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महक क्रांति नीति-2026-36 एवं 5 सैटेलाइट सेंटर का किया लोकर्पण विकास की नींव– मुख्यमंत्री धामी

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संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समन्वयक उत्तराखंड

महक क्रांति नीति-2026-36 एवं 5 सैटेलाइट सेंटर का किया लोकर्पण विकास की नींव– मुख्यमंत्री धामी

लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों की होगी खेती

आगामी सालों में करीब 1 लाख किसानों को जोड़ने का है लक्ष्य

देहरादून ,13 दिसम्बर ,मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सगन्ध पौधा केन्द्र, सेलाकुई, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए उत्तराखण्ड महक क्रांति नीति-2026-36 का शुभारम्भ किया। उन्होंने सेटेलाइट सेन्टर भाऊवाला का लोकार्पण एवं सुगंध पौधा केन्द्र, सेलाकुई स्थित ए.एम.एस (C-14) प्रयोगशाला का भी शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कुल 5 सेटेलाइट सेन्टरों का भी शिलान्यास किया। यह सेटेलाइट सेंटर – परसारी ( चमोली ), रैथल ( उत्तरकाशी), भैसोड़ी ( अल्मोड़ा), खतेड़ा ( चंपावत) एवं विषाड ( पिथौरागढ़) में स्थापित किए जाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान सुगंध पौधा केन्द्र और डाबर इंडिया लिमिटेड के बीच एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर भी किए गए। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य एक्सटेंशन (विस्तार), अनुसंधान एवं विकास, मानव संसाधन विकास, मार्केटिंग आदि के क्षेत्र में कैप और डाबर के बीच सहयोग के लिए एक रूपरेखा तैयार करना है। एम.ओ.यू के दौरान कैप की ओर से निदेशक कैप श्री नृपेन्द्र सिंह चौहान, एवं डाबर की अधिशासी निदेशक डाबर डा. सौरभ लाल मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने कैप के फाउण्डर वैज्ञानिकों एवं लेमनग्रास – तुलसी की खेती करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने परफ्यूमरी प्रयोगशाला का भी भ्रमण किया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड महक क्रांति नीति के शुभांरभ को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस नीति के अंतर्गत 7 एरोमा वैलियों को विकसित करने की शुरुआत होगी। प्रथम चरण में पिथौरागढ़ में तिमूर वैली, चमोली एवं अल्मोड़ा में डैमस्क रोज वैली, ऊधमसिंह नगर में मिन्ट वैली, चम्पावत और नैनीताल में सिनेमन वैली तथा हरिद्वार और पौड़ी में लेमनग्रास एवं मिन्ट वैली विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा इस नीति के अंतर्गत पौधशाला विकास सहयोग, खेती हेतु अनुदान, प्रशिक्षण एवं क्षमता-विकास, फसल बीमा, तथा पैकेजिंग और ब्रांडिंग जैसी आवश्यकताओं की व्यवस्था की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति के अंतर्गत राज्य में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों की खेती को विकसित कर करीब 1 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। आगामी दस वर्षों में राज्य में सुगंधित फसलों की खेती के टर्नओवर को सौ करोड़ रुपये से बढ़ाकर लगभग ₹ 1200 करोड़ तक पहुंचाने में सफलता मिलेगी। जिससे किसानों के साथ राज्य की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व राज्य सरकार, प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में किसानों को 3 लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि उपकरण खरीदने के लिए फार्म मशीनरी बैंक योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। राज्य में गेहूं खरीद पर किसानों को 20 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान रहे हैं। गन्ने के रेट में भी 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई है। किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त करने का काम किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस के निर्माण के लिए 200 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान भी किया है। जिसके तहत राज्य में लगभग 115 करोड़ रुपए की सहायता से करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को सहायता प्रदान करने के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट भी स्वीकृत किया गया है। राज्य में सब्जियों की तरह ही फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है।
यही नहीं राज्य सरकार ने 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति जैसी कई योजनाओं को लागू किया है। इन नीतियों के तहत किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है। सुगंध उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए काशीपुर में 40 एकड़ में एरोमा और परफ्यूमरी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ₹ 300 करोड़ से एरोमा पार्क भी विकसित किया जा रहा है। हाउस ऑफ हिमालयाज के माध्यम से सुगंध तेलों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। धौलादेवी, मुन्स्यारी और बेतालघाट के चाय बागानों को जैविक चाय बागान के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, मिलेट उत्पादन में निवेश पर 80 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान कर रही है। पंक्ति बुआई करने पर प्रति हेक्टेयर 4 हजार रुपये और अन्य विधियों से बुआई करने पर प्रति हेक्टेयर 2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, मिलेट उत्पाद की खरीद पर किसानों को 300 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी किया है। हमारे इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज हमने किसानों की आय में वृद्धि करने में भी देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सतत् विकास की सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करना, मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाए गए उत्पादों को उपहारों के रूप में दिए जा रहे हैं। सरकारी आयोजनों में भी स्थानीय उत्पादों को खरीदने को कहा गया है।

कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि एरोमा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड में अपार संभावनाएं हैं और आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में एग्री, हॉर्टीकल्चर एवं कैप की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में जहां इस क्षेत्र का टर्नओवर मात्र 1 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर 100 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

