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रामायण में राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल को टिकट

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लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए रविवार को उत्तर प्रदेश के 13 उम्मीदवारों की सूची जारी की. पार्टी ने जहां पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी को सुल्तानपुर से दोबारा मौका दिया है, वहीं उनके बेटे और पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी का टिकट काट दिया है और उनकी जगह जितिन प्रसाद को मैदान में उतारा है. केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा की यह पांचवीं सूची है. हालांकि, पहली सूची में 51 उम्मीदवार घोषित करने के बाद पार्टी ने बाकी तीन सूचियों में राज्य के लिये किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई थी. पांचवीं सूची में उत्तर प्रदेश के कुल 13 उम्मीदवार घोषित किये गये हैं जिनमें पार्टी ने अपने नौ मौजूदा सांसदों को मौका नहीं दिया है.

पार्टी ने जिन नौ सांसदों का टिकट काटा है उनमें गाजियाबाद के सांसद व केंद्रीय मंत्री (रिटायर जनरल) वीके सिंह, पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी, बरेली से संतोष गंगवार, कानपुर के सत्‍यदेव पचौरी, बदायूं से पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की पुत्री डॉक्टर संघमित्रा मौर्य, बाराबंकी के उपेंद्र सिंह रावत, हाथरस (आरक्षित) के सांसद राजवीर सिंह दिलेर, बहराइच (आरक्षित) से अक्षयवर लाल गौड़ और मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल शामिल हैं. मेरठ में राजेंद्र अग्रवाल की जगह सिने अभिनेता और रामायण धारावाहिक में भगवान राम की भूमिका अदा कर चुके अरुण गोविल को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है; वहीं बाराबंकी में पहली सूची में घोषित मौजूदा सांसद उपेंद्र सिंह रावत की जगह जिला पंचायत की अध्यक्ष राजरानी रावत को उम्मीदवार बनाया गया है.

वरुण गांधी ने कई मुद्दों पर सरकार का किया था विरोध
उपेन्द्र रावत का कथित तौर पर एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हुआ था, जिसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था. वरुण गांधी केंद्र के तीन कृषि कानूनों के आने के बाद से ही अपनी पार्टी और सरकार के खिलाफ मुखर रहे. हालांकि, बाद में सरकार ने इन कानूनों को वापस ले लिया. उन्होंने रोजगार और स्वास्थ्य समेत कई मुद्दों पर भाजपा के खिलाफ आवाज उठायी. वैसे पार्टी ने उनकी मां मेनका गांधी पर भरोसा जताया, जिन्हें सुल्तानपुर से फिर से टिकट दिया गया है. जनरल वीके सिंह और सत्यदेव पचौरी दोनों ने रविवार को ही 2024 का चुनाव लड़ने के लिए ‘अनिच्छा’ व्यक्त की थी.

अरुण गोविल को टिकट
भाजपा की सूची के मुताबिक सहारनपुर से राघव लखनपाल, मुरादाबाद से सर्वेश सिंह, मेरठ से रामानंद सागर कृत धारावाहिक रामायण में राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल, गाजियाबाद से विधायक व पूर्व मंत्री अतुल गर्ग, अलीगढ़ से मौजूदा सांसद सतीश गौतम, हाथरस (आरक्षित) से अलीगढ़ के खैर क्षेत्र के विधायक अनूप वाल्मीकि, बदायूं से दुर्गविजय सिंह शाक्य, बरेली से पूर्व मंत्री छत्रपाल सिंह गंगवार, पीलीभीत से प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद, सुलतानपुर से मेनका गांधी, कानपुर से वरिष्ठ पत्रकार रमेश अवस्थी, बाराबंकी (आरक्षित) राजरानी रावत और बहराइच (आरक्षित) से डॉक्टर अरविंद गौड़ को उम्मीदवार बनाया गया है. भाजपा के 51 उम्मीदवारों की पहली सूची में उत्तर प्रदेश की पांच सीट पर महिला उम्मीदवारों को मौका मिला; वहीं इस बार 13 सीट में दो सीट पर महिला उम्मीदवारों को उतारा गया है.

लोकसभा चुनाव 2024 में मैं प्रतिभाग नहीं करना चाहता हूं – Satyadev Pachauri

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UP Lok Sabha Election 2024: बीजेपी (BJP) के एक और सांसद ने चुनाव लड़ने के इनकार कर दिया है. कानपुर (Kanpur) से बीजेपी सांसद सत्यदेव पचौरी ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. उन्होंने ये जानकारी सोशल मीडिया (Social Media) पर एक चिट्ठी साझा कर दी है. उन्होंने यह चिट्ठी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखी है.

