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‘अल्टिमेट मिलियनेयर ब्लूप्रिंट’ ने महाराष्ट्र के उद्यमियों में किया नई ऊर्जा, नया विज़न और नई दिशा निर्माण

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लोनावला। मुंबई के समीप लोनावला में हाल ही में आयोजित चार दिवसीय भव्य कार्यशाला ‘अल्टिमेट मिलियनेयर ब्लूप्रिंट’ ने महाराष्ट्र के उद्यमियों में नई ऊर्जा, नया विज़न और नई दिशा निर्माण किया।

इस परिवर्तनकारी कार्यक्रम का नेतृत्व बिज़नेस कोच व अध्यात्मिक मार्गदर्शक देविदास श्रावण नाइकरे ने किया। उनका संदेश था कि बिज़नेस का असली उद्देश्य सिर्फ प्रॉफिट नहीं, बल्कि समाज को आगे ले जाना है।

वर्कशॉप में उद्यमियों को विभिन्न विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया।
जिसमें बिज़नेस चक्र मॉडल, माइंडसेट री-प्रोग्रामिंग व मेडिटेशन, टीम नेतृत्व एवं परफॉर्मन्स स्ट्रक्चर, ब्रांडिंग, ऑटोमेशन और बिज़नेस सिस्टम्स, रेवेन्यू ग्रोथ फ्रेमवर्क, स्पिरिचुअल लीडरशिप और स्थिरता, जैसे भिन्न भिन्न एवं अर्थपूर्ण विषयों का समावेश रहा।

कार्यक्रम के समापन समारोह में महाराष्ट्र के चयनित टॉप उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने और उद्यमियों का हौसला बुलंद करने करने के लिए बॉलीवुड अभिनेता अली खान और शाहबाज खान को श्रवण देवीदास नाईकरे ने विशेष रूप से लोनावाला आमंत्रित किया।

अभिनेता अली खान ने कहा कि यह अवॉर्ड आपकी सफलता का नहीं, बल्कि आपके इरादों और सेवा-भाव का सम्मान है।

शाहबाज खान ने कहा कि उद्यमी सिर्फ अपने परिवार का नहीं, बल्कि समाज का भविष्य बनाते हैं।

पूरे कार्यक्रम का सार एक ही था —“सच्चा नेतृत्व वह है जो दूसरों के रास्ते रोशन करे।

होम्योपैथी के फार्माकोपिया आयोग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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भारतीय औषधि एवं होम्योपैथी फार्माकोपिया आयोग (पीसीआईएमएंडएच) ने आज आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) द्वारा वित्त पोषित क्षेत्रीय कच्चे औषधि भंडार (आरआरडीआर) – गंगा मैदानी क्षेत्र परियोजना के अंतर्गत “एएसयूएंडएच के फार्माकोपियाल मापदंडों” पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

पीसीआईएमएंडएच के निदेशक डॉ. रमन मोहन सिंह ने अपने स्वागत भाषण में प्रतिभागियों को आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी (एएसयूएंडएच) औषधियों के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में आयोग द्वारा की गई विभिन्न गतिविधियों और हाल की कोशिशों के बारे में जानकारी दी।

उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, एनएमपीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रो. (डॉ.) महेश कुमार दाधीच ने एएसयू एंड एच प्रणालियों की सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने में प्राकृतिक औषधियों की गुणवत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने आरआरडीआर विकसित करने में पीसीआईएम एंड एच द्वारा की गई प्रगति की सराहना की और बताया कि एनएमपीबी, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के सहयोग से, एएसयू एंड एच औषधियों के लिए भारतीय निर्देशक द्रव्य विकसित कर रहा है। उन्होंने क्यूआर-कोड सक्षम डेटाबेस के साथ विषयगत औषधीय पादप उद्यान स्थापित करने के लिए पीसीआईएम एंड एच की भी सराहना की।

डीआरडीआर के पूर्व एसोसिएट निदेशक डॉ. राजेंद्र सिंह ने एएसयूएंडएच दवाओं की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति को रेखांकित किया और फार्माकोपियल और फार्मूलरी मानकों की स्थापना में पीसीआईएमएंडएच की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।

पीसीआईएमएंडएच की प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी (फार्माकोग्नॉसी) डॉ. ए. जयंती ने गंगा मैदानी आरआरडीआर परियोजना के अंतर्गत गतिविधियों का अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पीसीआईएमएंडएच वर्तमान में अपने भंडार में 523 प्रामाणिक कच्ची औषधियों के नमूने और एएसयूएंडएच औषधियों की 218 प्रजातियों के लगभग 1,000 हर्बेरियम नमूने संरक्षित कर रहा है।

