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गोबर से बनी कागज की पत्रिका बनाने की अनूठी पहल

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आज इस आधुनिक दुनिया में बढ़ते हुए प्रदूषण को देखते हुए लोग एक बार फिर पेड़ों के बारे में सोच रहे हैं और इसका बचाव कर रहे हैं. इसी कड़ी में जालौर भीनमाल के रहने वाले विकास सिंह पुत्र श्रवण सिंह राव बोरली ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए पर्यवरण संरक्षण का संकल्प लिया है. दरअसल विकास का विवाह 18 फरवरी को होने वाला है. ऐसे में उन्होंने गाय के गोबर से बनी कागज की पत्रिका बनाने की अनूठी पहल की है, जिससे कि गौ-संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण किया जा सके.

गौसंरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
विकास का कहना है कि वर्तमान समय में गायों के लिए के लिए केवल गौशाला बनवाना और गौ-दान करना ही काफी नहीं है. गोपालको पर आर्थिक दबाव और और गायों के रख-रखाव में भी बहुत समस्या आती है. गोबर से बने कागज के उत्पादन में गायों के रख-रखाव में होने वाली आर्थिक समस्या का समाधान हो सकता है, जिससे गौशाला में गाय पालने वालों के लिए आर्थिक सहयोग में सहायता मिले. पर्यावरण को बचाने के लिए गाय के गोबर से बने कागज बहुत सहायक हैं.

पर्यावरण संरक्षण के लिए कैसे उपयोगी है गौमय कागज
आज पर्यावरण को बचाने के लिए बहुत सारी संस्थाएं काम करती हैं. उसी को ध्यान में रखते हुए अगर गाय के गोबर से बने इस कागज का उपयोग किया जाए, तो यह पर्यावरण के लिए एक संरक्षक का रूप होगा, क्योंकि यह कागज पर्यावरण संरक्षण में एक अहम भूमिका निभाता है. यह कागज बहुत ही शुद्ध है और इसका उपयोग दोबारा किया जा सकता है.

समाज को मिल सकता है सकारात्मक सहयोग
विकास सिंह के 18 फरवरी को होने जा रहे विवाह की पत्रिका जयपुर स्थित गौकृति से तैयार हुई है. ऐसे में वहाँ के प्रधान संपादक भीमराज ने बताया कि गोमय पेपर की कीमत सामान्य कागज के बराबर है. उन्होनें बताया कि सामान्य कागज के 30 पेडों को काटने पर एक टन कागज तैयार किया जाता है. लेकिन गाय के गोबर और अन्य सामग्री के उपयोग से बने कागज की पत्रिका आर्थिक एवं पर्यावरण हेतु लाभदायक है.

एक्टर सोनू सूद के हाथों एशियन आईकॉनिक अवार्ड से सम्मानित हुए मितेश उपाध्याय

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मुंबई। हाल ही में रामकुमार पाल 64 फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत एशियन आईकॉनिक अवार्ड 2024 का भव्य आयोजन मुक्ति कल्चरल हब अंधेरी, मुंबई में संपन्न हुआ जहां सेलिब्रिटी गेस्ट के रूप में फिल्म अभिनेता सोनू सूद और विंदू दारा सिंह की विशेष उपस्थिति रही। उसी अवसर पर मितेश उपाध्याय को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सोनू सूद के हाथों एशियन आईकॉनिक अवार्ड प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में शो आयोजक रामकुमार पाल और शैलेश पटेल ने दोनों कलाकारों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए ट्रॉफी और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया।

अवार्ड शो के दौरान ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध अभिनेता सोनू सूद के हाथों समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विशिष्ट लोगों को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस अवार्ड शो का आयोजन रामकुमार पाल और मुंबई रफ्तार चैनल के सीइओ शैलेश पटेल ने किया।
वहीं इस शो का संचालन सिमरन आहूजा ने किया और एशियन आइकॉनिक अवार्ड कार्यक्रम में फिल्म व टीवी सितारें उर्वशी ढोलकिया, प्रिंस नरूला, विशाल जेठवा, शिव ठाकरे, सृजिता डे, स्नेहा वाघ, जसन शाह, अर्चना कोचर, ईशा संजरी, वाशु जैन की उपस्थिति रही जिन्हें रामकुमार पाल ने सम्मानित किया।
मितेश उपाध्याय निर्माता और इवेंट ऑर्गनाइजर हैं। वह गुजरात में गुजराती प्ले नाद म्यूजिकल शो का काम करते हैं।
इसके अलावा वह राम तेरी गंगा मैली फिल्म की अभिनेत्री मंदाकिनी के हाथों दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं।
मितेश उपाध्याय ने पिछले दिनों गोवा में एशियन फैशन टूर शो का आयोजन किया जहां उन्हें भी सारा खान ने सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें काफी अवॉर्ड मिल चुके हैं।

