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दादा साहब अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने पर रानी मुखर्जी ने जताया आभार

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मुंबई। बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री रानी मुखर्जी, जिन्होंने मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे में अपने शानदार अभिनय से काफी आलोचनात्मक और व्यावसायिक प्रशंसा हासिल की है, उन्होंने हाल ही में आयोजित दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता।

पुरस्कार प्राप्त करने पर, रानी ने मंच पर कहा, “मुझे लगता है कि हमारे देश के बाहर भारतीयों पर क्या बीतती है, उसके संदर्भ में एमसीवीएन एक महत्वपूर्ण फिल्म है। जब यह कहानी मेरे पास आई, तो मैं यह जानकर हैरान रह गई कि एक मां के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया।” और कैसे उसके बच्चों को उससे छीन लिया गया। एक माँ के रूप में, इस कहानी ने मुझे सचमुच छू लिया और मुझे लगा कि यह कहानी हर किसी को बतानी चाहिए और मैंने फिल्म की।
उन्होंने आगे कहा, “जब मैंने इस फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी और जब मुझे इस कहानी के बारे में पता चला तो मेरे अंदर बहुत उत्साह था। जब मैं शूटिंग कर रही थी तो मेरे दिमाग में बस एक ही बात थी कि मुझे अपनी क्षमता से ज्यादा देना है।” 100% ताकि सागरिका की इस कहानी को बड़े पर्दे पर लाया जा सके और इसे वास्तविक बनाया जा सके और इसे इस तरह से दिखाया जा सके कि लोग मुझे भूल जाएं लेकिन मुझमें देविका चटर्जी को देखें। इसलिए मेरे लिए किरदार बनना महत्वपूर्ण था, और मैं बहुत खुश और आभारी हूं कि दर्शकों ने इसे पसंद किया और उन्होंने एमसीवीएन को इतना प्यार दिया, मैं इस पुरस्कार के लिए वास्तव में आभारी और बहुत विनम्र हूं। मुझे यह सम्मान देने के लिए दादा साहेब फाल्के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को धन्यवाद। यह हमेशा सच्चा होता है एक पुरस्कार जीतना विशेष है, खासकर जब दर्शकों को आपका काम पसंद आता है और वे आपको पुरस्कार देते हैं, पहला बॉक्स ऑफिस के माध्यम से, और दूसरा फिल्म के लिए इन अद्भुत छोटे स्मृति चिन्हों के माध्यम से।
रानी ने अपनी फिल्म मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे के लिए पुरस्कार जीता, जहां उन्होंने एक उत्साही महिला की भूमिका निभाई, जो अपने बच्चों को वापस पाने के लिए एक देश से भिड़ती है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज़बरदस्त हिट रही और इसने यह विश्वास वापस ला दिया कि महामारी के बाद की दुनिया में कंटेंट सिनेमा लोगों को सिनेमाघरों तक खींच सकता है। दुनिया भर में बड़े पर्दे पर रानी का जलवा कायम है; यह प्रतिष्ठित सम्मान अब तक के सबसे प्रभावशाली और प्रशंसित अभिनेत्रीओं में से एक के रूप में उनकी स्थिति को और मजबूत करता है।
चमचमाती पारदर्शी काली साड़ी में रेड कार्पेट पर चलते हुए रानी बेहद खूबसूरत लग रही थीं। इस खूबसूरत अभिनेत्री के साथ सुपरस्टार शाहरुख खान भी शामिल हुए और किंग खान और बॉलीवुड क्वीन ने एक साथ अपनी तस्वीरों से इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि 2023 में आयोजित आईएफएफएम और जागरण फिल्म फेस्टिवल के बाद रानी को एमसीवीएन के लिए यह तीसरा पुरस्कार मिला है।

तब्बू, करीना कपूर खान और कृति सेनन स्टारर फिल्म ‘क्रू’ का फर्स्ट लुक पोस्टर हुआ रिलीज

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एकता कपूर की अपकमिंग कमर्शियल फैमिली एंटरटेनर ‘क्रू’ को लेकर दर्शकों में खूब एक्साइटमेंट है। इस फिल्म में तब्बू, करीना कपूर खान और कृति सेनन हैं। कुछ दिनों पहले फिल्म की रिलीज डेट रिवील कर ऑडियंस को एक्साइट किया जा चुका है और अब मेकर्स फिल्म के पहले पोस्टर के साथ सामने आए हैं जिसमें फिल्म की लीड एक्ट्रेसेज ने अपना जादू बिखेरा हैं।

इस पोस्टर पर तब्बू, करीना कपूर खान और कृति सेनन बैडएस एयर होस्टेसेज के रूप में अपनी ग्लैमरस प्रेजेंस से सीधा लोगों के दिलों में लैंड कर जाती है और एक मसालेदार एंटरटेनमेंट का वादा करती हैं। पहली बार एक साथ आते हुए, ये पावरफुल एक्टर्स स्क्रीन पर धमाल मचाने की गारंटी देती हैं। इस पोस्टर को देखते हुए कह सकते है कि ये फिल्म एक क्रेजी फ्लाइट एडवेंचर साबित होने वाली है।

