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भारतीय पशुपालन निगम भर्ती का नोटिफिकेशन जारी

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भारतीय पशुपालन निगम भर्ती का नोटिफिकेशन जारी

भारतीय पशुपालन निगम भर्ती का 10वीं पास के लिए 2250 पदों पर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है इसके लिए आवेदन फॉर्म 5 अगस्त तक भरे जाएंगे।

भारतीय पशुपालन निगम लिमिटेड भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है इसके तहत गौ संवर्धन विस्तारक, गौ संवर्धन सहायक और गौ सेवक के पदों पर भर्ती की जाएगी इस भर्ती के लिए 10वीं और 12वीं पास अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं यह भर्ती महिला और पुरुष दोनों के लिए आयोजित की जा रही है इस भर्ती के लिए अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

भारतीय पशुपालन निगम लिमिटेड द्वारा 2250 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया है इसमें गौ संवर्धन विस्तारक के लिए 225 पद, गौ संवर्धन सहायक के लिए 675 पद और गौ सेवक के लिए 1350 पद रखे गए हैं भारतीय पशुपालन निगम भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं और आवेदन की अंतिम तिथि 5 अगस्त रखी गई है।

भारतीय पशुपालन निगम भर्ती आवेदन शुल्क

इस भर्ती में गौ संवर्धन विस्तारक पद के लिए आवेदन शुल्क 944 रुपए, गौ संवर्धन सहायक पद के लिए 826 रुपए और गौ सेवक पद के लिए आवेदन शुल्क 708 रुपए यह रखा गया है अभ्यर्थी आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं।

भारतीय पशुपालन निगम भर्ती आयु सीमा

इस भर्ती में गौ संवर्धन विस्तारक पद के लिए आयु सीमा 25 से 45 वर्ष तक, गौ संवर्धन सहायक पद के लिए 21 से 40 वर्ष तक और गौ सेवक के लिए 18 से 40 वर्ष तक रखी गई है इसमें आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि को आधार मानकर की जाएगी इसमें आरक्षित वर्गों को सरकार के नियम अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

भारतीय पशुपालन निगम भर्ती शैक्षणिक योग्यता

इस भर्ती में गौ सेवक पद के लिए अभ्यर्थी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए गौ संवर्धन सहायक पद के लिए आवेदक मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा पास होना चाहिए जबकि गौ संवर्धन विस्तारक पद के लिए उम्मीदवार मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से स्नातक होना चाहिए।

भारतीय पशुपालन निगम भर्ती चयन प्रक्रिया

आवेदन पत्र प्राप्त होने के बाद भरी गई जानकारी के आधार पर ऑनलाइन परीक्षा की सूचना आपकी रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भेजी जाएगी ऑनलाइन परीक्षा की तिथि एवं समय विज्ञापन की अंतिम तिथि से एक माह के बाद आवेदक की रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भेजी जाएगी।

अभ्यर्थियों को सभी सूचनाओं आवेदन फॉर्म में भरी गई ईमेल आईडी पर भेजी जाएगी इसलिए आवेदन करते समय अपनी ईमेल आईडी और फोन नंबर सही दर्ज करें इसके बाद साक्षात्कार और डॉक्युमेंट वेरीफिकेशन होगा आवेदक द्वारा लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए दोनों में अलग-अलग 50% अंक लाना अनिवार्य होगा।

भारतीय पशुपालन निगम भर्ती आवेदन प्रक्रिया

अभ्यर्थी इस ऑनलाइन परीक्षा को किसी भी कंप्यूटर सेंटर, साइबर कैफे, लैपटॉप, डेस्कटॉप एवं मोबाइल के माध्यम से किसी भी स्थान से दे सकता है ऑनलाइन परीक्षा के लिए आवेदकों को एक लिंक उनकी रजिस्टर्ड ईमेल पर भेजा जाएगा अभ्यर्थी मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए एवं चरित्र अच्छा होना चाहिए।

भारतीय पशुपालन निगम भर्ती के लिए अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन आवेदन करना होगा जो अभ्यर्थी इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं उन्हें पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन पूरा देख लेना है इसके बाद अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक करना है।

अभ्यर्थियों को आवेदन फॉर्म में पूछी गई सभी जानकारी सही-सही भरनी है इसके बाद जरूरी दस्तावेज पासपोर्ट साइज फोटो और सिग्नेचर अपलोड करने हैं इसके बाद अपनी कैटेगरी के अनुसार आवेदन शुल्क का भुगतान करना है सभी जानकारी भरने के बाद आवेदन फॉर्म फाइनल सबमिट कर देना है और इसका प्रिंटआउट निकाल कर भविष्य के लिए सुरक्षित रख लेना है।

फिल्म “400” का मुहूर्त मड आयलैंड मुंबई में सम्पन्न, पॉलिटिकल सस्पेंस थ्रिलर है यह फिल्म

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मुंबई। ब्रॉडकास्ट मीडिया एण्ड एंटरटेनमेंट के बैनर तले निर्माता विश्व भट्ट की पॉलिटिकल सस्पेंस थ्रिलर फिल्म “400” का मुहूर्त पिछले दिन मनीषा बंगला, मड आयलैंड, मलाड (पश्चिम), मुंबई में भव्यता से सम्पन्न हुआ जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में भावनगर (गुजरात) के पूर्व विधायक प्रवीण कुमार मारू उपस्थित रहे। उन्हें शॉल श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।

