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19 साल बाद संजय निरुपम ने की घर वापसी

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कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद अब संजय निरुपम फिर से शिवसेना में शामिल हो गए हैं। करीब 19 साल बाद घर वापसी करते हुए उन्होंने शिवसेना का दामन थाम लिया। अपना राजनीतिक करियर शिवसेना से ही शुरू करने वाले संजय निरुपम ने 2005 में शिवसेना से इस्तीफा दे दिया था और कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ गए थे, लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी से बगावत कर दी थी, जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने उन्हें 6 सालों के लिए पार्टी से निकाल दिया था, हालाँकि इससे पहले ही उन्होंने कॉन्ग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। अब उन्होंने 19 साल बाद शिवसेना में वापसी की है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में उनका स्वागत किया। खास बात ये है कि संजय निरुपम ने जब शिवसेना से इस्तीफा दिया था, तब पार्टी बालासाहेब ठाकरे के हाथों में थी, लेकिन अब पार्टी का असली निशान और पार्टी एकनाथ शिंदे के हाथों में है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संजय निरुपम की शिवसेना में वापसी को ‘घर वापसी’ बताया है। उन्होंने एक्स पर निरुपम की पार्टी से जुड़ने की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “पूर्व सांसद और मुंबई कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम लगभग बीस साल बाद घर वापसी के बाद आज आधिकारिक तौर पर शिवसेना पार्टी में शामिल हो गए। ठाणे के आनंद आश्रम में हुए इस पार्टी प्रवेश के दौरान वह अपने कई कार्यकर्ताओं के साथ सार्वजनिक तौर पर शिवसेना में शामिल हुए।”

संजय निरुपम ने अपना करियर बतौर पत्रकार शुरू किया था। उन्होंने 1993 में सामना के हिंदी संस्करण ‘दोपहर का सामना’ के संपादक का दायित्व संभाला और शिवसेना में शामिल हो गए। सामना शिवसेना का मुखपत्र है। उन्हें साल 1996 में शिवसेना ने राज्यसभा भेजा था। वो दो बार राज्यसभा सांसद रहे और 2005 में उन्होंने शिवसेवा के साथ ही राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वो कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। वो मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं, तो कॉन्ग्रेस ने उन्हें कई राज्यों की जिम्मेदारियाँ भी सौंपी थी।

संजय निरुपम ने साल 2009 में मुंबई उत्तर लोकसभा सीट से चुना लड़ा और जीत हासिल की। हालाँकि साल 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2019 में कॉन्ग्रेस ने उनकी सीट पर उर्मिला मांतोड़कर को चुनाव लड़ाया था। वो इस साल लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन गठबंधन में मुंबई नॉर्थ सीट शिवसेना (उद्धव ठाकरे) को चली गई, जिसके बाद उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद दिया और कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ दी और अब वो शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए हैं।

 

