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लेबनान के पेजर धमाकों से सबक लेना आवश्यक

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मनोज कुमार अग्रवाल 

इजराइल ने हिजबुल्ला के कम्युनिकेशन सिस्टम में घुसपैठ कर तबाही मचा दी है। लेबनान में हजारों पेजर्स और वॉकी-टॉकी में धमाके हुए, इनमें करीब 37 लोगों की मौत हो गई वहीं 3 हजार से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। माना जा रहा है कि मरने वालों और घायलों में ज्यादातर हिजबुल्ला के लड़ाके शामिल हैं।
इस पूरे मामले में सबसे हैरान वाली बात ये है कि जिन देशों से हिजबुल्ला ने पेजर्स और वॉकी-टॉकी खरीदे थे, उन्हें भी इजराइल के इस प्लान की भनक तक नहीं लगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन पेजर्स में धमाके हुए उन पर ताइवान की गोल्ड अपोलो कंपनी का नाम था तो वहीं वॉकी-टॉकी जापान की आइकॉम से निर्मित थे लेकिन इन दोनों ही देशों की कंपनियों की ओर से जो बयान सामने आए हैं वो दिखाते हैं कि इजराइल ने इस प्लान को कितनी चतुरता से एक्जीक्यूट किया है।
एक ओर ताइवान की कंपनी ने गेंद हंगरी की कंपनी के पाले में डाल दी है तो वहीं दूसरी ओर जापान की कंपनी का कहना है कि उसने इन पेजर्स का निर्माण करना एक दशक पहले ही बंद कर दिया था।ताइवान की गोल्ड अपोलो कंपनी के फाउंडर और प्रेसीडेंट से  पेजर ब्लास्ट को लेकर पूछताछ भी हुई। कंपनी के प्रेसीडेंट शू चिंग क्वांग का कहना है कि जिन पेजर्स में धमाके हुए उनका निर्माण उनकी कंपनी ने नहीं बल्कि हंगरी के बुडापेस्ट की कंपनी बीएसई ने किया है, जिसके पास गोल्ड अपोलो के नाम का इस्तेमाल करने का लाइसेंस है। शू के अलावा अपोलो सिस्टम लिमिटेड नामक कंपनी की एक कर्मचारी टेरेसा वु भी जांच में शामिल हुईं। जिनके बारे में कुछ दिनों पहले गोल्ड अपोलो कंपनी के फाउंडर ने बताया था कि कंपनी की ओर से डील में टेरेसा ही उनके संपर्क में थी।
ताइवान सरकार लेबनान में हुए पेजर धमाकों की जांच कर रही है, क्योंकि यह अब तक साफ नहीं हो पाया है कि आखिर लेबनान में जो पेजर पहुंचे उनमें विस्फोटक कब, कहां, कैसे और किसने लगाए। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक उन्होंने जब ताइवान सरकार के जांच अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की तो कोई जवाब नहीं दिया गया। वहीं ताइवान सरकार ने अब तक अपनी जांच को लेकर भी कोई बयान जारी नहीं किया है।
इस मामले में ताइवान जैसा ही हाल जापान का है। लेबनान में जिन वॉकी-टॉकी में धमाके हुए उनमें जापानी कंपनी आइकॉम का नाम प्रिंट था। ये वॉकी-टॉकी IC-V82 मॉडल के थे, लेकिन यहां भी गौर करने वाली बात ये है कि जापान की कंपनी आइकॉम ने कहा है कि उसने इनका निर्माण करीब एक दशक पहले ही बंद कर दिया था। कंपनी का कहना है कि वह इस मामले की जांच कर रही है।आइकॉम के मुताबिक उसने इन नकली निर्माताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की थी और साल 2020 से ही वह नकली मॉडल के ट्रांसीवर्स के बारे में चेतावनी दे रहा था। आइकॉम के मुताबिक इसके कई इलेक्ट्रॉनिक गियर पब्लिक सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन और संयुक्त राज्य डिफेंस और मरीन कॉर्प विभाग को सप्लाई किए हैं।
लेबनान व सीरिया में एक साथ हुए पेजर धमाकों ने लेबनान और सीरिया को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया है। यह नई तकनीक का युद्ध है जो पहली बार प्रयोग किया गया है। दरअसल, तकनीकी तौर पर बेहद उन्नत इसराइली फौज व दुनिया में तहलका मचाने वाली खुफिया एजेंसी मोसाद मोबाइल के जरिये अपने कट्टर दुश्मनों को निशाना बनाते रहे हैं। इसी वजह से ईरान समर्थित हिजबुल्ला के लड़ाके अपनी स्थिति गोपनीय रखने के मकसद से पेजर का इस्तेमाल सूचना संकेतों के लिये करते रहे हैं। बहरहाल पेजर धमाकों की श्रृंखला में लेबनान में अब तक 37लोगों के मरने व करीब पांच हजार लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। लेकिन वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। वहीं सीरिया में भी पेजर धमाकों की श्रृंखला देखी गई।
हालिया घटनाक्रम इजराइल-हिजबुल्ला संघर्ष के चिंताजनक स्थिति में पहुंचने का संकेत देता है। युद्ध में इस तरह की रणनीति का पहली बार दुनिया के सामने खुलासा हुआ है, जिसमें अपने विरोधी देश के संचार उपकरणों को निशाना बनाकर हमला किया गया हो। यह इस क्षेत्र में लंबे समय से जारी संघर्ष में बिल्कुल नई रणनीति को ही दर्शाता है। वहीं हिजबुल्ला की सुरक्षा चक्र की कमजोरियों को भी उजागर करता है। निस्संदेह, हिजबुल्ला ईरान समर्थित लेबनान की एक प्रमुख ताकत है, जो उन्नत इसराइली ट्रैकिंग सिस्टम से बचने के लिये अपेक्षाकृत कम उन्नत तकनीक वाले उपकरण पेजर पर निर्भर रहा है। यही वजह है कि हिजबुल्ला लड़ाकों, चिकित्सकों तथा नागरिकों द्वारा पेजर का उपयोग किया जाता है। बेरूत के दक्षिणी उपनगरों व बेका घाटी सहित लेबनान के कई शहरों में एक एक करके पेजर फट गए। अस्पताल की तरफ भागती सैकड़ों एंबुलेंसों से पूरे लेबनान में भय व असुरक्षा का माहौल बन गया। यहां तक कि सीरिया के कुछ हिस्सों में भी धमाकों की गूंज सुनायी दी, वहां भी हिजबुल्ला के लड़ाके इससे प्रभावित हुए। बहरहाल, लेबनान व सीरिया में सीरियल पेजर धमाकों ने पूरी दुनिया को कई सबक दिए है ।
संकटकाल में अपने संचार नेटवर्क को बाहरी हस्तक्षेप से बचाने के लिये बहुत कुछ किया जाना जरूरी है। विज्ञान व तकनीकी उन्नति ने आज के युद्धों का पूरा स्वरूप ही बदल दिया है। परंपरागत सेना व सुरक्षा की सारी अभेद्य दीवारें तकनीक के हमलों के आगे बेकार साबित हो रही हैं। बहरहाल, इन हमलों के लिये, इजराइली खुफिया एजेंसी पर साजिश करने के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, इजराइल ने इन धमाकों को लेकर कोई दावा नहीं किया है, लेकिन रिपोर्टे बता रही हैं कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान पेजर से छेड़छाड़ करके उन्हें धमाकों के मकसद से ज्वलनशील बनाया गया है। जो एक बड़े सुनियोजित ऑपरेशन की ओर संकेत करता है। जिसमें दूर से सुनियोजित तरीके से विस्फोटों को अंजाम दिया गया। इजराइल ने इन धमाकों के जरिये हिजबुल्लाह को यह संदेश देने का प्रयास किया है कि भले ही वह गाजा संघर्ष में उलझा हुआ है, इसके बावजूद वह दूसरे मोर्चे पर हिजबुल्ला के बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाने की क्षमता रखता है। इजराइल इस समय न केवल हमास बल्कि हिजबुल्ला व हूती विद्रोहियों के हमलों का एकसाथ जवाब दे रहा है।
लेबनान में हुए पेजर और वॉकी टॉकी धमाकों में हैरान करने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जहां एक ओर ताइवान की गोल्ड अपोलो ने पेजर्स निर्माण के लिए हंगरी की एक कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है तो वहीं जापान की टेलीकम्युनिकेशन निर्माता कंपनी आइकॉम का कहना है कि उसने एक दशक पहले ही उन वॉकी-टॉकी का निर्माण बंद कर दिया था जिनमें ब्लास्ट हुए हैं। लेबनान ने अपने दुश्मनों को ऐसी शिकस्त दी है कि उन्होंने हिजबुल्ला के संचार सिस्टम को तबाह कर दिया है। इधर इजराइल की केबिनेट ने हिजबुल्ला के खिलाफ आल आउट वार की मंजूरी दे दी है। (विनायक फीचर्स)

