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कृषि रोबोट: किसानों का किफायती दोस्त

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प्रियंका सौरभ

भारत में कृषि उद्योग में पिछले कुछ दशकों में भारी बदलाव आया है। पारंपरिक खेती के तरीकों से लेकर स्मार्ट खेती तक, हमने एक लंबा सफर तय किया है। प्रौद्योगिकी ने अंततः ग्रामीण कृषि की चुनौतियों पर काबू पा लिया है और उत्पादकता बढ़ाने के लिए लगातार उन्नत समाधान लेकर आ रही है। अंतिम उद्देश्य किसानों को बढ़ती आबादी को खिलाने के लिए उच्च उपज वाली फसलों का उत्पादन करने में मदद करना है। इस सतत विकास को प्राप्त करने के लिए, कृत्रिम बुद्धि के साथ संयुक्त तकनीकी विकास ने ड्रोन, नमी सेंसर इत्यादि के आकार में नए-नए गैजेट पेश करने में मदद की है। ऐसा ही एक उदाहरण कृषि रोबोट है। रोबोटिक्स प्रौद्योगिकी की वह शाखा है जो रोबोट के डिजाइन, निर्माण, संचालन, संरचनात्मक निक्षेपण, निर्माण और अनुप्रयोग से संबंधित है। आज रोबोटिक्स तेजी से बढ़ता क्षेत्र है और यह विभिन्न व्यावहारिक उद्देश्यों की पूर्ति करने वाले नए रोबोटों के अनुसंधान, डिजाइन और निर्माण में जारी है।

भारत में कृषि उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने में रोबोटिक्स फसल और मिट्टी के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए कंपनियां सेंसर और विभिन्न तकनीकों का लाभ उठा रही हैं। विभिन्न एआई और मशीन लर्निंग टूल्स का उपयोग बीज बोने के समय की भविष्यवाणी करने, कीट हमलों से जोखिमों पर अलर्ट प्राप्त करने आदि के लिए किया जा रहा है। कंपनियां एक कुशल और स्मार्ट आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए कई स्रोतों से आने वाले डेटा-स्ट्रीम पर रीयल-टाइम डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर रही हैं। कृषि रोबोट कंपनियां आवश्यक कृषि कार्यों को संभालने के लिए स्वायत्त रोबोट विकसित और प्रोग्रामिंग कर रही हैं, जैसे मानव मजदूरों की तुलना में अधिक मात्रा में और तेज गति से फसल की कटाई। कृषि रोबोट के कुछ उदाहरण है जैसे ग्रीन सीकर सेंसर स्मार्ट मशीन एक पौधे की ज़रूरतों को पढ़ती है और फिर आवश्यक शाकनाशियों के उर्वरक की मात्रा को सटीक रूप से लागू करती है। ग्रीन सीकर एक ऐसी मशीन है जो सेंसर का उपयोग करके पौधे को बताती है कि उसे क्या चाहिए।

रोबोट ड्रोन ट्रैक्टर रोबोट ड्रोन की एक नई पीढ़ी हमारे खेती करने के तरीके में क्रांति ला रही है, विभिन्न रोबोट के निर्माण के साथ, पहली बार रोबोट ड्रोन ट्रैक्टर की घोषणा कृषि मुख्यधारा का हिस्सा बन गई है। रोबोट यह तय करेगा कि कहां बोना है, कब फसल काटनी है और खेत को पार करने के लिए सबसे अच्छा मार्ग कैसे चुनना है। उर्वरक फैलाने के लिए उड़ने वाले रोबोट इली खेतों के ऊपर फसलों की बढ़ती स्थिति की निगरानी करता है, एक स्वचालित उर्वरक प्रणाली के साथ, रोबोट स्वायत्त रूप से उड़ सकता है। फल चुनने वाले रोबोट अनुसंधान अभी भी पूरी तरह से प्रगति पर है, विशेष रूप से रोबोट को सावधानीपूर्वक डिजाइन करने की आवश्यकता है ताकि वे फलों को तोड़ते समय चोट न करें। एक समाधान सक्शन ग्रिपर्स का उपयोग है, जिसका उपयोग स्वचालित फल चुनने वाली मशीनों पर किया जाता है,  मानव श्रम के बिना डेयरी पशुओं, विशेष रूप से डेयरी मवेशियों का दूध दुहना है। स्वचालित दुग्ध प्रणाली, जिसे स्वैच्छिक दुग्ध प्रणाली भी कहा जाता है, 20वीं शताब्दी के अंत में विकसित की गई थी।

भारत में कृषि उपकरण कंपनियों और शोधकर्ताओं ने पारंपरिक खेती की जरूरतों के लिए बहुत सारे छोटे और भारी कृषि उपकरण विकसित किए हैं। यदि खरपतवार नियंत्रण के लिए रोबोट का उपयोग किया जा रहा है, तो इससे शाकनाशियों के उपयोग को कम करने में मदद मिलेगी और उपज जैविक में बदल जाएगी, उसी तरह रोबोटों का उपयोग सघनता से बचने के लिए रोपाई के लिए किया जा सकता है। ग्रामीण आविष्कारकों द्वारा कुछ प्रभावशाली नवीन तकनीकों को सेल फोन द्वारा दूर से संचालित किया जा सकता है, यह गर्मियों के समय में किसानों के लिए बहुत मददगार है क्योंकि बिजली की आपूर्ति अनियमित है। विभिन्न लाभों के बावजूद, कृषि रोबोटों की कुछ कमियाँ उनके उपयोग में काफी बाधा डालती हैं। एग्रीबॉट्स ऐसी मशीनें हैं जिनमें काफी निवेश की आवश्यकता होती है, जो उन्हें छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक महंगा मामला बनाती हैं। एगबॉट्स नवीनतम तकनीकी प्रगति से सुसज्जित हैं, जिससे उनका उपयोग करना जटिल हो जाता है। कृषि रोबोटों को किसानों को आधुनिक तकनीक से निपटने में कुशल और कुशल बनने की आवश्यकता है, जो उनके खेत की ठीक से देखभाल करने की उनकी क्षमता को बाधित करता है।

