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यम द्वितीया: भगवान चित्रगुप्त का पूजा दिवस

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(अंजनी सक्सेना-विनायक फीचर्स)

भारतीय समाज में कायस्थ एक बुद्धिजीवी एवं चतुर जाति मानी जाती है। मध्यकाल में तो यह मान्यता थी कि राज-काज के संचालन में इससे कुशल एवं प्रवीण कोई अन्य जाति नहीं है। गुप्त काल से लेकर राजपूत, मुगल एवं मराठा शासकों के काल में कायस्थ न केवल महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होते थे, बल्कि राजस्व विभाग विशेषकर ‘पटवारियों’ के पदों पर कायस्थों का ही अधिकार होता था।

कायस्थ जाति अपने आपको भगवान चित्रगुप्त का वंशज मानती है। धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान चित्रगुप्त, प्रत्येक प्राणी के पाप पुण्यों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं यथा वे धर्मराज के सहायक हैं।
भगवान चित्रगुप्त एवं कायस्थों की उत्पत्ति का विवरण कई पुराणों एवं धर्मग्रंथों में मिलता है। इस विवरण के अनुसार ब्रह्मा जी ने अपने मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, पेट या जंघा से वैश्य तथा पैरों से शूद्र उत्पन्न किए। उन्होंने सूर्य एवं चन्द्र आदि ग्रहों के साथ ही बिना पैर वाले जीवों से लेकर अनेक पैर वाले जीवों की रचना की।
इस सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा के शरीर (काया) से बड़ी-बड़ी भुजाओं वाले, श्याम वर्ण, कमलवत् नेत्रवान्, शंख के समान गर्दन वाले, तेजस्वी, अति बुद्धिमान, हाथ में लेखनी और दवात धारण किए हुए, अव्यक्त जन्मा चित्रगुप्त जी उत्पन्न हुए। समाधि खुलने के बाद ब्रह्मा जी ने अपने सामने उपस्थित इस पुरुष से पूछा आप कौन हैं? उस पुरुष ने कहा – मैं आपके ही शरीर से उत्पन्न हुआ हूं इसलिए आप मेरा नामकरण कीजिए तथा मेरे कर्तव्य बताईये।
ब्रह्मा जी ने यह सुनकर कहा कि तुम मेरी काया (शरीर) से उत्पन्न हुए हो इसलिए तुम्हारी संज्ञा कायस्थ है। तुम्हारी उत्पत्ति के समय मेरा मन विश्रांत स्थिति में था अर्थात् मेरा चित्त गुप्त था इसलिए तुम चित्रगुप्त कहलाओगे। तुम धर्मराज की धर्मपुरी में निवास करो और प्राणियों के धर्माधर्म पर विचार करो।
धर्म ग्रंथों के अनुसार चित्रगुप्त जी के दो विवाह हुए। एक सूर्य कन्या से तथा दूसरा नाग कन्या से। इन पत्नियों से उनके बारह पुत्र उत्पन्न हुए। इन पुत्रों के नाम पर ही कायस्थों की बारह उपजातियां हैं। भगवान चित्रगुप्त ने अपने इन पुत्रों को शास्त्रों की शिक्षा दी तथा उनके लिए कर्तव्यों का निर्धारण किया। इन कर्तव्यों के अनुसार कायस्थों को देवताओं का पूजन, पितरों का श्राद्ध तथा अभ्यागतों की सेवा करना चाहिए। चित्रगुप्त जी ने अपनी संतति को महिषासुर मर्दिनी देवी की पूजन एवं उपासना करने का भी आदेश दिया।
कायस्थ जाति में भगवान चित्रगुप्त की वर्ष में कम-से-कम दो बार पूजन होती है। इनमें से पहली पूजन दीपावली की द्वितीया को होती है तथा दूसरी होली की द्वितीया (दौज) को। यह दोनों ही तिथियां भाई दौज या यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन प्रत्येक कायस्थ के घर मे चित्रगुप्त जी एवं कलम दवात की पूजा होती है। कई स्थानों पर यह पूजन सामूहिक रूप से भी की जाती है।
पूजन के समय भगवान चित्रगुप्त की स्तुति में जो मंत्र कहे जाते हैं, उनका अर्थ है कि दवात-कलम और खल्ली धारण करने वाले भगवान चित्रगुप्त आप लेखकों को अक्षर प्रदान करते हैं। इन धर्मग्रंथो में कहा गया है कि कायस्थों के अतिरिक्त अन्य जाति के लोग भी चित्रगुप्त जी की पूजन करते हैं तो इस पूजन से उन मनुष्यों की आयु बढ़ती है तथा उन्हें नरक के कष्ट नहीं भोगने पडते है और वे स्वर्ग के अधिकारी होते हैं। (विभूति फीचर्स)

मुंबई में अक्टूबर महीने में पानी की किल्लत

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मुंबई: मुंबई में कई दिनों से कई इलाकों में पानी की समस्या बढ़ गई है। सायन, प्रतीक्षा नगर, विले पार्ले, अंधेरी, गोरेगांव, भांडुप, विक्रोली सहित कई इलाकों में कम दबाव या कम पानी आने से लोग परेशान है। बीएमसी का कहना है कि गर्मी बढ़ने और दिवाली में पानी की ज्यादा खपत की वजह से इस तरह की परेशानी आ रही है। 15 से 20 दिनों में हालत यह हो गई है कि मुंबईकर अक्टूबर में ही पानी की अघोषित कटौती झेल रहे हैं। पहले झीलों में जलस्तर घटने पर जून या जुलाई में पानी कटौती का सामना करना पड़ता था।

बीएमसी वॉटर डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि कम दबाव में पानी सप्लाई की समस्या को लेकर आम लोगों और अलग-अलग प्रभागों के पूर्व नगरसेवकों से शिकायतें मिल रही है। हम भी हैरान है, क्योंकि कहीं किसी पाइपलाइन में शिकायत नहीं मिली है।

गोरेगांव ईस्ट में शिकायत

गोरेगांव ईस्ट के गोकुलधाम इलाके में कई दिनों से पानी काफी कम प्रेशर में आ में रहा है। स्थानीय लोगों ने बीजेपी की पूर्व नगरसेविका प्रीति साटम से शिकायत की, जिसके बाद उन्होंने बीएमसी अधिकारियों को ज्ञापन देकर सुचारू तरीके से पानी सप्लाई की मांग की।

