दलित वर्ग को सार्वजनिक कुएं से पानी भरने से रोकने की कुरीति भी खत्म की जाए। इसके लिए संघ के स्वयंसेवक लोगों को जागरूक करेंगे। जहां भी दिक्कत होगी, वहां समस्या का समाधान किया जाएगा।
तेंदुआ के गाय पर हमले के बाद गांव में दहशत
तेंदुआ का जोड़ा देख सहमे ग्रामीण, गाय पर हमले के बाद गांव में दहशत
बुलंदशहर। गांव पिलखनी में गाय पर हमला करने के बाद ग्रामीणों ने तेंदुआ का एक जोड़ा देखने का दावा किया है। वहीं, जगह-जगह बने पंजों के निशान देखकर ग्रामीण सहमे हुए हैं।
रविवार की शाम क्षेत्र के गांव गजरौला में ग्रामीणों ने तेंदुआ देखने का दावा किया था। इसके बाद जंगली जानवर ने गांव पिलखनी में घेर में बंध रही गाय पर हमला कर दिया था। इससे पहले गांव अहार में बकरे और गांव ताहरपुर में वृद्ध किसान पर भी जंगली जानवर हमला कर जान ले चुका है।
वहीं, दूसरी ओर वन विभाग की टीम लगातार जंगली जानवर की तलाश में जुटी है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है। वन विभाग के अधिकारी अभी भी क्षेत्र में तेंदुआ न होने की बात कर रहे हैं।
70 फीसदी शादीशुदा कपल्स पार्टनर के खर्राटों से परेशान: सर्वे
32% ने पार्टनर के खर्राटों की आवाज की तुलना चलती हुई मोटरसाइकिल की आवाज से की
मुंबई। देश के 70 फीसदी कपल्स अपने पार्टनर के खर्राटों से परेशान है और वह अपने पार्टनर के खर्राटों की आवाज से नींद में एक बार जरूर जागते हैं। जबकि 32% कपल को यह महसूस होता है कि उनके पार्टनर के खर्राटों की आवाज चलती हुई मोटरसाइकिल के जैसी ही है। इस बात का खुलासा भारत में मैट्रेसेस (गद्दों) के प्रमुख ब्रैंड सेंचुरी मैट्रेसेस द्वारा किए गए सर्वेक्षण में हुआ है। वर्ल्ड स्लीप डे के मौके पर भारतीय अपनी नींद की गुणवत्ता को कितना महत्व देते हैं यह पता लगाने के उद्देश्य से यह सर्वेक्षण किया गया।
सर्वे से यह प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया कि 67% लोगों ने महसूस किया कि खर्राटों का संबंध दिन भर की थकान से जोड़ा जा सकता है। इसका सेहत और नींद की गुणवत्ता से काफी कम संबंध है। इसके अलावा करीब 45% लोग खर्राटों का संबंध मोटापे से जोड़ते हैं। कई अन्य कारक भी है। जैसे अधिकांश लोगों (करीब 55%) लोगों का यह विश्वास है कि खर्राटों को साधारण उपाय से काबू में किया जा सकता है। इसके लिए आसपास का माहौल बदलने की जरूरत नहीं होती।
हालांकि, कई कारकों से यह पता लगा कि किस तरह भारतीय अब अपनी गहरी नींद को अहमियत देने लगे है। वह अपनी लाइफस्टाइल और सोने की आदतें बदलने के लिए आपस में बातचीत भी करते हैं। उदाहरण के लिए 36% लोगों ने यह मानी है कि गहरी नींद में सोने के लिए सही गद्दा और तकिया बहुत जरूरी है। 71% लोग अपने खर्राटों के मुद्दे पर अपने पार्टनर से बातचीत करने के लिए तैयार हुए।
सेंचुरी मैट्रेसेस के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर उत्तम मालानी ने कहा, “सर्वे के नतीजे नींद के मुद्दे पर लोगों से जागरूक होने का आह्वान करते है। अगर कोई पार्टनर काफी तेज खर्राटे लेता हो तो इससे उसकी सेहत पर असर पड़ सकता है और आपसी संबंध भी खराब हो सकते हैं। गहरी नींद न आने और उसके सेहत और आपसी संबंध पर प्रभाव को नजरअंदाज करने के नतीजों का लंबे समय में काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। वर्ल्ड स्लीप डे पर किए गए इस सर्वे के साथ हमारा लक्ष्य उन मुद्दों पर लोगों को जागरूक करना है, जिससे लोगों की नींद खराब होती है। हम लोगों को बेहतर नींद लेने में मदद करने के लिए अपना योगदान कर रहे हैं और उन्हें एंटीमाइक्रोबियल ट्रीटेड मैट्रेस एवं पिलोज़ के साथ अच्छी नींद देने वाले प्रोडक्ट्स मुहैया करा रहे हैं ताकि उन्हें अच्छे से नींद आ सके।