कानपुर से बीजेपी सांसद ने अपने सोशल मीडिया के एक्स प्लेट फॉर्म पर एक चिट्ठी साझा की है. यह चिट्ठी उन्होंने जेपी नड्डा को लिखी है. उन्होंने इस चिट्ठी को साझा करते हुए लिखा, ‘आप सभी को अवगत कराना है कि आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में मैं प्रतिभाग नहीं करना चाहता हूं. इस निर्णय से मैंने माननीय प्रधानमंत्री एवं माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत करा दिया है.’

भाजपा सांसद ने आगे लिखा, ‘मैं पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं और पार्टी द्वारा दिए जाने वाले दायित्वों का निर्वहन करता रहूंगा.’ उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है, ‘आपसे विनम्र आग्रह है कि मैं वर्तमान कानपुर लोकसभा 2024 का चुनाव लड़ने का इच्छूक नहीं हूं .

मेरे नाम पर विचार न किया जाए- बीजेपी सांसद
उन्होंने अपनी चिट्ठी में आगे लिखा, ‘अत: मेरे नाम पर विचार न किया जाए. मैं पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं. पार्टी के द्वारा दिए गए सभी दायित्वों का निर्वहन करता रहूंगा.’ बीजेपी सांसद ने यह चिट्ठी 24 मार्च यानी रविवार को लिखी है.

गौतरलब है कि बीते 2019 के लोकसभा चुनाव में सत्यदेव पचौरी करीब 1.55 लाख वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार प्रकाश जायसवाल को हराया था. तब बीजेपी सांसद को करीब 4.68 लाख वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस उम्मीदवार को 3.13 लाख वोट मिले थे.

बता दें कि सत्यदेव पचौरी 2004 के लोकसभा चुनाव में भी कानपुर सीट पर उम्मीदवार थे. तब इस चुनाव में प्रकाश जायवाल ने उन्हें हराया था. इस चुनाव में प्रकाश जायवाल ने करीब छह हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी.

 

उल्लास, उमंग और आनन्द की अभिव्यक्ति का पर्व होली

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(रामभुवन सिंह ठाकुर-विनायक फीचर्स)

रंगों का त्यौहार होली समस्त त्यौहारों का शिरोमणि है। यह हर्षोल्लास, उमंग, उत्साह, एकता, प्रेम और मेल-मिलाप का अनुपम उपहार लेकर आता है।  फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्यौहार भारत में ही नहीं, वरन् विदेशों में भी बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। भले ही इसका नाम और मनाये जाने का तरीका भिन्न-भिन्न हो, परंतु उन सब में भी होली की छटा दृष्टिगोचर होती है।   आनन्द एवं उल्लास की अनुपम छटा बिखेरते इस अनूठे, चमत्कारी पर्व पर सभी प्रसन्न मुद्रा में दिखाई देते हैं।

चारों ओर रंग, अबीर, गुलाल की फुहार उड़ती दिखाई देती है। लोग अजीब-अजीब विकृत स्वांग बनाते, एक दूसरे को विनोदमय उपाधियों से विभूषित कर,

‘बुरा न मानो होली है’  की अलख जगाते हुए, उनके विशिष्ट गुणों-अवगुणों को उजागर कर, सुधार का संदेश देते हैं। आपस में हंसी-मजाक करते, नाचते-गाते, मस्ती भरे फागुन गीतों का आनंद लेते  हैं। अंग-अंग, रंग-तरंग से मस्त झूमते हुए दिखाई देते हैं एवं समवेत स्वर गूंज उठता है।

‘रंग बरसे, भीगे चुनर वाली, रंग बरसे।‘

ऋतु चक्रानुसार फाल्गुन पूर्णिमा को ऋतुराज बसंत  अपने पूर्ण यौवन  पर आ जाता है जिससे सम्पूर्ण सृष्टि में उन्मादी माधुर्य छा जाता है। प्रकृति की मन मोहकता को देखकर वसुन्धरा खिल उठती है, उसका रोम-रोम आनन्दातिरेक की सिहरन से भर उठता है। अर्ध मुकुलित नाना वर्णो के पुष्प प्रकृति की नाना इच्छाओं के रूप में विकसित हो उठते हैं एवं फलों में भी गुणवृद्घि हो जाती है, इसी से होली पर्व को फाल्गुनी भी कहते हैं। प्रकृति मानव की सदैव चिरसहचरी रही है। वह हमारे सुख-दुख की सहभागिनी है।

