Home Blog Page 310

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पत्नी के साथ सिद्धिविनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की

0

मुंबई: उप राष्ट्रपति का कार्यभार संभालने के बाद पहली बार देश की आर्थिक राजधानी मुंबई आए जगदीप धनखड़ ने अपनी पत्नी डॉ.सुदेश कुमार के साथ सिद्धिविनायक मंदिर में पूजा अर्चना की। उप राष्ट्रपति महालक्ष्मी रेसकोर्स में आयोजित वार्षिक आदित्य बिरला स्मारक पोलो कप चैम्पियनशिप में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।

ऐमचुर राइडर्स क्लब की ओर से आयोजित और आदित्य बिरला समूह के तत्वावधान में प्रायोजित इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, फिक्की-आदित्य बिरला सीएसआर सेंटर फॉर एक्सीलेंस के अध्यक्ष राजाश्री बिरला, आदित्य बिरला समूह के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिरला और पिरामल समूह के कार्यकारी निदेशक आनंद पिरामल भी मौजूद रहे।

इससे पहले दिन में मुंबई पहुंचे धनखड़ की हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और राज्य सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने अगवानी की।

सरल और टिकाऊ विकास के लिए आखिर क्या होगा ग्लोबल साउथ का वैश्विक एजेंडा?

0

@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

सरल और टिकाऊ विकास के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ का वैश्विक एजेंडा क्या होना चाहिए, इस पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी गम्भीर दिखाई देते हैं और वे चाहते हैं कि तीसरी दुनिया के विकासशील देश भी उनके साथ कदमताल भरें। वैसे तो विकसित देशों के सामने वो अक्सर विकासशील देशों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को वो उठाते आए हैं। लेकिन हाल ही में ‘वायस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए उन्होंने तीसरी दुनिया के जिन कुछ साझा चिंताओं को प्रकट किया और यह कहा कि अगर हम साथ मिलकर काम करते हैं तो वैश्विक एजेंडा तय कर सकते हैं, उनका दूरगामी महत्व है।

देखा जाए तो प्रधानमंत्री मोदी के इस कथन के गम्भीर मायने हैं, जिन्हें समय रहते ही तीसरी दुनिया के विकासशील देश यदि समझ गए तो 21 वीं सदी में उनकी वैश्विक भूमिका एकदम से बदल जाएगी। सच कहा जाए तो 21 वीं सदी उनकी अपनी होगी। कहना न होगा कि जिस तरह से संयुक्त राष्ट्र संघ, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं और जी-7, जी-20 जैसे अहम वैश्विक संगठनों द्वारा अबतक विकासशील यानी तीसरी दुनिया के देशों की उपेक्षा की जाती है, उससे इन देशों में धन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, भोजन, काम-धंधों, परिवहन के साधनों आदि की भारी किल्लत है, जिसे दूर किये जाने की जरूरत है। यह तभी सम्भव होगा, जब नीतिगत भेद-मतभेद दूर किये जाएंगे।

कमोबेश आज दुनिया जिस तरह से अमेरिका और रूस के खेमे में बंटी हुई है और दोनों एक-दूसरे को बर्बाद करने पर उतारू हैं, वह सबके लिए चिंताजनक है। तीसरी दुनिया के देशों के लिए तो और भी अधिक। वहीं, भारत को भी अपने पाले में करने के लिए पश्चिमी देशों के द्वारा जो तिकड़में लगाई जा रही हैं, उससे देर-सबेर तीसरी दुनिया के देशों के आम हित भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे। इसलिए ग्लोबल साउथ के सभी देश मिलकर यदि भारत के नेतृत्व में अपने सामूहिक हित की भाषा बोलने लगे तो देर सबेर उन सबका भला हो जाएगा।

देखा जाए तो दुनिया की अहम समस्याओं के पीछे विकसित देशों की स्पष्ट भूमिका है, लेकिन इसकी कीमत हमेशा से ही विकासशील देश चुकाते आये हैं। ग्लोबल वर्मिंग, पर्यावरण प्रदूषण, जल संकट, आतंकवाद आदि ने विकासशील देशों का जीना मुहाल कर रखा है। इसलिए अब इस स्थिति को बदलना होगा। भारत इसके लिए तीसरी दुनिया के देशों को नेतृत्व देने के लिए खुद को तैयार कर चुका है। अब सभी देशों का वह साथ पाना चाहता है, ताकि सबकी जरूरतें पूरी होती रहें और ग्लोबल सप्लाई चेन बना रहे। इसलिए इसे समझना और समझाना दोनों बहुत जरूरी है।

दरअसल, समकालीन वैश्विक परिस्थितियों में दुनियावी मंचों पर भारत जिस तरह से विकासशील देशों यानी तीसरी दुनिया के देशों के अहम मुद्दों यानी खाद्यान्न आपूर्ति और ऊर्जा जरूरतों आदि को स्वर देता आया है, उससे इन देशों में सरल और टिकाऊ विकास को लेकर कुछ नई उम्मीदें भी जगी हैं। गत दिनों ‘वायस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कुछ भी महत्वपूर्ण बातें कही है, उसके गहरे निहितार्थ हैं। मसलन, दुनिया के संकट को रेखांकित करते हुए और फिर उसके सर्वमान्य समाधान को लेकर पीएम मोदी ने जो खरी-खरी बातें कही हैं, उससे साफ है कि यदि ग्लोबल साउथ के देशों में सरल और टिकाऊ विकास पर जोर दिया जाए तो ग्लोबल नार्थ के देशों की मंदी भी दूर हो सकती है, जिसके लिए वो लोग काफी चिंतित नजर आते हैं।

सही कहते हैं कि नेता वही होता है जो कमजोरों की आवाज को बुलंद करता है। इस लिहाज से देखें तो विभिन्न वैश्विक मंचों पर तीसरी दुनिया के देशों के हकहुक़ूक़ के सवाल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से मुखर होकर बोलते रहते हैं, उससे स्पष्ट है कि वो भी इनके एकछत्र नेता बन चुके हैं, जिससे निकट भविष्य में भारत को काफी रणनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है। गाहे-बगाहे यानी विभिन्न मौकों पर जिस तरह से वो विकासशील देशों, खासकर तीसरी दुनिया के देशों के समग्र हितों की वकालत करते दिखते हैं, उससे स्पष्ट है कि इन देशों को भी भारत के रूप में एक अच्छा और सच्चा रहनुमा मिल चुका है।

