Chhath puja 2023 ए छठी मइया सुनी लेहू अरज हमार
रीमा राय – विभूति फीचर्स
वैसे तो छठ पूजा वर्ष में दो बार कार्तिक व चैत्र महीने में मनाई जाती है पर कार्तिक महीने की छठ पूजा ज्यादा प्रचलित है। छठ पूजा मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत है, इसलिए इसे 'छठ’ कहा जाता है। सूर्य को सृष्टि का संचालक और प्राणी जीवन का प्रहरी माना जाता है। सूर्य के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा सदियों से अर्पित की जाती रही है। छठ पूजा मूलत: ऊर्जा के प्रतीक भगवान सूर्य का आराधना पर्व है।
दीपावली में वैसे तो रंगाई-पुताई के काम संपन्न हो गये होते हैं पर जिन घरों में छठ पूजा आयोजित होनी होती है, वहां दीपावली के बाद भी सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। छठ पूजा का मुख्य दौर तीन दिन तक चलता है। पहले दिन जिसे 'छोटकी छठ’ का नाम दिया जाता है। उस दिन व्रती सारा दिन उपवास तो करती हैं पर शाम को मीठा
भोजन यानी खीर ही खा लेती हैं। दूसरे दिन जिसे 'बड़की छठ’ कहा जाता है वह दिन तो पूर्ण उपवास का होता है। बहुत ही साफ-सुथरे माहौल में पकवान बनाने, फलों को धोने-सजाने की प्रक्रिया संपन्न होती है। इस व्रत में सूप, दौरा,केला, नारियल, कच्ची हल्दी, कच्ची सुपारी, सेव, नींबू, ईख, अदरक, मूली, सुथनी के साथ मुख्य रूप से ठेकुआ और चना का प्रयोग पूजा सामग्री के तौर पर किया जाता है। छठ के दिन शाम को सूर्यास्त से पहले सभी व्रती फलों और पकवानों को दौरा और सिपुली में भरकर घाट पर पहुंच जाते हैं। घाट पर पहुंचने के बाद सबसे पहले काम यह होता है कि डूबते सूरज को अध्र्य (अरध) अर्पित किया जाये। घुटनों तक पानी में खड़ी होकर व्रती एक-दूसरे को पश्चिम की ओर मुंह कर अध्र्य दिलवाते हैं।;चार चौखंड के पोखरवा, बनारस अइसन घाट ताही पोखरा उतरीले महादेव, गौरा देई के साथ।‘ यहां तो कई जगह गंगाजी सहज उपलब्ध हैं पर जहां यह संभव नहीं है यानी गांवों और कस्बों में, वहां छोटी-छोटी नदियों, तालाबों और पोखरों के किनारे जाकर ही पूजा-अर्चना की जाती है और 'चार चौखंड के पोखरवा’ की कल्पना साकार की जाती है। बिहार के गांवों में तो तालाबों और पोखरों के किनारे पक्की 'छठी मइया’ बनाई गई होती है जहां साल-दर-साल पूजा संपन्न की जाती हैं पर जहां गंगा घाटों पर पक्की छठी मइया बनाना संभव नहीं है कच्ची मिटटी और ईंटों की सहायता से अस्थायी तौर पर छठी मैया का निर्माण होता हे। घाटों पर तो इतनी भीड़ होती है कि जगह आरक्षित नहीं की जाए तो बैठने की जगह नहीं मिलेगी। डूबते सूरज को अध्र्य देने के बाद छठ मैया के पास बैठकर अनूठे तरीके से पूजन किया जाता है। छठ पूजा ही नहीं बिहार और उत्तरप्रदेश की सारी पूजाओं की यह खासियत है कि पूजा के प्रत्येक चरण के लिए अलग-अलग गीत होते हैं और उन गीतों के अंदाज भी अलग अलग ही होते हैं। छठ मैया के पास बैठकर जब इस प्रार्थना गीत का दोर प्रारंभ होता है तो एक अलग ही समां बंध जाता है।
सेई ले शरण तोहार ए छठी मैया
सुनी लेहू अरज हमार
गोदिया भरल मइया बेटा मांगी ले
मंगलवा भरल ऐहवात ए छठी मैया
सुनी लेहु अरज हमार।‘
