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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के हाथों डॉ रामकुमार पाल को मिला गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान

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मुंबई: गाय की महिमा और संरक्षण पर आधारित “गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2024” पुरस्कार समारोह का आयोजन 14 जुलाई 2024 को मुक्ति कल्चरल हब, अंधेरी पश्चिम, मुंबई में संपन्न हुआ।

इस समारोह में श्री शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने बीजेपी नेता, समाजसेवक एवं बिजनेसमैन डॉ रामकुमार पाल को आशीर्वाद देते हुए सम्मानित किया।
डॉ रामकुमार पाल मंच पर महाराज के हाथों सम्मानित होकर और उनका आशीर्वचन सुनकर अभिभूत हो गए।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हैदराबाद की भाजपा नेता माधवी लता, मुक्ति हॉल की संस्थापक तथा फिल्म निर्मात्री स्मिता ठाकरे, बिजनेस मैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी, निर्माता प्रेम सागर, शेखर मुंदड़ा, प्रिंसिपल अजय कौल, प्रशांत काशिद, महेंद्र संगोई, गिरीश जयंतीलाल शाह, बिमल भूटा, सुनील सेठी, चिराग गुप्ता, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, कवि वागीश सारस्वत, मॉडल एक्ट्रेस सीमा मीना सहित कई गौ सेवक और गौ संरक्षक की विशेष उपस्थिति रही।
आपको बता दें कि भाजपा नेता होने के अलावा, डॉ रामकुमार पाल एक सफल व्यवसायी हैं और वे गरीबों के हितार्थ समर्पित भाव से कार्य करते हैं। वर्तमान में, वे मुंबई के उत्तर/पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र के लिए भाजपा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। इससे पहले, वे महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियुक्त विशेष कार्यकारी अधिकारी (एसईओ) (2005-2010) के पद पर रह चुके हैं। भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य और दमन-दीव और दादरा नगर हवेली के प्रभारी के रूप में, श्री पाल ने किसानों की विभिन्न समस्याओं की ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया।
डॉ पाल प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत अभियान संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं। वह भाजपा किसान मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। यह समूह भारतीय किसानों के जीवन में सुधार लाना चाहता है।
डॉ रामकुमार पाल के उल्लेखनीय योगदान और एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में मानवता के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए प्रमुख मीडिया हाउस, मिड-डे ने सक्सेस स्टोरी कॉलम में उन्हें स्थान दिया और मैगजीन इंडिया टुडे की 45 वीं वर्षगांठ के दौरान भी उन्हें उचित स्थान पर प्रकाशित किया।
श्री पाल को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, उनकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और हिंदी भाषा और सारस्वत साधना को लोकप्रिय बनाने के लिए वर्षों की सेवा के लिए वीर भारतीय हिंदी साहित्यपीठ, लखनऊ द्वारा समाज सेवा रत्न से सम्मानित किया गया। जनसंख्या समाधान फाउंडेशन महाराष्ट्र अध्यक्ष पद पर रामकुमार पाल अपनी तमाम उपलब्धियों के बावजूद एक विनम्र और समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता बने हुए हैं।

गऊ संसद का मुख्यपत्र गऊ भारत भारती होगा – शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी

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गऊ संसद का मुख्यपत्र गऊ भारत भारती होगा – शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी के कर-कमलो द्वारा ,गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान समारोह संपन्न

शंकराचार्य जी के हाथो माधवी लता , स्मिता ठाकरे तथा अन्य गौभक्तो का हुआ सम्मान

मुंबई: गऊ माता की महिमा और संरक्षण पर आधारित भारत का पहला समाचार पत्र गऊ भारत भारती’ की 10वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में “गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2024” पुरस्कार समारोह का आयोजन 14 जुलाई 2024 को मुक्ति कल्चरल हब, अंधेरी पश्चिम, मुंबई में संजय शर्मा अमान द्वारा आयोजित किया गया। इस समारोह में श्री शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज आशीर्वाद देने पहुंचे और उन्होंने अतिथियों और कई गणमान्य लोगों को सम्मानित भी किया। श्री शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी हाथो हैदराबाद से विशेष तौर पर आई माधवी लता , मुक्ति फाऊंडेशन की स्मिता ठाकरे , मुंबई भाजपा उपाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी , महाराष्ट्र गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष शेखर मूंदड़ा , प्रेम रामानंद सागर ,शैलेश गगलाणी , भरत भाई पोपट , बकुलेश भाई ठक्कर , गौ भक्त नवनाथ दुधाल , बिमल भुता भाजपा मुंबई सचिव , प्रकाश कोलते , अभय छेड़ा , अजय कौल , प्रशांत काशिद , चिराग गुप्ता , महेंद्र संगोइ प्रमुख ट्रस्टी “भगवान महावीर पशु रक्षा केंद्र, एंकरवाला अहिंसाधाम” , गौ वैज्ञानिक डॉ जितेंद्र भट्ट , वैज्ञानिक जेजे रावल , समाजसेवी कृष्णा पिम्पले , आदि को उनके उल्लेखनीय कार्यो के लिए सम्मानित किया गया।

