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मुख्यमंत्री साय ने ‘गाय धर्म एवं विज्ञान’ ग्रंथ का किया विमोचन

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रायपुर, 26 दिसंबर 2025 :मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति द्वारा आयोजित गौ विज्ञान परीक्षा–2025 के लिए तैयार किए गए संदर्भ ग्रंथ “गाय धर्म एवं विज्ञान” के नवीनतम संस्करण का अपने निवास कार्यालय में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में विमोचन किया।

गौशाला से जैविक खेती को नई दिशा

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वैज्ञानिक आधार पर विकसित पंचगव्य आधारित “गव्यामृत” फोलियर स्प्रे

इंदौर।  मिट्टी की घटती उर्वरता, रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव और बढ़ती खेती लागत के समाधान हेतु वैज्ञानिक परीक्षणों एवं भारतीय पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से विकसित पंचगव्य आधारित “गव्यामृत” लिक्विड ऑर्गेनिक मैन्योर फोलियर स्प्रे को गौशाला द्वारा किसानों के लिए उपलब्ध कराया गया है। यह पूर्णतः स्वदेशी, जैविक और पर्यावरण–अनुकूल उत्पाद है, जो सभी फसलों की सभी अवस्थाओं में प्रभावी है।

वैज्ञानिक आधार:
“गव्यामृत” में गोमूत्र व गोमय से प्राप्त जैव सक्रिय यौगिक, संतुलित एन.पी.के., आवश्यक माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स तथा उच्च सघनता में लाभकारी सूक्ष्मजीव (CFU आधारित—जैसे नाइट्रोजन फिक्सर, फॉस्फोरस सॉल्युबिलाइज़र व पोटाश मोबिलाइज़र) सम्मिलित हैं। ये घटक पत्तियों (स्टोमेटा) व जड़ों से शीघ्र अवशोषित होकर क्लोरोफिल संश्लेषण, एंज़ाइम गतिविधि और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि, फूल–फल विकास और उपज में वृद्धि होती है।

इसके जैव सक्रिय घटक एंटी-माइक्रोबियल एवं एंटी-फंगल प्रभाव दिखाते हैं, जिससे यह प्राकृतिक प्लांट प्रोटेक्टर के रूप में कीट–रोग दबाव को कम करता है। साथ ही, यह मृदा सूक्ष्मजीव संतुलन सुधारकर मिट्टी की संरचना व जलधारण क्षमता बढ़ाता है, परिणामस्वरूप रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों पर निर्भरता घटती है और किसान की लागत कम होती है।

श्री कृष्णायाण देसी गौरक्षा एवं गोलोक धाम सेवा समिति, रेशम केंद्र गौशाला हातोद के प्रमुख पू. अच्युतानंद जी महाराज के अनुसार, “गव्यामृत” सब्ज़ी, फल, दलहन, तिलहन, अनाज, कपास, फूल एवं सजावटी पौधों के लिए समान रूप से उपयोगी है।आवश्यकता के लिए संपर्क: 093015 14792 यह पहल वैज्ञानिक प्राकृतिक खेती, स्वच्छ पर्यावरण, और समृद्ध किसान के लक्ष्य को सशक्त करती है।

राष्ट्रपति द्वारा ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किए जाएंगे

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कल राष्ट्रीय स्तर पर ‘वीर बाल दिवस’ मनाएगा और ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किए जाएंगे


विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाले 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 20 बच्चों का चयन ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ के लिए किया गया

वीर बाल दिवस पर के राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री उपस्थिति रहेंगे

कार्यक्रम में भारत के युवा वीरों के साहस, बलिदान और अनुकरणीय मूल्यों का स्मरण किया जाएगा

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्वागत भाषण देंगी

भारत सरकार का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कल (26 दिसंबर 2025) को राष्ट्रीय स्तर पर वीर बाल दिवस मनाएगा। इस अवसर पर भारत के युवा वीरों के साहस, बलिदान और अनुकरणीय मूल्यों को स्मरण किया जाएगा। इसी दिन विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियाँ हासिल करने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (पीएमआरबीपी) प्रदान किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष बच्चों को प्रदान किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है। यह पुरस्कार वीरता,कला एवं संस्कृति,पर्यावरण,सामाजिक सेवा,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा खेल के क्षेत्रों में असाधारण उत्कृष्टता के लिए प्रदान किया जाता है। वर्ष 2025 में 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 बच्चों का इस सम्मान के लिए चयन किया गया है। यह पुरस्कार भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा 26 दिसंबर 2025 को प्रातः 10:00 बजे,विज्ञान भवन,नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाएगा।

