Home Blog Page 449

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा- बांग्लादेशी हिन्दुओं को भारत में शरण दी जाए

0

नई दिल्ली: बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद वहां के हिंदुओं के साथ हुमारपीट की घटनाएं सामने आई है. इसको लेकर विश्व भर में विरोध किया गया. इसी कड़ी में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर प्रताड़ित हिंदुओं को भारत में शरण देने की मांग की है. साथ ही शरण लेने वाले हिंदुओं के भोजन और वस्त्र की व्यवस्था की जाए.

शंकराचार्य ने राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में लिखा है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद अल्पसंख्यक हिन्दुओं की नृशंस हत्या की जा रही है. महिलाओं के साथ रेप किया जा रहा है. वहां की वर्तमान सरकार हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने में अब तक सफल नहीं हो सकी है. इसलिए मोदी सरकार को तत्काल अल्पकालिक शरण देनी चाहिए. उनके लिए बांग्लादेश के अंदर उनको सुरक्षित रूप से रहने की स्थायी व्यवस्था के लिए भारत सरकार आवश्यक कदम उठाने चाहिए.

उन्होंने कहा कि सभी हिन्दुओं की तरफ से पीएम मोदी से अनुरोध है कि जब तक बांग्लादेश के अंदर हिन्दुओं की सुरक्षा व्यवस्था पूर्णरूपेण सुनिश्चित नहीं कर ली जाती तब तक वहां से पलायन कर भारत की सीमा पर एकत्रित हुए बांग्लादेशी हिन्दुओं को भारत में सेना और प्रशासन के नियंत्रण में शरण दी जाए. हम यह वचन देते हैं कि उन शरणार्थी हिन्दुओं के भोजन और वस्त्र पर होने वाले व्यय भार का वहन हम हिन्दू धर्माचार्य, हमारे धर्मावलम्बी और हमारे हिन्दू धन कुबेर करेंगे. हम सरकारी कोष पर भार नहीं आने देंगे. हमारे हिन्दुओं की रक्षा करें. विश्व में कहीं भी हिन्दुओं पर संकट आए तो भारत की भूमि से यह साफ संदेश देना चाहिए कि विपत्ति आने पर हिन्दू भारत में कभी भी जाकर शरण ले सकते हैं.

अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में आरएसएस की कई हस्तियां शामिल होंगी: डॉ. गिरीश जयंतीलाल शाह

0
समस्त महाजन के आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ( 23 से 25 अगस्त,24) अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में आरएसएस की कई हस्तियां शामिल होंगी: डॉ. गिरीश जयंतीलाल शाह
 अजित प्रसाद महापात्र, नवल किशोर जी, सुनील विधावंश एवं गोपाल आर्या उपस्थित रहेंगे
 राजस्थान के विभिन्न शहरों में पशुपालन एवं पर्यावरण पर आंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किये जायेंगे।
वैश्विक स्तर पर जल, जन, जमीन, जंगल, जानवरों की सेवा में कार्यरत समस्त महाजन की गतिविधियों में मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, बचाव कार्य, गौशालाओं और पंजरापोलो का समर्थन और आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भर कृषि, जल संरक्षण, भोजन रथ, सामाजिक उत्थान, विशेषकर प्राकृतिक जिसमें मानव निर्मित आपदाओं के दौरान तत्काल सहायता, पशु वध और बलि की रोकथाम, राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर जीवदया, गौसेवा, मानव सेवा सहित विभिन्न सेवाएँ शामिल हैं।

यह बता दे कि समस्त महाजन 21 वर्षों से अधिक समय से पशु कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास, मानव कल्याण, स्वच्छता अभियान, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत आदि जैसे विभिन्न सामाजिक कार्यों के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी डाॅ. गिरीशभाई शाह जो भारत सरकार के एनिमल वेल्फेर बोर्ड के सदस्य है वे अपना अधिकांश समय जीवदया, गौसेवा, मानवसेवा तथा शाकाहार प्रचार-प्रसार के कार्यों में व्यतीत करते हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित कई क्षेत्रों में 300 से अधिक गांवों में तालाब निर्माण, गौचर निर्माण जैसे कार्यों के लिए समस्त महाजन सेवारत है।

 