परिश्रम और आत्मबल के दम पर आगे बढ़ रही है मुनज़्जा सबुवाला

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मॉडल से अभिनेत्री बनने की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहीं मुनज़्ज़ा सबुवाला जल्द ही दर्शकों को कई नए और रोचक प्रोजेक्ट्स में नज़र आने वाली हैं। वह आने वाले समय में रियलिटी शो, म्यूज़िक वीडियो और एक टेलीविज़न सीरियल में अपने अभिनय का जलवा बिखेरती दिखेंगी।

मुनज़्ज़ा ने अपने करियर की शुरुआत एक मॉडल के रूप में की और इस सफर में उन्होंने आत्मनिर्भरता को हमेशा सर्वोपरि रखा। अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने नौकरी की ताकि अपनी ज़रूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहना पड़े। नौकरी से मिलने वाली कमाई से ही उन्होंने अपनी तस्वीरें शूट कराईं और खुद का पोर्टफोलियो तैयार किया। यही आत्मबल और मेहनत उन्हें आगे बढ़ाती रही।

इसके बाद मुनज़्ज़ा ने लगातार मॉडलिंग असाइनमेंट, रैम्प वॉक, प्रिंट शूट और विज्ञापन अभियानों में काम किया। मिस पुणे के खिताब जीता और कई अवार्ड से सराही गई। उन्होंने न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी कई प्रतिष्ठित मॉडलिंग शो में हिस्सा लिया और अपनी एक अलग पहचान बनाई। मॉडलिंग इंडस्ट्री में सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने के बाद अब वह अभिनेत्री के रूप में अपने करियर की नई और दमदार पारी शुरू कर रही हैं।

मुनज़्ज़ा का मानना है कि “जब हम कोई सपना देखते हैं या कोई मंज़िल तय करते हैं, तो उसे पाने के लिए निरंतर मेहनत करते रहना चाहिए, क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।” यही सोच उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताक़त है।

बेहद स्वाभिमानी, आत्मविश्वासी और बहुमुखी प्रतिभा की धनी मुनज़्ज़ा कहती हैं कि अगर वह अभिनेत्री नहीं होतीं, तो मॉडल, एंकर या रिपोर्टर के रूप में ज़रूर अपना मुकाम बनातीं। अभिनय और कैमरे के साथ-साथ वह एक बेहतरीन टैरो कार्ड रीडर भी हैं। उन्हें नई चीज़ें सीखना बेहद पसंद है, जो उनके व्यक्तित्व को और भी खास बनाता है।

सिनेमा की बात करें तो वह संजय लीला भंसाली और करण जौहर की बड़ी प्रशंसक हैं। डांस के मामले में नोरा फतेही का स्टाइल उन्हें बेहद आकर्षित करता है, वहीं कैटरीना कैफ और करीना कपूर उनकी पसंदीदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं। वह आगे चलकर फ़िल्म जब वी मेट जैसे चुलबुली गीत और नमस्ते लंदन की जसमीत जैसे सशक्त किरदार निभाने की ख्वाहिश रखती हैं।

संघर्ष, आत्मविश्वास और प्रतिभा का बेहतरीन मेल हैं मुनज़्ज़ा सबुवाला—जो न केवल अपने सपनों को जी रही हैं, बल्कि अपनी मेहनत से दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनती जा रही हैं।

गाय के पेट से निकला 52 किलो प्लास्टिक

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आंध्र प्रदेश से एक गाय के वीडियो को देखने के बाद लोग उस समय हैरान रह गए जब उन्होंने गाय के पेट से 52 किलो प्लास्टिक को बाहर निकलते देखा.ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि अगर थोड़ी और देर हो जाती तो उसकी जान बचाना काफी मुश्किल हो जाता. फिलहाल गाय की हालत धीरे-धीरे सुधर रही है और उस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.

आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मछलीपटनम में सड़कों पर खुले आम घूमते मवेशियों की समस्या अब सिर्फ यातायात में बाधा तक सीमित नहीं रही. हाल ही में इस मुद्दे ने चिंताजनक रूप ले लिया जब नगर के बीचोंबीच एक गाय बेसुध हालत में मिली. स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पशु चिकित्सा विभाग को दी. जांच में पता चला कि गाय की तबीयत गंभीर है और उसे तुरंत इलाज की जरूरत है. विभाग ने मामले की इमरजेंसी को देखते हुए डॉक्टर की निगरानी में पशु चिकित्सकों दीपक और हेमंत की टीम को मौके पर भेजाय डॉक्टरों ने तुरंत गाय का ट्रीटमेंट शुरू किया. 3 घंटे से ज्यादा चले इस जटिल ऑपरेशन में टीम ने उसके पेट से करीब 52 किलो प्लास्टिक, पॉलिथिन, पोस्टर के टुकड़े और अन्य भारी कचरा निकाला. इस नजारे को देख वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए कि इतने लंबे समय तक इतना भारी कचरा उसके भीतर कैसे जमा रहा होगा.

ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि अगर थोड़ी और देर हो जाती तो उसकी जान बचाना काफी मुश्किल हो जाता. फिलहाल गाय की हालत धीरे-धीरे सुधर रही है और उस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. डॉक्टरों के अनुसार शहरों में मवेशियों को पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है.

खुले में घूमने वाले गाय-बैल अक्सर कूड़े के ढेरों में भोजन खोजते हैं और इसी दौरान पॉलिथिन और प्लास्टिक जैसी हानिकारक चीजें निगल लेते हैं. समय के साथ यह सामग्री उनके पेट में इकट्ठी होकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करती है. पशु चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे मामले अब लगातार सामने आ रहे हैं और यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि यह न केवल जानवरों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है बल्कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है.