तीसरी दुनिया के देशों की पीड़ा को स्वर देते हुए पीएम मोदी जब यह कहते हैं कि “यह वर्ष नई उम्मीदें और नई ऊर्जा लेकर आया है। हमने पिछले वर्ष के पन्नों को पलटा है, जिसमें युद्ध, संघर्ष, आतंकवाद और भू-राजनीतिक तनाव को देखा। खाद्य, ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती कीमतें, कोविड-19 वैश्विक महामारी के दूरगामी आर्थिक प्रभावों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से उतपन्न आपदाएं भी देखी, जो अब सबकी चिंता का सबब बन चुकी हैं। इसलिए इनसे पार पाने के लिए सरल और टिकाऊ विकास आवश्यक है।”, तो एक नई उम्मीद जगती है।

आगे पीएम मोदी जब यह कहते हैं कि “स्पष्ट है कि दुनिया संकट की स्थिति में है। एक तिहाई आबादी का भविष्य दांव पर है। इसलिए बेहतर विश्व के लिए खाद्य, ईंधन की कीमतें, काबू करनी होंगी।” तो एक उम्मीद जगती है कि कोई तो है जो उनके दुःख-दर्ज को समझ रहा है और सरेआम उसका इजहार कर रहा है।

पीएम मोदी यहीं नहीं रुकते, बल्कि तीसरी दुनिया के देशों की दुःखती रगों को दबाते हुए जब यह कहते हैं कि “यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि अस्थिरता की यह स्थिति कब तक रहेगी। फिर भी हमें उम्मीद है कि 21वीं सदी में दुनिया में वृद्धि ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों से आएगी। मैं समझता हूं कि अगर हम साथ मिलकर काम करते हैं तब हम वैश्विक एजेंडा तय कर सकते हैं।” तो उनकी वाणी में एक आत्मविश्वास और दृढ़प्रतिज्ञता झलकती है, जिसमें सभी समस्याओं का समाधान करने का जज्बा अंतर्निहित होता है।

पीएम मोदी ने ठीक ही कहा है कि “विकासशील विश्व जिस तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, उसके बावजूद मैं इस बात को लेकर आशावादी हूँ कि हमारा समय आएगा। वक्त की जरूरत है कि हम सरल, पूरा करने योग्य और टिकाऊ समाधान ढूंढें, जो समाज और अर्थव्यवस्थाओं में बदलाव ला सके। ऐसे दृष्टिकोण के साथ हम कठिन चुनौतियों से पार पा सकेंगे। साथ मिलकर नए और रचनात्मक विचार ला सकते हैं।” इसलिए अब वक़्त आ गया है कि तीसरी दुनिया के देश पीएम मोदी के उदात्त वैश्विक सरोकारों को समझें और उनके साथ कदमताल भरते हुए दुनियावी संकटों को हल करने में अपना अभिन्न योगदान दें।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि ‘ग्लोबल नार्थ’ समझे जाने वाले देशों की स्वार्थपरक नीतियों से ‘ग्लोबल साउथ’ समझे जाने वाले देशों के आम हित अक्सर प्रभावित होते आये हैं। इसलिए इनकी आपसी रस्साकशी निरन्तर चलती रहती है। एक तरफ ग्लोबल नार्थ जहां अमेरिका व रूस के खेमे में विभाजित है, तो वहीं दूसरी तरफ ग्लोबल साउथ भी चीन व भारत के खेमे में विभाजित है। इन सबके बीच पारस्परिक शह-मात का खेल चलता रहता है। इसी विरोधाभासी चक्की में तीसरी दुनिया के देश भी पिसते रहते हैं।

बता दें कि ‘ग्लोबल नॉर्थ’ यानी पश्चिमी देशों का मतलब अमेरिका, कनाडा, रूस, इजरायल, यूरोपीय देशों, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से है। वहीं ‘ग्लोबल साउथ’ यानी पूर्वी देशों का तातपर्य एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका, कैरिबियन, प्रशांत द्वीप समूह के देशों से है जिसमें ब्राजील, भारत, इंडोनेशिया और चीन जैसे प्रमुख देश भी आते हैं।

गौरतलब है कि ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन यूक्रेन संघर्ष के कारण उतपन्न खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा सहित विभिन्न चुनौतियों के मद्देनजर विकासशील देशों को अपनी चिंताएं साझा करने के लिए एक मंच प्रदान कर चुका है। कुल मिलाकर यह सम्मिट विश्व के लिए विकासशील देशों की आवाज बन चुका है। यह सम्मिट अनिवार्य रूप से ग्‍लोबल साउथ के देशों को एक साथ लाने और मुद्दों की सीरीज में एक साझा मंच पर उनके दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को साझा करने की परिकल्पना अभिव्यक्त करता है। यह पहल पीएम नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के विजन से प्रेरित है, जो भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के दर्शन पर भी आधारित है। इसलिए इसे मिलजुलकर प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसी से तीसरी दुनिया के देशों से जुड़ी सभी समस्याओं का सार्थक हल निकलेगा।

 कमलेश पांडे

बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन। आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन।।

0

प्रियंका सौरभ

दुनिया को केवल इस बात की परवाह है कि हम क्या करते हैं, न कि हम क्या कहते हैं कि हम क्या करेंगे। जो शब्द हम आम तौर पर कहते हैं, वे हमारे द्वारा किए जाने वाले कार्यों की तुलना में बहुत कम महत्व रखते हैं। हमें बोलना कम और काम ज्यादा करना चाहिए। यह न केवल हमें न्यूनतम संभव समय में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा बल्कि हमारे महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करने के लिए कुछ आवश्यक ऊर्जा भी देगा। इस तथ्य को समझना जरूरी है कि हमारे पास जो ऊर्जा है वह वास्तव में सीमित है, और इसलिए इसे बुद्धिमानी से उपयोग करना बहुत आवश्यक हो जाता है।

