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दृष्टिकोण विरोध एस.आइ.आर.का या चुनाव सुधार की कवायद का

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(डॉ. सुधाकर आशावादी-विनायक फीचर्स)

लम्बे समय से देश में फर्जी मतदान का ढिंढोरा पीटकर अनेक राजनीतिक दल कभी अपनी हार का कारण ई.वी.एम. को बताते रहे, कभी कार्यपालिका के प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों को मतदान में गड़बड़ी का आरोपी प्रचारित करते रहे। मतदाता सूची में गड़बड़ के आरोपों पर ध्यान देते हुए भारत में चुनाव सुधार की प्रक्रिया हेतु विशेष गहन पुनरीक्षण हेतु चुनाव आयोग ने कमर कसी, जिसके उपरांत बिहार में चुनाव हुए। उसके बाद देश के अनेक राज्यों में एस.आइ.आर. के माध्यम से मतदाता सूची को अद्यतन करने की कवायद चल रही है।
एक व्यक्ति एक मतदान अधिकार की स्पष्ट नीति के तहत एक से अधिक स्थानों पर मतदाता सूची में नाम होना या मृतक अथवा पलायन कर गए मतदाता का नाम संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची से हटाकर मतदाता सूची में प्रामाणिक परिवर्तन करना विशेष गहन पुनरीक्षण का प्रमुख उद्देश्य है।
विडंबना यह है कि जो लोग मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी का आरोप लगाकर चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रहे थे, वहीं मतदाता सूची को अद्यतन करने हेतु की जा रही एस.आइ.आर. का विरोध करके चुनाव आयोग के विरुद्ध अराजक प्रदर्शन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रथम दृष्टया यही प्रतीत होता है, कि देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग के निर्देशन में चल रही एस.आइ.आर. में जुटे कर्मचारियों की निष्ठा और कर्तव्यपरायणता को संकीर्ण सियासत अपमानित करके देश में अराजकता का वातावरण बनाना चाहती है तथा आम आदमी को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। वह ईमानदारी से चुनाव सुधार प्रक्रिया के पक्ष में नहीं है। यदि चुनाव सुधार के पक्ष में होती, तो अनेक क्षेत्रीय राजनीतिक दल पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश तथा अन्य प्रदेशों में एस.आइ.आर. का विरोध न करते, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से मतदाताओं की पहचान में सहयोग करते।
इतिहास साक्षी है, कि देश के दूरदराज के क्षेत्रों में बरसों तक देश में मतपत्रों के माध्यम से चुनाव कराए जाने वाली दीर्घ प्रक्रिया में आम आदमी की मतदान स्थल तक पहुँच नहीं हो पाती थी। गांवों के दबंग जातीय क्षत्रप अपनी मनमानी किया करते थे। बूथ कैप्चरिंग, मतपत्र छीनने और मतपेटियां चोरी करके चुनाव परिणामों को प्रभावित किया जाता था। मतगणना स्थल पर थकाऊ प्रक्रिया में दिन रात मतपत्रों की गिनती करके चुनाव परिणाम जारी होते थे, जिनमें गड़बड़ी की आशंका रहती थी।
अब मतदान पर्यवेक्षकों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में चुनाव कर्मियों को मतदान और मतगणना के लिए विशेष प्रशिक्षण देकर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराई जाती है। इस प्रक्रिया में जुड़े कर्मियों के अथक प्रयासों से सटीक चुनाव परिणाम आते हैं, किन्तु मतदाताओं द्वारा नकारे जाने से आहत अराजक तत्व अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़कर अपनी रातों की नींद और दिन का चैन गंवाकर चुनाव में ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों की निष्ठा और कर्तव्यपरायणता पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा करने में पीछे नहीं रहते। मतदाता सूचियों में यदि गड़बड़ है तथा एक व्यक्ति का एक से अधिक मतदाता सूची में नाम है, तो इसके लिए वह मतदाता दोषी क्यों नहीं है, जो एक मत के स्थान पर अधिक मत देने का दुस्साहस करता है। आम मतदाता तो ऐसा कर नहीं कर सकता। समझा जा सकता है, कि किसी राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति ही ऐसा दुस्साहस करने की हिम्मत जुटा सकता है। बहरहाल ऐसा प्रतीत होता है, कि एस.आइ.आर. का विरोध वही कर रहे हैं, जो निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के पक्षधर नहीं हैं। यहाँ यह भी समझना आवश्यक है कि मतदाता सूचियों का परीक्षण कर रहे बी.एल.ओ. को भी संकीर्ण मनोवृत्ति धारी संदेह के घेरे में खड़ा करने का प्रयास करने से परहेज नहीं कर रहे हैं। उनके आरोपों के अनुसार बी.एल.ओ. विपक्षी दलों के मतदाताओं के वोट काटता है। समझ नहीं आता कि इस प्रकार की सोच सियासी तत्व कैसे रख सकते हैं ? चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्राथमिक कर्मचारी से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम बिना किसी जांच पड़ताल के कैसे काट सकते हैं ? क्या प्राथमिक कर्मचारी मतदाता सूची का परीक्षण करने से पहले हर मतदाता से यह पूछता है, कि वह किसी राजनीतिक दल का समर्थक है ? क्या मतदान के दिन कोई मतदान कर्मी किसी खास दल के समर्थक मतदाताओं से पूछता है, कि वे किस राजनीतिक दल के पक्ष में मतदान करने आए हैं।
यदि नहीं तो वोट चोरी करने और मतदाता सूचियों के परीक्षण हेतु की जाने वाली एस.आइ.आर. प्रक्रिया पर प्रश्न उठाने का औचित्य क्या है ? लगता है कि अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके राजनीतिक दल अपनी नैतिक हार स्वीकार कर चुके हैं तथा जनता के बीच में अपना अस्तित्व सुरक्षित न पाने के कारण देश में अराजकता का वातावरण बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि ऐसा न होता, तो वे चुनाव सुधार की प्रक्रिया में विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एस.आइ.आर. का विरोध करने की जगह चुनाव प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने हेतु चुनाव सुधारों का समर्थन करते। (विनायक फीचर्स)

