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थारपारकर गाय पशुपालकों के लिए ‘दुधारू सोना’ है

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रायबरेली. पशुपालन लोगों के लिए समृद्धि का द्वार खोलने में बड़ी भूमिका निभा रहा है. पशुपालन का काम करके लोग अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. अब ग्रामीण अंचल से लेकर शहरी क्षेत्र के लोग एवं पढ़े-लिखे युवा भी इसके जरिए अपनी तकदीर बदल रहे हैं. जिसमें लोग गाय, भैंस, बकरी के साथ सूअर पालन का काम बड़े स्तर पर कर रहे हैं. गाय पालन का काम करने वाले पशुपालकों को उन्नत नस्ल की जानकारी न होने के कारण उन्हें काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. इसीलिए आज हम उन्हें गाय की एक खास उन्नत नस्ल के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसका पालन करके वह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. दरअसल हम बात कर रहे हैं गाय की उन्नत नस्ल थारपारकर गाय की जो अपने कई खास गुणों के लिए जानी जाती है. इसे हमारे देश के पशुपालक इस गाय को ‘दुधारू सोने’ के नाम से भी जानते हैं.

लोकल 18 से बात करते हुए रायबरेली के पशु विशेषज्ञ डॉ. इंद्रजीत वर्मा (एमवीएससी वेटनरी ) बताते हैं कि थारपारकर गाय भारत में मुख्य रूप से राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर में पाई जाती है. जो अपने दुग्ध उत्पादन के लिए जानी जाती है. यही वजह है, कि इसका पालन अब राजस्थान, यूपी , बिहार, महाराष्ट्र के पशुपालक भी कर रहे हैं. इसकी उत्पत्ति मुख्य रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जिले थारपारकर की है.

थारपारकर गाय की पहचान
डॉ. इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि थारपारकर गाय पशुपालकों के लिए ‘दुधारू सोना’ है. इसकी खासियत है कि यह भीषण गर्मी व सर्दी को सहन करने की क्षमता रखती है.यह गाय अन्य नस्ल की गायों को तुलना में बेहद अलग है. इस गाय का रंग सफेद या धूसर होता है. पीठ पर हल्के आसमानी रंग की धारियां होती हैं. इसका सिर मध्यम आकार का माथा एवं कान चौड़े होने के साथ ही पूंछ पतली और लंबी होती है.

इतनी है कीमत
डॉ. इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि यह गाय प्रतिदिन लगभग 15 से 18 लीटर दूध का उत्पादन देती है. इसकी कीमत 20 हजार रुपए से लेकर 60 हजार रुपए तक है. यह गाय एक ब्यांत में 1500 से 2200 लीटर दुग्ध उत्पादन की क्षमता रखती है. वहीं इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है. जिसकी वजह से यह जल्दी से बीमार भी नहीं पड़ती है. इसका पालन करके किसान कम समय में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. थारपारकर गाय सामान्य गायों की तरह ही आहार का सेवन करती है.

वित्त मंत्री ने आरआरबी के प्रौद्योगिकी उन्नयन में हुए सुधार की सराहना की

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केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज उदयपुर में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के नौ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता की


श्रीमती सीतारमण ने आरआरबी से सरकारी योजनाओं के बारे में, खासकर आकांक्षी जिलों में जागरूकता पैदा करने का आग्रह किया

केंद्रीय वित्त मंत्री ने 2022 से पश्चिमी मध्य क्षेत्र के नौ आरआरबी के प्रौद्योगिकी उन्नयन में हुए सुधार की सराहना की

श्रीमती सीतारमण ने एमएसएमई क्लस्टरों में स्थित आरआरबी शाखाओं द्वारा छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को ऋण सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय पहुँच (आउटरीच) बनाने पर जोर दिया

केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज उदयपुर में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान राज्यों के नौ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव श्री एम. नागराजू, अतरिक्‍त सचिव, अन्य वरिष्ठ डीएफएस अधिकारी, आरआरबी के अध्यक्ष और प्रायोजक बैंकों के सीईओ, आरबीआई, सिडबी और नाबार्ड के प्रतिनिधि और 5 राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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समीक्षा बैठक में व्यवसाय प्रदर्शन, डिजिटल प्रौद्योगिकी सेवाओं को उन्नत करने, एमएसएमई क्लस्टरों में कारोबार के विकास को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेश को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन देने में आरआरबी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने आरआरबी से विशेष रूप से आकांक्षी जिलों में सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता पैदा करने का आग्रह किया।

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श्रीमती सीतारमण ने बुंदेलखंड क्षेत्र में मुद्रा योजना के कम उपयोग का उल्लेख किया और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) को बुंदेलखंड क्षेत्र और आकांक्षी जिलों में अन्य वित्तीय समावेश योजनाओं के साथ-साथ मुद्रा योजना के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों, प्रायोजक बैंकों और आरआरबी के साथ विशेष बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने गुजरात और राजस्थान राज्यों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्राकृतिक क्षमता का उल्लेख किया और आरआरबी से इस योजना के लिए जागरूकता पैदा करने और ऋण प्रदान करने का आग्रह किया। आरआरबी द्वारा ऋण पहुँच बढ़ाने के लिए एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) कार्यक्रम की क्षमता पर भी प्रकाश डाला गया। इसी तरह, आरआरबी को ऋण प्रदान करने के लिए अपने संचालन-क्षेत्रों में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत संभावित कारोबार की पहचान करने का निर्देश दिया गया। आरआरबी को जमीनी स्तर पर कृषि ऋण वितरण में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के घोषित उद्देश्यों को प्राप्त करने का भी निर्देश दिया गया।

