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जीएसटी संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया

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New Delhi- अप्रैल 2024 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 2.10 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर 12.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, जो घरेलू लेन-देन (13.4 प्रतिशत की वृद्धि) और आयात (8.3 प्रतिशत की वृद्धि) में मजबूत वृद्धि से संभव हुआ है। रिफंड के बाद, अप्रैल 2024 के लिए शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.92 लाख करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 15.5 प्रतिशत की शानदार वृद्धि को दर्शाता है।

सभी घटकों में सकारात्मक प्रदर्शन:

अप्रैल 2024 के संग्रह का विवरण:  

  • केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी): 43,846 करोड़ रुपये;
  • राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी): 53,538 करोड़ रुपये;
  • एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी): 99,623 करोड़ रुपये, जिसमें आयातित वस्तुओं पर एकत्र 37,826 करोड़ रुपये भी शामिल है;
  • उपकरः 13,260 करोड़ रुपये, जिसमें आयातित वस्तुओं पर एकत्र किए गए 1,008 करोड़ शामिल हैं।

अंतर-सरकारी निपटानः अप्रैल, 2024 में केंद्र सरकार ने संग्रहित आईजीएसटी से सीजीएसटी को  50,307 करोड़ रुपये और एसजीएसटी को 41,600 करोड़ रुपये का निपटान किया। इसका मतलब है कि नियमित निपटान के बाद अप्रैल, 2024 में सीजीएसटी के लिए 94,153 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 95,138 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त होगा।

नीचे दिया गया चार्ट चालू वर्ष के दौरान मासिक सकल जीएसटी राजस्व में रुझान को दर्शाता है। तालिका-1 अप्रैल 2023 की तुलना में अप्रैल 2024 के दौरान प्रत्येक राज्य में एकत्र किए गए जीएसटी के राज्यवार आंकड़े दर्शाती है। तालिका-2 अप्रैल 2024 में प्रत्येक राज्य के निपटान के बाद जीएसटी राजस्व के राज्यवार आंकड़े दर्शाती है।

चार्ट: जीएसटी संग्रह में रुझान

 

 

तालिका 1अप्रैल, 2024 के दौरान जीएसटी राजस्व में राज्यवार वृद्धि[1]

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अप्रैल-23 अप्रैल-24 वृद्धि (%)
जम्मू और कश्मीर 803 789 -2%
हिमाचल प्रदेश 957 1,015 6%
पंजाब 2,316 2,796 21%
चंडीगढ़ 255 313 23%
उत्तराखंड 2,148 2,239 4%
हरियाणा 10,035 12,168 21%
दिल्ली 6,320 7,772 23%
राजस्थान 4,785 5,558 16%
उत्तर प्रदेश 10,320 12,290 19%
बिहार 1,625 1,992 23%
सिक्किम 426 403 -5%
अरुणाचल प्रदेश 238 200 -16%
नगालैंड 88 86 -3%
मणिपुर 91 104 15%
मिजोरम 71 108 52%
त्रिपुरा 133 161 20%
मेघालय 239 234 -2%
असम   1,513 1,895 25%
पश्चिम बंगाल 6,447 7,293 13%
झारखंड 3,701 3,829 3%
ओडिशा 5,036 5,902 17%
छत्तीसगढ़ 3,508 4,001 14%
मध्य प्रदेश 4,267 4,728 11%
गुजरात 11,721 13,301 13%
दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव 399 447 12%
महाराष्ट्र 33,196 37,671 13%
कर्नाटक 14,593 15,978 9%
गोवा 620 765 23%
लक्षद्वीप 3 1 -57%
केरल 3,010 3,272 9%
तमिलनाडु 11,559 12,210 6%
पुडुचेरी 218 247 13%
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 92 65 -30%
तेलंगाना 5,622 6,236 11%
आंध्र प्रदेश 4,329 4,850 12%
लद्दाख 68 70 3%
 अन्य क्षेत्र 220 225 2%
केन्द्रीय क्षेत्राधिकार 187 221 18%
कुल योग 1,51,162 1,71,433 13%

 

तालिका-2: आईजीएसटी का एसजीएसटी और एसजीएसटी हिस्सा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को दिया गया अप्रैल (करोड़ रुपये में)