विश्वास की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज तक थोड़ी भी कम नहीं हुई है कि छठी मैया सारी नोकामनाओं को पूर्ण करती है। परंपरागत गीतों के साथ छठी मैया की पूजा घाटों पर तब तक जारी रहती है, जब तक सूरज भगवान’अपने घर को लौट नहीं जाते हैं और रात की काली परछाइयां अपने डैने पसारने नहीं लगती हैं। सारे पथिक, पंछी अपने-अपने घरों को जब लौट रहे होते हैं छठ व्रती भी लौट पड़ते हैं अपने-अपने घरों को। घर आकर कोसी’ भरा जाता है। ईख के घरौंदे बनाकर नये कपड़े की छाजनी डाली जाती है और उसके बीच में मिट्टी के बारह या चौबीस बर्तनों में पकवान सजाकर दिये जलाए जाते हैं। छठी मैया तो घाट से चलकर आंगन में पहुंच गयी होती हैं।
पूछा भी जाता है कि ,-
सांझ भइल छठी रहलू में कंहवा’
तो छठी मैया जवाब देती है-
रहनी महादेव के आंगना,
गाई के गोबरे लिपहले उनकर अंगना,
झिलमिल दीप जरेला उनकर अंगना।
कोसी भरने के बाद समाप्त होती है शाम की पूजा। अब सूर्योदय के पहले फिर घाट पर पहुंचना है। भूख और प्यास से नींद भी नहीं आती पर उनींदी आंखों में कष्ट या पीड़ा के भाव झलकते भी नहीं। सूर्योदय के पहले घाट पर पहुंच फिर एक बार ;कोसी’ भरने की प्रक्रिया दोहराई जाती है। छठ मैया की पूजा होती है। गीतों के बोल उठते हैं और इंतजार किया जाता है कि कब पूरब के आकाश में लालिमा छायेगी और कब उदय होगा सृष्टि का एक और नया सवेरा।
हाथ में कलसुपवा लिहले पारवती ठाढ़ हे
कब दल उगीहें सुरूज अलबेलवा हे’
और गीतों की भाषा में पुरहन के पात’ पर सूर्य का उदय होता है तो प्रारंभ होती है वंदना ऊं सूर्याय नम:। पूरब की ओर मुंह कर अबकी बार गाय के कच्चे दूध से अध्र्य अर्पित किया जाता है। छठ पूजा प्रारंभ पश्चिम में डूबते सूरज को अध्र्य देकर होती है और पूरब में उगते सूरज को अध्र्य देकर संपन्न हो जाती है। इस सूर्य के आराधना पर्व 'छठ’ पर महिलाएं गीत गाते हुए घाटों पर जाती हैं और गीत गाते हुए पूजा करती हैं, फिर गीत गाते हुए लौट भी आती हैं। ब्रह्मा के शासनतंत्र में ऊर्जा विभाग सूर्य के अधीन है। सूर्य का कार्य सृष्टि को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करना है। सूर्य के दिव्य रथ में सात घोड़े हैं, जो अश्वशक्ति (हॉर्सपावर) के प्रतीक हैं। इस पृथ्वी के निवासी भी ऊर्जा का मापदण्ड अश्वशक्ति को ही मानते हैं। सूर्य का रथ जिस प्रकार बिना किसी आधार के चलता है उसी प्रकार आकाश में ऊर्जा की तरंगें भी वायुमंडल में चलती हैं। सौर ऊर्जा से जीवधारियों और वनस्पतियों को जीवन मिलता है। यही कारण है कि यह पूजा आज किसी प्रांत, जाति या समुदाय का बंधन नहीं मानती। छठ पूजा में व्यवहृत सामानों को इतनी सावधानी और सफाई से रखा या पकाया जाता है कि पक्षी भी उसको स्पर्श करते हैं तो पूजा के अयोग्य मान लिया जाता है। छठ पूजा खासकर बिहार के उत्तरी जिलों पुराना छपरा, चंपारण, मुजफ्फरपुर, पटना, आरा, वैशाली एवं बिहार की सीमा से सटे उत्तरप्रदेश के पश्चिमी जिलों गोरखपुर, देवरिया, बलिया, आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर आदि में ज्यादा महत्वपूर्ण है। बिहार में तो इसे सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया ही जाता है। पश्चिमी उत्तरप्रदेश में भी यह काफी तेजी से फैलती जा रही है, क्योंकि सीमा से सटे इन जिलों में विवाह संबंध बहुत ज्यादा हैं। बंगाल में भी इसका प्रचलन बढ़ा है, क्योंकि उन्हीं जिलों के लोग यहां भी बसते हैं। पटना की छठ पूजा तो समूचे भारत में अपना अलग ही एक स्थान रखती है।
मुजफ्फरनगर – दूध छोड़ते ही गायों को छोड़ रहे पशुपालक
रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। जिले की गोशालाओं और गोआश्रय स्थलों में बछड़ों और सांड़ों से अधिक गायों की संख्या हो गई है। ऐसे भी मामले हैं, जब गाय के दूध देना बंद करते ही घर से निकालकर पशुपालक सड़क पर छोड़ रहे हैं। दो से तीन किलो दूध की गाय को भी सड़कों पर छोड़ा जा रहा है।
सनातन संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। परिवार में पहली रोटी गाय को देने की परंपरा है। जिले में 65 गोशाला और 35 आश्रय स्थल बनाए गए हैं। पशुपालन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि आश्रय स्थलों में गोवंश की संख्या 7896 है। इनमें 3796 नर गोवंश और 4100 मादा गोवंश हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. चंद्रवीर सिंह का कहना है कि विभाग के प्रयासों से कृत्रिम गर्भाधान से पैदा होने वाले बछड़ों की संख्या घट रही है। हमारे सामने सबसे बड़ी चिंता अब यह है लोग बांझ गायों को अधिक संख्या में निराश्रित छोड़ रहे हैं। यह एक बड़ी सामाजिक समस्या बन गई है। हमारे जिले के आंकड़े सामने हैं, जनपद में गो आश्रय स्थलों में नर गोवंश से मादा गोवंश की संख्या 304 अधिक है। नवीन मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय मित्तल का कहना है कि कुछ लोग मंडी में दो से तीन किलो दूध देने वाली गायों को छोड़कर चले जाते हैं। गाय जितने का दूध देती है, उससे ज्यादा उनके ऊपर खर्च आता है।
सब्जी से महंगा हो रहा पशुओं का चारा
दूध देने वाले एक पशु पर किसान का प्रति दिन 300 से 400 रुपये तक का खर्च आ रहा है। छोटी जोत और आय के कम साधन होने के कारण बांझ गाय का घर में रखना उसके लिए चुनौती से कम नहीं है। बाजार भूसा इस समय 2100 रुपये क्विंटल पहुंच गया है। हरा चारा 17 रुपये का पांच किलो है। खल और चौकर अलग से लगता है। बाजार में कुछ सब्जियों के दाम पशुओं के चारे से कम हैं।
एकल गोशाला योजना अपनाएं : टिकैत
भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि हमने पांच साल पहले सरकार के सामने प्रस्ताव रखा था कि वह एकल गोशाला की व्यवस्था करें। शहरी क्षेत्र के पैसे वाले जो लोग गाय की सेवा करना चाहते हैं वह किसान की गाय गोद ले लें। किसान को हर माह एक हजार रुपये दे दें। किसान गाय का पालन कर लेगा, गाय की जान बच जाएगी। गोसेवा करने वालों का दान पुण्य हो जाएगा। गायों को बचाने का यही तरीका है।
छोटी जोत, बांझपन बड़ी समस्या : धर्मेंद मलिक
भाकियू अराजनैतिक के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि किसान अपने पशु को मजबूरी में छोड़ रहा है। छोटी जोत हो गई है, चारा महंगा पड़ रहा है और गायों में बांझपन की समस्या बढ़ गई है। गांवों में ट्रेंड पशु चिकित्सकों की व्यवस्था होनी चाहिए। नस्ल सुधार पर जोर दिया जाना चाहिए। समय पर किसान की गाय गाभिन हो जाए और अच्छी नस्ल के बच्चा पैदा हो तो यह समस्या खत्म हो जाएगी।
Gopashtami 2023 – ये पर्व गोवर्धन लीला से जुड़ा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गाय को कामधेनु का स्वरूप भी माना गया है
भारत में गाय को एक पूज्य स्थान दिया गया है. धार्मिक रूप से गाय को माता का दर्जा भी दिया गया है. यही कारण है कि हिंदू आस्था व मान्यताओं में गाय का विशेष महत्व है. हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन गाय की पूजा अर्चना की जाती है. मान्यता है कि गोपाष्टमी की संध्या पर गाय की पूजा करने वाले लोगों को सुख समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है. गोपाष्टमी के दिन गाय की पूजा करने का विशेष महत्व है.