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने सुरू किया गौ ध्वज स्थापना यात्रा

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मन्दिरों की मर्यादा सुरक्षित हो – परमाराध्य जगद्गुरु शङ्कराचार्य
अपने समय में धर्मसम्राट् कहे गए ब्रह्मलीन स्वामी श्री करपात्री जी महाराज ने हम सभी धर्मिकों के लिए धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो,  प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो, गौ माता की जय हो, गौ हत्या बन्द हो के नारे दिए थे; जो आज भी सर्वजनस्वीकृत हैं और गुञ्जयमान हो रहे हैं। पर सचाई यह है कि उन्होंने इन नारों के साथ तीन नारे और दिए थे जिन्हें अब भुला दिया गया है पर वे आज भी प्रासंगिक हैं। उनके और तीन नारे थे- मन्दिरों की मर्यादा सुरक्षित हो। शासन विधान शास्त्रीय हो। भारत अखण्ड हो।
हम आज अयोध्या की पवित्र धरती से इन तीनों नारों को फिर से अपने उदघोषों में सम्मिलित कर रहे हैं और धर्माचार्यों का आह्वान कर रहे हैं कि वे मन्दिरों की मर्यादा सुरक्षित रखने के लिए एकजुट हों। रामालय ट्रस्ट की बैठक बुलाकर हम इस पर चर्चा करेंगे। यदि प्रस्ताव पारित होता है तो रामालय ट्रस्ट विश्व के सभी हिन्दू मन्दिरों की मर्यादा के संरक्षण का काम आरम्भ करेगा।
ज्ञात हो कि रामलय ट्रस्ट समग्र हिन्दू समाज का प्रतिनिधित्व करता है क्योंकि उसमें सभी शङ्कराचार्य, सभी वैष्णवाचार्य, सभी आखड़े और विशिष्ठ जन सम्मिलित हैं ।

अयोध्या में मङ्गलवार को लायेंगे पञ्चगव्य प्राशन फलक

देश भर में तिरुपति लड्डू के बारे में आने वाली सूचनाओं से उन लड्डू को प्रसाद के रूप में खा चुके हिन्दू समाज के लोग ग्लानि का अनुभव कर रहे हैं। उस ग्लानि को मिटाने के लिए पञ्चगव्य प्राशन की व्यवस्था की गई है। पञ्चगव्य न बना सकने की स्थिति वाले लोगों के लिए हमारे गौ सांसद् पं सन्तोष दुबे जी के नेतृत्व में अयोध्या में आगामी मङ्गलवार को पांच स्थानों पर पञ्चगव्य प्राशन फलकों की स्थापना की जाएगी जिससे सहजता से अयोध्या के वे लोग पञ्चगव्य प्राशन कर अपने हृदय की ग्लानि को मिटा सकें।

हमें भाजपा विरोधी कहा जा रहा है पर समझने की जरूरत हैं कि हमारी मजबूरी क्या है?