‘किसलय वसना, नव वय-लतिका।‘

‘मिली मधुर प्रिय उर, तरू-पतिका।‘

प्रकृति जब भीनी-भीनी सुगन्ध एवं माधुर्य से गदरा उठती है और उसके सौन्दर्य की  मादकता, उस अपूर्व माधुर्य भार को सम्हाल नहीं पाती है तो कली-कली में बसंत किलकारी मारने लगता है। सौरभ भार से अवनत वायु मानव-हृदय को भी मादकता से भर देती है। तब मानव अपने उन्मादी मनोभावों को हास्य-विनोद, चुटकुलों में अभिव्यक्त करने, हंसने-हंसाने का माहौल बना लेता है और इस अलमस्त होली के त्यौहार को आनन्दाभिव्यक्ति का समवेत रूप निर्मित करते हुए इन्द्रधनुषी रंगों की अनुपम छटा बिखेरता हुआ रंगों का पर्व मानता है।

”सह न सकी भार धरा, मधुमास के यौवन का।

सौरभ सुगन्ध बिखेरता, बीता मास फाल्गुन का।

आया त्यौहार उल्लास, उमंग प्रेम-मिलाप का।

उड़त रंग, अबीर, गुलाल, आया मौसम रंगों का।‘

एक किवदन्ती के अनुसार यह पर्व ‘शिव वरदानी ढूंढसा’  नामक राक्षसी से भी जुड़ा है, जो अपना वीभत्स रूप धरकर गांव में आती, बच्चों को डराती तथा उठाकर ले जाती थी, जिससे तंग आकर उस भयावह राक्षसी को भगाने के लिए बालकों ने एक जुट होकर रंग-बिरंगे अद्भुत, डरावने स्वांग बनाये और उस राक्षसी से मुक्ति पाने में सफलता हासिल की। कहते हैं तभी से एक दूसरे पर रंग-रोगन, कीचड़, गोबर आदि डालने, वीभत्स स्वांग बनाने, चिढ़ाने, हा-हा- हू-हू करते हुए खुशी से उछलने, नाचने, मौज-मस्ती मनाने की प्रथा चली आ रही है।

आमोद-प्रमोद, रंग-तरंग, उमंग भरे इस त्यौहार में अबाल, वृद्घ नर-नारी सभी सप्त रंगी, रंगों में सराबोर हो बसन्ती बयार के संग-संग मस्ती में झूमने लगते हैं, उन्मादी मन मचलने लगता है। झांझ मंजीरे के साथ जब ढोलक की थाप पर फाल्गुनी गीतों के मधुर स्वर गूंजते हैं, तो पैर अपने आप थिरकने लगते हैं, बिन पायल ही घुंघरू बज उठते हैं, मन कूंह-कूंह कर नाचने लगता है। रंग-बिरंगे, अनोखे स्वांग में मतवाले, बिन सुर-ताल ही, भंग-तरंग, सुरा-संग मदमस्त हो झूम उठते हैं। ऐसे अनूठे माहौल में बूढ़ा भी जवान और कलुआ भी ललुआ नजर आता है। संपूर्ण वातावरण रंगीन हो उठता है। इसी से इसे मदनोत्सव भी कहा जाता है।

”जहं-तहं जनु उमंग अनुरागा। देखि मुएहू मन मनंसिजज जागा’ (तुलसीदास)

उन्मादी मन का उन्माद और गुबार निकालने एवं जीवन की एक रसता से मुक्ति पाने, हंसने-हंसाने के लिए, मूर्ख