मॉडल एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा ने ब्रेस्ट इम्प्लांट हटाने के फैसले पर खुलकर बात की और युवतियों से की खास अपील

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मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस और मॉडल शर्लिन चोपड़ा एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उनका साहसिक फैसला—अपने 825 ग्राम वजनी सिलिकॉन ब्रेस्ट इम्प्लांट को हटाना। इसके लिए उन्होंने मुंबई के कंट्री क्लब में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखी।

शर्लिन ने बताया कि इम्प्लांट्स की वजह से उन्हें लंबे समय से पीठ, सीने, गर्दन और कंधों में लगातार दर्द हो रहा था। उन्होंने कहा, “825 ग्राम सिलिकॉन लेकर चलना मेरे लिए बेहद मुश्किल हो गया था। ऐसा लगता था जैसे सीने पर कोई पहाड़ रखा हो। यह कदम बोल्ड था, लेकिन ज़रूरी भी।”
कई डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद मैंने इम्प्लांट हटाने का निर्णय लिया।

शर्लिन चोपड़ा ने आगे बताया कि अब यह भारी बोझ मेरे शरीर से उतर चुका है। हर इम्प्लांट 825 ग्राम का था। उन्हें हटाने के बाद मैं खुद को बेहद हल्का और आज़ाद महसूस कर रही हूँ। सबसे राहत की बात यह है कि अब मेरे शरीर में कुछ भी कृत्रिम नहीं है—सब कुछ नैचुरल है और मेरा अपना है। मैं ईश्वर और अपने प्रशंसकों की आभारी हूँ।”

शर्लिन चोपड़ा ने खास तौर पर युवा लड़कियों को संदेश देते हुए कहा कि दूसरों के कहने, सोशल मीडिया या समाज के दबाव में आकर अपने शरीर के साथ छेड़छाड़ न करें। किसी भी चीज़ का निर्णय जल्दबाजी में न लें। फायदे के साथ नुकसान को भी समझें, दुष्प्रभावों के बारे में जानें और अपने परिवार, दोस्तों व मेडिकल एक्सपर्ट्स से सलाह लिए बिना कोई कदम न उठाएँ। भीड़ का हिस्सा मत बनो—अपनी वास्तविकता की रक्षा करो।”

उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ खूबसूरती का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा सर्जिकल प्रोसेस है जिसमें जोखिम शामिल होते हैं।
“मैं विज्ञान के खिलाफ नहीं हूँ, पर केवल किसी और को देखकर कुछ भी मत कर लो। सोशल मीडिया की चमक पर आँख बंद करके भरोसा न करें। आपकी नैचुरल खूबसूरती ही आपकी सच्ची ताकत है।”

यह उल्लेखनीय है कि ब्रेस्ट इम्प्लांट एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें सिलिकॉन का उपयोग कर स्तनों के आकार और शेप को बढ़ाया जाता है।

शर्लिन के फैंस भी उनके इस फैसले की सराहना कर रहे हैं और कह रहे हैं, “आखिरकार आपको एहसास हुआ कि आपको किसी बदलाव की ज़रूरत नहीं थी। आप जैसी थीं, वैसी ही खूबसूरत हैं।

