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नारी विमर्श की मुखर अभिव्यक्ति है सुभद्रा कुमारी चौहान की कथा दृष्टि*

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(विवेक रंजन श्रीवास्तव – विनायक फीचर्स)

सुभद्रा कुमारी चौहान की खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी, हिन्दी के सर्वाधिक पढ़े व गाये गये गीतों में से एक है। यह गीत स्वयं में गीत से अधिक वीर गाथा की एक सच्ची कहानी ही है ! जिसमें कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन के सारे घटना क्रम को एक पद्यात्मक कहानी के रूप में इस सजीवता से प्रस्तुत किया है कि पाठक या श्रोता वीर रस से भाव विभोर हो उठता है। यह रचना उनकी पहचान बन गई है। इस गीत की संगीत बद्ध प्रस्तुतियां किसी भी देश राग के आयोजन को ओजस्विता से भर देती है। जबलपुर की ही साधना उपाध्याय जी के दल ने इस गीत पर बेहद खूबसूरत नृत्य नाटिका तैयार की है जिसकी अनेक प्रस्तुतियां जगह जगह हुई हैं।

किसी भी मनुष्य का व्यक्तित्व एवं उसका बौद्धिक विकास, उसके परिवेश, देश, काल, परिस्थिति के अनुरूप होता है। सुभद्रा कुमारी चौहान एक साथ ही प्रगतिशील नारी, गृहिणी, मां, कवि, लेखिका, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जननेत्री व राजनेता थीं। वे जमीन से जुड़ी हुई थीं, अत: उनके अनुभवों का संसार बहुत विशाल था। उन दिनो स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था। भारतीय समाज में जातिगत, वर्गगत, धर्मगत, लिंगगत रूढिय़ां अपने चरम पर थीं। पर्दा प्रथा, बाल विवाह, छुआ छूत, दहेज प्रथा, बहुविवाह, नारी उत्पीडन, सती हो जाने जैसी कुप्रथायें उनके समय समाज में स्त्रियों की प्रगति की बाधा बनी हुईं थी।  अपनी कहानियों से सुभद्रा जी ने इन कुप्रथाओ के विरुद्ध भरपूर आवाज उठाई।  यही कारण है कि उनके साहित्य में कहीं भी नाटकीयता व बनावटीपन नहीं है वरन् वह हृदय स्पर्शी, वास्तविकता के निकट जन मन की अभिव्यक्ति बन पड़ा है। उन्होने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में हिस्सेदारी निभाई स्वाभाविक है कि उनकी लेखनी ने देश प्रेम के मनोभावो का चित्रण अपनी कविता कहानियो में भी किया। सुभद्रा जी का जन्म 1904 में इलाहाबाद के निकट निहालपुर नामक गांव में रामनाथसिंह के जमींदार परिवार में हुआ था।  उनके पिता के अलावा पति लक्ष्मण सिंह , सखी महादेवी वर्मा, ने उनके व्यक्तित्व निर्माण में  भरपूर सहयोग किया। उन्होंने जो भी लिखा है वह सब का सब मर्मस्पर्शी, उद्देश्यपूर्ण व शाश्वत बन कर हिन्दी साहित्य की धरोहर के रूप में सुप्रतिष्ठित है। केवल कक्षा 9वीं तक शालेय शिक्षा  प्राप्त हुई महिला अपने अनुभवो के आधार पर कितना प्रौढ़ व परिपक्व लिख सकती है इसका सशक्त उदाहरण सुभद्रा जी हैं।

बिखरे मोती उनका पहला कहानी संग्रह है, इसमें भग्नावशेष, होली, पापीपेट, मंझलीरानी, परिवर्तन, दृष्टिकोण, कदम के फूल, किस्मत, मछुये की बेटी, एकादशी, आहुती, थाती, अमराई, अनुरोध, व ग्रामीणा कुल 15 एक दूसरे से बढ़कर कहानियां हैं ! इन कहानियों की भाषा सरल बोलचाल की भाषा है। अधिकांश कहानियां नारी विमर्श पर केंद्रित हैं। उनकी कथा दृष्टि की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि नारी मुक्ति व प्रगति जो शायद उनके समय के लिये नव चेतना थी पर उन्होंने बहुत स्पष्ट तथा खुलकर लेखन किया। उनके स्वयं के देश व साहित्य के लिये समर्पित जीवन का प्रभाव उनकी व्यापक सार्वभौमिक लेखनी पर स्पष्ट दिखता है। उनकी कहानियां नारी विमर्श की अग्रिम पंक्ति की संवाहिका हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान के समूचे साहित्य की सफलता जिस आधारभूत तथ्य पर केंद्रित है, वह मेरे पास उपलब्ध बिखरे मोती कहानी संग्रह की प्रति पर एक मित्र के द्वारा दूसरे को पुस्तक भेंट करते हुये की गई टिप्पणी है। जिसमें स्याही वाली कलम से सुंदर अक्षरो में अंकित है ये कहानियां तुम्हें प्रेरणा देंगी, जन्म दिवस पर सप्रेम भेंट जो इन कहानियों की लोकप्रियता, उपयोगिता व आम पाठक का साहित्य अनुराग प्रदर्शित करती है। आज कितने पाठक स्वयं पुस्तकें खरीद कर पड़ते हैं? भेंट करना तो बाद की बात है। ऐसी रुचिकर हृदय स्पर्शी कितनी कहानियां लिखी जा रहीं है कि वे पाठकों के बीच चर्चा का विषय बन जावें? उनकी कहानियां कृत्रिम , सप्रयास लिखी नहीं लगती। वे तो आसपास से ही उठाई गई विषय वस्तु की तरतीब से प्रस्तुति ही हैं !