कोली आगरी महोत्सव” में अभिनेत्री एकता जैन ने समाँ बांधा

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मुंबई (अनिल बेदाग) : कोली आगरी महोत्सव के अध्यक्ष चंदू दादा पाटील ने एरोली नवी मुंबई में “कोली आगरी महोत्सव” का भव्य आयोजन हुआ। इस महोत्सव में ऎक्ट्रेस और इंफ्लुएंसर एकता जैन, डॉ संतोष पाण्डेय, सचिन दनाई, राहिला रहमान जैसी हस्तियां पहुंचीं।
डॉ संतोष पाण्डेय ने बताया कि मैं चंदू दादा पाटील को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे इस कोली महोत्सव में बुलाया। यहां का माहौल, उत्साह, गीत संगीत और नृत्य देखकर बड़ा अच्छा अनुभव हुआ। इतना अच्छा कार्यक्रम करने के लिए दादा बधाई के पात्र हैं।
अभिनेत्री और इंफ्लुएंसर एकता जैन ने कहा कि मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लगा। मैं पहली बार कोली महोत्सव में आई हूं। मुझे पता नहीं था कि इतना बड़ा महोत्सव का आयोजन होता है। मुझे बचपन की यादें ताजा हो गई। कई लोकगीत सुने। यहाँ सिंगर्स लाइव गा रहे थे, म्यूजिशियन लाइव संगीत बजा रहे थे और डांसर उन गीतों पर डांस कर रहे थे। बहुत उत्साह का माहौल रहा। चंदू पाटिल जी ने जो माहौल बनाया है वह बेहद खूबसूरत है बहुत मजा आ रहा है। यहां बड़े अच्छे झूले लगे हुए हैं और उन्हें देखकर मेरा मन भी झूले पर बैठने का हो रहा है। मेरा मानना है कि आपका दिल हमेशा बच्चा रहना चाहिए भले ही आप बड़े हो जाएं मगर मन को चंचल और मासूम बने रहने दें। आज यहाँ मैंने भी कोली गीत पर डांस किया।

मैं सेमीकंडक्टर्स में आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रवेश से उत्साहित हूं-सचिन तेंदुलकर

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मुंबई : आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने एक प्रतिष्ठित यूरोपीय कंसोर्टियम के साथ एक ऐतिहासिक सहयोग में गर्व से महाराष्ट्र की अग्रणी सेमीकंडक्टर सुविधा के उद्घाटन की घोषणा की। यह अभूतपूर्व प्रयास एक बड़ी छलांग का प्रतीक है, जो महाराष्ट्र को सेमीकंडक्टर इनोवेशन और विनिर्माण में एक वैश्विक पावरहाउस के रूप में स्थापित करता है। देश को सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में अद्वितीय नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की ओर प्रेरित कर रहा है।
      श्री राजेंद्र के चोदनकर (आरआरपी एस4ई इनोवेटिव प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक, प्रमोटर, अध्यक्ष और सीईओ) का कहना है, “मैं आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा महाराष्ट्र की अग्रणी सेमीकंडक्टर सुविधा के अनावरण से उत्साहित हूं। यह महत्वपूर्ण अवसर न केवल हमारी तकनीकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है, बल्कि नवाचार और आकार देने के लिए हमारी अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।
     प्रसिद्ध भारतीय परमाणु भौतिक विज्ञानी और मैकेनिकल इंजीनियर डॉ. अनिल काकोडकर कहते हैं, _”महाराष्ट्र की अग्रणी सेमीकंडक्टर सुविधा का उद्घाटन भारत की तकनीकी शक्ति में एक लंबी छलांग का प्रतीक है। मैं इस परिवर्तनकारी यात्रा का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं, जो हमारे देश को सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में अद्वितीय नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की ओर प्रेरित कर रहा है।
     सचिन तेंदुलकर कहते हैं, “आज हम रोमांचक समय में रह रहे हैं, जब भारत ऐसे उद्योगों का निर्माण कर रहा है जो भविष्य में दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव डालेंगे। मैं उन प्रौद्योगिकियों और उद्यमियों का समर्थन करके खुश हूं जो इस कहानी का हिस्सा हैं। सेमीकंडक्टर्स में आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रवेश के लिए मेरा समर्थन इसी विश्वास से उपजा है। मैं आरआरपी इलेक्ट्रॉनिक्स की टीम को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं।”

गणेश शंकर विद्यार्थी : बलिदान दिवस 25 मार्च -पत्रकार लिखते ही नहीं हैं शहीद भी होते हैं