वीर बाल दिवस 2025 का राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम 26 दिसंबर 2025 को भारत मंडपम,नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इस राष्ट्रीय आयोजन के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति भी रहेगी, जो बच्चों और युवाओं को संबोधित करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में युवा नागरिकों की भूमिका को रेखांकित करेंगे। यह कार्यक्रम वीरता,दृढ़ता और निस्वार्थ सेवा की प्रेरक कहानियों को प्रस्तुत करेगा,जिससे बच्चों और युवाओं को प्रेरणा मिलेगी तथा विकसित भारत @2047 के अनुरूप सशक्त और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया जाएगा। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी स्वागत भाषण देंगी।

इस कार्यक्रम में देशभर से स्कूली बच्चे,प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्राप्तकर्ता तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भाग लेंगे। भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत और वीरता की भावना को प्रदर्शित करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां समारोह का प्रमुख हिस्सा होंगी।

वीर बाल दिवस 2025 के इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का 26 दिसंबर 2025 को दोपहर 12:30 बजे से एनआईसी वेबकास्ट,डीडी न्यूज तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारित किया जाएगा, जिससे देशभर में व्यापक सहभागिता सुनिश्चित हो सकेगी।

लोनावला में अभिनेता विंदु दारा सिंह ने सिखाया सफलता के गुर 

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मुंबई। लोनावला में हाल ही में संपन्न हुई चार दिवसीय भव्य कार्यशाला “अल्टिमेट मिलियनेयर ब्लूप्रिंट” ने महाराष्ट्र के उद्यमियों को सोच, सिस्टम और नेतृत्व के एक नए स्तर से परिचित कराया। यह कार्यक्रम केवल व्यवसायिक विकास तक सीमित न रहकर, जिम्मेदार नेतृत्व, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण की स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत करता है।
इस परिवर्तनकारी कार्यशाला का आयोजन देविदास ग्रुप ऑफ कंपनी द्वारा किया गया, जिसका नेतृत्व भारत के प्रसिद्ध स्पिरिचुअल बिज़नेस कोच और मेंटर देविदास नाईकरे ने किया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिज़नेस का वास्तविक उद्देश्य केवल मुनाफ़ा नहीं, बल्कि समाज को सशक्त बनाना और राष्ट्र के विकास में योगदान देना है।
कार्यशाला में बिज़नेस चक्र मॉडल, माइंडसेट री-प्रोग्रामिंग, टीम स्ट्रक्चर और लीडरशिप, ब्रांडिंग व बिज़नेस सिस्टम्स, रेवेन्यू ग्रोथ फ्रेमवर्क, बिज़नेस को सेवा के रूप में समझना तथा स्पिरिचुअल लीडरशिप पर गहन और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह के दौरान महाराष्ट्र के चयनित उद्यमियों को उनके उत्कृष्ट कार्य और सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में दीपक पाल, डॉ. नेहा सिंह रोडा, भावना योगेश आरोते, डॉ. रुचि गुलाटी, शब्बीर मोहम्मद गुलजार शेख, लहू शेटे, ज्योति सिंह, नवगांव साधु, स्त्री Streee सोशल फाउंडेशन, रफीक युनुस ढुक्का, संदीप अध्यापक, सुंदीप भडाडे, संदेश भुजबळ और धर्मेंद्र शर्मा सहित अन्य शामिल थे।
देविदास ग्रुप ऑफ कंपनी के शीर्ष बिज़नेस कोच—वेदांत नाईकरे, प्रमोद भुजबळ, डॉ. स्नेहा हिंगे, मिहिर शेखावल, हर्ष, देवा नारायणकर, डॉ. सुनील सुतार, प्रफुल्ल कांबळे, कुशल लोणारकर, दीपेश पांडे और अजय राणे—इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में बॉलीवुड अभिनेता विंदु दारा सिंह ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कहा,“सच्ची सफलता वही है, जब आपका बिज़नेस आगे बढ़े और साथ-साथ समाज को भी ऊपर उठाए।”

कार्यक्रम का मुख्य संदेश सभी प्रतिभागियों के मन में गहराई से गूंजा कि “जब नेतृत्व सेवा की भावना से जुड़ा होता है, तब बिज़नेस टिकाऊ, प्रभावशाली और अर्थपूर्ण बनता है।”

बिग बॉस फेम हेमा शर्मा द्वारा गौरव सिंह स्टारर म्युज़िक वीडियो “लव जिंदगी” हुआ लॉन्च