उन्मादिनी शीर्षक से उनका दूसरा कथा संग्रह 1934 में छपा। इस में उन्मादिनी, असमंजस, अभियुक्त, सोने की कंठी, नारी हृदय, पवित्र ईर्ष्या, अंगूठी की खोज व वेश्या की लड़की कुल 8 कहानियां हैं।इन सब कहानियों का मुख्य स्वर पारिवारिक व सामाजिक परिदृश्य ही है।

कहानी नारी हृदय में प्रमिला के 3 पत्रों के माध्यम से हमें यह समझने को मिलता है कि तत्कालीन समय में स्त्रियां कितनी विवश थीं ।

एक पत्रांश उधृत है    मेरे स्वामी ……परमात्मा ने स्त्री-जाति के हृदय में इतना विश्वास, इतनी कोमलता और इतना प्रेम शायद इसीलिए भर दिया है कि वह पग-पग पर ठुकराई जावे। जिस देवता के चरणों पर हम अपना सर्वस्व चढ़ाकर, केवल उसकी कृपा-दृष्टि की भिखारिन बनती है, वही हमारी तरफ आँखें उठाकर देखने में अपना अपमान समझता है। माना कि मैं समाज की आँखों में आपकी कोई नहीं। किंतु एक बार अपना हृदय तो टटोलिए, और सच बतलाइए क्या मैं आपकी कोई नहीं हूँ। समाज के सामने अग्नि की साक्षी देकर हम विवाह-सूत्र में अवश्य नहीं बँधे, किंतु शिवजी की मूर्ति के सामने भगवान् शंकर को साक्षी बनाकर क्या आपने मुझे नही अपनाया था? यह बात गलत तो नहीं है। मैं जानती हूँ कि आप यदि मुझसे बिलकुल न बोलना चाहें, तब भी मैं आपकी कुछ नहीं कर सकती। यदि किसी से कुछ कहने भी जाऊँ तो सिवा अपमान और तिरस्कार के मुझे क्या मिलेगा ? आपको तो कोई कुछ भी न कहेगा, आप फिर भी समाज में सिर ऊँचा करके बैठ सकेंगे। किंतु मेरे लिए कौन-सा स्थान रहेगा ? अभी रूखा-सूखा टुकड़ा खाकर, जहाँ रात को सो रहती हूँ, फिर वहाँ से भी ठोकर मारकर निकाल दी जाऊँगी, और उसके बाद गली-गली की भिखारिन बन जाने के अतिरिक्त मेरे पास दूसरा क्या साधन बच रहेगा? संभव है आप मुझे दुराचारिणी या पापिन समझते हों; और इसीलिए बहुत सोच-विचार के बाद आपने मुझसे संबंध-त्याग में ही कुशलता समझी हो, और पत्र लिखना बंद कर दिया हो।…अभागिनी प्रमिला।

कहानी का अंत सकारात्मक करते हुये सुभद्रा जी ने लिखा …पत्नी ने कहा … तुम बड़े कठोर हो, उसने मुँह फेरे-फेरे उत्तर दिया।

‘क्यों? मैंने उसका मुँह अपनी तरफ फेरते हुए पूछा, ‘मैं कठोर कैसे हूँ?

अपनी आँखों के आँसू पोंछती हुई वह बोली, यदि तुम निभा नहीं सकते थे, तो उस बेचारी को इस रास्ते पर घसीटा ही क्यों?