इस वर्ष गोपाष्टमी का पर्व 20 नवंबर को सुबह 5 बजे से शुरू हो रहा है. गौ कथा वाचक गोपाल मणि बताते है कि जब भगवान श्रीकृष्ण 6 वर्ष के होने पर जब पहली बार गाय चराने के लिए गये तो उस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी थी. तब से ही उस दिन को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा. इसका जिक्र श्रीमदभागवत गीता में भी किया गया है.
क्या हैं गौ भक्तों की मांग?
बताते हैं कि गोपाष्टमी का ये पर्व गोवर्धन लीला से जुड़ा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गाय को कामधेनु का स्वरूप भी माना गया है. जिसमें सभी देवता निवास करते हैं. इस बार गोपाष्टमी 20 नवंबर को पड़ रही है. इस साल देशभर के गौ भक्त गौपाष्टमी दिल्ली में मनाएंगे. जहां एक जुट होकर गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित किये जाने की मांग की जायेगी.
कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन खासतौर पर गौ माता की पूजा और सेवा करने का विधान है। इस साल गोपाष्टमी 20 नवंबर को है। मान्यता के अनुसार इस दिन सर्वप्रथम भगवान कृष्ण ने गायों को चराना आरंभ किया था, इसलिए इस दिन गौ माता के साथ बछड़े की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि यदि गोपाष्टमी के दिन विधि-विधान से गाय का पूजन व सेवा की जाए तो देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। गाय की पूजा करने से श्री कृष्ण प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इस दिन गाय की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। तो चलिए जानते हैं गोपाष्टमी की पूजा विधि और महत्व के बारे में.
गोपाष्टमी पर ऐसे करें गौ माता की पूजा
अष्टमी तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले स्वयं स्नानादि करना चाहिए और भगवान कृष्ण के समक्ष दीप प्रज्वलित करें।
इसके बाद गाय और उसके बछड़े को नहलाकर तैयार करें और गाय को घुंघरू आदि पहनाएं।
गाय को आभूषण या फूलों की माला पहनाकर श्रंगार करें। गौ माता के सींग रंगकर उनमें चुनरी बांधे।
अब गाय भलिभांति गाय का पूजन करें और भोजन कराएं। इसके बाद गाय की परिक्रमा करें।
गोधूलि बेला में पुनः गाय का पूजन करें और उन्हें गुड़, हरा चारा आदि खिलाएं।
यदि आपके घर में गाय न हो तो किसी गौशाला में जाकर गाय का पूजन कर सकते हैं।
गोपाष्टमी की कथा
मान्यता के अनुसार कान्हा जिस दिन गौ चराने के लिए पहली बार घर से निकले थे, वह कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी, इसलिए इस तिथि को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। गोपाष्टमी की पौराणिक कथा के अनुसार जब श्री कृष्ण छह वर्ष के हुए तो यशोदा जी से कहने लगे, ‘मईया अब मैं बड़ा हो गया हूं। यशोदा जी प्रेम पूर्वक बोलीं- अच्छा लल्ला अब तुम बड़े हो गए हो तो बताओ अब क्या करें। इस पर कन्हैया बोले- अब मैं बछड़े चराने नहीं जाउंगा, अब मैं गाय जाउंगा। इसपर यशोदा जी ने कहा- ठीक है बाबा से पूछ लेना। अपनी मईया के इतना कहते ही झट से कृष्ण जी नंद बाबा से पूछने पहुंच गए।
नंद बाबा ने कहा- लल्ला अभी तुम बहुत छोटे हो अभी तुम बछड़े ही चराओ, लेकिन कन्हैया हठ करने लगे। तब नंद जी ने कहा ठीक है लल्ला तुम पंडित जी को बुला लाओ- वह गौ चारण का मुहूर्त देख कर बता देंगे।बाबा की बात सुनकर कृष्ण जी झट से पंडित जी के पास पहुंच गए और बोले- पंडित जी, आपको बाबा ने बुलाया है, गौ चारण का मुहूर्त देखना है, आप आज ही का मुहूर्त बता देना मैं आपको बहुत सारा माखन दुंगा।
पंडित जी नंद बाबा के पास पहुंचे और बार-बार पंचांग देख कर गणना करने लगे, तब नंद बाबा ने पूछा, क्या बात है पंडित जी? आप बार-बार क्या गिन रहे हैं? तब पंडित जी ने कहा, क्या बताएं गौ चारण के लिए केवल आज का ही मुहूर्त निकल रहा है, इसके बाद तो एक वर्ष तक कोई मुहूर्त नहीं है। पंडित जी की बात सुनने के बाद नंदबाबा को गौ चारण की स्वीकृति देनी पड़ी। उसी दिन भगवान ने गौ चारण आरंभ किया। यह शुभ तिथि कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि थी, भगवान के द्वारा गौ-चारण आरंभ करने के कारण यह तिथि गोपाष्टमी कहलाई।
एक मान्यता ये भी
एक अन्य मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा था। आठवें दिन जब इंद्र देव का अहंकार टूटा और वे श्रीकृष्ण के पास क्षमा मांगने आए। तभी से कार्तिक शुक्ल अष्टमी पर गोपाष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा है।