समस्त महाजन ने 23 से 25 अगस्त (शुक्रवार-शनिवार-रविवार) तक धर्मज से पिंडवाड़ा तक ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ का आयोजन किया है। यह यात्रा गौशालाओं, पांजरापोलो के बारे में जानने, समझने और जानवरों को शाता देने के लिए की गई है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, गौसेवा गतिविधिके अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक अजीत प्रसाद महापात्र, अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक नवल किशोरजी, अखिल भारतीय गौसेवा क्षेत्र संयोजक सुनील विध्वंश तथा आरएसएस के अखिल भारतीय पर्यावरण प्रमुख गोपाल आर्या सहित अन्य महानुभाव उपस्थित रहेंगे। अवसर पर गोपाल आर्या ने कहा कि जिस तरह से पर्यावरण की समस्या उत्पन्न हो रही है उसको लेकर हमें सचेत होना होगा।
इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान 23 अगस्त को 146 एकड़ भूमि पर घास उगाकर गांव के पशुधन का भरण-पोषण कैसे किया जाए, 6000 पशुओं को ग्राम पंचायत से मूल किंमत पर घास मिले, हर साल रु. 50 लाख की आय आदि और 17000 इमली, आंवला और आम के पेड़ों का दौरा और शाम 5 बजे से 9 बजे तक अहमदाबाद में 700 गिर गायों के साथ बंसी गीर गौशाला का दौरा और गौशाला में एक शैक्षणिक कक्षा का आयोजन किया गया है ।
24 अगस्त सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक वीरमगाम में 4 तालाब, 5000 पेड़, 2700 पशुओं के साथ 1200 एकड़ गौचर भूमि का दौरा और दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक गुजरात में बनासकांठा जिले के भाभर गौशाला में 11,000 गायों के साथ वैज्ञानिक मॉडल के साथ जलाराम गौशाला का दौरा, 25 अगस्त सुबह 9 बजे से 12 बजे तक राजस्थान आबू रोड के पास पावापुरी में स्थित 6000 गायो की गौशालाएं और 1 लाख पेड़ों की सुंदर व्यवस्था को देखने और वैज्ञानिक ढंग से निर्मित सुविधाजनक गौशाला का निरीक्षण करने की योजना है।
उसके साथ राजस्थान के विभिन्न शहरों में पशुपालन एवं पर्यावरण पर आंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किये जायेंगे। ईसके साथ ही गौशालाओं, गौशाला/पांजरापोलो को स्वावलंबन की ओर परिवर्तित करना, गौ-आधारित संस्कृति की पुनर्स्थापना, पशु-विकास, गौ-आधारित कृषि, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर जन-जागरूकता, गौ-पालन, जीवन-रक्षा के संबंध में विभिन्न कानूनों का निर्माण तथा मौजूदा कानून का कड़ाई से कार्यान्वयन करना, गौशाला-पंजरापोलों की सुविधाओं का निर्माण करना शामिल किया गया है।
इसके साथ-साथ-साथ जानवरों और पक्षियों के स्वास्थ्य को बनाए रखना, रासायणिक कीटनाशकों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना, भारत में 6.50 लाख ग्राम गौचर विकसित करना, देशी वृक्षों का रोपण बढ़ाना, जल संरक्षण, आत्मा और विज्ञान का एकीकरण, मनुष्यों में पशु- पक्षियों, के प्रति अधिक करुणा पैदा करना, वर्षा जल संचयन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता, अहिंसक-स्वदेशी उपचार फसल सुरक्षा, शाकाहार के प्रचार-प्रसार समेत अन्य सवालों पर परिणामलक्षी तरीके से चर्चा की जाएगी।
यात्रा में शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति पंजीकरण शुल्क रु. 1000 है। जिसमें तीन दिनों का आवास और भोजन शामिल है। सभी को अपने वाहन की व्यवस्था स्वयं करनी होगी।यदि संस्था की व्यवस्था में आना है तो रु. 1000/- अलग से भुगतान करना होगा। बस बड़ौदा या अहमदाबाद से चलेगी। इन दोनों राशियों का भुगतान अलग-अलग करना होगा। गायें हमेशा से भारत की संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही हैं।
‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ एक ऐतिहासिक प्रयास है जिसमें गाय-केंद्रित और गाय-आधारित उद्योगों से जुड़े सभी क्षेत्रों के सैकड़ों लोग भाग लेंगे। इस ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ में पंचगव्य गाय से बने शैंपू, साबुन और गोमूत्र से बने सौंदर्य प्रसाधन, औषधि सहित गाय आधारित उत्पादों के बारे में भी ज्ञान और समझ प्रदान की जाएगी।
अधिक जानकारी के लिए डॉ. गिरीश शाह (मो. 98200 20976), मित्तल खेताणी (मो. 98242 21999), देवेन्द्र जैन (मो. 98251 29111) से संपर्क किया जा सकता है।

सैटेलाइट टीवी चैनल स्वदेश न्यूज महाराष्ट्र और गोवा में हुआ लॉन्च, बधाई देने पहुंचे उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल

0

मुम्बई। स्वदेश न्यूज़ (सैटलाइट टीवी चैनल) उत्तर भारत में काफी समय से बेहद लोकप्रिय रहा है। 12 अगस्त 2024 को मुम्बई के रेडिसन होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र और गोवा में इस चैनल को ऑफिशियल रूप से लॉन्च कर दिया गया है। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में मशहूर गायक उदित नारायण और गायिका अनुराधा पौडवाल उपस्थित हुए और दोनों सितारों ने स्वदेश न्यूज़ को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

इनके साथ कार्यक्रम में अतिथि के रूप में भालचंद्र शिरसाठ सीनियर स्पोकपर्सन (बीजेपी) और आनंद दुबे स्पोकपर्सन शिवसेना (उद्धव ठाकरे) की भी उपस्थिति रही। आनंद दुबे ने कहा कि उत्तर भारत मे स्वदेशी न्यूज़ चैनल लोकप्रियता के साथ चल रहा है। अब महाराष्ट्र और गोवा में भी यह चैनल सुचारू रूप से चलेगा। मेरी ओर से पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं।
आपको बता दें कि यूसुफ बावनगांववाला को इस चैनल का महाराष्ट्र व गोवा का स्टेट हेड बनाया गया है वहीं संजीव कुमार महाराष्ट्र व गोवा के ब्यूरो चीफ हैं। साथ ही फातिमा नकवी बिज़नेस हेड, संदीप उत्तम रंपिसे मुम्बई ब्यूरो चीफ और फिरोज़ पिंजरी महाराष्ट्र के हेड रिपोर्टर हैं।
इस अवसर पर स्वदेश न्यूज़ के एडिटर इन चीफ रवि शंकर श्रीवास्तव, गायक राघव कपूर एवं महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से स्वदेश चैनल के रिपोर्टर भी उपस्थित थे। इसके अलावा चैनल के पुणे ब्यूरो चीफ प्रीतम शाह, पत्रकार आदित्य और राकेश पघारे, प्रेम मोरे (ठाणे रिपोर्टर), अमोल कांबळे, नवी मुंबई रिपोर्टर और रिपोर्टर राजेंद्र त्रीमुखे (अहमदनगर, शिर्डी) भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की एंकर सिमरन आहूजा ने बखूबी लॉन्चिंग इवेंट का संचालन किया।

