देहव्यापार के नए ठिकाने स्पा सेंटर
देहव्यापार के नए ठिकाने स्पा सेंटर
– आशीष वशिष्ठ
देश में स्पा सेंटर और मसाज पार्लर के नाम पर देहव्यापार के नए ठिकाने तेजी से पनप रहे हैं। ऊपर लिखा रहता है कि यहां पर मसाज की जाती है लेकिन अंदर सेक्स रैकेट का गंदा खेल होता है। ये कुप्रवृत्ति बड़ी तेजी से देश के हर छोटे—बड़े शहर में फैल रही है। ग्राहकों को लुभाने के लिए व्हाट्स एप ग्रुप बनाया जाता है जिसमें युवतियों की फोटो डाली जाती और यह वायदा किया जाता है कि मसाज पार्लर में आने पर मसाज के अलावा उन्हें सैक्सुअल फेवर भी मिलेंगे। ग्राहकों की भीड़ को बढ़ाने के लिए मसाज के पैकेज भी बनाए जाते हैं।
जानकारों के मुताबिक, मोटा मुनाफा मिलने की उम्मीद में एस्कोर्ट सर्विस प्रोवाइडरों ने स्पा सेंटरों की शुरुआत की थी। क्योंकि एस्कोर्ट सर्विस प्रोवाइडरों को कॉल गर्ल्स प्रोवाइड कराने व नाइट शिफ्ट में ज्यादा खर्चा आने की वजह से एस्कॉर्ट सर्विस का धंधा फ्लॉप होने लगा था। वहीं मुनाफा भी ज्यादा नहीं थी। जबकि स्पा एंड मसाज सेंटर की आड़ में सेक्स रैकेट चलाने में उन्हें मोटा मुनाफा मिलता था।
स्पा एंड मसाज सेंटरों के संचालक ग्राहकों को लुभाने के लिए आयुर्वेद पद्धित का भी झांसा देते हैं। इसके लिए उन्होंने इस तरह के होर्डिंग्स भी स्पा के बाहर लगाए रहते हैं। वहीं संचालकों ने अपने स्पा सेंटर के नाम भी आयुर्वेद पद्धति के मिलते जुलते नाम से रख रखे हैं, जिससे किसी को भनक न लगे कि यहां जिस्मफरोशी का धंधा चल रहा है।
गत अक्टूबर को कानपुर पुलिस ने में दो स्पा सेंटरों में छापा डालकर 6 लड़कियों और चार युवकों को पकड़ा। वाराणसी पुलिस ने पांडेयपुर क्षेत्र में स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार के धंधे का भंड़ाफोड़ कर चार युवतियों समेत पांच लोग गिरफ्तार किये।
बीती 1 नवंबर को राजस्थान के अलवर में पुलिस ने एक मॉल में चलने वाले स्पा सेंटरों पर छापा मारकर 21 युवक-युवती पकड़े, इनमें अधिकतर कॉलेज के छात्र थे। इंदौर पुलिस ने बीती 15 सितंबर को स्पा सेंटर की आड़ में सेक्स रैकेट को पकड़ा। पुलिस ने छापा मार 12 लड़कों और 6 लड़कियों को गिरफ्तार किया। बीती 11 अगस्त को हरियाणा के गुरुग्राम में एक स्पा सेंटर की आड़ में सेक्स रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया।
पिछले साल 14 फरवरी यूपी की राजधानी लखनऊ पुलिस ने गाजीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई मराज पार्लरों में छापेमारी कर 12 लोगों को गिरफ्तार किया। अप्रैल 2017 में लखनऊ के हुसैनगंज क्षेत्र में एक मसाज पार्लर में पुलिस ने छापेमारी में 17 को गिरफ्तार किया। नवम्बर 2017 को लखनऊ पुलिस ने पाॅश कालोनी गोमती नगर में संचालित आयुर्वेदिक स्पा और मसाज पार्लर की आड़ में संचालित सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया था।
बीते साल 28 सितम्बर को नोएडा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के दिल्ली में तैनात साइंटिस्ट का मसाज करने के दौरान अपहरण हो गया था। आरोपियों ने साइंटिस्ट को छोड़ने की एवज में फिरौती मांगी थी। नोएडा पुलिस ने तीन अपहरणकर्तााओं को गिरफ्तार किया। मार्च 2018 को नोएडा पुलिस ने स्पा और मसाज पार्लर की आड़ में सेक्टर-18 में एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने करीब दो दर्जन लोगों को हिरासत में भी लिया था।