आख़िर पशुओं को आवारा छोड़ने वालों पर कैसे और कब होगी कार्यवाही, गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने से पहले उनका संरक्षण जरूरी।
रिपोर्ट:सत्यपाल नेगी
रूद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड में आय दिन जगह जगह गायों से लेकर अन्य पशुओं को आवारा छोड़कर उन्हे निराश्रित बनाने की संख्या बढ़ती ही जा रही है,ऐसे में पशुओं का सही संरक्षण कैसे होगा।एकदिवसीय जनपद भ्रमण पर पहुंचे उत्तराखंड राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष पं.राजेंद्र प्रसाद अंथवाल ने विकास भवन सभागार में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की तथा जनपद में निराश्रित गौ-पशुओं के लिए बनाए जा रहे गोसदन एवं की जा रही व्यवस्थाओं के संबंध में संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली।
बैठक में उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि गौ-सेवा ही भगवान की सेवा है।वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली है जिसे गो सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म में गाय की सेवा से मोक्ष प्राप्त होता है इसलिए सभी को संपूर्ण सेवा भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए निराश्रित गौ की सेवा करनी चाहिए।उन्होंने पशुपालन विभाग,नगर पालिका व नगर पंचायत के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनपद में निराश्रित गौ एवं निराश्रित पशुओं के संरक्षण के लिए गौ सदन बनाए जाने हेतु स्थान चिन्हित करने के लिए सर्वे कराने के निर्देश दिए तथा जनपद के सभी स्थानों में निराश्रित पशुओं को चिन्हित करते हुए उनके लिए छह माह के भीतर सभी आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी निराश्रित गाय यदि घायल हो जाती है तो उसके लिए उचित चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए।इसके लिए पशु एंबुलेंस की भी व्यवस्था कराई जाए। उन्होंने कहा कि जो भी निराश्रित गाय का निधन होता है तो उचित ढंग से उसे दफनाने की कार्यवाही की जाए तथा इसकी वीडियो व फोटोग्राफी कराने के भी निर्देश दिए।उन्होंने गौ सेवा से जुड़े सभी प्रतिनिधियों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में निराश्रित पशुओं पर विशेष निगरानी रखने की अपील की है,उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा किसी पशु के साथ किसी भी तरह की पशु क्रूरता की जाती है तो उसके विरुद्ध पशु-क्रूरता अधिनियम के तहत आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार ने जनपद आगमन पर गौसेवा आयोग के अध्यक्ष का स्वागत करते हुए कहा कि उनके द्वारा बैठक में जो भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं उनका संबंधित अधिकारियों से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।बैठक में सदस्य राज्य गौसेवा आयोग धर्मवीर सिंह,अजय सेमवाल,प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ.दीपमणी गुप्ता,मुख्य शिक्षा अधिकारी हेमलता भट्ट,जिला पंचायत राज अधिकारी प्रेम सिंह रावत,पुलिस उपाधीक्षक प्रबोध कुमार घिल्डियाल,अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत तिलवाड़ा वासुदेव डंगवाल,सहायक अभियोजन अधिकारी प्रमोद चंद्र आर्य,वन क्षेत्राधिकारी संजय कुमार,डाॅ.अमित सिंह सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
‘स्टारफिश’ का ट्रेलर जारी
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत -पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री उत्तराखंड )
16 नवंबर 2023,गुरुवार, देहरादून , संजय बलोदी प्रखऱ देहरादून,16 नवंबर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को सचिवालय में मिलेट बेकरी आउटलेट का उद्घघाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य के मोटे अनाजों पर आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने और महिला स्वयं सहायता समूहों की आजीविका में वृद्धि करने के उद्देश्य से सचिवालय परिसर में मिलेट बेकरी का आउटलेट शुभारंभ किया गया है।