1775 में ही पड़ गई थी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नींव* 

0
(वेद अग्रवाल- विभूति फीचर्स)
भारतीय स्वतंत्रता का इतिहास जब-जब लिखा जाएगा, तब-तब 10 मई 1875 का दिन बड़ी श्रद्घा एवं सम्मान के साथ अंकित किया जाएगा। इस दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम चिंगारी मेरठ की ब्रिटिश सेना की बैरकों में फूटी थी।
वैसे भारत के इस स्वतंत्रता संग्राम की नींव तो 1775 में ही पड़ गई थी, जब झूठे आरोप मढ़कर बंगाल के महाराज नंदकुमार को फांसी पर चढ़ा दिया गया था। उनकी धन सम्पत्ति छीन ली गई थी और उन्हें सत्ताच्युत कर दिया गया था। सच तो यह है कि  भारत में अंग्रेज साम्राज्य की जो सुदृढ़ इमारत भारत के पहले गर्वनर जनरल वारेन हेस्टिंग्ज के समय से खड़ी होनी शुरू हुई थी, उसकी नींव में जो पहली नरबलि चढ़ाई गई, वह महाराज नंद कुमार की थी।
हेस्टिंग्ज ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी के डायरेक्टरों यानि अपने मालिकों की धनलिप्सा पूरी करने के लिए न्यायालय के विवेक को ताक पर रखकर जहां भी धन था, उसकी प्राप्ति के लिए धन के स्वामियों पर लोमहर्षक अत्याचार किए। वह स्वयं भी रिश्वत और घूसखोरी के आरोपों का पात्र बना। इंग्लैंड की संसद में कई सांसदों ने उसकी घोर और कटु शब्दों में निंदा की। लेकिन वारेन हेस्टिंग्ज ने बेईमानी से प्राप्त धन के बल पर इंग्लैंड के कतिपय पत्रकारों और सत्ताधीशों को खरीद लिया, और किसी तरह घनघोर अपमान से अपनी रक्षा की। कहा जाता है कि समाचार पत्रों में अपने पक्ष में लेखन और प्रकाशन पर ही उन दिनों उन्होंने बीस हजार पौंड खर्च कर दिए थे।
मिथ्या आरोप लगाकर अकारण ही हेस्टिग्ज ने रूहेला सरदारों पर आक्रमण करवा दिया। रूहेलाओं को उनकी सम्पत्ति, सत्ता और धरती से वंचित कर दिया।
फलस्वरूप सन्ï 1773 का रेग्यूलेटिंग एक्ट पास हुआ। हेस्टिंग्ज की प्रभुता पर अंकुश लगाने के लिए चार सदस्यों की परिषद नियुक्त कर दी गई, लेकिन यह अंकुश बहुत प्रभावी नहीं सिद्घ हुआ। अवध की बेगमों और काशी नरेश राजा चेत सिंह पर आमानुषिक अत्याचार किए गए। उनकी धन सम्पत्ति ही नहीं लूटी गई, बल्कि उन्हें सत्ताच्युत भी किया गया। उन्हें घोर अपमान के कड़वे घूंट पीने पर बाध्य होना पड़ा।
महाराज नंद कुमार को फांसी हेस्टिंग्ज के अनेक काले कारनामों की लंबी श्रृंखला की पहली कड़ी थी। महाराज नंद कुमार का अपराध यह था कि उन्होंने गवर्नर जनरल के बढ़ते अत्याचारों को सह न सकने के कारण हेस्टिंग्ज की पोल गवर्नर जनरल की परिषद के सामने खोल दी। यही नहीं, अपने आरोप प्रमाणित भी कर दिए। उन्होंने बतलाया कि हेस्टिंग्ज ने किस प्रकार लगभग साढ़े तीन लाख से अधिक रुपया घूस के रूप में खाया है। इससे हेस्टिंग्ज साहब आपे से बाहर हो गए और उन्होंने येन-केन प्रकारेण महाराज नंद कुमार को अपने रास्ते से हटाने की ठान ली। इसमें उनके कतिपय अंग्रेज साथियों और कुछ भारतीयों की भी सांठगांठ तथा मिलीभगत थी। हालांकि कुछ अंग्रेज विशेष रूप से सर फिलिप फ्रांसिस, वारेन हेस्टिंग्ज के कट्ïटर विरोधी थे, लेकिन उन्होंने भी जब महाराज नंद कुमार पर विपत्ति आयी तो सहायता देने से साफ मुंह मोड़ लिया।
महाराज नंद कुमार के आरंभिक जीवन के विषय में जो कुछ लिखा गया है, उसे जान लेने से फांसी की घटना के महत्व को समझने में सरलता होगी। महाराज नंद कुमार ने बारह वर्ष की उम्र से लेकर बीस वर्ष की उम्र तक आठ वर्ष निरन्तर मुर्शिदाबाद में पं. बापूदेव शास्त्री के घर में रहकर शास्त्राध्ययन किया और फारसी पढ़ी। पं. बापूदेव कोरे सूत्र घुटाने वाले संस्कृत शास्त्री न थे। वह राजनीति, समाजनीति तथा धर्मनीति के भी पूरे पंडित थे। मुर्शिदाबाद के नवाब अली वर्दी खां एवं मीर कासिम अली खां, जो प्रजा के हित में अपना हित समझते थे, सदा शास्त्री जी के साथ सलाह मशविरा किया करते थे।
जब नंद कुमार की अवस्था बाईस वर्ष की हुई, तब पं. बापूदेव के अनुरोध पर नवाब अली वर्दी खां ने महाराज नंद कुमार को महिषादल परगने का राजस्व वसूल करने के कार्य पर नियुक्त कर दिया।
