बनारस भाजपा अध्यक्ष व विधायक श्री हंसराज विश्वकर्मा मुंबई मेंअर्जुन गुप्ता ने किया स्वागत

Mumbai – आज महाराष्ट्र भाजपा प्रदेश कार्यालय में बनारस भाजपा अध्यक्ष व विधायक श्री हंसराज विश्वकर्मा जी का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करते महाराष्ट्र भाजपा नेता श्री अर्जुन गुप्ता जी
Pitru Paksha 2023: पितृपक्ष में जरूर करें गाय की सेवा ,मिलता है, आशीर्वाद
Pitru Paksha: पितृ पक्ष में पूरी श्रद्धा के साथ पितरों को याद किया जाता है और उनके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है. विधि पूर्वक पितरों का श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है.
पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है. इसमें पूरी श्रद्धा के साथ पितरों को याद किया जाता है और उनके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है. विधि पूर्वक पितरों का श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वो अपने वशंजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर जाते हैं.
पितरों को प्रसन्न करने पितृ पक्ष में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है. पितृपक्ष में पशु-पक्षियों की सेवा भी जरूरी मानी जाती है. मान्यता है कि इन पशु-पक्षियों के रूप में ही पितर भोजन का अंश ग्रहण करने पृथ्वी पर आते हैं.
हिन्दू धर्म मे गाय को माता का दर्जा दिया गया है. पितृ पक्ष के दौरान गाय की सेवा का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इन दिनों गाय का दान करने से जन्म- जन्मांतर के पाप मिट जातें है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता होता है.
अगर आप गाय का दान नही कर सकतें हैं तो गौशाला या अन्य जगह पर जाकर गाय की सेवा करके भी पुण्य कमा सकते हैं. पितृ पक्ष के किसी भी गाय चारा या रोटी जरूर खिलाएं.
पितृ पक्ष के दौरान अगर गाय खुद आपके दरवाजे पर आती है तो इसे एक शुभ संकेत माना जाता है. ऐसे में गाय को अपने दरवाजे से भूलकर भी ना दुत्कारें. ऐसा करने से आपके परिजन आपसे नाराज हो सकते हैं.
पितृ पक्ष के दौरान गाय को हरा चारा खिलाने से कष्टों से मुक्ति मिलती है. मान्यता है कि पितृ पक्षगाय की सेवा करने से सभी प्रकार के दुख दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
कन्फ्यूज्ड और दिशाहीन राजनीतिज्ञ हैं राज ठाकरे- श्री संजय पांडेय
भाषावाद और प्रांतवाद की राजनीति पर भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा (महाराष्ट्र) के अध्यक्ष श्री संजय पांडे का मनसे पर करारा प्रहार
-नासिक। भारतीय जनता पार्टी (महाराष्ट्र) उत्तर भारतीय मोर्चा के अध्यक्ष श्री संजय पांडे ने कहा कि राज ठाकरे कन्फ्यूज्ड और दिशाहीन राजनीतिज्ञ है। “मोदी@9″ और “संपर्क से समर्थन” के अभियान के तहत उत्तर महाराष्ट्र की यात्रा पर निकले श्री संजय पांडेय ने बुधवार को नासिक में रह रहे उत्तर भारतीयों के ज्ञापन का संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे पर यह करारा हमला बोला।
भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय पांडे ने कहा कि राज ठाकरे ने जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पार्टी बनाई थी तब वह सेकुलर थे। उसके बाद नासिक महानगरपालिका में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा की। फिर मोदी भक्त हुए और कुछ दिनों के लिए मोदी विरोधी भी बने। उसके बाद उन्होंने हिंदुत्व का दामन थामा। हिंदुत्व के मुद्दे पर भी जब उनकी दाल नहीं गली तो एक बार फिर प्रांत वाद और भाषावाद की राजनीति पर उत्तर पड़े हैं। श्री संजय पांडे ने कहा कि राज ठाकरे दिशाहीन राजनीतिज्ञ है। अब सनातन धर्मी हिंदू न वर्ण व्यवस्था, न प्रांतवाद, न भाषावाद के बहकावे में आने वाला है। महारष्ट्र और देश की जनता यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विश्व गुरू बनाने के लिए सज्ज है और महाराष्ट्र में हमारे नेता उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य में विकास हो रहा है। अब देखना है कि राज ठाकरे भाषावाद और प्रांतवाद की राजनीति में परास्त होने के बाद कौन सी डगर पर जाएंगे।
नासिक से “मोदी @9” और “संपर्क से समर्थन अभियान” का शुभारंभ
भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा का दोबारा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद श्री संजय पांडेय जी बुधवार को सुबह 8 बजे त्रयम्बकेश्वर महादेव का दर्शन करने के बाद उत्तर महाराष्ट्र में नासिक से “मोदी @9″ और “संपर्क से समर्थन” की शुरुआत की। त्रयम्बकेश्वर महादेव के दर्शन के बाद सबसे पहले सुबह 10.30 बजे नासिक में भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा की जिला कार्यकारिणी की बैठक की। इसके बाद जिले के प्रमुख प्रतिष्ठित व प्रबुद्ध उत्तर भारतीयों से मुलाकात की।
देवेन्द्र फडणवीस को बताएंगे उत्तर भारतीयों की व्यथा
इस दौरान नासिक में रहने वाले उत्तर भारतीयों के एक प्रतिनिधि मंडल ने श्री संजय पांडे से मिलकर अपनी समस्याओं का एक ज्ञापन सौंपा। साथ ही, नाशिक में मनसे के कार्यकर्ताओं द्वारा कवि सम्मेलन रुकवाने की शिकायत की। इस दौरान श्री संजय पांडेय ने मनसे पर हमला बोला। श्री संजय पांडेय ने दो टूक कहा कि प्रदेश में उत्तर भारतीयों के हितों का पूरी तरह संरक्षण होगा। राज्य सरकार आपके साथ है। हम इस मामले को उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस तक लेकर जाएंगे। उत्तर भारतीयों को किसी से डरने की आवश्यकता नही है।
करमपुर में कसाई ने चुराई गाय को बनाया दावत का खाना, ग्रामीणों ने पुलिस में दी शिकायत
उत्तर प्रदेश: करमपुर चौधरी में एक गौ माता और एक बछड़ा जो कि हर दरवाजे पर सुबह जाती थी सभी लोग उसके लिये रोटी रात में बढ़ती से कर रखते थे। आज महीना भर से गाय और बछड़ा दोनों नजर नहीं आए, फिर किसी गांव वाले व्यक्ति के द्वारा जानकारी मिली कि, गांव के कसाई ने गौ माता और बछड़े को काट दिया है। किसी की बारात में परोसा गया था।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: करमपुर चौधरी में एक गौ माता और एक बछड़ा जो कि हर दरवाजे पर सुबह जाती थी सभी लोग उसके लिये रोटी रात में बढ़ती से कर रखते थे। आज महीना भर से गाय और बछड़ा दोनों नजर नहीं आए, फिर किसी गांव वाले व्यक्ति के द्वारा जानकारी मिली कि, गांव के कसाई ने गौ माता और बछड़े को काट दिया है। किसी की बारात में परोसा गया था। बैरियर 1 पुलिस चौकी को सूचना दी थी।
उन्होंने एप्लीकेशन मांगी, अगर उस कसाई को पुलिस ने नहीं पकड़ा तो एसपी के यहां जाकर उनसे बात की जाएगी। बैरियर बन चौकी चौकी पुलिसकर्मी सत्य से सख्त कार्रवाई करें उसी में अच्छाई है।
वोकल फॉर लोकल’और ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को समर्पित खादी महोत्सव
अनिल बेदाग, मुंबई
खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन और वोकल फॉर लोकल के विचार। एक बार फिर