गौ गोबर से हरित ऊर्जा (Green Energy): भारत का सतत भविष्य का ईंधन

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भारत में प्रतिवर्ष लगभग ५०० मिलियन टन गौ गोबर उत्पन्न होता है। इसे यदि कूड़ा मानकर फेंक दिया जाए तो यह मीथेन गैस छोड़कर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है, लेकिन यदि इसका वैज्ञानिक उपयोग किया जाए तो यही गोबर भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का सबसे बड़ा स्रोत बन सकता है।१. बायोगैस (Bio-Gas) – घरेलू हरित ईंधन

  • एक औसत देसी गाय प्रतिदिन १०-१२ किलो गोबर देती है।
  • २ किलो गोबर + २ किलो पानी से बने घोल से एक १ घन मीटर बायोगैस प्लांट में १ घन मीटर बायोगैस बनती है।
  • १ घन मीटर बायोगैस = ०.४५-०.५ किलो LPG के बराबर।
  • एक ४ जनों का परिवार ४-५ गायों के गोबर से अपना पूरा रसोई गैस मुफ्त में चला सकता है।

आज देश में ५० लाख से अधिक परिवार स्तर के बायोगैस प्लांट चल रहे हैं। नए मॉडल (जैसे फ्लेक्सी बायोगैस, SINTEC, KVIC फ्लोटिंग ड्रम) इतने आसान हो गए हैं कि छत पर भी लगाए जा सकते हैं।२. CBG (Compressed Bio-Gas) – पेट्रोल-डीज़ल का देसी विकल्प

  • बायोगैस को शुद्ध करके ९५-९८% मीथेन बनाई जाती है, इसे CBG कहते हैं।
  • १ टन गोबर से लगभग ४०-५० किलो CBG बनती है।
  • १ किलो CBG = १.२५ लीटर पेट्रोल या १.४ लीटर डीज़ल के बराबर ऊर्जा देती है।

सरकार का SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) योजना के अंतर्गत ५००० CBG प्लांट लगाने का लक्ष्य है।

  • एक ५ टन प्रतिदिन क्षमता वाला CBG प्लांट प्रतिदिन २ टन जैविक खाद भी देता है।
  • अभी तक १०० से अधिक CBG प्लांट चालू हो चुके हैं (Reliance, Indian Oil, Adani, HPCL आदि लगा रहे हैं)।
  • २०३० तक १५ मिलियन टन CBG उत्पादन का लक्ष्य = १५% प्राकृतिक गैस की जगह ले सकता है।

३. बिजली उत्पादन (Bio-CNG से Electricity)

  • १०००% गोबर से चलने वाले बायोगैस प्लांट से बिजली भी बनाई जा सकती है।
  • १ क्यूबिक मीटर बायोगैस से २-२.५ यूनिट बिजली बनती है।
  • महाराष्ट्र के बारामती में १० मेगावाट, राजस्थान में ५ मेगावाट क्षमता के गोबर आधारित पावर प्लांट सफलतापूर्वक चल रहे हैं।

४. जैविक खाद – बोनस लाभबायोगैस प्लांट का बचा हुआ स्लरी रासायनिक खाद से ३०-४०% अधिक उपज देने वाली बेहतरीन जैविक खाद होती है। इससे किसान की खाद का खर्चा भी बच जाता है।५. पर्यावरणीय लाभ

  • १ टन गोबर से बायोगैस बनने पर ३-४ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन रोकता है।
  • पराली जलाने की समस्या भी कम होती है क्योंकि किसान पराली की जगह गोबर बेचकर कमाई करते हैं।
  • मीथेन (जो CO₂ से २५ गुना अधिक ग्लोबल वार्मिंग करती है) को नियंत्रित किया जाता है।

प्रमुख सफल उदाहरण

  1. पुणे के उरुली कांचन में पंडित साठे जी का ३५ साल पुराना बायोगैस प्लांट आज भी चल रहा है।
  2. इंदौर नगर निगम रोज़ ५५० टन गोबर-कचरे से CBG बना रहा है और पूरे शहर की सफाई गाड़ियाँ CBG से चलती हैं।
  3. गुजरात का बनासकांठा डेयरी रोज़ ४० टन गोबर से CBG बना रही है।
  4. हरियाणा के करनाल में गौसंवर्धन केंद्र १०० टन गोबर रोज़ प्रोसेस करता है।

निष्कर्षगौ गोबर कोई अपशिष्ट नहीं, अपार ऊर्जा का खजाना है। यदि भारत अपने ३० करोड़ पशुओं के गोबर का केवल ५०% का भी उपयोग बायोगैस/CBG में कर ले तो:

  • ५० मिलियन टन जैविक खाद
  • २० मिलियन टन CBG (लगभग २५ अरब लीटर पेट्रोल के बराबर)
    -डाइज़ल)
  • १० करोड़ परिवारों को मुफ्त रसोई गैस
  • १०० गीगावाट बिजली क्षमता

यह केवल ऊर्जा क्रांति नहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वच्छ भारत और जलवायु परिवर्तन से लड़ाई का त्रिवेणी संगम है।
गौ गोबर सचमुच भारत का “ग्रीन गोल्ड” है।
ॐ गौमातरूपेण संरक्षितं विश्वम्।
जय गौमाता! जय हरित ऊर्जा!