– संतोष साहू

केंद्र सरकार के प्रयासों से कतर से सकुशल लौटे पूर्व नौसैनिक – मुख्यमंत्री ने धामी ने व्यक्त की प्रतिक्रिया

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 अधिकारी सौरभ वशिष्ट से मुख्यमंत्री धामी ने की सदिच्छा भेंट
मुख्यमंत्री ने सौरभ की रिहाई को बताया विश्व में भारत की पहचान की बढ़ती ताकत।
देहरादून ,14 बुद्धवार ,मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कतर से सकुशल वापस लौटे नौ सेना के पूर्व अधिकारी श्री सौरभ वशिष्ट को सम्मानित कर शुभकामनायें दी। मुख्यमंत्री ने बुधवार को सायं श्री वशिष्ट के टर्नर रोड स्थित आवास पर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की तथा उनकी खुशी में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौरभ की सकुशल रिहाई विश्व में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं भारत की बढ़ती ताकत की पहचान है। यही नहीं उनकी रिहाई मोदी है तो मुमकिन है का स्पष्ट उदाहरण भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सौरभ वशिष्ट लम्बे समय के बाद तमाम मुश्किलों का सामना कर वापस घर लौटे हैं, उनके परिवार के लिये यह अवसर दीपावली जैसा है। मुख्यमंत्री ने इसके लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी देश वासियों एवं विदेशों में रह रहे प्रवासी सभी भारतीयों को परिवारजन कहते हैं तथा सभी का परिवार के मुखिया की तरह ध्यान भी रखते हैं, यह मौत की सजा का सामना कर रहे कतर से सौरभ वशिष्ट की सकुशल वापसी का सबसे बड़ा उदाहरण भी है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के कुशल नेतृत्व पर उनके परिवार के साथ स्वयं उन्हें भी पूरा भरोसा था कि कतर में फंसे सभी 8 लोगों को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मौत के मुंह से जरूर वापस लायेंगे।

भारत ऊर्जा सप्ताह – 2024 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन संस्करण को आयोजित किया गया

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पेट्रोलियम मंत्री हरदीप एस पुरी ने भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का उल्लेख किया


भारत ऊर्जा सप्ताह (आईईडब्ल्यू)- 2024 के दौरान पीएनजीआरबी के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन संस्करण को आयोजित किया गया

इस सम्मेलन में दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के ऊर्जा नियामक प्राधिकरणों ने हिस्सा लिया

New Delhi  14 FEB 2024  गोवा में आयोजित भारत ऊर्जा सप्ताह (आईईडब्ल्यू)- 2024 के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के अधीन 5 से 8 फरवरी, 2024 के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामकों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन संस्करण आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, श्रीलंका और थाईलैंड के प्रमुख दक्षिण व दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्रीय ऊर्जा नियामक प्राधिकरणों सहित अंतरराष्ट्रीय उद्योग क्षेत्र के नेता शामिल हुए। एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स इस सम्मेलन का ज्ञान साझेदार था।

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इस सम्मेलन की व्यापक विषयवस्तु “प्राकृतिक गैस विकास के लिए मार्ग प्रशस्त करना” है। इसमें तीव्र गति और गहराई से उत्सर्जन में कमी लाने को लेकर प्राकृतिक गैस की भूमिका पर जोर दिया गया, जो उभरते व विकासशील देशों के जलवायु परिवर्तन संबंधित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन के तहत पांच पूर्ण सत्रों में ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करने वाली भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, तेजी से बुनियादी ढांचे के विकास, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और संस्थागत विकास जैसे कई विषयों पर चर्चाएं हुईं। इस सम्मेलन के तहत अंतरराष्ट्रीय नियामकों की एक विशेष गोलमेज बैठक ने नियामक ढांचे के संरक्षकों को एक साथ लाने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने व प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों, सीमा पार सहभागिता रणनीतियों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान किया।