भारत एक ऐसा देश है जो नियमित रूप से बिजली कटौती का सामना करता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। यह कृषि रोबोटों को बेकार बना देता है क्योंकि वे बिजली के बिना काम नहीं कर सकते हैं, जिससे समय की अनावश्यक बर्बादी होती है। खेती में उन्नत बुद्धिमान मशीनें, सेंसर या रीडर और हैंड हेल्ड पीडीए गणना और सटीकता में बहुत मददगार साबित होने वाले हैं सभी देशों में कृषि क्षेत्र में बहुत सारी बाधाएं हैं, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में भारत में किसान घट रहे हैं।  बार-बार कुछ सामान्य वाक्यों को दोहराकर खेती के पेशे को छोड़ रहे हैं कि यह अब लाभदायक नहीं है और यह दिन-ब-दिन जोखिम भरा होता जा रहा है। इसके नुकसान युवाओं को भी इसमें रुचि नहीं लेने देते हैं। रोबोटिक्स निश्चित रूप से कृषि क्रांति लाएगा। हालांकि आगे की राह बहुत आसान नहीं है। हमें दुनिया की खाद्य जरूरतों को पूरा करने की व्यवहार्यता, स्थिरता और दक्षता की गणना करनी होगी। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि किसान, कृषि-व्यवसायी और उपभोक्ता इस उद्योग के भविष्य को आकार देने के लिए रोबोटिक्स और डिजिटल-मशीनीकरण की शक्ति का उपयोग कैसे करेंगे।

अतीक-अशरफ हत्याकांड: कौन है वह महिला जिसने अतीक को दिया था श्राप?

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DESK: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज ही नहीं बल्कि आस-पास के पूरे इलाकों में 40 साल तक जिस माफिया डॉन के आतंक से लोग कांपते रहे, वह पूरे कुनबे के साथ मिट्टी में मिल गया। बात यूपी के सबसे बड़े माफिया डॉन अतीक अहमद की हो रही है। तीन दिन में अतीक के परिवार में तीन लोग कब्र में पहुंच गये. पहले अतीक के बेटे असद को एनकाउंटर मार गिराया गया और दो दिन बाद अतीक और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अतीक और उसके कुनबे के आतंक को जानने वालों को एक महिला का श्राप याद आ रहा है। 18 साल पहले इस महिला ने रो-रो कर कहा था-अतीक ने जैसे मरे पति की हत्या की है, एक दिन उसकी भी हत्या वैसे ही कर दी जायेगी। महिला का श्राप लग गया।
कौन है वह महिला जिसने अतीक को दिया था श्राप?
प्रयागराज के लोग कह रहे हैं कि अतीक के परिवार और उसके गुर्गों को एक महिला का श्राप लगा है. ये महिला और कोई नहीं बल्कि पूर्व विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल हैं. पूजा पाल के हाथों की मेंहदी नहीं उतरी थी कि सुहाग को उजाड़ दिया गया था. तभी उन्होंने कहा था कि अतीक भी वैसे ही मारा जायेगा. आखिरकार अतीक मारा ही गया. अकेले नहीं बल्कि भाई और बेटे के साथ।
ये कहानी शुरू होती है 2004 से. माफिया डॉन अतीक अहमद ने 2004 में प्रयागराज से लोकसभा चुनाव जीत लिया था. वह पहले से ही प्रयागराज पश्चिमी विधानसभा सीट से विधायक था. जब सांसद बन गया तो विधानसभा की सीट खाली हो गयी. अतीक के सांसद चुने जाने से खाली हुई सीट पर 2005 में उपचुनाव हुआ था. अतीक ने अपने भाई अशरफ को इस सीट से मैदान में उतारा. उधर बसपा ने एक युवा चेहरे को अतीक-अशरफ के आतंक का मुकाबला करने के लिए मैदान में उतारा. बसपा की टिकट से युवा नेता राजू पाल ने चुनाव लड़ा था. राजू पाल के सामने पहली बार अतीक के कुनबे ने हार का स्वाद चखा. राजू पाल विधानसभा उप चुनाव जीत कर विधायक बन गये.
2005 के जनवरी में विधायक बनने के कुछ ही दिन बाद राजू पाल की शादी भी हुई. राजू पाल ने पूजा पाल से शादी की थी. उधर अतीक और उसका कुनबा अपनी हार का बदला गोली से लेने की प्लानिंग कर रहा था. आतंक के पर्याय अतीक को राजू पाल के विधायक बनने के साथ साथ शादी होने की खुशी नागवार गुजर रही थी. लिहाजा राजू पाल को ऐसा सबक देने की प्लानिंग की गयी कि फिर कोई अतीक अहमद के सामने खड़ा नहीं हो पाये.
शादी के 9 दिव बाद राजू पाल को छलनी कर दिया गया था
घटना 25 जनवरी 2005 की है. प्रयागराज के धूमनगंज में विधायक राजू पाल को गोलियों से छलनी कर दिया गया था. अतीक के भाई अशरफ औऱ उसके गुर्गों ने राजू पाल को दौड़ा-दौड़ाकर गोलियां मारी थी. प्रयागराज में दिन दहाड़े विधायक की इस बेरहमी से हत्या ने पूरे उत्तर प्रदेश को दहला दिया था. सबसे बड़ा सदमा तो पूजा पाल को लगा. उनके हाथों की मेहंदी अभी छूटी भी नहीं थी पति को सरेआम गोलियों से भून दिया गया. शादी के सिर्फ नौ दिन बाद पूजा पाल को विधवा बना दिया गया. अपना सुहाग उजाड़ दिये जाने के बाद पूजा पाल ने अतीक और उसके कुनबे को श्राप दिया था. वही श्राप लग गया.
पूजा पाल ने कहा था-अतीक तेरा हाल भी ऐसा ही होगा
अपने पति की हत्या के बाद पूजा पाल ने रोते हुए कहा था कि अतीक और उसके गुर्गों ने जो हाल मेरे पति का किया है, उसका न्याय भगवान करेगा. एक दिन भगवान उन्हें उनके कर्मों की सजा देगा और अतीक का अंत भी ऐसे ही होगा. लगभग 18 साल बाद अतीक को भी सरेआम गोलियों से भून डाला गया. उसके साथ उसका भाई अशरफ भी मारा गया. अशरफ ने खुद राजू पाल को गोलियों से भूना था. तीन दिन के अंदर अतीक के परिवार का नामों निशान मिट गया. दो दिन पहले बेटे असद का एनकाउंटर हो गया. फिर अतीक और अशरफ को मार डाला गया. उसके दो नाबालिग बेटे जेल में हैं तो पत्नी शाइस्ता फरार है. अतीक और अशरफ की मौत के बाद पूजा पाल ने कहा है कि जो जैसा करता है वैसा ही भरता है. उन्होंने कहा-इंसान के कर्मों का फल इसी धरती पर मिलता है.
क्या कर रही हैं पूजा पाल?
शादी के नौ दिन बाद विधवा बना दी गयीं पूजा पाल ने अपने पति के मर्डर के बाद उनकी सियासी विरासत संभाल रखी है. राजू पाल की हत्या के बाद खाली हुई विधानसभा सीट पर 2005 में ही हुए उपचुनाव में पूजा पाल ने बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था. लेकिन वे अतीक के भाई अशरफ के आतंक के सामने हार गयी थीं. हालांकि 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में पूजा पाल ने बसपा की टिकट से जीत हासिल की थी. 2012 के विधानसभा चुनाव में भी पूजा पाल ने अपना दल से खड़े हुए अतीक अहमद को हराया था. पूजा पाल को बसपा ने जनवरी 2018 में अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल दिया. बीच में उनके भाजपा में जाने की भी चर्चा हुई. लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में पूजा पाल को सपा ने उन्नाव से प्रत्याशी बनाया था.