हमने कभी देश के किसी भी पार्टी का विरोध या समर्थन नहीं किया फिर भी हमारी छवि भाजपा या अन्य पार्टी विरोधी बनाई जाती रही है। हाॅ, हमने भाजपा (जो अनेक वर्षों से केन्द्र और कई राज्यों में सत्ता में है) के कुछ मुद्दों का विरोध किया हैं क्योंकि उन विषयों पर पार्टी और उनके नेताओं द्वारा हिन्दू धर्म के प्रति बड़ी क्षति की जा रही थी जैसे मूर्ति और मन्दिरों को तोड़कर मलबे मे फेकना आदि।

ताजा मामला देख लें गौ हत्या के समर्थन का है। हम जब गौरक्षा/गोप्रतिषठा की बात को लेकर देश के सभी राज्यों के राजधानी की यात्रा कर रहे हैं तो नागालैण्ड भाजपा लिखित रूप से न केवल उसका विरोध कर रही है अपितु अपनी सरकार के कैबिनेट से हमारे नागालैण्ड प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगा रही है और लिखित रूप से गौहत्या का समर्थन कर रही है। यही नहीं, भाजपा के सत्ता में रहते ही भारत विश्व की गोमांस निर्यातक देशों में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। अरुणाचल में हमारी यात्रा का विरोध करने वाला छात्रनेता कह पा रहा है कि शङ्कराचार्य जी गौहत्या रोकने अरुणाचल आएं उससे पहले उत्तर प्रदेश को रोकें जो ऑकडों के अनुसार देश का सबसे बड़ा गोमांस निर्यातक प्रदेश है।

आखिर हम क्या करें ? गौहत्या करने वाले और उसका समर्थन करने वालों का विरोध न करें ? एक हिन्दू धर्माचार्य होने के नाते यह हमसे कैसे हो सकता है ? इसलिए हम भाजपा सहित उन तमाम पार्टियों का विरोध करने के लिए बाध्य हैं जो सत्ता में रहकर भी गौहत्या रोकने के बजाय उसे बढावा दे रही हैं।

हर हिन्दू गोमतदाता बने

अब समय आ गया है कि हर हिन्दू गौमाता के प्राण और उनकी प्रतिष्ठा को बचाने का लिए गोमतदाता बने क्योंकि जिन पार्टियों और नेताओं के भरोसे हम आजादी के 78 साल रहे उन्होंने हमारे भरोसे को तोड़ दिया है। अब मतदाताओं को कमर कसनी होगी और उसी पार्टी और प्रत्याशी को मतदान का सङ्कल्प लेना होगा जो गौमाता के प्राण और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए शपथपूर्वक घोषणा कर चुका हो।

मन्दिरों की चढोत्तरी से हो गौओं की सेवा

मन्दिरों की चढोत्तरी से मन्दिरों में विराजमान देवता की सेवा से बचे पैसों से लोक कल्याण के कार्य होने उचित हैं। उनमें सबसे पहले; जैसे घर में पहली रोटी गाय की होती है वैसे ही पहली सेवा गाय की होनी चाहिए। हर मन्दिर की गौशाला होगी तो न केवल आस-पास के लोगों को रोजगार मिलेगा अपितु शुद्ध दूध, घी आदि भी मिलेगा और उनके गोबर गोमूत्र आदि से उगाए गये शुद्ध अनाज से लोगों का स्वास्थ्य भी ठीक होगा। तिरुपति मन्दिर को इसकी पहल करनी चाहिए और आगे से अपनी गौशाला के घी से ही भगवान् के नैवेद्य का लड्डू बनाना चाहिए।

हमारा आन्दोलन रामा गाय के लिए

हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हमारा यह गौप्रतिषठा आन्दोलन गाय नाम से प्रचलित सभी जानवरों/मवेशियों के लिए नहीं है बल्कि केवल उन गायों के लिए है जो शत-प्रतिशत शुद्ध देसी नस्ल की हैं और सङ्करीकृत नहीं है। उन्हें ही वेदलक्षणा, देसी शुद्ध नस्ल कहा जाता है जिन्हें हमने रामा नाम दिया है। कुल गाय नाम से प्रचलित पशुओं में से उनका प्रतिशत अनुमानतः तीस ही है।

श्रीरामजन्मभूमि की प्राप्ति में सहयोगियों का सम्मान करने हम फिर से अयोध्या आएंगे

श्रीरामजन्मभूमि की प्राप्ति हम हिन्दुओं के पराक्रम और देवसमर्पण की वह गाथा है जो सदियों तक गाई जाएगी। अभी सबका सम्मान नहीं हुआ है। अतः इस विषय पर अनुसन्धान करने के अनन्तर हम पुनः अयोध्या आएंगे और सबका यथोचित सम्मान कर कृतकृत्यता का अनुभव करेंगे।

