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गुजरात में दौड़ेगी देश की पहली वंदेभारत

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अहमदाबाद: वंदेभारत एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन के बाद अब रेलने वंदेभारत मेट्रो का संचालन शुरू करने की तैयारी में है। देश की पहली वंदेभारत मेट्रो गुजरात में दौड़ेगी। इसके लिए वंदेभारत मेट्रो अहमदाबाद के साबरमती स्टेशन पर पहुंच गई है। पश्चिम रेलवे के चीफ प्रवक्ता जे के जयंत के अनुसार अगले कुछ ही दिनों में मेट्रो का ट्रायल शुरू हो जाएगा। पश्चिम रेलवे की तरफ से पहली वंदेभारत मेट्रो वडोदरा से अहमदाबाद के बीच चलाई जा सकती है, क्योंकि हाल ही में रेलवे ने अहमदाबाद से लेकर मुंबई तक के रूट को काफी एडवांस बनाया है। जयंत ने कहा कि रूट पर फैसला आने वाले दिनों में किया जाएगा, लेकिन उन्होंने कहा कि वंदेभारत मेट्रो ट्रेन के संचालन से दैनिक यात्रियों का समय बचेगा। इन्हें खासतौर पर प्रतिदिन आवाजाही करने वाले यात्रियों की सुविधा के हिसाब से डिजाइन किया गया है।

अहमदाबाद में जल्द होगा ट्रायल रन
वेस्टर्न रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन के सीनियर पीआरओ जे के जयंत ने वंदेभारत मेट्रो साबरमती स्टेशन पहुंचने की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरुप रेलवे लोगों को कम समय में किफायती और सुरक्षित सफर मुहैया कराने की ओर बढ़ रहा है। जयंत ने कहा कि अगले कुछ दिनों वंदेभारत मेट्रो का ट्रायल रन शुरू किया जाएगा। इसके बाद यह दो बड़े शहरों के बीच दौड़ेगी। जयंत ने हालांकि यह नहीं बताया कि वंदेभारत मेट्रो का संचालन कितन दो शहरों के बीच होगी, लेकिन के सूत्रों का कहना है कि वंदेभारत मेट्रो के पहले रूट के लिए वडोदरा से अहमदाबाद सबसे ज्यादा मुफीद है क्यों कि इस रूट पर दैनिक यात्रियों की संख्सा सर्वाधिक है। यह वंदे भारत मेट्रो चलती है। तो वडोदरा, नाडियाद, आणंद के हजारों लोगों को फायदा मिलेगा।

गौ रक्षकों ने कई किलोमीटर पीछा कर मुक्त कराए सात गौवंश

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थाना इलाके के कानासर गांव में देर रात पिकअप में डालकर सात गौवंश ले जाया जा रहा था। सूचना मिलने पर जीव रक्षक गौ सेवा संगठन के अध्यक्ष जगदीश प्रजापत की टीम ने गौ तस्करों का पीछा किया और तस्करी कर लें जाए जा रहे हैं गौवंश को मुक्त कराया।

गौ रक्षकों ने कई किलोमीटर पीछा कर मुक्त कराए 7 गौवंश
बीछवाल थाना इलाके के कानासर में देर रात्रि को जीव रक्षक गौसेवा संगठन के कार्यकर्ताओं को सूचना मिली थी कि कुछ गौ तस्कर गौवंश को गाड़ी में डालकर ले जा रहे हैं। रक्षकों ने गौ तस्करों का पीछा कर उनके कब्जे गौवंश को मुक्त करवाया। सूचना के बाद मौके पर पहुंची बीछवाल पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गाड़ी में 7 गौवंश को ठूंस ठूंस कर भरे हुए थे। जिनके हाथ पैर और सींग को बुरी तरह से बांधा हुआ था और शरीर पर चोट आई हुई थी। पुलिस ने गौ तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नवभारत हेल्थ केयर समिट एंड अवॉर्ड्स समारोह में अपोलो सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल से सम्मानित

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नवी मुंबई। अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई प्रतिष्ठित नवभारत हेल्थ केयर समिट एंड अवॉर्ड्स 2024 में मुंबई के सर्वश्रेष्ठ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सम्मानित हुआ। यह पुरस्कार न केवल उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि प्रदान करने के लिए हमारी अटूट प्रतिबद्धता की हार्दिक स्वीकृति है। विश्व स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल जो करुणा और मानवीय संबंध में गहराई से निहित है। यह हमारे मरीजों के हम पर विश्वास और प्यार को दर्शाता है, जो हमें सहानुभूति, समर्पण और देखभाल के साथ उपचार के अपने मिशन को जारी रखने के लिए प्रेरित करता है।