खादी अपने नए विचारों के साथ सामने आई है जिसका उद्देश्य नागरिकों को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान देने के लिए खादी उत्पाद खरीदने और पहनने के लिए प्रोत्साहित करना है।
अक्टूबर खादी महोत्सव का महीना है। यह महोत्सव “वोकल फॉर लोकल” पहल और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सोचे गए ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ का समर्थन करने को समर्पित है। महात्मा गांधी की 154वीं जयंती मनाते हुए केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे ने मुंबई में खादी यात्रा को हरी झंडी दिखाई थी और 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2023 तक होने वाले ‘खादी महोत्सव’ की घोषणा की।
इस अभियान का उद्देश्य खादी और ग्रामोद्योग, हथकरघा, हस्तशिल्प, ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) उत्पादों और स्थानीय स्तर पर उत्पादित विभिन्न पारंपरिक और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना है। यह महोत्सव विभिन्न राज्यों के खादी उत्पादों की एक विविध शृंखला का प्रदर्शन करता है। इसमें खादी के कपड़े, रेशम की साड़ी, ड्रेस मटीरियल, कुर्ते, जैकेट, बेडशीट, कालीन, रसायन मुक्त शैंपू, शहद, अन्य घरेलू सामान, और साथ ही उत्कृष्ट कला और हस्तशिल्प शामिल हैं।

सरकार ने ठोस नतीजे पाने के लिए देश भर में शुरू की जाने वाली कई विशिष्ट जागरूकता गतिविधियों की पहचान की है। इन मुख्य गतिविधियों में सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छात्रों और आम जनता के लिए क्विज़ प्रतियोगिताएं और निबंध लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित करना और साथ-साथ सेल्फी प्रतियोगिताएं, ई-प्रतिज्ञाएं, जिंगल प्रतियोगिताएं, क्रिएटिव फिल्म प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक और वीडियो गेम प्रतियोगिताएं आयोजित करना शामिल है। इसका उद्देश्य युवाओं को खादी, ‘वोकल फॉर लोकल’ के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें हमारी अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और महिला सशक्तिकरण के लिए इनसे होने वाले लाभों के बारे में जागरूक करना है। यह बड़े पैमाने पर जनता और विशेष रूप से युवाओं को खादी और स्थानीय उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करेगा और उनमें स्थानीय उत्पादों के प्रति गौरव पैदा करेगा।
इस अनुसरण में, भारत सरकार ने ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए देश भर में की जाने वाली विशिष्ट जागरूकता गतिविधियों की पहचान की है। सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छात्रों और आम जनता के लिए आयोजित की जा रही क्विज़ प्रतियोगिता और निबंध लेखन प्रतियोगिता के जरिये खादी प्रेमियों के बीच वोकल फॉर लोकल की भावना को जगाने और उन्हें भारत के इतिहास के इस शानदार अध्याय की याद दिलाने का एक प्रयास है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
इसी तरह नारा प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को ‘खादी महोत्सव’ विषय पर ध्यान आकर्षित करने वाले नारे के साथ आना होगा। नारा लेखन प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के बीच खादी और एक कपड़े के रूप में इसके प्रचार के बारे में जागरूकता पैदा करना, स्थानीय पहल के लिए मुखर के महत्व के बारे में नागरिकों के बीच ज्ञान विकसित करना, फोकस क्षेत्रों की प्रासंगिकता के बारे में समझ को बढ़ावा देना और नागरिकों को प्रोत्साहित करना है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने में खादी और स्थानीय उत्पादों पर रचनात्मक रूप से अपने विचार व्यक्त करना। ई-प्रतिज्ञा सरकार की वेबसाइट पर पोस्ट की जाएगी और नागरिकों को एक प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
