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करवा चौथ पर गर्लफ्रेंड संग शॉपिंग करने गया पति, फिर पत्नी ने चप्पल से दिखाया ‘चांद’

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गाजियाबाद,  संवाददाता। नगर कोतवाली क्षेत्र के तुराबनगर में एक युवक अपनी प्रेमिका को करवा चौथ की खरीदारी करा रहा था। इस दौरान उसे पत्नी ने रंगेहाथ पकड़ लिया और युवक व प्रेमिका की स्वजन के साथ मिलकर जमकर पिटाई की। पत्नी ने चप्पल उतारकर पति और प्रेमिका को भरे बाजार में जमकर पीटा।

इस दौरान बाजार में लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई और यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। मारपीट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। मामला नगर कोतवाली तक पहुंच गया, पीड़ित पत्नी ने पति के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने आरोपित पति का शांति भंग की धाराओं में चालान किया और युवती को चेतावनी देकर छोड़ दिया।

 

पत्नी मायके में रहती है

पुलिस के अनुसार, सिहानी गेट क्षेत्र की प्रीति की शादी वर्ष 2017 में विजयनगर के राहुल के साथ हुई थी। शादी के बाद दोनों के बीच विवाद रहने लगा और पिछले तीन साल से प्रीति अपने मायके में रह रही है। दोनों के बीच विवाद से संबंधित एक याचिका कोर्ट में विचाराधीन है।

पत्नी को ससुराल लेकर नहीं जाता पति

प्रीति का आरोप है कि पति के संबंध दूसरी महिला से हैं और वह उन्हें अपने साथ ससुराल लेकर नहीं जाता। वह अकेला रहता है। बृहस्पतिवार को करवा चौथ के अवसर पर राहुल अपनी शादीशुदा प्रेमिका को तुराबनगर में खरीदारी करवा रहा था। प्रीति भी अपनी मां के साथ तुराबनगर में खरीदारी करने के लिए आई थीं।

पत्नी ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ा, बोली- दिखाती हूं तुमको चांद

इस दौरान उन्होंने दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोप है कि विरोध करने पर राहुल ने उनके साथ झगड़ा किया और हाथपाई की। इसके बाद प्रीति ने दोनों की चप्पल उतारकर पिटाई कर दी और कहा कि अभी करवा चौथ का चांद दिखाती हूं। घटना के दौरान दुकानदारों व बाजार में खरीदारी करने आई महिलाओं व लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

तीनों को लेकर थाने पहुंची पुलिस

मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों को लेकर नगर कोतवाली पहुंची। सीओ सिटी प्रथम अंशु जैन का कहना है कि घटना की सूचना के बाद पुलिस को मौके पर भेजा गया था। पीड़िता ने आरोपित पति के खिलाफ तहरीर दी है। मामले में वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

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गुजरात, हिमाचल के लिए चुनाव कार्यक्रम की आज हो सकती है घोषणा

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नई दिल्ली, एजेंसी। चुनाव आयोग (ईसी) शुक्रवार को गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। चुनाव आयोग इसको लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है। गुजरात विधानसभा का कार्यकाल 18 फरवरी, 2023 को समाप्त होगा जबकि हिमाचल सदन का कार्यकाल 8 जनवरी, 2023 को समाप्त होगा। 182 सीटों वाली गुजरात विधानसभा में फिलहाल 111 बीजेपी और 62 कांग्रेस विधायक हैं। पिछले महीने मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए गुजरात और हिमाचल का दौरा किया था। 14वीं गुजरात विधानसभा चुनाव 9 दिसंबर और 14 दिसंबर 2017 को विधान सभा के सदस्यों (एमएलए) का चुनाव करने के लिए आयोजित किया गया था।

फिल्म ‘कहानी रबरबैंड की’ के ट्रेलर को मिला दर्शकों का भरपूर प्यार

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केक काटकर मनीष रायसिंघन, मीत ब्रदर्स, सारिका संजोत ने मनाया जश्न