फिल्म से तब्बू, करीना कपूर खान और कृति सेनन का ये फर्स्ट-लुक पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मेकर्स ने लिखा,

https://www.instagram.com/p/C3rsNXQArj3/?igsh=MWp3bGt0Y2xjenNzNg==

https://www.instagram.com/p/C3rsTm6gezr/?igsh=MWdwdnE1aTk2NXF5MA==

https://www.instagram.com/p/C3rsYurgbmu/?igsh=MWsyNzhsZ3F0c3o4Nw==

वैसे जब से निर्माताओं ने मोशन पोस्टर के साथ ‘क्रू’ की रिलीज डेट का खुलासा किया है, तब से दर्शक फिल्म की और ज्यादा झलक देखने के लिए उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। और अब, पहले पोस्टर के आने के साथ दर्शकों की चाहत और बढ़ गई है।

राजेश ए कृष्णन द्वारा निर्देशित बालाजी टेलीफिल्म्स और अनिल कपूर फिल्म एंड कम्युनिकेशंस नेटवर्क की यह बहुप्रतीक्षित रिलीज 29 मार्च, 2024 को इस गुड फ्राइडे वीकेंड में सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।

फिल्म समीक्षा – आर्टिकल 370

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रेटिंग – 4 स्टार

निर्माता आदित्य धर और निर्देशक आदित्य सुहास जाम्भले की फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है। आर्टिकल 370 फिल्म एक रहस्य और रोमांच से भरी सत्य घटना पर आधारित फिल्म है। फिल्म की कहानी कई अध्याय में दिखाई गई है जो सभी कहानी को एक सिरे से जोड़े रखती है। हर अध्याय नया रहस्य और रोमांच पैदा करता है और दर्शकों को बांधे रखता है। यह यह मात्र एक फिल्म ही नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक घटना का वास्तविक दर्शन है और कुछ अदृश्य पन्ने जो भारत की जनता से छुपाए गए उनको भी विस्तार से और सबूतों के साथ उजागर करती है। आर्टिकल 370 भारतीय संविधान का हिस्सा था जो जम्मू कश्मीर पर पिछले 70 सालों से लागू था। इस आर्टिकल से जम्मू कश्मीर को मुक्त कराने के लिए वर्तमान सरकार ने क्या कदम उठाए और इसके लिए उन्हें किन दिक्कतों का सामना करना पड़ा यह पूरी कहानी को लघु रूप में इस फिल्म के माध्यम से दिखाने की कोशिश की गई है। यह मुख्य रूप से दो महिला सूत्रधारों के कंधों पर चलती है जिसमें कश्मीर की देशभक्त युवा लोकल फील्ड एजेंट जूनी हकसर (यामी गौतम धर) और दूसरी राजेश्वरी स्वामीनाथन (प्रियामणि) है जो प्रधानमंत्री के ऑफिस में टॉप सीक्रेट मिशन में काम कर रही है।
कहानी की शुरुआत में ही राजेश्वरी एक फ़ाइल लेकर गृहमंत्री के कार्यालय में पहुंचती है वहीं दूसरी ओर जूनी कश्मीर के एक भटके हुए नौजवान या कहिए आतंकवादी बुरहान वानी को एक मुठभेड़ में मार गिराती है। कश्मीर में तैनात कुछ देश के गद्दार जो लालचवश पाकिस्तान से हाथ मिलाकर कश्मीर को नर्क की आग में झोंक दिए होते हैं। वहीं अलगाववादी नेताओं के इशारे पर लोग पत्थरबाजी करते हैं। लेकिन जूनी अपनी सूझबूझ से उनके ठिकाने का पता लगाकर उसे पकड़ती है जिसके लिए वह सेना के जवान यश चौहान और उसकी टीम की मदद लेती है। इस कार्य में जूनी के उच्च अधिकारी उस अलगाववादी नेता को पकड़ने की अनुमति नहीं देते इसके बावजूद भी वह यह कार्य करती है। कार्य सफल होता है किंतु अपने अधिकारी की बात ना मानकर जूनी को एक बड़ा खामियाजा उठाना पड़ता है उसे कश्मीर से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया जाता है। इधर पीएमओ ऑफिस में एक बड़े गुप्त फैसले पर कार्य किया जा रहा है जिसके लिए रूपरेखा बनाया जा चुका है। इसी बीच राजेश्वरी को जूनी द्वारा किये कश्मीर में हुए कार्य का पता चलता है और वह जूनी से संपर्क करती है उसे आस्वासन देती है कि वह एनआईए संगठन में कार्य करेगी अपनी खुद की टीम बनाकर कश्मीर में अलगाववादी नेताओं को पकड़ने और कश्मीर में हो रही घटनाओं को रोकने में सहायता करेगी। उसके ऊपर किसी भी प्रकार का उच्च अधिकारियों का दबाव नहीं होगा। सारा कार्य वह पीएम ऑफिस की देखरेख में करेगी और उन्हें रिपोर्ट करेगी। जूनी यह बात मानकर अपने कार्य में लग जाती है और इधर कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाये जाने के लिए क्या नियम और तरीके अपनाए जाए इस बावत जानकारियां इकट्ठी करने और आर्टिकल को कैसे रद्द करें इस बावत तैयारियां प्रारम्भ हो जाती है। इसके यह भी सुनिश्चित करना जरूरी था कि कश्मीर की अवाम को इससे कोई जानमाल का नुकसान ना उठाना पड़े। पूरी फिल्म आर्टिकल 370 को जम्मू कश्मीर से कैसे हटाया जाए और सभी विधानसभाओं में कैसे पारित हो इसी के इर्दगिर्द घूमती है। वैसे 5 अगस्त 2019 में वास्तव में जब जम्मू कश्मीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिकल 370 कैसे हटाया था लगभग पूरे भारत की जनता यह जानती है और अब कश्मीर के हालात कैसे हैं यह भी सभी को ज्ञात है। लेकिन लोगों को जो नहीं मालूम वह यह है कि इसे लागू करने के पीछे जो लोगों की मेहनत है। आर्टिकल 370 के प्रावधान सब जानते हैं पर लोग यह नहीं जानते थे कि यही प्रावधान कश्मीर को भारत से जुदा कर रहा था। इस फिल्म के निर्माण में लेखक और निर्देशक ने बड़ी बारीकी से कार्य किया है। किसी एक धर्म की आड़ नहीं ली गई है फिल्म की सच्चाई को दिखाने के लिए। फिल्म के कई संवाद और दृश्य वास्तविक है।
फिल्म के कलाकारों का अभिनय बहुत ही सराहनीय है। यामी गौतम, प्रियामणि, अरुण गोविल और किरण करमाकर का अभिनय प्रभावशाली है। कई दृश्यों को देख आपको गर्व भी महसूस होगा और आप भावना में भी बह सकते हैं। कई नए रहस्य जानकर आप चौंक भी जाएंगे कि कैसे जनता को हमारे नेता भ्रमित कर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकते हैं। फिल्म में कुछ कमियां भी है लेकिन फिल्म की पटकथा सारी कमियों पर पर्दा डालने के लिए काफी है। फिल्म का निर्देशन चुस्त है जो दर्शकों को आरंभ से अंत तक बांधे रखता है।
देखा जाए तो यह फिल्म भारत की हर जनता और विद्यार्थियों को देखना चाहिए। फिल्म की पटकथा में महिला पत्रों के बजाए पुरुष पात्र लिए जा सकते थे किंतु निर्देशक ने महिला पात्रों का चयन कर फिल्म को गति देने के साथ नारी शक्ति को सम्मानित किया है।
एक सोची समझी राजनीतिक साजिश के अंतर्गत भारत देश के दुर्भाग्य को सटीक ढंग से इस फिल्म में निर्देशक ने दर्शाया है। आर्टिकल (अनुच्छेद) 370 हटाए जाने के बाद देश भर में जिस प्रकार से उत्सव मनाया गया इस फिल्म को देखकर फिर लोग आनंदित हो उठेंगे।