देह व्यापार के साथ मसाज पार्लर की आड़ में कई गोरखधंधे हो रहे है। अखबारों में हाई प्रोफाइल लेडीज का मसाज करें जैसे विज्ञापन पढ़ कर कई बेरोजगर युवक इसके जाल में फंसकर अपना पैसा और समय बर्बाद कर रहे हैं। युवतियों को यह कहकर पार्लर ज्वाइन कराया जाता है कि उन्हें अच्छी सैलरी मिलेगी और धीरे-धीरे पैसे का लालच देकर उन्हें देह व्यापार की दलदल में धकेल दिया जाता है।
ऑनलाइन ठग भी स्पा और मसाज के बहाने लोगों को आर्थिक ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। स्पा सेंटर के पीछे सफेदपोश, पुलिस और अपराधियों का एक संगठित नेटवर्क है। देहव्यापार के नए अड्डो स्पा सेंटरों पर पुलिस प्रशासन को प्रभावी कार्रवाई कर तत्काल लगाम लगाने की जरूरत है। (युवराज)
आशीष वशिष्ठ
श्रद्धा आफताब लिव इन रिलेशनशिप हत्याकांड प्रकरण उफ्फ यह प्रेम है क्या ?
श्रद्धा आफताब लिव इन रिलेशनशिप हत्याकांड प्रकरण
उफ्फ यह प्रेम है क्या ?
जीवन मूल्यों के ह्रास का भयावह मंजर
– डॉ घनश्याम बादल
इससे पहले कि श्रद्धा हत्याकांड की बात की जाए मैं अच्छी तरह जानता हूं कि यह देश प्रेम के खिलाफ नहीं है । मर्जी से एक दूसरे के साथ रहने को भी कानूनी मान्यता मिल चुकी है । दो बालिग व्यक्ति अपनी पसंद के साथी चुन सकते हैंऔर साथ रह सकते हैं । भले ही विवाह के बंधन में न बंधने की वजह से छोटे शहरों एवं निम्न मध्यमवर्गीय समाज के लोग ऐसे संबंधों को गलत मानते हों लेकिन महानगरों में अब एक बहुत बड़ा खाता पीता ऐसा वर्ग है जो ऐसी बातों की परवाह नहीं करता ।
सच बात तो यह है कि धन दौलत की अधिकता एवं जी कमाने की धुन में लगे युवा समाज को कुछ मानते ही नहीं तो फिर परवाह करने की जरूरत भी नहीं समझते । संभवतः श्रद्धा एवं आफताब के केस के मूल में भी यही भावना रही है ।
वें माया नगरी मुंबई में एक दूसरे से महज तीन-चार किलोमीटर की दूरी पर रहते बताए जाते हैं पर भीड़भाड़ वाले इस नगर में एक दूसरे को जानते होंगे ऐसा बहुत कम लगता है । इन्हें मिलवाने का काम किया डेटिंग एप ‘बंबल’ ने आज बम्बल जैसे कितने ही डेटिंग एप सोशल मीडिया पर आसानी से मिल जाते हैं । सरल शब्दों में कहें तो यह पुराने जमाने के बिचौलियों का काम करते हैं लोगों को आपस में मिलवाते हैं और इनकी जिम्मेदारी यहीं पर समाप्त हो जाती है लेकिन पहले जमाने के बिचौलिए लंबे समय तक उन लोगों पर निगाह रखते थे जिनके बीच में संबंध कराते थे और समाज भी कुछ ऐसा वैसा होने पर बिचौलियों को पकड़ता था लेकिन आज ऐसा कुछ नहीं है । इसका परिणाम भी सामने है । ऐसे ऐसे भयावह प्रकरण हो रहे हैं कि विश्वास नहीं होता।
अब बात विश्वास की करें तो प्रेम और विश्वास एक दूसरे के पूरक हैं आपसी संबंध भी बिना विश्वास के नहीं चलते । अब इसी आपसी विश्वास के चलते युवा लोग जो खुद को अत्याधुनिक मानते हैं लिव इन रिलेशन में रहने लगते हैं एक तरह से यह भी कहा जा सकता है कि वह विवाह से पहले एक दूसरे को इतना परख लेना चाहते हैं कि संशय की कोई गुंजाइश ही न रहे ।
