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साक्षात् श्रीकृष्ण भगवान का दर्शन है गोवर्धन परिक्रमा

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(डॉ. दौलतराज थानवी – विभूति फीचर्स)

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होने से ब्रजभूमि की रज को आज भी कृष्णमयी मानकर लोग मस्तक पर लगाते हैं। कहते हैं यह तो रमण देती है। बड़े-बड़े लक्ष्मी के लाल और सुदामा मंडल के निर्धन भी यहां आकर अपने को धन्य मानते हैं। उनका भक्त हृदय यहां के टुकड़ों के लिए तरसता है। ओड़छे के व्यास बाबा गिड़गिड़ा कर कहते हैं-
ऐसो कब करिहौ मन मेरो।
कर करवा हरवा गुंजन की कुंजन माहि बसेरो॥
भूख लगै तब मांगि खाउंगो, गिनौ न सांझ सवेरो।
ब्रज बासिन के टूक-जूंठ अरू घर-घर छाछ महेरो।
ब्रजभूमि को भगवान कृष्ण गौ लोक से साथ लाए थे। ब्रज में आते ही ब्रजभूमि की शान बढ़ गई। गोपी गीत में गोपियां कहते हैं-
जयति ते अधिकं जन्मना व्रज: श्रयत इंदिरा शश्वदत्र हि।
दयति दृश्यता दिक्षुतावकास् तवयि धृता सवम् तवां विचिन्वते।
जिस प्रकार देवी-देवता, ऋषि-मुनि, श्रुतियों आदि ने आकर गोप-गोपिकाओं का जन्म ग्रहण किया, उसी प्रकार पुराणों और वेदों में इस भूमि को सृष्टि और प्रलय से मुक्त बताया है। यह वह भूमि है जिस पर उद्धवजी ने लोट-पोट होकर रमण रेती को मस्तक लगा दिया। ऐसा इसलिए है कि यहां पर बड़े-बड़े देवता यहां के निवासियों की जूठन खाना, प्रसाद ग्रहण करने की तरह समझते थे। सूरदासजी ने तभी तो लिखा है-
ब्रजवासी पट तर कोउ नाहि
ब्रह्म सनक सिवध्यान न पावत, इनकी जूठनि लै लै खाहि।
हलधर कहयौ, छाक जेंवत संग, मीठो लगत सराहत जाहि।
सूरदास प्रभु जो विश्वम्भर, तो ग्वाल के कौर अधाहि।
ब्रजभूमि को मथुरा और वृन्दावन में आसपास 84 कोस में फैली बताया है। वाराह पुराण के अनुसार भगवान ने कहा कि मथुरा मण्डल 20 योजन में है। यहां के तीर्थ स्थल पर स्नान करना मनुष्यों के लिए अपने पापों का नाश करना है-
विशतिर् योज नानां च माथुरं मम मण्डलम्।
यत्र-तत्र न: स्नात्वा मुच्यते सर्व पात कै:॥