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस व आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने इस कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। उन्होंने इस पहल के लिए पीएनजीआरबी की सराहना की। इसके अलावा मंत्री ने आने वाले समय में तेल और गैस नियामकों के अंतरराष्ट्रीय नियामक सम्मेलन को आईईडब्ल्यू की एक अभिन्न विशेषता के रूप में बनाए जाने पर जोर दिया। वहीं, पीएनजीआरबी के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जैन ने प्राकृतिक गैस क्षेत्र के विकास को लेकर प्रभावी नियामक ढांचे तैयार करने के लिए ज्ञान साझा करने के संबंध में दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया।

इसमें वक्ताओं के सम्मानित समूह ने ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की जरूरत और नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक रूपांतरणकारी ईंधन के रूप में इसकी भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने विकासशील देशों में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने वाली भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए वैश्विक दक्षिण से एकजुट मोर्चे की जरूरत को रेखांकित किया। इस वार्ता ने भारत के प्राकृतिक गैस नियामक व बुनियादी ढांचे के विकास, विशेष रूप से विश्वसनीय और सस्ती स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए समग्र बुनियादी ढांचे के विकास व शहरी गैस वितरण क्षेत्र, को रेखांकित किया।

इसमें उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों ने परस्पर जुड़े गैस और बिजली ग्रिड के माध्यम से दक्षिण व दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच एक क्षेत्रीय स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा की जरूरत होने की पैरवी की। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामकों का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने विशेषज्ञता के एक समूह के रूप में कार्य किया है, जो विभिन्न हितधारकों को नेटवर्क बनाने, ज्ञान का आदान-प्रदान करने और प्राकृतिक गैस क्षेत्र के विकास के भविष्य को आकार देने के लिए साझेदारी बनाने का अवसर प्रदान करता है।

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खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने बुडापेस्ट को शतरंज ओलंपियाड मशाल सौंपी

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शतरंज रणनीतिक गहराई और दार्शनिक ज्ञान का प्रतिबिंब है: श्री अनुराग सिंह ठाकुर 

केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने शतरंज ओलंपियाड के 45वें संस्करण के आधिकारिक मेजबान बुडापेस्ट, हंगरी को आज नई दिल्ली में शतरंज ओलंपियाड मशाल सौंपी।
हैंडऑफ की रस्‍म मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में संपन्‍न हुई, जहां श्री ठाकुर ने एफआईडीई के अध्‍यक्ष और बुडापेस्ट को ओलंपियाड मशाल सौंपने से पहले भारतीय ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद के साथ एफआईडीई अध्यक्ष, अरकडी ड्वोर्कोविच और हंगेरियन ग्रैंड मास्टर जुडिट पोल्गर के साथ शतरंज की एक दोस्ताना बाजी भी खेली।

 

कार्यक्रम के दौरान श्री ठाकुर ने कहा, “मुझे खुशी है कि कुछ साल पहले हमने जो फैसला किया था (शतरंज ओलंपियाड मशाल रिले का) वह वास्तव में संपन्‍न हुआ और शतरंज ओलंपियाड के लिए मशाल के हैंडऑफ की रस्‍म निभाने हेतु मैं यहां मौजूद हूं।”
उन्होंने कहा, “शतरंज एक बौद्धिक विरासत है, जो संभवत: भारत ने दुनिया को प्रदान की है, और यह केवल खेल मात्र नहीं है, बल्कि रणनीतिक गहराई और दार्शनिक ज्ञान का प्रतिबिंब है। यह शानदार खेल न केवल दिमाग को तेज करता है, बल्कि धैर्य और लचीलेपन का महत्‍वपूर्ण सबक भी सिखाता है और व्यक्ति को रणनीतिक महारत की बौद्धिक तलाश के मार्ग पर ले जाता है।”
शतरंज ओलंपियाड का 44वां संस्करण 2022 में चेन्नई में आयोजित किया गया था। उस समय इस वैश्विक आयोजन में 2500 से अधिक खिलाड़ियों और 7000 से अधिक ने भाग लिया था। एफआईडीई शतरंज ओलंपियाड का अगला संस्करण अब इस साल हंगरी के बुडापेस्ट में होगा, जिसकी आधिकारिक घोषणा इस साल की शुरुआत में की गई थी।
दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में 19 जून, 2022 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा एक समारोह में प्रथम शतरंज ओलंपियाड मशाल रिले की शुरुआत की गई।