अब एक छत के नीचे एक कमरे में यदि दो विपरीत लिंगी रहें तो फिर यह संभावना भी प्रबल हो जाती है कि उनके बीच दैहिक संबंध होना भी बहुत स्वाभाविक है । खैर एक बार फिर कौन किस से संबंध रखता है या बनाता है यह नितांत निजी मामला हो जाता है । आफताब और श्रद्धा निकट आए, इतने निकट आए कि दोनों अपने परिवारों को छोड़कर मुंबई से दिल्ली शिफ्ट हो गए । साथ रह रहे थे स्वभाविक है महानगरीय संस्कृति के चलते हुए किसी को यह जानने की जरूरत भी नहीं थी कि वे कौन हैं व कैसे रह रहे हैं और उनके बीच में क्या संबंध है । दोनों स्वाभाविक रूप से अपने अपने कामों पर जाते होंगे यानी दिन में अलग-अलग और रात में साथ इसमें से भी देखें तो साथ 8 घंटे की नींद यानी महज 4 घंटे का साथ मान सकते हैं और इतने कम साथ में ही संबंधों में इतनी कटुता आई कि श्रद्धा के शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए ।
पुलिस के मुताबिक आफताब ने अपना जुर्म कबूल किया है अब न्यायालय में क्या होगा यह देखने वाली बात है । ( वैसे अभी अभी दो निचली अदालतों से फांसी की सजा पाने वाले अभियुक्त भी रिहा किए गए हैं और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे भी ‘अच्छे आचरण’ के चलते रिहा हो रहे हैं।) इस पर कुछ कहना अभी ठीक नहीं पर हर बात पर मौन साध लेना या चुप्पी खींच लेना सुरक्षित तो कर सकता है मगर समाज इस चुप्पी की छाती पर सवार होकर गहरे गर्त में जाता हुआ भी साफ दिख रहा है।
प्रेम एक आत्मिक अनुभूति है । एक दूसरे के प्रति समर्पण, निष्ठा एवं विश्वास का प्रतीक है मगर जब यह तथाकथित प्रेम केवल दैहिक या यौनिक मात्र रह जाए अथवा आकर्षण समाप्त हो जाए या फिर मन में वासना का विकार और ज्वर हावी हो जाए तो फिर वह एक से संतुष्ट नहीं । रहता शायद ऐसा ही कुछ हुआ होगा इस लिव इन रिलेशन में भी ।
श्रद्धा एवंआफताब के बीच मनमुटाव की परिणिति एक अमानुष एक एवं बर्बर हत्याकांड जैसे कृत्य में तब्दील हो गई । कितना भयावह मंजर लगता है जब एक व्यक्ति अपने साथ रहने वाली दूसरी लड़की की केवल हत्या ही नहीं करता अपितु उसके शव के 35 टुकड़े करता है उन्हें फ्रिज में सहेज कर रखता है दूसरी लड़की को फ्लैट में बुलाता है और टुकड़े रात के अंधेरे में ले जाकर जंगल में फेंक कर आता है और चैन से सो जाता है तो सुनने वाले की भी रूह कांप उठती है । मगर शैतान का दिल नहीं डरता वह फर्राटेदार अंग्रेजी में कबूल करता है ‘यस आई किल्ड हर’ ।
आधुनिक होना बुरा नहीं है लेकिन आधुनिकता के नाम पर जीवन मूल्यों को ताक पर रख देना, नैतिकता को दरकिनार कर देना भौतिकता के गर्त में इतना डूबना कि आत्मा से आत्मा का मिलन महज एक शाब्दिक लफ्फाजी मात्र रह जाए तो फिर इस समाज को सभ्य कहने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है ।
भले ही न्यायालय, सरकार, प्रशासन या समाज आधुनिकता के नाम पर ‘लिव इन’ या ऐसी ही दूसरी प्रवृत्तियों को स्वीकृति दे दे या आंख मूंद कर बैठ जाए लेकिन पश्चिमी देशों के अंधानुकरण की यह प्रवृत्ति हमें कहां ले जा रही है यह साफ दिख रहा है ।
बात – बात पर धरने प्रदर्शन एवं विरोध करने वाली सामाजिक संस्थाएं तो बहुत हैं । मगर ऐसे मुद्दों पर अड़ने एवं लड़ने वाली संस्थाएं एवं लोग कहीं गायब होते जा रहे हैं । क्यों न एक ऐसी संस्था सरकार या राष्ट्र की तरफ से खड़ी की जाए जो इस प्रकार के संवेदनशील एवं नैतिक मूल्यों से संबंधित प्रकरणों पर स्वयं संज्ञान लेकर इन्हें रोके ।
यहां सवाल केवल श्रद्धा या आफताब का नहीं है ‘लव जिहाद’ का भी नहीं है,विजातीय प्रेम के नाम पर शोषण या पाशविकता का भी नहीं है बल्कि यह प्रश्न है मनुष्यता का । उससे भी बड़ा प्रश्न है जीवन मूल्यों एवं नैतिकता का ।