इस 90 कोस में 12 महावन और 24 उपवन थे। सात सरिताएं थीं। 5 सरोवर थे। पांच पर्वत थे, जिसमें गोवर्धन सर्वाधिक पूजनीय माना गया है। भगवान कृष्ण ने जब गोवर्धन की पूजा का प्रस्ताव रखा तो समस्त देवता, अप्सराएं, नाग, कन्याएं और ब्रजवासियों के झुण्ड आने लगे। गंगाधर शिवजी भी पधारे। राजर्षि, ब्रह्यर्षि, देवर्षि, सिद्धेश्वर, हंस आदि मांगेश्वर तथा हजारों ब्राह्मण वृन्द गिरिराज के दर्शन को पधारे। (गर्ग संहिता)।
भगवान की बताई विधि से गिरिराज की पूजा प्रारंभ की गई। नन्द, उपनन्द, वृषभानु, गोपी वृन्द तथा गोप गण नाचने, गाने और बाजे बजाने लगे। उन सबके साथ हर्ष से भरे हुए श्रीकृष्ण ने गिरिराज की परिक्रमा की।
श्रीकृष्ण ब्रज स्थित शैल गोवर्धन के बीच से एक दूसरा विशाल रूप धारण करके निकले और ‘मैं गिरिराज गोवर्धन हूं’ यह कहते हुए वहां का सारा अन्नकूट का भोग लगा गए। कुछ समय बाद अन्तर्ध्यान हो गये।
देवराज इन्द्र इससे क्रोधित हो गए। उन्होंने सांवतर्क, मेघगणकों को पानी बरसाने को कहा। घबराये गोपों ने कृष्ण भगवान से कहा- ब्रजेश्वर कृष्ण, तुम्हारे कहने से हम लोगों ने इन्द्र योग छोड़कर गोवर्धन पूजा का उत्सव मनाया, इन्द्र का कोप बहुत बढ़ गया। अब शीघ्र बताओ, हमें क्या करना चाहिए। भगवान कृष्ण ने विश्वास दिलाया कि डटे रहें। समस्त परिकरों के साथ गिरिराज तट पर चलें। जिन्होंने तुम्हारी पूजा ग्रहण की है, वे ही तुम्हारी रक्षा करेंगे। भगवान ने गोवर्धन पर्वत को उखाड़कर एक ही हाथ की एक अंगुली पर खेल-खेल में ही धारण कर लिया। इन्द्र देव ने माफी मांगी।
भगवान ने पुन: पर्वत गिरिराज को धरती पर रख दिया। इसी से गोवर्धन गिरिराज पवित्र तीर्थ हो गया है। भगवान ने अपना हाथ गिरिराज पर रखा वहां का स्थान हस्तचिन्ह- उनके साथ चरण चिन्ह से पवित्र हो गया।
आकाश गंगा ने भगवान का अभिषेक किया। इसी से यहीं पर मानसी गंगा प्रकट हो गई जो सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली है। दुग्ध से भगवान का अभिषेक हुआ, जिसमें वहां गोविन्द कुण्ड प्रकट हो गया। यहां पर भी भक्तजन स्नान करते हैं। भण्डारी वन में ब्रह्माजी ने वृषभानुवन में पुत्री राधिका और श्रीकृष्ण का विवाह सम्पन्न कराया। समीप में ही नन्द नन्दन श्री हरि ने राधा पर मोती न्यौछावर किए थे, जिससे वहां मुक्ता (मोती) सरोवर प्रकट हो गया। यह सरोवर भोग और मोक्ष का दाता है। इस तरह गिरिराज सम्पूर्ण जगत में शिखरों के मुकुट का दर्जा पा सका।
गिरिराज पर भगवान के मुकुट से स्पर्श पाई शिला मुकुट है। जहां की शिला पर बालपन के चित्र बनाए वह चित्र शिला है। जहां बालकों के साथ खेल किया और शिला को बजाया वो वादिनी शिला के रूप में पूजनीय है। साथ में ही कन्दुक क्षेत्र (खेल क्षेत्र) है। यहीं पर शक्रपद और ब्रह्मपद के चिन्ह भी हैं। यहीं पर सभी गोपों की पगडिय़ां चुराई थीं वह स्थान औष्णीष नाम से प्रसिद्ध हो गया। जहां गोपियों से दही लूटा था और गोवर्धन की घाटी में कदम्ब और पलाश के पेड़ों के पत्तों से दोने बनाए थे, वह द्रौण स्थान भी नमस्कार करने पर फल देने वाला हो गया।
कदम्ब खण्ड, श्रृंगार मंडल में श्री नाथ जी सदा लीला करते हैं। श्री रंगनाथ, श्री द्वारकानाथ और श्री बद्रीनाथ प्रसिद्ध पांच नाथ देवताओं के पांच स्तम्भ।
चार स्तम्भों की परिक्रमा होती है। पर्वत बने चिन्ह, कुण्ड और मंदिर तो गिरिराज के जीवित स्वरूप हैं। इस प्रकार श्री गोवर्धन तो भगवान के मुख हैं। मानसी गंगा, भगवान के दो नेत्र हैं। चन्द्रसरोवर नासिका है। गोविन्द कुण्ड अधर हैं। श्रीकृष्ण कुण्ड भगवान का चिबुक है। राधाकुण्ड भगवान की जिव्हा है, ललिता सरोवर, भगवान के कपोल हैं, गोपाल कुण्ड, भगवान के कान हैं, कुसुम सरोवर, भगवान के कर्णान्त भाग हैं। पर्वत पर चित्रशिला भगवान का मस्तक है। वादिनी शिखा उनकी गर्दन है। कुन्दक तीर्थ भगवान का पार्श्व भाग (पीठ) है।
उष्णीष तीर्थ भगवान का कटि भाग है। द्रौण तीर्थ पिछली पसलियां हैं। लौकिक तीर्थ भगवान का पेट है। कदम्ब खण्ड भगवान का हृदय है। श्रृंगार मण्डप में जीवात्मा बसती है। श्रीकृष्ण चरण चिन्ह भगवान का मन है। हस्त चिन्ह तीर्थ बुद्धि है। ऐरावत चरणचिन्ह भगवान के चरण हैं। सुरभि के चरण गोवर्धन के पंख है।
पुच्द कुण्ड उस पर्वत राज की पूंछ है। वत्सकुण्ड उसका बल है। रूद्र कुण्ड क्रोध है। इन्द्र सरोवर काम वासना है। कुबेर तीर्थ उद्योग स्थल कर्म क्षेत्र है। ब्रह्म तीर्थ प्रसन्नता का प्रतीक है। यम तीर्थ गोवर्धन का अहंकार है।
यह गोवर्धन पर्वत श्री हरि के वक्ष स्थल से प्रकट हुआ है। पुलस्तय मुनि के तेज से यह ब्रज मण्डल में स्थित हो गया। यह साक्षात् श्रीकृष्ण ही है। इसकी परिक्रमा साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण की परिक्रमा है। यहां यह भी संदेश मिलता है कि जीवन का तथ्य जल है। पहाड़ों-पहाडिय़ों पर सरोवर और कुण्ड बनाना, कदम्ब जैसे वृक्षों से उन पर्वतों को श्रृंगार करना जीवन को जल से तृप्त करता है तथा भगवान की छाया का अनुभव होता है।
वर्तमान में हजारों श्रद्धालु इस तीर्थ की परिक्रमा करते हैं। भगवत कृपा से यहां पर चोरी-चकारी, लूट-खसोट और अन्य वारदातें नहीं सुनी हैं। हां कुछ स्वार्थी धन लोलुप यहां पर पर्वतराज के पास खनन कार्य की चेष्टा करते हैं।
इस तरह गिरिराज भगवान की परिक्रमा मात्र एक पर्वत खण्ड की परिक्रमा नहीं है, साक्षात् भगवान की परिक्रमा है जो कहते हैं गौरक्षा करो, जल संग्रहण करो, पेड़-पौधे लगाकर हरा-भरा क्षेत्र बनाओ, जहां राधा कृष्ण का विहार हो। अन्न क्षेत्र खोलकर भगवान को भोग लगाने का प्रबंध हो। (विभूति फीचर्स)

गोवर्धन पूजा को लेकर मिट्टी समेत सवावटी सामग्री की बढ़ी मांग

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दीपावली के बाद हर साल कार्तिक माह की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। पंचांग के मुताबिक, एक तिथि बढ़ने की वजह से बुधवार को मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनाकर पूजा होती है, साथ ही भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

गोवर्धन पूजा को लेकर मिट्टी समेत सवावटी सामग्री की बढ़ी मांग

शहर में गोवर्धन पूजा उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पर्व को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिरों से लेकर घरों तक भक्ति का माहौल है। सभी लोग गोवर्धन पूजा की तैयारियों में व्यस्त हैं। बाजारों में गोबर, मिट्टी, फूल और सजावटी सामग्रियों की मांग बढ़ गई है। इनसे गोवर्धन पर्वत की छोटी प्रतिकृतियां बनाई जाएंगी।

भाेग लगाने को घरों में बनने लगे अन्नकूट के पकवान, मंदिरों में हुई सजावट

महिलाएं अन्नकूट के लिए स्वादिष्ट पकवान जैसे खिचड़ी, पूड़ी, सब्जियां और मिठाइयां तैयार कर रही हैं। शहर के प्रमुख मंदिर श्रीखाटू श्याम, इस्कान मंदिर समेत अन्य मंदिरो में विशेष सजावट और भोग की व्यवस्था के साथ भक्तों का स्वागत करने को तैयार हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन और भक्ति कार्यक्रमों की धूम रहेगी।

लीला को स्मरण कराती है पूजा

गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण की उस लीला को स्मरण कराती है, जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर गोकुलवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण और गायों के प्रति सम्मान का संदेश देता है। शहर में भक्त इस दिन गाय की पूजा हाेगी और अन्नकूट का भोग लगाकर समृद्धि और एकता का उत्सव मनाया जाएगा।