मुम्बई। महिला डायरेक्टर सारिका संजोत की 14 अक्टूबर को रिलीज हो रही सोशल कॉमेडी फिल्म “कहानी रबरबैंड की” के ट्रेलर को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। ससुराल सिमर का फेम एक्टर मनीष रायसिंघन, बालिका वधू फेम अदाकारा अविका गोर, गौरव गेरा स्टारर फ़िल्म के ट्रेलर ने 21 मिलियन व्यूज का आंकड़ा पार कर लिया है। इस खुशी के अवसर पर मुम्बई के रहेजा क्लासिक क्लब में केक कटिंग का एक शानदार कार्यक्रम रखा गया। इस अवसर पर मनीष रायसिंघन, डायरेक्टर सारिका संजोत, संगीतकार मीत ब्रदर्स, गौरव गेरा, सिंगर अल्तमश फरीदी, श्याम लाल, मिनाक्षी सेठी, राजेश जैस, रोमिल चौधरी, ब्राइट आउटडोर के योगेश लखानी, हरलीन कौर सहित फ़िल्म से जुड़ी पूरी टीम मौजूद थी।
इस इवेंट में डायरेक्टर सारिका संजोत काफी उत्साहित नजर आईं और उन्होंने म्युज़िक डायरेक्टर मीत ब्रदर्स सहित सभी कलाकारों का दिल से शुक्रिया अदा किया कि सभी मेरी इस फ़िल्म का हिस्सा बने।
संगीतकार मीत ब्रदर्स ने लेखिका और निर्देशिका सारिका संजोत के पैशन की प्रशंसा करते हुए कहा कि कहानी रबरबैंड की आंख खोलने वाली फ़िल्म है। सारिका ने हमें जिस तरह फ़िल्म की कहानी सुनाई थी हमें लगा था कि फ़िल्म बेहतरीन बनेगी। आज इसके ट्रेलर को 21 मिलियन लोगों द्वारा देखना कोई साधारण बात नहीं है। फ़िल्म के गाने कहानी को आगे बढाते हैं। अल्तमश फरीदी ने बड़ी प्यारी आवाज़ में गीत गाया है।
टीवी जगत से फ़िल्म जगत में इंटर कर रहे मनीष रायसिंघन ने कहा कि मैं आयुष्मान खुराना का फैन हूँ। जिस तरह का सिनेमा वह करते हैं, हंसी मजाक में समाज के सीरियस ईशु को छू लेते हैं, यह फ़िल्म भी उसी तरह की है। कंडोम को लेकर समाज मे आज भी सोच पहले जैसी है। आज भी काली पॉलीथिन में कंडोम दिया जाता है। जनसंख्या और कई बीमारी से बचाने वाले कंडोम को मांगने वाले को छिछोरा कहा जाता है। यह क्या विडंबना है। यह पूरी फिल्म दरअसल मीम है। ट्रेलर को लेकर हमें काफी कॉम्पलिमेंट और अच्छे अच्छे कमेंट्स मिल रहे हैं।
मनीष रायसिंघन ने आगे बताया कि प्रतीक गांधी के साथ काम करके हमें काफी कुछ सीखने को मिला। मैंने ही अविका गोर को फोन किया और इस फ़िल्म के बारे में उससे बताया तो उसने कहा कि तुमने अगर कहानी सुनली है तो फिर मेरी तरफ से ओके है और इस तरह अविका भी इस फ़िल्म का हिस्सा बनी।
डायरेक्टर सारिका संजोत ने कहा कि यह मेरी पहली फ़िल्म है और सभी कलाकारों और टेक्नीशियन ने मेरा पूरा साथ दिया। ट्रेलर देखकर मनीष की तुलना सुशांत सिंह राजपूत से की जा रही है। वाराणसी में चिलचिलाती गर्मी में बेहोश हो हो कर हम सब ने इसकी शूटिंग की है। उम्मीद है कि दर्शक इसे पसन्द करेंगे और कंडोम को लेकर जो समाज में सिचुएशन है उसमें बदलाव आएगा।
यह जबरदस्त कॉमेडी फ़िल्म उस दुकानदार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो रबरबैंड के नाम से कंडोम बेचता है। एक मनोरंजक मसाला एंटरटेनर के माध्यम से यह सोशल ड्रामा दर्शकों को भी शिक्षित करने का वादा करती है।
“कहानी रबरबैंड की” फिल्म का निर्माण मून हाउस प्रोडक्शंस के बैनर तले किया गया है। मीत ब्रदर्स ने फिल्म के लिए संगीत तैयार किया है, जबकि फारूख मिस्त्री सिनेमेटोग्राफर हैं। फिल्म के गाने में जाने-माने सिंगर्स कुणाल गांजावाला, हरगुन कौर और गीत सागर की खूबसूरत आवाजें सुनी जा सकती हैं। फिल्म 14 अक्टूबर को पीवीआर सिनेमा पूरे भारत में रिलीज कर रहा है।

Cow Economy – गौपालक 4 रुपए प्रति लीटर में गौ मूत्र बेचकर कमा रहे आर्थिक लाभ

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कोरबा ,13 अक्टूबर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशा अनुसार जैविक खेती की ओर किसानों को अग्रसर करने और फसलों को रासायनिक दवाइयों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए जिले के दो गौठानों में गोमूत्र की खरीद की जा रही है। साथ ही गौमूत्र से जैविक कीटनाशक का निर्माण भी किया जा रहा है। गौठानों में गोमूत्र विक्रय से जहाँ ग्रामीणों को आर्थिक लाभ मिल रहा है, वहीं गोमूत्र से जैविक कीट नियंत्रक ब्रह्मास्त्र और वृद्धिवर्धक जीवामृत बनाकर और इसे बेचकर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक लाभ कमा कर रहीं हैं। जिले में दो समूह की महिलाओं ने दो हजार 400 लीटर गोमूत्र उत्पाद तैयार कर 63 हजार 385 रुपये का विक्रय किया है।

जिले के कोरबा विकासखंड के चिर्रा एवं पाली के ग्राम सेंद्ररीपाली गौठान में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गोमूत्र की खरीदी की जा रही है। इन गौठानों में ग्रामीणों ने उत्साह दिखाते हुए दो हजार 874 लीटर गोमूत्र 4 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचकर 11 हजार 496 रुपये का लाभ कमाया है।

राष्ट्रीय आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत स्व सहायता समूह की महिलाएँ गोमूत्र से जैविक कीट नियंत्रक ब्रह्मास्त्र और वृद्धिवर्धक जीवामृत बना रहीं हैं। महिलाओं द्वारा जैविक कीटनाशक गोमूत्र, नीम के पत्ते, पपीता, करंज, अमरुद के पत्तों से तैयार किया जा रहा है। वहीं वृद्धिवर्धक जीवामृत गोमूत्र, गुड़ गोबर, बेसन से बनाया जा रहा है। समुह की महिलाओं ने दो हजार 400 लीटर गोमूत्र से एक हजार 431 लीटर ब्रह्मास्त्र और जीवामृत तैयार किया है, जिसमें से एक हजार 195 लीटर कीट नियंत्रक एवं 200 लीटर वृद्धिवर्धक बनाया है। महिलाओ द्वारा गौ मूत्र से तैयार ब्रह्मास्त्र को 50 रुपये प्रति लीटर तथा जीवामृत को 40 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जा रहा है।

