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पारंपरिक प्रथाओं को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ता मध्यप्रदेश

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( बबिता मिश्रा-विनायक फीचर्स )
देश के 10% क्षेत्रफल वाले राज्य मध्यप्रदेश में देश की लगभग 7% आबादी निवास करती है। यहां 11 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जाता है। राज्य की कृषि उपज में विविधता मुख्यतः नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों पर निर्भर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में वर्तमान सरकार सरल नीतियों के माध्यम से ‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’ सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है, जिससे कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में मध्यप्रदेशनवाचार और प्रगति के नए अध्याय लिख रहा है। ‘भारत की फूडबास्केट’ कहलाने वाला मध्यप्रदेश पारंपरिक प्रथाओं को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से जोड़कर देश के कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
भारत की फूडबास्केट
कृषि क्षेत्र
मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और कृषि का राज्य के जीएसडीपी में 47प्रतिशत का योगदान है, जो सरकार द्वारा की गई पहल का प्रमाण है। आर्टिफिशियलइंटेलिजेंस (एआई) सहित स्मार्ट खेती तकनीकों को अपनाकर राज्य डिजिटल खेती क्रांति की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में, सरकार सक्रिय रूप से किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का डिजिटलीकरण और कृषि आपूर्ति श्रृंखला का आधुनिकीकरण कर रही है।
सरकारी पहल के साथ डिजिटल खेती पर केंद्रित स्टार्ट-अप के आने से विकास के लिए महत्वपूर्ण ईकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। बेहतर बीज गुणवत्ता, उर्वरक निर्माण, कृषि मशीनरी और सिंचाई परियोजनाओं पर रणनीतिक फोकस के साथ, मध्यप्रदेश खेती के क्षेत्र में प्रचुर निवेश के अवसर प्रदान करता है।
मध्यप्रदेश ‘कृषि कर्मण पुरस्कार’ का 7 बार विजेता है – यह पुरस्कार खाद्यान्न उत्पादन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले भारतीय राज्य को दिया जाता है। मध्यप्रदेश भारत में संतरा, मसाले, लहसुन, अदरक, चना और दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य में जैविक उपज और बागवानी उत्पादन के लिए खेती का उच्च क्षेत्र है। राज्य फल, लहसुन, टमाटर, हरी मटर, अमरूद, हरी मिर्च और प्याज का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और नींबू, गोभी और फूल और दूध सहित खट्टे फलों का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। मध्यप्रदेश शरबती गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, जिसे भारत में गेहूं की उच्चतम गुणवत्ता माना जाता है। केवल6 वर्षों में राज्य की बागवानी उत्पादन रैंक छठवें स्थान से प्रथम पर पहुंच गयी है।
खाद्य प्रसंस्करण
वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण बाजार, जिसका मूल्य 2021 में $134.21बिलियन है, के 2030 तक 11.82%सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान है, जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र, विशेष रूप से भारत, चीन, इंडोनेशिया और मलेशिया महत्वपूर्ण वैश्विक विकास को बढ़ावा देंगे। अपने समृद्ध कृषि संसाधनों और रणनीतिक स्थान के साथ, भारत ने अपने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में तेजी से वृद्धि देखी है, जिसने 2022 में 866बिलियन डॉलर के बाजार आकार में योगदान दिया है, जो देश के आर्थिक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में, मध्यप्रदेश अपने समृद्ध कृषि संसाधन और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का उपयोग करके एक प्रमुख खिलाड़ी बन गया है। राज्य का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, 8.3% की औसत वार्षिक दर से बढ़ रहा है, जो देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उद्योग-अनुकूल नीतियों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता ने मोंडेलेज, आईटीसी और यूनिलीवर जैसे दिग्गजों से बड़े निवेश को आकर्षित किया है।
पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण पहल की औपचारिकता के तहत, राज्य विभिन्न उत्पादक संगठनों को क्षमता निर्माण और समर्थन देकर असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को सशक्त बना रहा है। सरकार द्वारा वित्त पोषित फूड पार्क, निजी मेगाफूड पार्क और कृषि प्रसंस्करण समूहों की स्थापना एक मजबूत खाद्य प्रसंस्करण ईकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सरकार के समर्पण को दर्शाती है।
इस क्षेत्र में कौशल विकास पर मध्यप्रदेश का ध्यान फूड इनोवेशन हब विकसित करने के लिए विश्व आर्थिक मंच के सहयोग से उजागर होता है। राज्य में पाँच प्रतिष्ठित संस्थान हैं जो संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में कुशल कार्यबल को शिक्षित करने और बढ़ाने के लिए समर्पित हैं।
डेयरीप्रसंस्करण
डेयरी गतिविधियाँ मध्यप्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, जो रोजगार और आय के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में कार्य करती हैं। अधिकांश डेयरी उत्पाद दूध के रूप में बेचे जाते हैं, जिसके कारण उद्योग में मूल्यवर्धन और समग्र डेयरी प्रसंस्करण की जबरदस्त संभावनाएं हैं। वर्तमान में, राज्य के कुल डेयरी उत्पादन में दूध की हिस्सेदारी 48% है। सबसे तेजी से बढ़ते कुछ सेग्मेंट में दही, पनीर, यूएचटी दूध, फ्लेवर्ड दूध और छाछ शामिल हैं।
वर्तमान सरकार के नेतृत्व में राज्य देश का तीसरा सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य है, जो कुल दूध उत्पादन में 8.6% का योगदान देता है। मध्यप्रदेश सहकारी डेयरी फेडरेशन की उत्पादकता वृद्धि जैसी पहल, डेयरी प्रसंस्करण क्षेत्र में सतत विकास के लिए राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मध्यप्रदेश सहकारी डेयरी फेडरेशन- शीर्ष निकाय एमपीसीडीएफ ने अकेले 2022-23 में 8.35 लाख केजीपीडी की औसत दूध खरीद और 7.16 लाख एलपीडी की औसत क्षेत्रीय दूध बिक्री और 1982 करोड़ रुपये से अधिक का बिक्री राजस्व दर्ज किया। 2020-2021 में राज्य में कुल दूध उत्पादन लगभग 20.01 मिलियन टन था। डेयरीप्रसंस्करण में शामिल प्रमुख खिलाड़ियों में अमूल (जीसीएमएमएफ), एमपीसीडीएफ (सांची), अनिकइंडस्ट्रीज (सौरभ), पवनश्रीफूड इंटरनेशनल, स्टर्लिंगएग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड (नोवा) शामिल हैं।
एक जिला एक उत्पाद (ODOP)
24 कृषि और बागवानी से संबंधित प्राथमिक उत्पाद जिनकी खेती आमतौर पर राज्य भर में की जाती है, जिनमें कोदो-कुटकी, बाजरा, संतरा/नींबू, सीताफल, आम, टमाटर, अमरूद, केला, पान, आलू, प्याज, हरी मटर, मिर्च, लहसुन शामिल हैं। अदरक, धनिया, सरसों उत्पाद, गन्ना उत्पाद, आंवला और हल्दी। छिंदवाड़ा, आगरमालवा, शाजापुर, राजगढ़, मंदसौर, बैतूल और सीहोर जैसे जिले संतरे के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं जो संतरे के प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए आदर्श हैं। इसी तरह, मध्यप्रदेश के बैतूल, कटनी, अनूपपुर, रीवा, सिंगरौली और रायसेन जिले जो आम की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं, वहां कई आम आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग हैं जो स्थापित होने के विभिन्न चरणों में हैं।
राज्य सरकार ने इन जिलों की क्षमता को महसूस किया है और पहले से ही ऐसे संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है जो व्यावसायिक उपयोग के लिए जूस, जैम, स्क्वाश, सिरप, सौंदर्य उत्पाद, इत्र, सुगन्धिततेल, गूदा, सूखे आम पाउडर, चटनी, आम पना और स्टार्च जैसे प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का उत्पादन कर सकते हैं।
अनुकूल नीतिगत माहौल द्वारा सरकार से मजबूत समर्थन
राज्य सरकार ने उद्योग समर्थक नीतियां बनाकर इस क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया है। वित्तीय क्षेत्र में, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को दिया जाने वाला प्रोत्साहन राज्य के अन्य क्षेत्रों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन से 1.5 गुना है।
राज्य सरकार राज्य में और अधिक निवेश आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है और आगामी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव 2024 उज्जैन में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में राज्य की प्रगति को उजागर करेगी। मुख्यमंत्री अपनी टीम के साथ राज्य में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न अवसरों और भविष्य में कृषि आय में वास्तविक वृद्धि लाने के लिए इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है, इस पर चर्चा करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दृष्टिकोण से निर्देशित, मध्यप्रदेश डेयरी, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण नवाचार में सबसे आगे है। राज्य का व्यापक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक ज्ञान का मिश्रण, कृषि, खाद्य और डेयरी प्रसंस्करण मूल्य श्रृंखला में निवेशकों और हितधारकों के लिए एक आशाजनक भविष्य बनाता है । ( विनायक फीचर्स )