कार्यक्रम में लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें दिल्ली के जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय, गाजियाबाद के  राज कुमार गोयल प्रौद्योगिकी संस्थान, जीएस आयुर्वेद कॉलेज, संस्कार कॉलेज ऑफ फार्मेसी, नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), ग्रेटर नोएडा से बैक्सन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, आईएमएस गाजियाबाद आदि संस्थानों ने प्रतिनिधित्व किया ।

तकनीकी सत्रों में आरआरडीआर परियोजना के सलाहकार डॉ. मुकेश कुमार द्वारा “औषधीय पौधों की वर्गीकरण संबंधी पहचान”; पीसीआईएम एंड एच के पीएसओ डॉ. ए. जयंती द्वारा “फार्माकोग्नॉस्टिक मापदंडों द्वारा प्राकृतिक दवाओं की पहचान”; पीसीआईएम एंड एच के पीएसओ डॉ. एससी वर्मा द्वारा “पारंपरिक दवाओं का गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता मूल्यांकन”; और माइक्रोबायोलॉजी के एसओ डॉ. एम. रमेश द्वारा “एएसयू एंड एच दवाओं का माइक्रोबियल विश्लेषण” पर विशेषज्ञ व्याख्यान शामिल थे।

तकनीकी सत्रों के बाद, प्रतिभागियों को फार्माकोग्नॉसी, रसायन विज्ञान और सूक्ष्म जीव विज्ञान प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया और एएसयूएंडएच औषधियों के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण में प्रयुक्त प्रमुख उपकरणों का प्रदर्शन भी दिखाया गया। हर्बल गार्डन, क्षेत्रीय कच्ची औषधि भंडार और बीज बैंक का भी अवलोकन कराया गया।

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वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जयंती – खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी

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(डॉ. राघवेंद्र शर्मा-विनायक फीचर्स)

​भारत के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि युगों-युगों तक प्रेरणा के स्रोत बने रहते हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के, ‘मनु’ से ‘महारानी’ और फिर ‘वीरांगना’ बनने तक का सफर, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसे हर भारतीय गर्व से याद करता है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला में अपने जीवन की आहुति दे देने वाली इस असाधारण महिला का जीवन, शौर्य, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम का जीवंत उदाहरण है।
​रानी लक्ष्मीबाई का जन्म एक ऐसे समय में हुआ जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी अपनी ‘हड़प नीति’ और अन्य कुटिल चालों से भारतीय रियासतों को निगल रही थी। एक साधारण पृष्ठभूमि से आकर, शास्त्रों के साथ शस्त्रों की शिक्षा ग्रहण करने वाली मणिकर्णिका (मनु) का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव नेवालकर से हुआ और वह ‘लक्ष्मीबाई’ बन गईं। झांसी की रानी के रूप में उन्होंने केवल राज-काज ही नहीं संभाला, बल्कि उस समय की रूढ़िवादी सामाजिक बेड़ियों को भी तोड़कर घुड़सवारी, तलवारबाजी और सैन्य प्रशिक्षण में अपनी निपुणता सिद्ध की।

​ स्वाभिमान का शंखनाद
रानी के जीवन का निर्णायक मोड़ तब आया जब राजा गंगाधर राव के निधन के बाद, लॉर्ड डलहौज़ी ने दत्तक पुत्र दामोदर राव को झाँसी का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने की घोषणा की। यहीं से एक रानी का वीरांगना के रूप में उदय हुआ। रानी लक्ष्मीबाई ने गर्जना की, “मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी!” यह केवल एक वाक्य नहीं था, बल्कि भारतीय स्वाभिमान का वह शंखनाद था, जिसने सोए हुए राष्ट्र को जगाया।
​ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध उनकी अडिगता और विरोध ने उन्हें उस महासंग्राम का केंद्रीय चेहरा बना दिया, जिसने भारत में अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी थी। रानी ने एक ऐसी सेना का गठन किया जिसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध किया। झलकारी बाई जैसी उनकी सहयोगी ने नारी शक्ति और निष्ठा का नया मानदंड स्थापित किया।
​रणक्षेत्र में अद्वितीय पराक्रम