अरुणेश पुनेठा (क्षेत्रीय सीईओ – पश्चिमी क्षेत्र, अपोलो अस्पताल) ने कहा,”यह पुरस्कार अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई में हमारी पूरी टीम के समर्पण और जुनून का प्रतिबिंब है। हर दिन, हम जीवन को छूने, ठीक करने और अपने रोगियों और उनके परिवारों में आशा लाने का प्रयास करते हैं। सर्वश्रेष्ठ सुपर के रूप में पहचाना जा रहा है मुंबई में स्पेशलिटी अस्पताल हमारे अस्पताल के लिए सिर्फ एक प्रशंसा नहीं है, बल्कि हमारे मरीजों द्वारा हम पर रखे गए प्यार और विश्वास का प्रमाण है। हम करुणा और सहानुभूति के साथ स्वास्थ्य देखभाल के उच्चतम मानकों को प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि हर मरीज़ को यह सुविधा मिले हमारे दरवाज़ों को यथासंभव सर्वोत्तम देखभाल मिलती है।”

डॉ. किरण शिंगोटे, यूनिट प्रमुख, अपोलो अस्पताल, नवी मुंबई ने कहा,”यह पुरस्कार उन अनगिनत जिंदगियों की याद दिलाता है जिन्हें हमने छुआ है और जो मुस्कान हम अपने मरीजों के चेहरे पर वापस लाए हैं। हमारा यह यात्रा पुनर्प्राप्ति और आशा की कहानियों से प्रेरित है जो हमारे मरीज़ हमारे साथ साझा करते हैं। यह मान्यता हमें न केवल सर्वोत्तम चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के अपने मिशन को जारी रखने के लिए प्रेरित करती है बल्कि प्रत्येक मरीज के लिए उपचार और आराम का स्थान भी प्रदान करती है।

यह सम्मान उत्कृष्टता की हमारी निरंतर खोज और हमारे गहरे विश्वास को दर्शाता है कि हम जिस भी जीवन को छूते हैं वह सर्वोत्तम देखभाल, करुणा और सम्मान का हकदार है। हम यह पुरस्कार अपने मरीजों को समर्पित करते हैं, जो हमें हर दिन अतिरिक्त प्रयास करने के लिए प्रेरित करते हैं।

रक्षाबंधन पर गौरीशंकर चौबे ने दिंडोशी विधानसभा के माता-बहनों की रक्षा का लिया संकल्प

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2100 बहनों ने बांधी गौरीशंकर चौबे के कलाई पर राखी

मुम्बई। रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में उपनगर मालाड पूर्व कुरार गांव में द्वारिकामाई संस्था द्वारा आयोजित रक्षा शक्ति सम्मान समारोह हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरीशंकर चौबे की कलाई पर हजारों की संख्या में बहनों ने राखी बांधी। इस दौरान कुल 2100 बहनों को उपहार स्वरूप चौबे द्वारा साड़ी प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम और बहनों के स्नेह, प्यार, दुलार और आशीर्वाद से अभिभूत होकर गौरीशंकर चौबे ने कहा कि दिंडोशी विधानसभा के सभी बहनों और माताओं की रक्षा का मैं संकल्प लेता हूं। उनके हर दुख सुख में मैं और मेरी संस्था साथ रहेगी। द्वारिकामाई केवल एक संस्था नहीं है बल्कि परिवार है, इसलिए प्राथमिक स्तर पर संस्था से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष जुड़े हुए सभी सदस्यों के हित सुनिश्चित करना मेरा लक्ष्य है।


इसके अलावा उन्होंने बंगाल में एक बहन के साथ हुई अमानवीय बर्बरता पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे मेरा भी मन और आत्मा आहत है। ऐसी घटना मेरे दिंडोशी विधानसभा क्षेत्र में न हो, इस दृष्टि से मैं महिला सुरक्षा, सशक्तिकरण और स्वावलम्बन पर बल दूंगा।