आरआरबी का समेकित पूंजी से जोखिम (भारित) परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) वित्त वर्ष 2021 में 7.8 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 13.7 प्रतिशत हो गया है और वित्त वर्ष 2021 के 41 करोड़ रुपये के घाटे की जगह लाभप्रदता बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 2,018 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ में बदल गई है और सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (जीएनपीए) 3.9 प्रतिशत के अनुपात के साथ अपेक्षाकृत निम्न स्तर पर हैं। श्रीमती सीतारमण ने 2022 से पश्चिमी मध्य क्षेत्र के नौ आरआरबी के प्रौद्योगिकी उन्नयन में संतोषजनक सुधार को स्वीकार किया – इसी वर्ष आरआरबी की नियमित समीक्षा शुरू की गयी थी और इन आरआरबी से भविष्य में भी गति जारी रखने का आग्रह किया।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने आरआरबी को अधिक ऋण वितरित करने के लिए अपने स्वस्थ सीएएसए अनुपात का लाभ उठाने का निर्देश दिया तथा सरकार और प्रायोजक बैंकों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के अलावा, राज्य सरकारों से आरआरबी की लंबित बकाया राशि का समाधान करने में आरबीआई के हस्तक्षेप का भी आग्रह किया।

समीक्षा बैठक के दौरान, वित्त मंत्री ने आरआरबी को और अधिक ग्राहक अनुकूल बनने तथा प्रदर्शन को और बेहतर बनाने के लिए अपने स्थानीय संपर्क का लाभ उठाने का भी निर्देश दिया। तकनीकी सहायता प्रदान करने, सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने और आरआरबी को सफल होने के लिए आवश्यक संसाधनों तक पहुँच सुनिश्चित करने से जुड़े प्रयासों में प्रायोजक बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

श्रीमती सीतारमण ने छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को ऋण सुनिश्चित करने के लिए एमएसएमई क्लस्टरों में स्थित आरआरबी शाखाओं द्वारा सक्रिय पहुँच (आउटरीच) बनाने पर जोर दिया। सभी आरआरबी ने क्लस्टर गतिविधियों के अनुरूप एमएसएमई उत्पादों को अंतिम रूप दिया है। हालांकि, उन्हें इस खंड में अपने ऋण अनुभाग की नियमित समीक्षा करने की आवश्यकता है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि प्रायोजक बैंकों और आरआरबी को आगे आने वाली चुनौतियों की पहचान करनी चाहिए। विशेष रूप से परिसंपत्ति की गुणवत्ता बनाए रखना, डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना और मजबूत कॉरपोरेट प्रशासन सुनिश्चित करना, ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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राजनीति से सिनेमा तक स्त्री ही बिकती है