फिल्म ”400” की कहानी का प्लेटफार्म राजनीतिक गलियारा है जिसमें हर तरह के मसाले उपलब्ध रहेंगे। इस फिल्म में गलत कानून व्यवस्था, गलत राजनीतिक निर्णयों को दर्शकों के समक्ष ला कर उसे नये सिरे से समझने की कोशिश की जायेगी। उनकी दृष्टि में ऐसी बातें दो चार सौ तक होंगी जिन पर ध्यान नहीं दिया जाता। नवोदित निर्माता विश्व भट्ट कहते हैं कि फिल्म “400” न तो किसी राजनीतिक नारे से प्रेरित है ना ही हॉलीवुड की फिल्म “300” से प्रभावित है।
ब्रॉडकास्ट मीडिया एण्ड एंटरटेनमेन्ट की इस प्रथम प्रस्तुति की सारी निर्माण प्रक्रियाएं प्रारम्भ हैं। बरसात पश्चात् “400” हैदराबाद के खूबसूरत लोकेशंस पर फिल्माई जायेगी। संभवत: दूसरा लोकेशन नवाबों का नगर लखनऊ हो सकता है। लेकिन इस फिल्म की शूटिंग का समापन तो बस मुंबई में ही होगा।

बधाई व शुभकामनाएं देने पहुंचे शुभेच्छुओं में कुछ प्रमुख नाम हैं – भरत गज्जर, कल्याणजी भाई जाधव, राजेश पाटिल, राजेश नानावटी, राजू भाई शाह, दीपक मित्तल और अजीत बोरा।

खूबसूरत अंबर बेदी को एक महत्वपूर्ण सकारात्मक भूमिका हेतु चयनित किया गया है। सिनेमाघरों में विश्व भट्ट की “400” अगले वर्ष अर्थात् सन् 2025 के पूर्वार्द्ध में पहुंचेगी।

उलझ ट्रेलर: जान्हवी कपूर, गुलशन देवैया और रोशन मैथ्यू का दिखेगा इस दिलचस्प और मनोरंजक थ्रिलर में दमदार अभिनय

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जंगली पिक्चर्स द्वारा “उलझ” का मनोरंजक ट्रेलर रिलीज़ किए जाने के साथ ही इंतज़ार खत्म हो गया है. फिल्म में, जान्हवी कपूर, गुलशन देवैया और रोशन मैथ्यू नज़र आएंगे. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सुधांशु सरिया द्वारा निर्देशित “उलझ” दर्शकों को अंतर्राष्ट्रीय डिप्लोमेसी वाली दुनिया में ले जाती है.

इस रोमांचक कहानी में, जान्हवी कपूर ने सुहाना का किरदार निभाया है. वह लंदन दूतावास में अपने महत्वपूर्ण कार्य के दौरान एक विश्वासघाती व्यक्तिगत साजिश में उलझी हुई एक युवा राजनयिक है. जैसे-जैसे वह अपने करियर की जटिलताओं से निपटती है, वह खुद को अपनी विरासत के बोझ और धोखे के जाल में उलझी हुई पाती है, जहाँ हर सहयोगी दुश्मन हो सकता है. जान्हवी कपूर का किरदार और उनके एक्शन दर्शकों के लिए रोमांच की एक अलग ही दुनिया ले कर आते हैं, जिससे यह फिल्म उनके फैन्स के लिए मस्ट वाच हो जाती है.
ट्रेलर में इंटेंसिटी है, जिसमें जान्हवी, गुलशन और रोशन के बेहतरीन अभिनय को दिखाया गया है. हर किरदार ग्रे शेड्स से भरा हुआ है, जो सस्पेंस और अप्रत्याशित ट्विस्ट की रोलरकोस्टर राइड का वादा करता है.
दर्शक दिल को थामने वाले पलों और सीट से चिपके रहने वाले ड्रामा की उम्मीद कर सकते हैं क्योंकि “उलझ” जाल, साजिशों और विश्वासघात की एक मनोरंजक कहानी को सामने लाती है. अपनी आकर्षक कहानी और शानदार अभिनय के साथ, यह फिल्म बिलकुल अलग तरह के सिनेमाई अनुभव प्रदान करेगी.
जान्हवी कपूर ने फिल्म में अपनी भूमिका के बारे में अपने विचार साझा करते हुए कहा, “यह फिल्म मेरे लिए विशेष रूप से खास है क्योंकि मैं पहली बार एक राजनयिक की बहुत ही चुनौतीपूर्ण भूमिका निभा रही हूँ. यह एक आकर्षक अनुभव रहा है. सुधांशु सरिया के साथ काम करना अविश्वसनीय रूप से समृद्ध करने वाला रहा है. उन्होंने मुझे अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया. सुहाना का किरदार मजबूत और बहुआयामी है. मुझे किरदार के कुछ पहलुओं से व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस हुआ जिसने मुझे एक प्रामाणिक परफोर्मेंस देने में सक्षम बनाया.”
निर्देशक सुधांशु सरिया कहते हैं, “उलझ आखिरकार विकल्पों की पहेली के बारे में है और इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति वाली दुनिया में स्थापित करना इसे और अधिक रोमांचक बनाता है. जान्हवी, गुलशन और रोशन के नेतृत्व में इन शानदार कलाकारों का निर्देशन करना एक शानदार अनुभव रहा है.वे सभी अपने किरदारों में गहराई लेकर आए हैं और कहानी को ऊपर उठाया है. मैं जानता अहूँ कि दर्शक इस रोमांचक ट्विस्ट और टर्न से भरपूर फिल्म देखने के लिए इंतजार नहीं कर सकते.”
जंगली पिक्चर्स की सीईओ अमृता पांडे ने टिप्पणी की, “सुधांशु के निर्देशन में उलझ दर्शकों को सस्पेंस और ड्रामा का एक आकर्षक मिश्रण प्रदान करती है. हमारा मानना है कि जान्हवी ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ अभिनय किया है. फिल्म की तकनीकी टीम ने फिल्म को नया और प्रामाणिक बनाने के लिए बहुत मेहनत की है. हम 2 अगस्त को इस आकर्षक कहानी को बड़े पर्दे पर लाने के लिए उत्सुक हैं.”
फिल्म में आदिल हुसैन, राजेश तैलंग, मेयांग चांग, राजेंद्र गुप्ता और जितेंद्र जोशी ने भी अभिनय किया है. परवेज शेख और सुधांशु सरिया द्वारा लिखित और अतिका चौहान के संवादों के साथ, “उलझ” 2 अगस्त, 2024 को रिलीज़ होने के लिए पूरी तरह तैयार है.