इस तथ्य को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि हमारे कार्य हमें परिभाषित करते हैं न कि हमारे विकल्पों को। एक विजेता हमेशा सही विचारों को अच्छे कार्यों में बदलने के तरीके खोजता है। वह अपने सपनों को देने और उन्हें हकीकत में बदलने के तरीकों की तलाश करेगा। साथ ही, याद रखें कि वास्तविकता कठिन है और इतनी सरल नहीं है जितना हम इसे मान लेते हैं। बाद में भागदौड़ से बचने के लिए हमें अपने कार्यों को पहले ही पूरा कर लेना चाहिए। अपने फैसलों को ध्यान से देखना और उनका आत्मनिरीक्षण करना भी जरूरी है।

हमारे कार्य शब्दों से ज्यादा  हमारी प्रतिष्ठा और अखंडता को परिभाषित करते हैं। हम जो कहते हैं उसे करने में असफल होना और इस व्यवहार को बार-बार दोहराना हमारे चरित्र के लिए हानिकारक है जो दूसरे हमें समझते हैं। यह हमारी विश्वसनीयता को मिटा देता है। यदि हम वह नहीं करते जो हम कहते हैं कि हम करने जा रहे हैं, तो हमारी विश्वसनीयता कम हो जाती है। हमारे प्रत्येक वादे के बाद और इसे पूरा करने में विफल रहने से हमारी सत्यनिष्ठा भी कम हो जाती है। इसके बाद हमारी बातों का कोई मतलब नहीं है।

यह अविश्वास भी पैदा करता है। भरोसा छोटी-छोटी क्रियाओं पर बनाया जाता है, न कि फिल्मों के लिए बने नाटकीय पलों पर। अंत में, यह अवसर को सीमित करता है। जब हमारी टीम किए गए वादों पर भरोसा नहीं कर सकती है, तो हमारे लिए खुद को साबित करने के अवसर कम होते जाएंगे। यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं जो वादों और अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता है, तो आपको परिणाम भुगतने होंगे। अपने शब्द का कोई बनने का प्रयास करें। खासकर जब यह एक “छोटी बात” है, तो सुनिश्चित करें कि आप इसे करते हैं। आखिरकार, यदि आप “छोटी चीज़ों” में असफल होते हैं, तो कोई भी “बड़ी चीज़ों” पर आप पर भरोसा नहीं करेगा।

इस तथ्य को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि हमारे कार्य हमें परिभाषित करते हैं न कि हमारे विकल्पों को। एक विजेता हमेशा सही विचारों को अच्छे कार्यों में बदलने के तरीके खोजता है। वह अपने सपनों को हकीकत में बदलने के तरीकों की तलाश करेगा। आप जो कहते हैं उसे लगातार करते रहना ईमानदारी की बुनियाद है।

दुनिया को केवल इस बात की परवाह है कि हम क्या करते हैं, न कि हम क्या कहते हैं कि हम क्या करेंगे। जो शब्द हम आम तौर पर कहते हैं, वे हमारे द्वारा किए जाने वाले कार्यों की तुलना में बहुत कम महत्व रखते हैं। याद रखें कि जीवन वास्तव में एक खेल है और इसलिए हम सभी को जीतने का प्रयास करना चाहिए। असफलता और निराशा वास्तव में हर किसी के जीवन का एक हिस्सा है और इन चीजों के बारे में अधिक सोचना बेकार है। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करना और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करना और अतीत के बारे में भूलना अधिक महत्वपूर्ण है। याद रखें कि विजेता अलग चीजें नहीं करते हैं; वे बस अलग तरीके से करते हैं।

जीवन में सफल होने के लिए धैर्य रखना और अपने सपनों के लिए समर्पित रूप से कड़ी मेहनत करना महत्वपूर्ण है। जीवन में कुछ भी मुफ्त नहीं है, और इसलिए हमें जीवन में बड़ी चीजें हासिल करने के लिए अपने सभी प्रयास करने और अपनी सीमाओं को चरम तक पहुंचाने की जरूरत है। इसके अलावा, असफलताएं और निराशा वास्तव में हर किसी की यात्रा का हिस्सा होती हैं, और हमें उन्हें वैसे ही स्वीकार करना चाहिए जैसे वे आती हैं। हमें हमेशा वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए और एक बेहतर और सुखद कल बनाने के लिए इसे पूरी सावधानी और समर्पण के साथ करना चाहिए। हमें बोलना कम और काम ज्यादा करना चाहिए। यह न केवल हमें न्यूनतम संभव समय में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा बल्कि हमारे महत्वपूर्ण कार्यों में निवेश करने के लिए कुछ आवश्यक ऊर्जा भी देगा।

इस तथ्य को समझना जरूरी है कि हमारे पास जो ऊर्जा है वह वास्तव में सीमित है, और इसलिए इसे बुद्धिमानी से उपयोग करना बहुत आवश्यक हो जाता है। व्यक्ति को हमेशा समय की कद्र करनी चाहिए क्योंकि इसी से हमारा जीवन बना है। इसलिए जीवन में बड़ी चीजें हासिल करने के लिए हमें शुरू से ही बेसिक्स पर काम करने और अपने आधार को मजबूत करने की जरूरत है।  जीवन में हमेशा याद रखिये- बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन। आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन।।

म्यूजिक वीडियो ‘रांझणा’ जारी

0

 सिंगर आशिका कुंदनानी का पहला म्युज़िक वीडियो ‘रांझणा’ मुम्बई के लव एंड लत्ते प्रेक्षागृह में भव्य रूप से लॉन्च किया गया। इस अवसर पर शानदार केक काटकर सिंगर और ऎक्ट्रेस आशिका कुंदनानी का बर्थडे भी मनाया गया। इस मौके पर गाने की संगीतकार ऋतु जौहरी, गीतकार ऋचा जौहरी, निर्माता रवि कुंदनानी, जीतू शंकर (जीबीएन एंटरटेनमेंट) और वीडियो डायरेक्टर सुमित रंजन उपस्थित रहे। यहां कई सेलेब्रिटी गेस्ट्स भी उपस्थित थे, जिनमे संगीतकार समीर सेन, संगीतकार निखिल कामत, कॉमेडियन वीआईपी, सिंगर दिव्य कुमार के नाम उल्लेखनीय हैं। ऋतु प्रभा प्रोडक्शन और जीतू शंकर (जीबीएन एंटरटेनमेंट) की नवीनतम प्रस्तुति म्यूजिक वीडियो ‘रांझणा’ के निर्देशक सुमित रंजन हैं।

