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Ssan Music, Ssan मीडिया और एंटरटेनमेंट का एक प्रभाग है

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सुप्रसिद्ध जाने माने पत्रकार , साहित्यकार , गऊ भारत भारती के संस्थापक फिल्म और म्यूजिक निर्माता संजय अमान के द्वारा संचालित सान म्यूजिक SSAN MUSIC कंपनी तेजी से उभरती हुई एक भारतीय म्यूजिक कंपनी है। जिसने नए कलाकारों के लिए यह एक अच्छा मंच तैयार किया है।
कंपनी ने अभी हाल ही में कुछ नए कलाकारों के भोजपुरी लोकगीतों को रीलिज किया है। जो काफी लोकप्रिय हो रहे है।

Ssan Music, Ssan मीडिया और एंटरटेनमेंट का एक प्रभाग है, और इसका स्वामित्व संजय आर. शर्मा (संजय अमान) के पास है। कंपनी की स्थापना 1997 में अपने हर क्षेत्र में अपनी लचीलापन साबित करने की दृष्टि से की गई थी। Ssan Music संगीत सेवा प्रदाताओं की श्रेणी में शामिल हो गया है और भारत के संगीत पर एक अमिट छाप छोड़ रहा है। कंपनी का लक्ष्य अपने सभी श्रोताओं और दर्शकों को सभी शैलियों के जादुई गीत और मधुर रचनाएँ प्रदान करना है। कंपनी स्थायी संगीत देने का वादा करती है। शुरुआत करने के लिए कंपनी अपने दर्शकों को कुछ एल्बमों के साथ उत्तम संगीत देने की तैयारी कर रही है… तो बने रहें और विशिष्ट सामंजस्य और लय के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को लगातार देखें और सब्सक्राइब करें। इस चैनल की मैनेज और सीईओ कृतिका संजय शर्मा हैं।

कलियों का चमन फेम मेघना नायडू की उपस्थिति में आरोही एक्टिंग इंस्टिट्यूट का हुआ शुभारंभ

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आगरा। उत्तरप्रदेश के प्रसिद्ध शहर आगरा में आरोही इंस्टिट्यूट ऑफ एक्टिंग फॉर फिल्म एंड टेलीविजन का शुभारंभ मारुति सिटी रोड, ऑल सेंट स्कूल, शमशाबाद रोड पर शुक्रवार को हुआ। उद्घाटन फ़िल्म अभिनेत्री मेघना नायडू, टीवी स्टार ऋषिका सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू भदौरिया ने फीता काट कर संयुक्त रूप से किया।

प्रबंधक अमित तिवारी ने बताया कि आगरा की प्रतिभा पंख देने के लिए एक्टिंग इंस्टिट्यूट की शुरुआत हुई है। बच्चे को अब अपने परिवार को छोड़ कर मुंबई नहीं जाना होगा वो अपने शहर में रहकर अनुभवी कलाकारों से अभिनय की बारीकियां सीख पाएगा।

अभिनेत्री मेघना नायडू ने कहा कि ताजनगरी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आरोही इंस्टिट्यूट खुलने से शहर को नए कलाकार मिलेंगे। पार्श्व गायक शंकर साहनी ने कहा कि इंस्टिट्यूट में मुंबई के प्रोफेशनल टीचर्स द्वारा बच्चो को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान, किशन सिंह शाक्य, अरुण शर्मा, नितिन कोहली, दीपक अग्रवाल, कपिल सिंघल, मनीष चोपड़ा, अरविंद सिंह, दीपक सरीन, रवि तिवारी आदि मौजूद रहे।

मुंबई में फ्रीमैसन्स हॉल में लगी आग

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मुंबई के फोर्ट इलाके में फ्रीमैसन्स हॉल में आग लग गई है. घटना की जानकारी दमकल विभाग को दी गई जिसके बाद दमकल की चार गाड़ियों को मौके पर भेजा गया. दमकलकर्मी आग बुझाने के काम में जुटे हुए हैं. यह घटना शनिवार को दोपहर के वक्त हुई है. बिल्डिंग से लोगों को बाहर भागते हुए भी देखा गया है.

अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और ना ही किसे के हताहत होने की जानकारी मिली है. घटना का वीडियो सामने आया है जिसमें बिल्डिंग से आग की लपटें निकल रही हैं. बिल्डिंग से लोग बैग लेकर बाहर निकलते भी दिख रहे हैं. काफी शोरशराबे की भी आवाजें आ रही हैं.