विशिष्ट अतिथियों को सुभारती अवार्ड वितरित

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मुंबई। सनातन सेना व सुभारती चैनल प्रमुख सुरजीत सिंह द्वारा आयोजित तथा हितेश एच. सोमपुरा द्वारा प्रायोजित सुभारती अवार्ड वितरण समारोह सोल्लास संपन्न हुआ। रविवार की शाम गोरेगांव पूर्व स्थित एस्पन गार्डन बैंक्वेट में आयोजित इस अवार्ड समारोह के मुख्य अतिथि मुंबई के पूर्व शेरिफ डॉ. जगन्नाथराव हेगड़े थे। दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए इस आयोजन में पत्रकारिता, साहित्य, स्वास्थ्य, गीत-संगीत, ललित कला, काव्य, गायन, समाजसेवा, व्यापार आदि क्षेत्रों से जुड़े करीब दो दर्जन हस्तियों को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकर अजय भट्टाचार्य, गीतकार नीतू पाण्डे क्रांति, अदाकारा श्रुति भट्टाचार्य, डॉ. राजश्री सावे, डॉ. नीलिमा पांडे, चित्रकार रामजी शर्मा, रामायण सीरियल के मामा मारीच फेम अभिनेता रमेश गोयल आदि को मुख्य अतिथि के हाथों सम्मानित किया गया। किशन अग्रवाल के संचालन में संपन्न इस समारोह में शामराव विट्ठल को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक रविंदर सिंह, पत्रकार विजय यादव, अंकित मिश्र, जनार्दन मिश्र, अशोक तिवारी, मोईन शेख, सैयद आसिफ सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। विशेष सहयोगी रामलाल चौधरी ने आभार प्रदर्शन किया।

MP- गौरक्षा को लेकर सरकार का बड़ा फ़ैसला

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मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने गौ रक्षा ( गौ संवर्धन) को लेकर बड़ा फ़ैसला किया है. प्रदेश सरकार गौ रक्षा को लेकर और संजीदा है और जल्द मध्य प्रदेश में गौवंश संवर्धन और सुरक्षा कानून और सख्ती से लागू होगा. राज्य सरकार ने इस संबंध में रविवार को गजट नोटिफिकेशन किया है.
गौवंश संवर्धन और सुरक्षा कानून के नए कानून के तहत आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, इसमें आरोपियों पर 7 साल की जेल का भी प्रावधान किया गया है. नए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कलेक्टर कोर्ट के अलावा किसी और कोर्ट में आरोपी याचिका नहीं लगा पाएंगे.
गौरतलब है विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सरकार ने गौवंश संवर्धन और सुरक्षा कानून में संशोधन के लिए विधेयक पारित किया था. पारित संशोधित विधेयक के नए नियम के तहत पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई कर सकेगी. वहीं, नए कानून के तहत गौ तस्करी में शामिल वाहन भी जब्त किए जाएंगे.

क्या है नए विधेयक में खास?

जानकारी के मुताबिक इस नए विधेयक के अनुसार गौ-तस्करी करने वालों को 7 साल की सजा के साथ गो तस्करी में शामिल जो वाहन होगा उसे भी राजसात किया जाएगा. नए कानून के तहत मोहन यादव ने मुख्यमंत्री बनने के बाद जो कड़े फैसले लिये थे. उनमें से एक गौवंस की रक्षा का भी फैसला था.

वैसे भी मध्य प्रदेश सरकार साल 2024 को गौवंश रक्षा वर्ष के रूप में मना रही है. गौवंश को लेकर के कई बड़े फैसले राज्य सरकार कर रही है.  उसी के तहत ये नया कानून भी लाया गया है. जिसे गौवंश सम्वर्धन और सुरक्षा कानून नाम दिया गया है. इसके तहट गौ तस्करों के खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी.

गौ-वंश को लेकर कांग्रेस पार्टी राजनीतिक वजूद बचाने के लिए प्रपंच रच रही है – BJP

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रायपुर । भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव ने कहा है कि गौ माता की हत्या करने वालों को संरक्षण देने वाले अब कार्यालय में जाकर गौ-वंश को लेकर नाटक-नौटंकी कर प्रदर्शन करने का बहाना बना रहे हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि कांग्रेस की पूर्व सरकार ने गाय और गौठान को केवल घोटाले का माध्यम बना रखा था। इसके लिए कांग्रेस की पिछली प्रदेश सरकार में गौ-वंश के लिए भूपेश बघेल की सरकार ने गौठान योजना बनाई जिसमें करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ।