जगेश्वरी ईस्ट के हालत

जोगेश्वरी ईस्ट में उद्धव गुट के विधायक बाला नार ने भी के ईस्ट वॉर्ड (अंधेरी पूर्व) के असिस्टेंट कमिश्नर से मिलकर वॉटर प्रॉब्लम की शिकायत की थी। बीजेपी के पूर्व नगरसेवक अभिजीत सामंत ने अंधेरी ईस्ट के कई इलाकों में पानी की कम सप्लाई की शिकायत की है। बता दें कि 1 अक्टूबर, 2025 तक झील में 99.50% पानी जमा था। इसके बावजूद लोगों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है।

बीजेपी नेता रवि राजा ने आरोप लगाया कि बीएमसी अधिकारियों की लापरवाही से मुंबईकर 24 महीने अघोषित पानी कटौती झेल रहे हैं। पानी आपूर्ति पर बीएमसी हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन लोगों को किसी न किसी कारणवश पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है।

दहिसर में भी आ रहा गंदा और बदबूदार पानी

दहिसर पूर्व स्थित अंबावाडी में भी सप्लाई के पानी में बहुत गंदी बदबू आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ दिनों से यह समस्या हो रही है। पहले 5 से 6 मिनट पानी बहाना पड़ता है, क्योंकि वह पीने योग्य तो क्या होगा, अन्य उपयोग लायक भी नहीं है।

4,160 MLD हो रही जलापूर्ति

बीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि शिकायतों के बाद वॉटर सप्लाई 4,000 से बढ़ाकर 4,160 एमएलडी प्रतिदिन की गई है। अक्टूबर का महीना गर्म होने और दिवाली में साफ-सफाई व अन्य कामों में लोगों के ज्यादा पानी इस्तेमाल से दिक्कत हो सकती है। अगर अंदर की पानी की पाइपलाइन में सप्लाई में कोई दिक्कत आती है, तो सोसाइटियों और बिल्डिंग्स के साथ-साथ स्लम में भी पानी कम सप्लाई होने की आशंका है। आशंकाओं को देखते हुए वॉटर इंजिनियरिंग डिपार्टमेंट के इंजिनियर कई इलाकों में जांच कर रहे हैं। बता दें कि बीएमसी को रोजाना औसतन 2,700 शिकायतें वॉटर लीकेज की मिलती हैं।

आचार्य लोकेशजी ने आजाद हिंद फौज के स्थापना दिवस को संबोधित किया

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राष्ट्रीय सैनिक संस्था ने भारत सरकार से 21 अक्टूबर को ‘नेताजी दिवस’ घोषित करने की मांग की- कर्नल त्यागी

राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को सच्ची श्रद्धांजलि- आचार्य लोकेश

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2025: अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेश जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस एवं स्वतंत्रता सेनाननियों को समर्पित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि देश वासियों का राष्ट्र प्रेम व राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। राष्ट्रीय सैनिक संस्था दिल्ली ईकाई के युवा विंग द्वारा कान्स्टिटूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संगोष्ठी को गौरव सैनानी रमेश अग्रवाल, श्री सुपरनो सतपथी, श्री राजन छिब्बर, ऐयर वाईस मार्शल राकेश कुमार खत्री, कर्नल तजेंद्र पाल त्यागी वीर चक्र आदि अनेक दिग्गजों ने संबोधित किया |


विश्व शांति दूत आचार्य लोकेश जी ने इस अवसर पर कहा कि भारत के निर्माण में युवाओं का योगदान बहुआयामी है, जिसमें आर्थिक विकास के लिए उद्यमिता और नवाचार, सामाजिक प्रगति के लिए स्वैच्छिक कार्य और जागरूकता, और तकनीकी प्रगति के लिए डिजिटल साक्षरता शामिल है |
कर्नल तजेंद्र पाल त्यागी जी ने इस अवसर पर कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में 21 अक्टूबर 1943 को स्थापित ‘आजाद हिंद फौज’ ने मातृभूमि की स्वतंत्रता के संघर्ष में अनमोल योगदान दिया, इसलिए राष्ट्रीय सैनिक संस्था भारत सरकार से 21 अक्टूबर को ‘नेताजी दिवस’ घोषित करने की मांग करती है | सभागार में उपस्थित सभी महानुभावों ने इस मांग का पुरज़ोर समर्थन किया |
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री सुनील बंसल, कर्नल मुकेश त्यागी, श्री राजीव जोली खोसला, श्रीमती उषा राणा एडवोकेट डॉ सुधीर त्यागी ने पूर्ण सहयोग दिया |

नागर विमानन मंत्रालय ने उड़ान की 9वीं वर्षगांठ मनाई

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उड़ान योजना के तहत 3.23 लाख उड़ानों के ज़रिए 1.56 करोड़ से अधिक यात्रियों ने हवाई यात्रा की

93 अप्रयुक्त और अल्प प्रयुक्त हवाई अड्डों को जोड़ने वाले 649 हवाई मार्ग चालू किये गये

नागर विमानन मंत्रालय क्षेत्रीय संपर्क योजना – उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) की 9वीं वर्षगांठ मना रहा है। मुख्य समारोह नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता नागर विमानन सचिव ने की। इस अवसर पर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अध्यक्ष, सदस्यगण और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में नागर विमानन सचिव श्री समीर कुमार सिन्हा ने बताया कि उड़ान योजना, जिसे 21 अक्टूबर 2016 को राष्ट्रीय नागर विमानन नीति के अंतर्गत प्रारंभ किया गया था, एक परिवर्तनकारी पहल रही है, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को सुलभ और किफ़ायती बनाना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 27 अप्रैल 2017 को शिमला और दिल्ली के बीच उद्घाटित की गई पहली उड़ान ने क्षेत्रीय विमानन संपर्कता में एक नए युग की शुरुआत की।

इस योजना के अंतर्गत 15 हेलीपोर्ट और 2 जल हवाई अड्डों सहित 93 अप्रयुक्त और अल्प प्रयुक्त हवाई अड्डों को जोड़ने वाले 649 मार्गों का संचालन शुरू किया गया है, जिससे 3.23 लाख उड़ान उड़ानों के माध्यम से 1.56 करोड़ से अधिक यात्रियों को लाभ हुआ है। एयरलाइन ऑपरेटरों और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को समर्थन देने के लिए सरकार ने व्यवहार्यता गैप निधि (वीजीएफ) के रूप में 4,300 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया है और आरसीएस के तहत हवाई अड्डे के विकास में 4,638 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

हाल ही में की गई एक प्रमुख पहल अगस्त 2024 में सीप्लेन संचालन के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करना और सीप्लेन व हेलीकॉप्टरों के लिए विशेष बोली चरण, उड़ान 5.5 का शुभारंभ है। इस चरण के अंतर्गत विभिन्न तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में 30 जल हवाई अड्डों को जोड़ने वाले 150 मार्गों के लिए आशय पत्र जारी किए गए हैं।