रामजी गुलाटी ने अपनी नवीनतम कृति, “यार नाराज़ न हो” का अनावरण किया 

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मुंबई (अनिल बेदाग) : संगीत के उस्ताद रामजी गुलाटी ने अपनी नवीनतम कृति, “यार नाराज़ न हो” का अनावरण किया है, जो दोस्ती के लिए एक दिल को छू लेने वाला गीत है, जिसमें मनीष जैन, भाविन भानुशाली, मुकेश जैन और मोहित वशिष्ठ जैसे प्रतिभाशाली कलाकार शामिल हैं। विपुल मूडी अख्तर द्वारा लिखे गए बोलों के साथ, यह गीत दोस्ती के सार को फिर से परिभाषित करने और दुनिया भर के श्रोताओं के साथ गहराई से जुड़ने का वादा करता है।
ऐसी दुनिया में जहाँ बंधन क्षणभंगुर हैं और रिश्ते अक्सर सतही होते हैं, “यार नाराज़ न हो” उभर कर आता है  प्रामाणिकता और एकजुटता के प्रतीक के रूप में। अपने मार्मिक बोलों के माध्यम से, जो कहते हैं कि ‘ये सबका ख्याल रखते हैं कि यार नाराज़ न हो’ और दिल को छू लेने वाली रचना के माध्यम से, यह गीत दोस्ती की पेचीदगियों को उजागर करता है, दोस्तों से हर अच्छे-बुरे समय में एक-दूसरे का साथ देने का आग्रह करता है। इस मनमोहक धुन के पीछे के उस्ताद रामजी गुलाटी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “यार नाराज़ न हो’ एक ऐसा सफ़र है जो दोस्ती की खूबसूरती का जश्न मनाता है। ऐसे प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ काम करना एक समृद्ध अनुभव रहा है, और मुझे विश्वास है कि हमारा सामूहिक प्रयास हर जगह श्रोताओं के दिलों को छूएगा।”
मनीष जैन ने इस प्रोजेक्ट पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, “यार नाराज़ न हो’ का हिस्सा बनना अविश्वसनीय रूप से पुरस्कृत करने वाला रहा है। यह मेरी पहली रिलीज़ है और मुझे सभी से इतना प्यार पाकर बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा गाना मिलना दुर्लभ है जो दोस्ती के सार को इतनी प्रामाणिकता से समेटे हुए हो। मुझे उम्मीद है कि हमारा गायन दर्शकों के दिलों को छूएगा और उन्हें अपने बंधनों को संजोने के लिए प्रेरित करेगा।”
भाविन भानुशाली ने भी यही भावना दोहराते हुए कहा, “दोस्ती एक खजाना है, और ‘यार नाराज़ न हो’ खूबसूरती से इसके सार को दर्शाता है।  हम एक लंबा सफर तय कर चुके हैं, हमने साथ में कुछ बेहतरीन काम किए हैं जैसे ‘रुला के गया इश्क तेरा’, ‘तू भी रोएगा’ और भी बहुत कुछ, रामजी के साथ फिर से काम करना बहुत अच्छा है। ऐसे जोशीले लोगों के साथ काम करना सौभाग्य की बात है, और मुझे पूरा विश्वास है कि यह गाना श्रोताओं के बीच भाईचारे की भावना को बढ़ावा देगा।”
मुकेश जैन ने अपना उत्साह साझा करते हुए कहा,”संगीतकारों के रूप में, हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसी कला बनाएँ जो लोगों के साथ गहरे स्तर पर जुड़ती हो। ‘यार नाराज़ न हो’ कनेक्शन को बढ़ावा देने और दोस्ती को मजबूत करने में संगीत की शक्ति का एक प्रमाण है। मुझे इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने पर गर्व है।”
मोहित वशिष्ठ ने गाने के महत्व पर विचार करते हुए कहा,”तेज़ गति वाली दुनिया में, जो वास्तव में मायने रखता है उसे नज़रअंदाज़ करना आसान है। ‘यार नाराज़ न हो’ रिश्तों को प्राथमिकता देने और हमारे जीवन को समृद्ध करने वाले बंधनों को पोषित करने के लिए एक सौम्य अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है।  मुझे उम्मीद है कि श्रोताओं को इसकी धुन में सांत्वना और प्रेरणा मिलेगी।”
गीतकार मूडी अख्तर ने अपनी रचनात्मक दृष्टि साझा करते हुए कहा, “यार नाराज़ न हो’ के बोल लिखना एक बहुत ही निजी अनुभव था। दोस्ती एक सार्वभौमिक विषय है जो सभी क्षेत्रों के लोगों के साथ प्रतिध्वनित होता है, और मैं ईमानदारी और प्रामाणिकता के साथ इसके सार को पकड़ना चाहता था। मैं ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों के साथ सहयोग करने के लिए आभारी हूं और अपनी रचना को दुनिया के साथ साझा करने के लिए उत्साहित हूं। “
गीत यहाँ देखें*- https://youtu.be/c0cDpkB7MkA?si=muIPmBLjVixBfZhn

गौतम अदाणी ने ब्रिटिश उच्चायुक्त से की मुलाकात, साइबर सिक्योरिटी पर चर्चा

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नई दिल्ली: 

अदाणी ग्रुप (Adani Group) के चेयरमैन गौतम अदाणी (Gautam Adani) ने भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरून (Lindy Cameron) ने गुरुवार को मुलाकात की है. इस दौरान अदाणी और कैमरून के बीच इराक-अफगानिस्तान समेत तमाम मुद्दों पर बात हुई. अदाणी ने अपने X हैंडल से एक फोटो शेयर करके लिंडी कैमरून से मीटिंग की जानकारी दी है.अदाणी ने X पर पोस्ट किया, “भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरून से मुलाकात हुई. इस दौरान इराक-अफगानिस्तान समेत दुनियाभर में उनके कार्यकाल, साइबर सिक्योरिटी, न्यूक्लियर पावर का भविष्य समेत कई मुद्दों पर कैमरून की राय जानना दिलचस्प रहा. हम भारत-ब्रिटेन के रिश्ते को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें शुभकामनाएं देते हैं.”