चिर्रा गौठान की चंद्रमुखी स्व सहायता समूह की अध्यक्ष ललिता राठिया का कहना है कि छत्तीसगढ सरकार की गोमूत्र विक्रय योजना हम ग्रामीणों को लाभ देने वाली योजना है। इस योजना से ग्रामीण गोमूत्र बेचकर पैसे कमा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलायें जैविक कीटनाशक और वृद्धिवर्धक बना कर, इसे बेचकर आर्थिक लाभ ले रहीं हैं।

हिस्ट्रीशीटर गौ तस्कर से पुलिस की मुठभेड़

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हाथरस,  संवाददाता। Hathras News : सादाबाद कोतवाली सहपऊ के जलेसर रोड पर मंगलवार की रात पुलिस की हिस्ट्रीशीटर गौ तस्कर से मुठभेड़ हो गई। इस दौरान मुठभेड़ में गौ तस्कर के दाहिने पैर में गोली लग गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को सीएससी से जिला अस्पताल रेफर किया गया है। इस दौरान पुलिस ने गौ तस्कर से एक तमंचा बरामद किया है।
कालू उर्फ कलुआ उर्फ नौशाद निवासी गांव राइट थाना लोधा (अलीगढ़) गांव सलेमपुर स्थित गोवंश के अवशेष के मामले में मुकदमे में वांछित था। मंगलवार रात करीब दस बजे पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि वह जलेसर रोड से गुजर रहा है। सादाबाद, सहपऊ पुलिस व एसओजी की टीम ने जलेसर रोड पर घेराबंदी कर दी। इस दौरान पुलिस को देख बदमाश ने टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में बदमाश के दाहिने पैर में गोली लग गई और वह छटपटा कर जमीन पर गिर गया।
गंभीर हालत में उसे सीएससी में भर्ती कराया गया, जहां से चिकित्सको ने उसे हाथरस जिला अस्पताल के रेफर कर दिया है। सीओ रुचि गुप्ता ने बताया कि जलेसर रोड पर कालू उर्फ कलुआ उर्फ नौशाद पुत्र मल्ला जोकि हिस्ट्रीशीटर है। वह सलेमपुर में गोवंश के अवशेष मिलने के मुकदमे में वांछित चल रहा था मुठभेड़ में उसे गिरफ्तार किया गया है। दाहिने पैर में गोली लगने से बदमाश घायल हुआ है। उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

केलॉग्स ने लॉन्च किया ‘प्रो-मूसली’

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प्रोटीन आवश्यकता का 29% प्रदान करता है ‘केलॉग्स प्रो-मूसली’

मुंबई। भारत के अग्रणी नाश्ता अनाज निर्माता केलॉग्स ने ‘केलॉग्स प्रो मूसली’ लॉन्च किया है। एक उच्च प्रोटीन मूसली, जो कि 100% पौधा है, पोषण चाहने वाले और समय के दबाव वाले ग्राहकों के लिए केलॉग्स के बाउल का नवीनतम नवाचार है और यह रेडी-टू-ईट अनाज श्रेणी में इसकी पेशकश को मजबूत करेगा। यह नाश्ते में प्रोटीन को शामिल करने का एक स्वादिष्ट, पौष्टिक और आसान तरीका है। 200 मिलीलीटर दूध के साथ केलॉग्स प्रो मूसली की एक सर्विंग एक वयस्क (गतिहीन महिला) की दिन भर की प्रोटीन आवश्यकता का 29% प्रदान करती है।
केलॉग्स प्रो मूसली, केलॉग्स मूसली पोर्टफोलियो की मजबूत रेंज का नवीनतम अतिरिक्त है, जिसमें 20% नट्स डिलाइट के साथ केलॉग्स मूसली, 21% फल, नट और बीज के साथ केलॉग्स मूसली, 0% एडेड शुगर के साथ केलॉग्स मूसली और 22% के साथ केलॉग्स मूसली शामिल हैं। जुलाई 2022 के नीलसन के हालिया आंकड़ों के अनुसार, केलॉग की भारत में मूसली और ग्रेनोला श्रेणी में 70% हिस्सेदारी है और यह श्रेणी मजबूत दोहरे अंक में बढ़ रही है, जो उपभोक्ताओं के साथ इसकी मजबूत आत्मीयता को दर्शाता है।
सुमित माथुर (सीनियर डायरेक्टर-मार्केटिंग, साउथ एशिया-केलॉग) ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व्यक्ति अपने आहार में प्रोटीन के महत्व के बारे में जागरूक हैं ताकि वे सबसे अच्छे ऊर्जावान बने रहें और प्रोटीन से भरपूर विकल्प जो स्वादिष्ट भी है। केलॉग्स प्रो मूसली व्यस्त सुबह के लिए एक बढ़िया नाश्ता विकल्प है। मैं उस टीम के प्रयासों की सराहना करना चाहता हूं जिसने उपभोक्ताओं की दोहरी इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए इस भोजन को तैयार किया है, जो पोषण और स्वाद वाला है। यह पैकेजिंग डिजाइन, पैक पर स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी और विशेष रूप से भोजन के स्वाद सहित सभी ब्रांड संपत्तियों में परिलक्षित होता है।
महाराष्ट्र के तलोजा की निर्माण इकाई में बने केलॉग्स प्रो मूसली रिलायंस, डी मार्ट, मोर रिटेल इत्यादि जैसी सभी प्रमुख खुदरा श्रृंखलाओं में उपलब्ध है। इसे विशेष रूप से बिग बास्केट के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया गया था और अब इसे अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ाया जा रहा है।

