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Gau Bharat Bharati Vartalaap I Sanjay Amaan I भारत ने बेचा ४०० करोड़ का गऊ माता का गोबर I Episode 2

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India has earned ₹400 crore in foreign exchange by selling Gau Mata’s (cow dung) products. India, being the world’s largest cattle-producing country, has also become a major exporter of cow dung. Here, approximately 300 million cattle produce around 3 million tons of dung every day. Due to the rising global demand for organic farming, sustainable agriculture, and eco-friendly products, cow dung exports have surged. According to the data for the financial year 2024-25 (April 2024 to November 2025), India has earned approximately ₹400 crore in foreign exchange from cow dung and its value-added products (such as manure, compost, powder). This is higher than the ₹386 crore earned in 2023-24 — a true example of “Waste to Wealth. “Modi ji is doing wonders!

भारत की सबसे छोटी महाज्ञानी : समर्था महालक्ष्मी

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आज जब दुनिया डिजिटल युग की रफ्तार में भाग रही है, वहीं महाराष्ट्र के एक छोटे से कोने से निकली चार साल की एक नन्ही परी ने पूरी दुनिया को यह बता दिया है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, असली ताकत दिमाग और दिल की होती है। हम बात कर रहे हैं भारत की सबसे छोटी महाज्ञानी, पाँच बार की विश्व रिकॉर्ड धारक – समर्था महालक्ष्मी की।
मात्र 14 महीने की उम्र में समर्था ने अपना पहला विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उसके बाद रुकना जैसे उन्हें मंजूर ही नहीं। आज चार साल की छोटी सी उम्र में उनके नाम पाँच विश्व रिकॉर्ड हैं – सभी सामान्य ज्ञान (General Knowledge) के क्षेत्र में। वह विश्व की सबसे कम उम्र की बच्ची हैं जिन्होंने इतनी कम उम्र में इतने रिकॉर्ड अपने नाम किए।लेकिन समर्था सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं हैं।
वह एक साथ कई भाषाओं में भक्ति गीत गाती हैं – संस्कृत, हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और अन्य भारतीय भाषाओं में आध्यात्मिक भजन उनकी आवाज में ऐसा लगता है मानो सदियों पुरानी साधना बोल रही हो।
यही वजह है कि उन्हें “सबसे कम उम्र की भक्ति गायिका” और “आध्यात्मिक प्रतिभा” का खिताब भी मिला है। उनके सम्मानों की सूची देखकर बड़ा से बड़ा इंसान भी दंग रह जाए :

दादासाहब फाल्के अवॉर्ड
महाराष्ट्र रत्न पुरस्कार
नेशनल आइकन अवॉर्ड
ग्लोबल अचीवर अवॉर्ड
इंटरनेशनल कंटेंट क्रिएटर अवॉर्ड
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज द्वारा “भारत की सबसे छोटी जीनियस” की उपाधि
गुरुदेव आचार्य लोकेश मुनि और विवेक ओबेरॉय द्वारा “गौ भारत भारती” में पाँच बार विश्व रिकॉर्ड होल्डर के रूप में सम्मान
DNA के टॉप-10 इंस्पायरिंग लीडर्स में स्थान
ज़ी न्यूज़ के टॉप-18 प्रभावशाली व्यक्तित्व में स्थान
मिड-डे के टॉप-10 इंस्पायरिंग पर्सनैलिटी में स्थान
NDTV पर उनकी पूरी यात्रा पर एक घंटे का डॉक्यूमेंट्री प्रसारित

उन्हें मिले खिताब भी कम गौरवशाली नहीं – भारत की जीनियस, जीके मास्टर, आईक्यू मास्टर, महाराष्ट्र की बेटी, भारत की गौरव बेटी, सबसे कम उम्र की इन्फ्लुएंसर, सबसे कम उम्र की कंटेंट क्रिएटर, असाधारण प्रतिभाशाली बालिका, जीके प्रॉडिजी और न जाने कितने।चार साल की यह बच्ची जब मंच पर खड़ी होकर देश-विदेश के झंडे, राजधानियाँ, करेंसी, महापुरुषों के नाम, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक ग्रंथों की बातें, भजन-कीर्तन सब कुछ एक साथ याद करके सुनाती है तो पूरा हॉल तालियों से गूँज उठता है।

उनकी याददाश्त और एकाग्रता देखकर बड़े-बड़े विद्वान भी हैरान रह जाते हैं।समर्था महालक्ष्मी सिर्फ एक बच्ची नहीं, एक चमत्कार हैं। वह साबित कर रही हैं कि अगर इरादे बुलंद हों, माता-पिता का साथ हो और ईश्वर की कृपा हो तो आकाश भी छोटा पड़ जाता है।यह नन्ही सी बेटी आज पूरे भारत के लिए गर्व की बात है।

वह हम सबको बता रही हैं कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, बस उसे सही दिशा और प्रोत्साहन चाहिए।समर्था महालक्ष्मी – नाम नहीं, एक प्रेरणा है।  भारत माता की यह लाड़ली बेटी आगे चलकर दुनिया में भारत का नाम और ऊँचा करेगी, इसमें कोई शक नहीं। जय हिंद! जय महाराष्ट्र ! और ढेर सारा प्यार हमारी छोटी सी महाज्ञानी समर्था को !