ब्रिटेन ने 11 अप्रैल को लिंडी कैमरून को भारत में अपना नया उच्चायुक्त नियुक्त किया. उन्होंने एलेक्स एलिस की जगह ली है. लिंडी कैमरून और गौतम अदाणी की ये मीटिंग भारत-यूके के बीच विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए चल रहे प्रयासों को रेखांकित करती है.

क्यों बढ़ रही है बुजुर्गों की उपेक्षा* 

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   रोशनी साहू  –
आजकल प्राय: देखने-सुनने में आता है कि परिवार में बुजुर्गों की उपेक्षा बढ़ती ही जा रही है। घर के सदस्य बुजुर्गों का सम्मान नहीं करते, उनका ख्याल नहीं रखते। बुजुर्गों के प्रति वे संकुचित सोच रखने लगे हैं। आखिर क्यों बढ़ रही है बुजुर्गों की इतनी उपेक्षा? क्यों पीने पड़ रहे हैं उन्हें अपमान व तिरस्कार के कड़वे घूंट? बुजुर्गों के प्रति उपेक्षा का सबसे बड़ा कारण है औद्योगीकरण के कारण हुआ संयुक्त परिवारों का विघटन। संयुक्त परिवारों के विघटन से उपजी अपसंस्कृति ने बुजुर्गों को हाशिए पर रख छोड़ा है। संयुक्त परिवार के सभी सदस्य बुजुर्गों का आदर-सम्मान करते थे, लेकिन एकाकी परिवार में सम्मान गायब-सा हो चला है।
यदि कोई वृद्ध व्यक्ति आर्थिक रूप से सम्पन्न है तो माना जाता है कि उसका बुढ़ापा अच्छा बीतता है। पहले संयुक्त परिवारों के साथ तो यह बात लागू होती थी पर आज के छोटे और न्यूक्लियस परिवारों में यह बात लागू नहीं होती। छोटे परिवारों के एक या दो बच्चे देश-विदेश में कहीं बसते हैं तब उनके वृद्ध मां-बाप के आर्थिक रूप से सम्पन्न होने के बावजूद उनकी स्थिति अच्छी नहीं होती, क्योंकि वे भावनात्मक रूप से जहां बच्चों से जुडऩा चाहते हैं, वहीं बच्चे उन्हें पैसा भेजकर आर्थिक रूप से सम्पन्नता प्रदान कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ लेते हैं। यह समस्या सिर्फ भारत की ही नहीं वरन् सम्पूर्ण विश्व की है।
नई पीढ़ी का युवा पश्चिमी चकाचौंध में उलझकर बुजुर्गों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से भागना चाहता है। शादी-विवाह होते ही वे अपनी अलग दुनिया बसाकर बुजुर्गों का तिरस्कार कर उन्हें घर से बाहर निकालने तक में नहीं सकुचाते। किसी वृद्ध माता-पिता के सेवानिवृत्त होने पर उन्हें मिलने वाले रुपयों के लिए बेटों में लड़ाई-झगड़े होने लगते हैं और मनमाफिक रकम न मिलने पर वे उनसे नाता ही तोड़ लेते हैं या फिर बुजुर्ग मां-बाप को अपने साथ रखने की झंझट से बचने के लिए बेटे सभी भावनात्मक रिश्तों को भुला बैठते हैं, जिससे बुजुर्गों को किसी वृद्धाश्रम का या भीख मांगने तक का सहारा लेना पड़ता है। (विनायक फीचर्स)

कांग्रेस के घोषणा पत्र में मुस्लिम लीग की छाप – पीएम

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एएनआई, जामनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गुजरात के जामनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कुप्रचार से शुरू हुई कांग्रेस की राजनीति, आज कुंठा से घिर चुकी है। इनकी जो कुंठा पहले गुजरात को लेकर थी, आज कांग्रेस के भीतर देश की प्रगति को लेकर भी वहीं कुंठा, वहीं नफरत नस नस में भरी पड़ी है।