नागर विमानन सचिव ने विस्तारित उड़ान फ्रेमवर्क के माध्यम से अप्रैल 2027 के बाद भी इस योजना को जारी रखने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें पर्वतीय, उत्तर-पूर्वी और आकांक्षी क्षेत्रों के साथ कनेक्टिविटी और लगभग 120 नए गंतव्यों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

‘उड़ान’ केवल एक योजना नहीं है, बल्कि यह परिवर्तन का उत्प्रेरक है – भारत की इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि हवाई यात्रा को समावेशी, सतत और हमारी विकास यात्रा का अभिन्न अंग बनाया जाए।

लोक गायिका विजया भारती से विशेष साक्षात्कार उग हो सुरज देव, अरघ के बेरिया…”

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(शत्रुघ्न प्रसाद -विनायक फीचर्स)

“पटना के महंगी पनवा, खाइब गमकदार हो”
“उग हो सुरज देव, अरघ के बेरिया…”
“मोरे राजा केंवड़िया खोल, रस के बूनी पड़े…”
“दुनिया में छा गये बिहारी रे, बोलो जय जय बिहारी”

ये लोक गीत भारत की आत्मा की धड़कन हैं। और इन धड़कनों को चार दशकों से स्वर दे रही हैं – भारतीय लोक संगीत की शीर्ष साधिका, विजया भारती।
संगीत और हिंदी में डबल एमए व विद्यावाचस्पति विजया भारती देश की जानी मानी लोकगायिका, एंकर, कवयित्री व लोक संस्कृति की मर्मज्ञ हैं। आकाशवाणी व दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार विजया ने देश के कोने-कोने से लेकर 20 से अधिक देशों में भारतीय लोक संस्कृति का परचम लहराया है।
तमाम टीवी चैनलों पर नियमित कार्यक्रम के अलावा आपने महुआ टीवी पर लगातार चार साल तक प्रतिदिन ‘बिहाने बिहाने’ कार्यक्रम की एंकरिंग कर रिकार्ड बनाया है। अनेक पुरस्कारों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ‘कुपोषण’ और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित और निमंत्रित भी किया।
बिहार में जन्मी और मुंबई में पली-बढ़ी विजया भारती ने हिंदी, भोजपुरी, मैथिली, अंगिका, मगही के अलावा राजस्थानी, हरियाणवी, संथाली, असमिया आदि अनेक भाषाओं में गायन कर भारतीय लोकगायिकी को वैश्विक पहचान दिलाई है। वे केवल गायिका नहीं, बल्कि लोक संस्कृति की विचारक, रचनाकार और सांस्कृतिक नीति की सजग प्रहरी हैं। प्रस्तुत हैं उनसे लिए गए साक्षात्कार के मुख्य अंश-

प्रश्न लोकगीतों को आप सनातन से कैसे जोड़ती हैं?

विजया भारती- वेदों में कहा गया है – “संगीतं ब्रह्म स्वरूपं।” लोकगीतों में वही छंद और स्वर सहज रूप से बहते हैं जो ऋग्वेद के मंत्रों में हैं। लोक ही सत्य है और सनातन भी। शास्त्रीय संगीत उसका परिष्कृत रूप है, पर मूल तो लोक ही है।

प्रश्न- छठ गीतों में आपकी विशेष पहचान रही है। कुछ उदाहरण देंगी?
विजया भारती – इस साल मेरे दो छठगीत रिलीज हुए हैं। इंडियन फोक स्टार विजया भारती के नाम से मेरे यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध इन दोनों गीतों के बोल भी मैंने लिखे हैं। एक भोजपुरी और एक मैथिली में। इससे पहले मेरे गाये अनगिनत छठ गीत टी सीरीज और अन्य कंपनियों और चैनलों से रिलीज हुए, और यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। मैंने इन्हें न केवल गाया, बल्कि कई गीत स्वयं लिखे और संगीतबद्ध भी किए हैं।

प्रश्न आपने मंचों से लेकर टीवी और फिल्मों तक अपनी कला का विस्तार किया है। कुछ अनुभव साझा करें?

विजया भारती – मैंने अमिताभ बच्चन, अमरीश पुरी, गोविंदा, यश चोपड़ा, मनोज बाजपेयी जैसे दिग्गजों के साथ मंच साझा किया है। ICCR के माध्यम से रूस, ब्रिटेन, जर्मनी, त्रिनिडाड जैसे 22 देशों में कार्यक्रम किए। त्रिनिडाड के एक अखबार ने मेरे कार्यक्रम को “Electrifying Bharati” कहा- यह मेरे लिए गर्व का क्षण था।

प्रश्न: सांस्कृतिक राजनीति को लेकर आपने मुखरता दिखाई है। क्या कहना चाहेंगी?

विजया भारती – कुछ कलाकार राजनीतिक संबंधों के बल पर मंच तय करते हैं, यह प्रतिभा के साथ अन्याय है। मुझे राजनीति से उतना ही सरोकार है जितना किसी आम नागरिक को। मैंने कभी किसी संबंध से लाभ नहीं लिया, और ना ही चाहा।

प्रश्न लोक संस्कृति के लिए आपकी नीति-सुझाव क्या हैं?

विजया भारती – कोविड के बाद लोक कलाकारों के कार्यक्रमों में भारी गिरावट आई है। दूरदर्शन को लोक संगीत के लिए समर्पित चैनल आरक्षित करना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में लोक-संस्कृति को शिक्षा से जोड़ने की बात है, पर क्रियान्वयन नहीं दिखता। एक समर्पित सांस्कृतिक नीति बननी चाहिए।

प्रश्न साहित्य और समाज में आपका योगदान क्या रहा?

विजया भारती – मेरे 10 कविता संग्रह और एक कहानी संग्रह प्रकाशित हैं। ‘बेटी बचाओ’, ‘कुपोषण’, ‘बाल श्रम’, ‘पर्यावरण संरक्षण’ जैसे विषयों पर लोकगीतों के माध्यम से जनजागरण किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पत्र लिखकर इन अभियानों में आमंत्रित किया था।

प्रश्न आपकी लोकगायिकी का सार क्या है?

विजया भारती – “विशुद्ध लोक संगीत मन को माटी की सुगंध से भर देता है।” यह केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मनोविज्ञान का सार है।

प्रश्न: भारत की सांस्कृतिक एकता के लिए आपकी पुकार क्या है?