झाँसी के किले पर जनरल ह्यूरोज़ के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना के आक्रमण का रानी ने जिस अद्भुत साहस से सामना किया, वह आज भी रोमांच भर देता है। भारी संख्या बल और आधुनिक हथियारों से लैस अंग्रेजों के सामने मुट्ठी भर सैनिकों के साथ डटे रहना, रानी की अदम्य इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। किले से बाल-पुत्र दामोदर राव को पीठ पर बांधकर, घोड़े पर सवार होकर उनका निकलना, साहस और मातृत्व की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
​झाँसी से निकलकर, कालपी और ग्वालियर तक उन्होंने विद्रोही ताकतों का नेतृत्व किया। तात्या टोपे जैसे महान योद्धाओं के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। ग्वालियर में, वीरगति प्राप्त करने से ठीक पहले, रानी ने अपने अंतिम युद्ध में जो शौर्य दिखाया, उसने जनरल ह्यूरोज़ को भी कहने पर मजबूर कर दिया कि “विद्रोहियों में वह अकेली मर्द थी।” मात्र 29 वर्ष की अल्पायु में 18 जून 1858 को उनका बलिदान हुआ, लेकिन उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं गया।

​विरासत और प्रेरणा
​ रानी लक्ष्मीबाई का जीवन और उनका बलिदान, भारतीय इतिहास की एक अमिट छाप है। वह न केवल स्वतंत्रता संग्राम की नायिका हैं, बल्कि वह हर उस भारतीय महिला के लिए प्रतीक हैं जिसने अपनी पहचान, अधिकार और स्वाभिमान के लिए संघर्ष किया है। उनकी गाथा हमें सिखाती है कि नेतृत्व लिंग या उम्र का मोहताज नहीं होता, बल्कि साहस, संकल्प और न्याय के प्रति समर्पण से आता है।
​उनकी स्मृति में ‘रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार’ दिए जाते हैं, जो महिला सशक्तिकरण और असाधारण वीरता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित करते हैं। यह पुरस्कार हमें याद दिलाते हैं कि रानी की आत्मा आज भी उन महिलाओं में जीवित है जो अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाती हैं और अपने अधिकारों के लिए लड़ती हैं।
​आज जब राष्ट्र एक सशक्त और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है, हमें रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। हमें उनके निर्भीक स्वभाव, दूरदर्शिता, और राष्ट्रप्रेम को अपने आचरण में उतारना चाहिए। उनका यह आदर्श कि, “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है,” हमें आज भी हर प्रकार के शोषण और अन्याय के विरुद्ध लड़ने की प्रेरणा देता है।
​सच ही कहा गया है-
​बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
​वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई का शौर्य हमेशा हमें याद दिलाएगा कि मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उनका नाम अमर है। (विनायक फीचर्स)

गोपालन एक सबसे बड़ा व्यवसाय बनते जा रहा है

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गोपालन एक सबसे बड़ा व्यवसाय बनते जा रहा है. खासकर युवाओं में यह ट्रेंड सबसे अधिक चल रहा है. ऐसे में जब भी लोग गाय खरीदने जाते हैं. वह एक बार जरूर पूछते हैं कि यह कितने ब्यान है कि और यह कितना दूध देती है. इस हिसाब से भी गाय का दाम तय होता है.
लेकिन कभी आपने सोचा है की गाय कितने ब्यान तक दूध बढ़ा सकती है. यह एक बड़ा ही महत्वपूर्ण बात है गाय की खरीदारी में. अगर गाय एक ब्यान की है तो क्या अगले बार बच्चे को जन्म देने के बाद भी इतना ही दूध करेगी या इससे दूध और बढ़ाएगी.
कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक राजेश कुमार ने लोकल 18 से बताया कि देखिए गोपालन एक मुनाफे दायक व्यवसाय है. उन्होंने बताया कि अगर गाय पहली ब्यान में 10 लीटर कर रही है और आप उसको खाना सही से देते हैं तो जरूर अगले ब्यान में वह 14 लीटर जाएगी. उन्होंने बताया कि 3 ब्यान तक गाय की क्षमता है कि वह दूध बढ़ा सकती है. तीसरे ब्यान में अगर 20 लीटर दूध करेगी तो उसके बाद वह सब दिन 20 लीटर तक रह जायेगी. क्योकि दूध देने वाला हरेक इस तीसरे ब्यान तक खुल जाती है. इसलिए तीसरे ब्यान के बाद गाय दूध नहीं बढ़ाती है. इसलिए जो दाम गाय का दो ब्यान तक मिलता है उसके बाद वह दाम नहीं मिल पाता है.
उन्होंने यह भी बताया कि एक बात हमेशा ध्यान में रखे कि अगर आप गाय को एक समान खाना हमेशा दे रहे हैं तो आप गाय पालन में फ्लोफ नहीं कीजियेगा. ये गाय पालन करने वाले सभी किसानों को ध्यान देना चाहिए कि अब दूध नहीं कर रही है तो उसका भोजन कम कर दें नहीं. आप उसको उस समय भी वही भोजन देते रहें. उसके बाद आपको रिजल्ट हर हमेशा अच्छा मिलेगा. गाय का चारा अगर ठीक है तो वह लंबे समय तक दूध भी देती है और आगे दूध बढ़ाती भी रहती है.

