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भारत सरकार के पूर्व उपसचिव बसंत कुमार मछलीशहर लोकसभा सीट से भाजपा के प्रबल दावेदार।

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जौनपुर। आज हम उत्तर प्रदेश मे मछली शहर लोक सभा सीट से भाजपा के ऐसे प्रबल दावे दार की बात कर रहे है जो शिक्षित, सक्षम्, मेहनती, मृदुभाषी होने के बावजूद भाजपा से लगातार इसलिए वंचित किये जाते रहे है क्योकि वे जिस बिरादरी से संबंध रखते है उसे बसपा का पारंपरिक वोट माना जाता रहा है पर अपनी राष्ट्रवादी सोच के कारण उन्होंने बसपा की ओर से पार्टी जॉइन करने के ऑफर को ठुकरा दिया और एक दशक से अधिक समय से भाजपा मे एक कार्यकर्ता के रूप मे लगे हुए हैं। हम बात कर रहे है जनपद जौनपुर के ग्राम पिपरा के निवासी व भारत सरकार के पूर्व उपसचिव व एन डी ए 1 सरकार मे एम एस एम ई मंत्रालय में सलाहकार रहे बसंत कुमार की।
उन्होंने सरकारी सेवा से स्वैक्षिक सेवा निर्वित्ति के पश्चात् वर्ष 2011 मे सदस्यता ग्रहण की तथा भाजपा के   वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र के सानिध्य मे हिंदुत्व व राष्ट्रवाद के विषय को गहराई से जाना और भाजपा के नीतियों और कार्यक्रमो के प्रचार प्रसार में कड़ी मेहनत की और 2011 मे लाल कृष्ण अडवाणी और कलराज मिश्र के नेतृत्व मे जन स्वाभिमान यात्रा मे पूरे प्रदेश का भ्रमण किया।
जब वर्ष 2014 मे कलराज मिश्र देवरिया से चुनाव लड़ रहे थे तो बसंत कुमार की कड़ी मेहनत की और पूरे क्षेत्र मे अपनी मौजूदगी का एहसास कराया और पूरे क्षेत्र में उन्हे कलराज मिश्र का करीबी कहा जाता था और जब नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल मे कलराज मिश्र एम एस एम ई मंत्री बनाये गए तो बसंत कुमार को इस मंत्रालय मे सलाहकार बनाया गया।
एक लेखक के रूप मे उन्होंने निम्न किताबे लिखी 1- राष्ट्रवादी कर्म योगी 2- हिंदुत्व एक जीवन शैली 3- युवाओ के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद 4- एकात्म वाद भाजपा का संकल्प 5- भारत में उदयमिता 6- आंबेडकर और राष्ट्रवाद इन पुस्तको का लोकार्पण भाजपा के शिखर पुरुष लाल कृष्ण अडवाणी, डा मुरली मनोहर जोशी, राज नाथ सिंह, कलराज मिश्र, डा सत्य नारायण जटिया, योगी आदित्यनाथ आदि महान व्यक्तियों द्वारा किया गया। इसके अतिरिक्त वे जाने माने स्तंभकार है, उनके द्वारा लिखे गए स्तंभ प्रति सप्ताह प्रमुख दैनिक अखबरो व पत्र पत्रिकाओं मे प्रकाशित होते रहते हैं जिनमे बड़ी बेबाकी से अपने विचार रखते हैं।
उनके पिता गुरु प्रसाद(बड़े बाबू) प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने अपनी कालेज शिक्षा वर्ष 1941 मे कठिन परिस्थितियों में पूरी की,क्योकि उस समय कालेज मे शिक्षा प्राप्त करना सिर्फ सवर्ण जमीदारो का एकाधिकार होता था, शिक्षा के प्राप्त 1946 मे भारत सरकार मे डाक तार विभाग मे बिना आरक्षण के नौकरी प्राप्त की। उनके देहांत के 7 वर्ष बाद भी क्षेत्र के लोग गुरु प्रसाद ( बड़े बाबू) का नाम बड़ी श्रद्धा से लेते है।अपने पिता की भाति बसंत कुमार ने भी शिक्षा मे टापर रहे और मड़ियाहु महाविधालय में वर्ष 1977-78 मे टाॅपर होने के कारण कालेज छात्र यूनियन मे प्रतिनिधि के नाम से मनोनीत किये गए। वे हमेशा इस बात के पक्ष धर रहे कि आरक्षण का लाभ वंचित समाज के निर्धन व्यक्तियों को ही मिले और जो लोग एक बार आरक्षण का लाभ लेकर संपन्न हो चुके है,उन्हे अपने बच्चो के लिए आरक्षण का लाभ स्वत: छोड़ देना चाहिए जिससे उसका लाभ वंचित समाज के निर्धनों को मिल सके, अपनी इसी सोच के कारण उन्होंने अपने दोनों बेटो को दिल्ली के टॉप की शिक्षण संस्थाओ मे शिक्षा दिलाई और आरक्षण का लाभ लेकर आईएएस या आईपीएस बनाने के बजाय ऐसी फील्ड चुनी जहा आरक्षण का ठप्पा न हो,उनका बड़ा बेटा अजीत रंजन दिल्ली क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने के बाद इंग्लैंड मे काउंटी क्रिकेट खेल रहा है,जबकि छोटा बेटा विनीत रंजन सर्वोच्च् न्यायालय मे एडवोकेट है।
बसंत कुमार एक पहल नामक एनजीओ के राष्ट्रीय महासचिव है और अपनी संस्था के माध्यम से वंचितो और निर्धनों की शिक्षा और रोजगार मे मदद करने के लिए तत्पर रहते है। वे विधायक या सांसद न होते हुए भी मछली शहर ( जौनपुर) के लोगो की मदद हर समय करते हैं चाहे वह दिल्ली मे काम हो या मछली शहर मे। बसंत कुमार की विशेषता जो उन्हे अन्य लोगो से अलग रखती हैं कि वे अपने प्रतिद्वंदियों को भी दिल्ली मे बड़े राष्ट्रीय नेताओ से मिलाने में कोताही नही करते।
ऐसे सरल स्वभाव के बहुमुखी प्रतिभा के धनी व विद्वान लेखक बसंत कुमार को भाजपा अपना प्रत्याशी बनती है,तो भाजपा की भारी मतो से जीत होगी और क्षेत्र मे चहुंमुखी विकास होगा।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को नया आयाम दिया है : श्री मुंडा

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NEW DELHI – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज आईएआरआई, दिरपई चापोरी, गोगामुख, असम में प्रशासनिक-सह- शैक्षणिक भवन, मानस गेस्ट हाउस, सुबनसिरी गर्ल्स हॉस्टल और ब्रह्मपुत्र बॉयज हॉस्टल का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी उद्घाटन समारोह में उपस्थित थे और उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, असम में प्रदर्शनी स्टाल का दौरा किया।

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केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर विशेष बल है।  उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि के विकास की कमियों को दूर कर उन्हें मुख्यधारा में लाने का काम किया है। इस क्रम में  प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को एक नया आयाम दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है, जिसमें कृषि की भूमिका बेहद अहम है। श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि खाद्य तेल आयात का बोझ कम करने और तिलहन में आत्मनिर्भर बनने के लिए 11 हजार करोड़ रुपये का मिशन चलाया जा रहा है। हमें इस सोच के साथ काम करना है कि आने वाले दिनों में हम आयात नहीं बल्कि निर्यात करेंगे। उन्होंने कहा कि जब हम एक विजन के साथ काम करते हैं, तो हमें सफलता जरूर मिलती है।