न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक मामले में बड़ा खुलासा

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महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर द्वारा ब्रांच की तिजोरी लूटने की घटना सामने आई है। न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पूर्व महाप्रबंधक ने बैंक के खजाने से 122 करोड़ रुपये निकाल लिए। आरोपी पूर्व जनरल मैनेजर का नाम हितेश प्रवीणचंद मेहता है।

आरोपी हितेश मेहता हिरासत में

हितेश मेहता बैंक के महाप्रबंधक थे तो वे दादर और गोरेगांव ब्रांच की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वहीं, अब आरोपी हितेश मेहता को हिरासत में ले लिया गया है। EOW की टीम ने मुंबई से हिरासत में लिया है। हितेश मेहता को पूछताछ के लिए EOW मुख्यालय लाया गया है।

पुलिस ने दर्ज किया केस

उस समय यह बात सामने आई थी कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए दोनों शाखाओं के खातों से 122 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने इस मामले में बैंक के मुख्य लेखा अधिकारी द्वारा दादर थाने में दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया।

साल 2020 से 2025 के बीच हुआ घोटाला

पुलिस को संदेह है कि हितेश और एक अन्य व्यक्ति इस घोटाले में शामिल हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मामले को आगे की जांच के लिए EOW में ट्रांसफर किया गया है। शिकायत के मुताबिक, यह घोटाला 2020 से 2025 बीच हुआ है। दादर पुलिस ने इस संदर्भ में BNS की धारा 316(5) और 61(2) के तहत FIR दर्ज की है।

RBI ने बैंक में हैराफेरी के मामले में की कार्रवाई

बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के खिलाफ कार्रवाई की है। बैंक कर्मचारियों द्वारा धन की हेराफेरी के आरोपों के कारण कार्रवाई की गई है। मुंबई स्थित इस बैंक के 1.3 लाख जमाकर्ताओं में 90 प्रतिशत से अधिक के खातों में पांच लाख रुपये तक जमा हैं। ऐसे में वे जमा बीमा के माध्यम से अपना पूरा धन हासिल कर सकेंगे।

RBI बैंक खातों की जांच में पाईं थी खामियां

सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के खातों की जांच में कुछ खामियां पाई थी। इसके बाद बैंक के मुख्य अनुपालन अधिकारी (सीसीओ) ने गुरुवार को मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि यह मामला बैंक के कुछ कर्मचारियों द्वारा धन के दुरुपयोग से जुड़ा है। हालांकि, उन्होंने कुल राशि या इसमें शामिल लोगों की पहचान का खुलासा नहीं किया।

 

लव जिहाद’ और जबरन धर्मांतरण पर सख्त कानून – शाह के साथ फडणवीस की मीटिंग

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मुंबई: महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार अब लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के कानून को और सख्त करने की तैयारी में है। सरकार ने ऐसे मामलों के खिलाफ नए कानून के अध्ययन करने के मकसद से राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में महिला एवं बाल कल्याण, अल्पसंख्यक मामले, विधि एवं न्यायपालिका, सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग के सचिव और गृह विभाग के उप सचिव शामिल हैं।

शुक्रवार देर रात जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, यह समिति राज्य में मौजूदा स्थिति का अध्ययन करेगी और लव जिहाद एवं जबरन धर्मांतरण की शिकायतों से निपटने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों के संबंध में सुझाव देगी। यह समिति कानूनी पहलुओं और अन्य राज्यों में बनाये गये कानूनों पर भी विचार करेगी। इसके साथ ही वह जबरन धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को रोकने के लिए कानून की सिफारिश करेगी।

दिल्ली में अमित शाह के साथ फडणवीस की मीटिंग

इससे पहले शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र सरकार से राज्य के सभी पुलिस आयुक्तालयों में तीन नए आपराधिक कानूनों को जल्द से जल्द लागू करने को कहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। महाराष्ट्र में आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर यहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार को नए आपराधिक कानूनों के अनुसार अभियोजन निदेशालय बनाना चाहिए। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने क्रमशः औपनिवेशिक युग की भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 का स्थान लिया है। ये नए कानून पिछले साल एक जुलाई से लागू हुए।