सेल्फी प्रतियोगिता के माध्यम से सभी नागरिकों, फैशन के प्रति उत्साही और टिकाऊ कपड़ों के समर्थकों से खादी और स्थानीय उत्पादों, हमारे देश की विरासत के कपड़े के प्रति अपना प्यार सबसे रचनात्मक तरीके से दिखाना है।
अभियान के तहत वीडियो गेम प्रतियोगिता जहां प्रतिभागी एक गेम तैयार कर सकते हैं। और 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2023 तक प्रस्तावित साइट पर अपलोड कर सकते हैं।
खादी यात्रा स्थानीय उत्पादों, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र के लिए खादी और फैशन के लिए खादी के महत्व के बारे में युवाओं के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए खादी यात्रा के अलावा पूरे भारत में भी आयोजित की जाएगी।
जिंगल प्रतियोगिता और क्रिएटिव फिल्म प्रतियोगिता 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक आयोजित की जा रही है। भारतीय नागरिक प्रतियोगिताओं में भाग लेने के पात्र हैं और विजेताओं को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
5000 दुकानों के माध्यम से खादी, हथकरघा और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक सफल बिक्री अभियान बनाना एक सुविचारित रणनीति तैयार करना और उपभोक्ताओं को खादी और हथकरघा की विशिष्टता और लाभों के बारे में शिक्षित करना होगा।
नुक्कड़ नाटक के अंतर्गत बढ़ती जागरूकता की अवधारणा पर विभिन्न स्तरों पर मैदानी स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी और प्रतिभागियों को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।
उपयुक्त पाए जाने पर प्रतियोगिता ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में होगी। सभी प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए जाएंगे।
गिरिडीह गौशाला प्रांगण में श्री हरी गौ ग्राम योजना के तहत 5 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
गौशाला प्रांगण में एकल अभियान के द्वारा संचालित “श्री हरी गौ ग्राम योजना” के तहत 5 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त परिवार को गौशाला के सहयोग से एक गौवंश दिया जाएगा तथा साथ में एक वर्ष की गौ पालन पोषण की राशि भी दी जाएगी।
गौवंश के गोबर को लाभुक के द्वारा सुखाकर रखा जाएगा जिसे संस्था के द्वारा वापस ख़रीद किया जाता है। संस्था के द्वारा ख़रीद किए गए गोबर में कुछ आवश्यक सामग्री मिलाकर एक रेडीमेड प्रिमिक्स को वापस लाभुक को दिया जाता है।
उपरोक्त प्रिमिक्स से लाभुक परिवार के सदस्यों के द्वारा दिया वग़ैरह बनाया जाता है जिसे एकल संस्था के द्वारा ख़रीद कर बहुत ही सुंदर तरीक़े से पैकिंग कर महानगरों में बेचा जा रहा है। अनुपयोगी गोवंश को बचाने के लिए किया जा रहा यह कार्य वाक़ई आने वाले भविष्य में एक मिसाल क़ायम होगी।
अनोखे ढंग से लॉन्च हुआ रैपर शतरंज का रैप सॉन्ग “फील लाइक ए गैंगस्टा”
