सचिव विद्यालय शिक्षा श्री रवि नाथ रमन ने कहा कि इस करार से भविष्य में स्विस एजुकेशन ग्रुप फैकल्टी द्वारा न सिर्फ भारत में बल्कि स्विट्जरलैंड में भी इन स्कूली छात्र-छात्राओं को एक-एक माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा..!
बलिया पुलिस की बड़ी कार्रवाई, DM के आदेश पर गौ-तस्कर की सम्पत्ति जब्त
छत्तीसगढ़ – किसानों ने यूपी की तर्ज पर गौ-पालक योजना का प्रस्ताव रखा,इन प्रस्तावों पर मुहर
छत्तीसगढ़ , खेती में मजदूरों की कमी बड़ी समस्या बनती जा रही है. इससे निपटने मनरेगा के मजदूरों को पंचायत से जोड़कर रोजगार सेंटर बनाया जाए. यहां से डिमांड पर किसानों को खेती के काम के लिए मजदूर उपलब्ध कराया जाए. इस तरह मनरेगा को कृषि से जोड़ा जाना चाहिए. इससे किसानों की मजदूरों और सरकार की काम की समस्या खत्म हो जाएगी.
सिंचाई सुविधा: नदी और नालों में शुरूआत से लेकर आखिर तक तटीय गांवों में लिफ्ट सिस्टम तैयार कर बारिश का पानी सुरक्षित स्थलों में संरक्षित करने की व्यवस्था हो.
तैयार हो. इससे सिंचाई का रकबा बढ़ेगा वहीं ग्राउंड वाटर की समस्या भी खत्म हो जाएगी. अतिरिक्त फसल बीमा: पीएम फसल बीमा योजना में पैदावार की लिमिट 12 क्विंटल प्रति एकड़ है, जबकि सरकार 20 क्विंटल खरीदती है. इस तरह सरकार भी 20 क्विंटल उत्पादन मानती है. ऐसे में पीएम बीमा से छूटे उत्पाद के लिए प्रदेश स्तर पर अलग से बीमा योजना लागू किया जाना चाहिए.
अनाज बैंक: हर सहकारी समिति में अनाज बैंक की स्थापना कर यहां चना, गेहूं, अरहर जैसे उत्पादों को भंडारित कर रखने की सुविधा मुहैया कराया जाए. जमा अनाज पर गोल्ड लोन की तरह 70 फीसदी तक किसानों को लोन दिया जाना चाहिए. इससे किसान दाम ज्यादा होने पर उपज बेंच सकेंगे और नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा.
राज्य किसान आयोग: प्रदेश में किसान आयोग का गठन अब तक नहीं हुआ है. इससे चलते किसानों की आवाज सीधे सरकार तक पहुंचाने की कोई भी व्यवस्था नहीं है. किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए उचित मंच तैयार करने राज्य में राज्य किसान आयोग का गठन किया जाना चाहिए.
घुमंतु मवेशी: सड़कों पर आवारा मवेशियों से छुटकारा के लिए यूपी की तर्ज पर गो-पालक योजना लागू किया जाए. जिसके माध्यम से पशुपालकों को चारा व दूसरे खर्चों के लिए प्रति पशु 250 रुपए शासन की ओर से दिया जाए. उसके बाद पशु छोड़ने पर दंड की कार्राई हो.
कृषि उद्योग: ग्रामीण इंडस्ट्रीयल पार्कों में कृषि उत्पादों से तैयार प्रोडक्ट के लिए भी उद्योग स्थापित किए जाने चाहिए. इससे सीधे उत्पाद की बिक्री की तुलना में तैयार उपयोगी प्रोडक्ट से किसानों को ज्यादा लाभ मिलेगा. इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा.
अमानक खाद-बीज: अमानक खाद-बीज खेतों में खप जाता है, इसके बाद जांच की रिपोर्ट पहुंचती है. इससे बचने के लिए टेस्ट सर्टिफाइड खाद बीज की ही बिक्री का नियम बनाया जाना चाहिए. अमानक खाद बीज पर नुकसान की भरपाई का भी प्रावधान हो.