उत्तर प्रदेश – गौ-तस्कर गिरोह का पर्दाफाश

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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पुलिस और अंतरजनपदीय गौ-तस्कर गिरोह के सदस्यों के बीच शनिवार देर रात भीषण मुठभेड़ हो गई। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब स्वाट टीम (SWAT), जंगीपुर और बिरनो थाना की संयुक्त पुलिस बल ने गोरखपुर-वाराणसी हाईवे पर गौ तस्करों का पीछा किया और जंगीपुर थाना क्षेत्र के देवकठिया मोड़ के पास उन्हें घेर लिया। अधिकारियों ने बताया कि खुद को चारों ओर से घिरा हुआ देख तस्करों ने पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तीन गौ तस्करों को गोली लग गई और वे घायल हो गए। मुठभेड़ के बाद कुल छह गौ तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया।

मुठभेड़ के दौरान घायल हुए तीन तस्करों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी निगरानी की जा रही है। डीएसपी पश्चिमी सुचित्रा कुमारी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पकड़े गए छह गौ तस्करों के पास से भारी मात्रा में अवैध सामान बरामद हुआ है। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन अवैध तमंचे, कई जिंदा और खोखा कारतूस, एक स्कॉर्पियो और एक पिकअप वाहन जब्त किया है। इसके अलावा, तस्करों के पास से छह गोवंश (गाय) भी बरामद किए गए हैं, जिन्हें वे अवैध तस्करी के लिए ले जा रहे थे। इस गिरोह में शामिल सभी सदस्य आसपास के कई जिलों में गौ तस्करी को लेकर सक्रिय थे।

जंगीपुर और बिरनो थाना की पुलिस और स्वाट टीम की इस संयुक्त कार्रवाई को अंतरजनपदीय गौ-तस्कर गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ये तस्कर विभिन्न जिलों से गोवंश की तस्करी करते थे और उन्हें ऊंचे दामों पर बेचते थे। पकड़े गए तस्करों के आपराधिक रिकॉर्ड और उनके नेटवर्क की जानकारी हासिल करने के लिए गहन पूछताछ की जा रही है। इस ऑपरेशन ने पुलिस की सामूहिक कार्रवाई क्षमता को दर्शाता है और यह स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठित अपराध और अवैध तस्करी के खिलाफ पुलिस बल पूरी तरह से सक्रिय और तैयार है।

हर घर सुरक्षित 2025 अभियान के अंतर्गत गोदरेज ने लॉन्च किया ‘एक्सिडेंटल इन्विटेशन’ पहल

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स्मार्ट होम ग्रोथ को 20% तक बढ़ाने के लिए नियो डिजिटल लॉक्स रेंज को पेश किया

मुंबई। गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के प्रमुख व्यवसाय लॉक्स एंड आर्किटेक्चरल सॉल्यूशंस (LAS) ने अपने फ्लैगशिप अभियान हर घर सुरक्षित के 9 वे साल का में प्रवेश करते हुए इसके बड़े विस्तार की घोषणा की। यह विस्तार LAS की तेजी से बढ़ते स्मार्ट होम सेगमेंट में आक्रामक एंट्री को दर्शाता है, जहां कंपनी डिजिटल लॉक्स के मजबूत पोर्टफोलियो के साथ डबल-डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। भारत के मास-प्रिमियम उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट सुरक्षा समाधान को लोकतांत्रिक बनाने के उद्देश्य से ब्रांड ‘मेड इन इंडिया’ डिजिटल लॉक्स की अपनी रेंज में डिज़ाइन और कीमत, दोनों में नवाचार पर केंद्रित है।