पीएम मोदी ने कहा कि गुजरात ने वर्तमान में देश के लिए जितना योगदान दिया है, उतना ही योगदान अतीत में भी दिया है। जामनगर के महाराजा दिग्विजय सिंह जी ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय पोलैंड के नागरिकों को यहां शरण दी थी। आज भी जब पोलैंड की पार्लियामेंट शुरू होती है, तो सबसे पहले जामनगर का और महाराजा दिग्विजय सिंह जी का स्मरण होता है, फिर पार्लियामेंट शुरू होती है।

पीएम बोले- मैं यहां आशीर्वाद लेने आया हूं

पीएम ने कहा कि उन्होंने (महाराजा दिग्विजय सिंह जी ने) जो बीज बोए, उसके कारण आज भी पोलैंड के साथ हमारा रिश्ता मजबूत है। जाम साहब के परिवार के साथ मेरा नाता रहा है, उनका आशीर्वाद रहा है। आज मैं यहां आते समय, उनका आशीर्वाद लेने गया और जब जाम साहब विजयी भव: कहते हैं, तब विजय निश्चित हो जाती है। हमारे देश के राजा-महाराजाओं ने अखंड भारत बनाने के लिए अपना पीढ़ियों का राज-पाठ दे दिया था। उनके योगदान को ये देश कभी भूल नहीं सकता है।

हम भारत की अर्थव्यवस्था को 5वीं नंबर पर ले आए

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया में भारत का कद और सम्मान बढ़ रहा है। तो कांग्रेस के शहजादे और उनका पूरा ecosystem विदेशों में जाकर भारत को बदनाम करने के लिए लंबे-लंबे भाषण देकर आते हैं। कांग्रेस ने जब सत्ता छोड़ी, तब हमारे देश की अर्थव्यवस्था दुनिया में 11वें नंबर पर थी। देश जब आजाद हुआ था, तब देश की अर्थव्यवस्था 6ठें नंबर पर थी, वहां से कांग्रेस 11वें नंबर पर ले गए। एक चायवाला आया, उसकी रगों में गुजराती खून है। दुनिया में 11वें नंबर पर जो इकोनॉमी थी, वो अब 5वें नंबर पर पहुंच गई।

कांग्रेस के घोषणा पत्र में मुस्लिम लीग की छाप

पीएम मोदी ने कहा कि जब कांग्रेस का घोषणा पत्र आया, तब मैंने देश को चेताया था, खासकर देश का जो विचारक वर्ग है, उसे इशारा किया था कि कांग्रेस का घोषणा पत्र देश के लिए खतरे की घंटी है। मैंने साफ-साफ कहा था कि मैं कांग्रेस के घोषणा पत्र में मुस्लिम लीग की छाप देख रहा हूं। देश की आजादी से पहले भारत के विभाजन के लिए जो नैरेटिव गढ़े गए थे, आज कांग्रेस का घोषणा पत्र उन्हीं बातों को लेकर देशवासियों से वोट मांग रहा है। इंडी अलायंस की रैलियों में उनके नेता मुस्लिम वोटर्स से वोट जिहाद करने की अपील कर रहे हैं।

तुष्टीकरण के जरिए वोट बैंक की राजनीति कर रही कांग्रेस

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस समय दो रणनीतियों पर चुनाव लड़ रही है। एक जाति के नाम पर समाज को बांटना और दूसरा तुष्टीकरण के जरिए अपने वोट बैंक को एकजुट करना। कांग्रेस पार्टी एससी/एसटी और ओबीसी के आरक्षण को छीनकर, धर्म के आधार पर आरक्षण देने के लिए संविधान को परिवर्तित करने और मुस्लिमों को आरक्षण देने की तैयारी कर रही है।

भाजपा ने कैसरगंज से करण भूषण सिंह को प्रत्याशी बनाया

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में यूपी की सबसे हॉट सीट पर भाजपा ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने रायबरेली लोकसभा सीट से दिनेश प्रताप सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस अभी इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतार पाई है। इसके साथ ही भाजपा ने कैसरगंज लोकसभा सीट पर टिकट की पहेली सुलझाते हुए करण भूषण सिंह को प्रत्याशी बनाया है।