बास्केटबॉल के खिलाड़ियों को बुलंदी पर ले जाएगा आईएनबीएल

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खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन के लिए पहुंचे फिल्म अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कहा कि मुझे बास्केटबॉल पसंद है। दिल्ली में मैंने खूब छलांग लगा लगाकर बास्केटबॉल खेला और मेरी पहली फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ में भी खेलने का अवसर मिला।
मेरी शुभकामनाएं सभी खिलाड़ियों और आयोजकों के साथ है। उन्हें देखकर और भी प्रतिभाएं सामने आएंगे।

INBL राष्ट्रीय लीग के लिए 50 लाख रुपये का इनामी पूल, BFI की प्रथम राष्ट्रीय लीग के लिए टीम के प्रतीक लोगो और जर्सियों का अनावरण

मुंबई। भारतीय बास्केटबॉल की नई ऊंचाइयों पर पहुँचने की नई प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। बेंगलुरू, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, कोच्चि और मुंबई का प्रतिनिधित्व करने वाली छह शहर-आधारित टीमें बीएफआई की पहली नेशनल लीग, INBL सीजन 2022 में तीन प्रारंभिक राउंड में एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी होंगी। 16 से 20 अक्टूबर तक पहला राउंड कोच्चि में और छह दिन बाद दूसरा राउंड 26 से 30 अक्टूबर तक जयपुर में खेला जाएगा। तीसरा राउंड 7 से 11 दिसंबर के बीच पुणे में होगा। प्ले ऑफ 11-15 जनवरी के बीच बेंगलुरु में खेला जाएगा। प्रत्येक राउंड 5 दिनों का होगा जिसमें 6 टीमें एक राउंड रॉबिन में शेष सभी टीमों के खिलाफ खेलेंगी। तीन राउंड में स्टैंडिंग अंतिम रैंकिंग में जमा हो जाएगी जो प्लेऑफ के लिए सीडिंग का आधार बनेगी। ये टीमें बेंगलुरु किंग्स, चेन्नई हीट, चंडीगढ़ वॉरियर्स, दिल्ली ड्रिब्लर्स, कोच्चि टाइगर्स और मुंबई टाइटन्स के नाम से जानी जाएंगी। खिलाड़ियों को टीमों के आस-पास के कैचमेंट क्षेत्रों से टीमों में शामिल किया गया है। बास्केटबॉल खिलाड़ी अरविंद अरुमुगम (बेंगलुरु किंग्स), एम. अरविंद कुमार (चेन्नई हीट), अरविंदर सिंह कहलों (चंडीगढ़ वॉरियर्स), दिग्विजय सिंह (दिल्ली ड्रिब्लर्स), सेजिन मैथ्यू (कोच्चि टाइगर्स) और सिद्धांत शिंदे (मुंबई टाइटंस) ने लोगो के अनावरण में टीमों का प्रतिनिधित्व किया।
हेडस्टार्ट एरिना इंडिया (एचएआई) के चेयरमैन रूपिंदर बराड़ ने कहा कि इस उल्लेखनीय पहल के लिए बीएफआई के साथ काम करते हुए हमें खुशी है। यह भारत में शीर्ष प्रतिभाओं के लिए ज़बरदस्त टक्कर देने वाले विपक्ष के खिलाफ अपनी क्षमता को प्रदर्शित करने का एक मंच है। इस साल की शुरुआत में अत्यधिक सफल आईएनबीएल 3×3 सीजन 1, जिसकी 20 शहरों में आयोजित प्रतियोगिताओं में 9,000 से अधिक खिलाड़ी और 2500 टीमें देश भर के शामिल हुई थीं, के बाद यह हमारी दूसरी पहल है जिसे हम प्रोमोट कर रहे हैं। हमें ऑन रिकॉर्ड यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि INBL 3×3 सीज़न 1 राष्ट्रीय फ़ाइनल के चैंपियन-लुधियाना_INBL इस महीने की शुरुआत में सेबू में FIBA 3×3 वर्ल्ड टूर इवेंट में भाग लेने वाला पहला अखिल भारतीय रोस्टर बन गया है। हमें उम्मीद है कि हम सभी स्तरों पर खेल को विकसित करने में अपना प्रयास निरंतर करते रहेंगे और अंतत: भारतीय बास्केटबॉल को उस स्तर तक ले जाएंगे जिसका कि वह हकदार है।
INBL के सह-संस्थापक दुष्यंत खन्ना के अनुसार, “यह भारत के लिए बास्केटबॉल के लिए एक नया युग है। और हम इसका हिस्सा बनने और इसे होने के लिए प्रेरित करने के लिए बहुत उत्साहित हैं।
इस अवसर पर आईएनबीएल के सह-संस्थापक सरबजोत सिंह ढिल्लन मौजूद थे।
डॉ. के गोविन्दराज (एमएलसी, बीएफआई अध्यक्ष) ने कहा कि आईएनबीएल सिर्फ खेलों का एक लीग नहीं है। यह सही है कि भारत में बास्केटबॉल के लाखों प्रशंसकों ने एक नेशनल लीग का सपना देखा है। पर हमारा उद्देश्य केवल एक उच्च गुणवत्ता की बास्केटबॉल लीग आयोजित करना ही नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर इसके विकास के लिए एक मजबूत और टिकाऊ प्रक्रिया का आधार तैयार करने के साथ ही खेल के हर पहलू को शामिल करना भी है। हमने बीएफआई कार्यकारी परिषद के दृष्टिकोण के अनुसार योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए हेडस्टार्ट एरेना इंडिया को यह ज़िम्मेदारी सौंपा है।
बीएफआई के महासचिव चंदर मुखी शर्मा ने कहा कि इसे सीधे और सरल शब्दों में कहें, तो राष्ट्रीय टीमों की सफलता देश में किसी भी खेल की सफलता का असली संकेत है। एक उच्च गुणवत्ता वाली लीग जैसी प्रतियोगिता, जिसकी संरचना बहुत मजबूत हैं, निश्चित रूप से इस प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है। लेकिन यह यहीं तक सीमित नहीं है।
आईएनबीएल की अवधारणा है कि यह हर दूसरे सप्ताह के अंत में हजारों खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी खेल प्रदान करे। चाहे 3×3 प्रारूप हो, जहां हम मानते हैं कि हमारे पास 2024 में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का एक बहुत सुनहरा अवसर है या नियमित प्रारूप कि जैसी स्थिति है, उसमें हमें 2027 एफआईबीए बास्केटबॉल विश्व कप और 2030 एफआईबीए महिला बास्केटबॉल कप के लिए क्वालीफाई करने का लक्ष्य रखना चाहिए। और हम आईएनबीएल के माध्यम से ठीक यही हासिल करने पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं।
बेंगलुरू किंग्स के प्रमुख खिलाड़ी अरविंद अरुमुगम ने कहा कि न केवल यह हमें अपने इलाके का प्रतिनिधित्व करने का एक शानदार अवसर दे रहा है, बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद करने के लिए आईएनबीएल हमें महान चीजों से जुड़ने का भी अवसर प्रदान कर रहा है। लुधियाना आईएनबीएल के अरविंदर सिंह, जो आईएनबीएल 3×3 सीज़न 1 नेशनल फ़ाइनल के चैंपियन और सेबू में एफसीबीए 3×3 वर्ल्ड टूर इवेंट के लिए यात्रा करने वाली टीम के एक सदस्य हैं, उन्होंने कहा कि भले ही हम पेशेवर नहीं हैं पर खिलाड़ियों की तरह व्यवहार किया जाना कितना अच्छा लगता है। पुरस्कार राशि अर्जित करना और अपने साथियों के बीच पहचान पाने का अवसर मिलना भी बहुत ही शानदार अनुभव है।
कोची टीम के कैप्टन सेजिन मैथ्यू ने कहा कि मैं आईएनबीएल में खेलने के लिए वास्तव में उत्साहित हूं। यह न केवल मेरे शहर का प्रतिनिधित्व करने का, बल्कि इस नए प्रारूप में देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का भी एक शानदार अवसर है।

