Home Blog Page 127

हर वर्ष यहां गौ माता का पूजन किया जाता है

0

आधुनिक युगमें गौ माताके पूजन द्वारा युवाओंकों धर्म के साथ विज्ञान की जानकारी प्रदान करने की गुजरात में एक मात्र जगह । अंजार कच्छ, अंजार शिणाय हाईवे पर आया हुआ श्री सदगुरू रायमलधाम आश्रम । हर वर्ष यहां गौ माता का पूजन किया जाता है,ये साल २१/६/२४ से २१/७/२४ तक स्कूल के विधार्थी ,गौ प्रेमी द्वारा हररोज पूजन ,अनुष्ठान का आयोजन किया गया था , आश्रम में भागवत कथा के वक्ता ,ट्रस्टी श्री धनेश्वर महाराज जोशी पंडित , गुरु पूर्णिमा तक प्रतिदिन श्री जितेंद्र जोषी,नीलेश राजगोर ,यज्ञशाला में शास्त्री हरेश जोशी ,शास्त्री राहुल मढवी द्वारा सम्पुटीत सतचंडी अनुष्ठान विद्वान पंडितो , पूजन, हवन, अनुष्ठान समापन हुआ। गौ शक्ति, योग, यज्ञ महोत्सव के अंतर्गत गौ माताका के साथ विज्ञान का महत्व, साथ ही साथ कांकरेज गाय और जर्सी गाय एवं दूसरे प्राणीयों का विडियो दिखाकर बच्चों को समझाया गया । वर्तमान समय में प्रतीदिन आदिपुर, गांधीधाम, अंजार से अलग अलग स्कूल के आचार्य, शिक्षकगण, ट्रस्टी सभी के सहयोग से विद्यार्थी बड़ी उत्साह से इस गौमाता महोत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लिया ।
अभी तक अलग-अलग स्कूलों से लगभग 2000 से ज्यादा गौ भक्त विद्यार्थियोंने गौ पूजन का लाभ प्राप्त किया ,अंजार स्थित स्मार्ट किड्स,शैशव स्कूल के को ऑर्डिनेटर चिंटू गोर ,सेंटर इंचार्ज तृप्ति सोनी, शिक्षिका श्रद्धा उपाध्याय ,कश्मीरा राजगोर ,रीटा भट्ट, शैशव के कार्यकारी अध्यक्ष अंकिता जोशी,चावड़ा पल्लवी ,प्रजापति भावना , पंड्या बंसी , समर्थ भारत गर्भ विज्ञान एवं गर्भ संस्करण केंद्र गांधीधाम के संचालक भारतीबेन धोकाई २३ गर्भवती बहनों के साथ गौ पूजन का लाभ प्राप्त किया ,सुरभि गौ माता की सेवा में देवकरण आहीर जुड़े है, स्कूल के बच्चों को इस कार्यक्रम में सामिल करने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थि गौ माता के महत्व को समझे, भारतीय गौवंश को बचाना, गौमाता के पंचगव्य जिसमें गौ मूत्र, यज्ञ हेतु कंडे, दूध, दही, घी की उपयोगिता के बारे में जागृति अभियान चलाना ।
स्कूल के बच्चों का समस्त आयोजन एवं गौ रक्षा का कार्यभार दीपक पटेल देख रहे हैं । ट्रस्टी श्री शिवराम महाराज ,नाराणभाई आहीर ,गौ प्रेमी दिनेश ठक्कर (अंजार) हितेश जोशी, ऐडवोकेट & नोटरी रचना जोशी ,(आदिपुर )का पूर्ण सहयोग मिल रहा है,भोजन की व्यवस्था श्रीरामभाई जोशी,राजू सथवारा ,भगीरथ जोशी ,किशन खांडेका संभाल रहे हैं । उपरोक्त जानकारी श्री सर्व जीव कल्याण ट्रस्ट के स्थापक मुकेश बापटजी द्वारा प्रदान की गई ।

पुलिस और गौ-तस्करों में मुठभेड़, गोली लगने से निर्दोष युवक की मौत

0

Rajasthan News: डीग जिले में मंगलवार देर रात्रि पुलिस और गोतस्करों के बीच मुठभेड़ हो गई. इस दौरान दूसरे टेंपो में गायों को लेकर जा रहे संदीप प्रजापति को गोली लगने से मौत हो गई. उसके साथ नरेश जादौन को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. पुलिस ने गोवंश से भरी एक पिकअप को पकड़ा है. संदीप प्रजापति डीग के सोनगांव का रहने वाला था. सूचना पर आईजी राहुल प्रकाश, एसपी डीग राजेश मीणा कुम्हेर थाने पहुंचे.

मृतक के परिजन और गांव वालों ने घेरा थाना  

घटना कुम्हेर थाना इलाके में पिचूमर मोड़ के पास हुई. घटना के बाद मृतक संदीप के परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में पुलिस थाना कुम्हेर पहुंचे.  मृतक संदीप को निर्दोष बताते हुए कहा कि गांव में आवारा गाय थीं. वह फसलों को नुकसान पहुंचाती थीं. इस लिए संदीप आवारा गायों को टेंपू में भरकर मांढेरा रुंध छोड़ने जा रहा था.

गतस्करों और पुलिस के बीच फंस गया युवक 

पुलिस का कहना है कि मृतक गौ-तस्करों और पुलिस के बीच फंस गया. गौ-तस्करों ने उसे पुलिस का मुखबिर समझकर उसको गोली मार दी. नाकाबंदी तोड़कर फरार हो गए. मृतक के परिजन घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. आईजी राहुल प्रकाश ने मृतक के परिजन को निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया.