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मुम्बई। चीफ गेस्ट बिग बॉस फेम हेमा शर्मा और मशहूर कॉमेडियन सुनील पाल के हाथों एक्टर गौरव सिंह स्टारर म्युज़िक वीडियो “लव जिंदगी” Love Zindagi मुम्बई में लॉन्च किया गया। इस अवसर पर केक काटकर हेमा शर्मा का बर्थडे भी मनाया गया।

“लव जिंदगी” एक मॉडर्न बॉलीवुड म्यूज़िक वीडियो है, जो प्यार, ज़िंदगी और युवाओं की भावनाओं को खूबसूरत विज़ुअल्स और दिल छू लेने वाले म्यूज़िक के ज़रिए दिखाता है। इस म्यूज़िक वीडियो को मनोज वासुदेव ने डायरेक्ट किया है, जो साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक हैं और अब बॉलीवुड प्रोजेक्ट्स पर भी फोकस कर रहे हैं। उनकी कहानी कहने की स्टाइल और विज़ुअल समझ वीडियो को एक अलग और मॉडर्न बॉलीवुड फील देती है।

इस गाने का म्यूज़िक विजय करुण ने कंपोज़ किया है, जो मलयालम म्यूज़िक इंडस्ट्री के हिट म्यूज़िक डायरेक्टर हैं। उनके गाने मेलोडी और ट्रेंड्स का अच्छा बैलेंस रखते हैं। इस गाने को अपनी आवाज़ दी है राजा लक्ष्मी ने, जो एक स्टेट अवॉर्ड विनिंग सिंगर हैं और अपनी दमदार व भावनात्मक गायकी के लिए दुनियाभर में पसंद की जाती हैं। रूविथ गोविंद ने मेल पार्ट गाए हैं, जो दुबई में रहने वाले एक जाने-माने सिंगर हैं और 3 मलयालम फिल्मों में भी गा चुके हैं। Love Zindagi उनके लिए हिंदी म्यूज़िक इंडस्ट्री में पहला गाना है।

इस म्यूज़िक वीडियो में गौरव सिंह, पलक और रक्षिका नज़र आ रहे हैं।
गौरव सिंह युवा और उभरते हुए अभिनेता हैं, जिन्होंने अपनी आकर्षक मुस्कान और विनम्र स्वभाव से लाखों दिल जीते हैं। उन्होंने Netflix, MX Player, Amazon Prime और Jio Hotstar जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है। अक्षय कुमार, कार्तिक आर्यन और पंकज त्रिपाठी जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ स्क्रीन शेयर करने के बाद, हम गौरव सिंह से आने वाले समय में और भी बेहतरीन परफॉर्मेंस की उम्मीद करते हैं। इन तीनों कलाकारों की परफॉर्मेंस गाने में रोमांस, ताज़गी और आकर्षण लेकर आती है।

लॉन्च के अवसर पर अतिथियों में हेमा शर्मा और सुनील पाल के अलावा एक्टर गिरीश थापर और Bay Lehaaz के ओनर ऐक्टर अमन भी मौजूद थे। हेमा शर्मा और सुनील पाल ने गाने की खूब प्रशंसा की और मुख्य अभिनेता गौरव सिंह के लुक और उनके अभिनय को सराहा। इस मौके पर मेहमानों और म्युज़िक वीडियो की टीम को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

खूबसूरत लोकेशन्स पर शूट किया गया लव जिंदगी एक विज़ुअली शानदार बॉलीवुड सॉन्ग जैसा लगता है, जिसमें इमोशन, स्टाइल और म्यूज़िक का बेहतरीन मेल है, खास तौर पर आज की पैन-इंडियन ऑडियंस के लिए। जिनकी परफॉर्मेंस गाने में रोमांस, ताज़गी और आकर्षण लेकर आती है।

वन्य जीवों का संरक्षण

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(पंकज शर्मा “तरुण”-विभूति फीचर्स)
वन्य जीवों के प्रति लगाव, आकर्षण इंसानों का आदि काल से ही रहा है। चाहे वह महाभारत में पांडु के द्वारा हिरण का शिकार करने का उल्लेख हो,कृष्ण को कंस के द्वारा मथुरा आगमन पर हाथी को सुरा पान करवा कर कृष्ण की हत्या करने का असफल प्रयास करने का उल्लेख हो या रामायण में माता जानकी द्वारा मायावी स्वर्ण मृग के प्रति आकर्षण और इसी मृग मरीचिका में स्वयं भगवान के फंसने और सीता हरण होने का प्रसंग हो। कहीं न कहीं हर पौराणिक ग्रन्थ में वन्य जीवों के प्रति आकर्षण का उल्लेख पाया जाना इस बात का द्योतक है कि हम इंसानों का इन सुंदर जीवों के प्रति अगाध स्नेह रहा है।