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दिनेश चंद्र वर्मा –

आज जब पत्रकारिता मात्र व्यवसाय में परिवर्तित हो गई है, तब यह प्रश्न भी उठता है कि क्या पत्रकारों का काम लिखना मात्र ही है? इस प्रश्न का उत्तर दुनिया के अन्य देशों के पास हो ना हो, भारत की पत्रकारिता के पास अवश्य है।  भारत में पत्रकारिता का उद्भव और विकास केवल लिखने के लिये नहीं हुआ, अपितु भारतीय पत्रकारिता ने शहादत के सुनहरे अध्याय भी लिखे हैं। स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी का जीवन और बलिदान इसका श्रेष्ठ उदाहरण है।
बलिदानी पत्रकार गणेशशंकर विद्यार्थी इसी दृष्टि से न केवल भारतीय पत्रकारिता के अपितु विश्व पत्रकारिता के प्रेरणापुंज बन गये हैं।  वस्तुत: उनका जीवन पत्रकारिता का ऐसा आदर्श है, जिसमें तत्कालीन समाज, देश और काल का  आवश्यकताओं का संपूर्ण समावेश था। राष्ट्र और समाज के लिये अपने जीवन की आहुति देकर विद्यार्थी जी ने जो उदाहरण उपस्थित किया है, वह पत्रकारों के लिये ही नहीं अपितु देश और समाज के लिये भी एक अनुपम उदाहरण है।
विदिशा और मुंगावली में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात गणेश शंकर जी को विद्या अध्ययन हेतु अपने बड़े भाई श्री शिवव्रत नारायण के पास कानपुर जाना पड़ा।  कानपुर के क्राइस्ट चर्च कालेज से उन्होंने उच्च श्रेणी में एन्ट्रेन्स परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद विद्या अध्ययन हेतु वे इलाहाबाद गये। इलाहाबाद में उनकी भेंट कर्मवीर सुंदरलाल जी से हुई। फलस्वरूप विद्यार्थी जी सुंदरलाल जी के पत्र कर्मयोगी के अतिरिक्त स्वराज्य में भी राजनीति और क्रांतिकारी लेख लिखने लगे। इन लेखों में स्वतंत्रता के प्रति उनकी तड़प उजागर होती थी। इसके उपरांत उन्होंने सरस्वती में उपसंपादक का कार्य करना शुरू किया। इलाहाबाद में सरस्वती में काम करने के साथ उनका महान पत्रकार, समाजसेवी एवं राजनेता पंडित मदनमोहन मालवीय से संपर्क हुआ। मालवीय जी से प्रभावित होकर विद्यार्थी जी ने अभ्युदय नामक समाचार पत्र में काम करना शुरू किया, जो स्वयं मालवीय जी निकालते थे। इस अवधि में उनका देश के क्रांतिकारियों से भी संपर्क हुआ।
सरदार भगत सिंह, विद्यार्थी जी को अपना गुरू मानते थे।  चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, सुखदेव और राजगुरू सरीखे अमर क्रांतिकारियों से विद्यार्थी जी के इस अवधि में निकट संबंध रहे। दूसरी ओर अहिंसा के मार्ग से स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय नेताओं से भी उनके मधुर संबंध थे। गांधीजी उन्हें अहिंसा का पुजारी कहते थे।
अभ्युदय में विद्यार्थी जी को बीस रुपये मासिक वेतन मिलता था, पर इसके बदले में उन्हें रात- दिन मेहनत करनी पड़ती थी। अधिक मेहनत के कारण विद्यार्थी जी बीमार हो गये और काफी समय तक अस्वस्थ रहे। बीमारी से उठने के बाद विक्रमी संवत् 1970 की देवोत्थान एकादशी अर्थात 9 नवम्बर 1913 को विद्यार्थी जी ने कानपुर से प्रताप का प्रकाशन एवं संपादन प्रारंभ किया। प्रताप उन दिनों राष्ट्रीयता और देशभक्ति का प्रतीक पत्र था। उसके प्रथम पृष्ठ पर यह पंक्तियां अंकित रहती थी।
जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है।
वह नर नहीं नर पशु निरा और मृतक समान है।
प्रताप पहले साप्ताहिक समाचार पत्र था, पर वह जनता में इतना लोकप्रिय हो गया कि सात वर्ष बाद वह दैनिक के रूप में प्रकाशित होने लगा।  प्रताप ने देशभक्ति का जो उद्घोष किया उससे विद्यार्थी जी अंग्रेजों की आंख की किरकिरी बन गये। उन्हें पांच बार जेल यात्रा करनी पड़ी। प्रताप उन दिनों देश के स्वतंत्रता संग्राम की धुरी में परिवर्तित हो चुका था। विद्यार्थी जी और उनका प्रेम क्रांतिकारियों के लिये शरणस्थली था। श्री भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त, शचिंद्र सान्याल, रामेंद्र लाहिड़ी एवं अशफाक उल्ला आदि क्रांतिकारी महीनों तक प्रताप प्रेस में ही रहते थे तथा क्रांति की योजनायें बनाते थे।
अंग्रेज भारत की आजादी की लड़ाई का मुकाबला फूट डालो और राज करो की कलुषित कूटनीति से कर रहे थे। इसी कूटनीति के फलस्वरूप सन् 1931 में कानपुर में भयानक दंगा फैल गया।  9 मार्च सन् 1931 को विद्यार्थी जी जेल से छूटे और रात दिन इन दंगों में सांप्रदायिक सद्भावना स्थापित करने के लिये अथक परिश्रम करते रहे।  पूरे कानपुर शहर में मारकाट मची हुई थी। मकान जल रहे थे। ऐसी ही हालत में विद्यार्थी जी दो अन्य समाजसेवी ज्वाला दत्त और शंकर राव कालीगार के साथ दंगाग्रस्त क्षेत्रों में अमन-चैन के प्रयास कर रहे थे। कानपुर के बकरमंडी क्षेत्र में एक परिवार को बचाने का जब वे प्रयास कर रहे थे तब दो सौ से अधिक आतताईयों ने उन पर प्राणघातक हमला कर दिया और इस तरह विद्यार्थी जी राष्ट्र के लिये और समाज के लिये शहीद हो गये।
अंग्रेजों ने विद्यार्थी जी की मौत को बिल्कुल गुप्त रखा था।  कानपुर में कर्फ्यू लगा हुआ था, फिर भी उनके अंतिम संस्कार में भारी संख्या में लोग शामिल हुए और इसी शहादत ने यह सिद्ध कर दिया कि पत्रकार केवल लिखते ही नहीं बल्कि, देश, समाज और सांप्रदायिक एकता के लिये शहीद भी होते हैं। (विनायक फीचर्स)

