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मुंद्रा बंदरगाह पर तस्करी वाले 5 करोड़ रुपये मूल्य के पटाखे जब्त

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राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पटाखों के अवैध आयात को रोकने के लिए ऑपरेशन “फायर ट्रेल” के तहत जारी प्रयास में देश में चीनी पटाखों और पटाखों के अवैध आयात से जुड़े एक और गंभीर तस्करी के प्रयास का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है।

ऑपरेशन के दौरान, डीआरआई अधिकारियों ने मुंद्रा बंदरगाह पर चीन से आ रहे एक 40 फीट लंबा कंटेनर पकड़ा, जिसके बारे में बताया गया कि उसमें “गिलास सेट” और “फूलदान” है। विस्तृत जांच में गिलास के ऊपरी हिस्से के पीछे 30,000 पटाखे/आतिशबाज़ी के टुकड़े छिपे हुए पाए गए। इससे पहले, अक्टूबर 2025 में डीआरआई ने मुंबई और तूतीकोरिन में चीनी पटाखों के अवैध आयात के प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया था।

विदेश व्यापार नीति के आईटीसी (एचएस) वर्गीकरण के अंतर्गत पटाखों का आयात ‘प्रतिबंधित’ है और इसके लिए विस्फोटक नियम, 2008 के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) दोनों से वैध लाइसेंस की जरूरत होती है। आयातक के पास आयात के समर्थन में कोई वैध दस्तावेज़ नहीं थे और उसने स्वीकार किया कि माल की तस्करी आर्थिक लाभ के लिए की गई है। तदनुसार, तस्करी किए गए चीनी पटाखों को उनके कवर कार्गो/माल सहित 15.11.2025 को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के अंतर्गत जब्त कर लिया गया, इसकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपये है। इस लेन-देन के साजिशकर्ता-सह-वित्तपोषक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

ऐसे खतरनाक सामानों का अवैध आयात जन सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, महत्वपूर्ण बंदरगाह अवसंरचना और व्यापक शिपिंग एवं लॉजिस्टिक्स श्रृंखला के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। डीआरआई ऐसे संगठित तस्करी नेटवर्क का पता लगाकर और उन्हें ध्वस्त करके, खतरनाक तस्करी से जनता की सुरक्षा और देश के व्यापार एवं सुरक्षा परितंत्र की अखंडता को बनाए रखने के अपने मिशन पर अडिग है।

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प्रधानमंत्री ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा की

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कल गुजरात के सूरत में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन का दौरा किया और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की टीम से भी बातचीत की और गति तथा समय सारिणी के लक्ष्यों के पालन सहित परियोजना की प्रगति के बारे में जानकारी ली। कर्मियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि परियोजना बिना किसी कठिनाई के सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है।

केरल की एक इंजीनियर ने गुजरात के नवसारी स्थित नॉइज़ बैरियर फ़ैक्टरी में काम करने का अपना अनुभव साझा किया, जहाँ सरिया के पिंजरों की वेल्डिंग के लिए रोबोटिक इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं। श्री मोदी ने उनसे पूछा कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन के निर्माण के अनुभव को उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कैसा महसूस किया और इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बारे में वे अपने परिवारों के साथ क्या साझा करती हैं। उन्होंने देश की पहली बुलेट ट्रेन में योगदान देने पर गर्व व्यक्त किया और इसे अपने परिवार के लिए एक “ड्रीम प्रोजेक्ट” और “गर्व का क्षण” बताया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र सेवा की भावना पर विचार करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि जब राष्ट्र के लिए काम करने और कुछ नया योगदान देने की भावना जागृत होती है, तो यह अत्यधिक प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। उन्होंने भारत की अंतरिक्ष यात्रा के साथ तुलना करते हुए याद दिलाया कि देश का पहला उपग्रह प्रक्षेपित करने वाले वैज्ञानिकों को कैसा महसूस हुआ होगा और आज कैसे सैकड़ों उपग्रह प्रक्षेपित किए जा रहे हैं।

 