वर्तमान में भी हम एशिया से विलुप्त चीते को दक्षिण अफ्रीकी देशों से करोड़ों रुपए खर्च कर कूनो अभ्यारण्य और गांधीसागर अभयारण्य में बसा रहे हैं। बिगड़ते जा रहे पारिस्थितिकी तंत्र को पुनः पटरी पर लाने का भारत सरकार का यह अच्छा प्रयास है। शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या में निरंतर वृद्धि से ईश्वर द्वारा बनाई गई हमारी खाद्य श्रृंखला के टूट जाने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण उत्तर से लेकर दक्षिण तक नील गाय जिसको अब विशेषज्ञों ने रोज, रोजड़ा या घोड़ा रोज का नाम दे दिया है,के रुप में देखा जा सकता है। आज पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ने के कारण हमारी उन्नत खेती को हमारी ही नज़रों के सामने नीलगाय के द्वारा उजाड़ते हुए खामोशी से देखने को बाध्य हैं। इसी प्रकार मध्य प्रदेश के शाजापुर, सीहोर, उज्जैन जिलों में कृष्ण मृग एवं जंगली सूअर खुले खेतों में खड़ी फसलों को चरते रौंदते हुए देखा जा सकता है। इनके पीछे पीछे तेंदुआ,बाघ,और लकड़बग्गे,सियार,जंगली कुत्ते,इनका शिकार करने के लिए मानव बस्तियों में आने लगे हैं जो मानव जाति के लिए अभिशाप साबित हो सकते हैं।

वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम में इनके शिकार करने या हानि पहुंचाने पर सख्त सजा के प्रावधानों के चलते इंसान हाथ मलते रह जाता है। हालांकि इनके द्वारा फसलों को उजाड़ने पर सरकार द्वारा क्षतिपूर्ति (मुआवजा) देने का प्रावधान भी रखा गया है, मगर इसकी जटिल प्रक्रिया के चलते किसान मुआवजा राशि पाने में कम ही सफल हो पाते हैं।

हाल के दिनों में असम में राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन से टकरा जाने से सात जंगली हाथी बेमौत मृत्यु को प्राप्त हो गए और इसी दुर्घटना में ट्रेन के इंजन और पांच बोगियां भी पटरी से नीचे उतर गई।भले ही इस दुर्घटना में कोई जन हानि न हुई हो लेकिन हमने अपने हाथियों को तो खोया है। जहां एक ओर सरकार इन वन्य जीवों के संरक्षण में पानी की तरह पैसा बहा रही है वहीं दूसरी ओर ऐसी क्षति आखिर क्या सिद्ध करती है? हमारी चूक या लापरवाही? हाथियों के प्राकृतिक रहवास को सुरक्षित रखने की जिम्मेवारी भी तो केंद्र और राज्य सरकारों की है तो फिर इसकी जिम्मेदारी लेने से क्यों भाग रहे हैं?

पर्यावरण का यह चितेरा विशालकाय प्राणी हमारे हिन्दू शास्त्रों में प्रथम पूजनीय गणेश के रूप में पूजा जाता है। हमारे ऋद्धि सिद्धि के प्रदाता के रूप में पूजित है।सरकारों को इनके सुरक्षित रहने के उपाय करना चाहिए जिसमें इनके रहवास क्षेत्र में रेलवे लाइन के आसपास सुरक्षा बाढ़ लगाए या लोको पायलेट को इन क्षेत्रों में ट्रेन की गति नियंत्रित रखने के लिए निर्देशित करे,ताकि इतनी बड़ी मात्रा में हुई हानि को भविष्य में रोका जा सके। पर्यावरण मंत्रालय इस ओर ध्यान

देकर उचित कदम उठाए ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके।

(विभूति फीचर्स)

मुंबई से जुड़ेगा 840 km लंबा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे

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महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) ने नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे (Shaktipeeth Expressway) के रूट में बड़ा बदलाव किए हैं। शीतकालीन सत्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) की घोषणा के बाद अब इस महामार्ग की रूपरेखा पूरी तरह बदल गई है, जिससे यह न केवल राज्य का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनेगा, बल्कि अब मुंबई से भी जुड़ जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के रूट में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई अब 803 किमी से बढ़कर 840 किमी हो गई है। यह विस्तार न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगा, बल्कि महाराष्ट्र के आर्थिक और धार्मिक पर्यटन की तस्वीर भी बदल देगा। इसे मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग की तर्ज पर विकसित करने का प्रस्ताव है।