वित्त मंत्री ने ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट को किया संबोधित

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वाशिंगटन, प्रेट्र: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि आत्मनिर्भर भारत न तो ‘पृथकतावाद’ है और न ही ‘संरक्षणवाद’, बल्कि यह इस तथ्य की स्वीकार्यता है कि भारत को जीडीपी में अपनी विनिर्माण हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए। सीतारमण ने यहां प्रतिष्ठित ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में व्यापक तौर पर औद्योगिकीकरण नहीं हुआ क्योंकि इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी की कमी थी।

अलगाववाद या संरक्षणवाद के रूप में गलत समझा
सीतारमण ने मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भर भारत परियोजना के संदर्भ में कहा कि हम पिछले आठ साल से इसी कमी को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत को अलगाववाद या संरक्षणवाद के रूप में गलत समझा जाता है। यह इस तथ्य की मान्यता है कि भारत को सकल घरेलू उत्पाद का अपना विनिर्माण हिस्सा बढ़ाना चाहिए क्योंकि यह कुशल और अर्धकुशल दोनों के लिए रोजगार पैदा करता है।

 

उन्होंने कहा कि सड़क और हाईवे का निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। बंदरगाहों और रेल नेटवर्क को मजबूत किया गया है। सरकार के पूंजीगत व्यय में वृद्धि का उद्देश्य निजी क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण क्षमता बनाने के लिए बुनियादी ढांचा मंच प्रदान करना था। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर सीतारमण ने कहा कि, वैश्विक विकास और व्यापार परस्पर जुड़े हुए हैं। व्यापार के लिए नई विश्व व्यवस्था में विकास का समर्थन करने के लिए, हमें अनिवार्य रूप से सीमाओं के पार चलने के लिए माल और सेवा आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता है। सीतारमण ने कहा कि प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना स्थानीय स्तर पर वैश्विक क्षमता बनाने के बारे में है। यह हमें आपूर्ति-श्रृंखला के लचीलापन का एक उपाय प्रदान करते हुए भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में प्लग करना चाहते है।
भारत की यात्रा पर आएंगे अमेरिकी ट्रेजरी सचिव

वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण के साथ मुलाकात में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट एल येलेन ने घोषणा की कि वो जी20 की बैठकों से पहले नवंबर में, अमेरिका-भारत आर्थिक और वित्तीय भागीदारी की बैठक में भाग लेने के लिए ट्रेजरी सचिव के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा करेंगे।