मुझे हँसी आ गई, हालाँकि प्रमिला के पत्रों को पढऩे के बाद, मेरे हृदय में भी एक प्रकार का दर्द-सा हो रहा था। मुझे स्त्रियों की असहायता, उनकी विवशता और उनके कष्टों से बड़ी तीव्र मार्मिक पीड़ा हो रही थी।

मैंने किंचित् मुस्कराकर कहा, पगली। यह पत्र मेरे लिए नहीं लिखे गए। कविताओं की स्थिति हिन्दी साहित्य में अजब सी है , हमारा सारा पुरातन साहित्य काव्य में ही है, पर सुभद्रा जी के समय भी पत्रिकायें कविताओ पर पारिश्रमिक नहीं देते थे।  उनसे संपादकगण गद्य रचना चाहते थे और उसके लिए पारिश्रमिक भी देते थे। समाज की अनीतियों से उत्पन्न जिस पीड़ा को वे व्यक्त करना चाहती थीं , उसकी अभिव्यक्ति का उचित माध्यम गद्य ही हो सकता था, अत: सुभद्रा जी ने कहानियों की विधा को अपनाया।  उनकी कहानियों में देश-प्रेम के साथ-साथ समाज को, अपने व्यक्तित्व को प्रतिष्ठित करने के लिए संघर्षरत नारी की पीड़ा और विद्रोह का स्वर मिलता है। साल भर में ही उन्होंने पहला कहानी संग्रह बिखरे मोती ही लिख डाला। बिखरे मोती छपवाने के लिए वे इलाहाबाद गईं।  बिखरे मोती पर सुभद्रा जी को सेकसरिया पुरुस्कार भी मिला। उनकी अधिकांश कहानियाँ सत्य घटनाओ की लोकव्यापी प्रस्तुतियां  हैं। देश-प्रेम के साथ-साथ उनमें गरीबों के प्रति सच्ची सहानुभूति मिलती है।

उनकी कहानियों में जहाँ स्त्री सरोकारों की बात दिखती है  तो वे सामाजिक, राजनीतिक विसंगतियों की कसौटी पर भी खरी हैं। उनकी कहानियाँ स्वतंत्रता आंदोलन के दौर की नारी का मानसिक पटल प्रस्तुत करती हैं। आज़ादी के पूर्व की भारतीय नारी की दशा और दिशा के आकलन में वे हमारी बड़ी मदद करती हैं।

उनकी नारी केवल राजनीतिक आज़ादी नहीं चाहती बल्कि सभी प्रकार की गुलामी से मुक्ति चाहती है। वह स्वतंत्रता नहीं, स्वराज्य चाहती है। परतंत्रता नहीं, स्वानुशासन चाहती है। रूढिय़ों-बंधनों से मुक्त होकर वह स्वनियंत्रण में रहना चाहती है। सुभद्रा जी की सभी कहानियों को हम एक तरह से सत्याग्रही कहानियाँ कह सकते हैं। उनकी स्त्रियाँ सत्याग्रही स्त्रियाँ हैं। दलित चेतना और स्त्रीवादी विमर्श को उठाने वाली सुभद्राकुमारी चौहान हिंदी की पहली कहानीकार हैं। सीधेृसाधे चित्र सुभद्रा कुमारी चौहान का तीसरा व अंतिम कथा संग्रह है। इसमें कुल 14 कहानियां हैँ। रूपा , कैलाशी नानी, बिआल्हा, कल्याणी , दो साथी, प्रोफेसर मित्रा, दुराचारी व मंगला 8 कहानियों की कथावस्तु नारी प्रधान पारिवारिक सामाजिक समस्यायें हैं।

हींगवाला , राही, तांगे वाला एवं गुलाबसिंह कहानियां राष्ट्रीय विषयों पर आधारित हैं। उनके कथा संग्रहों में कुल 38 कहानियाँ (क्रमश: पंद्रह, नौ और चौदह) प्रकाशित हैं।  सुभद्रा जी की समकालीन स्त्री-कथाकारों की संख्या अधिक नहीं थीं। अपनी व्यापक कथा दृष्टि से वे एक  लोकप्रिय नारी विमर्श की ध्वज वाहिका कथाकार के रूप में हिन्दी साहित्य जगत में सुप्रतिष्ठित हैं। समय के साथ भले ही सुभद्रा जी की कहानियो के परिवेश का वर्णन पुराना पड़ गया हो किन्तु आज भी देश भक्ति की भावना , और आज की स्त्रियो के मर्यादा पूर्ण स्वातंत्रय की प्रेरणादायी इन कहानियों की प्रासंगिकता यथावत बनी हुई है। (विनायक फीचर्स)

प्रोड्यूसर डॉ निकेश जैन माधानी निर्मित और सीमा मीना अभिनीत एलबम “ओ मेरे हमदम” का ऑडियो और टीजर रिलीज