विजया भारती – उत्तर के लोक को दक्षिण से, पश्चिम के लोक को पूर्व से जोड़ना भारतीयता को बढ़ावा देगा। भारत की पुकार है-लोक का संरक्षण।

प्रश्न: आज कई कलाकार बिहार में चुनाव लड़ रहे हैं। क्या कहेंगी?

विजया भारती – मुझे राजनीति से उतना ही सरोकार है जितना किसी आम नागरिक को। मैं उन सभी कलाकारों को शुभकामनाएं देती हूँ। पर यह भी सत्य है कि कई मंच राजनीतिक संबंधों से तय होते हैं, जो प्रतिभा के साथ अन्याय है।

प्रश्न भारत की माटी से विश्व मंच तक आपने कहां-कहां प्रस्तुतियां दी हैं?

विजया भारती- बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, गुजरात, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हजारों प्रस्तुतियाँ दी हैं। मुंबई में छठ के अवसर पर मेरे कार्यक्रम लगातार 17 साल हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैंने 22 देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

प्रश्न सुरों की साधना से लेकर फिल्म, मंच और बॉलीवुड में आपका क्या योगदान रहा है?
विजया भारती- मैंने रवींद्र जैन के संगीत निर्देशन में ‘धर्मयुद्ध’, ‘गाँव आजा परदेसी’ जैसी फिल्मों में गाया है। ‘टूटे ना सनेहिया के डोर’ में अभिनय भी किया है। जुहू बीच पर अमिताभ बच्चन, शारदा सिन्हा, मनोज तिवारी, पूनम ढिल्लो, रवीन्द्र जैन, जितेन्द्र, उदित नारायण जैसे कलाकारों के साथ मंच साझा किया है।

प्रश्न आपने गायन के अलावा साहित्य सृजन भी किया है। कुछ बताएँ।
विजया भारती – मेरे 10 कविता संग्रह और एक कहानी संग्रह प्रकाशित हैं। पहली पुस्तक “रंग पिया का सोहना” थी। रोमांटिक से लेकर विभिन्न भावों से जुड़ी कविताओं का संकलन। इसका विमोचन गोवा की राज्यपाल रहीं मृदुला सिन्हा ने किया था। बीते वर्ष मेरे कविता संग्रह ‘वतन पे कुर्बान’ का विमोचन जनरल वीके सिंह ने किया। मैंने लोकगीतों के माध्यम से सामाजिक जागरण किया है। अपने गीत भी मैं खुद लिखती और धुन बनाती हूँ।

प्रश्न एक लोक गायिका के तौर पर आपके लिए भारत की पुकार और लोक का संकल्प क्या है?

विजया भारती- यह अमृत काल है। इस समय भारत को चाहिए कि वह लोक संस्कृति को केवल उत्सवों की शोभा नहीं, बल्कि नीति का हिस्सा बनाए। मेरी पुकार है-“भारत की पुकार है, लोक का संरक्षण हो, संवर्धन हो और बेहतर प्रोत्साहन भी मिले।” (विनायक फीचर्स)

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए जमीनी स्तर पर व्यवस्था का आकलन किया

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केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का दौरा किया और इस त्योहारी सीजन के दौरान रेलवे द्वारा की गई व्यवस्थाओं का जमीनी स्तर पर आकलन किया। बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए, उन्होंने बताया कि यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए 12 लाख रेलवे कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन विशेष ट्रेनों से अब तक 1 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा दी जा चुकी है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि औसतन लगभग 4.25 लाख यात्री प्रतिदिन दिल्ली क्षेत्र से यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सूरत, मुंबई, कोयंबटूर, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे प्रमुख स्टेशनों पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है और यहां तक कि चलती ट्रेनों पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मंडल और ज़ोन का अपना वॉर रूम है, जो सभी रेल कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों से चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करता है।

केंद्रीय मंत्री ने प्लेटफार्म संख्या 1 से होते हुए आरपीएफ नियंत्रण कक्ष का दौरा किया, जो पूरे स्टेशन पर नज़र रखता है। उन्होंने यात्रियों से बातचीत कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। केंद्रीय मंत्री ने प्राथमिक चिकित्सा कक्ष का भी दौरा किया और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों से बातचीत की।

श्री वैष्णव ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 16 पर पटना जाने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस के यात्रियों से भी बातचीत की। यात्रियों ने भारतीय रेलवे द्वारा उनके लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए होल्डिंग एरिया (यात्री सुविधा केंद्र) का भी दौरा किया।

निरीक्षण के दौरान रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सतीश कुमार, उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक श्री अशोक कुमार वर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

केंद्रीय मंत्री ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का दौरा करने से पहले रेल भवन वॉर रूम से विशेष ट्रेनों की जानकारी की भी समीक्षा की। यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

भारतीय रेल त्योहारी सीजन के दौरान 12,011 विशेष ट्रेनें चला रहा है, ताकि यात्रा मांग में तेज वृद्धि को पूरा किया जा सके, जो 2024 में 7,724 ट्रेनों से उल्लेखनीय वृद्धि है।

नियमित रेल सेवाओं के अलावा, भारतीय रेल ने 1 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2025 के बीच 4,211 विशेष रेलगाड़ियों का सफलतापूर्वक संचालन किया है, जिनसे 1 करोड़ से ज़्यादा यात्रियों को सुविधा मिली है। दिवाली और छठ के दौरान यात्रियों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि को देखते हुए, भारतीय रेल आने वाले दिनों में लगभग 7800 और विशेष रेलगाड़ियां चलाने की योजना बना रहा है।

1 से 20 अक्टूबर 2025 के बीच, इन विशेष ट्रेनों द्वारा 1 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की जा चुकी है। नई दिल्ली क्षेत्र में, 16 से 20 अक्टूबर 2025 के बीच 21.04 लाख यात्रियों को सुविधा प्रदान की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 19.71 लाख यात्रियों को सुविधा प्रदान की गई थी, इस प्रकार 1.33 लाख यात्रियों की वृद्धि हुई।

देश भर में यात्री सुविधाओं को मजबूती

भारतीय रेल यात्रियों की सुविधा और आराम को बढ़ाने के लिए व्यापक प्रयास कर रहा है। सभी स्टेशनों पर यात्री प्रबंधन को सुव्यवस्थित किया गया है, जिसमें सुगम यात्रा अनुभव सुनिश्चित करने के लिए समर्पित होल्डिंग क्षेत्र, अतिरिक्त टिकट काउंटर, पेयजल सुविधाएं और स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं।