  निपटान-पूर्व एसजीएसटी निपटान-पश्चात एसजीएसटी[2]
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अप्रैल-23 अप्रैल -24 वृद्धि अप्रैल -23 अप्रैल -24 वृद्धि
जम्मू और कश्मीर 394 362 -8% 918 953 4%
हिमाचल प्रदेश 301 303 1% 622 666 7%
पंजाब 860 999 16% 2,090 2,216 6%
चंडीगढ़ 63 75 20% 214 227 6%
उत्तराखंड 554 636 15% 856 917 7%
हरियाणा 1,871 2,172 16% 3,442 3,865 12%
दिल्ली 1,638 2,027 24% 3,313 4,093 24%
राजस्थान 1,741 1,889 9% 3,896 3,967 2%
उत्तर प्रदेश 3,476 4,121 19% 7,616 8,494 12%
बिहार 796 951 19% 2,345 2,688 15%
सिक्किम 110 69 -37% 170 149 -12%
अरुणाचल प्रदेश 122 101 -17% 252 234 -7%
नगालैंड 36 41 14% 107 111 4%
मणिपुर 50 53 6% 164 133 -19%
मिजोरम 41 59 46% 108 132 22%
त्रिपुरा 70 80 14% 164 198 21%
मेघालय 69 76 9% 162 190 17%
असम 608 735 21% 1,421 1,570 10%
पश्चिम बंगाल 2,416 2,640 9% 3,987 4,434 11%
झारखंड 952 934 -2% 1,202 1,386 15%
ओडिशा 1,660 2,082 25% 2,359 2,996 27%
छत्तीसगढ़ 880 929 6% 1,372 1,491 9%
मध्य प्रदेश 1,287 1,520 18% 2,865 3,713 30%
 गुजरात 4,065 4,538 12% 6,499 7,077 9%
दादरा और नगर हवेली एवं  दमन और दीव 62 75 22% 122 102 -16%
महाराष्ट्र 10,392 11,729 13% 15,298 16,959 11%
कर्नाटक 4,298 4,715 10% 7,391 8,077 9%
गोवा 237 283 19% 401 445 11%
लक्षद्वीप 1 0 -79% 18 5 -73%
केरल 1,366 1,456 7% 2,986 3,050 2%
तमिलनाडु 3,682 4,066 10% 5,878 6,660 13%
पुडुचेरी 42 54 28% 108 129 19%
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 46 32 -32% 78 88 13%
तेलंगाना 1,823 2,063 13% 3,714 4,036 9%
आंध्र प्रदेश 1,348 1,621 20% 3,093 3,552 15%
लद्दाख 34 36 7% 55 61 12%
अन्य क्षेत्र 22 16 -26% 86 77 -10%
कुल योग 47,412 53,538 13% 85,371 95,138 11%

[1] इसमें वस्तु के आयात पर जीएसटी शामिल नहीं है

[2] निपटान के बाद का जीएसटी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जीएसटी राजस्व और आईजीएसटी के एसजीएसटी हिस्से का संचयी हिस्सा है जो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को दिया जाता है

क्लब महिंद्रा कुंभलगढ़ रिज़ॉर्ट में राजस्थान की राजसी गरिमा का लें आनंद

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ख़ूबसूरत अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित, कुम्भलगढ़ ऐतिहासिक रूप से हैरत में डालने वाला स्थान है, जहां चीन की विशाल दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार है। राजस्थान के इस मनोरम स्थल के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत बीच मौजूद है, शानदार क्लब महिंद्रा कुंभलगढ़ रिज़ॉर्ट। राजसी किले जैसे अद्भुत अनुभव और इसके वास्तुशिल्प से चमत्कृत सदस्य खुद को आश्चर्यजनक मनोरम दृश्यों से घिरा हुआ पाते हैं। इस रिज़ॉर्ट का अनोखा शाही परिवेश इसे दर्शनीय स्थान बनाता है। क्लब महिंद्रा कुम्भलगढ़ इतिहास की एक गाथा है, जो खोज यात्रा पर निकलने का आमंत्रण देती है।

क्लब महिंद्रा कुंभलगढ़ रिज़ॉर्ट आराम और समृद्धि से भरपूर प्रवास सुनिश्चित करता है। 69 कमरों के साथ यह रिज़ॉर्ट लोगों की ज़रूरतों के अनुरूप कई किस्म के शानदार आवास प्रदान करता है। सुरुचिपूर्ण साज-सज्जा से लैस विशाल कमरों से लेकर अरावली पहाड़ियों के सुंदर दृश्य पेश करने वाली निजी बालकनी तक, रिज़ॉर्ट के हर कोने को मेहमानों को विश्राम और आनंद से भरा अनुभव प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रिज़ॉर्ट में दो रेस्तरां हैं – जीमन और बीबीक्यू बे। जीमन बुफे और ला कार्टे सेवा के साथ बहु-व्यंजन भोजन प्रदान करता है, जिसमें लाल मास, मेथी मुर्ग, केर सांगरी, मलाई घेवर और राजस्थानी थाली जैसे विशिष्ट व्यंजन पेश किए जाते हैं। जबकि बीबीक्यू बे, अरावली पहाड़ियों के ठीक सामने विशेष रेस्तरां, लाइव कुकिंग और टेबल साइड ग्रिलिंग के साथ भारतीय बारबेक्यू भोजन प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, विशेष अवसरों के लिए छत पर महाराजा-महारानी के भोजन का विकल्प भी है।