नए रूट में सतारा की एंट्री

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के नए अलाइनमेंट में अब सतारा जिले को भी शामिल किया गया है। पहले यह मार्ग वर्धा के पावनार से शुरू होकर पत्रादेवी (गोवा सीमा) तक जाना था। अब इसे कोल्हापुर के चंदगड के रास्ते आगे ले जाया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इसकी मुंबई से कनेक्टिविटी है। लातूर के मुरुड में इसे ‘जन कल्याण महामार्ग’ से जोड़ा जाएगा। वर्धा से सांगली तक लातूर और सोलापुर के रास्ते जाने वाला करीब 442 किमी लंबा यह खंड, जन कल्याण महामार्ग और मुंबई-बार्शी रोड के जरिए मुंबई तक पहुंचने का नया और तेज विकल्प उपलब्ध कराएगा। भविष्य में इसे विरार-अलीबाग कॉरिडोर से भी जोड़ा जा सकता है।

अब 90 हजार करोड़ होगी लागत

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के रूट के विस्तार और नए जिलों को जोड़ने के कारण परियोजना की लागत में भी इजाफा हुआ है। पहले इस प्रोजेक्ट का बजट करीब 86,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 90,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। निर्माण प्रक्रिया की बात करें तो 70 फीसदी भूमि अधिग्रहण का काम पूरा होने के बाद ही काम शुरू किया जाएगा।

क्यों खास है शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे?

इस महामार्ग के बनने से नागपुर और गोवा के बीच का सफर जो फिलहाल 18-20 घंटे का है, घटकर मात्र 8 घंटे रह जाएगा। शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे विदर्भ, मराठवाडा, पश्चिम महाराष्ट्र और कोंकण को एक कतार में लाएगा। यह एक्सप्रेसवे वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, बीड, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, सांगली, सिंधुदुर्ग, सतारा आदि जिलों से होकर गुजरेगा। यह न केवल तीर्थयात्रियों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगा।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में महायुति की सुनामी

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Maharashtra Local Body Election Result 2025: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर महायुति ने साबित कर दिया कि उसका दबदबा बरकरार है. महाराष्ट्र में महायुति की आंधी में एमवीए फिर से साफ हो गया. महाराष्ट्र लोकल बॉडी इलेक्श रिजल्ट में महायुति की शानदार जीत हुई है. महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव में शानदार जीत हासिल करते हुए इन स्थानीय निकायों में अध्यक्ष के 207 पदों पर कब्जा जमा लिया. वहीं, विपक्षी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) 44 सीट ही हासिल कर सकी. महायुति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) का गठबंधन है. एमवीए में कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) है. चलिए जानते हैं महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों से जुड़े कुछ अहम लेटेस्ट अपडेट्स.
महाराष्ट्र निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने रात में निकाय चुनाव रिजल्ट के अंतिम आंकड़े साझा किए. एसईसी के अनुसार, भाजपा ने नगर निगम अध्यक्ष के 117 पद जीते, शिवसेना ने 53 (एकनाथ शिंदे) और राकांपा (अजित पवार) ने 37 पद जीते. वहीं, एमवीए के घटक दल कांग्रेस को 28, राकांपा (शरद पवार) को सात और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) ने अध्यक्ष के नौ पदों पर जीत दर्ज की. राज्य निवार्चन आयोग के अनुसार, पंजीकृत अन्य पार्टियों ने चार सीट हासिल की, गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों ने नगर अध्यक्ष के 28 पदों पर जीत दर्ज की. पांच सीट निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गई.

वहीं, बीजेपी ने इस जीत को 15 जनवरी को होने वाले मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले एक बड़ी सफलता बताया. पार्टी ने इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व की जीत बताया और गठबंधन को चुनावों से पहले की मुश्किलों से निकालने का श्रेय उन्हें और केंद्रीय नेतृत्व को दिया. इन चुनावों से पहले डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ विधायकों को तोड़ने और इलाके पर नियंत्रण को लेकर अक्सर टकराव होते रहे थे.

अंकों के जादूगर महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन

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(प्रमोद दीक्षित मलय-विनायक फीचर्स)