– संतोष साहू

मानव -वन्यजीव संघर्ष रोकने हेतु उठाये जाएंगे प्रभावी कदम -पुष्कर सिंह धामी

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देहरादून,23 फरवरी, राज्य में मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है।
इस प्रपेक्ष्य में उन्होंने गुलदार और बाघों के हमले की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु वन सचिव एवं वन्यजीव प्रतिपालक को प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा जाए और प्रशिक्षित वनकर्मियों की क्विक रिस्पांस टीम गठित कर उसे तत्काल मौके पर भेजा जाए। जंगली जानवरों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए गांव और जंगल की सीमा पर सोलर फेंसिंग (तार बाड़) लगाई जाए।
मुख्यमंत्री धामी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गत समय से यह देखने में आ रहा है कि राज्य के अलग- अलग हिस्सों में वन्य जीवों के हमलों को रोकने में वन विभाग बेबस हो रहा है। इसे दृष्टिगत रखते हुए इन घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालीन योजना बनाई जाए। प्रशिक्षित पशु चिकित्सक मानव -वन्यजीव संघर्ष की दृष्टि से इलाक़ों में चौबीस घंटे तैनात रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर गुलदार और बाघों से भरे पड़े हैं। अब वहां अन्य पकड़े गए वन्य जीवों को रखने की जगह नहीं है, लिहाजा इसके लिए भी तुरंत कार्य योजना बनाई जाए।
यहां बता दें कि सीएम धामी ने गत माह वरिष्ठ अधिकारियों की आपात बैठक लेकर वन्य जीव प्रतिपालक को निर्देश दिए थे, कि राज्य के रेस्क्यू सेंटर के गुलदार और बाघों को दूसरे राज्यों के चिड़ियाघर/ वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर में शिफ्ट करने के लिए वहां के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करें, ताकि यह समस्या हल हो सके। इस दिशा में अभी तक कोई अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर मुख्यमंत्री ने आज शुक्रवार को पुनः इस सम्बंध में तत्काल कार्रवाई के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संघर्ष की घटना की स्थिति में स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है। इस मामले में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जिम्मेदार अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि जंगलों से सटे गांवों में शत प्रतिशत शौचालय और गैस कनेक्शन जैसे आवश्यक सुविधा दिए जाने की योजना बनाई जाए,जिससे नागरिकों को बाहर जंगलों पर निर्भर न होना पड़े ।