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राकेश अचल-

दुनिया में जो देश नारी की पूजा का दावा करता है उसी देश में नारी की सुरक्षा आज राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा है। ये मुद्दा लालकिले की प्राचीर से भी गूंजता है। उत्तर से दक्षिण तक,पूरब से पश्चिम तक ये एक समान मुद्दा है। ये मुद्दा राजनीति का भी है ,क़ानून और व्यवस्था का भी है ,समाज का भी है और अदालत का भी। फिर भी स्थिति ये है कि आज हम दुनिया के उन दुर्भाग्यशाली देशों में शुमार किये जा रहे हैं जहां नारी सबसे ज्यादा असुरक्षित,सबसे ज्यादा अपमानित,शोषित और पीड़ित है। कोई माने या न माने लेकिन ये सच है कि नारी यानि स्त्री यानि अबला सबके लिए आज भी वस्तु है,फिर चाहे वो सिनेमा हो,बाजार हो या सियासत हो।
हम और हमारा समाज मनुवादी है ,मनुस्मृति कहती है –
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः। (मनुस्मृति 3/56 ) लेकिन मुझे लगता है कि मनुस्मृति झूठ कहती है। मनुस्मृति के आधार पर चलने वाले लोग झूठे है। वे नारी की पूजा केवल स्मृतियों में करते हैं ,वास्तविकता में नहीं।। मनुस्मृति से ज्यादा सच तो हमारे दद्दा मैथलीशरण गुप्त बोलते रहे ,वे लिख गए कि –
‘ अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी
आँचल में है दूध और आँखों में पानी ‘
हम सदियों से स्त्रियों के बारे में अपनी सोच नहीं बदल पाए । आजादी के बाद भी हमारी सोच स्त्रियों को लेकर पाशविक ही बनी हुई है ,इसे बदलने के लिए कोई कुछ नहीं करना चाहता। सब स्त्री सुरक्षा के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं। स्त्री सुरक्षा के मुद्दे पर हमारा या किसी का सर शर्म से नहीं झुकता ,झुक भी नहीं सकता ,क्योंकि हम सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। हमारे लिए स्त्री केवल वस्तु है।
राजनीति में स्त्री की अस्मिता का मुद्दा आपको सत्ता तक ले जाता है, यानि राजनीति में स्त्री सत्ता के लिए एक सीढ़ी से ज्यादा कुछ नहीं है। जैसे बाजार में स्त्री को एक सामान की तरह बिकने के लिए मजबूर किया जाता हैं वैसे ही राजनीति में भी स्त्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। वे स्त्रियां अपवाद हैं जो पुरुष प्रधान और मनुवादी समाज में भी राजनीति में शीर्ष पर पहुंची और उन्होंने पुरुषों को उनकी औकात दिखाई ,बाकी तो केवल दही शक़्कर खिलाने के काम आने वाली स्त्रियां होतीं हैं। राजनीति में इंदिरा गाँधी कम ही जन्म लेती हैं। हमारे समाज में स्त्री आज भी एक गाली है और सबसे पहले इस्तेमाल की जाती है।
हाल ही में मैं श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘स्त्री 2’ के बारे में पढ़ रहा था। ये फिल्म अपनी रिलीज के पहले दिन से ही रिकॉर्ड तोड़ कलेक्शन कर रही है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कब्जा किए हुए हैं और हर रोज करोड़ों की कमाई कर रही है। ‘स्त्री 2’ महज हफ्ते भर के कलेक्शन के साथ अब घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ क्लब में एंट्री लेने के करीब आ गई है। कहते हैं की ‘स्त्री 2’ ने प्रीव्यू और रिलीज के साथ पहले दिन 76.5 करोड़ रुपए कमाए थे। दूसरे दिन फिल्म ने 41.5 करोड़, तीसरे दिन 54 करोड़, चौथे दिन के 58.2 करोड़ और पांचवें दिन 38.4 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। छठे दिन भी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 25.8 करोड़ रुपए बटोरे। वहीं अब सातवें दिन के शुरुआती आंकड़े सामने आ गए हैं जिसके मुताबिक फिल्म ने अब तक 20 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है।
भारत में ‘स्त्री 2’ ने हफ्ते भर में अब तक लगभग 300 करोड़ रुपए कमा लिए है। इसी के साथ ‘स्त्री 2’ साल की सबसे बड़ी फिल्म फाइटर के लाइफटाइम कलेक्शन से आगे निकल गई है। बता दें कि फाइटर ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर कुल 254.83 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया था। ‘स्त्री 2’ ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के मामले में भी फाइटर को शिकस्त दे दी है।आपको याद होगा की 15 अगस्त को रिलीज हुई ‘स्त्री 2’ बॉक्स ऑफिस पर कई हिंदी और साउथ फिल्मों से टकराई थी।
मैंने स्त्री-2 का उदाहरण जानबूझकर आपके सामने रखा है। मेरे कहने का आशय ये है कि स्त्री धरती की तरह उर्वरा भी है सहनशील भी ,लेकिन उसके इन गुणों का दुरूपयोग किया जा रहा है। पुरुष प्रधान समाज की राजनीति,और सत्ता मिलजुलकर स्त्री समाज को मूर्ख बना रही है ।
मैंने दुनिया के दर्जनों देशों का भ्रमण किया है। उन देशों का भी जहाँ की पूरी अर्थव्यवस्था नारियों की जिस्म फरोशी पर टिकी है लेकिन वहां भी नारियों के साथ वैसी ज्यादती नहीं होती ,जैसी भारत में होती है। भारत में नारी स्वातंत्र्य केवल एक नारा है ,जुमला है। हकीकत में भारतीय नारी सबसे ज्यादा असुरक्षित, शोषित ,पीड़िता है। मौजूदा स्थित में बदलाव कोई क़ानून नहीं कर सकता,कोई सरकार नहीं कर सकती। इसके लिए हमें देश की उस आधी आबादी का दिमाग बदलना होगा जो स्त्री के प्रति दुर्भाव रखती है। मानसिकता का बदलाव करने के लिए हमें हमारी शिक्षा प्रणाली बदलना होगी । महिलाओं को देखने का नजरिया बदलना होगा।
जब तक ये सब नहीं होगा ,तब तक मणिपुर में भी स्त्रियां जलेंगी और बंगाल में भी। कश्मीर में भी और उत्तर प्रदेश में भी। इस दुरावस्था को बदलने के लिए स्त्रियों को पुरुष समाज से खुद ही लोहा लेना होगा। उनकी वंदना क़ानून से तो होने से रही। क़ानून तो हमारे यहां बहुत से हैं लेकिन स्त्रियों की सुरक्षा इनसे नहीं हो पा रही ,बिलकुल नहीं हो पा रही। हमारे यहां स्त्रियों से साल में बलात्कार के 25 हजार मामले दर्ज होते हैं और सजा होती है केवल 27 -28 फीसदी लोगों को। दुर्भाग्य तो ये है कि सजायाफ्ता अपराधी भी फरलो जैसे घृणित कानूनों का इस्तेमाल कर मौज कर रहे हैं।
(विभूति फीचर्स)