अभी हमारे बीच में सन्तोष दुबे जी हैं जिन्होंने प्रण किया था कि जब तक भगवान् का घर नहीं बनता हम अपना घर नहीं बनाएंगे। हम इनसे कह रहे हैं कि अब अपना घर बनवाना शुरू करें क्योंकि राम जी का घर बनना आरम्भ हो चुका है। इसके लिए शुरुआती कुछ राशि भी शुभ के रूप में इनको देकर जाएंगे। पं देवीदीन पाण्डेय जी की 11वीं पीढ़ी दिग्विजयनाथ जी यहाँ हैं। रामचन्द्रधर जी यहाँ हैं। हम सबका सम्मान करते हैं।

हम आज राजकोट की परिक्रमा कर रामलला से लेंगे गौरक्षा सामर्थ्य का आशीर्वाद और लखनऊ होते हुए देश के सभी प्रदेशों की राजधानियों में गौ प्रतिष्ठा ध्वज फहराते हुए 26 अक्टूबर को वृन्दावन में भगवान् श्री बिहारी जी का दर्शन कर इस यात्रा का समापन करेंगे।

रामलला से हमारी टेक है। इसीलिए दर्शन नहीं, परिक्रमा कर ही आशीर्वाद मांग रहे

रामजी से हमारी प्रार्थना है –

रामलला हम आएंगे
पर मुख तभी दिखाएंगे
पशु सूची से गौ माता को
हटवाकर दिखलाएंगे।
राष्ट्र माता की शुभ पदवी पर
जब उनको बैठाएंगे।
स्वर्णपात्र में दुहकर “अमृत”
आपको भोग लगाएंगे।
रामलला तब आएंगे
रामलला हम आएंगे।

जयंती : 10 सितम्बर आचार्य पं. श्रीराम शर्मा

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संजय कुमार चतुर्वेदी ‘प्रदीप’ – विनायक फीचर्स

सम्पूर्ण विश्व में शान्ति स्थापित करने हेतु अश्वमेघ यज्ञों की शृंखला शुरू करने वाले युग ऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा का जन्म 10 सितम्बर 1911 को आगरा जनपद के आंवला खेड़ा ग्राम में एक जमींदार ब्राह्मïण परिवार में हुआ था।
बाल्यकाल से ही उनमें आध्यात्म की प्यास थी। दस वर्ष की आयु में उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय जी से गायत्री मंत्र की दीक्षा ग्रहण की और 15 वर्ष की आयु में देवात्मा हिमालय में वास करने वाले योगीबाबा सर्वेश्वरानन्द जी से उनका साक्षात्कार हुआ और आत्मबोध प्राप्त कर उनके निर्देश पर अखण्ड दीपक प्रज्ज्वलित करते हुए 24 लाख गायत्री मंत्र के 25 महापुरश्चरणों की शृंखला प्रारंभ की। साधनाकाल में गाय के गोबर से चुने गये जौ और छाछ ही उनका आहार था। इसी अवधि में उन्होंने कुण्डलिनी तथा पंचाग्नि विद्या की साधना भी पूरी की।

वे किशोरावस्था से ही भारत के स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय रहे और तीन बार कारावास की यात्रा की। सन् 1940 की बसन्त पंचमी के दिन अखण्ड ज्योति मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया जो प्रारंभ में कार्बन पेपर से तैयार हस्तलिखित होती थी और उसे वे स्वयं वितरित किया करते थे।

आज यह पत्रिका विश्व की कुछ ही मासिक पत्रिकाओं में से एक है, जिसमें विज्ञापन स्वीकार नहीं किये जाते तथा बिना लाभ-हानि के सिद्धांत पर इसका प्रकाशन हो रहा है। इस समय इसकी ग्राहक संख्या कई लाख है। इस पत्रिका में आध्यात्म तत्व व दर्शन का शास्त्रोक्त एवं विज्ञान सम्मत प्रतिपादन किया जाता है। 30 जून 1971 को उन्होंने मथुरा छोड़ दिया और एक वर्ष तक हिमालय के दुर्गम स्थानों में अज्ञातवास करते हुए कठिन साधना की।

वहां से लौटकर 1972 में गायत्री जयंती के अवसर पर ऋषियों की परम्परा का शान्ति कुंज हरिद्वार में बीजारोपण किया। यज्ञ विज्ञान और गायत्री महाशक्ति पर अनुसंधान हेतु सुविज्ञ डॉक्टरों एवं वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन करते हुए ब्रह्म वर्चस्व शोध संस्थान की स्थापना की जहां आधुनिकतम उपकरणों से सुसज्जित अद्वितीय प्रयोगशाला है।

30 जनवरी 1990 को बसंत पर्व पर महाकाल का संदेश में उनका संकेत था कि मार्गदर्शक सत्ता द्वारा दिया गया पांच वर्ष का अतिरिक्त समय समाप्त हो रहा है और भविष्य के कार्य सूक्ष्म शरीर द्वारा सम्पादित किये जायेंगे। यह उनके महाप्रयाण की तैयारी थी, 02 जून 1990 को गायत्री जयंती के दिन मां गायत्री का नाम उच्चारित करते हुए उन्होंने शरीर त्याग दिया। श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा इतने वर्ष के जीवन में आध्यात्म दर्शन, गायत्री महाविद्या, यज्ञ विज्ञान और जीवन के विभिन्न पक्षों के ऊपर तीन हजार से अधिक पुस्तकें लिखी गईं। (विनायक फीचर्स)

भक्ति की रसधार राधारानी सरकार

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( मुकेश कबीर-विभूति फीचर्स )