 

वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन पर गौ-तस्करों से मुठभेड़

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वाराणसी। दोहरीघाट थाना क्षेत्र के वाराणसी-गोरखपुर फोरलेन पर तारनपुर गांव के पास गौ-तस्करों के साथ मुठभेड़ में एक व्यक्ति घायल हो गया। यह घटना मंगलवार देर रात हुई, जब पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर एक संदिग्ध ट्रेलर को रोकने का प्रयास किया।

ट्रेलर में गौवंश भरा हुआ था, जिसे तस्कर अवैध रूप से ले जा रहे थे। जब पुलिस ने ट्रेलर को रोकने का इशारा किया, तो तस्करों ने पुलिस पर गोलियां चलाईं। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जबकि उसके पांच साथी गिरफ्तार कर लिए गए।

यह मुठभेड़ दोहरीघाट के तारनपुर हाईवे पर हुई, जहां सीओ जितेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ चेकिंग कर रहे थे। गोरखपुर की ओर से आ रहे एक बड़े ट्रेलर को संदिग्ध मानकर रोकने का प्रयास किया गया। तस्करों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने भी मोर्चा संभालते हुए कार्रवाई की।

पुलिस ने ट्रेलर की तलाशी ली, तो उसमें दर्जनों गायें और बछड़े ठूंसकर ले जाए जा रहे थे। सीओ जितेंद्र सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपी एक सक्रिय गिरोह के सदस्य हैं, जो अवैध रूप से गोवंश को बिहार ले जाकर गोकशी के लिए बेचते थे।

पुलिस ने मौके से एक स्कॉर्पियो (नंबर BR 44 V 1809) और एक ट्रक (नंबर BR 01 GB 7456) को जब्त किया। ट्रक में कुल 12 गायें और 11 बछड़े पाए गए, जिनमें से एक गाय गर्भवती थी। सभी गोवंश को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान राजकुमार (15 वर्ष, निवासी छपरा), मकरध्वज यादव (42 वर्ष, निवासी बक्सर), रजनीकांत पांडे (37 वर्ष, निवासी बक्सर), लखन यादव (26 वर्ष, निवासी बक्सर), रामनारायण यादव (निवासी बक्सर) और बबलू यादव (21 वर्ष, निवासी छपरा) के रूप में हुई है। बबलू यादव वही आरोपी है, जिसके पैर में गोली लगी थी। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस ने सभी अभियुक्तों, गोवंश, ट्रक और स्कॉर्पियो को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस घटना ने स्थानीय समुदाय में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस प्रशासन ने इस प्रकार की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने का आश्वासन दिया है।

विशिष्ट लोगों को सम्मानित करते हुए डॉ. कृष्णा चौहान ने किया बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड 2025 का सातवीं बार भव्य आयोजन

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संगीतकार दिलीप सेन, सुनील पाल, सिंगर ऋतु पाठक, के. के. गोस्वामी, एसीपी संजय पाटिल, निर्माता अनिल सिंह, दीपक देसाई, रमेश गोयल, संगीतकार वैष्णव देवा, ब्राइट आउटडोर मीडिया के डॉ योगेश लखानी, सहित कई हस्तियों को मिला सम्मान

मुम्बई। लगातार अवॉर्ड शो करने में सबसे आगे डॉ. कृष्णा चौहान द्वारा 1 दिसम्बर 2025 को ‘बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड 2025 का भव्य आयोजन मेयर हॉल, अंधेरी पश्चिम मुंबई में संपन्न हुआ। इस बार इस अवॉर्ड का सातवां संस्करण सफलतापूर्वक किया गया जहां बॉलीवुड के दिग्गजों सहित राजनीतिक, प्रशासनिक, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र के विशिष्ट लोगों को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही इस कार्यक्रम में दिग्गज अभिनेता दिवंगत धर्मेंद्र का स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। वहीं भारतीय फिल्मों और उसकी तरक्की में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को पुरस्कृत किया गया।

अवॉर्ड शो में एसीपी संजय पाटिल, दीपक देसाई, निर्माता अनिल सिंह, ब्राइट आउटडोर मीडिया के डॉ योगेश लखानी, सिंगर ऋतु पाठक, संगीतकार दिलीप सेन, रमेश गोयल, कॉमेडियन सुनील पाल, संगीतकार वैष्णव देवा, संदीप गोपीनाथ महामुंकर सहित कई हस्तियों को सम्मानित किया गया। भारती छाबड़िया और नितिन आनंद की एंकरिंग ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। वहीं सिंगर नरेश और सागर आचार्य ने फिल्मी गीत गाया और डांसर एक्ट्रेस शिरीन फरीद ने मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी।

संगीतकार दिलीप सेन ने डॉ कृष्णा चौहान की प्रशंसा करते हुए कहा कि अब वह अवॉर्ड किंग की उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।
सभी सम्मानित अतिथियों ने एक सुर में कहा कि साल के हर दूसरे महीने अवॉर्ड शो का आयोजन करना बड़े ही हिम्मत का काम है। कृष्णा चौहान पिछले सात वर्षों से निरंतर पांच से छह अवॉर्ड शो करते हैं और प्रतिभाओं को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाते हैं, जो कि एक प्रशंसनीय कार्य है। वे एक नेक दिल इंसान हैं क्योंकि अपने सभी शो में हमें आमंत्रित करते हैं और हमारे हाथों से नए नए लोगों को सम्मानित करवाते हैं। हम कृष्णा के हौसले को सलाम करते हैं सचमुच इस बन्दे में हैं दम।
उल्लेखनीय है कि डॉ कृष्णा चौहान न केवल एक फिल्म निर्देशक एवं समाजसेवक हैं बल्कि अवार्ड्स फंक्शन करने के मामले में सबसे अधिक चर्चा में रहते हैं। वह केसीएफ के अंतर्गत बॉलीवुड लीजेंड अवॉर्ड, बॉलीवुड आइकोनिक एवॉर्ड, लीजेंड दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड, महात्मा गांधी रत्न अवार्ड, राष्ट्रीय रत्न सम्मान का आयोजन पिछले कुछ वर्षों से करते आ रहे हैं।