डॉ जगदीश चतुर्वेदी, नोज़ एवं साइनस सर्जन, बेंगलुरू ने कहा कि “सर्वे के नतीजों से साफ पता चलता है कि अब ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी नींद से जुड़े मुद्दों, जैसे खर्राटों की समस्या के प्रति जागरूक होने लगे हैं और इसे स्वीकार भी कर रहे हैं। अब लोगों ने तरह-तरह के उपायों से इस समस्या के निपटारे की कोशिश करनी शुरू कर दी है। वे इसके लिए डॉक्टरों की सलाह ले रहे हैं। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से खर्राटों की समस्या है और वह अपनी इस परेशानी के लिए डॉक्टरों की सलाह नहीं लेता तो उसकी सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं।
पानी पीने से आठ मवेशियों की मौत
पानी पीने से आठ मवेशियों की मौत, जांच को लखनऊ भेजे गए छह मवेशियों के शवों का सैंपल
कुरारा हमीरपुर। थाना क्षेत्र के पतारा गांव में शनिवार शाम पानी पीने के बाद हुई आठ मवेशियों की मौत हो गई। इसी मामले में रविवार को छह मवेशियों के शवों का सैंपल जांच को लखनऊ भेजा गया है। पशु पालक ने थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा कार्रवाई की मांग की है। पोस्टमार्टम में मवेशियों के मरने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
पतारा गांव निवासी रज्जू प्रजापति ने थाने में दी तहरीर में बताया कि शुक्रवार को गांव के शीतल की भैंस ने गांव के बाहर स्थित राम महेश यादव के ट्यूबवेल के पास पानी पी लिया। वह घर पहुंचकर मर गई। पशुपालक ने समझा कि किसी जहरीले कीड़े के काटने से ऐसा हुआ और किसी को सूचना नहीं दी। वही शनिवार को गांव निवासी कुंवर बहादुर सिंह की एक दुधारू गाय, उसकी दो गाय, शिव नरेश की एक दुधारू गाय, संजय की दो गाय, स्वामीदीन की एक गाय व एक सांड़ मर गया है। जबकि रमेश प्रजापति की एक गाय बीमार है। शाम छह बजे के बाद मवेशियों के मरने का क्रम शुरू हुआ। पीड़ित ने उनका पोस्टमार्टम करा कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मवेशियों को जहर देकर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
पशु चिकित्सा अधिकारी रावेंद्र सिंह ने बताया कि मृत गोवंश का पोस्टमार्टम कर लिए गए सैंपल लखनऊ भेजे गए है। जांच रिपोर्ट आने पर सही तथ्यों का पता चल सकेगा। वहीं बीमार गोवंश का उपचार किया जा रहा है। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है।
वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने किया मुफ्त नेत्र जांच शिविर का आयोजन
फिल्म उद्योग से जुड़े फिल्मकारों, कलाकारों व कामगारों के लिए वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रो ड्यूसर्स एसोसिएशन एवं लायंस क्लब ऑफ मिलेनियम के संयुक्त तत्वाधान में अंधेरी (वेस्ट), मुम्बई स्थित माहेश्वरी भवन में मुफ्त नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। अभिनेता मुकेश ऋषि, राकेश बेदी, लायन विनोद अग्रवाल, लायन आनंद अग्रवाल, लायन विनोद गर्ग, लायन पवन खेतान,
वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड् यसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संग्राम शिर्के, सेक्रेटरी दिलीप दलवी, कार्यक्रम संयोजक धर्मेंद्र मेहरा, कार्यकारिणी सदस्य महावीर जैन, अंजना शर्मा, सुभाष दुर्गकर, रवि सिन्हा, दिनेश अशिवल, राजेश मित्तल, रविन्द्र अरोरा, चांदनी गुप्ता, अनुराधा मेहता, हीराचंद दंड, रामा मेहरा, राहुल सुगंध, अक्षय सिंह, अनिता नायक, प्रिया राठौड़ अमित चंद्रा और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉयज के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी
की उपस्थिति में मुम्बई के मशहूर नेत्र शल्य चिकित्सक डॉ प्रेम अग्रवाल, डॉ प्रतीक अग्रवाल, डॉ पूजा अग्रवाल व उनके टीम द्वारा संचालित इस 9वें ‘मुफ्त नेत्र जांच चिकित्सा शिविर’ में कुल 600 लाभार्थियों को जांच के पश्चात चश्मा व दवाइयां भी दी गई। 22 मार्च 1960 को स्थापित वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोडयू सर्स एसोसिएशन फिल्म निर्माताओं को सरंक्षण देने में अग्रणी रही है।
विकलांग व्यक्तियों के लिए गरिमापूर्ण जीवन के हो प्रयास
डॉ सत्यवान सौरभ
विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार, “विकलांग व्यक्ति” का अर्थ दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या संवेदी हानि वाला व्यक्ति है, जो बाधाओं के साथ बातचीत में, दूसरों के साथ समान रूप से समाज में उनकी पूर्ण और प्रभावी भागीदारी में बाधा डालता है। आज भारत में करोड़ों लोग विकलांग हैं। 2011 की जनगणना हमें 26।8 मिलियन आंकती है, जो भारत की कुल जनसंख्या का 2।21 प्रतिशत है; लेकिन कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और विश्व निकायों जैसे डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि यह 40 से 80 मिलियन के बीच होगा। राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 41 में कहा गया है कि राज्य अपनी आर्थिक सीमा के भीतर काम, शिक्षा और बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और विकलांगता के मामलों में सार्वजनिक सहायता के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए प्रभावी प्रावधान करेगा। संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में ‘विकलांगों और बेरोजगारों को राहत‘ का विषय निर्दिष्ट है।
इस मामले को उठाना केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का कर्तव्य बनता है। यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि सभी सरकारी बसें सुसंगत दिशानिर्देशों के अनुसार विकलांगों के अनुकूल हों। विकलांगता को एक विकसित और गतिशील अवधारणा के आधार पर परिभाषित किया गया है। विकलांगता के प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। अधिनियम में मानसिक बीमारी, आत्मकेंद्रित, स्पेक्ट्रम विकार, सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल स्थितियां, भाषण और भाषा विकलांगता, थैलेसीमिया, हीमोफिलिया, सिकल सेल रोग, बधिर सहित कई विकलांगताएं शामिल हैं। अंधापन, तेजाब हमले के पीड़ित और पार्किंसंस रोग जिन्हें पहले अधिनियम में काफी हद तक नजरअंदाज किया गया था। इसके अलावा, सरकार को निर्दिष्ट विकलांगता की किसी अन्य श्रेणी को अधिसूचित करने के लिए अधिकृत किया गया है।
यह विकलांग लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में 3% से 4% और उच्च शिक्षा संस्थानों में 3% से 5% तक आरक्षण की मात्रा बढ़ाता है। 6 से 18 वर्ष की आयु के बीच बेंचमार्क विकलांगता वाले प्रत्येक बच्चे को मुफ्त शिक्षा का अधिकार होगा। सरकार द्वारा वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थानों को समावेशी शिक्षा प्रदान करनी होगी। सुलभ भारत अभियान के साथ सार्वजनिक भवनों में निर्धारित समय सीमा में पहुंच सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है। विकलांग व्यक्तियों के लिए मुख्य आयुक्त और राज्य आयुक्त अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए नियामक निकायों और शिकायत निवारण एजेंसियों के रूप में कार्य करेंगे। विकलांग व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक अलग राष्ट्रीय और राज्य कोष बनाया गया था।