लोगों ने लगाई गुहार

स्थानीय निवासियों और पशु प्रेमियों ने डॉक्टरों से गुहार लगाई है कि जरूरत पड़ने पर अन्य बीमार मवेशियों की भी सिस्टमैटिक तरीके से सर्जरी कर उन्हें राहत दिलाई जाए. लोगों का कहना है कि सड़कों पर लावारिस हालत में घूम रहे मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. कई बार ये जानवर सड़क के बीच में बैठ जाते हैं या अचानक वाहनों के सामने आ जाते हैं. इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है और कई लोग घायल होने के साथ-साथ अपनी जान भी गंवा चुके हैं. वाहन चालकों को रोजाना ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है जिससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है.

इन परिस्थितियों को देखते हुए शहर के नागरिकों ने पशुपालन विभाग और नगर निगम से मिलकर ठोस कदम उठाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि दोनों विभाग एक साथ काम करें तो सड़कों पर घूमते मवेशियों की पहचान, उनकी देखभाल और उपचार की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है. इसके साथ ही शहर में प्लास्टिक कचरे पर नियंत्रण पाने के लिए भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि मवेशियों के लिए यह खतरा कम हो सके.

 

मुख्यमंत्री मोहन यादव के दो साल सत्ता के नायक से जननायक तक

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(पवन वर्मा-विनायक फीचर्स)

मध्यप्रदेश की राजनीति ने पिछले दो वर्षों में जिस स्थिरता, स्पष्टता और नेतृत्व की परिपक्वता को महसूस किया है, उसकी पृष्ठभूमि केवल राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि नेतृत्व की एक नई परिभाषा है। अक्सर सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारें दिशा तय करने में समय लेती हैं, परंतु डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद संभालते ही स्पष्ट कर दिया कि उनका नेतृत्व सिर्फ पद की औपचारिकता नहीं, बल्कि कार्य की प्रतिबद्धता पर आधारित है।

उनके दो वर्ष इस बात का प्रमाण बनकर खड़े हैं कि यदि नेतृत्व दृढ़ संकल्पित हो, स्पष्ट सोच रखता हो और जनता के हित को केंद्र में रखकर काम करे,तो शासन की शैली बदलते देर नहीं लगती। मोहन यादव की राजनीतिक यात्रा हमेशा जमीन से जुड़ी रही है, पर मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने जिस परिपक्वता और शांति से दृढ़ता का प्रदर्शन किया, उसने उन्हें सत्ता के नायक की सीमाओं से आगे बढ़ाकर जननायक की राह पर स्थापित किया है।

इन दो वर्षों में डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को एक ऐसे शासन मॉडल की ओर ले जाने का प्रयास किया है जहां निर्णयों में स्पष्टता हो, योजनाओं में परिणाम दिखें और प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही सुनिश्चित हो। उनकी नेतृत्व शैली शोर-शराबे से परे, दृढ़ता और निरंतरता पर आधारित रही है। वे प्रचारात्मक राजनीति से दूरी रखते हैं और यही गुण जनता के बीच उनके प्रति भरोसा मजबूत करता है।

मध्यप्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में पिछले दो वर्षों में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए। पुलिस और कानून व्यवस्था को लेकर स्पष्ट आदेश दिए गए। संगठित अपराध, साइबर अपराध और नक्सल नेटवर्क पर जो रणनीतिक दबाव बना, वह एक सुविचारित दृष्टि का हिस्सा था। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार समन्वय के साथ काम हुआ, अपराधियों पर नकेल कसी गई और साइबर अपराध के मामलों में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई का उदाहरण पेश किया। यह किसी आकस्मिक पहल का परिणाम नहीं था, बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय से लगातार मॉनिटर किया गया।

विकास योजनाओं के क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय गति पकड़ी। सड़क निर्माण से लेकर सिंचाई परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर शिक्षा के ढांचे तक सभी क्षेत्रों में योजनाओं के कार्यान्वयन पर सरकार ने बराबर ध्यान दिया। डॉ. यादव की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने किसी भी योजना को केवल घोषणाओं के स्तर पर नहीं रहने दिया। योजनाओं में परिणाम दिखाई दें,यह उनके प्रशासन की प्राथमिकता रही।
लाड़ली बहना योजना जैसी महिला-केंद्रित नीतियों को उन्होंने केवल बनाए ही नहीं रखा, बल्कि उन्हें मजबूत करते हुए यह सुनिश्चित किया कि इसका लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से महिलाओं तक पहुंचे। जनकल्याण की ये योजनाएं राज्य की सामाजिक संरचना को नई दिशा देती हैं और महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करती हैं।
डॉ. यादव की नेतृत्व शैली का सबसे प्रभावशाली पक्ष उनकी सहजता और जनता से उनका स्वाभाविक संबंध है। वे मंचों और भव्य आयोजनों के नेता नहीं, बल्कि सरल, संवादशील और जमीन से जुड़े नेतृत्व का उदाहरण हैं। उनकी यह शैली जनता के मन में यह विश्वास जगाती है कि उनका मुख्यमंत्री दूर नहीं, उनके बीच का व्यक्ति है जो कम शब्द बोलता है, पर काम ज़्यादा करता है।
सत्ता और संगठन के बीच उनका संतुलन भी उल्लेखनीय रहा। भाजपा संगठन के साथ उनके संबंध राजनीति में वह स्थिरता पैदा करते हैं जो किसी भी सरकार की सफलता का मूल आधार होती है। हेमंत खंडेलवाल के साथ उनकी समझदारी ने इन दो वर्षों में शासन और संगठन को एक स्पष्ट दिशा दी, जिससे निर्णय तेज हुए और राजनीतिक तालमेल मजबूत हुआ।

धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मध्यप्रदेश की विकास यात्रा के साथ जोड़ना भी डॉ. यादव के नेतृत्व की विशिष्टता है। उज्जैन,ओंकारेश्वर, अमरकंटक, रामराजा सरकार और खजुराहो जैसे स्थलों पर विकास कार्यों ने प्रदेश की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत की है। यह विकास केवल आस्था नहीं, बल्कि पर्यटन, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी है। उज्जैन के महाकाल कॉरीडोर की लोकप्रियता तो दुनिया भर में फैल चुकी है।

फिर भी, यह स्वीकार करना होगा कि किसी भी नेता की राजनीतिक यात्रा चुनौतियों से भरी होती है। आने वाले समय में बेरोजगारी, औद्योगिक निवेश, ग्रामीण क्षेत्रों का बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, शिक्षा की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण ये मुद्दे नई राह तय करेंगे। जनता अब पहले से अधिक उम्मीदें रखती है, और यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि पिछले दो वर्षों में नेतृत्व ने खुद को परिणाम देने वाली शैली के रूप में स्थापित किया है।

फिर भी, इन दो वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि मध्यप्रदेश में एक स्थिर, केंद्रित और जवाबदेह नेतृत्व खड़ा हुआ है। मोहन यादव की छवि प्रशासनिक दक्षता, सहज सरल नेतृत्व और जन-संवादशीलता के मेल से बनी है और यही वह आधार है जो किसी नेता को जननायक बनने की दिशा में आगे बढ़ाता है।

दो साल बाद यह स्पष्ट है कि मोहन यादव सिर्फ सत्ता संभालने वाले नेता नहीं, बल्कि एक ऐसे नेतृत्व की नींव रख चुके हैं जो मध्यप्रदेश की नई राजनीतिक संस्कृति का निर्माण कर रहा है। सत्ता का नायक समय बनाता है, पर जननायक समय से आगे बढ़कर जनता के मन में स्थान बनाता है। मोहन यादव की इन दो वर्षों की यात्रा इसी परिवर्तन का संकेत है और मध्यप्रदेश इस परिवर्तन को महसूस कर रहा है।

(विनायक फीचर्स)

सत्‍संकल्‍पों की प्रतिपूर्ति में संलग्न डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में विकसित होता मध्‍यप्रदेश

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(सुरेश पचौरी-विभूति फीचर्स)

मध्‍यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में गतिशील सरकार 13 दिसम्‍बर 2025 को अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरा कर रही है। इस अवधि पर एक विहंगम दृष्टि डालें तो स्‍पष्‍ट दृष्टिगोचर होता है कि विगत 2 वर्षों में सरकार ने अपनी जनकल्‍याणकारी नीतियों,सतत् संचालित विकास कार्यों तथा योजनाओं के लोकव्‍यापीकरण से प्रदेशवासियों का दिल जीतने में काफी हद तक कामयाबी हासिल कर ली है। डॉ. मोहन यादव ने मुख्‍यमंत्री पद का दायित्‍व संभालने के ठीक बाद कहा था कि मेरी प्राथमिकताओं में समाज का वह सर्वहारा वर्ग प्रमुखता से शामिल है, जिसे सरकार से मदद की दरकार है और जिसने बड़ी आशा के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकहितैषी सरकार बनाने में अपना अहम् योगदान दिया। उन्‍होंने यह भी कहा था कि हमारी सरकार जनता की भलाई की दिशा में इतने ज्‍यादा उल्‍लेखनीय कार्य करेगी, जिससे मध्‍यप्रदेश विकास का एक अनुकरणीय मॉडल बनेगा। फिलहाल डॉ. यादव अपने कथन को फलीभूत करने में अपनी मंत्रिपरिषद के सदस्‍यों के साथ जी-जान से कटिबद्ध हैं। वे अपने उन सत्‍संकल्‍पों की प्रतिपूर्ति के लिए न सिर्फ शिद्दत के साथ लगे हुए हैं, बल्कि एक सदाशयी जननेता के रूप में मध्‍यप्रदेश को हर क्षेत्र में ऊंचाइयों की ओर ले जाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।

आज मध्‍यप्रदेश में चतुर्दिक विकास का पहिया घूमता हुआ आपको नजर आएगा। चाहे बिजली का ज्‍यादा से ज्‍यादा उत्‍पादन हो, चाहे सड़कों का जाल बिछाने का सिलसिला हो, चाहे सिंचाई योजनाओं का विस्‍तार हो, चाहे उद्योग धंधों की स्‍थापना हो या फिर हर गांव में पीने का साफ पानी पहुंचाने की नल-जल योजना हो अथवा सुदूर आदिवासी इलाकों में शिक्षा व इलाज की सुविधा उपलब्‍ध कराना हो, सरकार की ओर से आम आदमी को सुविधा तथा संसाधन उपलब्‍ध कराने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी जा रही है। गांव, कस्‍बा, नगर, शहर सर्वत्र नागरिकों की मूलभूत आवश्‍यकताओं की पूर्ति के साथ ही समस्‍या का निवारण हो रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से प्रदेश के लाखों अन्‍नदाता किसान लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश में कानून व्‍यवस्‍था नियंत्रण में है, अपराधों में कमी आई है, गांव-गांव स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का विस्‍तार हो रहा है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में चलाई जा रही अनेक योजनाएं तो देश के अन्‍य राज्‍यों के लिए नजीर बन चुकी हैं।