नवाब थे तो विधर्मी पर वे गुण के सामने काले-गोरे, हिन्दू मुसलमान का भेद कम रखते थे। अत: नंद कुमार के काम पर प्रसन्न होकर, नवाब साहब ने उन्हें हुगली का फौजदार (गर्वनर) नियुक्त किया।
हुगली में वह पांच वर्ष फौजदार रहे। इस पद पर काम करके उन्होंने लगभग दो-तीन लाख रुपये पैदा किए। अनंतर गुरूदर्शन की अभिलाषा से महाराज नंद कुमार मुर्शिदाबाद गए। बापूदेव शास्त्री की एक कन्या थी, जिसका नाम प्रमदा देवी था। शास्त्री जी का कोई पुत्र न था। अत: जिन दिनों नंदकुमार शास्त्री के घर में रहकर शास्त्राध्ययन करते थे, उन दिनों उनकी गुरूपत्नी उन पर निज पुत्रवत, स्नेह करती थीं।
महाराज नंद कुमार ब्राह्मण थे। उन्होंने अपने जन्म ग्राम में एक बार यज्ञ किया था, जिसमें एक लक्ष ब्राह्मïणों को भोजन कराया था। महाराज ऐसे उदार थे कि जो कोई मनुष्य उनसे याचना करता, वह उनके घर से निराश नहीं जाता था। महाराज गुरूभक्त भी थे।
अत: गुरूदर्शनार्थ मुर्शिदाबाद जाते समय भगिनी सदृश प्रमदा देवी और मातृवत गुरूपत्नी की भेंट के लिए बहुमूल्य आभूषण बनवाकर ले गए किन्तु जब महाराज मुर्शिदाबाद पहुंचे, तब गुरू पत्नी की मृत्यु और गुरू कन्या के वैधव्य का दारूण समाचार सुनकर, महाराज बड़े दुखी हुए। उनका हृदय दया, ममता, भक्ति एवं कृतज्ञता से परिपूर्ण था।
जिनके लिए वे बहुमूल्य आभूषण बनवाकर ले गए थे, उनमें से एक का देहांत हो गया और दूसरी का, आभूषण धारण करने का अधिकार अपहृत हो गया। इसलिए नंद कुमार ने उन आभूषणों के लाने की चर्चा तक गुरू से न की और आभूषणों को निज परिचित बुलाकीदास महाजन की दुकान में अमानत के रूप में जमा करा दिया। साथ ही मन में संकल्प कर लिया कि इनकी बिक्री का धन प्रमदा देवी को दे देंगे। अनंतर मीर कासिम और कम्पनी के बीच युद्घ हुआ। मुर्शिदाबाद लूटा-पीटा गया। उसी लूट-खसोट में महाराज नंदकुमार की अमानत भी लुट गई। बुलाकीदास वैण्णव थे। उन्होंने महाराज को उनकी अमानत के बदले में 48021 रुपए का एक रूक्का लिख दिया। सन् 1769-70 के दुर्भिक्ष से पीडि़त बंगालियों को इन्ही रुपयों में से थोड़े से रुपयों से चावल खरीदकर बांटा गया। बुलाकीदास की मृत्यु के बाद मोहन प्रसाद पमरदास प्रभृति ने इसी रूक्के की बात उठाकर सुप्रीम कोर्ट के जजों की अनुमति से और हेस्टिंग्ज साहब के अनुरोध से, महाराज पर जाली दस्तावेज बनाने का आरोप लगाकर, उन्हें मरवा डाला।
आरोप लगाने वालों में उनके परम शत्रु जगत चंद्र, कमालुद्दीन आदि भी थे। इन सबने मुकद्दमा चलाने का यह काम मिस्टर हेस्टिंग्ज के संकेत पर किया। अंतत: फर्जी गवाहों की झूठी गवाही पर कलकत्ता जेल में महाराज नंदकुमार को फांसी दे दी गई।
इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत का शिकंजा धीरे-धीरे सम्पूर्ण भारत पर कसता गया, किन्तु साथ-साथ असंतोष की चिंगारी भी अन्दर ही अन्दर सुलगती गई, जिसकी चरम परिणति 10 मई 1857 को मेरठ में हुए सैनिक विद्रोह के रूप में सामने आई। भारतीय सैनिकों ने विद्रोह कर दिया और अनेक जनरलों को मौत के घाट उतार दिया। मेरठ से भड़की स्वातंत्रय-चाह की इस प्रथम चिंगारी ने सम्पूर्ण उत्तर भारत को अपनी जद में ले लिया। आम किसान से लेकर मुगल सम्राट तक इस आग में अपनी आहुति देने को कूद पड़े। राजा महाराजा, अमीर-उमरा, किसान-मजदूर सभी अंग्रेजों के खिलाफ खड़े हो गए। हालांकि अंग्रेज क्रान्ति की इस आग पर काबू पाने में सफल रहे, मगर उनकी चूल-चूल हिल गई। फलस्वरूप उन्होंने बड़ी बेदर्दी से भारतीयों का दमन कर कृत्रिम शांति स्थापित करने में सफलता पा ली, किन्तु आग अन्दर-अन्दर ही भड़कती रही। यह  ज्वाला 1942 तक सुलगती रही और फिर अंग्रेजों के विरूद्घ कश्मीर से कन्याकुमारी व असम से अटक तक भड़क उठी। जगह-जगह हिंसा का तांडव हुआ। 1946 में बंबई में ब्रिटिश नौसेना ने विद्रोह कर दिया, जिससे ब्रिटिश सरकार सिर से पांव तक कांप गई और अंतत: 1947 में उसे भारत से पलायन करना पड़ा। (विभूति फीचर्स)