परमाराध्य’ परमधर्माधिस उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठा धीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती ‘1008’ महाराज जी के कर कमलो द्वारा समाचारपत्र के १०वें अंक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर प्रेम रामानंद सागर ने अपनी लिखी पुस्तके शंकराचार्य को भेट करते हुए गौ माता पर सीरियल निर्माण की बात की तथा शंकराचार्य ने भी उनसे कहा कि आप गऊ माता पर भी सीरियल बनाए। नीरज पुरोहित , डॉ जितेंद्र भट्ट द्वारा शंकराचार्य जी को गाय के गोबर से बनी वस्तुए भेट की गई।
शंकराचार्य जी के आशीर्वचन के मुख्य अंश
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज जी अपने एक घंटे के अपने वक्तव्य में कहा कि हिन्दू कौन ? हम सब केवल बोलते रहते हैं हम हिन्दू हैं हम हिन्दू हैं लेकिन असली हिन्दू के तीन लक्षण बताये जो गऊ सेवा करता हो , जिसका विश्वास पुनर्जन्म में हो , अहं ब्रम्हास्मि।  जो गऊ माँ को काटते हैं उसका मांस खाते हैं , बेंचते हैं वे सब पाप के भागी हैं .गऊ को माता क्यों कहा गया ? जैसे कोई लड़की ब्याही जाती है तो उसके पति की माता उस लड़की की माता होती है उसी तरह अगर हमने किसी को अपने परिवार में सम्मिलित कर लिया तो जो हम मानते हैं वही सम्मिलित व्यक्ति भी मानता है गऊ को माता हमारे सनातन धर्म ने माना है इसलिए वो हमारी भी माता है।
शंकराचार्य जी ने आगे कहा कि -आज हमारे पास सिर्फ दो से ढाई करोड़ गाय बची है। अगर हम पांच वर्ष और रुक गए तो , जैसे हम कृष्ण भगवान् को सिर्फ चित्र में देखते है वैसे ही गाय को भी हम सिर्फ चित्र में ही देख पाएंगे। बहुत कठिन समय है , इसीलिए आप के पास यह अंतिम मौका है गाय को बचाने का।  जब तक हमारे पास बीज है तो बचाया जा सकता है जिस दिन बीज ख़त्म हो गया , हम कुछ नहीं कर पाएंगे।
संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए समय नहीं है , कहते है इस पर चर्चा के लिए समय ख़राब होता है इसीलिए हम ने निर्णय लिया है कि देश के हर संसदीय क्षेत्र से एक गौ भक्त को गौ सांसद के रूप में मनोनीत किया जाये। और उसको इस बात का एहसास कराया जाये कि तुम सांसद हो। अपने संसदीय क्षेत्र में गाय के बारे में काम शुरू करो। और जो तुम्हारा चुना गया सांसद है अगर तुम्हारा सहयोग लेना चाहे तो उसका सहयोग करो। गाय के बारे में सारे काम अपने हाथ में ले लो अगर चुना गया सांसद सहयोग नहीं करता है तो।

शंकराचार्य महाराज जी ने समाचारपत्र के संस्थापक संजय शर्मा की तरफ देखते हुए अपने आशीर्वचन में आगे कहा कि – ” ये जो गऊ भारत भारती अखबार है इसका नाम हम को बहुत अच्छा लगा , एक तो गाय को समर्पित है , दस वर्ष आप ने निकाल लिया , एक युग होता है , अब आप में ऊर्जा आ गई है।

आज मैं इस मंच से घोषणा करता हूँ जो हमारी गौसंसद है उसका मुख्य पत्र गऊ भारत भारती होगा। और भारत में सिर्फ दो ही चीजों की जरुरत है एक गौ की दूसरी भारत की।

कार्यक्रम का सञ्चालन आनन्द सिंह ने किया, कार्यक्रम में संगीतमय प्रस्तुति प्रकाश तिवारी मधुर का था। के प्रमुख आयोजक समाचारपत्र के संस्थापक संजय शर्मा अमान थे।

 