डीग एसपी बोले, गौ-तस्करों ने मुखबिर समझकर मारी गोली 

एसपी डीग राजेश मीना ने बताया है कि पुलिस को सूचना मिली थी कि एक पिकअप गाड़ी में गौ-तस्कर गोवंश को भरकर तस्करी कर ले जा रहे हैं. इस पर पुलिस गोतस्करों का पीछा कर रही थी. पुलिस और गोतस्करों की मुठभेड़ के बीच एक दूसरी टेंपू गाड़ी पिचूमर मोड़ के पास पहुंच गई. उसमें भी गाय थीं. गौ-तस्करों को लगा कि वह पुलिस को साथ लेकर आया है, इस पर गौ-तस्करों ने उसे गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई.

परिजन ज्यूडिशियल कस्टडी में पोस्टमार्टम कराने की मांग कर रहे हैं 

गौ-तस्कर नाकाबंदी तोड़कर फरार हो गए है जिनकी तलाश की जा रही है. मृतक का अभी पोस्टमार्टम नहीं किया जा सका है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.  मृतक के परिजन मेडिकल बोर्ड से ज्यूडिशियल कस्टडी में पोस्टमार्टम कराने की मांग कर रहे हैं. पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा की मृतक को किसकी गोली लगी? इस मामले को लेकर मृतक के परिजन और ग्रामीणों को कहना है कि हमें न्याय चाहिए. न्याय नहीं मिला तो हम धरना प्रदर्शन और जाम लगाएंगे.

NISHITA RATHOD’S – NS Dance Academy Wows with Spectacular 2024 Dance Show

0

Show Shines Bright with a celebration of dance excellence by all the students

Mumbai – The NS Dance Academy once again mesmerized audiences with its annual dance show, held at the mukkti cultural hub on 20th July 2024. The event was a grand celebration of dance, showcasing an array of performances that highlighted the incredible talent, dedication, and creativity of the academy’s students. The auditorium was packed with enthusiastic spectators, all eager to witness the magic that NS Dance Academy consistently delivers.
The Inspiring Journey of NS Dance Academy
NS Dance Academy, a beacon of artistic excellence and passion, was founded by renowned dancer and choreographer Nishita Rathod along with support of Avinash Gowda With a vision to create a nurturing environment where students can excel in dance ,gymnastic and hula hoop as whole . Nishita transformed her dream into reality by opening the doors of NS Dance Academy,Driven by a love for dance and a commitment to teaching, Nishita and her team of instructors Srushti , Riya , Kajol and Deepa worked tirelessly to offer the best show ever.
Over the years, the academy’s reputation for high-quality instruction, innovative choreography, and a supportive community began to grow. Today, NS Dance Academy has more than two hundred students who come to learn, grow, and express themselves through the beautiful art of dance.
From its humble beginnings, NS Dance Academy has blossomed into a vibrant institution, known for its dedication to fostering talent and inspiring a lifelong love of dance in all its students. It’s incredible to see how much students have grown, not just as a dancer, but as a confident and disciplined individual.It left a lasting impression on all who attended, highlighting the academy’s commitment to excellence and its role in fostering a love for dance in the community. NS Dance Academy Shines with 5-Star Google Rating for its top rated excellence in teaching !
As the curtains closed and the lights dimmed, the echoes of applause and the memories of the enchanting performances lingered, promising an even more spectacular show next year!

सिने स्टील, टीवी एंड मोशन फोटोग्राफर्स असोसिएशन के मेंबर्स के स्कूली बच्चों को आशफाक खोपेकर के हाथों नोटबुक वितरण

0

मुंबई। दादासाहेब फाल्के फिल्म फाऊंडेशन अवॉर्ड्स के अध्यक्ष और राईटर, डायरेक्टर आशफाक खोपेकर की अध्यक्षता में सिने स्टील, टीवी एंड मोशन फोटोग्राफर्स असोसिएशन का नोटबुक वितरण समारोह अंधेरी में 20 जुलाई 2024 को उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।

समारोह में असोसिएशन के एक्टिव मेंबर्स के बच्चों को निःशुल्क नोटबुक वितरण की गयी। कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष रमाकांत मुंडे, जनरल सेक्रेटरी अतुल राजकुले, खजिनदार सतीश घुसाळे, सह सेक्रेटरी अशोक कनोजिया, फाउंडर कमिटी मेंबर फिरोझ हाश्मी, कमिटी मेंबर्स श्याम साळवेकर, विनायक वेतकर, देवेंद्र सरकार और मेंबर्स किशोर रायभान, रामहरी सोनावणे अपने बच्चों के साथ उपस्थित थे।
उत्साहपूर्ण कार्यक्रम का समापन सेक्रेटरी अतुल राजकुले के हाथों अशपाक खोपेकर को शाल श्रीफळ दे कर सन्मानित करके किया गया।
कार्यक्रम में संस्था के ऑफिस स्टाफ महेश नार्वेकर का जन्म दिन‌ भी मनाया गया।

बहुत जल्द बिग ब्रांड के ज्वेलरी शूट में भाग लेंगी शिल्पा चौधरी

0

मुंबई। ब्यूटीफुल और क्यूट दिखने वाली शिल्पा चौधरी ने कई विज्ञापन फिल्मों, वेब सीरीज़ और म्युज़िक वीडियो में काम किया है और अब बॉलीवुड के गलियारों में दस्तक देने जा रही हैं। शिल्पा बहुत जल्द एक बिग ब्रांड के ज्वेलरी शूट में दिखाई देंगी और इसमें उनका लुक उनके फैन्स के लिए सरप्राइज से कम नहीं होगा। शिल्पा भी इस ऐड को लेकर काफी उत्साहित हैं जो जल्द ही लोगों को देखने को मिलेगा। इसमे उनका कॉस्ट्यूम और उनका स्टाइल बहुत लुभावना है।