मुसलमानों ने बॉलीवुड को बिगाड़ा है ,बनाया नहीं

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‘राष्ट्रद्रोही मुसलमान’ जब अपने समाज में भी दुत्कारे जाने लगे हैं , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने देश में तेजी से अप्रासंगिक होती मुस्लिम तुष्टिकरण की अपनी घिसी- पिटी राजनीति को प्राणवायु देने के लिए यह हास्यास्पद बयान दिया है कि मुसलमानों ने बॉलीवुड को बनाया है। ‘बनाया है ” के बाद के शब्द उन्होने शायद नहीं बोले या मीडिया को वह शब्द स्पष्ट सुनाई नहीं दिया तो उसने उस शब्द को नहीं लिखा या दिखाया जिससे राजनीतिक क्षेत्र में उनकी वरिष्ठता के कारण यह विश्वास होता है कि वे ‘उल्लू’ अथवा ‘भ्रष्ट ‘ बोलना भूल गए या बोले तो वह स्पष्ट नहीं सुनाई दिया – यदि ऐसा है तो वे बिलकुल सही बोल रहे थे। यदि उनके कहने का अर्थ यह है कि ‘मुसलमानों के कारण बॉलीवुड का भला हुआ है’ तो उनका भ्रम है – सुझाव होगा वे अपनी अज्ञानता को दूर करें और भारतीय सिनेमा के इतिहास को पढ़ें , अतीत के चलचित्रों को देखें तभी उनको ‘ सिनेमा एवं उसके चरित्र’ का ज्ञान होगा।
सिनेमा के लिए आवश्यक तत्व है धन , लेखन , निर्माण कौशल , निर्देशन कौशल , अभिनय कौशल ,’गायन -वादन -नृत्य – रूप सज्जा’ कौशल , प्रबंधन कौशल ,दृश्यांकन ( फिल्मांकन ) कौशल , सम्पादन कौशल , वितरण कौशल और व्यवसाय कौशल।भारतीय सिनेमा के लगभग सवा सौ सालों के इतिहास में
“मुसलमानों के कुसंस्कारिय दुष्कौशल” में ही हिन्दू पिछड़े हैं बाकी उपरोक्त किसी कौशल में वे हिन्दू प्रतिभाओं के आसपास भी फटकने की हैसियत नहीं रखते। यहां हम एक -एक उदाहरण हर खंड से लेते हैं बात स्पष्ट हो जाएगी।
भारतीय सिनेद्योग में कोई मुसलमान निर्माता प्रमथेश बरुआ ,शापूरजी पलोनजी , पी एल संतोषी की जूतियों बराबर आजतक नहीं हुआ। मुस्लिम निर्माता अगर कोई है तो वह लागत कम करने पर ध्यान देता है चाहे उसके लिए कंटेंट की भद्द क्यों नहीं पीटनी पड़े। ऐसे चिंदीचोर पैसा भले बना लें ,सिनेमा नहीं बना सकते। आज भी भारतीय फिल्मोद्योग के पास एक भी मुस्लिम वित्तपोषक ( फायनेंसर ) नहीं है , जो भी हैं वे प्रोजेक्ट मैनेजर हैं -पी पी टी दिखाकर अनेक लोगों से पैसा लेकर लगानेवाले। शापूरजी पालोन जी की देखा -देखी टाटा समूह भी फिल्म निर्माण में उतरा और चर्चित एवं कथित बड़े नामवाले मुस्लिम निर्देशक -कलाकारों को अनुबंधित कर लिया। शीघ्र ही फिल्म निर्माण के नाम पर मुस्लिम निर्देशक -कलाकारों के द्वारा की जानेवाली गन्दगी देखकर टाटा समूह ने प्रोजेक्ट बीच में ही बंद कर दिया। आज कोई ‘मुस्लिम फिल्मकार’ नहीं है जो बिना बैंक ,कॉर्पोरेट तथा ‘बाहर’ से निवेश लिए फिल्म बना ले। क्या ये कुर्सी -पिपासु नेतागण कभी सोच भी सकते हैं कि कोई मुसलमान ‘राजश्री प्रोडक्शन ‘ जैसी संस्थान बनाकर सिनेमा को संजीवनी दे सकता है बिना भारतीयता से कोई समझौता किये हुए ? राजश्री प्रोडक्शन अपने जीवन का शतक लगाने जा रही है।
क्या मुसलमानों में आजतक कोई इतना बड़ा लेखक हुआ
जो पंडित मुखराम शर्मा के घुटने तक भी पहुँच सके ?
क्या मुसलमानों में आजतक कोई इतना बड़ा लेखक हुआ जो पंडित मुखराम शर्मा के घुटने तक भी पहुँच सके-रचनात्मकता ही नहीं , व्यावसायिक मूल्यों की दृष्टि से भी ? मुस्लिम फिल्मलेखकों में सबसे बड़े नाम कहलानेवाले सलीम -जावेद चाहे जितनी बकलोली कर लें उनके नाम पर एक भी फिल्म बनाने से पहले नहीं बिकी जबकि पंडित मुखराम शर्मा अगर शीर्षक भी घोषित कर देते थे तो निर्माताओं की लम्बी पंक्तियाँ उनके घर के दरवाजे पर लग जाती थी और जो निर्माता उनको अनुबंधित कर लेता था उसको फिल्म बनाने से पहले गोल्डन जुबली मनाने पर होनेवाले लाभ तक की राशि वितरकों से मिल जाते थे। यह बात एशिया के सबसे बड़े फिल्म इतिहासकार कहलानेवाले स्वर्गीय पी के नायर ने अनेक बार ‘फिल्म एप्रिसिएशन कोर्सेज’ और नियमित फिल्म प्रशिक्षण वर्गों में कही है(जिनको संदेह हो वे पुणे स्थित फिल्म स्कूल जाकर उसके आर्काइव खंगाल लें )।
शापूरजी – केदारशर्मा के आगे आज भी
बौने हैं सारे मुस्लिम निर्माता -निर्देशक
फिल्म निर्माण कौशल में शापुर जी पालोन जी से लगायत राजकुमार कोहली , यश जौहर ,गुलशन राय – राजीव राय जैसे दिग्गज लोगों की सूची है जो मुसलमान नहीं थे और उनके घुटने के बराबर कद का भी एक मुस्लिम फिल्म निर्माता नहीं दिखता – नहीं मिलता पिछले सवा सौ सालों में।यदि निर्देशन की बात करें तो चरित्र -चित्रण एवं दृश्य-संयोजन का जो कौशल धुंडिराज गोविन्द (दादा साहेब) फाल्के , प्रमथेश बरुआ , केदार शर्मा ,विजय आनंद (गोल्डी ) ,मनोज कुमार दिखा गए उनके आसपास कोई अनीस बज्मी या तारिक़ खान खड़ा होने योग्य भी है क्या ?
दिलीप कुमार स्वयं को मोतीलाल,अशोक कुमार
शम्मी कपूर से कमतर अभिनेता मानते थे
कथित ‘अभिनय सम्राट’ दिलीप कुमार उपाख्य युसूफ खान ने स्वयं मुझे बताया था कि मोतीलाल , दादामुनि ( अशोक कुमार ) के साथ काम करते हुए उनको डर लगता था। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की पत्रकार देवयानी चौबल को सपने दिखाकर दिलीप ने मीडिया से स्वयं को ‘अभिनय सम्राट’ कहलवाकर अपनी दुकान चमकाई थी और जब देवयानी को धोखा मिला तो उसने दिलीप की चमक ऐसी धोई कि उनको फ़िल्में छोड़ हाजी मस्तान के साथ मिलकर राजनीतिक पार्टी का गठन कर नरगिस के सहारे इंदिरा जी की छत्रछाया ले राजयसभा का जुगाड़ बिठाना पड़ा। जॉन पीटर ने भी इसकी चर्चा दिलीप कुमार पर लिखी अपनी किताब में की है।बाद के वर्षों में कमल हसन के साथ काम करने से दिलीप मना कर गए लेकिन ‘विधाता’ में संजीव कुमार के आगे यह कथित अभिनय -सम्राट पानी भरता नजर आया।अपने स्वर्णिम काल में भी दिलीप कुमार को शम्मी कपूर से स्क्रीन शेयर करने में झिझक ही रही।