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मुंबई। मुंबई के जाने माने बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी बतौर प्रोड्यूसर एक रोमांटिक एलबम “ओ मेरे हमदम” का निर्माण किया है। इस एलबम को 150 से अधिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया है जिसे लाखों करोड़ों श्रोताओं द्वारा पसंद किया जा रहा है। इस एलबम में बहुत ही खूबसूरत मॉडल एक्ट्रेस एवं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसडर सीमा मीना ने अभिनय किया है। “ओ मेरे हमदम” के पोस्टर में सीमा मीना को मनमोहक अंदाज में गिटार बजाते हुए देखा जा सकता है। एलबम में सीमा के साथ को-एक्टर विपिन सिंह हैं।

इस एलबम के सिंगर आदित्य सिंह, कंपोजर मीट ट्यून्स, विराज विधीर, गीतकार मनीष सिंह और डायरेक्टर तान्या थानादार हैं।
“ओ मेरे हमदम” एलबम को शाईनिंग स्टार और माधानी फाइनेंस एंड इंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। दर्शकों को जल्द ही इस प्यारी सी एलबम का वीडियो भी देखने को मिलेगा।
इस एलबम के निर्माण में निशांत कुमार का भरपूर योगदान रहा और मीत ब्रदर्स के साथ उनकी पूरी टीम का उत्साहजनक सहयोग प्राप्त हुआ।

बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा हो सुनिश्चित, राष्ट्रीय परशुराम सेना की सरकार से मांग

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मुंबई। ब्राह्मण समाज के हित के लिए कार्य करने वाली राष्ट्रीय परशुराम सेना अब हिन्दू व सनातन धर्म को बचाने का बिगुल बजाया है. भांडुप में आयोजित मुंबई परशुराम सेना विस्तार एवं कजरी महोत्सव में बांग्लादेशी हिंदुओं को भारत सरकार से बचाने की मांग उठी है. संदेश फाउंडेशन एवं राष्ट्रीय परशुराम सेना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कजरी महोत्सव कार्यक्रम में महाराष्ट्र अध्यक्ष सचिन चौबे ने पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिया. मंच संचालन करते हुए सेना राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अविनाश पांडेय ने कहा कि परशुराम सेना आज ब्राह्मण हित के साथ-साथ हिंदू समाज की रक्षा के लिए भी कार्यरत है. जिस तरह से बीते दिनों से बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार हो रहा है, हम भारत सरकार से मांग करेंगे की बांग्लादेश के हिंदुओं की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करे और संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) में भी उनकी सुरक्षा की बात करें.
इस अवसर पर सेना के अध्यक्ष सचिन चौबे ने कहा कि यह संस्था ब्राम्हण समाज के लिए कार्य कर रही है. किसी भी ब्राम्हण पर यदि अत्याचार होता है तो हम और हमारा संगठन उसकी मदद के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे. सेना के महाराष्ट्र उपाध्यक्ष राजेश पांडेय ने कहा कि किसी भी संस्था के रीढ़ की हड्डी उसके सदस्य होते हैं और हमें खुशी है कि हमारी रीढ़ की हड्डी इतनी मजबूत हो रही है, जो ब्राह्मण ही नहीं अपितु पूरे सनातन धर्म की रक्षा के लिए कार्यरत हैं. राष्ट्रीय महासचिव संजय शर्मा ने कहा कि परशुराम सेना का विस्तार पूरे भारत वर्ष में किया जाएगा और संगठन के लिए अच्छा कार्य करने वाले को ही पद दिया जाएगा. इस अवसर पर बाबुलनाथ दुबे को मुंबई अध्यक्ष, अनुराग चौबे व संजय शुक्ला को महाराष्ट्र का सचिव, आर के मिश्रा को राष्ट्रीय संयोजक, अजीत त्रिवेदी को ठाणे जिला मीडिया प्रभारी, नरेंद्र दुबे को मुंबई उपाध्यक्ष के साथ दर्जनों लोगों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया.
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर श्रीनिवास त्रिपाठी, गुलाब दुबे, सदाशिव चतुर्वेदी, स्वामीनाथ मिश्रा, डीएन मिश्रा, विनय मिश्रा, विनोद दुबे, वकील मिश्रा, ओमप्रकाश तिवारी, विकास शर्मा, कैलाश दुबे, धीरेंद्र मिश्रा, अवधेश तिवारी, नरसिंह पाल, दिवा शहर अध्यक्ष संतोष तिवारी, के के शुक्ला, शिवप्रसाद चौबे, सुरेन्द्र मिश्रा, उमाशंकर तिवारी, सुशील पाण्डेय आदि गणमान्य उपस्थित थे.