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श्री अर्जुन मुंडा ने जलवायु अनुकूल फसल किस्मों के विकास पर भी बल दिया और कहा कि कृषि शिक्षा को आजीविका व रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाना चाहिए।  श्री मुंडा ने कहा कि जैव विविधता अध्ययन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एक साल में यह संस्थान शोध के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रौद्योगिकियों को जलवायु और लैंगिक स्तर पर तटस्थ होना चाहिए।

 

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राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने वैज्ञानिकों से उत्तर पूर्व क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक विविधता का दोहन करने का आग्रह किया।  उन्होंने प्रकृति के करीब प्रौद्योगिकियों के विकास पर भी बल दिया और कहा कि हमें जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़ना चाहिए। उन्होंने दलहन और तिलहन से संबंधित अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया, ताकि देश को दालों के निर्यात पर बहुत अधिक पैसा खर्च न करना पड़े। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान को उद्यमिता से जोड़ना होगा; और यह सब तभी संभव है जब विभिन्न संगठनों के बीच विचारों का मुक्त आदान-प्रदान हो।

 

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असम सरकार के शिक्षा, सामान्य जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री डॉ. रनोज पेगु ने आईएआरआई, असम के प्रयासों की सराहना की।  उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आईएआरआई, असम द्वारा किया जाने वाला शोध कार्य पौधों, पशुओं और मत्स्य विविधता पर विचार करने के साथ-साथ पर्यावरण के संरक्षण में भी सहायक होगा।

 

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लखीमपुर के सांसद श्री प्रदान बरुआ ने कहा कि यह हमारा स्वप्न था कि असम में इस स्तर का एक संस्थान बने। हमें आशा है कि यह संस्थान पूरे उत्तर-पूर्व भारत के युवा प्रतिभाओं की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।

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डीएआरई के सचिव और आईसीएआर नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने वर्चुअल माध्यम से उपस्थितजनों को संबोधित किया और आईएआर आई असम के उद्देश्यों व दायित्वों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उत्तर-पूर्व भारत में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अनुसंधान और विकास के माध्यम से तलाशने की जरूरत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आईसीएआर यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा कि संस्थान तेजी से प्रगति करता रहे। इस संस्थान का खुलना आईसीएआर के इतिहास में एक यादगार दिन है। उन्होंने संस्थान के विकास से जुड़े लोगों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

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आईएआरआई के निदेशक डॉ. ए.के. सिंह ने आईएआरआई, असम की श्रमिक समिति द्वारा किए गए सभी प्रयासों की सराहना की।  इस अवसर पर डॉ. डी.के.सिंह, डॉ. अनिल सिरोही, डॉ. मनोज खन्ना, डॉ. अनुपम मिश्रा, भार्गव शर्मा, डॉ. वाई.एल.सिंह, डॉ. के.बी.पुन, श्री अंकुर भराली और धेमाजी के जिला कमिश्नर भी उपस्थित थे।

2030 तक प्राकृतिक गैस की खपत में तीन गुना वृद्धि होगी: पेट्रोलियम मंत्री

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New Delhi शहरी  गैस वितरण (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन-सीजीडी) नेटवर्क के विकास के लिए देश के क्षेत्र में 100% कवरेज प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने आज यहां  सीजीडी बोली के 12वें दौर के लिए आयोजित एक समारोह की मेजबानी की। इस कार्यक्रम का उद्घाटन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और आवास और शहरी मामलों के मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री के सलाहकार श्री तरूण कपूर, पीएनजीआरबी के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जैन, बोर्ड के सदस्यों और पीएनजीआरबी के सचिव की उपस्थिति में किया। इसमें देश के तेल और गैस क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों और 12वें सीजीडी बोली दौर के सफल बोलीदाताओं की बड़ी उपस्थिति थी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी सफल बोलीदाताओं को आशय पत्र वितरित करते हुए

इस के दौरान, श्री हरदीप सिंह पुरी ने सीजीडी बोली के 12वें दौर के सफल बोलीदाताओं को उनके संबंधित भौगोलिक क्षेत्रों के लिए आशय पत्र वितरित किया। मंत्री महोदय ने एक सुदृढ़ तेल और गैस बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) और सफल बोलीदाताओं के प्रयासों को स्वीकार किया। मंत्री महोदय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने अंतिम उपभोक्ता को स्थिर मूल्य पर प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराने के लिए अगले छह वर्षों में प्राकृतिक गैस क्षेत्र में 67 बिलियन अमेरिकी  डॉलर का निवेश करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में देश में प्राकृतिक गैस को बढ़ावा देने के लिए नीति और नियामक ढांचे के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है।

श्री पुरी ने बताया कि सरकार द्वारा नियोजित वर्तमान मौजूदा उपायों से प्राकृतिक गैस की खपत में 2030 तक तीन गुना यानी 185 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर प्रति दिन(एमएमएससीएमडी) से 500 एमएमएससीएमडी तक वृद्धि होगी और इससे प्राकृतिक गैस पर निर्भर सहायक उद्योगों को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। मंत्री जी ने एकीकृत टैरिफ सुधार लाने के लिए पीएनजीआरबी की सराहना की, जिससे विशेष रूप से देश के दूर-दराज के क्षेत्रों के ग्राहकों को लाभ होगा।

12वें सीजीडी बोली दौर के बारे में विस्तार से विवरण देते  हुए  मंत्री महोदय ने कहा कि 12वें बोली दौर में पूर्वोत्तर के 06 राज्यों- अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, सिक्किम और मिजोरम और 2 केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर लद्दाख को कवर करते हुए कुल 8 भौगोलिक क्षेत्रों का प्रस्ताव किया गया था। इस दौर में कुल मिलाकर 103 जिले शामिल हुए। उन्होंने कहा कि  “इस दौर के बाद, पूरे देश में (द्वीपों को छोड़कर) सिटी गैस वितरण नेटवर्क के विकास के लिए प्राधिकरण प्रदान किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि 12वें सीजीडी बोली दौर के लिए अनुमानित निवेश रु. 41,000 करोड़ से रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं।

देश के प्राकृतिक गैस बुनियादी ढांचे की  एक तात्कालिक त्वरित झलक देते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि देश में 33,753 किलोमीटर से अधिक प्राकृतिक गैस ट्रंक पाइपलाइन अधिकृत हैं, जिनमें से लगभग 24,623 किलोमीटर पाइपलाइन वर्तमान में चालू हैं। उन्होंने कहा कि देश में 300 भौगोलिक क्षेत्र  (जीएएस अधिकृत हैं, जो सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए 98% जनसंख्या  और 88% क्षेत्र को कवर करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि “देश में अब तक 1.21 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन और 6,258 सीएनजी स्टेशन स्थापित किए गए हैं और यह सब भारत के मजबूत गैस ग्रिड के कारण संभव हो सका है।