प्रदेश महामंत्री ने कहा कि पशुओं को सड़कों पर आने से रोकने रोका-छेका अभियान चलाकर उसमें भी करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार करने वाले आज गौ-वंश की चिंता कर रहे हैं! कांग्रेस के शासनकाल में 1300 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया। श्रीवास्तव ने कहा कि देश की आजादी के 75 वर्षों में 60 साल शासन चलाने वाली कांग्रेस ने कभी गौ-वंश और गौ माता की चिंता नहीं की, लेकिन अब अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस गौ माता को लेकर कार्यालयों पर प्रदर्शन कर रही है, इससे निम्नस्तरीय पाखंड और कुछ नहीं हो सकता। श्रीवास्तव ने कहा कि वर्षा के समय गौ माता की सेवा करने का समय है, गौ माता को अपने घरों में ले जाकर उसकी सेवा करनी चाहिए। लेकिन कांग्रेसी आज भरी बरसात में गौ माता को साथ ले जाकर कार्यालयों पर प्रदर्शन कर रहे हैं इससे कांग्रेस के नेताओं की निम्नस्तरीय सोच को समझा जा सकता है।

श्रीवास्तव ने कहा कि गौ-वंश को लेकर कांग्रेस पार्टी केवल अपने राजनीतिक वजूद बचाने के लिए प्रपंच रच रही है। इसी कांग्रेस के शासनकाल में जब कांग्रेस के नेता राहुल गांधी 2023 के सितंबर माह में छत्तीसगढ़ आए थे, तब सड़कों पर गौ-वंश की अकाल मृत्यु उनके फेंके गए दूषित भोजन खाने से हुई थी। तब इन कांग्रेसियों की गौ माता को लेकर सेवा करने की भावना कहां गई थी? जब रायपुर के जरवाय ग्राम में स्थित गौठान में अव्यवस्था की वजह से कई गौ-वंश की मृत्यु हो गई थी, वहां पर गौ-वंश को कीचड़युक्त गौठान में रखा गया था। श्रीवास्तव ने कहा कि जुलाई 2020 में बिलासपुर के तखतपुर विधानसभा के हिर्री थाना क्षेत्र के ग्राम मेड़पार बाजार स्थित गौठान में 70 से ज्यादा गायों की दम घुटने से मौत हो गई। इन गायों को अस्थायी रूप से बनाए गौठान के एक कमरे में रखा गया था। नवागढ़ ब्लाक के ग्राम पंचायत खोखरा के गौठान में गांव के गौठान में एक साथ नौ मवेशियों की मौत हो गई। इसकी प्रमुख वजह गौठान में चारा-पानी का अभाव बताया गया था।

 

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने गौ सत्याग्रह को लेकर बोला हल्ला

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छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर शुक्रवार को प्रदेश भर में गौ सत्याग्रह आंदोलन किया गया. इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी सरकार पर जमकर हल्ला बोला. राजनांदगांव शहर जिला कांग्रेस कमेटी के द्वारा भाजपा सरकार द्वारा गौठान, गोधन न्याय योजना बंद किए जाने से प्रदेश में गौवंश की स्थिति खराब होती जा रही है. इस वजह से मवेशी आवारा घूम रहे हैं, जिससे किसानों की फसल की चराई हो रही है.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा- सड़क हादसों की वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.ऐसे तमाम मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया.  शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए रैली के रूप में बड़ी संख्या में गौवंश के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी राजनांदगांव एसडीएम कार्यालय पहुंचे.

गौवंश को एसडीएम कार्यालय में छोड़ा

प्रतीकात्मक तौर पर गौवंश को एसडीएम कार्यालय में छोड़ा गया और विरोध जताया गया. शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलबीर सिंह छाबड़ा ने कहा- प्रदेश सरकार गौ वंश को लेकर ध्यान नहीं दे रही है,जिसके कारण गौवंश और लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

बीजेपी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के कार्यकर्ता.

गौ माता के सम्मान और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर ब्लॉक कांग्रेस मैनपुर द्वारा तहसील मुख्यालय मैनपुर नगर में अनोखा विरोध प्रदर्शन किया गया. बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता बिन्द्रनवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के MLA जनक ध्रुव,जिला पंचायत उपाध्यक्ष संजय नेताम एके नेतृत्व में गौ – सत्याग्रह के तहत रैली निकाली. रैली में सैकड़ो की संख्या में मवेशी रैली के आगे-आगे चल रहे थे और मवेशियों को हाकते हुए कांग्रेस के MLA और कांग्रेस कार्यकर्ता सीधे एसडीएम कार्यालय में घुस गए. सैकड़ो की संख्या में मवेशियों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी किया.