बेफिक्र कमलनाथ, दिग्विजय और जीतू पटवारी

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(पवन वर्मा-विनायक फीचर्स)

देश के पूर्वी हिस्से से पश्चिम तक निकल रही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की न्याय यात्रा मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक हो, इसे लेकर कांग्रेस के नेता पूरी ताकत के साथ जुटे हुए हैं।राहुल गांधी की यात्रा के जरिए सभी नेताओं के साथ ही संगठन ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों से फिलहाल दूरी बनाए रखी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह सहित अन्य नेता लोकसभा चुनाव को लेकर इतने बेफिक्र क्यों हैं ? इन नेताओं की लोकसभा चुनाव को लेकर इतनी बेरूखी है कि चुनाव सिर पर होने के बाद भी कांग्रेस के सभी नेता  राहुल गांधी की यात्रा की तैयारियों में ज्यादा व्यस्त है। मध्य प्रदेश में राहुल गांधी की यात्रा तीन मार्च को आने की संभावना है और सात मार्च तक राहुल गांधी यहां के आठ लोकसभा क्षेत्रों से गुजरेंगे। प्रदेश के 29 लोकसभा क्षेत्रों में से अभी भाजपा के 28 सांसद हैं, जबकि एक मात्र सीट छिंदवाड़ा पर कांग्रेस का कब्जा है।
 *भाजपा का गढ़ और दिग्विजय का प्रभाव*
राहुल गांधी मध्य प्रदेश में मुरैना जिले से प्रवेश करेंगे।  यह सीट भाजपा के खाते में हैं, यहां से नरेंद्र सिंह तोमर सांसद थे, वे केंद्र में मंत्री भी रहे, लेकिन भाजपा ने उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ाया और अब वे मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हैं। यह सीट लंबे अरसे से भाजपा के खाते में रही है। यह सीट पिछले 27 सालों से भाजपा के कब्जे में हैं। यानी राहुल गांधी जिस लोकसभा क्षेत्र से मध्य प्रदेश में प्रवेश करेंगे वह भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इसी तरह ग्वालियर में माधवराव सिंधिया के बाद से कांग्रेस लोकसभा चुनाव में संघर्ष ही करती रही है। यह सीट भी पिछले तीन चुनाव से कांग्रेस लगातार हार रही है। राहुल गांधी की यात्रा ग्वालियर के बाद गुना-शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र से होकर गुजरेगी। इस सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया अब तक लोकसभा का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़े हैं। अब यह सीट भी कांग्रेस के पास नहीं बची है। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का सबसे मजबूत आधार  मानी जाने वाली राजगढ़ लोकसभा सीट आती है। राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में दिग्विजय सिंह का खासा प्रभाव माना जाता है। लेकिन यहां पर भी दो चुनाव कांग्रेस लगातार हार चुकी है। यहां पर वर्ष 2009 में कांग्रेस जीती थी, इसके बाद से यह सीट भी कांग्रेस के हाथ से निकल गई। इसी क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए राहुल गांधी की यात्रा देवास-शाजापुर लोकसभा क्षेत्र, फिर उज्जैन, धार, झाबुआ लोकसभा क्षेत्र से गुजरेगी। इन सभी लोकसभा क्षेत्रों में भाजपा के सांसद हैं।
*फिर भी लोकसभा चुनाव की तैयारियों से दूर कांग्रेस*
भाजपा के मजबूत गढ़ में बदल रहे मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव की तैयारियों में कांग्रेस, भाजपा से लगातार पिछड़ती जा रही है। भाजपा में जहां युद्ध स्तर पर चुनाव की तैयारी की जा रही है।  केंद्र से लेकर प्रदेश और मंडल स्तर के नेता और पदाधिकारी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। वहीं कांग्रेस इन दिनों  अपने नेता राहुल गांधी की यात्रा को लेकर बैठक कर रही है। जब लोकसभा चुनाव की रणनीति बनाने का वक्त प्रदेश में होगा, उस वक्त पूरी कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार राहुल गांधी की यात्रा में शामिल रहेंगे। प्रदेश भर के कार्यकर्ता और नेता यहां पर आएंगे। करीब सात दिन तक कांग्रेस चंद लोकसभा क्षेत्रों में सिमट जाएंगी।
 *मिशन 29 को कितना रोक सकेगी कांग्रेस*
मध्य प्रदेश में इस बार भाजपा सभी लोकसभा सीट जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है। पिछले चुनाव में वह 29 में से  28 सीटों पर जीती थी। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ छिंदवाड़ा से कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। इस बार जहां भाजपा के पास मिशन 29 को पूरा करने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस के सामने भाजपा के इस मिशन को रोकने की चुनौती है।  इस चुनौती को स्वीकार करते हुए भाजपा तो दिन रात एक कर काम कर रही है, लेकिन कांग्रेस की तैयारी भाजपा के मुकाबले में कमतर ही लग रही है।
 *कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने को कोई नेता नहीं तैयार*
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जबरदस्त हार के बाद प्रदेश कांग्रेस के कोई भी दिग्गज नेता और संगठन के मुखिया अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने का काम भी नहीं कर रहे हैं।  हालात यह हो चुके हैं कि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने दो महीने के कार्यकाल में प्रदेश के सभी लोकसभा क्षेत्रों का दौरा तक नहीं कर पाएं हैं। वे भोपाल और इंदौर में ही ज्यादा सक्रिय हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता माने जाने वाले कमलनाथ और दिग्विजय  सिंह दिल्ली में ज्यादा वक्त बीता रहे हैं। प्रदेश में ये आ भी रहे हैं तो कमलनाथ छिंदवाड़ा तक सीमित रह रहे हैं, वहीं दिग्विजय सिंह राजगढ़ लोकसभा में ही सिमट गए हैं। ये दोनों नेता भी विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर अपने-अपने क्षेत्रों से बाहर दौरा करने के लिए नहीं निकले हैं। इन तीनों नेताओं की बेरुखी के चलते कांग्रेस के अधिकांश कार्यकर्ता अब तक विधानसभा चुनाव की हार से बाहर ही नहीं निकल पाएं हैं। यही हाल मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी जितेंद्र भंवर सिंह का है।वे भी मध्यप्रदेश कम ही आते हैं।ऐसे में भाजपा के मिशन 29 को रोकने में कांग्रेस और उसके नेता कितने सफल होंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएंगा।(विनायक फीचर्स)लेखक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हैं।