डॉ. कृष्णा चौहान ने अनिल सिंह, एसीपी संजय पाटिल, दीपक देसाई, दिलीप सेन, सुनील पाल, सिंगर ऋतु पाठक, ब्राइट आउटडोर मीडिया के योगेश लखानी, सिंगर एनके नरेश, सागर आचार्य, विक्की नागर, भारती छबड़िया, प्रवीण वाडकर, अंकिता सिन्हा, संगीतकार वैष्णव देवा सहित कई हस्तियों को अवॉर्ड देकर सम्मानित किया।
साथ ही गोपाल दह्याभाई सुथार, कुनाल सिद्धू (लाइन प्रोड्यूसर), फहीम इस्लाम (सिंगर) शांतनु भामरे (एक्टर, प्रोड्यूसर), एक्ट्रेस कबीना महारजन, एक्टर अक्षर भारद्वाज, नितिन आनंद (एंकर), जितेन्द्र सुरती (सिंगर), संजना सिंह, निशा दुबे, सिंगर जय और एक्ट्रेस मिस राधिका को भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. कृष्णा चौहान के निर्देशन में बनी हिंदी म्युज़िक वीडियो “मुलाकातें” भी रिलीज की गई जिसके गीतकार संगीतकार पप्पू कुमार और एडिटर अगस्त्य कुमार हैं। इसके अलावा निर्देशक डॉ. कृष्णा चौहान का गीत “जिसकी बाँह पकड़ ले बाबा” भी रिलीज किया गया। गायक डी सी मदाना की आवाज में ये गीत कृष्णा म्युज़िक द्वारा रिलीज हुआ। इस गीत के निर्माता बी के पाठक हैं जबकि संगीत हरीश मिलन ने दिया है। इसके गीतकार और गायक डी. सी. मदाना एवं डीओपी पप्पू के शेट्टी हैं। दोनों गाने कृष्णा म्यूजिक कंपनी द्वारा रिलीज हुई है जिसे यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकता है।

– संतोष साहू

गो विधायकों का शंकराचार्य जी ने कराया सपथ ग्रहण समारोह

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गो विधानसभा सत्र होगा चालू

सनातनी भारत में विदेशी राजनीति देश के पतन का मूल कारण है ।

पटना-बिहार  आज जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने गो विधायकों को शपथ दिलाई और अतिशीघ्र गो विधानसभा का सत्र बुलाया जाएगा और उसमें कई प्रस्ताव पारित किया जाएगा। विधानसभा जैसी होगी कार्रवाई।  विश्वगुरु जैसा आदर सूचक शब्द भी आज के भारत में ज़ुमले जैसा लगता है क्यो की भारत जो सनातन संस्कृति का मूला है जो हमारी देवभूमि, धर्मभूमि और कर्मभूमि है वहाँ रूस, चीन, ब्रिटेन और अमेरिका की संस्कृति राजनीति के रूप में भारत को निगल रही है, आज भारत के हित की बात नहीं विदेशी सत्ता को प्रसन्न रखने बाली सरकारे यहाँ स्थापित हो रही है जिस कारण भारत अपनी सभ्यता और संस्कृति-विरासत से दूर हो रहा है, जब किसी राष्ट्र की मूल भावना पर उसका अधिकार समाप्त हो जाता है तब वह देश ग़ुलाम होता जाता हैं ।

आज पत्रकारो को सम्बोधित करते हुए जगतगुरु शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुकेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि भारत दिन प्रतिदिन अपने मूल से दूर हो रहा है, मीडिया ने भ्रम पैदा कर आधुनिकता के प्रदर्शन को ही यहाँ की संस्कृति स्थापित करने का कार्य किया जिस कारण आज का युवा अपने देश के भूगोल, इतिहास, संस्कृति, सभ्यता, संस्कारों और विरासतों से अनजान हो रहा है यह दुर्भाग्य पूर्ण है ।

शंकराचार्य जी ने कहा कि भारत के मूल में धर्म का स्थान है और धर्म की शक्ति गो माता में निहित है जब देश में माँ रूपा गो की निर्मम हत्या हो रही हो उस परिस्थिति में देश को बचाने की और जानता को पापी होने के कारण से अवगत करा कर धर्म पथ पर ले आने का दायुत्व धर्म प्रमुखों का ही होता है ।

इसी लिए हमने दिनांक १३/०९/२०२५ से १३/१०/२०२५ तक निरन्तर बिहार प्रदेश के सभी जिलों में पहुँच कर जानता को वर्तमान राजनैतिक सत्यता से अवगत कराया, गो माता का संरक्षण, सम्बर्धन हो गो हत्या बंद हो और वेदलक्षणा गो माता राष्ट्रमाता घोषित हो, भारत सनातनी राजनीति का पोषक बने इस हेतु बिहार की लगभग २०० विधान सभाओं में गो माता के रक्षा की प्रतिज्ञा करने बाले प्रत्याशी चुनाव लड़े जिनके वोटो की संख्य ५ लाख ८६ हज़ार रही अर्थात् बिहार में इतने गो भक्त चिह्नित हुए ।

बिहार की सभी विधान सभाओं में गो विधायकों का आज शपथ ग्रहण हुआ सभी ने प्रतिज्ञा की वह गो माता के रक्षार्थ और सनातनी राजनीति को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास रत रहेगे ।

शंकराचार्य जी ने कहा कि जल्दी ही गो सेना का गठन किया जाएगा हमारे प्रशिक्षित गो सैनिक गो माता की रक्षा हेतु सड़को में, जिलों के और प्रदेशों के बार्डर में तैनात रहेगे, अब किसी भी क़ीमत पर धर्म का विनाश हमे स्वीकार नहीं होगा ।