जन समुदाय को संबोधित करते हुए, पीएनजीआरबी के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जैन ने पूरे देश में एक जीवंत और टिकाऊ गैस बुनियादी ढांचे के निर्माण पर वर्तमान फोकस को स्पष्ट किया जिसमे इन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए इस बोली दौर की शुरुआत इन क्षेत्रों के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर स्वच्छ ईंधन प्रदान करने के लिए एक रणनीतिक कदम को दर्शाती है। डॉ. जैन ने आगे बताया कि इन राज्यों में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस- सीएनजी) की अत्यधिक संभावनाएं हैं। इस संबंध में, पूर्वोत्तर गैस ग्रिड और गुरदासपुर-जम्मू प्राकृतिक गैस पाइपलाइन का विकास, जिन्हें अब अधिकृत किया गया है, प्राकृतिक गैस नेटवर्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

श्री तरूण कपूर ने बोली दौर में शहरी गैस वितरण (सीजीडी) पहल के माध्यम से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) द्वारा की गई प्रभावशाली प्रगति की सराहना की। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि 12वें सीजीडी बोली दौर के अंतर्गत प्रस्तुत किए गए भौगोलिक क्षेत्र (जीएएस) कठिन क्षेत्र हैं जिनके लिए उच्च पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त, श्री तरूण कपूर ने यह भी कहा कि पीएनजी कनेक्शन और सीएनजी की कनेक्शन संख्या को और भी आगे बढ़ाने की आवश्यकता है और इसे प्राप्त करने के लिए उन्होंने वर्तमान उद्योगों को स्थिर और प्रतिस्पर्धी मूल्य प्रदान करके प्राकृतिक गैस में स्थानांतरित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। श्री तरूण कपूर ने यह भी साझा किया कि हाइड्रोजन मिश्रण या संपीड़ित बायो-गैस मिश्रण के साथ प्राकृतिक गैस के संयोजन का भी पता लगाया जाना चाहिए।

2014 तक, देश में सिटी गैस वितरण नेटवर्क के विकास के लिए केवल 57 भौगोलिक क्षेत्र अधिकृत थे। उसके बाद से  सीजीडी क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई है और 12वें सीजीडी बोली दौर के सफल समापन के साथ, जिसमें 7 और भौगोलिक क्षेत्रों  (जीएएस)  को अधिकृत किया जा रहा है, पिछले 10 वर्षों में सीजीडी नेटवर्क के  विकास हेतु 250 जीए के अलावा, पूरे देश को सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए अधिकृत किया गया है।

पीएनजीआरबी की यह ऐतिहासिक उपलब्धि घरों के लिए स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच प्रदान करने के साथ ही औद्योगिक और वाणिज्यिक सुविधाओं और ईंधन परिवहन का समर्थन करेगी और यह गैस आधारित अर्थव्यवस्था को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ी छलांग होगीI इससे देश के प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण में भी बहुत सहायता मिलेगी ।

महा शिवरात्रि पर विशेष – सुख समृद्धि कारक पारद शिवलिंग

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महर्षि डॉ.पं.सीताराम त्रिपाठी शास्त्री- 