रिज़ॉर्ट में सदस्यों को उनके प्रवास के दौरान व्यस्त रखने के लिए कई किस्म की गतिविधियों की व्यवस्था है। आनंददायक स्पा उपचार से लेकर हाई रोप कोर्स और तीरंदाजी जैसे रोमांचकारी आउटडोर रोमांच तक, हर किसी के लिए कुछ न कुछ है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाली कार्यशालाओं का आनंद लें और विशाल इनडोर गतिविधि क्षेत्र में सुकून पाएं। गाइडेड ट्रेक के साथ ग्रामीण जीवन के आकर्षण का अन्वेषण करें या ई-बाइक पर सुंदर स्थानों की यात्रा पर निकलें। और दिन ढलने के बाद, पारंपरिक लोक नृत्यों और कठपुतली शो के साथ राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में डूब जाते हैं। क्लब महिंद्रा कुंभलगढ़ की आपकी यात्रा विलासिता, रोमांच और सांस्कृतिक विसर्जन का अविस्मरणीय मिश्रण होने का वादा करती है।

रिज़ॉर्ट की सीमाओं से परे अन्वेषण करें और क्लब महिंद्रा कुंभलगढ़ के आसपास के इतिहास और संस्कृति का समृद्ध ताना-बाना देखें। राजसी कुंभलगढ़ किला, जटिल नक्काशीदार रणकपुर जैन मंदिर, पवित्र श्रीनाथ जी मंदिर जैसे प्रतिष्ठित स्थलों के लिए गाइडेड पर्यटन में शामिल हों और नाथद्वारा में भगवान शिव की 369 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा, स्टेच्यू ऑफ बिलीफ देखें। आप चाहे रोमांस की तलाश में हों या पारिवारिक जुड़ाव या रोमांच की, यह रिज़ॉर्ट एक यादगार अनुभव सुनिश्चित करता है जो आपके प्रवास के बाद लंबे समय तक बना रहता है।

पद्म पुरस्‍कार-2025 के लिए नामांकन शुरू

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Delhi  गणतंत्र दिवस, 2025 के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पद्म पुरस्‍कार-2025 के लिए ऑनलाइन नामांकन/सिफारिशें आज से शुरू हो गया है। पद्म पुरस्‍कारों के नामांकन की अंतिम तारीख 15 सितंबर, 2024 है। पद्म पुरस्‍कारों के लिए नामांकन/सिफारिशें राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार पोर्टल https://awards.gov.in पर ऑनलाइन प्राप्‍त की जाएंगी।

पद्म पुरस्‍कार, अर्थात पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री देश के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मानों में शामिल हैं। वर्ष 1954 में स्‍थापित, इन पुरस्‍कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है। इन पुरस्‍कारों के अंतर्गत ‘उत्‍कृष्‍ट कार्य’ के लिए सम्‍मानित किया जाता है। पद्म पुरस्‍कार कला, साहित्य एवं शिक्षा, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा, विज्ञान एवं इंजीनियरी, लोक कार्य, सिविल सेवा, व्यापार एवं उद्योग आदि जैसे सभी क्षेत्रों/विषयों में विशिष्‍ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। जाति, व्यवसाय, पद या लिंग के भेदभाव के बिना सभी व्यक्ति इन पुरस्कारों के लिए पात्र हैं। चिकित्‍सकों और वैज्ञानिकों को छोड़कर अन्‍य सरकारी सेवक, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले सरकारी सेवक भी शामिल है, पद्म पुरस्‍कारों के पात्र नहीं हैं।

सरकार पद्म पुरस्‍कारों को “पीपल्स पद्म” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अत:, सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे नामांकन/सिफारिशें करें। नागरिक स्‍वयं को भी नामित कर सकते हैं। महिलाओं, समाज के कमजोर वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों, दिव्यांग व्यक्तियों और समाज के लिए निस्वार्थ सेवा कर रहे लोगों में से ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों की पहचान करने के ठोस प्रयास किए जा सकते हैं जिनकी उत्कृष्टता और उपलब्धियां वास्तव में पहचाने जाने योग्य हैं।

नामांकन/सिफारिशों में पोर्टल पर उपलब्ध प्रारूप में निर्दिष्ट सभी प्रासंगिक विवरण शामिल होने चाहिए, जिसमें वर्णनात्मक रूप में एक उद्धरण (citation) (अधिकतम 800 शब्द) शामिल होना चाहिए, जिसमें अनुशंसित व्यक्ति की संबंधित क्षेत्र/अनुशासन में विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियों/सेवा का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया हो।