शुभ मुहूर्त

पंडित चंद्रेश कौशिक के अनुसार, गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त बुधवार सुबह 6:30 से 8:45 बजे तक और शाम 5:15 से 7:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान भक्त गोवर्धन पर्वत की पूजा करेंगे और भगवान कृष्ण को भोग अर्पित करेंगे। पर्व भक्ति, उत्साह और सामुदायिक एकता के साथ मनाया जाएगा।

घर-घर गौपाल’ बयान पर Jitu Patwari ने तीखा हमला बोला

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 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गौवर्धन पूजा के अवसर पर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन को 9% से बढ़ाकर 20% तक ले जाने की तैयारी है और इसके लिए ‘घर-घर गौपाल’ जैसी पहल जरूरी होगी. उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के ज़रिए सीएम पर पलटवार करते हुए कहा कि बातों से बदलाव नहीं होता, किसानों को जमीन पर नतीजे चाहिए. उन्होंने तंज कसा कि ‘आपको लगता है कि आप सबसे बड़े गौ-रक्षक बन गए हैं, लेकिन आपकी बातें सिर्फ़ कागज़ी बदलाव तक सीमित हैं. मोहन भैया झूठ बोलना बंद कीजिए.’ इतना ही नहीं पटवारी ने पिछले तीन साल में गौवंश की मौत का आंकड़ा भी बताया है. इसके अनुसार, पिछले तीन साल में 350+ गौवंश की मौत हुई है.

लोकप्रियता नहीं, जमीन पर सच्चाई दिखाइए

जीतू पटवारी ने लिखा कि मुख्यमंत्री सिर्फ बयानबाजी और सस्ती लोकप्रियता के सहारे सुर्खियां बटोर रहे हैं, जबकि असली गौ-पालक अच्छी तरह जानते हैं कि मौजूदा सरकार की ‘नकली गौ-भक्ति’ असली गौवंश पर ही भारी पड़ रही है.

पटवारी ने गिनाए गौवंश मौत के उदाहरण

उन्होंने सरकार को ‘आईना दिखाने’ के लिए प्रदेश के कई जिलों के उदाहरण दिए…

  • दिसंबर 2023, आगर-मालवा: 58 गायें गौशाला में मरीं, चारा नहीं था! फिर सवाल उठा सरकारी अनुदान कहां गया?
  • जून 2024, सिवनी: जंगलों में 63 गौ-कंकाल मिले! भाजपा सरकार की गोरक्षा पालन की असलियत उजागर हुई!
  • जून 2024, मंडला: फ्रीजर से मिला मांस, 150 गायों को सुरक्षा दी गई! मोहन सरकार मैदान से नदारद!
  • जून 2024, रतलाम: रतलाम मंदिर परिसर में बछड़े का सिर मिला, BJP ने सिर्फ़ राजनीति की!
  • जुलाई–सितंबर 2024, रीवा: रीवा हाईवे पर 78 गायें कुचली गईं! भविष्य में बचाव के नाम पर सिर्फ सरकारी नौटंकी हुई!
  • जुलाई-सितंबर 2024, देवास: हाईवे पर 54 गायों की मौत, BJP नेता केवल फोटो खिंचवाते रहे!
  • जुलाई-सितंबर 2024, सीहोर: 35 गायों ने हाईवे पर फिर दम तोड़ दिया! बेशर्म बीजेपी गोरक्षा के नाम पर ढोंग करती रही!
  • जुलाई-सितंबर 2024, विदिशा: विदिशा में 12 गायों की सड़क हादसे में मौत, सड़कें श्मशान बनती रही, CM चुप रहे!
  • जुलाई-सितंबर 2024, राजगढ़: राजगढ़ में 13 गायें हाईवे पर कुचली गईं! जनता बोली मोहन सरकार मूकदर्शक!
  • जून 2025, भोपाल: भोपाल की सड़कों पर रोज़ाना 50+हादसे, गायों के साथ जनता भी बेसहारा!

“गौरक्षा सिर्फ फोटो नहीं, जिम्मेदारी भी होती है”

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता सिर्फ फोटो खिंचवाने में व्यस्त रहे, जबकि हाईवे गायों के लिए कब्रगाह बनते गए. उनका दावा था कि सरकार की गौरक्षा राजनीति है, संरक्षण नहीं.

झूठ बोलना बंद कीजिए, मोहन भैया

पटवारी ने अपने संदेश का अंत तीखे शब्दों में करते हुए कहा कि ‘झूठ बोलना भाजपाइयों का धर्म होगा, लेकिन आप यह पाप मत कीजिए.’ उन्होंने दोबारा सीएम को गौवंश की वास्तविक स्थिति पर ध्यान देने की चुनौती दी.

ट्रक में पीछे आलू की बाेरियां और आगे थे 12 गौवंश यूपी के तस्कर अपनाते हैं यही तरीका

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हिमाचल प्रदेश में गोवंश की तस्करी का मामला सामने आया है। दीपावली की रात जिला सोलन की पंचायत बाहा, किनरी क्षेत्र में गोवंश से भरा एक ट्रक पकड़ा गया। जानकारी के अनुसार इस ट्रक में कुल 12 गोवंश थे, जिनमें से दम घुटने के कारण 10 की मौत हो चुकी थी, जबकि 2 जीवित पाए गए हैं।

इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। हैरानी की बात यह है कि ट्रक में सबसे पीछे आलू की बोरियां भरी हुई थी, ताकि वह किसी को भी चकमा देकर निकल सकें, लेकिन तकनीकी खराबी आने के कारण ट्रक सड़क किनारे खड़ा हो गया और गौरक्षा दल की नजरों में यह ट्रक आ गया, जिससे यह खुलासा हो पाया।

विदित हो कि दीपावली के दिन घटना की सूचना मिलते ही गौ रक्षा दल की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस को सूचित किया। सोमवार सुबह मृत गोवंश का पोस्टमार्टम लगभग 12 बजे करवाया गया। ट्रक में मौजूद तस्कर मौके से भाग निकले हैं।

गौरक्षा दल ने ट्रक की जांच की

गौरक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डीडी राणा ने बताया कि उनकी टीम के सदस्य सोलन जिला के रोहित कुमार ने इस पूरे मामले का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इस ट्रक की तहकीकात करने की हिम्मत जुटाई ओर दो बेजुबानों की जान बचाई और साथ ही इस तस्करी का नेटवर्क तोड़ने में सहायता की।