होली उत्सव में जानवरों को सुरक्षित रखें-लिज़ा मलिक

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मुंबई (अनिल बेदाग ) : लिज़ा मलिक को भारतीय मनोरंजन उद्योग में न केवल अपनी प्रतिभा और क्षमता के कारण प्यार और सम्मान मिलता है, बल्कि इससे भी बहुत कुछ है।  किसी भी अन्य चीज़ से अधिक, वह एक अच्छी इंसान के रूप में जानी जाती हैं, जो एक बहुत बड़ी पशु प्रेमी भी हैं और यह निश्चित रूप से उनके दयालु हृदय के बारे में बताता है। वह एक विशाल पशु प्रेमी है और जिस तरह से वह अपनी ‘फर बेबी’ एम्मा से प्यार करती है और उसका पालन-पोषण करती है, वह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है।  एम्मा के चेहरे पर स्याही लगवाने से लेकर अपनी एड्रेस प्लेट के एक हिस्से को ‘एम्मा हाउस’ कहकर समर्पित करने तक, उन्होंने दिल जीतने के लिए कई मनमोहक काम किए हैं।  हालाँकि, इस बार, सबसे अधिक उत्साहजनक बात यह है कि वह आसपास के सभी जानवरों के लिए स्टैंड लेने के लिए खुले में आ गई है।  हाँ यह सही है।
 होली पर जहां कुछ लोग जानवरों पर रंगों के हानिकारक प्रभावों को जाने बिना प्यार और करुणा के कारण ऐसा करते हैं, वहीं कुछ लोग जानबूझकर जानवरों को परेशान करने के लिए अमानवीय तरीके से ऐसा करते हैं।
बेजुबानों के लिए स्टैंड लेते हुए लिज़ा ने दृढ़ता से अपनी राय व्यक्त की और कहा कि कुछ लोगों को वास्तव में शिक्षित होने की ज़रूरत है। कुछ लोग इसे केवल मनोरंजन के लिए करते हैं क्योंकि उनका दोषी आनंद बेजुबानों को परेशान करना है। जबकि इस देश के एक व्यक्ति और जिम्मेदार नागरिक के रूप में मैं केवल इतना ही कह सकती हूं कि कृपया अपने उत्सवों को केवल होली तक ही सीमित रखें। जानवरों का होली से कोई लेना-देना नहीं है और न ही उन्होंने आपसे उन्हें शामिल करने के लिए कहा है। इसलिए, कृपया उन्हें मनाएं। मैं केवल अपने तक ही सीमित हूं। मैं किसी के भी त्योहार मनाने के खिलाफ नहीं हूं। कृपया जश्न मनाएं और आनंद लें। कृपया सुनिश्चित करें कि जानवर सुरक्षित हैं क्योंकि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है कि उन्हें किसी भी तरह का गलत व्यवहार करना पड़े। कम से कम हम उनके प्रति दयालु हो सकते हैं। .हमारी ओर से उन्हें सचमुच बस यही चाहिए।