पारद के पिरामिड, फेंगं शुई,श्रीयंत्र की स्थापना कराने से मनचाहा कार्य होता है परन्तु पारद शिवलिंग की स्थापना एवं आराधना से मनुष्य इस जीवन में भौतिक सुखभोग कर स्वर्ग में निवास करता है। महाशिवरात्रि के दिन पारे का शिवलिंग बनवाकर अपने घर पर विधि-विधान से स्थापित करने से मानवीय एवं दैविक शक्ति प्राप्त होती है।
वैसे समस्त देवताओं में सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले भगवान शिव है इसलिए उनका नाम आशुतोष भी है। शिवजी त्याग, सादगी, सरलता के साक्षात स्वरूप है। भोलेनाथ, अवढर दानी, अवधूत, परमवैरागी, महान योगी, महान दानी, कृपालु देवता, उदारता की सजीव प्रतिमा है। शिवलिंगों के रूपाकार में विभिन्न प्रतिमाओं का प्रभाव और प्राचीनता, यह सब इस तथ्य के प्रमाण है कि मानव-सभ्यता के आदि काल से ही शिवजी पूज्य रहे है। पारद शिवलिंग की यह पूजा एवं साधना, तंत्र साधना ही मानी जाती है। आप कहीं से भी शुद्घ, सिद्घ पारद शिवलिंग प्राप्त कर उस पर महाशिवरात्रि के दिन नियमित रूप से बिल्वपत्र चढावे तथा भगवान शिव के पंच्चाक्षर मंत्र ऊँ नम: शिवाय: का 11 माला जाप कर दुग्ध से अभिषेक करे।
आश्चर्यजनक फल उसी क्षण से साधक को मिलने लग जायेंगे। प्राण प्रतिष्ठा व 16 संस्कार युक्त पारद शिवलिंग होना चाहिये। शुद्घ पारे से तांत्रिक साधना द्वारा पारद शिवलिंग का निर्माण किया जा सकता है । भगवान शिव के दो रूप तत्काल सिद्घि प्रदान करने वाले है। ये रूप है पारद शिवलिंग, और जलमग्न शिवलिंग। काले पत्थर में जल का होना और उसके आधार में उपस्थित शिवलिंग महान फल प्रदान करने वाला होता है। अस्तु मेरा मुख्य बिन्दु पारद शिवलिंग है फिर भी जलमग्न शिवलिंग के दर्शन का महत्व धर्म शास्त्रों में कम नहीं है।;शताश्व मेघेन कृतेन पुप्यंगोकोटिमि:, स्वर्ण सहस्प्रदानात्ï’। ;नृणां भेवत्ï जलमग्नदर्शन मेन: यत्सर्वतीर्थ पु कृतामिषकात्’॥ अर्थात जो पुण्य 100 अश्वमेघ यज्ञ करने से, करोड़ों गोदान करने से, 1000 तोले के स्वर्ण दान करने से, तथा सभी तीर्थो के दर्शन सम्पन्न करने से प्राप्त होता है वह पुण्य जलमग्न शिवलिंग के दर्शन मात्र से सहज में ही प्राप्त हो जाता है। घर पर स्थापना की लीला ही अलग है। इसी प्रकार पारद शिवलिंग का महत्व है।
केदार दीनी लिंगनि, पृथित्यां यानि थानिचित्ï।
तानि दृष्टंवासु यत्पुण्यतत्पुण्यं रसदर्शनात्॥
अर्थात हिमालय में केदारनाथ आदि पवित्र तीर्थ स्थलों से लेकर पृथ्वी तल पर स्थित समस्त शिवलिंग तथा सम्पूर्ण भारत वर्ष में द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन से जो पुण्य मिलता है वही पुण्य फल पारद निर्मित शिवलिंग की घर में विधि-विधान से स्थापना व दर्शन मात्र से श्रावण माह एवं शिवरात्रि में सहज रूप से प्राप्त हो जाता है।
रसविधा, पराविधा, त्रैलोक्ये पिं च दुल्र्लभया।
भूक्ति-मुक्ति करी यास्यात्, तस्मात् यत्नेन गोपयेत॥
अर्थात जो पुण्य हजार स्वनिर्मित पार्थिव शिवलिंग के पूजन से प्राप्त होता है उससे करोड़ों गुना फल पारद शिवलिंग  के पूजन से प्राप्त होता है। रसविधा ही पारदविद्या कहलाती है। उड्ïडीश तंत्र भी यही कहता है कि पारद शिवलिंग भोग, मोक्ष, ऐश्वर्य का प्रदाता है। अत: मनुष्य को चाहिये कि श्रावण माह एवं महाशिवरात्रि पर पारद शिवलिंग स्थापित कर पूजन करे।
रसेन्द्र पारद: राज सूत: सूतराजच्च।
;शिवतेजो रस षप्त नामन्येनं रहस्य नं ॥
अर्थात रसेन्द्र, पारद, सूत, सूतराज, सूतक, शिव तेजरस ये सात नाम पारद के है। पारे से शिवलिंग बनाया जाय तो अपने आप में अद्ïभुत तेजस्वी तथा वर-दायक शिवलिंग बनता है। सही अर्थो में ऐसे शिवलिंग को ही पारदेश्वर शिवलिंग कहा जाता है। जहां पारद शिवलिंग होता है वहां केवल मात्र पारदेश्वर शिवलिंग ही नहीं होता अपितु भगवती लक्ष्मी, अन्नपूर्णा, कुबेर भी साथ में स्थापित हो जाते है।
ऐसे घर में लक्ष्मी पूर्ण रूप से चैतन्य होकर स्थापित हो जाती है और धन, धान्य, भूमि, भवन, कीर्ति, यश, दीर्घायु, पुत्र, पौत्र, वाहन और सम्पूण सिद्घियों के साथ लक्ष्मी का निवास उसके घर में होता है। स्वयं भगवान शिव कहते है..
पारदेश्वर स्थापित्यं लक्ष्मी सिद्घि तद् गृहें।
धनं धान्यं धरा पौत्रं पूर्ण सौभाग्य वै नर:॥
अर्थात जिसके घर में आठों संस्कारों से युक्त पारद से निर्मित पारदेश्वर शिवलिंग स्थापित होता है वहां मेरे साथ-
साथ कुबेर, विष्णु, लक्ष्मी, सौभाग्य, अवश्य मिलता है। वशिष्ठ जी ने अपने ग्रन्थ में कहा…
पारदेश्वर स्थापित्यं सर्व पाप विमुच्चते।
;सौभाग्यं सिद्घि प्राप्यन्ते पूर्ण लक्ष्मी नर:॥
अर्थात चाहे व्यक्ति ने कितने ही पाप किये हो, चाहे उसके जीवन में पूर्व जीवन कृत दोष हों चाहे विधाता ने उसके जीवन में पूर्ण सौभाग्य लिखा ही नहीं हो फिर भी यदि वह अपने घर में पारदेश्वर शिवलिंग को स्थापित करता है तो पूर्ण सौभाग्यशाली बन जाता है। एक अन्य स्थान पर महर्षि याज्ञवल्क्य ने भगवान पारदेश्वर के बारे में कहा है…किं दारिद्रयं दुख:पाप किं रोग शोकच:।
;पारदेश्वर पदं साक्षात लक्ष्मी पूर्ण सौभाग्य प्राप्यते॥
अर्थात मुझे समझ में नहीं आता है कि मनुष्य के जीवन में दरिद्रता क्यों है। वह दु:खी संतप्त और पीडि़त क्यों है। उसके जीवन में अभाव व बाधाएं क्यों है जबकि उसके पास आठों संस्कार युक्त पारद से निर्मित भगवान पारदेश्वर है।
स्वयं माता लक्ष्मी जी ने कहा कि.
पारदेश्वर सिद्घि वै साफल्यं लक्ष्मी च श्रिय।
कनक वर्षा, धनं पौत्र सौभाग्य वै नर:॥
अर्थात इस कलियुग में मानव जीवन की पूर्णता, सम्पन्नता श्रेष्ठता और सफलता का एक मात्र उपाय पारद
शिवलिंग’ प्राप्त कर महाशिवरात्रि पर स्थापित करना है। रावण ने पारद शिवलिंग का निर्माण कर उससे अपनी नगरी को स्वर्णमयी बनाकर यह सिद्घ कर दिया था कि पारदेश्वर की साधना से सब कुछ सम्भव है। स्वयं शिव भक्त
रावण ने कहा है…
पारदेश्वर महादेव स्वर्ण वर्षा करोति य्।
सिद्घिदं ज्ञानदं मोक्ष पूर्ण लक्ष्मी कुबेर य:॥
अर्थात स्वयं रावण ने कहा है कि मैने यह अनुभव किया है कि पारदेश्वर स्थापना व पूजन और साधना के आगे अन्य सभी साधनायें, प्रयोग व उपाय सभी तुच्छ है। मैंने केवल महाशिवरात्रि पर पारदेश्वर की स्थापना व पूजन कर पारद के ही माध्यम से स्वर्ण वर्षा सिद्घसूत से स्वर्ण निर्माण रसायन क्रिया कर लंका नगरी को स्वर्ण बनाने की प्रकिया सम्भव की थी। रसार्वण तंत्र व शिवपुराण में लिखा है ;धर्मार्थकाम मोक्षाख्या पुरूषार्थश्चतुर्विधा।
सिध्यंति नात्र सन्देहो पारद रस राज प्रसादत:॥
अर्थात जो मनुष्य पारद शिवलिंग की महाशिवरात्रि एवं श्रावण माह में एक बार भी पूजा कर लेता है उसे इस मानव जीवन में ही अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष, चारों पुरूषार्थो की प्राप्ति हो जाती है। (विनायक फीचर्स)

घोटिया आम्बा तीर्थ : पांडवों ने जहां शिव की आराधना की

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  • स्वामी गोपाल आनन्द बाबा

घोटिया आम्बा स्थल राजस्थान के जनपद बांसवाड़ा में अवस्थित है। कई किलोमीटर में छितराए पहाड़ों के आँचल में घोटिया आम्बा तीर्थ के देवस्थलों के दर्शनों तथा स्नान आदि के लिए श्रद्धालु पहुंचते रहते हैं। घोटिया यानि घोटेश्वर शिव और आम्बा यानि पार्वती का यह स्थान द्वापर युग के अन्तिम चरण यानि महाभारत काल का स्मरण कराता है। राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती अँचलों से लोगों का आवागमन यहां अधिक होता है।