राधारानी सरकार के विषय में कई तरह की धारणाएं हैं।कई लोग उन्हें काल्पनिक भी मानते हैं लेकिन राधा जी को सिर्फ भक्तिभाव से ही समझा जा सकता है। राधारानी का अस्तित्व था या नहीं,उनकी शादी कृष्ण जी से हुई या किसी और से यह सारे प्रश्न निरर्थक हैं क्योंकि भक्ति भाव में तर्क सदैव महत्वहीन हो जाता हैं।उद्धव और गोपी संवाद ऐसा ही है जहां उद्धव जी कृष्ण की वैज्ञानिक व्याख्या करना चाहते हैं लेकिन गोपियों के भक्तिभाव के आगे उन्हें नतमस्तक ही होना पड़ा।राधाजी की जिन्होंने भक्ति की है वे मानते और जानते हैं कि राधा जी ही कृष्ण की अल्हादिनी शक्ति हैं,बिना राधा के कृष्ण का गोपेश्वर बनना संभव नहीं था और कृष्ण युग के महानायक भी नहीं बन पाते क्योंकि बृज की मान्यताओं के अनुसार राधाजी ने श्रीकृष्ण से पहले जन्म इसलिए लिया ताकि वे कान्हा को सामाजिक संरक्षण प्रदान कर सकें।कन्हैया को जो संरक्षण माता यशोदा ने घर में दिया वैसा ही संरक्षण राधा जी ने गोप गोपियों के बीच दिया। राधा जी राजकुमारी थीं इसलिए सब उनकी बात मानते थे।
राधा जी के कारण ही गोपियां श्रीकृष्ण को घेरे रहती थीं और कई अनहोनियों को टालती थीं। हमारे भक्ति साहित्य में तो राधा एक महानायिका बनकर उभरी हैं । राधा जी के बिना कृष्ण की कोई भी लीला पूर्ण नहीं होती।बरसाने की विश्व प्रसिद्ध होली का तो आधार ही राधा रानी हैं,यदि राधा रानी नहीं होती तो बृज की लट्ठमार होली का नाम ही नहीं होता। असल में राधा के अस्तित्व पर सवाल इसलिए भी ज्यादा उठाए गए क्योंकि जयदेव के गीत गोविंद से पहले राधाजी का उल्लेख ज्यादा नहीं मिलता लेकिन शास्त्रों में ज्यादा और कम उल्लेख से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता है। निंबार्क सम्प्रदाय राधारानी को ही इष्ट मानते हैं इसलिए उन्होंने राधा जी की विस्तार से चर्चा की है और जयदेव पर भी इसी संप्रदाय का प्रभाव था इसलिए उन्होंने राधा को केंद्र में रखकर गीत गोविंद की रचना की।
विस्तार से राधारानी का महिमा मंडन गीतगोविन्द से पहले कभी नहीं हुआ इसलिए आम धारणा बन गई कि राधा जी जयदेव की ही कल्पना हैं। वस्तुतः राधा जी सिर्फ कल्पना नहीं इसकी पुष्टि रामकृष्ण परमहंस ने भी की है, उन्होंने तो यहां तक कहा है कि यदि किसी को राधा के अस्तित्व पर संदेह है तो उनकी एकनिष्ठ आराधना और साधना करके देख ले,राधा जी साक्षात प्रकट होने में विलंब नहीं करेंगी और फिर उनका प्रतिप्रश्न है कि यदि राधा जी का अस्तित्व नहीं था तो उनका साक्षात्कार कैसे हो सकता है ? मनोवैज्ञानिक रूप से यह तर्क सारे तर्कों पर भारी है। वहीं भक्ति मार्ग का एक और उदाहरण लें तो वर्तमान में प्रेमानंद जी महाराज भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि उन्होंने राधा रानी के दर्शन किए हैं।यदि इन सबकी बात नहीं भी मानें तो हम स्वयं बृज में जाकर देख सकते हैं जहां हर जगह राधे राधे ही हैं। गीता में कहा गया है कि असत्य की सत्ता नहीं रहती और सत्य को कोई मिटा नहीं सकता, यदि पिछले पांच हजार साल का इतिहास देखें तो राधा का उल्लेख हमें मिलता है और पिछले पांच सौ साल की बात करें तो पूरा बृज ही राधामय मिलेगा। जब मुगल आक्रांता बृज में बैठे हुए थे तब भी कोई राधारानी के अस्तित्व को कोई नकार नहीं पाया और मजे की बात यह है कि जो लोग आज राधारानी के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं वे ही यह भी कहते हैं कि राधा की शादी अयन घोष से हुई है,जब अस्तित्व ही नहीं तो फिर शादी कैसी ? इसलिए ज्यादा तर्क वितर्क में न पड़ते हुए भक्ति भाव से राधा जी को स्वीकार करें ।
राधा जी भक्ति की रसधार हैं,जिनकी कृपा से गोविंद भी प्रेमरस से सराबोर हो जाते हैं। राधारानी तो साक्षात् भक्ति स्वरूपा हैं और भक्ति को विज्ञान कभी नहीं प्राप्त कर सकता यह बात उद्धव और शंकराचार्य जी भी मान चुके थे और आज भी ऐसे भक्तों की कमी नहीं जिन पर राधा रानी ने कृपा बरसाई है, इसलिए तो उनके धाम का नाम ही बरसाना है। जय हो राधारानी सरकार की, राधे राधे…(लेखक गीतकार हैं)

महाराज जी गो संरक्षण व संवर्धन हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं

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गोरक्षपीठाधीश्वर, महंत श्री @myogiadityanath 

जी महाराज आज प्रातः श्री गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित गोशाला में आंध्र प्रदेश से आए पुंगनूर गोवंशों, भवानी और भोलू को दुलराते हुए। महाराज जी गो संरक्षण व संवर्धन हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं।

मास्क टीवी ओ टी टी प्लेटफ़ॉर्म पर फ़िल्म जेम्स एंड ऐलिस की हिंदी में स्ट्रीमिंग .!