सुलभ भारत अभियान, पीडब्ल्यूडी के लिए सुलभ वातावरण का निर्माण और सार्वभौमिक पहुंच प्राप्त करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी प्रमुख अभियान जो विकलांग व्यक्तियों को समान अवसर तक पहुंच प्राप्त करने और स्वतंत्र रूप से जीने और एक समावेशी समाज में जीवन के सभी पहलुओं में पूरी तरह से भाग लेने में सक्षम करेगा। अभियान का लक्ष्य निर्मित पर्यावरण, परिवहन प्रणाली और सूचना एवं संचार पारिस्थितिकी तंत्र की पहुंच को बढ़ाना है। दीन दयाल विकलांग पुनर्वास योजना के तहत विकलांग व्यक्तियों को विभिन्न सेवाएं प्रदान करने के लिए गैर सरकारी संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जैसे विशेष स्कूल, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, समुदाय आधारित पुनर्वास, पूर्व-विद्यालय और प्रारंभिक हस्तक्षेप आदि।
सहायक उपकरण की खरीद/फिटिंग के लिए विकलांग व्यक्तियों की सहायता: इस योजना का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को उनकी पहुंच के भीतर उपयुक्त, टिकाऊ, वैज्ञानिक रूप से निर्मित, आधुनिक, मानक सहायक उपकरण और उपकरण लाकर मदद करना है। इस योजना का उद्देश्य विकलांग छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसरों को बढ़ाना है। योजना के तहत, विकलांग छात्रों को प्रति वर्ष 200 फैलोशिप दी जाती है। ऑटिज़्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहु-विकलांगता वाले व्यक्तियों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय ट्रस्ट की योजनाएँ हैं।
ड़ी संख्या में विकलांगता को रोका जा सकता है, जिनमें जन्म के दौरान चिकित्सा संबंधी मुद्दों, मातृ स्थितियों, कुपोषण, साथ ही दुर्घटनाओं और चोटों से उत्पन्न होने वाली विकलांगताएं शामिल हैं। हालांकि, स्वास्थ्य क्षेत्र विशेष रूप से ग्रामीण भारत में विकलांगता के लिए सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया करने में विफल रहा है, इसके अलावा उचित स्वास्थ्य देखभाल, सहायक उपकरण और उपकरणों तक सस्ती पहुंच की कमी है और पुनर्वास केंद्रों में खराब प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता एक और चिंता का विषय है।
हमारी शिक्षा प्रणाली समावेशी नहीं है। मामूली से मध्यम विकलांग बच्चों को नियमित स्कूलों में शामिल करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेष स्कूलों की उपलब्धता, स्कूलों तक पहुंच, प्रशिक्षित शिक्षकों और विकलांगों के लिए शैक्षिक सामग्री की उपलब्धता जैसे कई मुद्दे हैं। इसके अलावा, उच्च शिक्षण संस्थानों में विकलांगों के लिए आरक्षण कई मामलों में पूरा नहीं किया गया है, भले ही कई विकलांग वयस्क उत्पादक कार्य करने में सक्षम हैं, विकलांग वयस्कों के पास सामान्य जनसंख्या की तुलना में बहुत कम रोजगार दर है। निजी क्षेत्र में स्थिति और भी खराब है, जहां बहुत कम विकलांगों को रोजगार मिला हुआ है।
भवनों, परिवहन, सेवाओं तक पहुंच आदि में भौतिक पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विकलांगों के परिवारों, और अक्सर स्वयं विकलांगों का नकारात्मक रवैया विकलांग व्यक्तियों को परिवार, समुदाय या कार्यबल में सक्रिय भाग लेने से रोकता है। विकलांग लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। मानसिक बीमारी या मानसिक मंदता से पीड़ित लोग सबसे खराब कलंक का सामना करते हैं और गंभीर सामाजिक बहिष्कार के अधीन हैं। कठोर और तुलनीय डेटा और स्टैटिक्स की कमी विकलांग व्यक्तियों को शामिल करने में और बाधा डालती है।
डेटा संग्रह और अक्षमता को मापने के साथ प्रमुख मुद्दे हैं,विकलांगता को परिभाषित करना कठिन है। अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अलग-अलग विकलांगता डेटा की आवश्यकता होती है अक्षमता को अक्षमता के रूप में रिपोर्ट करने में अनिच्छा को कई स्थानों/समाजों में एक कलंक माना जाता है। नीतियों और योजनाओं का खराब कार्यान्वयन विकलांग व्यक्तियों को शामिल करने में बाधा डालता है। हालांकि विकलांगों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विभिन्न अधिनियमों और योजनाओं को निर्धारित किया गया है, लेकिन उन्हें लागू करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