न्याय में देरी का विश्व रिकार्ड बनाती सबसे बड़े लोकतंत्र की न्यायपालिका

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– मनोज कुमार अग्रवाल 

तीन दशक पहले 1992 के अजमेर सेक्स स्कैंडल में अब बत्तीस साल बाद अदालत का फैसला आया है। इस मामले के आरोपी नफीस चिश्ती, नसीम उर्फ ​​टार्जन जैसे 6 और हैवानों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। दुनिया भर की अदालत और कानून का राज देने वाले विश्व भर की न्याय व्यवस्थाओं में संभवतः हमारी अदालत और न्यायपालिका देरी का विश्व रिकॉर्ड कायम कर रही है। क्या यही है हमारी संविधान और लोकतंत्र की कानून व्यवस्था जिसमें न्याय देने में बत्तीस साल लग जाते हैं? सैकड़ों नाबालिग व बालिग छात्राओं को एक स्कैंडल के तहत फंसा कर यौन शोषण करने के 1992 के बेहद शर्मनाक मामले में तीन दशक बाद निचली अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा का फैसला सुनाना हमारे देश की न्याय व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लगाता है।

राजस्थान का अजमेर ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह और पुष्कर मंदिर की वजह से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।इस धार्मिक शहर की आबोहवा में साल 1990 से 1992 तक कुछ ऐसा हुआ, जो ना सिर्फ भारतीय संस्कृति को कलंकित करने वाला था, बल्कि अजमेर के सामाजिक ताने-बाने पर बदनुमा दाग बन गया। उस वक्त एक स्थानीय दैनिकअखबार में एक ऐसी खबर छपी जिसने सबको हिलाकर रख दिया था।इस खबर में स्कूली छात्राओं को उनकी अश्लील तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करते हुए उनका यौन शौषण किए जाने का पर्दाफाश किया गया था। ”बड़े लोगों की पुत्रियां ब्लैकमेल का शिकार” शीर्षक से प्रकाशित खबर ने पाठकों के हाथों में अखबार पहुंचने के साथ ही भूचाल ला दिया।क्या नेता, क्या पुलिस, क्या प्रशासन, क्या सरकार, क्या सामाजिक धार्मिक नगर सेवा संगठन से जुड़े लोग सब के सब सहम गए।यह कैसे हो गया? कौन हैं? किसके साथ हुआ?
इसके बाद खुलासा हुआ कि एक गिरोह अजमेर के बड़े नाम वाले गर्ल्स स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को फार्म हाउसों पर बुला-बुला कर रेप करता रहा और उन लड़कियों के घरवालों को भनक तक नहीं लगी।रेप की गई लड़कियों में आईएएस, आईपीएस की बेटियां भी शामिल थीं।इस पूरे कांड को अश्लील तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करके अंजाम दिया गया था। पीड़ित लड़कियों की संख्या 100 से अधिक बताई गई थी।इन लड़कियों की उम्र 12 से 20 साल के बीच थी।
बताया गया है कि इस कांड की शुरूआत में सबसे पहले फारूक चिश्ती नामक एक शख्स ने पहले नामी स्कूल की एक लड़की को फंसाया।उसके साथ रेप किया।इस दौरान उसने उसकी अश्लील तस्वीरें खींच ली।इसके बाद वह इन अश्लील तस्वीरों के जरिए उसे ब्लैकमेल करने लगा।उससे स्कूल की दूसरी लड़कियों को बहला-फुसला कर लाने के लिए कहने लगा।मजबूरन वो लड़की अपनी सहेलियों को भी फार्म हाउस ले जाने लगी।उन सभी के साथ रेप और ब्लैकमेल का खेल होता रहा। एक के बाद दूसरी, दूसरी के बाद तीसरी, इस तरह एक ही स्कूल की करीब सौ से ज्यादा लड़कियों के साथ रेप हुआ। घर वालों की नजरों के सामने से ये लकड़ियां फार्म हाउसों पर जाती थीं।उनके लेने के लिए बाकायदा गाड़ियां आती थीं।घर पर छोड़ कर भी जाती थीं। लड़कियों की रेप करते समय तस्वीरें ले ली जाती थीं।इसके बाद डरा-धमका कर और लड़कियों को बुलाया जाता।स्कूल की इन लड़कियों के साथ रेप करने में नेता, पुलिस, अधिकारी भी शामिल थे।
आरोप है कि फारूक चिश्ती रैकेट का सरगना था वहीं इस सेक्स रैकेट में उसके साथ नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती भी शामिल थे। तीनों ही उन दिनों यूथ कांग्रेस के नेता थे। फारूक अध्यक्ष पद पर था।इन लोगों की पहुंच दरगाह के खादिमों तक भी थी।खादिमों तक पहुंच होने के कारण रेप करने वालों के पास राजनैतिक और धार्मिक दोनों ही तरह की शक्तियां थी।रेप की शिकार लड़कियां ज्यादतर हिंदू परिवारों से थीं। रेप करने वाले ज्यादातर मुस्लिम समुदाय थे। इस वजह से पुलिस डरती थी।
