श्री राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन में महिलाओं की भी रही अविस्मरणीय भूमिका
(डॉ वंदना गांधी-विनायक फीचर्स)
सिया राममय सब जग जानी….। आज भारत ही नहीं बल्कि पूरा लोक ही राममय हो उठा है। करोड़ों भारतवासियों के आराध्य प्रभु श्री राम अपने मंदिर में पुनः विराजित होने जा रहे हैं। करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास फलीभूत होने जा रहे हैं। उत्सव की इस घड़ी में हर गली-मोहल्ले से श्रीराम संकीर्तन की धुन पर लोग मतवाले हो रहे हैं। शहरों और गाँवों की गली-गली श्रीराम के स्वागत में भगवा पताकाओं से सजाई जा रही हैं। सदियों से श्रीराम की प्रतीक्षा कर रही मातृशक्ति के नयनों की आस पूरी हो रही है। राम आएंगे तो अंगना सजाऊँगी, गीत गाने-गुनगुनाने वाले घर-आँगन, चौक-चौबारे को धो-बुहारकर रंगोली संजाने लगे हैं। रामजी के नए परिधान तैयार करा लिए हैं तो किसी ने पालना सज़ा लिया है भोग के लिए लड्डू तैयार हैं, मंदिरों की साज-सज्जा कर पूजा की तैयारी पूरी कर ली गई है। मातृशक्ति अश्रुपूर्ण नयनों से इस समय के साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त कर रही हैं। एक ओर ये अश्रु आनंद के हैं कि हमारे रामलला टेंट-टीनशेड से निकलकर पुनः अपने मंदिर में विराजमान होंगे तो दूसरी ओर ये अश्रु उनके स्मरण में भी हैं जिन्होंने रामलला को पुनः अपने मंदिर में प्रतिष्ठित कराने के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। इन्हीं के सद्प्रयासों से आज हम इतने असीम आनंद के पलों के प्रत्यक्षदर्शी हो पा रहे हैं। निश्चित ही वे भी स्वर्ग से पुष्प वर्षा कर रामलला का स्वागत अवश्य कर रहे होंगे।
श्रीराम जी के विग्रह की पुनर्स्थापना के लिए 500 वर्षों की प्रतीक्षा, संघर्ष और तपस्या के पूर्ण होने के क्षण आ गए हैं। इन क्षणों को असंख्य कारसेवकों के शौर्य, साहस और समर्पण से प्राप्त किया जा सका है। ऐसे में पूरा समाज गौरव से भरा है, जिसने प्राणपण से इस पुण्य कार्य के लिए प्रयास किए हैं। भगवान श्रीराम की पुनर्प्रतिष्ठा के सद्प्रयासों में मातृशक्ति भी बढ़-चढ़कर सम्मलित रही और अपना अतुलनीय योगदान दिया।
1990 के दशक में जब राम मंदिर आंदोलन चल रहा था तब एक महिला ही थीं जिन्होंने सबसे पहले राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में रखा था और वे महिलाएँ ही थीं जिनकी आवाज़ इस आंदोलन का प्रेरक मंत्र बन गई थी। इनमें से एक साध्वी ऋतंभरा जी कहतीं भी हैं- “लंबी प्रतीक्षा का फल है। राम मंदिर विध्वंसकों के आगे हमारा संकल्प जीता। जनता जनार्दन ने असंभव को संभव कर दिया।”
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे आंदोलन में शीर्ष पर भी मातृशक्ति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका में थीं। देशभर में राम मंदिर आंदोलन की अलख जगाने में महिलाओं ने बहुत सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भाजपा की संस्थापकों में से एक रहीं राजमाता विजयाराजे सिंधिया, साध्वी ऋतंभरा और 30 वर्ष की उम्र में सांसद बनी उमा भारती तो आंदोलन के शीर्ष नेतृत्व में ही सम्मिलित थीं। राजमाता विजया राजे सिंधिया का मार्गदर्शन एवं सहायता आंदोलन में संजीवनी का काम कर रही थी। वे भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य रहीं और राम मंदिर आंदोलन की प्रमुख चेहरा बन गई थीं। 