कांग्रेस में शामिल होने के बाद जगदीश शेट्टार ने कहा “कल मैंने बीजेपी छोड़ दी और आज मैं कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गया

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023: राज्य में चुनाव 10 मई को होने वाले हैं, उससे पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। पूर्व सीएम और बीजेपी के विधायक रहे जगदीश शेट्टार ने आज कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद शेट्टार ने कहा कि मैं पूरे मन से कांग्रेस में शामिल हो रहा हूं। डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया, रणदीप सुरजेवाला और एमबी पाटिल सहित कांग्रेस नेताओं ने मुझसे संपर्क किया था। जब उन्होंने मुझे आमंत्रित किया, तो मैं बिना किसी दूसरे विचार के यहां आया।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद जगदीश शेट्टार ने कहा “कल मैंने बीजेपी छोड़ दी और आज मैं कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गया। एक विपक्षी नेता के रूप में कई लोग हैरान हैं, पूर्व सीएम और पार्टी अध्यक्ष कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। बीजेपी ने मुझे हर पद दिया है और पार्टी कार्यकर्ता होने के नाते मैंने हमेशा पार्टी के विकास के लिए काम किया है। वरिष्ठ नेता होने के नाते मैंने सोचा था कि मुझे टिकट मिल जाएगा, लेकिन जब मुझे पता चला कि मुझे टिकट नहीं मिल रहा है, तो मैं चौंक गया। पद मुझे मिलेगा या नहीं, वहां इसके लिए किसी ने मुझसे बात नहीं की, न ही मुझे मनाने की कोशिश की, आश्वासन भी नहीं दिया कि क्या होगा?”
कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर, सिद्धारमैया ने कही ये बात
कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने शेट्टार के ज्वाइन करने के बाद कहा था कि लिंगायत समुदाय कर्नाटक में एक बड़ा समुदाय है, वे (भाजपा) बीएस येदियुरप्पा को अपना नेता स्वीकार करते हैं और जगदीश शेट्टार हमेशा दूसरे स्थान पर रहे हैं। बीजेपी ने येदियुरप्पा को सीएम पद से नीचे लाकर उनका भी अपमान किया, इसलिए इस्तीफा देने पर वह रो पड़े।
सिद्धारमैया ने कहा मैं पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार का हमारी पार्टी में स्वागत करता हूं। उन्हें कर्नाटक में एक सभ्य राजनेता के रूप में जाना जाता है। हालांकि वह आरएसएस से हैं, लेकिन वह एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं। मैंने उनके साथ विपक्ष के नेता के रूप में काम किया और जब मैं मुख्यमंत्री था तब वह विपक्ष के नेता थे। वह भाजपा में एक ईमानदार पार्टी कार्यकर्ता थे और हमेशा पार्टी के साथ खड़े रहे, व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं।