आरोप तो यह भी है कि इस कांड के बारे में जानकारी होते हुए भी पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी।उसे डर था कि कही साम्प्रदायिक दंगे न हो जाएं और उस संभालना मुश्किल न हो जाए। धीरे-धीरे इस स्कैंडल के बारे में पूरे शहर को पता चल गया. लड़कियों की अश्लील तस्वीरें हवा में तैरने लगी। जिसे मौका मिलता वो हाथ साफ कर लेता।लड़कियों को ब्लैकमेल करके उनके साथ रेप करता।यहां तक कि निगेटिव से फोटो को डवलप करने वाला टेकनिशियन भी इसमें शामिल हो गया था।
समाज में अपनी बेइज्जती होती देख लड़कियां एक-एक करके खुदकुशी करने लगी।उन्हें इस नर्क से निकलने रास्ता जिंदगी को खत्म करना ही समझ आया क्योंकि परिवार, समाज, पुलिस और प्रशासन तक कुछ नहीं कर रहा था। इस तरह 6-7 लड़कियों की खुदकुशी के बाद मामला संगीन हो गया.।इसी बीच एक पत्रकार संतोष गुप्ता ने इस केस पर सीरीज शुरू कर दी।उनकी खबरों ने पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद तत्कालीन भैरोसिंह सरकार ने इस मामले की जांच सीआईडी-सीबी को सौंपी थी।
पीड़िताओं से आरोपियों की पहचान कराई गई। 30 नवंबर 1992 को अजमेर कोर्ट में पहली चार्जशीट दायर हुई, जिसमें सभी 18 आरोपियों के नाम थे। 1994 में आरोपी पुरुषोत्तम जमानत पर बाहर आया और आत्महत्या कर ली। 18 मई 1998 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पहला फैसला सुनाया। सभी को उम्रकैद की सजा दी। 20 जुलाई 2001 को हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें 4 को बरी कर दिया गया। 19 दिसंबर 2003 को सुप्रीम कोर्ट ने चार दोषियों की उम्रकैद की सजा को 10 साल कर दिया। 20 अगस्त 2024 को स्पेशल पॉक्सो एक्ट कोर्ट (जिला अदालत) ने छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में आरोपी जहूर चिश्ती पर फैसला लंबित है।
हैरानी की बात यह है कि 1992 में हुए इस कांड के बाद पुलिस के लिए आरोपियों को सामने लाना और सबूतों को सहेजकर रखना बहुत बड़ी चुनौती थी. क्योंकि पीड़िताओं ने समाज में बदनामी और दुष्कर्मियों के खौफ की वजह से अपना घर और शहर तक छोड़ दिया था और बतौर सबूत जमा किया गया सामान मसलन बिस्तर और कंडोम इत्यादि बदबू मारने लगे थे।
अभियोजन विभाग के सहायक निदेशक विजय सिंह राठौड़ इस मामले की साल 2020 से पैरवी कर रहे हैं।उनसे पहले करीब 12 अभियोजक बदल चुके।उनके अनुसार इस कांड में 100 से ज्यादा स्कूली छात्राओं को दरिंदों ने अपना शिकार बनाया, लेकिन अभियोजन पक्ष और पुलिस सिर्फ 16 पीड़िताओं को ही गवाही के लिए तैयार कर सकी।आखिरी कुछ गवाही के बाद इनमें से भी 13 पीड़िताओं ने रसूखदार आरोपियों के खौफ से कोर्ट में अपने बयान बदल दिए।ऐसे में अदालत ने पीड़िताओं के पुराने बयानों के आधार पर कार्रवाही की।
अजमेर की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने सनसनीखेज सेक्स स्कैंडल में 6 और लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।इस स्कैंडल में 100 से अधिक लड़कियों के साथ बलात्कार और उन्हें ब्लैकमेल किया गया था। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कोर्ट के जज रंजन सिंह ने हर आरोपी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
यह मामला हमारे देश की न्याय व्यवस्था की लेट लतीफी और अभियोजन की नाकामी का जीता जागता उदाहरण है यह वही न्याय व्यवस्था है जो देश के सबसे नृशंसता भरे निठारी कांड के अभियुक्तों को सत्रह साल की सुनवाई के बाद बरी कर देती है ।आप को याद होगा कि राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी में कम से कम 19 युवतियों और बच्चों के साथ बलात्कार किया गया, उनकी हत्या कर दी गई और उनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे।इस में 2006 में सुरिंदर कोली को 12 लड़कियों के साथ दुष्कर्म व हत्या के लिए आरोपित किया गया था जबकि कोठी मालिक मनिंदर सिंह पंढेर को दो मामलों में अभियुक्त बनाया गया था।
इस कांड के पीछे अंग व्यापार का रेकेट बताया गया। इन हालातों में इस देश की बच्चियों और महिलाओं को यौन विकृत राक्षसों से कौन और कैसे बचाएगा?इसी 18 अगस्त को जोधपुर में एक तीन साल की कूड़ा बीनने वाली मासूम के साथ दरिंदगी की खबर सामने आई तो इसी दिन सीहोर में 63 साल की महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है वहीं बदलापुर में चार साल की दो अबोध स्कूल छात्राओं के साथ दरिंदगी को लेकर बदलापुर महाराष्ट्र उबल रहा है। इन सब हालात के लिए देश की न्याय व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराना गलत नहीं होगा।  (विभूति फीचर्स)