कोरिया में किया विरोध

कोरिया जिले में भी कांग्रेस ने गौ सत्याग्रह किया. गौवंश की हत्या के विरोध में बैकुंठपुर में कांग्रेस कार्यकर्ता गायों को लेकर जनपद कार्यालय पहुंचे. जहां जिलाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने गौठानों को बंद कर दिया है, जिससे मवेशी सड़क पर घूम रहे हैं. प्रदर्शन को लेकर जिले में कलेक्ट्रेट, एसडीएम कार्यालय समेत सरकारी दफ्तरों के बाहर पुलिस ने सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की थी.जनपद पंचायत कार्यालय के सामने कांग्रेस ने जंगी प्रदर्शन करते हुए गायों को छोड़ा ताकि आवारा पशुओं की समस्या को लेकर सरकार और आम जनता का ध्यान खींचा जा सके.

सूरजपुर में सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

आवारा मवेशियों की बढ़ती समस्या को लेकर सूरजपुर जिले के विश्रामपुर में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गायों की सुरक्षा और इनके सड़कों पर होने से आम लोगों की परेशानियों को लेकर प्रदर्शन किया, जिसे गौ सत्याग्रह नाम दिया. इस दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओ ने NH 43 से मवेशियों को खदेड़ते हुए तहसील कार्यालय परिसर में लेजाकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा. जहां प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी करते कांग्रेसी कार्यकर्ता करते रहे. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश सरकार गाय को लेकर वोट मांगती है, लेकिन आज प्रदेश भर में गायों की मौत हो रही है.

आधुनिक समय में पुलिस के समक्ष चुनौतियां

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(डॉ.शैलेंद्र श्रीवास्तव-विनायक फीचर्स)

आधुनिक युग में, भारतीय पुलिस को असंख्य बहुआयामी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें कई तरह के मुद्दे शामिल हैं। इन चुनौतियों में सांप्रदायिक अशांति और  उग्रवाद से निपटना,नार्को टेरेरिज्म का मुकाबला करना, मानव तस्करी के नेटवर्क को विफल करना, आतंकवाद के विभिन्न रूपों का मुकाबला करना और सीमा पार खतरों का प्रबंधन करना शामिल है। आईईडी जैसे विस्फोटकों का बढ़ता उपयोग भी पुलिस की बढ़ती चुनौतियों में शामिल है।

इसके अलावा, प्रौद्योगिकी के प्रसार ने आपराधिक गतिविधियों के नए आयाम पेश किए हैं। साइबर अपराधों में वृद्धि एक खास तरह का खतरा पैदा करती है, क्योंकि अपराधी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पारंपरिक तंत्र से आगे निकलने के लिए प्रौद्योगिकी और गुमनामी का लाभ उठाते हैं। इस डिजिटल दायरे में वित्तीय धोखाधड़ी और डेटा में सेंध लगाने से लेकर ऑनलाइन उत्पीड़न और पहचान की चोरी तक कई प्रकार के अपराध शामिल हैं। इन डिजिटल खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस बल को लगातार इस उभरते  परिदृश्य के अनुरूप ढलना होगा।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने आने वाली जटिलताओं को और बढ़ा देती है। एआई प्रौद्योगिकी की तीव्र प्रगति में अपराध और कानून प्रवर्तन रणनीति में क्रांति लाने की क्षमता है। अपराधी परिष्कृत योजना और अपराधों को अंजाम देने के लिए एआई  का फायदा उठाते हैं, जिससे ऐसे अपराधों की भविष्यवाणी करना और रोकना कठिन हो जाता है। इसके लिए पुलिस बल के भीतर एआई विशेषज्ञता विकसित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण और संसाधनों की आवश्यकता होती है, जो उन्हें उभरते खतरों से आगे रहने में सक्षम बनाते हैं।

जैसे-जैसे शहरीकरण तेज हो रहा है और समाज आपस में अधिक जुड़ रहे हैं, सार्वजनिक कार्यक्रमों के प्रबंधन और बड़ी सभाओं के दौरान भीड़ पर नियंत्रण बनाए रखने जैसी चुनौतियाँ भी प्रमुखता हासिल कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, अवैध वन्यजीव व्यापार और प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय अपराध,कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए नई बाधाएं खड़ी करते हैं।
इस निरंतर बदलते परिदृश्य में, भारतीय पुलिस बल को इन उभरती चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने और देश के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार अनुकूलन,विकास और नवाचार करना चाहिए। *लेखक 1986 बैच के आईपीएस आफिसर एवं विशेष पुलिस महानिदेशक(सेवानिवृत्त) हैं।(विनायक फीचर्स)*

नारी विमर्श की मुखर अभिव्यक्ति है सुभद्रा कुमारी चौहान की कथा दृष्टि*

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(विवेक रंजन श्रीवास्तव – विनायक फीचर्स)