निवारक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मजबूत करने की आवश्यकता है और सभी बच्चों की कम उम्र में जांच की जानी चाहिए। केरल ने पहले ही एक प्रारंभिक रोकथाम कार्यक्रम शुरू कर दिया है। व्यापक नवजात स्क्रीनिंग (सीएनएस) कार्यक्रम शिशुओं में कमियों की शीघ्र पहचान करने और राज्य की विकलांगता के बोझ को कम करने का प्रयास करता है। विकलांग लोगों को कलंक पर काबू पाने के द्वारा समाज में बेहतर ढंग से एकीकृत करने की आवश्यकता है विभिन्न प्रकार की विकलांगताओं के बारे में लोगों को शिक्षित और जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए लोगों में सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करने के लिए विकलांग लोगों की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित किया जा सकता है।
विकलांग वयस्कों को रोजगार योग्य कौशल के साथ सशक्त बनाने की आवश्यकता है। निजी क्षेत्र को उन्हें रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। अक्षमता के माप में सुधार करके भारत में विकलांगता के पैमाने को बेहतर ढंग से समझने की आवश्यकता है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षा पर राज्यवार रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है। विकलांग बच्चों की जरूरतों को पूरा करने और उन्हें नियमित स्कूलों में शामिल करने की सुविधा के लिए उचित शिक्षक प्रशिक्षण होना चाहिए। इसके अलावा और अधिक विशेष स्कूल होने चाहिए और विकलांग बच्चों के लिए शैक्षिक सामग्री सुनिश्चित करनी चाहिए।
सड़क सुरक्षा, आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली आदि जैसे सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए इसके अलावा, भवनों को विकलांगों के अनुकूल बनाने के लिए इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाना चाहिए विकलांगों के कल्याण के लिए अधिक बजटीय आवंटन। लिंग बजट की तर्ज पर विकलांगता बजट होना चाहिए। योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उचित निगरानी तंत्र और सार्वजनिक धन की गिनती होनी चाहिए।
—– — डॉo सत्यवान सौरभ,
न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स ने लॉन्च किया आधुनिकतम प्रादेशिक रेफरेंस लेबोरेटरी
मुंबई। भारत में शीर्ष 4 पैथोलॉजी लेबोरेटरी श्रृंखलाओं में से एक, न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स ने 200 से अधिक लेबोरेटरीओं और 2000 से ज्यादा कलेक्शन केंद्रों और भारत, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका में मौजूदगी के साथ, मुंबई के दहिसर, चेंबूर और विद्याविहार में ऑन्कोपैथोलॉजी के तीन प्रादेशिक रेफरेंस लेबोरेटरी और उत्कृष्टता केंद्र को लांच किया। लेबोरेटरी का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के द्वारा डॉ. जीएसके वेलू (अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स), डॉ. अजय शाह (प्रबंध निदेशक, न्यूबर्ग अजय शाह लेबोरेटरी), डॉ. राजेश बेंद्रे (तकनीकी निदेशक, न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स) और डॉ. जय मेहता (प्रेसिडेंट और हेड, न्यूबर्ग ऑनकोपैथ) की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स ने दहिसर में लेबोरेटरी स्थापित करने के लिए सबसे पुराने और लीडिंग मेडिकल डायग्नोस्टिक नेटवर्क में से एक डॉ. अजय शाह के साथ पार्टनरशिप की है और चेंबूर में एक बड़ी स्टैंडअलोन संदर्भ लेबोरेटरी को स्थापित किया है। दहिसर और चेंबूर की नई