अमित शाह ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र सरकार को जल्द से जल्द राज्य के सभी आयुक्तालयों में नए आपराधिक कानूनों को लागू करना चाहिए।’’ बैठक में राज्य में पुलिस, जेल, अदालतों, अभियोजन और फोरेंसिक से संबंधित विभिन्न नए प्रावधानों के कार्यान्वयन और मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री को राज्य में नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन की द्वि-साप्ताहिक समीक्षा करनी चाहिए, जबकि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को साप्ताहिक समीक्षा करनी चाहिए। (भाषा)

उद्धव ठाकरे के लोग रोज छोड़ कर जा रहे – आशीष शेलार

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मुंबई: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में बड़ी फूट पड़ सकती है। महाराष्ट्र सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी और संस्कृतिक और मंत्री  आशीष शेलार ने दावा किया कि कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के कई लोग उनके संपर्क में हैं।  वहीं उन्होंने एकनाथ शिंदे की सेना द्वारा ऑपरेशन टाइगर चलाने के दावे को भी सही ठहराया और कहा कि इसमें गलत क्या है? उद्धव ठाकरे के कई नेता एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। वहीं आदित्य ठाकरे को लेकर आशीष सेलार ने कहा कि वे मुंबई के नेता नहीं बन सकते, मुंबई उनके हाथ में अब नहीं रही।

उद्धव ठाकरे के लोग रोज छोड़ कर जा रहे

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी ऑपरेशन टाइगर चला रही है, इस का उत्तर देते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता शेलार ने कहा कि इसमें गलत क्या है? शिंदे अपने दल को बड़ा करना चाहते हैं, उनका स्वागत है। उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी की बढ़ाएं उनको शुभकामनाएं।आशीष शेलार ने कहा कि कांग्रेस में आपस में सामंजस्. नहीं है, उद्धव ठाकरे के लोग रोज छोड़ कर जा रहे हैं, उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी में सामंजस्य बनाएं, शरद पवार एकनाथ शिंदे का स्वागत कर रहे हैं तो उद्धव ठाकरे को तकलीफ है।

मुंबई भी उनके हाथों से जाने वाली है

आशीष शेलार कहा कि आदित्य ठाकरे मुंबई के नेता बन जाएं तो बहुत है। मुंबई भी उनके हाथों से जाने वाली है। अब मुंबई बचेगी क्या? यह सवाल उठ रहा है। एकनाथ शिंदे ने जो कहा कि उन्हें हल्के में मत लीजिए। पूरा इशारा उद्धव ठाकरे मातोश्री की तरफ है। हर बार एकनाथ शिंदे को रोकने का प्रयास उद्धव ठाकरे करेंगे तो इसलिए उन्होंने बोला कि उन्हें हल्के में मत लो। महाराष्ट्र के मंत्री ने कहा कि बहुत सारी पार्टियों के लोग बहुत सारे लोगों उनके संपर्क में है। उद्धव ठाकरे के बहुत से ऐसे लोग हैं जो उनके संपर्क में हैं।

रणबीर इलाहाबादिया पर लिया जा रहा एक्शन

वहीं यूट्यूबर रणबीर इलाहाबादिया को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार काफी सख्त है। आशीष शेलार कहा कि रणवीर इलाहाबादिया के साथ  जो लोग हैं उनके ऊपर कारवाई की जा रही है।  FIR रजिस्टर किया गया है। जांच भी चल रही है। कल मंत्रालय में खुद उन्होंने बैठक ली है । मराठी थिएटर में भी इसी प्रकार की कार्यक्रम हो रहे हैं।कांदे पोहे नाम के कुछ कार्यक्रम चल रहे हैं।वो सेंसर की परमिशन नहीं लेते। थिएटर में टिकट बेचकर कार्यक्रम कर रहे और वह भी अश्लील है। उनके ऊपर भी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