नीमच से करीब 200km तक गाड़ी का पीछा कर बचाया गया गौ माता को

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नीमच से करीब 200km तक गाड़ी का पीछा किया लगभग 3 घंटे तक लगातार कड़ी मशक्कत के बाद कही जाकर गाड़ी हाथ लगी। इस दौरान हमारे बहुत से गौ रक्षक भाईयों ने अपनी जान भी जोखिम में डाली पर गौ माता के आशीर्वाद से किसी भाई को कुछ ज्यादा हानि नहीं हुई हल्की चोट लगी है। 4 टोल और 3 पुलिस बेरीकेट तोड़ने के बाद कही जाकर उस गाड़ी में से सभी 9 गौ माता को सुरक्षित बचा लिया गया है। गौ रक्षा दल के मेरे सभी शेरो🐅 को बहुत बहुत बधाई और धन्यवाद .

नीमच की ही गाड़ी थी जिसे धार जिला कानवन तक पीछा कर कर पकड़ा गया और पाच थानों की पुलिस ने भी पीछा किया जिसमें हमारे गौ रक्षक गौरक्षा दल प्रदेश उपाध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जी राठौड़ एवं संभाग अध्यक्ष सचिन जी नागदा और संभाग उपाध्यक्ष हर्ष राज सिह जी हाडा और संभाग महासचिव कृष्ण पाल सिंह जी पवार और भी हमारे कनावटी एवं पिपलिया मंडी के गौ रक्षक थे जो उज्जैन से आते समय सूचना लगने पर पिपलिया मंडी टोल से धार तक गाड़ी का पीछा करते रहे और पुलिस प्रशासन का भी खूब सहयोग रहा आप सभी का बहुत-बहुत आभार आज आपके कारण इन गोवंशों की जान बचपाई

जगद्‌गुरू स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की अपील

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मुंबई (अनिल बेदाग) : बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर जगद्‌गुरू स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज की कड़ी प्रतिक्रिया
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर अनंत श्री विभूषित द्वारका शारदा एवं ज्योतिष द्विपीठाधीश्वर जगद्‌गुरू स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने मुंबई में मीडिया से बात करते हुए कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है वो मानव जाति और मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। उपासना के स्थल को वहां नुकसान पहुंचाया जा रहा है। माता बहनों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। मैं भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील करूंगा कि बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में और भी कदम उठाए जाएं ताकि बांग्लादेश में धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाया जाए, उनके उपासना के स्थलों की सुरक्षा की जाए, जो हिन्दू भाई हिन्दुस्तान आना चाहते है उन्हें यहां लाया जाए, वहां महिलाओं के सम्मान की सुरक्षा की जाए।”
जगद्‌गुरू स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने यह भी कहा कि भारतवर्ष में जो अवैध रूप से घुसपैठिए रह रहे हैं, उन्हें देश से बाहर निकाला जाए। भारत सरकार में वह शक्ति है कि वो कश्मीर, पाकिस्तान, बांग्लादेश भी लेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि धर्म के अधीन राजनीति होनी चाहिए। राजनीति धर्म से दिशा प्राप्त करे तो राष्ट्र और विश्व में शांति फैल जाए। हमारे यहां तो जन्म से लेकर मृत्यु तक धर्म से संबंधित होता है। भारत की यही महत्ता है कि यहां धर्म की धड़कन धड़कती है।”
जगद्‌गुरू स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज का यहां भव्य स्वागत किया गया एवं भक्तों ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। पुष्प वर्षा करके और मालार्पण करके गुरुदेव का स्वागत किया। यहां लोगों ने भजनों का भी आनंद लिया।
शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती के इस कार्यक्रम में पहुंचकर भाजपा नेता पंकजा मुंडे ने भी उनसे आशीर्वाद लिया। जगद्गुरु स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया कि पंकजा मुंडे के पिता श्री गोपीनाथ मुंडे से उनका काफी करीबी और भावनात्मक संबंध रहा है। उनके दिखाए रास्ते पर चलकर समाज सेवा और राष्ट्र की सेवा करनी चाहिए।
जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती जी ने यह भी बताया कि श्री यंत्र की पूजा कैसे करते हैं? उन्होंने सनातन धर्म की महत्ता और उसकी खूबियों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि हम भारत के हैं और एक चींटी भी मारी जाती है तो हमें दर्द होता है ऐसे में किसी इंसान की हत्या से कितना दर्द होगा, आप अनुमान लगा लें। भारत ने सदैव उदारता दिखाई है, कभी किसी देश पर हमला नहीं किया बल्कि सभी को शांति का संदेश दिया है।

गाय के गोबर के कारोबार से सोलापुर के ये भाई-बहन हो रहे मालामाल

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सोलापुर: दक्षिण सोलापुर तालुका में वडकबल के प्रो. भाई-बहन उमा बिराजदार और रुद्रप्पा बिराजदार ने आध्यात्मिक प्रेरणा ली और एक गौशाला की स्थापना की. उन्होंने इस गौशाला में स्वयं सहायता समूह की 250 से 300 महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया है. इसके साथ ही इन दोनों बहन-भाई ने अपने-अपने खेतों में गोसेवा भी शुरू कर दी है.