भारत बनाने जा रहा है रॉकेट फोर्स, ‘प्रलय‘ मिसाइलें बदल देंगी जंग का रुख

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India-China-Pakistan: चीन और पाकिस्तान की ओर से भारत को हमेशा खतरा बना रहता है। इन खतरों से निपटने के लिए भारत अपनी पूरी तैयारी में है। इन दोनों देशों को करारा जवाब देने के लिए भारत रॉकेट फोर्स बनाने की कोशिश में जुटा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डिफेंस मिनिस्ट्री इसके लिए 7500 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बैलेस्टिक मिसाइल प्रलय की 250 यूनिट का ऑर्डर देने वाला है। दिसंबर 2022 में रक्षा मंत्रालय से इंडियन एयरफोर्स के लिए इन मिसाइलों की नई यूनिट को मंजूरी देने के बाद यह कदम उठाया गया है।
जिन प्रलय मिसाइलों पर भारत काम कर रहा है, उनकी खासियत यह है कि जंग की स्थिति में प्रलय मिसाइल 150 से 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। दुश्मन यदि चाहे भी कि एयर डिफेंस सिस्टम से प्रलय मिसाइल को रोक लिया जाए, तो भी ये संभव नहीं है। प्रलय की मारक क्षमता, उसकी रेंज को बढ़ाने पर काम चल रहा है। सबसे पहले प्रलय मिसाइल इंडियन एयरफोर्स, फिर इंडियन आर्मी में शामिल की जाएंगी।
भारत को क्यों है रॉकेट फोर्स की जरूरत
भारत के पूर्व चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान जैसे देशों की दोहरी चुनौती है। इन दोनों दुश्मन देशों से जंग की संभावित स्थिति में भारत अपनी ताकत का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तैयारी और दमखम को बढ़ा रहा है। इसमें रॉकेट फोर्स की अहम भूमिका रहेगी। चीन के साथ भारत की 3400 किलोमीटर लंबी सीमए लगती है। वहीं पाकिसतान भी कश्मीर से गुजरात तक भारत की लंबी सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में किसी भी परिस्थिति का सामना इन लंबी सीमाओं पर करने में रॉकेट फोर्स की अहम भूमिका रहेगी। रॉकेट फोर्स की कार्रवाई इतनी सटीक रहेगी कि चीन और पाकिस्तान को मौका ही नहीं मिल पाएगा।
जानिए रॉकेट फोर्स के बारे में
भविष्य की जंग में तेजी और जल्दी निर्णायक जीत हासिल करने में रॉकेट फोर्स की अहम भूमिका होगी। टैंक और लड़ाकू विमानों की परंपरागत जंग से परे रॉकेट फोर्स त्वरित परिणाम लाने वाले हथियार के रूप में पहचान रख सकेंगे। भविष्य के युद्धों में तेजी से और निर्णायक रूप से जमीन पर सैनिकों को तैनात किए बिना दुश्मन के सामरिक और सैन्य अड्डों को तगड़ी चोट पहुंचाने के लिए नए.नए उपाय खोजे जा रहे हैं। उनमें से ही एक तरीका मिसाइलों के जरिए होगा।
भारत को होगा यह फायदा
रॉकेट फोर्स बन जाने से इंडियन आर्मी के कोर ऑफ आर्टिलरी से दबाव हटेगा। ये फोर्स भारत के स्ट्रैटेजिक हथियारों को नियंत्रित करने के साथ्ज्ञ ही मौका पड़ने पर तुरंत जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम है। भारत की रॉकेट फोर्स से पाकिस्तान हमले की हिमाकत नहीं कर पाएगा।  इससे सैनिकों के हताहत होने की संख्या भी कम होगी।
जंग का रूख बदल सकती है प्रलय मिसाइल
प्रलय दरअसल, हाफ बैलेस्टिक मिसाइल है। जो कि जमीन से जमीन पर मार करती है। डीआरडीओ ने प्रलय मिसाइल को पृथ्वी और प्रहार मिसाइल को मिलाकर विकसित किया है।  ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के अलावा, यह भारत द्वारा तैनात की जाने वाली एकमात्र पारंपरिक सामरिक युद्धक्षेत्र मिसाइल है।इसका संचालन  भारत की सामरिक बल कमांड के हाथ में न होकर रॉकेट फोर्स के हाथों में होगा।  प्रलय मिसाइल 350 से 700 किलोग्राम तक वजन ले जाने में सक्षम है।यह मिसाइल चीनी सेना के खिलाफ अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में अधिकतम लाभ प्रदान कर सकती है।

‘मैंने प्रेम बो दिया’ कविता संग्रह का लोकार्पण सम्पन्न

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मुंबई। युवा साहित्यकार पवन तिवारी के नये कविता संग्रह ‘मैंने प्रेम बो दिया’ का लोकार्पण मुंबई हिंदी अकादमी की ओर से 15 अप्रैल 2023 की शाम मुंबई प्रेस क्लब के सभागार में साहित्य अकादमी से सम्मानित मराठी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मण गायकवाड़ के हाथों गरिमापूर्ण परिवेश में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शोधवरी पत्रिका के सम्पादक हूबनाथ पांडेय ने कहा कि मैं इस कठिन समय में प्रेम कविताओं को महत्व नहीं देता। युवा समालोचक एवं बिरला महाविद्यालय के एसोशिएट प्रोफेसर डॉ श्यामसुंदर पांडेय ने लोकर्पित कविता संग्रह ‘मैंने प्रेम बो दिया’ की कविताओं को जीवन की सचाई बताया। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सुलभा कोरे ने कवि द्वारा प्रेम बोने के भाव की सराहना की।
समारोह के अध्यक्ष लक्ष्मण गायकवाड़ ने वर्तमान में प्रेम को आवश्यक तत्व बताया। उन्होंने पवन तिवारी की साहित्य साधना और रचनाधर्मिता की प्रशंसा करते हुए शुभकामनाएं दी।
लेखकीय वक्तव्य में पवन तिवारी ने कहा कि मैं शौकिया नहीं लिखता, लिखना मेरा स्वभाव है। जो देखता हूँ, अनुभव करता हूँ, भोगता हूँ यदि उनका चिंतन असहनीय हो जाता है तो उसे शब्दों में बांध देता हूँ।
कार्यक्रम में नार्वे से प्रवासी साहित्यकार आलोक शरद विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम का सुंदर संचालन कवयित्री डॉ. वर्षा सिंह ने की। इस अवसर पर सागर जी का विशेष रूप से सम्मान किया गया।तो वहीं आभार प्रकट किया संस्था के सचिव एवं आर के पब्लिकेशन के मुखिया राम कुमार ने।
इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष मनोज कुमार गोयल, नन्दलाल क्षितिज, रामस्वरूप साहू, प्रज्जवल वागदरी, हसन पठान, प्रतिभा श्रीवास्तव, आलोक मिश्र, प्रो. रामलखन, प्रियंका जैसवार, मनसा मिश्रा, हेरम्ब तिवारी, जगदम्बा पांडेय, डॉ वर्षा महेश, राम प्यारे सिंह रघुवंशी, अनिल राही सूर्यकान्त शुक्ल, अल्हड़ असरदार, अभिजीत अयंक, कल्पेश यादव, रवि यादव, मुन्ना यादव मयंक, रवीन्द्र चौरसिया, डॉ उषा मिश्रा, रमाकांत ओझा, ताबिश रामपुरी, आनंद पांडेय केवल, सेवासदन प्रसाद, ओम प्रकाश पांडेय, प्रमोद गौंड़, शोभा खंडेलवाल, आलोक मिश्र, विनीत शंकर आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