बेंगलुरु की एक अन्य कर्मचारी, श्रुति, मुख्य इंजीनियरिंग प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कठोर डिज़ाइन और इंजीनियरिंग नियंत्रण प्रक्रियाओं के बारे में बताया। श्रुति ने बताया कि कार्यान्वयन के प्रत्येक चरण में, उनकी टीम फायदे और नुकसान का मूल्यांकन करती है, समाधानों की पहचान करती है और दोषरहित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए विकल्पों की खोज करती है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि यदि यहाँ प्राप्त अनुभवों को ब्लू बुक की तरह दर्ज और संकलित किया जाए, तो देश बुलेट ट्रेनों के बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत को बार-बार प्रयोग करने से बचना चाहिए और इसके बजाय मौजूदा मॉडलों से सीखों को दोहराना चाहिए। श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि अनुकरण तभी सार्थक होगा जब यह स्पष्ट समझ हो कि कुछ कदम क्यों उठाए गए। उन्होंने आगाह किया, कि अनुकरण बिना किसी उद्देश्य या दिशा के हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे रिकॉर्ड बनाए रखने से भविष्य के विद्यार्थियों को लाभ हो सकता है और राष्ट्र निर्माण में योगदान मिल सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम अपना जीवन यहीं समर्पित करेंगे और देश के लिए कुछ मूल्यवान छोड़ जाएँगे।”

एक कर्मचारी ने एक कविता के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त किया, जिस पर प्रधानमंत्री ने उनके समर्पण की प्रशंसा और सराहना की।

केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव इस दौरे के अवसर पर मौजूद थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) की प्रगति की समीक्षा करने के लिए सूरत में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन का दौरा किया। यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है और देश के हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के युग में प्रवेश का प्रतीक है।

एमएएचएसआर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में और 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में शामिल है। यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई सहित प्रमुख शहरों को जोड़ेगा, जो भारत के परिवहन बुनियादी ढांचे में एक परिवर्तनकारी कदम है।

अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों से निर्मित इस परियोजना में 465 किलोमीटर (मार्ग का लगभग 85 प्रतिशत) पुलों पर बना है, जिससे न्यूनतम भूमि व्यवधान और बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होती है। अब तक 326 किलोमीटर पुल निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है और 25 में से 17 नदी पुलों का निर्माण हो चुका है।

बुलेट ट्रेन परियोजना के पूरा होने पर, मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को लगभग दो घंटे तक कम कर देगी, जिससे अंतर-शहर यात्रा तेज, आसान और अधिक आरामदायक बनकर क्रांति ला देगी। इस परियोजना से पूरे कॉरिडोर पर व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की संभावना है।

सूरत-बिलिमोरा खंड, लगभग 47 किलोमीटर लंबा है और यह निर्माण कार्य के अंतिम चरण में है, जिसमें सिविल कार्य और ट्रैक बिछाने का काम पूर्ण रूप से पूरा हो चुका है। सूरत स्टेशन का डिज़ाइन शहर के विश्व प्रसिद्ध हीरा उद्योग से प्रेरित है, जो सुंदरता और कार्यक्षमता दोनों को दर्शाता है। स्टेशन को यात्रियों की सुविधा पर विशेष ध्यान देते हुए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें विशाल प्रतीक्षालय, शौचालय और खुदरा दुकानें हैं। यह सूरत मेट्रो, सिटी बसों और भारतीय रेलवे नेटवर्क के साथ निर्बाध मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी भी प्रदान करेगा।

बिहार विधानसभा के चुनाव परिणामों के निहितार्थ

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(डॉ. सुधाकर आशावादी -विनायक फीचर्स)

लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव व्यवस्था को बार बार कटघरे में खड़ा करने का प्रयास बिहार चुनावों में भी विफल सिद्ध हुआ। बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों ने सिद्ध कर दिया कि लोकतंत्र में झूठे विमर्श और भ्रामक प्रचार को मतदाता स्वीकार करने के लिए तैयार नही है। चुनाव परिणामों ने उन राजनीतिक दलों को सत्य का दर्पण दिखा दिया, जो यह समझते थे, कि उनके द्वारा स्थापित किया जाने वाला वोट चोरी का अप्रमाणिक विमर्श ही सत्य है। अप्रत्याशित चुनाव परिणामों ने यह भी स्पष्ट कर दिया, कि मतदाता पूर्व की अपेक्षा अधिक जागरूक है तथा वह अकल्पनीय वादों पर विश्वास नहीं करता।
बिहार चुनाव परिणामों ने जाति आधारित वोट बैंक के भरम को भी तोड़ दिया,कि जातियां किसी विशेष राजनीतिक दल की बपौती हैं, यही नहीं उन वंशवादी राजनेताओं को भी जमीनी दर्पण दिखा दिया, जो काल्पनिक बातें करके मनगढंत विमर्श से मतदाताओं को गुमराह करने के लिए किसी भी हद तक अराजकता की स्थिति उत्पन्न कर सकते थे। वस्तुस्थिति यह है, कि बिहार के चुनाव परिणामों ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को बरक़रार रखा तथा अपने निहित स्वार्थों के लिए देश की चुनाव व्यवस्था को बदनाम करने वाले तत्वों की कलई खोल कर रख दी।
यहाँ इस सत्य को नहीं नाकारा जा सकता, कि हार की खीज सहजता से नहीं मिटाई जा सकती, यदि ऐसा न होता, तो अपनी जमीनी सच्चाई को दरकिनार करते हुए राजनेता पूर्व से ही चुनाव आयोग, चुनाव व्यवस्था को कटघरे में खड़ा न करते। कभी वोट चोरी, कभी ईवीएम में गड़बड़ी, कभी स्लो काउंटिंग, कभी मतदाता सूची में गड़बड़, कभी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर कुछ राजनीतिक दल निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में विघ्न डालने का प्रयास न करते।
निसंदेह बिहार विधानसभा चुनाव देश में चुनाव सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी तथा चुनावों को मनगढ़ंत विमर्श से प्रभावित करने वाले राजनीतिक दलों के प्रति विश्वसनीयता को कम करेगी। ऐसा समझा जाना अपेक्षित है। (विनायक फीचर्स)

MP – चिकलोद गांव में गौवंश अभ्यारण्य विकसित किया जा रहा है

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MP News: मध्य प्रदेश के रायसेन के चिकलोद गांव में गौवंश अभ्यारण्य विकसित किया जा रहा है. बेसहारा गौवंशों की बढ़ती संख्या को देखते राज्य सरकार ने अभ्यारण्य बनाने का फैसला लिया है. इसे बनाने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई. यहां गौवंशों को रखने के साथ-साथ चिकित्सालय और क्वारंटीन करने समेत कई व्यवस्था होगी.

320 एकड़ में होगा विकसित
गौ अभ्यारण्य को 320 एकड़ में विकसित किया जाएगा. इसके लिए 15 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत कर दी गई और टेंडर भी जारी कर दिया गया है. इसके साथ ही पशुपालन विभाग ने ग्रामीण अभियांत्रकी सेवा को निर्देश दिया है कि एक साल के भीतर काम पूरा कर लिया जाए.

पशुपालन विभाग में डिप्टी डायरेक्टर डॉ. आरके शुक्ला ने बताया कि चिकलोद में अभ्यारण्य के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है. निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा. इसके साथ ही पठारी परियोजना को तेज गति पूरा किया जा रहा है. इसके बनने के बाद सड़क पर अवारा और बेसहारा गौवंशों को यहां रखा जाएगा.

6 हजार गौवंश रखने की व्यवस्था
चिकलोद अभ्यारण्य में 6 हजार गौवंशों को रखने की व्यवस्था होगी. यहां इनका हर तरीके से ध्यान रखा जाएगा. आधुनिक शेड, पानी की समुचित व्यवस्था, चारा भंडारण केंद्र, अस्पताल, क्वारंटीन जोन और सुरक्षा परिधि को विकसित किया जाएगा.

आगर-मालवा और रीवा में भी अभ्यारण्य
मध्य प्रदेश का पहला गौ अभ्यारण्य आगरा-मालवा जिले के सुसनेर में स्थापित किया गया. कामधेनु गौ अभ्यारण्य को साल 2023 से संचालित किया जा रहा है. इसके साथ ही रीवा में बसामन मामा में गौ अभ्यारण्य स्थापित किया गया है.