ऐड वर्ल्ड से ग्लैमर जगत में जाने वाली शिल्पा चौधरी ने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है। कई बिग ब्रांड के प्रिंट शूट में काफी व्यस्त रहने वाली शिल्पा चौधरी कई बड़े बजट की वेब सीरीज़ भी कर रही हैं साथ ही हिंदी के अलावा पंजाबी और मराठी अल्बम में भी काम कर रही हैं।
ढेर सारी विज्ञापन फिल्मों और म्यूज़िक वीडियो में अपनी अदाकारी के जौहर दिखा चुकी शिल्पा चौधरी वैसे तो बिना किसी फिल्मी बैक ग्राउंड के हैं मगर उन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा के बल पर मायानगरी मुंबई में शोहरत का परचम लहराया है।
नागपुर की रहने वाली शिल्पा चौधरी पिछले कई वर्षों से मुंबई में रह रही हैं। वह काफी प्रिंट शूट और कैटलॉग शूट का हिस्सा रही हैं और मॉडल के रूप में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर ली है। बॉलीवुड में उनके फेवरेट हीरो सलमान खान हैं और उनकी ख्वाहिश है कि वह एक बार उनके साथ स्क्रीन शेयर करें।
थियेटर बैक ग्राउंड से सम्बंध रखने वाली शिल्पा चौधरी का लुक बेहद आकर्षक है। वह सोशल मीडिया पर भी काफी ऐक्टिव रहती हैं। सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।

एक पौधा गौ मां के नाम अभियान’ की शुरुआत

0

Rajasthan News: गोपालन विभाग ने प्रदेशभर में एक पौधा गौ मां के नाम अभियान की शुरुआत की है. इसके तहत प्रदेश की गौशालाओं में करीब 12 लाख पौधे लगाए जाएंगे. इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया. हिंगोनिया गौशाला में शुभारंभ कार्यक्रम में 7500 पौधे लगाए गए.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि पेड़ों का कटना और नदियों का सिकुड़ना चिंताजनक है. पर्यावरण संरक्षण बहुत जरूरी है. इसलिए जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक पेड़ मां के नाम अभियान की शुरुआत की है. तो यहां भी एक पेड़ गौ मां के नाम से लगाए जा रहे हैं.

अमानवीयता की पार की हद : 50 से ज्यादा मृत गाय-बछड़ों को खुले में फेंका

0

पन्ना. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गौ माता के संरक्षण की बात करते हैं। वहीं नगर पालिका पन्ना में भाजपा की ही परिषद होने के बाद भी वहां मृत गौ-माता और गौवंशीय मवेशियों के साथ अमानवीयता की हद पार की गई। मृत गायों सहित अन्य मवेशियों को दफनाने के बजाय खुले में एक बड़े गड्ढे में फेंक दिया, जहां आसपास के पशु पक्षियों के साथ कुत्तों ने तक उनके मांस को नोंचा। कई दिनों से गायों और अन्य मवेशियों को एक ही जगह फेंके जाने से वहां करीब 50 मृत मवेशी हो गए। दुर्गंध से गौ सदन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र में काम करने वाले कर्मचारियों सहित आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
पक्षियों-आवारा कुत्तों ने नोंचा मांस
नगर के बायपास में नगर पालिका की गौ सदन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र एक-दूसरे से लगे हुए हैं। कुछ दिनों पहले गौ सदन को दो हिस्से में बांट दिया गया। एक हिस्से में गायों और दूसरे मवेशियों को रखा जा रहा है तो दूसरी ओर पौधरोपण कराया गया है। पौधरोपण वाले हिस्से में ही एक बड़ा से गड्ढ़ा खोदा गया था, जिसमें गौ सदन में मरने वाली गाय, बैल और बछड़ों सहित शहर में मरने वाले गाय, बैल-बछड़ों को फेंक दिया जाता है। करीब १५ दिनों में यहां 50 से भी अधिक मृत मवेशियों को दफनाने के बजाय गड्ढे फेंका गया।
दुर्गंध से बीमारी फैलने की आशंका
मृत मवेशियों के शवों को आसपास के आने वाले मांशाहारी पक्षी तो खा ही रहे थे, साथ ही आसपास के कुत्ते तक मांस को नोंच रहे थे। मृत मवेशियों के शरीर से उठने वाली दुर्गंध करीब एक किमी. दूर तक फैल रही है। इससे गौ सदन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र में काम करने वाले लोगों का वहां पर रुकना मुहाल हो रहा है। गौशाला आधा किमी. के क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक बालक और बालिका छात्रावास व सीएम राइज स्कूल भी संचालित है। दुर्गंध से बच्चों के बीमार पडऩे की आशंका है। इसके साथ ही आसपास की आवासीय बस्ती के लोगों के भी दुर्गंध और इससे फैलने वाले संक्रमण से लोगों के बीमार पडऩे की आशंका है। इस बारे में जानकारी लेने के लिए सीएमओ शशिकपूर गढ़वाले से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