डिजिटल लॉक्स कैटेगरी में गोदरेज ने 36% CAGR के साथ उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और बाजार में अग्रणी स्थिति बनाए रखी है।
हर घर सुरक्षित पहल, जो गोदरेज का प्रमुख होम सेफ्टी अवेयरनेस प्रोग्राम है, की लॉन्चिंग के अवसर पर ब्रांड ने ‘एक्सिडेंटल इन्विटेशन ऐप’ पेश किया। यह एक अद्वितीय और शक्तिशाली डिजिटल पहल है, जिसे नागरिकों को सोशल मीडिया पर ओवरशेयरिंग से जुड़े घरेलू सुरक्षा जोखिमों के प्रति जागरूक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। मेटा के साथ साझेदारी में विकसित, यह प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को एक पर्सनलाइज़्ड ‘एक्सीडेंटल इन्विटेशन स्कोर’ प्रदान करता है, जो बताता है कि उनकी ऑनलाइन शेयरिंग आदतों से उनके घर की सुरक्षा पर कितना खतरा मंडरा सकता है। इसके साथ ही, यह प्लेटफॉर्म व्यक्तिगत सुरक्षा ज़रूरतों के अनुरूप विशेषज्ञ-निर्मित सुरक्षा समाधान भी उपलब्ध कराता है। यह कैंपेन पूरी तरह से एआई-संचालित है, जिसमें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों पर आधारित प्रभावशाली फिल्में शामिल हैं। आज के अति-जुड़े डिजिटल युग में, वास्तविक सुरक्षा केवल दरवाज़ों पर ताले लगाने से नहीं, बल्कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही दुनिया में सजग और ज़िम्मेदार व्यवहार अपनाने से शुरू होती है। यह पहल लोगों को यह महत्वपूर्ण संदेश देती है कि डिजिटल सतर्कता ही आपके घर का नया सुरक्षा कवच है।

भारत में सोशल मीडिया से जुड़े साइबर अपराध पिछले पांच वर्षों में लगभग तीन गुना हो चुके हैं। साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा न सिर्फ सुरक्षा के लिए, बल्कि सुविधा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई है। इसी के तहत गोदरेज ने कई किफायती डिजिटल लॉक्स पेश किए हैं। नई नियो डिजिटल लॉक्स रेंज आधुनिक भारतीय घरों के लिए इंटेलिजेंट सुरक्षा का अगला चरण है। अत्याधुनिक तकनीक, आकर्षक डिज़ाइन और किफायत का संयोजन करते हुए यह रेंज इन-बिल्ट वीडियो डोर फोन, वाई-फाई और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, मल्टीपल एक्सेस मोड, एंटी-थेफ्ट अलार्म और इमरजेंसी पावर बैकअप जैसे फीचर्स के साथ आती है। 8,999 रुपये से शुरू होने वाली कीमतों के साथ नियो रेंज उन शहरी उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करती है जो सुविधा, सुरक्षा और स्टाइल को एक साथ चाहते हैं।

इस अवसर पर श्याम मोटवानी (बिजनेस हेड, एलएएस, गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप) ने कहा, “पिछले आठ वर्षों से हर घर सुरक्षित ने होम सेफ्टी को संयुक्त जिम्मेदारी के रूप में स्थापित किया है। एक्सीडेंटल इन्विटेशन ऐप के माध्यम से हम इस मिशन को डिजिटल दुनिया तक विस्तारित कर रहे हैं। नियो डिजिटल लॉक्स रेंज का लॉन्च आधुनिक भारतीय घरों के लिए बुद्धिमान सुरक्षा को नए सिरे से परिभाषित करने और स्मार्ट होम कैटेगरी में हमारी ग्रोथ को तेज करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
हम अपनी प्रमुख पहल ‘हर घर सुरक्षित’ के माध्यम से होम सेफ्टी में क्रांति ला रहे हैं। अब तक 1.7 लाख से अधिक होम सेफ्टी चेक-अप पूरे किए जा चुके हैं, जिसमें अकेले वित्त वर्ष 2026 में 21,000+ चेक-अप शामिल हैं। यह पहल स्मार्ट सुरक्षा समाधानों के प्रति जागरूकता और उन्हें अपनाने को लगातार बढ़ावा दे रही है। इस प्रयास से हमें वर्ष-दर-वर्ष डबल-डिजिट ग्रोथ मिली है और पिछले वर्ष डिजिटल सुरक्षा समाधानों को अपनाने में 30% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डिजिटल लॉक्स कैटेगरी से बढ़ते राजस्व योगदान के साथ, यह सफलता घरेलू सुरक्षा क्षेत्र में गोदरेज की नेतृत्वकारी स्थिति और सशक्त बिज़नेस परफॉर्मेंस को स्पष्ट रूप से मजबूत करती है। नियो डिजिटल लॉक्स रेंज का लॉन्च इस कैटेगरी की ग्रोथ को और तेज करेगा तथा भारत के तेजी से बढ़ते स्मार्ट होम मार्केट में गोदरेज की हिस्सेदारी बढ़ाएगा।