काव्य जगत पर छाया बसंत

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उमेश कुमार साहू – विभूति फीचर्स
ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति का सुंदर स्वरूप निखर उठता है। पतझड़ के पश्चात पेड़ पौधे नई-नई कोंपलों, फूलों से आच्छादित हो जाते हैं। धरती सरसों के फूलों की बासंती चादर ओढ़कर श्रृंगार करती है। विभिन्न प्रकार के पुष्पों की मनमोहक छटा के साथ पलाश के रंग तथा कोयल की कूक सर्वत्र छा जाती है। बसंत पुष्पों के माध्यम से प्रसन्नता व आनंद का उपहार सौंपता है। बसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति सजीव, जीवंत एवं चैतन्यमय हो उठती है। बसंती बयार में प्रकृति का रूप ‘नवगति-नवलय-तालछंद नवÓ से समन्वित हो जाता है। प्रकृति कुसुम-कलिकाओं की सुगंध से गमक उठती है। आम के बौर वातावरण को सुरभित कर देते हैं। प्रकृति के इस परिवेश में मानव भी उसके साथ थिरक उठता है, तदाकार हो जाता है।
वास्तव में बसंत प्रकृति और मानव मन की उमंग का प्रतीक है। विज्ञजनों  के अनुसार बसंत प्रकृति और मानव के संवेदनशील संबंधों का साकार रूप है। जब-जब बसंत आता है, कवियों में नवोन्मेष का संचार हो जाता है। अश्वघोष, कालिदास, माघ और भारवि जैसे प्रख्यात संस्कृत कवियों से लेकर वर्तमान युग के कवियों का श्रंृगार है – ‘बसंतÓ। ऋतुराज बसंत के बारे में सुमित्रानंदन पंत ने इस तरह अपने उद्गार व्यक्त किये है –
लो चित्रशलय सी पंख खोल,
  उडऩे को है कुसुमित घाटी,
यह है अल्मोड़े का बसंत,
  खिल पड़ी निखिल पर्वत घाटी।
महाकवि सेनापति को टेसू के फूल इतने भाये कि उस पर ही एक छंद उतर आया, उनके मानस में और यह रंग फागुन तक बरसता रहता है।
लाल-लाल टेसू फूलि रहे हैं बिसाल संग
श्याम रंग भेटि मनौ कसिकै मिलाएं हैं।
तहां मधु काज आय बैठे मधुकर पुंज
मलय पवन उपवन बन धाये हैं।
‘सेनापतिÓ माधव महीना में पलाश तरू
देखि-देखि भाव-कविता के मन आए हैं।
आधे-अन सुलगि-सुलगि रहे आधे मनौ
बिरही दहन काम क्वैला परचाए हैं।
बसंत के संदर्भ में महाकवि कालीदास ने इस ऋतु का उनके प्रसिद्घ ग्रंथ ऋतु संहार में कितना सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है देखें –
‘द्रुमा सपुष्पा सलिलं सपद्यं स्त्रय: सकामा पवन: सुगंधि:।
सुखा: प्रदोषा दिवसाश्च रम्या: सर्वप्रिये चारूतरं बसंते।Ó
अर्थात् ‘हे प्रिये! बसंत ऋतु में फूलों से लदे हुए पेड़, कमलों से भरा हुआ सरोवर, कामयुक्त नारियां, सुगंधित पवन, सुरभित मंजरियों का मेला लगता है और भंवरों की मधुर गुंजार होने लगती है।Ó
बसंत का मद कवि मतिराम पर ऐसा चढ़ा कि उन्होंने भी उमंग में आकर पद रच डाला। देखें-
मलय समीर लगौ चलन सुगंध सौ सौरो,
पथिकन कोने परदेसन तै आवने।
‘मतिराम’ सुकवि समूहीन सुमन फूले,
कोकिल-मधुप लागे बोलन सुहावने।
आयो है बसंत, भए पल्लवित जलजात,
तुम लागे चालिबब की चरचा चलावने।
रावरी तिया को तरवर, सरवरन के,
किसलै-कमल वहै हैं बारक बिछावने।
कबीर दास ने बीजक में बसंती राग को बड़े ही सरस एवं सहज ढंग से गाया है-
‘जाके बारहमास बसंत हो,
ताके परमारथ बूझे विरला कोय,
मैं आपऊं मेस्तर मिलन तोहि,
रितु वसंत पहिरावहु मोहि।‘
हरिण केशरी नाम से विख्यात सम्राट हर्षवर्धन ने भी बसंत का गुणगान किया है। बसंत को हर कवि ने स्वीकारा है और अपनी अभिव्यक्ति दी है। इसे पुष्प समय, पुष्प मास, ऋतुराज, पिकानंद, कामसखा, फलु, मधु माधव, मधु मास के नामों से भी चित्रित किया गया है। बसंत की इसी अपूर्व महत्ता के कारण ही गीताकार श्रीकृष्ण ने स्वयं को ऋतुओं में श्रेष्ठï बसंत कहा है।
कवि किसी भी युग में हुए हों, ऋतुओं के प्रति उनका आकर्षण सनातन एवं शाश्वत ही होता है। यदि कवि ऋतुओं को न गाये, तो लगता है कि उसकी काव्य प्रतिभा अपूर्ण ही है। हिन्दी के अनेक कवियों ने बसंत को खूब ढंग से और उसके रंग में सराबोर होकर गाया और गुनगुनाया है। उनके इन ललित-पदों में बसंत की जैसे छटा ही उतर आई हो।
धन्य हैं वे कवि जिन्होंने अपनी कविता में बसंत राग का ताना-बाना बुना। इतना ही नहीं इन्होंने काव्य के संयोग व वियोग के पक्ष को भी खूब संजोया है। इन गीतों में वास्तविकता और कल्पना का बड़ा ही सजीव गुंफन किया गया है। बसंत के इन गीतों को, संगीत के ताल-लय में गाने का आनंद ही दूसरा है। सरदार नामक कवि ने तो ऋतुराज बसंत की उपमा राजा से भी बढ़कर महाराजा से की है। इस काव्य प्रतिभा को जरा निरखे तो सही-
संग की सहेली रही पूजत अकेली शिव,
तीन जमुना के बीर चमक चपाई है।
हों तो आई भागत डरत हियरा में धरैं,
तेरे सोच करी मोहिं सोचित सवाई है।
बंचि है वियोगी जोगि जानि सरदार ऐसी,
कंठ से कलित कूक कोकिल कढ़ाई है।
विविध समाज में दराज सी आवाज होति,
आज महाराज ऋतुराज की अवाई है।
क्या ऊंचे सिंहासन पर बैठाया है बसंत को। यह एक स्वीकारणीय तथ्य है कि कोई भी ऋतु हो, मनुष्य का संबंध उससे सनातन काल से चला आ रहा है। सचमुच बसंत तुम… कामदेव के पुत्र हो। बहुत ही सौंदर्यमय है तुम्हारी छवि। (विभूति फीचर्स)