https://bit.ly/Ulajh-OfficialTrailer

जोधपुर में असुरक्षित हुई गौ माता

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भारत में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है. लेकिन ऐसे कई लोग हैं जो इन बेजुबानों को तकलीफ देने से नहीं हिचकते. इन बेजुबानों को दर्द देने के बाद इन्हें ख़ुशी मिलती है. इसका एक उदाहरण जोधपुर की सड़कों पर देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक वीडियो शेयर किया गया. इसे देखने के बाद आपका कलेजा भी कांप जाएगा.

वायरल हो रहे वीडियो को जोधपुर का बताया जा रहा है. सड़कों पर घूमने वाली गौ माता पर किस तरह से कुछ लोग एसिड से अटैक कर रहे हैं, ये देखकर सबकी रुह कांप गई. सड़क पर घूम रह एक बैल की पूरी चमड़ी जली हुई नजर आई. वो दर्द से कराह रहा था. उससे चला नहीं जा रहा था. जब नजदीक से देखा तो पता चला कि किसी ने उसपर एसिड फेंक दिया था. इससे उसकी बॉडी जल गई थी.

सामने आए कई मामले
सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो शेयर किया गया. इसमें एक बैल को सड़क पर लंगड़ाते हुए जाते देखा गया. जब कुछ लोग बैल के नजदीक गए तो उनके होश ही उड़ गए. किसी ने उसके ऊपर तेज़ाब फेंक दिया था. इससे बैल के पीठ के ऊपर की स्किन उतर गई थी. दर्द की वजह से उससे चला नहीं जा रहा था. इसके बाद कुछ लोग उसे इलाज के लिए पास के वेट अस्पताल ले गए, जहां दवा देने के बाद उसका दर्द कम हुआ.

आखिर क्यों मनाएं “संविधान हत्या दिवस”

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(डॉ. राघवेंद्र शर्मा -विभूति फीचर्स)

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  लोकसभा चुनाव के दौरान बार-बार कहते रहे हैं कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर इस देश को ऐसा संविधान सौंप कर गए हैं जिसे कोई माई का लाल छेड़  तक नहीं सकता। संभवतः कहने का मतलब यह है कि जिस संविधान को छेड़ा तक नहीं जा सकता तो फिर उसकी हत्या कैसे की जा सकती है? यदि सरसरी तौर पर देखा जाए तो  यह तर्क पूरी तरह गलत भी नहीं है। लेकिन जैसी मान्यताएं हैं कि अनेक बार पूर्ण सत्य वह नहीं होता जो हमें दिखाई अथवा सुनाई दे रहा होता है। उसे समझने के लिए कई बार तात्कालिक एवं पुरातन परिस्थितियों का अध्ययन करने की बाध्यता उत्पन्न हो जाती है। तब कहीं जाकर निर्णायक रूप से वास्तविकता का पता लग पाता है। इस मामले में भी यदि हम तार्किक दृष्टि से देखें तो  25 जून को संविधान हत्या दिवस कहना कोई गलती नहीं  है। लेकिन इस पूरे सत्य को समझने के लिए हमें थोड़ा पुरातन काल की ओर लौटना होगा और अपनी संस्कृति का अध्ययन करना पड़ेगा।