संगीत जगत में दिन प्रतिदिन नए प्रयोग किये जा रहे हैं। युवा पीढ़ी द्वारा गैंगस्टा रैप या गैंगस्टर रैप के बढ़ते चलन को देखते हुए एक युवा रैपर शतरंज का पहला गैंगस्टा रैप सॉन्ग “फील लाइक ए गैंगस्टा” इन्फिनिक्स म्युज़िक द्वारा रिलीज़ कर दिया गया है जिसे दर्शकों का खूब अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। मुम्बई के इस्पातो माई लर्न कॉफी में ये गीत अनोखे ढंग से लॉन्च किया गया। इस सॉन्ग के निर्माता विश्वास त्यागी और उदित ओबेरॉय एवं निर्देशक आदित्य जैन हैं। लॉन्च के अवसर पर रैपर शतरंज ने इस गाने पर परफॉर्म भी किया, वहां मौजूद सभी मेहमानों ने उनकी एनर्जी को बहुत सराहा।
निर्देशक आदित्य जैन ने कहा कि गैंगस्टा रैप या गैंगस्टर रैप विदेशों में काफी पॉपुलर रहा है जो गायकी व डांस की एक शैली है। शहरी सड़कों पर घूमने वालों के खास कल्चर को ऐसे गीतों में प्रस्तुत किया जाता है। गैंगस्टर रैप को मुख्यधारा की लोकप्रियता हासिल हुई है। जब मैंने रैपर शतरंज के लिखे कुछ रैप सॉन्ग सुने तो लगा कि इन के गीत को गैंगस्टर रैप के रूप में दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। फिर जब निर्माता विश्वास त्यागी और उदित ओबेरॉय ने शतरंज को सुना तो वे इनके फैन हो गए और इस तरह इस गीत की प्लानिंग हुई।
निर्देशक ने आगे बताया कि शतरंज एक हार्डकोर रैपर हैं। अपने दिल की बात अलग अंदाज में कहते हैं। जब वह दस साल के थे तब से रैप गीत लिखते आ रहे हैं। जिनका स्टाइल अलग है। वह समाज की बातों को अपने जज़्बात को रैप के रूप में पेश करते हैं। गैंगस्टा रैप के विजुअल्स ब्लैक एंड व्हाइट होते है। हमने इसे कलर शूट किया था मगर गैंगस्टा म्युज़िक का ऐसा फॉर्म है जिसमे वीडियो ब्लैक एंड व्हाइट ही होते हैं। हमने इस गाने में कोई हथियार, लड़की को नहीं दिखाया बस रैपर का एक एटीट्यूड, एक स्टाइल दर्शाया गया है जो दर्शकों को अलग ही दुनिया में ले जाता है।
शतरंज का असली नाम तरुण मेहरा है जो पंजाब से हैं। वह रैपर बोहेमिया को अपना आइडल मानते हैं। वह कहते हैं “इस गाने में मैं सेल्फ एटीट्यूड की बात कर रहा हूँ कि समाज मे किसी से डर कर मत जियो। यह एक मोटिवेशनल सॉन्ग है।”
निर्देशक का कहना है कि शतरंज की न सिर्फ आवाज़ अलग है बल्कि अपने लिरिक्स के माध्यम से भी वह कुछ कहना चाहते हैं। इसकी शूटिंग लुधियाना, चंडीगढ़, रोहतक, दिल्ली, मायापुरी, नोएडा, आगरा, जयपुर, गुड़गांव, राजस्थान और मुम्बई में की गई है। इसमे पूरा भारत दिखाया गया है।”
शिवाय प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बने इस रैप सॉन्ग के गीतकार, कम्पोज़र और सिंगर शतरंज हैं जबकि म्युज़िक किस्सू राजपूत ने दिया है। एडिटर जीत सिंह मेहता, डीओपी पिंकू चौहान, क्रिएटिव डायरेक्टर सचिन हलकुंडे, इपी विक्की गुप्ता, लाइन प्रोड्यूसर रोहित तिहारा हैं। इस प्रोजेक्ट में जयंत सनवाल और रोहित शर्मा का विशेष आभार जताया गया है और फेयर फॉक्स ग्रुप नॉएडा से इयोन प्रोजेक्ट का भी सपोर्ट हासिल रहा है। इस अवसर पर सिंगर हरिका और सिंगर विक्की मार्ले भी उपस्थित थे जो कंपनी के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स में नजर आएंगे।
भगवान की पूजा से घर की रौनक
आर. सूर्य कुमारी –
1998 के मार्च महीने में मेरी माताजी चल बसी थीं। उनको स्वस्थ करने के मेरे और मेरे भाई साहब के सारे प्रयास
विफल हो गए थे। ऐन मौके पर तो मैंने दृढ़ता से सब कुछ संभाल लिया, बाद में गंभीर डिप्रेशन से घिर गई। किसी तरह
भारी मन लिए भाई साहब को आफिस भेजती थी। मेरे समय का एक बहुत बड़ा हिस्सा माताजी को याद करने,
चुपचाप बैठे या लेटे रहने में बीतता था। इसी तरह दो साल बीत गए।