लता -मन्ना डे -येशुदास के आगे रफी नाटे ही थे
मुस्लिम मोहम्मद रफ़ी को सर्वश्रेष्ठ गायक के रूप में उछालते रहते हैं जबकि स्वयं रफ़ी को मन्ना डे की शास्त्रीयता और किशोर कुमार की बहुमुखी गायकी से भय लगता था। उनको स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने रिकॉर्डिंग के समय ही अनेक बार सुर सुधारने को कहा था। एक बार इसी बात पर रफ़ी तुनक गए तो लता मंगेशकर ने रिकॉर्डिंग से मना कर दिया। लगभग पंद्रह सालों तक रफ़ी फिर फिल्मों से बाहर हो गए और मुस्लिम संगीतकारों की लम्बी कतार भी उनको पुनर्जीवन नहीं दे सकी। जब उन्होने राज डूंगरपुर के पैर पकड़े तो लता जी ने क्षमा करते हुए उनके साथ गाने की रिकॉर्डिंग की। रफ़ी पहले कुन्दनलाल सहगल को अपने से महान मानते थे और बाद में येसुदास को स्वयं से अच्छा गायक कहा।
सलिल -रवि -सचिनदेब -एल पी -इलैया -रवींद्र -भाष्कर की तरह
रचनात्मक विविधता नहीं दिखी मुस्लिम संगीतकारों में
वादन में देखें तो मुस्लिम संगीतकार अपने एक ही पैटर्न पर कोल्हू के बैल की तरह चलते रहे चाहे वे सरदार मालिक हों या खय्याम अथवा नौशाद। कोई भी मुस्लिम फिल्मसंगीतकार हर बार मौलिक रचना लेकर नहीं आया जबकि वसंत देसाई ,रविशंकर,सलिल चौधरी ,सचिनदेब बर्मन ,चित्रगुप्त , रवि ,नीलेश मोइर ,भास्कर चंदावरकर ,मदनमोहन ,लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ,ओ पी नय्यर ,रामलक्ष्मण ,रवींद्र जैन, इलैया राजा, शंकर महादेवन जैसे अनेक फिल्म संगीतकार हैं जिन्होने हर बार अपने संगीत में कुछ नया रचकर फ़िल्मी संगीत को समृद्ध किया है।
गोपी -गणेश -गुरुदत्त बिरजू की पंक्ति में
नहीं है कोई मुस्लिम डांस डायरेक्टर
नृत्य निर्देशन की बात करें तो गोपीकृष्ण ,गणेश हसल गुरूजी ,गुरु दत्त ,सितारा देवी ,जयन्तीमाला , रुक्मिणी देवी पद्मा सुब्रह्मनियम ,सीमा केरवानी ,बिरजू महाराज लच्छू महाराज,शाश्वती सेन , मंजरी चतुर्वेदी के आसपास भी कोई मुस्लिम नृत्य निर्देशक नहीं मिलता। आधुनिक समय की बात करें तो प्रभुदेवा के सामने सभी पानी भरते हैं।
रूप सज्जा में सत्यजीत रे, पी जी जोशी ,आर पीतांबर ,टी राजा राम ,शान्तिदेव से लगायत विक्रम गायकवाड़ तक हिन्दू ही भरे पड़े हैं और उनके मुकाबले में कोई मुस्लिम नहीं दिखता। कला निर्देशन की बात करें तो के आर शर्मा ,अशोक भगत ,श्याम रामसे ,दादू मिस्त्री ,वी जाधव ,एम एस सथ्यू ,राम येदेकर ,बी आर खेड़कर ,एल डी लिंगायत, एच जे म्हात्रे, एस पी वरळीकर ,नितिन देसाई ,समीर चंदा जैसे बड़े नाम हिन्दू ही हैं। जहां तक फिल्म और टेलीविजन धारावाहिक निर्माण के प्रबंधकों का विषय है आर के हांडा , राममिलन वर्मा ,माणिक गुप्ता , वी के माथुर , गंगाधर राम ,भूषण वर्मा , ज्ञान सचदेव ,वेद गांधी , यश जौहर ,बंसीलाल ,सुरेंद्र श्रीवास्तव ,इंद्रजीत चड्डा ने बड़ी लकीरें खींची हैं और उनके आगे दूर- दूर तक कोई मुस्लिम प्रोडक्शन मैनेजर नहीं दिखता।
आरडी -सुब्रत -केके -बीर -सुमेर-प्रिय सेठ सा
एक भी कैमरामैन मुस्लिम मजहब का नहीं .
दृश्यांकन ( सिनेमैटोग्राफी ) में आर डी माथुर , सुब्रत मित्रा , के के महाजन ,पद्मश्री अपूर्वकिशोर बीर ,सुमेर वर्मा ,प्रिय सेठ ने फिल्मिंग की जिन ऊंचाइयों को छुआ और गहराइयों को नापा उसकी बराबरी छोड़िये , उस विधा में कदम रखकर खड़ा रहने की क्षमता वाला एक भी मुसलमान भारतीय सिनेमैटोग्राफर का नाम गिना दीजिये शरद पवार जी – आपका लोहा मान जाऊंगा। यही बात फिल्म -सम्पादन के लिए कहूंगा। फिल्म सम्पादन में धर्मवीर ,वाय जी चौहान, हृषिकेश मुखर्जी , बाबूभाई ठक्कर , विजय आनंद , माधव एस शिंदे , रेणु सलूजा ,भारती , आरती बजाज ,बल्लू सलूजा , कोटागिरी व्यंकटेश्वर राव ,ए श्रीकर प्रसाद की बराबरी या इनसे उन्नीस भी कोई मुस्लिम फिल्म सम्पादक बताइये। फिल्म वितरण और व्यवसाय कौशल में एक भी नाम मुसलमान मजहब का नहीं है। इनमें जोखिम उठाने की कुव्बत नहीं होती इसलिए इस कौम का कोई आदमी फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर और एक्जिवीटर नहीं है , हाँ फिल्म दलाली के क्षेत्र में ये बिजबिजाते मिलते हैं।
मुसलमानों के बढ़ते प्रभुत्व ने सिनेमा को १९६५ और उसके बाद के दशकों में रसातल की और धकेला है जिसका परिणाम चोर -डाकुओं -गुंडों और माफिया गिरोहों का महिमामंडन से लेकर देशद्रोह को कुतर्कों से सिद्ध करने के रूप में सामने आया तो समानांतर सिनेमा के नाम पर नक्सलवाद और सामाजिक कुरीतियों के ग्लैमराइजेशन ,कन्वर्जन ,हिन्दूद्रोह ,सामाजिक -पारिवारिक विखंडन ,तनाव ,परेशानियां ,लम्पटई को बढ़ावा मिला। बुराइयों की चर्चा से उसको विस्तार मिलता है इसलिए सिर्फ संकेत किया है। अगर आपके ज्ञानचक्षु नहीं खुले तो विस्तार से तीन -चार लेखों में १९६५ से २०२२ तक मुस्लिमों की गंदगियों का सिनेमाई प्रभाव सार्वजनिक करूँगा।