बकौल आशिका कुंदनानी यह गीत एक ऐसी लड़की के बारे में है जो अपने पिया की तलाश में निकली है, यह एक सूफी सॉन्ग है जिसमें इमोशंस और दर्द भी है। ‘रांझणा’ गीत काफी बेहतरीन है, जिसमें मेरा किरदार और लुक बहुत अलग है। बचपन से ही मुझे गायकी का शौक रहा है, इसकी बाकायदा तालीम हासिल की है। यह गीत करना मेरे लिए इसलिए चुनौतियों भरा रहा कि इसमे गायकी के साथ मुझे अभिनय भी करना था। मैं निर्देशक सुमित रंजन की आभारी हूं कि उन्होंने मुझसे यह काम बेहतरीन ढंग से करवा लिया। स्क्रीन पर खुद को देखती हूं तो खुशी होती है। यह गाना जैसलमेर (राजस्थान) के रेगिस्तान में फिल्माया गया है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

फैशन और सौंदर्य की दुनिया की चर्चित शख्सियत : अंजली फौगाट

0

                             अंजली फौगाट का नाम फैशन और सौंदर्य की दुनिया में एक चर्चित शख्सियत के रूप में बड़े ही कम समय में तेजी से उभर कर सामने आया है। एक विश्व प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर के रूप में पिछले कुछ वर्षों से वो मिस यूनिवर्स की ब्यूटी क्वीन्स को तैयार कर रही हैं। अंजली इस महीने न्यू ऑरलियन्स में 71वें मिस यूनिवर्स इवेंट का गवाह बनने जा रही हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक डिजाइनर के रूप में काम करके की थी। कुछ वर्षों के बाद, उन्होंने डीडीसी (डिजाइनर ड्रीम कलेक्शन) के रूप में जाना जाने वाला अपना खुद का लेबल लॉन्च किया और जल्दी ही देश में सबसे अधिक मांग वाले डिजाइनरों में से एक बन गईं। हाल के वर्षों में, फौगट मिस यूनिवर्स प्रतियोगियों के कपड़े पहनने में तेजी से शामिल हो गई हैं।

उसने कई विजेताओं और उपविजेताओं के कपड़े पहने हैं, और उसके डिजाइनों को दुनिया भर की पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में चित्रित किया गया है। फिलवक्त अंजली फौगाट मिस यूनिवर्स चिली और मिस यूनिवर्स अरमानिया के लिए ज्वेलरी और ड्रेस डिजाइन कर रही हैं। अंजली फौगाट के डिजाइन उनके स्त्रैण आकार, नाजुक कपड़े और जटिल बीडिंग के लिए जाने जाते हैं। वह अक्सर अपने डिजाइनों में पारंपरिक भारतीय कपड़ों और अलंकरणों का उपयोग करती हैं, जो उन्हें एक अद्वितीय और आकर्षक स्वभाव देता है। चाहे वह एक विजेता या उपविजेता के रूप में तैयार हो, फौगाट हमेशा यह सुनिश्चित करती है कि उसका संग्रह रॉयल्टी जैसा महसूस हो।

पूर्व में ‘इमर्जिंग वुमेन एंटरप्रेन्योर्स इन फैशन’ अवार्ड प्राप्त कर चुकी फैशन ब्रांड ‘डिजाइनर ड्रीम कलेक्शन’ की संस्थापक और क्रिएटिव डायरेक्टर अंजली फौगाट मिस यूनिवर्स हरनाज़ कौर संधू और कई अन्य बॉलीवुड हस्तियों को अपने डिजाइन की वस्त्र पहनाए और मिस यूनिवर्स सोफिया डिपासियर को 71वें मिस यूनिवर्स सौंदर्य प्रतियोगिता के दौरान अपने खुद के डिजाइन किये वस्त्र पहनाने के लिए काफी उत्साहित थीं लेकिन अब खबर आ गई है कि अंजली फौगाट मिस यूनिवर्स चिल्ली सोफिया डेपासियर के लुक को डिजाइन की हैं।

सोफिया डेपासियर मिस यूनिवर्स के 71वें संस्करण में चिली का प्रतिनिधित्व करेंगी। सौंदर्य प्रतियोगिता की दुनिया में सोफिया डेपासियर का नाम कोई अजनबी नहीं है उसने मिस टीन साउथ फ्लोरिडा 2004 में भाग लिया था जहाँ उसे मिस फोटोजेनिक से सम्मानित किया गया था।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

केजरीवाल और केसीआर से कांग्रेस को परहेज , ऐसे होगी विपक्षी एकता ?

0

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा अपने समापन की तरफ बढ़ रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तरफ से विपक्षी दलों के नेताओं को भेजी गयी चिट्ठी से पूर्णाहुति जैसा माहौल भी बनने लगा है । अब तो  कांग्रेस पार्टी ने कमाल कर दिया  है। भारत जोड़ो यात्रा के समापन समारोह में शामिल होने के लिए उसने देश की 21 पार्टियों को न्योता दिया है लेकिन आम आदमी पार्टी और भारत राष्ट्र संघ को नहीं बुलाया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभी 21 पार्टियों के अध्यक्षों को चिट्ठी लिखी है। सोचें, खड़गे को संसदीय कामकाज के दौरान आम आदमी पार्टी और भारत राष्ट्र समिति के साथ राजनीकि करने में कोई दिक्कत नहीं होती है। उन्होंने पिछले शीतकालीन सत्र में दो बार विपक्षी पार्टियों की बैठक बुलाई, जिसमें इन दोनों पार्टियों के नेता शामिल हुए। संसद में सरकार को घेरने में इन दोनों पार्टियों ने कांग्रेस के साथ सहयोग किया। लेकिन कश्मीर के श्रीनगर में 30 जनवरी को यात्रा के समापन कार्यक्रम का न्योता इनको नहीं दिया गया है।इससे पहले भी राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रही यात्रा जब दिल्ली पहुंचने वाली थी तब सभी विपक्षी पार्टियों को चिट्ठी लिख कर बुलाया गया था उसमें भी आप नेता अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी नहीं लिखी गई थी। यह अलग बात है कि कोई भी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बुलावे पर उसकी यात्रा मे शामिल नहीं हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश में जब यात्रा पहुंची तो वहां की विपक्षी पार्टियों को न्योता दिया गया लेकिन उनमें से भी कोई नेता यात्रा में शामिल नहीं हुआ। अब तीसरी बार विपक्षी पार्टियों को न्योता दिया गया है।

