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भारत के लीडिंग मेमोरी कोच सीए डॉ. महेश गौड़ को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मेमोरियल सम्मान

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मुंबई। शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला रहे सीए डॉ. महेश गौड़ को उनकी अद्वितीय सोच और नवाचार के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मृति अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें भारत में मेमोरी कोचिंग और मोटिवेशनल स्पीकिंग को नई दिशा देने के लिए दिया गया, जिससे आज हज़ारों छात्र न सिर्फ बेहतर सीख रहे हैं, बल्कि आत्मविश्वास से आगे बढ़ भी रहे हैं।

इस गरिमामय आयोजन का आयोजन टॉपनोटच फाउंडेशन द्वारा किया गया, जिसमें देश की कई जानी-मानी हस्तियों की उपस्थिति रही। समारोह में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे, अभिनेता सोनू सूद, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर, और शिवसेना प्रवक्ता शाइना एन.सी. जैसे सम्माननीय मेहमान मौजूद थे।

डॉ. गौड़ द्वारा स्थापित एडुक्विक (EduQuik), जो एडुवेदा एडटेक प्राइवेट लिमिटेड के अंतर्गत संचालित है, आज देशभर में विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है। यहां बच्चों को रटने के बजाय याद रखने के वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक तरीकों से पढ़ाया जाता है जिससे शिक्षा एक बोझ नहीं, बल्कि एक आनंदमय अनुभव बनती है।

डॉ. गौड़ कहते हैं, “मेरा सपना है कि भारत का हर बच्चा पढ़ाई से डरे नहीं, बल्कि उसे समझे और जिए। शिक्षा को केवल अंकों की दौड़ नहीं, बल्कि सोचने और सशक्त बनने का माध्यम बनाना है।”

वह खुद एक वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर मेमोरी कोच हैं और उन्हें महाराष्ट्र रत्न सम्मान, राजस्थान प्राइड अवार्ड, और इंडो इंटरनेशनल अचीवर अवार्ड जैसे कई ख्यातिप्राप्त पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

इस पुरस्कार के साथ, डॉ. गौड़ ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत सच्ची हो और नजरिया वैज्ञानिक, तो शिक्षा को एक नई दिशा दी जा सकती है।

देश विदेश में अपनी परफॉर्मेंस से लोगों को दीवाना बना लेती है डीजे चाहत 

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डीजे चाहत म्यूज़िक की दुनिया की एक नायाब सितारा हैं। चाहत कम उम्र से ही डीजे बन गई है। वर्तमान में वह 22 वर्ष की हैं और पिछले सात वर्षों से पेशेवर रूप से डीजे के रूप में सक्रिय हैं। वह देश की सबसे कम उम्र की लेडी डीजे बनकर अन्य महिलाओं के लिए एक नई मिसाल कायम कर चुकी हैं।

डीजे चाहत बताती हैं कि वह एक प्रोफेशनल डीजे हैं और उन्होंने डीजे की बाकायदा पढ़ाई की है तथा इस क्षेत्र में डिप्लोमा भी प्राप्त किया है। उनका मानना है कि अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि उन्हें पूरा करने की दिशा में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
उनके अनुसार, “काम ऐसा होना चाहिए जिससे जीवन बोझ न लगे, बल्कि आनंद मिले। अपने कौशल और प्रतिभा को लगातार बढ़ाएं, और अपने सपनों को साकार करें। आज का समय बदल चुका है, किसी एक नौकरी में अपने अमूल्य जीवन को नष्ट न करें। यदि आपने अपने लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत और लगन से कार्य किया, तो न केवल आप खुश रहेंगे बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ बना सकेंगे।”

चाहत बताती हैं कि डीजे बनना आसान नहीं है। एक डीजे का कार्य केवल लोगों का मनोरंजन करना नहीं होता, बल्कि उनकी भावनाओं को भी समझना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई भावनात्मक और धीमा गीत चल रहा हो और दर्शक भावुक हो जाएं, तो उसी भाव-तरंग के अनुसार अगले गानों का चयन करना आवश्यक होता है। आप तुरंत कोई रॉक सॉन्ग या मस्ती भरा गीत नहीं बजा सकते। यदि कोई मस्ती वाला गीत चल रहा हो, तो एकदम से अलग जॉनर का गाना बजाना उपयुक्त नहीं होता। चूंकि यह लाइव परफ़ॉर्मेंस होता है, इसलिए आपकी छोटी सी गलती भी दर्शकों के असंतोष का कारण बन सकती है। इसलिए इस क्षेत्र में अच्छी समझदारी और बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन आवश्यक होता है। डीजे इंडस्ट्री में भी ग्लैमर का प्रभाव काफी अधिक होता है।

डीजे चाहत म्यूजिक मिक्सिंग, प्लेलिस्ट निर्माण, डीजे मशीन के सही उपयोग और मास्टरिंग में दक्ष हैं। उन्हें बॉलीटेक, टेक्नो, पंजाबी और बॉलीवुड जैसे विभिन्न जॉनर में गीत बजाने में महारत हासिल है। एक बेहतरीन धुन तैयार करने के लिए उन्हें हजारों गाने सुनने पड़ते हैं। गानों को सुनकर उन्हें क्रमबद्ध रूप से सजाना और संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करना होता है। किसी एक ट्रैक को बजाने से पहले तीन से चार घंटे की कड़ी मेहनत होती है, तब जाकर एक अच्छी परफॉर्मेंस तैयार होती है। एक बेहतरीन धुन तैयार करने के लिए सभी इंस्ट्रूमेंट्स, बीट्स और डीजे मशीन पर विशेष ध्यान देना होता है। अनुभव से ही इस क्षेत्र में कौशल में निखार आता है और डीजे चाहत इस दिशा में अनुभवी हैं।