तीनों तरफ पर्वत से घिरे घोटेश्वर शिवालय में रक्ताभ शिवलिंग एवं देवी पार्वती की आकर्षक प्रतिमा है। पाश्र्व में दीर्घ अधिष्ठान पर श्वेत पाषाण निर्मित पाण्डव कुल की सात मूर्तियां हैं जिनका दर्शन एवं पूजन किया जाता है। मुख्य मंदिर के द्वार पर आकर्षक देव प्रतिमाओं के अतिरिक्त दो सिंह मूर्तियां एवं मध्य में ध्यानावस्थित महात्मा की प्रतिमा यहां की शान्ति एवं समन्वय को बहुत सुन्दरता पूर्वक अभिव्यक्ति देती है। इसके पास ही हनुमान मंदिर, यज्ञ कुण्ड, गोशाला, धर्मशाला, भोजनशाला है। घोटेश्वर शिवालय के पास ही पवित्र जल से भरा पाण्डव कुण्ड है, जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं। कुण्ड में ही शिला स्तम्भ पर शिवलिंग स्थापित है जिस पर श्रद्धालु भक्त जल व पैसे चढ़ाते हैं। श्रद्धालु केलापानी के देवालय, बजरंगबली मंदिर, वाल्मीकि मंदिर आदि में दर्शन करते हैं। शिवालय के सम्मुख धूनीवाला आश्रम भी आकर्षण का केन्द्र है।
पाण्डव कुण्ड के निकट जन-जन की अगाध आस्था का प्रतीक आम्रवृक्ष है, जिसके बारे में मान्यता है कि यह लोगों की कामनाएं पूरी करता है। घोटिया आम्बा के पठार पर पाण्डवों (युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव) ने भगवान श्रीकृष्ण की सहायता से देवराज इन्द्र से प्राप्त आम की गुठली यहां रोप दी और इस आम्रवृक्ष से उत्पन्न आम्रफलों के रस से अठासी हजार ऋषियों को भोजन कराने का पुण्य पाया। यहां आम्रवृक्ष की श्रृंखला तब से चली आ रही है। आज
भी लोग परम्परा से आम्रवृक्ष की परिक्रमा, पूजन इत्यादि करते हैं। यहां एक धूनी है, जिसमें नारियल का हवन लगातार चलता रहता है। श्रद्धालु कामना पूरी हो जाने पर यहां रंगीन ध्वज चढ़ाते हैं। नारियलों की पंक्तियां बांधते हैं और ब्राह्मणों व साधु-संतों को भोजन कराते हैं। घोटेश्वर शिवालय से कुछ ही दूर पठार के पार केलापानी नामक पवित्र धाम है, जहां शिवालय, राममंदिर, केले के मनोहारी झुरमुट, दिव्य चावल, सुरम्य झरना तथा गोमुख से सतत प्रवाहमान जलधाराएं श्रद्धा एवं आत्मीय आनन्द से भर देती हैं।
वनवास काल में प्यास लगने पर भीम के गदा प्रहार से घना सुरम्य केलापानी झरना वर्षाऋतु में हर किसी को मुग्ध कर देता है। यहां मोती गिरी महाराज की छतरी, धूनी, आश्रम तथा पाण्डवों के चरण चिन्ह भी विद्यमान हैं, जहां श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहता है। यहीं पर पौराणिक महत्व के साल के पौधों से गिरे चावलों को ढूंढ़कर दर्शनार्थी घर ले जाते हैं। इन चावलों को पाना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। चैत्रकृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक परम्परागत रूप से घोटिया आम्बा मेला यहां लगता है। बांसवाड़ा जिले का यह सबसे बड़ा परम्परागत ग्राम्य मेला है, जिसे जनजातीय गण बहुत अधिक मान्यता देते हैं और उनकी सर्वाधिक भीड़ यहां पधारती है। इसमें वागड़ आंचल के हजारों मेलार्थी के साथ ही गुजरात और मध्यप्रदेश के सीमा क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों की संख्या भी अच्छी रहती है। पाण्डवों की स्मृति में लगने वाला यह मेला शताब्दियों से जन-जन को पराक्रम एवं शौर्य एवं  सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक भी बना हुआ है।

मेला का प्रारम्भ शिवार्चन के साथ ही चैत्र कृष्ण 13 को महन्त हीरागिरी महाराज एवं महन्त रामगिरी महाराज द्वारा शिवलिंग पर रजत छत्र चढ़ाकर होता है और चैत्रशुक्ल द्वितीया को समापन होता है। यह मेला बांसवाड़ा, दोहद मार्ग स्थित बड़ोदिया से कुछ दूर घोटिया आम्बा के जंगल में लगता है। नर-नारियों को पाण्डव कुण्ड में स्नान करते देखा जा सकता है। मुख्य मेले के दिन स्नानार्थियों की भारी भीड़ यहां जमा रहती है। इस कुण्ड को पापों का शमन करने वाला और मुक्तिदायक माना गया है। स्नान में असमर्थ मेलार्थी हाथ-पांव व मुख का प्रक्षालन यहां अवश्य करते हैं।
घोटिया आम्बा का मनोहारी नैसर्गिक परिवेश ही ऐसा है कि यहां आने वाला हर कोई जीवन के संत्रासों, विषादों और भविष्य की तमाम आशंकाओं को भूलकर असीम आनन्द सागर में डूब जाता है।
मेलार्थी खाने-पीने की सामग्री अपने साथ लाते हैं एवं घोटिया आम्बा तीर्थ के देवस्थलों का दर्शन व मेलों का आनन्द लेते हैं। कई किलोमीटर छितराए पहाड़ों के आंचल में ये समूह दाल, बाटी, चूरमा आदि पकाकर परिजनों के साथ सामूहिक वन भोज का आनन्द लेते हैं। रमणीय घोटिया आम्बा क्षेत्र में चारों ओर बड़े-बड़े वृक्षों से भरी पहाडिय़ां, दुर्गम घाटियां, शीतल जल के स्रोत और वन्य जीवों की अठखेलियां प्रकृति के अनुपम वैभव को व्यक्त करती है। राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के सीमावर्ती अंचलों से परम्परागत परिधानों में जमा जनजाति स्त्री-पुरुषों, लोकवाद्यों के साथ फाल्गुनी गीतों की झंकार और नृत्यों की मनोहारी वातावरण जनजाति संस्कृति के प्राणों को बहुत सुन्दरता से रुपायित करती है। जनजाति समाज सुधारक एवं संत महात्मा भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर धार्मिक एवं सामाजिक चेतना का संचार करते हैं।

30 वर्षीय युवा निखिल आनंद बने मिस इंडिया यूनिवर्स के मालिक

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मुंबई (अनिल बेदाग) : बिहार में जन्मे व पले बढ़े निखिल आनंद आज दुनिया के सबसे बड़े सौंदर्य प्रतियोगिता मिस यूनिवर्स के फ्रैंचाइजी होल्डर हैं। मिस यूनिवर्स इंडिया के नए मालिक बनने के साथ  निखिल कई अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं के भी मालिक हैं।
दुनिया के कुछ चुनिंदा फैशन उद्यमियों में से एक निखिल आनंद  की संस्था ग्लेमानंद ग्रुप अब दुनिया के सबसे बड़े ब्यूटी पेजेंट मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के लिए भारतीय प्रतिनिधि का चयन करेगी। फैशन के क्षेत्र में निखिल आनंद विश्व भर में एक चर्चित नाम है और इनदिनों वह काफी चर्चा में हैं। हमेशा से भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिता क्षेत्र में कुछ बेहतर व अनोखेपन के लिए निखिल जाने जाते हैं और अपने विचारों से इस क्षेत्र को बदलने के लिए अक्सर उनकी सराहना भी की जाती है।
 बचपन से ही फैशन व ग्लैमर की दुनिया मे रुचि रखने वाले निखिल ने अपने कॉलेज के तीसरे वर्ष में ही मिस्टर नॉर्थ इंडिया प्रतियोगिता में भाग लिया और फाइनलिस्ट भी रहें। इस दौरान कुछ घटनाओं ने उन्हें फैशन उद्योग के उनके दृष्टिकोण को बदल के रख दिया। तभी उन्हें फैशन और सौंदर्य प्रतियोगिताओं की दुनिया में क्रांति लाने की इच्छा जागृत हुई। काफी संघर्षों के बाद 2014 में, उन्होंने ग्लैमानंद एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के जरिये कई फैशन कार्यक्रम आयोजित किया और युवा महत्वाकांक्षी मॉडलों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक मंच प्रदान किया।
2013 में  कंपनी की शुरुआत करने के तुरंत बाद, आनंद ने मिस अर्थ और मिस इंटरनेशनल प्रतियोगिता हासिल की। साथ ही 2016 में मिस टीन इंटरनेशनल के मालिक बने जिसका मालिकाना हक उस समय कोस्टा रिका के एनरिक गोंजालेज के पास था। कुछ ही समय बाद उन्होंने मिस मल्टीनेशनल का कार्यभार भी संभाला और इस तरह वह दुनिया के सबसे कम उम्र के सौंदर्य प्रतियोगिता निर्देशक बन गए। आज, उनकी कंपनी भारत में सबसे अधिक सौंदर्य प्रतियोगिताओं के मालिक हैं।