गोबर और गौमूत्र से बने उत्पाद

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गोबर और गौमूत्र से भारत में सैकड़ों पारंपरिक एवं आधुनिक उत्पाद बनाए जाते हैं। ये उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक, पर्यावरण-अनुकूल और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। नीचे कुछ प्रमुख उत्पादों की सूची दी गई है:गोबर से बने मुख्य उत्पाद

  1. गोबर की खाद (वर्मी कम्पोस्ट, सेंद्रिय खाद) – रासायनिक उर्वरक का सबसे अच्छा विकल्प
  2. गोबर गैस (बायोगैस) – खाना पकाने और बिजली बनाने के लिए
  3. धूपबत्ती, अगरबत्ती एवं हवन सामग्री
  4. गोबर के उपले – ईंधन के रूप में (ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बहुत उपयोग)
  5. गोबर से बने दीवारों का प्लास्टर – प्राकृतिक इन्सुलेशन, कीड़े-मकोड़े नहीं लगते
  6. हस्तशिल्प उत्पाद – फूलदान, गमले, खिलौने, दीये, मूर्तियां
  7. गोबर के बोर्ड – लकड़ी की जगह फर्नीचर की जगह (MDF जैसा)
  8. पेस्ट कंट्रोल स्प्रे – फसलों में कीटनाशक के रूप में
  9. फ्लोर क्लीनर (फिनाइल का विकल्प)
  10. गोबर से बनी ईंटें – मकान बनाने में उपयोग

गौमूत्र से बने मुख्य उत्पाद

  1. अर्क (डिस्टिल्ड गौमूत्र) – पंचगव्य चिकित्सा में मुख्य औषधि
  2. फिनाइल एवं टॉयलेट क्लीनर – 100% प्राकृतिक, बदबू मारने में बहुत प्रभावी
  3. साबुन, फेसवॉश, शैम्पू, बॉडी लोशन
  4. दांत का मंजन (टूथ पाउडर)
  5. कीटनाशक एवं फफूंदनाशक – नीम + गौमूत्र का स्प्रे किसान बहुत इस्तेमाल करते हैं
  6. पंचगव्य औषधियां – कैंसर, डायबिटीज़, त्वचा रोग, इम्यूनिटी आदि के लिए सैकड़ों फॉर्मूलेशन
  7. हेयर ऑयल एवं मेहंदी
  8. गौमूत्र आधारित हैंड सैनिटाइज़र

गोबर + गौमूत्र दोनों से मिलाकर बने उत्पाद (पंचगव्य)

  1. घी, दही, दूध, मट्ठा + गोबर-गौमूत्र मिलाकर पंचगव्य घृत
  2. पंचगव्य साबुन एवं बाम
  3. नाक की दवा (नस्य)
  4. त्वचा रोगों की क्रीम एवं मलहम

प्रमुख ब्रांड/संस्थान जो ये उत्पाद बनाते हैं

  • पतंजलि (पतंजलि आयुर्वेद)
  • गौक्रांति
  • गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र (देवलाना, नागपुर)
  • कामधेनु गौशाला एवं पंचगव्य चिकित्सा केंद्र
  • गोपालन (कर्नाटक सरकार)
  • श्री गौरी गौशाला (राजस्थान)
  • गौमाता उत्पाद (हरियाणा)
  • वेदवाणी, गौअंकुर, गौमय आदि कई छोटे-बड़े ब्रांड

ये उत्पाद अब ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं – Amazon, Flipkart, Jiomart के अलावा कई वेबसाइट्स जैसे gaukranti.org, gavyamart.com, panchgavya.com आदि पर मिल जाते हैं।

श्रृंगेरी जगद्गुरू ने गौ-रक्षा को बताया “शाश्वत कर्तव्य”

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राजधानी दिल्ली इनदिनों सनातन आस्था और भक्ति के भाव में डूबी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी में चल रही ऐतिहासिक धर्म विजय यात्रा 2025 के अंतर्गत श्रृंगेरी शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखरा भारती महास्वामीजी ने संवैधानिक पदाधिकारियों, वरिष्ठ नौकरशाहों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को संबोधित किया। अपने उद्बोधन में जगद्गुरू ने गौ संरक्षण को मात्र परंपरा नहीं, बल्कि मानवता के उत्थान का माध्यम और सनातन धर्म का अविचल हिस्सा बताया।