ऐप लिंक – https://accidental-invitation.in/
फिल्म लिंक –
• https://youtu.be/xFCQ4RNDL9c
• https://youtu.be/eu8tks9EHQg
• https://youtu.be/_aR4xoSMEAs

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण से प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज ने की SHG पर चर्चा

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18 नवम्बर 2025, नई दिल्ली कर्तव्य भवन, 18 नवम्बर ,नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड की प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज जी ने देश की माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामण जी से सौजन्य भेंट की।

इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड की स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आजीविका वृद्धि एवं कौशल-विकास को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक के दौरान श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज ने उत्तराखंड के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय महिला समूहों के उत्कृष्ट कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि-SHG महिलाओं ने उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नयी दिशा दी है।
स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन से लेकर डिजिटल लेन-देन तक हमारी बहनें स्वयं को और अपने परिवारों को सशक्त बना रही हैं।”

प्रदेश महामंत्री ने बैठक में निम्न विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला:
• SHG उत्पादों का राष्ट्रीय स्तर पर विपणन
• स्थानीय उद्योगों व हस्तशिल्प का मूल्य संवर्धन
• महिला उद्यमिता को बढ़ाने हेतु कौशल एवं वित्तीय प्रशिक्षण
• समूह आधारित आजीविका मॉडल
• बैंक लिंकिंग और वित्तीय समावेशन
• डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा

माननीय वित्त मंत्री श्रीमती सीतारामण ने उत्तराखंड की महिलाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिला आर्थिक भागीदारी बढ़ाने, SHG समूहों को नई तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित नए आजीविका मॉडल विकसित करने का सुझाव भी दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि-“SHG उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय बाज़ार और सरकारी क्रय प्रणालियों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
केंद्र सरकार इस दिशा में राज्य को हर संभव सहयोग देगी।”

बैठक के अंत में दीप्ति रावत भारद्वाज जी ने वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “माननीय वित्त मंत्री जी का मार्गदर्शन उत्तराखंड की महिलाओं को आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और आर्थिक उन्नति की नई ऊर्जा देगा।”

यह संवाद उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला नेतृत्व और SHG आधारित आजीविका को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री 19 नवंबर को आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का दौरा करेंगे

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प्रधानमंत्री 9 करोड़ किसानों के लिए पीएम-किसान निधि की 18,000 करोड़ रुपये की 21वीं किस्त जारी करेंगे

प्रधानमंत्री पुट्टापार्थी में भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह में भाग लेंगे

प्रधानमंत्री भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जीवन, शिक्षाओं और उनकी शाश्वत विरासत के सम्मान में स्मारक सिक्का और डाक टिकटों का सेट जारी करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 19 नवंबर को आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के पुट्टापार्थी में सुबह लगभग 10 बजे भगवान श्री सत्य साईं बाबा के पवित्र तीर्थस्थल और महासमाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री सुबह लगभग 10:30 बजे भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह में भाग लेंगे। वे इस अवसर पर भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जीवन, शिक्षाओं और शाश्वत विरासत को समर्पित स्मारक सिक्का और डाक टिकटों का सेट जारी करेंगे। वे इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे।

इसके बाद प्रधानमंत्री तमिलनाडु के कोयंबटूर जाएंगे। वहां वे लगभग 1:30 बजे दिन में दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री देश भर के 9 करोड़ किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए पीएम-किसान योजना की 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की 21वीं किस्त जारी करेंगे। प्रधानमंत्री इस अवसर पर वहां उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे।

दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन तमिलनाडु प्राकृतिक कृषि हितधारक मंच की ओर से 19 से 21 नवंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और रसायन-मुक्त कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा भारत में कृषि के भविष्य के लिए व्यावहारिक, जलवायु-अनुकूल और आर्थिक रूप से टिकाऊ मॉडल के रूप में प्राकृतिक और पुनः विकास योग्य कृषि की ओर परिवर्तन को गति प्रदान करना है।

यह शिखर सम्मेलन किसान और उत्पादक संगठनों तथा ग्रामीण उद्यमियों के लिए बाज़ार संपर्क का निर्माण करने पर भी केंद्रित होगा। साथ ही इसमें जैविक इनपुट, कृषि-प्रसंस्करण, पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग और स्वदेशी तकनीकों में नवाचारों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के 50,000 से अधिक किसान, प्राकृतिक कृषि व्यवसायी, वैज्ञानिक, जैविक इनपुट आपूर्तिकर्ता, विक्रेता और हितधारक भाग लेंगे।