– मनोज कुमार अग्रवाल 

UP-करोड़ो की लागत से गौ आश्रय स्थलों का हो रहा निर्माण

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कानपुर,23 अगस्त । योगी सरकार गौ संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास कर रही है। इसी अभियान के तहत कानपुर नगर जनपद में दो वृहद गौ आश्रय स्थल का निर्माण किया जा रहा है। निर्माणाधीन गौ आश्रय स्थल की क्षमता लगभग साढ़े तीन सौ से अधिक होगी। एक गौ आश्रय स्थल के निर्माण में एक करोड़ बीस लाख रूपए खर्च होगा। यह जानकारी गुरुवार को कानपुर नगर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.आई.डी.एन.चतुर्वेदी ने दी।

उन्होंने बताया कि कानपुर नगर में ग्रामीण क्षेत्र में 135 गौ आश्रय स्थल है और शहर में 7 गौ आश्रय स्थल है। गायों को चारा एवं पानी एवं समय-समय पर उनका उपचार एवं किसी भी बीमारी से बचने के लिए ​टीका समय-समय पर प्रत्येक ब्लाक में तैनात पशु चिकित्साधिकारी देखरेख करते हैं। गौ आश्रय स्थल का संचालन क्षेत्र के ग्राम प्रधान और उसके लिए बनी समिति के सदस्य देखरेख करते हैं।

हरे चारे के लिए गौ आश्रय स्थल के समीप स्थित चारागाह एवं जीएस की जमीन पर नेपियर घास को लगाया जा रहा है। कुछ स्थानों पर तैयार भी हो गई हैं, जिसे गौ वंशजों को दिया जा रहा है। इस तरह कुल 142 गोआश्रय स्थल पशुपालन विभाग की देखरेख में संचालित हो रहा है।

डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि कानपुर नगर में दो वृहद गौ आश्रय स्थल निर्माणाधीन है। दोनों के कार्यों को प्रतिदिन देखा जा रहा है। एक विकासखंड बिल्हौर के नानामऊ गांव में वृहद गौ आश्रय स्थल का निर्माण हो रहा है। दूसरा ककवन ब्लाक के जमालपुर गांव में बनाया जा रह है। दोनों का निमार्ण कार्य होने के बाद यहां गायों को संरक्षण के लिए रखा जाएगा।

गाय को बचाने के चक्कर में पानी में बहे दो शख्स

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पीटीआई, भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में गाय को बचाने के लिए नदी में कूदे एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं वचाव कार्य के लिए आपदा दल के दो कर्मी भी नाव पलटने के कारण पानी में बह गए। लापता कर्मियों का पता लगाने के लिए लगभग 100 बचावकर्मियों को लगाया गया है।

घटना भिंड जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर एक इलाके की है। पुलिस अधीक्षक असित यादव ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि बुधवार शाम को कुंवारी नदी पर बने बांध के गेट में एक गाय के फंस जाने के बाद विजय सिंह ने पानी में छलांग लगा दी। उसे भंवर में फंसा देख उसके चचेरे भाई दिनेश सिंह भदोरिया ने भी उसे बचाने की कोशिश में छलांग लगाई, लेकिन तेज बहाव के कारण वह बह गया।

एसडीईआरएफ की ली गई मदद

अधिकारी ने एजेंसी को बताया कि किनारे पर मौजूद कचोंगरा गांव के स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से विजय को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। नदी के बीच में झाड़ियों में फंसे दिनेश को देखने के बाद, ग्रामीणों ने अधिकारियों को सूचित किया, जिन्होंने उसे बचाने के लिए राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) की मदद मांगी।

एसपी ने बताया कि एसडीईआरएफ की तीन सदस्यीय टीम लाइफ जैकेट पहनकर नदी में उतरी। हालांकि, उनकी नाव पलट गई, जिससे बचावकर्मी पानी के तेज बहाव में गिर गए। कुछ ही देर में बांध के पास तेज बहाव के चलते एसडीईआरएफ के जवान प्रवीण कुशवाहा और हरदास चौहान के लाइफ जैकेट निकल गए और दोनों लापता हो गए। एसपी ने कहा कि उन्हें बचाने के प्रयास जारी हैं।

तलाश में जुटी 100 कर्मियों की टीम

एसपी ने बताया कि एसडीईआरएफ का तीसरा जवान सुरक्षित नदी किनारे जाने में कामयाब रहा। दो लापता जवानों को खोजने का अभियान बुधवार रात को अंधेरे के कारण रोक दिया गया था और यह गुरुवार सुबह फिर से शुरू हुआ। लगभग 100 बचावकर्मी लापता एसडीईआरएफ जवानों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश – यूनिफॉर्म में तैनात रहेंगे गौरक्षक दल

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राजगढ़: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक नवाचार हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बैठने वाले गौवंशों को हटाने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया गया है। कलेक्टर ने इस काम के लिए गौ रक्षक दलों को तैनात करने के निर्देश दिए है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत गौ रक्षक दल टार्च, सीटी, लाठी लेकर सड़कों पर जमा होने वाले आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाने का काम करेंगे।

राजगढ़ कलेक्टर डॉक्टर गिरीश कुमार मिश्रा ने कहा जिले से गुजरने वाले राजमार्गों से आवारा मवेशी को हटाने के लिए गौरक्षक दल तैनात करने के निर्देश दिए हैं। जनपद पंचायतों के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी एवं नगरीय निकायों के अधिकारियों की बैठक लेकर उन्‍होंने कहा कि राजमार्गों के जिन स्‍थानों पर गौवंश एकत्रित होता है, उन स्‍थानों को चिहिंत किया जाएगी। वहां विचरण करने वाले गौंवंश को मार्ग से हटाने की व्‍यवस्‍था की जाएगी।

दुघर्टना का शिकार होने बचेंगे

बैठक में कलेक्‍टर ने कहा कि राजमार्गों पर गौवंश की मौजूदगी रहने के कारण अक्सर सड़क दुर्घटनाएं हो जाती हैं। जिनसे जनहानि के साथ-साथ पशुहानि भी होती है। उन्‍होंने नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों के माध्‍यम से कर्मचारी तैनात कर मार्गों से पशुओं को हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यूनिफॉर्म में तैनात रहेंगे गौरक्षक दल