द्वापर युग में जब महाभारत का युद्ध समापन की ओर था और अश्वत्थामा स्वयं को श्रेष्ठ धनुर्धर साबित नहीं कर पा रहा था। उसकी वीरता और अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लग चुका था। जिसे वह अपना परम मित्र कहता था वह दुर्योधन अपना स्वार्थ सिद्ध न होने पर निरंतर उसे धिक्कार रहा था। तब अश्वत्थामा ने सारी लोक लाज त्याग कर द्रोपदी के निद्रामग्न पांच पुत्रों की वीभत्स हत्या कर दी। इससे भी मन नहीं भरा तो अश्वत्थामा ने सुभद्रा के गर्भ में पल रहे शिशु पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया। चूंकि ब्रह्मास्त्र को बेहद विध्वंसक और निर्णायक अस्त्र माना गया है सो उसने सुभद्रा के गर्भस्थ शिशु को मृतप्राय: कर ही दिया था। किंतु तभी भगवान कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र को उस शिशु की सुरक्षा हेतु सुभद्रा के गर्भ में स्थापित कर दिया। इससे वह जीव पुनर्जागृत हो चुका और उसने परीक्षित के रूप में जन्म लेकर धर्म राज्य की पुनर्स्थापना की। वर्ष 1975 में ऐसा ही कुछ घटित हुआ था। जब श्रीमती इंदिरा गांधी के ही घोर समर्थक और शिष्य कहे जाने वाले राजनारायण ने उनके निर्वाचन के खिलाफ अदालत में याचिका लगा दी थी। समस्त साक्ष्यों और परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद अदालत ने फैसला श्रीमती इंदिरा गांधी के विरुद्ध सुनाया। इससे उनके सांसद बने रहने में बाधा उत्पन्न हो गई तथा प्रधानमंत्री का पद उन्हें अपने हाथ से जाता लगा।
फलस्वरुप उन्होंने संविधान ही नहीं बल्कि लोकतंत्र की भी हत्या करने की ठान ली और सभी लोक मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए पूरे देश को आपातकाल की भट्टी में झोंक दिया। संविधान में प्राप्त आम नागरिकों के अधिकारों की एक प्रकार से हत्या ही कर दी गई। मीडिया ने अधिकारों की बात की तो उस पर भी अघोषित सेंसरशिप लागू कर दी गई। राजनीतिक स्तर पर संविधान की उपरोक्त हत्या का विरोध हुआ तो तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा सभी नेताओं को जेल में ठूंस दिया गया। जिस प्रकार दुरात्मा कंस, रावण, हिरण्यकश्यप आदि राक्षसों ने स्वयं को ईश्वर घोषित कर दिया था और आसुरी शक्तियों ने तीनों लोकों पर बलात् सत्ता स्थापित कर ली थी। उसी प्रकार आपातकाल के दौरान इंदिरा इज द इंडिया और इंडिया इज द इंदिरा के नारे जमीन आसमान को कंपित करने लगे थे। यह तो भला हो जनता जनार्दन का कि उसने लगभग मृतप्राय हो चुके संविधान में जन आंदोलन के माध्यम से पुनः प्राण फूंके और लगभग दो सालों के संघर्ष के बाद संविधान को जिंदा करके ही माने।परिणामस्वरुप इस देश में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार जनता शासन का प्रादुर्भाव हुआ। पूरे देश में कांग्रेस का एक प्रकार से सूपड़ा साफ ही हो गया था। निसंदेह उक्त उपलब्धि का श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत विभिन्न संगठनों को जाता है।
लिखने का आशय यह कि लॉर्ड मैकाले के स्वयंभू शिष्य वह अर्धसत्य कह रहे हैं जो सुनने में भले ही सच लगता हो किंतु वह पूरा सत्य नहीं है। जैसे बीते लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस के अनेक नेता तथा उनके गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों के नेतागण यह प्रपंच फैला रहे थे कि भाजपा अर्थात एनडीए सरकार केंद्र में स्थापित हुई तो वह संविधान को बदल देगी, संविधान की हत्या कर देगी, संविधान का नाश हो जाएगा। इस बात की तारीफ करनी होगी कि वह झूठ कांग्रेस ने पूरी कुशलता के साथ स्थापित भी कर दिखाया। कांग्रेस सहित विरोधी दलों को यह सफलता भी शायद इसीलिए मिली, क्योंकि संविधान को कैसे बदला जाता है, उसकी हत्या कैसे की जाती है, इस बात का उन्हें भली भांति अनुभव है।  25 जनवरी 1975 को यह लोग उक्त जघन्य अपराध कर चुके हैं।
मुझे लगता है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने प्रत्येक 25 जून को संविधान हत्या दिवस मनाने की जो अधिसूचना जारी की है, वह उक्त करतूत को उजागर करने का एक बेहतर माध्यम साबित होने वाली है, जो कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा 25 जून 1975 को रची गई थी। जब जब संविधान हत्या दिवस की बरसी मनाई जाएगी तब तक देश की जनता कांग्रेस और उसके नेताओं को पूरे आत्मविश्वास के साथ आईना दिखाने का काम करेगी।
धर्म संकट यह है कि कांग्रेस हो या फिर विपक्षी गठबंधन, यह लोग खुलकर आपातकाल की हिमायत नहीं कर सकते। लेकिन यह लोग अपने पापों पर पर्दा डालना भी चाहते हैं। क्योंकि यदि संविधान हत्या दिवस के माध्यम से सच्चाई बार-बार सामने आती रही तो इनके चेहरे पर पड़ा लोकतांत्रिक दल का नकाब तार तार हो जाएगा। नतीजा यह है कि यह लोग चाह कर भी इस अधिसूचना का खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे। यही वजह है कि इन लोगों ने यह काम लार्ड मैकाले के पिछलग्गू वामपंथी विद्वानों को सौंप दिया है।
यही कारण है कि बात कांग्रेस की हो या फिर उसके साथी राजनीतिक दलों की, यह सब बगले झांकते दिखाई दे रहे हैं। इंदिरा गांधी द्वारा लगाई जाने वाली इमरजेंसी की कांग्रेस जन निंदा कर पाएं ऐसा साहस किसी भी कांग्रेसी नेता में शेष नहीं है। जब तक कांग्रेसी अधिपत्य के सूत्र परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप से गांधी परिवार के किसी भी सदस्य के हाथ में बने हुए हैं, कम से कम तब तक तो ऐसा किया जाना किसी भी कांग्रेसी के लिए संभव ही नहीं है। संविधान हत्या दिवस मनाए जाने के खिलाफ जाते हुए यह इमरजेंसी को सही साबित कर पाएं यह भी संभव नहीं है। तब उनके पास केवल एक ही रास्ता बचा रह जाता है। वह यह कि बौद्धिक स्तर पर लोकतांत्रिक वातावरण में भ्रम का वातावरण स्थापित किया जाए। अतः यह काम प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक शुरू हो गया है। कांग्रेस एवं विपक्षी गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों के नेता संविधान हत्या दिवस की प्रासंगिकता पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर रहे हैं। लेकिन इनमें से कोई भी ना तो यह दावा कर रहा है कि आपातकाल सही था और ना ही यह कहने की हिम्मत जुटा पा रहा है कि आपातकाल गलत था। कुल मिलाकर यदि आपातकाल की स्मृति मरा हुआ सांप है तो कांग्रेस की स्थिति छछूंदर जैसी हो गई है। अब वह वास्तविकता को ना तो आत्मसात करने की स्थिति में है और ना ही उसे उगल पा रही है। शायद गोस्वामी तुलसीदास जी ने ऐसी ही परिस्थितियों को ध्यान में रखकर “भई गति सांप छछूंदर केरी” लिखा है।
(विभूति फीचर्स)