UIDAI का दस साल पहले आधार बनवाने वालों से आग्रह, कहा- डेटाबेस में अपनी जानकारी कराएं अपडेट

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नई दिल्ली, प्रेट्र: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइई) ने दस साल पहले अपना आधार बनवाने वाले लोगों से इसे अपडेट कराने का आग्रह किया है। यूआइडीएआइई ने कहा है कि ऐसे व्यक्ति जिन्होंने अपना आधार दस साल पहले बनवाया था और उसके बाद कभी अपडेट नहीं कराया है, ऐसे आधार नंबर धारकों से दस्तावेज अपडेट कराने का आग्रह किया जाता है।

अपडेट के लिए देय होगा निर्धारित शुल्क

प्राधिकरण ने कहा है कि इसके लिए आधार धारकों को दस्तावेज अपडेट करने की सुविधा निर्धारित शुल्क के साथ प्रदान की गई है। आधार धारक व्यक्तिगत पहचान प्रमाण और पते के प्रमाण से जुड़े दस्तावेजों को आधार डाटा में अपडेट कर सकता है। यह सुविधा आनलाइन भी प्राप्त की जा सकती है। गौरतलब है कि यूआइडीएआइई एक संवैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना आधार कानून, 2016 के तहत 12 जुलाई, 2016 को भारत सरकार द्वारा की गई थी।

आधार कार्ड डाटा कराएं अपडेट

गौरतलब है कि आधार प्रोग्राम आंख की पुतली, फिंगरप्रिंट और तस्वीरों के माध्यम से पहचान स्थापित करता है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि, पिछले 10 वर्षों के दौरान आधार नंबर लोगों की पहचान के स्रोत के रूप में उभरा है। आधार संख्या का इस्तेमाल विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं में किया जाता है। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे आधार डाटा को अपडेट करें ताकि पहचान में किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।