1988 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में मंदिर निर्माण के लिए प्रस्ताव लाने वाली राजमाता सिंधिया ही थीं। इसी के बाद राम मंदिर का मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख लक्ष्यों और संकल्पों में शामिल हो गया। भाजपा नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने 1989 में सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली जिसे राजमाता ने पूरा सहयोग दिया। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका विशेष रही और एक प्रमुख नेता के रूप में वे नेतृत्व करने वालों में शामिल थीं। 6 दिसंबर को ऐतिहासिक कारसेवा वाले दिन अयोध्या में रामकथा कुंज के मंच से उन्होंने भी संबोधित किया था।
आंदोलन के उस दौर मे साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती ने देशभर में सभाएं कीं, रामभक्तों में उत्साह जगाने का कार्य किया। वे दोनों आंदोलन की उत्साही युवा चेहरा बन गई थीं। साध्वी ऋतंभरा की प्रेरक और ओजपूर्ण वाणी घर-घर में गूंजने लगी थी। दोनों के भाषण जनमानस में उत्साह भरने और आंदोलन में तेजी लाने में बहुत सफल रहे। साध्वी ऋतंबरा के भाषण सुनने के लिए सभाओं में भारी संख्या में लोग जुटते, इनमें मातृशक्ति भी सम्मिलित रहती। भाषण पूरा होने तक सभी लोग ‘हम मंदिर वहीं बनाएंगे’ का संकल्प लेकर लौटते़। उनके भाषणों के ऑडियो टेप उस समय बहुत अधिक लोकप्रिय थे। दोनों के भाषणों ने समाज जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रामकथा कुंज के मंच से संबोधित करने वालों में साध्वी ऋतंभरा और उमा भारती भी थीं।
आंदोलन का नेतृत्व करने वाली ये प्रमुख महिलाएं ही नहीं बल्कि 1990 के दशक में बड़ी संख्या में महिलाओं ने आगे आकर राम जन्म भूमि आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया था। एक अनुमान के अनुसार 55 हज़ार महिला कारसेवक राम जन्मभूमि में कारसेवा में सक्रिय रहीं थीं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन विश्व हिन्दू परिषद की दुर्गावाहिनी की बहनें उस समय देशभर में भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए राष्ट्र जागरण के कार्य में लगी थीं। नवंबर 1990 और दिसंबर 1992 में कारसेवा में जो माताएं-बहनें नहीं जा सकीं उनका योगदान भी कम नहीं रहा। जाने कितनी मांओं और बहनों ने अपने पिता, पुत्र, पति, भाई के माथे पर तिलक लगाकर बड़ी श्रद्धा और सम्मान से उन्हें रामकाज में अपनी भागीदारी निभाने के लिए गर्व के साथ अयोध्या भेजा जबकि वे जानती थीं कि हो सकता है ये कारसेवक वहां से वापस न लौटें और अपने राम के लिए बलिदान हो जाएं। यहां यह भी स्मरण रखा जाना चाहिए कि तब की परिस्थितियां कैसी प्रतिकूल थीं जब कारसेवकों पर गोलियां तक चलवा दी गई थीं। यह सब जानते हुए भी कारसेवकों को विदा करते समय उनके माथे पर अक्षत-रोली सजाते न तो इन महिलाओं के माथे पर शिकन आई न उनकी आंखों से तनिक अश्रु बहे बल्कि उनके हर्ष और गर्व को देख घर से विदा लेते पुरुषों का उत्साह कई गुना बढ़ जाता था।