वंचितों और रोगियों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं परोपकारी अक्षय सोनकांबले

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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की आरोग्यनिधि सेवा संस्था के कर्मठ एवं समाजसेवक अक्षय दयानंद सोनकांबले मुंबई में गोरेगांव पूर्व संतोष नगर के रहवासी हैं, इनका जन्म और शिक्षा मुम्बई में हुआ है। परोपकारी स्वभाव के अक्षय सांताक्रुज, विलेपार्ले, अंधेरी, जोगेश्वरी, गोरेगांव के आसपास के क्षेत्र में जितने भी जरूरतमंद लोग हैं उनका दिल खोलकर सहायता करते हैं। मुम्बई ही नहीं सुदूर क्षेत्रों के लोगों तक भी वे अपनी सहायता पहुंचाते हैं। यह काम अक्षय पिछले सात आठ सालों से कर रहे हैं और अभी तक लगभग बारह सौ से अधिक लोगों तक वह सहायता पहुंचा चुके हैं। वह आर्थिक रूप से जरूरतमंद लोगों तक अन्न और फल सब्जियां पहुंचाकर, रुग्ण और असहाय लोगों को स्वास्थ्य चिकित्सा मुहैया कराकर, छोटे बच्चों को कपड़े और उनकी शिक्षा की आवश्यक वस्तुएं प्रदान कर सहायता करते हैं। आदिवासी बस्तियों में प्रत्येक रविवार को भोजन या खिचड़ी बांट कर उनकी सहायता करते हैं। इसके लिए वह स्थानीय लोगों की मदद भी लेते हैं और साथ में सम्मिलित होकर स्वयं भी भोजन ग्रहण करते हैं। इन सभी कार्यो में उनके परिवार का भरपूर सहयोग उन्हें मिलता है। अक्षय के भीतर यह सेवा और परोपकार की भावना का उदय उन्हें उनके पिता दयानंद सोनकाम्बले से मिला है। अक्षय अपने पिता को अपना आयडल मानते हैं। उन्हीं की तरह परोपकार और सेवा करना चाहते हैं। अक्षय बताते हैं कि जब से वह इस जनसेवा अभियान से जुड़े हैं तब से उनकी आर्थिक सहायता केवल उनके पिता ने ही कि है और वे अक्षय को कहते हैं कि जितना भी हो सके वह मदद करेंगे किसी अन्य से आर्थिक मदद या पैसे ना लें। यदि कोई सेवा हेतु आर्थिक मदद देता भी है तो यह धन केवल सेवा के लिए प्रयोग करें अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं। अक्षय के पिता एक मध्यमवर्गीय कामगार व्यक्ति हैं किंतु परोपकारी कार्यों हेतु वे सदैव तत्पर रहते हैं तथा अपने सामर्थ्य अनुसार वंचितों की सहायता में लगे रहते हैं।

अक्षय अपने पिता का अनुसरण करते हैं। अक्षय अपने बारे में बताते हैं कि उनके अंदर लोगों के लिए सहयोग की भावना का उदय तब हुआ जब वे सातवीं या आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। उस समय उनकी माँ के कानों में तेज दर्द और चक्कर की शिकायत थी। उनके पिता सुबह उनकी माँ को लेकर अस्पताल जाते और वापस लौटते हुए शाम या रात हो जाती थी। यह देख अक्षय यह सोचते कि आखिर सरकारी अस्पताल में इतना समय क्यों लग जाता है। फिर जब वे एक बार अपनी माँ को जोगेश्वरी स्थित क्रोमा अस्पताल (बालासाहेब ठाकरे हॉस्पिटल) लेकर गए तो वहां पहुंचते ही उनकी माँ को चक्कर आ गया। माँ की हालत देख अक्षय ने वार्डबॉय से अपनी माँ के लिए कुर्सी मांगी तब वार्डबॉय ने उन्हें अनदेखा कर दिया। तभी वहां सफाई कर्मचारी एक महिला ने कुर्सी का इंतजाम कर उन्हें दिया। इलाज कराने के बाद अक्षय पुनः वार्डबॉय से मिले और पूछा कि आपने सहायता क्यों नहीं की तो इस पर वॉर्डबॉय ने तीखा तंज कसते कहा कि आपकी माँ क्या झांसी की रानी है यदि सुविधा चाहिए तो प्राइवेट अस्पताल जाओ यहाँ क्यों आते हो। वॉर्डबॉय की बात अक्षय को बहुत बुरी लगी और उसने सोचा कि वह किसी और को ऐसी तकलीफ से नहीं गुजरने देंगे। फिर वह अपना जन्मदिन मनाने ‘दया अनाथाश्रम’ गए वहाँ उन्होंने अन्नदान किया और उनका हाल पूछा तभी कुछ बीमार लोगों ने अपनी व्यथा बताई और यह भी बताया कि बीएमसी अस्पतालों में इलाज के लिए जाने पर कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है लंबी लाइन लगाना पड़ता है। जिसका अस्पताल में पहचान हो, उसी का सही इलाज हो पाता है। उनकी यह बात सुन अक्षय को लगा कि लोग बीएमसी को लेकर जो बोल रहे हैं वह सही नहीं है और वहीं से अक्षय ने ठान लिया कि सरकारी अस्पताल में अब गरीब और जरूरतमंदों को कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए अक्षय पूरी जी जान से जुड़े, लोगों से संपर्क बनाया, सारी जानकारियां हासिल की, नेता, एनजीओ, नगरपालिका अधिकारियों, खासदार आदि से संपर्क किया, ताकि बीमार व्यक्तियों के लिए बीएमसी में इलाज करवाना आसान हो जाये और सरकारी अस्पतालों को लेकर लोगों में जो धारणा बनी है वह दूर हो और सभी रोगियों को आसानी से सहायता मिल सके। अक्षय ने सबसे पहले एक लकवाग्रस्त व्यक्ति की सहायता की और वहीं से जनसेवा का काम जो शुरू हुआ वह आज तक चल रहा है और इस सेवा चैन को अक्षय दूर दराज के लोगों तक लेकर जाना चाहते हैं। वह बीमार व्यक्ति को सरकारी अस्पताल में उचित डॉक्टर से मिलाना, बीमारी के लिए उन्हें सरकारी सहायता की जानकारी देना, जरूरतमंदों को एनजीओ या सरकार की ओर से सहायता दिलाना, कम लागत में इलाज की व्यवस्था, कैन्सर मरीजों को कीमो और दवा प्राप्त करने हेतु कम लागत में इलाज प्राप्त करने के उपाय बताना जैसे सेवाभाव का कार्य करते हैं।