रेबीज से गाय की मौत के बाद मचा हड़कंप, दहशत में चरणामृत पीने वाले

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गोरखपुर। रेबीज संक्रमित गाय की मौत ने उरुवा ब्लाक के रामडीह गांव में दहशत फैला दी है। इस गाय के कच्चे दूध से बना चरणामृत गांव के लगभग 150 लोगों ने हाल ही में एक धार्मिक आयोजन में ग्रहण किया था। संक्रमण की पुष्टि और गाय की मौत के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है।

पिछले दो दिनों में 70 ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) उरुवा पहुंचकर एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) की पहली डोज लगवा चुके हैं। पीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. जे.पी. तिवारी ने बताया कि एहतियात के तौर पर कच्चा दूध पीने वाले सभी ग्रामीणों को वैक्सीन की तीन डोज दी जाएगी। पहली के तीन दिन बाद दूसरी और सात दिन बाद तीसरी डोज लगाई जाएगी।

ग्रामीणों के अनुसार, लगभग तीन महीने पहले एक कुत्ते ने सुशील गौड़ और धर्मेंद्र गौड़ की दो गायों को काट लिया था। सुशील ने तत्काल एआरवी की डोज दिलवा दी, पर जानकारी के अभाव में धर्मेंद्र ने ऐसा नहीं किया। कुछ दिन पहले गांव में राजीव गौड़ और सोनू विश्वकर्मा के घर में धार्मिक आयोजन के दौरान चरणामृत बनाने के लिए धर्मेंद्र की गाय का कच्चा दूध लिया गया। इसी से बना चरणामृत लगभग 150 ग्रामीणों ने ग्रहण किया था।

बुधवार को धर्मेंद्र की गाय की तबीयत बिगड़ी। परीक्षण में रेबीज संक्रमण की पुष्टि हुई। गुरुवार को गाय का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। वह कुत्ते की तरह भौंकने लगी, पानी देख उछलने लगी और लोगों को काटने के लिए दौड़ाने लगी। शनिवार रात उसकी मौत हो गई। संक्रमण की आशंका के चलते शुक्रवार को 20 और शनिवार को 50 ग्रामीण वैक्सीन लगवाने पहुंचे। अनिल गौड़, मेवाती देवी, ललिता, सोनू विश्वकर्मा, नीलम विश्वकर्मा, रितु, आंचल, नीलम गौड़, आराध्या, अरविंद ओझा, शकुंतला, रितिका सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने चरणामृत का सेवन किया था, इसलिए बेहद चिंतित हैं।सीएमओ डा. राजेश झा ने कहा कि मामला संज्ञान में है और विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है। रविवार तक यह स्पष्ट किया जाएगा कि गाय के कच्चे दूध से रेबीज संक्रमण की वास्तविक आशंका कितनी है। तब तक एहतियातन सभी प्रभावितों को वैक्सीन दी जा रही है।

सबसे छोटी गाय पुंगनूर का जशपुर में जन्म

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जशपुर: पुंगनूर गाय दुनिया की सबसे छोटी गायों में से एक है. इसकी औसत ऊंचाई लगभग 70 से 90 सेंटीमीटर तक होती है. पुंगनूर गाय का वजन 115 से 200 किलोग्राम के बीच होता है. ये गाय कद काठी में छोटी जरुर होती है लेकिन इसका दूध कई गुणों की खान है. मुख्य रुप से ये गाय आंध्र प्रदेश में मिलती है. लेकिन अब लोग बड़े पैमाने पर इसे दूसरे राज्यों में भी ले जाकर पाल रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार इस गाय की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चुके हैं. पीएम मोदी ने जब से पुंगनूर गाय की तस्वीर शेयर की है तब से इस गाय की डिमांड कई राज्यों में तेजी से बढ़ी है.

दुनिया की सबसे छोटी गाय पुंगनूर का जशपुर में जन्म: जशपुर जिले में पहली बार कृत्रिम गर्भाधान के जरिए पुंगनूर नस्ल की मादा वत्स (बछिया) का जन्म कराया गया है. पशु विज्ञान और पशु चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग इसे एक बड़ी सफलता के तौर पर देख रहे हैं. उनका मानना है कि इस सफलता के बाद पुंगनूर नस्ल की गायों को संरक्षण और संवर्धन दोनों तेजी से हो सकेगा.