असफल छात्रों का मनोबल बनाए रखना आवश्य

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डॉ. गोपाल नारायण आवटे
आज की शिक्षा प्रणाली और उसमें व्यापक सुधार की गुंजाइश पर विगत दिवस एक कार्यशाला में जाने का अवसर मिला। इस कार्यशाला में भागीदारी करने वाले जितने भी सज्जन थे किसी ना किसी राजनैतिक पार्टी से जुड़े हुए थे। उनके द्वारा जो भी बातचीत निकलकर आई उसमें व्यापक सुधार की गुंजाइश की कम, अपनी पार्टी के विचारों को सम्बल देना अधिक था जो कि अत्यधिक खतरनाक था।

जब उस कार्यशाला में मेरी भागीदारी का अवसर आया, उस कार्यशाला में छात्र भी मौजूद थे, तब मैंने कहा- आज की शिक्षा तेजी से भागने वाली है। प्रतियोगिता से भरी हुई है। कोई प्रथम आने के लिए भाग रहा है और कोई प्रथम में भी विशेष योग्यता लाना चाह रहा है। इस दौड़ को छात्र के परिवार वाले प्रोत्साहित कर रहे हैं। ठीक उसी तरह जैसे घुड़ दौड़ में दर्शक घोड़े को दौडऩे के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

कोई प्रथम आता है और कोई द्वितीय और कोई तृतीय। दुर्भाग्यशाली असफल भी हो जाते हैं। विशेष योग्यता वाले से प्रथम आने वाला अपने को हीन समझता है। प्रथम आने वाले से द्वितीय आने वाला स्वयम्ï को हीन समझता है और तृतीय आने वाला तो बेचारा शर्मसार होकर बैठा रहता है।

जो असफल हो जाते हैं उन पर परिवार और परिचितों की मार पड़ती है और शाला के शिक्षकों की प्रताडऩा और ताने सुनना उनकी नियति होती है। पूरे वर्ष भर वह छात्र नए छात्रों के मध्य स्वयम्ï को अपरिचित-सा अनुभव करता है। परिणामस्वरूप उसमें उपजती है कुंठा, तनाव और अपनी पहचान बनाने की लालसा। शार्टकट से पहचान बनाने की लालसा उन्हें धकेल देतीे है अपराध जगत के दलदल में।

तब एक छात्र ने प्रश्न किया- तो क्या परीक्षाओं में प्रतियोगिता नहीं होना चाहिए? कोई भी प्रतियोगिता किसी ना किसी को पीछे धकेलने का कार्य करती है। प्रतियोगिता हो तो वह विषय ज्ञान के अतिरिक्त जीवन ज्ञान को समझने की भी होना चाहिए।

जो प्रथम आया या जिसने विशेष योग्यता अर्जित कर ली उसके पास क्या है? केवल पुस्तक ज्ञान जो अत्यधिक खतरनाक बात है। जिसके पास केवल पुस्तक ज्ञान है वह सबसे खतरनाक है क्योंकि उसमें और कोई सम्भावनाएं नहीं हैं, कोई भी गुंजाइश नहीं है, लेकिन जो द्वितीय आया या तृतीय आया उनमें सम्भावनाएं हैं, जो असफल हो गया उसमें काफी सम्भावनाएं हैं, उसमें जीवन को समझने की, जीवन रहस्यों को समझने की अपार संभावनाएं हैं क्योंकि
वह पुस्तकों से असफल हो गया। जीवन पुस्तक नहीं है। पुस्तक को जीवन बनाना सबसे बड़ी मूर्खता है। जो प्रथम श्रेणी में सफल हुआ है उसके पास केवल पुस्तक है और पुस्तक का अध्ययन मनुष्य को कहीं नहीं पहुंचाता सिर्फ अपने अनुभव से दूर ले जाता है। पुस्तक का अनुभव पुस्तक के पास ले जाता है। इसलिए जीवन का अनुभव प्रथम श्रेणी में आए छात्र के जीवन में उतारना भारी कठिन है क्योंकि वह पहले से ही भरा बैठा है।

असफल हो चुका छात्र जीवन में, मन में, मस्तिष्क में पुस्तकीय ज्ञान को भर नहीं पाया। वह कहीं न कहीं से मौलिक है। उसमें अपार संभावनाएं हैं, स्वयं भी प्रगट करने की, उसमें संभावनाएं हैं स्वयं की पहचान स्वयं बनने की। उसकी पहचान कोई माध्यम विशेष रूप से पुस्तक तो है ही नहीं। ऐसे छात्रों के साथ जीवन का अनुभव शेयर करके उसे अध्ययनशील बनाने की अपार संभावनाएं हैं।

मेरा अर्थ यह कदापि नहीं है कि पुस्तकें नहीं पढऩा चाहिए लेकिन पुस्तक के अनुभव को कभी अपना मानकर वहीं ठहर मत जाना। इसलिए असफल छात्र कई गुना सफल छात्र हैं जो प्रथम श्रेणी में पास हुए उनके मुकाबले। क्योंकि प्रथम श्रेणी में आए छात्र केवल पुस्तकों की परिभाषाएं बोलते हैं, अपने मौलिक स्वरूप को खो चुके होते हैं। इसलिए असफल हो चुके छात्र को आप निष्कृत ना मानें, असफल छात्र को कभी हीन न समझें उसे कुंठा से बाहर निकालें और अन्य संभावनाओं की ओर भी मोडऩे का प्रयास करें।

प्रसन्न हों कि वह रट्ïटू तोता नहीं है। वह पुस्तक के अतिरिक्त भी बहुत कुछ देखना व सोचना चाहता है। उसके सोच को विस्तार दें, उसके चिन्तन को मान्यता दें। हमारे देश में असफल छात्र से कोई भी बात ही नहीं की जाती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि छात्र भी अपनी संभावनाओं को नहीं जानता। असफलता की कुंठा के नीचे वह अपने मौलिक स्वरूप को दबा देता है जिसके कारण एक अच्छी प्रतिभा भी उभरने के पूर्व मुरझा जाती है।

असफल छात्र का भी स्वागत और सम्मान करने की हममें शक्ति होना चाहिए, क्योंकि उनकी असफलता के कारण ही तो आप सफल कहलाए। असफल छात्र को भी मुख्य धारा से जोडऩे का प्रयास करना चाहिए। उसके मौलिक स्वरूप को कायम रखने का पूरे समाज का दायित्व है। – विनायक फीचर्स