‘दो और दो प्यार’ का टीजर हुआ रिलीज़ 

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विद्या बालन, प्रतीक गांधी, इलियाना डिक्रूज  और सेंथिल राममूर्ति अभिनीत बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दो और दो प्यार’ का टीज़र रिलीज कर दिया गया है, जिसमें एक प्रेम कहानी की झलक दिखाई गई है जो जितनी आश्चर्यजनक है उतनी ही मनोरंजक भी। टीज़र भावनाओं, मज़ेदार संवादों और रिश्तों के उलझे जाल को दर्शाता है। अवार्ड विनिंग ऐड फिल्म मेकर शीर्ष गुहा ठाकुरता द्वारा निर्देशित फ्रेश पेयरिंग इस जॉनर की फिल्म में एक नई एनर्जी लाती है। दर्शकों को बहुत आनंद आएगा क्योंकि वे प्यार, हँसी और मॉडर्न रिलेशनशिप की कॉम्प्लिकेशन से खुद को रिलेट कर पाएंगे। इस फिल्म का म्यूजिक निश्चितरूप से सिनेप्रेमियों के दिल को छू जायेगा।अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत एलिप्सिस एंटरटेनमेंट प्रोडक्शन की फिल्म ‘दो और दो प्यार’ 19 अप्रैल को सभी सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

नाइट्रो सौंदर्य प्रतियोगिता 2024 में सौंदर्य, प्रतिभा और सशक्तिकरण का उत्सव

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मुंबई (अनिल बेदाग): नाइट्रो बेस्पोक फिटनेस ने बहुप्रतीक्षित नाइट्रो ब्यूटी कॉन्टेस्ट की गर्व से मेजबानी की। यह आयोजन उम्मीदों से बढ़कर था, जो सुंदरता, प्रतिभा और सशक्तिकरण का एक रोमांचक उत्सव पेश करता था। इसने एक मनोरम शाम में ग्लैमर, खेल कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी का सहज मिश्रण किया जिसने उपस्थित लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया।
इस आयोजन का एक मुख्य आकर्षण वसंत डावखरे फाउंडेशन द्वारा समर्थित छोटी अनाथालय की बच्चियों को शामिल करना था, जिन्होंने अन्य प्रतियोगियों के साथ भाग लिया, जिससे प्रतियोगिता में एक उत्साहजनक आयाम जुड़ गया।
शाम की शुरुआत शॉर्टलिस्टिंग राउंड से हुई, जहां प्रतिभागियों ने रैंप पर अपनी बेहतरीन अदाएं और सुंदरता और आकर्षण का प्रदर्शन किया।
 सैलून” ने प्रतिभागियों की उपस्थिति को निखारने के लिए ग्रूमिंग सत्र आयोजित किए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे रैंप पर आत्मविश्वास और शैली बिखेरें।
स्टर्च ब्रांड द्वारा प्रायोजित, इस अनूठे राउंड में एक स्पोर्ट्स वॉक का आयोजन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को रैंप के सबसे आगे प्रभावशाली गतिविधियों के साथ अपनी फिटनेस कौशल प्रदर्शित करने का मौका मिला।
 ग्रैंड फिनाले में एक ग्लैमरस वॉक और एक आकर्षक प्रश्नोत्तर सत्र शामिल था। इंटरैक्टिव सत्र के दौरान वॉक और प्रतिभागियों की वाक्पटुता दोनों के लिए अंक प्रदान किए गए।
 इस कार्यक्रम में दिल छू लेने वाला स्पर्श जोड़ते हुए, वसंत डावखरे फाउंडेशन द्वारा समर्थित अनाथ बच्चों ने रैंप की शोभा बढ़ाई, जो परोपकार और समावेशिता का प्रतीक है।
कड़े राउंड के बाद, शीर्ष 3 प्रतिभागियों को उनके असाधारण प्रदर्शन और शालीनता को स्वीकार करते हुए विजेताओं का ताज पहनाया गया।
नाइट्रो फिटनेस के अध्यक्ष प्रबोध वी दावखरे ने कहा, ”नाइट्रो सौंदर्य प्रतियोगिता के माध्यम से, हमारा लक्ष्य न केवल बाहरी सुंदरता, बल्कि आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास और लचीलेपन का भी जश्न मनाना है। यह एक ऐसा मंच है जहां व्यक्ति अपने अद्वितीय आकर्षण और प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं, दूसरों को अपने व्यक्तित्व को अपनाने और जुनून और दृढ़ संकल्प के साथ अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उन खूबसूरत बच्चों का होना हमारे लिए अत्यंत सम्मान की बात थी। “