शीघ्र प्रकाशित होगी शिवाजी महाराज पर उपन्यास श्रृंखला ‘महासम्राट’ की दूसरी कड़ी ‘रणखैंदळ’

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मुम्बई। मराठी में इन दिनों विश्वास पाटील द्वारा लिखी जा रही छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित उपन्यास श्रृंखला ‘महासम्राट’ की धूम मची है। इस उपन्यास श्रृंखला का दूसरा खंड ‘रणखैंदळ’ 15 मई को प्रकाशित होने जा रहा है। पुणे के मेहता पब्लिकेशन हाउस के अखिल मेहता इस ग्रंथ के प्रकाशन की जोरदार तैयारियों में लगे हैं।
छत्रपति के जीवन काल पर बाजार में तमाम दृष्टिकोणों से लिखी अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं। लेकिन श्री पाटील ने अपने शानदार लेखन कौशल और बीते तीस बरस के शोध के आधार पर एक विशिष्ट और विलक्षण कृति रची है, जिसने साहित्य रसिकों तथा पाठकों को विस्मित कर दिया है। बीते पांच-छह महीनों में मराठी में इस उपन्यास श्रृंखला की पहली कड़ी ‘झंझावात’ की तीस हजार से अधिक प्रतियां समाप्त हो चुकी हैं। यह उपन्यास मराठी के समानांतर हिंदी (राजकमल प्रकाशन, दिल्ली), कन्नड़ (सपना, बंगलुरू) और अंग्रेजी (वेस्टलैंड, दिल्ली) भाषाओं में प्रकाशित होकर बेस्ट सेलर हो चुका है।
‘महासम्राट’ के दूसरे भाग ‘रणखैंदळ’ उपन्यास की शुरुआत नेताजी पालकर द्वारा बीजापुर के अजेय समझे जाने वाले किले के चारों तरफ खड़ी मजबूत दीवार पर जोरदार हमले के साथ होती है। 1685 में औरंगजेब ने अपनी तीन लाख की फौज लेकर बीजापुर पर आक्रमण किया था और वहां उसकी विशाल सेना करीब बारह-तेरह महीनों तक इस अपराजेय दीवार से अपना सिर फोड़ती रही। मगर नाकाम रही। जबकि इससे पहले 10 नवंबर 1659 को जब प्रतापगढ़ की तलहटी में शिवराय ने अफजल खान को चीर दिया, तो उसके बाद राजा के आदेश पर चौथे ही दिन नेताजी पालकर ने मात्र पचास हजार की फौज के साथ बीजापुर के अभेद्य दरवाजे को इतनी जबर्दस्त टक्कर मारी थी कि वह ध्वस्त हो गया। शहर में हाहाकार मच गया। किसी महाकाव्य को शोभित करने वाली कल्पना से बढ़कर, यह सत्य घटना है। ‘पानीपत’ के लेखक की कलम से रचे इस प्रसंग को पढ़ते हुए निश्चित ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
इसके अतिरिक्त यहां आपको मिलेगा कि पन्हाल के घेरे में शिवराय एक सौ तैंतीस दिनों तक कैसे अटके रहे। उन्होंने सह्याद्री के अत्यंत कठिन जंगली रास्तों को किसी बहादुर किसान की तरह, धैर्यपूर्वक डेढ़ दिन में घोड़खिंड और विशालगढ़ के बीच करीब साठ किलोमीटर की दूरी पैदल चलते हुए कैसे तय की। इस दूरी में राजा ने घोड़े या पालकी का प्रयोग नहीं किया। कारण यह कि जंगल का ये रास्ता इतना दुरूह है कि आज भी इस राह पर घोड़ा चल नहीं सकता। पालकी यहां से नहीं गुजर सकती। यहां पालकी जानबूझकर सिर्फ शिवा काशिद को ढोने के लिए इस्तेमाल की गई थी। लेखक श्री विश्वास पाटील ने खुद उस अनुभव से गुजरने के लिए बीते अनेक वर्षों में, भरी बरसात के दिनों में इन रास्तों पर पैदल यात्रा की।
हिंदवी स्वराज्य के लिए पन्हाल के जंगलों में आत्माहुति देने वाले रणवीर शिवा काशिद के संग पहले इस्लामी शहीद सिद्दी वाहवाह, साथ ही पावनखिंड को पवित्र करने वाले बाजीप्रभु और फुलाजी की वीरता की कहानी इस खंड में है। मराठा इतिहास में प्रसिद्ध धनाजी और संताजी से पूर्व धनाजी जाधव के पिता शंभूजी जाधव ने भी पावनखिंड में युद्ध करते हुए कैसे अपने प्राणों की बाजी लगा दी, शिवकाल के ऐसे अनेक अभूतपूर्व प्रसंग और विलक्षण व्यक्ति चित्र श्री पाटिल अपने शोध-संधान के बल पर पाठकों के सामने लाए हैं।
शिवापट्टनम से पर्नाल पर्वत तक शिवराय के बहादुर सहकर्मियों के घोड़ों की दौड़, वेंगुर्ला-राजपूर, जैतापुर की तरफ सागर-खाड़ियों के किनारे बिछी रण-रंग की जमात, स्वर्णनगरी सूरत में शिवराय द्वारा की गई महालूट, हिंदवी स्वराज के हित के लिए शिवराय और उनके पिता के बीच बनी दूरियां तथा बाईस वर्षों तक एक-दूसरे से दूर रहने के बाद जेजुरी के गढ़ पर खंडेराया के प्रांगण में हुई उनकी विलक्षण भेंट। उंबरखिंडी के जंगलों, पेड़ों, पहाड़ों में छुपे शिवराय के मात्र दो हजार सैनिकों ने किस तरह कारतलब खान और रायबागिनी के 26 हजार फौजियों की धज्जियां उड़ाई और कैसे उन्हें अपने अस्त्र-शस्त्र छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया, ऐसे महापराक्रम की अनेक सत्य और अद्भुत घटनाएं ‘रणखैंदळ’ उपन्यास में एक अखंड विलक्षण महायुद्ध की तरह पृष्ठ-दर-पृष्ठ दर्ज हैं।
5 नवंबर 1664 को शिवराय ने जीता कुडाल का महायुद्ध। इसमें उन्होंने बीजापुर के तत्कालीन वजीर खवासखान को अक्षरशः भागने पर मजबूर कर दिया। खेम सावंत के दस हजार फौजियों का पूरी तरह सफाया किया। पिता की मृत्यु के वर्ष भर के अंदर, शत्रु के साथ मैदान में अपने विरुद्ध उतरे सौतेले बंधु व्यंकोजीराजा को देखने के दुख और दुर्दैव का भी उन्होंने सामना किया। इसके बाद मात्र बीस दिनों के भीतर उन्होंने सागर की कोख में शिवलंका कहलाने वाले सिंधुदुर्ग की नींव रख दी। सिकंदर महान और नेपोलियन बोनापार्ट जैसे संसार को जीतने वाले वीरों की तरह शिवराय में भी कितनी जिद और ऊर्जा थी।! इन्हीं महान लोगों की तरह शिवराय भले ही एक इंसान थे मगर अकेले ही नौ लोगों के बराबर काम करते थे। ऐसे बेजोड़ शिवराय के व्यक्तित्व का विस्तृत अनुसंधान श्री पाटिल ने अपनी लेखनी से किया है।
‘महासम्राट’ के पहले खंड ‘झंझावात’ में उपन्यासकार श्री पाटील ने हिंदवी स्वराज के स्वप्न की संकल्पना करने वाले शिवराय के महापिता शहाजीराजे भोसले और मातोश्री जीजाऊसाहेब के विराट व्यक्तिचित्र उकेरे हैं। उन्होंने औरंगजेब के पिता शाहजहां और दादा जहांगीर जैसे दो मुगल बादशाहों के लाखों सैनिकों के विरुद्ध शहाजीबाबा की खुली तलवार के उस पराक्रम को पाठकों के सम्मुख रखा, जिसके इतिहास में दर्ज होने के बावजूद निरंतर नजरअंदाज किया गया। जिजाऊसाहेब के पिता समेत परिवार के चार प्रमुख पुरुषों की हत्या करके निजाम ने एक प्रकार से कैसे उनका मायका उजाड़ दिया था। उसी समय बीजापुर सल्तनत ने उनके ससुराल, पुणे की जागीर पर कैसे गधों से हल चलवा दिए। उसी बरस पड़े भीषण अकाल ने कैसे प्रजा को निचोड़ कर रख दिया। ऐसे बेहद कठिन दिनों में जीजाऊसाहेब के गर्भ में शिवराय पल रहे थे। इन आसमानी और सुल्तानी संकटों के बीच शहाजीबाबा और जीजाऊसाहेब ने कैसे शिवराय का पालन-पोषण किया, उनके व्यक्तित्व को गढ़ा, यह सारा 1620 से 1659 का चालीस बरस का कालखंड ‘झंझावात’ में पाठकों को बेहद पसंद आया है। इसीलिए इस उपन्यास श्रृंखला के द्वितीय खंड की पाठकों की तरफ से बारंबार मांग की जा रही थी।
‘महासम्राट’ के दूसरे खंड के लिए आतुर-उत्सुक पाठकों के संग संपूर्ण भारतवर्ष में स्फूर्ति और उत्साह भर देने वाला ‘रणखैंदळ’ मई महीने के मध्य तक उपलब्ध होने को तैयार है। प्रथम खंड की तरह ही यह भी शाश्वत कथा यात्रा के प्रवाह में शामिल होगा, यह विश्वास है।