मुंबई: जोगेश्वरी स्टेशन पर 17 साल के छात्र की मौत निकली सुसाइड, ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़ा केस, 8 आरोपी

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मुंबई:  मुंबई के जोगेश्वरी रेलवे स्टेशन पर इस साल जनवरी में हुई 17 साल के लड़के की मौत को शुरुआत में पुलिस ने हादसा मानकर ADR दर्ज किया था, लेकिन करीब 11 महीने बाद अब पूरा मामला ऑनलाइन ठगी से जुड़ा सुसाइड निकला है. जांच में सामने आया है कि साइबर फ्रॉड के जाल में फंसकर लड़के ने करीब ₹49,000 गंवा दिए थे और मानसिक दबाव में आकर ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी. इस मामले में अंधेरी रेलवे पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत कई धाराओं में FIR दर्ज कर ली है

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

लड़का जोगेश्वरी के मेघवाड़ी इलाके में अपने माता-पिता के साथ रहता था. पिता निलेश ड्राइवर हैं, जबकि लड़का 12वीं कॉमर्स का छात्र था और सरवोदय नगर स्थित दीपक क्लासेस में ट्यूशन भी जाता था. 10वीं पास करने के बाद उसके पिता ने उसे मोबाइल दिया था, जिसके जरिए उसने कई सोशल मीडिया अकाउंट बनाए. इसी फोन पर उसे ऑनलाइन “टास्क” का लालच दिया गया.

छोटे-छोटे रिव्यू और रेटिंग का काम कर कमाई का झांसा

शुरू में ठगों ने कुछ पैसों का भुगतान करके भरोसा जीता, फिर हर टास्क के बदले पैसे भेजने को कहा और आखिर में पूरा ₹49,000 हड़प लिया. जब पैसा वापस नहीं मिला और दबाव बढ़ता गया तो लड़का मानसिक रूप से टूट गया.

कब हुआ हादसा

21 जनवरी 2025 को लड़का घर से निकला और कहा कि वह क्लासेस के लिए जा रहा है. देर रात तक घर नहीं लौटा तो परिवार परेशान हो गया. इस बीच खबर आई कि जोगेश्वरी रेलवे स्टेशन पर एक युवक को ट्रेन ने टक्कर मारी है. परिवार जब कूपर अस्पताल पहुंचा, तो मृतक की पहचान हुई. लड़के का टूटा हुआ मोबाइल बाद में मरम्मत कर पुलिस को मिला, जिसके बाद उसके WhatsApp और Telegram चैट खुल सके, यही से असली कहानी सामने आई.

किन पर लगा आरोप?

जांच में पुलिस को Telegram चैट में कई नाम मिले, जिनमें आठ संदिग्ध के नाम आए. पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने मिलकर लड़के को झांसा दिया, पैसे ऐंठे और मानसिक तनाव की वजह से उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया.

अब आगे क्या?

लड़के के पिता की शिकायत के आधार पर अंधेरी रेलवे पुलिस ने अब मामला दर्ज कर लिया है. धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराएं लगाई गई हैं. क्राइम ब्रांच भी इस केस में शामिल होकर आरोपियों की तलाश कर रही है.

हेल्पलाइन
वंद्रेवाला फाउंडेशन फॉर मेंटल हेल्‍थ 9999666555 या help@vandrevalafoundation.com
TISS iCall 022-25521111 (सोमवार से शनिवार तक उपलब्‍ध – सुबह 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक)
(अगर आपको सहारे की ज़रूरत है या आप किसी ऐसे शख्‍स को जानते हैं, जिसे मदद की दरकार है, तो कृपया अपने नज़दीकी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ के पास जाएं)

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पशुपालन एवं डेयरी विभाग देश में निम्नलिखित योजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है

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राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के पूरक और अनुपूरक के रूप में पशुपालन एवं डेयरी विभाग देश में निम्नलिखित योजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है

पिछले पांच वर्षों में दूध की औसत कीमत में कोई गिरावट नहीं आई है और यह लगातार बढ़ रही है। दूध को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)/उत्पाद शुल्क से छूट प्राप्त है।

 

दूध खरीद औसत मूल्य* (रु./लीटर)
वर्ष भैंस का दूध (वसा-6 प्रतिशत और एसएनएफ 9 प्रतिशत) गाय का दूध (वसा-3.5 प्रतिशत और एसएनएफ

8.5 प्रतिशत)

2021-22 39.8 29.4
2022-23 44.3 33.6
2023-24 46.5 35.2
2024-25 47.5 35.5
2025-26 49.2 36.7
*स्रोत: दुग्ध संघ/ फेडरेशन

मूल्य में राज्य सरकारों द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी शामिल है

 

स्तनपान के दौरान, 4-5 महीने के बाद दूध का उत्‍पादन आमतौर पर कम हो जाती है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसके अलावा, भारत में गाय-भैंसें औसतन 10-12 साल की उम्र तक दूध देती हैं।

  1. संविधान के अनुच्छेद 246(3) के अनुसार संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण के अंतर्गत पशुओं का संरक्षण एक ऐसा मामला है जिस पर राज्य विधानमंडल को कानून बनाने की विशेष शक्तियां प्राप्त हैं।
  2. पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) देश में दूध की कीमतों का विनियमन नहीं करता है। सहकारी और निजी डेयरियों द्वारा दूध की कीमतें उनकी उत्पादन लागत और बाजार के आधार पर तय की जाती हैं। हालांकि, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के पूरक और अनुपूरक के रूप में देश भर में निम्नलिखित योजनाओं को लागू कर रहा है:
  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम)
  • राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी)
  • डेयरी गतिविधियों में संलग्न डेयरी सहकारी समितियों एवं किसान उत्पादक संगठनों को सहायता प्रदान करना (एसडीसीएफपीओ)
  • पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ)
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम)
  • पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी)