प्रयोगशालाएं अलग-अलग प्रकार के टेस्ट करने और संसाधित करने के लिए लैस हैं और एक दिन में लगभग 5000 सैंपल को प्रोसेस करने और दिए गए टर्नअराउंड समय के अंदर सर्वोत्तम-इन-क्लास गुणवत्ता बनाए रखते हुए परिणाम देने में सक्षम हैं। इसके अलावा, लैब के पास 6000 से अधिक जांचों के पूरे लैब मेडिसिन टेस्ट मेन्यू तक पहुंच होगी, जिसमें नियमित जांच, और उन्नत जांच शामिल हैं, जैसे कि जीनोमिक्स, प्रोटिओमिक्स, मेटाबॉलिकमिक्स, प्रोटिओमिक्स, ऑन्कोपैथोलॉजी, ट्रांसप्लांट इम्यूनोलॉजी, नवजात स्क्रीनिंग आदि, जिससे मुंबई और महाराष्ट्र के आसपास के जिलों की आबादी को फायदा होगा। लोग प्रिवेंटिव हेल्थ चेक, होम कलेक्शन और विशेष ब्लड टेस्ट जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। डायग्नोस्टिक केंद्रों में कुल 25 कलेक्शन केंद्र हैं और आने वाले साल में 100 कलेक्शन केंद्र खोलने का प्लान है।
डॉ अजय शाह (मैनेजिंग डायरेक्टर, न्यूबर्ग अजय शाह लेबोरेटरी पार्टनर) ने बताया कि दहिसर में अपनी उच्च गुणवत्ता वाली पैथोलॉजी सेवाओं को लाने के लिए न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स के साथ पार्टनरशिप करने पर मुझे गर्व है। यह संयुक्त उद्यम यह आश्वस्त करेगा कि क्षेत्र के लोगों के पास मौजूद सर्वोत्तम पैथोलॉजी परीक्षण सेवाओं तक पहुंच हो।
डॉ. राजेश बेंद्रे (तकनीकी निदेशक, न्यूबर्ग रेफरेंस लेबोरेटरी, चेंबूर) ने बताया कि मुंबई में वर्ल्ड क्लास कस्टमर केयर देना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। डॉक्टरों को सटीक, विश्वसनीय परिणाम उपलब्ध करने और कस्टमर को सीधे पहुचाने पर हमारा मुख्य फोकस है। हमारी व्यक्तिगत व्यस्तताएं और स्मार्ट रिपोर्ट भी उपयोगकर्ता के अनुकूल तरीके से याख्या करने में मदद करती है। कंपनी ने विद्याविहार में न्यूबर्ग ऑन्कोपैथोलॉजी रेफरेंस लेबोरेटरी स्थापित की है जो एक उत्कृष्टता केंद्र और ऑन्कोपैथोलॉजी के लिए अत्याधुनिक दूसरी मत लेबोरेटरी है। केंद्र अनुभवी ऑन्कोपैथोलॉजिस्ट और जेनेटिसिस्ट के साथ उन्नत कैंसर केयर डायग्नोस्टिक का रास्ता खोलेगा, और देश भर के ऑन्कोलॉजिस्ट को बेहतर डायग्नोस्टिक अंतर्दृष्टि प्रदान करने और कैंसर रोगियों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए सभी आधुनिक तकनीकों और तकनीकी बुनियादी ढांचे का निर्माण करेगा।
मुंबई। मल्टी-स्पेश्यलिटी हेल्थकेयर सेंटर और पिरोजशॉ गोदरेज फाउंडेशन के लाभार्थी गोदरेज मेमोरियल हॉस्पिटल ने भारत की पहली व्यापक जीनोम टेस्टिंग की पेशकश की है, जोकि व्यक्ति में 150 से ज्यादा चिकित्सकीय स्थितियों की संभावनाओं और आनुवांशिक लक्षणों की पहचान करती है। हॉस्पिटल ने आईआईटी बॉम्बे की एक हेल्थकेयर-टेक्नोलॉजी कंपनी हेस्टैकएनालीटिक्स के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत पूरी तरह से ऑटोमेटेड और एआई-आधारित एक बायो-इंफोर्मेटिक्स प्लेटफॉर्म पर विकसित एवं उपभोक्ता-केन्द्रित स्वास्थ्य समाधान ‘हेल्थ जीनोमीटर स्मार्ट प्लान’ लॉन्च किया गया है। यह प्रिवेंटिव स्वास्थ्य रक्षा समाधान पैथोलॉजिकल और जीनोमिक परीक्षणों के माध्यम से मौजूदा और भविष्य के स्वास्थ्य जोखिमों का विश्लेषण कर व्यक्ति की ज्यादा जोखिम वाली चिकित्सकीय स्थितियों का संपूर्ण दृश्य देगा।
हेल्थ जीनोमीटर स्मार्ट प्लान अपनी तरह का पहला प्रिवेंटिव हेल्थकेयर जीनोम परीक्षण है, जोकि पूरे एक्जोम के विश्लेषण में सहायता करता है, जिसमें 7000 से ज्यादा जीन्स होते हैं, ताकि बीमारी की संभावनाओं को समझा जा सके। यह परीक्षण स्वास्थ्य के जोखिमों को जाँचने से आगे बढ़कर 48 नैदानिक चिकित्सकीय स्थितियों को शामिल करता है, जैसे कि कैंसर, मधुमेह और दूसरी कार्डियोवैस्कुलर बीमारियाँ, जिन पर काम हो सकता है और यह सभी अनुशंसाओं के लिये संवेदनशीलताओं तथा लक्षणों की पहचान करता है।