प्राइम वीडियो पर सलीम-जावेद की शानदार सिनेमाई विरासत को दर्शाती डॉक्यूसिरीज़ “एंग्री यंग मैन” का ट्रेलर हुआ रिलीज़

0

मुंबई। ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म प्राइम वीडियो ने अपनी नई ओरिजिनल डॉक्यूसीरीज़, “एंग्री यंग मेन” का जबरदस्त ट्रेलर रिलीज़ कर दिया है। तीन पार्ट वाली यह सीरीज़ मशहूर लेखक जोड़ी सलीम खान और जावेद अख्तर, जिन्हें सलीम-जावेद के नाम से जाना जाता है, के जीवन और करियर पर आधारित है। 1970 के दशक में सलीम-जावेद ने बॉलीवुड में ‘एंग्री यंग मैन’ हीरो को लाकर इंडियन सिनेमा को पूरी तरह से बदल दिया। उन्होंने रोमांस से हटकर एक्शन-ड्रामा पर ध्यान केंद्रित किया, जो बहुत पॉपुलर हुआ। सलमान खान फिल्म्स, एक्सेल मीडिया एंड एंटरटेनमेंट और टाइगर बेबी द्वारा प्रोड्यूस, एंग्री यंग मेन की सलमा खान, सलमान खान, रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर, जोया अख्तर और रीमा कागती एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। इसके साथ डायरेक्टर नम्रता राव अपना डेब्यू कर रही हैं। एंग्री यंग मेन का प्रीमियर 20 अगस्त को भारत और 240 से ज्यादा देशों में प्राइम वीडियो पर होगा। यह प्राइम मेंबर्स के लिए अवेलेबल लेटेस्ट शो है।

डॉक्युमेंट्री सीरीज के ट्रेलर में सलीम-जावेद की दिल छू लेने वाली और इंस्पायरिंग कहानी दिखाई गई है। यह दर्शकों को उनके द्वारा बनाई गई बॉलीवुड की दुनिया में ले जाता है और उनकी मशहूर फिल्मों जैसे दीवार, डॉन, शोले, त्रिशूल और दोस्ताना को दिखाता है, जिन्होंने इंडियन सिनेमा को बहुत प्रभावित किया है। यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज उनकी साधारण शुरुआत से लेकर मशहूर स्क्रीनराइटर बनने तक के सफ़र को दिखाती है। इसमें रेयर ओल्ड फुटेज शामिल है, जो उनकी निजी ज़िंदगी, दोस्ती और साथ में की गई 24 फ़िल्मों में उनकी क्रिएटिविटी को दिखाती है। इस डॉक्यूसीरीज में अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, हेमा मालिनी, हेलेन, सलमान खान, ऋतिक रोशन, आमिर खान और करीना कपूर खान जैसे सितारों के बेहद प्यार कॉमेंट्स शामिल हैं। वे बताते हैं कि सलीम-जावेद ने उनके करियर को कैसे प्रभावित किया है।

*सलीम खान कहते हैं*, “मैंने अपना करियर एक अभिनेता के रूप में शुरू किया था, लेकिन पाया कि मेरी असली ताकत कहानी कहने में थी। इसलिए, मैंने लेखन पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया, जो मेरे लिए अधिक स्वाभाविक था। मैं जावेद से मिला, जो राइटिंग के लिए जुनूनी थे, और साथ में हमने कुछ बेहतरीन काम किए, जिन पर मुझे बहुत गर्व है। हमने एक सफल यात्रा की और इंडस्ट्री के नियमों को चुनौती दी। यह बहुत अच्छी बात है कि हमारी कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए रिकॉर्ड की जा रही है। मुझे उम्मीद है कि यह लोगों को अपना बेस्ट करने और समाज की सीमाओं से पीछे न हटने के लिए प्रेरित करेगी। मैं इस बात के लिए उत्साहित हूं कि हर जगह के लोग प्राइम वीडियो पर हमारी कहानी देखेंगे।”

*जावेद अख्तर कहते हैं*, “जब मैं एक युवा के रूप में इस शहर में आया था, तो मेरे पास न तो कोई नौकरी थी, न ही कोई संपर्क और न ही कोई पैसा, और मैं अक्सर भूखे पेट सो जाता था। इसके बावजूद, मैंने कभी हार नहीं मानी। मैं हमेशा यही जानता था कि मैं अपनी ज़िंदगी की कहानी दुनिया के साथ साझा करना चाहता हूँ। हम अपने परिवार, दोस्तों और इंडस्ट्री से मिले समर्थन से वाकई बहुत प्रभावित हुए हैं, क्योंकि हमने अपनी यात्रा साझा की है। मैं सभी को उनके प्यार के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ। हम प्राइम वीडियो पर अपनी कहानी दुनिया भर के लोगों के साथ साझा करने के लिए उत्साहित हैं, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे हम संघर्ष से अपने सपनों को हासिल करने तक पहुँचे।”

*एंग्री यंग मेन की डायरेक्टर नम्रता राव ने अपने डेब्यू प्रोजेक्ट के लिए अपना उत्साह शेयर करते हुए कहा है*, “सलीम-जावेद के बारे में इस डॉक्यूसीरीज का डायरेक्शन करना एक शानदार अनुभव रहा है। उनकी कहानी प्रेरणादायक और दिलचस्प पलों से भरी है। एक डायरेक्टर के तौर पर यह मेरे लिए एक शानदार शुरुआत रही है। सलीम और जावेद के साथ काम करने से मुझे लेखन, जीवन और कलाकारों द्वारा चुनौतियों का सामना करने के तरीके के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला है।

वे नेचुरल स्टोरी टेलर हैं – ईमानदार, मज़ेदार और जीवन से भरपूर। उनकी कहानियों में गहरे विचारों के साथ मज़ेदार यादें भी हैं। यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ 70 के दशक की बड़ी फ़िल्मों पर भी नज़र डालती है। मैं सभी को 20 अगस्त को भारत और 240 देशों में प्राइम वीडियो पर इन दो दिग्गजों की असली कहानी देखे जाने को लेकर उत्साहित हूँ।