मातृशक्ति ने उस समय अयोध्या में उमड़े असंख्य कारसेवकों के भोजन से लेकर दवाइयों तक कोई कमी नहीं आने दी थी। राम काज का व्रत लेकर घरों से निकले कार सेवकों की भोजन आदि आवश्यकताओं की पूर्ति मातृशक्ति ने पूरे देश में स्थान-स्थान पर की। इसमें मातृशक्ति का जोश और भाव देखते ही बनता था। कोई मातृशक्ति कारसेवकों का मार्ग प्रशस्त करती उन्हें पुलिस से छिपते-छिपाते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा देती तो कोई कड़ाके की ठंड में मां और बहन की भूमिका में आकर उन्हें मातृवत अपने घरों में प्रश्रय देतीं। 6 दिसंबर को कार सेवा के दौरान जहानाबाद की तब 32 वर्ष की उन एक महिला वकील ललिता सिंह की कहानी ही पूरे देश की मातृशक्ति के मन की बात कह देती है जो अपने नन्हें शिशु को किसी और को थमा कर गुंबद पर जा चढ़ी थीं। यह भी उल्लेखनीय है कि बाबरी ढांचा ढहाए जाने के मामले के मुख्य आरोपियों में भी तीन महिलाएं थीं। यह भारत भूमि की मातृशक्ति है जो देश, धर्म, समाज की आन-बान पर आ पड़े तो अपनी चिंता छोड़ रणभूमि में उत्तर पड़ती है।
सदियों के अथक संघर्ष के बाद जो आनंद के पल आये हैं उसका उत्सव मनाने के लिए मातृशक्ति ने भी खूब तैयारियाँ की है। इन नयनों ने भगवान राम की सदियों प्रतीक्षा की है। भगवान श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा की मंगल बेला आ गई है। यह एक नये युग का आरंभ है। भगवान श्रीराम का मंदिर हिंदुओं की आस्था का केन्द्र बिंदु है। जब हिन्दू समाज के इस संघर्ष की गाथा कही और लिखी जाएगी मातृशक्ति का उल्लेख उसमें प्रतिष्ठा के साथ होगा।

(विनायक फीचर्स)(लेखिका शिक्षाविद, समाजविज्ञानी एवं कथाकार हैं)
महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस ने किया डॉ. मुस्तफ़ा युसूफ अली गोम को सम्मानित वाग्धारा सम्मान २०२४ दे कर किया सम्मान
महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस ने किया डॉ. मुस्तफ़ा युसूफ अली गोम को सम्मानित
वाग्धारा सम्मान २०२४ दे कर किया सम्मान
मुंबई। दिनाँक १८ जनवरी को वाग्धारा सम्मान समारोह २०२४ का आयोजन मुक्ति सभागार अँधेरी पश्चिम में वाग्धारा संस्थान द्वारा आयोजित किया गया था। मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस जी थे। वाग्धारा के अध्यक्ष डॉ बागीश सारस्वत इसके प्रमुख आयोजक थे।
इस सम्मान समारोह में वाग्धारा के द्वारा चयनित विभूतियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर मुंबई के जाने माने उद्योगपति और समाजसेवी तथा केयर टेकर्स एक्सटीरियर एंड इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. मुस्तफ़ा युसूफ अली गोम को उनके द्वारा किए गए समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए वाग्धारा सम्मान २०२४ महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस के हाथो प्रदान किया गया।
ज्ञात हो कि डॉ. मुस्तफ़ा यूसुफ़ अली गोम, मुंबई के कांदिवली में अंजुमन ए नजमी दाऊदी बोहरा जमात के सचिव हैं। अपनी अंजुमन के माध्यम से वह सामाजिक कार्य भी करते हैं। कोरोना काल में डॉ. मुस्तफ़ा यूसुफ़ अली गोम की संस्था ने बड़े पैमाने पर लोगो की मदद की और कम्युनिटी किचेन के माध्यम से जरूरत मंद लोगो तक खाने और पीने की व्यवस्था करवाई थी। साथ ही साथ डॉ. मुस्तफ़ा यूसुफ़ अली गोम द्वारा शिक्षा , चिकित्सा के क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओ को समय – समय पर मदद और उनका मागर्दर्शन करते रहे है।
उनके अच्छे सामाजिक कार्यों के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें “गऊ भारत भारती” के सर्वोत्तम सम्मान के साथ-साथ केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा पूर्व में वाग्धारा सम्मान से सम्मानित किया है साथ ही साथ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने भी राजभवन में डॉ. बीआर अंबेडकर पुरस्कार देकर सम्मानित किया है। इसके अलावा अन्य बहुत सी सामाजिक संस्थाओ ने उन्हें सम्मानित किया है।