चातुर्मास में भगवान विष्णु एवं महादेव शिव की उपासना*

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(अंजनी सक्सेना-विभूति फीचर्स)
चातुर्मास यानि आषाढ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक का समय सब पापों का नाश करने वाला है। स्कंद‌पुराण में कहा गया है कि इस अवधि में जो भी मनुष्य भगवान शिव अथवा विष्णु या दोनों को अपने हृदय में स्थापित करके अभेद बुद्धि से उनका चिंतन, स्मरण एवं उपासना करता है वह मनुष्य सब पाप कर्मों से मुक्त हो जाता है तथा उसके लिए अपना शत्रु भी अत्यंत प्रिय हो जाता है। चातुर्मास में भगवान विष्णु एवं महादेव शंकर का व्रत करने वाला मनुष्य उत्तम माना गया है। इस अवधि में भगवान विष्णु की शालग्राम स्वरूप ,भगवान शिव की नर्मदेश्वर स्वरूप और दोनों की संयुक्त रूप से हरिहर स्वरूप में आराधना करने का विधान है।
चातुर्मास में भगवान श्री हरि विष्णु की एवं देवाधिदेव महादेव की भक्ति करना श्रेयस्कर माना गया है ।  चातुर्मास में स्नान का भी महत्व है। स्कंद पुराण के अनुसार चातुर्मास में नदी में स्नान करने वाले को सिद्धि प्राप्त होती है।झरने, तालाब या बावड़ी में स्नान करने वाले के हजारों पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। जो मनुष्य चातुर्मास में पुष्कर, प्रयाग या किसी और महातीर्थ के जल में स्नान करता है उसके पुण्यों की संख्या में बढ़ोतरी होती है। नर्मदा नदी, सरस्वती नदी या समुद्र संगम में यदि कोई व्यक्ति चातुर्मास में एक दिन स्नान कर ले तो उसके समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं। जो व्यक्ति चातुर्मास में नियम से एकाग्रचित्त होकर तीन दिन भी नर्मदा स्नान कर लेता है तो उसके पाप के हजारों लाखों टुकड़े हो जाते हैं। जो मनुष्य सूर्योदय के समय चातुर्मास में पंद्रह दिन निरंतर गोदावरी नदी में स्नान करता है वह इस लोक में सारे सुख पाकर भगवान विष्णु के धाम जाता है। जो मनुष्य तीर्थस्थल न जा सके वह भी यदि तिल एवं आंवला मिश्रित जल  या फिर जल में बिल्व पत्र डालकर स्नान करें तो उनके भी समस्त पापों का शमन हो जाता है। बिना स्नान के इस अवधि में कोई कार्य नहीं करना चाहिए। बिना स्नान किए जो भी पुण्य कर्म एवं शुभकर्म किए जाते हैं वे निष्फल हो जाते हैं। ऐसे में किए गए सभी पुण्य कार्यों का फल राक्षसों द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है।
चातुर्मास में  स्नान  के अंत में भगवान श्री हरि का स्मरण करके पित्रों  का तर्पण करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। पित्र तर्पण के बाद षोडशोपचार से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। भगवान के शयन करने पर उनकी षोडशोपचार पूजा महातप के समान मानी जाती है। भगवान विष्णु की प्रतिमा या शालग्राम शिला स्थापित कर के यजुर्वेद के सोलह ऋचाओं वाले महासूक्त पुरुषसूक्त की प्रथम ऋचा”सहस्त्राशीर्षा पुरुष:”मंत्र के आदि में ऊंकार जोड़कर भगवान श्री हरि का आवाहन किया जाता है। दूसरी ऋचा ‘पुरुष एवेदम्’ से श्री हरि को आसन समर्पित किया जाता है। तीसरी ऋचा से पाद्य, चौथी ऋचा से अर्घ्य, पांचवी ऋचा से आचमन, छठी ऋचा से स्नान कराकर पुनः आचमन करना चाहिए। सातवीं ऋचा से भगवान श्री हरि को वस्त्र, आठवीं से यज्ञोपवीत, नौवीं ऋचा से चंदन, दसवीं से पुष्प, ग्यारहवीं से भगवान श्री हरि को धूप अर्पित करना चाहिए। चातुर्मास में भगवान श्री हरि को  कपूर, चंदन दल, मिश्री, मधु (शहद) और जटामासी से युक्त अगरु की धूप अर्पित करना चाहिए। बारहवीं ऋचा से भगवान श्री हरि को दीपदान करना चाहिए। चातुर्मास में जो मनुष्य भगवान विष्णु के आगे दीपदान करता है उसके सारे पाप क्षणभर में जलकर भस्म हो जाते है।
 दीपदान के बाद तेरहवीं ऋचा के साथ  भगवान विष्णु को अन्न युक्त नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। चौदहवीं ऋचा से आरती करके पंद्रहवी ऋचा द्वारा ब्राह्मणों के साथ भगवान के चारों ओर घूमकर परिक्रमा करनी चाहिए। अंत में सोलहवीं ऋचा द्वारा भगवान विष्णु के साथ अपनी एकता का चिंतन करना चाहिए।
 स्कंद पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने भक्तों के सामने  परम अद्‌भुत रूप धारण कर लिया | उनका यह रूप हरिहर स्वरूप था। वे आधे शरीर से शिव और आधे शरीर से विष्णु हो गये।  उनके एक ओर भगवान विष्णु के चिन्ह तथा दूसरी ओर भगवान शंकर के चिन्ह दिखाई देने लगे। विष्णु के चिन्ह की ओर वाले शरीर के पास गरुड़ और महादेव के चिन्ह वाले शरीर के पास नन्दी (वृषभ) विराजित थे। एक ओर बादलों के समान श्याम वर्ण तो दूसरी ओर कर्पूर की भाँति गौर वर्ण दृश्यमान था। भगवान श्री हरि विष्णु और देवाधिदेव महादेव एक ही शरीर में समाविष्ट होकर दिखाई देने लगे और मन्दराचल पर्वत पर हरिहर स्वरूप में प्रतिष्ठापित हो गए। चातुर्मास में इस हरिहर मूर्ति का स्मरण मात्र करने से मनुष्य का कल्याण हो जाता है।
जिस प्रकार गण्डकी नदी में भगवान विष्णु शालग्राम रूप में मिलते हैं उसी प्रकारा नर्मदा नदी में भगवान महादेव नर्मदेश्वर के रूप में विराजमान हैं। ये दोनों स्वयं प्रकट होते हैं। स्वयं देवाधिदेव महादेव ने माता पार्वती से चातुर्मास में “नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करने की प्रेरणा दी।  माता पार्वती ने हिमालय के सुंदर शिखर पर चातुर्मास तपस्या  के लिए प्रस्थान किया, तब महादेव जी पृथ्वी पर विचरण करने लगे । यमुना जी के जल में स्नान करके महादेव जी ने यमुना जी को वरदान दिया कि उनके पुण्य तीर्थ में स्नान करने वाले के सहस्त्रों पाप क्षण भर में नष्ट हो जाएंगे और वह स्थान हर तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध होगा।वरदान देकर देवाधिदेव महादेव हाथ में वाद्य यंत्र , शिखर पर जटा और ललाट में त्रिपुण्ड धारण करके गीत गाते और नाचते चले जा रहे थे । इस पर मुनियों ने क्रोधित होकर महादेव जी को लिंगरूप में होने का श्राप दे दिया। भगवान शंकर का यह रूप अमरकंटक में पर्वत के रूप में प्रकट हुआ। यहीं से नर्मदा नदी निकली।
 स्कंद पुराण के अनुसार नर्मदा में स्नान करके, उसका जल पीकर और उसके जल से पित्रों का तर्पण करके मनुष्य इस पृथ्वी पर दुर्लभ कामनाओं को भी प्राप्त कर लेता है। जो मनुष्य नर्मदा में स्थित शिवलिंगो का पूजन करेंगे वे स्वयं शिवस्वरूप हो जाएंगे। विशेष रूप से चातुर्मास में शिवलिंग की पूजा महान फल देने वाली है। चातुर्मास में रुद्रमंत्र का जाप, शिव की पूजा, और शिव में अनुराग विशेष रूप से फलदायी है। जो मनुष्य चतुर्मास में पंचामृत से भगवान शिव को स्नान कराते है उन्हें गर्भ की वेदना सहन नहीं करना पड़ती। जो शिवलिंग के मस्तक पर मधु (शहद) से अभिषेक करेंगें उनके सहस्त्रों दुख तत्काल नष्ट हो जाएंगे। जो दीपदान करेंगे वे  शिवलोक जाएंगे। जो जलधारा से युक्त नर्मदेश्वर महालिंग का चातुर्मास में विधिपूर्वक पूजन करता है, वह शिवस्वरूप हो जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार स्वयं ऋषि गालव जी ने कहा है कि चातुर्मास में शिव और विष्णु दोनों की भक्तिपूर्वक पूजन करना चाहिए जो शालग्राम रूपी हरि और नर्मदेश्वर रूप में हर (शिव) की पूजा करते है भगवान श्री हरि उन्हें मोक्ष प्रदान करते हैं।(विभूति फीचर्स)