कांग्रेस ने कहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने समान विचारधारा वाली पार्टियों को न्योता दिया है। तो सवाल है कि क्या अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति को कांग्रेस समान विचारधारा की पार्टी नहीं मानती है? अगर ये समान विचार वाली पार्टियां नहीं हैं तो संसद में इनके साथ कैसे समन्वय और सहयोग बनता है? एक सवाल यह भी है कि किस आधार पर कांग्रेस इन दोनों को समान विचार वाली पार्टी नहीं मान रही है? केजरीवाल की तरह राहुल गांधी भी मंदिर मंदिर जाते हैं और उनकी तरह मुफ्त में बिजली, पानी की घोषणा कांग्रेस भी करती है। केजरीवाल और केसीआर दोनों की पार्टी भी भाजपा के खिलाफ बोलते और उससे लड़ते हैं। सो, यह विचारधारा का मामला है।असलियत यह है कि जहां भी कांग्रेस का अपना हित सीधे किसी पार्टी से टकरा रहा है वह पार्टी कांग्रेस को पसंद नहीं है। जहां पार्टी पहले ही अपने हितों का सरेंडर कर चुकी है वहां की पार्टियों के साथ काम करने में कांग्रेस को दिक्कत नहीं है। आम आदमी पार्टी सीधे कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रही है। उसने दिल्ली कांग्रेस के हाथ से छीन ली, गोवा और गुजरात में कांग्रेस को नुकसान किया और इस साल होने वाले चुनाव में राजस्थान सहित कुछ और राज्यों में कांग्रेस को नुकसान कर सकती है। इसलिए वह कांग्रेस को पसंद नहीं है। तेलंगाना का निर्माण कांग्रेस ने कराया था और वह वहां वापसी की उम्मीद कर रही है, जिसके लिए उसको सीधे केसीआर की पार्टी से टकराना है। ऊपर से केसीआर कांग्रेस को छोड़ कर मोर्चा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सोचें, अगर भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने का कांग्रेस का यह पैमाना होगा तो कैसे गठबंधन बनेगा और काम करेगा?

हाल फिलहाल केसीआर और अरविंद केजरीवाल को काफी करीब देखा गया है, और तेलंगाना रैली में केजरीवाल के साथ साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी केसीआर की तरफ से बुलावा भेजा गया है। जैसे केजरीवाल के साथ केसीआर पंजाब तक जाकर किसानों को चेक बांट चुके हैं, पटना जाकर नीतीश कुमार के साथ विपक्षी एकता के प्रयासों का प्रदर्शन भी कर चुके हैं  लेकिन 18 जनवरी को होने जा रही रैली में केसीआर ने नीतीश कुमार ही नहीं, ममता बनर्जी को भी नहीं बुलाया है।केजरीवाल और केसीआर के प्रति कांग्रेस का व्यवहार इसलिए भी थोड़ा अजीब लग रहा है क्योंकि संसद के शीतकालीन सत्र में जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों के सांसदों की मीटिंग बुलायी थी, तो आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह के अलावा केसीआर के सांसद के केशव राव भी आखिरी वक्त में पहुंच गये थे। राज्य सभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष की मीटिंग में ममता बनर्जी ने भी प्रतिनिधि भेजा था और तब ऐसा लगा जैसे कांग्रेस ने सारे गिले शिकवे खत्म कर लिया है  लेकिन कन्याकुमारी से राहुल गांधी के कश्मीर पहुंचते पहुंचते सारी खटास बाहर निकल आयी है।

केजरीवाल और केसीआर ही नहीं तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी या फिर तेलुगु देशम पार्टी के नेताओं के साथ कांग्रेस नेतृत्व का व्यवहार तो दोस्ताना नहीं ही महसूस किया गया है। ममता बनर्जी तो अब सोनिया गांधी से भी नहीं मिलतीं और ऐसा लगता है जैसे वो विपक्षी खेमे से काफी दूर जा चुकी हों। फिर भी ममता बनर्जी को मल्लिकार्जुन खड़गे ने समापन समारोह के लिए बुलाया है।मायावती को लेकर तो राहुल गांधी खुल कर आरोप लगा चुके हैं। राहुल गांधी के ये कहने पर कि कांग्रेस की तरफ से बसपा नेता को मुख्यमंत्री पद का ऑफर दिया गया था, लेकिन जांच एजेंसियों के डर से वो खामोश हो गयीं । मायावती ने सामने आकर यही बताने की कोशिश की थी कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं।  और रही बात अखिलेश यादव की तो हाल ही में देखा गया कि कैसे राहुल गांधी के साथ वो मीडिया के जरिये दो दो हाथ करते रहे।