गाय के गोबर के महत्व पर हमेशा बहस होती रहती है. कई लोग इससे सहमत हैं और कई लोग इसे सच नहीं मानते. हालाँकि, गाय की उपयोगिता पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है. यह सोलापुर के प्रो. उमा बिराजदार ने अपनी कटव्वा देवी गौशाला में इसे साबित कर दिखाया है.

बिना मिलावट के तैयार की जाती है कौड़ियां
यहां बिना किसी मिलावट के पांच इंच गोल कौड़ियां तैयार की जाती हैं. एक पैकेट में 11 उपले होती हैं और इसे 25 रुपये में बेचा जाता है. भारतीय घरों में पूजा, हवन के लिए उपलों का इस्तेमाल होता है.

पशुपालकों के लिए अच्छी खबर

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जमुई. अगर आप पशुपालक हैं या दूध का कारोबार करते हैं तो आपके लिए एक बड़ी अच्छी खबर सामने आई है. बिहार सरकार ने एक ऐसी तकनीक पर काम करना शुरू किया है, जिसके तहत उच्च क्षमता वाले दुधारू नस्ल की गाय तैयार की जाएंगी, जिससे आप कम लागत में केवल दूध उत्पादन से अच्छी कमाई कर सकते हैं. दरअसल दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार ने मिलकर इस योजना पर काम करना शुरू किया है. जिससे पशुपालकों की आर्थिक स्थिति सुधारी जा सकती है. इसके तहत शुक्राणु छंटाई तकनीक से दुधारू नस्ल की गाय तैयार की जाएगी, जिससे पशुपालकों को बम पर फायदा पहुंचेगा.

पशुपालकों की आय में होगी वृद्धि
जिला पशुपालन पदाधिकारी कुंदन कुमार मिश्रा ने बताया कि भारत सरकार की तरफ से शुक्राणु छंटाई तकनीक योजना से अब जमुई जिले में भी दुधारू नस्ल की गाय तैयार की जाएगी. उन्होंने बताया कि इस योजना से तैयार की गई गायों से पशुपालक अच्छा खासा फायदा कमा सकते हैं. इससे काफी कम खर्चे में पशुपालक अच्छी नस्ल की गायों को तैयार कर सकते हैं तथा उन गायों से अत्यधिक दूध का उत्पादन कर सकते हैं. जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि जिले में शुक्राणु छंटाई तकनीक से उच्च क्षमता वाले मवेशियों को तैयार करने के लिए पर्याप्त मात्रा में सीमन भी उपलब्ध करा दिया गया है.

मात्र ढाई सौ रुपए का आएगा खर्च
जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि इस सीमन के इस्तेमाल के लिए किसानों को मात्र ढाई सौ रुपए खर्च करने पड़ेंगे. उन्होंने कहा कि इस सीमन से कृत्रिम गर्भाधान के जरिए पशुओं को निषेचित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि यह इस तरीके से काम करता है कि अगर इसे किसी गाय को निषेचित किया जाता है, तब वह केवल बाछी ही पैदा करेगी.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गोविंदानंद सरस्वती के खिलाफ मानहानि याचिका दायर किया

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नई दिल्ली: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोविंदानंद सरस्वती पर दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि याचिका दायर किया है. हाईकोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए गोविंदानंद सरस्वती को नोटिस जारी किया है. हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया है.

हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की याचिका पर गोविंदानंद सरस्वती के खिलाफ कोई भी अंतरिम एकतरफा आदेश पारित करने से इनकार किया. कोर्ट ने कहा कि बिना प्रतिवादी का पक्ष सुने कोई आदेश पारित करना सही नहीं होगा. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद के वकील से कहा कि आप एक संत हैं और आप इस बारे में चिंता क्यों कर रहे हैं. संतों को इस सब से चिंतित नहीं होना चाहिए, इससे उन्हें बदनाम नहीं किया जा सकता. संत अपने कर्मों से सम्मान पाते हैं.