हर हाल में इस पतन को रोकने के लिए आज आगे आने की जरूरत तो है । (युवराज)
डॉ घनश्याम बादल
(लेखक सामाजिक सरोकारों के जाने-माने स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं । )
आसान नहीं है मैनपुरी में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार डिम्पल यादव की राह
– अशोक भाटिया
सपा सांसद रह चुके रघुराज शाक्य मैनपुरी लोकसभा उप चुनाव में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को चुनौती देंगे। भाजपा ने रघुराज शाक्य को मैनपुरी उप चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया है। पार्टी ने मंगलवार को उप चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की। प्रसपा के अध्यक्ष शिवपाल यादव के करीबी रहे रघुराज शाक्य विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे। रघुराज को पार्टी ने मैनपुरी में प्रत्याशी बनाकर सपा के लिए मुकाबले को कांटे का बनाने की कोशिश की है। डिंपल यादव ने सोमवार को नामांकन दाखिल किया। इस दौरान डिंपल और अखिलेश से अधिक चर्चा में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव रहे। उनके नाम पर ही वोट मांगते अखिलेश यादव दिखते रहे। अब भाजपा ने ऐसा दांव खेला है, जिस चुनौती से निपटना अखिलेश यादव के लिए मुश्किलों भरा हो सकता है। शिवपाल यादव भले ही सोमवार को दिन भर लखनऊ कार्यालय में बैठकर भविष्य की रणनीति बनाते दिखे। मैनपुरी के चुनावी मैदान में वे दिखेंगे या नहीं, भविष्य तय करेगा। लेकिन, उनके साथी रहे रघुराज शाक्य की भाजपा से उम्मीदवारी ने चुनावी हलचल को बढ़ा दिया है। रघुराज शाक्य को शिवपाल सिंह यादव का करीबी माना जाता है। उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 से ठीक पहले प्रगतिशील समाजवादी पार्टी छोड़कर रघुराज शाक्य ने भाजपा का दामन थाम लिया था। रघुराज शाक्य इटावा सीट से दो बार सांसद रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में इसी साल फरवरी माह में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। करीब 53 वर्षीय रघुराज शाक्य प्रगतिशील समाज पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। रघुराज शाक्य वर्ष 1999 और 2004 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर इटावा से सांसद चुने गए। वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर इटावा सदर सीट से विधानसभा का चुनाव जीता था। उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 में इटावा सदर सीट से उम्मीदवारी कर रहे थे, लेकिन उन्हें चुनावी मैदान में नहीं उतारा गया।
मैनपुरी में जातीय समीकरण की बात करें तो ये सीट पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की बहुलता वाली सीट है। यहां सबसे ज्यादा यादव मतदाता हैं। इनकी संख्या करीब 3.5 लाख है। शाक्य, ठाकुर और जाटव मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं। इनमें करीब 1.60 लाख शाक्य, 1.50 लाख ठाकुर, 1.40 लाख जाटव, 1.20 लाख ब्राह्मण और एक लाख के करीब लोधी और राजपूतों के वोट हैं। वहीं, वैश्य और मुस्लिम मतदाता भी एक लाख के करीब हैं, जबकि कुर्मी मतदाता की संख्या एक लाख से ज्यादा है। मैनपुरी में अभी करीब 17 लाख वोटर्स हैं। इनमें 9.70 लाख पुरुष और 7.80 लाख महिलाएं हैं। 2019 में इस सीट पर 58.5% लोगों ने वोट डाला था।