पहली बार संतोकबा मानवतावादी पुरस्कार का मुंबई में आयोजन

0

साइरस पूनावाला, शिव नादर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.अभय, डॉ.रानी बंग को सम्मानित किया

मुंबई। श्री रामकृष्ण नॉलेज फाउंडेशन (एसआरकेकेएफ), श्री रामकृष्ण एक्सपोर्ट्स (एसआरके) की परोपकारी शाखा, एक प्रसिद्ध प्राकृतिक हीरा कंपनी ने जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में संतोकबा मानवतावादी पुरस्कार समारोह की सफलतापूर्वक मेजबानी की। इस कार्यक्रम में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक साइरस पूनावाला, शिक्षा सुधारक और एचसीएल तथा शिव नादर फाउंडेशन के संस्थापक शिव नादर, सामाजिक कार्यकर्ता और सर्च फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. अभय बंग और डॉ. रानी बंग को सम्मानित किया गया। संतोकबा मानवतावादी पुरस्कार पहली बार ‘सपनों के शहर’ मुंबई में आयोजित किया गया, जिसमें अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी और महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान के अध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने मुख्य अतिथि के रूप में अध्यक्षता की।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अभय बंग और डॉ. रानी बंग भी प्रतिष्ठित संतोकबा पुरस्कारों के विजेताओं में शामिल थे, जिन्हें सर्च फाउंडेशन की स्थापना के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए उनके काम के लिए सम्मानित किया गया। दोनों ने होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (HBNC) पहल के साथ-साथ सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (CHWs) पहल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा नवाचार की शुरुआत करके आदिवासी समुदायों के उत्थान में अग्रणी भूमिका निभाई है। पुरस्कार समारोह में डॉ. अभय बंग ने कहा,“मैं स्वामी गोविंद देव महाराज और गोविंद देव ढोलकिया के दल का आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे और मेरी पत्नी को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मान किया । मैं पूरी विनम्रता के साथ गढ़चिरोली के लोगों की ओर से यह सम्मान स्वीकार करता हूँ। जिनके अटूट समर्थन और विश्वास ने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया है।”

एसआरके, एसआरकेकेएफ के संस्थापक अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद गोविंद ढोलकिया द्वारा 2006 में स्थापित संतोकबा मानवतावादी पुरस्कार उनकी मां संतोकबा लालजी दादा ढोलकिया की निस्वार्थ भावना और दूरदर्शिता का प्रतीक है। श्री गोविंद ढोलकिया ने कहा,“संतोकबा पुरस्कार करुणा की शक्ति और दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव पैदा करने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हमें ऐसे व्यक्तियों को सम्मानित करने पर गर्व है जिन्होंने अपना जीवन बदलाव लाने और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करने के लिए समर्पित कर दिया है। यह सम्मान दयालुता की शक्ति और समाज पर इसके पड़ने वाले गहरे प्रभाव को रेखांकित करता है।“

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष एसआरकेकेएफ की मानवीय कारणों के प्रति समर्पित प्रतिबद्धता की 10वीं वर्षगांठ भी है। संतोकबा मानवतावादी पुरस्कार के पिछले प्राप्तकर्ताओं में उद्योगपति और परोपकारी रतन टाटा, आध्यात्मिक नेता परम पावन दलाई लामा, इंजीनियर और इनोवेटर सोनम वांगचुक, भारत की श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन, समाज सुधारक कैलाश सत्यार्थी और अंतरिक्ष वैज्ञानिक और इसरो के पूर्व अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हैं।

गोपालन की पारंपरिक रखरखाव पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार

0

पशु कल्याण और पर्यावरण विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार 23 अगस्त से , गोपालन की पारंपरिक रखरखाव पर आधारित विश्व प्रसिद्ध तकनीक दिखाए जाएंगे

12 अगस्त 2024 ; अहमदाबाद/मुंबई/गोरखपुर और चेन्नई से डॉ आर बी चौधरी की रिपोर्ट
गौसंरक्षण-संवर्धन के लिए समर्पित राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संस्था समस्त महाजन संस्था के घोषणा के अनुसार दया, करुणा, पशु कल्याण पर आधारित पशुपालन एवं पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर एक तीन दिवसीय सेमिनार/ प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। समस्त महाजन संस्था के एक अधिकारी के आकलन के अनुसार इस सेमिनार में 400 से 500 प्रतिभागी शामिल होंगे। संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉक्टर गिरीश जयंतीलाल शाह ने बताया कि यह सेमिनार पूर्णतया व्यवहारिक कार्यों के प्रदर्शन पर आधारित विचार विमर्श एवं प्रशिक्षण के ऐसे संवाद पर आधारित है, जहां प्रतिभागियों को आंखों देखा हाल का अनुभव और ज्ञान प्राप्त होगा ताकि, इस दिशा में काम कर रहे व्यक्ति को स्वावलंबी संस्था संचालित करने के लिए सहायता मिल सके।

संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉक्टर शाह ने बताया कि यह कार्यक्रम राजस्थान और गुजरात के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण करते हुए विषय-वस्तु की गहराई में जानकारी दी जाएगी और तदनुसार, संबंधित विषय पर प्रतिभागियों को फील्ड में किया जा रहे कार्यों का अवलोकन कराया जाएगा ताकि लोग लोग स्वावलंबन की इस विधा को भली प्रकार समझ सके और घर लौटकर अपनी संस्था में इन तकनीकों को अपनायें । उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम का शुभारंभ 23 अगस्त 2024 – शुक्रवार – धर्मज (तारापुर-बरोडा)से सुबह 9 से 12 आरंभ होगा जहां विस्तृत व्याख्यान के साथ 146 एकड़ जमीन पर घास उगाकर कैसे गांव का पशुधन प्रबंधन को स्वावलंबी बनाया जा सकता है।उन्होंने बताया कि इस गांव में 6,000 पशुओं को ग्राम पंचायत द्वारा उत्पादन कीमत पर घास उपलब्ध कराई जाती है जो एक अनोखा कार्य है। ग्राम सभा की की गई बागवानी जिसमें आंवला, आम और इमली के लगाए गए 17,000 वृक्षों के माध्यम से हर साल 50 लाख रुपये से अधिक की आमदनी मिलती हैं।