इसके अतिरिक्त वह गिटार और दरबुका जैसे वाद्ययंत्रों को भी बेहतरीन ढंग से बजा लेती हैं। उनकी गायन शैली भी सराहनीय है। योग, जिम और संगीत सुनना उनके प्रमुख शौक हैं। वह देश और विदेशों में बतौर डीजे परफ़ॉर्मेंस करती रहती हैं। यह कार्य उनके दिल के अत्यंत करीब है। वे पार्टी, क्लब, होटल, विवाह एवं अन्य कार्यक्रमों में डीजे का कार्य करती हैं।

एक मज़ेदार अनुभव साझा करते हुए डीजे चाहत ने बताया कि एक बार जब वह इंदौर गई थीं, तो तय समय से काफी पहले पहुंच गई थीं, जिससे कार्यक्रम की व्यवस्था में थोड़ा समय लग गया। उस खाली समय में उन्होंने होटल में ही म्यूजिक बजाना शुरू कर दिया। वह सिर्फ अपनी खुशी और समय बिताने के लिए म्यूजिक प्ले कर रही थीं, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने उनके म्यूजिक को खूब सराहा। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई और होटल प्रबंधन ने उनकी प्रशंसा करते हुए खुशी से उन्हें भुगतान भी किया। यह पल उनके लिए एक गर्व से भरा और यादगार अनुभव रहा।

ज्वेलबॉक्स ने मुंबई में खोला अपना 11वां स्टोर

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ग्राहकों के लिए एक्सक्लूसिव लॉन्च ऑफर: डायमंड पर 30% छूट और मेकिंग चार्ज पर 20% छूट

मुंबई। भारत के प्रमुख लैब-ग्रोन डायमंड ज्वेलरी ब्रांड ज्वेलबॉक्स ने अपने 11वें स्टोर की शुरुआत मुंबई में की है। यह नया स्टोर बोरिवली (पश्चिम) के गुलमोहर रोड स्थित हवेली सोसायटी में खोला गया है। फैशन कैपिटल माने जाने वाले मुंबई में ज्वेलबॉक्स की यह एंट्री शहर के आधुनिक और डिजाइन-प्रेमी ग्राहकों के लिए शानदार ज्वेलरी शॉपिंग का नया अनुभव लेकर आई है।
भारत के दक्षिण, पूर्व और उत्तर भारत में सफलता के बाद मुंबई का यह स्टोर पश्चिम भारत में ज्वेलबॉक्स की रिटेल विस्तार योजना में एक अहम पड़ाव है। रणनीतिक लोकेशन और तैयार ग्राहक आधार के कारण यह स्टोर बोरिवली के निवासियों के लिए डेली वियर, गिफ्टिंग और सेलिब्रेशन ज्वेलरी की पसंदीदा जगह बनने जा रहा है।
ज्वेलबॉक्स की को-फाउंडर विदिता कोचर जैन ने कहा, “मुंबई हमेशा से हमारी ग्रोथ स्ट्रेटेजी में शामिल रहा है। यह शहर बोल्ड, स्टाइलिश और सेल्फ-एक्सप्रेसिव है—यही हमारे ब्रांड की पहचान है। बोरिवली वेस्ट में नए स्टोर के साथ, हम डिजाइन-फर्स्ट ज्वेलरी अनुभव को नई पीढ़ी के ग्राहकों तक पहुंचाने को लेकर बेहद उत्साहित हैं।”
मिनिमलिस्ट और वॉर्म इंटीरियर से सजे इस स्टोर में लैब-ग्रोन डायमंड ज्वेलरी की शानदार रेंज उपलब्ध है—शानदार सॉलिटेयर रिंग्स और डेली मिनिमल स्टाइल्स से लेकर पुरुषों और खास मौकों के लिए क्यूरेटेड कलेक्शन तक। यह स्पेस क्वालिटी, क्राफ्ट्समैनशिप और सस्टेनेबिलिटी को सहज शॉपिंग अनुभव के साथ जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
लॉन्च सेलिब्रेशन ऑफर के तहत ग्राहकों के लिए सीमित समय तक डायमंड पर 30% और मेकिंग चार्ज पर 20% छूट उपलब्ध है। आने वाले फेस्टिव और वेडिंग सीजन को देखते हुए, ब्रांड को उम्मीद है कि यह स्टोर शहरी प्रोफेशनल्स, यंग कपल्स और स्टाइल-प्रेमी शॉपर्स के बीच लोकप्रिय होगा।
विदिता ने आगे कहा, “हमारा मुंबई स्टोर सिर्फ एक लोकेशन नहीं है, यह शहर की ऊर्जा और भावना का प्रतीक है। जैसे-जैसे लैब-ग्रोन डायमंड्स की जागरूकता बढ़ रही है, हम गर्व से ऐसा स्पेस दे रहे हैं जहां ग्राहक एलिगेंस, एथिक्स और एक्सेसिबिलिटी के बीच समझौता नहीं करना पड़ेगा।”
अपने शीर्ष प्रदर्शन करने वाले स्टोर्स के प्रदर्शन की बराबरी करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ, ज्वेलबॉक्स स्थानीय जागरूकता बढ़ाने, अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ सेवा प्रदान करने और 5-स्टार अनुभव प्रदान करने पर केंद्रित है जो ग्राहकों की मजबूत वफादारी और रेफरल-संचालित विकास को बढ़ावा देता है।
लैब ग्रोन डायमंड्स पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने वाले भारत के पहले लक्ज़री ब्रांड के रूप में ज्वेलबॉक्स इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और टाइमलेस डिज़ाइन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ उत्तम आभूषणों को नए सिरे से परिभाषित करता रहता है।