अक्षय कहते हैं कि अधिकांश लोगों को डॉक्टर और सरकारी सुविधाओं का ज्ञान ही नहीं है। सरकारी अस्पताल में कम लागत में ऑपरेशन, एमआरआई, सोनोग्राफी, एक्सरे और खून जांच आदि हो जाती है फिर भी लोग धैर्य नहीं रखते और अधिक लागत में अपना इलाज और जांच कराते हैं। वह सदा लोगों की सहायता के लिए तत्पर हैं और किसी भी बीमार व्यक्ति को इलाज हेतु आर्थिक सहायता चाहिए तो वह किसी बीएमसी अस्पताल में कम मेहनत और कम लागत में सहायता पहुंचाएंगे। जो आर्थिक रूप से सम्पन्न नहीं उनकी आर्थिक मदद भी करेंगे। अक्षय यह कार्य सेवा भाव
से करते हैं, आय साधन के लिए नहीं। उनका कहना है कि जो तकलीफ़ उन्होंने सही वह किसी और को भोगना ना पड़े।

– गायत्री साहू

बिजनेसमैन डॉ निकेश जैन माधानी के पिता की स्वास्थ्य संबंधी हालचाल लेने पहुंचे शिवसेना नेता व प्रवक्ता आनंद दुबे और सुनील चौबे

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मुंबई। बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी व्यापारिक व सामाजिक क्षेत्रों में अच्छी पकड़ रखते हैं। साथ ही वह राजनीतिक एवं मीडिया से भी जुड़े हैं। उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना नेता व प्रवक्ता आनंद दुबे 26 फरवरी को निकेश के घर जाकर उनके पिता से भेंट किए और स्वास्थ्य संबंधी हालचाल लिया। निकेश और उनके पिता ने गुलदस्ता देकर आनंद दुबे और सुनील चौबे का स्वागत किया।

अभी 25 फरवरी को ही बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी मुंबई के सहारा स्टार होटल में इंडियन गोल्डन अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
आपको बता दें कि हाल ही में डॉ निकेश जैन माधानी को भारत सरकार की युवा मामले एवं खेल मंत्रालय युवा मामले विभाग, नेहरू युवा केन्द्र संगठन द्वारा सम्मान मिला। वहीं निकेश जैन को रामायण धारावाहिक में सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया के हाथों दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड 2024, पार्श्वगायक उदित नारायण के हाथों अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024 और अभिनेता सोनू सूद के हाथों एशियन एक्सीलेंस अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
इसके साथ ही उन्हें सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023 मिला है।
विदित हो कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन मधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। पिछले दिनों ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी ने अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित किया। निकेश को परफेक्ट वुमेन अचीवर अवॉर्ड, गोल्डन ह्यूमेनिटी अवॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं आईपीएस कृष्ण प्रकाश नायर 2021 और 2022 में उन्हें अवॉर्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं।
डॉ निकेश जैन मधानी फाइनेंस एडवाइजर हैं और इनके कई बिजनेस हैं जैसे कि माधानी फाइनेंस, माधानी एंटरटेनमेंट एंड प्रोडक्शन, माधानी ट्रेडिंग कंपनी, माधानी न्यूज लाइव 24×7 और मधानी इंटरप्राइज इत्यादि। इसके साथ ही निकेश की माँ के नाम पुष्पा गृह उद्योग कंपनी और पुष्पम पापड़ कंपनी है। जल्द ही मधानी कंपनी की लिस्टिंग हो जायेगी।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी ने एक हिंदी कॉमेडी फिल्म प्रोड्यूस की है। इसके पहले उन्होंने 12 म्यूजिक एल्बम ओर शॉर्टफिल्म को माधानी एंटरटेनमेंट और प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।
निकेश ताराचंद जैन मधानी ने लॉ बुक में इतिहास बनाया है। दरअसल उनके ऊपर 2014 में ईडी पीएमएलए का केस हो गया था। फिर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ते हुए 2017 में सुप्रीम कोर्ट से धारा 45 ए रद्द हुआ जिससे कानून के किताब में डॉ निकेश जैन मधानी का नाम दर्ज हुआ और उनके ऊपर लगे धारा को हटाने में प्रसिद्ध वकील मुकुल रोहतगी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। निकेश जैन की कानून लड़ाई में जाने माने वकील साजल यादव, वकील नेमीचंद शर्मा और वकील मनीष वोरा ने भी सहयोग किया।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी सबसे सफल व्यवसायी रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम आदानी और लक्ष्मी मित्तल से प्रेरित हैं।

– संतोष साहू

इंडियन गोल्डन अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए डॉ निकेश जैन माधानी 

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मुंबई। 25 फरवरी के दिन बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को मुंबई के सहारा स्टार होटल में इंडियन गोल्डन अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया। जोइल इंटरटेनमेंट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बिग बॉस रियलिटी शो के कंटेस्टेंट एवं यूटूबर और इनफ्लुएंसर को मुख्य अतिथि डॉ निकेश जैन माधानी के हाथों सम्मानित किया गया।