जांत-पांत और ऊंच नीच के विरोधी थे संत रविदास

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इंजी. अतिवीर जैन पराग –
आज जबकि हमारे देश के कई नेता देश में जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं और नागरिकों को जातियों में बांटकर आपस में लडवाकर उनके वोटो  के सहारे सत्ता पाना चाहते हैं।  ऐसे में संत रविदास जी की का महत्व और बढ़ जाता है। जो जात-पांत और ऊंच-नीच के घोर विरोधी थे। रविदास ने अपने साहित्यिक पदों के माध्यम से सामाजिक एकता पर ज़ोर दिया और मानवतावादी मूल्यों की नींव रखी। आपने कहा कि व्यक्ति अपने कर्म से नीच होता है ना की जन्म से। संत रविदास जी कहते थे-
जाति-जाति में जाति है, जो केतन के पात। रैदास मनुष न जुड़ सके, जब तक जाति न जात।  अर्थात् समाज में जातियां केले के पेड़ के तने के समान है जिसको जितना ही छीलो पेड़ खत्म हो जाता है और कुछ नहीं मिलता। इसी प्रकार समाज में जाति-जाति करने से कुछ नहीं मिलेगा इंसान खत्म हो जाएगा। रविदास जी ने कहा – जनमजात मत पूछिए ,का जात अरु पात। रैदास पुत सब प्रभु के , कोए नहिं जात कुजात। किसी की जाति नहीं पूछनी चाहिए क्योंकि संसार में कोई जाति पाँति नहीं है। सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान है। और कोई भी जाति बुरी जाति नहीं है। रविदास जी ने कहा मनुष्य किसी भी जाति में जन्म लेने से नीच या छोटा नहीं हो जाता। मनुष्य अपने कर्मों से पहचाना जाता है। और जो नीच कर्म करता है वही नीच होता है। रविदास जन्म के कारने,होत न कोई नीच। नर कुं नीच करि डारि है, ओछ कर्म की कीच।
रविदास सभी प्रकार के भेदभाव को निरर्थक बताते थे और सभी को प्रेम पूर्वक मिलजुल कर रहने का उपदेश देते थे। आपका मानना था कि राम, कृष्ण, करीम ,राघव सब एक ही परमेश्वर के अलग-अलग नाम है।  वेद, कुरान, पुराण, सभी में एक ही परमेश्वर का जिक्र हैं। कृष्ण, करीम, राम, हरी, राघव, जब लग एक न पेखा।  वेद, कतेब, कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।
रविदास कहते थे भक्ति में ही शक्ति है। और जो मनुष्य दिन और रात राम का नाम जपता है।   राम के समान हो जाता है। और उसमें कोई भी क्रोध और काम भावना नहीं रहती। रैदास कहे जाके हदे, रहे रैन दिन राम।
सो भगता भगभंत सम , क्रोध न व्यापे काम।
आपका कहना था कि अभिमान को त्याग कर काम करने वाला व्यक्ति जीवन में सफल हो सकता है।  जैसे विशालकाय हाथी शक्कर के दानों को नहीं चुन सकता। जबकि एक लघु पीपलीका यानी चींटी शक्कर के दानों को आराम से चुन लेती है। इसी प्रकार अभिमान और बड़प्पन का भाव त्याग कर विनम्रता पूर्वक आचरण करने वाला मनुष्य ही ईश्वर का भक्त हो सकता है।
रैदास तेरी भक्ति दूरी है, भाग बड़े सो पावे।
तजि अभिमान मेटी आपा पर, पीपीलक  हवे चुनी खावे। 
   एक बार एक पर्व पर उनके पड़ोस के लोग गंगा-स्नान के लिए जा रहे थे। रविदास के शिष्य ने भी उनसे गंगा-स्नान चलने के लिए कहा। रैदास ने कहा कि मैंने पहले से ही अपने ग्राहक को जूता देने का वादा कर रखा है। और अब मेरी वहीं प्राथमिक जिम्मेदारी है।  अगर मैं गंगा- स्नान पर चला भी गया तो मेरा मन तो इस काम में लगा रहेगा। फिर मुझे पुण्य कैसे मिलेगा? मनुष्य को वही काम करना चाहिए जो उसका अंत:करण करने को तैयार हो। मन सही है तो मेरे कठौती के जल में ही गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त हो जाएगा। अर्थात मन चंगा तो कठौती में गंगा (कठौती यानी एक बर्तन जिसमें चमड़े को भिगोया जाता है।)
 15वीं शताब्दी में जब देश में जात-पात, ऊंच- नीच और धार्मिक भेदभाव अपने चरम पर था ,संत रविदास का जन्म हुआ। रविदास जी को कबीर ने संत रविदास कहा। इन्हें संत शिरोमणि, सतगुरु की उपाधि दी गई।
रविदास जी एक महान संत, दर्शन शास्त्री, समाज सुधारक और ईश्वर के उपासक थे।  आपके 40 पदों को पांचवें सिख धर्म गुरु अर्जनदेव ने सिखों के पवित्र धर्म ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया था। रविदास जी ने जात-पात का, ऊंच नीच, छुआछूत, भेदभाव का विरोध किया और मानव को आत्मज्ञान ग्रहण कर आत्मकल्याण का मार्ग बताया। आपकी कविताओं में अवधी राजस्थानी खड़ी बोली उर्दू फारसी के शब्दों का मिश्रण है।
रविदास जी का जन्म सन 1377 में सीरगोवर्धन गांव में वाराणसी जिले के अंतर्गत हुआ।  आपके जन्म के बारे में कई मतभेद है कुछ लोग इनका जन्म 1399 में मानते हैं तो कुछ 1414  में। पर आपका सामाजिक कार्यकाल 1450 से 1520 के बीच रहा। आपकी मृत्यु भी आपके जन्म की तरह विवादित है। और 1528 से 1540 के बीच बताई जाती है। और आयु 120 साल से 150 वर्ष के करीब बतायी जाती है।
आपकी माता का नाम कलसा देवी था। और पिता का नाम संतोषदास रघु था।  आपके पिता पेशे से चर्मकार थे और जूते चप्पल बनाने का काम करते थे। आपकी शादी लोनादेवी से हुई। आपका एक पुत्र विजयदास और पुत्री रविदासिनी हुई। बताया जाता है कि आपका जन्म का दिन रविवार था। इसलिए इनका नाम रविदास रखा गया।
  संत रविदास काशी के स्वामी रामानंदाचार्य के शिष्य थे। संत कबीर उनके समकालीन गुरु भाई थे।  आपके शिष्यों में कृष्णभक्त मीराबाई , चित्तौड़ के राणा सांगा की पत्नी झाला रानी, सिकंदर लोदी, राजा पीपा, राजा नागरमल, आदि अन्य कई शासक राजा थे। चित्तौड़ के किले में भी संत रविदास की छतरी बनी हुई है।
वाराणसी में गुरु रविदास स्मारक और पार्क बना हुआ है। वही पर गुरु रविदास घाट हैं।
रविदास ने कहा ईश्वर ने इंसान बनाया है। ना कि इंसान ने ईश्वर को बनाया है।  और जब ईश्वर ने इंसान बनाया है और सभी इंसान एक समान बनाए हैं। तो सभी का इस पृथ्वी पर समान अधिकार है। संत रविदास जयंती के इस शुभ अवसर पर हम सब सकंल्प ले की समाज से  जात-पात का भेदभाव मिटाएंगे ऊँच-नीच को दूर करेंगे गरीबी को मिटाएगे एक दूसरे का सम्मान करेंगे यही रविदास जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगीं। (विनायक फीचर्स)