राज्य में ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय मंडुआ ( कौदा ), झंगोरा, ज्वार, चौलाई इत्यादि मोटे अनाजों का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इन उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए जनपद देहरादून के रायपुर ब्लॉक तथा जनपद पौड़ी के पौड़ी ब्लॉक में 2 मिलेट उत्पादों की बेकरी प्रारम्भ की गयी है। मिलेट बेकरी में मंडुआ तथा झंगोरा का प्रसंस्करण कर बिस्किट, ब्रेड तथा पिज्जा बेस व अन्य उत्पाद तैयार किये जा रहें है। अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष 2023 के अन्तर्गत स्थानीय मोटे अनाजों के उत्पादन और उपभोग को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में अनेक कार्यक्रम किये जा रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2025 तक सवा लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक 40 हजार 270 महिलायें लखपति दीदी बनायी जा चुकी है। चयनित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बेकरी विशेषज्ञ के माध्यम से बेकरी उत्पाद हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है जिससे अधिक संख्या में समूहों द्वारा बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता तथा पोषण से युक्त बेकरी उत्पाद तैयार कर लोगों को उपलब्ध करा सके।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु, अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, सचिव श्रीमती राधिका झा एवं ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारी सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने झारखंड के खूंटी से प्रमुख सरकारी योजनाओं की परिपूर्णता सुनिश्चित करने के लिए विकसित भारत यात्रा का शुभारंभ किया
पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत 18,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि की 15वीं किस्त जारी की
झारखंड में लगभग 7,200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया

कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर जनजातीय कलाकारों ने गर्मजोशी के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इस कार्यक्रम में हजारों उत्साही किसानों ने भाग लिया और कई अन्य किसानों ने ऑनलाइन माध्यम से इस कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा झारखंड के राज्यपाल, श्री सी. पी. राधाकृष्णन, झारखंड के मुख्यमंत्री, श्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री, श्री अर्जुन मुंडा उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए, उलिहातू गांव और रांची में स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय की अपनी यात्रा के बारे में बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और श्रद्धेय क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री नरेन्द्र मोदी ने झारखंड के स्थापना दिवस के अवसर पर अपनी शुभकामनाएं भी दीं और इसके गठन में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि झारखंड राज्य में अब 100 प्रतिशत विद्युतीकृत रेल मार्ग मौजूद हैं।
श्री मोदी ने विकसित भारत के लिए चार स्तंभों: महिला शक्ति, कृषि शक्ति, युवा शक्ति और गरीबों और मध्यम वर्ग की शक्ति का समर्थन करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने लाखों लोगों को गरीबी से ऊपर उठाने और स्वच्छता, तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) कनेक्शन और स्वास्थ्य देखभाल जैसी आवश्यक सेवाओं में सुधार के सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री मोदी ने भविष्य के लिए अपना दृष्टिकोण भी साझा किया जहां हर गरीब व्यक्ति की सरकारी योजनाओं के माध्यम से आवश्यक सेवाओं और लाभों तक पहुंच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि अटल जी की सरकार ने अपने बजट से जनजातीय समुदायों के लिए अलग मंत्रालय बनाया, जिसे का बजट अब 6 गुना बढ़ा दिया गया है।
श्री मोदी ने कहा कि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत, सरकार का लक्ष्य प्राचीन जनजातियों तक पहुंचना है, जिनमें से कई अभी भी जंगलों में रहते हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि ऐसे 75 जनजातीय समुदायों और प्राचीन जनजातियों की पहचान की गई है, जिनकी कुल संख्या लाखों में है और वे 22 हजार से अधिक गांवों में रहते हैं। उन्होंने केवल संख्याओं को जोड़ने से लेकर जीवन को जोड़ने की ओर बदलाव पर बल दिया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार इस व्यापक अभियान में 24,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है।