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय – कृषि पंजीकरण हासिल करने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया गया

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तटीय एक्वाकल्चर प्राधिकरण, चेन्नई ने आज तमिलनाडु के नागपट्टिनम से तटीय एक्वाकल्चर फार्म पंजीकरण संबंधी राष्ट्रीय अभियान को झंडी दिखाई

New  Delhi – भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के अंतर्गत तटीय एक्वाकल्चर प्राधिकरण (सीएए) चेन्नई ने आज (14.02.2024) देश में 100 प्रतिशत कृषि पंजीकरण हासिल करने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है। पंजीकरण की आवश्यकता पर किसानों के बीच जागरूकता पैदा करने का यह पहला अभियान तमिलनाडु के नागपट्टिनम में आयोजित किया गया।

यह पहल तटीय एक्वाकल्चर पर प्र‍िंसिपल अधिनियम में किए गए संशोधनों द्वारा समर्थित है, जिसके अंतर्गत स्वामित्व वाली भूमि में स्थित फर्मों को पंजीकृत किया जा सकता है और उन किसानों के लिए नवीनीकरण में देरी को भी माफ किया जा सकता है, जिन्होंने विभिन्न कारणों से अपने पंजीकरण को नवीनीकृत नहीं किया था। अब सरकार ने व्यवसाय करने में आसानी के अंतर्गत लागू पंजीकरण शुल्क का दो गुना भुगतान करके देरी को माफ करने का प्रावधान शामिल किया है। इससे देश भर में 35,000 से अधिक फार्मों को अपने फार्म पंजीकरण के नियमितिकरण करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस अभियान के दौरान किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए स्थानीय भाषा में विवरण पुस्तिका भी वितरित की गई हैं।