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बेकार गोबर बना सोना

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हजारीबाग: झारखंड में हजारीबाग जिले की एक गौशाला इन दिनों तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने को लेकर चर्चा में है. यहां रह रही 500 से अधिक गाय की देखभाल का खर्च अब गौशाला खुद अपने संसाधनों से पूरा करने लगी है. पहले जहां चारे और देखभाल के लिए दान पर निर्भरता अधिक थी, वहीं, अब गायों से मिलने वाले संसाधनो खासकर जैविक खाद तैयार कर बिक्री से ही गौशाला का पूरा खर्च निकाला जा रहा है. इससे न केवल गौशाला आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है. बल्कि इसका सीधा लाभ जिले के किसानों और आम लोगों को भी मिल रहा है.
मौजूदा समय में हजारीबाग गौशाला में 500 गाएं हैं, जिन्हें सड़क से या विभिन्न परिस्थितियों में रेस्क्यू कर लाया गया है. इतने बड़े स्तर पर गौ-सेवा चलाना आसान नहीं है. इसलिए गौशाला कमेटी ने एक प्रभावी मॉडल तैयार किया है. जिसमें गायों के द्वारा दिए गए गोबर से जैविक खाद तैयार किया जा रहा है और इसी स्थानीय बाजार से लेकर स्थानीय किसानों को बेचा जा रहा है और इसी कमाई से अब गौशाला की आमदनी बढ़ाई जा रही है.
कमेटी के सदस्य मनोज गुप्ता ने बताया कि जैविक खाद की बढ़ती मांग ने गौशाला को आर्थिक सहारा दिया है. पहले के समय में गाय के द्वारा दिए गए गोबर को ऐसे ही बाहर फेंक दिया जाता था या किसी को ओने पौने दाम पर बेचा जाता था, लेकिन वह मॉडल प्रभावित नहीं था, जिस कारण से यहां पर गोबर से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई. आज यह मॉडल सफल हो चुका है. गौशाला के आमदनी का प्रमुख हिस्सा अब जैविक खाद है.

लेंसकार्ट ने बार्सिलोना के ब्रांड मेलर को भारत में किया लॉन्च

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लैबुबू मेकर पॉपमार्ट संग नई रचनात्मक साझेदारी के साथ प्रीमियम पोर्टफोलियो का किया विस्तार; ग्लोबल हाउस ऑफ ब्रांड्स को मजबूत किया

मुंबई। लेंसकार्ट ने भारत में मेलर के लॉन्च की घोषणा की और वैश्विक पॉप-कल्चर ब्रांड पॉपमार्ट के साथ एक नई रचनात्मक आईवियर साझेदारी की घोषणा की। इस साझेदारी से आईवियर ब्रांड्स का एक आधुनिक घराना बनाने की उसकी महत्वाकांक्षा और मज़बूत होगी और लेंसकार्ट को समकालीन आईवियर डिज़ाइन के केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।

पॉप मार्ट x लेंसकार्ट आईवियर कलेक्शन दिसंबर के पहले हफ्ते से सिंगापुर में—ऑनलाइन और चुनिंदा लेंसकार्ट स्टोर्स में—लॉन्च होगा। इस रेंज में संग्रहणीय, चरित्र-प्रेरित डिज़ाइन पेश किए गए हैं, जो उन उपभोक्ताओं के लिए हैं जो भावपूर्ण, चंचल और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक फैशन एक्सेसरीज पसंद करते हैं।

यह साझेदारी लेंसकार्ट के सांस्कृतिक सहयोगों के बढ़ते दायरे पर आधारित है, जिसमें हैरी पॉटर, हैलो किट्टी, पोकेमॉन, ड्रैगन बॉल ज़ेड, सुपरमैन और बैटमैन शामिल हैं। ये सहयोग लेंसकार्ट को डिज़ाइन-आधारित कहानी कहने के माध्यम से अपने आईवियर की अपील को व्यापक बनाने में मदद कर रहे हैं जो प्रशंसकों और उभरती उपसंस्कृतियों से गहराई से जुड़ती है।

बार्सिलोना में शुरू किया गया मेलर, यूरोप के सबसे प्रभावशाली डी2सी युवा आईवियर ब्रांडों में से एक बन गया है, जो अपने बोल्ड सिल्हूट, स्ट्रीट-कल्चर से प्रेरित पैलेट और अभिव्यंजक, फ़ैशन-फ़ॉरवर्ड सौंदर्यशास्त्र के लिए जाना जाता है। 700,000 से अधिक फ़ॉलोअर्स और यूरोप और अमेरिका में मज़बूत पकड़ के साथ, मेलर ने एक जीवंत वैश्विक समुदाय और विशिष्ट, डिज़ाइन-आधारित आईवियर चाहने वाले युवा उपभोक्ताओं के साथ एक गहरा जुड़ाव बनाया है।

