ही होगा।
एक प्रत्याशी एक ही सीट से चुनाव लड़े- भारत निर्वाचन आयेाग को सरकार से जल्द से जल्द ये कानून बनाने की मांग करनी चाहिये कि एक प्रत्याशी सिर्फ  एक सीट से चुनाव लड़ सकेगा।  फिलहाल जब तक कानून नहीं बनता तब तक निर्वाचन आयोग को इस दिशा में स्वयं पहल करनी चाहिये।
कौन नहीं जानता कि खासकर बड़े नेताओं की दो-दो सीटों से चुनाव लडऩे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है दोनो सीटे जीतने पर वे मनचाही एक सीट से प्रतिनिधित्व करते हैं और दूसरी सीट छोड़ देते हैं। नतीजतन उनके द्वारा छोड़ी गई ऐसी सीटों पर दुबारा चुनाव कराया जाता है और जिस पर देश की आम जनता की गाढ़ी कमाई दुबारा फूंकी जाती है।
यह भी कम विचारणीय नहीं है कि ऐसे उपचुनावों से देश की आर्थिक स्थिति पर अनायास बोझ बढ़ जाता है और यह बोझ देश का करदाता उठाने को मजबूर होता है।
और पिसता ही जा रहा है देश का मध्यम वर्ग- चाहे निजी राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि हेतु चुनावी रेवडिय़ां बांटे जाने की बढ़ती परम्परा हो, चाहे गरीबों हेतु चलाई जाने वाली मुफ्त की योजनायें हों और चाहे दो सीटों से जीतने वाले प्रत्याशियों का एक सीट छोड़े जाने से होने वाले उपचुनाव, आखिर इनका बोझ कौन उठाता है? साफ  है देश का करदाता। अब सवाल यह है कि समाज का कौन सा वर्ग है कि करदाता के रूप में जिसकी संख्या देश में सर्वाधिक है। सपाट उत्तर आता है मध्यम वर्ग। मध्यम वर्ग में अधिसंख्य व्यवसायी समाज और नौकरीपेशा लोग आते हैं। सरकारी नौकरी में उच्च पदों पर कार्यरत लोगों को छोड़ दिया जाये तो अधिसंख्य सरकारी व निजी क्षेत्रों के नौकरी पेशा लोगों को समाज का सर्वाधिक बोझ उठाने वाला वर्ग कहा जा सकता है। समाज में ऐसी ही दशा उन छोटे व्यापारियों की भी है जो पारिवर, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने में ही अपनी सारी जिदंगी खपा देते है और मृत्यु पर्यंत उन्हे सुकून नहीं मिल पाता।
 हर बजट में चाहे केन्द्रीय बजट हो और चाहे राज्यों का बजट मध्यम वर्ग की नजरें हमेशा आयकर में छूट को लेकर ही जिज्ञासु रहती है । इसका कारण उसे तंगहाली से राहत मिलने की उम्मीद जो होती है। यह भी किसी को बताने की जरूत नहीं है कि राष्ट्र व समाज की रीढ़ होते हुये भी सरकारी योजनाओं का उसे कोई लाभ नहीं मिल पाता। सारा का सारा लाभ निम्न वर्ग व उच्च वर्ग को प्राप्त होता है।  मध्यम वर्ग को इससे इंकार नहीं है कि सरकार उसके करों से समाज के जरूरतमंद लोगों के लिये लाभ की योजनायें न बनाये, न लागू करें। उसे खीझ व गुस्सा इस बात से है कि राजनीतिक दलों की स्वार्थ पूर्ति हेतु ही उसे बलि का बकरा बनाया जाता है।  चुनाव में रेवड़ी बांटने की संस्कृति का होता विस्तार, दो-दो सीटों से चुनाव लड़कर एक सीट छोडऩे की परम्परा को आखिर मध्यम वर्ग क्यों ढोता फिरे? सरकार व विपक्षी दलों को इस दिशा में गहन विमर्श करना ही होगा और जितनी जल्द हो सके उतना जल्द किया जाये। यदि कहीं मध्यम वर्ग ने कंधा डाल दिया तो हालात संभाले न संभलेगें। (विनायक फीचर्स)