सुभद्रा कुमारी चौहान की खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी, हिन्दी के सर्वाधिक पढ़े व गाये गये गीतों में से एक है। यह गीत स्वयं में गीत से अधिक वीर गाथा की एक सच्ची कहानी ही है ! जिसमें कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन के सारे घटना क्रम को एक पद्यात्मक कहानी के रूप में इस सजीवता से प्रस्तुत किया है कि पाठक या श्रोता वीर रस से भाव विभोर हो उठता है। यह रचना उनकी पहचान बन गई है। इस गीत की संगीत बद्ध प्रस्तुतियां किसी भी देश राग के आयोजन को ओजस्विता से भर देती है। जबलपुर की ही साधना उपाध्याय जी के दल ने इस गीत पर बेहद खूबसूरत नृत्य नाटिका तैयार की है जिसकी अनेक प्रस्तुतियां जगह जगह हुई हैं।

किसी भी मनुष्य का व्यक्तित्व एवं उसका बौद्धिक विकास, उसके परिवेश, देश, काल, परिस्थिति के अनुरूप होता है। सुभद्रा कुमारी चौहान एक साथ ही प्रगतिशील नारी, गृहिणी, मां, कवि, लेखिका, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, जननेत्री व राजनेता थीं। वे जमीन से जुड़ी हुई थीं, अत: उनके अनुभवों का संसार बहुत विशाल था। उन दिनो स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था। भारतीय समाज में जातिगत, वर्गगत, धर्मगत, लिंगगत रूढिय़ां अपने चरम पर थीं। पर्दा प्रथा, बाल विवाह, छुआ छूत, दहेज प्रथा, बहुविवाह, नारी उत्पीडन, सती हो जाने जैसी कुप्रथायें उनके समय समाज में स्त्रियों की प्रगति की बाधा बनी हुईं थी।  अपनी कहानियों से सुभद्रा जी ने इन कुप्रथाओ के विरुद्ध भरपूर आवाज उठाई।  यही कारण है कि उनके साहित्य में कहीं भी नाटकीयता व बनावटीपन नहीं है वरन् वह हृदय स्पर्शी, वास्तविकता के निकट जन मन की अभिव्यक्ति बन पड़ा है। उन्होने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में हिस्सेदारी निभाई स्वाभाविक है कि उनकी लेखनी ने देश प्रेम के मनोभावो का चित्रण अपनी कविता कहानियो में भी किया। सुभद्रा जी का जन्म 1904 में इलाहाबाद के निकट निहालपुर नामक गांव में रामनाथसिंह के जमींदार परिवार में हुआ था।  उनके पिता के अलावा पति लक्ष्मण सिंह , सखी महादेवी वर्मा, ने उनके व्यक्तित्व निर्माण में  भरपूर सहयोग किया। उन्होंने जो भी लिखा है वह सब का सब मर्मस्पर्शी, उद्देश्यपूर्ण व शाश्वत बन कर हिन्दी साहित्य की धरोहर के रूप में सुप्रतिष्ठित है। केवल कक्षा 9वीं तक शालेय शिक्षा  प्राप्त हुई महिला अपने अनुभवो के आधार पर कितना प्रौढ़ व परिपक्व लिख सकती है इसका सशक्त उदाहरण सुभद्रा जी हैं।

बिखरे मोती उनका पहला कहानी संग्रह है, इसमें भग्नावशेष, होली, पापीपेट, मंझलीरानी, परिवर्तन, दृष्टिकोण, कदम के फूल, किस्मत, मछुये की बेटी, एकादशी, आहुती, थाती, अमराई, अनुरोध, व ग्रामीणा कुल 15 एक दूसरे से बढ़कर कहानियां हैं ! इन कहानियों की भाषा सरल बोलचाल की भाषा है। अधिकांश कहानियां नारी विमर्श पर केंद्रित हैं। उनकी कथा दृष्टि की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि नारी मुक्ति व प्रगति जो शायद उनके समय के लिये नव चेतना थी पर उन्होंने बहुत स्पष्ट तथा खुलकर लेखन किया। उनके स्वयं के देश व साहित्य के लिये समर्पित जीवन का प्रभाव उनकी व्यापक सार्वभौमिक लेखनी पर स्पष्ट दिखता है। उनकी कहानियां नारी विमर्श की अग्रिम पंक्ति की संवाहिका हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान के समूचे साहित्य की सफलता जिस आधारभूत तथ्य पर केंद्रित है, वह मेरे पास उपलब्ध बिखरे मोती कहानी संग्रह की प्रति पर एक मित्र के द्वारा दूसरे को पुस्तक भेंट करते हुये की गई टिप्पणी है। जिसमें स्याही वाली कलम से सुंदर अक्षरो में अंकित है ये कहानियां तुम्हें प्रेरणा देंगी, जन्म दिवस पर सप्रेम भेंट जो इन कहानियों की लोकप्रियता, उपयोगिता व आम पाठक का साहित्य अनुराग प्रदर्शित करती है। आज कितने पाठक स्वयं पुस्तकें खरीद कर पड़ते हैं? भेंट करना तो बाद की बात है। ऐसी रुचिकर हृदय स्पर्शी कितनी कहानियां लिखी जा रहीं है कि वे पाठकों के बीच चर्चा का विषय बन जावें? उनकी कहानियां कृत्रिम , सप्रयास लिखी नहीं लगती। वे तो आसपास से ही उठाई गई विषय वस्तु की तरतीब से प्रस्तुति ही हैं !