गौ हत्या और तस्करी करने वाले 4 कसाई गिरफ्तार

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Bhopal. भोपाल। बिलखिरिया थाना इलाके में गोवंश का वध करने के मामले में मंगलवार को चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें से तीन के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत भी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने उनका जुलूस निकालते हुए उनके खिलाफ एनएसए के तहत भी कार्रवाई की है। इनमें से तीन को पूछताछ के लिए एक दिन के रिमांड पर भी लिया है। इस मामले में फरार एक आरोपित की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। पुलिस अधीक्षक देहात प्रमोद कुमार सिन्हा के मुताबिक अमझारा के जंगल में एक साथ आधा दर्जन गायों की हत्याकर उनका मांस बेचने के आरोप में चार युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान जहांगीराबाद में आम वाली मस्जिद के पास रहने वाले मो असलम, इस्लामपुरा तलैया निवासी अर्सलान कुरैशी, जिंसी चौराहा के पास रहने वाले मो सादिक एवं अमझरा निवासी नररुद्दीन के रूप में हुई।

इन्होंने जंगल में चरने गई गायों की हत्या करने के बाद मांस अजहर की लोडिंग पिकअप में भरकर बेचने के लिए भेज दिया था। अजहर की तलाश की जा रही है। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त चाकू, बका के अलावा मृत गायों के सींग, कान का हिस्सा आदि भी बरामद किया है। आरोपित असलम, सादिक और अरसलान के खिलाफ एनएसए के तहत भी कार्रवाई भी की गई है। पुलिस ने आरोपितों का इलाके में जुलूस भी निकाला। गिरफ्तार आरोपितों में से अर्सलान और सादिक रायसेन जिले के सलामतपुर में भी गोकशी की वारदात कर चुके हैं। उनके खिलाफ सलामतपुर थाने मे केस भी दर्ज है।

राजस्थान: जिले में गौ माता की सेवार्थ गौसवामणी का हुआ आयोजन

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राजस्थान: विक्रम संवत २०८१ आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी (१४ जूलाई २०२४) को महावीर प्रसाद बंसल मीरा देवी बंसल निवासी डाबला बिहार हाल निवासी रायपुर छत्तीसगढ़ के द्वारा गौ माता की सेवार्थ गौसवामणी का आयोजन किया गया।

विस्तार

राजस्थान: विक्रम संवत २०८१ आषाढ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी (१४ जूलाई २०२४) को महावीर प्रसाद बंसल मीरा देवी बंसल निवासी डाबला बिहार हाल निवासी रायपुर छत्तीसगढ़ के द्वारा गौ माता की सेवार्थ गौसवामणी का आयोजन किया गया।

विदित रहे महावीर मीरा देवी कमल खड़का वालों के मौसा मौसी हैं।कमल गौ सेवा के प्रति समर्पित हैं और सदैव सभी को गौ माता की सेवा के लिए प्रेरित करते रहते हैं उन्होंने भी गौशाला में सहयोग दिया है व गौसवामणी आयोजित करवाई है।विदित रहे बंसल परिवार गौ माता की सेवा के प्रति तथा सनातन धर्म के प्रति बहुत ही आस्थावान है और गौसेवा व धार्मिक कार्य में सदैव योगदान देता रहता है।