तिरपाल हटाई तो बेहद भयावह था अंदर का नजारा

डीडी राणा ने बताया कि यह ट्रक उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से लाया जा रहा था और माफिया इसे मनाली होते हुए श्रीनगर तक ले जाने की योजना में थे। उन्होंने कहा कि दीपावली से एक दिन पहले यह ट्रक जोघों के पास खराब हो गया था। जब टीम ने मौके पर जाकर ट्रक की तिरपाल हटाई, तो ऊपरी हिस्से में आलू रखे हुए थे और नीचे गोवंश को ठूंस-ठूंसकर भरा गया था।

यूपी के तस्कर अपनाते हैं यही तरीका

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से आने वाले अधिकतर ट्रकों में इसी प्रकार का तरीका अपनाया जाता है, ऊपर सब्जियों या फलों का लोड दिखाकर नीचे गऊ वंशों को छिपा दिया जाता है। उन्होंने सरकार से इस मामले में कड़ा संज्ञान लेने और हरियाणा व पंजाब बॉर्डर पर निगरानी बढ़ाने की मांग की।

काऊ सेस के नाम पर करोड़ों वसूले पर व्यवस्था नहीं

राणा ने कहा कि सरकार काऊ सेस के नाम पर करोड़ों रुपये वसूल रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर गौ तस्करी और गौ हत्या की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार दोनों से आग्रह किया कि बॉर्डर इलाकों में कड़े चेकपोस्ट व स्कैनिंग सिस्टम लगाए जाएं, ताकि इस प्रकार की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग सके।

ये गौभक्त रहे मौके पर

इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष डीडी राणा, प्रदेश अध्यक्ष विनोद पंवार, संगठन मंत्री प्रदीप ठाकुर, चेयरमैन लकी, जिला संयोजक बजरंग दल मोहित ठाकुर, रोहित कुमार (महा सचिव सोलन), टीम लीडर संजू बाबा, युवराज, दीपि, अमित शर्मा, पीन्दी, अनिल कुमार, मुकुल बसी, सतीश कुमार, सुखवीर राणा, चतर सिंह सहित सैंकड़ों गौभक्त मौजूद रहे।

सहारनपुर भेजी पुलिस टीम

बीबीएन पुलिस ने कहा कि उन्होंने इस मामले की छानबीन शुरू कर दी है। एक टीम को सहारनपुर भेजा गया है, ताकि ट्रक के चालक व मालिक से इसके बारे में पूछताछ की जा सके।

भोपाल में गोवर्धन पर्व पर गौ पालकों को मोहन यादव का टास्क

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भोपाल: मध्य प्रदेश में गोवर्धन पूजा का ये दूसरा साल है, जब पूरे प्रदेश में सरकारी तौर पर गौ पूजा हो रही है. भोपाल में हुए गोवर्धन पर्व के आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “केवल भाषणों से बात नहीं बनती.” उन्होंने गौ पालकों को टास्क दिया कि मध्य प्रदेश को गौ पालन में देश का नंबर-1 राज्य बनाना है. उन्होंने कहा “प्रयास ये होना चाहिए कि दूध की राजधानी मध्य प्रदेश में हो.” मोहन यादव ने भारतीय संस्कृति और परंपरा के महत्व को बताने के लिए इकबाल के शेर को याद किया और कहा कि “कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.”

दूध प्रोडक्शन में ऐसे नंबर-1 पर पहुंचे मध्य प्रदेश

पूरे प्रदेश की गौ शालाओं में गोवर्धन पूजा के आयोजन हो रहें हैं. राजधानी भोपाल में हुए मुख्य आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भी मौजूदगी रही. उन्होंने इस मौके पर गौ पालकों से ये उम्मीद जताई कि जिस तरह से अभी दुग्ध उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में तीसरे नंबर पर है. इसे अब मिल्क प्रोडक्शन में देश का नंबर-1 राज्य बनाना है. उन्होंने कहा “केवल भाषण से बात नहीं बनती. हमने प्रयास किया कि त्योहार में जो संस्कार छिपा है, जो संदेश छिपा है, उसे आत्मसात किया जाए.”

मोहन यादव ने कहा कि “गायों के दूध से बना घी अमृत के समान है. गिर के गाय का जो दूध है लोग तो उसे सोना भी बताते हैं.” मोहन यादव ने अपने भाषण में गाय की वो नस्लें भी गिनाई जिनमें कुछ न कुछ विशिष्टता है. मसलन उन्होंने बताया कि गिर की गाय का दूध इतना पौष्टिक है कि कई बीमारियों से बचाव करता है. गायों के दूध का बना घी अमृत के समान होता है. मोहन यादव ने बताया कि “मालवी गाय में दूध कम मिलेगा लेकिन दूध पौष्टिक बहुत होता है.” उन्होंने आंध्र प्रदेश की पुंगरु गाय का भी जिक्र किया.

महाकाल का ये रूप देखकर बोले मोहन ‘आनंद आ गया’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोवर्धन पूजा के आयोजन में आए प्रदेश भर के गौ पालकों के हाथ से बनाए उत्पाद भी देखे. इसमें एक शिल्पी की गोबर से बनाए गए महाकाल का मुख्यमंत्री ने खास जिक्र किया. उन्होंने बताया कि “यहां जो गौ पालक आए हैं. वे केवल दूध नहीं गौ माता से जुड़े गौ मूत्र और गोबर से भी उत्पाद बना रहे हैं.” उन्होंने खास तौर पर गोबर से बनाए गए महाकाल का जिक्र करते हुए कहा कि “गोबर के महाकाल देखकर तो आनंद ही आ गया.”

मध्य प्रदेश में 1 करोड़ से ज्यादा गोवंश

मध्य प्रदेश में गौवंश की संख्या 1 करोड़ 39 लाख से ज्यादा है. मोहन सरकार ने हाल ही में गौ शालाओं को प्रति गाय की राशि बीस रुपए से बढ़ाकर चालीस रुपए कर दी है. इसके लिए बाकायदा गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए स्वावलंबी गौ शालाओं की स्थापना नीति 2025 लागू की गई है. फिलहाल देखें तो भारत के दूध उत्पादक राज्यों में मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है. देश भर के मिल्क प्रोडक्शन का 9 फीसदी अकेले मध्य प्रदेश में होता है. मध्य प्रदेश में गोवर्धन पूजा को सरकारी तौर पर मनाए जाने के ऐलान के बाद प्रदेश भर की गौशालाओं में गोवर्धन पूजा का आयोजन हो रहा है.