आपको बता दें कि हाल ही में डॉ निकेश जैन माधानी को भारत सरकार की युवा मामले एवं खेल मंत्रालय युवा मामले विभाग, नेहरू युवा केन्द्र संगठन द्वारा सम्मान मिला। वहीं निकेश जैन को रामायण धारावाहिक में सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया के हाथों दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड 2024, पार्श्वगायक उदित नारायण के हाथों अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024 और अभिनेता सोनू सूद के हाथों एशियन एक्सीलेंस अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
इसके साथ ही उन्हें सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023 मिला है।
विदित हो कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन मधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। पिछले दिनों ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी ने अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित किया। निकेश को परफेक्ट वुमेन अचीवर अवॉर्ड, गोल्डन ह्यूमेनिटी अवॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं आईपीएस कृष्ण प्रकाश नायर 2021 और 2022 में उन्हें अवॉर्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं।
डॉ निकेश जैन मधानी फाइनेंस एडवाइजर हैं और इनके कई बिजनेस हैं जैसे कि माधानी फाइनेंस, माधानी एंटरटेनमेंट एंड प्रोडक्शन, माधानी ट्रेडिंग कंपनी, माधानी न्यूज लाइव 24×7 और मधानी इंटरप्राइज इत्यादि। इसके साथ ही निकेश की माँ के नाम पुष्पा गृह उद्योग कंपनी और पुष्पम पापड़ कंपनी है। जल्द ही मधानी कंपनी की लिस्टिंग हो जायेगी।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी ने एक हिंदी कॉमेडी फिल्म प्रोड्यूस की है। इसके पहले उन्होंने 12 म्यूजिक एल्बम ओर शॉर्टफिल्म को माधानी एंटरटेनमेंट और प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।
निकेश ताराचंद जैन मधानी ने लॉ बुक में इतिहास बनाया है। दरअसल उनके ऊपर 2014 में ईडी पीएमएलए का केस हो गया था। फिर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ते हुए 2017 में सुप्रीम कोर्ट से धारा 45 ए रद्द हुआ जिससे कानून के किताब में डॉ निकेश जैन मधानी का नाम दर्ज हुआ और उनके ऊपर लगे धारा को हटाने में प्रसिद्ध वकील मुकुल रोहतगी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। निकेश जैन की कानून लड़ाई में जाने माने वकील साजल यादव, वकील नेमीचंद शर्मा और वकील मनीष वोरा ने भी सहयोग किया।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी सबसे सफल व्यवसायी रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम आदानी और लक्ष्मी मित्तल से प्रेरित हैं।

सीसीएल का अपना पहला मुकाबला नहीं बचा पाए भारत राइजिंग के भोजपुरी दबंग्स 

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अभी पिछले साल के ख़िताबी मुकाबले के घाव ताजा ही थे कि सीसीएल के दसवें संस्करण से भारत राइजिंग के भोजपुरी दबंग्स के लिए पहले मुकाबले से भी अच्छी ख़बर नहीं आई है। दुबई के शारजाह में खेले जा रहे पहले मुकाबले में मनोज तिवारी के नेतृत्व में भोजपुरी दबंग्स गत चैम्पियन तेलुगु वारियर्स से यह मुकाबला 8 रनों से हार गई है। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए तेलुगु वारियर्स ने अपनी पहली पारी में तीन विकेट के नुकसान पर 94 रन बनाए। जवाब में मनोज तिवारी 38 रनों (रिटार्यड हर्ट) और आदित्य ओझा की 43 रनों की उपयोगी पारियों की बदौलत भारत राइजिंग वाले भोजपुरी दबंग्स ने अपनी पहली पारी में चार विकेट के नुकसान पर 103 रन बना डाले और इस तरह से तेलुगु वारियर्स पर 9 रनों की बढ़त बना लिया था। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करते हुए पहली पारी में बढ़त लेकर अपने इस प्रदर्शन से भोजपुरी दबंग्स का खेमा उत्साहित था क्योंकि इन्हें पहली पारी के आधार पर जो 9 रनों की बढ़त मिल गई थी, लेकिन भोजपुरी दबंग्स की यह खुशी अधिक देर तक कायम नहीं रह सकी, क्योंकि अब तेलुगु वारियर्स ने अपनी दूसरी पारी में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 118 रन बना दिया और फिर भोजपुरी दबंग्स पर दबाव बनाते हुए उनके सामने जीत के लिए 110 रनों का भारी भरकम टारगेट सेट कर दिया। 10 ओवर में 110 रनों के टारगेट के दबाव में भोजपुरी दबंग्स की शुरुआत बेहद खराब हुई। जहां भोजपुरी दबंग्स के लिए दूसरी पारी की शुरुआत में विकेट जल्दी गिर जाने के कारण ही भारी गड़बड़ हो गई। भारत राइजिंग भोजपुरी दबंग्स के दो विकेट 5 रनों के अंदर निकल जाने के बाद पारी सम्भालने में लगे आदित्य ओझा नाबाद 46 रन और असगर खान नाबाद 40 रन ने मोर्चा संभाल लिया था। लेकिन भारी टारगेट और कम ओवर के दबाव के आगे इनकी मेहनत भी बेकार गई , और भोजपुरी दबंग्स अपनी दूसरी पारी में कुल 2 विकेट के नुकसान पर 101 रन ही बना पाई , और अपना पहला मुकाबला 8 रनों से हार गई। वहीं तेलुगु वारियर्स की तरफ से आज अश्विन बाबू ने शानदार ऑल राउंडर खेल दिखाते हुए इस मैच में अर्धशतक लगाकर अपनी टीम को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गेंदबाजी करते हुए अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण दो विकेट भी चटकाए।

भारत राइजिंग के राहुल मिश्रा बताते हैं कि सीसीएल एक मात्र क्रिकेट का ऐसा संस्करण है जिसमें 20 ओवर के मैच में ही दोनों टीमो को 10-10 ओवर्स की दो इनिंग्स खेलने का मौका मिलता है। क्रिकेट का यह प्रारूप अपनेआप में बेहद रोमांचक और मनोरंजन से भरपूर रहता है जहां आप अपने फिल्मी सितारों को एक दूसरे के साथ और एक दूसरे के खिलाफ क्रिकेट के मैदान में प्रतिस्पर्धा करते हुए देखते हैं । आज भोजपुरी दबंग्स के साथ तेलुगु वारियर्स के मुकाबले में भी दो संस्कृतियों का मिलन था। जहां एक तरफ शुद्ध देशी वातावरण में रहने वाले अपनी देशज भाषा और खान पान के लिए मशहूर भारत राइजिंग वाली भोजपुरी दबंग्स की टीम थी, जिसके ऑनर भी भोजपुरी से प्रेम करने वाले कनिष्क शील, सुशील मलिक, सुशील शर्मा,और राहुल मिश्रा हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राचीन भारत की समृद्ध परम्पराओं को पुनर्जीवित करने वाली तेनालीरामन की धरती के योद्धा तेलुगु वारियर्स के रूप में आज मैदान में थे। गत साल और इस तरह से 4 बार सीसीएल का खिताब जीत चुके तेलुगु वारियर्स ने अपने पिछले साल भी ख़िताबी मुकाबले में भोजपुरी दबंग्स को हराकर ये ट्रॉफी जीते थे। दुबई में हुए इस हाई वोल्टेज सीसीएल मैच में भोजपुरी दबंग्स को चीयर करने के लिए इनकी महिला ब्रांड एम्बेसडर पाखी हेगड़े, आम्रपाली दुबे, शुभी शर्मा, नीलम गिरी, माही खान, रक्षा गुप्ता मौजूद रहीं।