पशु चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी सफलता: यह उपलब्धि पशु चिकित्सालय पत्थलगांव में पदस्थ सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के.के. पटेल के मार्गदर्शन और तकनीकी दक्षता से संभव हो सका. के के पटेल ने गोढ़ीकला तथा ग्राम करमीटिकरा–करूमहुआ क्षेत्र के किसान खगेश्वर यादव की देशी गाय में पुंगनूर नस्ल के सांड के हिमकृत सीमेन का उपयोग करते हुए 29 जनवरी 2025 को गाय को कृत्रिम गर्भाधान कराया. 284 दिनों के गर्भकाल के बाद 11 नवंबर 2025 को गाय ने एक पूरी तरह से स्वस्थ पुंगनूर नस्ल की बछिया को जन्म दिया. जशपुर के किसान और गौ पालक इसे लेकर काफी उत्साहित हैं. बड़ी संख्या में लोग पुंगनूर बछिया को देखने के लिए किसान के घर पहुंच रहे हैं.

दुनिया की सबसे छोटी गाय होने का मिला है तमगा: पुंगनूर गाय मूल रूप से आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के पुंगनूर क्षेत्र की देशज नस्ल है. इसे विश्व की सबसे छोटी गाय के रूप में मान्यता प्राप्त है. इसकी औसत ऊंचाई 70 से 90 सेंटीमीटर तथा वजन 110 से 200 किलोग्राम तक होता है. इसे पालने वाले किसान बताते हैं कि ये गाय कम चारा, कम रखरखाव और कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी आसानी से जीवित रहती है. पशु चिकित्सक और इसे पालने वाले किसान बताते हैं कि यह प्रतिदिन 1 से 2 लीटर तक दूध देती है, जबकि कुछ मादा अधिकतम 3 लीटर तक दूध देती है. पुंगनूर गाय के दूध में A2 प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा होती है. इसके साथ ही इसके दूध में एंटी-बैक्टीरियल तत्व और औषधीय गुण भरपूर मात्रा में होता है. इसकी वजह से इस गाय का दूध स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है. इस गाय के दूध में फैट की मात्रा भी काफी कम होती है.

मऊ में गो तस्करों की गाड़ी पलटी

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सौरभ राय, मऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गोवंश संवर्धन और उनके विकास के लिए हर संभव प्रयास करती दिख रही है। गौ संरक्षण के लिए कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, जिससे पशुपालकों की रुचि गौसेवा के प्रति बढ़े। गौ तस्करी पर लगाम लगाने के लिए भी उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार अभियान चलाकर गौ तस्करों पर नकेल कसने का प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जनपद मऊ में गौ तस्करी के लिए जा रही एक पिकअप गाड़ी मोड़ने के दौरान गहरी खाई में पलट गई। जिससे एक गोवंश की मौके पर ही मृत्यु हो गई। ग्रामीणों द्वारा शोर मचाने पर गौ तस्कर गाड़ी को छोड़कर मौके से फरार हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से गायों को सुरक्षित गौशाला पहुंचाया।

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आज सुबह करीब 5 बजे जनपद मऊ के मधुबन थाने के अहिरौली गांव के समीप गोवंश से भरी पिकअप अनियंत्रित होकर पलट गई। स्थानीय लोगों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हम लोग सड़क के किनारे भोर में टहल रहे थे। तभी अचानक से मधुबन की तरफ से आ रही एक पिकअप गाड़ी जो गोवंश से भरी थी, ड्राइवर द्वारा बैक करने के दौरान पलट गई। जिसके बाद ग्रामीणों ने जब शोर मचाना शुरू किया तो गो तस्कर गाड़ी को मौके पर छोड़कर फरार हो गया।

लोगों ने पुलिस को सूचना दी

स्थानियों ने पुलिस को मामले की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने ग्रामीणों की मदद से जेसीबी के द्वारा जब पिकअप को सही कराया तो मौके पर एक गोवंश मृत अवस्था में पाई गई। जबकि कुछ घायल गोवंश को पुलिस ने ग्रामीणों के मदद से स्थानीय गौशाले में पहुंचाया जहां पशु चिकित्सकों के द्वारा घायल गोवंश का उपचार किया गया।

डेन्यूब प्रॉपर्टीज़ ने दुबई में एक प्रीमियम बिज़नेस टावर ‘शाहरुखज़ बाय डेन्यूब’ किया लॉन्च