आफताब शिवदसानी, विशाल कोटियान और सना सूरी मुम्बई में रवि सिंह द्वारा आयोजित “होप्स मिस्टर इंडिया 2025” में हुए उपस्थित

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बॉलीवुड स्टार आफताब शिवदसानी, बिग बॉस फेम विशाल कोटियान और सना सूरी मुम्बई में आयोजित “होप्स मिस्टर इंडिया 2025” में जज के रूप में उपस्थित हुए. निलयश्री क्रिएशंस द्वारा प्रेजेंट इस पेजेन्ट के ऑर्गनाइजर रवि सिंह थे जो एक फिल्ममेकर भी हैं. इस अवसर पर सोशल मीडिया वायरल आर्टिस्ट राजू कलाकार इत्यादि को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया. इसके विजेता हर्षित मिश्रा, फर्स्ट रनरअप विवेक चौधरी और सेकंड रनरअप रूपेश प्रसाद को घोषित किया गया.

शो के ऑर्गनाइजर रवि सिंह ने कहा कि उनकी कंपनी निलयश्री क्रिएशंस दिल्ली में पिछले 10 साल से काम कर रही है. बहुत सारे इवेंट किए गए हैं. “होप्स मिस्टर इंडिया का आयोजन दिल्ली में भी सफल रहा है. अब पहली बार हमने मुम्बई मे इसका आयोजन किया. मैं शो के जजों आफताब शिवदसानी, विशाल कोटियान और सना सूरी का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस कार्यक्रम मे आकर प्रोग्राम की शोभा बढ़ा दी. सभी प्रतियोगियों ने काफी तैयारी और मेहनत की. विजेता को 5 लाख रुपये नकद और हमारे प्रोडक्शन की फिल्म मे अभिनय का अवसर दिया जाएगा. जैसा कि शो का नाम है होप्स मिस्टर इंडिया ये तमाम नए मॉडल के लिए उम्मीद का एक बड़ा प्लेटफार्म है जहां उन्हें अपना हुनर दिखाने का मौका मिलता है.

आफताब शिवदसानी, विशाल कोटियान और सना सूरी ने आयोजक रवि सिंह को बधाई और शुभकामनाएं दीं और कहा कि उन्होंने इतने अच्छे शो का बखूबी आयोजन किया ये उनकी टीम की मेहनत का परिणाम है. हर प्रतियोगी मे आत्मविश्वास और उम्मीद नजर आई. इस तरह के कार्यक्रम मे नए लोगों को बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है. इस शो के ग्रूमर अभिषेक कपूर थे और शो मैनेजमेंट अक्षित चौहान ने किया. मीडिया पार्टनर स्वदेश चैनल था.

अक्षय कुमार की सकारात्मक सोच और संयमित जीवनशैली से बहुत कुछ सीखा है : राज रानी

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अभिनेत्री राज रानी उर्फ रानी ने कलकत्ता में फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में अपनी प्रतिभा से नाम कमाया है और आज वह हिंदी फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कोलकाता में उन्होंने कई फिल्मों, टीवी सीरियल्स, म्यूजिक वीडियो और विज्ञापनों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा, जिसके बाद अब वह मायानगरी मुंबई में अपने अभिनय का परचम लहराने को बेताब हैं।

रानी ने लोकप्रिय बांग्ला धारावाहिक “आकाश कुसुम” में मुख्य भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। इस सीरियल की सफलता के बाद उन्हें कई नए प्रोजेक्ट्स ऑफर हुए और उनका करियर नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ा। जल्द ही वह अपने नए हिंदी टीवी सीरियल में नज़र आएंगी, जिसमें वह सुमन का किरदार निभा रही हैं। यह एक पारिवारिक ड्रामा है, जो जायदाद के लिए चल रहे षड्यंत्रों के इर्द-गिर्द घूमता है।

हालाँकि रानी को फिल्मों में अभिनय करने में विशेष रुचि है। वह शाहरुख़ खान की फिल्मों और उनके व्यक्तित्व से बेहद प्रभावित हैं, वहीं ‘एक्शन कुमार’ अक्षय कुमार की फिटनेस, अनुशासन और आदर्श जीवनशैली को अपनी प्रेरणा मानती हैं। रानी का कहना है कि उन्होंने अक्षय कुमार की सकारात्मक सोच और संयमित जीवनशैली से बहुत कुछ सीखा है और वह स्वयं भी अपनी फिटनेस पर विशेष ध्यान देती हैं।

रानी अभिनेत्री श्रद्धा कपूर के अभिनय कौशल और सरलता से भी प्रभावित हैं। रानी कहती हैं कि अगर उन्हें सही अवसर मिला तो वह भी दिव्या भारती की तरह अपने दौर में एक अलग और यादगार छवि बनाना चाहेंगी।

फैशन जगत में भी रानी ने अपनी चमक बिखेरी है। वह मॉडलिंग और रैंप वॉक कर चुकी हैं और एक सेकंड रनर-अप विजेता रह चुकी हैं। उन्होंने मशहूर कोरियोग्राफर गणेश आचार्या की डांस एकेडमी से नृत्य की ट्रेनिंग ली और वहाँ आयोजित प्रतियोगिता में विजेता भी बनीं।

रानी को ऐतिहासिक और पौराणिक किरदार निभाना बेहद पसंद है। बचपन से ही अभिनय के प्रति जुनून रखने वाली रानी ने अपने इस शौक को करियर में बदलने के लिए निरंतर मेहनत की। उन्होंने रंगमंच (थिएटर) से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की और अपने शानदार प्रदर्शन के लिए खूब सराहना प्राप्त की। परिवार का सहयोग उन्हें हमेशा मिला और उन्होंने हर कठिन दौर में स्वयं पर विश्वास बनाए रखा।

रानी कहती हैं – “अगर आप स्वयं पर विश्वास नहीं करते, तो आप कुछ नहीं कर सकते। और अगर आप खुद से प्यार नहीं करते, तो दूसरों से क्या हमदर्दी दिखा पाएंगे। मंज़िल तक पहुँचने के लिए धैर्य रखना बहुत ज़रूरी है।”

खुशमिजाज और आत्मविश्वासी रानी संजय लीला भंसाली और मोहित सूरी की फिल्मों से गहराई से प्रभावित हैं और भविष्य में उनके साथ काम करने की इच्छा रखती हैं।