भारतीय रेल ने त्योहारों के मौसम में आने वाले यात्रियों की भारी भीड़ की निगरानी और प्रबंधन के लिए रेल भवन में एक समर्पित “वॉर रूम” स्थापित किया है। यह कमांड सेंटर तत्क्षण निगरानी रखने में सक्षम है और अधिकारियों को भीड़भाड़, यात्रियों की शिकायतों और संभावित घटनाओं का त्वरित समाधान करने में सक्षम बनाता है। यह पहल केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के कार्यभार संभालने के तुरंत बाद उनके मार्गदर्शन में स्थापित की गई थी, जिसका उद्देश्य पूरे रेलवे नेटवर्क में सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करना है।

श्री वैष्णव और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सतीश कुमार, यात्रियों की आवाजाही की समीक्षा करने और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने के लिए समय-समय पर रेल भवन वॉर रूम का दौरा करते हैं। आज, यह वॉर रूम पूरे भारतीय रेल नेटवर्क की निगरानी करने वाली एक प्रभावी प्रणाली के रूप में विकसित हो चुका है, जिसके रेलवे बोर्ड, क्षेत्रीय और मंडल स्तर पर 80 से अधिक वॉर रूम सक्रिय हैं।

इसी प्रकार, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यात्री व्यवस्थाओं पर बारीकी से निगरानी रखने, सुचारू संचालन सुनिश्चित करने और यात्रियों के लिए अधिक सुविधा सुनिश्चित करने के लिए एक छोटा नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।

जयपुर स्टेशन पर यात्रियों को विशेष मोबाइल अनारक्षित टिकट प्रणाली (एम-यूटीएस) के माध्यम से सीधे होल्डिंग एरिया में टिकट जारी किए जा रहे हैं, जिससे स्टेशन पर व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिल रही है और यात्रियों को सुविधाजनक और संतोषजनक अनुभव मिल रहा है।

पश्चिम रेलवे का वडोदरा मंडल भी यात्रियों की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। 1 अक्टूबर से अब तक, वडोदरा मंडल द्वारा संचालित नियमित और 5 विशेष ट्रेनों के माध्यम से 30 लाख से अधिक यात्री उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल स्थित अपने गंतव्यों तक पहुंच चुके हैं। मंडल द्वारा पांच त्यौहार विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिनके 70 से अधिक फेरे पहले ही अधिसूचित किए जा चुके हैं।

यात्री सुविधा के तहत, व्यस्त यात्रा समय के दौरान यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आज उधना रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बीच 5,000 पैकेज्ड पेयजल बोतलें वितरित की गईं।

तंजावुर जंक्शन पर एक हालिया उदाहरण, जहां बुजुर्ग यात्रियों ने स्वच्छ सुविधाओं के साथ वातानुकूलित विश्राम कक्षों का लाभ उठाया। उन्होंने विषम समय में भी आराम और सुविधा सुनिश्चित की। यात्रियों  ने भी भारतीय रेलवे के अपने बेहतर यात्री अनुभव के हिस्से के रूप में विचारशील, सेवा-उन्मुख सुविधाएं प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया।

भ्रामक सूचना का मुकाबला करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना

भारतीय रेल यात्रियों के लिए सुरक्षित, आरामदायक और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए चालू त्यौहारी सीजन के दौरान सतर्कता से काम कर रही है, साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से फैलाई जा रही गलत सूचनाओं को रोकने के लिए सक्रिय कदम भी उठा रही है।

यह संज्ञान में आया है कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल यात्रियों में अनावश्यक दहशत पैदा करने के लिए भीड़भाड़ और यात्रियों की असुविधा को दर्शाने वाली पुरानी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित कर रहे हैं। इनमें से कई दृश्य बिना संदर्भ के शेयर किए जा रहे हैं, जिससे जनता को यह भ्रम हो रहा है कि ये हाल ही के हैं। आधिकारिक क्षेत्रीय हैंडल सक्रिय रूप से स्पष्टीकरण जारी कर रहे हैं और ऐसी भ्रामक सामग्री को पुराना और झूठा बता रहे हैं।

पिछले पांच दिनों में, ऐसे 40 से अधिक भ्रामक मामलों की पहचान कर उन्हें चिन्हित किया गया है। भ्रामक सूचना फैलाने वालों के ख़िलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। यात्रियों की सुरक्षा और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए सरकार त्वरित और ठोस कार्रवाई कर रही है।

त्यौहारी सीजन के दौरान अभूतपूर्व परिचालन

यात्रियों ने भी इस वर्ष की बेहतर व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया है। कई यात्रियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस बार व्यवस्थाएं पहले से कहीं बेहतर थीं और पूरी यात्रा सुगम और आरामदायक रही।

प्रयागराज, वलसाड, विशाखापत्तनम और संबलपुर स्टेशनों पर यात्रियों ने भारतीय रेल द्वारा की गई व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया तथा अनारक्षित डिब्बों में भी बेहतर सुविधाओं और प्रबंधन की सराहना की।

समर्पित कार्यबल एक सुगम यात्रा सुनिश्चित करता है

भारतीय रेल ने लेडीज़ सर्कल इंडिया के सहयोग से, आयुष्मान परियोजना के अंतर्गत मैसूर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म 2 पर अपनी तरह का पहला नर्सिंग रूम शुरू किया है। यह समर्पित सुविधा माताओं और शिशुओं को एक शांत, स्वच्छ और सुरक्षित स्थान प्रदान करती है, जिससे यात्रा के दौरान उनकी गोपनीयता, सम्मान और आराम सुनिश्चित होता है। वातानुकूलित, अच्छी रोशनी वाला और उच्च स्वच्छता मानकों के अनुरूप, यह नर्सिंग रूम लंबी यात्राओं, देर रात के कनेक्शनों या त्योहारों की भीड़ के दौरान माताओं की जरूरतों को पूरा करता है।

भारतीय रेल की हालिया उपलब्धियों में एक और उपलब्धि जोड़ते हुए, लखनऊ सिटी रेलवे स्टेशन उत्तर भारत का पहला पूर्णतः महिला-कर्मचारी स्टेशन बन गया है, जिसने सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के नए मानक स्थापित किए हैं। नियंत्रण कक्ष से लेकर टिकट काउंटर, सुरक्षा गश्ती दल से लेकर सिग्नल केबिन तक, सभी कार्यों का प्रबंधन अब 34 सदस्यीय महिला टीम द्वारा किया जाता है। पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा शुरू किया गया यह ऐतिहासिक कदम नारी शक्ति की सक्रियता को दर्शाता है, जो यात्रियों के लिए सुरक्षित, समावेशी और प्रेरणादायक स्थान बनाता है।