धर्मज गांव का भ्रमण करने और परिचर्चा के बाद शाम 5 बजे से 9 बजे तक अहमदाबाद स्थित देश की प्रख्यात पारंपरिक एवं प्राकृतिक तौर तरीके से से देसी गौ संरक्षण केंद्र – बंसी गीर गौशाला का भ्रमण किया जाएगा , जहां तकरीबन 700 गीर गायों के रखर-खाव की आधुनिक व्यवस्था से लेकर गाय एवं गौशाला उत्पादों के पारंपरिक विधि को अपनाते हुए वैज्ञानिक कसौटी पर खरे पाए जाने वाले तकनीक को दिखाया और समझाया जाएगा। इसी क्रम की अगली कड़ी में 24 अगस्त 2024 दिन शनिवार, सुबह 9 बजे से 12 बजे तक गुजरात के प्रख्यात स्थान वीरमगाम (अहमदाबाद के पास) का भ्रमण और व्याख्यान आयोजित किया जाएगा , जहां पर देश की विकसित एवं संरक्षित 1,200 एकड़ का वृहद गौचर प्रबंधन देखने को मिलेगा। साथ ही साथ जल प्रबंधन के लिए प्रयुक्त विशालकाय 4 तालाबों के साथ 5,000 पेड़, 2,700 गोवंशीय पशुओं का अद्भुत संरक्षण भी देखने को मिलेगा। 24 अगस्त, 2024 की शाम 3 बजे से 7 बजे तक जानी -मानी भाभर(बनासकांठा जनपद) गुजरात की जलाराम गौशाला का भ्रमण कराया जाएगा, जहां 11,000 से अधिक गोधन की पशु कल्याण के मापदंडों के अनुसार व्यवस्था का एक मॉडल देखने को मिलेगा।

इस सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव के रूप में 25 अगस्त, 2024 दिन रविवार को सुबह 9 से 12 बजे पावापुरी (आबू रोड के पास, राजस्थान) के ऐसे गौशाला प्रकल्प का भ्रमण कराया जाएगा , जहां गऊ-पर्यटन की अनुभूति के साथ गौसेवा के आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा। पावापुरी की व्यवस्थित ढंग से पूरे लाड-प्यार से पाली गई6,000 से अधिक गायों की गौशाला देखने और गौशाला के पृष्ठ-भूमि तथा विकास की जानकारी मिलेगी। यह बता दे कि यहां भी गौशाला के अधीन तकरीबन 1 लाख विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण वृक्षों की सुंदर श्रृंखला देखने को मिलेगी। अंतिम पड़ाव के दिन शाम 4 बजे पिंडवाड़ा (आबू रोड के पास) संचालित वैज्ञानिक तरीके से बनाई गई गौशाला का भ्रमण करवा कर कार्यक्रम का समापन किया जाएगा।

कार्यक्रम के तीसरे एवं अंतिम दिन हर्षो-उल्लास से युक्त विदाई कार्यक्रम संपन्न होगा जिसमें गौशाला संचालकों/जीव जंतु कल्याण में नियम अनुसार संचालित संस्थाओं को अनुदान सहायता के साथ विदा किया जाएगा। इस कार्यक्रम में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पशु प्रेमियों/ गौशाला प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया जाता है। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए संपर्क सूत्र : 9820020976/9825129111/9824221999

गोमाता को राष्ट्र माता घोषित कराने हेतु हस्ताक्षर एवं जन जागरण अभियान

0

 

गणेश पोल से रैली का शुभारंभ

राजगढ । अलवर लोक सभा क्षेत्र के नव नियुक्त गो सांसद कंदार नाथ शर्मा द्वारा गोवंश प्रेमियों के साथ गो जन जागरण रैली का आयोजन किया गया ।
रैली गणेश पोल से होती हुई मिनी सचिवालय तक पहुंची ।
रैली में महिला पुरुष व बच्चों ने भाग लिया एवं सभी ने गोमाता को राष्ट्र माता घोषित कराने हेतु हस्ताक्षर किए । रैली में नंदी गोशाला राजगढ़ भोरंगी गोशाला राजगढ एवं गणेश गोशाला माचाडी के कार्यकताओं ने भाग लिया ।
इस अवसर पर

गोमाता राष्ट्र माता
गोमाता राष्ट्र माता – घोषित हो घोषित हो
गोवंश को पशु सूचि से – अलग करें अलग करें
गोवंश को राज्य सूचि से निकाल कर – केन्द्र सूचि में रखें केन्द्र सूचि में रखें
भारत में सम्पूर्ण गोवंश हत्या पर – पूर्ण प्रतिबंध लगे प्रतिबंध लगे
धर्म सम्राट करपात्री जी महाराज की जय
गोवंश हमारी आस्था का प्रतीक है इसे हमें बचाना है
आदि उद्‌घोषों के साथ रैली आगे बढ़ती रही
इस अवसर पर

रघुबीर सैनी नीरज सैनी प्रशान्त संजय रमेश चंद शर्मा डार्विन जाहन्वी दीक्षित दुष्यंत कुमार शर्मा अनिल गुप्ता विजय कुमार शर्मा बसंत
आदि गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे

महाराष्ट्र में 94% युवा हाई सोशिएटल प्रेशर के बावजूद है आशावाद और आकांक्षाओं से भरपूर – द आईकू (iQOO) क्वेस्ट रिपोर्ट 2024