माँ और गौ माता का संबंध

जगद्गुरु ने आदि शंकराचार्य की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि माता शब्द गौ के लिए इसलिए प्रयुक्त होता है क्योंकि वह पोषण का सर्वोच्च प्रतीक है। देवी देवताओं और गौ को ही माता के रूप में संबोधित किया जाता है, जो इस विशेष संबंध को दर्शाता है। जगद्गुरू ने हजारों वर्षों से कृषि और मानव जीवन में पशुधन के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि की नींव हमेशा से पशुधन पर टिकी रही है।

कृषि और मानव अस्तित्व की रीढ़
शंकराचार्य जी ने मवेशियों के ऐतिहासिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हज़ारों वर्षों से वे कृषि और मानव अस्तित्व की रीढ़ रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि मानवता को मिलने वाला पोषण मुख्य रूप से मवेशियों से ही आता रहा है। उन्होंने यह भी आगाह किया कि पिछले पाँच दशकों में खाद्य उत्पादन और कृषि में देखे गए बदलावों ने मानव अस्तित्व को प्रभावित किया है। आचार्य ने मनुष्यों से इन जानवरों के प्रति उनके नैतिक दायित्व की ओर लौटने का आग्रह किया।

आईसीजी ने महाराष्ट्र और गोवा के तटीय इलाकों में किया दो दिन का तटीय सुरक्षा अभ्यास

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भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) ने 19-20 नवंबर, 2025 तक महाराष्ट्र और गोवा के समुद्र तट पर बड़ी कोस्टल सिक्योरिटी एक्सरसाइज सागर कवच-02/25 को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसमें एजेंसियों के बीच अच्छा तालमेल, मजबूत ऑपरेशनल तैयारी और समुद्री सुरक्षा की मुश्किलों से निपटने की मजबूत क्षमता दिखाई गई, जिसमें राष्ट्र-विरोधी तत्वों (एएनई) द्वारा जरूरी तटीय संपदाओं को निशाना बनाने के खतरे भी शामिल थे। दो दिन की इस एक्सरसाइज में 6,000 से ज्यादा कर्मचारियों, 115 से ज्यादा समुद्री और हवाई एसेट्स और कई तरह की केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, बंदरगाहों और कोस्टल अथॉरिटीज ने हिस्सा लिया।

इस एक्सरसाइज का मकसद तटीय सुरक्षा इमरजेंसी से निपटने, जरूरी तटीय जगहों पर हमलों को रोकने और मल्टी-लेयर्ड तटीय सुरक्षा नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए हिस्सा लेने वाली सभी एजेंसियों की तैयारी का अंदाजा लगाना था। इसमें तटीय और सामुद्रिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार केंद्रीय और राज्य हितधारकों स्टेकहोल्डर्स के बीच तालमेल बढ़ाने की भी कोशिश की गई। भारतीय नौसेना और आईसीजी शिप, आईसीजी डोर्नियर एयरक्राफ्ट, चेतक हेलीकॉप्टर और एयर कुशन व्हीकल (एसीवी) समेत कई तरह के मैरीटाइम और एरियल एसेट्स को एक जगह लाया गया। सभी ऑपरेशनल डोमेन में आसानी से समन्वय सुनिश्चित करने के लिए सामुद्रिक पुलिस बोट्स, सीमा शुल्क और सीआईएसएफ क्राफ्ट और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (एमएमबी) के संसाधन भी तैनात किए गए, साथ ही पुलिस और फिशरीज विभाग की बोट्स भी लगाई गईं।

इस एक्सरसाइज से सुरक्षा, इंटेलिजेंस और बंदरगाह प्रबंधन एजेंसियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, कम्युनिकेशन नेटवर्क और कोऑर्डिनेशन में काफी बढ़ोतरी हुई। 19 केंद्रीय और 13 राज्य एजेंसियों के बड़े समूह के साथ-साथ एक बड़े बंदरगाह, 21 छोटे बंदरगाह और जिला स्तरीय तटीज अथॉरिटीज की भागीदारी ने समुद्र और किनारे दोनों पर रिस्पॉन्स की पूरी कवरेज सुनिश्चित की।

श्रमिकों को नई श्रम संहिताओं के देश भर में लागू

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने देश के सभी श्रमिकों को नई श्रम संहिताओं के देश भर में लागू किए जाने की हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं ।