इस परीक्षण के साथ जेनेटिक परामर्श और चिकित्सक से सलाह भी मिलती है और साथ ही जेनेटिक जाँच की तैयार रिपोर्ट, जिसमें निजी और पारिवारिक इतिहास होता है, ताकि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर किफायती खर्च पर हो सके। इसे आईसीएमआर के डॉ. दीपक मोदी, गोदरेज मेमोरियल हॉस्पिटल के सीईओ, लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) डॉ. एल. सी. वर्मा, वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एस. वी. कुलकर्णी, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. बोमन धाभर और उद्यमी तथा एक्टर छवि मित्तल की गरिमामयी उपस्थिति में लॉन्च किया गया है।
इस भागीदारी के हिस्से के तौर पर गोदरेज मेमोरियल हॉस्पिटल में लॉन्च हो रहे अन्य उत्पाद हैं टीबी होल जीनोम सीक्वेंसिंग परीक्षण और सेप्सिस के मरीजों के लिये जीनोमिक्स पर आधारित इंफेक्शियस स्क्रीनिंग टेस्ट। यह सभी जल्दी ही जीएमएच के मरीजों के लिये उपलब्ध होंगे।
गोदरेज मेमोरियल हॉस्पिटल के सीईओ, लेफ्टिनेंट कर्नल एल. सी. वर्मा ने कहा कि गोदरेज मेमोरियल हॉस्पिटल और हेस्टैकएनालीटिक्स के बीच गठजोड़ का परिणाम, व्यापक जीनोम स्क्रीनिंग टेस्ट प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को किफायती बनाता है और ज्यादा लोगों को शीघ्र निदान और तेज उपचार में समर्थ बनाएगा और इस तरह देश की सेहत सुरक्षित रहेगी।
हेस्टैकएनालीटिक्स के सीईओ डॉ. अनिर्वन चटर्जी ने कहा कि जीनोम सीक्वेंसिंग जीवन में एक बार होती है और कैंसर, पैतृक मेटाबोलिक बीमारियों तथा पोषण के अभाव की बीमारियों का जोखिम आंकने में मदद कर सकती है और यह प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के लिये एक नई खोज है। ये टेक्नोलॉजी व्यक्तिगत इलाज और दवाइयों के क्षेत्र में क्रांति लाएगी और हेल्थकेयर क्षेत्र में भविष्य में नए-नए आविष्कारों का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस टेस्ट की कीमत 24,990 रुपये है।
26 मार्च को बॉलीवुड व मीडिया के लोगों के लिए निःशुल्क महा आरोग्य शिविर
आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर व भारत के लीडिंग होम हेल्थ केयर सर्विस प्रोवाइडर डॉक्टर 365 द्वारा आयोजित किए जा रहे फ्री मेडिकल कैम्प में सैकड़ों डॉक्टर्स, नर्स होंगे उपस्थित, 30 हजार चश्मे और 500 व्हीलचेयर दी जाएंगी
मुम्बई। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर के अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र कुमार और क्रिएटिव आई लिमिटेड के निर्माता निर्देशक धीरज कुमार द्वारा आगामी 26 मार्च रविवार को बॉलीवुड और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए मुम्बई में निःशुल्क महा आरोग्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। सिनेमा के इतिहास में फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम टेक्नीशियन, मीडिया, उनकी फैमिली के लिए इस तरह का इतना बड़ा फ्री मेडिकल कैम्प पहली बार होने जा रहा है। इस संदर्भ में मुम्बई में स्थित वल्चर क्लब में एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया जहां भारत के लीडिंग होम हेल्थ केयर सर्विस प्रोवाइडर डॉक्टर 365 के डॉ धर्मेंद्र कुमार और धीरज कुमार के अलावा बीएन तिवारी, मनीष कुमार वर्मा, संगीता तिवारी, डॉ दिलीप पवार, महेंद्र पोद्दार, अमित दोषी, फैशन डिजाइनर अर्चना कोचर, अविनाश राय, दिनेश चतुर्वेदी, जावेद खान, प्राची बेडेकर और सुंदरी ठाकुर सहित कई महत्वपूर्ण हस्तियां शामिल हुईं।