इस संबंध में विस्‍तृत विवरण गृह मंत्रालय की वेबसाइट (https://mha.gov.in) पर ‘पुरस्‍कार और पदक’ शीर्षक के अंतर्गत और पद्म पुरस्‍कार पोर्टल (https://padmaawards.gov.in) पर उपलब्‍ध हैं। इन पुरस्‍कारों से संबंधित संविधि (statutes) और नियम वेबसाइट पर https://padmaawards.gov.in/AboutAwards.aspx लिंक पर उपलब्‍ध हैं।

गर्मी में बीमारियों से बचें

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(आर. सूर्य कुमारी – विनायक फीचर्स)
गर्मी का मौसम आ जाता है तो समझ लेना चाहिए कि बीमारियों का मौसम आ गया है। नालियों, गटरों, टंकियों, तालाबों, बजबजाते कूड़ा करकटों, अस्पताल वगैरह के आदि के पास रहने वाले लोगों के लिए यह मौसम मुश्किल भरा साबित होता है।

सबसे ज्यादा कष्ट मक्खियों से होता है। एक नन्हीं मक्खी कूड़ा-करकट व बजबजाती गंदगियों से होकर व्यक्ति के आहार तक पहुंचती है, तो बहुत संभव होता है कि हैजा फैल जाए। हैजा उल्टी दस्तों वाली ऐसी बीमारी है जो व्यक्ति को पस्त कर देती है। सही इलाज व समय पर इलाज नहीं होने से मौत के मुंह में डाल देती है। गर्मी के मौसम में बाजार का भेाजन भी तरोताजा नहीं रह पाता है। अनेक घरों में भी भोजन तरोताजा नहीं रहता है। भोजन को अच्छी तरह ढंक कर रखने की आदत भी बहुत कम लोगों में होती है। मिठाई की दुकानों में मक्खियां मिठाइयों पर मंडराती हैं। बस एक कपड़े से हल्की हवा देकर बीच-बीच में मक्खियों भगाते-उड़ाते रहना दुकानदारों के कर्तव्य की इतिश्री मात्र है। पढ़े-लिखे जानकार लोग तो सावधान होते हैं मगर गरीब, जानकारी न रखने वाले लोग जमकर ऐसी मिठाइयों की खरीददारी करते हैं।

ऐसा ही फलों व जूसों की दुकानों में भी देखने को मिलता है।। झुंड की झुंड बिलबिलाती मक्खियां फलों, छिलकों आदि को विषाक्त करती रहती है। बजबजाती नालियों में थमे पानी में, गंदी जगहों में, तालाबों के गंदे पानी में मच्छर अंडे दे-देकर पनपने लगते हैं। मलेरिया, चिकनगुनियां जैसी बीमारियों के वाहक ये मच्छर भी संक्रमण फैलाते रहते हैं। देश की लगभग पचास प्रतिशत आबादी ऐसी है जो मच्छरदानी का इस्तेमाल नहीं कर पाती। आर्थिक तंगी के कारण और कुछ अनभिज्ञता के कारण। और एक महत्वपूर्ण बात यह हे कि मच्छर सुबह शाम काटते ही रहते हैं। क्या व्यक्ति चौबीसों घंटे मच्छरदानी के अंदर कैद रह सकता है। खून के प्यासे मच्छर भी महामारी फैलाते हैं।

तरह तरह की गंदगियों के बीच टायफाइड जैसी बीमारी के रोगाणु भी फैलते रहते हैं। पानी आदि के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर टायफाइड का बुखार पैदा करते हैं। खुशनसीबी है कि आजकल टायफाइड की बहुत सारी दवाइयां आ गई हैं, पहले टायफाइड वाले मरीज अधिसंख्या में ऊपर वाले को प्यारे हो जाते थे। अब भी टायफाइड का समय रहते उचित इलाज नहीं होता है तो मरीज जीवन से हाथ धो बैठता है। ऐसे ही पीलिया के रोगाणु भी शरीर में जाकर व्यक्ति को परेशान कर देते हैं।

गंदगी, मलमूत्र के बीच लोटपोट करने वाले सुअर भी बीमारी को आमंत्रण देते हैं। स्वाइन फ्लू के विषाणु शरीर में पहुंचकर मरीज को परेशान करते हैं। श्वसन तंत्र में सक्रिय हो जाते हैं। मरीज को गंभीर स्थिति में डाल देते हैं। कई तो काल के ग्रास में समा जाते हैं। ऐसे ही न जाने कितनी तरह की बीमारियां गंदगी के चलते तंग करती हैं। महामारी का रूप ले लेती हैं। इसमें सरकार को बहुत कुछ करना चाहिए। ग्रीष्मकालीन महामारियों के लिए, बजट तय करना चाहिए। रोकथाम के लिए कीटनाशकों का छिड़काव, नालियों की साफ-सफाई मरे जानवरों को गड़ाई आदि तमाम तरह के कदम उठाने चाहिए।