ज्वेलबॉक्स के बारे में बता दें कि यह भारत का सबसे भरोसेमंद प्रयोगशाला में उगाए गए हीरा आभूषण ब्रांड है, जो नैतिक रूप से प्राप्त, उच्च-गुणवत्ता वाले उत्तम आभूषणों के साथ ‘कॉन्शियस लक्ज़री’ का अग्रणी है। मई 2022 में विदिता कोचर जैन और निपुण कोचर द्वारा स्थापित, यह ब्रांड शिल्प कौशल, स्थिरता और सुलभता का मिश्रण है। ज्वेलबॉक्स रोज़मर्रा और अवसर दोनों के लिए उत्तम डिज़ाइन प्रदान करता है। बढ़ती खुदरा उपस्थिति और एक मजबूत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ, यह ब्रांड पूरे भारत में तेज़ी से विस्तार कर रहा है।

बीमार गाय को पीठ पर उठाकर ले गए 2 ग्रामीण

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सिरमौर: हिमाचल प्रदेश से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जहां 2 ग्रामीण भारी भरकम बीमार गाय को पीठ पर उठाकर सड़क तक पहुंचाते हुए नजर आ रहे हैं. साथ ही अन्य ग्रामीण भी गाय को सहारा दे रहे हैं. इन ग्रामीणों ने मानवता की मिसाल पेश कर बेजुबान पशु की जान बचाई है. ये मामला जिला सिरमौर के दुर्गम क्षेत्र शिलाई की क्यारी गुंडाह पंचायत का है. बुधवार को इस मामले का वीडियो सामने आने के बाद दोनों ग्रामीणों की बहादुरी की हर कोई प्रशंसा कर रहा है. इन दोनों ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डाल बीमार गाय को अपनी पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया.

दरअसल यह मामला करीब एक सप्ताह पहले का है, जिसका वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. ईटीवी भारत द्वारा पड़ताल करने पर पाया गया कि ये वीडियो शिलाई विधानसभा क्षेत्र की क्यारी गुंडाह के कुराई गांव का है. इस गांव के दीप राम शर्मा की गाय कई दिन से बीमार थी और उसे तुरंत इलाज की जरूरत थी. वेटरनरी अस्पताल हालांकि केवल 3 किलोमीटर दूर गुडाहां गांव में था, लेकिन भारी बरसात के कारण पहाड़ी रास्ता कई जगहों से टूट चुका था. लिहाजा बीमार गाय को अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया था. उसे गाड़ी से ले जाना तो दूर, पैदल ले जाना भी लगभग असंभव था.

देवदूत बनकर आए ये दो ग्रामीण

इस बीच गौमाता की जान बचाने के लिए दयाराम और लाल सिंह देवदूत बनकर आगे आए. उन्होंने इस असंभव से लगने वाले कार्य को संभव कर दिखाया. उन्होंने रस्सियों की मदद से डेढ़ से दो क्विंटल वजनी गाय को अपनी पीठ पर बांधा और जोखिम भरे पहाड़ी रास्ते पर चलना शुरू किया. जरा सी चूक या संतुलन बिगड़ने का परिणाम जानलेवा दुर्घटना हो सकता थी, लेकिन ग्रामीणों ने धैर्य और सूझबूझ से काम लिया. इस दौरान अन्य ग्रामीणों ने भी उनके पीछे-पीछे चलकर पीठ पर बंधी गाय को सहारा देकर उसे अस्पताल पहुंचाने में अपना भरपूर सहयोग किया. सधे हुए कदमों से चलते हुए उन्होंने गाय को रास्ते का टूटा हुआ हिस्सा पार कराया और गाय को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे उचित इलाज मिल सका. एक दिन के इलाज के बाद गाय अब बिल्कुल स्वस्थ है. इन दोनों ग्रामीणों की गौ सेवा, साहस और मानवता के अनूठे और प्रेरणादायक प्रयासों की चारों ओर सराहना हो रही है.

गऊ भारत भारती की 11 वीं वर्षगांठ और सर्वोत्तम सम्मान समारोह 6 अगस्त की शाम जुहू इस्कॉन में

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गऊ भारत भारती की 11 वीं वर्षगांठ और सर्वोत्तम सम्मान समारोह 6 अगस्त की शाम जुहू इस्कॉन में

आचार्य पवन त्रिपाठी होंगे समारोहअध्यक्ष 

श्रीनारायण तिवारी, डॉ महेंद्र कुमार गर्ग, राघवेंद्र नाथ द्विवेदी, डॉ रोशनी किरण, हेमा चंदानी, पंकज तिवारी, डॉ जितेंद्र पांडेय, राजेश त्रिपाठी, नितेश वशिष्ठ, सुरज्ञान गुप्ता, उमेश शाह, हेमलता त्रिपाठी और विमल भुता, हनुमंत पोपट गोसावी , श्री अभिषेक जाजू को मिलेगा सर्वोत्तम सम्मान