उत्तराखण्ड News – नशा न मात्र व्यक्ति, परिवार बल्कि समूचे सामाजिक परिवेश को करता है प्रभावित -मुख्यमंत्री धामी,

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देहरादून,24 फरवरी, शनिवार को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में अमर उजाला द्वारा आयोजित ‘‘नशे की अंधेरी राह में उजाला’’ कार्यक्रम को संबोधित किया !

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नशे के विरूद्ध अभियान चलाने के लिये किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि नशे की प्रवृति को रोकने एवं नशाग्रस्त व्यक्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों और विशेषकर युवाओं में नशे के दुष्परिणामों को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। नशे की रोकथाम एवं इसके सम्बन्ध में जानकारी तथा जनता को किसी भी प्रकार की सहायता हेतु हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज में नशे के विरूद्ध जनजागरूकता के प्रसार में सभी से सहयोगी बनने की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को ही नहीं बल्कि उसके सारे परिवार और समूचे सामाजिक परिवेश को हानि पहुंचाता है। प्रदेश में जहां एक ओर लोगों और विशेषकर युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर नशा तस्करी से जुड़े अपराधियों के खिलाफ कड़ी करवाई भी की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि सभी के सहयोग और संस्थाओं द्वारा किये जा रहे अथक प्रयासों से, हम समय से पहले ही ड्रग्स फ्री देवभूमि का विकल्प रहित संकल्प अवश्य प्राप्त कर लेंगे।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार युवा सपनों को साकार करने के साथ ही युवा प्रतिभाओं के साथ न्याय करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए हमने प्रदेश में सबसे कठोर ’’नकल विरोधी कानून’’ बनाकर भर्तियों में घोटाले करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की। वर्तमान में 7 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है और जल्द ही 19 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की जायेगी। प्रदेश में सभी विभागों में रिक्त पदों पर नियुक्ति का कैलेण्डर भी जारी किया गया है।

युवाओं को देश का कर्णधार बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब युवाओं की मेहनत, योग्यता, प्रतिभा एवं क्षमता को कोई रोक नहीं सकेगा। उन्हें उनकी मेहनत का इमानदारी एवं निष्पक्षता से फल अवश्य मिलेगा। अब हमारे युवाओं को अवसाद की स्थिति का सामना नहीं करना पडेगा।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न संस्थानों की नुक्कड नाटक प्रतियोगी दलों के चयन मण्डल के सदस्यों को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी एवं अमर उजाला के स्थानीय संपादक अनूप वाजपेयी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

आदिबद्री बिना बद्रीनाथ की यात्रा अधूरी

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दीपक नौंगाई अकेला

यह माना जाता है कि बद्रीनाथ धाम की यात्रा तभी पूरी होती है, जब पांचो बद्री धामों की यात्रा की जाए। इन्हे पंचबद्री कहा जाता है। ये है- आदिबद्री, ध्यानबद्री, योगबद्री, विशालबद्री और भविष्यबद्री।

इनमें आदिबद्री कुमाऊं के रास्ते गैरसैंण होते हुए बद्रीनाथ जाते मार्ग पर कर्णप्रयाग से 19 किलोमीटर पहले, समुद्र सतह से लगभग 3800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है

प्रसिद्ध चांदपुर गढी से यह मंदिर समूह 3 किलोमीटर दूर है। चांदपुर गढी उतराखण्ड के 52 गढ़ो में से एक है। यह प्रसिद्ध गढ था। किले के अवशेष आज भी मौजूद है। गढ़वाल में कत्यूरी राजाओं के ह  के बाद वहां कई गढपतियों का उदय हुआ। इनमें पवार वंश सबसे   शक्तिशाली था, जिसने चांदपुर गढी मे शासन किया। कनकपाल इस वंश का संस्थापक माना जाता है। उसने चांदपुर के भानु प्रताप की पुत्री   से विवाह किया और खुद वहां का गणपति बन गया।

स्कंद पुराण में वर्णन है कि ऋषि नारायण ने जिस स्थान पर तपस्या की थी, उसी जगह का नाम आगे चलकर आदिबद्री हुआ। ऋषि की तपस्या से घबरा कर स्वर्ग के राजा इन्द्र ने उनके तप में विघ्न डालने के लिए कुछ अप्सराए भेजी, किंतु इसके जवाब में ऋषि ने अपनी जांघ पर प्रहार कर एक कन्या उतपन्न की जो उर्वशी कहलायी। इस प्रकार उन्होंने इन्द्र का मान मर्दन किया। आदिबद्री के समीप भराडी गाँव को उर्वशी की क्रीड़ास्थली कहा जाता है।

आदिबदरी रानीखेत- कर्णप्रयाग मोटर मार्ग पर स्थित है। कुमाऊं के रास्ते आने वाले यात्रियों का यह पहला पड़ाव है। इस मंदिर के दर्शन करने के बाद ही यात्री आगे की यात्रा आरंभ करते हैं। मैंने चार बार आदिबद्री के दर्शन किए है। गौरतलब है कि भगवान विष्णु का बद्री नाम वाला क्षेत्र तीनों लोकों में परम दुर्लभ है। विष्णु पंच बद्री के इन मंदिरों में अपने विभिन्न रुपों में विराजते है।

आदिबद्री के मंदिर सातवीं- आठवीं सदी के आसपास कत्यूरी राजाओं द्वारा निर्मित बताए जाते हैं। आदि गुरु शंकराचार्य ने अपनी दिग्विजय यात्रा के दौरान कुछ मंदिरों का जीर्णोद्धार किया। मूलरुप से यह 16 मंदिरों का समूह था, अब 14 मंदिर बचे है। आज यह मंदिर समूह भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन है।