एक्सिकॉम टेली-सिस्टम्स लिमिटेड का आईपीओ 27 फरवरी को खुलेगा

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मुंबई (अनिल बेदाग ) : एक्सिकॉम टेली-सिस्टम्स लिमिटेड (ईटीएसएल) 27 फरवरी, 2024 को इक्विटी शेयरों की अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश के संबंध में अपनी बोली/प्रस्ताव खोलेगी। कुल ऑफर आकार में रुपए 3,290 मिलियन रुपए 329 करोड़ (“फ्रेश इश्यू”) तक के इक्विटी शेयरों का ताज़ा इश्यू और  7,042,200 इक्विटी शेयरों तक की बिक्री की पेशकश शामिल है। ऑफर का प्राइस बैंड 135 से 142 रुपए प्रति इक्विटी शेयर तय किया गया है। बोली न्यूनतम 100 इक्विटी शेयरों के लिए और उसके बाद 100 इक्विटी शेयरों के गुणकों में लगाई जा सकती है। एंकर निवेशक बोली की तारीख सोमवार, 26 जनवरी, 2024 होगी। बोली/प्रस्ताव सदस्यता के लिए मंगलवार, 27 फरवरी, 2024 को खुलेगी और गुरुवार, 29 फरवरी, 2024 को बंद होगी।

संगीतकार इस्माइल दरबार ने ‘मिस एंड मिसेज इंडिया एंड नारी शक्ति सम्मान 2024’ का पोस्टर किया लॉन्च