करण भूषण भाजपा सांसद बृज भूषण सिंह के पुत्र हैं। करण भूषण सिंह का जन्म 13 दिसंबर 1990 को हुआ था। करण भूषण सिंह के एक बेटी और एक बेटा है। वह डबल ट्रैप शूटिंग के नेशनल खिलाड़ी रह चुके हैं। करण भूषण विदेश से पढ़े लिखे हैं।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं और वह पहली बार कोई चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसी खबर है कि करण भूषण तीन मई को अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए चार सेट नामांकन पत्र भी खरीदा गया है।

कोयला उत्पादन में 7.41 प्रतिशत की वृद्धि

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 Delhi  अप्रैल 2024 में भारत का कोयला उत्पादन 78.69 मीट्रिक टन (अनंतिम) तक पहुंच गया,  जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 7.41 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ 73.26 मीट्रिक टन था। अप्रैल 2024 के दौरान,  कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने 61.78 मीट्रिक टन (अनंतिम) का कोयला उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह 57.57 मीट्रिक टन था। इसके अतिरिक्त, अप्रैल  2024 में कैप्टिव/अन्य द्वारा कोयला उत्पादन 11.43 मीट्रिक टन (अनंतिम) था, जो पिछले वर्ष से 12.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है और यह 10.12 मीट्रिक टन था।
अप्रैल 2024 में भारत का कोयला प्रेषण 85.10 मीट्रिक टन (अनंतिम) तक पहुंच गया,  जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 6.07 प्रतिशत अधिक है, जब यह 80.23 मीट्रिक टन दर्ज किया गया था। अप्रैल 2024 के दौरान, कोल इंडिया लिमिटेड ने 64.26 मीट्रिक टन (अनंतिम) कोयला भेजा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 3.18 प्रतिशत की वृद्धि है और यह 62.28 मीट्रिक टन था। अप्रैल में कैप्टिव/अन्य द्वारा कोयला प्रेषण 15.16 मीट्रिक टन (अनंतिम) दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष से 26.90 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है यह 11.95 मीट्रिक टन था।

संयुक्त व्यापार समिति की बैठक न्यूजीलैंड में संपन्न

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New Delhi –  वाणिज्य सचिव श्री सुनील बर्थवाल के नेतृत्व में 26-27 अप्रैल 2024 न्यूजीलैंड में 11वीं भारत-न्यूजीलैंड संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) की बैठक द्विपक्षीय आयोजित की गई। बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। न्यूजीलैंड का प्रतिनिधित्व वहां के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले ने किया। इस दौरान  कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी और न्यूजीलैंड के विदेश मामलों और व्यापार सचिव श्री ब्रुक बैरिंगटन भी मौजूद थे।

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भारत और न्यूजीलैंड ने दोनों अर्थव्यवस्थाओं और द्विपक्षीय व्यापार और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाओं पर चर्चा की। इन  बैठकों में द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने और दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और मौजूदा घनिष्ठ संबंधों तथा व्यावसायिक संपर्कों को सुदृढ़ करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

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बैठकों में बाजार पहुंच के मुद्दों, आर्थिक सहयोग परियोजनाओं पर प्रगति की समीक्षा की गई और नई पहलों के अवसरों की संभावनाएं खोजी गई। दोनों पक्षों ने मजबूत द्विपक्षीय आर्थिक संवाद जारी रहने और  कृषि जैसे क्षेत्रों पर कार्य समूहों के गठन पर चर्चा की। इस दौरान खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण एवं परिवहन; प्रमुख व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर चल रहे सहयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए वानिकी और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्रों पर बल दिया गया। चर्चा में बागवानी क्षेत्र में सहयोग प्रमुख रहा, जिसमें कीवी फल क्षेत्र (गुणवत्ता और उत्पादकता, पैक हाउसों में उचित भंडारण और उनके  उपयुक्त परिवहन) के साथ-साथ डेयरी क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। एक बार कार्य समूह गठित हो जाने के बाद, भारत और न्यूजीलैंड नियमित अंतराल पर उन कार्य समूहों द्वारा की गई प्रगति और उनकी सिफारिशों की समीक्षा करेंगे।