मध्‍यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी द्वारा जो वादे चुनाव के दौरान किए गए थे वे पूरे किए जा रहे हैं। यद्यपि किसी भी सरकार के लिए 2 वर्ष का समय पर्याप्‍त नहीं माना जा सकता लेकिन डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश सरकार घोषणा पत्र में उल्‍लेखित एक-एक बिंदु को योजनाबद्ध तरीके से अमली जामा पहना रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि विभिन्‍न इलाकों में बंटे मध्‍यप्रदेश के प्रत्‍येक भू-भाग में समरस भाव से विकास कार्य किए जा रहे हैं। न किसी तरह का भेदभाव है, न किसी क्षेत्र की उपेक्षा। शासन का लक्ष्‍य समूचे मध्‍यप्रदेश का सर्वांगीण विकास कर उसे एक विकसित व आदर्श राज्‍य बनाने का है। मुख्‍यमंत्री जी ने तो सभी विधायकों से यहां तक कह दिया है कि आप अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए पूरे पाँच साल का प्‍लान बनाकर हमें दीजिए, हम उसे पूरा करने के लिए भरपूर राशि उपलब्‍ध कराएंगे। धन के अभाव में विकास कार्य बाधित नहीं होंगे। यह मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सदाशयता का परिचायक तो है ही, साथ ही प्रदेश की जनता से किए गए वादों को पूरा करने की उनकी सरकार की संकल्‍पबद्धता भी है।

शाश्‍वत सत्‍य है कि यदि सही नीति और अच्‍छी नीयत के साथ कुशल व संवेदनशील नेतृत्‍व हो तो उसके परिणाम बहुत सुखद होते हैं। मध्‍यप्रदेश को इस मामले में सौभाग्‍यशाली राज्‍य माना जा सकता है कि इसे जहां एक ओर देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी का मार्गदर्शन व वरदहस्‍त प्राप्‍त है तो दूसरी ओर है कर्मठ मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कुशल नेतृत्‍व। प्रधानमंत्री जी को मुख्‍यमंत्री की नेतृत्‍व क्षमता पर पूरा भरोसा है और उन्‍होंने सार्वजनिक रूप से इसका इजहार भी किया है। प्रधानमंत्री मोदी जी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कई बार मध्‍यप्रदेश की सम-सामयिक उपलब्धियों का जिक्र कर चुके हैं। यह तो एक बानगी है। मध्‍यप्रदेश में महिलाओं, किसानों, युवाओं, वंचितों, निराश्रितों एवं जरूरतमंदों की भलाई के साथ-साथ स्‍व-सहायता समूहों के उत्‍थान के लिए इतने काम हुए हैं, जो बेमिसाल हैं।
मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कथन है कि प्रधानमंत्री जी ने विकसित भारत निर्माण के लिए ज्ञान (GYAN) गरीब, युवा, अन्‍नदाता और नारी के सम्‍मान की जो बातें की हैं, वे हमारी सरकार के लिए ब्रह्म वाक्‍य है। इन्‍हीं चार आधार स्‍तंभों पर केन्द्रित समग्र विकास का रोडमैप मध्‍यप्रदेश में भी तैयार किया गया है और उसी दिशा में प्रदेश सरकार सेवारत है। प्रदेश सरकार गरीब कल्‍याण, युवा शक्ति, किसान कल्‍याण और नारी शक्ति मिशन लागू कर अंतिम पंक्ति के आखिरी व्‍यक्ति के कल्‍याण और उसके बेहतर भविष्‍य के निर्माण हेतु अवसर उपलब्‍ध करा रही है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में देश में विकास की जो गंगा प्रवाहित हो रही है उससे मध्‍यप्रदेश भी अछूता नहीं है। श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में संचालित केन्‍द्रीय योजनाओं का मध्‍यप्रदेश को भरपूर लाभ मिल रहा है। केन्‍द्र सरकार की महत्‍वपूर्ण जनहितैषी योजनाओं के क्रियान्‍वयन से उनका लाभ पात्र हितग्राहियों को दिलाने में मध्‍यप्रदेश देश में लगातार अग्रणी बना हुआ है। जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी व ग्रामीण) आयुष्‍मान भारत योजना आदि।

विगत 2 वर्षों की महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों की बात की जाए तो मध्‍यप्रदेश में भारत सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 11 लाख 46 हजार आवास से मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम रहा। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 8 लाख 64 हजार आवासों का कार्य पूर्ण हो चुका है। गरीब बंदी सहायता योजना का क्रियान्‍वयन करने वाला प्रथम राज्‍य बना है। प्रदेश में 80 लाख 52 हजार घरों तक नल कनेक्‍शन दिए गए। प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना के अंतर्गत मध्‍यप्रदेश में लगभग 85 लाख से अधिक हितग्राहियों को कुल 8 हजार 690 करोड़ से अधिक का लाभ प्रदान किया गया। प्रदेश के 82 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्‍मान निधि की 1671.00 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया गया है। आयुष्‍मान निरामयम भारत योजनांतर्गत 3 लाख एक हजार 496 परिवारों के सदस्‍यों को चिकित्‍सा सहायता प्रदान की गई। राज्‍य में मातृ शक्ति को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाये गए हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं का 512 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता उपलब्‍ध कराई गई।