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मुम्बई। साल भर पुरस्कार समारोह के आयोजन में व्यस्त रहने वाले कृष्णा चौहान आगामी 15 मार्च 2024 को महिला दिवस के उपलक्ष्य पर ‘मिस एंड मिसेज इंडिया एंड नारी शक्ति सम्मान 2024’ का आयोजन मुम्बई महानगर के प्रसिद्ध उपनगर अंधेरी पश्चिम स्थित मेयर हॉल में करने जा रहे हैं। हम दिल दे चुके सनम और देवदास जैसी सुपरहिट फिल्मों के संगीतकार इस्माइल दरबार ने मिस एंड मिसेज इंडिया एंड नारी शक्ति सम्मान 2024 का पोस्टर लॉन्च किया।

केसीएफ प्रस्तुत इस पुरस्कार समारोह में उन महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने समाज सेवा और मानव सेवा का उल्लेखनीय कार्य किया है। साथ ही अपनी कला और व्यक्तित्व का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए समाज को नई दिशा प्रदान की हैं।
कृष्णा चौहान द्वारा आयोजित अवार्ड समारोह में कई हस्तियां मौजूद होंगी। जिनमें इस्माइल दरबार, सोमा घोष, सुजाता मेहता, उपासना सिंह,
दिलीप सेन, डॉ दीपा नारायण झा, ऋतु पाठक, सुनील पाल, अली खान, एसीपी संजय पाटिल, बीएन तिवारी और योगेश लखानी (ब्राइट एडवरटाइजिंग) का नाम उल्लेखनीय है।
इस अवार्ड समारोह के सीजन 3 को लेकर समर्पित भाव से कृष्णा चौहान तैयारी कर रहे हैं।
कृष्णा चौहान पिछले 20 साल से फिल्म इंडस्ट्री में बतौर फिल्ममेकर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वह सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रहते हैं। कोविड काल के दौरान उन्होंने न सिर्फ जरूरतमंदों को राशन वितरित किया बल्कि भगवतगीता भी लोगों को भेंट किया।
मिस एंड मिसेज इंडिया के ज्यूरी मेम्बर्स होंगे सिंगर डॉ दीपा नारायण झा, निक्की बत्रा, सिंगर ऋतु पाठक और फैशन डिजाइनर डॉ भारती छाबड़िया।
अपने सभी अवार्ड समारोह में समाज सेवकों, बिज़नेसमैन, फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ साथ कृष्णा चौहान कई पत्रकारों, फोटोग्राफर को भी सम्मानित करते हैं।
आपको बता दें कि कृष्णा चौहान अपनी नेक्स्ट हॉरर थ्रिलर फिल्म ‘आत्मा डॉट कॉम’ की शूटिंग भी जल्द शुरू करने जा रहे हैं। इस फिल्म में प्रसिद्ध संगीतकार दिलीप सेन का संगीत होगा।
आपको बता दें कि कृष्णा चौहान अपने जन्मदिन 4 मई 2024 को ‘लीजेंड दादासाहेब फाल्के 2024’ का 5 वीं बार आयोजन करने जा रहे हैं। सिनेमा, टीवी, वेब सीरीज के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

पुण्यतिथि : 23 फरवरी सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति मधुबाला

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अंजनी सक्सेना

ऐसा कहा जाता है कि खुदा जब हुस्न देता है, तो नजाकत आ ही जाती है लेकिन पर्दे की रानी वीनस माने जाने वाली मधुबाला के साथ ऐसा कुछ भी नहीं था। उनके जीवन से जुड़े हर पहलू में आज भी सादगी की महक बरकरार है। मुगल ए आजम, महल, हाफ टिकट, अमर, फागुन, चलती का नाम गाड़ी और हावड़ा ब्रिज जैसी अनेक फिल्मों में अपने सौंदर्य और अभिनय का जलवा बिखेरने वाली मधुबाला ने महज 36 साल की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया था।

मधुबाला ने अपने कैरियर की शुरुआत के केवल चार वर्षों में करीब 24 फिल्मों में काम किया, क्योंकि उन्हें अपनी और परिवार की माली हालत को सुधारना था। जिसके चलते फिल्मों के चयन में उनसे कई गलत फैसले भी हुए। एक अभिनेत्री के रूप में उन्होंने सभी ऊँचाइयों को छुआ और उस समय के सभी मशहूर अभिनेता व अभिनेत्रियों के साथ काम किया। जिसमें अशोक कुमार, राज कपूर, रहमान, प्रदीप कुमार, शम्मी कपूर, दिलीप कुमार, सुनील दत्त, देवानंद, कामिनी कौशल, सुरैया, गीता बाली, नलिनी जयवंत और निम्मी शामिल थे। इसके अलावा उन्हें मशहूर निर्माता निर्देशक महबूब खान, गुरुदत्त, कमाल अमरोही और के. आसिफ के साथ काम करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। वह प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी पीछे नहीं रही और उन्होंने फिल्म नाता (1955) बनाई। जिसमें उन्होंने अभिनय भी किया था।