कलेक्‍टर ने आगे कहा कि पशु हटाने के लिए तैनात होने वाले गौरक्षक दलों को निर्घारित यूनिफॉर्म दी जाएगी। साथ ही उनके पास टॉर्च, सीटी एवं लाठी भी होगी। जिससे वे आसानी से पशुओं को इन मार्गों से हटा सकेंगे। इन गौरक्षक के दलों के सदस्‍यों के फोन नंबर सीधे कंटोल रूम से जुड़े रहेंगे। इससे आवश्‍यकता पड़ने पर उन्‍हे उचित निर्देश दिए जा सकेंगे। साथ ही जरूरी सहयोग भी लिया जा सकेगा।

गौशालाओं की स्थिति को लेकर समीक्षा

कलेक्‍टर ने पशुओं को सड़क से हटाने के लिए पशुपालकों को जागरूक एवं प्रेरित करने के भी निर्देश दिए हैं। बैठक में कलेक्‍टर ने जिले में गौशालाओं की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्‍होंने कहा की जो गौशालाएं दुरूस्‍त नही हैं। उनको दुरूस्‍त कर सक्रिय किया जाएगा। इससे इन गौशालाओं में गौवंश रखे जाने की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था हो सकेगी।

एक्ट्रेस सीमा मीना अभिनीत एलबम “ओ मेरे हमदम” का वीडियो रिलीज

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मुंबई। एक्ट्रेस सीमा मीना अभिनीत एलबम “ओ मेरे हमदम” का ऑडियो और 150 से अधिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया है जिसे लाखों करोड़ों दर्शकों द्वारा पसंद किया गया। 21 अगस्त 2024 को इस एलबम का वीडियो बॉलीवुड के प्रसिद्ध म्यूजिक डायरेक्टर, सिंगर मनमीत सिंह के हाथों रिलीज हुआ। जिसे शाइनिंग स्टार यूट्यूब प्लेटफॉर्म में देखा जा सकता है।

वीडियो रिलीज के अवसर पर निर्माता डॉ निकेश जैन माधानी, डॉ रामकुमार पाल, एक्ट्रेस सीमा मीना सहित पूरी प्रोडक्शन टीम की उपस्थिति रही।
“ओ मेरे हमदम” एलबम के वीडियो में दर्शक सीमा मीना को मनमोहक अंदाज में गिटार बजाते हुए देख सकते हैं जिसके लिए उन्होंने विशेष रूप से ट्रेनिंग ली हैं। एलबम में सीमा के साथ को-एक्टर विपिन सिंह हैं।
इस एलबम के सिंगर आदित्य जैन, कंपोजर मीत ट्यून्स, विराज विधीर, गीतकार मनीष सिंह और डायरेक्टर तान्या थानादार हैं।
मुंबई के जाने माने बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी ने बतौर प्रोड्यूसर रोमांटिक एलबम “ओ मेरे हमदम” का निर्माण किया है।


सीमा मीना ने डॉ निकेश जैन माधानी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने मेरे टैलेंट को पहचाना और अपने एलबम में अवसर देते हुए मुझे लॉन्च किया जो कि मेरे लिए बड़ी खुशी की बात है।
“ओ मेरे हमदम” एलबम को शाईनिंग स्टार और माधानी फाइनेंस एंड इंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
इस एलबम के निर्माण में ब्राइट आउटडोर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के सर्वेसर्वा डॉ योगेश लखानी, सोशल वर्कर डॉ रामकुमार पाल के साथ साथ निशान कुमार का भरपूर सहयोग रहा और मीत ब्रदर्स के साथ उनकी पूरी टीम का भी उत्साहजनक सहयोग प्राप्त हुआ।
इससे पहले सीमा मीना टीवीएस के लिए एड शूट में अमिताभ बच्चन और महेंद्र सिंह धोनी के साथ काम कर चुकी हैं। हाल ही सीमा ने एक एनर्जी ड्रिंक 7 हॉर्स के लिए पोस्टर शूट की है। साथ ही वह कई प्रिंट शूट और पोस्टर शूट में मुख्य भूमिका निभा चुकी है।
राजस्थान सरकार के कार्यक्रम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में ब्रांड एंबेसडर के रूप में एक्ट्रेस सीमा मीना जुड़ी हैं।
आपको बता दें कि सीमा मीणा राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर की रहने वाली हैं। फैशन इंडस्ट्री में वह कई ब्यूटी पेजेंट कंपीटिशन में नए मॉडल को ट्रेनिंग और ग्रूमिंग करती है। इसके अलावा वह एक सोशल वर्कर के रूप में लड़कियों के उत्थान के लिए नियमित कार्य करती रहती हैं और वह अनेक लड़कियों के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं।
सीमा मीणा के उल्लेखनीय सामाजिक कार्यों को देखते हुए उन्हें पिछले दिनों मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के हाथों सम्मान मिल चुका है। इसके अलावा सीमा को फिल्म तेरे नाम की एक्ट्रेस भूमिका चावला के हाथों तमस आईकॉनिक अवॉर्ड्स 2024, फिल्म परदेश की एक्ट्रेस महिमा चौधरी के हाथों ग्लैमर एंड लाइफ स्टाइल अवार्ड 2024 और फिल्म मोहब्बतें की एक्ट्रेस प्रीति झंगियानी के हाथों नेशनल इंपैक्ट अवार्ड 2024 मिल चुका है।
मुंबई में निवासरत मॉडल एक्ट्रेस सीमा मीना के पति आशीष मीना मुंबई में रेलवे में पेशे से इंजीनियर हैं। सीमा एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देने से कभी भी पीछे नहीं हटती। सीमा मीणा FENTA Association की राष्ट्रीय सदस्य है। वह मिसेज एशिया इंडिया 2021 और मिसेज राजस्थान 2023 रह चुकी हैं। सीमा ब्यूटी पेजेंट शो फेश ऑफ गुजरात 2023 और मिस एंड मिसेज सुपर इंडियन मॉडल 2024 में ज्यूरी मेंबर रही हैं।