गंदगी के आसपास रहने वाले लोगों, भुक्त भोगियों को पहले से ही सावधान हो जाना चाहिए। उनको यह बात ध्यान में रखना चाहिए कि निरंतर बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में सरकार कारगर काम नहीं कर सकती, कारगर कदम नहीं उठा सकती, इसलिए इनको भी साफ-सफाई का बीड़ा उठाना चाहिए। मोहल्ले कालोनियों के लोग खुद साफ-सफाई कर सकते हैं। घर-बाहर को रोगमुक्त कर सकते हैं या फिर चंदा की उगाही कर, सफाई वालों से काम करवा सकते है। समाज के प्रबुद्ध व जानकार लोग, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी, गैर सरकारी संगठन आदि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों तक पहुंचकर उन्हें जाग्रत कर सकते हैं। रोकथाम पहली आवश्यकता है, जबकि बीमारी से संघर्ष दूसरी। (विनायक फीचर्स)

एशिया का सबसे बड़ा अनाथालय बंद होने के कगार पर

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(सुभाष आनंद – विनायक फीचर्स)

एशिया का सबसे बड़ा अनाथालय बंद होने के कगार पर एशिया का सबसे बड़ा अनाथालय फिरोजपुर की बस्ती टैंका वाली में स्थित है। यहां कभी महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने हाथों से इसकी नींव का पत्थर रखा था ताकि लावारिस बच्चों को नयी जिंदगी मिल सके। स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपने भाषण में कहा था कि आज भारत की हालत काफी दयनीय है। देश का बचपन भूखा है, उसे आश्रय की जरूरत है, उन्हें संस्कृति देने की जरूरत है। 102 अनाथ बच्चों को लेकर यह अनाथालय फिरोजपुर शहर में स्थापित किया गया था, तब फिरोजपुर के साथ-साथ पंजाब के दानी सज्जनों ने दिल खोलकर दान दिया था।

इतिहास के झरोखों को देखा जाए तो शहीद भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह ने जब देश में भुखमरी की लहर चल रही थी तब ढाई सौ से ज्यादा अनाथ बच्चों को इसी अनाथालय में शरण दिलवाई थी उन्होंने पंजाब के किसानों से 100 बोरी गेहूं और गेहूं का दलिया दान किया था।

फिरोजपुर शहर का अनाथालय हजारों अनाथ बच्चों का आश्रय स्थल बन गया। जैसे-जैसे समय व्यतीत होता गया आर्य अनाथालय में राखी का त्यौहार बड़े स्तर पर मनाया जाने लगा, देश की कई सेवाभावी संस्थाओं के अतिरिक्त सेना के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा यहां हर त्यौहार को बड़े जोश से मनाया जाने लगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आर्य अनाथालय की अधिकतर बच्चियों की शादियां रक्षा विभाग के जवानों के साथ करवाई गई।

डाक्टर साधु चंद्र विनायक बताते हैं कि फिरोजपुर का आर्य अनाथालय अपने आप में बड़ी संस्था थी। लोग अपने बच्चों के जन्म दिवस एवं बुजुर्गों के जन्म मृत्यु पर यहां लंगर करते थे। कोई समय था जब इस अनाथालय में चहल पहल रहती थी, अब वह वीरान हो चुका है।

झारखंड से कुछ गरीब परिवारों के बच्चों को यहां लाया गया था। बाद में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार उन्हें वापस भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि बच्चे अपने राज्य की संस्कृति से कट गए थे, उनके मां-बाप होते हुए उन्हें अनाथालय में रखा जा रहा है।

अनाथालय के प्रबंधको में से पी. डी. चौधरी और उनकी पत्नी संतोष चौधरी की सेवाएं सदैव याद रखी जाएगी, उन्होंने अपना सारा जीवन अनाथालय की सेवा में लगा दिया और बच्चों को अच्छे संस्कार प्रदान किए, उनके समय अनाथालय में पूरा अनुशासन हुआ करता था ,आर्य समाज की पद्धति से अनाथालय में हवन यज्ञ नियमित रूप से होते थे। संतोष चौधरी ने लड़कियों की कमान अपने हाथों में ले रखी थी। खाने से पहले आरती की प्रथा को अनाथालय में कायम रखा।
एक समय बच्चों की किलकारियों से गुंजायमान रहने वाले इस अनाथालय में इस समय केवल दो बच्चे ही बचे हैं। सतनाम कौर इस समय अनाथालय का सारा कामकाज देख रही है उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली की प्रबंधक कमेटी नए अनाथालय को बसाने जा रही है।