हम समस्त गौ सेवक आपका हार्दिक अभिनंदन करते हैं। ईश्वर व गौ माता की कृपा से आप व पूरा बंसल परिवार सदैव हंसता मुस्कुराता हुआ आनंदपूर्वक जीवन व्यतीत करें। सभी स्वस्थ रहें प्रसन्न रहें। आप सभी को इस पृथ्वी पर समस्त सुख प्राप्त हो आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो यही हम समस्त गो सेवकों की ईश्वर से प्रार्थना है।

चरित्रवान माता-पिता ही सुसंस्कृत संतान बनाते हैं*    

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(द्वारका प्रसाद चैतन्य – विनायक फीचर्स)
अंग्रेजी में कहावत- ‘दि चाइल्ड इज ऐज ओल्ड ऐज हिज एनसेस्टर्स’ अर्थात् बच्चा उतना पुराना होता है जितना उसके पूर्वज। एक बार संत ईसा के पास आई एक स्त्री ने प्रश्न किया- बच्चे की शिक्षा-दीक्षा कब से प्रारंभ की जानी चाहिए? ईसा ने उत्तर दिया- गर्भ में आने के 100 वर्ष पहले से। स्त्री भौंचक्की रह गई पर सत्य वही है, जिसकी ओर ईसा ने इंगित किया। सौ वर्ष पूर्व जिस बच्चे का अस्तित्व नहीं होता, उसकी जड़ तो निश्चित ही होती है, चाहे वह उसके बाबा हों या परबाबा। उनकी मन:स्थिति, उनके आचार, उनकी संस्कृति पिता पर आई और माता-पिता के विचार, उनके रहन-सहन, आहार-विहार से ही बच्चे का निर्माण होता है। कल जिस बच्चे को जन्म लेना है, उसकी भूमिका हम अपने में लिखा करते हैं। यदि यह प्रस्तावना ही उत्कृष्ट न हुई तो बच्चा कैसे श्रेष्ठ बनेगा? भगवान राम जैसे महापुरुष का जन्म रघु, अज और दिलीप आदि पितामहों के तप की परिणति थी, तो योगेश्वर कृष्ण का जन्म देवकी और वसुदेव के कई जन्मों की तपश्चर्या का पुण्यफल था। अठारह पुराणों के रचयिता व्यास का आविर्भाव तब हुआ था, जब उनकी पांच पितामह पीढिय़ों ने घोर तप किया था। हमारे बच्चे श्रेष्ठ,सद्गुणी बनें, इसके लिए मातृत्व और पितृत्व को गंभीर अर्थ में लिए बिना काम नहीं चलेगा।
महाभारत के समय की घटना है। द्रोणाचार्य ने पांडवों के वध के लिए चक्रव्यूह की रचना की। उस दिन चक्रव्यूह का रहस्य जानने वाले एकमात्र अर्जुन को कौरव बहुत दूर तक भटका ले गए। इधर पांडवों के पास चक्रव्यूह भेदन का आमंत्रण भेज दिया। जब सारी सभा सन्नाटे में थी, तब 16 वर्षीय राजकुमार अभिमन्यु खड़े हुए और बोले- ‘मैं चक्रव्यूह भेदन करना जानता हूं।‘ युधिष्ठिर ने साश्चर्य प्रश्न किया- ‘तात! मैंने तो तुम्हें कभी भी चक्रव्यूह सीखते नहीं देखा, और न ही सुना।‘  अभिमन्यु ने कहा- ‘जब मैं अपनी मां सुभद्रा के पेट में था। मां को जब प्रसव पीड़ा प्रारंभ हुई, तब मेरे पिता अर्जुन पास ही थे। मां का ध्यान दर्द की ओर से बंटाने के लिए उन्होंने चक्रव्यहू के भेदन की क्रिया बतानी प्रारंभ की। छह द्वारों के भेदन की क्रिया बताने तक मेरी मां ध्यान से सुनती रहीं और गर्भ में बैठा हुआ मैं उसे सीखता चला गया पर सातवें और अंतिम युद्ध की बात बताने से पूर्व ही मां को निद्रा आ गई, उन्हीं के साथ में भी विस्मृति में चला गया। उसके बाद मेरा जन्म हो गया। छह द्वार तो मैं आसानी से तोड़ लूंगा। सातवें में सहायतार्थ आप सब पहुंच जाएंगे तो उसे भी तोड़ लूंगा।‘
यह घटना उस सत्य की ओर संकेत करती है कि पुत्र गर्भ में आए उससे पूर्व ही माता-पिता को अपनी शारीरिक और मानसिक तैयारी प्रारंभ कर देनी चाहिए। वर्षों पहले अमेरिका में जन्मे एक बालक की बड़ी चर्चा चली। इस बालक की आंख में ‘जे’ और ‘डी’ की आकृति उभरी हुई थी। वैज्ञानिकों ने उसकी बहुत जांच की पर कारण न जान पाए। आखिर इस गुत्थी को मनोवैज्ञानिक ने सुलझाया। युवती ने उन्हें बताया कि मैं अपने विद्याध्ययन काल से ही जान डिक्सन की विद्वता से प्रभावित रही हूं। मेरी सदा से यह इच्छा रही है कि मेरी जो संतान हो वह जान डिक्सन की तरह ही विद्वान हो। मैंने अपनी यह इच्छा कभी किसी को बताई तो नहीं पर जब भी इस बात की याद आती, मैं अक्सर दीवार या कापी पर जे.डी. अक्षर लिखकर अपनी स्मृति को गहरा करती रही हूं। उन्होंने अपने अध्ययनकाल की कई कॉपियां और पुस्तकें भी दिखाईं, जिनमें जे.डी. लिखा मिला।