मुंबई – भारत का पहला गऊ वंश पर आधारित राष्ट्रीय समाचारपत्र गऊ भारत भारती की ११वीं वर्षगाँठ तथा ” सर्वोत्तम सम्मान समारोह ” का आयोजन ६ अगस्त २०२५ को जुहू इस्कॉन सभागार मुंबई में शाम ५ .30 बजे से आचार्य पवन त्रिपाठी ( कोषाध्यक्ष – श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट तथा उपाध्यक्ष, भाजपा मुंबई , की अध्यक्षता और वरिष्ठ पत्रकार , साहित्यकार राजेश विक्रांत के संयोजन में होने जा रहा है।

भारत में गौवंश और गौ-आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित पहला राष्ट्रीय समाचारपत्र “गऊ माता राज्य माता स्वर्णिम भारत – संपन्न किसान – उन्नत महाराष्ट्र” अपने प्रकाशन के 11वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यह समाचारपत्र गौवंश संरक्षण, गौ-आधारित कृषि, और इसके आर्थिक व सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह समाचारपत्र न केवल गौवंश के आर्थिक योगदान पर प्रकाश डालता है, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को भी रेखांकित करता है, जैसे कि गाय को “विश्व की माता” के रूप में मान्यता देना। यह देशव्यापी चर्चा का हिस्सा बनकर गौ-आधारित अर्थव्यवस्था और सतत विकास को प्रोत्साहित कर रहा है।
गऊ भारत भारती अपने प्रत्येक वार्षिक वर्षगाँठ के अवसर पर ” गऊ भारत भारती ” सर्वोत्तम सम्मान उन भारत की महान विभूतियों को प्रदान करता है जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यो से देश और समाज को नई दिशा दिखलाई हो। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी, गौ सेवा , पत्रकारिता, साहित्य समाजसेवा, शिक्षा, कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली विभूतियों को इस वर्ष भी सम्मानित किया जा रहा है।
पुरस्कार चयन समिति और अखबार के संरक्षक राम कुमार पाल के अनुसार इस वर्ष पत्रकारिता के क्षेत्र में श्रीनारायण तिवारी (संपादक दैनिक यशोभूमि), श्री राघवेंद्र नाथ द्विवेदी ( कार्यकारी संपादक, हमारा महानगर ), श्री राजेश त्रिपाठी ( टीवी पत्रकार एबीपी न्यूज़ ) को दिया जा रहा है। वही साहित्य के क्षेत्र में डॉ रोशनी किरण , सुश्री हेमा चंदानी, श्री पंकज तिवारी, डॉ जितेंद्र पांडेय, कवयित्री सुश्री हेमलता त्रिपाठी, लखनऊ ब्यूरो चीफ, गऊ भारत भारती को प्रदान किया जायेगा।
गऊ सेवा और गऊ आधारित स्टार्टअप के क्षेत्र में श्री नितेश वसिष्ठ ( पंचगव्य विशेषज्ञ ) , श्री सुनील रामविलास प्रजापति एवं श्री मनीष रामविलास प्रजापति ( गऊ आधारित स्टार्टअप), डॉ महेंद्र कुमार गर्ग ( गऊ वैज्ञानिक, कोटा राजस्थान), सुरज्ञान गुप्ता (स्पेक्ट्रा क्रायोजेनिक सिस्टम्स प्रा लि. गऊ आधारित स्टार्टअप), श्री उमेश शाह (गौशाला संचालक), प्रफुल्ल कटेलिया ( गौ सेवक ), सम्मान मूर्ति २०२५- समाजसेवा के क्षेत्र में श्री मुस्तफ़ा गोम ,  श्रीमती प्रीति धीरेन दोशी ( ट्रस्टी मरू घर ओल्ड ऐज होम), डॉ दिलीप कुमानदास अम्लानी ( ट्रस्टी मरूधर ओल्ड ऐज होम), संघमित्रा ताई गायकवाड (आरपीआई आठवले), तुषार एन कथारेचा, सचिव – श्री गुर्जर सुतार विश्वकर्मा बाग, विलेपार्ले, श्री अभिषेक जाजू स्वस्ति श्री त्रिवेणी फाउंडेशन, श्री बिमल भूता (सचिव भाजपा मुंबई) संस्थापक टीम पार्ले मुंबई ,श्री आर के मंधना ( ट्रस्टी सुशील आनंद मंधना चैरिटेबल ट्रस्ट ) सम्मान मूर्ति २०२५ – प्रशासनिक सेवा के लिए श्री हनुमंत पोपट गोसावी (सहायक उद्यान अधीक्षक, बीएमसी) को इस वर्ष यह सम्मान दिया जायेगा।  ज्ञात हो कि इस भव्य आयोजन में आयोजन समिति में श्री राम कुमार पाल , श्री विशाल भगत , श्री प्रशांत काशिद , श्री संजय बलोदी प्रखर , श्री राजेश मेहता आदि नाम प्रमुख है।

 

सुरेश वाडेकर के प्रतिभावान शिष्य रवि त्रिपाठी ने सजाया ‘संत तुकाराम’ फिल्म का संगीत