 

गोदरेज प्रोफेशनल ने प्रमुख सैलून में Botosmooth हेयर बोटॉक्स को लॉन्च किया

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मुंबई, 05 मार्च, 2024: गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) के बालों की देखभाल (हेयर केयर)कलरस्टाइलिंग और केराटिन प्रोडक्ट्स के साथ एक पेशेवर हेयर ब्रांडगोदरेज प्रोफेशनल ने अपना नया हेयर बोटोक्स ट्रीटमेंट – बोटोस्मुथ पेश किया है, जिसका उपयोग महाराष्ट्र के प्रसिद्ध सैलून्स में कंज्यूमर्स कर सकते हैं। पेशेवर सैलून ब्रांड ने इस हेयर बोटोक्स ट्रीटमेंट के बारे में जानकारी देने के लिए एक हेयर शो भी आयोजित कियाजिसमें राज्य भर से 100 से अधिक सैलूनिस्ट और स्टाइलिस्टों ने भाग लिया। सैलून पेशेवरों को इस उपचार के बारे में गहराई से समझ मिली जो कंज्यूमर्स के लिए बालों की देखभाल के अनुभव में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार है। यह पहल न केवल इनोवेटिव ट्रीटमेंट पेश करने के लिए ब्रांड की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैबल्कि इंडस्ट्री में यह नवीनतम तकनीक हैजो प्रोफेशनल्स को अपग्रेड करने के प्रति उसके समर्पण को भी दर्शाती है।

 

गोदरेज प्रोफेशनल का बोटोस्मुथ एक क्रांतिकारी ट्रीटमेंट है जो सभी प्रकार के बालों को रिस्टोर एंड रेविटलिज़ (पुनर्स्थापित और पुनर्जीवित) करता है। फॉर्मल्डिहाइड के शून्य उपयोग इस उपचार (ट्रीटमेंट)  का मुख्य आकर्षण हैजो इसे दूसरों की तुलना में एक सुरक्षित विकल्प बनाता है। यहां तक कि फॉर्मल्डिहाइड के बिना भीयह बालों को बेहद मुलायमघुंघराला-मुक्त बनाता हैऔर इसे प्राकृतिक रूप से सीधे दिखने वाले बालों में बदल देता हैजो 30-60 बार धोने तक टिके रहते हैं।

बोटोस्मूथजिसमें आर्गन तेलअंगूर के बीज का तेलनारियल तेलसूरजमुखी तेल और शी बटर जैसे पोषण से भरे न्यूट्री ऑइल का मिश्रण हैहेयर केयर रूटीन में क्रांति लाने का वादा करता हैयह एक उत्कृष्टता का नया मानक स्थापित करता है और व्यक्तियों को हर दिन अपने सर्वोत्तम बालों को अपनाने की शक्ति प्रदान करता है।

 

महाराष्ट्र में बोटोस्मूथ के लॉन्च पर टिप्पणी करते हुएगोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) के महाप्रबंधक (जनरल मैनेजर) अभिनव ग्रांधी ने कहा, “पेशेवर हेयर केयर कैटेगरी में हमारी पहले से ही मजबूत उपस्थिति रही है और हेयरकेयर व कलर में विशेषज्ञता भी हैजो हमें नेक्स्ट कैटेगरी में आगे ले जाने में मदद करती हैहमारी अगली श्रेणी (नेक्स्ट कैटेगरी) हेयर बोटोक्स ट्रीटमेंट है। बोटोस्मूथ एक बेहतर फॉर्मूलेशन है जो फॉर्मल्डिहाइड से मुक्त है औऱ बालों को मुलायमलंबे समय तक टिकाऊ और बालों को फिज़ मुक्त बनाता है। बोटोस्मूथ जैसे क्रांतिकारी उत्पाद ग्राहकों के लिए सैलून अनुभव को और भी बेहतर करते हैं और सैलून मालिकों के लिए बिजनेस ग्रोथ के अवसरों को बढ़ाते हैं।

 

उन्होंने आगे कहा, “सैलून हेयर केयर उपचार में सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए नवीनतम हेयर उपचारों के बारे में कौशल-निर्माण शिक्षा (स्कील बिल्डिंग एजुकेशन) महत्वपूर्ण है। गोदरेज प्रोफेशनल महाराष्ट्र के स्टाइलिस्टों के लिए अंतरराष्ट्रीय हेयरड्रेसर और उद्योग विशेषज्ञों के साथ प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कर उन्हें ऐसी सुविधा उपलब्ध करा रहा है। इससे इन सभी हेयर स्टाइलिस्टों के कौशल में वृद्धि होगी।”

 

100 से अधिक स्टाइलिस्टों ने ब्रांड के शिक्षा और तकनीकी एंबेसडर के साथ पूरा दिन बितायाजिन्होंने बोटोस्मूथ उपचार के बारे में सटीक जानकारी दी। सत्र का संचालन अंतरराष्ट्रीय बाल विशेषज्ञ (हेयर एक्सपर्ट) फ़िलिप रबेलो ने कियाजिन्होंने नवीनतम हेयर बोटोक्स ट्रीटमेंट से लोगों को परिचित कराने के लिए कई टिप्स भी साझा किया। गोदरेज प्रोफेशनल के नेशनल टेक्निकल हेड (राष्ट्रीय तकनीकी प्रमुख) शैलेश मूलया (Shailesh Moolya) ने गोदरेज प्रोफेशनल के बोटोसमुथ और केरास्मूथ एंबेसेडर नजीब उर रहमान के साथ नई हेयर स्ट्रेटनिंग और स्मूथनिंग तकनीकबोटोसमुथ की चरण-दर-चरण प्रक्रिया के बारे में बात कीजबकि गोदरेज प्रोफेशनल के तकनीकी एंबेसडर सिल्विया चेन ने कुछ सरल स्टाइल की जानकारी दी।

 

गोदरेज प्रोफेशनल के राष्ट्रीय तकनीकी प्रमुख शैलेश मूलया ने बालों की देखभाल के क्षेत्र में बोटोस्मूथ को मील का पत्थर बताते हुए कहा, “स्टाइलिंग टूल्स से जूझने या अनियंत्रित बालों से जूझने के दिन गए। शी बटरआर्गन ऑयलअंगूर के बीजनारियल तेलसूरजमुखी तेल व अन्य पोषक तेलों से समृद्ध बोटोस्मूथ एक परिवर्तनकारी समाधान (ट्रांसफॉर्मेटिव सोल्युसंस) प्रदान करता हैजो सभी प्रकार के बालों के लिए उपयुक्त है।

इस फॉर्मलडिहाइड मुक्त फॉर्मूला के साथआप क्षतिग्रस्तसूखे बालों को अलविदा कह सकते हैंजिन्हें बार-बार धोने की जरूरत होती है। फिर आप फिज़-मुक्तचिकनेचमकदारसीधे बालों का स्वागत कर सकते हैं। होम केयर के दौरान इन नतीजों को बनाए रखने के लिए हम अपने गोदरेज प्रोफेशनल केराकेयर बाल केयर प्रोडक्ट्स की सिफारिश करते हैंजैसे शैम्पूकंडीशनरहेयर मास्क और ऑइल।