निराश्रित गौवंश गौशालाओं में भेजने के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीते दिनों वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सड$कों पर घूमने वाले गौवंश को नजदीकी गौशालाओं में पहुंचाने के निर्देश दिए थे। इसी कड़ी में अब कलेक्टर ने जिले के सभी नगरीय निकायों के सीएमओ और ग्राम पंचायत सरपंच-सचिव को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ अपने क्षेत्र में सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गौवंश को नजदीकी गौशालाओं में भेजने को निर्देशित किया है। साथ ही गंभीरता से अमल करने को कहा है।
कार्रवाई की मांग
नगर पालिका परिषद का यह बहुत ही अमानवीय कृत्य है। एक ओर मुख्यमंत्री गौ संरक्षण का ङ्क्षढढोरा पीट रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा की ही परिषद में गौमाता के साथ ऐसा अमानवीय कृत्य किया जा रहा है। सीएमओ और परिषद से मामले की जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हैं।
-मोहम्मद रेहान, नगर पालिका में विपक्षी पार्षद दल के नेता
सनातन संस्कृति में गाय को मां के तुल्य माना गया है। इसीलिए गाय को गौमाता कहते हैं। मुख्यमंत्री गौ संरक्षण की बात करते हैं और भाजपा वाली परिषद में ही इस तरह से गौमाता और दूसरे मवेशियों के प्रति अमानवीय कृत्य किया जाना बहुत ही दुखत है। कलेक्टर को चाहिए कि वे मामले को संज्ञान में लेकर परिषद के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गौवंश प्रतिशेष अधिनियम के तहत अपराध कराएं।
-राजेश दीक्षित, वरिष्ठ अधिवक्ता
मवेशियों को खुले में फेंकना गलत है। गड्ढे में डालने के बाद मिट्टी से पाटना चाहिए था। मामला संज्ञान में आने के बाद मैंने नगर पालिका को भी सूचना दी है और मृत गाय व अन्य मवेशियों के शवों को मिट्टी से पाटने के लिए कहा है।
-संतोष रैकवार. जिला उपाध्यक्ष गौ संवर्धन बोर्ड
गायों की यह दुर्दशा बहुत ही ङ्क्षनदनीय और अमानवीय है। गाय यदि सम्मान के साथ जी नहीं प रही हैं तो सम्मान के साथ मारने का हक तो है ही। नगर पालिका के इस अमानवीय कृत्य से बहुत दुखी हूं। कलेक्टर को इस मामले में संज्ञान जरूर लेना चाहिए।
-प्रणेशराज शर्मा, जिला संयोजक ङ्क्षहदू जागरण

गौ पालन सरकार करेगी मदद ऐसे करें आवेदन

0

Patna News: यदि आपके पास 15 से 30 डिसमिल भी जमीन है तो गो-पालन कर परंपरागत कृषि से ज्यादा कमाई कर सकते हैं। इसके लिए बेरोजगार युवक-युवतियों को सरकार 50 से 75 प्रतिशत तक अनुदान देगी। समग्र गव्य विकास योजना के तहत दो, चार, 15 और 20 उन्नत नस्ल के दुधारू मवेशी की डेयरी की स्थापना के लिए अनुदान ले सकते हैं।

इसके लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 4848.248 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी गई है। योजना का लाभ लेने के लिए 15 अगस्त से आनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। आवेदकों का चयन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। इस योजना के तहत पूरे प्रदेश में 3583 इकाई लगायी जानी हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में 3355 लोगों को इस योजना का लाभ दिया गया था।

कैसे करें आवेदन

योजना का लाभ लेने के लिए 15 अगस्त से गव्य विकास निदेशालय की वेबसाईट पर आनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पिछले तीन वर्षों में आनलाइन प्रोप्त आवेदनों में से वैसे आवेदक जिन्हें योजना का लाभ प्राप्त नहीं हो सका, वैसे आवेदकों को प्राथमिकता के आधार पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजाना का लाभ ले सकेंगे। इस योजना के लाभुकों की उम्र 55 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

कितनी होनी चाहिए जमीन

योजना के तहत चार उन्नत नस्ल के दुधारू मवेशी की इकाई की स्थापना के लिए कम से कम 15 डिसमिल, 15 और 20 उन्नत नस्ल के दुधारू मवेशी, बाछी-हिफर की इकाई की स्थापना के लिए कम से कम 30 डिसमिल जमीन या लीज की जमीन होनी चाहिए ताकि वे हरा चारा का उत्पादन भी कर सके।

इकाई की लागत और अनुदान

दो दुधारू मवेशी की इकाई लागत 1,74,000 रुपये है। चार दुधारू मवेशी के लिए इकाई लागत 3,90,400 रुपये है। 15 दुधारू मवेशी की इकाई लागत 15,34,000 रुपये है। 20 दुधारू मवेशी की इकाई लागत 20,22,000 रुपये है।

सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत जबकि अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को कुल लागत का 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इकाई लगाने के लिए सामान्य वर्ग को कुल लागत का 10 प्रतिशत राशि और अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को कुल लागत का पांच प्रतिशत राशि देना होगा।

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने के साथ-साथ स्वरोजगार के अतिरिक्त अवसर सृजित करने के लिए पशु पालन विभाग की ओर से समग्र गव्य विकास योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना से प्रदेश में दुधारू पशुओं की संख्या में वृद्धि होगी। सिर्फ यही नहीं प्रदेश के सभी व्यक्तियों को दुग्ध के रूप में पौष्टिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। – संजय कुमार, निदेशक डेयरी

*स्वयंभू, सर्वोच्च एवं शाश्वत हैं भगवान शंकर*

0

(सुनील कुमार महला-विनायक फीचर्स)

सावन या श्रावण के महीने को देवो के देव कहलाने वाले महादेव, भोलेशंकर या भगवान शिव(भोलेनाथ)का प्रिय मास माना जाता है। पूरे सावन के महीने में शिव की विशेष आराधना की जाती है। इस मास में कांवड़िए दूर दूर तक कांवड़ लेकर पैदल जाते हैं। हमारे शास्त्रों में कहा गया कि भोलेनाथ इतने भोले हैं कि यदि उनको भक्तिभाव से हम एक लोटा जल भी चढ़ा दें, तो वह अति प्रसन्न हो जाते हैं और बिना मांगे ही सब कुछ दे देते हैं। पाठक जानते हैं कि आषाढ़ पूर्णिमा के समापन के साथ ही श्रावण माह आरंभ हो जाता है।