रानी बिग बॉस की भी बड़ी प्रशंसक हैं और एक दिन उस घर में जाने का सपना देखती हैं। वह मुस्कराते हुए कहती हैं -“बिग बॉस में लोग छोटी-छोटी बातों पर झगड़ते हैं। मैं वहाँ जाकर सबको यह दिखाना चाहती हूँ कि प्यार, सौहार्द और सरलता से भी गेम जीता जा सकता है।”

फिलहाल रानी अपने आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर बेहद उत्साहित हैं और उनका कहना है कि बहुत जल्द दर्शक उन्हें नए और दमदार किरदारों में देख पाएंगे।

तमसो माँ ज्योतिर्गमय का संदेश देता दीपावली का पर्व

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(सुषमा जैन – विनायक फीचर्स)

उल्लास एवं समृद्धि का प्रतीक तथा भारतीय संस्कृति का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और सर्वोपरि पर्व दीपावली का कारवां वैदिक युग की ज्ञान ज्योति से चलकर, ऐतिहासिक अंधकारों को चीरता तथा मुगलकाल की संकरी गलियों से गुजरता हुआ आजादी के खुले आंगन और घरों में प्रवेश कर चुका है। चाहे गांव-देहात हो या शहर, महानगर, गली-मोहल्ला हो या फिर बहुमंजिला अपार्टमेंट, क्या बूढ़े और बच्चे सभी के चेहरे पर कार्तिक का महीना एक अलग प्रकार की खुशियों से लबालब चमक लेकर आता है। सभी के तन-मन खिलखिला उठते हैं। कन्या कुमारी से लेकर कश्मीर तक, बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक नवरात्रि से शुरू हुआ यह हर्षोल्लास दीपावली तक अपने चरम पर होता है। यद्यपि युग-युगांतर से जलते आ रहे दीपक और दीपावली के स्वरूप में पौराणिक काल से लेकर अब तक भिन्न-भिन्न काल परिवेश और परिस्थिति के अनुसार अनेकानेक परिवर्तन आये हैं। फिर भी आज किस प्रकार यह पर्व अपव्यय और दुर्घटनाओं के पर्व के रूप में जाना जाने लगा है, वैसी स्थिति पहले कभी नहीं रही। आज से लगभग 40-50 वर्ष पूर्व दीपावली की रौनक देखते ही बनती थी। भारी धन के अपव्यय के साथ धूमधड़ाकों की दीपावली मनाते नहीं देखा जाता था। प्रसन्नता व्यक्त करने का एक निराला ही तरीका होता था।

चारों ओर झिलमिलाते दीपों की एक के बाद एक अनंत पंक्तियां, मुस्कराते नन्हें बालक, घर-आंगन को लीपती-पोतती रंग बिरंगे परिधानों में सजी कुलवधुएं, अपनी शोखियों और चंचलताओं से नवजीवन उड़ेलती तथा घर के कोने-कोने को दीपों की रोशनी से प्रकाशित करती नव बालाएं, यौवन की देहरी का स्पर्श करती हुई कंदीलों और रंगोली की प्रतिस्पर्धा में लगी यौवनाएं, अपनी आंखों में अनगिनत सपने संजोये और अनजानी उत्सुकताओं को मन में समेटे मस्ती का आलम संजोये नवयुवक तथा अपने वर्तमान को भूलकर अतीत के साथ हास्य-विलास की स्मृतियों को सजाते हुये कभी बेटे के साथ हंसकर तो कभी पौत्र के साथ खेलकर दीपोत्सव मनाते वृद्ध। आबाल वृद्ध, नर-नारी सभी प्रसन्नता पूर्वक सामूहिक रूप से इस पर्व का आनंद लेते थे।

दीपावली पूजन का मूल उद्देश्य यही रहा है कि चारों ओर सुख-समृद्धि, खुशहाली समरसता और ज्ञान का प्रकाश फैले। इसके लिये यह कामना की जाती थी कि मानव समाज के लिये बड़े नहीं भले लोगों की जरूरत है। इसलिये धन की देवी मेहरबान हो और वे अधिक से अधिक धर्म-कर्म कर सकें। पर आज स्थिति बिल्कुल उलट गई है। लोग केवल अपनी स्वार्थपूर्ति तक ही सिमट कर रह गये हैं। अधिक से अधिक धन प्राप्त कर दुनिया भर की सुखसुविधाएं जुटाना ही एक मात्र लक्ष्य बन गया है। जिससे समाज में गैरबराबरी की खाई बढ़ती जा रही है। कहीं खुशियों के अनगिनत दीप जलते है, तो अधिकतर जगहों पर गम और अभावों का अंधेरा पसरा हुआ है। उसी देश के लोग कुछ समय से मनोरंजन तथा बढ़-चढ़कर अपनी हैसियत दिखाने के लिये करोड़ों रुपयों के पटाखे फूंक डालते हैं। जिससे न केवल असंख्य लोग वायु एवं ध्वनि प्रदूषण से पीडित हो जाते हैं, बल्कि उनका दूषित हवा में सांस तक लेना मुश्किल हो जाता है। ऊपरी दिखावे को सामाजिक प्रतिष्ठा मान लिये जाने के कारण ही मिट्टी के दीयों का स्थान भारी मात्रा में बिजली की झालरों ने ले लिया है। खील बताशों के स्थान पर महंगे-महंगे तोहफे दिये जाने लगे हैं। पड़ोसियों की होड़ में लोग टिड्डी दल की तरह बाजार पर टूटकर अनावश्यक वस्तुएं भी खरीद डालते हैं। जिससे गृह बजट को संतुलित करने में कई माह लग जाते हैं। यह सारा उपक्रम व्यक्ति की औकात का घटिया प्रदर्शन मात्र है। जुएं को तो जैसे सामाजिक स्वीकृति मिल गई है। क्योंकि उसके खिलाफ आवाज उठाने वाला मध्यम वर्ग आज स्वयं अपनी दमित इच्छाओं और कुंठाओं को सहलाने लगा है। यह वह मध्यमवर्ग है जो अपने से समृद्ध को ललचायी नजरों से देखता है और अपने से पीछे वालों को तिरस्कार से। कभी सामाजिक परिवर्तन का औजार बना यह वर्ग आज आत्मकेंद्रित बनता जा रहा है।