ये योजनाएं गोजातीय पशुओं की दुग्ध उत्पादकता में सुधार, डेयरी सहकारी समितियों के नेटवर्क का विस्तार, डेयरी अवसंरचना को सुदृढ़ करने, कार्यशील पूंजी की आवश्यकता, चारे की उपलब्धता बढ़ाने और पशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायक हो रही हैं। ये हस्तक्षेप दुग्ध उत्पादन की लागत को कम करने और डेयरी फार्मिंग से दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने में भी सहायक हैं।

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​लल्लन सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

Jammu Kashmir – गौ-तस्करी का भंडाफोड़

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घगवाल (लोकेश): जम्मू-कश्मीर में गौ-तस्करी का बड़ा खुलासा हुआ है। सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही शादी-ब्याह का दौर भी तेज हो गया है। ऐसे में पशु तस्करों ने अपनी पुरानी रणनीतियों को बदलकर नए और चौंकाने वाले तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। इसी बदलती चाल का सबसे ताजा और सबसे बड़ा सबूत घगवाल में देखने को मिला, जहां पशु तस्करों ने पहली बार एक यात्री बस को ही गौ-तस्करी का साधन बना डाला।

यह मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि जम्मू-कश्मीर की अब तक की सबसे बड़ी और सबसे अनोखी गौ-तस्करी कोशिश के रूप में दर्ज हो गया है, जिसे घगवाल पुलिस ने अपनी तत्परता और सूझबूझ से विफल कर दिया। जानकारी के अनुसार एसएसपी सांबा वरिंद्र सिंह मनहास के दिशा निर्देश पर थाना प्रभारी घगवाल नवीन अंग्राल के नेतृत्व में तड़के सुबह करीब 5 बजे घगवाल पुलिस टप्याल क्षेत्र में नाका लगाकर नियमित जांच कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध पैसेंजर बस नाके की ओर आती दिखाई दी। पुलिस ने रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक अचानक बस को तेज़ गति से भगाते हुए नाका तोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए भागने लगा।

पुलिस टीम ने तुरंत पीछा किया। चालक ने कुछ दूरी पर बस को सड़क किनारे छोड़कर फरार होने में सफलता हासिल कर ली। जब पुलिस ने बस का दरवाजा खोला, तो सामने आया जम्मू-कश्मीर के इतिहास का सबसे हिला देने वाला दृश्य था। यात्री सीटों की जगह 6 गौवंश मवेशी रस्सियों से क्रूरतापूर्वक बांधकर भरे हुए मिले। बस को तुरंत जब्त किया गया और सभी मवेशियों को सुरक्षित छुड़ाकर गौशाला भेज दिया गया। पुलिस ने पशु तस्करी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसी दौरान एक और बड़ी सफलता हाथ लगी जब पुलिस ने एक 407 टेंपो लोड कैरियर को भी रोका, जिसमें 8 मवेशी अवैध रूप से भरे हुए मिले। उसे भी कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इस प्रकार घगवाल पुलिस ने कुल 14 मवेशियों को क्रूर तस्करी से बचाकर एक बार फिर साबित कर दिया है कि क्षेत्र में अवैध पशु परिवहन किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अब फरार चालक और पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है, ताकि इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्दियों में और विशेष रूप से शादी के मौसम में पशु तस्करी के प्रयास बढ़ जाते हैं, क्योंकि तस्कर रात के अंधेरे और मौसम का फायदा उठाते हुए अलग-अलग नए तरीके अपनाते हैं। लेकिन इस बार उनका यह नायाब तरीका भी घगवाल पुलिस के आगे टिक न सका।

पर्यावरण संरक्षण – बल्कि समग्र जीव कल्याण का माध्यम

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(निखिलेश महेश्वरी-विनायक फीचर्स)

आज पूरे विश्व में जिस विषय पर सबसे अधिक चर्चा हो रही है, वह है पर्यावरण संरक्षण। परंतु प्रश्न यह खड़ा होता है कि पर्यावरण की रक्षा किससे करनी है? और संकट उत्पन्न किसने किया है? धरती पर रहने वाले समस्त जीव-जंतु प्रकृति द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार जीवन जीते हैं। केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जिसने अपनी बढ़ती इच्छाओं, लालच और अंधाधुंध उपभोग के कारण पृथ्वी के संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया। इसका परिणाम यह हुआ कि जल, जंगल, जमीन, वायु और ध्वनि जैसे सभी प्रकार के प्रदूषण बढ़ गए और संपूर्ण जीव-जगत एक गंभीर संकट में पहुँच गया।

ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठना भी स्वाभाविक है कि समाधान कहाँ है? इसका उत्तर हमें भारत की प्राचीन, वैज्ञानिक और प्रकृति-सम्मत पर्यावरण दृष्टि में मिलता है। प्रकृति को मातृरूप में देखने वाली भारतीय संस्कृति मनुष्य को प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का मार्ग दिखाती है। यदि मनुष्य इस भारतीय दृष्टि को अपनाते हुए अपनी जीवनचर्या को पर्यावरण अनुकूल बनाता है, तभी पर्यावरण संरक्षण संभव है। अतः आवश्यक है कि मनुष्य अपनी आदतों, आवश्यकताओं और उपभोग की सीमाओं पर पुनः विचार कर प्रकृति के अनुकूल जीवन को अपनाए। क्योंकि प्रकृति बचेगी तो पृथ्वी बचेगी, और पृथ्वी बचेगी तो ही मानवता सुरक्षित रह पाएगी।