प्रधानमंत्री ने आज जारी पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 15वीं किस्त के बारे में बात करते हुए बताया कि अब तक किसानों के खातों में 2,75,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। उन्होंने पशुपालकों और मछुआरों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड, मुफ्त पशुधन टीकाकरण पर 15,000 करोड़ रुपये के सरकारी खर्च कर रही है। उन्होंने मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत मछली पालन के लिए वित्तीय सहायता और 10,000 नए किसान उत्पादन संघों के निर्माण जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य बाज़ारों को अधिक सुलभ बनाकर किसानों के लिए लागत कम करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाने और विदेशी बाजारों में श्री अन्न जैसी भारतीय उपज को प्रोत्साहन प्रदान करने के सरकार के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
कुल मिलाकर, यह आयोजन किसानों को सहायता प्रदान करने और जनजातीय समूहों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ है। पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 15वीं किस्त जारी करना और पीएम जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान का शुभारंभ हाशिए पर रहने वाले समुदायों के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों को प्रदर्शित करता है।
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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने तीसरी हॉकी इंडिया सीनियर महिला अंतर-विभागीय राष्ट्रीय चैम्पियनशिप का उद्घाटन किया
खेल-कूद के रोमांचकारी माहौल में, माननीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस एवं आवास तथा शहरी मामलों के मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने तीसरी हॉकी इंडिया सीनियर महिला अंतर-विभागीय राष्ट्रीय चैम्पियनशिप और टूर्नामेंट ट्रॉफी का शिवाजी स्टेडियम में उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह और ट्रॉफी अनावरण के अवसर पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव श्री पंकज जैन, इंडियन ऑयल के अध्यक्ष श्री श्रीकांत माधव वैद्य, हॉकी इंडिया के महासचिव श्री भोलानाथ और भारतीय हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी अजीत पाल सिंह तथा जफर इकबाल उपस्थित थे। टूर्नामेंट का आयोजन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।

अपने संबोधन में श्री हरदीप पुरी ने हाल ही में एशियाई महिला हॉकी चैंपियनशिप जीतने वाली भारतीय महिला टीम के खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने भाग लेने वाली आठ हॉकी टीमों के सभी सदस्यों को एक शानदार टूर्नामेंट के लिए शुभकामनाएं दीं।

श्री पुरी ने कहा, “आज, आप यहां अंतर-विभागीय सीनियर महिला टूर्नामेंट में खेल रही हैं, लेकिन कल, आप में से कई भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और विश्व चैंपियन और विश्व विजेता के रूप में उभरेंगे। अपनी ओर से, हम अपनी लड़कियों के लिए सर्वोत्तम सुविधाएं और वातावरण प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे ताकि, वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमक सकें।
इस अवसर पर, श्री पंकज जैन ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने 1982 के एशियाई खेलों के हॉकी मैचों के दौरान इसी शिवाजी स्टेडियम में एक चिकित्सा स्वयंसेवक के रूप में कार्य किया था। उन्होंने कहा, “मैं उस समय एक युवा लड़का था और उन दिनों की यादें मेरे साथ जुड़ी हुई हैं। आप सभी कई लड़कियों और कई युवाओं के लिए रोल मॉडल हैं। आप अपने प्रदर्शन से आने वाली पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं और आपकी वजह से उनकी आंखों में आशा और खुशी है”, श्री जैन ने आठ टीमों के युवा हॉकी खिलाड़ियों को प्रेरित और प्रोत्साहित करते हुए कहा।