विवान शाह और संजय मिश्रा अभिनीत फिल्म ‘कोट’ का ट्रेलर हुआ लॉन्च

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मुम्बई। मुम्बई में आयोजित एक भव्य समारोह में हिंदी फ़िल्म ‘कोट’ का ट्रेलर लॉन्च किया गया. परफेक्ट टाइम पिक्चर्स, ब्रांडेक्स एंटरटेनमेंट और ब्लैक पैंथर मूवीज़ लिमिटेड प्रस्तुत हिंदी फ़िल्म ‘कोट’ के ट्रेलर लाँच इवेंट में फ़िल्म के कलाकारों के अलावा इंडस्ट्री के और भी कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं. फ़िल्म‌‌ की कास्ट में से विवान शाह, संजय मिश्रा, सोनल झा, पूजा पांडे, बादल राजपूत, नवीन प्रकाश, गगन गुप्ता अभिषेक चौहान, निर्देशक अक्षय दीत्ति, निर्माता कुमार अभिषेक, अर्पित गर्ग, शिव आर्यन ने‌ अपनी विशेष मौजूदगी दर्ज़ कराई. इस अवसर पर अभिनेत्री शालिनी पांडेय भी उपस्थित थी, फ़िल्म कोट से उनकी बहन पूजा पांडे अपने कैरियर की शुरूवात कर रही हैं.