डॉक्टर केडी अरोरा जो 1981 से अनाथालय में बच्चों का मुफ्त इलाज करते आए हैं, बताते हैं कि यहां बच्चों को अच्छा और पौष्टिक आहार मिलता था। अत: खाने पीने की बच्चों को कोई कमी नहीं थी, वह शाम को 2 घंटे बच्चों का उपचार करते थे।

दानी सज्जनों की कोई कमी नहीं थी,अनाथालय के भीतर अपना ही प्राइमरी स्कूल चल रहा था पर अब यह इमारत बुरी तरह जर्जर हो चुकी है, एशिया का सबसे बड़ा अनाथालय अब वीरान बन चुका है और बंद होने की कगार पर है। (विनायक फीचर्स)

व्यंग्य – कुत्ता राष्ट्रीय पशु घोषित हो

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(पंकज शर्मा तरूण – विभूति फीचर्स)

हमारे देश में हमेशा से उल्टी गंगा बहाने वाले को सलाम ठोका जाता रहा है। यह इस उदाहरण से सिद्ध हो जाता है कि मुहल्ले या कस्बे में जो व्यक्ति जितना बड़ा गुंडा, मवाली, उत्पाती, उचक्का, ठग और झूठा होता है, उसे परिवार,समाज के लोग अपना संरक्षक मानने लगते हैं और वह होता ही है संरक्षक। ऐसे कई लोग हुए जिनका आपराधिक जीवन होने के बावजूद चुनाव में खड़े किए गए और विधायक सांसद बने। उन्होंने बड़ी ही दबंगई और निष्ठा से इस देश की बहुत सेवा की और महान हो गए। इतिहास में उनका नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा है। भले ही इतिहासकारों ने डर के मारे लिखा हो।

हमारा विषय है कुत्ता या श्वान को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का। कुत्ता एक वफादार जानवर है जो आदिम युग से ही मानव के साथ रह कर वफादारी करता रहा है। कहते हैं कि जब मानव शिकार खेल कर उदरपूर्ति किया करता था तब उसे यही कुत्ता शिकार करने में पूर्ण सहयोग करता था बिना किसी लालच के! यही कारण है कि आज भी हमने इस वफादार जीव को हर घर में पाल रखा है। हमारे द्वारा इसका लालन पालन अपने बच्चों से भी अधिक नेह लगन से किया जाता है।हजारों रुपए मासिक खर्च किए जाते हैं। गौ माता को तो हमने केवल दूध के लिए ही पाला था और इसके बाद सड़कों पर बैठने को बाध्य कर दिया।अब वह हमारी कहने भर की माता रह गई है! यह कहना भी अर्ध सत्य ही माना जाएगा कैसे? मैं बताता हूं। गौ रक्षा के नाम पर कई संगठन बन गए हैं जो सरकारी मदद पा कर अपने जीवन को धन्य कर बैठे हैं। गौ शालाएं खोल कर बैठे हैं जो गायों के शरीर में भूसा भर कर उनको मार रहे हैं। इसी बहाने उनकी मुक्ति का मार्ग खुल रहा है और मानव को सुख वैभव मिल रहा है।

आज हमारे देश का राष्ट्रीय पशु शेर को बना रखा है जो इंसान के किसी काम का नहीं। पहले यह सर्कस में हम लोगों का मनोरंजन करता था तथा सर्कस के सभी सदस्यों का पेट भरने में मददगार था, इसे भी मेनका जी ने सर्कस से छुड़ा कर सेवा निवृत्त कर दिया। सर्कस भी इतिहास के पन्नो में गुम हो गए! दूसरे इसको या तो दुर्गा माता की तस्वीर में देखा जा सकता है या फिर गिर के जंगलों में जाएं तो वहां इनका स्थाई रहवास है।

वहां इनके दर्शन हो सकते हैं। मगर मेरे आज तक यह बात समझ में नहीं आई कि इन से हमें क्या लाभ। करोड़ों अरबों रुपए इन पर खर्च किया जा रहा है?

किसी पागल कुत्ते ने किसी वी आई पी को नोच खसौट लिया होगा तो बेचारे इस वफादार जानवर को पकडऩे और जंगलों में छोडऩे का फरमान जारी हो गया इसको नगर प्रशासन बीन -बीन कर इकठ्ठा कर रहा है। जैसे कोई भयानक आपदा आ गई है। हमारे गली की रात भर भौंक कर चोरों से रक्षा करता है, मुफ्त में। कोई वेतन, वर्दी की मांग नहीं करता फिर भी आज हमसे इसे जुदा किया जा रहा है।