सुनवाई के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के वकील ने कहा कि गोविंदानंद उन्हें फर्जी बाबा, ढोंगी बाबा और चोर बाबा कहते हैं. वो लगातार बयान दे रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लोगों का अपहरण कर रहे हैं, वे हिस्ट्रीशीटर हैं. वकील ने आगे कहा कि गोविंदानंद सरस्वती कह रहे हैं कि उन्होंने सात हजार करोड़ का सोना चुराया है. साध्वियों के साथ उनका अवैध संबंध है. इस तरह के बयान से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की छवि खराब हो रही है, इसलिए उनके बयान देने पर रोक लगाए जानी चाहिए.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा- बांग्लादेशी हिन्दुओं को भारत में शरण दी जाए

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नई दिल्ली: बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद वहां के हिंदुओं के साथ हुमारपीट की घटनाएं सामने आई है. इसको लेकर विश्व भर में विरोध किया गया. इसी कड़ी में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर प्रताड़ित हिंदुओं को भारत में शरण देने की मांग की है. साथ ही शरण लेने वाले हिंदुओं के भोजन और वस्त्र की व्यवस्था की जाए.

शंकराचार्य ने राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में लिखा है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद अल्पसंख्यक हिन्दुओं की नृशंस हत्या की जा रही है. महिलाओं के साथ रेप किया जा रहा है. वहां की वर्तमान सरकार हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने में अब तक सफल नहीं हो सकी है. इसलिए मोदी सरकार को तत्काल अल्पकालिक शरण देनी चाहिए. उनके लिए बांग्लादेश के अंदर उनको सुरक्षित रूप से रहने की स्थायी व्यवस्था के लिए भारत सरकार आवश्यक कदम उठाने चाहिए.

उन्होंने कहा कि सभी हिन्दुओं की तरफ से पीएम मोदी से अनुरोध है कि जब तक बांग्लादेश के अंदर हिन्दुओं की सुरक्षा व्यवस्था पूर्णरूपेण सुनिश्चित नहीं कर ली जाती तब तक वहां से पलायन कर भारत की सीमा पर एकत्रित हुए बांग्लादेशी हिन्दुओं को भारत में सेना और प्रशासन के नियंत्रण में शरण दी जाए. हम यह वचन देते हैं कि उन शरणार्थी हिन्दुओं के भोजन और वस्त्र पर होने वाले व्यय भार का वहन हम हिन्दू धर्माचार्य, हमारे धर्मावलम्बी और हमारे हिन्दू धन कुबेर करेंगे. हम सरकारी कोष पर भार नहीं आने देंगे. हमारे हिन्दुओं की रक्षा करें. विश्व में कहीं भी हिन्दुओं पर संकट आए तो भारत की भूमि से यह साफ संदेश देना चाहिए कि विपत्ति आने पर हिन्दू भारत में कभी भी जाकर शरण ले सकते हैं.

अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में आरएसएस की कई हस्तियां शामिल होंगी: डॉ. गिरीश जयंतीलाल शाह

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समस्त महाजन के आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ( 23 से 25 अगस्त,24) अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में आरएसएस की कई हस्तियां शामिल होंगी: डॉ. गिरीश जयंतीलाल शाह
 अजित प्रसाद महापात्र, नवल किशोर जी, सुनील विधावंश एवं गोपाल आर्या उपस्थित रहेंगे
 राजस्थान के विभिन्न शहरों में पशुपालन एवं पर्यावरण पर आंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किये जायेंगे।
वैश्विक स्तर पर जल, जन, जमीन, जंगल, जानवरों की सेवा में कार्यरत समस्त महाजन की गतिविधियों में मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, बचाव कार्य, गौशालाओं और पंजरापोलो का समर्थन और आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भर कृषि, जल संरक्षण, भोजन रथ, सामाजिक उत्थान, विशेषकर प्राकृतिक जिसमें मानव निर्मित आपदाओं के दौरान तत्काल सहायता, पशु वध और बलि की रोकथाम, राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर जीवदया, गौसेवा, मानव सेवा सहित विभिन्न सेवाएँ शामिल हैं।

यह बता दे कि समस्त महाजन 21 वर्षों से अधिक समय से पशु कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास, मानव कल्याण, स्वच्छता अभियान, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत आदि जैसे विभिन्न सामाजिक कार्यों के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी डाॅ. गिरीशभाई शाह जो भारत सरकार के एनिमल वेल्फेर बोर्ड के सदस्य है वे अपना अधिकांश समय जीवदया, गौसेवा, मानवसेवा तथा शाकाहार प्रचार-प्रसार के कार्यों में व्यतीत करते हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित कई क्षेत्रों में 300 से अधिक गांवों में तालाब निर्माण, गौचर निर्माण जैसे कार्यों के लिए समस्त महाजन सेवारत है।

 