आज विश्व जिन पर्यावरणीय संकटों से जूझ रहा है उसका बड़ा कारण पश्चिमी विकास मॉडल है, जो अधिक से अधिक उपभोग पर आधारित है। वहाँ पेड़, पर्वत, नदियाँ और पशु सबको मनुष्य के उपयोग की वस्तु माना गया है। इसी मानसिकता के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हुआ। विश्व के “जी-7” देश अकेले दुनिया के करीब 80% संसाधनों का उपयोग करते हैं, फिर भी प्रदूषण का दोष विकासशील देशों पर डालते हैं। जब तक विकसित देश अपनी जीवनशैली में संयम और संतुलन नहीं अपनाएँगे, तब तक वैश्विक पर्यावरण संकट का समाधान संभव नहीं होगा।


रासायनिक खेती ने मिट्टी की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित किया है। रासायनिक उर्वरक मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों और केंचुओं को नष्ट कर देते हैं, जिससे मिट्टी का पोषण, नमी और हवा का संतुलन टूट जाता है। कई वर्ष तक रासायनिक खेती करने पर फसलें आकार में बड़ी तो दिखती हैं, पर उनमें पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इन रसायनों के अवशेष मानव शरीर में पहुँचकर अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं।

इसी प्रकार जंगलों का विनाश भी बड़ी समस्या बन चुका है। स्वतंत्रता के समय भारत में लगभग 22% भूमि पर जंगल थे, परंतु प्राकृतिक जंगल लगातार कम होते जा रहे हैं। कृत्रिम वृक्षारोपण से आँकड़े भले ही बढ़े हुए दिखें, लेकिन प्राकृतिक जंगलों की जैव विविधता और मिट्टी को जो लाभ मिलता था, वह अब कम हो रहा है।

मनुष्य आज अपने सौंदर्य, सजावट और विलासिता के लिए, जानवरों के विनाश का कारण बन रहा है। पशुओं की चमड़ी, हड्डियों, तेल और हाथीदाँत से बनने वाले उत्पादों ने कई प्रजातियों को खत्म होने की कगार पर पहुँचा दिया है। यह उपभोग पर आधारित सोच का ही दुष्परिणाम है।

इसके विपरीत भारतीय संस्कृति हर जीव को प्रकृति के संतुलन का आवश्यक अंग मानती है। यहाँ पेड़ों, नदियों, पर्वतों को माता कहा गया। साँपों को भी नागपंचमी पर दूध पिलाकर यह संदेश दिया जाता है कि हर प्राणी का अस्तित्व मूल्यवान है। जनमेजय के सर्प-यज्ञ को रोकने वाले आस्तिक मुनि का संदेश भी यही था कि किसी भी प्रजाति का विनाश पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ देता है।

मनुष्य आज सौन्दर्य प्रसाधन, सजावट की वस्तुओं और विलासिता के लिए अनेक जीवों का विनाश कर रहा है। जानवरों की चमड़ी, तेल, हड्डियों और खून से बनने वाले उत्पादों तथा हाथीदाँत के व्यापार ने कई प्रजातियों को विनाश के कगार पर ला दिया है। यह पश्चिमी उपभोग आधारित सोच का परिणाम है।

भारतीय दृष्टि इसके विपरीत हर जीव को उद्देश्यपूर्ण मानती है। धरती, नदियाँ और वृक्षों को माता मानने की परंपरा ने समाज में प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना जगाई। यहाँ तक कि साँपों और नागों को भी दूध पिलाकर उनके अस्तित्व को महत्व दिया गया, क्योंकि हर जीव प्रकृति के संतुलन का भाग है। जनमेजय के सर्प-यज्ञ को रोकने वाले आस्तिक का संदेश भी यही था कि किसी प्रजाति का विनाश पूरे पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ देता है।

महात्मा गांधी आजीवन कहते रहे कि भारत का विकास गाँवों के आधार पर होना चाहिए। उनका मानना था कि भारतीय जीवन-दृष्टि के आधार पर विकसित समाज ही अंतिम व्यक्ति तक सुख और सुविधा पहुँचा सकता है। परंतु पश्चिमी मॉडल को अपनाने से शहर तो चमक उठे, पर गाँव, किसान और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोग पिछड़े ही रह गए। इससे सामाजिक और पर्यावरणीय असंतुलन दोनो बिगड़ गया।

जंगलों की कटाई का दोष अक्सर गरीबों पर लगाया जाता है, जबकि वास्तविक कारण अमीरों की उपभोगवादी प्रवृत्ति है। भारी लकड़ी के फर्नीचर, सजावटी वस्तुएँ, बड़े पलंग, और टिश्यू पेपर बनाने के लिए कटने वाले अनगिनत पेड़। स्पष्ट है कि पर्यावरण संकट गरीबों के कारण नहीं, बल्कि अमीरीकरण के कारण है। जबकि हमारे पूर्वजों ने कहा “तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः” अर्थात् त्यागपूर्वक उपभोग करो।

भारतीय चिंतन में मनुष्य को प्रकृति का स्वामी नहीं, बल्कि उसका सहयात्री और संरक्षक माना गया है। इसी कारण यहाँ मितव्ययिता, अपरिग्रह और न्यूनतम संग्रह की भावना को सर्वोपरि बताया गया है।