प्रोड्यूसर डॉ निकेश जैन माधानी निर्मित एलबम “ओ मेरे हमदम” का वीडियो शाइनिंग स्टार चैनल पर हुआ रिलीज

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मुंबई। हाल ही में “ओ मेरे हमदम” अलबम का वीडियो बॉलीवुड के प्रसिद्ध म्यूजिक डायरेक्टर, सिंगर मनमीत सिंह के हाथों रिलीज हुआ। उसी अवसर पर एलबम के निर्माता डॉ निकेश जैन माधानी, सोशलवर्कर डॉ रामकुमार पाल, एक्ट्रेस सीमा मीना सहित पूरी टीम की उपस्थिति रही। मुंबई के जाने माने बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी ने बतौर प्रोड्यूसर और फाइनेंसर रोमांटिक एलबम “ओ मेरे हमदम” का निर्माण किया है। इस एलबम के ऑडियो को 150 से अधिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया जिसे लाखों करोड़ों दर्शकों द्वारा पसंद किया जा रहा है। और अब वीडियो को शाइनिंग स्टार चैनल पर रिलीज किया गया है। इस एलबम में खूबसूरत एक्ट्रेस एवं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसडर सीमा मीना ने अभिनय किया है। “ओ मेरे हमदम” एल्बम में सीमा मीना को मनमोहक अंदाज में गिटार बजाते हुए दर्शक देख सकते हैं। एलबम में सीमा के साथ को-एक्टर विपिन सिंह हैं।

इस एलबम के सिंगर आदित्य जैन, कंपोजर मीत ट्यून्स, विराज विधीर, गीतकार मनीष सिंह और डायरेक्टर तान्या थानादार हैं।
“ओ मेरे हमदम” एलबम को शाईनिंग स्टार और माधानी फाइनेंस एंड इंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
इस एलबम के निर्माण में ब्राइट आउटडोर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के सर्वेसर्वा डॉ योगेश लखानी, डॉ रामकुमार पाल के साथ साथ निशान कुमार का भरपूर सहयोग रहा और मीत ब्रदर्स के साथ उनकी पूरी टीम का भी उत्साहजनक सहयोग प्राप्त हुआ।
डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी बॉलीवुड में कई वर्षों से सक्रिय हैं, इसके पहले उन्होंने कई एल्बम और टीवी शो का निर्माण किया है। साथ ही वह कई प्रोजेक्ट को फाइनेंस भी करते हैं। डॉ निकेश जैन हमेशा नई प्रतिभाओं को मौका देकर प्रोत्साहित करते हैं। इस एलबम में उन्होंने सीमा मीना को लॉन्च किया है जिससे खुश होकर सीमा मीना उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की हैं।

सात हजार हिन्दू मुस्लिम महिलाओं सहित बच्चियों ने रईस लश्करिया को बांधी राखी

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मुंबई। भाई बहन के स्नेह, प्यार और रक्षा का त्योहार रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में जोगेश्वरी इलाके में एआईएमआईएम नवनियुक्त मुम्बई अध्यक्ष रईस लश्करिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लगभग 7 हज़ार हिन्दू, मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें राखी बांधी। कुछ बहनों ने आशीर्वाद दिया तो किसी ने उनके सुनहरे भविष्य की कामना की।

एआईएमआईएम के पूर्व मुम्बई अध्यक्ष को हटाकर रईस लश्करिया को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाया गया है। पत्रकारों से उन्होंने कहा, हमें पूरा यकीन है कि आगामी विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी और हमारे कई विधायक जीत कर आएंगे। हमारे महाराष्ट्र अध्यक्ष इम्तियाज़ जलील महा विकास आघाडी के साथ गठबंधन की पेशकश की है। हमारी पार्टी और महा विकास आघाडी का मसकद वर्तमान सरकार और उसकी सहयोगी पार्टी को हराना है। साथ ही उन्होंने दुख जाते हुए कहा कि बदलापुर और पश्चिम बंगाल की दर्दनाक घटना समाज के लिए कलंक है। बहन बेटियों पर ऐसा अत्याचार असहनीय है। दोषियों पर कड़ी कारवाई होनी चाहिए।
कुल मिलाकर रक्षाबंधन का ये कार्यक्रम शानदार रहा था, लेकिन राजनीतिक गलियारे में ये भी चर्चा है कि मुसलमानों के हित की बात करने वाली पार्टी की अब हिन्दू वोट बैंक पर भी नज़र है।