हमारे पूर्वज इन तथ्यों  से पूर्ण परिचित थे, तभी उन्होंने न केवल ऐसी जीवन-व्यवस्था निर्मित की थी, जिससे जाति स्वत: ही श्रेष्ठ आचरण वाली संतान देती चली जाती है। गर्भाधान को उन्होंने षोड्स संस्कारों में से एक संस्कार माना था और उसे पूर्ण पवित्रता के साथ संपन्न करने की प्रथा प्रचलित की थी। बालक का निर्माण माता-पिता भावभरे वातावरण में किया करते थे और जैसी आवश्यकता होती थी, उस तरह की संतान समाज को दे देते थे। सती मदालसा ने अपने तीनों पुत्रों विक्रांत, सुबाहु और अरिदमन को जो शिक्षा-दीक्षा और संस्कार दिए, वे पारमार्थिक और पारलौकिक थे। फलत: उन तीनों ने ही प्रौढ़ावस्था में पहुंचने से पूर्व ही संन्यास धारण कर अपना सारा जीवन लोकमंगल में लगा दिया। वह कहा करती थीं- हे पुत्र! तू अपनी जननी मदालसा के शब्द सुन। तू शुद्ध है, बुद्ध है, निरंजन है, संसार की माया से रहित है। यह संसार स्वप्न मात्र है। उठ, जाग्रत हो, मोहनिद्रा का परित्याग कर। तू सच्चिदानंद आत्मा है, अपने स्वरूप का ज्ञान प्राप्त कर।
महारानी की शिक्षा से महाराज ऋतुध्वज बहुत चिंतित हुए। उन्होंने मदालसा से कहा कि यदि ऐसा ही रहा तो राज-काज कौन संभालेगा? इस बार जो पुत्र हुआ, उसे मदालसा ने राजनीति की शिक्षा दी और कहा-‘हे तात! तुम राज्य करो। अपने मित्रों को आनंदित करो, सज्जन पुरुषों की रक्षा करना, यज्ञ करना, गौ और ब्राह्मणों की रक्षा के लिए युद्ध अनिवार्य हो तो युद्ध करना, भले ही रणभूमि में तुम मृत्यु को प्राप्त हो।‘
ये उदाहरण इस बात के प्रतीक हैं कि बालक माता-पिता के शारीरिक और मानसिक सांचे और ढांचे में ढले, समाज एवं संस्कृति द्वारा संस्कारित मिट्टी के पुतले होते हैं। जैसे माता-पिता होंगे, वैसी ही संतान होगी। राम वन गए, तब की घटना है। राम ने लक्ष्मण के चरित्र की परीक्षा लेनी चाही। उन्होंने प्रश्न किया- ‘हे लक्ष्मण! सुंदर पुष्प, पके हुए फल और मदमस्त यौवन देखकर ऐसा कौन है, जिसका मन विचलित न हो जाए?’ इस पर लक्ष्मण ने उत्तर दिया- ‘आर्य श्रेष्ठ! जिसके पिता का आचरण सदैव से पवित्र रहा हो, जिसकी माता पतिव्रता रही हो, उनके रज-वीर्य से उत्पन्न बालकों के मन कभी चंचल नहीं हुआ करते।‘
लक्ष्मण का यह उपेदश माता-पिता को यह सोचने के लिए विवश करता है कि यदि श्रेष्ठ संतान की आवश्यकता है तो उसे ढालने के लिए अपना चरित्र सांचे की तरह बनाना चाहिए।
संस्कारों की पूर्व सूत्रधार माता ही है। वह जिस तरह के संकल्प और विचार बच्चे में पैदा करती है, वैसी ही उसमें ग्रहणशीलता और आविर्भाव हो जाता है और बाद में उसी तरह के तत्व वह संसार में ढूंढ़कर अपने संस्कारजन्य गुणों का अभिवर्द्धन करता है। संस्कारवान माताएं बच्चों के चरित्र की नींव बाल्यावस्था में डालती हैं।
संतान के रूप में जीवात्मा का अवतरण और उसकी विकास-यात्रा में योग देना माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। पिता गर्भधारण में केवल सहयोग प्रदान करता है, बाद में उस गर्भ को पकाने का कार्य माता ही करती है, इसलिए पिता की अपेक्षा माता का उत्तरदायित्व अधिक है। बिना उचित ज्ञान और स्थिति की जानकारी हुए माता इस कत्र्तव्य का भलीभांति पालन कर सकती है, यह असंभव है। अतएव महिलाओं को यह ज्ञान होना नितांत आवश्यक है कि संतान कामवासना का परिणाम नहीं है, काम तो मात्र एक प्रेरक तत्व है, जो एक आत्मा के अवतरण के लिए माता-पिता को प्रेरित करता है।
गर्भावस्था में बच्चा अपनी माता के केवल प्रकट आचरण से ही प्रभावित नहीं होता, उससे तो बहुत हल्का असर बालक की मनोभूमि पर पड़ता है, अधिकांश प्रभाव तो मानसिक भावनाओं और विचारणाओं का होता है। (विनायक फीचर्स)

छत्तीसगढ़ – गौ वंश के अवैध परिवहन पर सरकार ने सख्ती दिखाई

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रायपुर। राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी गौ वंश के अवैध परिवहन पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। इस संबंध में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने आज ही आदेश जारी किया है। जिसके अनुसार सक्षम अधिकारी की अनुमति के बगैर परिवहन अवैध होगी।