 

डॉ. राघवेंद्र शर्मा –

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के हाथों डॉ रामकुमार पाल को मिला गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान

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मुंबई: गाय की महिमा और संरक्षण पर आधारित “गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2024” पुरस्कार समारोह का आयोजन 14 जुलाई 2024 को मुक्ति कल्चरल हब, अंधेरी पश्चिम, मुंबई में संपन्न हुआ।

इस समारोह में श्री शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने बीजेपी नेता, समाजसेवक एवं बिजनेसमैन डॉ रामकुमार पाल को आशीर्वाद देते हुए सम्मानित किया।
डॉ रामकुमार पाल मंच पर महाराज के हाथों सम्मानित होकर और उनका आशीर्वचन सुनकर अभिभूत हो गए।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हैदराबाद की भाजपा नेता माधवी लता, मुक्ति हॉल की संस्थापक तथा फिल्म निर्मात्री स्मिता ठाकरे, बिजनेस मैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी, निर्माता प्रेम सागर, शेखर मुंदड़ा, प्रिंसिपल अजय कौल, प्रशांत काशिद, महेंद्र संगोई, गिरीश जयंतीलाल शाह, बिमल भूटा, सुनील सेठी, चिराग गुप्ता, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, कवि वागीश सारस्वत, मॉडल एक्ट्रेस सीमा मीना सहित कई गौ सेवक और गौ संरक्षक की विशेष उपस्थिति रही।
आपको बता दें कि भाजपा नेता होने के अलावा, डॉ रामकुमार पाल एक सफल व्यवसायी हैं और वे गरीबों के हितार्थ समर्पित भाव से कार्य करते हैं। वर्तमान में, वे मुंबई के उत्तर/पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र के लिए भाजपा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। इससे पहले, वे महाराष्ट्र सरकार द्वारा नियुक्त विशेष कार्यकारी अधिकारी (एसईओ) (2005-2010) के पद पर रह चुके हैं। भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य और दमन-दीव और दादरा नगर हवेली के प्रभारी के रूप में, श्री पाल ने किसानों की विभिन्न समस्याओं की ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया।
डॉ पाल प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत अभियान संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं। वह भाजपा किसान मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। यह समूह भारतीय किसानों के जीवन में सुधार लाना चाहता है।
डॉ रामकुमार पाल के उल्लेखनीय योगदान और एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में मानवता के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए प्रमुख मीडिया हाउस, मिड-डे ने सक्सेस स्टोरी कॉलम में उन्हें स्थान दिया और मैगजीन इंडिया टुडे की 45 वीं वर्षगांठ के दौरान भी उन्हें उचित स्थान पर प्रकाशित किया।
श्री पाल को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, उनकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और हिंदी भाषा और सारस्वत साधना को लोकप्रिय बनाने के लिए वर्षों की सेवा के लिए वीर भारतीय हिंदी साहित्यपीठ, लखनऊ द्वारा समाज सेवा रत्न से सम्मानित किया गया। जनसंख्या समाधान फाउंडेशन महाराष्ट्र अध्यक्ष पद पर रामकुमार पाल अपनी तमाम उपलब्धियों के बावजूद एक विनम्र और समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता बने हुए हैं।