इस बहुप्रतिक्षित फ़िल्म का निर्देशन अक्षय दीत्ति ने‌ किया है तो वहीं फ़िल्म का निर्माण कुमार, पन्नू सिंह, अर्पित गर्ग और शिव आर्यन ने मिलकर किया है. समारोह में एक बेहद अलहदा किस्म के विषय पर बनी इस फ़िल्म के ट्रेलर लॉन्च किया गया जिसे दर्शकों के साथ समीक्षकों की भी ख़ूब सराहना मिल रही है.
विवान शाह और संजय मिश्रा ने फ़िल्म को लेकर इस क़दर देखी जा रही उत्सुकता पर‌ अपनी ख़ुशी जताई और मीडिया से निजी तौर पर बातचीत भी की. दोनों ने फ़िल्म में काम में करने के अनुभवों को साझा किया और कहा कि उन्हें इस फ़िल्म की रिलीज़ का बेसब्री से इंतज़ार है.
इस कार्यक्रम की सफलता पर कुमार अभिषेक ने कहा, “हम ‘कोट’ के द्रेलर को लेकर दर्शकों के मिल रहे प्रतिसाद को लेकर बेहद ख़ुश हैं. हमने इस फ़िल्म को लेकर काफ़ी मेहनत की है और हमारे लिए यह बेहद ख़ुशी की बात है कि दर्शकों को फ़िल्म का ट्रेलर इस क़दर पसंद आ रहा है. हमें इस बात की पूरी उम्मीद है कि फ़िल्म भी दर्शकों को ख़ूब पसंद आएगी.” यह फ़िल्म 26 म‌ई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ की जाएगी.
अभिनेता संजय मिश्रा ने कहा कि मैं हमेशा नए फ़िल्म निर्माताओ के साथ कार्य करना पसंद करता हूँ क्योंकि मुझमें नयी अभिनय संभावनाओं को देखते है। फ़िल्म कोट की कहानी ने मुझे बहुत प्रभावित किया. बिहार ही नहीं देश कई कई गाव में ग़रीबी और पिछड़ापन है हमने इस फ़िल्म के लिए गांव में रहे. गांव के लोगों के साथ खाना खाने और घूमने का मौक़ा मिला.
अभिनेता विवान शाह ने कहा कि यह फ़िल्म मेरे लिए बहुत ख़ास है, मेरा दिल और दिमाग़ दोनो का नज़रिया बदल दिया. मेरी परवरिश एक मेट्रो शहर में हुई हैं इसलिए बिहार के गाव के इस कैरेक्टर को निभाना मेरे लिए बहुत चुनौतिपूर्ण था और मेरी सबसे अधिक सहायता संजय मिश्रा जी ने किया. उन्होंने ने मुझे स्थानीय संवाद के उच्चारण में बहुत सहायता की.
परफ़ेक्ट्स टाईम पिक्चर्स के सहयोग से ब्लैक पैंथर मूवीज़ लिमिटेड और ब्रांडेक्स एंटरटेनमेंट की फ़िल्म कोट के निर्माता निर्माता कुमार अभिषेक, पिन्नु सिंह, शिव आर्यन और अर्पित गर्ग हैं. फ़िल्म की कहानी कुमार अभिषेक ने लिखी है और फ़िल्म का निर्देशन अक्षय दित्ती ने किया है. प्रमुख भूमिका में विवान शाह, संजय मिश्रा के साथ ही सोनल झा, पूजा पांडेय, बादल राजपूत, हर्षिता पांडेय, नवीन प्रकाश, अभिषेक चौहान, आकांक्षा श्रीवास्तव, रागिनी कश्यप और गंगन गुप्ता अहम किरदारों में नज़र आएंगे. फ़िल्म देशभर के सिनेमागृह में २६ मई को रिलीज होगी.

ट्रेलर लिंक : https://youtu.be/wnIzGtDNGaM

छोटे भाई ने बताया लवलेश कभी-कभी आता था घर

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दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार  प्रयागराज में माफ‍िया अतीक और अशरफ की हत्‍या करने वाले तीन हत्‍यारों में एक बांदा का लवलेश त‍िवारी भी शाम‍िल है। लवलेश के भाई वेद से जागरण संवाददाता ने बात की तो वह डरा और सहमा हुआ नजर आया। उसकी आंखें झुकी थीं और आवाज में खौफ था।

छोटे भाई ने बताया लवलेश कभी-कभी आता था घर
लवलेश के छोटे भाई वेद तिवारी से हुई बातचीत में उसने बताया कि लवलेश नशे का आदी था। तीन-चार साल पहले एक लड़की को थप्पड़ मारने में जेल गया था। करीब एक सप्ताह पहले वह घर से गया था। लवलेश घर पर कभी-कभी ही आता था, उसकी आदतें खराब थीं।
टीवी पर अतीक की हत्‍या में बेटे को देख बदहवास हुए माता-प‍िता
लवलेश के प‍िता एक स्कूल में बस चलाते हैं। इन लोगों को घटना की जानकारी टीवी में उसका चेहरा देखने के बाद हुई। उसके बाद से लवलेश के मां और पिता डिप्रेशन में चले गए। लवलेश शहर के कटरा में किराए के मकान में रहता है।
लवलेश ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है पढ़ाई
लवलेश के पिता का नाम यज्ञ तिवारी और मां का नाम मां आशा तिवारी है। लवलेश ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीए में प्रवेश लिया था। फर्स्ट ईयर फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। उसके बाद उसकी संगत गलत हो गई। भाई वेद तिवारी ने बताया कि उससे मिलने घर पर कोई नहीं आता था, वह खुद घर पर कम आता था। मम्मी, पापा और वह खुद भी उससे कम संबंध रखते थे।
अतीक-अशरफ की हत्‍या के बाद पूरे प्रदेश में गूंजता रहा पुल‍िस का सायरन
दोहरे हत्याकांड के ठीक बाद स‍िर्फ प्रयागराज ही नहीं पूरे प्रदेश में पुल‍िस ने ज‍िलों में गश्‍त की। प्रयागराज के अति संवेदनशील हुए चकिया से लेकर करेली, बेनीगंज, अटाला और चौक, गढ़ी सरांय तक। लगभग सभी मुहल्लों में गलियों के नुक्कड़ और बंद दुकानों के बाहर लोगों की भीड़ जुटी रही। अतीक और अशरफ की हत्या मामला इतना बड़ा था और प्रदेश सरकार के सख्त रुख को देखते हुए लोग दबी जुबान से ही चर्चा करते रहे।
प्रयागराज छावनी में तब्‍दील, चप्‍पे-चप्‍पे पर पुल‍िस
उधर पुलिस की गाड़ियां हूटर बजाते हुए आधी रात तक दौड़ती रही। पुराने शहर के मुहल्ले चकिया, करेली, करामत की चौकी, रसूलपुर, बेनीगंज, खुल्दाबाद, अटाला, दायराशाह अजमल, गढ़ी सरांय, कोलहन टोला आदि मुस्लिम बाहुल्य इलाके हैं। अतीक व अशरफ की हत्या ने इन सभी मुहल्लों में सनसनी फैल गई। वहीं पुलिस की गाड़ियाें ने क्षेत्र भ्रमण कर हूटर बजाते हुए सभी को चेतावनी भी दी कि कोई गड़गड़ी करने पर सख्ती से निपटा जाएगा।