आज से लगभग 125 साल पहले एक गांव के विद्यालय की कक्षा तीन के गणित शिक्षक बच्चों से बातचीत करते हुए कहते हैं कि तीन केले यदि तीन लोगों में या एक हजार केलों को एक हजार लोगों में बराबर बांटा जाये तो प्रत्येक को एक-एक केला मिलेगा। अर्थात् किसी दी हुई संख्या में उसी संख्या से भाग देने पर भागफल एक आता है। तभी एक बच्चे ने सवाल किया कि क्या शून्य को शून्य से भाग देने पर भी भागफल एक आयेगा। कक्षा में मौन पसर गया। इस बालक ने कक्षा पांचवीं में पूरे जिले में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर अपने माता-पिता और विद्यालय को गौरवान्वित किया। इतना ही नहीं, कक्षा सातवीं में पढ़ते हुए कक्षा बारहवीं और बी.ए. के बच्चों को गणित पढ़ाया करता था। आगे चलकर यही बालक विश्व का महान गणितज्ञ सिद्ध हुआ जिसे सभी श्रीनिवास रामानुजन आयंगर के नाम से जानते हैं और जिनके प्रमेय आधारित सूत्र गणितज्ञों के लिए आज भी रहस्य एवं अबूझ पहेली बने हुए हैं और शोधकार्य का आधार भी, तथा जिनके नाम पर रामानुजन अभाज्य, रामानुजन स्थिरांक सिद्धांत विश्व विश्रुत हैं। वास्तव में रामानुजन गणित की दुनिया के प्रखर भास्कर थे जिनके ज्ञान, मेधा और अंक शास्त्र की समझ से विश्व चमत्कृत है। वह गणितीय कर्म कौशल के फलक का कोहिनूर माणिक्य हैं। गणित के आकाश का दैदीप्यमान नक्षत्र हैं जिनकी आभा से गणित-पथ प्रकाशित है, जिनके महनीय अवदान से गणित-कोश समृद्ध, समुन्नत और सुवासित हुआ है।

रामानुजन का जीवन-पथ कंटकाकीर्ण था। तमाम अभावों और दुश्वारियों से जूझते हुए वह गणित के शोधकार्य में मृत्युपर्यन्त साधनारत रहे। अंतिम घड़ी तक रोगशैय्या पर पेट के बल लेटे औंधे मुंह वह गणित के सूत्र रचते रहे। रामानुजन का जन्म तमिलनाडु के निर्धन ब्राह्मण परिवार में पिता श्रीनिवास आयंगर के कुल में माता कोमलताम्मल की कोख से 22 दिसम्बर, 1887 को जनपद इरोड में हुआ था। पिता एक दुकान में मुनीम अर्थात् खाता-बही लेखन का काम करते थे। एक वर्ष बाद पिता परिवार के साथ कुंभकोणम् आ गये। मजेदार बात यह कि बालक तीन वर्ष तक कुछ बोला ही नहीं। सभी समझे कि वह गूंगा है। पर आगे वाणी प्रस्फुटित हुई तो परिवार में खुशी छाई। रामानुजन का बचपन कुंभकोणम में बीता और यहीं पर ही प्राथमिक शिक्षा भी पूरी हुई। आगे की शिक्षा के लिए टाउन हाईस्कूल में प्रवेश लिया। यहां पढ़ने का बेहतर वातावरण मिला। स्थूलकाय रामानुजन की आंखों में नया सीखने की उत्कट उत्कंठा की चमक थी। स्कूल के पुस्तकालय में त्रिकोणमिति आधारित सूत्रों की एक पुस्तक मिली। बालक रामानुजन उन सूत्रों को हल करने में जुटे रहते। न प्यास की चिंता न भोजन का ध्यान। सूत्रों को हल करने की ललक से रामानुजन गणितीय संक्रियाओं को समझने और हल करने में पारंगत हो गये। वह अंकों से खेलने लगे, उनके गुण-धर्मों पर सोचने लगे। पर इसके कारण अन्य विषयों के अध्ययन के लिए समय न बचता। फलतः वह अन्य विषयों में पिछड़ते गये। लेकिन हाईस्कूल उत्तीर्ण कर लिया और गणित एवं अंग्रेजी में अधिक अंक प्राप्त करने के कारण आगे के अध्ययन के लिए सुब्रमण्यम छात्रवृत्ति मिली और कालेज में 11वीं कक्षा में दाखिला ले लिया। यहां प्रोफेसर जार्ज शुब्रिज की गणित पुस्तक पढ़ी, जिससे गणित के प्रति रुचि प्रगाढ़ हुई।11वीं में गणित में सर्वोच्च अंक लाकर अन्य विषयों में अनुत्तीर्ण हो गये। छात्रवृत्ति बंद हो गई और कालेज छूट गया। परिवार की आर्थिक स्थिति डांवाडोल और जरूरतें मुंह बाये खड़ी थीं। गणित का ट्यूशन शुरू किया तो पांच रुपये महीना मिलने लगे। 1907 में बारहवीं की परीक्षा में व्यक्तिगत परीक्षार्थी के रूप में बैठे पर फिर अनुत्तीर्ण हो गये, हालांकि गणित में पूरे अंक प्राप्त किये। परिणाम यह हुआ कि कालेज हमेशा के लिए छूट गया।