गौ तस्करी अब गैर जमानती अपराध माना जाएगा। अवैध परिवहन पाए जाने पर सात साल तक की सजा और पचास हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। प्रदेश के जिस रूट पर अवैध परिवहन पाया जाता है वहां के एसपी और थाना प्रभारी का सीआरभी खराब होगा।

आदेश में कहा गया है कि ⁠अवैध परिवहन करने वालों पर ही बर्डन ऑफ प्रूफ की जिम्मेदारी होगी। ⁠परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ी में फलैक्स लगाने की अनिवार्यता होगी। अवैध परिवहन में इस्तेमाल गाड़ी राजसात की जाएगी। वाहन मालिकों पर भी कार्रवाई की जाएगी। गौ वंश के अवैध परिवहन को रोकने जिला स्तर पर एक राजपत्रित अधिकारी की नियुक्ति होगी। ये नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाएंगे। अवैध परिवहन के पुराने प्रकरणों को जिलेवार एकत्रित किया जाएगा. आदतन अपराधियों को ट्रैक किया जाएगा. उन रास्तों पर भी निगरानी कड़ी होगी, जहां से अवैध परिवहन किया जाता रहा है.

ये हैं प्रमुख प्रावधान
पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 अनुसार पशुओं को मारने, ठोकर मारेगा, उस पर अत्यधिक सवारी करेगा, अत्यधिक बोझ लादेगा या किसी यान में ऐसे रीति से ले जाएगा, जिससे उसे यातना पहुंचती है या उसे परिरूद्ध करेगा, पर्याप्त खाना, जल या आश्रय नहीं देगा, उनके विरुद्ध दांडिक कार्यवाही किए जाने का प्रावधान किया गया है।
गौवंश एवं दुधारू पशुओं की तस्करी एवं वध की घटनाओं के रोकथाम के लिए आसूचना तंत्र विकसित किया जाएगा।
गौवंश का वध व वध किए जाने का प्रयास किए जाने की सूचना प्राप्त होने पर घटना पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सुसंगत धाराओं में अपराध दर्ज कर अभियुक्तों की पहचान स्थापित करते हुए कार्यवाही की जाएगी।
गौवंश एवं दुधारू पशुओं को अवैध परिवहन (तस्करी) के दौरान जब्त करने पर नियमानुसार संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए गौशाला कांजी हाउस या संबंधित संस्था को सुपुर्दगी में दिया जाएगा।
पशु वध शालाओं के विरुद्ध जिला मजिस्ट्रेट के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विधिसम्मत कार्यवाही की जाएगी।
गौवंश का परिवहन सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी निर्धारित प्रारूप में अनुज्ञापत्र के बिना परिवहन न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा।
अनुज्ञापत्र धारक वाहनों में मवेशी के परिवहन करते समय पृथक से ऐसे वाहनों पर फ्लैक्स/बैनर लगाकर चिन्हाकिंत किया जाएगा कि ऐसे वाहन में गौवंश का परिवहन किया जा रहा है।
अवैध रूप से गौवंश परिवहन करने वाले वाहनों को राजसात किया जाएगा एवं वाहन मालिक पर भी आपराधिक दाण्डिक कार्यवाही किया जाएगा
प्रकरण में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
आरोपी, संदिग्ध, गवाह व मुखबीर से सघन पूछताछ करते हुए सूचना एकत्रित किया जाएगा।
विगत वर्षों में हुई घटनाओं की जानकारी संकलित व सूचीबद्ध करते हुए तस्करी के रूट, संवेदनशील क्षेत्र को चिन्हित करते हुए विशेष कार्य योजना तैयार की जाएगी।
जिला/थाना स्तर पर गौवध तथा गौवंश की तस्करी की घटनाओं में संलिप्त व्यक्तियों को चिन्हित कर इनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में विशेष रूप से अवैध परिवहन (तस्करी) रोकने संवेदनशील क्षेत्रों में स्थैतिक सर्विलेंस पाइंट स्थापित की जाएगी।
तस्करी में प्रयोग होने वाले संभावित मार्गों पर निरंतर पेट्रोलिंग की जाएगी।
अभियुक्तों द्वारा अवैध तस्करी से अर्जित सम्पत्ति को चिन्हित करते हुए नियमानुसार जब्ती/कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
विगत वर्षों की घटनाओं में संलिप्त अभियुक्तों की सूची तैयार कर आदतन अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोली जाएगी।
अपराध में संलिप्त सह-अभियुक्तों व सहयोगियों को चिहिन्त कर उन पर सतत् निगरानी रखी जाएगी।
उक्त प्रकरणों में अपराध विवेचना के साथ वित्तीय जांच एवं मनीट्रेल का भी पता लगाया जाएगा।
उक्त घटनाओं की रोकथाम के लिए अन्य विधि प्रवर्तक एजेंसी व राज्यों के साथ भी जानकारी साझा की जाएगी।
जिला स्तर पर गौवंश के वध तथा गौवंश व दुधारू पशुओं की तस्करी (अवैध परिवहन) से संबंधित समस्त लम्बित प्रकरणों की सूची तैयार कर इनका समुचित पर्यवेक्षण/मानिटरिंग करते हुए शीघ्र कार्यवाही पूर्ण कराकर निराकरण किया जाए।
दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा किया जाकर विवेचना की कमियों की पूर्ति के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाए।
न्यायालय में विचाराधीन मामलों की अभियोजन में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए, जिससे अभियुक्तों की जमानत का लाभ न मिल सके तथा अभियुक्त को अभियोजित किया जा सके।
जिला स्तर पर एक राजपत्रित अधिकारी को उक्त घटनाओं की रोकथाम व पर्यवेक्षण करने नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी व इसकी जानकारी सभी थानों/जिला स्तर/सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि उक्त घटनाओं के संबंध में जानकारी नोडल अधिकारी को प्रदान की जा सके।
यदि किसी पुलिस अधिकारी/कर्मचारी की गौवंश के वध, गौवंश व दुधारू पशुओं की तस्करी (अवैध परिवहन) की कार्यवाही में किसी प्रकार की शिथिलता व संलिप्तता पायी जाती है तो उनके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी.