भारत में, मेलर अब लेंसकार्ट के रिटेल नेटवर्क के साथ-साथ लेंसकार्ट ऐप और वेबसाइट के ज़रिए ऑनलाइन भी उपलब्ध होगा। ब्रांड सबसे पहले उच्च फ़ैशन-अनुकूलता वाले क्षेत्रों से मेल खाने के लिए जियोआईक्यू इंटेलिजेंस का उपयोग करके पहचाने गए लगभग 500 क्यूरेटेड स्टोर्स में इसे लॉन्च करेगा।

मेलर, जॉन जैकब्स, ओनडेज़ जैसे ब्रांडों और पॉपमार्ट, ड्रैगन बॉल ज़ेड और हैरी पॉटर जैसी रचनात्मक साझेदारियों के माध्यम से, लेंसकार्ट धीरे-धीरे एक विचारशील प्रीमियम पोर्टफोलियो तैयार कर रहा है जो नई पीढ़ी के ग्राहकों की ज़रूरतों के अनुरूप है। आईवियर उद्योग ने दिखाया है कि कैसे मजबूत प्लेटफॉर्म ब्रांडों को आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं, और लेंसकार्ट को अभिव्यंजक, डिज़ाइन-प्रधान ब्रांडों की अगली लहर को सक्षम करने में अपनी भूमिका निभाने की उम्मीद है। प्रत्येक ब्रांड एक विशिष्ट डिज़ाइन दर्शन और उपभोक्ता वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे लेंसकार्ट विशिष्टता, प्रीमियम गुणवत्ता और स्टाइल चाहने वाले वैश्विक ग्राहकों की एक विस्तृत श्रृंखला की सेवा कर पाता है। लेंस तकनीक के क्षेत्र में, वैश्विक नवप्रवर्तक टोकाई और रोडेनस्टॉक ने भी लेंसकार्ट के साथ साझेदारी की है।

लेंसकार्ट के सह-संस्थापक और सीईओ, पीयूष बंसल ने कहा, “हमारे ग्राहक हमारे हर फैसले को प्रेरित करते हैं। वे वैश्विक डिज़ाइन, विशिष्टता और प्रामाणिक लगने वाले ब्रांड चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मेलर का बोल्ड सौंदर्यबोध और मज़बूत समुदाय इसे हमारे ब्रांड हाउस में एक अद्भुत जोड़ बनाता है। और पॉप मार्ट जैसी रचनात्मक साझेदारियों के माध्यम से, हम अपने ग्राहकों को प्रसन्न करने वाले तरीकों से आईवियर में खेल, कल्पना और संग्रहणीयता के क्षण लाने की उम्मीद करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जॉन जैकब्स, ओनडेज़ और अब मेलर जैसे ब्रांडों को पॉप मार्ट जैसे सहयोगों के साथ एक साथ लाकर, हमारा लक्ष्य ग्राहकों को ज़्यादा विकल्प और बेहतर अनुभव प्रदान करना है। हम खुद को अगली पीढ़ी के आईवियर ब्रांडों के लिए एक सक्षमकर्ता के रूप में देखते हैं – उन्हें ज़्यादा लोगों तक पहुँचने और अपनी क्षमता को उजागर करने के लिए एक मंच और क्षमताएँ प्रदान करते हैं।”

लेंसकार्ट के वितरण पैमाने, पूर्ण-स्टैक आपूर्ति श्रृंखला, डिज़ाइन पारिस्थितिकी तंत्र और उन्नत तकनीकी क्षमताओं द्वारा संचालित, साझेदार ब्रांड नए दर्शकों तक पहुंच सकते हैं और बाज़ारों में अधिक सार्थक रूप से विकसित हो सकते हैं।

जैसे-जैसे वैश्विक आईवियर विकसित हो रहा है, मज़बूत मल्टी-ब्रांड प्लेटफ़ॉर्म ने इस श्रेणी को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। अपने हाउस ऑफ ब्रांड्स विज़न के साथ, लेंसकार्ट का लक्ष्य दुनिया भर में एक्सप्रेसिव, डिज़ाइन-आधारित आईवियर ब्रांड्स और सांस्कृतिक सहयोगों की अगली लहर को सशक्त बनाना है।