राष्ट्रपति ने बीआईटी मेसरा के प्लेटिनम जयंती समारोह में भाग लिया

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज झारखंड के रांची में बीआईटी मेसरा के प्लेटिनम जयंती समारोह में भाग लिया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा युग प्रौद्योगिकी का युग है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई प्रगति ने हमारे जीवन जीने के तरीके को बदल दिया है। कल तक जो अकल्पनीय था, वह आज वास्तविकता बन गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष और भी परिवर्तनीय होने जा रहे हैं, क्योंकि विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में दूरगामी प्रगति की आशा है। उन्होंने कहा कि एआई तेजी से अर्थव्यवस्थाओं को बदल रहा है, इसलिए भारत सरकार उभरते परिदृश्य पर प्रतिक्रिया देने में तत्पर रही है। उच्च शिक्षा संस्थानों में एआई को एकीकृत करने के लिए कई पहल की जा रही हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रौद्योगिकी समाज में व्यापक स्तर पर व्यवधान भी उत्पन्न करती है, इसलिए हमें वंचति समूहों पर इसके प्रभाव के बारे में चिंतित रहना चाहिए। जिन शानदार अवसरों का सृजन किया जा रहे है, वे सभी के लिए उपलब्ध होने चाहिए और वर्तमान में जारी इन महत्वपूर्ण परिवर्तनों से सभी को लाभ मिलना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि अक्सर हमारे आस-पास की समस्याओं के लिए किसी बड़े तकनीकी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने युवाओं को छोटे पैमाने के पारंपरिक समाधानों के महत्व को न भूलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नवोन्मेषकों और उद्यमियों को पारंपरिक समुदायों के ज्ञान के आधार को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि यह प्लेटिनम जुबली- इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और संबद्ध क्षेत्रों में शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में बीआईटी मेसरा के योगदान का उत्सव मनाने और उसे सम्मानित करने का एक उपयुक्त अवसर है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि यह संस्थान कई क्षेत्रों में अग्रणी रहा है। देश में अंतरिक्ष इंजीनियरिंग और रॉकेट्री का पहला विभाग 1964 में यहीं स्थापित किया गया था। इंजीनियरिंग उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले विज्ञान और प्रौद्योगिकी उद्यमिता पार्क (एसटीईपी) की स्थापना भी 1975 में यहीं की गई थी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बीआईटी मेसरा भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के निरंतर विकास में समृद्ध योगदान देना जारी रखेगा।

आधा भारत संगम में लगा चुका है आस्था की डुबकी

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प्रयागराज की धरती पर बीते 13 जनवरी से आयोजित दिव्य-भव्य धार्मिक, सांस्कृतिक समागम ‘महाकुंभ 2025’ अब इतिहास रच चुका है. यहां अबतक 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में सनातन आस्था की पावन डुबकी लगाई है. 50 करोड़ से अधिक की यह संख्या किसी भी धार्मिक, सांस्कृतिक या सामाजिक आयोजन में मानव इतिहास की अबतक की सबसे बड़ी सहभागिता बन चुकी है. इस विराट समागम का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया में केवल भारत और चीन की जनसंख्या ही यहां आने वाले लोगों की संख्या से अधिक है.

अमेरिका, रूस और पाकिस्तान जैसे देशों की जनसंख्या कितनी है?

यूएस सेंसस ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया के 200 से अधिक देशों में जनसंख्या के दृष्टिकोण से टॉप 10 देशों में क्रमश: भारत (1,41,93,16,933), चीन (1,40,71,81,209), अमेरिका (34,20,34,432), इंडोनेशिया (28,35,87,097), पाकिस्तान (25,70,47,044), नाइजीरिया (24,27,94,751), ब्राजील (22,13,59,387), बांग्लादेश (17,01,83,916), रूस (14,01,34,279) और मैक्सिको (13,17,41,347) शामिल हैं. वहीं महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की अबतक की संख्या (50 करोड़ पार) को देखा जाए तो केवल भारत और चीन की जनसंख्या ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं से अधिक है. जबकि अमेरिका, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, नाइजीरिया, ब्राजील, बांग्लादेश, रूस और मैक्सिको की जनसंख्या भी इससे कहीं पीछे है. ये दिखाता है कि महाकुम्भ अब केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह सनातन धर्म के विराट स्वरूप का प्रतीक बन चुका है.