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मास्क टीवी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इनदिनों दक्षिण भारत की सुपरहिट फिल्म जेम्स एंड एलिस का हिंदी वर्जन धूम मचा रहा है । सुपरहिट मलयाली फ़िल्म ने स्ट्रीमिंग के साथ ही शानदार प्रदर्शन किया है । इसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है । इस फ़िल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिका में हैं । पृथ्वीराज सुकुमारन सिर्फ दक्षिण ही नहीं बल्कि पूरे भारत के सुपर स्टार भी हैं , उनकी अभिनय क्षमता का लोहा पूरी दुनिया में फैले उनके चाहने वाले , और उनके प्रशंसक मानते हैं।
मास्क टीवी ओ टी टी प्लेटफ़ॉर्म की चैनल प्रोड्यूसर मानसी भट्ट ने बताया की न सिर्फ़ पृथ्वीराज की फ़िल्म जेम्स और एलिस बल्कि सीनियर सुपर स्टार मम्मूटी की भी सुपरहिट फ़िल्म टोपिल जोप्पन को भी हिंदी में टैग प्रोडक्शन ने मास्क टीवी पर प्रसारित कराया है जिसको की दर्शकों का अगाध समर्थन और प्यार मिला था । टैग प्रोडक्शन के प्रोड्यूसर अंजु भट्ट और चिरंजीवी भट्ट ने मास्क टीवी ओ टी टी प्लेटफ़ॉर्म पर इस टोपिल जप्पन का हिंदी रूपांतरण रिलीज कराया था ।
इन दोनों फ़िल्म्स के ज़रिये दर्शक अपने सुपर स्टार्स की फिल्मों का हिंदी में आनंद ले सकेंगे ।
जेम्स एंड ऐलिस में पृथ्वीराज सुकुमारन के साथ वेदिका, सिजॉय वर्गीज़,साई कुमार,किशोर सत्या ,मंजु पिल्लै,सुधीर करमन, विजय राघव के साथ कन्नड़ सुपरस्टार पुनीत राजकुमार को भी स्पेशल अपीयरेंस में दर्शक देख पायेंगे । सुजीत वासुदेव के लेखन , निर्देशन और शानदार सिनेमेटोग्राफ़ी ने जेम्स एंड ऐलिस को एक नया रूप दिया है , जिसे दर्शक खूब सराह रहे हैं ।
वहीं मास्क टीवी ओटीटी पर पूर्व प्रसारित फ़िल्म टोपिल जोप्पन में नायक बने ममूटी के साथ ममता मोहनदास,एंड्रिया जेरेमिया, मैरीकुट्टी, कवियूर पोन्नम्मा रेन्जी पणिक्कर फादर के रूप में, जेम्स अनाक्कट्टिल , सुधीर सुकुमारन,हरिश्री अशोकन,एलान्सिएर ले लोपेज़ साजू नवोदय ,श्रीजीत रवि ,सोहन सीनुलाल,सलीम कुमार, सुरेश कृष्ण,मोहन जोस ,जूड एंथनी जोसेफ,मेघनाथन, आर्या रोहित,सरेशमी बोबन,प्रदीप कोट्टायम,थेस्नी खान ,अक्षरा किशोर,संथाकुमारी ,गोकुलन,रेस्मी अनिल का काम भी ज़बरदस्त है।
टोपिल जोप्पन जॉनी एंथनी के निर्देशन और विद्यासागर के संगीत से सजी एक बेहतरीन फ़िल्म है। टैग प्रोडक्शन के बैनर तले बनी इस फ़िल्म के निर्माता हैं चिरंजीवी भट्ट और अंजु भट्ट । इन दोनों खूबसूरत फिल्मों का आनंद दर्शक इनदिनों खूब उठा रहे हैं जिनमें उनके चहेते सुपरस्टार पृथ्वीराज सुकुमारन और ममूट्टी एक प्लेटफॉर्म पर सुगमता से उपलब्द्ध हैं । इन दोनों फिल्मों का हिंदी रूपांतरण दर्शकों को खूब भा रहा है और इसे स्ट्रीमिंग के बाद ट्रेंडिंग में भी शामिल करा दिया है । यह जानकारी प्रचारक संजय भूषण पटियाला ने दिया ।

विधानसभा चुनाव से पहले CM शिंदे के जीवन पर होगी नाट्य प्रस्तुति

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महाराष्ट्र में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। इस चुनाव को लेकर महाविकास अघाड़ी (एमवीए) और महायुति गठबंधन के बीच चुनावी टकरार जारी है। इस बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के जीवन पर आधारित एक मराठी नाटक और उनके मार्गदर्शक स्वर्गीय आनंद दिघे पर बनी फिल्म की एक कड़ी जल्द रिलीज होने वाली है। मराठी नाटक ‘माला कहि तारि संगयचा आहे- एकनाथ संभाजी शिंदे’ पितृपक्ष के बाद रिलीज होने की संभावना है। वहीं, ‘धर्मवीर मुक्कम पोस्ट ठाणे 2’  इस महीने 27 सितंबर को रिलीज होने वाली है। धर्मवीर का प्रीक्वल मई 2022 में रिलीज किया गया था। आनंद दिखे पर बनी फिल्म में शिंदे और दादा भुसे जैसे मंत्रियों को सकारात्मक रूप में दिखाया गया है। धर्मवीर 2 इस साल अगस्त में रिलीज होने वाली थी, इसका ट्रेलर जून में जारी किया गया था। हालांकि, राज्य के कुछ इलाकों में बाढ़ के कारण इस फिल्म को रिलीज नहीं किया गया था।