मुलायम सिंह यादन ने भले ही 1996, 2004, 2009, 2014 और 2019 में पांच बार मैनपुरी सीट जीती हो, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में उनकी जीत का अंतर समाजवादी के लिए चिंता का विषय है। 2004 के लोकसभा चुनावों में 64 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन हासिल करने वाली समाजवादी पार्टी के लिए साल 2019 लोकसभा चुनाव में जीत का अंतर घटकर 94,389 रह गया, जबकि समाजवादी ने ये चुनाव बसपा के साथ मिलकर लड़ा था, जिसे दलितों का बड़ा समर्थक माना जाता है।
अखिलेश और डिंपल यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार को एकजुट करने की भी होगी। मैनपुरी लोकसभा के तहत इटावा नगर की जसवंतनगर विधानसभा सीट भी आती है। इस सीट से शिवपाल सिंह यादव विधायक हैं। शिवपाल सिंह और अखिलेश के बीच की तल्खी भी जगजाहिर है। वहीं, जसवंतनगर में शिवपाल यादव की पकड़ सबसे मजबूत मानी जाती है। साल 2019 के लोकसभा में मुलायम सिंह की जीत जसवंतनगर से ही सुनिश्चित हुई थी। इस सीट से मुलायम सिंह यादव ने 65 हजार से ज्यादा वोटों के लीड ली थी। ऐसे में शिवपाल यादव की नाराजगी डिंपल पर भारी पड़ सकती है। हालांकि, रामगोपाल यादव ने कहा कि शिवपाल की सहमति से ही मौनपूरी से डिंपल को प्रत्याशी बनाया गया।
मैनपुरी लोकसभा सीट पर उप चुनाव सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हो रहा है। यह मुलायम परिवार की परंपरागत सीट रही है। ऐसे में सपा की ओर से डिंपल यादव को उम्मीदवार बनाया गया। उनके पक्ष में चुनावी मैदान में उतरे अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव के नाम पर सभी वोट डिंपल को मिलने का दावा किया है। हालांकि, भावनाओं को एक तरफ रखें तो शाक्य वोट बैंक मुलायम सिंह यादव तक की चिंता इस सीट पर बढ़ाता रहा है। मैनपुरी सीट से लोकसभा चुनाव 2019 में महज 94,389 वोटों के अंतर सेजीता था। मुलायम के खिलाफ प्रेम सिंह शाक्य चुनावी मैदान में उतरे थे।
लोकसभा चुनाव 2019 में मुलायम सिंह यादव को 5,24,926 वोट मिले थे। वहीं, दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य को 4,30,537 वोट मिले थे। मुलायम सिंह यादव का यह आखिरी चुनाव माना जा रहा था। इस कारण भाजपा का कोई भी सीनियर नेता यहां प्रचार करने नहीं आया। इसके बाद इस प्रकार का वोट भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में था। उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 में भाजपा ने मैनपुरी सीट के तहत मैनपुरी विधानसभा और भोगांव विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया था। भाजपा ने पिछले दिनों में किलों को ढाहने की कवायद शुरू की है। आजमगढ़ और राजपुर लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के अभेद्य किले को उप चुनाव की बिसात पर ढाहा जा चुका है। इन सीटों पर भगवा परचम लहरा रहा है। ऐसे में रघुराज शाक्य डिंपल यादव की चुनौती बढ़ा सकते हैं। इतना मानकर चलिए, अब मैनपुरी लोकसभा सीट पर प्रचार करने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जाएंगे। अन्य सीनियर नेता भी। इसलिए मुकाबला कड़ा होगा।