सुप्रसिद्ध समाजसेवी मुस्तफा गोम की कंपनी केयर टेकर्स एक्सटीरियर एंड इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं जो पुरानी ईमारतों के मरम्मत का काम करती है। डॉ मुस्तफा गोम को इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट स्टडीज द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त श्री गोम वर्ल्ड ह्यूमन राईट प्रोटेक्शन कमीशन से भी जुड़ कर देश की सेवा कर रहे हैं।
वाग्धारा सम्मान २०२४ से सम्मानित अन्य लोगो में से सिनेमा से सीमा विस्वास , पत्रकार पराग छापेकर , साहित्य के लिए नन्दलाल पाठक , पत्रकार संपादक नरेंद्र कोठेकर , राजेश बादल , छत्तीगढ़ की ऋतू वर्मा कला के लिए , इत्यादि को सम्मानित किया गया।
वाग्धारा सम्मान २०२४ सम्मान के चयन समिति के अध्यक्ष जयंत देशमुख थे , कार्यकारी अध्यक्ष दुर्गेश्वरी सिंह ‘ महक ‘ ,भार्गव तिवारी , और अन्य इस सम्मान समारोह के सहयोगी रहे।

मायानगरी की रंगीन दुनिया की अदाकारा श्रेया देशमुख
श्रेया देशमुख एक अदाकारा और नृत्यांगना हैं। इनका जन्म और परवरिश महाराष्ट्र के अमरावती में हुयी है और इन्होंने कॉमर्स में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। बचपन से पेंटिंग्स बनाने का इनका शौक रहा है। श्रेया कागज के पन्नों में रंगीन दुनिया का चित्रण करते हुए आज मायानगरी की रंगीन दुनिया की अदाकारा बन गयी है, यह एक अजीब इत्तेफाक ही है। धारावाहिक ‘कबूल है’ और ‘बेहद’ इनके पसंदीदा शो रहे, जिन्हें देखकर इनके मन में भी अभिनय करने का शौक जागा। भरतनाट्यम, कुकिंग और हॉर्सराइडिंग में माहिर श्रेया देशमुख फिल्म, विज्ञापन फिल्म, वेब सीरीज और धारावाहिकों में काम कर रही है। जल्द ही इनकी मराठी भाषा में बनी फिल्म पर्दे पर प्रदर्शित होगी। इन्होंने टेलीविजन शो ‘मेहंदी है रचने वाली’ और ‘ब्रम्हराक्षस 2’ में भी अभिनय किया है। खंडेलवाल ज्वैलरी, स्कॉट आईवियर जैसे कई विज्ञापन में काम कर चुकी हैं और आगे भी कई प्रोजेक्ट्स इनके पास है जिनमें कुछ वेबसीरीज़ भी हैं।
श्रेया देशमुख ने अभिनय की बारीकियों को अपनी मेहनत और लगन से सीखा है। इन्होंने शुरुआत छोटी भूमिकाओं से की और आज मुख्य भूमिका भी कर रही है। इनका कहना है कि जिस चीज को आप बारीकी से अध्ययन करते हुए देखते हो, तो उस कौशल में आपकी योग्यता अधिक बढ़ती है और जब आप उसका अभ्यास करते हैं तो आपके कार्य में परिपक्वता और निपुणता आती है।
श्रेया देशमुख कहती है कि एक कलाकार को अपने कौशल पर विश्वास होना चाहिए ना कि बाह्य प्रदर्शन में, खासकर महिला कलाकारों को अपनी स्वयं की योग्यता और हुनर पर विश्वास होना चाहिए। श्रेया का कहना है कि वह ऐसी भूमिकायें करना चाहती हैं जिसमें उनकी सकारात्मक ऊर्जा दर्शकों तक पहुंचे। जो परिवार के साथ देखने योग्य हो और सारी दुनिया आप पर गर्व कर सके। प्रसिद्धि पाने की महत्वाकांक्षा में आपकी अपनी परछाई और अस्तित्व धूमिल नहीं होना चाहिए। जब भी दर्पण में नज़र टिके आपको आपनी निर्मल और दोषरहित छवि दिखनी चाहिए। इससे आप कभी भी आत्मग्लानि और अवसाद के अंकुश में नहीं फसेंगे।