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मुंबई। प्रसिद्ध गायक रवि त्रिपाठी, जिन्होंने बॉलीवुड फिल्म ‘चाँदनी चौक टू चाइना’ में अपने सशक्त गायन से पहचान बनाई, अब उन्होंने बतौर संगीत निर्देशक एक नई पारी की शुरुआत किया है। हालिया प्रदर्शित फिल्म ‘संत तुकाराम’ में वे न सिर्फ गायिकी किये, बल्कि इस फिल्म के संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी भी खुद निभाई है। इस फिल्म में उनका भक्ति गीत ‘माउली माउली’ रिलीज से पहले ही चर्चा में रहा है।

रवि त्रिपाठी ने बताया कि संत तुकाराम पर पहले भी अनगिनत गीत बन चुके हैं। ऐसे में एक नया और प्रभावशाली गीत रचना बहुत बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने आगे कहा, “मेरे मन में भगवान विट्ठल के प्रति गहरा विश्वास है। शायद उसी विश्वास की वजह से ‘माउली माउली’ गीत एक ही टेक में रिकॉर्ड हो गया और सभी को पसंद आया।”

रवि त्रिपाठी बताते हैं कि एक फिल्मी गीत केवल गायन नहीं होता, वह निर्देशक, गायक, गीतकार और संगीतकार की सामूहिक सोच का परिणाम होता है। “हर बार संगीत और गीत के बोलों में बदलाव करना पड़ता है, लेकिन इस बार जैसे सब कुछ सहज रूप से हो गया।

रवि त्रिपाठी का संगीत सफर कोई नया नहीं है। उन्होंने ‘गीत नागेन्द्र हराय त्रिलोचनाय’, ‘शिरडी के साईं बाबा – ओम जय साई राम’, ‘बागपत’ और ‘चाँदनी चौक टू चाइना’ जैसी फिल्मों में गाने गाए हैं। इसके अलावा वे देश-विदेश में सैकड़ों लाइव शो कर चुके हैं। विशेष बात यह है कि उन्होंने चीन में सबसे ज्यादा लाइव शो करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है।

रवि त्रिपाठी हिंदी, चाइनीज़, तेलुगू, तमिल, कन्नड़, मराठी और भोजपुरी जैसी कई भाषाओं में गा चुके हैं। उनका संगीत सफर विविधता और समर्पण का प्रतीक है। सुरेश वाडेकर और रविंद्र जैन जैसे दिग्गज उनके गुरु रहे हैं। साथ ही वह लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, मुकेश, किशोर कुमार और सुरेश वाडेकर जैसे महान गायकों को अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं।

उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से आने वाले रवि त्रिपाठी के परिवार का फिल्मों और संगीत से कोई लेना-देना नहीं रहा। संगीत के प्रति उनके प्रेम को पहले उनके पिता समझ नहीं पाए। लेकिन एक दिन उन्होंने कहा कि हम एक अच्छे संस्कारी परिवार से हैं, इसलिए परिवार की छवि को कभी धूमिल मत करना। और यही वाक्य रवि के जीवन का संकल्प बन गया।

रवि ने मुंबई आकर सुरेश वाडेकर के सान्निध्य में न केवल गायन सीखा, बल्कि जीवन के संस्कार भी पाए। वे लंबे समय तक वाडेकर के मुंबई के जुहू स्थित आजीवासन निवास में रहे, जिसे वे अपना दूसरा घर मानते हैं। वहीं रहते हुए उन्हें कई दिग्गज गायकों, संगीतकारों और कलाकारों से मिलने और सीखने का अवसर मिला।

रवि त्रिपाठी की संगीत यात्रा बताती है कि समर्पण, श्रद्धा और अनुशासन के साथ चलने पर मंज़िल चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, रास्ते खुद बनते जाते हैं।
वैसे ‘संत तुकाराम’ फिल्म के माध्यम से में उनका नया अवतार दर्शकों और संगीत प्रेमियों के दिलों पर जादू कर गया है।

“भिक्षुदया” के रुप में मनाई गई आचार्य सम्राट आनंद ऋषी मसा की जन्म जयंति

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“भिक्षुदया – हम भी करते हैं एक दिन का साधु वेश धारण” कार्यक्रम का आयोजन