गऊ संसद का मुख्यपत्र गऊ भारत भारती होगा – शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी

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गऊ संसद का मुख्यपत्र गऊ भारत भारती होगा – शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी के कर-कमलो द्वारा ,गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान समारोह संपन्न

शंकराचार्य जी के हाथो माधवी लता , स्मिता ठाकरे तथा अन्य गौभक्तो का हुआ सम्मान

मुंबई: गऊ माता की महिमा और संरक्षण पर आधारित भारत का पहला समाचार पत्र गऊ भारत भारती’ की 10वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में “गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2024” पुरस्कार समारोह का आयोजन 14 जुलाई 2024 को मुक्ति कल्चरल हब, अंधेरी पश्चिम, मुंबई में संजय शर्मा अमान द्वारा आयोजित किया गया। इस समारोह में श्री शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज आशीर्वाद देने पहुंचे और उन्होंने अतिथियों और कई गणमान्य लोगों को सम्मानित भी किया। श्री शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी हाथो हैदराबाद से विशेष तौर पर आई माधवी लता , मुक्ति फाऊंडेशन की स्मिता ठाकरे , मुंबई भाजपा उपाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी , महाराष्ट्र गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष शेखर मूंदड़ा , प्रेम रामानंद सागर ,शैलेश गगलाणी , भरत भाई पोपट , बकुलेश भाई ठक्कर , गौ भक्त नवनाथ दुधाल , बिमल भुता भाजपा मुंबई सचिव , प्रकाश कोलते , अभय छेड़ा , अजय कौल , प्रशांत काशिद , चिराग गुप्ता , महेंद्र संगोइ प्रमुख ट्रस्टी “भगवान महावीर पशु रक्षा केंद्र, एंकरवाला अहिंसाधाम” , गौ वैज्ञानिक डॉ जितेंद्र भट्ट , वैज्ञानिक जेजे रावल , समाजसेवी कृष्णा पिम्पले , आदि को उनके उल्लेखनीय कार्यो के लिए सम्मानित किया गया।

परमाराध्य’ परमधर्माधिस उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठा धीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती ‘1008’ महाराज जी के कर कमलो द्वारा समाचारपत्र के १०वें अंक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर प्रेम रामानंद सागर ने अपनी लिखी पुस्तके शंकराचार्य को भेट करते हुए गौ माता पर सीरियल निर्माण की बात की तथा शंकराचार्य ने भी उनसे कहा कि आप गऊ माता पर भी सीरियल बनाए। नीरज पुरोहित , डॉ जितेंद्र भट्ट द्वारा शंकराचार्य जी को गाय के गोबर से बनी वस्तुए भेट की गई।
शंकराचार्य जी के आशीर्वचन के मुख्य अंश
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज जी अपने एक घंटे के अपने वक्तव्य में कहा कि हिन्दू कौन ? हम सब केवल बोलते रहते हैं हम हिन्दू हैं हम हिन्दू हैं लेकिन असली हिन्दू के तीन लक्षण बताये जो गऊ सेवा करता हो , जिसका विश्वास पुनर्जन्म में हो , अहं ब्रम्हास्मि।  जो गऊ माँ को काटते हैं उसका मांस खाते हैं , बेंचते हैं वे सब पाप के भागी हैं .गऊ को माता क्यों कहा गया ? जैसे कोई लड़की ब्याही जाती है तो उसके पति की माता उस लड़की की माता होती है उसी तरह अगर हमने किसी को अपने परिवार में सम्मिलित कर लिया तो जो हम मानते हैं वही सम्मिलित व्यक्ति भी मानता है गऊ को माता हमारे सनातन धर्म ने माना है इसलिए वो हमारी भी माता है।
शंकराचार्य जी ने आगे कहा कि -आज हमारे पास सिर्फ दो से ढाई करोड़ गाय बची है। अगर हम पांच वर्ष और रुक गए तो , जैसे हम कृष्ण भगवान् को सिर्फ चित्र में देखते है वैसे ही गाय को भी हम सिर्फ चित्र में ही देख पाएंगे। बहुत कठिन समय है , इसीलिए आप के पास यह अंतिम मौका है गाय को बचाने का।  जब तक हमारे पास बीज है तो बचाया जा सकता है जिस दिन बीज ख़त्म हो गया , हम कुछ नहीं कर पाएंगे।
संसद में इस विषय पर चर्चा के लिए समय नहीं है , कहते है इस पर चर्चा के लिए समय ख़राब होता है इसीलिए हम ने निर्णय लिया है कि देश के हर संसदीय क्षेत्र से एक गौ भक्त को गौ सांसद के रूप में मनोनीत किया जाये। और उसको इस बात का एहसास कराया जाये कि तुम सांसद हो। अपने संसदीय क्षेत्र में गाय के बारे में काम शुरू करो। और जो तुम्हारा चुना गया सांसद है अगर तुम्हारा सहयोग लेना चाहे तो उसका सहयोग करो। गाय के बारे में सारे काम अपने हाथ में ले लो अगर चुना गया सांसद सहयोग नहीं करता है तो।