अखिलेश यादव के ये बोल देने के बाद कि भाजपा को हराएगा कौन – राहुल गांधी ने भी बोल दिया कि ये काम समाजवादी पार्टी के वश का तो है नहीं। क्योंकि, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का भले ही प्रभाव हो, लेकिन केरल और कर्नाटक में उसे पूछता ही कौन है? और लगे हाथ राहुल गांधी ने ये भी जता दिया कि कांग्रेस की राष्ट्रीय विचारधारा ही भाजपा के खिलाफ विपक्ष को सही नेतृत्व दे सकती है।भारत जोड़ो यात्रा के उत्तर प्रदेश से गुजरने के दौरान तो अखिलेश यादव भावनात्मक रूप से तो शामिल हुए थे, लेकिन जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी के नेताओं की तरह अपना कोई नुमाइंदा नहीं भेजा था।अब जबकि मल्लिकार्जुन खड़गे ने व्यक्तिगत तौर पर अखिलेश यादव को भी पत्र भेज कर यात्रा के समापन कार्यक्रम के लिए बुलाया है, फिर भी ऐसा कोई संकेत तो नहीं मिल रहा है कि अखिलेश यादव मन से तैयार हों। यहां तक कि केसीआर की रैली में जाने को तैयार हैं।अखिलेश यादव जब मुलायम सिंह यादव के नाम पर कैलेंडर जारी कर रहे थे, तभी मीडिया केसीआर की रैली और भारत जोड़ो यात्रा को लेकर समाजवादी पार्टी का रुख जानना चाहा। अखिलेश यादव ने बताया कि केसीआर की रैली का निमंत्रण मिला भी है और वो रैली में शामिल भी होंगे।कंफर्म तो अखिलेश यादव ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बुलावा मिलने का भी किया, लेकिन उसे लेकर उनका कहना रहा कि समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ विचार करने के बाद ही वो भारत जोड़ो यात्रा के समापन समारोह में शामिल होने को लेकर कोई फैसला करेंगे।अब तो ये समझना भी मुश्किल हो रहा है कि अखिलेश यादव ने कैसे फटाफट केसीआर की रैली में जाने का फैसला कर लिया। क्योंकि केसीआर ने नीतीश कुमार को तो नहीं बुलाया है। नीतीश कुमार उत्तरप्रदेश में अखिलेश यादव को महागठबंधन का नेता तक घोषित कर चुके हैं – क्या अखिलेश यादव, केसीआर के साथ जाने के लिए नीतीश कुमार को छोड़ भी सकते हैं?

एक बात तो सामने आ चुकी है कि कांग्रेस के बगैर विपक्ष के ज्यादातर नेता एकजुट होने की पहल भी अधूरी मानते हैं। अब तो राहुल गांधी खुल कर ये बात कह भी चुके हैं कि कांग्रेस ही विपक्ष का नेतृत्व कर सकती है।भारत जोड़ो यात्रा शुरू होने से पहले ही कांग्रेस के रणनीतिकारों की कोशिश और उम्मीद भी रही कि विपक्षी खेमे के ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक दल साथ आ सकें। मल्लिकार्जुन खड़गे की विपक्षी नेताओं को भेजी गयी चिट्ठी उसी मिशन की आखिरी तैयारी लगती है।ये भी देखने में आया कि कन्याकुमारी से यात्रा के शुरू होने के मौके पर जिस तरह डीएमके नेता एमके स्टालिन डटे रहे, श्रीनगर में समापन के मौके पर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती भी राहुल गांधी के साथ खड़ी देखने को मिलेंगी। फारूक अब्दुल्ला तो दिल्ली में यात्रा के प्रति अपना समर्थन जता ही चुके हैं।जिन दलों ने यात्रा से दूरी बनायी उनमें तृणमूल कांग्रेस, भारत राष्ट्र समिति, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी रही है। फिर भी मल्लिकार्जुन खड़गे ने ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती को न्योता भेजा है, लेकिन अरविंद केजरीवाल और केसीआर को सूची से बाहर रखा है।

हाल ही की तो बात है, राहुल गांधी क्षेत्रीय दलों से अपील कर रहे थे कि सब लोग साथ मिल कर भाजपा के खिलाफ लड़ें। राहुल गांधी ने ये भी प्रॉमिस किया था कि कांग्रेस सबको साथ लेकर चलेगी और सबका सम्मान कायम रखने की भी कोशिश होगी – गुलाम नबी आजाद और जगनमोहन रेड्डी को न बुलाये जाने की बात भी एक बार समझी जा सकती है, लेकिन केसीआर और केजरीवाल से क्या दिक्कत हो सकती है?क्या राहुल गांधी अभी से  बी आर एस  और आप  दोनों पार्टियों को क्षेत्रीय दलों के दायरे से बाहर कर चुके हैं । मतलब, राष्ट्रीय पार्टी मान चुके हैं? और ये भी मान कर चल रहे हैं कि ये दोनों ही कांग्रेस और उनको नहीं पूछने वाले हैं?देखा जाये तो केसीआर के साथ साथ जेडीएस को न बुलाये जाने के पीछे अलग राजनीतिक समीकरण हो सकते है  और ये भी हो सकता है कि ये पॉलिसी सिर्फ 2023 के लिए हो। हो सकता है 2024 से कांग्रेस अपना स्टैंड बदल ले।असल में 2023 के शुरू में कर्नाटक विधानसभा और फिर साल के आखिर में तेलंगाना में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। तेलंगाना में राहुल गांधी पहले से ही केसीआर के खिलाफ धावा बोले हुए हैं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान तेलंगाना में दोनों के बीच तनातनी देखने को मिली थी।अगर केसीआर गैर कांग्रेसी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे होते तो क्या कांग्रेस उनको अलग रखने के बारे में नहीं सोचती। हैदराबाद में कांग्रेस दफ्तर पर छापे के बाद से कांग्रेस नेता केसीआर के खिलाफ आक्रामक हो गये थे – और यहां तक बताने लगे थे कि केसीआर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में कोई फर्क नहीं है। वैसे भी तेलंगाना में बीआरएस को कांग्रेस से मुकाबला तो करना ही है।तेलंगाना से पहले कर्नाटक में चुनाव होने जा रहे हैं और वहां कांग्रेस को भाजपा ही नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस के साथ भी लड़ना है। ध्यान देने वाली बात ये है कि कर्नाटक में केसीआर ने जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी के साथ चुनाव गठबंधन भी कर रखा है  और केसीआर को भी विपक्ष की अपनी सर्कल से दूर रखने की कांग्रेस नेतृत्व का राजनीतिक स्टैंड हो सकता है।राहुल को किसी से व किसी ओर को किसी ओर से अलेर्जी है तो विपक्षी एकता बेमानी है और ‘भारत जोड़ो यात्रा ‘ फुस्स ।