नालासोपारा। श्री स्थानकवासी जैन श्रावक संघ मेवाड़, उपसंघ नालासोपारा के तत्वावधान और श्रमण संघीय सलाहकार सिद्धांताचार्य राष्ट्रसंत पू. गुरुदेव डॉ. राम मुनि मसा निर्भय व युवा मनीषी श्री विकास मुनि मसा शास्त्री के पावन सान्निध्य में “भिक्षुदया – हम भी करते हैं एक दिन का साधु वेश धारण” कार्यक्रम का आयोजन 25 जुलाई को गुरु अंबेश दरबार, कच्छी स्थानक, नालासोपारा पूर्व (पालघर, महाराष्ट्र) में किया गया। इस आयोजन में 5 सामयिक का लक्ष्य रखा गया था।
इस दौरान बड़ों के साथ साथ छोटे छोटे बच्चों ने भी साधु वेश धारण किया था जो कि बड़ा ही मनमोहक दृश्य लग रहा था।
भिक्षु दया का महत्व समझाते हुए राम मुनि मसा ने कहा कि आचार्य भगवंत आनंद ऋषी मसा की जन्म जयंति के उपलक्ष्य में जो भिक्षुदया का कार्यक्रम रखा और साधु वेश धारण कर अपना जीवन धन्य बनायें।
वहीं विकास मुनि मसा ने कहा कि आज जो नजारा देखने को मिल रहा है उससे ऐसा प्रतित हो रहा है मानो समवसरण चल रहा हो। सभी वरिष्ठ श्रावकों, युवाओं और खास तौर पर बच्चों ने जो भाग लिया है जिससे आपके जीवन परिवर्तन आए। एक दिन की भिक्षुदया आपके लिए सदा के लिए बन जाए।
भिक्षुदया आयोजन में एक दिन साधु वेष धारण करने वाले कुल 129 लोगों ने भाग लिया।
जिसमें कमलेश बोहरा, राजेश इंटोदिया, आशीष लोढ़ा, गौरव बडोला, लक्ष्मीलाल एम इंटोदिया, अशोकजी लोढ़ा, मुकेश सांखला, महावीर सिंघवी, जयेश छाजेड, भारत बोहरा, कपिल बोहरा, विकास आंचलिया, राजमल कोटिफोड़ा, सोहनलाल मादरेचा, नरेश सांखला, रमेश मादरेचा, रमेश बोहरा, कमलेश इंटोदिया, भगवती इंटोदिया, मितेश राजावत, महेश सोलंकी, अभिनव सांखला, महावीर सिसोदिया, ललित कोटिफोड़ा, गणेश चपलोत, नरेश इंटोदिया, राजू इंटोदिया, गगन सियाल, लक्ष्मीलाल के इंटोदिया, मुकेश डांगी, धर्मचंद बोहरा, रमेश के. इंटोदिया, प्रीतेश बोहरा, हर्षिल सांखला, हिम्मत इंटोदिया, मदन इंटोदिया, भगवती के इंटोदिया, विनोद रमेश इंटोदिया, प्रवीण इंटोदिया, नंदलाल लोढ़ा, मुकेश बडोला, सुशील दुग्गड, संजय दुग्गड, महेन्द्र लोढ़ा, प्रवीण लोढ़ा, नरेश लोढ़ा, दीपक बोहरा, सुरेन्द्र लोढ़ा, हेमंत कच्चरा, नेमीचंद इंटोदिया, हितेश पामेचा, मुकेश आर. इंटोदिया, मुकेश ए. मादरेचा, संदीप चोरड़िया, कवीश आर. इंटोदिया, कवित आर इंटोदिया, संजय वडालमिया, साहिल सांखला, आदर्श बोहरा, हितेश इंटोदिया, सिद्धार्थ इंटोदिया, मोहित सांखला, भगवतीलाल कोटीफोड़ा, विनोद चौहान, डालचंद सांखला, मनीष सांखला, आरुष विनोद चौहान, मदनलाल दुग्गड, राकेश पामेचा, अशोक चोरड़िया, कियान बोहरा, हंसराज बोहरा, मांगीलाल लोढ़ा, रमेश एम इंटोदिया, शांतिलाल सोलंकी, गणेश इंटोदिया, पुखराज लोढ़ा, महेंद्र गोटी, अशोक छाजेड़, हीरा पोखरना, मांगीलाल बाशा, मोतीलाल कच्छारा, विकास आंचलिया, अनील कोठारी, राऊल वडालमीया, संतोष पामेचा, मुकेश सियाल, गणेश चपलोत, मुकेश बडोला, रोशनलाल धाकड़, लक्ष राकेश वदामा, विहान मुकेश बडोला, नेमिन मुकेश बडोला, गोविंद बाफना, तोलाराम पामेचा, भरत राजावत, सक्षम पी. इंटोदिया, श्रेयांश पी. इंटोदिया, गोपीलाल सिंघवी, पार्थ एम. राजावत, रुद्रा इंटोदिया, लालचंद डांगी, रौनक इंटोदिया, कुंदन इंटोदिया, भावेश इंटोदिया, संजय जैन, मुकेश चपलोत, अदित्य नितेश लोढा, कनिश लोढा, धर्मेश इंटोदिया, प्रीत इंटोदिया, सिद्धम आशीष लोढ़ा, पारस नवलखा, अनुज नवलखा, भवर नवलखा, बाबूलाल बड़ौला, बाबुलालजी चोरड़िया, लालजी कोठारी, निखिल बडोला, भेरूलाल वडालमिया, निर्मल मांडोत, जीतू इंटोदिया, शांतिलालजी पिपाड़ा, विक्की इंटोदिया, रूपरजत रान्का, बसंतीलाल चौहान, जैनम मेहता, सम्यक सांखला है।
कार्यक्रम में वक्ता के रूप में अशोक लोढा, रमेश एम इंटोदिया, रमेश बोहरा, भरत बोहरा, लक्ष्मीलाल के. इंटोदिया, कपिल बोहरा ने अपने विचार व्यक्त किए। महिला मंडल ने गोचरी का शानदार आयोजन किया। कन्या मंडल की सक्रियता अच्छी रही। अम्बेश पाठशाला के बच्चों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का संचालन प्रवीण इंटोदिया ने किया और यह जानकारी लक्ष्मीलाल इंटोदिया ने दी।

फिल्म ही नहीं असल जिंदगी की भी नायिका है शिखा मल्होत्रा

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“हौसलों की मिसाल: अभिनेत्री शिखा मल्होत्रा की कहानी : रूपहले पर्दे की नायिका, ज़िंदगी की योद्धा”

मुंबई की चकाचौंध में जब एक चेहरा अपनी चमक खुद गढ़ता है, तब वह सिर्फ कलाकार नहीं, प्रेरणा बन जाता है। ऐसी ही हैं अभिनेत्री शिखा मल्होत्रा, जिनकी जीवनयात्रा एक फिल्मी कहानी से कहीं ज़्यादा दिल छू लेने वाली हकीकत है।