चिकित्सा तत्परता और समर्पण का एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, पलक्कड़ जंक्शन (दक्षिण रेलवे) के मंडल चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितिन पी.एस. ने कन्याकुमारी-डिब्रूगढ़ विवेक एक्सप्रेस के प्रस्थान से कुछ मिनट पहले प्लेटफॉर्म पर एक 24 वर्षीय यात्री के जबड़े की हड्डी उखड़ने पर उसका उपचार किया। जबड़े की आपातकालीन मैन्युअल कमी को अत्यंत सटीकता से किया गया, जिससे यात्री तुरंत ठीक हो गया और बिना किसी देरी के अपनी यात्रा जारी रख सका। इस त्वरित हस्तक्षेप की सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से सराहना की गई, जिसमें भारतीय रेलवे की चौबीसों घंटे चिकित्सा तत्परता, मौके पर प्रशिक्षित पेशेवरों और प्रमुख स्टेशनों पर आपातकालीन देखभाल के बुनियादी ढांचे को उजागर किया गया।

भारतीय रेल यात्री सुरक्षा, पारदर्शिता और सेवा उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है, साथ ही जनता से आग्रह करती है कि वे यात्रा संबंधी अद्यतन जानकारी के लिए केवल आधिकारिक चैनलों और सत्यापित सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

 

असरानी यानि हंसी का खजाना

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(राकेश अचल – विभूति फीचर्स)

मैंने जबसे हिंदी फिल्में देखना शुरू कीं तभी से असरानी को फिल्मों मे काम करते देख रहा था। मैने हिंदी सिनेमा के लगभग सभी हास्य अभिनेताओं की फिल्में देखीं हैं, अनेक से मिला भी हूँ, लेकिन असरानी पर किसी हास्य अभिनेता की छाप नजर नहीं आई। वे अपने आप में खास थे 1 जनवरी 1941 को जन्मे असरानी का असली नाम बहुत कम लोग जानते होंगे।
गुलाबी नगरी जयपुर, में असरानी की गर्भनाल थी। वे जयपुर से स्नातक परीक्षा पास कर भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान, पुणे में पढने आ गये। असरानी को 1967 में फिल्मी दुनिया में प्रवेश मिला लेकिन वे पहचाने बहुत बाद में गए।
फिल्म गुड्डी के एक बेहद मामूली रोल के बाद मनोज कुमार की नज़र असरानी पर पड़ गई। उनको लगा कि इसको भी ले सकते हैं, ऐसा करते-करते चार-पांच फ़िल्में मिल गईं और यहीं से असरानी का कैरियर शुरू हुआ। फ़िल्म शोले में ‘अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर’ का किरदार निभाने के लिए उन्हें हिटलर की मिसाल दी गई थी।अंग्रेजों के जमाने का ये जेलर रातों रात सितारा बन गया ।
असरानी कभी गायक बनना चाहते थे। उन्होने 1977 में फ़िल्म आलाप में दो गाने गाए जो उन्ही पर फ़िल्माए गए थे। अगले साल उन्होंने फ़िल्म फूल खिले हैं गुलशन गुलशन में प्रसिद्ध पार्श्वगायक किशोर कुमार के साथ एक गाना गाया। मैंने असरानी की कितनी फिल्में देखीं, मुझे याद नहीं। वे वे ढोल में भी थे और धमाल में भी। वे शाका लाका बूम -बू म में भी थे और भूल भुलैया में भी। मुझे याद है कि असरानी ने फौज में मौज,फुल एन फाइनल, लालवानी,मालामाल वीकली, रॉनी और जॉनी,भागम भाग,चुपके चुपके,गरम मसाला,मैक के मामा,एलान,क्योंकि,खुल्लम खुल्ला प्यार करें,दीवाने हुए पागल,अंधा आदमी,इन्सान,शर्त,सुनो ससुर जी औरएक से बढ़कर एक जैसी शताधिक फिल्मों में काम किया।
मेरी नजर में असरानी को काम की कमी कभी नहीं रही। वे जीवन के अंतिम दिनों तक सक्रिय रहे। गुजरात सरकार ने “सात कैदी” (गुजराती) के लिए असरानी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता व सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। उनके नाम तमाम श्रेष्ठ पुरस्कार और सम्मान दर्ज हैं। वे हर अभिनेता और अभिनेत्री के साथ फिट हो जाते थे। असरानी भूमिकाओं के चयन को लेकर लापरवाह रहे।
असरानी न भगवान दादा थे, न धुमाल, न मेहमूद, न केस्टो मुखर्जी, न आई एस जौहर, न जानी वाकर। वे सिर्फ असरानी थे। असरानी आम आदमी के हास्य अभिनेता थे। उनके पास कद काठी नहीं थी लेकिन उन्हे कभी हीन ग्रंथि का शिकार होते नहीं देखा गया। असरानी सबको हंसते-हंसाते चुपचाप चले गये। वे सुर्खियों से दूर रहने वाले शख्स थे। असरानी हमेशा याद किए जाएंगे। दुनिया गोवर्धन असरानी की नहीं बल्कि खालिस असरानी की मुरीद है।विनम्र श्रद्धांजलि। (विभूति फीचर्स)

रास्ते पर लेट जाते हैं लोग ऊपर से दौड़ती हैं गायें

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संजीव जाट की रिपोर्ट

Strange Tradition : भारत देश अपने त्योहारों के साथ-साथ उनसे जुड़ी परंपराओं के लिए भी दुनियाभर में अपनी एक खास पहचान रखता है। बात करें हालिया देश के सबसे बड़े त्योहार दीपावली की तो इसे भी देशभर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया है। दीपों के इस त्योहार से जुड़ी अलग-अलग इलाकों की अलग-अलग परम्पराएं है। एक ऐसी ही अनोखी परम्परा मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के अंतर्गत आने वाली बदरवास तहसील के ग्राम खैराई में दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है।

यहां ग्रामीणों की पूरे साल में कभी भी मन्नत पूरी होती है तो वो दीपावली के अगले दिन यहां के लोग गाय की पूजा करते हैं। यही नहीं, पूजा के बाद परम्परा के नाम पर वो उन पूजी जाने वाली गायों को अपने ऊपर से भी गुजारते हैं। इस अनोखी परम्परा को ‘गौ-गाय पर्व’ के रूप में मनाया जाता है।