बैठकों में आपसी हित के द्विपक्षीय व्यापार मामलों पर चर्चा की गई, जिनमें बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाएं (एनटीबी) और अंगूर, भिंडी और आम जैसे उत्पादों पर स्वच्छता तथा फाइटोसैनिटरी (एसपीएस) उपाय,  जैविक में पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (एमआरए) से संबंधित मुद्दे शामिल थे। उत्पाद आयात-निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सरल बनाने के लिए वाहन घरेलू मानकों की समरूपता की पारस्परिक मान्यता आदि शामिल है। दोनों पक्षों ने मौजूदा तंत्र के तहत रचनात्मक बातचीत और सहयोग के माध्यम से इन मुद्दों को हल करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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विभिन्न  स्तरों पर हुई चर्चाओं के दौरान सेवा क्षेत्र और द्विपक्षीय व्यापार के लिए इसके पैमाने को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसमें आपसी व्यापार के साथ-साथ दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने इसमें काफी रुचि दिखाई दी। साहसिक पर्यटन, नर्सिंग, टेली-मेडिसिन, शिक्षा, हवाई कनेक्टिविटी, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (जहां भी संभव हो), स्टार्टअप आदि सहित आतिथ्य क्षेत्र पर चर्चा हुई।

फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग पर विस्तार से चर्चा की गई,  जिसमें नियामक प्रक्रिया की फास्ट ट्रैकिंग को अपनाना और तुलनीय विदेशी नियामकों की निरीक्षण रिपोर्ट का उपयोग करके विनिर्माण सुविधाओं की गुणवत्ता का मूल्यांकन करना शामिल है। भारत से दवाओं की अधिक सोर्सिंग और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में सहयोग पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने डिजिटल व्यापार, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान, सीमा पार भुगतान प्रणाली आदि में सहयोग के अवसरों की संभावनाओं पर संक्षेप में चर्चा की। इस दौरान जी20, इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी  (आईपीईएफ) और अन्य बहुपक्षीय और बहुपक्षीय संघों जैसे प्लेटफार्मों के भीतर सहकारी भागीदारी और अनिवार्य आर्थिक चुनौतियों और अवसरों को कैसे संबोधित किया जाए, इस पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रणाली को बनाए रखने के लिए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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बैठक इस बात पर सहमति बनी कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच मौजूदा सहयोग को निरंतर बातचीत के जरिये आगे बढ़ाया जा सकता है। इसलिए दोनों पक्षों ने मुद्दों को सुलझाने के लिए सभी स्तरों पर  नियमित बैठकें आयोजित करने के साथ-साथ अनछुए क्षेत्रों में सहयोगात्मक और सहकारी गतिविधियों पर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

खाली-पीली थोड़ी जाएंगे दिल्ली शिवराज सिंह चौहान

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मध्य प्रदेश के पूर्व सिंह शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) विदिशा लोकसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार हैं. अब वो दिल्ली जाने का दावा कर रहे हैं. दतिया (Datia) जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दिल्ली जाने का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि ‘मामा’ अब दिल्ली जा रहे हैं. खाली-पीली थोड़ी जाएंगे, वहां से प्रदेश के लिए सौगात लेकर आएंगे.

मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दातिया के भउआपुरा में जनसभा को संबोधित किया. शिवराज ने कहा, ”राज्य की बहनों से कहना चाहता हूं कि आपको भाई ने लाडली बहना बनाया है लेकिन आगे आपको लखपति बहना बनाएंगे. मैंने कहा है तो बनाउंगा, मोहन यादव जी यहां की सारी योजनाओं को जारी रखेंगे. अब ये मामा दिल्ली जा रहा है. हम भी खाली पीली थोड़ी जाएंगे. प्रदेश के लिए सौगात लेकर आएंगे.”

कांग्रेस की बुद्धि पर बैठी मंथरा- शिवराज
शिवराज ने इस दौरान विपक्षी कांग्रेस पर भी हमला किया और कहा, ” लोकसभा का चुनाव हो रहा है. कांग्रेस में अब ऐसा कुछ नहीं बचा कि कांग्रेस को वोट दिया जाए. ना दिल्ली में सरकार और ना भोपाल में  सरकार. कांग्रेस को वोट देने से कोई फायदा नहीं है. कांग्रेस ने उल्टे-सीधे फैसले किए हैं. अयोध्या में राम मंदिर को लेकर चारों तरफ खुशी का माहौल था लेकिन एक पार्टी कांग्रेस थी जिसने कहा था कि मुहुर्त नहीं है. ऐसा लगा जैसे इसकी बुद्धि पर मंथरा बैठी हो, लिखकर कहा कि हम नहीं जाएंगे.”