शिखा ने यशराज फिल्म्स की ‘फैन’ में शाहरुख खान के साथ रिपोर्टर की छोटी-सी भूमिका से शुरुआत की, लेकिन इस छोटे दृश्य में उनकी प्रतिभा इतनी बड़ी थी कि खुद किंग खान ने उन्हें गले लगाकर सराहा।इस सीन को शाहरुख खान मॉनिटर कर रहे थे और वे शिखा के पास जाकर शिखा को प्रोत्साहित किये। उस एक आलिंगन में शायद हजारों सपनों की मेहनत और पहचान छुपी थी। यह बेहद गर्व भरा पल रहा।

इसके बाद उन्होंने दर्शकों को झकझोर कर रख देने वाली फिल्म ‘कांचली’ में मुख्य भूमिका निभाई। यह कोई आम फिल्म नहीं थी, यह एक साहसिक स्त्री की अंतर्वेदना और विद्रोह की दास्तान थी। उस रूढ़ियों से भरी दुनिया में जहां एक स्त्री को सिर्फ सहने की आदत सिखाई जाती है, वहीं शिखा की ‘कांचली’ उस आदत को तोड़ती है।

शिखा केवल एक अभिनेत्री नहीं हैं,वह एक क्लासिकल सिंगर, कथक डांसर, बॉलीवुड परफॉर्मर और एक प्रशिक्षित नर्स भी हैं। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसमें कला और सेवा दोनों सांस लेते हैं। जब पूरी दुनिया महामारी के साए में सहमी थी, शिखा ने अपनी चकाचौंध भरी दुनिया को छोड़ अस्पताल की सफेद वर्दी पहन ली, वो भी बिना किसी शुल्क के, सिर्फ मानवता के लिए। यह सेवा नहीं, संकल्प था, एक जीवंत अभिनेत्री का सच्चा किरदार।

लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती। वक्त ने उनकी हिम्मत को फिर से परखा, चेहरे पर पैरालिसिस ने एक पल को उनके सपनों को जकड़ लिया, मानो जैसे कोई चित्रकार की तूलिका से रंग छीन ले। मगर शिखा ने न हार मानी, न चेहरे की परिभाषा को अपनी पहचान बनने दिया। उन्होंने उस अंधेरे से फिर उजाला रचा और एक नई वापसी, एक नई शुरुआत की।

अब एक बार फिर, ‘कांचली’ थिएटरों में वापसी कर रही है। यूट्यूब पर लाखों दिलों तक पहुँचने के बाद अब यह फिल्म बड़े पर्दे पर अपने असली जादू के साथ लौट रही है। शिखा का कहना है, “जब ये फिल्म बनी थी, तब ये समय से आगे थी। अब समय इस फिल्म को देखने लायक हो चुका है।”

जल्द ही वह अभिनेता हितेन तेजवानी के साथ फिल्म ‘मानो या ना मानो’ में भी नज़र आएंगी। इसके अलावा तापसी पन्नू की ‘रनिंग शादी’, तमिल फिल्म ‘सेंथेनल’, तेलुगु फिल्म ‘जयंती’, और पंजाबी फिल्म ‘लकी कबूतर’ में भी उन्होंने अपनी बहुपक्षीय प्रतिभा से अभिनय को नई ऊंचाइयाँ दी हैं।

शिखा मल्होत्रा की कहानी सिर्फ एक कलाकार की नहीं, एक योद्धा, सेविका और असल जिंदगी की नायिका की है — जो हर बाधा को पार कर अपने सपनों की रोशनी को फिर से जलाना जानती है।

कांचली की तरह ही शिखा भी एक प्रतीक हैं — उस स्त्री की जो सहती नहीं, सवाल करती है। जो गिरती नहीं, बदलती है। और जो अभिनय नहीं, आत्मा से जीती है।

हर्षवर्धन चौहान ने पेश की ब्रांडिंग की एक नई परिभाषा ‘दिल से’

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दिल से… एक ब्रांड नहीं, एक एहसास: भारत को मिला पहला ‘एक्सपीरिएंसेज़-टू-कंज़्यूमर’ विज़न