दरअसल, शिवपुरी जिले के बदरवास विकास खंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम खैराई में बीते सवा सौ साल से ये परम्परा मनाई जाती आ रही है। इस अनोखी और रोमांचित कर देने वाली परम्परा को स्थानीय ग्रामीणों ने इस बार भी बड़े हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया। मंगलवार को सबसे पहले ग्रामीणों ने गाय की पूजा अर्चना कर पर्व मनाया। इसके बाद गांव के वो लोग एक मार्ग पर इकट्ठे हुए। इनमें वो लोग एक स्थान पर आ गए, जिनकी सालभर में मांगी गई कोई मन्नत पूरी हुई है। ये लोग संबंधित मार्ग पर में लेट गए। इसके बाद उस सड़क से दर्जनों की संख्या में गायें दौड़ते हुए गुजरी और मार्ग पर लेटे लोगों के ऊपर से गुजर गईं। खास बात ये है कि, ये पूरा घटनाक्रम इतना हैरतंगेज होता है कि, कुछ देर के लिए मन्नत मांगने वालों से लेकर उन्हें देखने वालों तक की सांसें थम जाती हैं।

गौ माता को पाले और करें सेवा : उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा

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उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को मंदसौर में गुरूदेव कमलमुनि चिन्मयानंद गौशाला लामगरी-नगरी में गोवर्धन पूजा की। उन्होंने गौ माता को गुड़ एवं रोटी खिलाई और गाय-बछड़ों को दुलारा।

उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने सभी को दीपावली और गोवर्धन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम सभी को गौमाता की सेवा और गौपालन करना चाहिए। हमारी सनातन संस्कृति हमें प्रकृति से जुड़ना सिखाती है। गौमाता अपने बछड़े के साथ हम सबका भी ध्यान रखती हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गौशाला में बिजली की व्यवस्था शीघ्र कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि सोयाबीन के लिए भावांतर भुगतान योजना प्रारंभ की गई है, जो किसानों और व्यापारियों के बीच सेतु का कार्य करेगी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने गौशाला सेवादारों का सम्मान कर अन्नकूट प्रसाद ग्रहण किया।

श्री देवड़ा ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग स्वदेशी से होकर जाता है। छोटे एवं कुटीर उद्योगों से निर्मित वस्तुएं खरीदें, हर घर स्वदेशी और घर-घर स्वदेशी का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, इसके लिए हमें स्वदेशी चीजों को अपनाना होगा।

इस अवसर पर लोकसभा सांसद श्री सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

साक्षात् श्रीकृष्ण भगवान का दर्शन है गोवर्धन परिक्रमा

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(डॉ. दौलतराज थानवी – विभूति फीचर्स)

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होने से ब्रजभूमि की रज को आज भी कृष्णमयी मानकर लोग मस्तक पर लगाते हैं। कहते हैं यह तो रमण देती है। बड़े-बड़े लक्ष्मी के लाल और सुदामा मंडल के निर्धन भी यहां आकर अपने को धन्य मानते हैं। उनका भक्त हृदय यहां के टुकड़ों के लिए तरसता है। ओड़छे के व्यास बाबा गिड़गिड़ा कर कहते हैं-
ऐसो कब करिहौ मन मेरो।
कर करवा हरवा गुंजन की कुंजन माहि बसेरो॥
भूख लगै तब मांगि खाउंगो, गिनौ न सांझ सवेरो।
ब्रज बासिन के टूक-जूंठ अरू घर-घर छाछ महेरो।
ब्रजभूमि को भगवान कृष्ण गौ लोक से साथ लाए थे। ब्रज में आते ही ब्रजभूमि की शान बढ़ गई। गोपी गीत में गोपियां कहते हैं-
जयति ते अधिकं जन्मना व्रज: श्रयत इंदिरा शश्वदत्र हि।
दयति दृश्यता दिक्षुतावकास् तवयि धृता सवम् तवां विचिन्वते।
जिस प्रकार देवी-देवता, ऋषि-मुनि, श्रुतियों आदि ने आकर गोप-गोपिकाओं का जन्म ग्रहण किया, उसी प्रकार पुराणों और वेदों में इस भूमि को सृष्टि और प्रलय से मुक्त बताया है। यह वह भूमि है जिस पर उद्धवजी ने लोट-पोट होकर रमण रेती को मस्तक लगा दिया। ऐसा इसलिए है कि यहां पर बड़े-बड़े देवता यहां के निवासियों की जूठन खाना, प्रसाद ग्रहण करने की तरह समझते थे। सूरदासजी ने तभी तो लिखा है-
ब्रजवासी पट तर कोउ नाहि
ब्रह्म सनक सिवध्यान न पावत, इनकी जूठनि लै लै खाहि।
हलधर कहयौ, छाक जेंवत संग, मीठो लगत सराहत जाहि।
सूरदास प्रभु जो विश्वम्भर, तो ग्वाल के कौर अधाहि।
ब्रजभूमि को मथुरा और वृन्दावन में आसपास 84 कोस में फैली बताया है। वाराह पुराण के अनुसार भगवान ने कहा कि मथुरा मण्डल 20 योजन में है। यहां के तीर्थ स्थल पर स्नान करना मनुष्यों के लिए अपने पापों का नाश करना है-
विशतिर् योज नानां च माथुरं मम मण्डलम्।
यत्र-तत्र न: स्नात्वा मुच्यते सर्व पात कै:॥