इंडियन ऑयल के अध्यक्ष श्री श्रीकांत माधव ने न सिर्फ महिला हॉकी, बल्कि अन्य खेलों के लिए भी, हर संभव सहायता देने का वादा किया। उन्होंने कहा, ”हम अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और जब भी हमसे कहा जाता है, हम हमेशा आगे आते हैं। हमने युवा हॉकी खिलाड़ियों की एक टीम बनाई है और मुझे उम्मीद है कि अन्य भी जल्द ही हमारी स्टार महिला खिलाड़ियों को बहुत सारे अवसर देंगे।”
हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने अपने संबोधन में युवा लड़कियों को टूर्नामेंट के लिए शुभकामनाएं दीं। महिला हॉकी को विभिन्न क्षेत्रों से मिल रहे समर्थन से उत्साहित होकर उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब महिला हॉकी टीम ओलंपिक में पदक जीतकर लाएगी।
इस कार्यक्रम में, हॉकी के इतिहासकार और लेखक, श्री के. अरुमुगम को हॉकी के खेल में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। श्री पूरी और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने उनके गैर सरकारी संगठन वन थाउजेंड हॉकी लेग्स (ओटीएचएल) की 25 लड़कियों को नई हॉकी स्टिक दी।
यह चैंपियनशिप, शीर्ष स्तरीय प्रतिभा का एक रोमांचक प्रदर्शन,करने का वादा करती है, जिसमें देश भर से आठ सर्वश्रेष्ठ महिला टीमें भाग ले रही हैं। प्रतिभागियों में, 12 से अधिक खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गर्व से भारत का प्रतिनिधित्व किया है, जिससे टूर्नामेंट में अनुभव और कौशल दोनो देखने का मौका मिलेगा। टूर्नामेंट में भाग लेने वाली आठ टीमों में, अखिल भारतीय पुलिस खेल नियंत्रण बोर्ड, रेलवे खेल संवर्धन बोर्ड, यूको बैंक, भारतीय खेल प्राधिकरण, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सशस्त्र सीमा बल, तमिलनाडु पुलिस और आयोजक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन-महिला शामिल हैं।
ट्रॉफी अनावरण और उद्घाटन समारोह ने इस प्रतिष्ठित चैम्पियनशिप की आधिकारिक शुरुआत को चिह्नित किया और जो खेल भावना का प्रदर्शन करता है और उच्चतम स्तर पर महिला हॉकी को बढ़ावा देता है।

मध्य प्रदेश में प्रस्तावित समस्त यात्राओं,कार्यक्रमों एवं जन -सभाओं को स्थगित कर आज देर रात्रि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लौटेंगे देहरादून.
मध्य प्रदेश में प्रस्तावित समस्त यात्राओं,कार्यक्रमों एवं जन -सभाओं को स्थगित कर आज देर रात्रि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लौटेंगे देहरादून.
15 नवंबर 2023,बुद्धवार इंदौर /देहरादून
संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखंड प्रदेश
विदित हो 12 नवंबर को उत्तरकाशी के सिलक्यारा में निर्माणाधीन टनल में हुए भू धसांव की घटना के पश्चात निरंतर बचाव एवं राहत कार्य चल रहा है…जिसका मुख्यमंत्री धामी निरंतर अपडेट ले रहे हैँ.. !
हालांकि मुख्यमंत्री की मध्य प्रदेश में कई जनसभाएं और यात्राएं प्रस्तावित थी !किंतु इन सभी कार्यक्रमों को मध्य में ही स्थगित कर टनल में धसावं व श्रमिकों के फसें होने की स्थिति की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए उन्होंने शीघ्र अपने गृह प्रदेश लौटने का निर्णय लिया.. !
मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हुई केंद्रीय एजेंसियों की टीम की हौसला अफजाई कर यथाशीघ्र टनल में फंसे श्रमिकों के सकुशल रेस्क्यू की कही बात।
केंद्रीय एजेंसियों को प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सहायता एवं हर संभव मदद हेतु शासन एवं प्रशासन को वैसे तो पूर्व में ही दिए जा चुके हैं समुचित दिशा निर्देश।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए फंसे हुए श्रमिकों के परिजनों से निरंतर संपर्क कर एवं संचार हेतु प्रशासन द्वारा जारी किए गए दूरभाष नंबर एवं अन्य संपर्क सूत्र. !
घटनास्थल पर श्रमिकों के परिजनों एवं सहकर्मियों के साथ-साथ घटना की कवरेज करने आए मीडिया कर्मियों के लिए समुचित व्यवस्था बनाने एवं सहयोग करने के जिला प्रशासन को दिए निर्देश।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह से बचे.. तथा किसी भी समस्या के निराकरण के लिए शासन प्रशासन की यथासंभव सहायता करें साथ ही हमें शांति व्यवस्था बना कर रखनी चाहिए ! जिस कारण घटनास्थल पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था व उन्माद न फैले जिससे रेस्क्यू कार्रवाई निर्बाध व शीघ्रताशीघ्र पूर्ण हो सके.. !