श्री अमित शाह ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि देश के सभी श्रमिक जनों को नई श्रम संहिताओं के देश भर में लागू किए जाने की हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में बनीं ये संहिताएँ श्रम कानूनों के इतिहास का सबसे बड़ा रिफॉर्म है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, समाजिक सुरक्षा, महिला श्रमिकों को समान अवसर की गारंटी तथा गिग और असंगठित श्रमिकों को कानूनी पहचान देने वाली ये संहिताएँ श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाएँगी। साथ ही, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को भी गति देकर दुनिया के श्रम कानूनों के लिए रोल मॉडल बनेंगी। इन ऐतिहासिक संहिताओं के लिए मोदी जी का आभार।

हरित सागर और अमृत मिशन के अनुरूप, डेटा-आधारित जल प्रबंधन में क्रांति लाने की दिशा में कदम

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भारत को मिला एआई-पावर्ड जलाशय प्रबंधन का नया समाधान – क्लियरबोट का स्मार्ट रोबोट बेड़ा

मुंबई। भारत की सतत और तकनीक आधारित जलाशय पुर्नजीवन निश्चय को मजबूत करते हुए, बेंगलुरु स्थित क्लियर रोबोटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 25 एआई-संचालित स्वायत्त “क्लियरबोट्स” का पहला बेड़ा लॉन्च किया है, जो भारत के हरित सागर और अटल मिशन फॉर रीजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) के उद्देश्यों के अनुरूप है।

ये उन्नत इलेक्ट्रिक, मानव रहित समुद्री रोबोट जल निकायों के प्रबंधन में परिवर्तन लाने के लिए बनाए गए हैं, जो पारंपरिक प्रतिक्रियात्मक सफाई तरीकों से आगे बढ़ते हुए, डेटा-आधारित पर्यावरणीय निगरानी और सुधार को सक्षम करते हैं, जिससे यह कार्य तीन गुना अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन जाता है।

वर्तमान में कई प्रमुख सरकारी परियोजनाओं में लागू किए गए ये अगली पीढ़ी के क्लियरबोट्स समुद्री कार्यों की सुरक्षा, दक्षता और बुद्धिमत्ता को बढ़ा रहे हैं। ये तैरता कचरा, जलकुंभी और अवांछित खरपतवार हटाने के साथ-साथ बाथिमेट्रिक सर्वे, ड्राफ्ट सर्वे और रियल-टाइम पानी की गुणवत्ता जांच भी करते हैं—वह भी बिना किसी निकास के और बिना मानव जीवन को जोखिम में डाले।

भारत के कई सरकारी निकाय—जैसे कि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (मुंबई), बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी), गया नगर निगम, अडूर नगरपालिका और मेघालय सरकार के तहत काम करने वाली मेघालयन एज लिमिटेड —ने सतत जलमार्ग प्रबंधन के लिए क्लियर रोबोटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड. के साथ हाथ मिलाया है। मुंबई क्षेत्र में कंपनी राम एनवायरो एंड इन्फ्रा एलएलपी के साथ साझेदारी करके व्यापक समर्थन प्रदान करती है।

मुंबई के जेएनपीए में क्लियरबोट क्लास 3 ने अक्टूबर 2024 से 6.5 टन से अधिक कचरा हटाया है, जिससे भारत के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में समुद्री कचरा प्रबंधन में सुधार हुआ है।

बीएमसी ने गेटवे ऑफ इंडिया और बधवार पार्क, कफ परेड में क्लास 3 की दो इकाइयाँ तैनात की हैं, जो समुद्री तटों को साफ और टिकाऊ बनाए रखने में मदद कर रही हैं।

ओएनजीसी ने क्लास 2 क्लियरबोट खरीदा और बाद में इसे ठाणे नगर निगम को दान किया, जहाँ यह शहर के कचरा प्रबंधन अभियान के तहत नियमित झील सफाई में उपयोग किया जा रहा है।

बिहार के गया में, पितृपक्ष मेले के दौरान एक क्लियरबोट क्लास 2 ने सिर्फ 15 दिनों में 5.5 टन कचरा हटाया, जिससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ध्यान आकर्षित हुआ और उन्होंने स्थल पर पहुँचकर इस पोत को कार्य करते हुए देखा।

दक्षिण भारत में, अडूर (केरल) में अमृत मिशन के तहत क्लियरबोट एलीगेटर ने 44 दिनों में 14,164 वर्गमीटर क्षेत्र में फैली अफ्रीकी खरपतवारों को हटाया, जो प्रतिदिन लगभग 500 वर्गमीटर औसत है।

मेघालय में उमियम झील पर, मेघालयन एज लिमिटेड और स्मार्ट विलेज मूवमेंट (एसवीएम) के तहत, क्लियरबोट क्लास 3 ने मई 2024 से अब तक 44 टन से अधिक कचरा हटाया है, जिससे पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और पर्यटन की संभावनाएँ बढ़ी हैं।