इस बार यदि हम सावन की बात करें तो हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 47 मिनट से आरंभ हो जाएंगी, जो 22 जुलाई को दोपहर 1 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 22 जुलाई से श्रावण मास आरंभ हो रहा है, जो 19 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा। यह बहुत ही रूचिकर है कि इस साल श्रावण मास सावन सोमवार के साथ आरंभ हो रहा है और इसी दिन के साथ समाप्त हो रहा है। सोमवार भगवान भोलेनाथ का अति प्रिय दिन भी है और इस साल कुल 5 सावन सोमवार पड़ रहे है।

इसके साथ ही सावन माह के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग बन रहा है। इसके साथ ही ग्रहों की स्थिति के कारण कुबेर योग, मंगल-गुरु युति, शुक्रादित्य योग, बुधादित्य, लक्ष्मी नारायण योग, गजकेसरी योग , शश राजयोगों जैसे योग बन रहे हैं।

सावन में भगवान शिव का रूद्राभिषेक किया जाता है।बिल्वपत्र, धतूरा, भस्म व फलादि अर्पित किए जाते हैं। भारत में  सावन बारिश का मौसम होता है और शिवजी को चढ़ने वाले फूल-पत्ते बारिश के मौसम में ही पल्लवित होते हैं इसलिए सावन में शिव पूजा की परंपरा बनी। सावन के महीने में पूर्णिमा तिथि पर श्रवण नक्षत्र होता है। इस नक्षत्र के कारण ही सावन महीने का ये नाम पड़ा बताते हैं। सावन के महीने में महादेव की पूजा, उनकी आराधना, भक्ति, आदि का विशेष महत्व माना जाता है।

 

यहां पाठकों को यह भी जानकारी देना चाहूंगा कि श्रावण मास के हर एक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है जिसमें मां पार्वती की पूजा करने का विधान है। श्रावण माह में भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति को हर एक दुख-दर्द से छुटकारा मिल जाता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।भगवान शि‍व को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु विशेषकर सावन के महीने में अपनी सामर्थ्य अनुसार व्रत, उपवास, पूजन, शिव का अभि‍षेक आदि करते हैं। मान्यता है कि सावन के आरंभ में भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं और इस सारे संसार की सत्ता-संचालन का दायित्व प्रभु शिव के हाथों में होता है।

कहते हैं कि सावन माह में की गई उपासना का विशेष फल भक्तों को प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार विवरण मिलता है कि जब देवी सती(माता पार्वती )ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति द्वारा अपनी देह का त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को प्रत्येक जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने राजा हिमाचल और रानी मैना के घर में पार्वती के रूप में जन्म लिया था।

मां पार्वती ने सावन के महीने में अन्न-जल आदि त्याग कर, निराहार रह कर कठोर व्रत किया था। मां पार्वती के इस व्रत से प्रसन्न होकर ही भगवान शिव(भोलेनाथ)ने देवी पार्वती से विवाह किया और तभी से भगवान महादेव को सावन का महीना अतिप्रिय है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं।

त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं।सच तो यह है कि शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदि स्रोत हैं। वास्तव में, त्रिदेवों में भगवान शंकर को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। भगवान ब्रह्मा सृजनकर्ता, भगवान विष्णु संरक्षक और भगवान शिव विनाशक की भूमिका निभाते हैं।

वैसे तो भगवान शिव के अनेक नाम हैं लेकिन शिव के कुछ प्रचलित नामों में महाकाल, आदिदेव, किरात, शंकर, चन्द्रशेखर, जटाधारी, नागनाथ, मृत्युंजय (मृत्यु पर विजय पाने वाले), त्रयम्बक, महेश, विश्वेश, महारुद्र, विषधर, नीलकण्ठ, महाशिव, उमापति (माता पार्वती के पति), काल भैरव, भूतनाथ, त्रिलोचन (तीन नयन वाले), शशिभूषण, पशुपतिनाथ, अर्द्धनारीश्वर, लिंगम(संपूर्ण ब्रह्मांड के प्रतीक), नटराज (नृत्य के देव), भोलेनाथ (कोमल हृदय, दयालु व आसानी से माफ करने वालों में अग्रणी तथा बहुत जल्द प्रसन्न होने वाले) आदि को शामिल किया जाता है। यहां आदि का अर्थ है प्रारंभ। शिव को ‘आदिनाथ’ भी कहा जाता है और आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम आदिश भी है। वे दैत्यों, दानवों और भूतों के भी प्रिय भगवान हैं। भगवान शिव को रूद्र नाम से भी जाना जाता है। रुद्र का अर्थ है रुत् दूर करने वाला अर्थात दुखों को हरने वाला।

वास्तव में रूद्र से तात्पर्य है दुखों का निर्माण और नाश करना। ‘शिव’ शब्द का अर्थ ‘शुभ, स्वाभिमानिक, अनुग्रहशील, सौम्य, दयालु, उदार, मैत्रीपूर्ण’ होता है। लोक व्युत्पत्ति में ‘शिव’ की जड़ ‘शि’ है जिसका अर्थ है जिन में सभी चीजें व्यापक हैं। यहां ‘वा’ का अर्थ है ‘अनुग्रह के अवतार।’ ऋग्वेद में शिव शब्द एक विशेषण के रूप में प्रयोग किया जाता है। शिव शब्द ने “मुक्ति, अंतिम मुक्ति” और ‘शुभ व्यक्ति’ का भी अर्थ दिया है।  कैलाश सरोवर को शिव का निवास स्थान माना जाता है, जहां भगवान शिव साक्षात् विराजते हैं। शिव’ का शाब्दिक अर्थ है- ‘जो नहीं है’। शिव ‘शून्य’ हैं।  देखा जाए तो हमारी इस संपूर्ण सृष्टि में सब कुछ ‘शून्यता’ से ही तो आता है और वापस ‘शून्य’ में ही चला जाता है।  शिव ही वो गर्भ हैं जिसमें से सब कुछ जन्म लेता है, और वे ही वो गुमनामी हैं, जिनमें सब कुछ फिर से समा जाता है। सब कुछ शिव से आता है, और फिर से शिव में चला जाता है।