श्रेया देशमुख का व्यक्तित्व प्रभावशाली है। वह सकारात्मक सोच रखती हैं। उनका कहना है कि हमेशा इंसान को कुछ ना कुछ नया सीखते रहना चाहिए और अपना कौशल बढ़ाना चाहिए। ज्ञान अथाह है, केवल एक जन्म काफी नहीं इसे बटोरने के लिए इसलिए जितना ज्ञान अर्जित कर सको उतना आपके लिए फायदेमंद होगा। सीखने के लिए उम्र की सीमा नहीं होती और ना ही कोई दायरा होता है। आपको जो सीखना है सीख सकते हैं और ज्ञान अर्जित कर सकते हैं। कभी भी अकेलेपन या अपनी हार से थककर या निराश होकर स्थायी नहीं होना चाहिए बल्कि नदी की तरह हर मुसीबत का सामना करते हुए बहते रहना चाहिए। हमेशा कुछ नया ज्ञान या नई सीख अर्जित कर अपने जीवन में नया पड़ाव और खुशी का समावेश करना चाहिए।
श्रेया को अभिनेत्री रेखा, माधुरी दीक्षित,कीर्ती सुरेश, जेनिफर विंगेट का अभिनय पसंद है। श्रेया अपने अभिनय के माध्यम से अपने कौशल और योग्यता को लोगों तक पहुंचना चाहती है। श्रेया अपने कार्य में आगे बढ़ रही है, आगे उनका भविष्य अवश्य उज्ज्वल होगा।
मणिपुर के राज्यपाल ने राजभवन में ‘गौ सेवा’ के साथ मकर संक्रांति की शुरुआत
इंफाल: उत्सव की परंपरा को जीवित रखते हुए, मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने सोमवार को राजभवन में मकर संक्रांति और ‘गौ सेवा’ मनाई। हर्षोल्लासपूर्ण मकर संक्रांति उत्सव के उपलक्ष्य में, राज्यपाल ने राजभवन मणिपुर में एक हार्दिक समारोह में भाग लिया। मकर संक्रांति एक त्योहार है जो सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का जश्न मनाता है, जो सर्दियों के अंत और लंबे दिनों की शुरुआत का प्रतीक है।
उत्सव के हिस्से के रूप में, उन्होंने सूर्य देव को प्रार्थना की और ‘गौ सेवा’ (गाय की सेवा) में शामिल होकर एक सराहनीय कार्य किया, इस अवसर की भावना को अपनाया और सांस्कृतिक समारोहों और सामुदायिक जुड़ाव के प्रति अपने समर्पण का प्रतीक बनाया।
गौ सेवा’ वैदिक संस्कृति और विरासत का एक हिस्सा है जिसमें गायों को भोजन, आश्रय और चिकित्सा देखभाल प्रदान करना शामिल है। राज्यपाल ने इस विश्वास के साथ गाय की सेवा की कि किसी के आसपास गायों की उपस्थिति नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकती है और सकारात्मक ऊर्जा ला सकती है।
एक कलाकार को अपने कौशल पर विश्वास होना चाहिए : श्रेया देशमुख
श्रेया देशमुख एक अदाकारा और नृत्यांगना हैं। इनका जन्म और परवरिश महाराष्ट्र के अमरावती में हुई है और इन्होंने कॉमर्स में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है। बचपन से पेंटिंग्स बनाने का इनका शौक रहा है। श्रेया कागज के पन्नों में रंगीन दुनिया का चित्रण करते हुए आज मायानगरी की रंगीन दुनिया की अदाकारा बन गयी है, यह एक अजीब इत्तेफाक ही है। धारावाहिक ‘कबूल है’ और ‘बेहद’ इनके पसंदीदा शो रहे, जिन्हें देखकर इनके मन में भी अभिनय करने का शौक जागा। भरतनाट्यम, कुकिंग और हॉर्स राइडिंग में माहिर श्रेया देशमुख फिल्म, विज्ञापन फिल्म, वेब सीरीज और धारावाहिकों में काम कर रही है। जल्द ही इनकी मराठी भाषा में बनी फिल्म पर्दे पर प्रदर्शित होगी। इन्होंने टेलीविजन शो ‘मेहंदी है रचने वाली’ और ‘ब्रम्हराक्षस 2’ में भी अभिनय किया है। खंडेलवाल ज्वैलरी, स्कॉट आईवियर जैसे कई विज्ञापन में काम कर चुकी हैं और आगे भी कई प्रोजेक्ट इनके पास है जिनमें कुछ वेबसीरीज़ भी हैं।

श्रेया देशमुख ने अभिनय की बारीकियों को अपनी मेहनत और लगन से सीखा है। इन्होंने शुरुआत छोटी भूमिकाओं से की और आज मुख्य भूमिका भी कर रही है। इनका कहना है कि जिस चीज को आप बारीकी से अध्ययन करते हुए देखते हो, तो उस कौशल में आपकी योग्यता अधिक बढ़ती है और जब आप उसका अभ्यास करते हैं तो आपके कार्य में परिपक्वता और निपुणता आती है।