सीएम योगी ने टाले पहले से तय सभी कार्यक्रम, बढ़ाई गई मुख्यमंत्री की सुरक्षा !

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माफिया अतीक अहमद और भाई अशरफ की कल देर रात गोली मार कर हत्या कर दी गई। इस सनसनी फैला देने वाली घटना के बाद प्रदेश के सभी जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया हैं। जगह जगह सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया हैं। इसी बीच खबर सामने आयी हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटनाक्रम को देखते हुए अपने सभी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया हैं। बताया जा रहा हैं कि मुख्यमंत्री आवास की सुरक्षा को बड़ा दिया गया हैं।
दरअसल माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। प्रयागराज में मेडिकल के लिए ले जाते समय गोली मारकर इस हत्या को अंजाम दिया गया है। अतीक और उसके भाई को मेडिकल के लिए ले जाया जा रहा था जहां मीडिया के सामने ही तीन लोगों ने गोलीबारी कर हत्या कर दी। तीनों आरोपियों पर पहले से भी अपराधिक मामले दर्ज हैं। STF के अफसर इस मामले में तीनों से पूछताछ कर रहे हैं।
इस पूरी घटना के बाद पूरे प्रदेश में हाईअलर्ट किया गया हैं। सीएम योगी लगातार इस मामले पर नजर बनाये हुए हैं। वे लगातार अधिकारियों से पल -पल का अपडेट ले रहे हैं। इस पूरी के बाद घटनास्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और आसपास के इलाकों से भी पुलिस बुलाई गई है। इस दौरान पूरा इलाका छावनी में तब्दील है और पूरे प्रदेश में जगह जगह पर धारा 144 लागू कर दी गई है।

एनकाउंटर होगा या कोई मार देगा’ : अतीक अहमद जानता था अपना हश्र

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प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद माफिया डॉन का एक पुराना बयान मीडिया में सामने आया है। इस बयान में उसने बताया हुआ है कि वो सामान्य मौत नहीं मरने वाला या तो पुलिस उसका एनकाउंटर करेगी या फिर उसे कोई मार देगा।
अतीक ने खुद को लेकर भविष्यवाणी 2004 में अपने संसदीय क्षेत्र फूलपुर में कैंपेनिंग के दौरान की थी। आज ये भविष्यवाणी सच हो गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अतीक ने तब कहा था, “या तो मेरा एनकाउंटर होगा, या पुलिस मारेगी या फिर कोई अपनी ही बिरादरी का सिरफिरा मारेगा। हम सड़क किनारे पड़े मिलब।”
इसी तरह रिपोर्ट् में एक और बैठक का जिक्र है जब अतीक से उसके अंत के बारे में पूछा गया था। उस समय भी अतीक ने मान ही लिया था कि वो अपराधी है और उसका अंत सामान्य नहीं होगा। उसने कहा था, “सबको पता होता है कि अंजाम क्या होना है। कब तक टाला जा सकता है ये इसकी जद्दोजहद है।”
बता दें कि अतीक अहमद ने फूलपुर संसदीय क्षेत्र से लड़ने पर भी एक दफा बयान दिया था। ये वही क्षेत्र है जिसका प्रतिनिधि कभी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने किया था। ऐसे में अतीक ने कहा था, “पंडित जी की तरह हम नैनी जेल में भी रहे हैं। वो किताब लिखे थे वहाँ और हमें अपनी हिस्ट्रीशीट की वजह से जाना पड़ा था।”
उल्लेखनीय है कि 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई। दोनों को प्रयागराज मेडिकल कॉलेज के पास गोली मारी गई। घटना के बाद दोनों भाइयों का शव एक किनारे खून से लथपथ पड़े दिखाई दिए।
घटना मीडिया के सामने घटी इसलिए विजुअल्स आने भी समय नहीं लगा। मीडिया अशरफ से बात कर ही रहा था कि तभी पहले अतीक के भेजे में गोली दागी गई और उसके बाद अशरफ को मौत के घाट उतार दिया गया। पुलिस ने तीन आरोपितों को इस संबंध में मौके से गिरफ्तार किया। जबकि पुलिस की लापरवाही के कारण घटी इस घटना पर प्रशासन ने कई पुलिसकर्मी सस्सपेंड किए। कहा जा रहा है कि जिन लोगों ने अतीक को मारा उनमें से एक के रिश्तेदार को अतीक ने कभी मरवाया था।