शंकराचार्य महाराज जी ने समाचारपत्र के संस्थापक संजय शर्मा की तरफ देखते हुए अपने आशीर्वचन में आगे कहा कि – ” ये जो गऊ भारत भारती अखबार है इसका नाम हम को बहुत अच्छा लगा , एक तो गाय को समर्पित है , दस वर्ष आप ने निकाल लिया , एक युग होता है , अब आप में ऊर्जा आ गई है।

आज मैं इस मंच से घोषणा करता हूँ जो हमारी गौसंसद है उसका मुख्य पत्र गऊ भारत भारती होगा। और भारत में सिर्फ दो ही चीजों की जरुरत है एक गौ की दूसरी भारत की।

कार्यक्रम का सञ्चालन आनन्द सिंह ने किया, कार्यक्रम में संगीतमय प्रस्तुति प्रकाश तिवारी मधुर का था। के प्रमुख आयोजक समाचारपत्र के संस्थापक संजय शर्मा अमान थे।

 

चातुर्मास में भगवान विष्णु एवं महादेव शिव की उपासना*

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(अंजनी सक्सेना-विभूति फीचर्स)
चातुर्मास यानि आषाढ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक का समय सब पापों का नाश करने वाला है। स्कंद‌पुराण में कहा गया है कि इस अवधि में जो भी मनुष्य भगवान शिव अथवा विष्णु या दोनों को अपने हृदय में स्थापित करके अभेद बुद्धि से उनका चिंतन, स्मरण एवं उपासना करता है वह मनुष्य सब पाप कर्मों से मुक्त हो जाता है तथा उसके लिए अपना शत्रु भी अत्यंत प्रिय हो जाता है। चातुर्मास में भगवान विष्णु एवं महादेव शंकर का व्रत करने वाला मनुष्य उत्तम माना गया है। इस अवधि में भगवान विष्णु की शालग्राम स्वरूप ,भगवान शिव की नर्मदेश्वर स्वरूप और दोनों की संयुक्त रूप से हरिहर स्वरूप में आराधना करने का विधान है।
चातुर्मास में भगवान श्री हरि विष्णु की एवं देवाधिदेव महादेव की भक्ति करना श्रेयस्कर माना गया है ।  चातुर्मास में स्नान का भी महत्व है। स्कंद पुराण के अनुसार चातुर्मास में नदी में स्नान करने वाले को सिद्धि प्राप्त होती है।झरने, तालाब या बावड़ी में स्नान करने वाले के हजारों पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। जो मनुष्य चातुर्मास में पुष्कर, प्रयाग या किसी और महातीर्थ के जल में स्नान करता है उसके पुण्यों की संख्या में बढ़ोतरी होती है। नर्मदा नदी, सरस्वती नदी या समुद्र संगम में यदि कोई व्यक्ति चातुर्मास में एक दिन स्नान कर ले तो उसके समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं। जो व्यक्ति चातुर्मास में नियम से एकाग्रचित्त होकर तीन दिन भी नर्मदा स्नान कर लेता है तो उसके पाप के हजारों लाखों टुकड़े हो जाते हैं। जो मनुष्य सूर्योदय के समय चातुर्मास में पंद्रह दिन निरंतर गोदावरी नदी में स्नान करता है वह इस लोक में सारे सुख पाकर भगवान विष्णु के धाम जाता है। जो मनुष्य तीर्थस्थल न जा सके वह भी यदि तिल एवं आंवला मिश्रित जल  या फिर जल में बिल्व पत्र डालकर स्नान करें तो उनके भी समस्त पापों का शमन हो जाता है। बिना स्नान के इस अवधि में कोई कार्य नहीं करना चाहिए। बिना स्नान किए जो भी पुण्य कर्म एवं शुभकर्म किए जाते हैं वे निष्फल हो जाते हैं। ऐसे में किए गए सभी पुण्य कार्यों का फल राक्षसों द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है।
चातुर्मास में  स्नान  के अंत में भगवान श्री हरि का स्मरण करके पित्रों  का तर्पण करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। पित्र तर्पण के बाद षोडशोपचार से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। भगवान के शयन करने पर उनकी षोडशोपचार पूजा महातप के समान मानी जाती है। भगवान विष्णु की प्रतिमा या शालग्राम शिला स्थापित कर के यजुर्वेद के सोलह ऋचाओं वाले महासूक्त पुरुषसूक्त की प्रथम ऋचा”सहस्त्राशीर्षा पुरुष:”मंत्र के आदि में ऊंकार जोड़कर भगवान श्री हरि का आवाहन किया जाता है। दूसरी ऋचा ‘पुरुष एवेदम्’ से श्री हरि को आसन समर्पित किया जाता है। तीसरी ऋचा से पाद्य, चौथी ऋचा से अर्घ्य, पांचवी ऋचा से आचमन, छठी ऋचा से स्नान कराकर पुनः आचमन करना चाहिए। सातवीं ऋचा से भगवान श्री हरि को वस्त्र, आठवीं से यज्ञोपवीत, नौवीं ऋचा से चंदन, दसवीं से पुष्प, ग्यारहवीं से भगवान श्री हरि को धूप अर्पित करना चाहिए। चातुर्मास में भगवान श्री हरि को  कपूर, चंदन दल, मिश्री, मधु (शहद) और जटामासी से युक्त अगरु की धूप अर्पित करना चाहिए। बारहवीं ऋचा से भगवान श्री हरि को दीपदान करना चाहिए। चातुर्मास में जो मनुष्य भगवान विष्णु के आगे दीपदान करता है उसके सारे पाप क्षणभर में जलकर भस्म हो जाते है।