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मुंबई। एक अनोखे वैश्विक पहल के तहत, डेन्यूब प्रॉपर्टीज़ ने बॉलीवुड मेगास्टार शाहरुख खान के नाम पर एक प्रीमियम कमर्शियल टावर ‘शाहरुखज़ बाय डेन्यूब’ के लॉन्च की घोषणा की है। यह घोषणा
शाहरुख खान और डेन्यूब समूह के संस्थापक और अध्यक्ष रिज़वान साजन के बीच एक ऐतिहासिक सहयोग का प्रतीक है जिन्होंने अपनी-अपनी दुनिया में महत्वाकांक्षा और सफलता को नई परिभाषा दी है।

दुबई में शेख जायद रोड पर भव्य रूप से स्थापित, यह 55-मंजिला टावर दुबई के सबसे प्रतिष्ठित व्यावसायिक स्थलों में से एक बनने के लिए तैयार है – एक ऐसा स्थल जो साम्राज्य निर्माताओं, नवप्रवर्तकों और दूरदर्शी लोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह टावर शाहरुख खान और डेन्यूब दोनों के 33 वर्षों के उत्कृष्टता का जश्न मनाता है, जो सुगमता, पुनर्निर्माण और सफलता की निरंतर खोज के उनके साझा मूल्यों का प्रतीक है।

यह घोषणा मुंबई में हयात होटल में आयोजित एक इवेंट में शाहरुख खान और रिज़वान साजन की उपस्थिति में की गई। इस लॉन्च में सैकड़ों मेहमानों ने शिरकत की, जिनमें प्रमुख प्रभावशाली व्यक्ति, व्यावसायिक नेता, निवेशक, रचनाकार और मीडिया हस्तियाँ शामिल थीं, जिसने इसे साल के सबसे प्रसिद्ध रियल एस्टेट अनावरणों में से एक बना दिया।

लॉन्च के अवसर पर शाहरुख खान ने कहा, “दुबई में एक ऐतिहासिक स्थल का नाम मेरे नाम पर रखना मेरे लिए बेहद विनम्र और दिल को छू लेने वाला अनुभव है। दुबई हमेशा से मेरे लिए एक खास जगह रहा है – एक ऐसा शहर जो सपनों, महत्वाकांक्षाओं और संभावनाओं का जश्न मनाता है। शाहरुखज़ बाय डेन्यूब इस बात का प्रतीक है कि विश्वास और कड़ी मेहनत आपको कितनी दूर तक ले जा सकती है। मुझे डेन्यूब के साथ जुड़कर गर्व महसूस हो रहा है, एक ऐसा ब्रांड जो आकांक्षा और उत्कृष्टता की इसी भावना को दर्शाता है।”
डेन्यूब समूह के संस्थापक और अध्यक्ष रिज़वान साजन ने कहा कि
शाहरुख खान और मैंने 33 साल पहले एक साझा सपने के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी। शाहरुख खान ने सपनों को नियति में बदल दिया, एक ऐसा दर्शन जो डेन्यूब में हमारी यात्रा को दर्शाता है। ‘शाहरुखज़ बाय डेन्यूब’ विनम्र शुरुआत और अथक महत्वाकांक्षा की इन दो कहानियों को जोड़ता है—दृष्टि, मूल्य और बड़े सपने देखने की शक्ति के वैश्विक प्रतीक के रूप में उभरता है।

शाहरुखज़ बाय डेन्यूब 10 लाख वर्ग फुट से ज़्यादा के निर्मित क्षेत्र में फैला एक प्रतिष्ठित विकास है, जो विलासिता, नवाचार और स्टार पावर का मिश्रण प्रदान करता है। केवल 475,000 अमेरिकी डॉलर / 4.2 करोड़ रुपये से शुरू होने वाली कीमतों के साथ, यह ऐतिहासिक परियोजना दुबई में प्रीमियम रियल एस्टेट के लिए एक नया मानक स्थापित करती है, जिसमें विश्व स्तरीय डिज़ाइन को बॉलीवुड के बादशाह से प्रेरित एक पते के साथ जोड़ा गया है। यह प्रीमियम बिज़नेस टावर 40 से ज़्यादा विश्वस्तरीय सुविधाएँ प्रदान करेगा, जिनमें स्काई पूल, एयर टैक्सियों के लिए हेलीपैड, वैलेट सेवाएँ और विशिष्ट बिज़नेस लाउंज शामिल हैं – ये सभी सुविधाएँ उत्पादकता और प्रतिष्ठा को नई परिभाषा देने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। इसकी रणनीतिक लोकेशन बुर्ज खलीफ़ा और दुबई हवाई अड्डे जैसे दुबई के सबसे प्रतिष्ठित स्थलों से बेजोड़ निकटता प्रदान करती है।