निर्देशक-लेखक प्रवीण तारडे ने कहा, “हम राज्य के प्रत्येक थिएटर में इस फिल्म को दिखाएंगे।” मराठी नाटक माला कही तारी संगायचा आहे–एकनाथ संभाजी शिंदे को थिएटर की दुनिया में लोकप्रिय और अनुभवी अशोक सामेल प्रस्तुत करेंगे। समेल ने कहा, “90 मिनट का यह नाटक मुख्यमंत्री शिंदे के चरित्र को “बहुत सकारात्मक रूप से” प्रदर्शित करेगा।” उन्होंने आगे कहा कि एक साधारण ऑटो रिक्शा चालक से मुख्यमंत्री के रूप में उभरे एकनाथ शिंदे 20-22 घंटे काम करते हैं। समेल शिंदे सरकार की मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा, “नाटक में इसका भी जिक्र है कि कैसे अविभाजित शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन के हिस्से के रूप में वोट मांगे, लेकिन बाद में राकांपा और कांग्रेस से हाथ मिला लिया।

समेल ने बताया कि फिल्म को पितृपक्ष के बाद रिलीज किया जाएगा। शिनसेना और राकांपा में विभाजन के बाद से ही महाराष्ट्र की राजनीति का दृश्य ही बदल गया। विधानसभा चुनाव में अधिकतम सीटें जीतना न केवल सत्तारूढ़ पार्टी के लिए बल्कि महाविकास अघाड़ी के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।

बंगलूरू में महिला की हत्या, शव के 30 से ज्यादा टुकड़े किए

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बंगलूरू के मल्लेश्वरम इलाके में एक महिला की हत्या के बाद शव के 30 से ज्यादा टुकड़े कर दिए गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जब महिला के घर में फ्रिज खोलकर देखा तो शव के टुकड़ों को देखकर होश उड़ गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि मल्लेश्वरम इलाके में रहने वाली महिला एक मॉल में काम करती थी। महिला अपने पति से अलग रह रही थी। उसका पति शहर से दूर एक आश्रम में काम करता है।

पुलिस को सूचना मिली कि महिला का घर कई दिनों से बंद है और उसे किसी ने देखा नहीं है। इस पर पुलिस ने महिला के घर पहुंच कर जांच की तो उसकी हत्या की पुष्टि हुई। पुलिस ने घर में रखे फ्रिज से शव के 30 से अधिक टुकड़े बरामद किए।  पुलिस के मुताबिक 29 वर्षीय महिला की हत्या कुछ दिन पहले की गई होगी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमने मृतक महिला की पहचान कर ली है, लेकिन अभी इसका खुलासा नहीं कर रहे हैं।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिम क्षेत्र) एन सतीश कुमार ने कहा कि व्यालिकावल पुलिस थाना क्षेत्र के भीतर एक घर में एक महिला का शव टुकड़ों में कटा हुआ और फ्रिज में रखा हुआ मिला। देखने से लगता है कि यह 4-5 दिन पहले किया गया था। उन्होंने बताया कि डॉग स्क्वाड और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल का दौरा किया और जांच शुरू कर दी।

पुलिस अधिकारी कुमार ने बताया कि शव की पहचान हो गई है। जांच जारी है। जांच के बाद हम और जानकारी देंगे। महिला कर्नाटक में रहती थी, लेकिन मूल रूप से दूसरे राज्य की है। महिला की हत्या की सूचना पर उसका पति भी मौके पर पहुंच गया।

दिल्ली में भी ऐसे ही हुई थी युवती की हत्या
इससे पहले दिल्ली में 18 मई 2022 को श्रद्धा वॉकर की उसके लिव-इन पार्टनर आफताब पूनावाला ने हत्या कर दी थी। पूनावाला ने कथित तौर पर वाकर का गला घोंट दिया था और उसके शरीर के 35 टुकड़े कर दिए। जिन्हें उसने शहर भर में फेंकने से पहले अपने आवास पर लगभग तीन सप्ताह तक 300 लीटर के फ्रिज में रखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय अमेरिका के दौरे पर

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वाशिंगटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय अमेरिका के दौरे पर हैं. इस दौरान वह QUAD की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं. पीएम मोदी ने विलमिंगटन, डेलावेयर में क्वाड शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए शनिवार (स्थानीय समय) को उद्घाटन भाषण में कहा कि चतुर्भुज गठबंधन ‘यहां हमेशा के लिए’ है और ‘किसी के खिलाफ नहीं’ है. उन्होंने चीन के संदर्भ में कहा कि क्वाड के नेता नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और संप्रभुता के सम्मान के पक्षधर हैं. बता दें कि चीन दुनिया में अपना एकतरफा वर्चस्व चाहता है. चीन इस वर्चस्व के लिए अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ साजिश रचता है, खासकर भारत के खिलाफ. चीन को लगता है कि QUAD उसी के खिलाफ बनाया गया है और ऐसा है भी. ऐसे में पीएम मोदी का यह संदेश कई मायनों में अहम है.