इस 90 कोस में 12 महावन और 24 उपवन थे। सात सरिताएं थीं। 5 सरोवर थे। पांच पर्वत थे, जिसमें गोवर्धन सर्वाधिक पूजनीय माना गया है। भगवान कृष्ण ने जब गोवर्धन की पूजा का प्रस्ताव रखा तो समस्त देवता, अप्सराएं, नाग, कन्याएं और ब्रजवासियों के झुण्ड आने लगे। गंगाधर शिवजी भी पधारे। राजर्षि, ब्रह्यर्षि, देवर्षि, सिद्धेश्वर, हंस आदि मांगेश्वर तथा हजारों ब्राह्मण वृन्द गिरिराज के दर्शन को पधारे। (गर्ग संहिता)।
भगवान की बताई विधि से गिरिराज की पूजा प्रारंभ की गई। नन्द, उपनन्द, वृषभानु, गोपी वृन्द तथा गोप गण नाचने, गाने और बाजे बजाने लगे। उन सबके साथ हर्ष से भरे हुए श्रीकृष्ण ने गिरिराज की परिक्रमा की।
श्रीकृष्ण ब्रज स्थित शैल गोवर्धन के बीच से एक दूसरा विशाल रूप धारण करके निकले और ‘मैं गिरिराज गोवर्धन हूं’ यह कहते हुए वहां का सारा अन्नकूट का भोग लगा गए। कुछ समय बाद अन्तर्ध्यान हो गये।
देवराज इन्द्र इससे क्रोधित हो गए। उन्होंने सांवतर्क, मेघगणकों को पानी बरसाने को कहा। घबराये गोपों ने कृष्ण भगवान से कहा- ब्रजेश्वर कृष्ण, तुम्हारे कहने से हम लोगों ने इन्द्र योग छोड़कर गोवर्धन पूजा का उत्सव मनाया, इन्द्र का कोप बहुत बढ़ गया। अब शीघ्र बताओ, हमें क्या करना चाहिए। भगवान कृष्ण ने विश्वास दिलाया कि डटे रहें। समस्त परिकरों के साथ गिरिराज तट पर चलें। जिन्होंने तुम्हारी पूजा ग्रहण की है, वे ही तुम्हारी रक्षा करेंगे। भगवान ने गोवर्धन पर्वत को उखाड़कर एक ही हाथ की एक अंगुली पर खेल-खेल में ही धारण कर लिया। इन्द्र देव ने माफी मांगी।
भगवान ने पुन: पर्वत गिरिराज को धरती पर रख दिया। इसी से गोवर्धन गिरिराज पवित्र तीर्थ हो गया है। भगवान ने अपना हाथ गिरिराज पर रखा वहां का स्थान हस्तचिन्ह- उनके साथ चरण चिन्ह से पवित्र हो गया।
आकाश गंगा ने भगवान का अभिषेक किया। इसी से यहीं पर मानसी गंगा प्रकट हो गई जो सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली है। दुग्ध से भगवान का अभिषेक हुआ, जिसमें वहां गोविन्द कुण्ड प्रकट हो गया। यहां पर भी भक्तजन स्नान करते हैं। भण्डारी वन में ब्रह्माजी ने वृषभानुवन में पुत्री राधिका और श्रीकृष्ण का विवाह सम्पन्न कराया। समीप में ही नन्द नन्दन श्री हरि ने राधा पर मोती न्यौछावर किए थे, जिससे वहां मुक्ता (मोती) सरोवर प्रकट हो गया। यह सरोवर भोग और मोक्ष का दाता है। इस तरह गिरिराज सम्पूर्ण जगत में शिखरों के मुकुट का दर्जा पा सका।
गिरिराज पर भगवान के मुकुट से स्पर्श पाई शिला मुकुट है। जहां की शिला पर बालपन के चित्र बनाए वह चित्र शिला है। जहां बालकों के साथ खेल किया और शिला को बजाया वो वादिनी शिला के रूप में पूजनीय है। साथ में ही कन्दुक क्षेत्र (खेल क्षेत्र) है। यहीं पर शक्रपद और ब्रह्मपद के चिन्ह भी हैं। यहीं पर सभी गोपों की पगडिय़ां चुराई थीं वह स्थान औष्णीष नाम से प्रसिद्ध हो गया। जहां गोपियों से दही लूटा था और गोवर्धन की घाटी में कदम्ब और पलाश के पेड़ों के पत्तों से दोने बनाए थे, वह द्रौण स्थान भी नमस्कार करने पर फल देने वाला हो गया।
कदम्ब खण्ड, श्रृंगार मंडल में श्री नाथ जी सदा लीला करते हैं। श्री रंगनाथ, श्री द्वारकानाथ और श्री बद्रीनाथ प्रसिद्ध पांच नाथ देवताओं के पांच स्तम्भ।
चार स्तम्भों की परिक्रमा होती है। पर्वत बने चिन्ह, कुण्ड और मंदिर तो गिरिराज के जीवित स्वरूप हैं। इस प्रकार श्री गोवर्धन तो भगवान के मुख हैं। मानसी गंगा, भगवान के दो नेत्र हैं। चन्द्रसरोवर नासिका है। गोविन्द कुण्ड अधर हैं। श्रीकृष्ण कुण्ड भगवान का चिबुक है। राधाकुण्ड भगवान की जिव्हा है, ललिता सरोवर, भगवान के कपोल हैं, गोपाल कुण्ड, भगवान के कान हैं, कुसुम सरोवर, भगवान के कर्णान्त भाग हैं। पर्वत पर चित्रशिला भगवान का मस्तक है। वादिनी शिखा उनकी गर्दन है। कुन्दक तीर्थ भगवान का पार्श्व भाग (पीठ) है।
उष्णीष तीर्थ भगवान का कटि भाग है। द्रौण तीर्थ पिछली पसलियां हैं। लौकिक तीर्थ भगवान का पेट है। कदम्ब खण्ड भगवान का हृदय है। श्रृंगार मण्डप में जीवात्मा बसती है। श्रीकृष्ण चरण चिन्ह भगवान का मन है। हस्त चिन्ह तीर्थ बुद्धि है। ऐरावत चरणचिन्ह भगवान के चरण हैं। सुरभि के चरण गोवर्धन के पंख है।
पुच्द कुण्ड उस पर्वत राज की पूंछ है। वत्सकुण्ड उसका बल है। रूद्र कुण्ड क्रोध है। इन्द्र सरोवर काम वासना है। कुबेर तीर्थ उद्योग स्थल कर्म क्षेत्र है। ब्रह्म तीर्थ प्रसन्नता का प्रतीक है। यम तीर्थ गोवर्धन का अहंकार है।
यह गोवर्धन पर्वत श्री हरि के वक्ष स्थल से प्रकट हुआ है। पुलस्तय मुनि के तेज से यह ब्रज मण्डल में स्थित हो गया। यह साक्षात् श्रीकृष्ण ही है। इसकी परिक्रमा साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण की परिक्रमा है। यहां यह भी संदेश मिलता है कि जीवन का तथ्य जल है। पहाड़ों-पहाडिय़ों पर सरोवर और कुण्ड बनाना, कदम्ब जैसे वृक्षों से उन पर्वतों को श्रृंगार करना जीवन को जल से तृप्त करता है तथा भगवान की छाया का अनुभव होता है।
वर्तमान में हजारों श्रद्धालु इस तीर्थ की परिक्रमा करते हैं। भगवत कृपा से यहां पर चोरी-चकारी, लूट-खसोट और अन्य वारदातें नहीं सुनी हैं। हां कुछ स्वार्थी धन लोलुप यहां पर पर्वतराज के पास खनन कार्य की चेष्टा करते हैं।
इस तरह गिरिराज भगवान की परिक्रमा मात्र एक पर्वत खण्ड की परिक्रमा नहीं है, साक्षात् भगवान की परिक्रमा है जो कहते हैं गौरक्षा करो, जल संग्रहण करो, पेड़-पौधे लगाकर हरा-भरा क्षेत्र बनाओ, जहां राधा कृष्ण का विहार हो। अन्न क्षेत्र खोलकर भगवान को भोग लगाने का प्रबंध हो। (विभूति फीचर्स)