श्रेया देशमुख कहती है कि एक कलाकार को अपने कौशल पर विश्वास होना चाहिए ना कि बाह्य प्रदर्शन में, खासकर महिला कलाकारों को अपनी स्वयं की योग्यता और हुनर पर विश्वास होना चाहिए। श्रेया का कहना है कि वह ऐसी भूमिकायें करना चाहती हैं जिसमें उनकी सकारात्मक ऊर्जा दर्शकों तक पहुंचे। जो परिवार के साथ देखने योग्य हो और सारी दुनिया आप पर गर्व कर सके। प्रसिद्धि पाने की महत्वाकांक्षा में आपकी अपनी परछाई और अस्तित्व धूमिल नहीं होना चाहिए। जब भी दर्पण में नज़र टिके आपको आपनी निर्मल और दोषरहित छवि दिखनी चाहिए। इससे आप कभी भी आत्मग्लानि और अवसाद के अंकुश में नहीं फसेंगे।
श्रेया देशमुख का व्यक्तित्व प्रभावशाली है। वह सकारात्मक सोच रखती हैं। उनका कहना है कि हमेशा इंसान को कुछ ना कुछ नया सीखते रहना चाहिए और अपना कौशल बढ़ाना चाहिए। ज्ञान अथाह है, केवल एक जन्म काफी नहीं इसे बटोरने के लिए इसलिए जितना ज्ञान अर्जित कर सको उतना आपके लिए फायदेमंद होगा। सीखने के लिए उम्र की सीमा नहीं होती और ना ही कोई दायरा होता है। आपको जो सीखना है सीख सकते हैं और ज्ञान अर्जित कर सकते हैं। कभी भी अकेलेपन या अपनी हार से थककर या निराश होकर स्थायी नहीं होना चाहिए बल्कि नदी की तरह हर मुसीबत का सामना करते हुए बहते रहना चाहिए। हमेशा कुछ नया ज्ञान या नई सीख अर्जित कर अपने जीवन में नया पड़ाव और खुशी का समावेश करना चाहिए।
श्रेया को अभिनेत्री रेखा, माधुरी दीक्षित, कीर्ती सुरेश, जेनिफर विंगेट का अभिनय पसंद है। श्रेया अपने अभिनय के माध्यम से अपने कौशल और योग्यता को लोगों तक पहुंचाना चाहती है। श्रेया अपने कार्य में आगे बढ़ रही है, आगे उनका भविष्य अवश्य उज्ज्वल होगा।
– गायत्री साहू
बालाजी फाउंडेशन द्वारा निःशुल्क नेत्र शिविर में सैकड़ों लोगों को मिला लाभ
मुंबई। मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर बालाजी फाउंडेशन द्वारा 14 जनवरी 2024 को नालासोपारा पश्चिम स्थित यशवंत गौरव रिक्शा स्टैंड के पास सुंदरम प्लाजा में निःशुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में निःशुल्क आंखों की जांच, मोतियाबिंद का ऑपरेशन, चश्में पर 50% की विशेष छूट जैसी कुछ सुविधा संस्था के माध्यम से उपलब्ध की गई। बालाजी फाउंडेशन के संस्थापक दीपक मिश्रा ने बताया कि यह शिविर सभी के लिए रखा। हम मानव सेवा को अपना धर्म समझते हैं इसलिए यह नेत्र शिविर लगाकर मानव सेवा कर रहे हैं और हमारी कोशिश निरंतर जारी रहेगी।

वहीं मिश्रा ने यह भी बताया कि इस शिविर में आंखों की जांच के लिए सुप्रसिद्ध डॉक्टर आनंद जयपुरिया का विशेष योगदान मिला जो कि वसई तालुका में प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक हैं।
इस शिविर में पहुंचकर 140 लोगों ने अपनी आंखों का जांच करवाया और सभी ने हमारे इस छोटे से प्रयास की सराहना की। इस अवसर पर सोशल वर्कर और पत्रकार बंधुओं का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
इसके साथ ही दीपक मिश्रा मदर मेरी स्कूल में रक्त दान शिविर में भी सम्मिलित रहे और सक्रिय भूमिका निभाते हुए रक्तदान भी किये।
डॉ. अशोक खोसला हुए पहले सोहराब पिरोजशा गोदरेज पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित
मुंबई, 16जनवरी, 2024: मुंबई फर्स्ट की भागीदारी में शुरू की गई अग्रणी पहल, सोहराब पिरोजशा गोदरेज पर्यावरण पुरस्कार के सफल लॉन्च के बाद अब गोदरेज इंडस्ट्रीज लिमिटेड और इसकी सहायक कंपनियों ने डॉ. अशोक खोसला को इस पुरस्कार का पहला विजेता घोषित किया। मुंबई में आयोजित इस पुरस्कार समारोह में पर्यावरण तथा वहनीयता के क्षेत्र में डॉ.अशोक खोसला के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की गई।
अग्रणी पर्यावरणविद् डॉ. अशोक खोसला ने अपने प्रयासों से न केवल देश में बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। वह अपने विस्तृत करियर के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड, राष्ट्रीय पर्यावरण बोर्ड और देश के कैबिनेट की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद से जुड़े रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, खोसला ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की, साथ ही उन्होंने 1965 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पर्यावरण पर पहले विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, 1972 में एक विकासशील देश में पर्यावरण के लिए पहली सरकारी एजेंसी का नेतृत्व किया और 1983 में वहनीय विकास से जुड़ा पहला सामाजिक उद्यम स्थापित किया।
इस मौके पर, गोदरेज इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, नादिर गोदरेज ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा, “हमें डॉ. अशोक खोसला को पहला सोहराब पिरोजशा गोदरेज पर्यावरण पुरस्कार देने की घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है। उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियां और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के प्रति समर्पण का प्रभावशाली असर हुआ, और वह वास्तव में इस पुरस्कार की मूल भावना का प्रतीक हैं। हम उनकी उपलब्धियों का सम्मान करते हुए पर्यावरण से जुड़े मुद्दों और वहनीयता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जारी रखने के लिए प्रेरित हैं।”
पुरस्कार समारोह के मुख्य वक्ता, डॉ. रघुनाथ माशेलकर, एफआरएस, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के पूर्व अध्यक्ष और सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “पर्यावरण के क्षेत्र के अग्रदूत, एस. पी. गोदरेज के नाम पर घोषित यह पुरस्कार सबसे पहले पर्यावरण के क्षेत्र में किंवदंती बन चुके, डॉ. अशोक खोसला को दिया जाना और इस मौके पर आयोजित इस अनोखे समरोह में भाग लेना बेहद सौभाग्य की बात है।“
पहले एस. पी. गोदरेज पर्यावरण पुरस्कार पाने वाले डॉ.अशोक खोसला ने इस पर खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, “मैं इस साल का पर्यावरण से जुड़ा एस. पी. गोदरेज पुरस्कार प्राप्त कर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मेरे संगठन, डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स ने गोदरेज इंडस्ट्रीज लिमिटेड और इसकी सहायककंपनियों के साथ कई पर्यावरण तथा आजीविका से जुड़े मुद्दों पर काम किया है। एक वैज्ञानिक के रूप में मेरा मानना है कि पृथ्वी और मानव की सहजीविता से जुड़े सामूहिक दृष्टिकोण को हासिल करने के लिए नवोन्मेष महत्वपूर्ण है। डीए में, वर्षों से मैंने और मेरी टीम ने इस तालमेल को हासिल करने की कोशिश की है। मेरा योगदान मामूली है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि यह पुरस्कार युवाओं को पृथ्वी और हम मनुष्यों सहित सभी प्रजातियों की रक्षा की दिशा में ठोस बदलाव लाने के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करेगा।”