सीएए अधिनियम, 2005 की धारा 13 के अनुसार, तटीय एक्वाकल्चर इकाइयों का पंजीकरण न करना एक उल्लंघन है। इस प्राधिकरण का उद्देश्य तटीय पर्यावरण की रक्षा करना और दीर्घकालिक तरीके से निरंतर एक्वाकल्चर का विकास करना है। किसानों का समर्थन करने के लिए यह प्राधिकरण संबंधित राज्य मत्स्य पालन विभागों और एमपीईडीए के साथ मिलकर सभी राज्यों में अभियान आयोजित करने की योजना बना रहा है।

यह जन प्रेरणा कार्यक्रम किसानों के लिए एक “हेल्प-लाइन” के रूप में काम करेगा और इसके परिणामस्वरूप फार्मों के वैधीकरण में तटीय एक्वाकल्चर इकाइयों का 100 प्रतिशत पंजीकरण और नवीनीकरण होगा तथा देश में फार्मों की उपज की ट्रेसबिलिटी की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।

तमिलनाडु के विभिन्न जिलों के किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया और पंजीकरण एवं नवीनीकरण के लिए आवेदन सौंपा तथा मत्स्य पालन और मछुआरा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने भी एकत्र किए गए आवेदन पत्र सीएए अधिकारियों को सौंपे। बैठक में नागपट्टिनम एक्वाकल्चर किसान संघ (एनएएफए) के अध्यक्ष श्री चिदम्बरम, नागपट्टिनम एक्वाकल्चर किसान संघ (एनएएफए) के सचिव श्री शिवशंकर, सीएए के सचिव डॉ. वी. कृप, श्री एलमवालुथि, संयुक्त निदेशक (नागपट्टिनम), मत्स्य पालन और मछुआरा कल्याण विभाग, तमिलनाडु सरकार, श्री नरेश विष्णु तंभाडु, उप निदेशक, एमपीईडीए और एनएसीएसए, सीएए के अधिकारी तथा डॉ. जे.जयललिता मत्स्य पालन विश्वविद्यालय, नागपट्टिनम, तमिलनाडु के कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित थे।

PM MODI Narendra Modi – विश्व सरकार शिखर सम्मेलन 2024 में भाग लिया , “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन”

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New Delhi – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 14 फरवरी 2024 को दुबई में विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लिया। वे संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और दुबई के शासक महामहिम शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के निमंत्रण पर शिखर सम्मेलन में गए है। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में – “भविष्य की सरकारों को आकार देना” विषय पर मुख्य भाषण दिया। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2018 में विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लिया था। इस बार शिखर सम्मेलन में 20 वैश्विक नेताओं की भागीदारी रही इनमें 10 राष्ट्रपति और 10 प्रधानमंत्री शामिल हैं। वैश्विक सभा में 120 से अधिक देशों की सरकारों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने शासन के बदलते स्वरूप पर अपने विचार साझा किये। उन्होंने “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के मंत्र पर आधारित भारत के परिवर्तनकारी सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय अनुभव को साझा करते हुए बताया कि देश ने कल्याण, समावेशिता और स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का लाभ कैसे उठाया, उन्होंने शासन के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण का आह्वान किया। उन्होंने एक समावेशी समाज का लक्ष्य हासिल करने के लिए जन-भागीदारी, अंतिम व्यक्ति तक सुविधाओं की पंहुच और महिलाओं के नेतृत्व पर आधारित विकास पर भारत के फोकस को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि विश्व की परस्पर जुड़ाव की प्रकृति को देखते हुए, सरकारों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग करना चाहिए और एक-दूसरे से सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन का समावेशी, तकनीकी-स्मार्ट, स्वच्छ, पारदर्शी और हरित पर्यावरण को अपनाना समय की मांग है। इस संदर्भ में, उन्होंने बलपूर्वक कहा कि सरकारों को सार्वजनिक सेवा के प्रति अपने दृष्टिकोण में जीवन में सरलता, न्याय में आसानी, गतिशीलता में आसानी, नवाचार में आसानी और व्यापार करने में आसानी को प्राथमिकता देनी चाहिए। जलवायु परिवर्तन कार्रवाई के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता पर उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे एक टिकाऊ दुनिया के निर्माण के लिए मिशन लाईफ (पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली) में शामिल हो।
प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष जी-20 की अध्यक्षता के रूप में दुनिया के समक्ष भारत की विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों पर निभाई गई नेतृत्वकारी भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। इस संदर्भ में, उन्होंने ग्लोबल साउथ के सामने आने वाली विकास संबंधी चिंताओं को वैश्विक चर्चा के केंद्र में लाने के लिए भारत के प्रयासों पर प्रकाश डाला। बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार प्रकिया का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें निर्णय लेते समय ग्लोबल साउथ की कठिनाईयों और आवाज को उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत “विश्व बंधु” के रूप में वैश्विक प्रगति में योगदान देना जारी रखेगा।