सीएम योगी की उम्मीदों से भी पार पहुंच चुका है श्रद्धालुओं का आंकड़ा

मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य मां सरस्वती के पवित्र संगम में श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत साधु-संतों, श्रद्धालुओं, कल्पवासियों, स्नानार्थियों और गृहस्थों का स्नान अब उस शिखर के भी पार पहुंच गया है, जिसकी महाकुंभ से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उम्मीद जताई थी. सीएम योगी ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार जो भव्य और दिव्य महाकुम्भ का आयोजन हो रहा है वह स्नानार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा. उन्होंने शुरुआत में ही 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई थी. बता दें कि उनका यह आंकलन बीते 11 फरवरी को ही सच साबित हो गया था. वहीं शुक्रवार (14 फरवरी) को यह संख्या 50 करोड़ के ऊपर पहुंच चुका है. अभी महाकुंभ में 12 दिन और एक महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष है. पूरी उम्मीद है कि स्नानार्थियों की यह संख्या 55 से 60 करोड़ के ऊपर जा सकती है.

विभिन्न स्नान पर्वों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

यदि अब तक के कुल स्नानार्थियों की संख्या का विश्लेषण करें तो सर्वाधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति के अवसर पर अमृत स्नान किया था. एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ के पार और पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई, इसके अलावा बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई थी. वहीं माघी पूर्णिमा के महत्वपूर्ण स्नान पर्व पर भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पावन स्नान किया था.

मछली पकड़ने के जाल डालना सफलता का पैमाना

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भारत में मत्स्य पालन विकास के पथ पर अग्रसर

परिचय:  भारत वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। पिछले दो दशकों में, भारत मत्स्य पालन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि और परिवर्तन का साक्षी बना है। तकनीकी प्रगति से लेकर नीतिगत सुधारों तक, 2004 से 2024 की अवधि में ऐसी उपलब्धियां रही हैं, जिन्होंने वैश्विक मत्स्य पालन और जलीय कृषि में भारत की स्थिति को मजबूत किया है। केंद्रीय बजट 2025-26 में मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 2,703.67 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक कुल वार्षिक बजटीय समर्थन प्रस्तावित किया गया है। यह जलीय कृषि और समुद्री खाद्य निर्यात में अग्रणी के रूप में भारत की उपलब्धि का प्रमाण है!

केंद्रीय बजट 2025-26 में उदीयमान क्षेत्र

2025-26 के बजट की घोषणा रणनीतिक रूप से वित्तीय समावेशन को बढ़ाने, सीमा शुल्क को कम करते हुए किसानों पर वित्तीय बोझ को कम करने और समुद्री मत्स्य पालन के विकास को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।

इसके अतिरिक्त, बजट 2025-26 में विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और खुले समुद्र से मत्स्य पालन के सतत दोहन के लिए एक रूपरेखा को सक्षम करने पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे समुद्री क्षेत्र में विकास के लिए भारतीय ईईजेड और आस-पास के खुले समुद्र में समुद्री मछली संसाधनों की अप्रयुक्त क्षमता का सतत दोहन सुनिश्चित होगा।

भारत सरकार ने मछुआरों, किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और अन्य मत्स्य पालन हितधारकों के लिए ऋण सुलभता बढ़ाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण सीमा को 3 रुपए लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय संसाधनों के प्रवाह को सुव्यवस्थित करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्षेत्र की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक धन आसानी से उपलब्ध हो।

सफलता के दो दशक

उत्पादन में वृद्धि: मछली उत्पादन 95.79 लाख टन (2013-14) और 63.99 लाख टन (2003-04) से बढ़कर 184.02 लाख टन (2023-24) हो गया, जो 10 वर्षों (2014-24) में 88.23 लाख टन की वृद्धि दर्शाता है, जबकि 2004-14 में 31.80 लाख टन की वृद्धि हुई थी।

अंतर्देशीय और जलीय कृषि मछली उत्पादन में वृद्धि: अंतर्देशीय और जलीय कृषि मछली उत्पादन में 2004-14 में 26.78 लाख टन की तुलना में 2014-24 में 77.71 लाख टन की जबरदस्त वृद्धि हुई।

समुद्री मछली उत्पादन 5.02 लाख टन (2014-24) से दोगुना होकर 10.52 लाख टन (2004-14) हो गया।

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारत ने 60,523.89 करोड़ रुपये मूल्य के 17,81,602 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य पदार्थ का निर्यात किया। निर्यात मूल्य में 2003-04 के 609.95 करोड़ रुपये से उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

नीतिगत पहल और योजनाएँ:

नीली क्रांति: नीली क्रांति योजना मत्स्य पालन क्षेत्र को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और मजबूत बनाने की दिशा में पहला कदम था। अपनी बहुआयामी गतिविधियों के साथ, नीली क्रांति मुख्य रूप से अंतर्देशीय और समुद्री दोनों जलीय कृषि और मत्स्य संसाधनों से मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित है। नीली क्रांति योजना का वित्त वर्ष 2015-16 में 5 वर्षों के लिए 3000 करोड़ रुपये के केंद्रीय परिव्यय के साथ शुभारंभ किया गया था।

हालांकि, चूंकि इस क्षेत्र में मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण अंतराल को दूर करने के लिए सुधारों की आवश्यकता थी; इस प्रकार, मछुआरों, मछली किसानों और अन्य हितधारकों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण को सुनिश्चित करते हुए मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में मदद करने के लिए 2020 में प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) योजना की कल्पना की गई थी। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) को 20,050 करोड़ रुपये के निवेश के साथ पांच वर्ष (2020-21 से 2024-25) की अवधि के लिए लागू किया जा रहा है। यह पहल अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलकृषि के क्षेत्र में मजबूती आधार रखती है, तथा उत्पादन को बढ़ाने तथा मजबूत खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देती है।

स्रोत:https://pmmsy.dof.gov.in/#schemeIntro

पीएमएमएसवाई के तहत पहल

मत्स्यपालक उत्पादक संगठन (एफएफपीओ)- वर्तमान पीएमएमएसवाई के अंतर्गत, मछुआरों और मछली पालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी लेन-देन क्षमता को बढ़ाने के लिए मछली पालक उत्पादक संगठन (एफएफपीओ) की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है, जो अंततः मछुआरों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करता है।

मत्स्यपालन विभाग ने अब तक 544.85 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत पर कुल 2195 एफएफपीओ की स्थापना के लिए स्वीकृति दी है, जिसमें 2000 मत्स्य सहकारी एफएफपीओ और 195 नए एफएफपीओ शामिल हैं। इसके अलावा, मछुआरों और मछली पालकों द्वारा संस्थागत ऋण तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने के लिए, 2018-19 से किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा को मत्स्यपालन तक बढ़ा दिया गया है और आज तक मछुआरों और मछली पालकों को 4,50,799 केसीसी कार्ड स्वीकृत किए गए हैं।

मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ)-

केंद्रीय बजट 2018 में, माननीय वित्त मंत्री ने मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) की स्थापना की घोषणा की। तदनुसार, 2018-19 के दौरान, एफआईडीएफ नामक एक समर्पित निधि बनाई गई, जिसका कुल निधि आकार 7522.48 करोड़ रुपये है।

मत्स्य पालन विभाग ने विभिन्न राज्य सरकारों/संघ शासित प्रदेशों और अन्य पात्र संस्थाओं से प्राप्त 3858.19 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता के लिए प्रतिबंधित परियोजना लागत के साथ कुल 5801.06 करोड़ रुपये की लागत पर कुल 136 परियोजना प्रस्तावों/परियोजनाओं को मंजूरी दी है। एफआईडीएफ के विस्तार से विभिन्न मत्स्य पालन अवसंरचनाओं के विकास में और तेजी आएगी।

प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना-

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी 2024 में वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2026-27 तक चार वर्ष की अवधि के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएमएमकेएसएसवाई) को स्वीकृति दी, यह प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत एक केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना है। पीएम-एमकेएसएसवाई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 6000 करोड़ रुपए के अनुमानित परिव्यय के साथ लागू किया जाएगा। पीएम-एमकेएसएसवाई का उद्देश्य लंबी अवधि में मत्स्य पालन क्षेत्र के परिवर्तन का समर्थन करने के लिए संस्थागत सुधार लाने के लिए पहचाने गए वित्तीय और तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से क्षेत्र की अंतर्निहित कमजोरियों को दूर करना है।

पीएमएमएसवाई के तहत एकीकृत जल पार्क-

भारत में मत्स्य पालन विभाग मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत जल पार्कों के विकास को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। ये जल पार्क प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) का हिस्सा हैं और इनका उद्देश्य विभिन्न पहलों के माध्यम से जलकृषि मूल्य श्रृंखला को बढ़ाना है। विभाग ने देश में कुल 682.6 करोड़ रुपये की लागत से कुल 11 एकीकृत जल पार्क स्थापित करने की स्वीकृति दी है।