अगले पांच वर्ष जीवन की कड़ी परीक्षा का काल था। पढ़ाई छूट चुकी थी, कोई काम-धंधा था नहीं। गणित में काम करने का असीम उत्साह तरंगें मार रहा था पर किसी विद्वान शिक्षक या प्रोफेसर का साथ नहीं था। ऐसे दु:सह विकट संकटकाल में एक भाव था जो रामानुजन को अनवरत् ऊर्जा प्रदान कर रहा था और वह था ईश्वर के प्रति दृढ आस्था और विश्वास। कुलदेवी नामगिरि के प्रति अनंत असीम श्रद्धा और समर्पण भाव उनके हृदय को ज्योतित किए हुए था, जिसका उल्लेख रामानुजन ने प्रो. हार्डी के साथ बातचीत में करते हुए कहा था कि गणित में शोध भी मेरे लिए ईश्वर की ही खोज है। इसी दौरान 1909 में पिता ने 12 वर्षीय कन्या जानकी से रामानुजन का विवाह करवा दिया। अब पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ गईं तो आजीविका की तलाश में मद्रास (अब चैन्नै) की राह पकड़ी। पर 12वीं अनुत्तीर्ण युवक को नौकरी पर कौन रखता। जैसे-तैसे एक साल गुजरा, स्वास्थ्य भी गिरने लगा तो कुंभकोणम् लौटना पड़ा। एक साल बाद फिर मद्रास लौटे। पर अबकी बार अपने गणित के शोधकार्य का रजिस्टर साथ लाये और रजिस्टर दिखाकर काम मांगने लगे। संयोग से एक शुभचिंतक ने रजिस्टर देखा तो रामानुजन को डिप्टी कलेक्टर से मिलने की सलाह दी। डिप्टी कलेक्टर वी रामास्वामी अय्यर स्वयं गणित के विद्वान थे। वह रामानुजन के काम से प्रभावित हुए और जिलाधिकारी रामचंद्र राव से अनुशंसा कर 25 रुपये मासिक मानधन का प्रबंध करवा दिया। इससे रामानुजन को आर्थिक झंझावात से आंशिक मुक्ति मिली और वे शोधकार्य में अधिक ध्यान देने लगे। इसी अवधि में वह इंडियन मैथमेटिक्स सोसायटी में काम करते हुए उसके जर्नल के लिए प्रश्न बनाने और हल करने का काम भी करने लगे थे। इसी जर्नल में आपका 17 पृष्ठों का पहला शोध-पत्र ‘बरनौली संख्याओं का गुण’ प्रकाशित हुआ, जिसकी चतुर्दिक भूरि-भूरि प्रशंसा हुई। आगे मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में क्लर्क के पद पर काम करने लगे।

यह समयावधि रामानुजन के शोध के लिए उपयुक्त थी। रात भर स्लेट पर सूत्र बनाते, हल करते, फिर रजिस्टर पर उतारते और थोड़े आराम के बाद कार्यालय निकल जाते। अब एक गणितज्ञ के रूप में पहचान बनने लगी थी। मित्र की सलाह पर अपने काम को इंग्लैंड के गणितज्ञों के पास भेजा पर कोई महत्व न मिला। संयोग से 8 फरवरी, 1913 को एक पत्र प्रो. जी. एच. हार्डी को भेजते हुए उनके एक अनुत्तरित प्रश्न को हल करने के सूत्र खोजने का संदर्भ देकर अपने कुछ प्रमेय भी भेजे। पहले तो हार्डी ने पत्र पर ध्यान न दिया पर अपने शिष्य लिटिलवुड से परामर्श कर रामानुजन के काम की गम्भीरता समझी और रामानुजन को मद्रास विश्वविद्यालय से छात्रवृति दिला कालांतर में शोध हेतु अपने पास लंदन बुलवा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रवेश दिला दिया। दोनों साथ शोधकार्य करते रहे। यहां रामानुजन के कई शोध-पत्र प्रकाशित हुए। ऐसे ही एक विशेष शोधकार्य पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने बी.ए. की उपाधि प्रदान की। लेकिन वहां की जलवायु, रहन-सहन, खान-पान और सामाजिक व्यवहार से शर्मीले, संकोची, आत्मनिष्ठ शाकाहारी रामानुजन तादात्म्य न बैठा सके। स्वयं भोजन पकाने और शोधकार्य के अत्यधिक मानसिक श्रम से शरीर क्षीण होने लगा। चिकित्सकों ने क्षय रोग बता आराम करने की सलाह दी। पर रामानुजन पर काम की धुन सवार थी। इसी काल में आपको रॉयल सोसायटी का फेलो चुना गया। आज तक सबसे कम उम्र में फेलो चुने जाने वाले वह पहले व्यक्ति थे और पहले अश्वेत भी। ट्रिनिटी कालेज से फेलोशिप पाने वाले पहले भारतीय बने। रोग बढ़ने के कारण आप 1919 में जन्मभूमि भारत लौट आये। मद्रास विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नियुक्त हुए। पर स्वास्थ्य तेजी से गिरने लगा। रोग शैय्या पर लेटे-लेटे ही आप काम करते। कालपाश रामानुजन के प्राणों की ओर बढ़ रहा था। 26 अप्रैल, 1920 को गणित का यह जगमगाता दीप अपना प्रकाश समेट अनंत की यात्रा पर निकल गया।