मध्‍यप्रदेश में निवेश

भोपाल में पिछले दिनों ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स समिट की सफलता ने पूरे देश का ध्‍यान आकर्षित किया। इसके उद्धाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और समापन अवसर पर केन्‍द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने मध्‍यप्रदेश को देश का अग्रणी विकसित राज्‍य बनाने के मुख्‍यमंत्री के अथक परिश्रम और दृढ इच्‍छाशक्ति की प्रशंसा की। प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में राज्‍य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन अंतर्गत अब तक 8.57 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्‍ताव धरातल पर आ चुके हैं। इसके अलावा मुख्‍यमंत्री कन्‍या विवाह/निकाह सहायता योजनांतर्गत 1 लाख 52 हजार 353 हितग्राहियों को सहायता राशि रुपए 83844.39 लाख दी गई।

सिंहस्‍थ की तैयारियां

मध्‍यप्रदेश सरकार के सामने आने वाले दिनों में उज्‍जैन में होने वाले सिंहस्‍थ पर्व को सुसम्‍पन्‍न कराने की एक बड़ी चुनौती है। इस धार्मिक समागम में देश विदेश से करोड़ों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इसे निर्विघ्‍न व गरिमापूर्ण तरीके से संपन्‍न कराने के लिए राज्‍य सरकार ने कमर कस ली है। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की बागडोर संभालते ही शासन-प्रशासन के अधिकारियों को सिंहस्‍थ महापर्व की तैयारियां करने के निर्देश दे दिए थे, ताकि सारे काम समय पर पूरे हो जाएं। इसके लिए यथासमय बजट का आवंटन किया गया। वर्ष 2025-26 में सिंहस्‍थ 2028 के लिए 67 आवासीय भवन के निर्माण की स्‍वीकृति प्रदान की गई। सिंहस्‍थ के अवसर पर दुनिया भर से उज्‍जैन आने वाले श्रद्धा‍लुओं तथा तीर्थयात्रियों को किसी तरह की तकलीफ न होने पाए, इसके लिए युद्ध स्‍तर पर तैयारियां चल रही है। प्रदेश की सांस्‍कृतिक, ऐतिहासिक तथा धार्मिक पहचान रखने वाले प्रमुख स्‍थानों के साथ ही पर्यटन स्‍थलों को विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के चित्रकूट, उज्‍जैन, ओंकारेश्‍वर, महेश्‍वर, ओरछा, मैहर आदि स्‍थानों को उनके प्राचीन गौरव, वैभव और गरिमा के अनुसार सजाया-संवारा जा रहा है। मध्‍यप्रदेश में द्रुत गति से विकास के काम जारी हैं। श्रीराम वन गमन पथ श्रीराम के कर्तव्‍य पालन और राष्‍ट्र निर्माण का समर्पण संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का आधार देगा। साथ ही राज्‍य शासन द्वारा उन सभी स्‍थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ श्रीकृष्‍ण के स्‍मृति चिन्‍ह विराजमान हैं।

मध्‍यप्रदेश में नक्‍सल समस्‍या

मध्‍यप्रदेश में नक्‍सल मोर्चे पर सबसे बड़ी कामयाबी दर्ज की गई है। मध्‍यप्रदेश में 2.36 करोड़ रुपए के इनामी 10 हार्डकोर नक्‍सलियों ने एके-47 समेत आई.एन.एस.ए.एस. राइफल, एस.एल.आर. और सिंगल शॉट गन जैसे घातक हथियारों के साथ मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने सरेंडर किया है।

नि:संदेह, मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश सरकार प्रदेशवासियों के हितों के मद्देनजर तमाम लोककल्‍याणकारी योजनाओं के माध्‍यम से निष्‍ठापूर्वक राजधर्म निभा रही है तथा एक लोकप्रिय सरकार बनने की दिशा में निरंतर कदम बढ़ा रही है। भौगोलिक दृष्टि से देश के इस बड़े राज्‍य के सामने जहां तमाम चुनौतियां हैं, वहीं जनता की अनगिनत अपेक्षाएं भी हैं। सरकार चुनौतियों से भी निपट रही है और जनापेक्षाओं को भी पूरा कर रही है। विकास सतत् चलने वाली प्रक्रिया है और आशा की जानी चाहिए कि देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश सरकार विकास के रथ को रुकने नहीं देगी। मध्‍यप्रदेश सरकार के उपलब्धियों भरे 2 वर्ष पूरे होने के अवसर यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके मंत्रिमंडल के ऊर्जावान सहयोगियों, राज्‍य की प्रशासनिक टीम तथा प्रदेश की जागरूक जनता को हार्दिक बधाई।

(लेखक भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं) (विभूति फीचर्स)

गाय को चिकन मोमोज खिलाने वाले एक यूट्यूबर को पुलिस ने किया गिरफ़्तार

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दिल्ली से सटे गुरुग्राम में गाय को चिकन मोमोज खिलाने वाले एक यूट्यूबर का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया है। गिरफ्तारी से पहले गौ रक्षा संगठन के लोग उसके घर पर पहुंचे और कथित तौर पर उसकी पिटाई की। पिटाई के बाद उसने ऑन कैमरा आकर अपनी इस हरकत के लिए मांफी मांगी। आरोपी के दोनों वीडियो (गाय को मोमोज खिलाने वाला और माफी मांगने वाला) वायरल हो रहे हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठन और