पीएमएमएसवाई के तहत तैनात कृत्रिम चट्टानें-

कृत्रिम चट्टानें मानव निर्मित संरचनाएं हैं जो समुद्री आवासों और पारिस्थितिकी प्रणालियों को बढ़ाने के लिए समुद्र तल पर रखी जाती हैं। ये संरचनाएं प्राकृतिक चट्टानों की तरह होती हैं और विभिन्न समुद्री जीवों के लिए आश्रय, खाद्य स्रोत और प्रजनन स्थल प्रदान करती हैं। भारत में, मत्स्य विभाग सतत समुद्री मत्स्य पालन संरक्षण प्रयासों का समर्थन करने के लिए तटीय राज्यों में कृत्रिम चट्टानों की स्थापना को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। इन पहलों का उद्देश्य तटीय मत्स्य पालन को फिर से जीवंत करना, मछली स्टॉक का पुनर्निर्माण करना और समुद्री जैव विविधता को बढ़ाना है। मत्स्य विभाग, भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई) और आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) के तकनीकी समर्थन से, इन परियोजनाओं के माध्यम से स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देने और तटीय समुदायों की आजीविका में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है आंध्र प्रदेश, गुजरात, लक्षद्वीप, कर्नाटक, ओडिशा, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 291.37 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

पीएमएमएसवाई के अंतर्गत नामित एनबीसी-

भारत में मत्स्य पालन विभाग ने जलीय कृषि प्रजातियों की आनुवंशिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए विशिष्ट न्यूक्लियस ब्रीडिंग सेंटर (एनबीसी) नामित किए हैं। ये एनबीसी झींगा जैसी प्रजातियों की उत्पादकता और गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो घरेलू खपत और निर्यात दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

तकनीकी प्रगति:

उपग्रह प्रौद्योगिकी एकीकरण: मत्स्य पालन क्षेत्र में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग पर मत्स्य पालन विभाग द्वारा पोत संचार और सहायता प्रणाली, ओशनसैट के अनुप्रयोग, संभावित मत्स्य पालन क्षेत्र (पीएफजेड) आदि के लिए राष्ट्रीय क्रियान्वयन योजना।

जीआईएस-आधारित संसाधन मानचित्रण: समुद्री मछली लैंडिंग केंद्रों और मछली पकड़ने के मैदानों के मानचित्रण के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) प्रौद्योगिकी का कार्यान्वयन, प्रभावी संसाधन प्रबंधन में सहायता करना।

मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए डाटाबेस और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) को मजबूत करने की योजना के घटक निम्नानुसार हैं:

आईसीएआर-केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई): उत्कृष्टता का केंद्र

केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई), जिसकी स्थापना 1961 में हुई थी, मत्स्य पालन में उच्च शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत का अग्रणी संस्थान है। सीआईएफई ने 4,000 से अधिक मत्स्य पालन विस्तार कार्यकर्ताओं और पेशेवरों को प्रशिक्षित किया है जो देश भर में स्थायी मत्स्य पालन प्रथाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्षमता निर्माण में सीआईएफई की भूमिका भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण रही है।

भारत के सतत मत्स्य पालन प्रयासों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

समुद्री मत्स्य पालन पर राष्ट्रीय नीति (एनपीएमएफ, 2017): भारत सरकार ने एनपीएमएफ की शुरुआत की है, जो सभी समुद्री मत्स्य पालन कार्यों के लिए मुख्य सिद्धांत के रूप में स्थिरता पर ज़ोर देती है। यह नीति भारत के समुद्री मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन का मार्गदर्शन करती है।

विनियमन और संरक्षण उपाय: समुद्री मछली भंडार की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने कई संरक्षण उपायों को लागू किया है, जिनमें शामिल हैं:

  • मछली पकड़ने पर समरूप प्रतिबंध: मानसून के मौसम के दौरान ईईजेड में मछली पकड़ने पर 61 दिनों का एकसमान प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि मछली के स्टॉक को फिर से भरा जा सके।
  • विनाशकारी तरीके से मछली पकड़ने पर प्रतिबंध: जोड़ी में मछली पकड़ने, बुल मछली पकड़ने और मछली पकड़ने में कृत्रिम एलईडी लाइट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध, जो अत्यधिक मछली पकड़ने को कम करने और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले नुकसान को कम करने में सहायता करते हैं।
  • स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देना: समुद्री पशुपालन, कृत्रिम चट्टानों की स्थापना और समुद्री शैवाल की खेती जैसी समुद्री कृषि गतिविधियों को प्रोत्साहित करना।
  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मत्स्य पालन नियम: तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने गियर-मेष आकार और इंजन शक्ति विनियमन, मछली का न्यूनतम कानूनी आकार (एमएलएस) और विभिन्न प्रकार के जहाजों के लिए मछली पकड़ने के क्षेत्रों का ज़ोनिंग भी लागू किया है, जो दीर्घकालिक रूप में मछली पकड़ने में योगदान देता है।

निष्कर्ष:

2004 से 2024 तक की अवधि भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी रही है। नीति कार्यान्वयन, तकनीकी एकीकरण और दीर्घकालिक कार्य प्रणालियों में ठोस प्रयासों के माध्यम से, भारत ने न केवल अपने मछली उत्पादन को बढ़ाया है, बल्कि अपने मछली पकड़ने वाले समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी सुनिश्चित किया है। जैसे-जैसे देश आगे बढ़ता है, नवाचार और स्थिरता पर निरंतर ध्यान इस ऊपर की ओर प्रक्षेपवक्र को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

संदर्भ:

  • मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय

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प्रधानमंत्री 16 फरवरी को दिल्ली में भारत टेक्स 2025 में भाग लेंगे

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SYDNEY, AUSTRALIA - MAY 24: Indian Prime Minister Narendra Modi speaks at a joint news conference with Australian Prime Minister Anthony Albanese (R) at Admiralty House on May 24, 2023 in Sydney, Australia. Modi is visiting Australia on the heels of his and Albanese's participation in the G7 summit in Japan. (Photo by Saeed Khan-Pool/Getty Images)

कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों तक वस्त्रों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को एक ही मंच पर लाने वाला एक अनूठा कार्यक्रम

120 से अधिक देशों के नीति निर्माता और वैश्विक सीईओ, प्रदर्शक, अंतर्राष्ट्रीय खरीदार भाग लेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 16 फरवरी को करीब 4 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत टेक्स-2025 में भाग लेंगे। इस अवसर पर वे उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे।

भारत टेक्स 2025, एक व्यापक स्तर का वैश्विक कार्यक्रम है और इसका आयोजन 14-17 फरवरी को भारत मंडपम में किया जा रहा है। यह एक विशिष्ठ कार्यक्रम है क्योंकि यह कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों तक की संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला को एक ही मंच पर एक साथ लाता है।

भारत टेक्स प्लेटफॉर्म कपड़ा उद्योग का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक आयोजन है, जिसमें दो स्थलों पर फैला एक मेगा एक्सपो शामिल है और इसमें संपूर्ण वस्त्र पारिस्थितिकी व्यवस्था को प्रदर्शित किया जाएगा। इस दौरान 70 से अधिक सम्मेलन सत्र, गोलमेज बैठक, पैनल चर्चा और मास्टर क्लासेस वाले वैश्विक स्तर के सम्मेलन भी शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान आयोजित होने वाली प्रदर्शनी में विशेष नवाचार और स्टार्टअप मंडप होंगे। इस दौरान हैकथॉन आधारित स्टार्टअप पिच फेस्ट और इनोवेशन फेस्ट, टेक टैंक और डिजाइन चुनौतियों को भी शामिल किया जाएगा और यह प्रमुख निवेशकों के माध्यम से स्टार्टअप के लिए वित्तपोषण के अवसर प्रदान करेंगी।

भारत टेक्स 2025 में नीति निर्माताओं, वैश्विक सीईओ के साथ-साथ 5000 से अधिक प्रदर्शकों, 120 से अधिक देशों के 6000 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और अन्य आगंतुकों के आने की आशा है। अंतर्राष्ट्रीय वस्त्र निर्माता संघ (आईटीएमएफ), अंतर्राष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (आईसीएसी), यूरेटेक्स, टेक्सटाइल एक्सचेंज, यूएस फैशन इंडस्ट्री एसोसिएशन (यूएसएफआईए) सहित दुनिया भर के 25 से अधिक प्रमुख वैश्विक वस्त्र निकाय और संघ भी इस कार्यक्रम में भागीदारी करेंगे।