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि समूह ‘चल रहे संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान’ चाहता है, क्योंकि यह ऐसे समय में बैठक कर रहा है जब विश्व कई विवादों से जूझ रहा है. पीएम मोदी ने कहा, “साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर क्वाड का एक साथ काम करना पूरी मानवता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. हम किसी के खिलाफ नहीं हैं. हम सभी नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान और सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करते हैं.”

PM मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा ”हमारा संदेश स्पष्ट है- क्वाड यहां रहने, सहायता करने, साझेदारी करने और पूरक बनने के लिए है. मैं एक बार फिर राष्ट्रपति बाइडन और अपने सभी सहयोगियों को बधाई देता हूं. हमें 2025 में भारत में क्वाड लीडर्स समिट आयोजित करने में खुशी होगी. ”

इस साल QUAD सम्मेलन भारत में होने वाला था
बता दें कि इस साल क्वाड लीडर्स समिट पहले भारत में आयोजित होने वाली थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अपने होम टाउन में कार्यक्रम आयोजित करने के इच्छुक थे. यह बाइडन के लिए विदाई शिखर सम्मेलन था, क्योंकि वह अपने कार्यकाल के अंत के करीब हैं.

चीन को QUAD से क्यों लगता है डर
अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2017 में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक व्यवहार का मुकाबला करने के लिए “क्वाड” या चतुर्भुज गठबंधन की स्थापना के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को आकार दिया था. चार सदस्यीय क्वाड या चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता, एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत को बनाए रखने की वकालत करती है. चीन का दावा है कि समूह का उद्देश्य उसके उदय को रोकना है.

 

*देश की समृद्धि के लिए सही नीति और रणनीति का चयन आवश्यक* 

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(डॉ हितेष वाजपेयी-विनायक फीचर्स)
भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में खेती ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में केवल खेती पर निर्भर रहकर समृद्धि हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसके विपरीत, वाणिज्य, यानी व्यापार, उद्योग, और सेवाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करना, देश की आर्थिक प्रगति के लिए अधिक प्रभावी तरीका साबित हो सकता है। 
*1. खेती की सीमाएँ*
*अस्थिर आय:* खेती मुख्य रूप से मानसून, जलवायु, और भूमि की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। इन कारकों में अस्थिरता के कारण किसान अक्सर आर्थिक संकट का सामना करते हैं।
जलवायु परिवर्तन के चलते अनिश्चितताएँ और बढ़ रही हैं।
*कम योगदान:* देश की जनसंख्या में लगभग 50% लोग कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन इसके बावजूद कृषि का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान लगभग 15-20% तक सीमित है।
इससे स्पष्ट है कि खेती से पूरी जनसंख्या का आर्थिक विकास संभव नहीं है।
*प्रौद्योगिकी की कमी:* खेती में नवाचार और तकनीकी प्रगति सीमित है। बड़ी संख्या में किसान आज भी पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उत्पादकता और आय सीमित रहती है।
*2. वाणिज्य का महत्व*
*व्यापक रोजगार के अवसर:* वाणिज्य, उद्योग, और सेवा क्षेत्रों में अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं।  तकनीकी, औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में कौशल के विकास से युवाओं को बेहतर भविष्य की संभावना मिलती है।
*निर्यात और आय:* वाणिज्य के माध्यम से निर्यात बढ़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा का प्रवाह होता है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
*उद्योग और नवाचार:* वाणिज्य और उद्योग नए नवाचारों और प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहित करते हैं। इससे उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार होता है, जो वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करता है।
*वित्तीय समृद्धि:* वाणिज्यिक गतिविधियाँ, जैसे बैंकिंग, बीमा, ई-कॉमर्स और उद्यमिता, देश की वित्तीय प्रणाली को मजबूती प्रदान करती हैं। इसका सीधा प्रभाव सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय पर पड़ता है।
*3. वाणिज्य और कृषि का संतुलन*
यह कहना उचित होगा कि खेती को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता,कृषि अति आवश्यक है लेकिन देश की समृद्धि के लिए *खेती और वाणिज्य* के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
खेती को व्यावसायिक रूप देना, यानी कृषि-उद्योग का विकास करना, एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
कृषि उत्पादों का निर्यात, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों का विस्तार और आधुनिक कृषि तकनीक का उपयोग करके कृषि क्षेत्र को भी वाणिज्यिक गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है।
*4. विकास के उदाहरण*
दुनिया के कई विकसित देश जैसे सिंगापुर, जापान, और दक्षिण कोरिया ऐसे उदाहरण हैं, जिनकी कृषि क्षमता सीमित है, फिर भी वे वाणिज्य, उद्योग और सेवाओं पर आधारित अपनी अर्थव्यवस्था से दुनिया के समृद्ध देशों में गिने जाते हैं।भारत जैसे देश को भी मैन्युफैक्चरिंग, आईटी सेक्टर, स्टार्टअप इकोसिस्टम, और नवीन तकनीकों को बढ़ावा देकर वैश्विक व्यापार में अपनी पहचान बनानी चाहिए। इससे देश की समृद्धि के लिए नए द्वार खुल सकते हैं।
 *केवल खेती पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं*
वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा करने और व्यापक आर्थिक विकास हासिल करने के लिए वाणिज्य, उद्योग, और सेवा क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना अनिवार्य है। हालांकि खेती को पूरी तरह से छोड़ना नहीं चाहिए,परंतु खेती को भी वाणिज्यिक दृष्टिकोण से जोड़कर देश की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है।
(लेखक मध्यप्रदेश भाजपा के प्रवक्ता हैं।)