क्लियरबोट का इलेक्ट्रिक, शून्य-उत्सर्जन बेड़ा तीन प्रकार के पोतों से बना है—एलीगेटर, क्लास 2 और क्लास 3—हर मॉडल को विभिन्न प्रकार के सफाई और सर्वेक्षण कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

क्लियरबोट एलीगेटर, जो बेड़े का सबसे बड़ा मॉडल है, प्रतिदिन 500 वर्गमीटर तक पानी साफ कर सकता है और एक बार में लगभग एक टन जलकुंभी और खरपतवार इकट्ठा कर सकता है।

कॉम्पैक्ट क्लास 2 पोत संकरी और उथली जलधाराओं के लिए बनाया गया है और एक मिशन में 150 किलोग्राम तक भार ले जा सकता है। क्लास 3 मॉडल अधिकतम परिचालन सीमा के लिए तैयार किया गया है और अपनी मजबूत बनावट के कारण यह खुले जल में, तेज धाराओं में और विभिन्न मौसम परिस्थितियों में प्रभावी रूप से कार्य कर सकता है।

क्लास 2 और क्लास 3 दोनों आठ घंटे तक संचालित हो सकते हैं और इनमें स्वायत्त नेविगेशन, ऑन-बोर्ड कैमरे, रियल-टाइम मैपिंग और अवरोध पहचान प्रणाली शामिल है, जो मिशनों को सुरक्षित और प्रभावी बनाती है।

सभी क्लियरबोट पोत पूरी तरह इलेक्ट्रिक हैं और विभिन्न प्रकार के समुद्री सर्वेक्षणों का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। एआई-आधारित मिशन योजना और रिपोर्टिंग प्रणाली उन्हें उपयोग में सरल बनाती है और इन्हें मामूली अभ्यास के साथ ही नगरपालिका और बंदरगाह प्राधिकरणों द्वारा अपनाया जा सकता है।

एकीकृत प्रणाली उच्च-रिज़ॉल्यूशन पानी के नीचे का डेटा एकत्र करती है, जो प्रभावी बंदरगाह और जल प्रबंधन के लिए आवश्यक है—जैसे नौवहन चार्ट अपडेट करना, समुद्र तल में बदलाव की निगरानी करना और पानी के नीचे की संरचनाओं का निरीक्षण करना। इसके अलावा, ऑन-बोर्ड सेंसर प्रदूषक, घुलित ऑक्सीजन, सैलिनिटी, तापमान और pH जैसे प्रमुख पानी की गुणवत्ता संकेतकों को निरंतर मापते हैं। यह प्रदूषण की शुरुआती पहचान में मदद करता है और डेटा-आधारित जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देता है। क्लियरबोट की पारदर्शी और बुद्धिमान प्रदूषण निगरानी प्रणाली फिलीपींस में भी पायलट आधार पर लागू की जा रही है, जो दुनिया भर में स्वच्छ और स्मार्ट समुद्री संचालन को आगे बढ़ाने की इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

क्लियरबोट के पोत उन्नत पर्यावरणीय सेंसरों और एकीकृत ऑटोनॉमस मरीन सर्वे सिस्टम (एएमएसएस) से लैस हैं, जो उन्हें कचरा संग्रह से आगे की भूमिकाओं के लिए सक्षम बनाते हैं। सेंसर लगातार पानी की गुणवत्ता जैसे प्रदूषक, घुलित ऑक्सीजन, लवणता, तापमान और pH स्तर की निगरानी करते हैं, जिससे प्रदूषण की शुरुआती पहचान और सूचित जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है। वहीं, एएमएसएस उच्च-रिज़ॉल्यूशन पानी के नीचे का डेटा कैप्चर करता है, ताकि नौवहन चार्ट अपडेट किए जा सकें और समुद्र तल में बदलाव की निगरानी की जा सके, जिससे सुरक्षित नौवहन और अधिक कुशल ड्रेजिंग संचालन सुनिश्चित होता है।

क्लियर रोबोटिक्स के सीईओ सिद्धांत गुप्ता ने कहा, “जेएनपीए, बीएमसी और अन्य प्राधिकरणों के साथ हमारी साझेदारियाँ सिर्फ सफाई संचालन से आगे बढ़कर भारत में समुद्री शासन को नई दिशा देने का प्रयास हैं। 25 क्लियरबोट्स के पहले बेड़े को अपनाया जाना यह साबित करता है कि भारत को अपने महत्वपूर्ण जलमार्गों की सुरक्षा के लिए स्वदेशी, स्केलेबल एआई समाधानों की अत्यधिक आवश्यकता है। इस सहयोग के माध्यम से, हम देश के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक नया राष्ट्रीय मानदंड स्थापित कर रहे हैं।”