गौठान और बिजली: इसके अलावा महापंचायत में गौठान और बिजली सहित अन्य समस्याओं को लेकर भी प्रस्ताव पारित किए गए. किसानों ने गौठान योजना को पूरी तरह फ्लाप करार दिया वहीं कृषि उपयोग की बिजली में कटौती को भी अनुचित बताया.
राज्य में किसान आयोग के गठन और घुमंतु मवेशियों की समस्या से निपटने यूपी की तर्ज पर गौ-पालक योजना की मांग किसानों ने उठाई है. नगपुरा में किसान महापंचायत में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया. ये प्रस्ताव राजनीतिक दलों को भेजे जाएंगे. किसानों ने उनके प्रस्ताव पर अमल के लिए तैयार राजनीतिक दलों को सहयोग का फैसला भी किया गया. छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के बैनरतले यह महापंचायत आयोजित किया गया.महापंचात में आधा दर्जन से ज्यादा किसान संगठनों के प्रदेशभर के करीब 1500 किसान प्रतिनिधि शामिल हुए. महापंचायत में करीब दर्जनभर अन्य प्रस्ताव भी पारित किए गए.
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युगांडा एयरलाइंस ने एंटेबे-मुंबई फ्लाइट के लॉन्च के साथ भारत में अपना परिचालन शुरू किया
मुंबई : युगांडा एयरलाइंस ने आज मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट और युगांडा के एंटेबे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच अपनी नई डायरेक्ट सर्विस के लॉन्च के साथ भारत में अपना परिचालन शुरू करने की घोषणा की। यह सेवा 7 अक्टूबर से शुरू होगी। दोनों शहरों के बीच हफ्ते में तीन दिन यह विमान सेवा संचालित की जाएगी। कंपनी अपनी एयरबस ए330-800 नियो एयरक्राफ्ट पर सीधी सेवा की पेशकश करेगी। इस सेवा में तीन श्रेणियों में यात्रा करने की सुविधा यात्रियों को मिलेगी। इसमें बिजनेस क्लास में 20 सीटें, प्रीमियम इकोनॉमी क्लास में 28 और इकोनॉमी क्लास में 210 सीटें होंगी। 50 से भी ज्यादा सालों में दोनों देशों के उड्डयन संबंधों में इस तरह का उत्साहजनक विकास पहली बार होगा कि जब भारत और युगांडा नॉन-स्टॉप विमान सेवा से आपस में जुड़ेंगे।
यह रूट युगांडा एयरलाइंस की सर्विस का अफ्रीकी महाद्वीप के बाहर विस्तार करेगा। कंपनी के तेजी से फैलते नेटवर्क में इस नई विमान सेवा के जुड़ने से यात्रियों को दक्षिण, पश्चिम, मध्य और पूर्वी अफ्रीका की यात्रा करने का सुविधाजनक अवसर मिलेगा। इस डायरेक्ट सर्विस की अवधि एक दिशा में करीब साढ़े पांच घंटे होगी। इससे बिजनेस, परिवार से मिलने और घूमने-फिरने के लिए दोनों देशों के यात्रियों को बेमिसाल सुविधा मिलेगी।
चीफ कमर्शल अफसर श्री एडेदायो ओलावुयी ने कहा, “हम इसे लॉन्च करने के लिए काफी उत्साहित हैं। हमारे नेटवर्क में शामिल हुई ये नई उड़ान सेवा युगांडा एयरलाइंस के अपने यात्रियों के लिए यात्रा संबंधी विकल्पों के विस्तार की पुष्टि करती है। हम उम्मीद करते हैं कि यात्रियों को सुविधा देने के अलावा यह रूट भारत और युगांडा के एक दशक से भी लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी और वाणिज्यिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।“
युगांडा के माननीय राजदूत एच.ई. मधुसुदून अग्रवाल ने कहा, “2017 से ही मैंने मुंबई और एंटेबे के बीच सीधी फ्लाइट के सपने को साकार करने के लिए बिना रुके और बिना थके मेहनत की है। मेरा विश्वास है कि दोनों देशों के बीच सीधी विमान सेवा व्यापार, वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा देगी। मैं अपने सपने को पूरा होते देखकर बेहद उत्साहित हूं।”
बुंदेलखंड के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगी केन-बेतवा लिंक परियोजना
विष्णु दत्त शर्मा-