हिन्दी सिनेमा की रुहानी शख्सियत मानी जाने वाली मधुबाला ने जिस सादगी और सच्चाई के साथ जीवन संघर्ष किया, वह आज भी बेमिसाल है। वैसे, मधुबाला के अभिनय के दीवानों की आज भी कोई कमी नहीं है। उनके सशक्त अभिनय के चलते ही लंबे समय तक उनका जादू लोगों के दिलों-दिमाग में बसा रहा है। पचास और साठ के दशक में मधुबाला को प्रतिभाशाली और प्रभावी अभिनेत्रियों की श्रेणी में गिना जाता है। जिसमें मीना कुमारी और नर्गिस के नाम भी शामिल हैं। दिल्ली के पठान परिवार में जन्मी मधुबाला का असली नाम मुमताज जेहन बेगम देहलवी था, लेकिन पारिवारिक स्थिति अच्छी न होने के कारण जल्दी उनका पूरा परिवार दिल्ली से मुंबई आ गया।

अपनी परिस्थितियों से लड़ते हुए मधुबाला ने मात्र 9 वर्ष की उम्र में ही अभिनय शुरू कर दिया था। उन्होंने बाल कलाकार के तौर पर कई फिल्मों में काम किया। जिसमें उनकी पहली फिल्म बसंत थी। जिसमें उनके अभिनय की गहराई से मशहूर कलाकार देविका रानी बहुत प्रभावित हुई और उन्होंने उन्हें अपना नाम बदल कर मुमताज से मधुबाला रखने को कहा। इसके बाद उनको पहला बड़ा ब्रेक केदार शर्मा ने राजकपूर के साथ फिल्म नील कमल में दिया था। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 14 वर्ष थी। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफल तो नहीं हुई लेकिन, उनकी प्रतिभा ने सब को प्रभावित किया और दर्शकों ने उन्हें पर्दे की रानी वीनस का खिताब दिया। इसके बाद फिल्म महल इनके कैरियर के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुई।

फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय से अब तक मधुबाला सभी की पसंद बन चुकी थी, लेकिन किस्मत उनका साथ देती नहीं दिखी और 1950 में उनमें दिल की बीमारी सामने आई, जिसका असर जल्द ही उनकी शरीर पर भी दिखने लगा था और फिल्म बहुत दिन हुए की शूटिंग के दौरान उन्हें खून की उल्टी हुई और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। उस दौरान वासन परिवार ने उनका बखूबी खयाल रखा। जिसके बदले उन्होंने 1955 में वासन के लिए एक और फिल्म इंसानियत भी की थी।

मधुबाला निर्देशक विमल राय का काफी सम्मान करती थी और उनकी फिल्म विराज बहू में काम करने की इच्छुक थी, क्योंकि उन्होंने वह नॉवेल पढ़ रखा था, लेकिन विमल राय ने उनकी ऊंची कीमत को देखते हुए उस समय संघर्षरत अभिनेत्री कामिनी कौशल को वह रोल दे दिया। जब मधुबाला को यह बात पता चली, तब उन्होंने कहा कि वह तो इस रोल के लिए एक रुपए में भी राजी हो जाती।

उनके सफल कैरियर में एक पड़ाव ऐसा भी आया, जहां उनकी कुछ फिल्में आर्थिक रूप से इस तरह असफल हुई कि उन्हें बॉक्स पॉइजन के नाम से जाना जाने लगा था, लेकिन इस दौर को उन्होंने जल्द ही खत्म करने की

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक दिल्ली मैक्स अस्पताल में भर्ती

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बागपत: जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के पैतृक गांव में सीबीआई ने छापेमारी की है। सीबीआई को देखकर गांव में अफरातफरी का माहौल रहा। कई घंटे तक सीबीआई उनके आवास पर गहनता से जांच करती रही। मकान की वीडियोग्राफी के बाद सीबीआई टीम रवाना हो गई।

जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खिलाफ गुरुवार को सीबीआई एक्शन मोड में दिखी है। जम्मू कश्मीर के किरू हाईड्रो इलेक्ट्रॉनिक प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के मामले को लेकर सीबीआई ने देश भर में कई जगह पर छापेमारी की है। सत्यपाल मलिक के पैतृक गांव भी सीबीआई की 7 सदस्य टीम उत्तर प्रदेश के बागपत जिला स्थित उनके पैतृक गांव हिसावड़ा पहुंची। टीम ने गांव में उनके मकान की वीडियोग्राफी की है। आसपास के लोगों से पूछताछ की है। मकान की गहनता से जांच की गई है। जांच के दौरान कई घंटे तक टीम अपना काम करती रही। इस दौरान गांव के लोगों की भीड़ मामले को लेकर उनके मकान के पास एकत्र हो गई।