भारतीय दर्शन में यह संदेश दिया गया है कि लेने से अधिक लौटाना ही सच्चा धर्म है। इसी संदर्भ में भगवद्गीता की यह प्रार्थना इसका स्पष्ट प्रमाण है—
“जीवने यावदादानं स्यात्, प्रदानं ततोऽधिकम्।
इत्येषा प्रार्थनास्माकं भगवन् परिपूर्यताम्॥” जिसका अर्थ है “जीवन में हम जितना लेते हैं, उससे अधिक लौटाने की क्षमता और संकल्प हमें प्राप्त हों, भगवान, हमारी यह प्रार्थना पूर्ण करें।” इसी मार्ग पर चलते हुए मनुष्य अपने स्वभाव में परिवर्तन ला सकता है और पृथ्वी को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और संतुलित रूप में संरक्षित कर सकता है।
पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत हमें अपने स्वयं के घर से ही करनी होगी। प्रकृति की रक्षा और संरक्षण प्रत्येक मनुष्य का मौलिक कर्तव्य है, परंतु आज मनुष्य इसी कर्तव्य से विमुख होता जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि हमारी पारंपरिक जीवन शैली पूरी तरह प्रकृति आधारित थी और अब हमें उसी दिशा में लौटने की आवश्यकता है।
इस परिवर्तन की शुरुआत बहुत सरल कार्यों से हो सकती है,जैसे पानी बचाएँ, प्लास्टिक हटाएँ और पेड़ लगाएँ।
दूध-सी बहती नदी की धार पुकार रही बार-बार,
दूषित कर तूने मनुष्य, उसे कर दिया है लाचार।

पीने योग्य जल पृथ्वी पर सीमित मात्रा में उपलब्ध है और इसकी कमी निरंतर बढ़ती जा रही है। पानी को हम बना तो नहीं सकते, लेकिन समझदारी से इसका संरक्षण अवश्य कर सकते हैं।
प्रयागराज में कांग्रेस महासमिति की बैठक चल रही थी। मोतीलाल नेहरू, लाला लाजपत राय, मदन मोहन मालवीय और महात्मा गांधी सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित थे। भोजन के बाद जब हाथ धोने का समय आया, तो जवाहरलाल नेहरू ने एक लोटा पानी लेकर गांधीजी के हाथ धुलाएं। गांधीजी चर्चा में इतने मग्न थे कि एक लोटा पानी अनजाने में समाप्त हो गया। नेहरू जी दूसरा लोटा लाने लगे, तभी गांधीजी का ध्यान गया और वे तुरंत बोले- “मैं एक लोटे पानी में हाथ नहीं धो सका, यह मेरे लिए अपराध है।”

नेहरू जी आश्चर्य से बोले- “बापू, यह प्रयागराज है। यहाँ तो गंगा-यमुना बह रही हैं, इतनी चिंता क्यों?”
गांधीजी ने शांत स्वर में उत्तर दिया- “गंगा-यमुना केवल मेरे लिए नहीं बहतीं। करोड़ों मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी इन्हीं से जीवन पाते हैं। यदि मैं आवश्यकता से अधिक पानी लेता हूँ, तो किसी और का हिस्सा कम कर देता हूँ।”
गांधीजी का यह प्रसंग इस बात का संदेश है कि प्राकृतिक संसाधन केवल मनुष्यों के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रकृति के प्रत्येक जीव के लिए समान रूप से बने हैं। इसलिए इनका उपयोग हमेशा संयम और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।
पॉलिथीन का अत्यधिक उपयोग आज कचरा प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इसलिए प्रभावी कचरा प्रबंधन के साथ-साथ प्लास्टिक उन्मूलन की दिशा में ठोस कदम उठाना अनिवार्य है।

प्लास्टिक के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाना होगा, पॉलिथीन का न्यूनतम उपयोग करना होगा, और पुनर्चक्रण की संस्कृति विकसित करना होगी। इन्हें ही समाधान का मूल मंत्र मानकर कार्य करना होगा।
पौधारोपण, वृक्षारोपण और जैविक कृषि भारतीय संस्कृति के मूल में रहे हैं। हमारे यहाँ पेड़ केवल पर्यावरणीय आवश्यकता के लिए नहीं, बल्कि लोक कल्याण की भावना से प्रेरित होकर लगाए जाते थे। इतिहास में अहिल्याबाई होल्कर जैसे अनेक उदाहरण मिलते हैं, जिन्होंने वृक्षारोपण को समाज हित का महत्वपूर्ण कार्य माना।

भारतीय परंपरा में पेड़ों की समूह-रचना का भी विशेष महत्व रहा है। पंचवटी, त्रिवेणी जैसे वृक्षसमूह इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। ऐसे समूह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक ही नहीं थे, बल्कि उनमें इस तरह के वृक्ष लगाए जाते थे कि पक्षियों और जीव-जंतुओं को वर्ष भर भोजन और आश्रय मिल सके। इस प्रकार भारतीय अवधारणा में वृक्षारोपण केवल प्रकृति-संरक्षण नहीं, बल्कि समग्र जीव कल्याण का माध्यम रहा है। “हमारे द्वारा उठाए गए ये छोटे-छोटे कदम ही पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।”

भारत का चिंतन समग्रता पर आधारित है। समय बदल गया है, पर हमारी प्रकृति-सम्मत जीवन-दृष्टि आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। अब आवश्यकता है कि भारत एक ऐसा विकास मॉडल प्रस्तुत करे जिसमें पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था,तीनों का संतुलन हो। यह दायित्व हम सबका है। यदि हम अपनी परंपरा के सिद्धांतों को अपनाएँगे, तो निश्चित ही एक स्वस्थ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य का निर्माण कर पाएँगे। (विनायक फीचर्स)

नेशनल हेराल्ड केस : भ्रष्टाचार या राजनीतिक प्रतिशोध

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(मनोज कुमार अग्रवाल -विनायक फीचर्स)