 दीपदान के बाद तेरहवीं ऋचा के साथ  भगवान विष्णु को अन्न युक्त नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। चौदहवीं ऋचा से आरती करके पंद्रहवी ऋचा द्वारा ब्राह्मणों के साथ भगवान के चारों ओर घूमकर परिक्रमा करनी चाहिए। अंत में सोलहवीं ऋचा द्वारा भगवान विष्णु के साथ अपनी एकता का चिंतन करना चाहिए।
 स्कंद पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने भक्तों के सामने  परम अद्‌भुत रूप धारण कर लिया | उनका यह रूप हरिहर स्वरूप था। वे आधे शरीर से शिव और आधे शरीर से विष्णु हो गये।  उनके एक ओर भगवान विष्णु के चिन्ह तथा दूसरी ओर भगवान शंकर के चिन्ह दिखाई देने लगे। विष्णु के चिन्ह की ओर वाले शरीर के पास गरुड़ और महादेव के चिन्ह वाले शरीर के पास नन्दी (वृषभ) विराजित थे। एक ओर बादलों के समान श्याम वर्ण तो दूसरी ओर कर्पूर की भाँति गौर वर्ण दृश्यमान था। भगवान श्री हरि विष्णु और देवाधिदेव महादेव एक ही शरीर में समाविष्ट होकर दिखाई देने लगे और मन्दराचल पर्वत पर हरिहर स्वरूप में प्रतिष्ठापित हो गए। चातुर्मास में इस हरिहर मूर्ति का स्मरण मात्र करने से मनुष्य का कल्याण हो जाता है।
जिस प्रकार गण्डकी नदी में भगवान विष्णु शालग्राम रूप में मिलते हैं उसी प्रकारा नर्मदा नदी में भगवान महादेव नर्मदेश्वर के रूप में विराजमान हैं। ये दोनों स्वयं प्रकट होते हैं। स्वयं देवाधिदेव महादेव ने माता पार्वती से चातुर्मास में “नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करने की प्रेरणा दी।  माता पार्वती ने हिमालय के सुंदर शिखर पर चातुर्मास तपस्या  के लिए प्रस्थान किया, तब महादेव जी पृथ्वी पर विचरण करने लगे । यमुना जी के जल में स्नान करके महादेव जी ने यमुना जी को वरदान दिया कि उनके पुण्य तीर्थ में स्नान करने वाले के सहस्त्रों पाप क्षण भर में नष्ट हो जाएंगे और वह स्थान हर तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध होगा।वरदान देकर देवाधिदेव महादेव हाथ में वाद्य यंत्र , शिखर पर जटा और ललाट में त्रिपुण्ड धारण करके गीत गाते और नाचते चले जा रहे थे । इस पर मुनियों ने क्रोधित होकर महादेव जी को लिंगरूप में होने का श्राप दे दिया। भगवान शंकर का यह रूप अमरकंटक में पर्वत के रूप में प्रकट हुआ। यहीं से नर्मदा नदी निकली।
 स्कंद पुराण के अनुसार नर्मदा में स्नान करके, उसका जल पीकर और उसके जल से पित्रों का तर्पण करके मनुष्य इस पृथ्वी पर दुर्लभ कामनाओं को भी प्राप्त कर लेता है। जो मनुष्य नर्मदा में स्थित शिवलिंगो का पूजन करेंगे वे स्वयं शिवस्वरूप हो जाएंगे। विशेष रूप से चातुर्मास में शिवलिंग की पूजा महान फल देने वाली है। चातुर्मास में रुद्रमंत्र का जाप, शिव की पूजा, और शिव में अनुराग विशेष रूप से फलदायी है। जो मनुष्य चतुर्मास में पंचामृत से भगवान शिव को स्नान कराते है उन्हें गर्भ की वेदना सहन नहीं करना पड़ती। जो शिवलिंग के मस्तक पर मधु (शहद) से अभिषेक करेंगें उनके सहस्त्रों दुख तत्काल नष्ट हो जाएंगे। जो दीपदान करेंगे वे  शिवलोक जाएंगे। जो जलधारा से युक्त नर्मदेश्वर महालिंग का चातुर्मास में विधिपूर्वक पूजन करता है, वह शिवस्वरूप हो जाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार स्वयं ऋषि गालव जी ने कहा है कि चातुर्मास में शिव और विष्णु दोनों की भक्तिपूर्वक पूजन करना चाहिए जो शालग्राम रूपी हरि और नर्मदेश्वर रूप में हर (शिव) की पूजा करते है भगवान श्री हरि उन्हें मोक्ष प्रदान करते हैं।(विभूति फीचर्स)