आदिबदरी के मंदिर शिखर शैली के है जो विशाल शिलाओं को काटकर और एक के ऊपर एक रखकर बनाए गए हैं। नींव पर से चकोर स्थापत्य शैली से इन्हे उठाया गया है। ऊपर जाकर शिखर पर ये धीरे-धीरे तंग हो जाते है और शिखर पर सूर्य शिला इस शैली को पूर्ण करती है। इतिहासकारों ने इन मंदिरों की बनावट को रेखा देवल शैली, पीढा देवल शैली और खाकरा देवल शैली मे बाँटा है। इन मंदिरों की बनावट जागेश्वर और द्वाराहाट के मंदिरों से मिलती जुलती है। इससे यह भी प्रतीत होता है कि ये सभी मंदिर एक ही काल सदी मेें निर्मित हुए हैं।

हल्द्वानी से सुबह सात बजे चले तो एक या दो बजे के आसपास आप यहाँ पहुँच जाएंगे। ठीक दाई ओर यह मंदिरों का समूह है। आदिबद्री एक मंदिर न होकर कई मंदिरों का समूह है जो एक ही प्रांगण में सिमटे हुए हैं। बीच में मुख्य मंदिर है, जिसकी ऊंचाई बीस फीट है। मंदिर के गर्भगृह में चार फीट की मूर्ति स्थापित है। काले पत्थर से बनी मूर्ति चार खंडो में विभक्त है, परन्तु मूर्ति के सौन्दर्य व सजीवता को देखकर नहीं लगता कि यह चार खंडो में विभक्त है

यह मूर्ति खड़ी मुद्रा में है तथा इसके दाएं अधोहस्त में पदम नहीं है। यह हाथ वरद मुद्रा में है जिसे रजो मुद्रा कहते हैं। मूर्ति के वृक्ष पर लक्ष्मी जी का प्रतीक श्री वत्स अंकित है। मूर्ति के आसपास कई उप मूर्तियां उत्कीर्ण है। पहले ठीक ऊपर नवग्रह पंक्ति है। दांई तथा बांई ओर क्रमश: विष्णु व शिव पत्नियों सहित आसीन हैं। इसके ठीक ऊपर भगवान नारायण योगासन की मुद्रा में विराजमान हैं।

यहाँ सभी मंदिर आकर्षक मूर्तियां से युक्त है। सभी मूर्तियां प्रस्तर खंडो की बनी है। मुख्य मंदिर के ठीक सामने गरुड़ का मंदिर है। इसमें गरुड़ की दिबाहू मूर्ति है , जो बांया घुटना टेके दोनों हाथों में अमृत घट लिए हुए है। लक्ष्मी नारायण तथा सत्यनारायण के मंदिर छोटे परंतु अपनी स्थापत्य के साथ आकर्षित करते है। इन मंदिरों के अतिरिक्त अन्नपूर्णा देवी तथा महिषासुर मर्दिनी आदि के मंदिर भी कलात्मक शैली के लिए जाने जाते हैं।

आदिबदरी के मंदिरों में स्थित मूर्तियों ने तस्करों को बार बार ललचाया है। यहाँ 1965, 1966 और 1967 मे लगातार तीन बार मूर्तियों की चोरी हुई। 1967 मे मूर्ति चुराकर ले जा रहे तस्करों को ऋषिकेश में पकड़ लिया गया। विदेश पहुंचने पर इन मूर्तियों की कीमत करोडों में होती। कई सालों तक यह मूर्ति विभिन्न अदालतों में रही। 1986 मेें 14 से 21 जनवरी तक आदिबद्री धाम में हुए एक समारोह में मूर्ति की पुन: प्राण प्रतिष्ठा हुई।

यहाँ एक बहुत प्रसिद्ध मेला  नोठा कोथीग भी लगता है, जिसमें कई गांवों के लोग भाग लेते हैं। यह मेला बैशाख माह के पांचवे अथवा ज्येष्ठ माह के पहले सोमवार से शुरु होता है। लोग परंपरागत वेशभूषा तथा ढोल नगाड़ों के साथ टोलियों में मंदिर आते हैं।

आदिबद्री चमोली जिले मे है। यहां से चमोली 50 किलोमीटर और बद्रीनाथ 140 किलोमीटर दूर है।

आदिबद्री के ठीक सामने एक छोटी नदी बहती है, जिसका नाम उत्तर नारायण गंगा है। यह नदी दुधातोली से निकलती है। उत्तर दिशा की ओर बहते हुए यह सिमली ( कर्णप्रयाग) मे पिंडर नदी में मिल जाती है। पिंडर नदी कर्णप्रयाग मे अलकनंदा नदी से मिल जाती है। धापली गाँव के थपलियाल लोग मंदिर मे पुजारी का काम करते हैं। मंदिर की देखरेख के लिए मंदिर समिति भी बनाई गई है। (विभूति फीचर्स)

मुख्यमंत्री धामी ने ऋषिकेश स्थित एम्स ’NMOCON-2024’ के 43वें राष्ट्रीय अधिवेशन का किया शुभारंभ

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देहरादून,24 फरवरी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश स्थित एम्स में नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन के 43 वें दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन ‘NMOCON- 2024’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया !

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने अधिवेशन में आए चिकित्सक एवं छात्रों का उत्तराखंड में स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानने वाला यह संगठन निरंतर ’नर सेवा नारायण सेवा’ के भाव से देश में अपनी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। देश के विभिन्न स्थानों पर चिकित्सकों और छात्रों द्वारा स्वास्थ्य से जुडे विभिन्न विषयों पर चिंतन करना सराहनीय प्रयास है। इस प्रकार ’’स्वास्थ्य सेवा से राष्ट्र सेवा’’ और ’’स्वास्थ्य सेवा ही राष्ट्र सेवा’’ के सिद्धांत को अपनाकर संगठन द्वारा अंत्योदय की भावना से कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत में स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। साथ ही स्वास्थ्य के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर सुधार जारी है, इनमें सस्ते उपचार व दवाइयां, ग्रामीण स्तर पर आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, मानव संसाधन का विकास और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने के लिए तकनीक का उपयोग आदि शामिल है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवा में अंत्योदय की सोच के साथ कार्य कर रही है। पिछले दस वर्षों में देश में 200 से अधिक नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण हुआ है। वर्तमान में 22 से अधिक एम्स में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। साथ ही योग और आयुष को लेकर देश में और अधिक जागरूकता आई है। विश्व में योग को लेकर आकर्षण बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान एवं जल जीवन मिशन ने कई रोगों की रोकथाम में सहायता की है। पोषण अभियान देश में कुपोषण को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध हुआ है। राष्ट्रीय टेली-मेडिसिन सेवा-ई-संजीवनी ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग सुदूर क्षेत्र में स्थित रोगियों के डायग्नोसिस, उपचार और प्रबंधन को सक्षम करने के लिए किया है। इनके उपयोग से सुदूर गांव में रहने वाला कोई व्यक्ति भी शहरों में रहने वाले चिकित्सकों से शुरुआती परामर्श प्राप्त कर सकता है। स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन शुरू किया गया है। जो स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाभार्थियों तक सुविधाओं को पहुंचाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के परस्पर समन्वय से कार्यों का सफल सम्पादन किया जा रहा है। प्रदेश में सभी को निःशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही कैशलेस उपचार देने की दिशा में अटल आयुष्मान योजना प्रभावी साबित हो रही है। अब तक करीब 55 लाख से ज्यादा लोगों का आयुष्मान कार्ड होल्डर के रूप में पंजीकरण हो चुका है। अटल आयुष्मान योजना और आयुष्मान कार्ड की सहायता से 5 लाख से अधिक मरीजों ने समय पर अपना इलाज भी कराया है। प्रदेश सरकार जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार कई योजनाएं चला रही है। गर्भवती महिलाओं के लिए ’जननी सुरक्षा योजना’ के अंतर्गत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए इस योजना का संचालन किया जा रहा है। इन्द्रधनुष योजना के तहत बच्चों का निःशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। आमजन की मधुमेह, रक्तचार, स्तन कैंसर एवं मुंह के कैंसर की निःशुल्क जाँच तथा स्क्रीनिंग के लिए हैल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर संचालित किए जा रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हैल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर के माध्यम से आम जनमानस को उनके क्षेत्रों में स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने के लिए जन आरोग्य अभियान का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन का उद्देश्य क्षय रोगियों को रोग मुक्त करना है, जिसके लिए भारत को क्षय मुक्त बनाने के लिए 2025 का लक्ष्य रखा गया है। जबकि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024 तक इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए धरातल पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ने संपूर्ण विश्व का नेतृत्व किया। कोरोनाकाल में देश के साथ विदेशों में भी निःशुल्क वैक्सीन दी गई। प्रधानमंत्री जी द्वारा शुरू किए गए हर अभियान का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को मिल रहा है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य सरकार ’’विकल्प रहित संकल्प’’ के आधार पर निरंतर कार्य कर रहे हैं। सभी के सहयोग से हम स्वस्थ, समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का निर्माण करने में सफल होंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल, डॉ. धन सिंह रावत, निदेशक एम्स प्रो. मीनू सिंह, आरएसएस सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि एवं अन्य लोग उपस्थित थे।

भारत सरकार की खेल मंत्रालय मामले विभाग एवं नेहरू युवा केंद्र संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित हुए डॉ निकेश जैन माधानी 

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अभिनेता रंजीत, डॉ निकेश जैन माधानी और रामकुमार पाल ने मेधावी छात्रों को किया सम्मानित

मुंबई। भारत सरकार की युवा मामले एवं खेल मंत्रालय युवा मामले विभाग, नेहरू युवा केन्द्र संगठन और महाराष्ट्र – गोवा जोन, मुंबई द्वारा राज्य स्तरीय भाषण प्रतियोगिता प्रतियोगिता का आयोजन जेपी नाईक भवन विद्यानगरी कलीना, सांताक्रुज मुंबई में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का विषय “मेरा भारत – विकसित भारत @2047” रखा गया था। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रंजीत और डॉ निकेश जैन को सम्मानित किया गया।
उसी अवसर पर मेधावी छात्रों को बॉलीवुड सीनियर एक्टर रंजीत, बिजनेसमैन निकेश ताराचंद जैन माधानी, समाजसेवक राम कुमार पाल, प्रकाश कुमार मनुरे (राज्य निदेशक, एनवाईकेएस, महाराष्ट्र – गोवा) और कई दिग्गज हस्तियों के हाथों पुरस्कार प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम में डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय (वरिष्ठ प्रोफेसर, हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय), डॉ शीतला प्रसाद दुबे (कार्यकारी अध्यक्ष, महा. हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई), डॉ. शिवाजी सरगर (एचओडी, अंग्रेजी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय) और निशांत रौतेला (जिला युवा अधिकारी, एनवाईके, मुंबई) की उपस्थिति रही।
अमृत काल के दौरान भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए युवाओं को उनके भविष्य के विकास और सशक्तिकरण के लिए नेतृत्व गुणों सहित युवा वक्ताओं को कौशल दिखाने और अपने साथियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक सुनहरा अवसर मिला।
इस भाषण प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि रहे डॉ निकेश जैन माधानी के बारे में आपको बता दें कि पिछले दिनों रामायण धारावाहिक में सीता की भूमिका निभाने वाली ख्याति प्राप्त अभिनेत्री दीपिका चिखलिया के हाथों डॉ. निकेश जैन दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड 2024, पार्श्वगायक उदित नारायण के हाथों अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024 और अभिनेता सोनू सूद के हाथों एशियन एक्सीलेंस अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
इसके साथ ही उन्हें सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023 मिला है।
आपको बता दें कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन मधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। पिछले दिनों ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी ने अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित किया। निकेश को परफेक्ट वुमेन अचीवर अवॉर्ड, गोल्डन ह्यूमेनिटी अवॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं आईपीएस कृष्ण प्रकाश नायर 2021 और 2022 में उन्हें अवॉर्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं।
डॉ निकेश जैन मधानी फाइनेंस एडवाइजर हैं और इनके कई बिजनेस हैं जैसे कि मधानी फाइनेंस, मधानी एंटरटेनमेंट एंड प्रोडक्शन, मधानी ट्रेडिंग कंपनी, मधानी न्यूज लाइव 24×7 और मधानी इंटरप्राइज इत्यादि। इसके साथ ही निकेश की माँ के नाम पुष्पा गृह उद्योग कंपनी और पुष्पम पापड़ कंपनी है। जल्द ही मधानी कंपनी की लिस्टिंग हो जायेगी।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी ने एक हिंदी कॉमेडी फिल्म प्रोड्यूस की है। इसके पहले उन्होंने 12 म्यूजिक एल्बम ओर शॉर्टफिल्म को माधानी एंटरटेनमेंट और प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।
निकेश ताराचंद जैन मधानी ने लॉ बुक में इतिहास बनाया है। दरअसल उनके ऊपर 2014 में ईडी पीएमएलए का केस हो गया था। फिर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ते हुए 2017 में सुप्रीम कोर्ट से धारा 45 ए रद्द हुआ जिससे कानून के किताब में डॉ निकेश जैन मधानी का नाम दर्ज हुआ और उनके ऊपर लगे धारा को हटाने में प्रसिद्ध वकील मुकुल रोहतगी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। निकेश जैन की कानून लड़ाई में जाने माने वकील साजल यादव, वकील नेमीचंद शर्मा और वकील मनीष वोरा ने भी सहयोग किया।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी सबसे सफल व्यवसायी रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम आदानी और लक्ष्मी मित्तल से प्रेरित हैं।

– संतोष साहू