समस्त महाजन ने 23 से 25 अगस्त (शुक्रवार-शनिवार-रविवार) तक धर्मज से पिंडवाड़ा तक ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ का आयोजन किया है। यह यात्रा गौशालाओं, पांजरापोलो के बारे में जानने, समझने और जानवरों को शाता देने के लिए की गई है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, गौसेवा गतिविधिके अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक अजीत प्रसाद महापात्र, अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक नवल किशोरजी, अखिल भारतीय गौसेवा क्षेत्र संयोजक सुनील विध्वंश तथा आरएसएस के अखिल भारतीय पर्यावरण प्रमुख गोपाल आर्या सहित अन्य महानुभाव उपस्थित रहेंगे। अवसर पर गोपाल आर्या ने कहा कि जिस तरह से पर्यावरण की समस्या उत्पन्न हो रही है उसको लेकर हमें सचेत होना होगा।
इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान 23 अगस्त को 146 एकड़ भूमि पर घास उगाकर गांव के पशुधन का भरण-पोषण कैसे किया जाए, 6000 पशुओं को ग्राम पंचायत से मूल किंमत पर घास मिले, हर साल रु. 50 लाख की आय आदि और 17000 इमली, आंवला और आम के पेड़ों का दौरा और शाम 5 बजे से 9 बजे तक अहमदाबाद में 700 गिर गायों के साथ बंसी गीर गौशाला का दौरा और गौशाला में एक शैक्षणिक कक्षा का आयोजन किया गया है ।
24 अगस्त सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक वीरमगाम में 4 तालाब, 5000 पेड़, 2700 पशुओं के साथ 1200 एकड़ गौचर भूमि का दौरा और दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक गुजरात में बनासकांठा जिले के भाभर गौशाला में 11,000 गायों के साथ वैज्ञानिक मॉडल के साथ जलाराम गौशाला का दौरा, 25 अगस्त सुबह 9 बजे से 12 बजे तक राजस्थान आबू रोड के पास पावापुरी में स्थित 6000 गायो की गौशालाएं और 1 लाख पेड़ों की सुंदर व्यवस्था को देखने और वैज्ञानिक ढंग से निर्मित सुविधाजनक गौशाला का निरीक्षण करने की योजना है।
उसके साथ राजस्थान के विभिन्न शहरों में पशुपालन एवं पर्यावरण पर आंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किये जायेंगे। ईसके साथ ही गौशालाओं, गौशाला/पांजरापोलो को स्वावलंबन की ओर परिवर्तित करना, गौ-आधारित संस्कृति की पुनर्स्थापना, पशु-विकास, गौ-आधारित कृषि, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर जन-जागरूकता, गौ-पालन, जीवन-रक्षा के संबंध में विभिन्न कानूनों का निर्माण तथा मौजूदा कानून का कड़ाई से कार्यान्वयन करना, गौशाला-पंजरापोलों की सुविधाओं का निर्माण करना शामिल किया गया है।
इसके साथ-साथ-साथ जानवरों और पक्षियों के स्वास्थ्य को बनाए रखना, रासायणिक कीटनाशकों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना, भारत में 6.50 लाख ग्राम गौचर विकसित करना, देशी वृक्षों का रोपण बढ़ाना, जल संरक्षण, आत्मा और विज्ञान का एकीकरण, मनुष्यों में पशु- पक्षियों, के प्रति अधिक करुणा पैदा करना, वर्षा जल संचयन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता, अहिंसक-स्वदेशी उपचार फसल सुरक्षा, शाकाहार के प्रचार-प्रसार समेत अन्य सवालों पर परिणामलक्षी तरीके से चर्चा की जाएगी।
यात्रा में शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति पंजीकरण शुल्क रु. 1000 है। जिसमें तीन दिनों का आवास और भोजन शामिल है। सभी को अपने वाहन की व्यवस्था स्वयं करनी होगी।यदि संस्था की व्यवस्था में आना है तो रु. 1000/- अलग से भुगतान करना होगा। बस बड़ौदा या अहमदाबाद से चलेगी। इन दोनों राशियों का भुगतान अलग-अलग करना होगा। गायें हमेशा से भारत की संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही हैं।
‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ एक ऐतिहासिक प्रयास है जिसमें गाय-केंद्रित और गाय-आधारित उद्योगों से जुड़े सभी क्षेत्रों के सैकड़ों लोग भाग लेंगे। इस ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ में पंचगव्य गाय से बने शैंपू, साबुन और गोमूत्र से बने सौंदर्य प्रसाधन, औषधि सहित गाय आधारित उत्पादों के बारे में भी ज्ञान और समझ प्रदान की जाएगी।
अधिक जानकारी के लिए डॉ. गिरीश शाह (मो. 98200 20976), मित्तल खेताणी (मो. 98242 21999), देवेन्द्र जैन (मो. 98251 29111) से संपर्क किया जा सकता है।