बुंदेलखंड की दो दशक पुरानी आस अब पूरी हो रही है। 18 साल से लंबित केन-बेतवा लिंक परियोजना का शुभारंभ क्षेत्र की प्यास के बुझने के साथ ही जीवन बदलने का ऐतिहासिक पड़ाव भी है। चार दशक से बुंदेलखंड की जनता को जिस दिन का बेसब्री से इंतजार था,वह दिन अब आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल जी ने देश में 37 नदियों को आपस में जोड़कर जल संकट को दूर करने का बीड़ा उठाया था, उसमें केन-बेतवा लिंक परियोजना भी थी, उसे अब मूर्त रूप मिल गया है। यह भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इसको अंतर्राज्यीय नदी हस्तांतरण मिशन के लिये एक मॉडल योजना के रूप में माना जाता है। लेकिन दुर्भाग्य से अटल जी के बाद की यूपीए सरकार ने इसमें रुचि नहीं दिखायी। हालांकि बुन्देलखंड की दुर्दशा पर राजनीतिक रोटियाँ जरुर सेकीं। अटल जी ने नदियों को जोड़ने की जो परिकल्पना की थी, उनमें से केन-बेतवा पहला लक्ष्य था। देश में जल के संकट से सर्वाधिक प्रभावित बुन्देलखंड का ही क्षेत्र था, जिसका निदान मानवता की माँग थी।
स्वाधीन भारत में सर्वाधिक राजनीतिक रोटियाँ बुंदेलखंड के पिछड़ेपन पर ही सेकी गईं। राजनीतिक पर्यटकों ने इसकी दुर्दशा की तस्वीरों को देश-विदेश में भी खूब प्रचारित किया, लेकिन जिनके हाथों में सात दशक तक इसके तकदीर की चाभी थी, उन्होंने उससे हर बार छल किया और बुंदेलखंड की दशा जस की तस बनी रही। जिस बुंदेलखंड की वीरता की गाथाएँ साहस देती हैं, वही बुंदेलखंड पानी के समर में कई दशकों से मात खाता रहा। उजड़ते गाँव और पलायन बुंदेलखंड की त्रासदी का वृतांत बताते हैं। बुंदेलखंड की जनता के जीवन में हर दिन अंधकार और अधिक घना होता गया और सपनों के सौदागर उन्हें सब्जबाग दिखाते रहे। कड़वा सच है कि विगत दशकों में बुन्देलखंड से करोड़ों लोग पलायन कर गये। पशुधन को बचाना, कृषि कार्य करना, जीवन के लिए जरूरी पानी जैसी समस्याएँ बुन्देलखंड की नसीब बन गयीं और जन-जीवन में और अँधेरा छाता चला गया।
लेकिन अब बुंदेलखंड के इतिहास में नया सवेरा आने वाला है। जल, वन-भूमि साझाकरण और अधिग्रहण में आने वाली कठिनाईयों से जूझ रही केन-बेतवा लिंक परियोजना अब शुरू हो रही है। इस महान परियोजना की अनेक अड़चनें दूर हुईं और विश्व जल दिवस पर 8 मार्च को प्रधानमंत्री की उपस्थिति में यूपी और एमपी सरकारों ने इसके लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। सारी बाधाओं को पार कर अब मोदी सरकार ने 45 हजार करोड़ वाली केन-बेतवा लिंक जैसी बहुप्रतीक्षित परियोजना को जमीन पर उतार कर यहाँ समाज-जीवन की सरलता के सारे मार्ग प्रशस्त कर दिये हैं। इस परियोजना में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी और शेष मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश वहन करेंगे। इसके तहत केन नदी से बेतवा नदी में पानी भेजा जाएगा और 221 किलोमीटर लंबी संपर्क नहर निकाली जाएगी, जो झांसी के निकट बरुआ में बेतवा नदी को जल उपलब्ध कराएगी। केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से नॉन मानसून सीजन (नवंबर से अप्रैल के बीच) में क्रमशः मध्यप्रदेश को 1834 तथा उत्तर प्रदेश को 750 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिल सकेगा। इसका लाभ मध्य प्रदेश में बुंदेलखंड के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर और दतिया के साथ-साथ शिवपुरी, विदिशा और रायसेन सहित अन्य जिलों को भी मिलेगा। केन-बेतवा लिंक कार्य के पूरा हो जाने से जहां 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा पहुंचाई जा सकेगी, वहीं 41 लाख लोगों को सहज तौर पर पीने का पानी मिल पाएगा। बुंदेलखंड में आने वाले उत्तर प्रदेश के 2 लाख 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाईं और पेयजल की सुविधा भी इससे मिल सकेगी। बाद में 103 मेगा वाट पनबिजली और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा भी पैदा की जा सकेगी।