स्टंटमैन से निर्देशक बने जेम्स जॉन बरला की हिंदी फिल्म “रॉकी दी स्लेव” 26 जुलाई 2024 को होगी सिनेमाघरों में रिलीज़

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अक्षय कुमार की फिल्म इंटरनेशनल खिलाड़ी, और सनी देओल की फिल्म बॉर्डर, ज़िद्दी सहित दर्जनों फिल्मो में स्टंटमैन के रूप में जान जोखिम में डाल कर एक्शन करने वाले जेम्स जॉन बरला अब फिल्म डायरेक्टर बन गए हैं। स्टंटमैन के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत करने के बाद एक्शन डायरेक्टर फिर लेखक निर्देशक बने जेम्स जॉन बरला की हिंदी फिल्म “रॉकी दी स्लेव” 26 जुलाई 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही है और यह फिल्म भी जबरदस्त और रियल एक्शन से भरपूर है।

हजारीबाग (झारखंड) से 80 के दशक में मुम्बई आए जेम्स जॉन बरला की जिंदगी की कहानी भी किसी फिल्म की स्टोरी से कम नही है। 14 वर्ष की छोटी सी उम्र में वे झारखंड से मुंबई आ गए थे। उन्होंने मायानगरी में बहुत कठिन संघर्ष किया फुटपाथ पर भी समय बिताया लेकिन हिम्मत नहीं हारी। तमाम परेशानियों का उन्होंने एक योद्धा की तरह सामना किया और बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई। हालांकि स्टंटमैन के रूप में उन्होंने जान हथेली पर रखकर शॉट्स दिए और वह भी उस दौर में जब इस तरह के खतरनाक सीक्वेंस के लिए सुरक्षा उपाय बहुत कम थे। जब एक्शन डायरेक्टर उन्हें बहु मंजिला बिल्डिंग से कूदने के लिए कहते तो जेम्स प्रभु का नाम लेकर निर्भीकता पूर्वक कूद जाते थे। हां कांच टूटने के सीन के दौरान कई बार वह चोटिल हुए। जेम्स ने सुपरस्टार अक्षय कुमार का आभार जताया कि उनके प्रयास से स्टंटमैन को इंश्योरेंस पॉलिसी मिल सका है।
स्टार एंजेल फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले बनी फिल्म रॉकी द स्लेव की निर्मात्री शोभा बरला हैं। फिल्म में शक्ति कपूर, दलीप ताहिल, सुदेश बेरी, मुश्ताक खान, प्रदीप काबरा जैसे कलाकारों ने अभिनय किया है। रॉकी का टाइटल रोल ईसा ने निभाया है जबकि रॉकी के बचपन के रोल में रिचर्ड बरला नज़र आएंगे, वहीं इस फिल्म की हिरोइन लेजली त्रिपाठी हैं।
फिल्म के निर्देशक और एक्शन डायरेक्टर जेम्स जॉन बरला ने बताया कि उन्होंने ही इस फिल्म की कहानी लिखी है। दरअसल यह फिल्म गुलामी की मानसिकता रखने वालों के विरुद्ध एक आवाज है कि आप किसी को ज्यादा दिनों तक गुलाम या स्लेव बनाकर नहीं रख सकते जब वह जागता है तो फिर रॉकी जैसा तूफान सामने आता है जो बड़ी तबाही मचाता है।


फिल्म की प्रोड्यूसर शोभा बरला ने कहा कि रॉकी द स्लेव दरअसल एक मनोरंजक सिनेमा है जिसमें अच्छी कहानी भी है, खतरनाक एक्शन भी है, ड्रामा भी है, रोमांस और सस्पेंस भी है। फिल्म की शूटिंग मुम्बई के स्टूडियो और कुछ जगहों पर की गई है।
फिल्म के निर्देशक एवं एक्शन डायरेक्टर जेम्स जॉन बरला ने बताया कि रॉकी द स्लेव के निर्माण में सभी कलाकारों और तकनीशियनों ने कड़ी मेहनत की है। हमें आशा है कि एक्शन फिल्मों के दीवाने दर्शकों को यह फिल्म पसंद आयेगी। फिल्म में चार अलग अलग सिचुएशन के गाने हैं। एक आइटम सॉन्ग ममता शर्मा ने गाया है जबकि फ़िल्म का टाइटल सॉन्ग अमेरिका के सिंगर अजिताभ रंजन (एजे रंजन) ने गाया है। एक लोरी अल्का याग्निक ने गाई है वहीं ऋतु पाठक की आवाज में एक रोमांटिक गीत है।
फिल्म का प्रचार वनअप रिलेशन्स द्वारा किया जा रहा है।