नेता लोग तो इसे अपना इष्ट देवता, पथ प्रदर्शक मानते हैं। फिर भला अचानक से इनकी सोच कैसे बदल गई? मेरा तो सुझाव है कि इस श्वान भाई को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दो ताकि इसे कोई भी नुकसान पहुंचाने, पकडऩे, मारने की हिम्मत नहीं करेगा। मेरे सुझाव के समर्थन में आने हेतु आप सभी से कर बद्ध निवेदन है। प्रमुख रूप से उन कन्याओं के बारे में सोचना आवश्यक है जो इनसे जी जान से प्यार करती हैं। वे इनके विलुप्त हो जाने पर स्वच्छंद प्यार किससे करेंगी? (विभूति फीचर्स)

दिल्ली – महिला आयोग से 223 कर्मचारियों को निकाला गया

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दिल्ली के उपराज्यपाल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली महिला आयोग से 223 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. आरोप है कि दिल्ली महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने नियमों के खिलाफ जाकर बिना अनुमति के इनकी नियुक्ति की थी.

आदेश में डीसीडब्ल्यू अधिनियम का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि आयोग में केवल 40 पद स्वीकृत हैं और डीसीडब्ल्यू के पास अनुबंध पर कर्मचारियों को नियुक्त करने का अधिकार नहीं है.

DCW डिपार्टमेंट के एडिशनल डायरेक्टर की तरफ से जारी इस आदेश में ये भी कहा गया है कि नई नियुक्तियों से पहले ज़रूरी पदों का कोई मूल्यांकन नहीं हुआ था और न ही अतिरिक्त वित्तीय बोझ की अनुमति ली गई थी.यह कार्रवाई फरवरी 2017 में तत्कालीन उपराज्यपाल को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है

गायों के लिए बड़ी संख्‍या में दान करें- द‍िल्‍ली हाईकोर्ट

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नई द‍िल्‍ली. द‍िल्‍ली हाईकोर्ट ने एक आदेश देते हुए कहा है क‍ि लैंडफिल साइट के पास गाय निस्संदेह कचरे पर पलती होंगी और यदि उनका दूध मनुष्य, विशेषकर बच्चे पीते हैं, तो इससे बीमारी होना निश्चित है. लैंडफिल साइट के पास डेयरियों से मनुष्यों को होने वाले गंभीर खतरे को ध्यान में रखते हुए प्रथम दृष्टया कोर्ट का मानना ​​है कि इन डेयरियों को तत्काल स्थानांतरित किया जाना चाहिए.

द‍िल्‍ली हाईकोर्ट ने वकील सुनयना सिब्बल और अन्य द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में नौ डेयरी कॉलोनियों को अन्य उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने के निर्देश देने की मांग की गई थी. हालां कि, कोर्ट ने कहा कि कोई भी बाध्यकारी निर्देश जारी करने से पहले वह संबंधित अधिकारियों से सुनना चाहेगा कि इन निर्देशों को किस प्रकार तैयार किया जाना चाहिए.

हाईकोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आयुक्त, पशु चिकित्सा निदेशालय, एमसीडी और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के सीईओ को अगली सुनवाई की तारीख पर कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश दिया है. पीठ ने आदेश दिया है कि अधिकारी ऐसी भूमि की उपलब्धता की संभावना भी तलाशेंगे, जहां डेयरियों को स्थानांतरित किया जा सके. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने मौखिक रूप से एमसीडी से डेयरियों के स्थानांतरण के लिए दान स्वीकार करने की संभावना तलाशने को कहा है.

कोर्ट ने कहा क‍ि अलग सोचिए… आपको कल्पनाशील होना होगा. बाकी सब भूल जाइए, आप कहते हैं कि आप दान स्वीकार करेंगे. मुझे यकीन है कि लोग गायों के लिए बड़ी संख्या में पैसे दान करेंगे. इस मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इस खराब दूध को हम सभी किसी न किसी रूप में पचा रहे हैं. कोर्ट ने कहा कि इस सारे दूध का इस्तेमाल मिठाई और अन्य सभी उत्पादों के प्रबंधन के लिए किया जाएगा. क्या आप उन उत्पादों का परीक्षण भी कर रहे हैं या नहीं? क्या आप लोगों को यह सब खाने की इजाजत दे रहे हैं?

याचिकाकर्ता ने कहा था कि 22 साल हो गए हैं और राज्य ने कोई कदम नहीं उठाया है. 2011 में कोर्ट ने आदेश हुए था और तब से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है और अब हम 2024 में आ गए है, मामले की प्रगति की निगरानी के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त किया जाए.