क्लियर रोबोटिक्स के सीटीओ उत्कर्ष गोयल ने कहा, “क्लियरबोट्स की असली शक्ति उस रियल-टाइम पर्यावरणीय डेटा में है जो वे उत्पन्न करते हैं—बाथिमेट्रिक मैपिंग से लेकर विस्तृत पानी की गुणवत्ता गहरी समझ तक। यह बंदरगाहों और शहरी प्रबंधन को प्रतिक्रियात्मक सफाई से आगे बढ़ाकर सक्रिय, डेटा-आधारित हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाता है। महत्वपूर्ण रूप से, यह तकनीक खतरनाक सर्वेक्षण और सफाई कार्यों को स्वचालित करके समुद्री संचालन को तीन गुना अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना रही है।”

जब भारत अपने सतत विकास लक्ष्यों को मजबूत कर रहा है, ऐसे में क्लियरबोट जैसे इनोवेटर के साथ साझेदारी देश में जल निकायों की निगरानी और पुनर्स्थापन को नई दिशा दे रही है, जिससे देश भर में अधिक स्मार्ट, स्वच्छ और हरित समुद्री संचालन का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

कृषि मंत्री से मिले डॉ. अखिल जैन

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कृषि मंत्री राम विचार नेताम से मनोहर गौशाला के ट्रस्टी और जीव जंतु कल्याण बोर्ड भारत सरकार के मानद प्रतिनिधि डॉ. अखिल जैन (पदम डाकलिया) ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने साधना के लिए गोबर से निर्मित सूर्य उपासना पात्र , गोबर की वैदिक माला, फसल अमृत, मनोहर ऑर्गेनिक गोल्ड, गाय एक वरदान पुस्तक, जैन दुपट्टा आदरपूर्वक भेंट की। कृषि मंत्री ने मनोहर गौशाला में होने वाले रिसर्च और बनने वाले उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि डॉ. जैन का गौ संरक्षण, जैविक खेती, भारतीय परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता सच में प्रेरणादायी है।

गौ-सेवा से सुधरेंगे कैदी तिहाड़ जेल में गौशाला

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पश्चिमी दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जेल तिहाड़ में अब कैदियों के साथ गायों को भी आश्रय मिलेगा। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने राज्य के गृह मंत्री आशीष सूद और जेल महानिदेशक एसबीके सिंह की मौजूदगी में जेल नंबर 7 में गौशाला का उद्घाटन किया।

नई गौशाला में फिलहाल 10 साहीवाल गायें हैं। हालाँकि नई गौशाला आकार और क्षमता में छोटी है, लेकिन 250 एकड़ के तिहाड़ परिसर में बड़ी गौशालाएँ खोलने की संभावना तलाशने का काम जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। सरकार को उम्मीद है कि इससे सड़कों पर आवारा गायों को आश्रय देने वाली गौशालाओं की कमी दूर होगी।

जेल प्रशासन का मानना है कि गौशाला न केवल गायों को आश्रय प्रदान करेगी, बल्कि उनके संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गौवंश की सेवा से कैदियों के मन से नकारात्मकता दूर होगी और करुणा का भाव जागृत होगा।

उपराज्यपाल ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आप गाय जैसे पालतू जानवर की सेवा करते हैं, तो इस सेवा के दौरान जो करुणा जागृत होती है, वह आपके भीतर नैतिकता भी जगाती है और तनाव को दूर करती है। उपराज्यपाल ने गौशाला के आर्थिक लाभों के बारे में भी बताया। आशीष सूद ने कहा कि जिन कैदियों से मिलने वाला कोई नहीं है, उनके लिए गाय का स्पर्श और सेवा मानसिक शांति प्रदान करती है। यह एक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध चिकित्सा पद्धति है।

तीन अन्य सुविधाओं का उद्घाटन

जेल मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में तीन डिजिटल पहलों का उद्घाटन किया गया। इसमें एक इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली शामिल है। इस सुविधा से सभी को दवाइयाँ, राशन और कपड़े रीयल-टाइम उपलब्ध होंगे। स्टॉक खत्म होने से पहले सभी को समय पर अलर्ट प्राप्त होंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यदि एक जेल में किसी वस्तु का अतिरिक्त स्टॉक है और दूसरी जेल में खत्म हो रहा है, तो वे दूसरी जेल के स्टॉक का उपयोग कर सकेंगे।

इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। उद्घाटन की गई दूसरी पहल को एनजीओ पोर्टल कहा जाता है। देश भर के एनजीओ इस पोर्टल पर मुफ्त पंजीकरण कर सकेंगे और कैदियों के पुनर्वास के लिए अपनी गतिविधियों को अपलोड कर सकेंगे। इससे जेलों और एनजीओ के बीच सहयोग बढ़ेगा। एक अन्य पहल के तहत टीजे उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री भी शुरू की गई है।