मेरी माताजी के चल बसने के बाद एक तो विषाद के कारण और दूसरा भगवान से नाराजगी के कारण मैंने माताजी के
सारे पूजा के सामानों को एक पेटी में बंद कर दिया। पूजा-पाठ बंद कर दिया। समय-समय पर जाला-वाला भी साफ
नहीं कर पाती थी। दो साल में घर की व्यवस्था बिल्कुल डगमगा गई थी। भाई साहब बीच बीच में नाराज होते थे, मगर
मेरी मानसिक स्थिति को देखते हुए दबाव भी नहीं बना पाते है।
सन् 2000 के सितंबर माह में एक दिन मैं सोफे पर लेटी हुई थी। जब उठी तो पैर के नीचे कुछ गीला-गीला सा लगा।
मैंने बत्ती जलाकर देखा तो पाया कि फर्श पर खून की कुछ बूंदे गिरी हुई हैं। मैंने फिर ध्यान से देखा। खून, सरसों का
तेल व दूध इन तीनों को मिलाकर जिस तरह के मिश्रण की हम कल्पना कर सकते है, वैसा ही मिश्रण था वह। मैंने
सूंघ कर देखा तो बड़ी विचित्र सी गंध थी। घर में कोई भी जानवर नहीं था और तैलीय खून किस जानवर का है यह भी
पता नहीं लगा पा रही थी। मुझे एक बार आभास हुआ कि कहीं कोई बला ने तो घर में प्रवेश नहीं कर लिया। फिर भी
मैंने बात को अपने आप से टाल दिया। भाई साहब जब शाम को लौटे तो उनसे भी नहीं बतलाया, चुप रही।
कुछ समय बाद फिर एक बार इस घटना की पुनरावृत्ति हुई। वैसी ही खून दूध के मिश्रण सी लगने वाली बूंदे गिरी हुई
थीं। अब मुझे पक्का समझ में आ गया कि यह किसी बला का कारनामा है। मैंने फर्श साफ किया और नहा लिया। मैं
अज्ञात बला से प्रार्थना की कि वह मुझे अपना पूरा कष्ट दे दे, लेकिन अब कभी घर के अंदर न आए। फिर बहुत दिन
तक बला नहीं आई। उस दिन की दहशत खौफ से बचने के लिए मैंने भाई साहब को कुछ नहीं बतलाया।
अब दीपावली को आने में मात्र दस-बारह दिन बाकी थे। मैं रसोई में खाना बनाने की तैयारी कर रही थी। कुकर में पानी
डालकर दाल-चावल के बर्तन उतारकर ढक्कन की ओर बढ़ी। देख के अवाक रह गई। ढक्कन पर वही बूंदे गिरी हुई थीं।
मैंने ढक्कन साफ कर कुकर तो चढ़ा दिया, फिर फटाफट तैयार होकर बाजार गई। हनुमान जी का एक फोटो, फूल-
माला, प्रसाद, सब कुछ पूरी पूजन सामग्री खरीद लाई और एक टेबल पर हनुमान जी को आसीन कर उनकी पूजा की।
भाई साहब लौटे तो उनको पूरी कहानी कह सुनाई। उन्होंने कहा कि खून का सैम्पल रूई मे ले लेना चाहिए था। यह भी
कहा कि घर की स्थिति ही कुछ ऐसी बन गई कि अब भूत-प्रेत पिशाच अड्डा जमाने की सोच रहे हैं। थोड़ा समय
निकालकर पूजा-पाठ मे मन लगाओ। बाद वाले दिन मैंने माताजी की सभी पूजन-सामग्री निकाली, स्थल को भी साफ किया। भगवान को विराजकर पूजा की। इस घटना के बाद और चार साल हम धनबाद में इस मकान में रहे, मगर उस तरह की घटना की चौथी बार पुनरावृत्ति नहीं हुई।
इसलिए एक बात आपसे बताना चाहती हूं, आपके यहां भी कभी कोई गम आ सकता है, अप्रिय घटना घट सकती है,
कोई गंभीर रूप से बीमार हो सकता है। अगर बहुत दिनों तक घर में क्रन्दन मचा रहे, शोक-दुख मचा रहे दीप बत्ती बंद
हो गई हो तो बलाएं, आपके घर को अपना अड्डा बना सकती है, आपको नुकसान पहुंचा सकती है। आपके घर में
रौनक बनी रहे, सुख-दुख के बीच ही सही सुबह-शाम भगवान की पूजा-आरती होनी चाहिए अगर परिस्थिति इस
लायक नहीं हो तो भी सुबह-शाम हनुमान जी को दो अगरबत्ती दिखाकर हाथ जोडऩा कभी न भूलें।
उपरोक्त घटना सत्य घटना है, मुझे भी भूत, प्रेत, पिशाचों पर विश्वास नहीं था। मगर अब मुझे पता चल गया कि ये
पैशाचिक हवाएं खण्डहरों में, वीरानों में या जहां पूजा पाठ नहीं होता है, वहां रहती है, तथा वहीं अपना अड्डा बनाने की
कोशिश करती हैं। (विभूति फीचर्स)