गाय को चिकन मोमोज खिलाने वाले आरोपी की पहचान 28 वर्षीय ऋतिक चांदना के रूप में हुई है। ऋतिक का डोपरमैन के नाम से एक यूट्यूब चैनल है। गुरुग्राम की न्यू कॉलोनी के रहने वाले ऋतिक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें वह एक टास्क को कंप्लीट करने के चक्कर में चिकन मोमोज खा रहा था, लेकिन उससे पूरे मोमोज खाए नहीं गए जिसके बाद उसने बचे हुए मोमोज एक गाय को खिला दिए। उसने अपने इस टास्क का लाइव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया था। वह वीडियो वायरल हो गया और जिसके बाद हिंदू संगठनों ने इस वीडियो पर आपत्ति जताई।

महाराष्ट्र और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने नागपुर में गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र का दौरा किया

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नागपुर, 10 दिसंबर 2025: महाराष्ट्र और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने रामटेक तालुका, नागपुर जिले के देवलापार में स्थित गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र (गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र) का दौरा किया, जिसमें स्वदेशी गौ नस्लों के महत्व और सतत प्रथाओं पर जोर दिया गया।
दौरे के दौरान राज्यपाल ने केंद्र की गौशाला और वर्मीकंपोस्ट परियोजना का भ्रमण किया। उन्होंने भारतीय गौ नस्लों की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए चल रहे प्रयासों पर गहरी संतुष्टि व्यक्त की तथा प्राकृतिक खेती, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता में उनकी भूमिका पर बल दिया।
गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र एक प्रमुख गैर-सरकारी संगठन है जो पंचगव्य (गौ उत्पादों) पर वैज्ञानिक अनुसंधान और देशी मवेशियों के संरक्षण के लिए समर्पित है, जो देवलापार में अपने परिसर से कार्यरत है।
राज्यपाल के साथ वित्त एवं योजना राज्य मंत्री एडवोकेट आशीष जायसवाल तथा केंद्र के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे: अध्यक्ष पद्मेश गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत जांभेकर, उपाध्यक्ष यशपाल आर्य, सचिव सनत कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष डॉ. संजय एकापुरे और सीईओ डॉ. मनोज तत्ववादी।
प्राकृतिक खेती और गौ संरक्षण पहलों के समर्थक के रूप में जाने जाने वाले राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पहले गुजरात और अन्य राज्यों में इसी तरह के प्रयासों को बढ़ावा दिया है। यह दौरा महाराष्ट्र में स्वदेशी गौ संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रथाओं पर निरंतर ध्यान केंद्रित होने को रेखांकित करता है।

लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा होगी

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लोकसभा में चुनाव सुधारों पर आज आगे चर्चा होगी। कल विधि और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि पहले भी कांग्रेस के शासनकाल में कई बार मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण हो चुका है, लेकिन अब विपक्ष इसे लेकर सवाल उठा रहा है। उन्होंने देश के मतदान तंत्र की सराहना करते हुए कहा कि आजादी के बाद से हर एक को समान मताधिकार प्राप्त है।

न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया है। जिसके तहत महिलाओं के लिए लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में एक तिहाई सीट आरक्षण का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि भारत में चुनाव केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र का उत्सव है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि देश में चुनाव प्रक्रिया डॉ. बी.आर आम्बेडकर द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप सम्पन्न होती है। सदन के कई अन्य सदस्यों ने भी चर्चा में भाग लिया।

राज्यसभा में आज राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150वें वर्ष पर आगे चर्चा होगी। कल चर्चा की शुरूआत करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रगीत विकसित भारत की ओर देश की यात्रा में हमेशा प्रासंगिक रहेगा। उन्होंने वंदे मातरम पर चर्चा को लेकर सवाल उठाने और इसे पश्चिम बंगाल चुनावों से जोड़ने के लिए कांग्रेस की आलोचना की।

गृहमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रा सेनानी अपनी प्रत्येक बैठक की शुरूआत वंदे मातरम के गान से करते थे। आज भी सीमा पर वीर सैनिक वंदे मातरम के उद्घोष के साथ सर्वोच्च बलिदान करते हैं। गृहमंत्री शाह ने कहा कि राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम के माध्यम से मां के रूप में देश वंदना और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की संस्कृति स्थापित की। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम तमाम प्रतिबंधों और बाधाओं को जीतते हुए देश वासियों के हृदय तक पंहुचा है। देश की संस्कृति पर आघात करने वाले इस्लामी आक्रमणों और नई सभ्यता- संसकृति थोपने के ब्रिटेन के प्रयासों के बावजूद वंदे मातरम राष्ट्र की शक्ति बना रहा है। गृहमंत्री ने कहा कि संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम पर चर्चा से भावी पीढ़ियों को इसकी महत्ता और गरिमा समझने में मदद मिलेगी।

चर्चा में भाग लेते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस ने वंदे मातरम को नारा बनाया। उन्होंने कहा कि जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया तब कांग्रेस के लाखों स्वतंत्रता सेनानी वंदे मातरम गाते हुए जेल गए। श्री खरगे ने कहा कि गुरूदेव रबिंद्र नाथ टैगोर ने 1896 में कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार वंदेमातरम गाया और तब से यह भारत के जनजीवन में प्रवेश कर गया।