कंटेनर ने तीन गाय को रौंदा

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संवाद न्यूज एजेंसी

सेलाकुई। देहरादून-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस बैरियर के पास तेज रफ्तार कंटेनर पेड़ से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि इसकी चपेट में आने से एक गाय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो गाय घायल हो गईं। गो रक्षक दल के कार्यकर्ताओं ने घायल गायों को गोशाला पहुंचाया। पुलिस ने कंटेनर को थाने में खड़ा करवा दिया है।
घटना बृहस्पतिवार देर रात 12:35 बजे ही है। पुलिस बैरियर के पास कंटेनर अनियंत्रित होकर पीपल के पेड़ से टकरा गया। पेड़ के पास तीन गाय खड़ी थी। वह भी वाहन की चपेट में आ गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पेड़ से मोटी-मोटी टहनियां नीचे गिर गई। गनीमत यह रही कोई व्यक्ति टहनियों की चपेट में नहीं आया। सूचना पर गो रक्षक दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। एक गाय की मौत हो चुकी थी और दो गाय बुरी तरह से घायल थीं। टीम ने पहले घायल गायों को उपचार के लिए गोशाला भिजवाया। उसके बाद मृत गाय के शव को जेसीबी से सड़क से हटाया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कंटेनर को अपने कब्जे में ले लिया। गो रक्षक दल के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर गिरी टहनियां भी हटाईं। थाना प्रभारी पीडी भट्ट ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ की तैयारी तेज

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नासिक: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को कहा कि आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है जिससे नासिक एक प्रमुख पर्यटन एवं तीर्थस्थल के रूप में स्थापित होगा। फडणवीस ने 5,757 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। फडणवीस ने कई परियोजनाओं का भूमिपूजन करने के बाद कहा कि ये सभी कार्य पारदर्शी तरीके से किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 12 साल में एक बार आयोजित होने वाले इस पर्व के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी।

कब से कब तक चलेगा यह आयोजन?

भूमिपूजन कार्यक्रम के बाद एक रैली में सीएम फडणवीस ने कहा, ‘‘हमने योजना बनाई है कि ये सभी कार्य कम से कम 25 वर्षों तक टिके रहें और नासिक तथा त्र्यंबकेश्वर की सूरत बदल दें। इससे नासिक एक प्रमुख पर्यटन और तीर्थस्थल बन जाएगा। राज्य सरकार इन कार्यों के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए अच्छा मुआवजा देगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह कुंभ विशेष है और यह 75 साल बाद ‘त्रिखंड योग’ के दौरान पड़ रहा है। इसलिए, यह 28 महीने तक जारी रहेगा। यह 31 अक्टूबर 2026 को शुरू होगा और 24 जुलाई 2028 तक जारी रहेगा। दुनिया भर से लोग प्रयागराज कुंभ में पहुंचे थे और नासिक कुंभ भी इस परंपरा का एक हिस्सा है।’’

20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले कार्यों को मंजूरी

मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों ने 20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले कार्यों को मंजूरी दी है जिनमें से 5,757 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का ‘भूमिपूजन’ आज किया गया। फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और कुंभ मेले के प्रभारी राज्य मंत्री गिरीश महाजन तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कहा कि राज्य में सबसे बड़े जिला परिषद भवन का भी उद्घाटन यहां किया गया है।

शिंदे ने क्या कहा?

सीएम ने पंचवटी में रामकुंड क्षेत्र का भी दौरा किया और प्रस्तावित 99.14 करोड़ रुपये के रामकाल पथ के बारे में जानकारी ली। इस अवसर पर शिंदे ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेला सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं होगा, बल्कि यह भारत को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा। बाद में फडणवीस और शिंदे ने भगवान कालाराम मंदिर में प्रार्थना की। इसके अलावा एक अन्य घटनाक्रम में, पूर्व विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिरीष कोटवाल तथा अन्य लोग राज्य के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गए। (भाषा इनपुट्स के साथ)