पूर्व सीएम शिवराज ने कहा, ”कांग्रेस छोड़-छोड़कर लोग जा रहे हैं. किसी पार्टी की इतनी दुर्गति देखी है क्या. ये कांग्रेस के कर्मों के कारण हुआ है. बीजेपी देश की सेवा करने वाली पार्टी है. हमने जो कहा वह किया. अयोध्या में राम मंदिर बनाना हो, धारा 370 हटाना हो या फिर समृद्ध भारत बनाना हो बीजेपी ने किया.  मोदी जी आज हैं और कल भी रहेंगे और भारत को विश्व गुरु बनाएंगे.’

इंडिया गठबंधन के पीएम उम्मीदवार को लेकर शिवराज का तंज
शिवराज सिंह चौहान ने इंडिया गठबंधन पर तंज करते हुए कहा, ” इंडिया गठबंधन वाले बता दें कि आपका पीएम कौन बनेगा. धन्ना बनेगा, पन्ना बनेगा, कल्ला बनेगा या लल्ला बनेगा या जुम्मन बनेगा, कुछ तो बता दो. उन्होंने (इंडिया गठबंधन) कहा कि बाद में फैसला कर लेंगे और आपस में लड़ लेंगे. बारी-बारी बन जाएंगे. बताइए ऐसे हाथों में देश जाने देना चाहिए क्या

जीएसटी संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया

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New Delhi- अप्रैल 2024 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह 2.10 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर 12.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, जो घरेलू लेन-देन (13.4 प्रतिशत की वृद्धि) और आयात (8.3 प्रतिशत की वृद्धि) में मजबूत वृद्धि से संभव हुआ है। रिफंड के बाद, अप्रैल 2024 के लिए शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.92 लाख करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 15.5 प्रतिशत की शानदार वृद्धि को दर्शाता है।

सभी घटकों में सकारात्मक प्रदर्शन:

अप्रैल 2024 के संग्रह का विवरण:  

  • केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी): 43,846 करोड़ रुपये;
  • राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी): 53,538 करोड़ रुपये;
  • एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी): 99,623 करोड़ रुपये, जिसमें आयातित वस्तुओं पर एकत्र 37,826 करोड़ रुपये भी शामिल है;
  • उपकरः 13,260 करोड़ रुपये, जिसमें आयातित वस्तुओं पर एकत्र किए गए 1,008 करोड़ शामिल हैं।

अंतर-सरकारी निपटानः अप्रैल, 2024 में केंद्र सरकार ने संग्रहित आईजीएसटी से सीजीएसटी को  50,307 करोड़ रुपये और एसजीएसटी को 41,600 करोड़ रुपये का निपटान किया। इसका मतलब है कि नियमित निपटान के बाद अप्रैल, 2024 में सीजीएसटी के लिए 94,153 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 95,138 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त होगा।

नीचे दिया गया चार्ट चालू वर्ष के दौरान मासिक सकल जीएसटी राजस्व में रुझान को दर्शाता है। तालिका-1 अप्रैल 2023 की तुलना में अप्रैल 2024 के दौरान प्रत्येक राज्य में एकत्र किए गए जीएसटी के राज्यवार आंकड़े दर्शाती है। तालिका-2 अप्रैल 2024 में प्रत्येक राज्य के निपटान के बाद जीएसटी राजस्व के राज्यवार आंकड़े दर्शाती है।

चार्ट: जीएसटी संग्रह में रुझान

 

 

तालिका 1अप्रैल, 2024 के दौरान जीएसटी राजस्व में राज्यवार वृद्धि[1]