प्रत्येक वर्ष दीपोत्सव पर हम माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं कि वे अपनी कृपा हमें दें। परंतु सब व्यर्थ चला जाता है। देवी प्रसन्न नहीं होती, बल्कि कुपित होती है। आखिर कुपित क्यों न हो? कहीं लक्ष्मी स्वरूप कुलवधू को दहेज की बलिदेवी पर कुर्बान किया जा रहा है तो कहीं उसे जन्म लेने से पूर्व ही मौत के घाट उतारा जा रहा है। देखा जाय तो देवी आज भी पूरी तरह क्रुद्ध ही है। कहीं दरिद्रता का तांडव नृत्य हो रहा है तो कहीं बाहुबलियों और धनपशुओं के हाथ पांव फैलते जा रहे हैं। करूणा के लिये कोई स्थान नहीं बचा है। अंधकार प्रकाश को निगल रहा है, रात दिन को डस रही है, कोई भूख से मर रहा है, तो कोई प्यास से तड़प रहा है। कहीं बाढ़ से लोग बेघर हो रहे हैं तो कहीं भूकंप से छाती दहल रही है तथा कहीं आतंकवाद का जिन्न निर्दोषों और मासूमों को ग्रास बनाता जा रहा है। ऐसे में हमारे राष्ट्र की शान और प्राण संस्कृति के गौरव को किस प्रकार बरकरार रखा जा सकेगा? यह चिंता और चिंतन का विषय है। जीवन में उजाले की इच्छा हर कोई रखता है। पर इस उजाले की सार्थकता तभी है जब इसकी रौनक मन के अंदर और बाहर समान रूप से हो। जबकि हो यह रहा है कि बाहर दीप आदि जलाकर उजाला तो कर दिया जाता है, लेकिन हमारी आत्मा काजल की कोठरी और मन मलिन ही बना रह जाता है। जब अंतर में छल, कपट, राग, द्वेष, ईर्ष्या, आडंबर और वैचारिक कलुषता भरी हो, ऐसे में क्या बाह्य दीपों का जलाना मात्र ही दीपावली को सार्थक बना पायेगा? प्रत्येक धर्म ने यही संदेश दिया है कि हम धन का सदुपयोग करें। उन लोगों को भी अपनी खुशी में भागीदार बनायें जो अभावग्रस्त जीवन जी रहे हैं। इसलिये जकात या दान की नीवें रखी गई। वास्तविकता तो यह है कि हमने लक्ष्मी के विराट स्वरूप को अपने अंतर्मन में बसाया ही नहीं। जिस लक्ष्मी को हम सर्वोपरि मान बैठे हैं वह तो तृष्णा या लोभ है और जब मन में तृष्णा जन्म ले लेती है तो मन का अशांत होना आवश्यक हो जाता है।

वर्तमान का भवन निर्माण अतीत की नींव पर ही किया जाता है। प्रत्येक राष्ट्र एवं जाति अपने बीते युग की स्मृतियां सुरक्षित रखने का प्रयास करती हैं। दीपावली मनाते हुये हम सिर्फ हम नहीं रह जाते, बल्कि अपने को एक पूरे इतिहास के साथ जोड़ते हैं। एक स्मृति-परंपरा को पुनर्जीवित करने की कोशिश करते हैं। आज से लगभग 2600 वर्ष पूर्व कार्तिक कृष्ण चर्तुदशी की रात्रि में पावापुर नगरी में भगवान महावीर का निर्वाण हुआ। निर्वाण की खबर सुनते ही सुर, असुर, मनुष्य, गंधर्व आदि बड़ी संख्या में वहां एकत्र हुये। रात्रि अंधेरी थी, अत: देवों ने रत्नों के दीपकों का प्रकाश कर निर्वाण उत्सव मनाया और उसी दिन कार्तिक अमावस्या के प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उनके प्रधान शिष्य इंद्रभूति गौतम को ज्ञान लक्ष्मी की प्राप्ति हुई। तभी से प्रतिवर्ष उक्त तिथि को दीपावली का आयोजन होने लगा। यही नहीं भगवान राम के अयोध्या आगमन पर स्वागत हेतु सजाई गई दीपमाला को भी दीपावली की परंपरा से जोड़ा गया। इस प्रकार यह महापर्व भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय वातावरण में पूरी तरह पगकर प्रेरणास्त्रोत प्रमाणित हुआ है।

दुर्भाग्य से आज हमारे देश की छाती पर बहुत बड़ी तादाद में ऐसे लोग जमते जा रहे हैं जो तन से तो भारतीय है, परंतु मन से पूरे विदेशी, जिनके लिये राष्ट्रीयता और भारतीयता अक्षरों के संयोग के सिवा और कुछ भी नहीं है, जो न अपने पूर्वजों के प्रति कोई सम्मान रखते हैं और न अपने धर्म और उत्सव के प्रति। इसका परिणाम हम सभी को भुगतना पड़ रहा है। यही कारण है हम सभी के अंतर में गहरा अंधकार भरा पड़ा है। हम उसे शत्रु मानकर भयभीत हो रहे हैं और उससे डरकर बाहर के प्रकाश की ओर भाग रहे हैं। यह बाह्य भौतिक प्रकाश उस प्रकाश तक कभी नहीं ले जा पायेगा जिस प्रकाश का अर्थ ”तमसो मा ज्योर्तिगमय” वाक्य में छिपा है।

दीपावली सांस्कृतिक चेतना का मापदंड भी है और राष्ट्रीय एकता की साक्षी भी। गणेश बुद्धि के देवता हैं और लक्ष्मी संपदा की देवी। संपत्तिवान की अपेक्षा बुद्धिमान होना अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि धन का उपार्जन न्याय नीति के आधार पर हो और उसका उपयोग करने में भी विवेकशीलता से काम लिया जाये तभी वास्तविक सुख और समृद्धि आती है। दीपावली मूल रूप से सहृदयता, आपसी भाईचारे और मिठाई के रूप में आपस में मिठास पैदा करने का पर्व है। दरिद्रता के अंधकार में जीने वाले लोगों के घरों में, दिलों में हम प्रकाश की एक किरण भी जला पायें तो समझो कि हमने दीपोत्सव का उद्देश्य सार्थक कर लिया। ठीक ही तो है कि अंधेरे को क्यों धिक्कारें, अच्छा है कि एक दीप जला लें। (विनायक फीचर्स)

लावारिश गाय की सूचना देने पर युवक से मारपीट

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Giridih News :गिरिडीह नगर थाना क्षेत्र के झिंझरी मोहल्ले में मंगलवार की देर शाम एक युवक के साथ कुछ लोगों ने मारपीट कर दी. इस घटना में झिंझरी मोहल्ला निवासी सुमित कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया. घायल युवक को स्थानीय लोगों की मदद से सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है.