नेशनल हेराल्ड मामले में श्रीमती सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने नेशनल हेराल्ड केस में मामला दर्ज किया है। आरोपों के मुताबिक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की दो हजार करोड़ रुपये की संपत्ति 50 लाख रुपये में खरीदी गई थी। दोनों नेताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने नई प्राथमिकी दर्ज की है। इस में सोनिया और राहुल के अलावा कुल छह अन्य लोगों और तीन कंपनियों के नाम शामिल हैं।
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आर्थिक अपराध शाखा ने राहुल और सोनिया गांधी समेत 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपों के मुताबिक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिडेट की दो हजार करोड़ रुपये की संपत्ति महज 50 लाख रुपये में हड़प ली गई थी। इस मामले में एजेएल ने 6 लोगों और 3 कंपनियों को आरोपी बनाया है।नेशनल हेराल्ड केस की जांच कर रही इडी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने केस दर्ज किया है। कांग्रेस पार्टी से जुड़ी एसोसिएटेड जर्नल्स को धोखाधड़ी से कब्जाने की साजिश का आरोप लगा है।
सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेशनल हेराल्ड केस की जांच पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को सौंपी थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने 3 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस के स्वामित्व वाली संस्था एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण धोखाधड़ी के जरिए किया गया। एसोसिएट जर्नल की कुल संपत्ति लगभग 2000 करोड़ रुपये बताई गई है। यह अधिग्रहण यंग इंडियन के माध्यम से किया गया था, जिसमें गांधी परिवार की 76 फीसदी हिस्सेदारी बताई जाती है।
नई एफआईआर में सोनिया और राहुल के अलावा इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा और तीन अन्य व्यक्तियों के नाम भी दर्ज किए गए हैं। जिन कंपनियों को एफआईआर में शामिल किया गया है, उनमें एजेएल, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ​इडी ने 9 अप्रैल,2025 को सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और डोटेक्स के प्रमोटर के खिलाफ नेशनल हेराल्ड/एसोसिएटेड जर्नल्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक चार्जशीट दायर की थी। ताज़ा एफआईआर में सोनिया गांधी (आरोपी संख्या 1) राहुल गांधी (आरोपी संख्या 2)सुमन दुबे (आरोपी संख्या 3) सैम पित्रोदा (आरोपी संख्या 4)​ मेसर्स यंग इंडियन (आरोपी संख्या 5)​ मेसर्स डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड (आरोपी संख्या 6)सुनील भंडारी (आरोपी संख्या 7)बनाए गए हैं।
आरोप है कि कोलकाता स्थित तीन फर्जी कंपनियों के माध्यम से यंग इंडियन को 1 करोड़ रुपये दिए गए और सिर्फ 50 लाख रुपये में एसोसिएट जर्नल का अधिग्रहण किया गया, जबकि एसोसिएट जर्नल की संपत्ति 2000 करोड़ रुपये आंकी गई है। माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस जल्द ही एजेएल के शेयरधारकों से पूछताछ कर सकती है।
गांधी परिवार पर आरोप है कि इस संपत्ति को हड़पने के लिए यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड नाम का इस्तेमाल किया गया। ये कंपनियां कथित तौर पर कोलकाता की शेल कंपनियां हैं, जिसने यंग इंडिया को एक करोड़ रुपये दिए थे। जिससे गांधी परिवार ने कांग्रेस को 50 लाख रुपये देकर एसोसिएट जर्नल को कथित तौर पर 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदने के लिए कहा था।
गौरतलब है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरूआत की थी। इसकी संपत्ति दिल्ली, मुंबई, लखनऊ समेत कई शहरों में फैली थी। एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी अखबार के प्रबंधन का जिम्मा संभालती थी। आरोपों के मुताबिक जिस वक्त नेशनल हेराल्ड की संपत्ति गांधी परिवार को महज 50 लाख रुपये में बेची गई उस वक्त उसकी कीमत 2,000 करोड़ रुपये थी।
नेशनल हेराल्ड केस में 2008 से 2014 के बीच मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। वर्ष 2014 में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत के आधार पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया था। 9 अप्रैल को गांधी परिवार समेत अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। गांधी परिवार ने पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट दोनों में चुनौती दी, लेकिन अदालतों ने कोई राहत नहीं दी। ​चूंकि यह मामला हजारों करोड़ की एजेएल की संपत्तियों और शेयरों के रूप में अपराध की आय बनाने, कब्जे और उपयोग से संबंधित है, इसलिए ₹ 752 करोड़ मूल्य की एजेएल की संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए इडी ने 20 नवंबर 2023 को अटैच करने का आदेश जारी किया था, जिसकी निर्णायक प्राधिकारी ने पुष्टि कर दी है।
​इडी की जांच रिपोर्ट आयकर विभाग के यंग इंडियन मामले में 27 नवंबर 2017 के आदेश को और आगे बढ़ाती है। 2017 में, आईटी विभाग ने यंग इंडियन के हाथों एजेएल की संपत्तियों के अवैध अधिग्रहण पर ₹414 करोड़ से अधिक की बड़ी टैक्स चोरी पाई थी। हालांकि इडी के आरोपों को कांग्रेस पार्टी लंबे समय से खारिज करती आ रही है। कांग्रेस का कहना है कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी एजेंसियों का इस्तेमाल कर गांधी परिवार को परेशान कर रही है। कांग्रेस ने लगातार आरोपों को गलत बताया है और इडी पर सरकार के कहने पर राजनीतिक चाल चलने का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ बीजेपी इसे कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार का भ्रष्टाचार बताती रही है।
राजनीतिक हल्के में ताजा एफआईआर से हड़कंप मच गया है। कयास है कि राहुल गांधी को नेशनल हेराल्ड मामले के आगे बढ़ने पर नेता प्रतिपक्ष पद भी छोड़ना पड़ सकता है। संभावना है कि अब सरकार विपक्ष पर हावी होने के लिए नई स्टेट्रजी बना कर काम कर रही है और जल्द ही कुछ अहम बिल सरकार संसद में लाएगी और अपने अजेंडा को प्रभावी बनाएगी।