 

 

 

Cow Smuggling in : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से गाय तस्करी का बड़ा मामला

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Cow Smuggling in : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से गाय तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है। जिसमें बताया गया है कि रायपुर के कुम्हारी नाका पर गौ सेवकों ने गायों से भरा एक कंटेनर पकड़ा जिसमें लगभग 80 गायें रखी हुई थीं.आपको बता दें इसमें कम से कम 10 मवेशियों (गाय) की मौत हो गई थी. इसके साथ ही कई मवेशियों के पैर टूटी हुई हालत में पाए गए हैं.
सेवकों ने पकड़ा कंटेनर :
मिली जानकारी के मुताबिक कंटेनर की पहचान छुपाने के लिए आरोपियों के द्वारा फर्जी नंबर प्लेट लगाई थी. इस दौरान जैसे ही गौ सेवकों ने कंटेनर को पकड़ लिया तब उन्होंने मवेशियों को जरवाय स्थित गौठान में ले गए। इस घटना की सूचना मिलते ही वहां भारी संख्या में पुलिस और गौ सेवक मौजूद पहुंच गए.जानकारी के मुताबिक ये मामला अभी कुम्हारी पुलिस संभाल रही है . 

सिरोही News – गाय के बछडे़ का धड़ से अलग हुआ सिर मिला, गौ सेवकों में रोष

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शिवगंज (सिरोही)। शहर के गोकुलवाड़ी क्षेत्र में सड़क किनारे गाय के बछडे का धड़ से अलग हुआ सिर मिलने से सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे गोसेवकों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पशु चिकित्सकों की टीम से बछडे के सिर का पोस्टमार्टम करवाया है। ताकि यह जानकारी मिल सके कि यह सिर धड़ से किसी ने अलग किया है या पशुओं ने नौंचा है।

जानकारी के अनुसार मंगलवार को गौसेवक महिपाल रावल को सूचना मिली कि गोकुलवाडी से आखरिया की तरफ जाने वाले मार्ग पर सड़क किनारे एक बछडे़ का सिर पड़ा हुआ है। सूचना मिलने पर एनिमल हैल्प रेस्क्यूअर मौके पर पहुंचे तथा इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलने पर पुलिस निरीक्षक अचलदान मय पुलिस दल मौके पर पहुंचे तथा मौका मुआयना करने के बाद पशु चिकित्सक को मौके पर बुलवा जांच करवाई गई।

तत्पश्चात पुलिस बछडे़ के सिर को कब्जे में कर पशु चिकित्सालय ले गई। जहां पशु चिकित्सक डॉ. गौतम राजपुरोहित, डॉ. कमलेश सुथार व डॉ. पाताराम चौधरी की मेडिकल टीम से पोस्टमार्टम करवाया गया। इस बीच जानकारी मिलने पर तहसीलदार पेमाराम पुनिया भी पशु चिकित्सालय पहुंचे तथा पुलिस से जानकारी लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया।

बहरहाल, बछडे़ के सिर का पोस्टमार्टम करने के बाद उसे गोसेवकों को सुपुर्द कर उसका रीति रिवाज अनुसार अंतिम संस्कार करवाया गया। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट गोसेवकों को अभी तक नहीं मिल पाई है। इस घटना से गौसेवकों में भी रोष व्याप्त है। गोसेवकों का कहना है कि यदि बछडे को श्वानों अथवा किसी जानवर ने नौंचा है तो काफी ढूंढने के बाद भी उसका धड़ क्यों नहीं मिला। हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।