भाजपा की तो 2014 से ही उत्तर प्रदेश की ऐसी सीटों पर नजर रही जिन पर बड़े राजनीतिक विरोधी काबिज हुआ करते थे। 2019 में भाजपा ने अमेठी हथिया लिया और 2022 में आजमगढ़ और रामपुर के बाद भाजपा का अगला निशाना मैनपुरी ही है।
डिम्पल का राजनातिक अनुभव देखे तो 2009 से उन्होंने अपना सफ़र शुरू किया था । तब अखिलेश यादव फिरोजाबाद और कन्नौज दो लोक सभा सीटों से चुनाव लड़े थे। दोनों सीटों से जीते भी, लेकिन बाद में फिरोजाबाद छोड़ दी थी। जब उपचुनाव की घोषणा हुई तो परिवार में डिंपल यादव को चुनाव लड़ाने पर सहमति बनी – ये डिंपल यादव का पहला चुनाव था।लेकिन तभी राज बब्बर भी कांग्रेस से टिकट लेकर मैदान में कूद पड़े। मुलायम परिवार में किसी ने भी राज बब्बर की परवाह नहीं की। असल में राज बब्बर पहले समाजवादी पार्टी के ही नेता हुआ करते थे, लेकिन पार्टी में उनको लाने वाले अमर सिंह से तकरार बढ़ जाने पर निकाल दिया गया था। राज बब्बर के बाद ही अमर सिंह ने अमिताभ बच्चन और जया बच्चन को मुलायम सिंह यादव के परिवार और पार्टी से जोड़ा था, लेकिन उनके बढ़ते प्रभाव से राज बब्बर को घुटन होने लगी थी , और फिर नौबत ये आ गयी कि पार्टी से ही बेदखल होना पड़ा । फिरोजाबाद उपचुनाव राज बब्बर के लिए बदला लेने का बड़ा मौका समझ में आया।चुनाव प्रचार के लिए जब राज बब्बर ने सलमान खान को बुला लिया तो, अमर सिंह ने संजय दत्त को बुला लिया डिंपल यादव के लिए वोट मांगने। अमर सिंह ने भी संजय दत्त के साथ रैली की, लेकिन सलमान खान को वॉन्टेड बोल कर सारे किये कराये पर खुद ही पानी फेर दिया।नतीजा आया तो डिंपल यादव चुनाव हार चुकी थीं और राज बब्बर जीत कर हिसाब बराबर कर चुके थे। पूरे परिवार में मायूसी छा गयी और उबरने में तीन साल लग गये , लेकिन ये भी है कि डिंपल की वो हार समाजवादी पार्टी के लिए संजीवनी बूटी साबित हुई। अखिलेश यादव के लिए डिंपल यादव की हार बहुत बड़ा सदमा रही। तब समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर हो चुकी थी और मायावती अपनी सोशल इंजीनियरिंग के जरिये सरकार बनवा चुकी थीं । अखिलेश यादव ने सलाह मशविरा किया और साइकिल लेकर निकल पड़े।उसके बाद तो अगले विधानसभा चुनाव की तारीख आने तक अखिलेश यादव साइकिल पर ही सवार रहे और गांव गांव घूम कर लोगों से समाजवादी पार्टी के लिए वोट मांगते रहे। और तब तक मैदान में डटे रहे जब तक लोगों ने समाजवादी पार्टी को सत्ता नहीं सौंप दी।
ये तो मुलायम सिंह का दबदबा ही रहा जो सारी चीजें मैनेज कर दिये और 2012 में डिंपल यादव को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया और वो संसद पहुंच गयीं। खास बात ये है कि तब भी डिंपल यादव को उपचुनाव में ही उतारा गया था और वो भी अखिलेश यादव की ही खाली की हुई सीट से। असल में 2012 में जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो मुलायम सिंह यादव पीछे हट गये और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने गये और उसी के चलते उनकी कन्नौज सीट खाली हो गयी थी। अव्वल को मुलायम परिवार को छाछ फूंक कर पीने की जरूरत नहीं थी, लेकिन सच तो यही रहा कि फिरोजबाद चुनाव का नतीजा दूध से जलने जैसा ही रहा। फिर क्या था, मुलायम सिंह यादव ने पूरी ताकत झोंक दी। फिर भी एक आदमी चुनाव मैदान में टपक पड़ा था। बहरहाल जैसे तैसे वो भी मैनेज हो गया और डिंपल यादव निर्विरोध चुनाव जीत कर संसद पहुंच गयीं।