 

सम्मानित ग्लोबल एजुकेटर (वैश्विक प्रशिक्षक) और ब्राज़ील में प्रमुख सैलून चेन के मालिक फ़िलिप रबेलो ने कहा, “बेहतर हेयर टेक्सचर (बाल बनावट) के लिए गोदरेज प्रोफेशनल का बोटोस्मूथ प्रोडक्ट एक सैलून एक्सपर्ट हैजो अब भारत में उपलब्ध एक क्रांतिकारी उपचार की पेशकश करता है। यह प्रोटीन-आधारित उत्पाद फॉर्मल्डिहाइड से मुक्त हैजो सैलून प्रोफेशनल्स और ग्राहकोंदोनों के लिए एक सुरक्षित और आनंददायक अनुभव सुनिश्चित करता है। विभिन्न प्रकार के पोषण-वर्धक तत्वों (न्यूट्रिशन इन्हैंसिंग इंग्रेडिएंट) से युक्तयह प्रोडक्ट आपके स्मूथस्लीक फिनिश बालों के स्वस्थ और मजबूत बने रहने की गारंटी देता है। यह उत्पाद भारत में सभी प्रकार के बालों के लिए उपयुक्त ब्राजीलियाई फॉर्मूलेशन पेश करने के लिए गोदरेज प्रोफेशनल के साथ मेरे व्यक्तिगत सहयोग को भी दर्शाता है।”

लोग मुंबई और महाराष्ट्र के प्रमुख सैलून में गोदरेज प्रोफेशनल बोटोस्मूथ उपचार का लाभ उठा सकते हैं।

स्लाइस की ब्रैंड एंबेसडर बनी लेडी सुपरस्टार नयनतारा 

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मुंबई (अनिल बेदाग ) : वर्ष 2024 की गर्मियों में नया तूफान लाते हुए स्लाइस ने आज एक बहुत बड़ी घोषणा की। ब्रैंड ने जानी-मानी अभिनेत्री नयनतारा को अपना नया ब्रैंड एंबेसडर नियुक्त किया है। नयनतारा को साथ लेने का स्लाइस का उद्देश्य अपने ग्राहकों के साथ संबंधों को मज़बूती देना है जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि आम के शौकीनों के लिए यह प्रमुख बेवरेज ब्रैंड है।
बीते वर्षों के दौरान स्लाइस® ने आम की तलब को शांत करने के सबसे उपयुक्त और करीबी विकल्प के तौर पर देश भर के घरों में अपनी स्थिति मज़बूत की है।
दूसरी ओर, नयनतारा ने भारतीय सिनेमा में समीक्षकों द्वारा प्रशंसित अभिनेत्रियों के बीच अपनी जगह बनाई है और उन्हें “लेडी सुपरस्टार” के तौर पर जाना जाता है। गर्मियों के सीज़न में आनंद और उत्साह बढ़ाने के वादे के साथ स्लाइस इस नई साझेदारी और आकर्षक कहानियों के दम पर अग्रिम पंक्ति में बना हुआ है क्योंकि इन गर्मियों में ब्रैंड नए अभियान की शुरुआत करने को लेकर पूरी तरह तैयार है।
स्लाइस के नए चेहरे के तौर पर उनके साथ जुड़ने के अपने उत्साह को साझा करते हुए अभिनेत्री नयनतारा ने कहा, “मैं स्लाइस परिवार का हिस्सा बनने और इस मशहूर ब्रैंड की विरासत में अपना योगदान देने को लेकर बेहद उत्साहित हूं। ब्रैंड को उनके यादगार अभियानों के लिए जाना जाता है, ऐसे में मैं ब्रैंड के आगामी प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने को लेकर उत्साहित हूं। मुझे उम्मीद है कि नया अभियान मेरे प्रशंसकों को अनोखे और मज़ेदार तरीके से स्लाइस की खुशनुमा दुनिया में ले जाएगा।”
इस साझेदारी के बारे में अनुज गोयल, एसोसिएट डायरेक्टर, स्लाइस एवं ट्रॉपिकाना, पेप्सिको इंडिया ने कहा, “हमें स्लाइस परिवार में नयनतारा का स्वागत करते हुए बेहद खुशी हो रही है और हमें पूरी उम्मीद है कि विभिन्न समुदायों तक फैली उनकी व्यापक अपील, ब्रैंड को हमारे मूल ग्राहकों से अच्छी तरह जुड़ने में मदद करेगी। नयनतारा और स्लाइस दोनों ने परिवारों का भरपूर मनोरंजन किया है और बहुत ही शानदार तरीके से लोगों को साथ लाए हैं। हमें उम्मीद है कि नए फिल्म के साथ यह जादू बरकरार रहेगा और इसे हर कोई पसंद करेगा।” स्लाइस के लिए इस सहयोग को फ्रेमवर्क एंटरटेनमेंट द्वारा सुगम बनाया गया है।

स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के संघर्ष से रूप करता है फिल्म का ट्रेलर

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मुंबई (अनिल बेदाग ) : एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे और रणदीप हुड्डा अभिनीत फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ का बहुप्रतीक्षित ट्रेलर आज जारी किया गया और इसने दर्शकों को उत्सुक कर दिया है। हालांकि, अंकिता लोखंडे ट्रेलर लॉन्च इवेंट में शामिल नहीं हो सकीं, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपना सपोर्ट दिखाया। ट्रेलर आपको राजनेता और कार्यकर्ता विनायक दामोदर सावरकर की यात्रा और भारत की स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष से रूबरू कराता है। ट्रेलर में जहां रणदीप हुड्डा ने अपनी शानदार परफॉर्मेंस से सबका ध्यान खींचा है, वहीं अंकिता लोखंडे उनकी पत्नी का किरदार निभाकर सभी को उतना ही प्रभावित कर रही हैं। अंकिता की भूमिका, जिसने दर्शकों को समान रूप से आकर्षित किया है, कहानी को उजागर करने में महत्वपूर्ण है। फिल्म का ट्रेलर मीडिया की उपस्थिति में दिखाया गया और इसने उन्हें काफी प्रभावित भी किया है।
अंकिता और रणदीप के किरदारों में गहराई यह है कि दोनों वास्तविक शख्सियतों से काफी मिलते-जुलते दिखते हैं, जो उन्हें भरोसेमंद और विश्वसनीय बनाता है। ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ की भूमिका निभाने में रणदीप के दृढ़ विश्वास और उनकी पत्नी ‘यमुनाबाई’ की भूमिका निभाने के लिए अंकिता के समर्पण ने फिल्म के प्रति जनता के बीच प्रत्याशा बढ़ा दी है। फिल्म में रणदीप हुड्डा और अंकिता लोखंडे के अलावा अमित सियाल भी अहम भूमिका में हैं।
‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ से एक्टर रणदीप हुड्डा अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू कर रहे हैं। फिल्म को ज़ी स्टूडियोज, आनंद पंडित, रणदीप हुडा, संदीप सिंह और योगेश राहर ने प्रोड्यूस की है। इतने प्रभावशाली ट्रेलर के साथ, स्वातंत्र्य वीर सावरकर 22 मार्च, 2024 को सिनेमाघरों में दर्शकों को प्रभावित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।