दो कमरों के मालिक है सत्यपाल मलिक
गांव में रहने वाले उनके पड़ोसी जयवीर ने बताया कि सत्यपाल मलिक के परिजन गांव से बाहर रहते है। गांव में उनके मकान तो है, लेकिन दो कमरे ही उनके हिस्से में आते है। सीबीआई ने उनके कमरों को खुलवाकर गहन जांच की है। सत्यपाल का परिवार यहां नहीं था, वो सभी दिल्ली रहते है।
दिल्ली मैक्स अस्पताल में भर्ती
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के पीए का कहना है कि उनको चार दिन से परेशान किया जा रहा है। सत्यपाल मलिक बीमार हैं और दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती हैं, उनके करीबियों को प्रताड़ित कर उन पर दबाव बनाया जा रहा है। सत्यपाल मलिक ने ही जम्मू कश्मीर के प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार बताया था, नाम भी दिए थे लेकिन सीबीआई ने आरोपियों पर कोई एक्शन नहीं लिया। उल्टा भ्रष्टाचार उजागर करने वाले किसान परिवार के किसान के बेटे सत्यपाल पर ही सीबीआई जांच बैठा दी है और उनको प्रताड़ित किया जा रहा है।

गोवंशो की तस्करी में संलिप्त अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट

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चंदौली जिले के थाना चकिया पुलिस द्वारा गोवंशो की तस्करी में संलिप्त 01 अभियोग में 03 शातिर अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई है।
बताते चलें कि डा0 अनिल कुमार पुलिस अधीक्षक चन्दौली द्वारा अपराध एवं अपराधियो के विरूद्ध अंकुश लगाने के क्रम में दिये गये निर्देश में व अनिल कुमार यादव अपर पुलिस अधीक्षक (आप0) व आशुतोष क्षेत्राधिकारी चकिया के कुशल निर्देशन में अतुल कुमार प्रजापति थानाध्यक्ष चकिया जनपद चन्दौली द्वारा एवं थाना चकिया पर गठित टीम द्वारा अपराधियों एवं गो- तस्करो के विरूद्ध की जा रही अभिसूचना संकलन की कार्यवाही के क्रम में थानाध्यक्ष अतुल कुमार प्रजापति द्वारा थाना क्षेत्र में गो- तस्करी करने वाले अभियुक्तगण गैंग लीडर 1. मनोज कुमार पुत्र बाबादीन निवासी ग्राम कोर्रही (तरउस) थाना विसण्डा जिला बांदा व गैंग सदस्य 1. सोनू उर्फ मो0 शेरु पुत्र हसीन निवासी ग्राम उजिहिनी फरीदपुर थाना संदीपनघाट जिला कौशाम्बी 2. विकास मिश्रा पुत्र रामलखन मिश्रा निवासी ग्राम घाघूघार थाना अमेठी जिला अमेठी पर मु0अ0सं0 029/24 धारा 3(1) यूपी गैगेस्टर एक्ट का मुकदमा पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की जा रही है।

गैंग लीडर-  मनोज कुमार पुत्र बाबादीन निवासी ग्राम कोर्रही (तरउस) थाना विसण्डा जिला बांदा।
1.    मु0अ0सं0 340/23 धारा 3/5ए/बी/8 गोवध नि0 अधि0 व 11 पशु क्रूरता नि0 अधि0 व 307/429 भादवि व 4/25 आर्म्स एक्ट थाना चकिया जनपद चन्दौली
2.    मु0अ0सं0 029/24 धारा 3(1) यूपी गैगेस्टर एक्ट थाना चकिया जनपद चन्दौली

सदस्य- 1- सोनू उर्फ मो0 शेरु पुत्र हसीन निवासी ग्राम उजिहिनी फरीदपुर थाना संदीपनघाट जिला कौशाम्बी।
1.    मु0अ0सं0 340/23 धारा 3/5ए/बी/8 गोवध नि0 अधि0 व 11 पशु क्रूरता नि0 अधि0 व 307/429 भादवि व 4/25 आर्म्स एक्ट थाना चकिया जनपद चन्दौली ।
2.    मु0अ0सं0 029/24 धारा 3(1) यूपी गैगेस्टर एक्ट थाना चकिया जनपद चन्दौली

सदस्य-2- विकास मिश्रा पुत्र रामलखन मिश्रा निवासी ग्राम घाघूघार थाना अमेठी जिला अमेठी।

1.    मु0अ0सं0 340/23 धारा 3/5ए/बी/8 गोवध नि0 अधि0 व 11 पशु क्रूरता नि0 अधि0 व 307/429 भादवि व 4/25 आर्म्स एक्ट थाना चकिया जनपद चन्दौली ।
2.    मु0अ0सं0 029/24 धारा 3(1) यूपी गैगेस्टर एक्ट थाना चकिया जनपद चन्दौली

इस दौरान कार्यवाही करने वाली टीम में थानाध्यक्ष अतुल कुमार प्रजापति, कांस्टेबल अजय यादव, कांस्टेबल अरूण वर्मा सम्मलित रहे।