उन्मादिनी शीर्षक से उनका दूसरा कथा संग्रह 1934 में छपा। इस में उन्मादिनी, असमंजस, अभियुक्त, सोने की कंठी, नारी हृदय, पवित्र ईर्ष्या, अंगूठी की खोज व वेश्या की लड़की कुल 8 कहानियां हैं।इन सब कहानियों का मुख्य स्वर पारिवारिक व सामाजिक परिदृश्य ही है।

कहानी नारी हृदय में प्रमिला के 3 पत्रों के माध्यम से हमें यह समझने को मिलता है कि तत्कालीन समय में स्त्रियां कितनी विवश थीं ।

एक पत्रांश उधृत है    मेरे स्वामी ……परमात्मा ने स्त्री-जाति के हृदय में इतना विश्वास, इतनी कोमलता और इतना प्रेम शायद इसीलिए भर दिया है कि वह पग-पग पर ठुकराई जावे। जिस देवता के चरणों पर हम अपना सर्वस्व चढ़ाकर, केवल उसकी कृपा-दृष्टि की भिखारिन बनती है, वही हमारी तरफ आँखें उठाकर देखने में अपना अपमान समझता है। माना कि मैं समाज की आँखों में आपकी कोई नहीं। किंतु एक बार अपना हृदय तो टटोलिए, और सच बतलाइए क्या मैं आपकी कोई नहीं हूँ। समाज के सामने अग्नि की साक्षी देकर हम विवाह-सूत्र में अवश्य नहीं बँधे, किंतु शिवजी की मूर्ति के सामने भगवान् शंकर को साक्षी बनाकर क्या आपने मुझे नही अपनाया था? यह बात गलत तो नहीं है। मैं जानती हूँ कि आप यदि मुझसे बिलकुल न बोलना चाहें, तब भी मैं आपकी कुछ नहीं कर सकती। यदि किसी से कुछ कहने भी जाऊँ तो सिवा अपमान और तिरस्कार के मुझे क्या मिलेगा ? आपको तो कोई कुछ भी न कहेगा, आप फिर भी समाज में सिर ऊँचा करके बैठ सकेंगे। किंतु मेरे लिए कौन-सा स्थान रहेगा ? अभी रूखा-सूखा टुकड़ा खाकर, जहाँ रात को सो रहती हूँ, फिर वहाँ से भी ठोकर मारकर निकाल दी जाऊँगी, और उसके बाद गली-गली की भिखारिन बन जाने के अतिरिक्त मेरे पास दूसरा क्या साधन बच रहेगा? संभव है आप मुझे दुराचारिणी या पापिन समझते हों; और इसीलिए बहुत सोच-विचार के बाद आपने मुझसे संबंध-त्याग में ही कुशलता समझी हो, और पत्र लिखना बंद कर दिया हो।…अभागिनी प्रमिला।

कहानी का अंत सकारात्मक करते हुये सुभद्रा जी ने लिखा …पत्नी ने कहा … तुम बड़े कठोर हो, उसने मुँह फेरे-फेरे उत्तर दिया।

‘क्यों? मैंने उसका मुँह अपनी तरफ फेरते हुए पूछा, ‘मैं कठोर कैसे हूँ?

अपनी आँखों के आँसू पोंछती हुई वह बोली, यदि तुम निभा नहीं सकते थे, तो उस बेचारी को इस रास्ते पर घसीटा ही क्यों?