दूसरे शब्दों में यह बात कही जा सकती है कि  शिव वह चेतना है जहाँ से सब कुछ आरम्भ होता है, जहाँ सबका पोषण होता है और जिसमें सब कुछ विलीन हो जाता है| कोई भी कभी ‘शिव’ के बाहर नहीं हैं क्योंकि पूरी सृष्टि ही शिव में विद्यमान है। हमारा मन, शरीर सब कुछ केवल शिव तत्व  से ही बना हुआ है, इसीलिए शिव को ‘विश्वरूप’ कहते हैं जिसका अर्थ है कि सारी सृष्टि उन्हीं का रूप है।

शिव का कोई आदि और अंत नही है। भगवान शिव को स्वयंभू कहा जाता है जिसका अर्थ है कि वह अजन्मा हैं। वह ना आदि हैं और ना ही अंत। वास्तव में,भोलेनाथ को अजन्मा और अविनाशी कहा जाता है। सच तो यह है कि श्रद्धा का नाम माँ पार्वती और विश्वास का नाम शिव है।  ‘शिवतत्व” में शिवतत्व और शक्तितत्व दोनों का अंतर्भाव होता है। परमशिव प्रकाशविमर्शमय है। इसी प्रकाशरूप को शिवतत्व और विमर्शरूप को शक्तितत्व कहते हैं। यही विश्व की सृष्टि, स्थिति और संहार के रूप में प्रकट होती है। शिवलिंग अनंत शिव की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है। शिव को सुंदरेश भी  कहते हैं वहीं उन्हें अघोर (भयंकर) भी कहते हैं।

शिव, चेतना की जागृत, निद्रा और स्वप्न अवस्था के परे हैं| शिव समाधि हैं – चेतना की चौथी अवस्था, जिसे केवल ध्यान में ही प्राप्त किया जा सकता है। इस संसार में बल्कि यूं कहें कि इस संपूर्ण ब्रह्मांड में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ शिव न हों, यानी कि शिव सर्वत्र विराजमान हैं। जब हम शिव कहते हैं, तो हम एक विशेष योगी की बात कर रहे होते हैं। वे जो आदियोगी या पहले योगी हैं, और जो आदिगुरू, या पहले गुरु भी हैं। आज हम जिसे योगिक विज्ञान के रूप में जानते हैं, उसके जनक शिव ही हैं। अतः हम यह कह सकते हैं कि शिव शब्द के दो अर्थ हैं। एक योगी शिव और दूसरा शून्यता। ये दोनों ही देखा जाए तो एक तरह के पर्यायवाची हैं, पर फिर भी वे दो अलग-अलग पहलू हैं।

ॐ नमः शिवाय मन्त्र हमारे संपूर्ण सिस्टम को शुद्ध करता है और ध्यानमय बनाने में हमारी मदद करता है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि भगवान शिव का स्वरूप कल्याणकारक है। समुद्र मंथन के समय महादेव को इस दुनिया को बचाने के लिए विष(जहर) का पान करना पड़ा था, और उस महाविनाशक विष को अपने कंठ में धारण करना पड़ा था। यही कारण है कि उन्हें नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है।मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव और माता पार्वती भू लोक पर साक्षात् निवास करते हैं और यदि विधि​-विधान से सच्चे मन, आत्मा, विश्वास और पूर्ण श्रद्धा भाव से उनका पूजन किया जाए तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ‘सत्यम् शिवम् सुंदरम’ अर्थात इस संसार में जो भी सत्य है, वह शिव है और जो शिव है, वह स्वयं में सुंदर है।

वास्तव में, शिव चेतना के स्वामी हैं और शिव की अर्द्धागिंनी स्वयं मां शक्ति अर्थात पार्वती हैं। शिव के पुत्र  र्तिकेय,अय्यपा और गणेश हैं और अशोक सुंदरी, ज्योति और मनसा देवी इनकी पुत्रियां हैं।

शिव के मस्तक में ज्वाला है, जिसे शांत करने के लिए उनके मस्तक पर चन्द्रमा तथा जटाओं में पावन मां गंगा का वास है। शिव के गले में नागदेवता का वास है और इनके हाथों में डमरू और त्रिशूल हैं। शिव सौम्य भी हैं और रूद्र हैं। इसलिए शिव जी की पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। अंत में, हम यह बात कह सकते हैं कि शिव स्वयंभू  हैं, शाश्वत हैं, सर्वोच्च हैं। शिव इस संपूर्ण ब्रह्माण्ड के अस्तित्व के आधार हैं।(विनायक फीचर्स)