फिरोजाबाद की ही तरह पिछले आम चुनाव में हार का मुंह देख चुकीं डिंपल यादव के लिए मैनपुरी का मैदान कोई नया नहीं है, लेकिन कन्नौज की तरह तो वो मैनेज होने से रहा। बल्कि, ये लड़ाई तो और भी ज्यादा मुश्किल होने वाली है।मुलायम सिंह ने तो 2019 में ही मैनपुरी के लोगों से बोल दिया था कि वो अपना आखिरी चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि, वो अपना कार्यकाल भी नहीं पूरा कर पाये। और अब उनके विरासत को बचाने और बनाये रखने की जिम्मेदारी बेटे अखिलेश यादव पर आ चुकी है और यही वजह है कि अखिलेश यादव ने अपने बाद समाजवादी पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा मैदान में उतार दिया है।हो सकता है अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव के आखिरी चुनाव लड़ने की बात सोच कर ही मैनपुरी संसदीय क्षेत्र की विधानसभा सीट करहल से चुनाव लड़ने का फैसला किया हो ये तो है ही कि आजमगढ़ के मुकाबले अखिलेश यादव के लिए मैनपुरी का किला बचाना कहीं ज्यादा जरूरी है।
मैनपुरी संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें हैं, जिनमें अखिलेश यादव की करहल सहित तीन विधानसभा सीटें समाजवादी पार्टी के पास हैं, जबकि दो सीटों पर भाजपा काबिज है। इस लिहाज से देखा जाये तो इलाके में आधे से ज्यादा दखल तो समाजवादी पार्टी का ही है, लेकिन चुनाव भी तो सर्जरी की ही तरह होता है जिसमें हमेशा ही जोखिम बना रहता है।मैनपुरी सीट पर समाजवादी पार्टी का 1996 से ही कब्जा रहा है, जब मुलायम सिंह यादव खुद वहां से सांसद बने थे अब तक मैनपुरी लोक सभा सीट पर दो बार उपचुनाव भी हो चुके हैं और ये तब से तीसरा उपचुनाव है।2004 में हुआ उपचुनाव जीत कर धर्मेंद्र यादव संसद पहुंचे थे, लेकिन 2022 के आजमगढ़ उपचुनाव में वो भाजपा के दिनेश लाल निरहुआ से मात खा गये।
2014 में मुलायम सिंह यादव मैनपुरी और आजमगढ़ दो सीटों से चुनाव लड़े और जीतने के बाद मैनपुरी सीट छोड़ दी थी। तब मुलायम परिवार के ही तेज प्रताप यादव सांसद बने – और अब उनकी बहू डिंपल यादव मैदान में उतर चुकी हैं।हाल फिलहाल हो रहे उपचुनाव एक हिसाब से 2024 के आम चुनाव के लिए फीडबैक माने जा रहे हैं, लेकिन मैनपुरी उपचुनाव का नतीजा तो समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार डिम्पल यादव के लिए आसान नहीं लगाती। खैर नतीजा जो है वह 8 दिसंबर को आएगा तब तक बहुत कुछ राजनीतिक उलटफेर हो सकता है । (युवराज)
– अशोक भाटिया
बिग बॉस 16 में मिस नेपाल मनीषा आचार्या की हो सकती है wild Card एन्ट्री !
मुम्बई। Big boss के घर मे कई बार ऐसे कंटेस्टेंट की वाइल्ड कार्ड एंट्री हो जाती है जो अपने दम पर दर्शकों का खूब मनोरंजन करते है यही वजह है कि बिग बॉस की टीम ऐसे पर्सनालिटी की तलाश करती है जो वाकई में दमदार हो, कुछ ऐसी है पर्सनालिटी के लिए जानी जाती है मिस नेपाल मनीषा आचार्य।
खबर आ रही है कि मनीषा आचार्या जिनको आप लोगों ने कई वीडियो एल्बम और कई प्रोजेक्ट में देखा है वो अगर आने वाले समय मे बिग बॉस के घर में एंट्री मार ले तो इसमें आश्चर्य नहीं होगा।
इस खबर की पुष्टि फिलहाल ना ही बिग बॉस की टीम ने किया और ना ही मनीषा आचार्या ने, लेकिन सूत्रों के हवाले से खबर है कि मनीषा से इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी चर्चा चल रही और जल्द ही इस खबर पर मोहर लग सकता है।