मुझे हँसी आ गई, हालाँकि प्रमिला के पत्रों को पढऩे के बाद, मेरे हृदय में भी एक प्रकार का दर्द-सा हो रहा था। मुझे स्त्रियों की असहायता, उनकी विवशता और उनके कष्टों से बड़ी तीव्र मार्मिक पीड़ा हो रही थी।

मैंने किंचित् मुस्कराकर कहा, पगली। यह पत्र मेरे लिए नहीं लिखे गए। कविताओं की स्थिति हिन्दी साहित्य में अजब सी है , हमारा सारा पुरातन साहित्य काव्य में ही है, पर सुभद्रा जी के समय भी पत्रिकायें कविताओ पर पारिश्रमिक नहीं देते थे।  उनसे संपादकगण गद्य रचना चाहते थे और उसके लिए पारिश्रमिक भी देते थे। समाज की अनीतियों से उत्पन्न जिस पीड़ा को वे व्यक्त करना चाहती थीं , उसकी अभिव्यक्ति का उचित माध्यम गद्य ही हो सकता था, अत: सुभद्रा जी ने कहानियों की विधा को अपनाया।  उनकी कहानियों में देश-प्रेम के साथ-साथ समाज को, अपने व्यक्तित्व को प्रतिष्ठित करने के लिए संघर्षरत नारी की पीड़ा और विद्रोह का स्वर मिलता है। साल भर में ही उन्होंने पहला कहानी संग्रह बिखरे मोती ही लिख डाला। बिखरे मोती छपवाने के लिए वे इलाहाबाद गईं।  बिखरे मोती पर सुभद्रा जी को सेकसरिया पुरुस्कार भी मिला। उनकी अधिकांश कहानियाँ सत्य घटनाओ की लोकव्यापी प्रस्तुतियां  हैं। देश-प्रेम के साथ-साथ उनमें गरीबों के प्रति सच्ची सहानुभूति मिलती है।

उनकी कहानियों में जहाँ स्त्री सरोकारों की बात दिखती है  तो वे सामाजिक, राजनीतिक विसंगतियों की कसौटी पर भी खरी हैं। उनकी कहानियाँ स्वतंत्रता आंदोलन के दौर की नारी का मानसिक पटल प्रस्तुत करती हैं। आज़ादी के पूर्व की भारतीय नारी की दशा और दिशा के आकलन में वे हमारी बड़ी मदद करती हैं।

उनकी नारी केवल राजनीतिक आज़ादी नहीं चाहती बल्कि सभी प्रकार की गुलामी से मुक्ति चाहती है। वह स्वतंत्रता नहीं, स्वराज्य चाहती है। परतंत्रता नहीं, स्वानुशासन चाहती है। रूढिय़ों-बंधनों से मुक्त होकर वह स्वनियंत्रण में रहना चाहती है। सुभद्रा जी की सभी कहानियों को हम एक तरह से सत्याग्रही कहानियाँ कह सकते हैं। उनकी स्त्रियाँ सत्याग्रही स्त्रियाँ हैं। दलित चेतना और स्त्रीवादी विमर्श को उठाने वाली सुभद्राकुमारी चौहान हिंदी की पहली कहानीकार हैं। सीधेृसाधे चित्र सुभद्रा कुमारी चौहान का तीसरा व अंतिम कथा संग्रह है। इसमें कुल 14 कहानियां हैँ। रूपा , कैलाशी नानी, बिआल्हा, कल्याणी , दो साथी, प्रोफेसर मित्रा, दुराचारी व मंगला 8 कहानियों की कथावस्तु नारी प्रधान पारिवारिक सामाजिक समस्यायें हैं।

हींगवाला , राही, तांगे वाला एवं गुलाबसिंह कहानियां राष्ट्रीय विषयों पर आधारित हैं। उनके कथा संग्रहों में कुल 38 कहानियाँ (क्रमश: पंद्रह, नौ और चौदह) प्रकाशित हैं।  सुभद्रा जी की समकालीन स्त्री-कथाकारों की संख्या अधिक नहीं थीं। अपनी व्यापक कथा दृष्टि से वे एक  लोकप्रिय नारी विमर्श की ध्वज वाहिका कथाकार के रूप में हिन्दी साहित्य जगत में सुप्रतिष्ठित हैं। समय के साथ भले ही सुभद्रा जी की कहानियो के परिवेश का वर्णन पुराना पड़ गया हो किन्तु आज भी देश भक्ति की भावना , और आज की स्त्रियो के मर्यादा पूर्ण स्वातंत्रय की प्रेरणादायी इन कहानियों की प्रासंगिकता यथावत बनी हुई है। (विनायक फीचर्स)