0

मुंबई। वीवो ग्रुप के सब-स्मार्टफोन ब्रांड आईकू (iQOO) ने साइबर मीडिया रिसर्च (CMR) के साथ अपनी पहली द आईकू (iQOO) क्वेस्ट रिपोर्ट 2024 जारी की की है, जो जेन जी (Gen Z) के सपनों, करियर और आकांक्षाओं के ट्रेट्स और ट्रेंड्स पर आधारित है। रिपोर्ट इस आशावादी पीढ़ी के सपनों और जुनून की यात्रा को सामने लेकर है, जो दुनिया भर में सबसे बड़ी पीढ़ी में से एक है। इसमें 20-24 साल की उम्र के 6,700 रेस्पोंडेंट्स के इनसाइट्स शामिल हैं, जो भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ब्राजील, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे 7 देशों से हैं। रिपोर्ट में तीन क्षेत्रों को शामिल किया गया है: जेन जी (Gen Z) क्वेस्टर्स की भावना और अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा, उनके जुनून की खोज में आने वाली बाधाएं और रुकावटें, और उनके हितों को आगे बढ़ाने वाले करियर आप्शन शामिल है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि महाराष्ट्र के युवाओं को हाई सोशिएटल प्रेशर का सामना करना पड़ता है। लेकिन हाई सोशिएटल प्रेशर के बावजूद आशावाद और आकांक्षाओं का स्तर 94% है।
रिपोर्ट में जेन जी (Gen Z) के लिए सफलता का क्या अर्थ है, इसके विभिन्न पहलुओं की गहराई से पड़ताल की गई है। इसमें क्वेस्टर्स की ड्राइव, जुनून और महत्वाकांक्षा को एक क्वांटिटी मीट्रिक – क्वेस्ट इंडेक्स या “QI” से समझाया गया है। परिणामों से पता चलता है कि भारत का QI 9.1 है, इसके बाद मलेशिया 8.7 QI, थाईलैंड और अमेरिका 8.2 QI, इंडोनेशिया 8.1 QI, यूनाइटेड किंगडम 8 QI और ब्राजील 7.8 QI के साथ आता है।
आईकू इंडिया के सीईओ निपुण मार्या ने कहा कि आईकू(iQOO) में क्वेस्ट की स्पिरिट है, जो हर कम्युनिकेशन में जेन जी (Gen Z) के साथ। सीमाओं को आगे बढ़ाने और अधिक प्रयास करने के लिए समर्पित ब्रांड के रूप में, आईकू इन मूल्यों को अपने जेन जी (Gen Z) दर्शकों तक पहुंचाता है। पिछले साल, आईकू (iQOO) ने कानपुर से भारत के पहले 23 साल के एक चीफ गेमिंग ऑफिसर को शामिल किया। हम युवाओं को अपने जुनून को आगे बढ़ाने के अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ब्रांड सक्रिय रूप से उन पहलों में शामिल होता है जो व्यक्तियों को अपनी क्षमता का एहसास करने में मदद करते हैं और यह रिपोर्ट उस दिशा में एक प्रयास है। इसका उद्देश्य जेन जी (Gen Z) को कई चुनौतियों के बावजूद अपने खुद की खोज पर निकलने और अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है। रिपोर्ट के निष्कर्ष जेन जेड (Gen Z) को बेहतर ढंग से समझने में महत्वपूर्ण इनसाइट प्रदान करते हैं, जिससे हम उनकी जरूरतों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सकते हैं।

अकबर ने शुरू किया गौशाला आज अकबर के पास 27 गायें और 39 भैंसें हैं.

0

धाराशिव: हिंदू धर्म में गाय को कामधेनु माना जाता है. इसलिए गायों की पूजा की जाती है. हाल ही में देशी गायों के संरक्षण की आवश्यकता उत्पन्न हुई है. इसलिए धाराशिव जिले के मुस्लिम समुदाय के अकबर कुशलदीन शेख ने एक गौशाला शुरू की है. उनकी गौशाला वास्तव में कई लोगों के लिए प्रेरणा है.

कैसे शुरू करें गौशाला?
अंडूर धाराशिव जिले के तुलजापुर तालुका में अकबर कुशलदीन शेख का एक गांव है. खेती करते समय उन्हें एहसास हुआ कि गाय का साथ समाज के लिए कितना महत्वपूर्ण है. उन्हें गाय होने की मानसिक संतुष्टि का अनुभव हुआ और उसी से उन्होंने देशी गायों के संरक्षण के लिए एक गौशाला शुरू करने का फैसला किया. दरअसल, उन्हें गौहत्या और गौ-पालन में अंतर का अनुभव हुआ और उन्होंने एक बड़ी गौशाला की शुरूआत की.

अकबर ने शुरू किया गौशाला
आज अकबर के पास 27 गायें और 39 भैंसें हैं. जिसमें कुछ गायें और भैंसें कत्लखाने जा रही थीं. पुलिस ने गाय-भैंसों को मुक्त कराया. अकबर उन गाय-भैंसों की देखभाल करता है. तो कुछ गायें ऐसी हैं जिन्हें उन्होंने कसाईयों से बचाया था. मुस्लिम होने के बावजूद गौशाला खोलने के उनके फैसले को कुछ विरोध का भी सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने इसका बड़ी दृढ़ता से सामना किया. अकबर द्वारा शुरू की गई इस गौशाला में कई जानवर हैं. उन्हें गौहत्या और गौपालन में अंतर समझ में आया. गौशाला शुरू करने के बाद वे भाखड़ा गाय, अंधी गाय और भैंसों की देखभाल करते हैं. दरअसल, अकबर द्वारा शुरू की गई यह गौशाला कई लोगों के लिए प्रेरणा है.