आरके एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर के अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि बॉलीवुड इंडस्ट्री और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए महा आरोग्य शिविर 26 मार्च को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक चित्रकूट ग्राउंड वीरा देसाई रोड, अंधेरी पश्चिम मुम्बई में लगाया जा रहा है। उसके बाद उसी शाम को 7 बजे से फ़िल्म टेक्नीशियन और मीडिया प्रोफेशनल्स के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। फिल्म उद्योग से जुड़े टेक्नीशियन, मीडिया और उनकी फैमिली के साथ ही मुम्बई पुलिस व उनके परिवार के लाखों लोग इस निःशुल्क महा आरोग्य चिकित्सा शिविर का लाभ लेंगे।
डॉ धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि कोरोना काल के बाद इंसानों में मेंटल हेल्थ, दिल की बीमारियों सहित कई रोगों ने हमला किया है। ऐसे में तमाम लोगों की जांच होनी जरूरी है,समय पर उनका इलाज होना महत्वपूर्ण है। भारत देश के तमाम वासियों को हम स्वस्थ देखना चाहते है, इसी उद्देश्य के अंतर्गत हम मेडिकल कैम्प का आयोजन पिछले कई वर्षों से करते आ रहे हैं।
डॉ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि डॉक्टर 365 व आर.के. एचआईवी एड्स रिसर्च एंड केयर सेंटर ने दिसंबर 2022 तक 3,55,00,000 (तीन करोड़ पचपन लाख) से अधिक लाभार्थियों के साथ 29,000 से अधिक चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया है। मुंबई में 26 मार्च को बॉलीवुड और मीडिया बिरादरी के लिए मुफ्त महा आरोग्य शिविर में मुंबई के शीर्ष अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टर सहित 900 डॉक्टर्स दिनभर मौजूद रहेंगे। यहां हम लोगों के लिए हेल्थ चेकअप, हड्डी सम्बंधित रोग, ईसीजी टेस्ट, ईएनटी, हार्ट चेकअप, आई चेकअप, चश्मा वितरण, दवा वितरण, डेंटल चेकअप, ट्राई साइकिल वितरण और ब्लड ग्रुप चेकअप जैसी सुविधाएं प्रदान करेंगे। डॉक्टर्स जिन्हें ऑपरेशन के लिए रेफर करेंगे हम उनकी मुफ्त सर्जरी के लिए भी इंतजाम करेंगे। 30 हजार चश्मे और 500 व्हीलचेयर दी जाएंगी।
इस अवसर पर सुंदरी ठाकुर ने शॉल पहनाकर धर्मेंद्र कुमार और धीरज कुमार का सम्मान किया।
धीरज कुमार ने कहा कि धर्मेंद्र कुमार इस तरह के हजारों महा आरोग्य शिविर का आयोजन कर चुके हैं मगर 26 मार्च को होने जा रहे महा आरोग्य शिविर की विशेषता यह है कि यहां इंडस्ट्री से जुड़े लोगों, मीडिया, पुलिस और सबकी फैमिली के लिए हेल्थ सुविधाएं रखी गई हैं। डॉ धर्मेंद्र कुमार के जज़्बे और उनकी टीम की मेहनत को सलाम, मैं इसी वजह से इस मुहिम में शामिल हुआ। इंडस्ट्री के ढेर सारी हस्तियों ने इस पहल का सपोर्ट किया है जिनमे हेमा मालिनी, मधुर भंडारकर, शंकर महादेवन, शान, अनूप जलोटा, मधु, जॉनी लीवर, दिव्या दत्ता, सुनील पाल सहित कई नाम उल्लेखनीय है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री श्री तानाजी सावंत भी इस पहल के सपोर्ट में आगे आए हैं। लीलावती अस्पताल, जसलोक अस्पताल, सैफी अस्पताल सहित मुम्बई के कई बड़े अस्पताल इस कैम्प का सपोर्ट कर रहे हैं।
मेयर ऑफ लंदन सहित कई महत्वपूर्ण हस्तियां 26 मार्च को आ रही हैं। यहां ई-श्रम कार्ड कैम्प भी रखा गया है, जिसमें ई-श्रम कार्ड रखने वालों को काफी लाभ मिलेंगे। 60 वर्ष की आयु होने के बाद प्रतिमाह 3,000 रुपये की पेंशन मिलेगी। 2,00,000 रुपये का बीमा है। गरीब और कमजोर परिवार को अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख का लाभ मिलेगा। मैं सभी लोगों खास कर फ़िल्म इंडस्ट्री और मीडिया जगत से जुड़े लोगों से अपील करूंगा वे इस कैम्प में अपने परिवार के सदस्यों को भी लेकर आएं और इस महा शिविर का लाभ उठाएं। साथ ही अपने दोस्तों, परिचितों को भी इस कैम्प के बारे में बताएँ।