अशोक भाटिया

आरआरआर स्टार राम चरण की यूएसए में नेक्स्ट बिग पिक्चर के साथ बातचीत

0

हाल ही मेगा पॉवर स्टार राम चरण गोल्डन ग्लोब्स अवॉर्ड्स के लिए लॉस एंजेल्स में थे और जहां उन्होंने नेक्स्ट बिग पिक्चर के साथ एक पोडकास्ट में बातचीत के दौरान अपनी एक्साइटमेंट जाहिर की।
आपको बता दें कि गोल्डन ग्लोब्स में राम चरण और जूनियर एनटीआर स्टारर आरआरआर के नाटू नाटू गाने को बेस्ट सॉन्ग से सम्मानित किया गया है। ऐसे में उन्होंने बात करते हुए कहा कि यह देखकर संतोष होता है कि वेस्ट इंडियन सिनेमा को पहचान दे रहा है। उन्होंने कहा, “यह हम सभी के लिए एक खास पल है।
यह पूछे जाने पर कि उन्हें अल्लूरी सीता राम राजू की भूमिका कैसे मिली, राम चरण ने कहा, “मैंने पहले भी राजामौली के साथ काम किया हैं। जब उन्होंने स्क्रीन पर दो सबसे अच्छे दोस्तों के कॉन्सेप्ट और उसके इर्द गिर्द घूमने वाले ड्रामा को चुना, तो उन्होंने सोचा कि ऐसे दो अभिनेताओं को लेना सही होगा जो रियल लाइफ में भी दोस्त हैं। यही मुख्य वजह है कि फिल्म के लिए उन्होंने हमें चुना। वह अपनी फिल्म और स्क्रिप्ट के अवाला किसी और के लिए फेवर्स नही करते हैं।
वहीं जब आगे उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने किरदार की तैयारी करते समय अपने परिवार के इतिहास को देखा, जिस पर जवाब देते हुए उन्होंने नहीं कहा। उनके मुताबिक, “यह इन किरादरों पर निर्देशक का एक काल्पनिक टेक है। उन्होंने वास्तव में क्या किया, इसका इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने ऑटोबायोग्राफी नहीं पढ़ी। यह किरदारों के पीछे का सार और आभा है। उन्होंने इसके इर्द-गिर्द अपनी कहानी बुनी है। यह काफी हद तक एक नई स्क्रिप्ट की तरह था। इसके लिए हमें इतिहास में जाने की जरूरत नहीं।
राम चरण ने बात को जारी करते हुए कहा, “अगर आपको राजामौली की फिल्म का एक्टर बनना है, तो आपको लुक में बेस्ट और फिट दिखना होता है। मैं उनका यह कहकर मजाक उड़ाता था कि वह हमें बॉडी शेम कर रहे हैं। मैं आमतौर पर फिट रहना पसंद करता हूं। लेकिन फिटनेस को लेकर राजामौली की दीवानगी एक अलग ही लेवल पर है। महामारी के साथ, यह और भी मुश्किल हो गया क्योंकि यह फास्टेस्ट फिल्म होने वाली थी, लेकिन महामारी की वजह से हमें अपने लुक को दो साल तक और मेंटेन रखना पड़ा।
अल्लूरी सीता रामा राजू में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “इतिहास के किसी एक किरदार को निभाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। लोग इतिहास से वाकिफ हैं और यह एक जिम्मेदारी है। आखिरी के 15 मिनट पूरी फिल्म की तरह ही चुनौतीपूर्ण थे।
आरआरआर फिल्म के नाटू नाटू गीत के बारे में राम चरण ने कहा कि रिहर्सल और प्रैक्टिस में पूरे 6 दिन लग गए। मैंने लगभग 4 किलो वजन कम किया और जूनियर एनटीआर ने 2-3 किलो वजन कम किया। जब मैं उस गाने के बारे में बात करता हूं तो मेरे घुटने आज भी कांपने लगते हैं। तारक और मेरे पास कमाल का स्टाइल और एबिलिटी है। कोरियोग्राफी इतनी मुश्किल नहीं लगी क्योंकि हमने इस पर बहुत मेहनत की थी, और यह स्क्रिप्ट की डिमांड थी। यह दो शरीर थे जिन्हें एक जैसा दिखना था। तालमेल और विचार कि हम एक जैसे हैं, जिसे स्क्रीन्स पर भी अच्छे से दर्शाना था। ये दो जिस्म और एक जान की तरह था। हमें हर एक फ्रेम, हर एक कदम को सिंक्रोनाइज़ करना था। यह राम चरण स्टाइल या तारक स्टाइल नहीं था, यह राजामौली स्टाइल था। हम मैराथन की तरह लूप पर चलते रहें।”
आगे यह पूछे जाने पर कि क्या वह इसे गोल्डन ग्लोब्स के मंच पर करेंगे, उन्होंने पॉजिटिव जवाब देते हुए फौरन कह दिया, “बेशक और 17 बार करेंगे जैसे टेक्स के दौरान किया था।”
मैं देख सकता हूं कि राजामौली ने क्या कल्पना की थी और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। सारा प्यार देखकर बहुत संतोष होता है।
वेस्ट के दर्शकों के लिए, राम चरण ने उन्हें इंडियन फिल्म मेकिंग की और झलक देखने के लिए रंगस्थलम, बाहुबली, ईगा, अरविंदा समेता जैसी कई फिल्में देखने की नसीहत दी।

प्रेम चोपड़ा को कृष्णा चौहान ने सौंपा बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड 2022