एमसीडी वकील ने कहा कि लैंडफिल के पास स्थित डेयरी को जल्द से जल्द स्थानांतरित करने की जरूरत है. एमसीडी के वकील ने कहा कि जब हम किसी डेयरी को बंद करते हैं और शिकायत दर्ज करते हैं, तब भी वह अपना फिर डेयरी चलाना शुरू कर देते हैं. यह मुद्दे हल नहीं होंगे. एमसीडी के वकील ने कहा कि हम कार्यवाही करते हैं और डेयरी को बंद कर देते है. वह कुछ दिनों में वापस शुरू हो जाती है. पशु चिकित्सा अधिकारी हर दिन मैदान पर नहीं रह सकते, हम नोटिस जारी कर सकते हैं और हम उन्हें बंद कर सकते हैं लेकिन इससे अधिक कुछ नहीं कर सकते.

TMC विधायक हुमायूं कबीर का विवादित बयान

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लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर दूसरे चरण का मतदान समाप्त हो चुका है। वहीं तीसरे चरण के लिए मतदान की तैयारियां चल रही हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार करने पहुंचे तृणमूल कांग्रेस के विधायक ने विवादित बयान दिया है। दरअसल टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने कहा है कि हिंदुओं को गंगा में बहा देंगे। बता दें कि हुमायूं कबीर भरतपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं, जो कि मुर्शिदाबाद जिले के तहत आता है। साथ ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के सदस्य हैं। बता दें कि हुमायूं कबीर लगातार चुनाव प्रचार करने में जुटे हुए हैं। बीते दिनों इन्होंने टीएमसी के बहरमपुर से उम्मीदवार यूसुफ पठान के लिए भी चुनाव प्रचार किया था

हुमायूं कबीर का विवादित बयान

दरअसल हमारे हाथ एक वीडियो लगा है। दावा किया जा रहा है कि इस वीडियो में टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे हैं। इस चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि तुम लोग (हिंदू) 70 फीसदी हो और हम लोग भी 30 फीसदी हैं। यहां पर तुम काजीपाड़ा का मस्जिद तोड़ोगे। बाकी मुसलमान हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे, यह कभी नहीं होगा। भाजपा को मैं यह बता देना चाहता हूं कि यह कभी भी नहीं होगा। 2 घंटे के अंदर ही भागीरथी नदी में बहा न सके तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।

यूसुफ पठान पर छिड़ी थी जंग

बता दें कि इससे पहले हुमायूं कबीर तब सुर्खियों में आए थे जब टीएमसी द्वारा लोकसभा चुनाव के लिए टिकट बांटे गए थे। दरअसल पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए क्रिकेटर यूसुफ पठान को बहरामपुर से अपना उम्मीदवार बनाया। इसके बाद से पार्टी में ही विवाद शुरू हो गया और टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने कहा था कि अगर पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बदला तो वह बहरामपुर से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। कबीर ने कहा था कि दूसरे राज्य से किसी को लाकर कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी को नहीं हराया जा सकता है।

देवेंद्र फडणवीस लाएंगे घोटालों की लिस्ट

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New Delhi –भाषा –  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महामारी के दौरान देश में ‘टीके’ के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे, तब राज्य की तत्कालीन महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार कथित घोटालों में लिप्त थी। मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रैली को संबोधित करते हुए फडणवीस ने दावा किया कि वह बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) में अनियमितताओं और एमवीए शासन (नवंबर 2019-जून 2022) के दौरान हुए कथित घोटालों की एक सूची लाएंगे .

देवेंद्र फडणवीस लाएंगे घोटालों की लिस्ट

बता दें कि मुंबई में 20 मई को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के दौरान राज्य में (एमवीए) सरकार के लिए नेतृत्व प्रदर्शित करने का एक बड़ा अवसर था। प्रधानमंत्री मोदी आगे बढ़कर नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने (कोविड-19 के खिलाफ) टीके बनाने के लिए वैज्ञानिकों को संसाधन और कच्चा माल उपलब्ध कराया।’’ भाजपा नेता फडणवीस ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे (एमवीए सरकार) ‘खिचड़ी’ (मजदूरों, बेघर लोगों के लिए भोजन) की आपूर्ति और ‘शव के लिए बैग’ की खरीद में अनियमितता जैसे घोटालों में लिप्त थे।

एमवीए को बताया कफन चोर

फडणवीस ने कहा कि वे ‘कफन चोर’ हैं जिन्होंने अपनी लूट में मृतकों को भी नहीं बख्शा। फडणवीस ने कहा, ‘‘मैं जल्द ही उनके घोटालों की एक सूची सामने लाऊंगा। मैं लोगों से कुछ समय इंतजार करने के लिए कहूंगा ताकि मैं उनके कृत्यों के बारे में विस्तार से बता सकूं।’’ विपक्षी गठबंधन एमवीए में शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) शामिल हैं। बता दें कि इससे पूर्व शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि पूर्व के चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी के लिए वोट मांगने को लेकर लोगों से माफी मांगता हूं।