जो पार्टियां भारत की भूमि से गौ हत्या बन्द करने का शपथ-पत्र देंगी उसे समर्थन

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पलवल  गौ को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए पदयात्रा कर रहे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने पलवल में प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा की सनातन धर्म में गौ हत्या महापाप है। गोहत्या करने वाले को समर्थन देने वाले को भी यह पाप लगता है। इसलिये सत्ता में आकर गोहत्या करने वाले राजनीतिक दलों को मत देकर उन्हें सत्ता में लाने वाले मतदाताओं को भी गोहत्या का पाप लग रहा है। हिन्दुओं को इससे बचने और अपने मताधिकार का सही प्रयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा की इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने यह पदयात्रा शुरू की है।

जगदगुरू शंकराचार्य ने कहा कि हमारे शास्त्र हमें बताते हैं कि गौमाता सर्वदेवमयी है। इनकी पूजा करने से 33 करोड देवी-देवताओं की पूजा एक साथ हो जाती है। इनका स्थान सर्वोपरि है। तभी तो सनातन धर्म में देवता और गुरु के लिए नहीं, अपितु गौमाता के लिए पहली रोटी (गौ-ग्रास) निकालने का नियम है।
हमारे देश का यह भी गौरवपूर्ण इतिहास रहा है कि चक्रवर्ती सम्राट दिलीप और भगवान राम कृष्ण आदि ने भी गौ सेवा की है। परन्तु बहुसंख्यक गौ-पूजक सनातनियों के इस देश में आज गौमाता की हत्या हो रही है जो हम सबके लिए कलंक है। इसी कलंक को भारत की भूमि से मिटाने के लिए पूर्व में भी अनेक संतों ने धर्म सम्राट स्वामी श्री करपात्री जी महाराज एवं शंकराचार्यों के नेतृत्व में गोरक्षा आंदोलन किया था।
तब से अब तक अनेक सरकारें आईं पर किसी ने भी गोहत्या बंदी की उद्घोषणा नहीं की बल्कि मुगलों, आक्रमणकारियों और अंग्रेजों द्वारा की जा रही गौ हत्या को बढ़ावा देती रहीं। अब जब देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है और रामजी के आने की बात कही जा रही है तब भी अमृत (दूध) देने वाली गोमाता की हत्या होती रहे तो ये सरासर अन्याय है और आम हिन्दू मतदाताओं को पाप में डालने वाला काम है जिसे किसी भी दशा में रोका जाना चाहिए। इसलिए हम सब हिन्दू सनातनी चाहते हैं कि भारत में गोहत्या को दंडनीय अपराध माना जाए और गौमाता को पशु सूची से निकालकर राष्ट्रमाता का सम्मान दिया जाए। उन्होंने कहा की आगामी चुनाव में कौन सी पार्टी सत्ता में आएगी यह अभी से नहीं कहा जा सकता।
इसलिए आप सब यह स्पष्ट निर्णय कर लें कि जिस भी पार्टी की सरकार बने उसे शपथ ग्रहण करते ही सबसे पहला कार्य गोहत्या बंद कराकर गौ को राष्ट्र माता घोषित करने का कार्य करना होगा। आपके द्वार पर जो भी वोट लेने आए उनसे आप ये कह सकते हैं कि गौ हत्या न करने का शपथ-पत्र लिखित रूप से देने पर ही वोट दिया जाएगा ताकि आपको स्वयं गोहत्या का पाप न लगे।गोमाता को राष्ट्र माता घोषित कराने के लिए हम स्वयं 14 फरवरी 2024 को  वृंदावन से दिल्ली तक की पदयात्रा कर रहे हैं। यह यात्रा गोवर्धन परिक्रमा से आरम्भ होगी और वर्ष 1966 में जहाँ गौ भक्तों पर गोली चली थी संसद भवन दिल्ली के उस स्थान पर जाकर गो की रक्षा करने के संकल्प के साथ पूर्ण होगी। मार्ग में सभी राजनीतिक दलों को अवसर होगा कि वे यात्रा में सम्मिलित होकर गोरक्षा का संकल्प लें और उद्घोषणा करें।
एनडीए और इंडिया की तर्ज पर होगा गो-गठबंधन
जो पार्टियां भारत की भूमि से गौ हत्या बन्द करने का शपथ-पत्र देंगी वे पार्टियां इस यात्रा में सम्मिलित होकर अपना शपथ-पत्र दे सकती हैं। जो भी राजनीतिक दल इस प्रकार का शपथ-पत्र देकर भारत से गौ हत्या बन्द कराने की स्पष्ट घोषणा करेगा हम उस दल को गो-गठबन्धन का अंग मानकर मतदान करने के लिए सनातनी हिन्दू समाज से अपील करेंगे क्योंकि ऐसे दल को वोट देने से कम से कम गोहत्या का पाप तो हम और आप सब हिन्दुओ को न लगेगा।