मुंबई में 24 लाख का सोना चुराने वाले को पुलिस ने बांदा से किया अरेस्ट

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मुंबई: मुंबई पुलिस ने सोने की चोरी की एक बड़ी घटना को सुलझाने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने मुंबई के सर जे जे मार्ग पुलिस ने घर से 20 तोला सोना चोरी करने वाले एक आरोपी इरशाद कल्लू खान (22) को लगातार सात दिन तक चार राज्यों में पीछा करने के बाद उत्तर प्रदेश के बांदा से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी से चोरी का पूरा 200 ग्राम (24 लाख रुपये मूल्य) का सोना भी बरामद कर लिया है। यह घटना 29 नवंबर को नागपाड़ा स्थित आफिया हाइट्स में हुई थी शिकायतकर्ता यूसुफ इब्राहिम कसमनी के घर में इंटीरियर का काम चल रहा था और घर के सभी दरवाजे खुले थे। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने बेडरूम के लकड़ी के कपाट में रखे 200 ग्राम के सोने के बार चोरी कर लिए। इस आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया।

तफ्तीश के दौरान सीसीटीवी फुटेज में काम पर आए एक मजदूर पर संदेह गया। जांच में उसका मोबाइल बंद मिला और आधार कार्ड भी फर्जी निकला। जब पुलिस उसके कमरे पर पहुंची तो पता चला कि वह अपना सामान बेचकर गांव भाग गया है। वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देकर उप निरीक्षक प्रशांत नेरकर के नेतृत्व में टीम यूपी के बांदा जिले रवाना हुई। गांव में पूछताछ करने पर पता चला कि आरोपी वहां भी नहीं पहुंचा था,आपराधिक छवि वाला आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और मोबाइल बंद रखकर पुलिस को चकमा दे रहा था।

पुलिस टीम ने आरोपी की बहन और जीजा का फोन सर्विलांस पर रखा जिससे पुलिस को पता चला कि वह कानपुर की तरफ जाने वाला है। पुलिस ने लगातार सात दिन तक चार राज्यों में उसका पीछा जारी रखा।8 दिसंबर की सुबह गुप्त सूत्रों से पीएसआई प्रशांत नेरकर को सूचना मिली कि आरोपी कानपुर–मतोंध हाईवे से गुजर रही एक बस में है। पुलिस ने बस रोकी तो आरोपी खिड़की से कूदकर झाड़ियों में भागने लगा, तभी आरोपी एक ऑटो से टकराकर गिरा गया जिसके बाद पुलिस ने उसे दौड़ा कर पकड़ लिया। पेशे से पेंटर आरोपी बांदा (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है। तफ्तीश टीम में उप निरीक्षक प्रशांत नेरकर, हवलदार तडवी, पुलिस शिपाई घाडगे, कोलपुसे, शेवरे, डावरे और चौधरी शामिल थे।

गोवा अग्निकांड में तीन सगी बहनों सहित उत्तराखंड के नौ लोगों की मौत

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Goa Night Club Fire:गोवा नाइट क्लब अग्निकांड की आंच सबसे ज्यादा उत्तराखंड को झुलसा गई। शनिवार देर रात पणजी में अरपोरा नदी के पास स्थित ‘बर्च बाई रोमियो लेन’ नाइट क्लब में भयानक आग लग गई थी। उस समय नाइट क्लब में 200 से अधिक लोग मौजूद थे। क्लब की पहली मंजिल पर आग की लपटें उठने लगीं थी। उस दौरान डांस फ्लोर पर सौ से अधिक पर्यटक खुशियों में झूम रहे थे। देखते ही देखते पूरे क्लब में धुआं भर गया था। इससे मौके पर भगदड़ मच गई थी। उस अग्निकांड में कुल 25 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतकों में उत्तराखंड के नौ लोग शामिल हैं। मरने वालों में पांच युवक वह थे जो उस नाइट क्लब में नौकरी करते थे। चार लोग अल्मोड़ा के द्वाराहाट मूल निवासी विनाद कबड़वाल और उनके रिश्तेदार थे। विनोद दिल्ली में रहते थे। विनोद कबड़वाल, उनकी पत्नी भावना, पत्नी की बहनें कमला, अनीता और सरोज गोवा घूमने गई थीं। अग्निकांड में विनोद और उनकी पत्नी की तीन बहनों की मौत हो गई थी। इसके अलावा अग्निकांड में पिथौरागढ़, चम्पावत, पौड़ी, देवप्रयाग और टिहरी गढ़वाल के एक-एक युवक ने जान गंवाई है।

रोजगार के लिए पहुंचे मिली मौत

गोवा नाइट क्लब में लगी आग में जान गंवाने वाले उत्तराखंड के पांचों युवक रोजगार के लिए वहां गए थे। लेकिन उनकी लाशें इधर लौटी हैं। पिथौरागढ़ के गुरना क्षेत्र जमराड़ी सिमली निवासी सुरेंद्र सिंह पुत्र अमर सिंह बीते सप्ताह बेंगलुरु से गोवा शेफ की नौकरी करने पहुंचे थे। सुरेंद्र चार साल जर्मनी में काम कर चुके थे। वीजा संबंधी दक्कित के चलते वह विदेश नहीं जा पा रहे थे । सुरेंद्र की तीन वर्ष पहले ही शादी हुई थी। वहीं, बाराकोट के नेत्र सलान निवासी मनीष सिंह महर भी हादसे में नहीं बच सके। उनकी मृत्यु की पुष्टि रविवार को हो गई थी। मनीष रोजगार के लिए गोवा काम के सिलसिले में गए थे।