भले ही देश में जल-संकट पर छिटपुट चर्चाएँ होती रहीं हों परन्तु यह एक अटल सत्य है कि 1999 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी ने ही पहली बार नदी जोड़ो परियोजना पर काम शुरू किया था। उस समय एक टॉस्क फोर्स का गठन करके आधारभूत कार्य किया गया। इस टॉस्क फोर्स ने देश की नदियों का वर्गीकरण करके एक रूपरेखा रखी कि किन नदियों को जोड़कर देश को पानी की समस्या से मुक्ति दिलाई जा सकती है। हालांकि बीच में यह योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई लेकिन अब यहां की जनता का जीवन बदलने का रास्ता खुल गया है।
मोदी सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण को इसकी कमान सौंपी तथा प्राधिकरण की मॉनिटरिंग का जिम्मा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री को दिया । इसके लिए अप्रैल 2015 में एक स्वतंत्र कार्यबल भी गठित किया था। अब देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में केन-बेतवा लिंक प्रारंभ हो रही है और बुंदेलखंड की जनता का भी सपना पूरा हो रहा है।
बुंदेलखंड की जीवन रेखा केन-बेतवा लिंक परियोजना अब यहां युगांतकारी परिवर्तन लाएगी। जल-संकट खत्म होने के साथ ही महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। उन्हें मीलों सिर पर पानी ढोने से निजात मिलेगी। पानी की उपलब्धता से स्वच्छता बढ़ेगी और उनका स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। इस परियोजना से बुंदेलखंड में सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक स्तर ऊँचा होगा। नहरों का विकास होगा, पनबिजली से सस्ती बिजली मिलेगी तथा वनीकरण भी बढ़ेगा। आर्थिक समृद्धि आने से जीवन बदलेगा और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति रुझान बढ़ेगा तो पर्यटन उद्योग भी निखरेगा। खाद्य सम्पन्नता और रोजगार के अवसर मिलेंगे तो पलायन पर विराम लगेगा।आज जिस बुंदेलखंड की पहचान अकाल और सूखा की है, वह बुंदेलखंड भविष्य में हरियाली से पहचाना जाएगा। जो बुंदेलखंड गरीबी से जाना जाता है,वह समृद्ध बुंदेलखंड बनेगा और भविष्य में अपने गौरवशाली अस्मिता के साथ सारी दुनिया को आकर्षित करेगा। (विभूति फीचर्स)
विष्णु दत्त शर्मा-
(लेखक खजुराहो लोकसभा क्षेत्र से सांसद व मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं)
राजश्री प्रोडक्शंस एक बार फिर अपने सिग्नेचर अंदाज में ‘दोनों’ के जरिये नए युग का रोमांस ला रही है

नई दिल्ली प्रस्तावित रोड शो में पंहुचे पुष्कर सिंह धामी , केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदिच्छा भेंट की
नई दिल्ली ,4अक्टूबर,बुद्धवार नई दिल्ली प्रस्तावित रोड शो में पंहुचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदिच्छा भेंट की |
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री से उत्तराखंड में आगामी दिसंबर माह में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट व जोशीमठ आपदा पर चर्चा की | इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समसामयिक विषयों पर चर्चा कर गृहमंत्री को राज्य की तत्कालीन स्थिति से अवगत कराया ,तथा दिसंबर माह में आयोजित होने वाले” वैश्विक निवेशक सम्मलेन” तथा नवंबर में आपदा प्रबंधन पर आयोजित होने वाले छठे वैश्विक सम्मेलन में सम्मिलित होने का निमंत्रण भी दिया |

Sanjay Balodi ‘ Prakhar’