मुंबई। जब ब्रांड्स अपने उत्पादों से नहीं, बल्कि अपने जज़्बातों से दिल जीतने निकलें, तो उन्हें नाम दिया जाता है – ‘दिल से’।
मुंबई में अंधेरी पश्चिम स्थित रहेजा क्लासिक क्लब में ‘दिलसे – द हैपिनेस कलेक्टिव प्राइवेट लिमिटेड’ ने भारत के पहले ‘एक्सपीरिएंसेज़-टू-कंज़्यूमर (E2C)’ ब्रांड के रूप में दस्तक दी। लेकिन यह कोई आम लॉन्च नहीं था, यह एक थिएटर के पर्दे पर उभरी आत्मा की आवाज़ थी, एक ऐसी प्रस्तुति जिसने दर्शकों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक आंतरिक स्पंदन का अनुभव कराया।
इस शो के सूत्रधार, लेखक और रचनात्मक शक्ति हर्षवर्धन चौहान न केवल मंच पर थे, बल्कि हर शब्द, हर रचना में उनकी आत्मा बोल रही थी। उन्होंने कहा कि यह लॉन्च नहीं था, यह एक ‘सोल कॉन्ट्रैक्ट’ था। हमने अभिनय नहीं किया बल्कि हमने खुद को जिया। हमारा ब्रांड आँकड़ों में नहीं, एहसास में सांस लेता है।
‘दिलसे’ भारतीय मार्केट में एक नई कैटेगरी लेकर आया है – E2C यानी ‘एक्सपीरिएंसेज़-टू-कंज़्यूमर’, जहां ग्राहक सिर्फ एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक भावनात्मक सहभागी बन जाता है।
यह ब्रांड थिएटर, आवाज़, संगीत, डिज़ाइन और डिजिटल आर्ट के ज़रिए एक ऐसा अनुभव गढ़ता है, जो यादों की तरह दिल में बस जाए। यहां प्रोडक्ट्स धारण करने के लिए नहीं बल्कि महसूस करने के लिए होंगे।
लॉन्च शो की गूंज के बाद ‘दिल से’ अब एक और साहसिक कदम उठाने जा रहा है।
23 जुलाई 2025 को दिलसे ऐप की सॉफ्ट लॉन्चिंग होगी। भारत का पहला सोल-लेड डिजिटल स्पेस, जहां ब्रांड और भावनाएं एक-दूसरे से संवाद करेंगी।
अगस्त से ब्रांड अपने ‘प्रोडक्ट रिचुअल्स’ और खास वियरेबल्स लॉन्च करेगा, जो न केवल स्टाइल बल्कि एक इनर-कनेक्शन का प्रतीक होंगे।
हर्षवर्धन चौहान केवल एक सीईओ नहीं हैं – वो एक अनुभवी-निर्माता, शब्दों के योगी और एक भावना-शिल्पी हैं। उन्होंने नाट्य के रूप में “दिल से” ब्रांड को अनोखे रूप में प्रस्तुत किया है, वह बिज़नेस नहीं, एक आंदोलन है और सीधे तौर पर दिल से जुड़ने की पहल।
हर्षवर्धन चौहान के अनुसार ‘दिलसे’ ब्रांडिंग शोर नहीं, संवेदना है और अगर कारोबार को फिर से दिल से गढ़ना है – तो यही शुरुआत है। क्योंकि कुछ ब्रांड दिखते हैं, पर ‘दिलसे’ महसूस होता है।

मुंबई में ड्रग्स के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, अमृता फडणवीस ने Say No To Drugs का दिलाया संकल्प 

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मुंबई। देश नहीं पूरी दुनिया में युवा पीढ़ी की जिंदगी नशे से बर्बाद हो रही है, और महानगर में नशे का कारोबार भी लगातार बढ़ते जा रहा है। ड्रग्स पर रोकथाम करना आज के समय में सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है। हालांकि की ड्रग्स तस्करी और सेवन पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा समय – समय पर कदम उठाया जाता है। साथ ही जागरूकता मुहिम भी चलाई जाती है। इस कड़ी में ड्रग्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मुंबई के अंधेरी पश्चिम के मॉडल टाउन से यारी रोड, वर्सोवा तक करीब दो किलोमीटर तक भव्य ड्रग्स अवेयरनेस रैली निकाली गई। ड्रग्स के खिलाफ इस जागरूकता रैली का आयोजन सामाजिक संस्था एकता मंच द्वारा किया गया जिसमें मुंबई उपनगरीय जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण समिति, महाराष्ट्र राज्य औषधि बोर्ड, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) ड्रग्स विरोधी सामाजिक संगठन समेत समाज के हर तबके के लोग शामिल हुए। एकता मंच द्वारा आयोजित इस भव्य ड्रग्स अवेयरनेस रैली में राजनेता अभिनेता सामाजिक कार्यकर्ता बच्चे, बूढ़े, युवा हर कोई बड़े ही जोश के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं इस रैली में मुख्य अतिथि के रुप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस, मंत्री योगेश कदम, बॉलीवुड अभिनेता चंकी पांडे आईआरएस ऑफिसर समीर वानखेड़े, अभिनेता अरबाज खान, सांसद रविंद्र वायकर, बीजेपी विधायक अमित साटम और स्थानीय विधायक हारुन खान ने शिरकत की।

ड्रग्स अवेयरनेस रैली में शामिल हुई मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने इस रैली को आयोजित करने के लिए सामाजिक संस्था एकता मंच के अध्यक्ष अजय कौल की जमकर सराहना की और लोगों से ड्रग्स के खिलाफ जागरुक होने की अपील की उन्होंने लोगो से कहा कि अगर आपको कहीं भी कोई ड्रग्स का सेवन करते या ड्रग्स की तस्करी करते दिखे तो उसके खिलाफ तुरंत पुलिस में शिकायत करें ताकि हम अपने आसपास और अपने राज्य को ड्रग्स फ्री बना सके। वहीं इस कार्यक्रम में शिरकत किए गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने एकता मंच के अध्यक्ष अजय कौल द्वारा उठाए गए इस कदम की सराहना करते हुए आश्वासन दिया है कि ड्रग्स के खिलाफ सरकार कड़े से कड़े कानून बना रही है और कार्रवाई भी की जा रही है उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि सरकार ने ड्रग्स तस्करों के खिलाफ अब मकोका के तहत भी अब कार्रवाई की जाएगी।

इस रैली में लोगों ने अपने अपने तरीके से जागरुकता फैलाने की कोशिश की। इस रैली का स्लोगन था से No To ड्रग्स, जिसका हर किसी ने पालन करने का संकल्प लिया।