0

मुम्बई। बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता प्रेम चोपड़ा को पिछले दिनों कृष्णा चौहान ने उनके आवास पर पहुंचकर चौथे बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड 2022 से सम्मानित किया। प्रेम चोपड़ा को यह ट्रॉफी बेहद पसन्द आई और वे ट्रॉफी को देखते ही रहे। साथ ही कृष्णा चौहान ने प्रेम चोपड़ा को 26 जनवरी को होने वाले राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2023 के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है।
बता दें कि ‘बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड का भव्य आयोजन पिछले 3 वर्षों से कृष्णा चौहान करते आ रहे हैं। चौथे वर्ष कृष्णा चौहान फाउंडेशन द्वारा बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड – 2022 का आयोजन 10 दिसम्बर 2022 को किया गया था। जहां भारतीय फिल्मों और उसकी तरक्की में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उसी अवसर पर ब्राइट आउटडोर मीडिया के डॉ योगेश लखानी, संगीतकार दिलीप सेन, देवदास और हम दिल दे चुके सनम फेम संगीतकार इस्माइल दरबार, बी एन तिवारी, रमेश गोयल, बीरबल जी, विजेंद्र गोयल, नाफ़े खान, देव मेनारिया, पुनीत सहित कई हस्तियां उपस्थित रहे और सम्मान प्राप्त किये। कार्यक्रम में सिया काले ने डांस किया वहीं भारती छाबड़िया ने एंकरिंग की।
अवार्ड समारोह में सिंगर संध्या पवार, विजय कश्यप, तृप्ति शुक्ला, निकेश ताराचंद, ज्योति झिंज्ञानी, बीरबल खोसला, के के गोस्वामी, पुनीत कुमार वोरा, जान्हवी राठौड़, डॉ भारती छाबड़िया, ऐश्वर्या सिंह, दीपा नारायण, रंजन कुमार सिंह (टीवी डायरेक्टर), आर राजपाल, सिंगर राजू टांक, चंद्रप्रकाश, आसमा कपाड़िया, राजेन्द्र, उपेंद्र पंडित, महताब आलम, दिनेश कुमार, नसीर तगाले, दिलीप पटेल, देवेंद्र खन्ना, प्रमोद शर्मा, दीपक साहू, मंगेश, रत्न जी, रेहान शेख, गणेश पाण्डेय, पीके गुप्ता, केवल कुमार, तेजेन्द्र सिंह, अब्दुल कदीर, शमा ईरानी सहित कई लोग सम्मानित हुए।
कृष्णा चौहान केसीएफ के अंतर्गत बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड, बॉलीवुड आइकोनिक एवॉर्ड, लीजेंड दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड और महात्मा गांधी रत्न अवार्ड का आयोजन पिछले कई वर्षों से करते आ रहे हैं।

मकर संक्रान्ति के अवसर पर मेघाश्रेय फाउंडेशन द्वारा सर्वाइकल कैंसर फ्री इंडिया पर जागरूकता अभियान

0

मुंबई। मकर संक्रान्ति के अवसर पर मेघाश्रेय फाउंडेशन के द्वारा फाउंडेशन द्वारा सर्वाइकल कैंसर फ्री इंडिया पर जागरूकता अभियान का आयोजन कार्टर रोड, बांद्रा पश्चिम में किया गया। भाजपा के मुंबई अध्यक्ष और आमदार आशीष शेलार, सीमा सिंह (संस्थापक मेघाश्रेय फ़ाउंडेशन) और डॉ मेघना सिंह ने इस अवसर पर ज़रूरतमंद बच्चों को कंबल, पतंग और मिठाइयाँ भी वितरित की।
इस अवसर पर सीमा सिंह ने कहा कि हम लगातार सर्वाइकल कैंसर फ्री इंडिया पर जागरूकता अभियान का आयोजन करते रहते हैं। अगर समय पर महिलाओं में होने वाली इस बीमारी का पता चलता है तो बेहतर उपचार और इलाज संभव हैं। मेघाश्रेय फाउंडेशन की संस्थापक सीमा सिंह अपने बच्चों डॉ मेघना सिंह और श्रेय सिंह के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में सबसे आगे रहती हैं। सीमा सिंह ने अपने बच्चों की ओर से मेघाश्रेया फाउंडेशन की शुरुआत की। मेघाश्रेया फाउंडेशन भारत भर में वंचित बच्चों की बेहतरी और भूखे लोगों को खाना खिलाने की दिशा में काम करता है। अब तक, 50 से अधिक कार्यक्रम और पहल के माध्यम से पूरे भारत में एक लाख से अधिक लोगों के जीवन को बदल दिया है।

गौ मूत्र से स्नान कर आरिफ बन गया आनंद, अपने प्यार को पाने के लिए अपनाया हिन्दू धर्म

0

Bhopal News: अब तक सुनते और देखते आए हैं कि मोहब्बत में आदमी कुछ भी कर सकता है. ऐसा ही एक नजारा राजधानी भोपाल (Bhopal) से 100 किलोमीटर दूर शुजालपुर तहसील में देखने को मिला है. यहां एक युवक अपने सच्चे प्रेम को पाने के लिए मुस्लिम से हिन्दू बन गया. विहिप और बजरंग दल पदाधिकारियों की मौजूदगी में मुस्लिम युवक ने हिन्दू धर्म अपनाया.

इसी के साथ युवक आरिफ खान का मुंडन कराया, गौ मूत्र से स्नान कराया. मंदिर में माताजी के दर्शन-पूजन के बाद तिलक लगाकर और कलाई पर कलेवा बांधकर उसे सनातन धर्म ग्रहण कराया. इन सभी प्रक्रियाओं के बाद आरिफ खान अब आनंद तिवारी बन गया है.

दरअसल, शुजालपुर के नूरपुरा निवासी 30 वर्षीय आरिफ खान पिता यासीन खान कबाड़ी का काम करता है. युवक को एक हिन्दू युवती से प्रेम हो गया. दोनों ने साथ रहने का मन बनाया. 21 दिसंबर 2022 को दोनों शाजापुर कोर्ट पहुंचे, लेकिन जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन के युवा पहुंच गए. इसके बाद युवती को नारी निकेतन भेज दिया गया, जबकि युवक को पुलिस ने घर भेज दिया. हालांकि युवक आरिफ ने अपने प्यार को पाने के लिए धर्म परिवर्तन का मन बनाया.

आरिफ का नाम बदलकर आनंद तिवारी रखा गया
बुधवार को क्षेत्र में विहिप और बजरंग दल का शौर्य संचलन निकाला जाना था. यहां पहुंचकर हिन्दू संगठन के पदाधिकारियों के समक्ष आरिफ खान ने मुस्लिम धर्म छोडऩे की बात कही. मंच पर उपस्थित विहिप-बजरंग दल के मालवा प्रांत के संगठन मंत्री नंददास दंडोतिया ने आरिफ की सहमति से उसे हिन्दू धर्म में शामिल किया. आरिफ ने हिन्दू धर्म अपनाने के लए कलेक्टर काके आवेदन दिया.