गुरु पूर्णिमा – शिक्षक, आचार्य, गुरु एवं सद्गुरु* 

0
 (ईश्वर शरण पाण्डेय- विनायक फीचर्स)
शिक्षक, आचार्य, गुरु एवं सद्गुरु समाज के दिव्य प्रकाश-स्त्रोत होते हैं। वे ज्ञान एवं चेतना की एक अवस्था विशेष, के दिव्य प्रतीक-प्रतिनिधि हैं। कला सिखाने वाला शिक्षक, जिंदगी सिखाने वाला आचार्य, चेतना के गहन मर्म से परिचित कराने वाला गुरु एवं शिष्य को अपने में मिला लेने वाला तत्व सद्गुरु कहलाता है। ये चारों तत्त्व आपस में घुले-मिले तो हैं, पर एक नहीं है। हर एक की अपनी सीमा एवं सामथ्र्य होती है, परंतु अनगढ़ व्यक्तित्व को सुधार-संभालकर भौतिक एवं आत्मिक रूप से परिपूर्ण करने में इनका अपना-अपना मौलिक योगदान रहता है।
शिक्षक ज्ञान की किसी कुशलता का विशेषज्ञ होता है। वह कुशलता के विशेष आयामों को खोलता एवं अनावृत्त करता है। उसको अपने विषय विशेष का विशेष एवं गंभीर ज्ञान  होता है। शिक्षक को अपने विषय का गहरा अनुभव होता है और वह इस अनुभव का स्पर्श विद्यार्थी को  भी करा देता है। शिक्षक में शिक्षार्थी के भीतर कुशलता को विकसित करने की अपार क्षमता होती है। उसमें शिक्षार्थी को अपने जैसा तथा अपने से भी बेहतर एवं निष्णात बना देने की कला होती है। साधारण से छात्र को अत्यंत प्रतिभावान शोधार्थी के रूप में गढ़ देने की विशेषता शिक्षक में होती है। शिक्षक ज्ञान का समुद्र होता है, जिसमें कला-कुशलताएं उद्दाम लहरों की भांति उफनती-उमड़ती रहती है। वह शिक्षार्थी के जीवन में इन कुशलताओं की बाढ़ ला देता है। वह उसे असाधारण प्रतिभा से निष्णात एवं पारंगत कर देता है। इस प्रकार शिक्षक ज्ञान का, कुशलता का बोध कराता है, परंतु जहां जिंदगी जीने की कला सिखाने की बारी आती है, शिक्षक असहाय और असमर्थ हो जाता है।
इस बिंदु पर उसकी सारी सीमाएं समाप्त हो जाती हैं, क्योंकि वह इस विषय से अनभिज्ञ एवं अपरिचित-सा होता है। सर्जन अपने ऑपरेशन थिएटर  में सर्जरी का ज्ञान देता है, परंतु जिंदगी की सर्जरी की कला नहीं बता पाता। यह थोड़ा कठिन है, क्योंकि जिंदगी जीकर ही सीखी जा सकती है। स्वयं के व्यक्तित्व को परिष्कृत, परिमार्जित करके ही दूसरों के व्यक्तित्व को  गढ़ा जा सकता है।
आज समाज, राष्ट्र और विश्व में प्रतिभाओं की कमी और अभाव नहीं है। मेडिकल, टेक्नीकल, प्रोफेशनल कॉलेजों से अव्वल दर्जे में निकलने वाले प्रतिभावान छात्रों की कमी नहीं है और न ही पब्लिक कॉर्पोरेट सेक्टर एवं प्रोफेशनल कॉलेजों में एक्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं प्रोफेसरों का अभाव है। परंतु ये विशेषज्ञ शिक्षक एवं प्रतिभाशाली छात्र दोनों ही जिंदगी जीने के मामले में दुर्बल एवं कमजोर हैं। इनका आंतरिक व्यक्तित्व बिखरा, धुंधला एवं खोखला-सा दिखाई देता है। ये किसी गहरी प्यास से प्यासे लगते हैं। इनकी भावना भटकी हुई, अतृप्त एवं अनबुझी होती है। इन्हें बौद्धिकता तो मिली, परंतु अनुभव नहीं मिला, प्रवीण शिक्षक आचार्य नहीं होते। आचार्य शिक्षक का पर्याय भी नहीं है और हो भी नहीं सकता, परंतु आचार्य शिक्षक भी हो सकता है, क्योंकि वह व्यक्तित्व गढऩे के साथ-साथ कला-कुशलता भी सिखा सकता है। आचार्य को व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों की गहरी समझ एवं बोध होता है और इसी कारण वह व्यक्तित्व को संभाल-निखार सकता है।
आचार्य की वाणीभर नहीं बोलती, उसका आचरण उससे भी अधिक मुखर होकर बोलता है। वाणी की पहुंच कानों तक ही सीमित होती है, परंतु आचरण प्राणों तक अपनी पहुंच बनाता है। आचार्य विचारों का संप्रेषण भर नहीं करता, साथ ही अनुभव प्रदान कर उनमें प्राणों को घोलता है। आचार्य मात्र विचार ही नहीं, गहन अनुभव के निष्कर्ष से प्राप्त आचरण भी प्रदान करता है।
आचार्य को सहज अनुभव प्राप्त होता है कि विचार से व्यवहार तक की महायात्रा कितनी कठिन, कितनी दुष्कर और कितनी भीषण होती है। विचारों को व्यवहार और आचरण से उतारने का पुरुषार्थ कितना श्रमसाध्य, कष्टसाध्य और समयसाध्य है, आचार्य इससे भलीभांति परिचित होता है। आचार्य सद्विचार को सद्व्यवहार के रूप में परिवर्तित कर नई सृष्टि करता है, नूतन सृजन करता है।
आचार्य का  ज्ञान बड़ा ही पारदर्शी होता है। वह व्यक्तित्व निर्माण की समग्र प्रविधियों का कुशल विशेषज्ञ होता है। वह बखूबी जानता है कि कैसे संस्कारों, आदतों, वृत्तियों आदि की दुर्बलताओं को हटाया-मिटाया जाए तथा इनके स्थान पर सदाचार, सद्विचार तथा सद्प्रवृत्ति की स्थापना की जाए। आचार्य व्यक्तित्व निर्माण की सूक्ष्म सर्जरी का सर्जन  होता है। उसे इसके मर्म का गहरा बोध होता है। सैद्धांतिक के साथ-साथ उसे व्यावहारिक ज्ञान भी होता है।