मुंबई फर्स्ट के उपाध्यक्ष, श्री रोजर सी.बी. परेरा ने कहा, “श्री एस. पी. गोदरेज महान व्यक्तित्व थे और अपने समय से बहुत पहले पैदा हुए थे! उन्होंने अपना पूरा जीवन, अपना समय और अपनी प्रतिभा को पर्यावरण के हित में समर्पित कर दिया। हमारे निर्णायक मंडल ने पहले पुरस्कार के लिए बेहतरीन चयन किया है, जिसके तहत सोहराबजी की तरह ही एक पर्यावरण योद्धा, डॉ. अशोक खोसला को पुरस्कार दिया जा रहा है, जो 1965 से ही न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर काम कर रहे है।“
इस पुरस्कार को पहले साल ही शानदार प्रतिक्रिया मिली। पुरस्कार के मूल्यांकन मानदंड में प्रभाव, नेतृत्व, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के प्रति प्रतिबद्धता, सामुदायिक जुड़ाव, नवोन्मेषी दृष्टिकोण, जागरूकता के प्रसार के प्रयास, पहल के विस्तार की संभावना, शैक्षणिक प्रसार और विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण जैसे कारक शामिल थे।
गोदरेज इंडस्ट्रीज लिमिटेड और इसकी सहायक कंपनियां अशोक खोसला को हार्दिक बधाई और इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी व्यक्तियों और संगठनों के प्रति आभार व्यक्त कर रही हैं। सोहराब पिरोजशा गोदरेज पर्यावरण पुरस्कार वहनीय और पर्यावरण के प्रति जागरूक भविष्य तैयार करने के प्रति गोदरेज की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
ऋतिक रोशन, दीपिका पादुकोण और अनिल कपूर स्टारर फिल्म ‘फाइटर’ का ट्रेलर हुआ रिलीज
मुम्बई। भारत की सबसे बड़ी एरियल एक्शन फिल्म ‘फाइटर’ के बहुप्रतीक्षित ट्रेलर के रिलीज होते ही प्रत्याशा नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है। सिद्धार्थ आनंद द्वारा निर्देशित और मार्फ्लिक्स पिक्चर्स के सहयोग से वायकॉम18 स्टूडियो द्वारा प्रस्तुत, ‘फाइटर’ देशभक्ति की भावना के साथ एड्रेनालाईन-पंपिंग एक्शन सीक्वेंस के रोमांचक संयोजन के साथ सिनेमाई एक्सीलेंस को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है, जो मनोरंजन का एक परफेक्ट मेल पेश करता है।
बेहतरीन स्क्रिप्ट और ऋतिक रोशन, दीपिका पादुकोण और अनिल कपूर के दमदार अभिनय के साथ, ‘फाइटर’ का ट्रेलर दर्शकों को इंडियन एयर फोर्स की स्पेशल यूनिट – एयर ड्रैगन्स के साथ एक एपिक यात्रा पर ले जाता है। स्क्वाड मेंबर्स खतरों का सामना करते हुए हमारे आसमान और देश की सुरक्षा के मिशन पर निकलते हैं। ट्रेलर इन हीरोज के दोस्ती, साहस और बलिदान को खूबसूरती से दर्शाता है, जिससे ‘फाइटर’ सभी पीढ़ियों के लिए एक मस्ट वॉच फिल्म बन गई है।
ट्रेलर, जो रिलीज हो चुका है, जबरदस्त सीन्स और दिल थाम देने वाले पलों से भरे एक स्टनिंग विजुअल ट्रीट का वादा करता है। 3डी और 3डी आईमैक्स प्रारूपों में शानदार विजुअल इफेक्ट्स से भरपूर, ‘फाइटर’ दर्शकों के लिए पूरी तरह से एंटरटेनमेंट से भरपूर होने की गारंटी देता है।
भारत के 75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर खास 25 जनवरी, 2024 की शाम सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली ‘फाइटर’ एक सिनेमाई ट्रीट है जिसे दर्शक मिस नहीं कर सकते। फिल्म भारतीय सिनेमा में एक नया स्टैंडर्ड सेट करने का वादा करती है। साहस, बलिदान और विजय की यात्रा के साथ ‘फाइटर’ सिनेमाई एक्सीलेंस की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
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