रामानुजन का काम आज भी गणितज्ञों की परीक्षा ले रहा है। ट्रिनिटी कालेज के पुस्तकालय में 1976 में रामानुजन का हस्तलिखित 100 पन्नों का रजिस्टर मिला था जिसमें उनकी प्रमेय और सूत्र लिखे हैं। जिसे टाटा फंडामेंटल रिसर्च सेंटर ने रामानुजन नोटबुक नाम से प्रकाशित किया है। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर एक फिल्म ‘द मैन हू न्यू इन्फिनिटी’ भी बन चुकी है। भारत सरकार ने 1912 में 125वीं जयंती के अवसर पर रामानुजन पर डाक टिकट जारी करते हुए उनके जन्मदिन 22 दिसम्बर को गणित दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। 1962 में भी एक डाक टिकट जारी किया गया था। गूगल ने डूडल बनाकर अपना श्रद्धा भाव अर्पित किया। जब तक गणित है तब तक उनकी खोज ‘रामानुजन संख्याएं’ (1729, 4104, 39312 आदि), थीटा फलन और संख्या सिद्धांत पर उनका विशेष काम विद्यार्थियों को प्रेरित करता रहेगा। रामानुजन हमेशा गणित के पृष्ठों पर विद्यमान रहेंगे।

संगीत जो सिखाता है दिल की भाषा: मोहम्मद रफ़ी की अमर विरासत

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मोहम्मद रफ़ी, महान पार्श्व गायक, भारतीय संगीत के सुनहरे पन्नों में अंकित एक नाम है। उनकी सशक्त आवाज़ और अद्वितीय बहुमुखी प्रतिभा ने पीढ़ियों के संगीत प्रेमियों पर अमिट छाप छोड़ दी है। दो दशकों से अधिक के करियर में, रफ़ी जी का संग्रह भावनाओं, शैलियों और अनुभवों का खजाना है।

“तेरे लिए बड़ा” जैसे रोमांटिक बैलाड से लेकर “चलो दिलदार” जैसे भावनात्मक एंथेम तक, रफ़ी जी की आवाज़ में भावनाओं को जागृत करने, दिलों को छूने और यादें बनाने की शक्ति थी। “ओ दुनिया के रखवाले” जैसे प्रेरणादायक ओडेस और “करम अकरम” जैसे फुट-टैपिंग नंबर्स ने उनकी विविध शैलियों पर प्रभुत्व दिखाया। चाहे वह भक्ति गीत हों या देशभक्ति गीत, रफ़ी जी की आवाज़ भाव और अभिव्यक्ति का परफेक्ट मेल थी।

उनकी कुछ अन्य हिट्स:
– “आप के हसीन रुख” (रोमांटिक)
– “बहारों फूल बरसाओ” (जोशपूर्ण)
– “मुझे दगा दे के” (भावनात्मक)
– “काने काने से” (भक्ति)

राजेश दबरे की श्रद्धांजलि लाखों प्रशंसकों की भावनाओं को प्रतिध्वनित करती है – रफ़ी जी की आवाज़ आज भी समय और स्थान से परे, पीढ़ियों को प्रेरित करती है। उनकी गीत एक अभिव्यक्ति की मास्टरक्लास हैं – आपको किसी और प्रशिक्षण सत्र की आवश्यकता नहीं है। हर ट्रैक भावना का एक सूत्र है, एक पाठ है निपुणता का। उनकी विरासत को मनाते हुए, हम उस व्यक्ति को याद करते हैं जिसने अनगिनत दिलों को आवाज़ दी, और जिसका संगीत समय और स्थान से परे है।

रफ़ी जी के गीत सिर्फ धुनें नहीं हैं – वे भावनाओं की यात्रा हैं, उनकी अद्वितीय प्रतिभा का प्रमाण। उनकी आवाज़ अनगिनत यादों की साउंडट्रैक रही है, प्रेम, हानि और जीवन की याद दिलाती है।