चाणक्य  आचार्य थे, चंद्रगुप्त को उन्होंने उसके व्यक्तित्व का बोध करा दिया था, उसके अनगढ़-अपरिष्कृत व्यक्तितव को गढ़ दिया था। आचार्य चाणक्य राजनीति के शिक्षक थे और चंद्रगुप्त को राजनीति ज्ञान से सराबोर कर दिया था। आचार्य जीवन के मर्म को  जानता है। आई.सी.एस. की नौकरी को तिलांजलि देने वाले श्री अरविंद सही मायने में आचार्य थे, जो अपने विद्यार्थियों में प्राण भरते थे, उनके व्यक्तित्व को गढ़ते थे। आचार्य का प्रभावकारी पक्ष उसके आचरण का आकर्षण होता है।
 आचार्य चरित्र, चिंतन एवं व्यवहाररुपी व्यक्तित्व को तो गढ़ता है, परंतु आंतरिक चेतना के विभिन्न आयामों को अनावृत्त कर पाने में असमर्थ होता है। वह मानवीय चेतना के मर्म को समझ पाने में अक्षम होता है। परंतु यह कार्य गुरु के लिए सहज-सुलभ होता है। गुरु मानवीय चेतना का गहरा मर्मज्ञ होता है। वह चेतना के रहस्य को उजागर  उद्घाटित करता है।
चेतना का परिमार्जन, परिष्कार एवं विकास, व्यक्तित्व की ऊंचाई से ऊंचा होता है। मानवीय चेतना की शिखर यात्रा सामान्य घटना नहीं है। यह असामान्य और असाधारण बात है। पिंड में समायी ब्रह्मांडीय चेतना को अनुभव करने एवं कराने की क्षमता शिक्षक एवं आचार्यों के पास नहीं हो सकती। इस महाघटना को केवल गुरु ही संपादित एवं संचालित करता है। वह मानवीय चेतना की समग्रता को जानता एवं बताता है। वह न केवल अद्वितीय बातें बताता है, बल्कि उनका प्रतिपल-प्रतिक्षण अनुभव भी करा देता है। ऐसी बातें जो न भी कहीं गईं और न सुनी गईं, न जानी गईं और न समझी गईं, उनकी वह नए सिरे से व्याख्या-विवेचना करता है।
गुरु देहधारी ईश्वर होता है। गुरुरूप में भगवान मूर्त होते हैं। गुरु के पास बैठने से भगवद्चेतना का दिव्य स्पर्शबोध होता है। इसी कारण रामकृष्ण परमहंस ने गुरु के हृदय को ‘भगवान का डाक-बंगला’ कहकर उसकी गरिमा को महाभिव्यक्ति दी है और कबीरदास ने गुरुपद को भगवान से भी बड़ा एवं श्रेष्ठतम बताया है। गुरुपद स्वयं भगवान देते हैं। गुरुपद की प्राप्ति इस मरणशील संसार के लिए महाक्रांति है, उत्क्रांति है, क्योंकि गुरु शिष्य  को मदहोशी से जगा-उठाकर उसे उसके आत्मसाक्षात्कार रुपी महाधिकार से विभूषित करता है। गुरु शिष्य की चेतना को महाशिखर की ओर आरोहित करता है। इच्छाओं, कामनाओं एवं वासनाओं से विदग्ध इस संसार में गुरु का अवतरण सुखद, सजल एवं शीतल छांव के समान होता है, जिस छांव तले न जाने कितनों को बोध प्राप्त होता और इस दिव्य स्पर्श से न जाने कितने बुद्ध पैदा होते है। गुरु केवल और केवल अविराम व नि:स्वार्थ कृपा ही करता है, महाकृपा करता है।
गुरु शिष्य को बोध कराता है, उसे बोधिसत्व बना देता है, परंतु सद्गुरु शिष्य को अपने में समाहित कर लेता है, मिला  लेता है। शिष्य की चेतना में वास करने वाला तथा अपनी महाचेतना में शिष्य को डुबो देने वाला सद्गुरु होता है। अत: हर गुरु सद्गुरु नहीं होते। सद्गुरु के लिए बाहर की दौड़ आवश्यक नहीं है, वह तो अंदर में वास करता है। वह बाहर दृश्यमान नहीं, अंदर में झलकता है। सूफियों की नजीर में सद्गुरु की बड़ी ही भावप्रवण अभिव्यंजना मिलती है-‘जब जरा गर्दन झुकाई देख ली तस्वीरें यार।’
सद्गुरु स्वराट नहीं, विराट होते हैं। सद्गुरु ब्राह्मी चेतना से सर्वथा अभिन्न होने के कारण इस जगत के चरम-परम स्त्रोत होते हैं। यह जगत भी  उन्हीं का, विस्तार, विराट रूप है। वे एक साथ महाबीज भी है और महावट भी। ऊपरी और बाहरीतौर पर हर कहीं कितना भेद-विभेद और विभाजन क्यों न दिखाई दे, सद्गुरु की परम पावन चेतना सभी कुछ अभिन्न और अभेद है। वह कहीं बाहर नहीं, अंदर में ही विद्यमान है। वह देहातीत है। अत: सद्गुरु को पाने की ढूंढ-खोज अपने अंदर ही करनी चाहिए। सद्गुरु की महाचेतना शिष्यों के अंदर वास करती है। हम अपने अंदर झांंककर ही उसका दिव्य साक्षात्कार कर सकते हैं, अपनी ही चेतना की अंतर्यात्रा में हम सद्गुरु में तदाकार-एकाकार हो सकते हैं। इस प्रकार शिक्षक, आचार्य, गुरु एवं सद्गुरुरुपी कला, ज्ञान, चेतना और महाचेतना के मूर्तरूप का स्पर्श पाकर भौतिक एवं आत्मिक रूप से जीवन समृद्ध होता है। (विनायक फीचर्स)