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अप्रैल-23 अप्रैल-24 वृद्धि (%)
जम्मू और कश्मीर 803 789 -2%
हिमाचल प्रदेश 957 1,015 6%
पंजाब 2,316 2,796 21%
चंडीगढ़ 255 313 23%
उत्तराखंड 2,148 2,239 4%
हरियाणा 10,035 12,168 21%
दिल्ली 6,320 7,772 23%
राजस्थान 4,785 5,558 16%
उत्तर प्रदेश 10,320 12,290 19%
बिहार 1,625 1,992 23%
सिक्किम 426 403 -5%
अरुणाचल प्रदेश 238 200 -16%
नगालैंड 88 86 -3%
मणिपुर 91 104 15%
मिजोरम 71 108 52%
त्रिपुरा 133 161 20%
मेघालय 239 234 -2%
असम   1,513 1,895 25%
पश्चिम बंगाल 6,447 7,293 13%
झारखंड 3,701 3,829 3%
ओडिशा 5,036 5,902 17%
छत्तीसगढ़ 3,508 4,001 14%
मध्य प्रदेश 4,267 4,728 11%
गुजरात 11,721 13,301 13%
दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव 399 447 12%
महाराष्ट्र 33,196 37,671 13%
कर्नाटक 14,593 15,978 9%
गोवा 620 765 23%
लक्षद्वीप 3 1 -57%
केरल 3,010 3,272 9%
तमिलनाडु 11,559 12,210 6%
पुडुचेरी 218 247 13%
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 92 65 -30%
तेलंगाना 5,622 6,236 11%
आंध्र प्रदेश 4,329 4,850 12%
लद्दाख 68 70 3%
 अन्य क्षेत्र 220 225 2%
केन्द्रीय क्षेत्राधिकार 187 221 18%
कुल योग 1,51,162 1,71,433 13%

 

तालिका-2: आईजीएसटी का एसजीएसटी और एसजीएसटी हिस्सा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को दिया गया अप्रैल (करोड़ रुपये में)

  निपटान-पूर्व एसजीएसटी निपटान-पश्चात एसजीएसटी[2]
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अप्रैल-23 अप्रैल -24 वृद्धि अप्रैल -23 अप्रैल -24 वृद्धि
जम्मू और कश्मीर 394 362 -8% 918 953 4%
हिमाचल प्रदेश 301 303 1% 622 666 7%
पंजाब 860 999 16% 2,090 2,216 6%
चंडीगढ़ 63 75 20% 214 227 6%
उत्तराखंड 554 636 15% 856 917 7%
हरियाणा 1,871 2,172 16% 3,442 3,865 12%
दिल्ली 1,638 2,027 24% 3,313 4,093 24%
राजस्थान 1,741 1,889 9% 3,896 3,967 2%
उत्तर प्रदेश 3,476 4,121 19% 7,616 8,494 12%
बिहार 796 951 19% 2,345 2,688 15%
सिक्किम 110 69 -37% 170 149 -12%
अरुणाचल प्रदेश 122 101 -17% 252 234 -7%
नगालैंड 36 41 14% 107 111 4%
मणिपुर 50 53 6% 164 133 -19%
मिजोरम 41 59 46% 108 132 22%
त्रिपुरा 70 80 14% 164 198 21%
मेघालय 69 76 9% 162 190 17%
असम 608 735 21% 1,421 1,570 10%
पश्चिम बंगाल 2,416 2,640 9% 3,987 4,434 11%
झारखंड 952 934 -2% 1,202 1,386 15%
ओडिशा 1,660 2,082 25% 2,359 2,996 27%
छत्तीसगढ़ 880 929 6% 1,372 1,491 9%
मध्य प्रदेश 1,287 1,520 18% 2,865 3,713 30%
 गुजरात 4,065 4,538 12% 6,499 7,077 9%
दादरा और नगर हवेली एवं  दमन और दीव 62 75 22% 122 102 -16%
महाराष्ट्र 10,392 11,729 13% 15,298 16,959 11%
कर्नाटक 4,298 4,715 10% 7,391 8,077 9%
गोवा 237 283 19% 401 445 11%
लक्षद्वीप 1 0 -79% 18 5 -73%
केरल 1,366 1,456 7% 2,986 3,050 2%
तमिलनाडु 3,682 4,066 10% 5,878 6,660 13%
पुडुचेरी 42 54 28% 108 129 19%
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 46 32 -32% 78 88 13%
तेलंगाना 1,823 2,063 13% 3,714 4,036 9%
आंध्र प्रदेश 1,348 1,621 20% 3,093 3,552 15%
लद्दाख 34 36 7% 55 61 12%
अन्य क्षेत्र 22 16 -26% 86 77 -10%
कुल योग 47,412 53,538 13% 85,371 95,138 11%

[1] इसमें वस्तु के आयात पर जीएसटी शामिल नहीं है

[2] निपटान के बाद का जीएसटी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जीएसटी राजस्व और आईजीएसटी के एसजीएसटी हिस्से का संचयी हिस्सा है जो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को दिया जाता है