सुमित कुमार मंगलवार की शाम करीब सात बजे अपने घर से बड़ा चौक की ओर जा रहा था. इसी दौरान हटिया के पास पहले से मौजूद कुछ युवकों ने उसका रास्ता रोक लिया. इसके बाद उसे जबरन हटिया के अंदर ले जाकर मारपीट शुरू कर दी गई. बताया गया कि हमलावरों में से एक युवक ने चाकू निकालकर वार करने की कोशिश भी की, लेकिन सुमित किसी तरह वहां से भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहा. उसने आशंका जताई है कि कुछ दिन पहले उसने झिंझरी मोहल्ला पार्क में एक लावारिस गाय बंधे मिलने की सूचना पुलिस को दी थी, उसी रंजिश में उस पर हमला किया गया.

नगर थाना में की शिकायत

उधर सुमित ने इस संबंध में नगर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. नगर थाना प्रभारी ज्ञान रंजन कुमार ने बताया कि मारपीट की घटना की जांच की जा रही है. शिकायत के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है. उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस घटना में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

गौ माता के नाम पर करोड़ों का घोटाला – संजय सिंह

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लखनऊ: आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता कर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह और अयोध्या सुंदरीकरण परियोजनाओं में घोटाले का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा ने न केवल जनता के पैसे का दुरुपयोग किया, बल्कि प्रभु श्रीराम और गौ माता के नाम पर भी भ्रष्टाचार कर आस्था को कलंकित किया है.

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि योगी सरकार के अधीन ‘स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग, अयोध्या मंडल’ द्वारा तैयार रिपोर्ट में करीब 250 करोड़ रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार उजागर हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, 4,305 निर्माण कार्यों में अनियमितताएं पाई गईं, जिनमें से केवल 102 मामलों में ही जवाब दिया गया, शेष हजारों मामलों का कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला .

कान्हा गौशाला में करोड़ों की लूटः संजय सिंह ने कहा कि भाजपा नेताओं ने गौ माता के चारे से लेकर सड़कों और योजनाओं तक में भ्रष्टाचार किया. कान्हा गौशाला में एक ही समय पर दो ट्रकों की तौल दर्शाकर भुगतान दिखाया गया, यानी एक मिनट में दो ट्रक भूसा तौल दिए गए. इसी तरह ‘प्रताप हाइट्स लिमिटेड’ नामक ब्लैकलिस्टेड कंपनी को 6.05 करोड़ का भुगतान बिना कार्य किए ही कर दिया गया. इसके अलावा, लायन सिक्योरिटी सर्विस और किंग सिक्योरिटी सर्विस जैसी एजेंसियों को ₹1.31 करोड़ से अधिक का भुगतान बिना किसी अनुबंध या काम के आदेश के किया गया. 1,500 ‘घोस्ट कर्मचारियों’ के नाम पर भुगतान निकाला गया.

सड़कें, चौराहे और गौ माता का चारा खा गएः संजय सिंह ने कहा कि आईआईटी बीएचयू के छात्रों द्वारा किए ऑडिट की रिपोर्ट के अनुसार, 22 चौराहों पर लाइट सज्जा का कार्य होना था. लेकिन केवल 19 चौराहे मिले, 3 चौराहे ‘गायब’ पाए गए, जिन पर ₹4.46 करोड़ का भुगतान किया जा चुका था. इसी तरह CCTV कैमरा योजना (₹4.24 करोड़), हेल्थ एटीएम योजना (₹1.46 करोड़), वॉक्यू इल्यूजन (₹3.95 करोड़) का भी कोई अता-पता नहीं है. संजय सिंह ने कहा कि रामपथ की 28 किलोमीटर सड़क की सफाई का भुगतान किया गया. जबकि वास्तविक सफाई केवल 3-4 किलोमीटर की ही हुई. उन्होंने कहा, “सड़कें खा गए, चौराहे खा गए, गौ माता का चारा खा गए, भाजपा के लिए कोई भी चीज पवित्र नहीं रही.”

जनता की आस्था पर सबसे बड़ा हमलाः संजय सिंह ने कहा कि एक और भ्रष्टाचार है प्रताप हाइट्स का ही. इनको कुल भुगतान ₹1 करोड़ 8 लाख 79 हज़ार 306 का भुगतान हुआ है और ये सोलर परियोजना का पता ही नहीं है. कान्हा गौशाला में बिना टेंडर के ₹18 करोड़ का काम फिर इसी प्रताप हाइट्स को हैंडपंप लगाने से लेकर और तमाम कामों के नाम पर किया गया है. राम मंदिर और अयोध्या सुंदरीकरण के नाम पर हुआ यह भ्रष्टाचार जनता की आस्था पर सबसे बड़ा हमला है. संजय सिंह ने मांग की कि योगी सरकार इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे.

इन अधिकारियों के कार्यकाल में हुआ घोटालाः संजय सिंह ने उन अधिकारियों के नाम भी बताए जिनके कार्यकाल में ये गड़बड़ियां हुईं. गिरीशपति त्रिपाठी (महापौर, अयोध्या), विशाल सिंह (नगर आयुक्त, अयोध्या / सूचना निदेशक, उत्तर प्रदेश / उपाध्यक्ष, अयोध्या विकास प्राधिकरण), संतोष कुमार शर्मा (नगर आयुक्त, अयोध्या), नरेंद्र प्रताप सिंह (वित्त एवं लेखा अधिकारी). साथ ही उन्होंने अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा किसानों की भूमि अधिग्रहण में हुई गड़बड़ियों का भी उल्लेख किया, जहां किसानों से ₹5 लाख प्रति बिस्वा में खरीदी गई जमीन बाद में ₹1.77 करोड़ में बेची गई. संजय सिंह ने कहा कि हालिया चुनावों में अयोध्या समेत कई जिलों में भाजपा की हार का कारण जनता का यह जागरण है. “प्रभु श्रीराम जानते थे कि ये भक्त नहीं, चोर हैं. इसलिए अयोध्या, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, प्रयागराज, बांदा, चित्रकूट, हर जगह जनता ने इन्हें हराया.